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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 06 January 2017

Published 06 January 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-01-06.7
Languages
English, Hindi

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सरकारसरकारसरकारसरकार (cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत

ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत 16 पौषपौषपौषपौष 1938 (शशशश0)

((((संसंसंसं0 पटनापटनापटनापटना 07) ) ) ) पटनापटनापटनापटना

पटनापटनापटनापटना, शुबशुबशुबशुबवारवारवारवार, 6666 जनवर!जनवर!जनवर!जनवर! 2017

जल संसाधन विभाग

---------

अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

25252525 अक्तूबरअक्तूबरअक्तूबरअक्तूबर 2016201620162016

सं0 22/नि0सि0(डि0)-14-08/2014/23

न0सि0(डि0)-14-08/2014/2325—श्री गोविन्द प्रसाद (आई0 डी0 -3948), तत्कालीन अवर श्री गोविन्द प्रसाद (आई0 डी0 -3948), तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॅा तट नहर अवर प्रमण्डल सं0-3, मल्हीपुर, शि0-चेनारी द्वारा स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित प्रमण्डल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॅा तट नहर अवर प्रमण्डल सं0-3, मल्हीपुर, शि0-चेनारी द्वारा स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित प्रमण्डल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॅा तट नहर अवर प्रमण्डल सं0-3, मल्हीपुर, शि0-चेनारी द्वारा स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता एवं रहने, सरकारी कार्य का निष्पादन नहीं करने, नियंत्रण पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता एवं रहने, सरकारी कार्य का निष्पादन नहीं करने, नियंत्रण पदाधिकारी नियंत्रण पदाधिकारी के विरूद्व झूठा एवं अनर्गल आरोप लगाने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय नियंत्रण पदाधिकारी के विरूद्व झूठा एवं अनर्गल आरोप लगाने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय नियंत्रण पदाधिकारी के विरूद्व झूठा एवं अनर्गल आरोप लगाने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-754 दिनांक 19.06.14 द्वारा निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) 14 द्वारा निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) 14 द्वारा निलंबित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) 14 द्वारा निम्नांकित आरोपों के नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभा ी 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय अधिसूचना सं0-2064 दिनांक 23.12.14 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः- लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गईः-

(i) स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित रहने एवं सरकारी कार्य का निष्पादन कर घर बैठे वेतन पाने की प्रवृति। ) स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित रहने एवं सरकारी कार्य का निष्पादन कर घर बैठे वेतन पाने की प्रवृति। ) स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित रहने एवं सरकारी कार्य का निष्पादन कर घर बैठे वेतन पाने की प्रवृति। (ii) नियंत्रण पदाधिकारी के आ ) नियंत्रण पदाधिकारी के आदेश की हमेशा अवहेलना करना एवं पत्राचार में उलझाए रखकर दो वषो

देश की हमेशा अवहेलना करना एवं पत्राचार में उलझाए रखकर दो वर्षों के सेवाकाल में दुर्गावती जलाशय योजना का कोई कार्य नहीं करना। सेवाकाल में दुर्गावती जलाशय योजना का कोई कार्य नहीं करना।

(iii) सरकारी कार्यों के निष्पादन में रूचि का अभाव एवं राजपत्रि

के निष्पादन में रूचि का अभाव एवं राजपत्रित पदाधिकारी के आचरण के प्रतिक

त पदाधिकारी के आचरण के प्रतिकूल झगड़ालू एवं अनुशासनहीनता का व्यवह

ालू एवं अनुशासनहीनता का व्यवहार करना।

गॅाठ कर शिविर में अराजकता की स्थिति पैदा करना एवं दुर्गावती नारी के असामाजिक तत्वों से सॅाठ-गॅाठ कर शिविर में अराजकता की स्थिति पैदा करना एवं दुर्गावती (iv) चेनारी के असामाजिक तत्वों से सॅाठ- जलाशय योजना के कार्यों के निष्पादन में बाधा उत्पन्न करना।

के निष्पादन में बाधा उत्पन्न करना।

(v) नियंत्री पदाधिकारी के विरूद्व झूठे एवं अनर्गल आरोप लगाकर वरीय पदाधिकारियों से पत्राचार कर ) नियंत्री पदाधिकारी के विरूद्व झूठे एवं अनर्गल आरोप लगाकर वरीय पदाधिकारियों से पत्राचार कर उन्हें ) नियंत्री पदाधिकारी के विरूद्व झूठे एवं अनर्गल आरोप लगाकर वरीय पदाधिकारियों से पत्राचार कर भयभीत कर बिना सरकारी कार्य निष्पादन के वेतन प्राप्त करने का प्रयास करना। भयभीत कर बिना सरकारी कार्य निष्पादन के वेतन प्राप्त करने का प्रयास करना।

14 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। श्री प्रसाद को विभागीय अधिसूचना सं0-1644 दिनांक 06 श्री प्रसाद को विभागीय अधिसूचना सं0-1644 दिनांक 06.11.14 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री गोविन्द प्रसाद द्वारा कोई बचाव बयान समर्पित नहीं किया गया। संचालन संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री गोविन्द प्रसाद द्वारा कोई बचाव बयान समर्पित नहीं किया गया। संचालन संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री गोविन्द प्रसाद द्वारा कोई बचाव बयान समर्पित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई एवं पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई एवं पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई एवं 15 द्वारा श्री प्रसाद से संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 2223 दिनांक 30 संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 2223 दिनांक 30.09.15 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारणपृच्छा की गई। द्वितीय कारण ृच्छा के प्रत्युत्तर में श्री प्रसाद द्वारा बताया गया कि 1,90,000/- (एक द्वितीय कारणपृच्छा की गई। द्वितीय कारणपृच्छा के प्रत्युत्तर में श्री प्रसाद द्वारा बताया गया कि 1,90,000/- (एक लाख नब्बे हजार रूपये) की सरकारी राशि के गबन के मामले को नहर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराने के योजना हित में लाख नब्बे हजार रूपये) की सरकारी राशि के गबन के मामले को नहर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराने के योजना हित में लाख नब्बे हजार रूपये) की सरकारी राशि के गबन के मामले को नहर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराने के योजना हित में2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 6 जनवर! 2017 खुलासा करने के कारण षड्‌यंत्र के तहत बन्दरबॅाट करनेवाले, उच्च रसूख वाले भयादोहन कर प्रत्यानुपातिक धनार्जन करने वाले भ्रष्ट तत्वों से सॅाठ-गॅाठ एवं मिलीभगत कर कतिपय आधारहीन एवं तथ्यहीन आरोपों का उल्लेख कर बिना Application of mind एवं Mensrea देखे ही विभागीय पत्रांक-8/विविध-10-05/2013-252 दिनांक 17.01.14 एवं 7/परि0-11-1004/12-331 दिनांक 07.04.14 द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरण का उत्तर अवर प्रमण्डल के पत्रांक 48 दिनांक 06.03.14 एवं 69 दिनांक 09.05.14 द्वारा समर्पित उत्तर की समीक्षा किए बिना एवं बिना उड़नदस्ता से जॅाच कराए प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोप मानकर विभागीय अधिसूचना सं0-754 दिनांक 19.06.14 द्वारा निलंबित कर दिया गया।

श्री प्रसाद पर प्रथम आरोप स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित रहने एवं सरकारी कार्य का निष्पादन न कर घर बैठे वेतन प्राप्त करने से संबंधित है परन्तु उनके द्वारा इस बिन्दु पर कुछ नहीं कहा गया है और न कोई साक्ष्य दिया गया है जिससे प्रमाणित हो सके कि वे अनुपस्थित नहीं रहे है और अपने कर्तव्यों का भली भॅाति निर्वहन किया गया है। अतः आरोप संख्या-1 प्रमाणित पाया गया। आरोप सं0-2 के प्रत्युत्तर में श्री प्रसाद द्वारा बताया गया कि अनुशासनिक प्राधिकार की राय में उनका (श्री प्रसाद) निलंबन पूर्णरूपेण अनुचित होने के कारण ही चार माह सतरह दिनों के पश्चात निलंबन से मुक्त कर दिया गया।

श्री प्रसाद पर द्वितीय आरोप नियंत्रण पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना एवं पत्राचार में उलझाए रखकर दो वर्षों के सेवाकाल में दुर्गावती जलाशय योजना का कोई कार्य नहीं करने से संबंधित है परन्तु उनके द्वारा अपने प्रत्युत्तर में निलंबन से मुक्त करने के स्थितियों की चर्चा की गई है। आरोप के संबंध में कोई तथ्य अथवा साक्ष्य नहीं दिया गया है जिससे इसका प्रतिवाद हो सकें।

अतः आरोप संख्या-2 प्रमाणित पाया गया। आरोप सं0-3 के प्रत्युत्त्तर में श्री प्रसाद द्वारा बताया कि पूर्णतः निर्दोष होने एवं निलंबित अवधि के पूरे वेतन तथा भत्ता पाने का हकदार होने के कारण निलंबित अवधि के पूरे वेतनादि के भुगतान हेतु दिनांक 13.11.14 को आवेदन दिया था। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 11 (निलंबन के पश्चात पुनः स्थापित किए जाने पर सेवा का निरूपण तथा वेतन भत्ता की अनुमान्यता) के अनुसार उन्हें (श्री प्रसाद) पूरा वेतन एवं भत्ता अनुमान्य है परन्तु आधारहीन एवं तथ्यहीन आरोप लगाकर उनके विरूद्व विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई जिसे निश्चित कालावधि में तार्किक परिणति तक नहीं पहुॅचाया गया।

श्री प्रसाद के विरूद्व आरोप सं0-3 सरकारी कार्यों के निष्पादन में रूचि का अभाव एवं राजपत्रित पदाधिकारी के प्रतिकूल आचरण करने एवं अनुशासनहीनता से संबंधित है परन्तु उनके द्वारा उक्त बिन्दुओं पर अपना प्रत्युत्तर न देकर निलंबन अवधि के वेतनादि भुगतान का मामला उठाते हुए विभागीय कार्यवाही के संचालन पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया है। निलंबन अवधि के वेतनादि के भुगतान के बिन्दु पर निर्णय बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 11 (5) के तहत विभागीय कार्यवाही के संचालन के पश्चात लिए गए निर्णय के उपरान्त किया जाता है। इस प्रकार श्री प्रसाद द्वारा उनके विरूद्व प्रमाणित आरोप के बिन्दु पर वस्तुतः कुछ नहीं कहा गया और न कोई साक्ष्य दिया गया।

अतः आरोप संख्या-3 प्रमाणित पाया गया। आरोप सं0-4 के प्रत्युत्तर में श्री प्रसाद द्वारा अधीक्षण अभियन्ता, उड़नदस्ता अंचल-2, पटना से प्राप्त 1,90,000/- (एक लाख नब्बे हजार रूपए) के गबन के मामले से संबंधित जॅाच प्रतिवेदन पर कार्रवाई नहीं होने की बात कही गई।

वस्तुतः उक्त मामला कार्रवाई के अन्तर्गत है और श्री प्रसाद द्वारा अपने विरूद्व प्रमाणित आरोप के प्रत्युत्तर में कुछ नहीं कहा गया है।

अतः आरोप संख्या-4 प्रमाणित पाया गया। आरोप सं0-5 के प्रत्युत्तर में श्री प्रसाद द्वारा मुख्यतः संचालन पदाधिकारी पर उनसे गलत लाभ प्राप्त करने की मंशा का आरोप लगाया गया तथा विभागीय कार्यवाही का संचालन सही तरीके से नहीं करने की बात कही गई। इसके साथ ही अपने वरीय एवं अधीनस्थ पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों पर विभिन्न तरह के आरोप लगाते हुए विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया।

श्री प्रसाद के विरूद्व आरोप सं0-5 नियंत्री पदाधिकारी के विरूद्व झूठे एवं अनर्गल आरोप लगाकर वरीय पदाधिकारियों से पत्राचार कर उन्हें भयभीत कर बिना कार्य निष्पादन के वेतन प्राप्त करने का प्रयास से संबंधित है जिसके प्रत्युत्तर में श्री प्रसाद द्वारा अपना पक्ष न रखकर संचालन पदाधिकारी, वरीय पदाधिकारी एवं अधीनस्थों के विरूद्व दोषारोपण किया गया जो आरोप सं0-5 को स्वतः प्रमाणित करता है।

श्री गोविन्द प्रसाद, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॅा तट नहर अवर प्रमण्डल सं0-3, मल्हीपुर, शि0-चेनारी के विरूद्व प्रमाणित आरोपों के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1109 दिनांक 15.06.16 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-

(i) निन्दन वर्ष 2013-14 (ii) दो वेतनवृद्वि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त संसूचित दण्ड के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया जिसमें मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया हैः-3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 6 जनवर! 2017 (i) विभागीय कार्यवाही का निष्पादन नियमानुसार नहीं किया गया है, उनके पक्ष को सुने बगैर आदेश पारित किया गया है।

(ii) निलंबन आदेश निर्गत होने की तिथि से तीन माह के भीतर आरोप पत्र गठित कर उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। विलम्ब से आरोप पत्र गठित किए जाने के संबंध में कारणों को अभिलेखित नहीं किया गया है। (iii) उनकी प्रोन्नति बाधित करने के उद्वेश्य से मिथ्या आरोप लगाकर आरोप पत्र निर्गत किया गया। विभिन्न तिथियों की अनुपस्थित होने के संदर्भ में कार्यपालक अभियन्ता द्वारा लगाया गया आरोप आधारहीन तथा तथ्यहीन है। (iv) उनके द्वारा सरकारी कार्यों का निष्पादन निष्ठा एवं तत्परतापूर्वक किया गया है। श्री प्रसाद के पुनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा में पाया गया कि श्री प्रसाद ने अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में विभागीय कार्यवाही के संचालन को नियम विरूद्व बताया है। उनका पक्ष सुने बगैर संचालन पदाधिकारी द्वारा मंतव्य अंकित किया गया है जो नैसर्गिक न्याय के प्रतिकूल है। संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन से विदित होता है कि श्री प्रसाद से बचाव बयान की मॅाग की गई थी तथा उन्हें आवश्यक कागजात विभागीय पत्रांक 483 दिनांक 18.02.15 द्वारा उपलब्ध कराया गया था किन्तु श्री प्रसाद आरोपित बिन्दुओं के संदर्भ में किसी प्रकार का बचाव बयान न देकर कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व 1,90,000/- रूपए बंदरबॅाट को उजागर करने की बात कही है। संचालन पदाधिकारी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि कई पत्रों से उन्हें अपना बचाव बयान साक्ष्य सहित उपलब्ध कराने का मौका दिया गया किन्तु वे अपना बचाव बयान साक्ष्य सहित उपलब्ध कराने का मौका दिया गया किन्तु वे अपना बचाव बयान उपलब्ध नहीं कराए, ऐसी स्थिति में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा अभिमत गठित किया गया है। अतः श्री प्रसाद का यह कहना कि उनका पक्ष सुने बगैर आदेश पारित किया गया है, स्वीकार योग्य नहीं है। अपने कर्तव्य से अनुपस्थित रहने के संबंध में श्री प्रसाद का कहना है कि वे हमेशा अपने कर्तव्य पर उपस्थित रहे हैं तथा सरकारी कार्यो का निष्पादन पूरी निष्ठा एवं तत्परता से किया है। उनकी प्रोन्नति बाधित करने के उद्वेश्य से उन्हें कर्तव्य से अनुपस्थित दिखाकर उनके विरूद्व प्रपत्र-''क'' गठित किया गया है। प्रपत्र-''क'' के साथ संलग्न साक्ष्य से स्पष्ट होता है कि श्री प्रसाद अपने कर्तव्य से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे हैं जिसके संदर्भ में कार्यपालक अभियन्ता द्वारा अनुपस्थिति अवधि के लिए इनसे विभिन्न तिथियों में स्पष्टीकरण किया गया है। अतः श्री प्रसाद का यह कथन कि वे अपने कर्तव्य पर लगातार उपस्थित रहे हैं, मान्य नहीं है।

अतएव सम्यक समीक्षोपरान्त श्री गोविन्द प्रसाद, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॅा तट नहर अवर प्रमण्डल सं0-3, मल्हीपुर, शि0-चेनारी द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0-1109 दिनांक 15.06.16 द्वारा संसूचित दण्ड के आलोक में प्रस्तुत पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए दण्ड को यथावत रखने का निर्णय सरकार के स्तर से लिया गया है।

सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री गोविन्द प्रसाद, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, दुर्गावती दायॅा तट नहर अवर प्रमण्डल सं0-3, मल्हीपुर, शि0-चेनारी के पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1109 दिनांक 15.06.16 द्वारा संसूचित दण्ड को यथावत रखा जाता है। उक्त निर्णय श्री प्रसाद को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

जीउत सिंह,

सरकार के उप-सचिव।

———— अधी)क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:1)बहार, पपपपटनाटनाटनाटना (cid:23)ारा ूकािशत एवं मु/ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 07-571+10-ड!0ट!0प ी0।

Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 06 January 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-01-06.7/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-01-06.7.