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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 07 October 2016

Published 07 October 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-10-07.859
Languages
English, Hindi

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सं॰ 22 नि0 सि0 (सम0)-02-01

रधुनाथपुर करारी जमींदारी बॅाध के 0.00 से 4.6 कि0 मी0 तक उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का प्राक्कलन 6 कि0 मी0 तक उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का प्राक्कलन रधुनाथपुर करारी जमींदारी बॅाध के 0 .07 में जमींदारी बॅाधों मुख्य अभियन्ता, योजना एवं मोनेटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक 2365 दिनांक 23 मुख्य अभियन्ता, योजना एवं मोनेटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक 2365 दिनांक 23.10. र करने के पूर्व उच्चाधिकारियों के के निर्माण के संबंध में जारी निर्देश के अनुरूप तैयार किया गया था। प्राक्कलन तैयार करने के पूर्व उच्चाधिकारियों के के निर्माण के संबंध में जारी निर्देश के अनुरूप तैयार किया गया था। प्राक्कलन तैया साथ स्थल निरीक्षण के दौरान बॅाध के अगल बगल मिट्‌टी की उपलब्धता को देखते हुए प्राक्कलन में मिट्‌टी ढुलाई का साथ स्थल निरीक्षण के दौरान बॅाध के अगल बगल मिट्‌टी की उपलब्धता को देखते हुए प्राक्कलन में मिट्‌टी ढुलाई का साथ स्थल निरीक्षण के दौरान बॅाध के अगल बगल मिट्‌टी की उपलब्धता को देखते हुए प्राक्कलन में मिट्‌टी ढुलाई का प्रावधान नहीं किया गया था। लेकिन प्राक्कलन में फसल क्षतिपूर्ति की मुआवजा का प्रावधान किया गया था। प्राक्कलन प्रावधान नहीं किया गया था। लेकिन प्राक्कलन में फसल क्षतिपूर्ति की मुआवजा का प्रावधान किया गया था। प्राक्कलन प्रावधान नहीं किया गया था। लेकिन प्राक्कलन में फसल क्षतिपूर्ति की मुआवजा का प्रावधान किया गया था। प्राक्कलन ने का मूल उद्वेश्य बेगुसराय जिलान्तर्गत साहेबपुर कमाल प्रखण्ड के रधुनाथपुर करारी, हीरा टोला, रहुआ एवं ने का मूल उद्वेश्य बेगुसराय जिलान्तर्गत साहेबपुर कमाल प्रखण्ड के रधुनाथपुर करारी, हीरा टोला, रहुआ एवं तैयार करने का मूल उद्वेश्य बेगुसराय जिलान्तर्गत साहेबपुर कमाल प्रखण्ड के रधुनाथपुर करारी, हीरा टोला, रहुआ एवं चिरैया आदि ग्रामों के लगभग 553.28 एकड़ भूमि के साथ साथ उक्त क्षेत्र में पड़ने वाले महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की 28 एकड़ भूमि के साथ साथ उक्त क्षेत्र में पड़ने वाले महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की 28 एकड़ भूमि के साथ साथ उक्त क्षेत्र में पड़ने वाले महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की बाढ़ से सुरक्षा करना था। साथ ही साथ यह जमी ंदारी बॅाध एन0 एच0-31 को उमेशनगर रेलवे स्टेशन से जोड़ने का बाढ़ से सुरक्षा करना था। साथ ही साथ यह जमींदारी बॅाध एन0 एच0-31 को उमेशनगर रेलवे स्टेशन से जोड़ने का एक मात्र साधन भी है। कार्य स्थल पर भूस्वामियों द्वारा उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण कार्य तत्काल 58 प्रतिशत एक मात्र साधन भी है। कार्य स्थल पर भूस्वामियों द्वारा उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण कार्य तत्काल 58 प्रतिशत एक मात्र साधन भी है। कार्य स्थल पर भूस्वामियों द्वारा उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण कार्य तत्काल 58 प्रतिशत ै, अतः 2'0'' मिट्‌टी काटने ही पूर्ण कराया जा सका। ग्रामीणें द्वारा बताया गया कि 2'0'' मिट्‌टी के नीचे खेत में बालू है, अतः 2'0'' मिट्‌टी काटने ही पूर्ण कराया जा सका। ग्रामीणें द्वारा बताया गया कि 2'0'' मिट्‌टी के नीचे खेत में बालू ह 2 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 7 अ(cid:23)तूबर 2016 पर खेत उपजाउ नहीं रह जाएगा। जमींदारी बॅाध पर 269.92 लाख रूपये प्राक्कलित राशि के विरूद्व पी0 सी0 सी0 सड़क का निर्माण कराया गया है। कार्य की अंतिम विपत्र की राशि में पूर्व में भुगतान की गई राशि से 148002/- रूपये की कमी के कारण वाहनों के आवागमन एवं चार वर्षो के बरसात में मिट्‌टी का क्षरण होना माना जा सकता है। आपसे प्राप्त बचाव बयान की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षोपरान्त निम्न तथ्य पाये गयेः- रधुनाथपुर करारी जमींदारी बॅाध के 0.00 से 4.54 कि0मी0 तक पी0 सी0 सड़क के निर्माण के लिए 269.91 लाख रूपये के प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दी गई। इसका शिलान्यास दिनांक 02.12.2012 को किया गया है। आरोपित पदाधिकारियों के बचाव बयान के अनुसार पी0 सी0 सी0 सड़क का निर्माण किया जा चुका है। इस तरह बॅाध का सदुपयोग किया जा रहा है। फिर भी बाढ़ से बचाव के लिए बने जमींदारी बॅाध का सदुपयोग होता अगर यांत्रिक साधन से मिट्‌टी ढुलाई का पुनरक्षित प्राक्कलन स्वीकृत करवाकर इस कार्य को पूरा करा लिया जाता। संचिका में उपलब्ध अभिलेखों से स्पष्ट है कि मिट्‌टी उपलब्ध नहीं होने के बाद यांत्रिक साधन से मिट्‌टी ढुलाई कर जमींदारी बॅाध बनाने का प्रस्ताव तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा अधीक्षण अभियन्ता को उपलब्ध नहीं कराया जा सका। प्रस्ताव प्राप्त होने पर सक्षम पदाधिकारी द्वारा विचलन की स्वीकृति देकर जमींदारी बॅाध का पूर्ण निर्माण कराया जाना संभव होता एवं बॅाध का पूर्ण सदुपयोग होता। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इससे क्षेत्रीय पदाधिकारी यथा कार्यपालक अभियन्ता, सहायक अभियन्ता एवं सभी कनीय अभियन्ता में दूरदर्क्षिता का अभाव परिलक्षित होता है जिसके फलस्वरूप अनुपयोगी व्यय की स्थिति उत्पन्न हुई ं जिसके लिए आप दोषी पाये गये है।

इस प्रकार प्रमाणित आरोपों के लिए श्री रविन्द्र नारायण, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, बेगुसराय को विभागीय अधिसूचना सं0 717 दिनांक 29.04.16 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-

(1) देय तिथि से प्रोन्नति पर दो वर्ष तक रोक। (2) एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड। उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री रविन्द्र नारायण द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी विभाग को उपलब्ध कराया गया जिसमें उनके द्वारा निम्नलिखित बाते कही गयीः-

(i) श्री नारायण ने अपने पुनर्विचार आवेदन में अंकित किया है कि उनके पदस्थापन काल में मात्र 58 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण कराया जा सका था। कार्य कराने के दौरान ही उनका स्थानान्तरण हो गया, जिसके कारण उक्त अवर प्रमण्डल का प्रभार सौप कर दिनांक 04.12.08 को स्थानान्तरित स्थान पर योगदान हेतु प्रस्थान कर गये। यदि उनका स्थानान्तरण नहीं होता तो कार्य को एकरारनामा के अनुरूप संवेदक से पूर्ण करा लिया जाता।

(ii) श्री नारायण ने पुनर्विचार आवेदन में उल्लेख किया है कि किसी भी कर्मचारी / पदाधिकारी से स्पष्टीकरण के आलोक में वृहत दण्ड दिये जाने का कोई भी प्रावधान नहीं है। यदि किसी भी सरकारी पदाधिकारी पर कोई मामला बनता है। तो उस स्थिति में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 में निहित प्रावधानों के तहत आरोपी के विरू़द्व प्रपत्र-''क'' गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाना आवश्यक है। इस मामले में उपरोक्त प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया है। इसलिए उनके विरूद्व निर्गत दण्डादेश को निरस्त किया जाये। उक्त पुनर्विलोकन अर्जी में वर्णित तथ्यों की विभागीय समीक्षा की गई जिसमें निम्न तथ्य पाया गयाः- (i) श्री नारायण द्वारा इसके पूर्व भी अपने स्पष्टीकरण में इस बात का उल्लेख किया था कि उनका स्थानान्तरण हो जाने के कारण ही 58 प्रतिशत कार्य सम्पन्न हो सका। उस स्पष्टीकरण में यह भी अंकित है कि कार्य स्थल पर कार्य कराने के दौरान भूस्वामियों द्वारा मिट्‌टी उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण कार्य 58 प्रतिशत तक ही पूर्ण कराया जा सका। समय समय पर कार्य स्थल पर जन विरोध को रोकने हेतु उनके द्वारा अथक प्रयास किया गया एवं ग्रामीणों को कार्य पूर्ण होने से होने वाले लाभ से अवगत कराते हुए कार्य पूर्ण कराने में वांछित सहयोग करने हेतु पूर्णतः प्रयास किया गया। किन्तु इसके बाद भी ग्रामीणों द्वारा मिट्‌टी उपलब्ध नहीं करायी गई जिससे स्पष्ट होता है कि योजना का प्राक्कलन स्थल निरीक्षण कर तैयार नहीं किया गया था। मिट्‌टी की उपलब्धता को ध्यान में रखे वगैर इस योजना का प्राक्कलन तैयार किया गया। यही कारण है कि मिट्‌टी की अनुपलब्धता के कारण योजना में मात्र 58 प्रतिशत कार्य ही कराया जा सका, जिसके कारण यह योजना अनुपयोगी रही एवं इस पर किया गया व्यय निष्फल रहा। इस प्रकार श्री नारायण के पुनर्विलोकन अर्जी की कंडिका (i) स्वीकार योग्य नहीं है। 3

ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 7 अ(cid:23)तूबर 2016

(ii) श्री नारायण ने अपने पुनर्विलोकन अर्जी की कंडिका (ii) में उल्लेखित किया है कि बगैर विभागीय कार्यवाही संचालित किये ही उनके विरूद्व वृहत दण्ड अधिरोपित किया गया है जो बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के प्रावधानों के प्रतिकूल है। श्री नारायण को विभागीय अधिसूचना सं0 717 दिनांक 29.04.16 द्वारा ''देय तिथि से प्रोन्नति पर दो वर्षो तक रोक'' एवं '' एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड संसूचित है। ये दोनों ही दण्ड लधु शास्ति के अन्तर्गत आते है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 में प्रावधानित है कि आरोपों के संदर्भ में स्पष्टीकरण प्राप्त कर लधु दण्ड निर्गत किया जा सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि लधु दण्ड निर्गत करने के पूर्व विभागीय कार्यवाही संचालित की जाए। इस प्रकार श्री नारायण के पुनर्विलोकन अर्जी की कंडिका (ii) भी स्वीकार योग्य नहीं है।

उपरोक्त विभागीय समीक्षा के आधार पर श्री रविन्द्र नारायण, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, बेगुसराय सम्प्रति कार्यपालक अभियन्ता, पूर्वी सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल, टिकारी, गया के विरूद्व प्रमाणित आरोप के लिए अधिरोपित दण्ड ''देय तिथि से प्रोन्नति पर दो वर्षो तक रोक'' एवं ''एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' को बरकरार रखते हुए इनके पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री रविन्द्र नारायण, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियत्रण प्रमण्डल, बेगुसराय सम्प्रति कार्यपालक अभियन्ता, पूर्वी सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमण्डल, टिकारी, गया द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0 717 दिनांक 29.04.16 द्वारा अधिसूचित दण्ड को बरकरार रखा जाता है।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 07 October 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-10-07.859/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-10-07.859.