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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 17 October 2016

Published 17 October 2016

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-10-17.903
Languages
English, Hindi

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सं॰ 2/सी0-10139/2007-सा0प्र0-12715 सं॰ lkekU; lkekU; lkekU; lkekU; iz'kkluiz'kkluiz'kkluiz'kklu foHkkxfoHkkxfoHkkxfoHkkx ——— ladYiladYiladYiladYi 19 flrEcj 2016

श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सोनपुर सम्प्रति श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सोनपुर सम्प्रति श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सोनपुर सम्प्रति जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मधुबनी के विरूद्ध गठित प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मधुबनी के विरूद्ध गठित प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मधुबनी के विरूद्ध गठित प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा 2007 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' में त्रि-स्तरीय पंचायत निर्वाचन, 2006 के अवसर 2007 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' में त्रि-स्तरीय पंचायत निर्वाचन, 2006 के अवसर के पत्रांक 334 दिनांक 15.10.2007 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' में त्रि-स्तरीय पंचायत निर्वाचन, 2006 के अवसर पर सोनपुर प्रखंड अन्तर्गत ग्राम पंचायत-हासिलपुर के मुखिया पद के चुनाव से पराजित प्रत्याशी, श्रीमती रीता देवी के ाी, श्रीमती रीता देवी के पर सोनपुर प्रखंड अन्तर्गत ग्राम पंचायत-हासिलपुर के मुख्ि ाधिकारी की हैसियत से वैध मतपत्रों के बंडलों चुनाव अभिर्काा द्वारा दिये गये परिवाद पत्र के आलोक में निर्वाची पद चुनाव अभिर्काा द्वारा दिये गये परिवाद पत्र के आलोक में निर्वाची पदाधिकारी की हैसियत से वैध मतपत्रों के बंडलों की जाँच नहीं करने आदि का आरोप प्रतिवेदित है। की जाँच नहीं करने आदि का आरोप प्रतिवेदित है।

2008 द्वारा श्री हुसैन से गठित प्रपत्र 'क' के संदर्भ में स्पष्टीकरण विभागीय पत्रांक 13470 दिनांक 23.12.2008 द्वारा श्री हुसैन से गठित प्रपत्र 'क' के संदर्भ में स्पष्टीकरण 2. विभागीय पत्रांक 13470 दिनांक 23 की मांग किये जाने पर उनके द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 17.02.2009 समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 2278 दिनांक 2009 समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 2278 दिनांक की मांग किये जाने पर उनके द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 17 2009 द्वारा श्री हुसैन के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा से मंतव्य की मांग की गयी। जिला सारण, छपरा से मंतव्य की मांग की गयी। जिला 25.03.2009 द्वारा श्री हुसैन के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, 2011 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री हुसैन के विरूद्ध पदाधिकारी, सारण, छपरा के पत्रांक 1243 दिनांक 22 पदाधिकारी, सारण, छपरा के पत्रांक 1243 दिनांक 22.07.2011 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री हुसैन के विरूद्ध आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

3. प्रतिवेदित आरोप, श्री हुसैन के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, सार

प्रतिवेदित आरोप, श्री हुसैन के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा के मंतव्य पर सम्यक्‌ ण, छपरा के मंतव्य पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 17344 दिनांक 11 2013 द्वारा श्री हुसैन के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 17344 दिनांक 11.11.2013 द्वारा श्री हुसैन के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालित की गयी तथा आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालित की गयी तथा आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

4. आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, सारण प्रमंडल , छपरा द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन आयुक्त के सचिव, आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, सारण प्रमंडल, छपरा द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन आयुक्त के सचिव, सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक 2017 दिनांक 08 2015 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त जाँच प्रतिवेदन मे निष्कर्ष के रूप में सारण प्रमंडल, छपरा के पत्रांक 2017 दिनांक 08.09.2015 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त जाँच प्रतिवेदन मे निष्कर्ष के रूप में प्रतिवेदित किया गया है कि आरोप सं0-1 एवं 8 आरोप की श्रेणी में नहीं आते हैं। आरोप सं0-3 प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है कि आरोप सं0-1 एवं 8 आरोप की श्रेणी में नहीं आते हैं। आरोप सं0-3 प्रमाणित नहीं होता प्रतिवेदित किया गया है कि आरोप सं0-1 एवं 8 आरोप की श्रेणी में नहीं आते हैं। आरोप सं0-3 प्रमाणित है। शेष आरोप के संदर्भ में निष्कर्ष यह है कि पूरे प्रकरण में प्रत्यक्ष रूप से आरोपित पदाधिकारी की सीधी संलिप्तता है। शेष आरोप के संदर्भ में निष्कर्ष यह है कि पूरे प्रकरण में प्रत्यक्ष रूप से आरोपित पदाधिकारी की सीधी संलिप्तता है। शेष आरोप के संदर्भ में निष्कर्ष यह है कि पूरे प्रकरण में प्रत्यक्ष रूप से आरोपित पदाधिकारी की सीधी संलिप्तता परिलक्षित नहीं होती तथा वे सभी आरोप पूरी तरह प्रमाणित नहीं होता है। परिलक्षित नहीं होती तथा वे सभी आरोप पूरी तरह प्रमाणित नहीं होता है। 5. उपर्युक्त अंषतः प्रमाणित आरोपों के लिए श्री हुसैन से

उपर्युक्त अंषतः प्रमाणित आरोपों के लिए श्री हुसैन से विभागीय पत्रांक 3240 दिनांक 02

विभागीय पत्रांक 3240 दिनांक 02.03.2016 द्वारा अभ्यावेदन की मांग किये जाने पर उनके द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 27 2016 समर्पित किया गया। श्री हुसैन का अभ्यावेदन की मांग किये जाने पर उनके द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 27.06.2016 समर्पित किया गया। श्री हुसैन का अभ्यावेदन में कहना है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट है कि अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर ने अभ्यावेदन में कहना है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट है कि अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर ने अभ्यावेदन में कहना है कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट है कि अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर ने 2006 द्वारा जाँच प्रतिवेदन का प्रेषण किया था। जिसमें अंकित किया गया है कि 06.2006 द्वारा जाँच प्रतिवेदन का प्रेषण किया था। जिसमें अंकित किया गया है कि अपने पत्रांक 1363/गो0 दिनांक 19.062 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 17 अ(cid:24)तूबर 2016 उक्त पंचायत में दिनांक 15.06.2006 को मतगणना का कार्य समाप्त होने के पश्चात दिनांक 16.06.2006 को प्रखंड विकास पदाधिकारी, सोनपुर-सह-निर्वाची पदाधिकारी द्वारा निर्वाचन प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है। सच यह है कि निर्वाचन प्रमाण पत्र दिनांक 15.06.2006 को ही निर्गत किया गया था। जो निर्वाचन प्रमाण पत्र के अवलोकन से स्पष्ट होता है। अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर ने अपने पत्रांक 1363/गो0 दिनांक 19.06.2006 में यह भी स्पष्ट किया है कि आरोप पत्रों की जाँच हेतु उनके कार्यालय के पत्रांक 1355 दिनांक 17.06.2006 द्वारा पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई। इससे स्पष्ट है कि मतगणना की प्रक्रिया पूरी कर निर्वाचन प्रमाण पत्र निर्गत होने के बाद की तिथि में अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर द्वारा पुनः वैध मतों की संविक्षा/सत्यापन कराई गई। जो बिहार पंचायत राज्य अधिनियम, 2006 की धारा-137 में वर्णित प्रावधानों के प्रतिकुल है। क्योंकि निर्वाचन प्रमाण पत्र निर्गत कर दिये जाने के बाद किसी भी सक्षम प्राधिकार/सक्षम न्यायालय द्वारा मत पत्रों के पुनः संविक्षा/सत्यापन/मतगणना का कोई आदेष अनुमंडल पदाधिकारी को नहीं दिया गया था।

6. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं श्री हुसैन द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षा के उपरान्त निम्नांकित तथ्य पाया गया :-

(i) आरोप सं0-1, जो गुलाब हुसैन के प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित रहने एवं निर्वाची पदाधिकारी (पंचायत) नियुक्त किये जाने से संबंधित तथ्य है। अतः यह आरोप की श्रेणी में नहीं आता है।

(ii) गुलाब हुसैन के विरुद्ध मुख्य आरोप आरोप सं0-2 है, जिसमें इनके विरुद्ध हासिलपुर पंचायत के मुखिया पद के चुनाव में निकटतम पराजित प्रत्याशी के चुनाव अभिकर्त्ता के द्वारा दिये गये परिवाद पत्र के आलोक में निर्वाची पदाधिकारी की हैसियत से इनके द्वारा वैध मतपत्रों के बंडलों की जॉंच नहीं किये जाने से संबंधित है।

आरोप सं0-3 से 8, आरोप सं0-2 पर ही आधारित है। (iii) आरोप सं0-2 के संबंध में गुलाब हुसैन का कहना है कि हासिलपुर पंचायत के सभी पदों का परिणाम प्रपत्र-19 एवं 20 दिनांक 15.06.2006 को उन्हें प्राप्त हुआ एवं उनके द्वारा स्वयं सभी पदों के प्रपत्रों की जॉंच करते हुए मुखिया पद के मतों को प्रपत्र-'ख' में समेकित करते हुए दिन के लगभग 3.30 बजे परिणाम की घोषणा की गयी। आपत्ति दर्ज करने हेतु 15 मिनट का समय दिया गया। मुखिया पद की प्रत्याशी, श्रीमती रीता देवी के चुनाव अभिकर्त्ता, श्री अजय कुमार सिंह के द्वारा एक परिवाद पत्र दायर किया गया कि बूथ सं0-8, भाग सं0-1 के बिना स्वास्तिक चिन्ह वाले मतपत्रों की भी गिनती की जाय। चुनाव आयोग का स्पष्ट निदेश था कि बिना स्वास्तिक (पूर्ण या आंशिक) चिन्ह के मतपत्रों को वैध नहीं माना जायेगा। फलस्वरूप श्री अजय कुमार सिंह के परिवाद पत्र को अस्वीकृत कर दिया गया। पुनः श्री सिंह के द्वारा मौखिक मॉंग की गयी कि उनके प्रत्याशी के बहुत वैध मतों को अवैध घोषित कर दिया गया है, अतः सभी अवैध मतों की पुनर्गणना कर ली जाय। चूॅंकि हार-जीत का अन्तर मात्र 10 मत था, अतः इस मॉंग को स्वीकृत कर विजयी प्रत्याशी के चुनाव अभिकर्त्ता, श्री राम बाबू यादव एवं परिवादी, श्री अजय कुमार सिंह के समक्ष अवैध मतों की संवीक्षा एवं पुनर्गणना की गयी। अवैध मतों की पुनर्गणना में एक भी अवैध घोषित मतपत्र वैध नहीं पाया गया। पुनर्गणना के परिणाम से दोनों प्रत्याशियों के अभिकर्त्ताओं ने अपनी संतुष्टि जतायी एवं श्रीमती रामरती देवी को विजयी घोषित किया गया। इन सब बातों की सूचना उनके द्वारा चुनाव प्रेक्षक को दी गयी। दस मतों के अन्तर से हार-जीत का अन्तर देख चुनाव प्रेक्षक के द्वारा कुछ समय इन्तजार किया गया कि शायद कोई आपत्ति आये। लगभग एक घंटा इन्तजार करने के बाद चुनाव प्रेक्षक के द्वारा चुनाव परिणाम प्रपत्र-21 पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद उनके द्वारा विजयी प्रत्याशी को 7.00 बजे अपराह्‌न में प्रमाण पत्र दिया गया। परिणाम घोषित करने एवं प्रमाण पत्र दिये जाने के बीच किसी भी प्रत्याशी की तरफ से निर्वाची पदाधिकारी, चुनाव प्रेक्षक या अनुमंडल पदाधिकारी या अन्य किसी को आपत्ति पत्र नहीं दिया गया। निर्वाची पदाधिकारी की हैसियत से उनके द्वारा मतों को सील कर बक्से में रख दिया गया।

श्रीमती रीता देवी के पति श्री अजय कुमार सिंह का राज्य निर्वाचन आयोग को सम्बोधित पत्र के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर के द्वारा उनसे कनीय पदाधिकारियों की तीन सदस्यीय कमिटी का गठन कर दिया गया एवं मतों की पुनर्गणना हेतु मुखिया पद के सील मतपत्रों की मॉंग की गयी। उनके द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग के निदेशों का हवाला देते हुए तथा मतों की गणना एवं प्राप्त आपत्ति के आधार पर किये गये गणना, प्रेक्षक को दी गयी जानकारी एवं अन्य सभी तथ्यों से अवगत कराते हुए बताया गया कि नियमानुसार प्रमाण पत्र निर्गत होने के पश्चात्‌ सील मतपत्रों के पैकेट को न्यायालय के आदेश से ही खोला जा सकता है, लेकिन अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा अनसुनी कर दी गयी एवं उनके निदेश पर सील तोड़कर मतपत्रों की पुनर्गणना की गयी, मतपत्रों के पुनर्गणना का क्या परिणाम निकला, उन्हें नहीं बताया गया एवं अनुमंडल पदाधिकारी के आवास पर उनके दबाव में जॉंच दल के सदस्यों द्वारा जॉंच प्रतिवेदन तैयार किया गया। हासिलपुर पंचायत के मुखिया पद के मतगणना में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है, बल्कि3 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 17 अ(cid:24)तूबर 2016 अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर के द्वारा नियम विरुद्ध कार्य करते हुए उन्हें फॅंसाने की कोशिश की गयी।

श्री गुलाब हुसैन के स्पष्टीकरण के संदर्भ में जिला पदाधिकारी, सारण के द्वारा मंतव्य दिया गया है कि श्री अजय कुमार सिंह के परिवाद पत्र के आलोक में राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त निदेश के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर द्वारा जॉंच की गयी थी। जॉंच/पुनर्गणना की तिथि तक प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा मतपत्रों को सील नहीं किया गया था। बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली के नियम-84 एवं 85 के द्वारा जिला पदाधिकारी के अभिरक्षण में रखे हुए निर्वाचन संबंधी अभिलेखों का उपस्थापन एवं निर्वाचन अधिनियम में विहित निर्णय एवं प्राधिकारी के आदेश से करने का प्रावधान है। दिनांक 17.06.2006 को ही अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा मतपत्रों के जॉंचोपरान्त मतगणना प्रेक्षक के समक्ष निर्वाची पदाधिकारी को दिखला दिया गया था एवं उन्हें अलग बंडल में रखने का निदेश दिया गया था। उक्त तिथि तक न तो मतपत्रों को सील किया गया था, न जिला पदाधिकारी-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत), सारण के अभिरक्षा में रखने हेतु जिला स्तर पर गठित वज्रगृह में जमा किया गया था। सोनपुर प्रखंड के प्रधान सहायक एवं अन्य छः कर्मियों द्वारा लिखित बयान दिया गया कि मतों की पुनर्गणना सहायक निर्वाची पदाधिकारी/निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष की गयी थी। इस प्रकार के मतपत्रों की मतगणना पर्यवेक्षक की उपस्थिति में ही निर्वाची पदाधिकारी/सहायक निर्वाची पदाधिकारी को अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर द्वारा दिखला दिया गया था, जो सही बंडल में नहीं रखे गये थे।

(iv) श्री अजय कुमार सिंह के आपत्ति आवेदन दिनांक 15.06.2006 के अवलोकन से स्पष्ट है कि उनके द्वारा मोहर में स्वास्तिक चिन्ह के नहीं रहने के कारण मतपत्रों को वैध घोषित करने हेतु आवेदन दिया गया है। अतः राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त निदेशों के आलोक में गुलाब हुसैन के द्वारा स्वास्तिक चिन्ह के नहीं रहने के कारण मतपत्रों को वैध मतपत्रों के रूप में नहीं गिना जाना सही है।

(v) ग्राम पंचायत-हासिलपुर के मुखिया पद के लिए निर्वाचन परिणाम की विवरणी प्रपत्र-21 के अवलोकन से स्पष्ट है कि उक्त परिणाम पत्र पर दिनांक 15.06.2006 को ही प्रेक्षक के द्वारा प्रतिहस्ताक्षर किया गया है एवं दिनांक 15.06.2006 को ही प्रपत्र-22, निर्वाचन प्रमाण पत्र हस्ताक्षरित किया गया है।

(vi) राज्य निर्वाचन आयोग के पत्रांक 1905 दिनांक 22.06.2006, जो जिला पदाधिकारी, सारण के ज्ञापांक1785 दिनांक 23.06.2006 के द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी को संसूचित है, के द्वारा निर्गत आदेश के आलोक में ग्राम पंचायत-हासिलपुर के मतगणना में हुई अनियमितता के लिए चिन्हित मतगणना पर्यवेक्षक, सहायक के विरुद्ध आरोपों का गठन से संबंधित प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट है कि मतदान कर्मियों के द्वारा अवैध मतपत्रों को वैध मतपत्रों के रूप में गिनती की गयी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरोप पत्र प्रपत्र 'क' की कंडिका-5 में प्रतिवेदित राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा जारी मतगणना निदेश के अध्याय-11 के पैराग्राफ-17 के अनुसार निर्वाची पदाधिकारी द्वारा स्वयं या सहायक निर्वाची पदाधिकारी अथवा अन्य पदाधिकारी से वैध मतपत्रों के बंडलों की जॉंच नहीं की गयी है और न करायी गयी है।

यह सही है कि मतगणना का कार्य मतगणना टेबुल पर मतगणना कर्मियों के द्वारा किया जाता है, लेकिन अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा गठित जॉंच दल के द्वारा जॉंच किये जाने पर अवैध मतपत्रों को वैध मतपत्रों के बंडल में पाया जाना स्वतः इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि राज्य निर्वाचन आयोग के मतगणना निदेश के आलोक में निर्वाची पदाधिकारी के रूप में गुलाब हुसैन के द्वारा वैध मतपत्रों के बंडलों की जॉंच स्वयं अथवा सहायक निर्वाची पदाधिकारी के द्वारा नहीं करायी गयी है।

उक्त के आधार पर गुलाब हुसैन के विरुद्ध आरोप सं0-2 प्रमाणित होता है एवं उक्त के आधार पर आरोप सं0-2 पर आधारित आरोप सं0-4, 5, 6 एवं 7 भी स्वतः प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री हुसैन के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कोई नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है, बल्कि उनके द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखा गया था। अतएव श्री गुलाब हुसैन द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 27.06.2016 को अस्वी—त किया गया।

7. वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री हुसैन के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, जाँच प्रतिवेदन एवं अभ्यावेदन के सम्यक विचारोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''निन्दन एवं असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

8. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री गुलाब हुसैन (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 843/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सोनपुर सम्प्रति जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मधुबनी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक4 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 17 अ(cid:24)तूबर 2016 (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 14 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (वर्ष 2006-07), (ii) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिल कुमार, सरकार के विशेष सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 17 October 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-10-17.903/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-10-17.903.