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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 06 January 2017

Published 06 January 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-01-06.4
Languages
English, Hindi

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पटनापटनापटनापटना, शुबशुबशुबशुबवारवारवारवार, 6666 जनवर!जनवर!जनवर!जनवर! 2017

जल संसाधन विभाग

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अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

21 21 21 21 दिसम्बर 2016दिसम्बर 2016दिसम्बर 2016दिसम्बर 2016

सं0 22/नि0सि0(ल0सि0)-05-04/2013/2598

सि0(ल0सि0)-05-04/2013/2598—श्री महेश रजक (आई0 डी0-4589), सहायक अभियंता के श्री महेश रजक (आई0 डी0-4589), सहायक अभियंता के विरूद्ध इनके द्वारा नलकूप प्रमण्डल, खगड़िया के वर्ष 2010-11 के पदस्थापन काल में मुख्यमंत्री जिला विकास योजना विरूद्ध इनके द्वारा नलकूप प्रमण्डल, खगड़िया के वर्ष 2010-11 के पदस्थापन काल में मुख्यमंत्री जिला विकास योजना विरूद्ध इनके द्वारा नलकूप प्रमण्डल, खगड़िया के वर्ष 2010-11 के पदस्थापन काल में मुख्यमंत्री जिला विकास योजना

के निर्माण में बरती गयी अनियिमतताओं के लिए अन्तर्गत खगड़िया जिला के खगड़िया प्रखण्ड के अनाज गोदाम के निर्माण में बरती गयी अनियिमतताओं के लिए अन्तर्गत खगड़िया जिला के खगड़िया प्रखण्ड के अनाज गोदाम

15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक निम्नांकित आरोपोें को गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 287 दिनांक 28.01.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक निम्नांकित आरोपोें को गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 287 दिनांक 28

(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयीः- (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयीः- (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयीः-

(i) अनाज गोदाम का निर्माण प्राक्कलन के अनुसार नहीं होना, फर्श निर्माण कार्य घटिया होना, प्लीन्थ लेवेल निर्माण प्राक्कलन के अनुसार नहीं होना, फर्श निर्माण कार्य घटिया होना, प्लीन्थ लेवेल के नीचे भरी गयी मिट्‌टी का पर्याप्त संपीडन नहीं करना तथा फर्श का टूटा पाया जाना। के नीचे भरी गयी मिट्‌टी का पर्याप्त संपीडन नहीं करना तथा फर्श का टूटा पाया जाना।

(ii) जी0 एस0 शीट रूफिंग के स्वीकृति के विरूद्ध कम दर पर भुगतान किये जाने से चदरा का कार्य ) जी0 एस0 शीट रूफिंग के स्वीकृति के विरूद्ध कम दर पर भुगतान किये जाने से चदरा का कार्य ) जी0 एस0 शीट रूफिंग के स्वीकृति के विरूद्ध कम दर पर भुगतान किये जाने से चदरा का कार्य तकनीकी दृष्टिकोण से सही परिलक्षित नहीं होना।

ी दृष्टिकोण से सही परिलक्षित नहीं होना।

(iii) ससमय स्थल निरीक्षण कर संवेदक को आवश्यक दिशा निर्देश नहीं देना।

) ससमय स्थल निरीक्षण कर संवेदक को आवश्यक दिशा निर्देश नहीं देना।

विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी सह मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के पत्रांक विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी सह मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के पत्रांक विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी सह मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद के पत्रांक 134 दिनांक 27.01.16 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी श्री महेश रजक के बचाव बयान के आलोक 16 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोपित पदाधिकारी श्री महेश रजक के बचाव बयान के आलोक में इनके विरूद्ध उपर्युक्त तीनों आरोपों को प्रमाणित नहीं होने का निष्कर्ष प्रतिवेदित किया गया। में इनके विरूद्ध उपर्युक्त तीनों आरोपों को प्रमाणित नहीं होने का निष्कर्ष प्रतिवेदित किया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित उक्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित उक्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित उक्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवंसमीक्षोपरान्त निम्नांकित तथ्य पाये गयेः- नांकित तथ्य पाये गयेः- 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 6 जनवर! 2017 (i) टूटे फर्श की मरम्मति करा लिये जाने, प्राक्कलन के अनुसार प्लीन्थ लेवेल की उँचाई जमीन से 7 फीट रखने, प्राक्कलन में उपबंधित बालू से प्लीन्थ तक भराई कर लेने से संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अनाज गोदाम का निर्माण प्राक्कलन के अनुसार नहीं होने, फर्श निर्माण कार्य घटिया होने, प्लीन्थ लेवेल के नीचे भरी गयी मिट्‌टी का पर्याप्त संपीडन हीं करने तथा फर्श के टूटे पाये जाने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

(ii) 1.00 एम0एम0 चदरा की अनुपलब्धता के कारण 0.8 एम0एम0 का टाटा मेक गुणवत्तापूर्ण चदरा का उपयोग कर अनाज गोदाम को भंडारण लायक उपयोगी बनाने तथा तदनुरूप कम दर पर भुगतान करने से एवं गोदाम विगत पाँच वर्षों से सुचारू रूप से पूर्णरूपेण कार्यरत होने से संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए जी0 एस0 शीट रूफिंग के स्वीकृत दर के विरूद्ध कम दर पर भुगतान किये जाने से चदरा का कार्य तकनीकी दृष्टिकोण से सही नहीं होने का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

(iii) गोदाम का निर्माण कार्य प्रारम्भ होने की तिथि 08.01.09 तथा कार्य समाप्ति की तिथि म1.03.09 थी। संवेदक द्वारा निर्धारित तिथि तक कार्य पूरा नहीं करने पर श्री रजक द्वारा सहायक अभियंता के रूप में समय पर कार्य पूरा कराने के लिए संवेदक को आवश्यक दिशा-निर्देश देने से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। मात्र कार्य समाप्ति की तिथि व्यतीत हो जाने के लगभग तीन माह बाद पत्रांक 69 दिनांक 06.07.10 द्वारा त्रुटिपूर्ण कार्य को सुधारने का निर्देश दिया गया है एवं पत्रांक 93 दिनांक 07.09.10 द्वारा प्लास्टर का कार्य एवं रंग-रोगन कार्य को सुधारने तथा निर्माण के लिए संवेदक को निर्देश दिया गया जिसे विलम्बित पाया गया है। समय पर श्री रजक, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये जाने से गोदाम निर्माण का कार्य निर्धारित विशिष्टि के अनुरूप ससमय पूर्ण कराया जा सकता था तथा समय पर गोदाम के निर्माण की स्थिति में इसे मार्च, 2011 के पूर्व खाद्य निगम को हस्तांतरित किया जा सकता था। समय पर कार्य कराने के लिए कार्य भार का अधिक होना कारक नहीं माना जा सकता तथा ससमय स्थल निरीक्षण कर संवेदक को आवश्यक दिशा निर्देश नहीं देने के बिन्दु पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति व्यक्त की गयी।

उपर्युक्त पाये गये तथ्यों के आलोक में सरकार के स्तर पर लिए गये निर्णय के अनुसार संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से एकमात्र असहमति के बिन्दु को उल्लिखित करते हुए श्री महेश रजक, सहायक अभियंता से विभागीय पत्रांक 993 दिनांक 30.05.16 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

श्री महेश रजक, सहायक अभियंता के पत्रांक 18 दिनांक 31.08.16 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में निम्नांकित तथ्य मुख्य रूप से समर्पित किया गयाः-

(i) अत्यधिक कार्य भार के बावजूद सचेत रहकर निरीक्षण करते हुए लिखित एवं मौखिक रूप निदेश संवेदक को दिया गया तथा निश्चित अंतराल पर भौतिक रूप से अथवा दूरभाष पर कार्यपालक अभियंता को कार्य की प्रगति से अवगत कराता गया। साथ ही यथासंभव कार्यपालक अभिंयता के साथ भी स्थल निरीक्षण में शामिल रहा। इनके द्वारा समय-समय पर अवगत कराये जाने के पश्चात कार्यपालक अभियंता एवं इनके द्वारा संवेदक को सचेत करने से संबंधित निम्नांकित विवरण प्रस्तुत किया गया हैः-

(क) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 132 दिनांक 12.02.09 द्वारा कार्य की गति बढ़ाने हेतु संवेदक को निदेश दिया गया है जिसमें उनके पत्रांक 70 दिनांक 09.02.09 का भी संदर्भ है एवं उक्त पत्र में प्रभारी अभियंता के निदेश की अवहेलना करते हुए संवेदक द्वारा मनमाने ढंग से कार्य कराये जाने का तथ्य अंकित है।

(ख) इनके द्वारा कार्य की धीमी प्रगति से अवगत कराने पर कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 169 दिनांक 04.03. 09 द्वारा संवेदक को कार्य की गति बढ़ाने हेतु निदेश दिया गया तथा मौखिक रूप से कार्य की गति धीमी रहने एवं3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 6 जनवर! 2017 समय-सीमा की समाप्ति के पश्चात भी कार्य अधूरा रहने की सूचना देने पर कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 284 दिनांक 21.04.09 द्वारा संवेदक को निदेश दिया गया।

(ग) कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 615 दिनांक 18.08.09 द्वारा कार्य की गति बढ़ाकर दिनांक 15.09.09 तक कार्य पूरा करने का निदेश संवेदक को दिया गया एवं कार्रवाई करने की चेतावनी भी दिया गया। पुनः पत्रांक 59 दिनांक 21.01.10 द्वारा संवेदक को कार्य समाप्त करने का निदेश संवेदक को दिया गया।

(घ) तत्पश्चात इनके पत्रांक 69 दिनांक 06.07.10 द्वारा त्रुटिपूर्ण कार्य में सुधार हेतु निदेश दिया गया एवं पत्रांक 93 दिनांक 07.09.10 द्वारा त्रुटिपूर्ण कार्य का निवारण करते हुए कार्य समाप्ति की सूचना दी गयी।

(ड़) आरोप सं0-3 त्रृटिपूर्ण कार्य से संबंधित निरीक्षण की अपर्याप्तता पर आधारित रहने के कारण उपर्युक्त पत्रों का संदर्भ नहीं दिया गया था।

श्री महेश रजक, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित उपर्युक्त तथ्योें एवं साक्ष्यों की समीक्षा पुनः सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त निम्न तथ्य पाये गयेः-

कार्यपालक अभियंता के संदर्भित पत्रों से परिलक्षित होता है कि संवेदक के कार्यकलाप की सूचना श्री महेश रजक, सहायक अभियंता द्वारा कार्यपालक अभियंता को दिया गया है। कार्यपालक अभियंता द्वारा कार्यों का एकरारनामा किये जाने के कारण सामान्यतः कार्य के दौरान कार्यपालक अभियंता द्वारा ही संवेदक से आवश्यक पत्राचार किया जाता है। सहायक अभियंता का दायित्व कार्य की प्रगति एवं गुणवत्ता तथा अन्य पहलू की लिखित अथवा मौखिक सूचना अपने नियंत्री पदाधिकारी को देना है। कार्यपालक अभियंता के पत्रों से श्री रजक का कथन ''कि स्थल निरीक्षणोपरान्त कार्य के कार्यान्वयन के दौरान कार्य की प्रगति एवं अन्य पहलुओं से कार्यपालक अभियंता को अवगत कराया गया है'' स्वीकार योग्य पाया गया है तथा स्थल निरीक्षण नहीं करने एवं कार्य को ससमय पूर्ण कराने हेतु संवेदक को आवश्यक निदेश नहीं देने का आरोप इनके विरूद्ध प्रमाणित नहीं होता है।

उपर्युक्त पाये गये तथ्यों के आलोक में सरकार के स्तर पर श्री महेश रजक, सहायक अभियंता को आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री महेश रजक, सहायक अभियंता को आरोप मुक्त किया जाता है।

उक्त आदेश श्री महेश रजक, सहायक अभियंता को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जीउत सिंह,

सरकार के उप-सचिव।

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Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 06 January 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-01-06.4/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-01-06.4.