(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
ॢबह(cid:4)र गजट
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 6 आि(cid:21)वन 1938 (श0) सं(cid:8)या 39 पटना, बुधवार, ———————— 28 "सत$बर 2016 (ई0) &वषय-सूची पृ+ठ भाग-1—(cid:1)नयुि/त, पद1थापन, बदल(cid:15), शि/त, छु 5ी और अ8य 9यि/तगत सूचनाएं। 2-4 भाग-1-क—1वयंसेवक गु>म@ के समादे+टाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैD(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Hाओं के पर(cid:15)Hा-फल, कायJKम, छाLवृिMत Nदान, आOद।
---
भाग-1-ग—"शHा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Hाफल आOद ---
भाग-2—Pबहार-राRयपाल और कायाJSयH@ Tवारा (cid:1)नकाले गये &व(cid:1)नयम, आदेश, अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम आOद। 5-5 भाग-3—भारत सरकार, पि(cid:21)चम बंगाल सरकार और उWच 8यायालय के आदेश, अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राRय गजट@ के उZरण। ---
भाग-4—Pबहार अUध(cid:1)नयम ---
पृ+ठ भाग-5—Pबहार &वधान मंडल म] पुर:1था&पत &वधेयक, उ/त &वधान मंडल म] उप1था&पत या उप1था&पत _कये जानेवाले Nवर स"म(cid:1)तय@ के N(cid:1)तवेदन और उ/त &वधान मंडल म] पुर:1थापन के पूवJ Nका"शत &वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अUध(cid:1)नयम िजनपर रा+Dप(cid:1)त कa Rये+ठ अनुम(cid:1)त "मल चुकa है। ---
भाग-8—भारत कa संसद म] पुर:1था&पत &वधेयक, संसद म] उप1था&पत Nवर स"म(cid:1)तय@ के N(cid:1)तवेदन और संसद म] उप1था&पत Nवर स"म(cid:1)तय@ के N(cid:1)तवेदन और संसद म] पुर:1थापन के पूवJ Nका"शत &वधेयक। ---
भाग-9—&वbापन
---
भाग-9-क—वन &वभाग कa नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—(cid:1)न&वदा सूचनाएं, पcरवहन सूचनाएं, 8यायालय सूचनाएं और सवJसाधारण सूचनाएं इMयाOद। 6-6
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पूरक
पूरक-क 7-132 Pबहार गजट, 28 "सत$बर 2016
भ(cid:2)ग(cid:4)1
०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $
—————
श्रम संसाधन विभागश्रम संसाधन विभागश्रम संसाधन विभागश्रम संसाधन विभाग ——— अधिसूचनाएं 31 अगस्त 2016
सं॰ 1/श्रम वि॰स्था॰ (1) 10-03/2016 श्र॰सं॰-153—विभागीय संकल्प सं॰ 2441, दिनांक 28.08.2015 द्वारा श्रम सेवा (सामान्य) के अन्तर्गत श्रम अधीक्षकों के पदों के एकीकरण, पुनर्विन्यास एवं क्षेत्राधिकार निर्धारण किया गया है, जिसमें श्रम अधीक्षक (—षि श्रमिक) के पद को समाप्त कर दिया गया है। इस कारण पूर्व से स्वी—त उप श्रमायुक्त (—षि श्रमिक) के पदों को समाप्त कर नये सिरे से उप श्रमायुक्त के पदों के एकीकरण, पुनर्विन्यास एवं क्षेत्राधिकार निर्धारण किया जाना अपेक्षित हो जाता है। एतद्विषयक पूर्व में निर्गत सभी सरकारी आदेशों को अवक्रमित करते हुए श्रम सेवा (सामान्य) के अन्तर्गत उप श्रमायुक्त के 6 पदों का पदनाम, मुख्यालय एवं क्षेत्राधिकार निम्नरूपेण निर्धारित किया जाता है :-
| क्र॰ | पदनाम | मुख्यालय | क्षेत्राधिकार (प्रमण्डल) |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | उप श्रमायुक्त, पटना | पटना | पटना |
| 2 | उप श्रमायुक्त, भागलपुर | भागलपुर | भागलपुर एवं पूर्णियाँ |
| 3 | उप श्रमायुक्त, मुजफ्फरपुर | मुजफ्फरपुर | तिरहुत (मुजफ्फरपुर) एवं सारण (छपरा) |
| 4 | उप श्रमायुक्त, गया | गया | मगध (गया) |
| 5 | उप श्रमायुक्त, दरभंगा | दरभंगा | दरभंगा एवं कोशी (सहरसा) |
| 6 | उप श्रमायुक्त, मुंगेर | बेगूसराय | मु गेर ं |
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, भुवनेश्वर मिश्रा, अपर सचिव।
———
22 अगस्त 2016
सं॰ 1/श्रम वि॰स्था॰ (1) 10-04/2016 श्र॰सं॰-143—विभागीय संकल्प सं॰ 2441, दिनांक 28.08.2015 द्वारा श्रम सेवा (सामान्य) के अन्तर्गत श्रम अधीक्षकों के पदों के एकीकरण, पुनर्विन्यास एवं क्षेत्राधिकार निर्धारण किया गया है, जिसमें श्रम अधीक्षक (—षि श्रमिक) के पद को समाप्त कर दिया गया है। इस कारण पूर्व से स्वी—त सहायक निदेशक (—षि श्रमिक) के पदों को समाप्त कर नये सिरे से सहायक श्रमायुक्त के पदों के एकीकरण, पुनर्विन्यास एवं क्षेत्राधिकार निर्धारण किया जाना अपेक्षित हो जाता है। एतद्विषयक पूर्व में निर्गत सभी सरकारी आदेशों को अवक्रमित करते हुए श्रम सेवा (सामान्य) के अन्तर्गत सहायक श्रमायुक्त के 13 पदों का पदनाम, मुख्यालय एवं क्षेत्राधिकार निम्नरूपेण निर्धारित किया जाता है :-
| क्र॰ | पदनाम | मुख्यालय | क्षेत्राधिकार (जिला) |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | सहायक श्रमायुक्त, पटना | पटना | पटना, नालंदा, भोजपुर |
| 2 | सहायक श्रमायुक्त, डालमियानगर | डालमियानगर | रोहतास, कैमूर, बक्सर |
| 3 | सहायक श्रमायुक्त, मुजफ्फरपुर | मुजफ्फरपुर | मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, वैशाली |
| 4 | सहायक श्रमायुक्त, छपरा | छपरा | सारण, सिवान एवं गोपालगंज |
| 5 | सहायक श्रमायुक्त, गया | गया | गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, नवादा |
| 6 | सहायक श्रमायुक्त, दरभंगा | दरभंगा | दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर |
| 7 | सहायक श्रमायुक्त, सहरसा | सहरसा | सहरसा, सुपौल, मधेपूरा |
| 8 | सहायक श्रमायुक्त, पूर्णियाँ | पूर्णियाँ | पूर्णियाँ, कटिहार, किशनगंज, अररिया |
| 9 | सहायक श्रमायुक्त, भागलपुर | भागलपुर | भागलपुर, बाँका |
| 10 | सहायक श्रमायुक्त, मुंगेर | मुंगेर | मु गेर, लखीसराय, शेखपुरा, जमुई, खगड़िया, बेगूसराय ं |
| 11 | सहायक श्रमायुक्त (शोध), पटना | पटना | मुख्यालय |
| 12 | सहायक श्रमायुक्त, मुख्य निरीक्षी कार्यालय, पटना | पटना | सम्पूर्ण बिहार |
| 13 | सहायक श्रमायुक्त, (—षि निदेशालय), पटना | पटना | सम्पूर्ण बिहार |
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, भुवनेश्वर मिश्रा, अपर सचिव।
———
वाणिज्य-कर विभाग
———
अधिसूचना
21 सितम्बर 2016
सं॰ 6/प्रो0-6-07/2016(खंड-1)-3590/वा0कर—बिहार वित्त सेवा सम्वर्ग के वाणिज्य-कर पदाधिकारी (वेतनमान् 15,600-39,100ग्रेड पे 5,400 रू0) कोटि से वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त (वेतनमान् 15,600-39,100ग्रेड पे 6,600 रू0) कोटि में निम्नलिखित 04 पदाधिकारियों को भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है :-
| क्र॰ | पदाधिकारी का नाम | बैच संख्या | वरीयता क्रमांक 2014 | वैचारिक प्रोन्नति की तिथि | आर्थिक लाभ की द य तिथि े |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
| 1 श्री योगेन्द्र प्रसाद | विशेष | 205 | 03.12.13 | दिनांक 19.11.14 | |
| 2 श्री कैसर तौहिद | विशेष | 211 | 03.12.13 | दिनांक 12.02.15 | |
| 3 श्री अनिल कुमार | 39वीं | 228 | 01.07.15 | दिनांक 01.07.15 | |
| 4 श्री गोपाल प्रसाद | द्वितीय सीमित | 263 | 03.12.13 | दिनांक 16.09.14 |
2. उपर वर्णित तालिका के क्रमांक-3 में अंकित पदाधिकारी को दिनांक 01.07.15 एवं क्रमांक 1, 2 तथा 4 में अंकित पदाधिकारियों को इनसे कनीय पदाधिकारी को वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त कोटि में पदभार ग्रहण, जो कॉलम-6 में अंकित है, की तिथि से आर्थिक लाभ सहित भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति देने पर वित्त विभाग, बिहार, पटना की सहमति प्राप्त है।
3. उपरोक्त प्रोन्नतियाँ सामान्य प्रषासन विभाग के परिपत्र संख्या-4800 दिनांक 01.04.16 की कंडिका-11(iv) में निहित शर्त्तो के अधीन तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन एस0एल0पी0 (सी0) संख्या- 29770/ 2015, बिहार सरकार बनाम सुषील कुमार सिंह एवं अन्य में पारित आदेष के फलाफल से प्रभावित होंगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, अवर सचिव।
——— गृह विभागगृह विभागगृह विभागगृह विभाग (आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा) ——— अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 15151515 सितम्बर 2016सितम्बर 2016सितम्बर 2016सितम्बर 2016
सं॰ 7/सी0सी0ए0-1024/2001(खंड-II)गृ0आ0-7456—बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1981 (7/81) की अध्याय 2 की धारा-12 (2) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल, राज्य के सभी जिला दण्डाधिकारियों को उपर्युक्त अधिनियम की धारा-12 (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का अपने जिला के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत गृह विभाग (आरक्षी शाखा) के एतद् विषयक अधिसूचना संख्या-4870, दिनांक 22.06.2016 के क्रम में अगले तीन महीनों के लिए अर्थात दिनांक 01.10.2016 से 31.12.2016 तक (एक अक्तूबर दो हजार सोलह से एकतीस दिसम्बर दो हजार सोलह तक) प्रयोग करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, गिरीष मोहन ठाकुर, गिरीष मोहन ठाकुर, गिरीष मोहन ठाकुर, गिरीष मोहन ठाकुर, अवर सचिव।4 Pबहार गजट, 28 "सत$बर 2016 eaf=eaMy lfpoky; ¼jktHkk"kk½ foHkkx ——— vf/klwpuk 9999 सितम्बर 2016सितम्बर 2016सितम्बर 2016सितम्बर 2016
laŒ स्था॰-1-59/90-695/रा॰—विभागीय प्रोन्नति समिति की अनुशंसा के आलोक में निम्नलिखित वरीय राजभाषा सहायक (वेतनमान 9300-34800, ग्रेड पे 4600) को अधिसूचना निर्गत की तिथि से राजभाषा पदाधिकारी (वेतनमान 9300-34800, ग्रेड पे 4800) के पद पर नियमित प्रोन्नति दी जाती है :-
1. श्री अनिल कुमार लाल 2. श्री रवीन्द्र मोहन पाण्डेय 3. श्री लाल बाबू पासवान
2. सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-4800, दिनांक 01.04.2016 की कंडिका 11(IV) के अनुसार यह प्रोन्नति औपबंधिक होगी तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन एस॰एल॰पी॰ (सी॰) संख्या-29770/2015, बिहार सरकार बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगी।
3. प्रस्ताव में मुख्य (विभागीय) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
fcgkj&jkTiky ds vkns'k ls] jkefcykl ikloku] निदेशक-सह-अपर सचिव।
—————
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Website: http://egazette.bih.nic.in
5 Pबहार गजट, , 28 "सत$बर 2016भ(cid:2)ग(cid:4)2
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———————
श्रम संसाधन विभागश्रम संसाधन विभागश्रम संसाधन विभागश्रम संसाधन विभाग
——— शुद्धि-शुद्धि-शुद्धि-शुद्धि-पत्रपत्रपत्रपत्र
16 सितम्बर16 सितम्बर16 सितम्बर16 सितम्बर 2016201620162016
/श्रम वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0-2730-2730-2730-2730—विभागीय अधिसूचना संख्या-1/श्रम विभागीय अधिसूचना संख्या-1/श्रम विभागीय अधिसूचना संख्या-1/श्रम विभागीय अधिसूचना संख्या-1/श्रम संसंसंसं॰॰॰॰ /श्रम वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0 /श्रम वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0 /श्रम वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0
2016 के द्वारा सहायक श्रमायुक्त के क्षेत्राधिकार वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0 143 दिनांक 22....08080808....2016 के द्वारा सहायक श्रमायुक्त के क्षेत्राधिकार वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0 143 दिनांक 22 2016 के द्वारा सहायक श्रमायुक्त के क्षेत्राधिकार 2016 के द्वारा सहायक श्रमायुक्त के क्षेत्राधिकार वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0 143 दिनांक 22 वि0 स्था0 (1) 10-04/2016 श्र0सं0 143 दिनांक 22
एवं मुख्यालय का एिवं मुख्यालय का एिवं मुख्यालय का एिवं मुख्यालय का निर्धारण किया गया है।नर्धारण किया गया है।नर्धारण किया गया है।नर्धारण किया गया है।
1. उक्त अधिसूचना की पंक्ति 3 में अंकित सहायक निदेशक (—षि श्रमिक) के स्थान पर सहायक श्रमायुक्त (—षि श्रमिक) पढ़ा जाय।
2. उक्त अधिसूचना के क्रम संख्या 3 पर उद्धृत सहायक श्रमायुक्त, मुजफ्फरपुर का मुख्यालय, मुजफ्फरपुर के स्थान पर बेतिया (पश्चिम चम्पारण) किया जाता है।
3. उक्त अधिसूचना के क्रम संख्या 8 पर उद्धृत सहायक श्रमायुक्त, पूर्णिया का मुख्यालय, पूर्णिया के स्थान पर कटिहार किया जाता है।
4. उक्त अधिसूचना को इस हद तक संशोधित समझा जाय।
5. उक्त अधिसूचना का शेष भाग यथावत रहेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, भुवनेश्वर मिश्रा, अपर सचिव।
—————
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Website: http://egazette.bih.nic.in
6 Pबहार गजट, 28 "सत$बर 2016भाग-9(ख)
और सवJसाधारण सूचनाएं इMयाOद।
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सूचना ——
No. 1114— I, ANKITA D/o Manoj Kumar Himanshu R/o. C/o Pramod Kumar Pandey, kanti verma path Near Dr. B. Bhattacharya West Patal Nagar Patna 800023 Bihar Declare vide Affidavit no. 9830 Dated 06.06.2016 That now Onwards I shall be known as Ankita kumari.
.
ANKITA.
—————
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Website: http://egazette.bih.nic.in
7 Pबहार गजट, , 28 "सत$बर 2016ॢबह(cid:4)र गजट
क(cid:4)
प३रक(cid:13)[(cid:15)(cid:16) (cid:17)(cid:4)०धक(cid:4)र(cid:20) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:17)क(cid:4)०शत
—————
सं॰ 2/आरोप-01-02/2014-सा0प्र0-11560
सामान्य प्रषासन विभाग ——— संकल्प 26 अगस्त26 अगस्त26 अगस्त26 अगस्त 2016201620162016
श्री गोपाल शरण (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1212/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, वायसी, पूर्णियां सम्प्रति अनुमंडलीय लोक षिकायत निवारण पदाधिकारी, पुपरी, सीतामढ़ी के विरूद्ध अनुमंडल मुख्यालय में निवास स्थान नहीं रखने, नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहने, सरकारी वाहन एवं ईंधन का दुरूपयोग करने, सरकारी कार्योंं में अभिरूचि नहीं लेने, नियमित रूप से न्यायालय कार्य नहीं करने एवं आपदा राहत में दिलचस्पी नहीं लेने संबंधी आरोप जिला पदाधिकारी, पूर्णियां के पत्रांक 89 दिनांक 12.01.2014 द्वारा प्रतिवेदित किया गया।
2. प्रतिवेदित आरोपों के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 1484 दिनांक 03.02.2014 द्वारा श्री शरण को एक सप्ताह के अन्दर स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेष दिया गया। परन्तु श्री शरण द्वारा कोई स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। 3. प्रतिवेदित आरोप के समीक्षोपरान्त श्री गोपाल शरण (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1212/11, भूमि सुधार उप समार्हाा, वायसी, पूर्णियां के विरूद्ध आरोपों की सम्यक् जाँच बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 का नियम 17(2) में विहित रीति से करने हेतु संकल्प ज्ञापांक 4269 दिनांक 28.03.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, पूर्णियां द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
4. आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां के पत्रांक 3421/विधि, दिनांक 18.08.2015 के द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें कुल-आठ (08) आरोपों में से आरोप संख्या-01 एवं 06 अंषतः प्रमाणित आरोप संख्या-02 पूर्णतः प्रमाणित एवं शेष अन्य आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। अंषतः/पूर्णतः प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 1648 दिनांक 01.12.2015 द्वारा श्री शरण से अभ्यावेदन की मांग की गयी।
5. श्री शरण द्वारा अपना अभ्यावेदन दिनांक 27.01.2016 विभाग में समर्पित किया गया। अभ्यावेदन में आरोप संख्या-01 के संबंध में कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा इनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर न ही कोई टिप्पणी की है और न ही कोई मंतव्य दिया गया है। उपस्थापन पदाधिकारी के द्वारा रखे गये सरकारी पक्ष के खंडन में इनके द्वारा दिये गये लिखित प्रत्युार पर कोई मंतव्य संचालन पदाधिकारी द्वारा नहीं दिया गया है। उपस्थापन पदाधिकारी ने न तो अपने मूल आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' में कहीं किराया या किराया प्रमाण-पत्र की बात उठाई है और न ही दिनांक 17.07.2014 को समर्पित अपने सरकारी पक्ष में इसका उल्लेख किया है। इस संबंध में इनका यह भी कहना है कि यह कोई बिल्ंिडग कंट्रोल एक्ट का केस नहीं है अपितु यह विभागीय कार्यवाही का केस है। आरोप संख्या-02 के संबंध में कहना है कि संचालन पदाधिकारी ने लिखा है कि साक्ष्य के रूप में आरोपी पदाधिकारी ने उन तिथियों का जिक्र नहीं किया है, जिन तिथियों को वे अनुपस्थित रहते थे या कार्य नहीं करते थे। जबकि उनके द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन तिथियों को ये अनुपस्थित रहते थे या कार्य नहीं करते थे। आरोप संख्या-06 के संबंध में कहा गया है कि इनके द्वारा बायसी अनुमंडल में पदस्थापन के दौरान किये गये कार्यों का साक्ष्य सहित ब्यौरा संचालन पदाधिकारी को समर्पित किया गया है। इस प्रकार आर0टी0पी0एस0/भू-विवाद एवं अन्य राजस्व कार्यों में अनियमितता उन्होंने प्रतिवेदित नहीं किया है। साथ ही इनका यह भी कहना है कि संचालन पदाधिकारी ने अमर्यादित भाषा के लिए आरोपी पदाधिकारी को कुछ हद तक दोषी माना है। पुनः8 Pबहार गजट, 28 "सत$बर 2016 संचालन पदाधिकारी ने अंतिम पारा में स्वयं उल्लिखित कर दिया है। अतः अंषतः प्रमाणित जैसे वाक्यांष का प्रयोग समीचीन प्रतीत नहीं होता है। श्री शरण द्वारा उक्त आधार पर आरोप से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।
6. श्री शरण के विरूद्ध आरोप संख्या-01, 02 एवं 06 क्रमषः अनुमंडल मुख्यालय, वायसी में निवास स्थान नहीं रखने, कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने, सरकारी वाहन एवं इंधन का दुरूपयोग करने, आर0टी0पी0एस0/भू-विवाद एवं अन्य राजस्व कार्यों में अनियमितता बरतने तथा पत्र में अषिष्ट आचरण बरतने का आरोप है।
7. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं श्री शरण द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा की गयी। श्री शरण के मुख्यालय में आवास नहीं रखने के संबंध में दो अलग-अलग अनुमंडल पदाधिकारियों तथा अपर समार्हाा के द्वारा प्रतिवेदन समर्पित है। श्री शरण के द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा दुराग्रह से प्रेरित होकर उक्त आषय का प्रतिवेदन भेजने की बात कही गयी है। किन्तु यह संभव प्रतीत नहीं होता है कि तीन अलग-अलग पदाधिकारी एक ही बिन्दु पर श्री शरण से दुराग्रह से प्रेेरित हों। यह सहज रूप से स्थपित होता है कि श्री शरण वायसी अनुमंडल मुख्यालय में अपना आवास नहीं रखते थे। श्री शरण के विभिन्न पत्रों के आवलोकन से स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा अपने पत्रों में मर्यादित आचारण नहीं रखा गया। इस तथ्य को संचालन पदाधिकारी द्वारा भी जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया है। संचालन पदाधिकारी का कहना है कि किसी भी पदाधिकारी का अकारण नौ माह तक वेतन स्थगित रह जाने की स्थिति में उसके पत्र की भाषा असंयमित हो सकती है लेकिन प्राषासनिक दृष्टिकोण से इसे किसी भी रूप में उचित नहीं कहा जा सकता है।
8. श्री शरण के द्वारा अपने अभ्यावेदन में आंषिक/पूर्णप्रमाणित आरोपों से इनकार किया गया। आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन तथ्यात्मक एवं साक्ष्यधारित नहीं है। अतएव यह स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
उक्तवर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री शरण के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संषोधित) के संगत प्रावधानों के तहत श्री शरण के विरूद्ध ''संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धियों पर रोक'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
9. श्री शरण के विरूद्ध विनिष्चत दंड पर विभागीय पत्रांक 4892 दिनांक 04.04.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 1248 दिनांक 22.07.2016 द्वारा श्री शरण के विरूद्ध विनिष्चित दंड पर अपनी सहमति दी गयी।
10. अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री गोपाल शरण (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1212/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, वायसी, पूर्णियां सम्प्रति अनुमंडलीय लोक षिकायत निवारण पदाधिकारी, पुपरी, सीतामढ़ी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संषोधित) के संगत प्रावधानों के तहत ''संचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धियों पर रोक'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
——— सं॰ 2/आरोप-01-02/2015-सा0प्र0-11623 ——— संकल्प 29292929 अगस्त 2016अगस्त 2016अगस्त 2016अगस्त 2016
श्री धर्मेष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1037/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, विक्रमगंज, रोहतास सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, सुपौल के विरूद्ध कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, विक्रमगंज के प्रभार अवधि में गलत मृत्यु प्रमाण-पत्र निर्गत करने तथा मृत्यु प्रमाण-पत्र के आधार पर जालसाजी कर खरीदी गयी जमीन का नामान्तरण करने का आरोप राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 395 दिनांक 01.04.2015 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, रोहतास द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित प्राप्त हुआ।
2. प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 6790 दिनांक 11.05.2015 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिंह के पत्रांक-01 (कैम्प) दिनांक 31.07.2015 एवं पत्रांक-02 (कैम्प) दिनांक 24.08.2015 द्वारा अंचल कार्यालय, विक्रमगंज एवं नगर परिषद कार्यालय, विक्रमगंज से संबंधित कतिपय अभिलेखों की मांग करते हुए कहा गया है कि उन्हें याचित कागजातों की छायाप्रति उपलब्ध कराया जाय ताकि वे अपना स्पष्टीकरण समर्पित कर सके। श्री सिंह द्वारा याचित अभिलेखों को उन्हें उपलब्ध कराने हेतु विभागीय पत्रांक 2196 दिनांक 11.02.2016 द्वारा जिला पदाधिकारी, रोहतास से अनुरोध किया गया। साथ ही श्री सिंह को भी निदेष दिया गया कि वे व्यक्तिगत पहल कर कागजातों को प्राप्त करने का प्रयास करेगें। किन्तु श्री सिंह द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया।
3. सम्यक् विचारोपरांत अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री धर्मेष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1037/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, विक्रमगंज, रोहतास के विरूद्ध अनुलग्नक अनुबंध में9 Pबहार गजट, , 28 "सत$बर 2016 अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, सीतामढ़ी के द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. जिला पदाधिकारी, रोहतास को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।
5. श्री धर्मेष कुमार सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1037/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
——— सं॰ 2/सी0-1092/2009-सा0प्र0-11710 ——— संकल्प 30303030 अगस्त 2016अगस्त 2016अगस्त 2016अगस्त 2016
श्री जितेन्द्र प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 155/11, तत्कालीन उप विकास आयुक्त, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध बी0आर0जी0एफ0 योजना मद की राषि नगर निगम को हस्तान्तरित नहीं करने तथा अपने स्तर से 138.49 लाख रूपया दरभंगा नगर निगम के लिए कर्णाकित किए जाने की सूचना नगर निगम को नहीं दिए जाने, मार्गदर्षिका में विहित प्रावधानों का उल्लंघन करने आदि के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोपों के आधार पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3564 दिनांक 01.04.2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
2. श्री प्रसाद की दिनांक 31.08.2013 को सेवानिवृाि के फलस्वरूप संकल्प ज्ञापांक 14185 दिनांक 15.10.2014 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली के नियम 43(बी) के अन्तर्गत सम्परिवर्तित किया गया।
3. विभागीय कार्यवाही के उपरान्त विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक 376 दिनांक 30.07.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें आरोप संख्या 01, 02, 03 एवं 04 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या 05 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।
4. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18(3) के प्रावधानों के तहत प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 11844 दिनांक 13.08.2015 द्वारा श्री प्रसाद से अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त निदेष के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 29.08.2015 में कहा गया है कि पंचायती राज विभाग के पत्रांक 1547 दिनांक 28.03.2008 के द्वारा आवंटन आदेष दिनांक 30.03.2008 को प्राप्त हुआ था। दिनांक 31.03.2008 को विाीय वर्ष की अंतिम तिथि होने के कारण विभागीय निकायों के लिए राषि कर्णाकित करते हुए कोषागार से राषि की निकासी की गयी। भूलवष कर्णाकित राषि संबंधी पत्र की प्रति नगर निगम को नहीं भेजी गयी थी। बाद में भूल को संज्ञान में आने पर उक्त पत्र की प्रति नगर निगम को उपलब्ध करा दी गयी थी। महापौर एवं 32 नगर निगम पार्षदों द्वारा नगर आयुक्त से विमर्ष कर लिखित अनुरोध पत्र के आलोक में उनके द्वारा 13 योजनाओं की स्वी—ति प्रदान कर चयनित एजेंसी विषेष प्रमंडल, दरभंगा को स्वी—त प्राक्कलित राषि की आधी राषि दी गयी थी, जिसे नगर निगम की सामान्य बैठक दिनांक 27.07.2008 में अनुमोदित किया गया है। योजना प्रारम्भ होने के बाद पंचायती राज विभाग द्वारा मार्गदर्षिका भेजी गयी। मार्गदर्षिका प्राप्त होने पर उसके अनुसार शेष राषि नगर निगम को उपलब्ध करा दी गयी। योजना के कार्यान्वयन का निर्णय जनहित में लेना पड़ा, जिसका मुख्य उद्देष्य योजना को शीघ्रता से कार्यान्वित करना था। मार्गदर्षिका प्राप्त होने पर योजनाओं के प्राक्कलन सहित शेष बची राषि एवं अन्य दस्तावेज नगर निगम को भेज दिया गया। नगर निगम के द्वारा लेखा का संधारण कर लिया गया एवं योजनाओं का कार्यान्वयन कराया गया। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के प्रासंगिक पत्र ज्ञापांक 1603 दिनांक 10.04.2008 को उसी तिथि को नगर निगम एवं विषेष प्रमंडल को भेजा गया है, जिसे विषेष प्रमंडल द्वारा उसी तिथि में प्राप्त भी किया गया है। उसी प्रकार पत्रांक 2214 दिनांक 16.05.2008, दिनांक 20.05.2008 को प्राप्त किया गया है। अतः उक्त पत्र के फर्जी होने का आरोप निराधार है। आरोप संख्या 5 के संबंध में उनके द्वारा सभी विधिसम्मत कार्रवाई की गयी है। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री प्रसाद के द्वारा आरोपमुक्त करने का अनुरोध किया गया।
5. प्रतिवेदित आरोपों, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री प्र्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त निम्नांकित तथ्य पाये गये :-
(i) पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 1547 दिनांक 28.03.2008 की कंडिका-3, 9 एवं 10 निम्नवत् है :-
10 Pबहार गजट, 28 "सत$बर 2016कंडिका-3- नगर निकायों को शीघ्र राषि उपलब्ध कराने के उद्देष्य से विा विभाग, बिहार, पटना का परामर्ष है कि इस वर्ष पंचायती राज विभाग ही जिलान्तर्गत सभी नगर निकायों को राषि आवंटित करने के लिए जिले के उप विकास आयुक्त को ही राषि आवंटित कर दे, जो इसे नगर निकायों को उपलब्ध करायेंगे।
कंडिका-9- प्रत्येक पंचायत एवं नगर निकाय आवंटित धनराषि के खातों के रख-रखाव के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। कार्यक्रम के लिए अलग से कैषबुक एवं खाते अनुरक्षित किये जायेंगे।
कांडिका-10- कार्य की स्वी—ति मिल जाने के तुरन्त बाद ही संबंधित पंचायतों/नगर निकायों को नियमानुसार धनराषि जारी कर दी जायेगी। ऐसा करते समय इस तरत के भुगतानों के निपटान की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जायेगा।
(ii) आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के साथ संलग्न साक्ष्यों, श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि पंचायती राज विभाग का पत्रांक 1547 दिनांक 28.03.2008 श्री प्रसाद को दिनांक 30.03.2008 को प्राप्त हुआ था एवं इस तथ्य को श्री प्रसाद के द्वारा अपने अभ्यावेदन में भी स्वीकार किया गया है। पंचायती राज विभाग के उपर्युक्त पत्र की प्रासंगिक कंडिकाओं द्वारा स्पष्ट निदेष दिये जाने के बावजूद श्री प्रसाद के द्वारा नगर निगम, दरभंगा के लिए बी0आर0जी0एफ0 की कर्णांकित राषि नगर निगम, दरभंगा को उपलब्ध नहीं कराया गया एवं योजनाओं की स्वी—ति के उपरान्त सीधे अपने स्तर से ही विषेष प्रमंडल, दरभंगा को आवंटित कर दिया गया।
प्रासंगिक पत्र की कंडिका-9 में अलग से कैष बुक एवं खाता अनुरक्षित किये जाने के संबंध में स्पष्ट निदेष रहने के बावजूद श्री प्रसाद के द्वारा उक्त निदेष का अनुपालन नहीं किया गया एवं बी0आर0जी0एफ0 की मार्गदर्षिका प्राप्त होने के उपरान्त नगर निगम के द्वारा कैष बुक का संधारण करवाया गया।
उपर्युक्त तथ्यों को श्री प्रसाद द्वारा अपने स्पष्टीकरण में भी स्वीकार किया गया है, जिससे श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप संख्या 01 से 03 स्वतः प्रमाणित होते है।
6. वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री जितेन्द्र प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 155/11, तत्कालीन उप विकास आयुक्त, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृा के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार पेंषन नियमावली के नियम 43(बी) के प्रावधानों के तहत श्री प्रसाद के पेंषन से ''10 (दस) प्रतिषत राषि की कटौती दस (10) वर्षाें तक करने'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
7. श्री प्रसाद के विरूद्ध विनिष्चत दंड पर विभागीय पत्रांक 4221 दिनांक 17.03.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 1275 दिनांक 25.07.2016 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध विनिष्चित दंड पर अपनी सहमति दी गयी।
8. संचालन पदाधिकारी के द्वारा प्रमाणित पाए गए आरोपों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री जितेन्द्र प्रसाद (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 155/11, तत्कालीन उप विकास आयुक्त, दरभंगा संप्रति सेवानिवृा के पेंषन से ''10 (दस) प्रतिषत राषि की कटौती दस (10) वर्षाें तक करने'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
——— सं॰ 2/सी0-10156/2006-सा0प्र0-12453 ——— संकल्प 12 सितम्बर12 सितम्बर12 सितम्बर12 सितम्बर 2016201620162016
श्री महर्षि राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 303/11, तत्कालीन जिला पंचायती राज पदाधिकारी, मधुबनी सम्प्रति अपर समार्हाा, नवादा के विरूद्ध ग्रामीण विकास विभाग (ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, पंचायत राज, विधायक/पार्षद योजना, कोषी क्रांति योजना का कार्य) पंचायत राज निदेषालय, बिहार, पटना के पत्रांक 2636 दिनांक 26.07.2006 द्वारा जिला पंचायत राज पदाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापन अवधि में बिना अवकाष की स्वी—ति कराये अपने र्काव्य से लगातार अनधि—त रूप से अनुपस्थित रहने तथा त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन/गठन का कार्य प्रभावित होने संबंधी आरोप प्रतिवेदित किया गया। श्री राम के विरूद्ध अनुषासनहीनता एवं र्काव्यहीनता आदि के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित करने की अनुषंसा की गयी।
2. उक्त के आलोक में विभागीय स्तर पर प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 12723 दिनांक 14.12.2006 द्वारा श्री राम को स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेष दिया गया। श्री राम के पत्रांक 57 दिनांक 07.02.2007 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 3775 दिनांक 09.04.2007 द्वारा जिला पदाधिकारी, मधुबनी से श्री राम के समर्पित स्पष्टीकरण पर मंतव्य की मांग की गयी।
3. जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 1487 दिनांक 19.07.2011 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें श्री राम के विरूद्ध आरोप संख्या 01, 02 एवं 03 के संबंध में ''स्पष्टीकरण स्वीकारयोग्य नहीं है'' प्रतिवेदित किया गया तथा आरोप संख्या 04 पर सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना से ही मंतव्य की अपेक्षा की गयी।11 Pबहार गजट, , 28 "सत$बर 2016 4. श्री राम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी के मंतव्य के विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3311 दिनांक 02.03.2015 द्वारा वृहत जाँच हेतु विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
5. आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 45 दिनांक 08.03.2016 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राम के विरूद्ध सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। उक्त जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 7047 दिनांक 17.05.2016 द्वारा श्री राम से अभ्यावेदन की मांग की गयी।
6. श्री राम के पत्रांक 848 दिनांक 14.07.2016 द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कहा गया है कि उनके सामने दो ही विकल्प था या तो अपने वृद्ध पिता की इलाज एवं देखभाल करता या उनको उनकी हालत पर छोड़ देता, क्योंकि मधुबनी में रह कर उनका इलाज संभव नहीं था। आगे इनका कहना है कि जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 1386 दिनांक 04.09. 2006 द्वारा इनकी सेवा विनियमित करने संबंधी पत्र पर विचार किये बिना ही तथ्यों से हट कर आरोपों को प्रमाणित किया गया। उपार्जित अवकाष सरकारी कर्मी द्वारा अर्जित किया गया अवकाष है जो उसका हक है और इस हक से वंचित करने के लिए ऐसा किया गया है; क्योंकि ये अनुसूचित जाति से हैं। दूसरे आरोप के संबंध में इनका कहना है कि इनके पिता का इलाज पटना में ही हुआ लेकिन उनके उनके स्वास्थ्य में स्थिरता आने के कारण बाहर ले जाने की आवष्यकता नहीं पड़ी। संचालन पदाधिकारी का यह कहना कि निबंधित डाक जान-बूझकर प्राप्त नहीं किया गया है, सही नहीं है। क्योंकि अपने पिता के इलाज को लेकर अस्पताल में रहने के कारण निबंधित डाक वापस लौट गया। आरोप संख्या 04 के संबंध में उनका कहना है कि इनके अवकाष में रहने से पंचायत चुनाव कार्य में कठिनाई नहीं हुई। अवकाष के अभ्यावेदन को जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा अनुषंसा के साथ सचिव, कार्मिक एवं प्रषासनिक सुधार विभाग को अग्रसारित किया गया था। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन इनके कारण प्रभावित हुआ होता तो जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा आवेदन को अनुषंसा के साथ विभाग में अग्रसारित नहीं किया जाता। वे परिस्थितिवष अवकाष में रहे थे, इनकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति भी होता तो ऐसा हीं करता। इनका कहना है कि वे समय-समय पर अवकाष वृद्धि हेतु आवेदन देते रहे हैं।
7. अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, मधुबनी एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा उपलब्ध कराये गये मंतव्य में इनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि ग्रामीण विकास विभाग के अधिसूचना संख्या 902 दिनांक 09. 03.2006 द्वारा जिला पंचायत राज पदाधिकारी, मधुबनी के पद पर पदस्थापन एवं अधिसूचित स्थान पर योगदान करने का निदेष दिये जाने के बावजूद निदेष की अवहेलना कर तथा योगदान नहीं करने के कारण त्रि-सदस्यीय पंचायत निकाय निर्वाचन, 2006 के प्रभावित होने का आरोप प्रमाणित होता है।
सम्यक् समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के संगत प्रावधानों के तहत ''निन्दन'' (आरोप वर्ष 2005-06) एवं असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड संसूचित करने का निर्णय लिया गया।
8. अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री महर्षि राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 303/11, तत्कालीन जिला पंचायती राज पदाधिकारी, मधुबनी सम्प्रति अपर समार्हाा, नवादा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) ''निन्दन'' (आरोप वर्ष 2005-06) एवं (ii) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड।
आदेषः- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ संचालन पदाधिकारी, आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा/जिला पदाधिकारी, मधुबनी/ श्री महर्षि राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 303/11, तत्कालीन जिला पंचायती राज पदाधिकारी, मधुबनी सम्प्रति अपर समार्हाा, नवादा को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्रवाई हेतु भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
——— सं॰ 2/सी0-111/2010-सा0प्र0-12500 ——— संकल्प 14 सितम्बर14 सितम्बर14 सितम्बर14 सितम्बर 2016201620162016
श्री अमर नाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, नैहट्टा सम्प्रति विषेष भू-अर्जन पदाधिकारी, भागलपुर के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक 26/गो0 दिनांक 28.01.2010 द्वारा साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ। श्री साहा के विरूद्ध प्रखंड मुख्यालय से अनुपस्थित रहने, बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसल के लिए —षि अनुदान की राषि लाभुकों के बीच वितरित नहीं करने, इंदिरा आवास योजना की प्रतीक्षा सूची के विरूद्ध बी0पी0एल0 परिवार के लाभुकों के नाम बैंकों में खोले गये खाता संबंधी प्रतिवेदन नहीं भेजने, निदेष दिये जाने के बावजूद राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत् डाटा इन्ट्री का कार्य प्रारम्भ नहीं करने, एस0जी0एस0वाई0 की राषि खर्च नहीं करने आदि आरोपों सहित अकर्मण्यता, र्काव्यहीनता एवं कार्यों के प्रति लापरवाही का आरोप प्रतिवेदित है।12 Pबहार गजट, 28 "सत$बर 2016 2. श्री साहा से उक्त आरोपों पर विभागीय पत्रांक 2538 दिनांक 24.05.2010 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री साहा के पत्रांक 66 दिनांक 15.08.2014 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
3. प्रतिवेदित आरोपों पर सम्यक् विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री साहा के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानोंं के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है। आयुक्त, कोषी प्रमंडल, सहरसा को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, सहरसा के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. जिला पदाधिकारी, सहरसा को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।
5. श्री अमर नाथ साहा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
——— सं॰ 2/नि0था0-11-09/2014-सा0प्र0-12655 ——— संकल्प 16161616 सितम्बरसितम्बरसितम्बरसितम्बर 2016201620162016
आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के पत्रांक 76 दिनांक 16.04.2014 द्वारा दिनांक 07.10.2012 को आयोजित ऑडिटर परीक्षा एवं दिनांक 30.09.2012 को आयोजित जूनियर इंजीनियर की परीक्षा में प्राथमिकी अभियुक्तों के साथ षडयंत्रपूर्वक चिन्हित अभ्यार्थियों से मोटी रकम लेकर OMR sheets में छेड़-छाड़ करने के आरोप के संबंध में दर्ज आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 23/2012 दिनांक 20.10.2012 में श्री अकील जुबैर हाषमी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 92/11, तत्कालीन संयुक्त सचिव, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, पटना सम्प्रति सेवानिवृा को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाये जाने की सूचना दी गयी। आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 23/2012 में विधि विभाग के आदेष ज्ञापांक 68 दिनांक 22.04.2015 द्वारा श्री हाषमी के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति दी गयी। प्रतिवेदित आरोप के आधार पर श्री हाषमी के विरूद्ध आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित किया गया।
2. श्री हाषमी से उक्त आरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक 17801 दिनांक 28.12.2015 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री हाषमी द्वारा उक्त निदेष के आलोक में स्पष्टीकरण दिनांक 15.07.2016 समर्पित किया गया।
3. प्रतिवेदित आरोपों एवं श्री हाषमी के स्पष्टीकरण पर सम्यक् विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री हाषमी के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के प्रावधानोंं के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा श्री राम बिषुन राय, अवर सचिव (प्रभारी प्रषाखा-2), सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. श्री अकील जुबैर हाषमी (सेवा निवृत्त बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 94/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
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सं॰ 2/सी0-3-30207/99-सा0प्र0-12685
——— संकल्प 19 सितम्बर19 सितम्बर19 सितम्बर19 सितम्बर 2016201620162016
श्री आषुतोष सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 740/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, सिरदला, नवादा सम्प्रति प्रषासी पदाधिकारी, इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्यों सहित जिला पदाधिकारी, नवादा के पत्रांक 287 दिनांक 26.01.2016 द्वारा प्राप्त हुआ। श्री सिंह के विरूद्ध सिरदला (नवादा) के अंचल कार्यालय द्वारा कार्यान्वित इंदिरा आवास योजनाओं के लाभुकों से प्रति लाभुक रूपये 800.00 से 1500.00 तक रिष्वत लेने, सरकारी कार्य में बाधा डालने एवं जाँच हेतु अभिलेख नहीं उपस्थापित करने, इंदिरा आवास की स्वी—ति में गरीबों की उपेक्षा कर समृद्ध लोगों को इसका लाभ पहुँचाने एवं इंदिरा आवास योजना के लाभुकों से अवैध राषि की वसूली करने का आरोप प्रतिवेदित है।13 Pबहार गजट, , 28 "सत$बर 2016 2. श्री सिंह से उक्त आरोपों पर विभागीय पत्रांक 2459 दिनांक 17.02.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिंह के पत्रांक 911 दिनांक 26.02.2016 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 3937 दिनांक 14.03.2016 द्वारा जिला पदाधिकारी, नवादा से मंतव्य की मांग किये जाने पर जिला पदाधिकारी, नवादा के पत्रांक 1598 दिनांक 14.06.2016 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ।
3. प्रतिवेदित आरोपों, श्री सिंह के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, नवादा के मंतव्य पर सम्यक् विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सिंह के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानोंं के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है। आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, नवादा के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. जिला पदाधिकारी, नवादा को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।
5. श्री आषुतोष सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 740/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधित को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
——— वाणिज्य-कर विभाग ——— अधिसूचना 20 सितम्बर20 सितम्बर20 सितम्बर20 सितम्बर 2016201620162016
सं॰ कौन/भी-138/08/(छाया II)-336/सी—श्री राजीव रंजन कुमार सिंह (बिहार वित्त सेवा) तत्कालीन वाणिज्य-कर उपायुक्त, प्रभारी, सासाराम अंचल सम्प्रति सेवानिवृत वाणिज्य-कर उपायुक्त, मुख्यालय, पटना को विभागीय अधिसूचना संख्या-28 दिनांक 02.03.2009 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए, विभागीय संकल्प संख्या-99 दिनांक 08.05.09 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रांरभ की गयी। उन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-267 दिनांक 23.09.2010 द्वारा तत्कालिक प्रभाव से निलंबन मुक्त किया गया। श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के अनुपालन में समर्पित जवाब के सम्यक् समीक्षोपरांत एवं विभागीय जाँच आयुक्त के जाँच प्रतिवेदन में अंशतः प्रमाणित आरोप संख्या-(1) को आधार बनाते हुए अधिसूचना संख्या-01, दिनांक 01.01.15 द्वारा उन्हे निन्दन का दंड संसूचित किया गया। श्री सिंह द्वारा निलंबन अवधि के पूर्ण वेतन का भूगतान हेतु समर्पित अभ्यावेदन के सम्यक् समीक्षोपरांत एवं विचारोपरांत निम्नांकित निर्णय लिया गया है :-
(i) श्री राजीव रंजन कुमार सिंह, सेवानिवृत उपायुक्त को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 10 (1) में निहित प्रावधान के अनुसार उनके निलंबन अवधि दिनांक 02.03.09 से 22.09.10 तक उनका जीवन निर्वाह भत्ता 90% की दर से देय होगा।
(ii) निलंबन अवधि की गणना पेंशन आदि के लिए होगी।
2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अशोक कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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