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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 October 2016

Published 19 October 2016

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-10-19.42
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

ॢबह(cid:4)र गजट

ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 27 आि(cid:22)वन 1938 (श0) सं(cid:8)या 42 पटना, बुधवार, ———————— 19 अ#तूबर 2016 (ई0) (वषय-सूची पृ,ठ भाग-1—(cid:1)नयुि#त, पद1थापन, बदल(cid:15), शि#त, छु 5ी और अ7य 8यि#तगत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—1वयंसेवक गु=म? के समादे,टाओं के आदेश।

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भाग-1-ख—मैC(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Gाओं के पर(cid:15)Gा-फल, कायIJम, छाKवृिLत Mदान, आNद।

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भाग-1-ग—OशGा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Gाफल आNद ---

भाग-2—Pबहार-राRयपाल और कायाISयG? Tवारा (cid:1)नकाले गये (व(cid:1)नयम, आदेश, अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम आNद। ---

भाग-3—भारत सरकार, पि(cid:22)चम बंगाल सरकार और उWच 7यायालय के आदेश, अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राRय गजट? के उZरण। ---

भाग-4—Pबहार अUध(cid:1)नयम ---

पृ,ठ भाग-5—Pबहार (वधान मंडल म] पुर:1था(पत (वधेयक, उ#त (वधान मंडल म] उप1था(पत या उप1था(पत _कये जानेवाले Mवर सOम(cid:1)तय? के M(cid:1)तवेदन और उ#त (वधान मंडल म] पुर:1थापन के पूवI MकाOशत (वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अUध(cid:1)नयम िजनपर रा,Cप(cid:1)त क` Rये,ठ अनुम(cid:1)त Oमल चुक` है। ---

भाग-8—भारत क` संसद म] पुर:1था(पत (वधेयक, संसद म] उप1था(पत Mवर सOम(cid:1)तय? के M(cid:1)तवेदन और संसद म] उप1था(पत Mवर सOम(cid:1)तय? के M(cid:1)तवेदन और संसद म] पुर:1थापन के पूवI MकाOशत (वधेयक। ---

भाग-9—(वaापन

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भाग-9-क—वन (वभाग क` नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—(cid:1)न(वदा सूचनाएं, पbरवहन सूचनाएं, 7यायालय सूचनाएं और सवIसाधारण सूचनाएं इLयाNद। 3-3

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पूरक

पूरक-क 4-102 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016

भ(cid:2)ग(cid:4)1

०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचना

14 अक्तूबर 2016

सं॰ 6/प्रो0-6-07/2016(खंड-1)-3892/वा0कर—बिहार वित्त सेवा सम्वर्ग के वाणिज्य-कर पदाधिकारी (वेतनमान्‌ 15,600-39,100ग्रेड पे 5,400 रू0) कोटि से वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त (वेतनमान्‌ 15,600-39,100ग्रेड पे 6,600 रू0) कोटि में निम्नलिखित 03 पदाधिकारियों को भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति दी जाती है :-

क्रमांक पदाधिकारी का नाम बैच संख्या वरीयता क्रमांक 2014 आर्थिक लाभ सहित प्रोन्नति की तिथि
1 2 3 4 5
1 श्री राजेषपति त्रिपाठी 36वीं 86 01.04.13
2 श्री अरविन्द झा 36वीं 115 10.07.10
3 श्री राजेन्द्र सहनी (सेवानिवृत) प्रथम सीमित 140 03.12.13

2. क्रमांक 1 में अंकित पदाधिकारी को दिनांक 01.04.2013, क्रमांक-2 में अंकित पदाधिकारी को दिनांक 10.07.10 एवं क्रमांक-3 में अंकित पदाधिकारी को दिनांक 03.12.13 से आर्थिक लाभ सहित भूतलक्षी प्रभाव से प्रोन्नति देने पर वित्त विभाग, बिहार, पटना की सहमति प्राप्त है।

3. उपरोक्त प्रोन्नतियाँ सामान्य प्रषासन विभाग के परिपत्र संख्या-4800 दिनांक 01.04.16 की कंडिका-11(iv) में निहित शर्त्तो के अधीन तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन एस0एल0पी0 (सी0) संख्या- 29770/ 2015, बिहार सरकार बनाम सुषील कुमार सिंह एवं अन्य में पारित आदेष के फलाफल से प्रभावित होंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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परिवहन विभाग

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अधिसूचना

4 अक्तूबर 2016

सं 05/स्था0-146/2007-6008—प्रमंडलीय आयुक्त, सारण प्रमंडल छपरा से प्राप्त अनुषंसा के आलोक में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा-213(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री रतन कुमार, उपनिदेषक, कल्याण, सारण प्रमंडल, छपरा को संयुक्त आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार, सारण(छपरा) के कार्यों के निष्पादन हेतु अगले आदेष तक शक्ति प्रत्यायोजित करते हुए अपने कार्याें के अतिरिक्त संयुक्त आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार, सारण के कार्य सम्पादन हेतु प्राधिकृत किया जाता है।

आदेश से,

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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 31-571+50(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

3 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016

भाग-9(ख)

और सवIसाधारण सूचनाएं इLयाNद।

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सूचना ——

No. 1187— I, VANDANA KUMARI, W/o Amit Tiwari, Vill–Indrath Khurd, Post–Kastar Mahadeo, Dist. – Rohtas, Bihar – 802212, Have changed my name to Vandana Tiwari for all purposes.

VANDANA KUMARI.

—————

[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 31-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

4 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016

ॢबह(cid:4)र गजट

क(cid:4)

प३रक(cid:13)[(cid:15)(cid:16) (cid:17)(cid:4)०धक(cid:4)र(cid:20) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:17)क(cid:4)०शत

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सं॰ 2/आरोप-01-44/2014-सा0प्र0-13678 सामान्य प्रषासन विभाग ——— संकल्प 5 अक्तूबर5 अक्तूबर5 अक्तूबर5 अक्तूबर 2016201620162016

श्री गुलाब चन्द्र (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 364/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, फुलपरास, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध आयुक्त कार्यालय, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 729 दिनांक 08.10.2013 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया। आरोप-पत्र में वर्ष 2007 में घोघरडीहा अंचल में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच राहत वितरण में बरती गयी अनियमितता का सही ढं़ग से पर्यवेक्षण नहीं करने के कारण बाढ़ राहत से खाद्यान्न का गबन किये जाने का आरोप प्रतिवेदित है।

2. प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 9758 दिनांक 16.07.2014 द्वारा श्री चन्द्र से स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर उनके द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 02.08.2014 समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 12984 दिनांक 17.09.2014 द्वारा उक्त स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, मधुबनी से मंतव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 2584 दिनांक 21.10.2014 द्वारा प्राप्त मंतव्य में प्रतिवेदित किया गया कि आरोपित पदाधिकारी श्री गुलाब चन्द्र, द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण स्वीकारयोग्य नहीं है।

3. प्रतिवेदित आरोप, श्री चन्द्र के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी के मंतव्य पर सम्यक विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 17537 दिनांक 19.12.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

4. आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन आयुक्त कार्यालय, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 399 दिनांक 12.05.2015 द्वारा प्राप्त हुआ। जाँच प्रतिवेदन में श्री चन्द्र के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

5. विभागीय पत्रांक 7946 दिनांक 01.06.2015 द्वारा उपर्युक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री चन्द्र से अभ्यावेदन की मांग किये जाने पर उनके द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 25.06.2015 समर्पित किया गया। अभ्यावेदन में श्री चन्द्र द्वारा कहा गया है कि उनके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को संचालन पदाधिकारी द्वारा अनसुना कर दरकिनार कर दिया गया है एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी एवं अनुमंडल पदाधिकारी, फुलपरास के मन्तव्य को मान लिया गया। उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि वर्ष 2007 में घोघरडीहा में आई बाढ़ में राहत कार्यों में हुई गड़बड़ी की शिकायत माननीय विधायक द्वारा एक वर्ष बाद (12.07.2008) की गयी। उनके द्वारा इसकी जाँच दिनांक 16.07.2008 को की गयी। जबकि अनुमंडल पदाधिकारी, फुलपरास का प्रतिवेदन एक वर्ष बाद का है। उनसे स्पष्टीकरण न पूछ कर सीधे प्रपत्र 'क' गठित कर दिया गया जो नियम के विरूद्ध है। साथ ही उनका यह भी कहना है कि अनुमंडल पदाधिकारी, फुलपरास ने अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि उन्होंने राहत वितरण अवधि में निरन्तर घोघरडीहा में उपस्थित रह कर साहाय्‌य वितरण कार्य का पर्यवेक्षण एवं निरन्तर वितरण कार्य कराया। जबकि जिला पदाधिकारी के द्वारा कहा गया है कि उनके द्वारा न तो उपस्थित रहकर समुचित पर्यवेक्षण किया गया न ही साहाय्‌य वितरण की समस्त अवधि में उनके द्वारा साहाय्‌य वितरण में बरती जा रही अनियमितताओं पर किसी प्रकार की रोक लगाने हेतु ससमय कोई सुधारात्मक कार्रवाई की गयी न ही दोषी कर्मियों के विरूद्ध कार्रवाई करने हेतु अपने वरीय पदाधिकारी को कोई प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। इस प्रकार जिला पदाधिकारी के द्वारा उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण5 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016 को स्वीकार योग्य न कहना गलत है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा जिला पदाधिकारी के मन्तव्य को सम्पुष्ट कर दिया गया है, जो गलत एवं निराधार है। उनके द्वारा स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

6. श्री चन्द्र की सेवानिवृाि दिनांक 30.06.2015 को हो जाने के कारण विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13542 दिनांक 09.

09.2015 द्वारा इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।

7. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन एवं श्री चन्द्र द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त निम्नांकित तथ्य पाये गये :-

(i) अनुमंडल पदाधिकारी, फुलपरास के पत्रांक 786 दिनांक 25.08.2009, जो जिला पदाधिकारी, मधुबनी को सम्बोधित है, के अवलोकन से स्पष्ट है कि भूमि सुधार उप समार्हाा, फुलपरास द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में जिला पदाधिकारी द्वारा यह पाया गया कि अंचल अधिकारी, घोघरडीहा एवं श्री सुरेष प्रसाद, राजस्व कर्मचारी के आपसी तालमेल से सहाय्य सामग्री एवं राषि के वितरण में अनियमितता बरती गयी है तथा जिला प्रषासन एवं राज्य सरकार को गलत सूचना देकर गुमराह किया गया है। प्रासंगिक पत्र द्वारा अंचल अधिकारी, घोघरडीहा द्वारा बरती गयी अनियमितता के संबंध में समर्पित, फुलपरास के संबंध में यह प्रतिवेदित किया गया है कि उन्हें घोघरडीहा अंचल में वरीय प्रभारी पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था। यदि वे राहत वितरण अवधि में सही पर्यवेक्षण करते एवं अनियमितता/कुव्यवस्थ के प्रारम्भिक चरण में वे स्वयं कार्रवाई करते अथवा प्रतिवेदन समर्पित कर वरीय पदाधिकारी से कार्रवाई करवाते तो यह स्थिति नहीं बनती।

(ii) भूमि सुधार उप समार्हाा के पत्रांक 448 दिनांक 29.07.2008 के अवलोकन से स्पष्ट है कि अंचलाधिकारी, घोघरडीहा एवं राजस्व कर्मचारी के विरूद्ध द्वितीय चरण के सहाय्य राहत वितरण में दिनांक 12.07.2008 को जानकारी मिलते ही, उनके द्वारा दिनांक 12.07.2008 को ही त्वरित कार्रवाई की गयी एवं जाँच करते हुए विस्तृत जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें यह स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि श्री सुरेष प्रसाद, राजस्व कर्मचारी के बाजार समिति गोदाम में 1398.26 क्विंटल खाद्यान्न कम है। (iii) श्री गुलाब चन्द्र के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी के द्वारा मंतव्य दिया गया है कि भूमि सुधार उप समार्हाा के पत्रांक 448 दिनांक 21.07.2008 के द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि बाजार समिति, घोघरडीहा में बाढ़ प्रभावित के लिए सुरक्षित रखे गये खाद्यान्न के सत्यापन के दौरान 1398.26 क्विंटल खाद्यान्न कम पाया गया। गोदाम में खाद्यान्न कम पाया जाना इस बात को सम्पुष्ट करता है कि बाढ़ प्रभावित के बीच सही ढंग से खाद्यान्न का वितरण नहीं किया गया और इस कार्य के पर्यवेक्षण के लिए प्रतिनियुक्त पदाधिकारी, श्री गुलाब चन्द्र द्वारा पर्यवेक्षण एवं अपने दायित्व में बरती गयी लापरवाही को स्पष्ट रूप से परिलक्षित करता है।

(v) संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री गुलाब चन्द्र के विरूद्ध सहाय्य वितरण कार्य का पर्यवेक्षण सही ढ़ंग से नहीं करने, राहत वितरण में बरती गयी अनियमितता के संबंध में दोषी कर्मियों के विरूद्ध कार्रवाई हेतु वरीय पदाधिकारियों को ससमय सूचना नहीं देने का आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।

8. वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक्‌ विचारोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चन्द्र के अभ्यावेदन दिनांक 25.06.2015 को अस्वी—त करते हुए बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के संगत प्रावधानों के तहत श्री चन्द्र के विरूद्ध ''पेंषन से 10% (दस प्रतिषत) की कटौती पाँच वर्षों तक करने'' का दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया।

9. श्री चन्द्र के विरूद्ध विनिष्चत दंड पर विभागीय पत्रांक 5908 दिनांक 27.04.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 1688 दिनांक 16.09.2016 द्वारा श्री चन्द्र के विरूद्ध विनिष्चित दंड पर सहमति दी गयी है।

10. संचालन पदाधिकारी के द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोप के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री गुलाब चन्द्र (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 364/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, फुलपरास, मधुबनी सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के संगत प्रावधानों के तहत ''पेंषन से 10% (दस प्रतिषत) की कटौती पाँच वर्षों तक करने'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।6 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016 सं॰ 2/सी॰-3-3098/2005-सा0प्र0-13676 ——— संकल्प 5 अक्तूबर 20165 अक्तूबर 20165 अक्तूबर 20165 अक्तूबर 2016

श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 427/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी, जहानाबाद सम्प्रति उप विकास आयुक्त, खगड़िया के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1183 दिनांक 06.06.2005 द्वारा प्राप्त हुआ। श्री अंसारी के विरूद्ध गैर मजरूआ आम एवं गैर मजरूआ मालिक खाते की जमीन को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर, राजस्व नियमों की अनदेखी करते हुए लगान निर्धारण की स्वी—ति हेतु भूमि सुधार उप समार्हाा, जहानाबाद को अभिलेख तैयार कर अनुषंसा के साथ भेजे जाने का आरोप प्रतिवेदित है।

2. प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में श्री अंसारी से विभागीय पत्रांक 7015 दिनांक 18.07.2006 एवं 12722 दिनांक 14.12.2006 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर उनके द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 29.12.2006 समर्पित किया गया। 3. श्री अंसारी से प्राप्त स्पष्टीकरण तथा संलग्न किये गये साक्ष्यों के आलोक में जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से विभागीय पत्रांक 1682 दिनांक 14.02.2007 द्वारा मन्तव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के पत्रांक 329 दिनांक 16.03.2011 द्वारा प्राप्त मन्तव्य में प्रतिवेदित किया गया कि अंचलाधिकारी के द्वारा किया गया कार्य उनके क्षेत्राधिकार में उपलब्ध नियमों के अन्तर्गत जनकल्याण एवं धार्मिक भावनाओं का आदर करते हुए शुद्ध मंशा से किया गया। उक्त आलोक में श्री अंसारी पर लगाये गये आरोप प्रमाणित नहीं होते है।

4. प्रतिवेदित आरोप, श्री अंसारी के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से प्राप्त मंतव्य पर सम्यक विचारोपरान्त जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से प्राप्त मन्तव्य को अमान्य करते हुए श्री अंसारी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8169 दिनांक 17.06.2014 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, मगध प्रमण्डल, गया को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

5. संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 465 दिनांक 28.02.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन के उपरान्त जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित दोनों आरोपों के संदर्भ में निम्नांकित निष्कर्ष प्रतिवेदित किये गये हैं :-

''(i) आरोपित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण तथा समाहर्त्ता, जहानाबाद के द्वारा उपलब्ध मन्तव्य में आरोपित पदाधिकारी के दोष को प्रमाणित नहीं होना बतलाया गया है। उल्लेखनीय है कि सरकारी अधिवक्ता से स्पष्ट मन्तव्य भी प्राप्त किया गया था, तत्पश्चात्‌ ही अभिलेख स्वी—ति हेतु भूमि सुधार उप समाहर्त्ता को भेजा गया था। यह भी उल्लेख किया गया है कि चकबन्दी पदाधिकारी, धोषी द्वारा चकबन्दी अधिनियम की धारा-10(4) वाद सं0-133/1986-87 में लक्ष्मी नारायण मंदिर के संस्थापक रामानुजाचार्य के नाम से खाता खोलने का आदेश पारित है। उपरोक्त परिस्थिति में मैं पाता हूँ कि चकबन्दी में खाता खोलने, सरकारी अधिवक्ता के मन्तव्य तथा दखल कब्जा के आधार पर ही अंचल अधिकारी द्वारा लगान निर्धारण की अनुशंसा की गई थी। इसे बाद में आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया द्वारा स्थल निरीक्षण दिनांक 05.01. 1990 को किया गया है जैसा कि जिला पदाधिकारी ने अपने मन्तव्य में अंकित किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिलास्तर पर या एल0आर0डी0सी0 के स्तर पर प्रस्ताव की पूर्ण समीक्षा नहीं की गई थी। जब प्रस्ताव को अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष स्वी—ति हेतु उपस्थापित किया गया तो उन्होंने बन्दोवस्ती प्रस्ताव भेजने का निदेश दिया। इस प्रकार न तो डी0सी0एल0आर0 अथवा अनुमंडल पदाधिकारी न ही समाहर्त्ता द्वारा इसे अवैध घोषित किया गया है। इस प्रकार उपरोक्त तथ्यों के आलोक में अंचल अधिकारी पर सीधे आरोप प्रमाणित नहीं होता है। ऐसा ही समाहर्त्ता द्वारा भी अपने मन्तव्य में अंकित किया गया है। (ii) आरोप सं0-02 के संदर्भ में आरोपों पर आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण, समाहर्त्ता, जहानाबाद के मन्तव्य की समीक्षा की गई। जिसमें गैरमजरूआ मालिक भूमि के लगान निर्धारण का आरोप आरोपित पदाधिकारी पर लगाया गया है। उक्त भूमि पर मंदिर निर्माण, विद्यालय भवन निर्माण, छात्रावास निर्माण, जिसपर अनुसूचित जातियों, पिछड़ी जातियों जथा सामान्य जाति के पठन-पाठन का कार्य सम्पादित किये जा रहे है। उक्त भूमि पर सांसद, विधायक मद से निर्माण भी सामाजिक उपयोग के लिए किया गया है। समाहर्त्ता द्वारा अपने मन्तव्य में उल्लेख किया गया है कि अभिलेख प्रेषित करने के पूर्व सारी प्रक्रिया अपनाई गयी थी । साथ ही इसी मामले में प्रस्ताव गठित करने वाले राजस्व कर्मचारी पर लगाये गये आरोप को आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया द्वारा रद्‌द कर दिया गया। साथ ही जमाबंदी कायम नहीं किया गया तथा लगान रसीद भी निर्गत नहीं हुआ है। इस आरोप के संबंध में भी समाहर्त्ता, जहानाबाद के मन्तव्य से अधोहस्ताक्षरी सहमत है कि आरोपित पदाधिकारी श्री अब्दुल बहाव अंसारी, तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी के विरूद्ध लगाया गया आरोप प्रमाणित नहीं होता है।''

6. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के उपर्युक्त निष्कर्ष से असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर आरोपित पदाधिकारी से अभ्यावेदन मांगे जाने का अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा निर्णय लिया गया :-

(i) संचालन पदाधिकारी के द्वारा आरोप संख्या-1 के संदर्भ में विभागीय नियमों एवं निदेषों के आलोक में लगान निर्धारण हेतु प्रस्ताव भेजे जाने में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किये जाने के बिन्दु पर जाँच नहीं की गयी है, जबकि उनके विरूद्ध चार एकड़ गैर मजरूआ आम किस्म नदी का लगान निर्धारण का प्रस्ताव7 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016 भेजने का आरोप है। लगान निर्धारण हेतु प्रस्ताव भेजते समय राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 76LR दिनांक 06.01.1965 द्वारा गैर मजरूआ आम एवं अन्य भूमि पर हुए अतिक्रमण पर विषेष ध्यान रखे जाने का निदेष दिया गया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 4097 दिनांक 23.09.1953 की कंडिका-3(ii) एवं (iii) निम्नवत्‌ है :-

3(ii)- In Cases, in which the area settled is fairly big and the settlement effects adversely the right of the public in the matter of enjoyment of the Gairmazura Am lands, steps should be taken under the land for encroachment Act, for evicting the settees therefrom. 3(iii)- The settlements of small tanks and Jhils which were Gairmazrua Am lands should be set aside and the tanks and Jhils restored to public use.

लगान निर्धारण का प्रस्ताव भेजते समय उपरोक्त निदेष का अनुपालन श्री अंसारी द्वारा नहीं किया गया है। (ii) आरोप संख्या-2 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के द्वारा गैर मजरूआ मालिक भूमि पर मंदिर निर्माण, विद्यालय भवन निर्माण, छात्रावास निर्माण, जिसपर अनुसूचित जातियों, पिछड़ी जातियों तथा सामान्य जाति के पठन-पाठन का कार्य सम्पादित किये जाने तथा उक्त भूमि पर सामाजिक उपयोग के लिए सांसद/विधायक मद से निर्माण किये जाने तथा इस मामले में प्रस्ताव गठित करने वाले राजस्व कर्मचारी पर लगाये गये आरोप को आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया द्वारा रद्‌द कर दिये जाने के आधार पर उनके विरूद्ध आरोपों को प्रमाणित नहीं होना प्रतिवेदित किया गया।

आपके द्वारा संस्था के नाम से लगान निर्धारण का प्रस्ताव नही दिया गया था, बल्कि श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, हुलासगंज के संस्थापक रामानुजाचार्य के नाम से दिया गया गया। लगान निर्धारण के अभिलेख में कहीं यह अंकित नहीं किया गया है कि श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, हुलासगंज के किन कार्यों के आधार पर उसे सार्वजनिक उपयोग में माना गया।

(iii) लगान निर्धारण हेतु प्रस्तावित जमीन में चार एकड़ भूमि नदी की गैर मजरूआ आम भूमि थी, जिसकी प्रकृति बदल जाने के बावजूद भी किसी व्यक्ति अथवा संस्था के नाम से लगान निर्धारण किया जाना सार्वजनिक हित में नहीं है क्योंकि नदी से व्यापक जनहित जुड़ा हुआ है तथा नदी सिंचाई के साथ-साथ बाढ़/वर्षा के समय जन निकासी एवं कृषि के समय सिंचाई का मुख्य साधन भी है। यदि किसी के आवेदन के आधार पर उक्त भूमि का खाता श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, हुलासगंज के संस्थापक के नाम से खोल दिया गया था तो वैसी स्थिति में राजस्व पदाधिकारी होने के नाते उनके द्वारा उक्त तथ्यों को वरीय पदाधिकारियों के ध्यान में लाते हुए उक्त गैर मजरूआ आम भूमि की रक्षा हेतु विधि सम्मत कार्रवाई करनी चाहिए थी, जो नहीं की गयी।

7. उपर्युक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 10101 दिनांक 13.07.2015 द्वारा श्री अंसारी से अभ्यावेदन की मांग की गयी।

8. श्री अंसारी द्वारा असहमति के बिन्दुओं पर अभ्यावेदन दिनांक 01.08.2015 समर्पित किया गया। श्री अंसारी द्वारा उक्त अभ्यावेदन में असहमति के बिन्दु सं0-(i) के संदर्भ में कहा गया है कि लगान निर्धारण हेतु आवेदन प्राप्त होने पर अभिलेख खोलते हुए हल्का कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कर सर्वसाधारण की जानकारी हेतु आम सूचना निर्गत किया गया एवं तामिला कराया गया। किसी से कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होने, चकबन्दी पदाधिकारी द्वारा उपरोक्त भूमि का खाता खोलने, भूमि का फाईनल खतियान बन जाने, प्रस्तावित जमीन पर 40-50 वर्षों से शान्तिपूर्ण ढंग से कब्जा करने, ठाकुरबाड़ी/मन्दिर निर्मित रहने तथा आवासीय विद्यालय में निःशुल्क शिक्षण का कार्य होने के कारण प्रस्ताव समर्पित किया गया। इस प्रकार उनके द्वारा लगान निर्धारण हेतु सभी प्रक्रिया का पालन करते हुए अनुशंसा किया गया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का पत्रांक-E/X5-1038/53-4097 LR दिनांक 2.09.1953 की कंडिका-3(iv) में स्पष्ट है कि

'In cases in which schools, Devi Asthans and such other buildings of public use are found to have been built on garmazrua Am lands, no action should be taken for removal thereof.'

हल्का कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक के द्वारा प्रस्तावित भूमि पर मन्दिर, बगीचा, ईट का चहार दीवारी बने रहने, परिसर के अन्दर विद्या संस्थान के भवन, दातव्य आयुर्वेदिक औषधालय तथा सांसद/विधायक निधि से भवनों के निर्मित रहने तथा 40-50 वर्षों का कब्जा रहने का प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के उपरोक्त प्रासंगिक पत्र की कंडिका-2 में अंकित है कि :-

'Government have given the matter due considerations. They desire that in dealing with the encroachement two points should be borne in mind, ViZ, the duration of the encroachment and the actual character of the land at the time the encroachments had started. If an encroachment is found to have occurred long ago and at a time when the character of the land had changed from Garmazrua Am (i.e. it had ceased to be in public use) it is desirable to find some mode of adjustment by setting that land with the encroacher and if there is necessity of providing an equal area of land for public use getting form him another piece of land in place thereof. I am to say that the approach in such matters should not be the8 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016 technical approach of dealing with every encroachment as fit for removal, but rather it should be to examine the needs of the village as regards public land and to ensure that these are met, if necessary by removing the encroachment, but doing so in a matter as to cause the least amount of disturbance or unsettlement. Mala fide lesaes made by the outgoing landlords in recent years will not of course e deserving of this kind of consideration.'

वर्णित पत्र की कंडिका तथा स्थल निरीक्षण उपरान्त उन्होंने प्रासंगिक पत्र की कंडिका-2 एवं 3(iv) के आलोक में कार्रवाई करना उचित समझा क्योंकि कंडिका-3(ii) एवं (iii) के तहत्‌ कार्रवाई किये जाने पर मन्दिर को हटाने में विवाद एवं विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की प्रबल संभावना थी।

असहमति के बिन्दु सं0-(ii) के संदर्भ में श्री अंसारी द्वारा कहा गया है कि लगान निर्धारण का प्रस्ताव चकबन्दी पदाधिकारी के द्वारा अभिलेख वाद सं0-133/1986-87 एवं अन्य में पारित आदेश के आलोक में भेजा गया था। चकबन्दी पदाधिकारी ने अपने आदेश दिनांक 16.01.1987 में स्पष्ट उल्लेख किया है कि जमीन नदी का छाड़न है। इसी वजह से अनाबाद, सर्वसाधारण खाता है मगर जमीन की प्र—ति बदल चुकी है, जो सार्वजनिक उपयोग में नहीं है बल्कि आवेदक श्री रामानुजाचार्य, जो लक्ष्मी नारायण मंदिर, हुलासगंज के संरक्षक है, यहाँ सार्वजनिक कार्यों से संबंधित संस्—त विद्यालय चलाते हैं, जिसमें विद्यार्थी निःशुल्क आवास में रहकर विद्या ग्रहण करते हैं। लक्ष्मी नारायण मंदिर के माध्यम से अन्य सार्वजनिक कार्यों का भी सम्पादन होता है। इसके अलावे राजस्व कर्मचारी द्वारा लगान निर्धारण प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित स्थल पर लक्ष्मी नारायण मंदिर, फुलवारी, बगीचा, चहार दीवारी के अन्दर बना हुआ है। इस प्रकार स्पष्ट है कि स्थल पर निर्मित मंदिर, विद्यालय एवं औषधालय आदि सार्वजनिक उपयोग के ही भवन हैं, व्यक्तिगत उपयोग के नहीं। असहमति के बिन्दु सं0-(iii) के संदर्भ में श्री अंसारी द्वारा कहा गया है कि चकबन्दी पदाधिकारी, घोषी द्वारा लक्ष्मी नारायण मन्दिर के संस्थापक, रामानुजाचार्य के नाम से खाता खोलने का आदेश दिनांक 16.01.87 को पारित है। उक्त आदेश के विरूद्ध सक्षम न्यायालय में 30 दिनाें के अन्दर अपील दायर करने का प्रावधान है। पूर्व के पदाधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी। आदेश पारित होने के लगभग 10 वर्षों बाद अपील दायर करने हेतु विलम्ब का कोई उचित कारण नहीं था।

लगान निर्धारण का प्रस्ताव भेजते समय स्थल निरीक्षण में पाया गया कि नदी की धारा बदलने के कारण वर्षों पूर्व भूमि का स्वरूप बदल गया था, जिसपर ठाकुरबाड़ी, मन्दिर एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवन निर्मित पाये गये। यदि विशाल मंदिर एवं परिसर, अन्य निर्मित सार्वजनिक भवनों को हटाने का प्रयास किया जाता तो निश्चित रूप से विधि-व्यवस्था की गम्भीर समस्या उत्पन्न होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। उनके द्वारा लगान निर्धारण अनुशंसा किये जाने से सरकार को कोई क्षति नहीं हुई है क्योंकि पूर्व से बने इन भवनों की कोई जमाबन्दी कायम नहीं हुई है, बल्कि आय श्रोत बढ़ाने का कार्य किया गया है। श्री अंसारी के द्वारा उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में अभ्यावेदन को स्वीकार करते हुए आरोप से मुक्त करने हेतु अनुरोध किया गया है।

9. श्री अंसारी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर विभागीय पत्रांक 13899 दिनांक 14.09.2015 द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 930 दिनांक 01.09.2016 द्वारा प्राप्त मंतव्य में प्रतिवेदित किया गया कि गैर मजरूआ आम एवं खास जमीन की लगान निर्धारण नहीं होता है। गैर मजरूआ आम जमीन की बन्दोबस्ती की स्वी—ति वर्ष 2010 के पूर्व सरकार द्वारा दी जाती थी। गैर मजरूआ खास जमीन का भी लगान निर्धारण नहीं किया जाता है। सक्षम श्रेणी के परिवारों के साथ गैर मजरूआ खास जमीन की बन्दोबस्ती की शक्ति संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी को प्रदा है। जब भी किसी गैर मजरूआ खास जमीन की बन्दोबस्ती की स्वी—ति दी जाती है, तो वैसी जमीन का लगान भी साथ-साथ निर्धारित कर दिया जाता है।

प्रष्नगत मामले में श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी, जहानाबाद के द्वारा गैर मजरूआ आम किस्म नहीं स्वरूप जमीन का एवं गैर मजरूआ खास जमीन का लगान निर्धारण की अनुषंसा किया जाना प्रतिवेदित है, जो गलत है। अंचल अधिकारी के रूप में श्री अब्दुल बहाव अंसारी से अपेक्षा नहीं की जाती है कि उनके द्वारा गैर मजरूआ आम किस्म नदी एवं गैर मजरूआ खास जमीन का लगान निर्धारण का प्रस्ताव अपनी अनुषंसा के साथ वरीय पदाधिकारी को भेजें। उनका यह —त्य नियम के प्रतिकूल है।

10. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन, श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन एवं राजस्व एवं भुमि सुधार विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा के उपरान्त निम्नांकित तथ्य पाया गया :-

(i) लगान निर्धारण वाद सं0 5-98-99 एवं 6/98-99 में कहीं इस तथ्य का उल्लेख नहीं है कि प्रस्तावित भूमि पर निर्मित मंदिर, औषधालय एवं विद्यालय का सार्वजनिक उपयोग होता है तथा इससे संबंधित साक्ष्य का उल्लेख/संलगन नहीं किया गया है। अपने स्पष्टीकरण अथवा अभ्यावेदन में भी श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो कि उस प्रस्तावित भूमि पर निर्मित मंदिर एवं अन्य संस्थानों का सार्वजनिक उपयोग होता है।

(ii) श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा अपने अभ्यावेदन में भी स्वयं स्वीकार कि गया है कि प्रस्तावित भूमि का खाता लक्ष्मीनारायण मंदिर, हुलासगंज के संस्थापक के नाम से खोलने की अनुषंसा की गयी थी।9 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016 (iii) प्रस्तावित भूमि का रकबा बड़ा होने तथा नदी की गैर मजरूआ भूमि की प्र—ति बदल जाने के बावजूद भी किसी व्यक्ति अथवा संस्था के नाम से लगान निर्धारण किया जाना सार्वजनिक हित में नहीं है क्योंकि नदी से व्यापक जनहित जुड़ा हुआ रहता है।

(iv) लगान निर्धारण के प्रासंगिक वादो के अभिलेखों में श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा स्थलीय निरीक्षण किये जाने एवं निरीक्षण में पाये गये तथ्यों का कोई उल्लेख नहीं है।

(v) राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा प्रतिवेदित मंतव्य में अंकित किया गया है कि अंचल अधिकारी के रूप में श्री अंसारी द्वारा गैर मजरूआ आम किस्म नदी एवं गैर मजरूआ खास जमीन का लगान निर्धारण का प्रस्ताव अपनी अनुषंसा के साथ वरीय पदाधिकारी को भेजे जाने का —त्य नियम के प्रतिकूल है। 11. वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन, श्री अंसारी के अभ्यावेदन एवं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य के सम्यक्‌ विचारोपरान्त श्री अंसारी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संषोधित) के संगत प्रावधानों के तहत श्री अंसारी के विरूद्ध ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

12. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 427/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी, जहानाबाद सम्प्रति उप विकास आयुक्त, खगड़िया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संषोधित) के संगत प्रावधानों के तहत ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।

——— सं॰ 2/नि0था0-11-02/2016-सा0प्र0-13501 ——— संकल्प 3333 अक्तूबर 2016अक्तूबर 2016अक्तूबर 2016अक्तूबर 2016

पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 2174 दिनांक 21.09.2016 द्वारा श्री महर्षि राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 303/11, अपर समार्हाा, नवादा को चार लाख रूपये रिष्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर दिनांक 08.09.2016 को न्यायिक हिरासत में (आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेउर, पटना) भेजे जाने तथा उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या 087/2016 दिनांक 09.09.2016 दर्ज किये जाने की सूचना प्राप्त है।

2. श्री राम को रंगे हाथो घूस लेते दिनांक 08.09.2016 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत्‌ उन्हें गिरफ्तार किये जाने की तिथि दिनांक 08.09.2016 के प्रभाव से अगले आदेष तक के लिए निलंबित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में श्री राम को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10 के तहत्‌ अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।

——— सं॰ 2/सी0- 10125/2009 -सा0प्र0- 13028 ——— संकल्प 23 सितम्बर 201623 सितम्बर 201623 सितम्बर 201623 सितम्बर 2016

मो0 मोबिन अली अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 459/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, चौथम, खगड़िया सम्प्रति उप विकास आयुक्त, बक्सर के विरूद्ध अपने कार्यकाल में बुनियादी इंदिरा आवास योजना के तहत इंदिरा आवास योजना की मार्गदर्षिका उल्लंघन कर इंदिरा आवास आवंटित करने, सरकारी राषि का दुरूपयोग करने व विाीय अनियमितता से संबंधित आरोप के लिए ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 12100 दिनांक 23.12.2009 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।

2. आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 2706 दिनांक 25.03.2010 द्वारा मो0 अंसारी को स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेष दिया गया। मो0 अंसारी के पत्रांक-शून्य दिनांक 16.04.2010 द्वारा स्पष्टीेकरण समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 2435 दिनांक 01.03.2011 द्वारा ग्रामीण विकास विभाग से श्री अंसारी के स्पष्टीकरण पर मन्तव्य उपलब्ध कराने का10 Pबहार गजट, 19 अ#तूबर 2016 अनुरोध किया गया। ग्रामीण विकास विभाग को कतिपय स्मार दिये जाने के बावजूद भी मन्तव्य अप्राप्त रहने की स्थिति में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मो0 अंसारी के विरूद्ध इंदिरा आवास की मार्गदर्शिका का उल्लंघन करने के आरोप को प्रथम दृष्टया सही पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2848 दिनांक 28.02.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1060 दिनांक 26.04.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन अभिलेख सहित उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में निम्नलिखित निष्कर्ष अंकित किया गया है :-

''आरोपी पदाधिकारी मो0 मोबिन अली अंसारी, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, चौथम द्वारा श्री पंडित को जो कि इंदिरा आवास प्राप्ति हेतु सुयोग्य श्रेणी में नहीं आने के बावजूद भी आवास आवंटित किया गया जो मार्गदर्शका का उल्लंघन है। परन्तु इनके द्वारा पता चलने पर अपने भूल का एहसास करते हुए उक्त आवास आवंटन को रद्‌द करते हुए सन्निहित राशि की वसूली कर ली गयी है, इसलिए सरकारी राजस्व की हानि होना प्रतीत नहीं होता है।

आरोपी पदाधिकारी मो0 मोबिन अली अंसारी, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, चौथम द्वारा उप विकास आयुक्त के पत्रांक 1052 दिनांक 02.08.2006 के द्वारा सूचित करने के बाद आवंटन को रद्‌द करते हुए राशि की वसूली कर नजारत में जमा किया गया है।''

4. विभागीय पत्रांक 8869 दिनांक 22.06.2016 द्वारा मो0 अंसारी को अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। मो0 अंसारी के पत्रांक 909 दिनांक 25.07.2016 द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में कहा गया है कि स्थानीय पंचायत सचिव के जाँच के बाद ही श्री पंडित को आवास स्वी—ति हेतु भेजा गया था। श्री पंडित को कच्चा मकान था, मकानमय सहन के रूप में उनके हिस्से में एक एकड़ साठ डी0 जमीन पड़ती थी इस वजह से उन्हें आवास उपलब्ध कराया गया था। बाद में ज्ञात होने पर कि श्री पंडित इसकी पात्रता नहीं रखते हैं, स्वी—त आवास को रद्द कर दिया गया एवं अग्रिम के रूप में दी गयी सम्पूर्ण राशि 20,000/-(बीस हजार) रूपया की वसूली कर N.R संख्या 554391 दिनांक 09.08.2006 द्वारा प्रखंड नजारत में जमा करा दिया गया। इस आशय की सम्पुष्टि उप विकास आयुक्त, खगड़िया के पत्रांक 73 दिनांक 11.01.2007 द्वारा भी होती है। आगे उनका कहना है कि इनके द्वारा स्वयं अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्तिगत पहल कर श्री पंडित से राशि जमा कराया गया। 5. अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा मो0 अंसारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि मो0 अंसारी के विरूद्ध मात्र एक व्यक्ति (श्री चन्द्र किषोर पंडित) को मार्गदर्षिका के विरूद्ध बुनियादी इंदिरा आवास आवंटन का आरोप है। मो0 अंसारी द्वारा स्पष्ट किया गया है कि पंचायत सचिव के जाँच के बाद श्री पंडित को आवास आवंटित किया गया था। बाद में ज्ञात होने पर कि श्री पंडित इसकी पात्रता नहीं रखते हैं उनके स्वी—त आवास को रद्‌द कर दिया गया एवं उन्हें अग्रिम के रूप में भुगतान की गयी सम्पूर्ण राषि 20,000/-(बीस हजार) रूपये की वसूली कर नाजिर रसीद सं0 554391 दिनांक 09. 08.2006 द्वारा प्रखंड नजारत में जमा करा दिया गया। प्रासंगिक मामले में सरकारी राजस्व की क्षति नहीं हुई है। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में भी इसी आषय की सम्पुष्टि की गयी है। अतः मो0 अंसारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप का प्रषासनिक चूक माना जा सकता है। अतः मो0 अंसारी के विरूद्ध उक्त प्रषासनिक चूक के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत ''निन्दन'' का दंड संसूचित करने का निर्णय लिया गया।

6. अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मोबिन अली अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 459/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, चौथम, खगड़िया सम्प्रति उप विकास आयुक्त, बक्सर को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 प्रावधानों के तहत ''निन्दन'' (आरोप वर्ष 1996-97) का दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ संचालन पदाधिकारी, आयुक्त मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर/जिला पदाधिकारी, खगड़िया/मो0 मोबिन अली अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 459/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, चौथम, खगड़िया सम्प्रति उप विकास आयुक्त, बक्सर को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्रवाई हेतु भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।

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Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 October 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-10-19.42/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-10-19.42.