(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:17)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या ॢबह(cid:4)र
ह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क [स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 4 \०(cid:27)वन 1(cid:21)3(cid:20) (cid:31)श(cid:15)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) (cid:19)(cid:20)(cid:21)) पटन(cid:4)(cid:22)
पटन(cid:4)(cid:22) स!मव(cid:4)र(cid:22) 2$ ०सत%बर 2(cid:15)1$
सं॰ कारा/नि0को0 (क)-33/10-5748 कारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालयकारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालयकारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालयकारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालय गृह गृह गृह गृह विभाग (कारा)विभाग (कारा)विभाग (कारा)विभाग (कारा) ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 19 सितम्बर19 सितम्बर19 सितम्बर19 सितम्बर 2016201620162016
ा प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के श्री उमेश प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के ा प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध उनके मंडल कारा, मधुबनी में पदस्थापन के दौरान विचाराधीन बंदी देव नारायण मंडल की समुचित चिकित्सा के विरूद्ध उनके मंडल कारा, मधुबनी में पदस्थापन के दौरान विचाराधीन बंदी देव नारायण मंडल की समुचित चिकित्सा के विरूद्ध उनके मंडल कारा, मधुबनी में पदस्थापन के दौरान विचाराधीन बंदी देव नारायण मंडल की समुचित चिकित्सा के रवाही बरतने, कर्त्तव्यहीनता एवं प्रशासनिक विफलता के प्रतिवेदित आरोप के लिए ाासनिक विफलता के प्रतिवेदित आरोप के लिए अभाव में हुई मृत्यु के संबंध में लापरवाही बरतने, कर्त्तव्यहीनता एवं प्रश् 2013 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई एवं विभागीय कार्यवाही विभागीय संकल्प ज्ञापांक 638 दिनांक 05 विभागीय संकल्प ज्ञापांक 638 दिनांक 05.02.2013 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई एवं विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संयुक्त जांच आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया। के संचालन हेतु संयुक्त जांच आयुक्त, दरभंगा प्रमंड ल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया। 2. श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत् है :-
श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत् है :-
मंडल कारा, मधुबनी में संसीमित विचाराधीन बंदी देव नारायण मंडल की सदर अस्पताल, मधुबनी में दिनांक मंडल कारा, मधुबनी में संसीमित विचाराधीन बंदी देव नारायण मंडल की सदर अस्पताल, मधुबनी में दिनांक मंडल कारा, मधुबनी में संसीमित विचाराधीन बंदी देव नारायण मंडल की सदर अस्पताल, मधुबनी में दिनांक 04.02.2005 को हुई मृत्यु के संबंध में जिला पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि उक्त बंदी टी0बी0 तथा 2005 को हुई मृत्यु के संबंध में जिला पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि उक्त बंदी टी0बी0 तथा खून की अत्यधिक कमी की बीमारी से ग्रसित था। कारा के तत्कालीन चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा दिनांक 01.01.2005 खून की अत्यधिक कमी की बीमारी से ग्रसित था। कारा के तत्कालीन चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा दिनांक 01 खून की अत्यधिक कमी की बीमारी से ग्रसित था। कारा के तत्कालीन चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा दिनांक 01 को बन्दी का ईलाज सदर अस्पताल में कराने हेतु अनुशंसा की गई, किन्तु इनके द्वारा दिनांक 17.01.2005 को सिविल को बन्दी का ईलाज सदर अस्पताल में कराने हेतु अनुशंसा की गई, किन्तु इनके द्वारा दिनांक 17 को बन्दी का ईलाज सदर अस्पताल में कराने हेतु अनुशंसा की गई, किन्तु इनके द्वारा दिनांक 17 सर्जन से उक्त बंदी के ईलाज के अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया। सर्जन से उक्त बंदी के ईलाज के अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया।
2005 को उक्त बन्दी के ईलाज की अनुमति प्राप्त हुई। इस बीच सिविल सर्जन, मधुबनी द्वारा दिनांक 03.02.2005 को उक्त बन्दी के ईलाज की अनुमति प्राप्त हुई। इस बीच सिविल सर्जन, मधुबनी द्वारा दिनांक 03 इनके द्वारा मात्र पत्राचार कर औपचारिकता का निर्वह्न किया जाता रहा। यदि इनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से सिविल इनके द्वारा मात्र पत्राचार कर औपचारिकता का निर्वह्न किया जाता रहा। यदि इनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से सिविल इनके द्वारा मात्र पत्राचार कर औपचारिकता का निर्वह्न किया जाता रहा। यदि इनके द्वारा व्यक्ि सर्जन से सम्पर्क किया जाता तो बन्दी के ईलाज की सुविधा उपलब्ध हो पाती। परन्तु इनके द्वारा पत्राचार करने में सर्जन से सम्पर्क किया जाता तो बन्दी के ईलाज की सुविधा उपलब्ध हो पाती। परन्तु इनके द्वारा पत्राचार करने में सर्जन से सम्पर्क किया जाता तो बन्दी के ईलाज की सुविधा उपलब्ध हो पाती। परन्तु इनके द्वारा पत्राचार करने में व्यर्थ समय नष्ट किया गया, जो इनकी र्काव्यहीनता, लापरवाही एवं प्रशासनिक अकुशलता का परिचायक है। व्यर्थ समय नष्ट किया गया, जो इनकी र्काव्यहीनता, लापरवाही एवं प्रशासनिक अकुशलता का परिचायक है। व्यर्थ समय नष्ट किया गया, जो इनकी र्काव्यहीनता, लापरवाही एवं प्रशासनिक अकुशलता का परिचायक है। श्री सिंह की उक्त लापरवाही के कारण राज्य मानवाि धकार आयोग के आदेश से मृतक बन्दी के परिजनों को श्री सिंह की उक्त लापरवाही के कारण राज्य मानवाधिकार आयोग के आदेश से मृतक बन्दी के परिजनों को रूपया 3,00,000,/-(तीन लाख) भुगतान करना पड़ा जिसमें 1,00,000/-(एक लाख) रूपया इनसे बीस किस्तों में रूपया 3,00,000,/-(तीन लाख) भुगतान करना पड़ा जिसमें 1,00,000/-(एक लाख) रूपया इनसे बीस किस्तों में रूपया 3,00,000,/-(तीन लाख) भुगतान करना पड़ा जिसमें 1,00,000/-(एक लाख) रूपया इनसे बीस किस्तों में वसूलनीय है। 2014 से प्राप्त संयुक्त आयुक्त, ाक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित (विभागीय जांच) दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित (विभागीय जांच) दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा समर्पित जा किया गया है।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 26 (cid:22)सत(cid:24)बर 2016 4. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18 (3) के प्रावधानों के तहत् विभागीय पत्रांक 6711 दिनांक 26.12.2014 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री सिंह से उपर्युक्त प्रमाणित आरोप के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गई। तद्आलोक में श्री सिंह द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब दिनांक 23.03.2015 को समर्पित किया गया।
5. आरोपित के विरूद्ध गठित आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जांच प्रतिवेदन एवं आरोपित द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि जब बंदी देव नारायण मंडल कारा में प्रवेश किया तथा आरोपित को इस बात की जानकारी थी कि बंदी पहले से ही टी0बी0 तथा खून की कमी से ग्रसित था, तब अधीक्षक को उक्त बंदी के बेहतर ईलाज हेतु स्वयं तत्पर रहना चाहिए था, न कि मात्र अपने अधीनस्थ जेलर को आदेश देकर तथा सिविल सर्जन को पत्र लिखकर अपना काम समाप्त समझ लेना चाहिए था। इस प्रकार श्री सिंह उक्त बंदी के ससमय एवं समुचित ईलाज कराने में विफल रहे हैं। पुराना कारा हस्तक नियम के नियम 60 एवं 61 के तहत् कारा के सम्पूर्ण प्रबंधन एवं पर्यवेक्षण के लिए काराधीक्षक कारा के नियंत्री पदाधिकारी होते हैं। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी के अधिगम '' आरोपित पदाधिकारी, श्री सिंह को आंशिक रूप से दोषी माना जा सकता है'' से अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा सहमति व्यक्त की गई है।
6. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर श्री सिंह के द्वितीय कारण पृच्छा जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के प्रावधानों के तहत निम्न दंड निरूपित करने के विनिश्चय के साथ-साथ 1,00,000/-(एक लाख) रूपया की वसूली दस किस्तों में करने का निर्णय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिया गया :-
'' एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक''।
7. उपर्युक्त विनिश्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 2404 दिनांक 17.04.2015 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गई। तद्आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1290 दिनांक 11.08. 2015 द्वारा प्रस्तावित '' एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक'' के दंड पर सहमति संसूचित की गई।
8. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में एवं प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति की सम्यक् विश्लेषणोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री उमेश प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4950 दिनांक 21.08.2015 के द्वारा निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :-
'' एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक''।
इसके अतिरिक्त श्री सिंह की सेवानिवृत्ति की तिथि 29.02.2016 को देखते हुए 1,00,000/-(एक लाख) रूपये की वसूली माह अगस्त 2015 से दिसम्बर 2015 तक के वेतन से 20,000/- (बीस हजार रूपये) प्रतिमाह की दर से पाँच समान मासिक किस्तों में वसूली किये जाने का दंड निरूपित किया गया।
9. संकल्प ज्ञापांक 4950 दिनांक 21.08.2015 के द्वारा श्री सिंह को एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक का दंड अधिरोपित किया गया। परन्तु वेतनवृद्धि की देय तिथि प्रत्येक वर्ष की 01 जुलाई निर्धारित है, जबकि बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति निर्धारित वेतनवृद्धि के देय तिथि के पश्चात् प्राप्त हुई। श्री सिंह दिनांक 29.02.2016 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस प्रकार बिहार लोक सेवा आयोग का परामर्श देर से प्राप्त होने तथा वेतनवृद्धि की देय निर्धारित तिथि 01 जुलाई बीत जाने के फलस्वरूप उक्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4950 दिनांक 21.08.2015 के द्वारा श्री सिंह को अधिरोपित '' एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक '' का दण्ड प्रभावी नहीं हो सका।
10. उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को संकल्प ज्ञापांक 1903 दिनांक 29.03.2016 के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत् सम्परिवर्तित कर दिया गया।
11. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के सम्यक् विश्लेषणोपरान्त श्री उमेश प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृत्त को निम्नांकित दंड अधिरोपित किये जाने का पुनर्विनिश्चय अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा किया गया :-
'' दस प्रतिशत (10 %) पेंशन तीन (03) वर्षो तक कटौती का दंड ''।
12. उपर्युक्त विनिश्चित दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 2702 दिनांक 06.05.2016 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श की मांग की गई। तद्आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1684 दिनांक 06.09. 2016 द्वारा प्रस्तावित ''दस प्रतिशत (10 %) पेंशन तीन (03) वर्षो तक कटौती का दंड '' के दंड पर सहमति संसूचित की गई।
13. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में एवं प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति, मामले की विश्लेषणोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री उमेश प्रसाद सिंह, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, मधुबनी (सम्प्रति सेवानिवृत्त) को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4950 दिनांक 21.08.2015 के द्वारा पूर्व में3 (cid:27)बहार गजट (असाधारण), 26 (cid:22)सत(cid:24)बर 2016 अधिरोपित दंड '' एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक'' को संशोधित करते हुए निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता हैः-
'' दस प्रतिषत (10 %) पेंषन तीन (03) वर्षों तक कटौती का दंड ''।
आदेष ः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (प्र॰)।
———— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) %89&5%1+1*&ड(cid:17)*ट,*प(cid:17)*? Website: http://egazette.bih.nic.in