(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
ॢबह(cid:4)र गजट
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 9 अ(cid:20)हायण 1938 (श0) सं(cid:8)या 48 पटना, बुधवार, ———————— 30 नव!बर 2016 (ई0) %वषय-सूची पृ*ठ भाग-1—(cid:1)नयुि/त, पद2थापन, बदल(cid:15), शि/त, छु 6ी और अ8य 9यि/तगत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—2वयंसेवक गु>म@ के समादे*टाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैE(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Iाओं के पर(cid:15)Iा-फल, कायKLम, छाMवृिNत Oदान, आPद।
---
भाग-1-ग—QशIा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Iाफल आPद ---
भाग-2—Rबहार-राSयपाल और कायाKTयI@ Uवारा (cid:1)नकाले गये %व(cid:1)नयम, आदेश, अVधसूचनाएं और (cid:1)नयम आPद। ---
भाग-3—भारत सरकार, पिWचम बंगाल सरकार और उYच 8यायालय के आदेश, अVधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राSय गजट@ के उ\रण। ---
भाग-4—Rबहार अVध(cid:1)नयम ---
पृ*ठ भाग-5—Rबहार %वधान मंडल म^ पुर:2था%पत %वधेयक, उ/त %वधान मंडल म^ उप2था%पत या उप2था%पत `कये जानेवाले Oवर सQम(cid:1)तय@ के O(cid:1)तवेदन और उ/त %वधान मंडल म^ पुर:2थापन के पूवK OकाQशत %वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अVध(cid:1)नयम िजनपर रा*Eप(cid:1)त कb Sये*ठ अनुम(cid:1)त Qमल चुकb है। ---
भाग-8—भारत कb संसद म^ पुर:2था%पत %वधेयक, संसद म^ उप2था%पत Oवर सQम(cid:1)तय@ के O(cid:1)तवेदन और संसद म^ उप2था%पत Oवर सQम(cid:1)तय@ के O(cid:1)तवेदन और संसद म^ पुर:2थापन के पूवK OकाQशत %वधेयक। ---
भाग-9—%वcापन
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भाग-9-क—वन %वभाग कb नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—(cid:1)न%वदा सूचनाएं, पdरवहन सूचनाएं, 8यायालय सूचनाएं और सवKसाधारण सूचनाएं इNयाPद। 3-3
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पूरक
पूरक-क 4-162 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016
भ(cid:2)ग(cid:4)1
०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $
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सं॰ 348सं॰ 348सं॰ 348सं॰ 348 कार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) का कार्यालयकार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) का कार्यालयकार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) का कार्यालयकार्यपालक अभियंता (याँत्रिक) का कार्यालय याँत्रिक प्रमण्डल, पथ निर्माण विभाग, पटना-14 ———
अनुसूची-53 फारम संख्या 202अनुसूची-53 फारम संख्या 202अनुसूची-53 फारम संख्या 202अनुसूची-53 फारम संख्या 202
वि॰नि॰ फार्म-3वि॰नि॰ फार्म-3वि॰नि॰ फार्म-3वि॰नि॰ फार्म-3 वि॰नि॰ नियम 86 द्रष्टव्यवि॰नि॰ नियम 86 द्रष्टव्यवि॰नि॰ नियम 86 द्रष्टव्यवि॰नि॰ नियम 86 द्रष्टव्य
प्रभार रिपप्रभार रिपप्रभार रिपप्रभार रिपोर्टोर्टोर्टोर्ट
अधोहस्ताक्षरी मैं श्रीनिवास कुमारश्रीनिवास कुमारश्रीनिवास कुमारश्रीनिवास कुमार श्रीश्रीश्रीश्री राजीव कुमारराजीव कुमारराजीव कुमारराजीव कुमार को तारीख 31 अक्टूबर31 अक्टूबर31 अक्टूबर31 अक्टूबर सन्, 2016201620162016 के अपराह्न में कार्यपालक कार्यपालक कार्यपालक कार्यपालक अभियंता (याँ॰), याँत्रिक प्रमण्डल, पथ निर्माण विभाग, पटना अभियंता (याँ॰), याँत्रिक प्रमण्डल, पथ निर्माण विभाग, पटना के रूप में भार सौंपा। पदोन्नति होने पर अधीक्षण अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अभियंता (याँ॰), याँत्रिक प्रमण्डल, पथ निर्माण विभाग, पटना अभियंता (याँ॰), याँत्रिक प्रमण्डल, पथ निर्माण विभाग, पटना याँत्रिक अंचल, पथ निर्माण विभायाँत्रिक अंचल, पथ निर्माण विभायाँत्रिक अंचल, पथ निर्माण विभायाँत्रिक अंचल, पथ निर्माण विभाग, दरभंगाग, दरभंगाग, दरभंगाग, दरभंगा के रूप में पद ग्रहण कर चुका हूँ (दरभंगा)कर चुका हूँ (दरभंगा)कर चुका हूँ (दरभंगा)कर चुका हूँ (दरभंगा) जा रहा हूँ। विभाग की अधिसूचना संख्या 8362 (8362 (8362 (8362 (S) दिनांक 07) दिनांक 07) दिनांक 07) दिनांक 07....10101010....2016 एवं 8731 (2016 एवं 8731 (2016 एवं 8731 (2016 एवं 8731 (S) दिनांक 25) दिनांक 25) दिनांक 25) दिनांक 25....10101010....2016201620162016 द्रष्टव्य। अधिसूचना का प्रतीक्षा है।
(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,
(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,(ह॰) अस्पष्ट,
भारमुक्त पदाधिकारीभारमुक्त पदाधिकारीभारमुक्त पदाधिकारीभारमुक्त पदाधिकारी।।।।
भारग्राही पदाधिकारीभारग्राही पदाधिकारीभारग्राही पदाधिकारीभारग्राही पदाधिकारी।।।।
[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
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Website: http://egazette.bih.nic.in
3 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016भाग-9(ख)
और सवKसाधारण सूचनाएं इNयाPद।
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सूचना ——
No. 1369— I , RANJIT KUMAR GOPAL, S/OLate Yogendra Prasad Verma R/O Flat No. 104, Monica Apartment, West Anandpuri, Boring Canal Road, patna-1 declare vide Affiadavit No. 16777 Dated 23.09.16 that now onwards my son Mohit will be known as Mohit Verma for all future purposes.
RANJIT KUMAR GOPAL.
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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
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————— सं॰ 2/आरोप-01-06/2016-सा0प्र0-13851 सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 7 अक्तूबर 2016
श्री काषीनाथ सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 172/11, तत्कालीन विषेष सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 1070/अनु0 दिनांक 29.03.2016 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर बिहार पेंषन नियमावली के अधीन कार्यवाही चलाने की अनुषंसा की गयी। श्री सिंह के विरूद्ध आरोप है कि विषेष सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के पदस्थापन अवधि में श्री सुदर्षन राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-हिलसा के विरूद्ध उनकी सेवानिवृाि की तिथि (दिनांक 30.06.2015) ज्ञात रहने के बावजूद छड़ों की निलामी में बरती गयी अनियमितता के लिये एक वेतनवृद्धि (01.07.2014 को देय) रोकने का प्रस्ताव दिनांक 01.07. 2014 के बाद दिया गया। प्रस्तावित दंड तकनीकी रूप से अधिरोपित किया जाना संभव नहीं होने के फलस्वरूप श्री सिंह के विरूद्ध र्काव्यहीनता का आरोप प्रतिवेदित किया गया।
2. श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पर विभागीय पत्रांक 8592 दिनांक 15.06.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने के फलस्वरूप श्री सिंह के पत्र दिनांक 06.07.2016 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री सिंह दिनांक 30.09.2014 को सेवानिवृा हो गयें।
3. प्रतिवेदित आरोप एवं समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक् विचारोपरांत पाया गया कि श्री सिंह के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' में प्रतिवेदित आरोप प्रथम द्रष्टया सही पाते हुए अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सिंह के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोप की वृहत जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के प्रावधानोंं के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है एवं विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा ग्रामीण कार्य विभाग के द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना द्वारा विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को दिया जायेगा।
5. श्री काषीनाथ सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 172/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को5 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016
सं॰ 2/सी0-1094/2008-सा0प्र0-14021
———
संकल्प
14 अक्तूबर 2016
श्री दिवाकर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 477/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मनीगाछी, ताराडीह, दरभंगा सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, गोपालगंज के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा प्रपत्र 'क' में गठित आरोप-पत्र ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 1711 दिनांक 13.02.2008 द्वारा विभागीय कार्यवाही की अनुषंसा के साथ उपलब्ध कराया गया। उक्त प्रपत्र 'क' में बी0पी0एल0 सर्वेक्षण सूची के क्रम को तोड़कर इंदिरा आवास योजना की राषि के भुगतान में अनियमितता बरतने, बिना अवकाष स्वी—त कराये मुख्यालय छोड़ने, बिना प्रभार सौंपे अवकाष में प्रस्थान कर जाने एवं रोकड़ पंजी का प्रभार नहीं सौंपे जाने संबंधी आरोप प्रतिवेदित है।
2. ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना द्वारा श्री झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलाये जाने हेतु की गयी अनुषंसा के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 47 दिनांक 02.01.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
3. विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 820 दिनांक 30.11.2010 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या 01 जो बी0पी0एल0 सर्वेक्षण सूची के क्रम को तोड़कर इंदिरा आवास योजना की राषि के भुगतान में अनियमितता बरतने से संबंधित है एवं आरोप संख्या 03 जो बिना प्रभार सौंपे तथा बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए अचानक अवकाष में चले जाने से संबंधित है, को अप्रमाणित तथा आरोप संख्या 02 जिसमें बिना पूर्वानुमति के मुख्यालय छोड़ने एवं आरोप संख्या 04 जो रोकड़ पंजी का प्रभार दिए बिना लगातार अवकाष पर रहने से संबंधित है को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
4. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के क्रम में आरोप संख्या 01 के संबंध में ग्रामीण विकास विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अपने मंतव्य में कहा गया है कि विभागीय पत्रांक 11755 दिनांक 10.10.2006 में स्पष्ट निदेष है कि सूची से प्रति पंचायत 10-10 निर्धनतम परिवारों का पारिवारिक सूची से चिन्हित किया जाय तथा प्रखंड स्तर के पदाधिकारी/कर्मचारी से उनके अंकों का सत्यापन कराने पर यदि वे निर्धनतम एवं बेघर पाये जाते हैंं तो उन्हें इंदिरा आवास आवंटित किया जाय। उक्त पत्र में यह कही भी छूट नहीं है कि उच्च अंक वाले परिवार एवं बी0पी0एल0 सूची से बाहर के परिवार को इंदिरा आवास का लाभ दे दिया जाय। उक्त तथ्यों के आलोक में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमत होते हुए आरोप संख्या 01 को प्रमाणित बताया गया। फलस्वरूप अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा इसकी पुनर्जांच का निर्णय लेते हुए विभागीय पत्रांक 12444 दिनांक 15.11.2011 द्वारा आरोप संख्या 01 की पुनर्जांच हेतु विभागीय जाँच आयुक्त बिहार, पटना से अनुरोध किया गया।
5. विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने पत्रांक 392 दिनांक 31.07.2015 द्वारा समर्पित पुनर्जांच प्रतिवेदन में अभिलेखों की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए प्रषासी विभाग को ही अपने स्तर से जाँच कर निष्कर्ष पर पहुंचने का परामर्ष दिया गया।
6. सम्यक विचारोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा आरोप संख्या 01 के संदर्भ में असहमति के बिन्दुओं के साथ-साथ प्रमाणित पाये गये आरोप संख्या 02 एवं 04 के लिए विभागीय पत्रांक 4602 दिनांक 29.03.2016 द्वारा श्री झा से अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त निदेष के आलोक में पत्रांक 567 दिनांक दिनांक 01.04.2016 द्वारा श्री झा का अभ्यावेदन प्राप्त हुआ।
7. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री झा द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर समीक्षा के उपरांत अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री दिवाकर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 477/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मनीगाछी, ताराडीह, दरभंगा सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, गोपालगंज के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संषोधित) के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8270 दिनांक 08.06.2016 द्वारा ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धियों पर रोक का दंड'' संसूचित किया गया।
8. उपर्युक्त दंडादेष के विरूद्ध श्री झा द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 21.06.2016 समर्पित किया गया। उक्त पुनर्विलोकन अर्जी में श्री झा द्वारा कहा गया है कि जाँच प्रतिवेदन में आरोप सं0-1, जो बी0पी0एल0 सर्वेक्षण सूची क्रम को तोड़कर इंदिरा आवास देने से संबंधित है, अप्रमाणित कहा गया। जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि प्रारम्भिक दौर की पारिवारिक सूची और बाद में बने कम्प्यूटरी—त सूची में काफी भिन्नता आई है। इतनी भिन्नता आयी कि सरकार को फिर से बी0पी0एल0 सर्वेक्षण कराना पड़ा और उस दौर की कम्प्यूटरी—त सूची को रद्द करना पड़ा। ग्रामीण विकास विभाग के विभागीय पत्रांक 11755 दिनांक 10.10.2006 के आलोक में प्रारम्भिक दौर की पारिवारिक सूची से क्रमांक-1 से क्रमांक-13 अंक तक के लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन कराया गया और निर्धनतम तथा बेघर पाये जाने पर उन्हें इंदिरा आवास का लाभ दिया गया। विचारणीय है कि इंदिरा आवास का चयन प्रारम्भिक दौर की पारिवारिक सूची अर्थात् प्रारूप सूची से हुआ। आरोप का गठन कम्प्यूटरी—त सूची से हुआ है अर्थात् आरोप का गठन वैसे सूची से हुआ है, जो गलत है, प्रमाणिक नहीं है, प्रारूप सूची से सर्वथा भिन्न है। जाँच और पूर्ण जाँच से यह स्पष्ट है। उनके विरूद्ध प्रखंड मनीगाछी और तारडीह से वहाँ की जनता द्वारा कोई भी और किसी भी प्रकार की षिकायत नहीं हुई है, तो फिर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा कौन से आधार पर कहा जा रहा है कि उनके द्वारा अधिक अंक वाले को इंदिरा आवास का लाभ दिया गया है। बिना साक्ष्य के जाँच और6 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 पुनः जाँच प्रतिवेदन से अहसमति बना कर दंडित करना Natural Justice के खिलाफ है, —पया पुनर्जांच कराया जाय। श्री झा का यह भी कहना है कि आरोप सं0-2, जो बिना अवकाष स्वी—त कराये मुख्यालय छोड़ने से संबंधित है, के संबंध में कहना है कि आरोप प्रमाणित है, लेकिन विचारणीय है कि मुख्यालय किस कार्य से छोड़ा गया। मा0 उच्च न्यायालय में प्रतिषपथ पत्र दायर करने का जिला पदाधिकारी का आदेष था और अनुमंडल पदाधिकारी से मुख्यालय छोड़ने की अनुमति प्राप्त थी। क्या इस स्थिति में जिला पदाधिकारी के अवकाष स्वी—त कराने का औचित्य था ? साथ ही उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि आरोप सं0-4, बिना प्रभार सौंपे अवकाष में प्रस्थान करने से संबंधित है, इसका भी संबंध आरोप सं0-2 से है अर्थात् दुर्घटनावष और शारीरिक अस्वस्थता की वजह से यदि वे कार्य पर नहीं लौटे तो स्वाभाविक है कि प्रभार का आदान-प्रदान बाद में ही होगा और उनके द्वारा प्रभार दिया गया, कोई घोटाला आदि नहीं हुआ। उक्त पुनर्विलोकन अर्जी में श्री झा के द्वारा अनुरोध किया गया है कि पुनर्विचार करते हुए अधिरोपित दंड को खत्म कराया जाय या कम-से-कम कराया जाय।
9. प्रतिवेदित आरोप, श्री झा के विरूद्ध संसूूचित दंडादेष एवं पुनर्विलोकन अर्जी पर सम्यक विचारोपरान्त पाया गया कि सर्वेक्षण सूची का क्रम तोड़कर इंदिरा आवास का आवंटन किये जाने के बिन्दु पर ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा समर्पित मंतव्य में स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि :-
''विभागीय पत्रांक 11755 दिनांक 10.10.2006 में स्पष्ट निदेष है कि सूची से प्रति पंचायत 10-10 निर्धनतम परिवारों को पारिवारिक सूची (प्रारूप सूची) से चिन्हित किया जाए तथा प्रखांड स्तर के पदाधिकारी/कर्मचारी से उनके अंकों का सत्यापन कराने पर यदि वे निर्धनतम एवं बेघर पाये जाते हैं तो उन्हें इंदिरा आवास आवंटित किया जाए। उक्त पत्र में यह कहीं भी छूट नहीं दी गयी है कि उच्च अंक वाले परिवार एवं बी0पी0एल0 सूची से बाहर के अरिवार को इंदिरा आवास का लाभ दे दिया जाए। आरोपी पदाधिकारी को प्रारूप सूची से निर्धनतम को चिन्हित करने के लिए जाँच कराना था, उनके अंकों का सत्यापन कराना था। आरोपी पदाधिकारी द्वारा विभागीय पत्रांक 11755 दिनांक 10.10.2006 में निहित प्रावधान के अनुसार लाभार्थियों का चयन नहीं करने के कारण अधिक अंक प्राप्त करने वाले परिवारों/गैर बी0पी0एल0 परिवार लाभान्वित हुए।''
श्री झा के द्वारा अपने अभ्यावेदन में आरोप सं0-4 के संबंध में कहा गया है कि परिस्थितिवष वे रोकड़पंजी का प्रभार नहीं सौंप पाये। श्री झा का यह कथन आरोप सं0-4 स्वतः प्रमाणित करता है।
10. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री झा के पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 21.06.2016 को अस्वी—त करते हुए श्री झा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8270 दिनांक 08.06.2016 द्वारा संसूचित''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धियों पर रोक'' के दंड को पूर्ववत् बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
11. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री दिवाकर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 477/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, मनीगाछी, ताराडीह, दरभंगा सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, गोपालगंज के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8270 दिनांक 08.06.2016 द्वारा संसूचित ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धियों पर रोक'' के दंड को पूर्ववत् बरकरार रखा जाता है।
आदेषः- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
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सं॰ 2/सी0-1020/2008-सा0प्र0-14079
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संकल्प
17 अक्तूबर 2016
डॉ0 मुन्नी दास (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 553/11, तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी-सह-प्रभारी सेक्टर दंडाधिकारी, रोहतास सम्प्रति जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, सहरसा के विरूद्ध जिला निर्वाचन पदाधिकारी, रोहतास, सासाराम के पत्रांक 350/निर्वा0 दिनांक 14.05.2008 द्वारा 36-बिक्रमंगज संसदीय उप चुनाव, 2007-209 दिनारा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के मतदान केन्द्र संख्या-74 एवं 75 पर दिनांक 29.12.2007 को भ्रमण किये जाने के बावजूद मतदान केन्द्रों पर संधारित भ्रमण पंजी पर हस्ताक्षर नहीं करने एवं कार्य के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप प्रतिवेदित किया गया।
2. प्रतिवेदित आरोपों के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 7102 दिनांक 30.06.2008 द्वारा डॉ0 दास से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। डॉ0 दास के पत्रांक 501/नि0 दिनांक 30.08.2008 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में कहना है कि उन्हें आवंटित सेक्टर में मतदान केन्द्रों की संख्या काफी अधिक थी और उन्हें सभी मतदान केन्द्रों का भ्रमण करना था। उनके द्वारा मतदान केन्द्र संख्या 74 एवं 75 पर भी भ्रमण किया गया था, उक्त मतदान केन्द्र पर स्थिति शान्तिपूर्ण पाकर वे दूसरे मतदान केन्द्र के लिए प्रस्थान कर गये थे। पीठासीन पदाधिकारी के द्वारा मतदान कार्यों में व्यस्तता के कारण भ्रमण पंजी उपस्थापित नहीं करने के कारण तथा शान्तिपूर्वक मतदान सम्पन्न कराने के क्रम में उनके द्वारा र्काव्य निर्वहन में अति व्यस्तता के कारण भ्रमण पंजी पर हस्ताक्षर छूट गया, जो स्वाभाविक है।7 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 3. डॉ0 दास के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 8642 दिनांक 31.08.2009 द्वारा जिला पदाधिकारी, रोहतास, सासाराम से मंतव्य की मांग की गयी। जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, रोहतास द्वारा पत्रांक 46/निर्वाचन दिनांक 19.01.2009 द्वारा समर्पित मंतव्य में प्रतिवेदित किया गया कि डॉ0 मुन्नी दास, कार्यपालक दण्डाधिकारी, रोहतास (सासाराम) का स्पष्टीकरण संतोषप्रद नहीं है। साथ ही डॉ0 दास के विरूद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुषंसा की गयी। 4. प्रतिवेदित आरोपों, डॉ0 दास द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, रोहतास द्वारा समर्पित मंतव्य पर सम्यक् विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13346 दिनांक 11.12.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
5. संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 1622/स्था0 दिनांक 07.11.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया है कि-''आरोपी पदाधिकारी द्वारा पीठासीन पदाधिकारी की डायरी में हस्ताक्षर नहीं किया गया है, जो उनके द्वारा अपने स्पष्टीकरण में स्वयं स्वीकार किया गया है। आरोपी पदाधिकारी का यह —त्य निर्वाचन जैसे संवेदनषील मामले के प्रति उदासीनता एवं जिला निर्वाचन पदाधिकारी के आदेष की अवहेलना का परिचायक है। अतः आरोपी पदाधिकारी पर लगाया गया आरोप प्रमाणित होता है।''
6. प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 17073 दिनांक 10.12.2015 के द्वारा डॉ0 दास से अभ्यावेदन की मांग की गयी है। डॉ0 दास के द्वारा अभ्यावेदन समर्पित करने हेतु कतिपय दस्तावेजों की मांग की गयी थी, जिसे विभागीय पत्रांक 7409 दिनांक 25.05.2016 के द्वारा उन्हें उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बावजूद डॉ0 दास के द्वारा अभ्यावेदन समर्पित नहीं किया गया, जिससे यह समझे जाने का पर्याप्त आधार बनता है कि प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में डॉ0 दास को कुछ नहीं कहना है।
7. प्रतिवेदित आरोप, डॉ0 दास द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि डॉ0 दास के विरूद्ध 36-बिक्रमगंज संसदीय उप चुनाव, 2007 में मात्र दो मतदान केन्द्रों पर भ्रमण के क्रम में सेक्टर दंडाधिकारी के रूप में मतदान केन्द्रों पर संधारित भ्रमण पंजी पर हस्ताक्षर नहीं करने का आरोप है। डॉ0 दास द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि सेक्टर पदाधिकारी के रूप में मतदान केन्द्र संख्या 74 एवं 75 के भ्रमण पंजी पर हस्ताक्षर नहीं किये जाने की चूक डॉ0 दास से हुई है।
8. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा डॉ0 दास के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् ''निन्दन'' (आरोप वर्ष 2007-08) का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
9. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार डॉ0 मुन्नी दास (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 553/11, तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी-सह-प्रभारी सेक्टर दंडाधिकारी, रोहतास सम्प्रति जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, सहरसा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् ''निन्दन'' (आरोप वर्ष 2007-08) का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
आदेषः- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
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सं॰ 2/आरोप-01-66/2014-सा0प्र0-14335
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संकल्प
21 अक्तूबर 2016
मो0 अनामुलहक सिद्दिकी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 447/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, भोजपुर सम्प्रति अपर समार्हाा, बक्सर के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 9389 दिनांक 10.12.2014 के माध्यम से बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के पत्रांक 9452 दिनांक 29.08.2014 द्वारा निगम के पदस्थापन अवधि में नियम विरूद्ध कार्य करने, निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने, र्काव्य के प्रति षिथिलता बरतने, उच्चाधिकारियों के आदेष की अवहेलना करने, जनहित के विरूद्ध कार्य करने, पर्यवेक्षण का अभाव एवं निगम मुख्यालय की स्वी—ति के बिना वेतनवृद्धि की निकासी कर विाीय अनियमितता बरतने का आरोप प्रतिवेदित है।
2. विभागीय पत्रांक 17884 दिनांक 26.12.2014 द्वारा मो0 सिद्दिकी से उक्त आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। मो0 सिद्दिकी के पत्रांक 03/मु0 दिनांक 16.03.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 5142 दिनांक 06.04.2015 द्वारा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग का मंतव्य सम्प्रति अप्राप्त है।
3. मो0 सिद्दिकी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक् विचारोपरांत आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के साथ संलग्न साक्ष्यों एवं आरोप संख्या-1 से 4 के संबंध में समीक्षोपरान्त पाये गये तथ्यों के आधार पर प्रतिवेदित आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया।8 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार मो0 सिद्दिकी के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानोंं के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, भोजपुर, आरा के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। 4. जिला पदाधिकारी, भोजपुर, आरा को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।
5. मो0 अनामुलहक सिद्दिकी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 447/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेषः- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।
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सं॰ 2/आरोप-01-35/2014-सा0प्र0-14462
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संकल्प
25 अक्तूबर 2016
श्री अभिराम त्रिवेदी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 964/11, तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, वैषाली-सह-अधीक्षक, मंडल कारा, हाजीपुर सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए गठित प्रपत्र 'क' के आधार पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक 139 दिनांक 05.01.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, वैषाली द्वारा मनोनीत किसी वरीय पदाधिकारी को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
2. आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 1380 दिनांक 25.04.2015 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या 4 को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। किन्तु आरोप संख्या-1, 2 एवं 3 के संबंध में कोई मंतव्य या निष्कर्ष नहीं दिया गया।
3. उक्त जाँच प्रतिवेदन पर सम्यक् विचारोपरांत अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18 (1) प्रावधानोंं के तहत् आरोप संख्या-1, 2 एवं 3 की पुनर्जांच कराने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 11851 दिनांक 13.08.2015 द्वारा आरोप संख्या-1, 2 एवं 3 की पुनर्जांच करके जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
4. आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 891 दिनांक 01.08.2016 में कहा गया है कि श्री त्रिवेदी के एक अन्य मामले में एक दूसरी विभागीय कार्यवाही भी संचालित हुई थी, जिसमें संचालन पदाधिकारी तत्कालीन पदेन आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल ही थे तथा इसके अतिरिक्त आरोपित पदाधिकारी के मामले में ही मानवाधिकार आयोग द्वारा मांगे जाने पर भी उनके द्वारा प्रतिवेदन भेजा गया है। ऐसी स्थिति में इस तथ्य के बावजूद की इस विभागीय कार्यवाही के आरोप भले ही अलग है, परन्तु इन सभी पूर्व के मामलों का घटनाक्रम एवं परिस्थितियाँ एक ही है। इस विभागीय कार्यवाही का संचालन कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराये जाने पर उनके स्तर से निष्पक्षता से जाँच का प्रतिवेदन देने के बावजूद यदि आरोप प्रमाणित पाये जायेंगे तो आरोपित पदाधिकारी के स्तर से इसे पूर्वाग्रह से ग्रस्त प्रतिवेदन बताकर इसका अनुचित लाभ लिये जाने की संभावना सदैव रहेगी। उक्त आधार पर विभागीय कार्यवाही के लिए संचालन पदाधिकारी के परिवर्तन का अनुरोध किया गया। 5. आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर द्वारा किये गये अनुरोध पर सम्यक् विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री त्रिवेदी के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानोंं के तहत् संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक 139 दिनांक 05.01.2015 को संषोधित करते हुए आयुक्त, तिरहुुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के स्थान पर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
6. जिला पदाधिकारी, वैषाली को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।
7. श्री अभिराम त्रिवेदी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 964/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेषः- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, अनिल कुमार, विषेष सचिव।9 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 ग्रामीण कार्य विभागग्रामीण कार्य विभागग्रामीण कार्य विभागग्रामीण कार्य विभाग ——— अधिसूचनाएं 14 नवम्बर14 नवम्बर14 नवम्बर14 नवम्बर 2016201620162016
सं0 3 अ0प्र0-1-141/2014 -3421—श्री रामू प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अवर प्रमंडल, षिवाजीनगर, समस्तीपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, दरभंगा-1 द्वारा कार्य अवर प्रमंडल, षिवाजीनगर, समस्तीपुर अन्तर्गत पदस्थापन काल में विभागीय अधिसूचना संख्या-6069 दिनांक 29.03.2012 एवं अधीक्षण अभियंता, कार्य अंचल, समस्तीपुर का पत्रांक 707 दिनांक 24.07.2014 में निहित निदेषों की अवहेलना करने के कारण मुख्य अभियंता-3 के पत्रांक 3012 अनु॰ दिनांक 27.08.2014 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध कार्रवाई करने की अनुषंसा की गयी।
2. उक्त अनुषंसा के आलोक में मुख्य अभियंता-3 से श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय निदेषों की अवहेलना के लिए अपने स्तर से स्पष्टीकरण पुछने एवं प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा के आधार पर आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त मुख्य अभियंता-3 के पत्रांक 424 अनु॰ दिनांक 06.02.2015 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर उपलब्ध कराया गया।
3. गठित आरोप पत्र प्रपत्र 'क' के आधार पर श्री रामू प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता से विभागीय पत्रांक 1886 अनु॰ दिनांक 29.05.2015 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद के पत्रांक शून्य दिनांक 20.06.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि कार्य अवर प्रमंडल, हसनपुर के सहायक अभियंता, श्री नन्द गोपाल के स्थानांतरण के उपरान्त जब श्री रामू प्रसाद द्वारा कार्य अवर प्रमंडल, हसनपुर का प्रभार लिया गया तो विभागीय अधिसूचना संख्या-6069 दिनांक 29.03.2012 के अनुसार श्री प्रसाद को कार्य अवर प्रमंडल, विथान का भी अतिरिक्त प्रभार प्राप्त हुआ। परन्तु श्री हिमांषु राज, सहायक अभियंता का पदस्थापन विभाग द्वारा कार्य अवर प्रमंडल, हसनपुर में किया गया तब श्री रामू प्रसाद द्वारा सिर्फ कार्य अवर प्रमंडल, हसनपुर का ही प्रभार श्री हिमाषु राज को सौंपा गया, जबकि विभागीय अधिसूचना संख्या-6069 दिनांक 29.03.2012 के अनुसार श्री प्रसाद को कार्य अवर प्रमंडल, विथान का भी अतिरिक्त प्रभार श्री हिमांषु राज को सौंपना था। श्री रामू प्रसाद द्वारा यह प्रतिवेदित करना कि उन्हें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, कार्य अंचल समस्तीपुर के पत्र के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-6069 दिनांक 29.03.2012 को प्रसंगित करते हुए आदेष निर्गत किया गया, जो उन्हें प्राप्त नहीं था, समीक्षोपरान्त स्वीकार्य योग्य नहीं पाया गया।
4. अतएव उक्त आलोक में श्री रामू प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अवर प्रमंडल, षिवाजीनगर, समस्तीपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, दरभंगा-1 के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(i) एवं 14(v) के तहत लघु दंड के रूप में निम्नांकित दंड संसूचित किया जाता हैः- (i) निन्दन (आरोप वर्ष 2013-14) (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, नरेन्द्र कुमार झा, अपर सचिव।
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26262626 अक्टूबर 2016अक्टूबर 2016अक्टूबर 2016अक्टूबर 2016
सं0 2 अ0प्र0-2-140/14-3271—श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, शेखपुरा सम्प्रति सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बाढ़ द्वारा कार्य प्रमंडल, शेखपुरा अन्तर्गत सुनिष्चित रोजगार योजना, सांसद एवं विधायक क्षेत्रीय विकास योजना के तहत कार्यान्वित योजनाओं में बरती गयी अनियमितता की जाँच माननीय लोकायुक्त द्वारा तकनीकी परीक्षक कोषांग, मंत्रीमंडल निगरानी विभाग से करायी गयी। प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के आलोक में श्री सिंह को आरोपित मानते हुए बिहार लोकायुक्त अधिनियम की धारा-10(1)(क) के अन्तर्गत नोटिस द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षोपरान्त माननीय लोकायुक्त द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध ग्रामीण विकास विभाग को कार्रवाई करने का निदेष दिया गया।
2. श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह का संवर्ग पथ निर्माण विभाग होने के कारण ग्रामीण विकास विभाग द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध कार्रवाई हेतु पथ निर्माण विभाग से अनुरोध किया गया। इस संदर्भ में ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 74350 दिनांक 26.09.2011 द्वारा की गयी अनुषंसा के आलोक में पथ निर्माण विभाग के संकल्प ज्ञापांक-13714(एस) दिनांक 15.12.2011 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 2861अनु0 दिनांक 10.10.2014 द्वारा जॉच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के अनुसार श्री सिंह के विरूद्ध लगाये गये कुल 10 आरोपों में से आरोप सं0-3, जो विभिन्न 18 योजनाओं के कार्यान्वयन में सरकारी निदेषों के विपरीत करोड़ों रूपये का कार्य कराये जाने के पश्चात् योजना में मापी के जॉच किये बिना राषि के भुगतान करने से संबंधित है, उसमें राषि के भुगतान संबंधी आरोप आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध स्थापित नहीं होने, परन्तु मापी की जॉच नहीं करने के हद तक यह आरोप श्री सिंह के विरूद्ध आंषिक रूप से प्रमाणित होने तथा आरोप10 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 सं0-4, जो पथ ढ़लाई के कार्य में व्यवहृत सामग्रियों में सीमेंट की कमी से संबंधित है, उसमें तकनीकी परीक्षक कोषांग के द्वारा निदेषित प्रक्रियाओं का अनुपालन संभवतः सामग्रियों के प्रयोगषाला में नहीं किया गया प्रतीत होने, परन्तु आरोप में विचलन की मात्रा अत्यधिक है, इसलिये आरोप के इस अंष को श्री सिंह के विरूद्ध प्रमाणित माने जाने का मंतव्य संचालन पदाधिकारी द्वारा दिया गया। शेष अन्य आरोप संख्या-1, 2, 6, 7, 8, 9 एवं 10 श्री सिंह के विरूद्ध प्रमाणित नहीं होने तथा आरोप संख्या-5 specific नहीं होने के कारण इस आरोप के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंच पाना संभव नहीं हो पाने का उल्लेख संचालन पदाधिकारी द्वारा किया गया।
4. अभियंताओं के संवर्ग विभाजन के फलस्वरूप श्री सिंह का पैतृक विभाग ग्रामीण कार्य विभाग होने के कारण श्री सिंह के विरूद्ध आरोप से संबंधित संचिका की छायाप्रति पथ निर्माण विभाग के पत्रांक 11609(एस) दिनांक 03.12.2014 द्वारा ग्रामीण कार्य विभाग को हस्तांतरित की गयी। ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध पथ निर्माण विभाग के स्तर से संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन से सहमति व्यक्त करते हुए श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह से विभागीय पत्रांक 136अनु0 दिनांक 12.01.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 की कंडिका-18(3) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
5. श्री सिंह के पत्रांक शून्य दिनांक 27.08.2015 द्वारा प्राप्त द्वितीय बचाव बयान की समीक्षा विभाग द्वारा की गयी। समीक्षोपरान्त द्वितीय बचाव बयान को अस्वीकृत करते हुए श्री सिंह के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन एवं बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा प्रदान की गयी सहमति के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2007-सह-पठित ज्ञापांक 2008 दिनांक 23.06.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील)(संषोधन) नियमावली, 2007 के नियम 14(vi) एवं 14(ii) के तहत निम्नांकित दंड संसूचित किया गया :-
(i) संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतन वृद्वि पर रोक। (ii) प्रोन्नति की देय तिथि से अगले तीन वर्ष तक प्रोन्नति पर रोक। 6. उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह के पत्रांक शून्य दिनांक 07.08.2016 द्वारा विभाग को पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में सारतः विभागीय कार्यवाही में आंषिक प्रमाणित/प्रमाणित आरोप सं॰- 3 एवं 4 के संदर्भ में ही उल्लेख किया गया है। आरोप सं0-4, जो पथ ढ़लाई के कार्य में व्यवहृत सामग्रियों में सीमेंट की कमी से संबंधित है, के संबंध में श्री सिंह द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि उनके द्वारा पूर्व में दिये गये बचाव बयान को न तो संचालन पदाधिकारी द्वारा संज्ञान लिया गया और ना ही उक्त आरोप के संदर्भ में दिये गये द्वितीय कारण पृच्छा को विभाग द्वारा संज्ञान लिया गया। श्री सिंह द्वारा अपने विरूद्ध आंषिक प्रमाणित आरोप सं0-3, जो विभिन्न 18 योजनाओं के कार्यान्वयन में सरकारी निदेषों के विपरीत करोड़ों रूपये का कार्य कराये जाने के पश्चात् योजना में मापी के जॉच किये बिना राषि के भुगतान करने से संबंधित है, के संबंध में उल्लेख किया गया है कि सिर्फ मापी की जाँच नहीं करने के लिए उन्हें दंडित किया गया है, जबकि इसमें किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त श्री सिंह द्वारा उन्हें ए॰सी॰पी॰ लाभ, प्रोन्नति लाभ नहीं दिये जाने का उल्लेख किया गया है।
7. श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा विभाग द्वारा की गयी। समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि संचालित विभागीय कार्यवाही में श्री सिंह द्वारा दिये गये बचाव बयान की विस्तृत समीक्षा के उपरान्त ही संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध आरोप सं॰-3 को आंषिक प्रमाणित एवं आरोप सं॰-4 को प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया। इसके उपरान्त विभाग को उपलब्ध कराये गये द्वितीय कारण पृच्छा में भी श्री सिंह द्वारा सिर्फ वही तथ्यों को दोहराया गया, जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखा गया था। पुनः श्री सिंह द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में भी वही तथ्यों को रखा गया है, जिसपर पूर्व में ही विचार किया जा चुका है। इस प्रकार श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में ऐसा कोई नया तथ्य नहीं पाया गया, जो पूर्व में विचारित नहीं हुआ हो।
8. अतएव समीक्षोपरांत श्री सिंह के पत्रांक शून्य दिनांक 07.08.2016 द्वारा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी के गुण विहीन होने के कारण इसे अस्वीकार करते हुए पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं॰-2007-सह-पठित ज्ञापांक 2008 दिनांक 23.06.2016 द्वारा अधिरोपित दण्ड को बरकरार रखने का निर्णय लिया जाता है।
9. प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, नरेन्द्र कुमार झा, अपर सचिव।
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22227777 अक्टूबर 2016अक्टूबर 2016अक्टूबर 2016अक्टूबर 2016
सं0 3 अ0प्र0-1-111/2014-3282— श्री वीरेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, क्षेत्रीय प्रयोगषाला, गुलजारबाग के विरूद्ध कार्य प्रमंडल, लखीसराय अन्तर्गत पदस्थापन अवधि में एन॰एच॰-80 से ज्वॉस गॉव तक पथ निर्माण के डी॰पी॰आर॰ में पथ के वास्तविक लम्बाई से कम लम्बाई का आरेखन करने, स्थल के अनुरूप प्राक्कलन नहीं बनाने, स्वीकृत आरेखन से अलग कार्य कराने के आरोप में आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर अधिसूचना संख्या-2065-सह-पठित ज्ञापांक 2066अनु॰ दिनांक 12.06.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसके निमित्त श्री कमलेष चौधरी, अभियंता प्रमुख, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं श्री उज्जवल कुमार, सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नामित किया गया।11 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक शून्य दिनांक 07.09.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुसार श्री प्रसाद के विरूद्ध स्थल के अनुरूप प्राक्कलन नहीं बनाने तथा बगैर पुनरीक्षित प्रषासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति प्राप्त किये स्वीकृत रेखांकन से अलग दूसरे रेखांकन में कार्य कराने के लिये दोषी माने जाने का निष्कर्ष संचालन पदाधिकारी द्वारा अंकित किया गया।
3. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमति व्यक्त करते हुए श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक 36 अनु॰ दिनांक 04.01.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 की कंडिका-18(3) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
4. श्री प्रसाद के पत्रांक शून्य दिनांक 09.02.2016 द्वारा द्वितीय बचाव बयान समर्पित किया गया। समर्पित द्वितीय बचाव बयान में श्री प्रसाद द्वारा सारतः उल्लेख किया गया कि प्राक्कलन उनके द्वारा नहीं बनाया गया था, बल्कि यह प्राक्कलन कनीय अभियंता द्वारा बनाकर प्रस्तुत किया गया था। एकरारनामा होने के बाद जब पथ पर कार्य आरंभ करने की कार्रवाई की गयी तो स्वीकृत आरेखन पर जमीन उपलब्ध नहीं था साथ ही उक्त आरेखन पर जल जमाव का क्षेत्र था। कार्य आरंभ करने एवं एकरारनामा को देखते हुए अलग आरेखन पर कार्य आरंभ करने की स्वीकृति उच्चाधिकारी द्वारा दी गयी, जिसके आलोक में कार्य को आरंभ किया गया।
5. श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय बचाव बयान के विभागीय समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा उन्हीं तथ्याेंे को दोहराया गया है, जो उन्होंने विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के समक्ष कही थी तथा जिसपर संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँचोपरान्त जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। इस प्रकार श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय बचाव बयान में कोई नया विचारणीय तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया। समर्पित द्वितीय बचाव बयान को अस्वीकृत करते हुए श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिये निदंन एवं संचयात्मक प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक के दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।
6. उक्त अनुमोदित दंड प्रस्ताव में से वहृत दंड के प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 2275 अनु0 दिनांक 19.07.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्ष की मांग की गयी।
7. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2029/लो0से0आ0 दिनांक 04.10.2016 द्वारा दंड प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।
8. अतएव उक्त आलोक में श्री वीरेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, क्षेत्रीय प्रयोगषाला, गुलजारबाग के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील)(संषोधन) नियमावली, 2007 के नियम 14(i) एवं 14(vi) के तहत निम्नांकित दंड संसूचित किया जाता हैः-
(i) निन्दन (आरोप वर्ष 2012-13) (ii) संचयात्मक प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, नरेन्द्र कुमार झा, अपर सचिव।
——— dk;kZy; vij funs'kd] ;{ek çn'kZu ,oa çf'k{k.k dsUnz] vxedqvk¡] iVuk&7 ——— dk;kZy; vkns'k 23 नवम्बर 201623 नवम्बर 201623 नवम्बर 201623 नवम्बर 2016
laŒ 858—निदेशक प्रमुख (नर्सिंग), स्वास्थ्य सेवाएँ, बिहार, पटना के पत्रांक 882(6), दिंनाक 04.09.2015 संशोधित पत्रांक 1268(6), दिनांक 29.12.2015 एवं अभिलेख सत्यापन से संबंधित पत्रांक 106(6), दिंनाक 05.02.2016 के द्वारा श्रीमती पिंकी देवी, पिता/पति-श्री मनु सिंह, ग्राम-तोप, थाना-शाहजहाँपुर, जिला-पटना, रौल नं0 10301100 को ए0एन0एम0 के पद पर नियुक्ति हेतु यक्ष्मा प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केन्द्र, अगमकुआँ, पटना-7 आवंटित किए जाने के आलोक में अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के पत्रांक 100, दिनांक 15.02.2016 के द्वारा श्रीमती पिंकी देवी को यक्ष्मा प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केन्द्र, अगमकुआँ, पटना-7 में ए0एन0एम0 के पद पर नियुक्ति पत्र निर्गत किया गया। तदनुसार श्रीमती पिंकी देवी दिनांक 16.02.2016 को अपना योगदान दी।
श्रीमती पिंकी देवी के द्वारा ए0एन0एम0 के पद पर नियुक्ति हेतु स्वास्थ्य निदेशालय में समर्पित शेक्षणिक प्रमाण-पत्र के प्रमाण स्वरूप बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा निर्गत प्रथम श्रेणी से मध्यमा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र समर्पित किया गया जिसमें कुल प्राप्तांक 422 अंकित है और यही अभिलेख सत्यापन हेतु उपलब्ध कराया गया।
श्रीमती पिंकी देवी के द्वारा ए0एन0एम0 के पद पर योगदान समर्पित करने के समय समर्पित शैक्षिणक प्रमाण-पत्र के रूप में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा निर्गत प्रथम श्रेणी से मध्यमा उत्तीर्ण होने का प्रमाण पत्र समर्पित किया गया। इसमें कुल प्राप्तांक 422 अंकित है।
श्रीमती पिंकी देवी के द्वारा ए0एन0एम0 के पद पर नियुक्ति के संदर्भ में समर्पित बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा निर्गत प्रथम श्रेणी से मध्यमा उत्तीर्ण होने संबंधी प्रमाण-पत्र को अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के पत्रांक 162, दिनांक 01.03. 2016 के द्वारा सचिव, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना के पास भेजकर सत्यापन कराए जाने पर परीक्षा नियंत्रक, बिहार12 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना के पत्रांक 701-सं0, दिंनाक 13.06.2016 द्वारा श्रीमती पिंकी देवी, कोड/क्रमांक/ वर्ष-4303/215/06, प्राप्तांक - 284, श्रेणी - तृतीय बताया गया है।
परीक्षा नियंत्रक, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना के पत्रांक 701-सं, दिनांक 13.06.2016 द्वारा प्राप्त सत्यापन प्रतिवेदन से श्रीमती पिंकी देवी द्वारा नियक्ति के संदर्भ में समर्पित बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा निर्गत 422 अंक से प्रथम श्रेणी में मध्यमा उत्तीर्ण होने संबंधी प्रमाण-पत्र पूर्णतः जाली होना प्रमाणित पाया गया। फलतः अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के पत्रांक 510, दिनांक 02.07.2016 द्वारा श्रीमती पिंकी देवी के विरूद्ध आलमगंज थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई जिस संदर्भ में आलमगंज थाना काण्ड सं0 196/2016 दिनांक 02.07.2016 धारा 420/467/468/471 भा0 द0 वि0 दर्ज किया गया है।
तदोपरान्त अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के पत्रांक 521, दिंनाक 08.07.2016 के द्वारा श्रीमती पिंकी देवी से स्पष्टीकरण की मांग की गई, किंतु उनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। इसके बाद अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के पत्रांक 534, दिनांक 15.07.2016 द्वारा श्रीमती पिंकी देवी को स्मारित किया गया। इसके बावजूद भी उनके द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया तो पत्रांक 548, दिनांक 21.07.2016 द्वारा प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित कर श्रीमती पिंकी देवी से स्पष्टीकरण की मांग की गई। इसके बाद डाक के माध्यम से श्रीमती पिंकी देवी का स्पष्टीकरण प्राप्त हुआ।
श्रीमती पिंकी देवी से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गई। श्रीमती पिंकी देवी द्वारा अपने स्पष्टीकरण में स्वीकार किया गया है कि उन्होंने वर्ष 2006 में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा आयोजित मध्यमा परीक्षा कोड- 4303, क्रमांक - 215, पंजीकरण संख्या -003477/06, वर्ष-2006, प्राप्तांक-422, श्रेणी-प्रथम से संबंधित बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा निर्गत अंक-पत्र संख्या - 0109619, जमा की थी। यदि मेरा अंक-पत्र संख्या 0109619 जाली है तो सचिव, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना को स्पष्ट करना चाहिए था कि अंक-पत्र संख्या-0109619 परीक्षा नियंत्रक, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना के हस्ताक्षर से निर्गत किया गया है या नहीं? बिना इसका सत्यापन किए परीक्षा नियंत्रक के द्वारा सत्यापन प्रतिवेदन कैसे भेज दिया गया? आगे उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख की है कि ए0एन0एम0 के पद पर नियुक्ति के लिए मैट्रिक पास होना आवश्यक था, न कि मैट्रिक प्रथम श्रेणी में पास करना। इनका चयन प्राप्तांक के आधार पर प्राप्त श्रेणी के आधार पर न होकर साक्षात्कार में प्राप्तांक के आधार पर हुई है। इस आधार पर इनका यह भी कहना है कि प्राप्तांक-284, के अनुसार तृतीय श्रेणी से पास करने और जाली अंक-पत्र का प्रभाव इनकी नौकरी पर नहीं पड़ता है क्योंकि इनके द्वारा प्रस्तुत अंक-पत्र अभी आलमगंज थाना काण्ड सं0 196/2016 में अनुसंधान के अंतर्गत है जिसमें वह भी एक अभियुक्त है तथा न्यायालय का यह निर्णय नहीं आया है कि उनके द्वारा समर्पित अंक-पत्र जाली है और आलमगंज थाना काण्ड सं. 196/2016 न्यायालय में अभी लंबित है।
समीक्षोपरान्त अधोहस्ताक्षरी का यह अभिमत है कि श्रीमती पिंकी देवी का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है। ये अपने स्पष्टीकरण के माध्यम से परीक्षा नियंत्रक, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना के पत्रांक 701-स0, दिनांक 13.06.2016 द्वारा इनका प्राप्तांक -284, श्रेणी-तृतीय को झुठलाने में सफल नहीं हो सकी हैं, साथ ही स्वयं द्वारा प्रस्तुत बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना द्वारा निर्गत 422 अंक से प्रथम श्रेणी में मध्यमा उत्तीर्ण होने संबंधी प्रमाण-पत्र को सही करार करने में पूर्णतः विफल रही हैं। इनका यह कहना भी गलत है कि इनका चयन मात्र साक्षात्कार में प्राप्तांक के आधार पर हुई है, जबकि ए0एन0एम0 के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए ही मैट्रिक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। इस प्रकार इनका ए0एन0एम0 प्रशिक्षण ही गलत है और उस आधार पर निुयक्ति भी अवैध है। तथापि इनके द्वारा प्रस्तुत मध्यमा का अंक -पत्र जाँच कराए जाने पर जाली पाया गया है। जाली अंक-पत्र के आधार पर नियुक्ति पाना जालसाजी और धोखाधड़ी से नियुक्ति पाना है। अतः इनकी नियुक्ति अवैध है।
उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार/ अधोहस्ताक्षरी बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 20 (ii) एवं प्रावधान के आलोक में इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि राज्यहित में श्रीमती पिंकी देवी के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के से 19 में निरूपित सिद्धांत का अनुपालन किया जाना आवश्यक नहीं है क्योंकि इनके द्वारा समर्पित अंक-पत्र जाँच कराए जाने पर सक्षम बोर्ड द्वारा जाली प्रमाणित हो चुका है जिसे ख्ांडित करने में श्रीमती पिंकी देवी विफल रही है। पत्रांक 548, दिनांक 21.07.2016 द्वारा हिन्दुस्तान समाचार पत्र में प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित कर श्रीमती पिंकी देवी से नियुक्ति रद्द करने के विरूद्ध स्पष्टीकरण की मांग की जा चुकी है। श्रीमती पिंकी देवी अपने स्पष्टीकरण में आरोप को खंडित करने में सफल नहीं हुई हैं। अतः इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (x) में निहित दण्ड दिया जाना उपयुक्त है। अतः सम्यक विचारोपरान्त नवनियुक्त ए0 एन0 एम0 श्रीमती पिंकी देवी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाता है।
आदेषः आदेष दिया जाता है कि इस आदेष की एक प्रति नवनियुक्त ए0 एन0 एम0 श्रीमती पिंकी देवी जो उनके गृहपते पर निबंधित डाक से भेज दिया जाय ओर इसे बिहार के असाधारण राजपत्र में प्रकाषित कराया जाय।
vkns'k ls] Mk0 fot; dqekj flag] vij funs'kd A13 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 समाहरणालय गोपालगंज (जिला स्थापना शाखा) ——— vkns'k 23 23 23 23 जुलाईजुलाईजुलाईजुलाई 2016201620162016
सं॰ 954/स्था॰—जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के कार्यालय से दिनांक 24.06.2013 को दूरभाष पर दिये गये निर्देश के आलोक में प्रखंड विकास पदाधिकारी, थावे तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे द्वारा संयुक्त रूप से बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे का औचक निरीक्षण किया गया। जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के कार्यालय को किसी व्यक्ति द्वारा बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे में आंगनबाड़ी सेविकाओं से अवैध वसूली की सूचना प्राप्त हुई थी। औचक निरीक्षण के क्रम में बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे के कार्यालय परिचारी श्री राजन कुमार एवं एक अन्य व्यक्ति श्री गुडू सिंह, पिता- श्री जगतनारायण सिंह, सा0- धतिवना, थाना- थावे की अलग-अलग तलाशी ली गयी तथा दोनों के पास से 6400-6400 रूपये बरामद किये गये। रूपये के अतिरिक्त उनलोगों के पास से आंगनबाड़ी सेविकाओं के मोबाईल नंबर की सूची भी बरामद की गयी। बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे के आवेदन के आलोक में थावे थाना के द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गयी तथा थावे थाना कांड सं0-79/2013 दिनांक 24.06.2013, भा0द0वि0 की धारा-161 एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम- 1988 की धारा- 7,8,9 के अन्तर्गत कांड पंजीकृत किया गया। थाना कांड सं0- 79/2013 में कार्रवाई करते हुए अभियुक्तों को हिरासत में लिया गया तथा माननीय विशेष न्यायधीश, निगरानी, मुजफ्फरपुर के आदेश से दिनांक 26.06.2013 से न्यायायिक हिरासत में भेज दिया गया।
तत्पश्चात् जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, गोपालगंज एवं प्रभारी पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे द्वारा दिनांक 30.12.2013 को श्री राजन कुमार के विरूद्ध प्रपत्र-''क'' गठित किया गया एवं जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, गोपालगंज द्वारा पत्रांक 1774 दिनांक 31.12.2013 से निदेशक, आई0सी0डी0एस0, बिहार, पटना को सूचित किया गया कि श्री राजन कुमार, अनुसेवक को आंगनबाड़ी सेविकाओं से अवैध वसूली करते हुए दिनांक 24.06.2013 को गिरफ्तार किया गया एवं श्री कुमार दिनांक 26.06.2013 से न्यायायिक हिरासत में है तथा न्यायायिक हिरासत के लिए निलंबन हेतु अनुरोध किया गया। निदेशक, आई0सी0डी0एस0, निदेशालय, बिहार, पटना के आदेश ज्ञापांक 842 दिनांक 31.01.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम- 9(2)(क) के आलोक में श्री राजन कुमार, अनुसेवक, बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे, गोपालगंज को दिनांक 24.06.2013 के प्रभाव से निलंबित किया गया एवम् नियमावली 2005 के नियम 10 के तहत जीवन निर्वाह् भता अनुमान्य किया गया।
जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, गोपालगंज द्वारा पत्रांक 187 दिनांक 14.02.2014 से निदेशक, आई0सी0डी0एस0 बिहार, पटना को सूचित किया गया कि श्री राजन कुमार को दिनांक 06.01.2014 को माननीय उच्च न्यायालय के क्रिमीनल मिसलिनियस केस सं0- 46740/2013 में पारित आदेश के आलोक में जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उक्त के आलोक में उन्होेंने दिनांक 06.01.2014 को बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे में अपना योगदान दिया है।
निदेशक, आई0सी0डी0एस0 निदेशालय, बिहार, पटना के आदेश ज्ञापांक 1518 दिनांक 28.02.2014 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9(3) के सुसंगत प्रावधान के तहत श्री राजन कुमार, कार्यालय परिचारी, बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे का दिनांक 06.01.2014 से योगदान स्वीकृत करते हुए पुनः 06.01.2014 के प्रभाव से निलंबित किया गया। निलंबन के दौरान श्री राजन कुमार का मुख्यालय जिला प्रोग्राम कार्यालय, सारण निर्धारित किया गया एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के तहत जीवन निर्वाह भता देय होगा। साथ हीं विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु अपर समाहत्र्ता (विभागीय जॉच) सारण समाहरणालय, सारण को संचालन पदाधिकारी एवं जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, गोपालगंज को उपस्थापन पदाधिकारी नामित किया गया।
| क्र0 | आरोप | लांछन का अभिकथन | साक्ष्य |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | आंगनबाड़ी सेविकाओं से अवैध वसूली | दिनांक 24.06.2013 को बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे जहॉ परिचारी के रूप में पदस्थापित है, आंगनबाड़ी स विकाओं े से अवैध वसूली की आरोप में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के उपरान्त दिनांक 26.06.2013 स े अबतक न्यायिक हिरासत में है। | थावे थाना क स े सं0- 79/2013 आई0पी0सी0 की धारा-161 उप-धारा 7,8,9 भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम, 1988 तथा मुजफ्फरपुर निगरानी केस सं0- 21/ 2013। प्राथमिकी की छायाप्रति, जप्ति सूची की छायाप्रति, सेविकाओं का मोबाईल नं0 की छायाप्रति। |
| 2 | कार्यालय परिचारी के दायित्व का निर्वह्न नहीं करना तथा सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल आचरण करना। | इनका कार्य कार्यालय परिचारी का है, परन्तु अपने दायित्व का निर्वह्न नहीं कर स्थानीय तथ्वों के सॉठ-गॉठ में रह कर अनुशासनहीनता तथा अवांछित लाभ प्राप्त करने का है, जो सरकारी कर्मचारी के आचरण के प्रतिकूल है। | उपरोक्तानुसार |
| 3 | गिरफ्तारी के सूचना नहीं देना तथा तथ्यों को छिपाना | हिरासत अवधि में रहने संबंधी कोई सूचना नहीं देकर तथ्यों को छिपा लिया गया, जिससे सरकारी कार्य बाधित हुआ। | इस संबंध में इनके द्वारा कोई सूचना अभी तक नहीं दी गयी है। |
संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री राजन कुमार को प्रपत्र 'क' की एक प्रति उपलब्ध कराते हुए अपना पक्ष रखने का निदेश दिया गया। दिनांक 17.04.2014 को श्री कुमार द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
अरोपी का स्पष्टीकरण :-
आरोप सं0-1. आरेापी का कहना है कि आरोप बेबुनियाद है इसके समर्थन में आरोपी के द्वारा कहा गया है कि मेरे उपर लगाये गये उक्त आरेाप के संबंघ में किसी सेविका ने ऐसा कोई लिखित आवेदन नही दिया है। इनका कहना है कि आंगनबाड़ी सेविका :-
(1) रीना देवी (2) माया देवी (3) शीला देवी(4) बबली देवी (5) अन्नु आरा (6) निर्मला कुॅवर (7) पुष्पा गुप्ता (8) प्रतिमा देवी ने पुलिस के समक्ष ब्यान दिया है कि श्री राजन कुमार को उन्होने कोई पैसा नही दिया है।
आरोप सं0-2. आरेापी का कहना है कि लगाया गया आरोप गलत है। आरोपी सन् 1986 से बाल विकास शाखा से संबंध रख रहा है। लेकिन आजतक किसी पदाधिकारी ने सरकारी सेवक के प्रतिकूल आचरण का आरोप नही लगाया है। आरोप सं0-3. आरेापी का कहना है कि आरोप सरासर गलत और निराधार हैं। प्रथम सूचना के अवलोकन से हीं यह स्पष्ट हो जाता है कि उक्त कांड की सूचिका स्वयं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे निलम कुमारी है जिनके लिखित आवेदन के आधार पर उपरोक्त कांड दर्ज हुआ और आरोपी की गिरफ्तारी हुई। जमानत पर रिहा होने के शीघ्र बाद हीं आरेापी ने कार्यालय में अपना योगदान दिया है।
अतः आरोपी द्वारा सर्वथा गलत, आधारहीन, वास्तविकता से परे उनके विरूद्ध लगाये गये आरोपों के संबध में अपने स्पष्टीकरण पर विचार करते हुए दोषमुक्त करने का अनुरोध किया है।
उपस्थापन पदाधिकारी का मंतव्य
आरोप सं0-1. श्री राजन कुमार को एक अन्य व्यक्ति के साथ सेविकाओं से रूपये की वसूली करने की सूचना पर स्थानीय पुलिस की मदद से प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, थावे तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे द्वारा पकडा गया तथा प्राथमिकी दर्ज करायी गयी। दोनो के पास से 6400 + 64000 रूपये एवं सेविकाओं की मोबाईल सं0 की सूची बरामद हुई। उनके द्वारा कहा गया है कि आरोपी द्वारा उपलब्ध कराये गये पुलिस अनुसंधान की डायरी की छायाप्रति की कंडिका 60 तथा 73 के संबंध में मुझे कुछ नही कहना है।
आरोप सं0-2. साथ पकड़े गये गुड्डु सिंह स्थानीय है। उनके साथ हीं आरोपी कर्मचारी भी पकड़ गये है। इस प्रकार यह स्थानीय सॉठ-गॉठ तथा अवांछित लाभ प्राप्त करना प्रमाणित करता है।
आरोप सं0-3. दिनांक 30.12.2013 को प्रपत्र "क" हस्ताक्षरित हुआ तथा उस दिन तक बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे द्वारा आरोपी के हिरासत में रहने या जमानत पर छुटने की सूचना नही दी गई थी। राजन कुमार ने परियोजना कार्यालय में दिनांक 06.01.2014 को जमानत पर रिहा होने के बाद योगदान किया जो उक्त आरोप का कारण है। उपस्थापन पदाधिकारी, द्वारा लगाये गये आरोपो के पक्ष मे ही अपना मंतव्य दिया गया है।
संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदनः-
आरोप सं0 1. आंगनबाडी़ सेविकाओं से अवैध वसूली, दिनांक 24.06.2013 को बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे, जहॉ परिचारी के रूप में पदस्थापित है, आंगनबाडी़ सेविकाओं से अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के उपरांत दिनांक 26.06.2013 से अबतक न्यायायिक हिरासत में रहने के संबंध में आरेापी द्वारा अपने स्पष्टीकरण मे यह कहना है कि आरोप के संबंध में किसी सेविका ने कोई ब्यान या लिखित आवेदन नही दिया कि राजन कुमार द्वारा उनसे पैसे की वसूली की गई। अपने स्पष्टीकरण में थावे कांड सं0 79/2013 के अनुसंधान की कंडिका 60 तथा 73 में दो15 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 सविकाओं द्वारा श्री राजन कुमार को पैसा देने से इनकार किया गया है। इसक्रम में 6400 रूपये की बरामदगी तथा उनके पास से सेविकाओं की मोबाईल सं0 की सूची प्राप्त होना आरोपों के संपुष्ट होने का आधार माना है। उनके द्वारा अनुसंधान के कंडिका 60 एवं 73 के संबंध में कोई भी मंतव्य देना उचित नही समझा गया हैं।
जिला पदाधिकारी, गोपालगंज द्वारा दूरभाष पर दिये गये निर्देश वह किसी सूचना पर ही आधारित है, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, थावे और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे द्वारा संयुक्त रूप से निरीक्षण के दौरान श्री राजन कुमार तथा एक अन्य व्यक्ति के पास से 6400 + 6400 रूपये समान मात्रा में बरामद होना तथा उनके ही पास से सेविकाओं की मोबाईल सं0 की सूची बरामद होना उनके असूचितापूर्ण कार्य का स्पष्ट प्रमाण है। आरोपी के पास से बरामद 6400 रूपये का तथा उनके साथ पकड़े गये दूसरे स्थानीय व्यक्ति के पास से उतनी ही राशि बरामद होना आरोप संपुष्टि के लिए पर्याप्त है। इसप्रकार आरोपी पर लगाये गये प्रथम आरोप सिद्ध होता है।
आरोप सं0-2. कार्यालय परिचारी के दायित्वों का निर्वहन नही करना तथा सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल आचरण- इनका कार्य कार्यालय परिचारी का है परन्तु अपने दायित्वो का निर्वहन नही कर स्थानीय व्यक्यिों से सॉठ-गॉठ में रहकर अनुशासनहीनता तथा अवांछित लाभ प्राप्त करने का हैं, जो सरकारी कर्मचारी के आचरण के प्रतिकूल है, के संबंध में आरोपी द्वारा कहना कि 28 वर्षो में सरकारी कर्मचारी के आचरण के विरूद्ध कोई आरोप किसी पदाधिकारी द्वारा मुझे नही लगाया गया, समीचीन नही हैं। जैसे ही कोई कर्मी अनैतिक रूप से धनोपार्जन मे लगता है या अपने कार्यो के अतिरिक्त किसी अनैतिक कार्य में संलिप्त पाया जाता है, वैसी स्थिति में उसपर लगाये गये अुनशासनहीनता तथा सरकारी कर्मचारी के आचरण के प्रतिकूल, आरोप स्वतः प्रमाणित होता हैं। ंइसप्रकार गठित आरोप सं0-02 भी प्रमाणित होता है।
आरोप सं0-3. गिरफ्तारी की सूचना नही देना तथा तथ्यों को छिपाना, हिरासत अवधि मे रहने संबंधी कोई सूचना नही देकर तथ्यों को छिपा लिया गया जिससे सरकारी कार्य बाधित हुआ। इस संबध मे आरोपी कर्मचारी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, थावे के लिखित आवेदन पर हीं आरोपी की गिरफ्तारी हुई, से प्रमाणित होता है कि आरोपी द्वारा तथ्यों को छिपाया नही गया। हिरासत से बाहर आने पर उनके द्वारा अपने कर्तव्य पर योगदान दिया गया हैं। अतः आरोप सं0-03 प्रमाणित नही होता है।
विभागीय कार्यवाही के तहत संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आधार पर वृहत दण्ड देने के संबंध में सहायक निदेशक, आई0सी0डी0एस0, पटना के पत्रांक 3179 दिनांक 05.08.2015 द्वारा श्री राजन कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री राजन कुमार द्वारा दिनांक 14.08.2015 को निदेशालय आई0सी0डी0एस0, पटना को द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया।
समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के ज्ञापांक 3130, दिनांक 30.07.2015, आई0सी0डी0एस0 निदेशालय, बिहार, पटना अंतर्गत जिला प्रोग्राम कार्यालयों एवं बाल विकास परियोजना कार्यालयों में समूह "घ" के पद पर भर्ती प्रक्रिया एवं सेवा शर्तो के निर्धारण आदि के संदर्भ में निर्गत है। उक्त के आलोक में आई0सी0डी0एस0 निदेशालय, समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 3494, दिनांक 02.09.2015 एवं पत्रांक 3562 दिनांक 08.09.2015 द्वारा अग्रेतर कार्रवाई हेतु आवश्यक कागजात जिला पदाधिकारी, गोपालगंज को उपलब्ध कराया गया। तत्पश्चात श्री राजन कुमार द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण पर इस कार्यालय के पत्रांक 539/स्था0, दिनांक 26.04.2016 एवं 606/स्था0, दिनांक 16.05.2016 से सहायक निदेशक-सह-प्रभारी पदाधिकारी,(स्थापना) आई0सी0डी0एस0 निदेशालय, समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गई। निदेशक, आई0सी0डी0एस0 निदेशालय, बिहार, पटना के पत्रांक 1382 दिनांक 27.05.2016 से मंतव्य उपलब्ध कराया गया है जो निम्नवत् हैंः-
''संचालन पदाधिकारी-सह-अपर समाहत्र्ता, वि0जॉच, सारण, छपरा के पत्रांक 4मु0 दिनांक 05.06.2014 द्वारा श्री राजन कुमार, निलंबित कार्यालय परिचारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रतिवेदन निदेशालय को प्राप्त हुआ। श्री राजन कुमार के विरूद्ध प्रपत्र "क" में तीन गंभीर आरोप लगाये गये थे, जिनमें संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रथम दो गंभीर आरोपों को प्रमाणित पाया गया। आरोप प्रमाणित होने के क्रम में हीं श्री कुमार को वृहत दंण्ड देने के क्रम में स्पष्टीकरण की गई, जिसके प्रत्युत्तर में श्री राजन कुमार द्वारा दिनांक 14.08.2015 को स्पष्टीकरण का जबाब दिया गया है।
स्पष्टीकरण के सम्यक् अवलोकन से यह पाया गया है कि श्री राजन कुमार द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन प्रक्रिया मे ही दोष निर्धारण करने का प्रयास किया गया है, जबकि उनके द्वारा अवैध वसूली एव ंअन्य के संबंध में कोई समीचीन तथ्य उपलब्ध नही कराये गये है। उल्लेखनीय है कि जिला पदाधिकारी, गोपालगंज के द्वारा दिनांक 24.06.2013 को दूरभाष पर प्राप्त सूचना के आलोक में हीं श्री राजन कुमार एवं अन्य को कार्यालय में आंगनबाड़ी सेविकाओं से अवैध वसूली करते हुए पकड़े जाने के कारण गिरफ्तार कर न्यायायिक हिरासत मे ंभेजा गया था।
अतः श्री राजन कुमार, निलंबित कार्यालय परिचारी द्वारा दिनांक 14.08.2015 का प्रस्तुत स्पष्टीकरण भ्रामक एवं स्वीकार योग्य नही है।''
अतः श्री राजन कुमार, कार्यालय परिचारी, बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे के विरूद्ध प्रपत्र "क" में गठित आरोप, विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन, संचालन पदाधिकारी के जॉच प्रतिवेदन के आधार पर विभाग द्वारा श्री कुमार को निर्गत द्वितीय कारण पृच्छा, श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में स्पष्टीकरण16 Rबहार गजट, 30 नव!बर 2016 एवं उक्त स्पष्टीकरण पर प्राप्त विभागीय मंतव्य पर सम्यक रूप से की गई विवेचना के उपरांत आरोपी श्री कुमार के विरूद्ध गठित प्रथम दो गंभीर आरोप प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियत्रंण एव अपील) नियमावली, 2005 (यथा संशोधित, 2007) के भाग- v के नियम-14(xi) के अनुरूप वृहत शास्ति के योग्य है।
अतः मैं राहुल कुमार (भा0प्र0से0), जिला पदाधिकारी, गोपालगंज बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियत्रंण एव अपील) नियमावली, 2005 (यथा संशोधित, 2007) के भाग- v के नियम-14(xi) के तहत् श्री राजन कुमार, कार्यालय परिचारी, बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे को आदेश निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्त करता हूॅ।
श्री राजन कुमार, कार्यालय परिचारी, बाल विकास परियोजना कार्यालय, थावे से संबंधित विवरणी निम्नप्रकार हैः- 1. नाम- श्री राजन कुमार 2. पिता का नाम- गुन्जेश्वरी शरण 3. पदनाम- कार्यालय परिचारी 4. जन्म तिथि- 25.02.1961 5.नियुक्ति तिथि- 28.01.1986 6. वेतनमान- पे बैण्ड 5200-20200, ग्रेड पे0-1800 7. समूह- "घ" 8. स्थायी पता- शरण निवास नं0-01, ग्राम-मोतिहारी, पो0-मोतिहारी, जिला -मोतिहारी।
आदेश से,
(ह॰) अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी, गोपालगंज।
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