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स्थानापन्न आधार पर दी गई प्रोन्नतियों के नियमितिकरण एवं ऐसी प्रोन्नतियों के आधार विषयः- स्थानापन्न आधार पर दी गई प्रोन्नतियों के नियमितिकरण एवं ऐसी प्रोन्नतियों के आधार स्थानापन्न आधार पर दी गई प्रोन्नतियों के नियमितिकरण एवं ऐसी प्रोन्नतियों के आधार पर कालावधि की गणना के संबंध में। पर कालावधि की गणना के संबंध में। विभागीय संकल्प सं0-7457 दिनांक-11
विभागीय संकल्प सं0-7457 दिनांक-11.09.2002 (विभागीय परिपत्र संग्रह, 2010,
2002 (विभागीय परिपत्र संग्रह, 2010, पृ0-485-489) द्वारा सरकारी सेवकों की प्रोन्नति पर विचार करते समय उनके विरूद्ध निलंबन/अनुशासनिक/आपराधिक कार्यवाही द्वारा सरकारी सेवकों की प्रोन्नति पर विचार करते समय उनके विरूद्ध निलंबन/अनुशासनिक/आपराधिक कार्यवाही द्वारा सरकारी सेवकों की प्रोन्नति पर विचार करते समय उनके विरूद्ध निलंबन/अनुशासनिक/आपराधिक कार्यवाही आदि के लंबित मामलों की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया एवं मार्गदर्शी सिद्धांत निरूपित किये गये हैं। आदि के लंबित मामलों की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया एवं मार्गदर्शी सिद्धांत निरूपित किये गये हैं। आदि के लंबित मामलों की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया एवं मार्गदर्शी सिद्धांत निरूपित किये गये हैं। 2. उपर्युक्त विभागीय संकल्प की कंडिका- 2
उपर्युक्त विभागीय संकल्प की कंडिका- 2(iii) में प्रावधानित है कि ''जब किसी सरकारी सेवक की प्रोन्नति ''जब किसी सरकारी सेवक की प्रोन्नति के लिए विभागीय प्रोन्नति समिति की उपयुक्तता संबंधी निष्कर्ष मुहरबंद लिफाफे में रखा गया हो तो एतद् संबंधी रिक्ति के लिए विभागीय प्रोन्नति समिति की उपयुक्तता संबंधी निष्कर्ष मुहरबंद लिफाफे में रखा गया हो तो एतद् संबंधी रिक्ति के लिए विभागीय प्रोन्नति समिति की उपयुक्तता संबंधी निष्कर्ष मुहरबंद लिफाफे में रखा गया हो तो एतद् संबंधी रिक्ति 2007 द्वारा भी मुहरबंद को स्थानापन्न आधार पर भरा जा सकता है।'' विभागीय परिपत्र सं0 3259 दिनांक 26.10.2007 द्वारा भी मुहर को स्थानापन्न आधार पर भरा जा सकता है।'' लिफाफे में निष्कर्ष रखे जाने पर, पद रिक्त नहीं रखने एवं उक्त पद के विरूद्ध स्थानापन्न प्रोन्नतियाँ दिये जाने संबंधी लिफाफे में निष्कर्ष रखे जाने पर, पद रिक्त नहीं रखने एवं उक्त पद के विरूद्ध स्थानापन्न प्रोन्नतियाँ दिये जाने संबंधी लिफाफे में निष्कर्ष रखे जाने पर, पद रिक्त नहीं रखने एवं उक्त पद के विरूद्ध स्थानापन्न प्रोन्नतियाँ दिये जाने संबंधी निदेश दिये गये हैं।
3. विभागीय संकल्प सं0 7457 दिनांक
7457 दिनांक 11.09.2002 की कंडिका-2 (vi) में यह भी प्रावधानित है कि विभागीय में यह भी प्रावधानित है कि विभागीय कार्यवाही समाप्त हो जाने के उपरांत सरकारी सेवक के दोष-मुक्त कर दिये जाने की स्थिति में आवश्यकतानुसार ने के उपरांत सरकारी सेवक के दोष-मुक्त कर दिये जाने की स्थिति में आवश्यकतानुसार ने के उपरांत सरकारी सेवक के दोष-मुक्त कर दिये जाने की स्थिति में आवश्यकतानुसार स्थानापन्न आधार पर प्रोन्नत कनिष्ठतम व्यक्ति को पदावनत कर संबंधित दोषमुक्त सरकारी सेवक को उससे कनीय स्थानापन्न आधार पर प्रोन्नत कनिष्ठतम व्यक्ति को पदावनत कर संबंधित दोषमुक्त सरकारी सेवक को उससे कनीय स्थानापन्न आधार पर प्रोन्नत कनिष्ठतम व्यक्ति को पदावनत कर संबंधित दोषमुक्त सरकारी सेवक को उससे कनीय अधिकारी की प्रोन्नति की तिथि से प्रोन्नति दी जा सकती है। अधिकारी की प्रोन्नति की तिथि से प्रोन्नति दी जा सकती है। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 28 (cid:20)सत(cid:22)बर 2016 साथ ही स्थानापन्न आधार पर अथवा तदर्थ/कार्यकारी व्यवस्था के तहत प्रोन्नत पदाधिकारियों के संदर्भ में अगले पद पर प्रोन्नति हेतु कालावधि की गणना के संबंध में भी अस्पष्टता की स्थिति है। अतः स्थानापन्न आधार पर प्रोन्नत सरकारी सेवकों को, रिक्त पद उपलब्ध होते ही नियमित प्रोन्नति प्रदान करने एवं स्थानापन्न आधार पर अथवा तदर्थ/कार्यकारी व्यवस्था के तहत प्रोन्नति के मामलों में कालावधि की गणना की प्रक्रिया में एकरूपता लाये जाने के लिये एक मार्गदर्शी सिद्धांत निरूपित किये जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
5. अतः सम्यक विचारोपरांत राज्य सरकार द्वारा स्थानापन्न आधार पर प्रोन्नत सरकारी सेवकों की प्रोन्नति नियमित किये जाने एवं ऐसे मामलाें में कालावधि की गणना किये जाने के संबंध में निम्नलिखित निर्णय लिये जाते हैं :-
(i) विभागीय संकल्प सं0 22576 दिनांक 27.11.1976 (विभागीय परिपत्र संग्रह, अगस्त, 1978, पृ0 407) की कंडिका-2(घ) के अनुरूप विभागीय प्रोन्नति समिति के समक्ष वर्ष भर अर्थात आगामी 31 मार्च तक की संभावित रिक्तियों की तिगुनी संख्या तक के सरकारी सेवकों के मामले रखें जाय एवं उनके संबंध में विभागीय प्रोन्नति समिति की अनुशंसा प्राप्त की जाय, ताकि उक्त अनुशंसा की वैधता की अवधि (आगामी एक वर्ष) में नई रिक्ति उपलब्ध होने पर संबंधित सरकारी सेवकों को अविलम्ब प्रोन्नति दी जा सके।
(ii) संबंधित सेवा/संवर्ग की वरीयता सूची में, जिस क्रमांक तक नियमित प्रोन्नति दी जानी हो, के भीतर आने वाले विचाराधीन किसी सरकारी सेवक की प्रोन्नति संबंधी विभागीय प्रोन्नति समिति की अनुशंसा, मुहरबंद लिफाफे में रखे जाने के कारण उत्पन्न रिक्तियों को सूची में उक्त क्रमांक के ठीक नीचे के कर्मियों को स्थानापन्न रूप से प्रोन्नति देकर भरा जाय।
भविष्य में सेवा निवृत्ति अथवा अन्य कारणों से नियमित रिक्ति उपलब्ध होते ही ऐसे स्थानापन्न प्रोन्नति को, रिक्ति उपलब्ध होने की तिथि से ही, नियमित किये जाने का आदेश निर्गत किया जाय। चूँकि उपर्युक्त कंडिका- (i) के तहत संबंधित सरकारी सेवक, विभागीय प्रोन्नति समिति द्वारा पहले ही प्रोन्नति के योग्य अनुशंसित किये जा चुके होंगे, अतएव इस प्रकार से स्थानापन्न प्रोन्नति को नियमित किये जाने हेतु पुनः विभागीय प्रोन्नति समिति की अनुशंसा प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी।
(iii) स्थानापन्न आधार पर प्रोन्नत किसी पदाधिकारी की प्रोन्नति को उपर्युक्त कंडिका-(ii) के अनुसार नियमित कर दिये जाने के उपरांत मुहरबंद लिफाफे में रखी गयी अनुशंसा वाले पद को रिक्त नहीं रखा जाय। नियुक्ति प्राधिकार द्वारा उक्त पद के विरूद्ध उपर्युक्त कंडिका-(i) के अनुरूप, प्रोन्नति के योग्य अनुशंसित वरीयताक्रमानुसार ठीक निचले व्यक्ति को स्थानापन्न आधार पर प्रोन्नति प्रदान किया जाय।
(iv) अगले प्रोन्नत पद पर विधिवत्/नियमित प्रोन्नति हेतु निर्धारित न्यूनतम कालावधि में स्थानापन्न/ तदर्थ/कार्यकारी प्रोन्नति के रूप में बिताई गयी अवधि को जोड़ा जायेगा। संकल्प संख्या 1800 दिनांक 09.06.2011 की अन्य शर्त्तें यथावत् रहेंगी।
(v) परंतु आरोपित पदाधिकारी, जिसके संदर्भ में विभागीय प्रोन्नति समिति की अनुशंसा, मुहरबंद लिफाफे में रखी गयी हो, के आरोप मुक्त हो जाने की स्थिति में, यदि उसके स्थान पर स्थानापन्न रूप से प्रोन्नत सरकारी सेवक को, पद रिक्त नहीं रहने के कारण पदावनत कर दिया जाता है, तब माना जायेगा कि उन्हें संबंधित पद का लगातार वास्तविक कार्यानुभव प्राप्त नहीं हुआ है, बल्कि उसमें टूट हो गई है। इसी प्रकार से तदर्थ/कार्यकारी रूप से प्रोन्नत पदाधिकारियों को अगर किसी कारणवश पूर्व पद पर प्रत्यावर्तित किया जाता है तो माना जायेगा कि उन्हें भी संबंधित पद का लगातार वास्तविक कार्यानुभव प्राप्त नहीं हुआ है, बल्कि उसमें टूट हो गई है। इस प्रकार की टूट की स्थिति में स्थानापन्न/तदर्थ/कार्यकारी रूप से की गई सेवा अवधि की गणना प्रोन्नति हेतु वांछित कालावधि में नहीं की जाएगी।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प का प्रकाशन राजकीय गजट के असाधारण अंक में किया जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिल कुमार, सरकार के विशेष सचिव।
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