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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 21 December 2016

Published 21 December 2016

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2016-12-21.51
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

ॢबह(cid:4)र गजट

ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 30 अ(cid:20)हायण 1938 (श0) सं(cid:8)या 51 पटना, बुधवार, ———————— 21 #दस%बर 2016 (ई0) (वषय-सूची पृ-ठ भाग-1—(cid:1)नयुि2त, पद4थापन, बदल(cid:15), शि2त, छु 8ी और अ:य ;यि2तगत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—4वयंसेवक गु@मB के समादे-टाओं के आदेश।

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भाग-1-ख—मैG(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Kाओं के पर(cid:15)Kा-फल, कायMNम, छाOवृिPत Qदान, आ#द।

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भाग-1-ग—RशKा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Kाफल आ#द ---

भाग-2—Sबहार-राTयपाल और कायाMUयKB Vवारा (cid:1)नकाले गये (व(cid:1)नयम, आदेश, अWधसूचनाएं और (cid:1)नयम आ#द। 3-3 भाग-3—भारत सरकार, पिXचम बंगाल सरकार और उZच :यायालय के आदेश, अWधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राTय गजटB के उ]रण। ---

भाग-4—Sबहार अWध(cid:1)नयम ---

पृ-ठ भाग-5—Sबहार (वधान मंडल म^ पुर:4था(पत (वधेयक, उ2त (वधान मंडल म^ उप4था(पत या उप4था(पत `कये जानेवाले Qवर सRम(cid:1)तयB के Q(cid:1)तवेदन और उ2त (वधान मंडल म^ पुर:4थापन के पूवM QकाRशत (वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अWध(cid:1)नयम िजनपर रा-Gप(cid:1)त कb Tये-ठ अनुम(cid:1)त Rमल चुकb है। ---

भाग-8—भारत कb संसद म^ पुर:4था(पत (वधेयक, संसद म^ उप4था(पत Qवर सRम(cid:1)तयB के Q(cid:1)तवेदन और संसद म^ उप4था(पत Qवर सRम(cid:1)तयB के Q(cid:1)तवेदन और संसद म^ पुर:4थापन के पूवM QकाRशत (वधेयक। ---

भाग-9—(वcापन

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भाग-9-क—वन (वभाग कb नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—(cid:1)न(वदा सूचनाएं, पdरवहन सूचनाएं, :यायालय सूचनाएं और सवMसाधारण सूचनाएं इPया#द। ---

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पूरक

पूरक-क 4-102 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016

भ(cid:2)ग(cid:4)1

०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचना

16 दिसम्बर 2016

सं॰ 6/सं0-4-01/2016-4897/(वा0कर)—बिहार वित्त सेवा के अधोलिखित पदाधिकारियों को वाणिज्य-कर पदाधिकारी (9,300-34,800ग्रेड पे 5,400 रू0) के पद पर उनके नाम के सामने कॉलम-4 में अंकित तिथि से सेवा सम्पुष्ट किया जाता है :-

क्र0 सं0 पदाधिकारी का नाम वर्त्तमान पदस्थापन सम्पुष्टि की तिथि
1 2 3 4
1 श्रीमती इन्दु कुमारी म ुजफ्फरपुर पष्चिमी अंचल। 20.11.15
2 श्रीमती रीता सिंह अंकेक्षण भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर। 05.09.15
3 श्री बलदेव चौधरी समेकित जॉच चौकी, डोभी गया। 07.05.16
4 श्रीमती प्रतिमा कुमारी कदमकुऑ अंचल, पटना। 02.12.15
5 मो0 शब्बीर आलम समेकित जॉच चौकी, जलालपुर गोपालगंज। 20.11.15
6 श्री षिव नारायण पासवान तेधड़ा अंचल, तेघड़ा। 30.04.16
7 श्री मनीष कुमार गुप्ता शाहाबाद अंचल, शाहाबाद। 20.11.15
8 श्री विषाल कुमार गुप्ता पटना दक्षिणी अंचल, पटना। 11.12.15
9 श्री सच्चिदानन्द विष्वास लखीसराय अंचल, लखीसराय। 19.11.15
10 श्री वाल्मिकी कुमार समस्तीपुर अंचल, समस्तीपुर 18.12.15
11 श्री विजय कुमार पाठक पटना उत्तरी अंचल, पटना। 21.11.15
12 स ुश्री अंजु कुमारी प र्णियॉ अंचल, पूर्णियॉ। ू 10.12.15

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 40-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

3 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016

भ(cid:2)ग(cid:4)2

ॢबह(cid:2)र(cid:4)र(cid:2)Îयप(cid:2)ल jर क(cid:2)य(cid:2)Z8य¡9 ह(cid:2)र(cid:2) ०नक(cid:2)ल: गय: ॢव०नयम(cid:12) \द:श(cid:12) [०धस३चन(cid:2)e $ jर ०नयम \ॢद?

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचना

(शुद्धि-पत्र)

9 दिसम्बर 2016

सं॰ कौन/भी-109/2009-417/सी—विभागीय अधिसूचना संख्या कौन/भी-109/2009-416/सी, पटना, दिनांक 08.12.2016 के क्रमांक 2 में अंकित ''दो वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जा सकती है के स्थान पर दो वार्षिक वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है,'' पढ़ा जाय।

शेष यथावत्‌ रहेंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 40-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

4 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016

ॢबह(cid:4)र गजट

क(cid:4)

प३रक(cid:13)[(cid:15)(cid:16) (cid:17)(cid:4)०धक(cid:4)र(cid:20) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:17)क(cid:4)०शत

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सं॰ 08/नि॰था॰-11-13/2015,सा॰प्र॰-9945

सामान्य प्रशासन विभाग

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संकल्प

19 जुलाई 2016

श्री रविकान्त तिवारी, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-410/11) के विरुद्ध उप विकास आयुक्त, सारण (छपरा) के पद पर पदस्थापन के दौरान आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोपों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13 (2) सह पठित धारा-13 (1) (ई॰) के तहत विशेष निगरानी इकाई, पटना द्वारा कांड सं॰-02/15 दिनांक 20.12.2015 दर्ज करते हुए पत्रांक-1574 (अनु॰) दिनांक 22.12.2015 द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को संसूचित किया गया। 2. मामले की संवेदनशीलता एवं गम्भीरता को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के ज्ञापांक-183, दिनांक 06.01.2016 द्वारा श्री तिवारी को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया गया।

3. उपर्युक्त आरोपों के लिए अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर गठित एवं अनुमोदित प्रपत्र 'क' के आलोक में विभागीय पत्रांक-6936, दिनांक 16.05.2016 द्वारा श्री तिवारी से स्पष्टीकरण माँगा गया। इस क्रम में श्री तिवारी से प्राप्त स्पष्टीकरण दिनांक 14.06.2016 की समीक्षा में विरोधाभाषी तथ्य पाये गये।

4. तत्पश्चात्‌ यह निर्णय लिया गया कि मामले की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, निगरानी विभाग द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे।

5. श्री तिवारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

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सं॰ 08/नि॰था॰-11-07/2015,सा॰प्र॰-12687

——— संकल्प

19 सितम्बर 2016

श्री शिवशंकर प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-630/11) के विरुद्ध कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, राजगीर के पद पर पदस्थापन के दौरान राजगीर मलमास मेला वर्ष-2015 के बन्दोबस्ती में अनियमितता बरतने के आरोपों पर निगरानी थाना कांड सं॰ 55/2015, दिनांक 11.07.2015 दर्ज किये जाने, अनाधि—त रूप से कार्यालय से अनुपस्थित रहने तथा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को जाँच में सहयोग नहीं करने का तथ्य निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, गया प्रक्षेत्र, पटना5 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016 के पत्रांक-267, दिनांक 10.12.2015 एवं जिला पदाधिकारी, पटना के ज्ञापांक-08 मु॰, दिनांक 08.01.2016 द्वारा प्रतिवेदित हुआ।

2. मामले के संवेदनशीलता के मद्देनजर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2546, दिनांक 18.02.2016 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना का कार्यालय निर्धारित किया गया है। विधि विभाग के आदेश सं॰ 113, दिनांक 03.06.2016 द्वारा श्री प्रसाद के विरुद्ध अभियोजन की स्वी—ति प्रदान की गयी।

3. कालान्तर में श्री प्रसाद ने अपने निलंबनादेश के विरुद्ध माननीय पटना उच्च न्यायालय में याचिका (यथा सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-6774/16) दायर किया। जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश (दिनांक 04.07.2016) के अनुपालन में संकल्प ज्ञापांक-11060, दिनांक 12.08.2016 द्वारा निलंबनादेश (संकल्प ज्ञापांक-2546, दिनांक 18.02.2016) वापस लेते हुए दिनांक 12.08.2016 के प्रभाव से इन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में श्री प्रसाद का मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय, पटना निर्धारित किया गया।

4. जिला पदाधिकारी, नालन्दा के पत्रांक-617, दिनांक 23.06.2016 द्वारा उपर्युक्त आरोपों पर श्री प्रसाद के विरुद्ध आरोप, प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ। जिसके आलोक में विभागीय स्तर पर पुनर्गठित एवं अनुमोदित आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति पत्रांक-9933, दिनांक 19.07.2016 द्वारा श्री प्रसाद को भेजते हुए उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री प्रसाद ने अपने पत्रांक-शून्य, दिनांक 04.08.2016 एवं पत्रांक-शून्य, दिनांक 09.08.2016 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया।

5. आरोप, प्रपत्र 'क' एवं श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की विभागीय स्तर पर समीक्षा के उपरांत यह पाया गया कि राजस्व की क्षति से संबंधित इस गम्भीर मामले में आरोपित पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में आरोपवार स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इसके साथ हीं राजस्व वसूली के संबंध में भी उनके द्वारा सही ढंग से तथ्यों को स्पष्ट नहीं किया गया है। 6. अतएव सम्यक्‌ विचारोपरांत यह निर्णय लिया गया कि श्री शिवशंकर प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-630/11) से संबंधित उक्त मामले की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, विभागीय जाँच आयुक्त एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, नालन्दा द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे। 7. श्री शिवशंकर प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-630/11 (सम्प्रति निलंबित) से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

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सं॰ 08/आरोप-01-203/2014सा॰प्र॰-12457

——— संकल्प

12 सितम्बर 2016

श्री शालिग्राम साह, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-1021/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, काराकाट (रोहतास) सम्प्रति जन सम्पर्क पदाधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार, पटना के विरुद्ध इन्दिरा आवास आवंटन में अनियमितता संबंधी प्रतिवेदित आरोपों की जाँच हेतु विभागीय संकल्प ज्ञापांक-14796, दिनांक 11.09.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री साह के विरुद्ध गठित दो आरोपों में से आरोप सं॰-1 को प्रमाणित बताया गया। इस क्रम में जाँच प्रतिवेदन पर श्री साह से लिखित अभिकथन प्राप्त किया गया। आरोप, जाँच प्रतिवेदन एवं श्री साह से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा के उपरांत इन्दिरा आवास आवंटन में मार्गदर्शिका के निदेशों का उल्लंघन संबंधी प्रमाणित आरोप के लिए सम्यक्‌ विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7165, दिनांक 19.05.2016 द्वारा ''निन्दन (आरोप वर्ष-2008-09 के प्रभाव से) एवं दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' की शास्ति संसूचित की गयी।

उपर्युक्त दंडादेश के विरुद्ध श्री साह ने अपना पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 08.07.2016 समर्पित किया है। जिसमें उक्त दंडादेश को निरस्त करने हेतु किये गये अनुरोध में यह उल्लेख किया है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी, काराकाट के दौरान कई अन्य पदों के प्रभार में रहने के कारण उनपर अत्यधिक कार्यबोझ था तथा संसधानों की भी कमी थी। इन कारणों से उनके स्तर से हुई उक्त स्वाभाविक पर्यवेक्षकीय भूल क्षमा योग्य है।

श्री साह के अभ्यावेदन में निहित उक्त तथ्यों की सम्यक्‌ रूप से समीक्षा की गयी तथा यह पाया गया कि इन्दिरा आवास का आवंटन बी॰पी॰एल॰ सूची के आधार पर तैयार प्रतीक्षा सूची के अनुरूप किया जाता है। इस क्रम में आरक्षण कोटा का पालन करते हुए कम अंकों की प्राथमिकता के अनुसार क्रमवार इन्दिरा आवास आवंटन में यदि युक्ति युक्त कारणों से किसी व्यक्ति को उक्त लाभ से वंचित किया जाता है तो तत्संबंधी कारणों की प्रविष्टि अनिवार्य होती है। श्री साह का6 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016 पुनर्विलोकन अर्जी तथ्य आधारित एवं तार्किक प्रतीत नहीं होता है अतः उक्त आरोप से मुक्त करने एवं दंडादेश निरस्त करने संबंधी उनका अनुरोध स्वीकार योग्य नहीं है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर श्री साह द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को विचारोपरान्त अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7165, दिनांक 19.05.2016 द्वारा संसूचित दंड यथावत्‌ रखा जाता है।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

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सं॰ 08/आरोप-01-50/2014सा॰प्र॰-12448

——— संकल्प

12 सितम्बर 2016

श्री संजय प्रियदर्शी, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-483/2011, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, मुजफ्फरपुर सम्प्रति उप सचिव, —षि विभाग, बिहार, पटना के विरुद्ध खाद्यान्न उठाव के संबंध में गलत सूचना देने, व्ययगत कराने एवं उठाव एवं वितरण की समीक्षा एवं अनुश्रवण नहीं करने इत्यादि के प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7356, दिनांक 02.06.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रियदर्शी के विरुद्ध गठित कतिपय आरोपों को प्रमाणित बताया गया है। इस क्रम में प्रमाणित आरोपों पर श्री प्रियदर्शी से प्राप्त लिखित अभिकथन एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा के उपरांत सम्यक्‌ विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12506, दिनांक 25.08.2015 द्वारा तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।

उपर्युक्त दंडादेश के विरुद्ध श्री प्रियदर्शी ने अपना पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 11.09.2015 समर्पित किया है। श्री प्रियदर्शी ने उक्त दंडादेश को निरस्त करने हेतु पुनर्विलोकन में यह उल्लेख किया है कि उनके कार्यकाल में राज्य खाद्य निगम, मुजफ्फरपुर में खाद्यान्न का आवंटन एवं उठाव शत-प्रतिशत रहा इसके साथ ही सकल आय में भी वृद्धि हुई। गोदाम प्रबंधकों से नाजायज राशि वसूलने का आरोप गलत है तथा शहरी क्षेत्र के सहायक गोदाम प्रबंधक द्वारा नाजायज राशि वसूलने के तथ्य को अस्वीकार किये जाने संबंधी बयान को इसका आधार दर्शाया गया है। इसके साथ श्री प्रियदर्शी ने खाद्यान्न के शत-प्रतिशत उठाव नहीं होने एवं व्ययगत होने के लिए राज्य खाद्य निगम के दोष पूर्ण कार्य प्रणाली एवं मजदूरों के हड़ताल इत्यादि को भी जिम्मेवार बताया है।

पुनर्विलोकन आवेदन पर सम्यक्‌ रूप से विचार करते हुए पाया गया कि श्री प्रियदर्शी द्वारा प्रस्तुत तथ्य अतार्किक है एवं स्वीकार योग्य नहीं है। श्री प्रियदर्शी को दी गई शास्ति आरोप की प्र—ति के आलोक में अनुपातिक है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर श्री प्रियदर्शी द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को विचारोपरान्त अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12506, दिनांक 25.08.2015 द्वारा संसूचित दंड यथावत्‌ रखा जाता है।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

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सं॰ 08/वि॰प॰-04-02/2014,सा॰प्र॰-11425

——— संकल्प

23 अगस्त 2016

श्री उदय कुमार सिंह, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-213/2011, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, महुआ, जिला-वैशाली (सम्प्रति उप निदेशक, पंचायती राज, पटना प्रमंडल, पटना) के विरुद्ध सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु मकानों पर नम्बर प्लेट लगाने के कार्य में अपने स्तर से अनियमित आदेश दिये जाने के आरोपों से संबंधित माननीय स॰वि॰प॰, श्री उदय नारायण राय के ध्यानाकर्षण एवं उसपर सरकार द्वारा दिये गये वक्तव्य के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत श्री सिंह के विरूद्ध आरोप, प्रपत्र 'क' गठित किया गया। तत्पश्चात्‌ विभागीय पत्रांक-10070, दिनांक 13.07.2015 द्वारा उक्त आरोपों पर इनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इस क्रम में श्री सिंह ने अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक-67, दिनांक 30.07.2015) समर्पित किया।

2. श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण (उपर्युक्त आरोपों के संबंध में) अपर समाहर्त्ता, वैशाली के जाँच प्रतिवेदन एवं जिला पदाधिकारी, वैशाली से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा के उपरांत पाया गया कि मकानों पर नम्बर प्लेट लगाने के कार्य हेतु सरकार के स्तर से कोई दिशा-निदेश अथवा परिपत्र जारी नहीं हुआ था। जिला पदाधिकारी अथवा प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर से भी7 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016 इस तरह के कार्य के लिए उन्हें प्राधि—त नहीं किया गया था। इसके बावजूद श्री सिंह ने इस कार्य में व्यक्ति विशेष को सहयोग देने हेतु प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा थाना प्रभारी को निदेशित किया।

उक्त प्रमाणित आरोपों के आधार पर सम्यक्‌ विचारोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5397, दिनांक 13.04.2016 द्वारा श्री सिंह को निन्दन (आरोप वर्ष-2006-07 के प्रभाव से) एवं एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।

3. उक्त दंड को निरस्त करने हेतु श्री सिंह ने एक पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (पत्रांक-87, दिनांक 14.06.2016) समर्पित करते हुए उल्लेख किया है कि राज्य के अन्य जिलों में उक्त कार्य हेतु जो आदेश निर्गत किये गये थे उसी के सदृश्य उन्होंने अपने स्तर से पत्र निर्गत किया था। अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर उन्होंने उक्त कार्य पर तुरन्त रोक भी लगा दी। इस मामले में उनका निहित स्वार्थ नहीं था बल्कि सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु उन्होंने ऐसा किया था।

उपर्युक्त तथ्यों एवं दिनांक 31.01.2017 को अपनी वार्धक्य सेवानिवृत्ति के आधार पर श्री सिंह ने उक्त दंड निरस्त करने का अनुरोध किया है।

4. उपलब्ध अभिलेख एवं श्री सिंह के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा में यह पाया गया कि मकानों पर नम्बर प्लेट लगाने हेतु सरकार के स्तर से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया गया था। अन्य जिलें में इस कार्य हेतु दिये गये आदेश को दृष्टांत बनाकर आरोपित पदाधिकारी द्वारा जारी निर्देश को नियम संगत नहीं माना जा सकता है। उनके द्वारा जिस एन॰जी॰ओ॰ को उक्त कार्य दिया गया था वे विधि सम्मत रूप से इस हेतु अधि—त भी नहीं थे। एन॰जी॰ओ॰ द्वारा अनावश्यक रूप से उक्त कार्य हेतु ग्रामीणों से राशि ली गयी तथा मामले का संज्ञान होने पर जिला पदाधिकारी द्वारा कार्य पर रोक लगाने का निदेश दिया गया। इसके पश्चात्‌ आरोपित पदाधिकारी द्वारा उक्त कार्य पर रोक लगायी गयी। इन्हीं आरोपों पर एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी सदन में आया।

इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी के स्तर से व्यक्ति विशेष के पक्ष में मनमाना आदेश जारी करने एवं संबंधित एन॰जी॰ओ॰ द्वारा ग्रामीणों से अवैध रूप से नम्बर प्लेट के लिए राशि वसूली किये जाने की पुष्टि होती है।

5. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर श्री सिंह द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को विचारोपरान्त अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5397, दिनांक 13.04.2016 द्वारा संसूचित दंड यथावत्‌ रखा जाता है।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।

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सं॰ 08/आरोप-01-77/2015,सा॰प्र॰-12389

——— संकल्प

9 सितम्बर 2016

श्रीमती रंजना कुमारी, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-435/11) के विरुद्ध जिला प्रबंधन राज्य खाद्य निगम, दरभंगा के पद पर पदस्थापन के दौरान अधिप्राप्ति किये गये गेहूँ के निलामी के उपरांत राशि की वसूली में लापरवाही एवं अनियमितता बरतने के आरोपों से आच्छादित प्रपत्र 'क' बिहार स्टेट फुड एण्ड सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लि॰, पटना के पत्रांक-7138, दिनांक 09.06.2016 द्वारा उपलब्ध कराया गया है।

2. उक्त के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित एवं अनुमोदित आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए पत्रांक-9932, दिनांक 19.07.2016 द्वारा श्रीमती रंजना कुमारी से स्पष्टीकरण माँगी गयी, जो निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी अप्राप्त रहा।

3. वर्णित तथ्यों एवं प्रतिवेदित आरोप की विभागीय स्तर पर समीक्षा के उपरांत यह पाया गया कि अधिप्राप्ति किये गये गेहूँ के निलामी में अनियमितता एवं राजस्व की क्षति का यह एक गम्भीर मामला है।

4. तत्पश्चात्‌ सम्यक्‌ विचारोपरांत यह निर्णय लिया गया कि श्रीमती रंजना कुमारी, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-435/11) से संबंधित उक्त मामले की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, दरभंगा द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे। प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर स्वयं आरोपों की जाँच करेंगे।

5. श्रीमती रंजना कुमारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।8 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016

सं॰ 08/आरोप-01-48/2014,सा॰प्र॰-12394

——— संकल्प

9 सितम्बर 2016

श्री राजेश रंजन, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-789/11) के विरूद्ध प्रखंड विकास पदाधिकारी, हसनपुर (समस्तीपुर) के पद पर पदस्थापन काल से संबंधित इन्दिरा आवास योजना एवं इन्दिरा आवास उन्नयन योजना की राशि गबन करने का आरोप प्रतिवेदित हुआ। इस संबंध में श्री रंजन के विरूद्ध हसनपुर थाना कांड सं॰-83/11, दिनांक 16.09.2011 भी दर्ज होने एवं वरीय उप समाहर्त्ता, लखीसराय (तत्समय) के पद से दिनांक 05.09.2011 से अनधि—त रूप से अनुपस्थित रहने की सूचना जिला पदाधिकारी, लखीसराय के पत्रांक-486, दिनांक 13.06.2012 द्वारा प्राप्त हुई। उक्त आरोपों की गम्भीरता के मद्देनजर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11016, दिनांक 02.07.2013 द्वारा श्री रंजन को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर निर्धारित किया गया।

2. विभागीय पत्रांक-18548, दिनांक 05.12.2013 एवं स्मार पत्रांक-17429, दिनांक 18.12.2014 द्वारा जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर से श्री रंजन के विरूद्ध इन्दिरा आवास योजना की राशि गबन से संबंधित आरोपों पर आरोप, प्रपत्र 'क' माँगा गया, जिसके अनुपालन में उक्त स्तर से पत्रांक-12, दिनांक 05.01.2015 द्वारा आरोप, प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ। उक्त थाना कांड में विधि विभाग के आदेश सं॰-01, दिनांक 09.01.2015 द्वारा श्री रंजन के विरूद्ध अभियोजन की स्वी—ति प्रदान की गयी।

3. जिला स्तर से प्राप्त आरोप पत्र की समीक्षा के उपरांत विभागीय पत्रांक-2857, दिनांक 24.02.2015 द्वारा जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर से श्री रंजन के विरूद्ध प्रतिवेदित गबन की कार्य प्रणाली के संबंध में सूचना माँगी गयी। 4. तत्पश्चात्‌ जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर के पत्रांक-125, दिनांक 27.01.2016 द्वारा गबन की कार्य प्रणाली के संबंध में वांछित सूचना उपलब्ध करायी गयी जिसके आधार पर विभागीय स्तर पर पुनर्गठित एवं अनुमोदित प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए पत्रांक-4027, दिनांक 15.03.2016 द्वारा श्री रंजन से स्पष्टीकरण माँगी गयी। इसके प्रत्युत्तर स्वरूप श्री रंजन का एक अभ्यावेदन (दिनांक 06.04.2016) प्राप्त हुआ जिसके द्वारा उन्होंने स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु कतिपय अतिरिक्त कागजातों की माँग की। श्री रंजन से स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा।

5. आरोप की गम्भीरता को देखते हुए सम्यक्‌ विचारोपरांत यह निर्णय लिया गया कि श्री राजेश रंजन, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-789/11 से संबंधित उक्त मामले की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, दरभंगा एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे। चूँकि आरोप एक बड़ी राशि के गबन का है अतः जाँच कार्य प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा स्वयं की जायगी।

6. श्री रंजन से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।9 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016

सं॰ 5 नि0गो0वि0 (1) 08/2012-397नि॰गो॰

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

——— संकल्प

8 दिसम्बर 2016

विषयः- डा0 राजेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, नवगछियॉ, भागलपुर (सम्प्रति निलंबित रक्षित पशु चिकित्सा पदाधिकारी, सहरसा) मुख्यालय क्षेत्राीय निदेशक, गया को सरकारी से सेवा से बर्खास्त किये जाने के संबंध में।

डा0 राजेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, नवगछियॉ, भागलपुर सम्प्रति निलंबित रक्षित पशु चिकित्सा पदाधिकारी, सहरसा, बिहार, मुख्यालय क्षेत्राीय निदेशक, गया, बिहार पशुपालन सेवा वर्ग-2 (मूल स्तर) वरीयता क्रमांक-1618, जन्म तिथि 16.06.1958, नियुक्ति तिथि 15.02.1982, सेवानिवृति तिथि 30.06.2018 को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने के कारण निगरानी विभाग के धावा दल द्वारा उनके विरुद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-40/2008 दिनांक 08.07.2008 दर्ज किया गया तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9 (2) (क) के तहत पूरी हिरासत अवधि के लिए विभागीय आदेश 256 नि0गो0 दिनांक 28.07.2008 के द्वारा निलंबित किया गया एवं जेल से रिहा होने के पश्चात्‌ विभागीय आदेश-465 नि0गो0 दिनांक 04.12.2009 के द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (3) (1) के तहत डा0 प्रसाद को निलंबन मुक्त मानते हुए उनके द्वारा दिनांक 22.10.2008 को समर्पित योगदान स्वीकार नहीं किया गया तथा विभागीय आदेश-465 नि0गो0 दिनांक 04.12.2009 के द्वारा ही पुनः अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया। विभागीय संकल्प-214 नि0गो0 दिनांक 30.05.2011 द्वारा डा0 प्रसाद के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत समर्पित जांच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी के विरूद्ध आरोप को न्यायिक कार्रवाई में ही प्रमाणित / अप्रमाणित किया जाना श्रेयस्कर बताते हुए आरोपी के विरुद्ध लगे आरोप को प्रमाणित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय आदेश ज्ञापांक-379 नि0गो0 दिनांक 26.11.2012 के द्वारा विभागीय कार्यवाही से मुक्त करते हुए उन्हें निलंबन मुक्त करने का आदेश निर्गत किया गया जबकि विभागीय कार्यवाही समाप्त करने संबंधी निर्णय नहीं हो सका था।

विभागीय पत्राांक-24 नि0गो0 दिनांक 29.01.2016 के द्वारा डा0 प्रसाद से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। डा0 प्रसाद द्वारा दिनांक-12.02.2016 को समर्पित लिखित अभिकथन में निगरानी विभाग द्वारा pre trap memorandum and post trap memorandum को ही गलत बतलाया गया है और उल्लेख किया गया है कि post trap memorandum में उन्हें कार्यालय परिसर के पास कदम्ब के वृक्ष के पास से गिरफ्तारी एवं तलाशी की बात उदधृत किया गया है। जबकि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा माननीय न्यायालय में समर्पित साक्ष्य में गिरफ्तारी कार्यालय परिसर के आगे पेट्रोल पम्प परिसर में बताया गया है जो अपने आप में विरोधाभासी है और विभागीय कार्यवाही में जांच पदाधिकारी द्वारा उनके विरुद्ध लाए गये आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया है और इस आधार पर उन्हें विभागीय कार्रवाई से मुक्त करने का अनुरोध आरोपित पदाधिकारी द्वारा किया गया है।

आरोपित पदाधिकारी डा0 प्रसाद द्वारा उनके विरुद्ध गठित सरकारी सेवक के आचरण हेतु निर्धारित मानदण्डों के विरुद्ध आचरण करते हुए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के तथ्य पर कोई लिखित अभिकथन प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस प्रकार जिन असहमति के बिंदु पर उनसे लिखित अभिकथन की अपेक्षा थी उन्हें छोड़कर अन्य तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार इनका लिखित अभिकथन स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।

वर्णित परिस्थिति में आरोपित पदाधिकारी के विरुद्ध रिश्वत लेते रंगे हाथ पकडे़ जाने जैसे भ्रष्टाचार के मामले में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्राण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14 (xi) के आलोक में सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया जिसपर माननीय मुख्य मंत्राी का अनुमोदन प्राप्त है।

डा0 राजेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, नवगछियॉ, भागलपुर सम्प्रति निलंबित रक्षित पशु चिकित्सा पदाधिकारी, सहरसा, बिहार, मुख्यालय क्षेत्राीय निदेशक, गया केा इस आदेश के निर्गत होने की तिथि से निलंबन मुक्त करते10 Sबहार गजट, 21 #दस%बर 2016 हुए सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाता है। इस आदेश के निर्गत होने की तिथि से डा0 प्रसाद का इस विभाग में ग्रहणाधिकार नहीं रहेगा और निलंबन अवधि में प्राप्त जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्रा में प्रकाशित किया जाए एवं इसकी सूचना संबंधित पदाधिकारी को दी जाय।

नामः- डा0 राजेन्द्र प्रसाद

पदनामः- तत्कालीन भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, नवगछियॉ, भागलपुर (सम्प्रति निलंबित रक्षित पशु चिकित्सा पदाधिकारी, सहरसा) मुख्यालय क्षेत्राीय निदेशक, गया

जन्मतिथिः- 16.06.1958

विभाग में योगदान देने की तिथि-15.02.1982

सेवा निवृति तिथिः-30.06.2018

वरीयता क्रमांकः- 1618,

पताः-ग्राम/मुहल्ला-पिपरा (चौरम),

पो0-केशवनगर, थाना-चौथम जिलाः-खगड़िया, बिहार

बिहार- राज्यपाल के आदेश से,

वीरेन्द्र कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 21 December 2016. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2016-12-21.51/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2016-12-21.51.