िनबंधन सं(cid:18)या पी0ट&0-40 िनबंधन सं(cid:18)या (cid:1)ब(cid:1)ब(cid:1)ब(cid:1)बहारहारहारहार
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((((संसंसंसं0 पटनापटनापटनापटना 874) ) ) ) पटनापटनापटनापटना
पटनापटनापटनापटना, शुबशुबशुबशुबवारवारवारवार, 7777 अ"तूअ"तूअ"तूअ"तूबरबरबरबर 2016
जल संसाधन विभाग ---------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 10101010 अगस्त 2016अगस्त 2016अगस्त 2016अगस्त 2016
सं0 22/नि0सि0(ल0सिं0)-05-09/2014
22/नि0सि0(ल0सिं0)-05-09/2014/1730—श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, (आई0 डी0 3300), श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, (आई0 डी0 3300), तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा को वित्तीय वर्ष 2012-13 में न लकूप प्रमण्डल, छपरा के अन्तर्गत तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा को वित्तीय वर्ष 2012-13 में नलकूप प्रमण्डल, छपरा के अन्तर्गत नलकूपों के नाला मरम्मति एवं आउटलेट निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितताओं से संंबंधित अधीक्षण अभियंता, नलकूपों के नाला मरम्मति एवं आउटलेट निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितताओं से संंबंधित अधीक्षण अभियंता, नलकूपों के नाला मरम्मति एवं आउटलेट निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितताओं से संंबंधित अधीक्षण अभियंता, 14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त नाला मरम्मति में नलकूप अंचल, पटना के पत्रांक 142 दिनांक 12.02.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त नाला मरम्मति में नलकूप अंचल, पटना के पत्रांक 142 दिनांक 12 ता, तकनीकी निविदा के निस्तारण से संबंधित कोई अभिलेख/संदर्भ नहीं पाये जाने, निविदा ता, तकनीकी निविदा के निस्तारण से संबंधित कोई अभिलेख/संदर्भ नहीं पाये जाने, निविदा बरती गयी अनियमितता, तकनीकी निविदा के निस्तारण से संबंधित कोई अभिलेख/संदर्भ नहीं पाये जाने, निविदा निस्तार की स्थापित प्रक्रिया का घोर उल्लंघन कर सरकारी राशि का दुरूपयोग करने, अवैध भुगतान संवेदक को देने निस्तार की स्थापित प्रक्रिया का घोर उल्लंघन कर सरकारी राशि का दुरूपयोग करने, अवैध भुगतान संवेदक को देने निस्तार की स्थापित प्रक्रिया का घोर उल्लंघन कर सरकारी राशि का दुरूपयोग करने, अवैध भुगतान संवेदक को देने आदि आरोपों के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाये जाने के लघु जल संसाधन विभाग द्वारा श्री दिनकर को थम द्रष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप लघु जल संसाधन विभाग द्वारा श्री दिनकर को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही चलाने के प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त किया गया। निलंबित कर विभागीय कार्यवाही चलाने के प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त किया गया। निलंबित कर विभागीय कार्यवाही चलाने के प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त किया गया। उक्त आदेश के आलोक में श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा उक्त आदेश के आलोक में श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा उक्त आदेश के आलोक में श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा के कार्यपालक अभियंता, त्रिवेणी नहर निर्माण प्रमण्डल, नरकटियागंज (जल संसाधन विभाग के अधीन) के पद पर हर निर्माण प्रमण्डल, नरकटियागंज (जल संसाधन विभाग के अधीन) के पद पर हर निर्माण प्रमण्डल, नरकटियागंज (जल संसाधन विभाग के अधीन) के पद पर पदस्थापित रहने के कारण लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक 5282 दिनांक 20.09.14 द्वारा प्राप्त अनुशंसा एवं आदेश 14 द्वारा प्राप्त अनुशंसा एवं आदेश पदस्थापित रहने के कारण लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक 5282 दिनांक 20 बत किया गया तथा लघु के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1629 दिनांक 05.11.14 द्वारा श्री दिनकर को निलंबित किया गया तथा लघु के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1629 दिनांक 05 15 द्वारा श्री दिनकर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञापांक 175 दिनांक 09.01.15 द्वारा श्री दिनकर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञापांक 175 दिनांक 09 (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोपों को गठित करते हुए (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोपों को गठित करते हुए (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोपों को गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही चलायी गयीः- - वित्तीय वर्ष 2012-13 में नलकूप प्रमण्डल, छपरा में नाला/आउटलेट की मरम्मति/निर्माण आरोप सं0आरोप सं0आरोप सं0आरोप सं0-1-1-1-1- वित्तीय वर्ष 2012-13 में नलकूप प्रमण्डल, छपरा में नाला/आउटलेट की मरम्मति/निर्माण - वित्तीय वर्ष 2012-13 में नलकूप प्रमण्डल, छपरा में नाला/आउटलेट की मरम्मति/निर्माण कार्य हेतु अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा कतिपय प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी। उक्त प्राक्कलन कार्य हेतु अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा कतिपय प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी। उक्त प्राक्कलन कार्य हेतु अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा कतिपय प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी। उक्त प्राक्कलन के आधार पर श्री दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कार्य कराया गया। उक्त का र्यों की जाँच अधीक्षण के आधार पर श्री दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कार्य कराया गया। उक्त कार्यों की जाँच अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, पटना की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय जाँच दल द्वारा की गयी जिसमें निम्नलिखित अनियमितता अभियंता, नलकूप अंचल, पटना की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय जाँच दल द्वारा की गयी जिसमें निम्नलिखित अनियमितता अभियंता, नलकूप अंचल, पटना की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय जाँच दल द्वारा की गयी जिसमें निम्नलिखित अनियमितता परिलक्षित हुई हैः- (i) स्वीकृत प्राक्कलन में किसी भी योजना का कोई रेखाचित्र, अकार्यरत नालों का स्थान, नाले की तत्कालीन ) स्वीकृत प्राक्कलन में किसी भी योजना का कोई रेखाचित्र, अकार्यरत नालों का स्थान, नाले की तत्कालीन ) स्वीकृत प्राक्कलन में किसी भी योजना का कोई रेखाचित्र, अकार्यरत नालों का स्थान, नाले की तत्कालीन स्थिति का सेक्शन आदि की सूचना अंकित नहीं है। इसके अतिरिक्त एक मीटर नाले का औसत प्राक्कलन के आधार न आदि की सूचना अंकित नहीं है। इसके अतिरिक्त एक मीटर नाले का औसत प्राक्कलन के आधार न आदि की सूचना अंकित नहीं है। इसके अतिरिक्त एक मीटर नाले का औसत प्राक्कलन के आधार पर प्रावधानित कार्य का मूल्यांकन करते हुए प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी है, जो युक्तिसंगत नहीं है। फिर भी इस पर प्रावधानित कार्य का मूल्यांकन करते हुए प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी है, जो युक्तिसंगत नहीं है। फिर भी इस पर प्रावधानित कार्य का मूल्यांकन करते हुए प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी है, जो युक्तिसंगत नहीं है। फिर भी इस त्रुटिपूर्ण प्राक्कलन के आधार पर सहायक अभियंता के रूप में श्री दिनकर द्वारा कार्य सम्पादित कराया गया। त्रुटिपूर्ण प्राक्कलन के आधार पर सहायक अभियंता के रूप में श्री दिनकर द्वार ा कार्य सम्पादित कराया गया। 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 अ"तूबर 2016 (ii) नलकूप स्थल पकहा के लिए प्राक्कलन स्वीकृत नहीं है, फिर भी सहायक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा के रूप में श्री दिनकर द्वारा इस नलकूप का कार्य कराया गया तथा कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा द्वारा रू0 90778/- मात्र का एकरारनामा सम्पादित कर इस मद में रू0 90710/- का भुगतान संवेदक को किया गया जो वित्तीय अनियमितता का द्योतक है। (iii) एकरारनामा से संबंधित अभिलेखों के अवलोकन से ज्ञात हुआ कि नाला/आउटलेट मरम्मति हेतु कुल तीन एकरारनामा सम्पादित किया गया जिसका विवरण निम्नवत हैः- एकरारनामा संख्या नलकूप का नाम प्राक्कलित राशि भुगतान राशि 15/F2/12-13 तेनुआ 94311/- 78250/- 1/F2/12-13 तेजपुरवा, भटौरा, 4979530/- 4092087/- पंचभिंडा एवं नारायणपुर 2/F2/12-13 पकहा 90775/- 90710/- इनमें एकरारनामा सं0 1/F2/12-13 से संबंधित निविदा कार्यावंटन इत्यादि का अभिलेख जाँच दल को प्राप्त नहीं हो सका परन्तु अन्य एकरारनामा से संबंधित अभिलेख से स्पष्ट हुआ है कि निविदा सहायक अभियंता द्वारा आमंत्रित की गयी तथा तकनीकी निविदा खोलकर तकनीकी तुलनात्मक विवरणी कार्यपालक अभियंता को समर्पित की गयी। कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता द्वारा तकनीकी निविदा का निस्तार करने से संबंधित कोई अभिलेख/संदर्भ नहीं पाया गया। वित्तीय निविदा खोलने से संबंधित पदाधिकारी का हस्ताक्षर वित्तीय निविदा पर नहीं पाया गया। इस प्रकार मामले में निविदा निस्तार की स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। (iv) मापी पुस्तकें चेकिंग में यह पाया गया कि मापीपुस्त में वास्तविक मापी अंकित कार्य के बजाय स्वीकृत प्राक्कलन की प्रतिलिपि मात्र कर दी गयी है तथा मापीपुस्त में मापी के किसी अंश की जाँच सहायक अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा नहीं की गयी है। इससे स्पष्ट होता है कि संबंधित सहायक अभियंता द्वारा बगैर स्थल निरीक्षण किये हुए मापीपुस्त में प्रविष्टि कर राशि की बंदरबांट की गयी है। आरोप सं0-2आरोप सं0-2आरोप सं0-2आरोप सं0-2- जाँच दल द्वारा सभी छः नलकूपों का स्थल जाँच किया गया है जिसमें निम्नांकित अनियमितता पायी गयीः- (i) तेनुआ नलकूपः- इस नलकूप पर पूर्ण क्षतिग्रस्त नाला 74 मीटर, आंशिक क्षतिग्रस्त 23 मीटर तथा 3 अदद आउटलेट का कार्य कराया जाना प्रस्तावित था। स्थल निरीक्षण में नाले की उँचाई एक मीटर से अधिक पायी गयी जबकि प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में नाले की उँचाई 0.75 मीटर अंकित है। नाले में एक भी नया आउटलेट नहीं पाया गया तथा पुराने आउटलेट में स्पॉट चेम्बर नहीं पाया गया। नालों की कुछ लम्बाई में मात्र प्लास्टर एवं पनींग का कार्य पाया गया। उप मुखिया के द्वारा बताया गया कि वर्ष 2012-13 में इस नलकूप पर नाला मरम्मति का कार्य सम्पन्न नहीं कराया गया है। इस प्रकार उक्त नलकूप का कार्य प्राक्कलन के अनुरूप नहीं पाया गया। (ii) भटौरा नलकूपः- इस नलकूप पर पूर्ण क्षतिग्रस्त 100 मीटर तथा वास्ड आउट नाला 100 मीटर एवं 60 आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था। जाँच दल को निरीक्षण में सड़क पार की दिशा में 80 मीटर नाला विस्तारित पाया गया। इस नवनिर्मित नाले की उँचाई 0.5 मीटर पाया गया जबकि प्राक्कलित उँचाई 0.75 मीटर था। 600 मीटर नाले की लम्बाई पर मात्र प्लास्टर एवं पनींग का कार्य पाया गया। इस नाले की उँचाई 1 मीटर से अधिक पाया गया। प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में अंकित 60 अदद आउटलेट के जगह मात्र 38 आउटलेट पाये गये जो टूटे-फूटे अवस्था में थे। किसी भी आउटलेट में स्पॉट चेम्बर नहीं पाया गया। इसके अतिरिक्त 2012-13 में कोई मिट्टी का कार्य कराने का प्रमाण नहीं पाया गया। (iii) पंचभिंडा नलकूपः- इस नलकूप पर 500 मीटर पूर्ण क्षतिग्रस्त, 300 मीटर वास्ड आउट नाला एवं 48 अदद आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था जिसके विरूद्ध वर्तमान में नाले की कुल लम्बाई मात्र 300 मीटर पाया गया। जिसमें 26.5 मीटर नाला नवनिर्मित पाया गया। यह भी प्राक्कलन के अनुरूप नहीं था। उपस्थित ग्रामीणों द्वारा भी 26.5 मीटर कार्य कराये जाने की बात कही गयी है। इस नवनिर्मित नाले की आंतरिक चौड़ाई 0.40 मीटर पायी गयी जबकि प्राक्कलन एवं मापपुस्त में इसकी चौड़ाई 0.50 मीटर अंकित है। शेष नाले पर प्लास्टर एवं पनींग का कार्य मात्र पाया गया। प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में अंकित 48 अदद आउटलेट की जगह मात्र 16 आउटलेट पाये गये जो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। एक भी आउटलेट में स्पॉट चैम्बर नहीं पाया गया। इस प्रकार नलकूप पर कराये गये कार्य प्राक्कलन के अनुरूप थे। (iv) तेजपूरवा नलकूपः- इस नलकूप पर 300 मीटर एवं 500 मीटर लम्बाई में क्रमशः पूर्ण क्षतिग्रस्त एवं वास्ड आउट नाले तथा 32 अदद आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था। स्थल पर कुल नाले की लम्बाई मात्र 596 मीटर पायी गयी। नाले की स्थिति से यह स्पष्ट हुआ कि इनमें प्लास्टर एवं पनींग के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं कराया गया है। इस आशय की स्वीकारोक्ति नलकूप चालक द्वारा भी की गयी। इस नलकूप पर जीर्ण-शीर्ण हालत में कुल दो आउटलेट पाये गये। नाले की उँचाई प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में अंकित उँचाई से दो गुणा अधिक पाया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि मिट्टी का कार्य नहीं कराया गया। (v) नारायणपुर नलकूपः- इस नलकूप पर 500 मीटर एवं 900 मीटर लम्बाई में क्रमशः पूर्ण क्षतिग्रस्त एवं वास्ड आउट नाले तथा 56 अदद आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था। स्थल पर कुल नाले की लम्बाई मात्र 800 मीटर 3
(cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 अ"तूबर 2016
पाया गया। 38 मीटर नाले की उँचाई एक मीटर पायी गयी तथा इसकी आंतरिक चौड़ाई मात्र 0.35 मीटर पायी गयी। प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में इसकी चौड़ाई 0.5 मीटर है। इस नाले पर मरम्मति का कोई कार्य परिलक्षित नहीं हुआ। वास्ड आउट नाला यथास्थिति में पाया गया तथा इसपर भी कोई कार्य कराये जाने का संकेत नहीं मिला। शेष नाला पर मात्र प्लास्टर एवं पनींग का कार्य पाया गया। वर्तमान नाला पर मिट्टी का कार्य कराया जाना परिलक्षित नहीं हुआ। प्रावधानित कुल 56 आउटलेट में मात्र 10 आउटलेट पाया गया। (vi) पकहा नलकूपः- इस नलकूप का प्राक्कलन स्वीकृत नहीं होने के बावजूद कार्य का भुगतान किया गया। यहाँ 130 मीटर नाले की जाँच की गयी जिसमें प्लास्टर एवं पनींग के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं कराया गया। आरोप सं0-3आरोप सं0-3आरोप सं0-3आरोप सं0-3- उपरोक्त विर्णत स्थिति के बावजूद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा एकरारित राशि के विरूद्ध रू0 4261317/- (बयालीस लाख एकसठ हजार तीन सौ सत्तरह) मात्र का भुगतान कार्यों के प्राक्कलन, निविदा कार्यान्वयन, मापी एवं भुगतान में निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी की गयी है। सहायक अभियंता के रूप में इस अनियमित भुगतान हेतु श्री दिनकर भी उत्तरदायी हैं। आरोप सं0-4आरोप सं0-4आरोप सं0-4आरोप सं0-4- बिहार लोक निर्माण विभाग संहिता के नियम-49 के अनुसार सहायक अभियंता अपने अनुमण्डल के अन्तर्गत निर्माण के प्रबंध एवं निष्पादन के लिए जिम्मेवार हैंं। इस प्रकार उपरोक्त सभी कंडिकाओं में वर्णित अनियमितताओं के लिए सहायक अभियंता के रूप में श्री दिनकर समान रूप से उत्तरदायी हैंं। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-सचिव, जल संसाधन विभाग के पत्रांक 451 दिनांक 24.08.15 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में केवल आरोप सं0- 01 (iv) इस हद तक प्रमाणित होने कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रतिशत की जाँच नहीं की गयी है, जो उनके अतिरिक्त कार्य बोझ के कारण था, शेष कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त जाँच प्रतिवेदन लघु जल संसाधन विभाग को प्रतिवेदित किया गया जिसकी समीक्षा लघु जल संसाधन विभाग के स्तर पर किये जाने के फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए आरोप सं0- 01 (iv) के लिए पत्रांक 5628 दिनांक 29.09.15 द्वारा श्री दिनकर से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-18 (3) के तहत जाँच प्रतिवेदन के संदर्भ में अभ्यावेदन की माँग की गयी। श्री दिनकर के पत्रांक- शून्य दिनांक 16.10.15 द्वारा लघु जल संसाधन विभाग को अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर) समर्पित किये जाने के फलस्वरूप श्री दिनकर का संवर्ग जल संसाधन विभाग होने के कारण इनके विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचिका एवं अभिलेख लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक 6705 दिनांक 17.12.15 द्वारा जल संसाधन विभाग को उपलब्ध कराते हुए अग्रेतर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। उपर्युक्त मामले में श्री दिनकर के पत्रांक- शून्य दिनांक 16.10.15 द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर) में निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया हैैः- (i) आरोप सं0-1(i), 1(ii), 1(iii), 2, 3 एवं 4 को अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित नहीं पाया गया है। (ii) आरोप सं0-1(iv) को अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा इस हद तक प्रमाणित प्रतिवेदित किया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रतिशत की जाँच नहीं की गयी, जो उनके अतिरिक्त कार्य बोझ के कारण था। (iii) वे तीन-तीन पदों के प्रभार में थे। त्रिवेणीगंज नहर निर्माण प्रमण्डल, नरकटियागंज एवं त्रिवेणी नहर प्रमण्डल, रक्सौल के एक विस्तृत क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने तथा त्रिवेणी नहर का पुनस्र्थापन कार्य कराने की जिम्मेदारी उनके पास थी। कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा/अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर एवं मुख्य अभियंता, नलकूप प्रभाग, उत्तर से सहायक अभियंता के रूप में पूर्ववर्त्ती प्रभार से मुक्त करने हेतु बार-बार अनुरोध करने पर भी सहायक अभियंता के प्रभार से इन्हें मुक्त नहीं किया गया। इतने अधिक संख्या में अतिरिक्त प्रभार में रहने के कारण समयाभाव के चलते सहायक अभियंता के लिए निर्धारित प्रतिशत एवं मापीपुस्त में जाँच करना असम्भव था। श्री दिनकर द्वारा समर्पित उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में सम्पूर्ण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त निम्नांकित तथ्य पाये गयेः- श्री दिनकर के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में कुल चार आरोप गठित किये गये थे जिसमें संचालन पदाधिकारी ने आरोप सं0-1(iv) को छोड़कर अन्य सभी आरोपों को अप्रमाणित माना है। लघु जल संसाधन विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से किसी प्रकार की असहमति व्यक्त नहीं कर एकमात्र आरोप सं0-1(iv) के लिए श्री दिनकर से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। आरोप सं0-1(iv) सहायक अभियंता द्वारा योजना के निरीक्षण से संबंधित है जिसमें आरोप है कि श्री दिनकर द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार योजनाओं का निरीक्षण नहीं किया गया है। श्री दिनकर ने अपने अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर) में इस तथ्य को स्वीकार किया गया है कि अत्यधिक प्रभार के कारण वे योजनाओं का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निरीक्षण नहीं कर सके। संचालन पदाधिकारी ने भी इस आरोप के संबंध में टिप्पणी की गयी है कि कार्याधिक्य के कारण योजनाओं के निरीक्षण में कमी पायी गयी है। फिर भी श्री दिनकर को चाहिए था कि वे मापीपुस्त पर हस्ताक्षर करने के पूर्व योजनाओं का स्थल निरीक्षण करते, किन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया, जो उनकी लापरवाही को दर्शाता है। 4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 अ"तूबर 2016 फलस्वरूप उक्त पाये गये तथ्यों के आलोक में श्री दिनकर को निलम्बन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया हैः- 'एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।' दण्ड प्रस्ताव पर माननीय मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त निर्णय के आलोक में श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति (निलम्बित) कार्यपालक अभियंता को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय संसूचित किया जाता हैः- 'एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।' श्री दिनकर के निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (5) के तहत अलग से नोटिस निर्गत किया जायेगा।
श्री दिनकर को निदेशित किया जाता है कि वे सिंचाई भवन स्थिति मुख्यालय में अपना योगदान समर्पित करेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के उप-सचिव।
———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पपपपटना (cid:23)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 874-571+10-ड&0ट&0प ी0। Website: http://egazette.bih.nic.in