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सं॰ BRRDA (HQ)-GTSNY.-28/2016-3885 सं॰ ग्रामीण कार्य विभाग ——— संकल्प 2 सितम्बर 2016
विषयः- ''ग्रामीण टोला सम्पर्क निष्चय योजना'' अंतर्गत विाीय वर्ष 2016-17 से 100 या अधिक ''ग्रामीण टोला सम्पर्क निष्चय योजना'' अंतर्गत विाीय वर्ष 2016-17 से 100 या अधिक आबादी वाले सर्वेक्षित अनजुड़े टोलों/बसावटों को बारहमासी एकल सम्पर्कता प्रदान आबादी वाले सर्वेक्षित अनजुड़े टोलों/बसावटों को बारहमासी एकल सम्पर्कता प्रदान आबादी वाले सर्वेक्षित अनजुड़े टोलों/बसावटों को बारहमासी एकल सम्पर्कता प्रदान करने के लिए सभी जिलों में पथों का निर्माण के संबंध में। करने के लिए सभी जिलों में पथों का निर्माण
1.3 ऐसा पाया गया है कि पूर्व में तैयार किए गए दोनों प
1.1 राज्य के ग्रामीण बसावटों को एकल बारहमासी सम्पर्कता प्रदान करने के लिए राज्य में दो 1 राज्य के ग्रामीण बसावटों को एकल बारहमासी सम्पर्कता प्रदान करने के लिए राज्य में दो 1 राज्य के ग्रामीण बसावटों को एकल बारहमासी सम्पर्कता प्रदान करने के लिए राज्य में दो मुख्य योजनाएँ लागू हैं। प्रथम योजना प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना है, जो पूर्व में ोजना है, जो पूर्व में मुख्य योजनाएँ लागू हैं। प्रथम योजना प्रधानमंत्री ग्राम सड़क य ात् और वर्ष 2015-16 से 60ः40 के अनुपात में केन्द्र प्रायोजित है। इसके तहत शत-प्रतिशत् और वर्ष 2015-16 से 60ः40 के अनुपात में केन्द्र प्रायोजित है शत-प्रतिश् राज्य के 11 IAPजिले, यथा गया, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, राज्य के पश्चिम चम्पारण, जमुई, मुंगेर, नवादा तथा सीतामढ़ी में 250 या उससे अधिक आबादी चम चम्पारण, जमुई, मुंगेर, नवादा तथा सीतामढ़ी में 250 या उससे अधिक आबादी चम चम्पारण, जमुई, मुंगेर, नवादा तथा सीतामढ़ी में 250 या उससे अधिक आबादी वाले बसावटों को तथा शेष 27 गैर IAPजिलों में 500 या उससे अधिक आबादी वाले जिलों में 500 या उससे अधिक आबादी वाले वाले बसावटों को तथा शेष 27 गैर IAP जिलों के बीच बसावटों को एकल सम्पर्कता प्रदान की जाती है। IAPतथा गैर IAP बसावटों को इस विषमता को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी निधि से 27 गैर इस विषमता को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी निधि से 27 गैर इस विषमता को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी निधि से 27 गैर IAPजिलों में मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना लागू की है, जिसके तहत 250-499 तक जिलों में मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना लागू की है, जिसके तहत 250-499 तक जिलों में मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना लागू की है, जिसके तहत 250-499 तक की आबादी वाले बसावटों को एकल सम्पर्कता प्रदान की जाती की आबादी वाले बसावटों को एकल सम्पर्कता प्रदान की जाती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन करने के लिए राष्ट्रीय बसावट सर्वेक्षण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन करने के लिए राष्ट्रीय बसावट सर्वेक्षण 1.2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन करने के लिए राष्ट्रीय बसावट सर्वेक्षण 2003के आधार पर वर्ष 2012 में कोर-नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसमें कुल के आधार पर वर्ष 2012 में कोर-नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसमें कुल के आधार पर वर्ष 2012 में कोर-नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसमें कुल बसावटाें की संख्या 1,03,591 है। पुनः वर्ष 2012-13 के पूर्व लागू मुख्यमंत्री ग्राम सड़क बसावटाें की संख्या 1,03,591 है। पुनः वर्ष 2012-13 के पूर्व लागू मुख्यमंत्री ग्राम सड़क बसावटाें की संख्या 1,03,591 है। पुनः वर्ष 2012-13 के पूर्व लागू मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा वष र् 2013-14 से लागू मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना एवं राज्य निधि से योजना तथा वर्ष 2013-14 से लागू मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना एवं राज्य निधि से लागू की गई अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2012 में राज्य कोर-नेटवर्क लागू की गई अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2012 में राज्य कोर-नेटवर्क लागू की गई अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2012 में राज्य कोर-नेटवर्क तैयार किया गया, जिसमें कुल बसावटों की संख्या 1,08,591 है। तैयार किया गया, जिसमें कुल बसावटों की संख्या 1,08,591 है। ऐसा पाया गया है कि पूर्व में तैयार किए गए दोनों प्रकार के नेटवर्क में बड़ी संख्या में ्रकार के नेटवर्क में बड़ी संख्या में योग्य बसावट तथा टो ा टोले/बसावट आर्थिक एवं योग्य बसावट तथा टोले छूट गए हैं। इनमें से अधिकांश टोले/बसावट आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से पिछड़े वर्गों एवं अनुसूचित जातियों की बहुलता वाले हैं। सामाजिक दृष्टिकोण से पिछड़े वर्गों एवं अनुसूचित जातियों की बहुलता वाले हैं। सामाजिक दृष्टिकोण से पिछड़े वर्गों एवं अनुसूचित जातियों की बहुलता वाले हैं।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 27 अ(cid:16)तूबर 2016 1.4 उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया कि वैसे सभी कोर-नेटवर्क में अचिह्नित तथा अनजुड़े टोलें/बसावटों को उपग्रह मानचित्र के आधार पर चिह्नित कर तथा उनका स्थल सर्वेक्षण/सत्यापन कर पूरक राज्य कोर-नेटवर्क तैयार किया जाए तथा एक नई योजना का सृजन कर इन अचिह्नित अनजुड़े बसावटों को एकल बारहमासी सम्पर्कता प्रदान की जाए।
1.5 तद्नुसार ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के सहयोग से उपग्रह मानचित्रों के विश्लेषण तथा स्थानीय सूचनाओं के आधार पर 33461 बसावटों की पहचान की गयी जो वर्त्तमान या प्रस्तावित सम्पर्कता के दृष्टिकोण से अनजुड़े प्रतीत होते हैं। तत्पश्चात् इन बसावटों का भौतिक सत्यापन तथा सर्वेक्षण विभागीय अभियंताओं के द्वारा किया गया तथा प्रत्येक बसावट के संबंध में वर्त्तमान तथा प्रस्तावित सम्पर्कता, जनसंख्या, सम्पर्कता के लिए आवश्यक पथ की लम्बाई तथा उपलब्ध सरकारी एवं रैयती भूमि के संबंध में वास्तविक सूचनाएँ संकलित की गयी। सर्वेक्षण से संबंधित तथ्य/सूचनाएँ परिषिष्ट-1 में अंकित हैं। सर्वेक्षण में सम्मिलित बसावटों, वर्त्तमान में सम्पर्कता प्राप्त बसावटों, भविष्य में प्रस्तावित सम्पर्कता प्राप्त करने वाले बसावटों तथा सर्वेक्षित अनजुड़े बसावटों की संख्या परिषिष्ट-1, खण्ड-I पर संलग्न है। परिषिष्ट-1, खण्ड-II में इन सूचनाओं को जिलावार एवं प्रखंडवार प्रदर्शित किया गया है। परिषिष्ट-1, खण्ड-IIIमें सभी सर्वेक्षित अनजुड़े बसावटों को जनसंख्या के आधार पर प्रदर्शित करते हुए इन बसावटों को एकल बारहमासी सम्पर्कता प्रदान करने के लिए आवश्यक पथ की लम्बाई अंकित की गयी है। परिषिष्ट-1, खण्ड-IVमें 100 से अधिक आबादी वाले बसावटों को संकलित कर प्रदर्शित किया गया है। परिषिष्ट-1, खण्ड-V में 100 से अधिक आबादी वाले बसावटों के संबंध में सम्पर्कता प्रदान करने के लिए आवश्यक पथ की लम्बाई, उसके आदि एवं अंतिम बिन्दु, पथ में पड़ने वाले Cross Drainage संरचनाओं की संख्या, पथारेखन में आने वाली सरकारी एवं रैयती भूमि तथा आवश्यकतानुसार रैयती भूमि की कोटि एवं न्यूनतम निबंधित मूल्य से संबंधित सूचनाएँ प्रदर्शित की गयी हैं।
1.6 100 से कम आबादी वाले अनजुड़े बसावटों के सर्वेक्षण परिणाम पंचायती राज विभाग को हस्तगत करा दिये जायेंगे ताकि सरकार के सात निश्चयों के अन्तर्गत पंचायतों द्वारा पंचायत की आंतरिक गली निर्माण योजना के तहत् इन बसावटों को नियमानुसार सम्पर्कता प्रदान की जा सके।
1.7 सर्वेक्षण के पश्चात् पाया गया कि 1960 बसावटों को सम्पर्कता प्रदान करने के लिए 2 कि0मी0 से अधिक लंबाई में पथ का निर्माण करना पड़ेगा। इस लंबाई के पथ के लिए कोर-नेटवर्क के पथों के लिए अनुमान्य मानक ही उपयुक्त होंगे। तद्नुसार इन बसावटों का पुनः भौतिक सत्यापन कर जनसंख्या की अर्हत्ता के अनुसार अन्य विभागीय योजनाओं के तहत इन्हें सम्पर्कता प्रदान की जायेगी।
2. परिषिष्ट-1, खण्ड-V पर अंकित सर्वेक्षित अनजुड़े बसावटों, जिनकी आबादी 100 से अधिक है, को बारहमासी एकल सम्पर्कता प्रदान करने के उद्द्ेष्य से ग्रामीण टोला सम्पर्क निष्चय योजना प्रारम्भ की जायेगी, जिसके लिए परिषिष्ट-1, खण्ड-V के स्तम्भ 7, 8 एवं 9 में वर्णित पथ पूरक राज्य कोर-नेटवर्क, 2016 माने जायेंगे।
2.1 इस योजना के तहत वर्ष 2016-17 से वर्ष 2019-20 तक निर्मित्त किये जाने वाले पथों की कुल अनुमानित लम्बाई 12500.40 कि0मी0 है। पथ के निर्माण में भू-अर्जन या लीज के आधार पर प्रयुक्तकी जाने वाली रैयती भूमि का कुल अनुमानित क्षेत्रफल 2222.35 एकड़ है।
2.2 इस योजना का क्रियान्वयन पूर्ण रूपेण उक्त पूरक राज्य कोर-नेटवर्क पर आधारित होगा तथा प्रत्येक विाीय वर्ष में योजनाओं की प्राथमिकताओं का निर्धारण स्थानीय विधान सभा सदस्यों के परामर्श से किया जाएगा।
2.3 सम्पर्कता की आकस्मिक/गंभीर समस्या के आलोक में विभाग प्राथमिकता सूची में परिवर्तन करने में सक्षम होगा।
2.4 इस योजना के लिए प्रत्येक प्रखंड के बीच उपलब्ध राशि का कर्णांकण पूरक राज्य कोर-नेटवर्क में उक्त प्रखंड में निर्माण के लिए प्रस्तावित पथों की लंबाई के अनुपात में किया जाएगा।
2.5 इस योजना का कार्यान्वयन राज्य की अपनी निधि या अन्य स्रोतों से प्राप्त निधि से कराया जाएगा।3 (cid:29)बहार गजट (असाधारण), 27 अ(cid:16)तूबर 2016 2.6 इस योजना के तहत वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में बजट उपबंध के 2.0 गुणी राशि तक की योजनाएँ प्रारम्भ की जाएंगी। अगले विाीय वर्षों में बजट सीमा के अन्तर्गत योजना को सीमित रखा जाएगा।
2.7 योजना का क्रियान्वयन पूर्व से गठित बिहार ग्रामीण पथ विकास अभिकरण (BRRDA) तथा उसके अधीन कार्यरत कार्य प्रमंडल, अर्थात् परियोजना क्रियान्वयन ईकाई (PIU), के माध्यम से किया जाएगा। ग्रामीण कार्य विभाग बजटीय राषि को बिहार ग्रामीण पथ विकास अभिकरण (BRRDA) को उपलब्ध कराएगा।
2.8 इस योजना में पथों के निर्माण के साथ पंचवर्षीय अनुरक्षण का भी प्रावधान रहेगा। साथ ही आवश्यकतानुसार भू-अर्जन/सतत् लीज का प्रावधान भी रहेगा।
2.9 इस योजना के क्रियान्वयन के लिए योजना की अवधारणा, पूरक राज्य कोर-नेटवर्क की अवधारणा, दिशानिर्देश, पंचवर्षीय अनुरक्षण प्रावधान, गुणवत्ता नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण प्रावधान, कार्यक्रम तकनीकी मार्गदर्शिका तथा सूचना पट्ट परिषिष्ट-2 की मार्गदर्शिका के खण्ड-I-खण्ड-VII पर उद्धृत है।
2.10 इस योजना के क्रियान्वयन के लिए वर्त्तमान दर पर अनुमानित लागत 7675.30 करोड़ रुपये है। रैयती भूमि के अर्जन/सतत् लीज के लिए अनुमानित लागत 2263.38 करोड़ रुपये है।
2.11 इस योजना का कार्यान्वयन विभागीय SBDके आलोक में ई-निविदा के माध्यम से किया जाएगा।
2.12 इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कार्य प्रमंडल द्वारा डी0पी0आर0 तैयार किया जायेगा। 2.13 बजटीय राशि की 2.25 प्रतिशत राशि प्रशासनिक व्यय हेतु कर्णांकित की जाएगी, जिसका उपयोग निम्नवत् होगा - (क) कार्य प्रमंडलों के प्रशासनिक व्यय, यात्रा व्यय, मुख्यालय के प्रबंधन एवं यात्रा
व्यय हेतु - 1.75%
(ख) गुणवाा अनुश्रवण हेतु -0.50 %
3. कंडिका-2 में वर्णित प्रावधानों में माननीय मुख्यमंत्री की स्वीकृत्ति प्राप्त कर आवश्यक परिवर्तन किये जा सकेंगे।
4. योजना के क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त बजट शीर्ष तथा योजना उद्व्यय निर्धारित है। 5. वर्ष 2016-17 के लिए `100 करोड़ के अधीन योजना एवं परिशिष्ट-2 के खण्ड-VI के कार्यक्रम तकनीकी मार्गदर्शिका के अनुच्छेद 1.6 की संशोधित तकनीकी विशिष्टताओं पर योजना प्राधिकृत समिति का अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया है।
6. उपरोक्त प्रावधानों के आलोक में प्रस्तावित पूरक राज्य कोर-नेटवर्क के आधार पर ''ग्रामीण टोला सम्पर्क निष्चय योजना'' अंतर्गत विाीय वर्ष 2016-17 से 100 या अधिक आबादी वाले सर्वेक्षित अनजुड़े टोलों/बसावटों को बारहमासी एकल सम्पर्कता प्रदान करने के लिए सभी जिलों में पथों का निर्माण कराये जाने के प्रस्ताव पर दिनांक 30.08.2016 को सम्पन्न मंत्रिपरिषद् की बैठक में मद सं0 11 के रूप में स्वीकृति प्राप्त है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राज्य पत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय एवं इसकी प्रतिलिपि सरकार के सभी विभागों एवं महालेखाकार, बिहार, पटना को सूचनार्थ भेजी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार, सरकार के सचिव।
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