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सं॰ 2/सी0-1083/2008-सा0प्र0-13030
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श्री मुस्ताफ हफीजुर रहमान (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 197/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बायसी, श्री मुस्ताफ हफीजुर रहमान (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 197/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बायसी, श्री मुस्ताफ हफीजुर रहमान (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 197/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बायसी, पूर्णियाँ सम्प्रति अपर समार्हाा, बाँका, भागलपुर के विरूद्ध वर्ष 2005-06 एवं 2006- 07 में वायसी अनुमंडल के जन पूर्णियाँ सम्प्रति अपर समार्हाा, बाँका, भागलपुर के विरूद्ध वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में वायसी अनुमंडल के जन वितरण प्रणाली बिक्रेताओं द्वारा की गई घोर अनियमितता पर अनुज्ञापन पदाधिकारी होने के नाते नियंत्रण एवं वितरण प्रणाली बिक्रेताओं द्वारा की गई घोर अनियमितता पर अनुज्ञापन पदाधिकारी होने के नाते नियंत्रण एवं वितरण प्रणाली बिक्रेताओं द्वारा की गई घोर अनियमितता पर अनुज्ञापन पदाधिकारी होने के नाते नियंत्रण एवं निगरानी नहीं रखे जाने संबंधी आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ के पत्रांक 1781 दिनांक 09.05.2008 द्वारा निगरानी नहीं रखे जाने संबंधी आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ के पत्रांक 1781 दिनांक 09 निगरानी नहीं रखे जाने संबंधी आरोप के लिए जिला पदाधिकारी, पूर्णियाँ के पत्रांक 1781 दिनांक 09 आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर प्रतिवेदित किया गया।
गठित कर प्रतिवेदित किया गया।
2. श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 9017 दिनांक 14 श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 9017 दिनांक 14.08.2008 द्वारा श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 9017 दिनांक 14 2011 द्वारा स्पष्टीकरण ा दिया गया। श्री रहमान के पत्रांक-1/गो0 दिनांक 17.02.2011 द्वारा स्पष्टीकरण स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया। श्री रहमान के पत्रांक-1/गो0 दिनांक 17 समर्पित किया गया।
3. श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप की गंभीरता को देखते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9645 ्रतिवेदित आरोप की गंभीरता को देखते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9645 श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप की गंभीरता को देखते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9645 दिनांक 26.08.2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन 2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन 2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन 2012 द्वारा जाँच प्रतिवेदन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आयुक्त कार्यालय, पूर्णियाँ के पत्रांक 852 दिनांक 21.03.2012 द्वारा जाँच प्रतिवेदन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आयुक्त कार्यालय, पूर्णियाँ के पत्रांक 852 दिनांक उपलब्ध कराया गया, जिसमें प्रतिवेदित है कि वर्ष 2005-06 की अवधि की जाँच नहीं की गयी है एवं वर्ष 2006-07 उपलब्ध कराया गया, जिसमें प्रतिवेदित है कि वर्ष 2005-06 की अवधि की जाँच नहीं की गयी है एवं वर्ष 2006-07 उपलब्ध कराया गया, जिसमें प्रतिवेदित है कि वर्ष 2005-06 की अवधि की जाँच नहीं की गयी है एवं वर्ष 2006-07 की अवधि की जाँच हेतु अधिकांष विक्रेताओं के जाँच की निर्धारित तिथि को उपस्थित नहीं होने पर यह अनुमान की अवधि की जाँच हेतु अधिकांष विक्रेताओं के जाँच की निर्धारित तिथि को उपस्थित नहीं होने पर यह अनुमान की अवधि की जाँच हेतु अधिकांष विक्रेताओं के जाँच की निर्धारित तिथि को उपस्थित नहीं होने पर यह अनुमान लगाया गया कि वायसी प्रखंड में बी0पी0एल0 खाद्यान्न एवं वितरण में काफी अनियमितता बरती गयी है। सम्यक ी प्रखंड में बी0पी0एल0 खाद्यान्न एवं वितरण में काफी अनियमितता बरती गयी है। सम्यक ी प्रखंड में बी0पी0एल0 खाद्यान्न एवं वितरण में काफी अनियमितता बरती गयी है। सम्यक जाँच के बिना आरोपी तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, वासयी श्री रहमान (बि0प्र0से0) को गठित आरोप के लिए जाँच के बिना आरोपी तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, वासयी श्री रहमान (बि0प्र0से0) को गठित आरोप के लिए जाँच के बिना आरोपी तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, वासयी श्री रहमान (बि0प्र0से0) को गठित आरोप के लिए जाँच के आधार पर इनके विरूद्ध दोषी मानना न्यायोचित नहीं होता है। उक्त स्थिति में साक्ष्य के अभाव एवं अपूर्ण जाँच के आधार पर इनके विरूद्ध दोषी मानना न्यायोचित नहीं होता है। उक्त स्थिति में साक्ष्य के अभाव एवं अपूर्ण गठित आरोप प्रमाणित नहीं होता है। 2 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 17 अ(cid:24)तूबर 2016 5. आयुक्त कार्यालय, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ के पत्रांक 192 दिनांक 15.01.2013 द्वारा पुर्नजाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया, जिसमें प्रतिवेदित किया गया कि-''उपस्थापन पदाधिकारी ने ऐसा कोई एक भी नया साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह प्रमाणित हो कि परिवाद-पत्र की सम्यक् जाँच की गयी हो एवं बिना परिवाद-पत्र की सम्यक जाँच किये आरोपी, श्री मुस्ताफ हफीजुर रहमान (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 197/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, वायसी, पूर्णियाँ को गठित आरोप के लिए दोषी मानना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है। आरोपी पदाधिकारी द्वारा दाखिल प्रतिउार संतोषप्रद एवं स्वीकार योग्य है। मेरे द्वारा पूर्व मेंं भेजे गये जाँच प्रतिवेदन में कोई परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं है।''
6. श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के समर्पित जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13924 दिनांक 26. 08.2013 द्वारा असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि रोकने का दंड संसूचित किया गया।
7. श्री रहमान के पत्रांक 01 दिनांक 24.09.2013 द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी दाखिल की गयी, जिसके सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5987 दिनांक 06.05.2014 द्वारा श्री रहमान के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वी—त किया गया।
8. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13924 दिनांक 26.08.2013 के विरूद्ध श्री रहमान द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में याचिका सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 7024/2014 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 23.01.2015 को पारित न्यायादेश निम्नवत् है :- "In the present case evidently the disciplinary authority has decided to disagree with the report of the enquiring officer, but he has not given cogent reasons for such disagreement. Furthermore, after deciding to disagree with the enquiry report, he has not recorded his own findings with respect to articles of charge framed against the petitioner on the basis of the evidence collected during the course of enquiry, yet he has decided to award punishment to the petitioner. The impugned resolution dated 26.08.2013 is contrary to the mandate of Rule 18(2) of the Rules, 2005 and, therefore , it cannot be sustained in law.
For the reasons recoreded above, the impugned resolution dated 26.08.2013 passed by the respondent Joint Secretary, is hereby set aside and quashed. However, this shall not preclude the respondent authorities from passing a fresh order in accordance with law order."
9. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के अनुपालन के क्रम में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6533 दिनांक 07.05.2015 द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13924 दिनांक 26.08.2013 को निरस्त किया गया। पुनः विभागीय पत्रांक 6534 दिनांक 07.05.2015 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के असहमति के बिन्दु पर अभ्यावेदन की मांग की गयी। श्री रहमान के पत्रांक-1/मु0 दिनांक 13.07.2015 द्वारा असहमति के बिन्दु पर अभ्यावेदन समर्पित किया गया। 10. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संलग्न दस्तावेजों, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन तथा असहमति के बिन्दु पर श्री रहमान से प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5572 दिनांक 20.04.2016 द्वारा ''एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में तीन निम्नतम प्रक्रम पर अवनति का दंड'' संसूचित किया गया।
11. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5572 दिनांक 20.04.2016 द्वारा संसूचित दंड के विरूद्ध श्री रहमान के पत्रांक 611 दिनांक 04.05.2016 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दाखिल किया गया। समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में मुख्य रूप से उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जिसका उल्लेख विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान तथा पूर्व में समर्पित अभ्यावेदन (पत्रांक-1/मु0 दिनांक 13.07.2015) में किया गया था।
12. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी के समीक्षोपरान्त पाया गया कि खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के माध्यम से प्राप्त परिवाद-पत्र की जाँच आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णिया के ज्ञापांक 3512 दिनांक 20.07.2007 द्वारा वरीय पदाधिकारियों के नेतृत्व में चार जाँच दलों का गठन किया गया था। जाँच दलों द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में पाया गया कि :-
(i) जनवितरण प्रणाली के बिक्रेताओं द्वारा आवंटन से कम खाद्यान्न का उठाव किया गया है तथा किसी-किसी बिक्रेताओं द्वारा खाद्यान्न से अधिक उठाव किया गया है, जो खाद्यान्न के उठाव एवं वितरण में अनियमितता को स्वतः प्रमाणित करता है।
(ii) श्री रहमान द्वारा मात्र दो दुकानों का निरीक्षण प्रतिवेदन समर्पित किये जाने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अनुज्ञापन पदाधिकारी होने के नाते जन वितरण प्रणाली दुकानों/राज्य खाद्य निगम के दुकानों का नियमित रूप से निरीक्षण किया गया है तथा जन वितरण प्रणाली पर कड़ी निगरानी रखी गयी है।
(iii) आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां के पत्रांक 4349 दिनांक 13.09.2007 द्वारा अंकित सारांश में भी स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि ''चुँकि 61 में 56 जन वितरण प्रणाली के विक्रेता3 ॢबह(cid:5)र गजट (cid:10)[स(cid:5)ध(cid:5)रण(cid:15)(cid:16) 17 अ(cid:24)तूबर 2016 जानबूझकर जाँच हेतु उपस्थित नहीं हुए। इससे यह निश्कर्ष निकाला जा सकता है कि इस प्रखंड के अन्तर्गत बी0पी0एल0 खाद्यान्न के उठाव एवं वितरण में इन बिक्रेताओं द्वारा व्यापक अनियमितता बरती गयी है।'' 61 जन वितरण प्रणाली बिक्रेताओं को जाँच हेतु निर्धारित तिथियों को उपस्थित होने हेतु सूचना उपलब्ध कराये जाने के बावजूद निर्धारित तिथि को जाँच में उपस्थित नहीं होने से आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां के कथन को बल मिलता है।
13. उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री रहमान के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संलग्न दस्तावेजों, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री रहमान से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वी—त करने का निर्णय लिया गया।
अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मुस्ताफ हफीजुर रहमान (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 197/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बायसी, पूर्णियाँ सम्प्रति अपर समार्हाा, बाँका, भागलपुर द्वारा समर्पित अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5572 दिनांक 20.04.2016 द्वारा अधिरोपित दंड ''एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में तीन निम्नतर प्रक्रम पर अवनति'' के दंड को पूर्ववत् बरकरार रखा जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अनिल कुमार, सरकार के विशेष सचिव।
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