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सं॰ 22 नि0 सि0 (डि0)-14-16/2013
22 नि0 सि0 (डि0)-14-16/2013/1956—श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता (आई0 डी0 4524), तत्कालीन श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता (आई0 डी0 4524), तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण अवर प्रमण्डल, बसावन के विरूद्ध स्वेच्छापूर्वक कर्त्तव्य से अनुपस्थित सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण अवर प्रमण्डल, बसावन के विरूद्ध स्वेच्छापूर्वक कर्त्तव्य से अनुपस्थित सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण अवर प्रमण्डल, बसावन के विरूद्ध स्वेच्छापूर्वक कर्त्तव्य से अनुपस्थित री के आदेश की अवहेलना के प्रथम दृष्टया प्रमाणित रहने, उत्तरदायित्व के निर्वहन में लापरवाही एवं नियंत्री पदाधिका रहने, उत्तरदायित्व के निर्वहन में लापरवाही एवं नियंत्री पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना के प्रथम दृष्टया प्रमाणित 13 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय अधिसूचना आरोपों के लिए विभगीय अधिसूचना ज्ञापांक 1413 दिनांक 26.11.13 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय अधिसूचना आरोपों के लिए विभगीय अधिसूचना ज्ञापांक 1413 दिनांक 26 13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के ज्ञापांक 1487 दिनांक 10.12.13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के 13 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
7 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान में श्री गुप्ता द्वारा बताया गया कि मुख्य अभियंता, जल संसाधन संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान में श्री गुप्ता द्वारा बताया गया कि मुख्य अभियंता, जल संसाधन संचालन पदाधिकारी को समर्पित बचाव बयान में श्री गुप्ता द्वारा बताया गया कि मुख्य अभियंता, जल संसाधन
13 जो उन्हें प्रमण्डल से दिनांक 29.06. ाप्त हुआ, के आलोक में दिनांक 02.07.13 को बाण सागर के लिए प्रस्थान कर गए तथा दिनांक 03 13 तक ट्रायल में दस क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया। पुनः 14.07.13 से 20 विभाग, डिहरी के पत्रांक 1876 दिनांक 22.06.13 एवं पत्रांक 1931 दिनांक 24.06.13 जो उन्हें प्रमण्डल से दिनांक 29 विभाग, डिहरी के पत्रांक 1876 दिनांक 22 13 को बाण सागर के लिए प्रस्थान कर गए तथा दिनांक 03.07.13 को 13 को प्राप्त हुआ, के आलोक में दिनांक 02 बाण सागर पहुँचकर दिनांक 04.7.13 से बाण सागर के पदाधिकारियों के निर्देश पर दस क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया। 13 से बाण सागर के पदाधिकारियों के निर्देश पर दस क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया। 13 से बाण सागर के पदाधिकारियों के निर्देश पर दस क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया। 13 से 20.07.13 तक दिनांक 04.07.13 से 13.07.13 तक ट्रायल में दस क्यूस 14 से नियमित जलश्राव जलापूर्ति बन्द रही, जिसकी सूचना उनके द्वारा निदेशित स्थान पर दिया गया। दिनांक 21.07.14 से नियमित जलश्राव जलापूर्ति बन्द रही, जिसकी सूचना उनके द्वारा निदेशित स्थान पर दिया गया। दिनांक 21 13 से प्रतिदिन जलश्राव की सूचना अपने मोबाईल से इन्द्रपुरी शुरू हुआ। श्री गुप्ता का कथन है कि दिनांक 04.07.13 से प्रतिदिन जलश्राव की सूचना अपने मोबाईल से इन्द्रपुरी शुरू हुआ। श्री गुप्ता का कथन है कि दिनांक 04 ाज पर पदस्थापित सहायक अभियंता श्री नवीन कुमार के मोबाईल पर भेजते रहे। उनका मोबाईल नम्बर अन्य स्थानों बराज पर पदस्थापित सहायक अभियंता श्री नवीन कुमार के मोबाईल पर भेजते रहे। उनका मोबाईल नम्बर अन्य स्थानों ाज पर पदस्थापित सहायक अभियंता श्री नवीन कुमार के मोबाईल पर भेजते रहे। उनका मोबाईल नम्बर अन्य स्थानों पर भी प्रतिवेदित रहने के कारण आवश्यकतानुसार अन्य नम्बरों से भी सूचना ली जाती रही। पर भी प्रतिवेदित रहने के कारण आवश्यकतानुसार अन्य नम्बरों से भी सूचना ली जाती रही। के क्रम में श्री गुप्ता द्वारा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक 2187 दिनांक 18.07.13 के क्रम में श्री गुप्ता द्वारा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक 2187 दिनांक 18
बताया गया है कि नेटवर्क नहीं मिलने के कारण ही एस0 एम0 एस0 मिलने में विलम्ब की संभावना है। दिनांक 14.07. बताया गया है कि नेटवर्क नहीं मिलने के कारण ही एस0 एम0 एस0 मिलने में विलम्ब की संभावना है। दिनांक 14 बताया गया है कि नेटवर्क नहीं मिलने के कारण ही एस0 एम0 एस0 मिलने में विलम्ब की संभावना है। दिनांक 14 13 से 20.07.13 तक जलापूर्ति बन्द थी। इसलिए जलापूर्ति की सूचना नियमित रूप से नहीे दी जा सकी थी। इसके 13 तक जलापूर्ति बन्द थी। इसलिए जलापूर्ति की सूचना नियमित रूप से नहीे दी जा सकी थी। इसके 13 तक जलापूर्ति बन्द थी। इसलिए जलापूर्ति की सूचना नियमित रूप से नहीे दी जा सकी थी। इसके 13 तक जलापूर्ति की सूचना दी जाती रही है। साक्ष्य के रूप में उनके द्वारा बाण उपरान्त दिनांक 21.07.13 से 07.09.13 तक जलापूर्ति की सूचना दी जाती रही है। साक्ष्य के रूप में उनके द्वारा बाण 13 तक जलापूर्ति की सूचना दी जाती रही है। साक्ष्य के रूप में उनके द्वारा बाण सागर से प्रतिदिन भेजे गए जलश्राव का आंकड़ा संलग्न किया गया है। सागर से प्रतिदिन भेजे गए जलश्राव का आंकड़ा संलग्न किया गया है।
13 के द्वारा श्री गुप्ता से बाण मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक 2848 दिनांक 12.09.13 के द्वारा श्री गुप्ता से बाण मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक 2848 दिनांक 12 सागर में सिंचाई अवधि 2013-14 में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु की गई प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थिति 14 में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु की गई प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थिति 14 में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु की गई प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थिति के संबंध में माँगे गये स्पष्टीकरण के जवाब में श्री गुप्ता द्वारा लिखित बचाव बयान दिया गया है कि वे दिनांक 08.09. के संबंध में माँगे गये स्पष्टीकरण के जवाब में श्री गुप्ता द्वारा लिखित बचाव बयान दिया गया है कि वे दिनांक 08 के संबंध में माँगे गये स्पष्टीकरण के जवाब में श्री गुप्ता द्वारा लिखित बचाव बयान दिया गया है कि वे दिनांक 08 स्थान किए हैं। आगे पानी कब छोड़ा जाएगा 13 को बाण सागर से विभागीय आदेश में जलापूर्ति बन्द होने के बाद प्रस्थान किए हैं। आगे पानी कब छोड़ा जाएगा 13 को बाण सागर से विभागीय आदेश में जलापूर्ति बन्द होने के बाद प्र 2 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 7 अ(cid:23)तूबर 2016 इसकी सूचना उन्हें दिनांक 08.09.13 को नहीं थी। इसलिए वे अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी द्वारा सौंपे गए कार्य को निबटाने हेतु दिनांक 09.09.13 को बाण सागर से प्रस्थान किए। यह कार्य समय-सीमा के अन्तर्गत दिनांक 02.09.13 से 27.09.13 तक करना था। आगे श्री गुप्ता द्वारा बताया गया है कि बाण सागर में ही उनकी तबीयत खराब थी और रास्ते में तबीयत और भी खराब हो गयी। तब वे बेहतर ईलाज के लिए पटना चले आए। पटना पहुँचने के बाद मुख्य अभियंता, डिहरी, कार्यपालक अभियंता एवं मुख्य अभियंता के स्टेनों से उनकी वार्ता हुई एवं उनके द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरण का जवाब दिया गया। दिनांक 14.09.13 को वे पुनः वाण सागर पहुँच गए। lapkyu inkf/kdkjh dk earO;%& संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में यह मंतव्य व्यक्त किया गया है कि श्री गुप्ता, मुख्य अभियंता, जल ससांधन विभाग, डिहरी के पत्रांक 1876 दिनांक 22.06.13 एवं पत्रांक 1931 दिनांक 24.06.13 के आलोक में दिनांक 02.07.13 को ट्रेन द्वारा बाण सागर के लिए प्रस्थान किए। बाण सागर से दिनांक 04.07.13 से स्थलीय पदाधिकारियों के निदेश पर दस क्यूसेक जलापूर्ति ट्रायल के रूप में 13.07.13 तक किया गया जिसकी सूचना श्री गुप्ता द्वारा अपने मोबाईल से मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी एवं इन्द्रपुरी बराज पर पदस्थापित सहायक अभियंता श्री नवीन कुमार को उनके मोबाईल पर एस0 एम0 एस0 द्वारा दी गई। उसके बाद 14.07.13 से 07.09.13 तक जलापूर्ति बन्द रही जिसके कारण उक्त अवधि में जलापूर्ति की सूचना नियमित रूप से नहीं दी जा सकी। इसके उपरान्त 21.07.13 से 07.09.13 तक नियमित रूप से जलापूर्ति की सूचना दी जाती रही है। दिनांक 08.09.13 के बाद जलापूर्ति बन्द हो गई और इसके उपरान्त जलापूर्ति कब होगी इसकी सूचना नहीं मिलने के कारण ये अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी द्वारा सौंपे गए कार्य को पूरा करने के लिए दिनांक 09.09.13 को बाण सागर से प्रस्थान कर गए। श्री गुप्ता की तबीयत बाण सागर में ही खराब थी तथा रास्ते में तबीयत और खराब हो जाने के कारण वे ईलाज के लिए पटना चले गए। पटना पहुँचने के बाद मुख्य अभियंता, जल ससांधन विभाग, डिहरी, कार्यपालक अभियंता एवं मुख्य अभियंता के स्टेनों से श्री गुप्ता से वार्ता हुई। इसी बीच जलापूर्ति बन्द होने के कारण सोन नहर में पानी की कमी होने लगी और श्री गुप्ता स्थल पर उपलब्ध नहीं थे तो इनसे स्पष्टीकरण पूछा गया जिसका जवाब उनके द्वारा पत्रांक 15 दिनांक 21.09.13 के माध्यम से दिया गया। स्पष्टीकरण में श्री गुप्ता द्वारा चिकित्सक का प्रमाण पत्र संलग्न किया गया जिसके अनुसार ये चार दिन दिनांक (10.09. 13 से 13.09.13 तक) चिकित्सा के कारण बाण सागर स्थल पर मौजूद नहीं थे। बावजूद इसके वे अनुपस्थिति अवधि में भी सभी पदाधिकारियों के सम्पर्क में रहे हैंं। स्वस्थ होने के उपरान्त वे दिनांक 14.09.13 को बाण सागर पहुँच गए। दिनांक 14.09.13 की संध्या 4.00 बजे से जलापूर्ति शुरू हुई तब से पुनः 15.09.13 से 16.09.13 का जलश्राव का आंकड़ा भेजा गया है। उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री गुप्ता के विरूद्ध आरोप को पूर्णतः प्रमाणित नहीं पाया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के आधार पर मामले की सरकार के स्तर पर समीक्षा की गयी। समीक्षा में यह पाया गया कि श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण अवर प्रमण्डल, बसावन को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के आदेश सं0 1876 दिनांक 22.06.13 द्वारा सोन नहर में बाण सागर जलाशय (मध्य प्रदेश) से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक सम्पर्क कार्य हेतु प्रतिनियुक्त किया गया था। वे दिनांक 03.07.13 को बाण सागर पहुँचे। दिनांक 04.07.13 से बाण सागर के पदाधिकारियों के निदेश पर दस क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दिनांक 04.07.13 से 13.07.13 तक ट्रायल मेें दस क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया। दिनांक 14.07.13 से 20.07.13 तक जलापूर्ति बन्द रही। दिनांक 21.07.13 से नियमित जलापूर्ति शुरू हुई जिसकी सूचना वे निदेशित स्थान पर देते रहे। दिनांक 08.09.13 तक जलापूर्ति की सूचना अप्राप्त रहने के कारण वे दिनांक 09.09.13 को बाण सागर से प्रस्थान कर गए जिसकी सूचना उनके द्वारा न तो मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी को दी गई और न ही अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी को जिनके द्वारा सौंपे गये कार्य को पूरा करने हेतु प्रस्थान करने की आवश्यकता बताई गई है। श्री गुप्ता एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रतिनियुक्त थे और इस प्रकार बिना सूचना के कार्य स्थल छोड़ना कतई उचित नहीं था। बाण सागर से प्रस्थान करने के बाद वे सीधे पटना पहुँच गए। दिनांक 12.09.13 को जब मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी द्वारा श्री गुप्ता से मोबाईल पर कार्य प्रगति की जानकारी माँगी गयी तब उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त हुई कि श्री गुप्ता कार्य स्थल पर मौजूद नहीं थे। इस प्रकार श्री गुप्ता द्वारा दिनांक 09.09.13 से 11.09.13 तक अपने स्तर से वरीय पदाधिकारियों को सूचना देना मुनासिब नहीं समझा गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षोपरान्त असहमति के निम्न बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 1245 दिनांक 03.09.14 द्वारा श्री गुप्ता से द्वितीय कारण पृच्छा की गईः-
1. मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के आदेश सं0 1876 दिनांक 22.06.13 द्वारा सोन नहर में बाण सागर जलाशय (मध्य प्रदेश) से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक सम्पर्क कार्य हेतु आपकी प्रतिनियुक्ति की गई थी परन्तु दिनांक 09.09.13 को आप मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी को सूचित किए बिना कार्य स्थल से प्रस्थान कर गए।
2. कार्य स्थल छोड़ने का कारण आपके द्वारा यह बताया गया है कि अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी द्वारा पूर्व से सौंपे गए कार्य को पूरा करना था परन्तु आप ईलाज हेतु पटना आ गए और इसकी सूचना न तो अधीक्षण अभियंता को और न मुख्य अभियंता को दी गई। 3
ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 7 अ(cid:23)तूबर 2016
3. दिनांक 12.09.13 को जब मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी द्वारा आपके मोबाईल पर कार्य प्रगति की जानकारी माँगी गई तब यह पता चला कि आप कार्य स्थल पर मौजूद नहीं हैं बल्कि पटना में हैं। इस प्रकार दिनांक 09.09.13 से 12.09.13 के मध्य आपके द्वारा अपने वरीय पदाधिकारियों को वस्तुस्थिति से अनभिज्ञ रखा गया। 4. महत्वपूर्ण कार्य के प्रति आपकी उदासीनता एवं लापरवाही के कारण ही आपके थान पर दूसरे पदाधिकारी को प्रतिनियुक्त करना पड़ा।
श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में बिन्दु (i) के संबंध में बताया गया कि दिनांक 08.09.13 से जलश्राव बन्द था और अधीक्षण अभियंता द्वारा सौंपे गए कार्य को पूरा करने के लिए कार्यस्थल छोड़ने की सूचना उनके स्तर से नहीं दी गई।
कारण पृच्छा के बिन्दु (ii) के संबंध में उनके द्वारा बताया गया कि वे ईलाज के दौरान कष्ट में थे इसलिए कार्य स्थल छोड़ने की सूचना उनके स्तर से नहीं दी गई परन्तु जिस पदाधिकारी एवं कर्मचारी से वार्ता हुई उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी दी गइर््र।
कारण पृच्छा के बिन्दु (iii) एवं (iv) के संबंध में श्री गुप्ता द्वारा पूर्व में दिए गए बचाव बयान को दुहराया गया है और कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है।
श्री गुप्ता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की सरकार के स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि उनके द्वारा कार्य स्थल छोड़ने की सूचना मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी अथवा अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी को नहीं दी गई। इस तथ्य को श्री गुप्ता द्वारा भी स्वीकार किया गया है। श्री गुप्ता का यह कथन कि ''कष्ट में होने के कारण वे सूचना नहीं दे सके परन्तु पदाधिकारी एवं कर्मचारी से वार्ता होने पर उन्हें स्थिति से अवगत करा दिया गया'' अपने आप में विरोधाभाषी है क्योंकि यदि वे कष्ट में थे तो किसी भी परिस्थति मेें सूचना देने में सक्षम नहीं थे। जिससे स्पष्ट है कि कार्य स्थल पर नहीं बल्कि पटना में हैं- इस तथ्य से वरीय पदाधिकारियों के अनभिज्ञ रखना चाहते थे। स्पष्टतः श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में कोई ऐसा तथ्य अथवा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिसके आधार पर असहमति के बिन्दुओं का निराकरण हो सके। अतएव सम्यक समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर आधुनिकीकरण अवर प्रमण्डल, बसावन के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0 1654 दिनांक 11.11.14 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- ''निन्दन वर्ष 2013-14'' उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री गुप्ता द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया जिसमें उनके द्वारा अंकित किया गया है कि जब वे प्रतिनियुक्ति स्थल बाण सागर से दिनांक 09.09.13 को प्रस्थान किए तो उनके द्वारा उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी गई क्योंकि वहाँ सचिवालय स्तर से कार्य अगले आदेश तक बंद कर दिया गया था। वे दिनांक 10.09.13 को पटना पहुँचे और अपना ईलाज करने लगे। वे दिनांक 12.09.13 को मुख्य अभियन्ता एवं कार्यपालक अभियन्ता के स्टेनो को तबियत खराब होने के बारे में सूचना दिए थे। पुनः वे दिनांक 14.09.13 को बाण सागर पहुँचे और दिनांक 14.09.13, दिनांक 15.09.13, दिनांक 16.09.13 को बाण सागर से जलश्राव का आँकड़ा भेजे। दिनांक 16.09.13 को नव प्रतिनियुक्त पदाधिकारी के पहुँचने पर प्रतिनियुक्ति स्थल बाण सागर से वे लौट गए। कार्य बंद रहने के कारण वे दिनांक 09.09.13 से अगले चार दिनों के लिए अनुपस्थित रहे और जैसे ही कार्य आरंभ हुआ, वे दिनांक 14.09.13 को प्रतिनियुक्ति स्थल बाण सागर पर पहुँच गए। इसलिए उनके द्वारा अपने कर्त्तव्य के निर्वहन में किसी प्रकार की उदासीनता अथवा लापरवाही नहीं बरती गई। उनकी अनुपस्थिति से सरकार को किसी प्रकार की वित्तीय क्षति नहीं हुई है। इसलिए अनुपस्थिति के लिए सरकार उन्हें चेतावनी भी दे सकती है किन्तु उन्हें वर्ष 2013-14 के लिए निन्दन का दण्ड दिया गया है जिसके कारण वे अगले तीन वर्षों तक पदोन्नति एवं द्वितीय सुनिश्चित वृति उन्नयन के लाभ से वंचित हो गए। दिनांक 26.11.13 से दिनांक 10.11.14 तक की निलंबन अवधि में उन्हें मात्र नब्बे प्रतिशत ही भुगतान किया गया है जिसके कारण उन्हें आर्थिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता, सहायक अभियंता से प्राप्त पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी के पत्रांक 1876 दिनांक 22.06.13 द्वारा श्री गुप्ता की प्रतिनियुक्ति बाण सागर एवं रिहन्द में की गई थी। साथ ही इन्हें प्रतिदिन जलश्राव का आँकड़ा विभाग एवं मुख्य अभियंता को उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया था किन्तु इनके द्वारा विभागीय दिशा-निदेशों का उल्लंघन करते हुए किसी प्रकार का जलश्राव का आँकड़ा नहीं भेजा गया। साथ ही ये दिनांक 09.09.13 को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, डिहरी को सूचना दिए बगैर प्रतिनियुक्ति स्थल से प्रस्थान कर गए। इस तथ्य की स्वीकारोक्ति श्री गुप्ता के पुनर्विचार अभ्यावेदन में भी किया गया है। श्री गुप्ता द्वारा अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में अंकित किया गया है कि कार्य बन्द रहने एवं अधीक्षण अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अंचल, डिहरी द्वारा पूर्व में सौंपे गए कार्य को पूरा करने के उद्धेश्य से वे प्रतिनियुक्ति स्थल से लौट आए। श्री गुप्ता का यह कथन स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि अपने अभ्यावेदन में श्री गुप्ता ने पटना में ईलाज कराने की बात कही है। श्री गुप्ता को चाहिए था कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में इन्हें प्रतिनियुक्ति स्थल से लौटना था तो इसकी सूचना मुख्य अभियंता को देते एवं उनसे पूर्वानुमति प्राप्त कर लेते किन्तु इनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया। फलस्वरूप इनके स्थान पर अन्य अभियंताओं को प्रतिनियुक्त करना पड़ा। अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में श्री गुप्ता ने ही इस तथ्य को स्वीकार किया है कि वे दिनांक 09.09.13 से 14.09.13 तक प्रतिनियुक्ति स्थल से अनुपस्थित रहे जिसके लिए उन्हें चेतावनी भी दिया जा सकता है। दण्ड निर्धारण का अधिकार अनुशासनिक प्राधिकार को है। दण्ड निर्धारण आरोपोें की प्रकृति पर आधारित होती है। श्री गुप्ता द्वारा 4 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 7 अ(cid:23)तूबर 2016 जलश्राव का आँकड़ा नहीं भेजना, प्रतिनियुक्ति स्थल से बगैर किसी सूचना के गायब हो जाना, इनकी स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करता है जिसके लिए पूर्व में दिया गया निन्दन का दण्ड सुविचारित है। इसमें किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। श्री गुप्ता की निलंबन अवधि मेें नब्बे प्रतिशत राशि का भुगतान किया है तथा निलंबन अवधि को पेंशन प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य पर बिताई गई अवधि के रूप में विनियमित किया गया है। अतः सम्यक समीक्षोपरान्त श्री गुप्ता के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए दण्ड को यथावत रखने का निर्णय सरकार के स्तर से लिया गया है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री कामेश्वर प्रसाद गुप्ता, तत्कालीन सहायक अभियंता, सोन नहर आधुनिकीकरण अवर प्रमण्डल, बसावन के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0 1654 दिनांक 11.11.14 द्वारा संसूचित 'निन्दन' के दण्ड को यथावत रखते हुए पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।
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