(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
ॢबह(cid:4)र गजट
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 28 पौष 1938 (श0) सं(cid:8)या 3 पटना, बुधवार, ———————— 18 जनवर(cid:15) 2017 (ई0) #वषय-सूची पृ'ठ भाग-1—(cid:1)नयुि,त, पद/थापन, बदल(cid:15), शि,त, छु 3ी और अ6य 7यि,तगत सूचनाएं। 2-4 भाग-1-क—/वयंसेवक गु<म> के समादे'टाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैC(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Gाओं के पर(cid:15)Gा-फल, कायIJम, छाKवृिLत Mदान, आNद।
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भाग-1-ग—OशGा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Gाफल आNद ---
भाग-2—Pबहार-राRयपाल और कायाISयG> Tवारा (cid:1)नकाले गये #व(cid:1)नयम, आदेश, अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम आNद। 5-5 भाग-3—भारत सरकार, पिVचम बंगाल सरकार और उXच 6यायालय के आदेश, अUधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राRय गजट> के उZरण। ---
भाग-4—Pबहार अUध(cid:1)नयम ---
पृ'ठ भाग-5—Pबहार #वधान मंडल म] पुर:/था#पत #वधेयक, उ,त #वधान मंडल म] उप/था#पत या उप/था#पत _कये जानेवाले Mवर सOम(cid:1)तय> के M(cid:1)तवेदन और उ,त #वधान मंडल म] पुर:/थापन के पूवI MकाOशत #वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अUध(cid:1)नयम िजनपर रा'Cप(cid:1)त क` Rये'ठ अनुम(cid:1)त Oमल चुक` है। ---
भाग-8—भारत क` संसद म] पुर:/था#पत #वधेयक, संसद म] उप/था#पत Mवर सOम(cid:1)तय> के M(cid:1)तवेदन और संसद म] उप/था#पत Mवर सOम(cid:1)तय> के M(cid:1)तवेदन और संसद म] पुर:/थापन के पूवI MकाOशत #वधेयक। ---
भाग-9—#वaापन
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भाग-9-क—वन #वभाग क` नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—(cid:1)न#वदा सूचनाएं, पbरवहन सूचनाएं, 6यायालय सूचनाएं और सवIसाधारण सूचनाएं इLयाNद। 6-6
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पूरक
पूरक-क 7-252 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017
भ(cid:2)ग(cid:4)1
०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $
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परिवहन विभाग
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अधिसूचनाएं
21 दिसम्बर 2016
सं 05/स्था0-146/2007-7424—प्रमंडलीय आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से प्राप्त अनुषंसा के आलोक में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा-213(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्रीमती कुमारी पुनीता श्रीवास्तव, उपनिदेषक(संयुक्त सचिव), खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संयुक्त आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार, मुजफ्फरपुर के कार्यों के निष्पादन हेतु अगले आदेष तक शक्ति प्रत्यायोजित करते हुए अपने कार्याें के अतिरिक्त संयुक्त आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार, मुजफ्फरपुर के कार्य सम्पादन हेतु प्राधिकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, संयुक्त सचिव।
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23 दिसम्बर 2016
सं 05/स्था0(डी0टी0ओ0)-30/2013-7443/परि0—श्री संजय कुमार, बि0प्र0से0, जिला परिवहन पदाधिकारी, भागलपुर की सेवा सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को वापस किये जाने के फलस्वरूप उत्पन्न रिक्ति के कारण श्री नजीर अहमद, बि0प्र0से0, जिला परिवहन पदाधिकारी, मुगेर को अपने कार्याें के अतिरिक्त जिला परिवहन पदाधिकारी, भागलपुर के पद का प्रभार अगले आदेष तक सौंपा जाता है।
2. मोटर वाहन अधिनियम , 1988 की धारा-213 (1)तथा बिहार मोटर वाहन करारोपण अधिनियम 1994 की धारा-3 का प्रयोग करते हुए उपरोक्त नवपदस्थापित जिला परिवहन पदाधिकारी, भागलपुर को जिला परिवहन पदाधिकारी की शक्तियॉ उनके प्रभार ग्रहण की तिथि से प्रदान की जाती है।
3. श्री अहमद को निदेष दिया जाता है कि वे अविलम्ब नवपदस्थापन वाले पद का प्रभार ग्रहण करना सुनिष्चित करेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
(ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।
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23 दिसम्बर 2016
सं 05/स्था0(डी0टी0ओ0)-30/2013-7446/परि0—जिला पदाधिकारी, बांका के पत्रांक-614 दिनांक 26.11.2016 द्वारा जिला परिवहन पदाधिकारी, बांका के पद पर पदस्थापन का अनुरोध किया गया और आदेष ज्ञापांक-2430 दिनांक-06.
12.2016 द्वारा उक्त पद का अतिरिक्त प्रभार श्री राम कुमार पोद्दार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, बांका को सौंपा गया है। जिला पदाधिकारी, बांका द्वारा की गई अंतरिम व्यवस्था के आलोक में श्री राम कुमार पोद्दार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, बांका को अपने कार्यों के अतिरिक्त जिला परिवहन पदाधिकारी, बांका के कार्याें के सम्पादन हेतु अगले आदेष तक प्राधिकृत किया जाता है।
2. मोटर वाहन अधिनियम , 1988 की धारा-213 (1)तथा बिहार मोटर वाहन करारोपण अधिनियम 1994 की धारा-3 का प्रयोग करते हुए उपरोक्त नवपदस्थापित जिला परिवहन पदाधिकारी, बांका को जिला परिवहन पदाधिकारी की शक्तियॉ उनके प्रभार ग्रहण की तिथि से प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
(ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।3 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017
सामान्य प्रशासन विभाग
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अधिसूचनाएं
8 नवम्बर 2016
सं॰ 14/पद-203/2016, सा0प्र0-15053—भारत सरकार द्वारा निर्गत राजपत्र कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न (निवारण प्रतिबंध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 की धारा-5 तथा सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना द्वारा निर्गत संकल्प सं0- 17903 दिनांक- 29.12.2014 में वर्णित दिशा निर्देश के आलोक में सभी जिला के जिला पदाधिकारी को अधिनियम के तहत् कार्याें के निष्पादन हेतु तत्काल प्रभाव से अपने जिला क्षेत्र के लिए जिला अधिकारी अधिसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
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20 दिसम्बर 2016
सं0 21/एस॰एस॰सी॰-03/2016, सा॰प्र॰-17284—बिहार कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा संचालन नियमावली, 2010 के नियम-04 में प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हए उक्त नियमावली की अनुसूची-2 (स्नातक स्तरीय) में वाणिज्य-कर विभाग, के ''वाणिज्य-कर पर्यवेक्षक'' पद को तत्कालिक प्रभाव से शामिल किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सहकारिता विभाग
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अधिसूचनाएं
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10 नवम्बर 2016
सं॰ 01/रा॰स्था॰(2)प्रो॰-11/2008सह॰-3955395539553955—बिहार सहकारिता सेवा (प्रशासनिक प्रभाग) के उप निबंधक, सहयोग समितियाँ वेतनमान 15600-39100/-, ग्रेड पे-6600 कोटि के स्तम्भ-2 में उल्लिखित निम्न पदाधिकारियों को तत्कालिक प्रभाव से संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ को पी॰बी॰-3 वेतनमान 15600-39100/-, ग्रेड पे 7600 के पद पर नियमित प्रोन्नति प्रदान की जाती है।
| क्र॰क्र॰क्र॰क्र॰ सं॰सं॰सं॰सं॰ | पदाधिकारी का नाम/पदनाम एवं वरीयता क्रमांक एवं वरीयता क्रमांक | वर्तमान धारित पद (अतिरिक्त प्रभार सहित) |
| 1 | 2 | 3 |
| 1. | श्री जमाल जावेद आलम, उप निबंधक, स॰स॰ (261/06) | प्रभारी संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना |
| 2. | श्री ललन शर्मा, उप निबंधक, स॰स॰ (296/06) | उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, कोशी प्रमंडल, सहरसा |
| 3. | श्री मुकुल कुमार सिन्हा, उप निबंधक, स॰स॰ (382/06) | राज्य अनुश्रवण पदाधिकारी, आई॰सी॰डी॰पी॰, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार संयुक्त निबंधक, स॰स॰ (पणन), बिहार, पटना, प्रबंध निदेशक, बि॰स्टे॰टुबैको ग्रोवर्स को-ऑप॰ फेड॰ लि॰, पटना) |
| 4. | श्री चन्द्रशेखर सिंह, उप निबंधक, स॰स॰ (383/06) | प्रभारी संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, सारण प्रमंडल, छपरा (अतिरिक्त प्रभार जिला सहकारिता पदाधिकारी, सारण) |
2. ए॰सी॰पी॰/एम॰ए॰सी॰पी॰ नियमावली के तहत संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ के पद पर प्रोन्नति की तिथि से पूर्व द्वितीय एम॰ए॰सी॰पी॰ लाभ प्राप्त पदाधिकारियों को उपर्युक्त नियमावली के नियम-8(2) के अनुसार वेतन नियतिकरण का कोई लाभ देय नहीं होगा।
3. यह प्रोन्नति माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन एस॰एल॰पी॰(सी॰) सं॰-29770/15 में पारित आदेश से प्रभावी होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमल, , , , उप-सचिव।
ह॰/-———
28 सितम्बर 2016 सं॰ 01/सह॰रा॰स्था॰-बि॰स॰से॰(अंके॰)स्थाना॰-16/2012-3508350835083508—श्री जितेन्द्र कुमार, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, स॰स॰, सीतामढ़ी को विभागीय अधिसूचना संख्या-2409 दिनांक-30.06.16 के स्तम्भ-5 द्वारा दिये गये अतिरिक्त पदस्थापन में4 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 से जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, स॰स॰, मधुबनी को विलोपित किया जाता है। शेष अतिरिक्त पदस्थापन यथावत रहेगा। उक्त अधिसूचना की शेष कंडिकायें यथावत रहेंगी। ह॰/-
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमल, , , , उप-सचिव।
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8 नवम्बर 2016
सं॰ 1/सह॰राज॰स्था॰ (स्थानान्तरण)-04/2015-3921392139213921—श्री अमर कुमार झा, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, पूर्णियाँ को अपने कार्यों के अतिरिक्त जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्णियाँ एवं महाप्रबंधक, आई॰सी॰डी॰पी॰, पूर्णियाँ का अतिरिक्त प्रभार तत्कालिक प्रभाव से दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमल, , , , उप-सचिव।
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13 दिसम्बर 2016
सं॰ 1/सह॰ राज॰ स्था॰ (स्थानान्तरण) 04/2015-4302—श्री जवाहर प्रसाद, प्रबंध निदेषक, केंद्रीय सहकारी बैंक लि॰, मुजफ्फरपुर (अतिरिक्त प्रभार सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर पूर्वी) को अपने कार्यों के अतिरिक्त संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर, उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर, जिला सहकारिता पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर एवं सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर, जिला सहकारिता पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर एवं सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, मुजफ्फरपुर(पष्चिमी) का अतिरिक्त प्रभार तत्कालिक प्रभाव से दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमल, , , , उप-सचिव।
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13 दिसम्बर 2016
सं॰ 1/सह॰-रा॰स्था॰(अंके॰)संपुष्टि-31/2010-4303430343034303—बिहार सहकारिता सेवा (अंकेक्षण प्रभाग) के निम्न पदाधिकारी को मूल कोटि पद जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ के स्थायी पद पर उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ-5 में अंकित तिथि से संपुष्ट किया जाता हैः-
| क्र॰सं॰ | पदाधिकारी का नाम | वरियता कोटि क्रमांक | प्रथम नियुक्ति की तिथि | सेवा संपुष्टि की तिथि |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1. | श्री कुन्दन लाल | 12/15 | 31.10.2009 | 08.08.2015 |
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमलऋचा कमल, , , , उप-सचिव।
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समाज कल्याण विभाग
ऽ समाज कल्याण निदेषालयऽ
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अधिसूचना
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29 दिसम्बर 2016
सं॰ 10/स॰क॰ बोर्ड-01/2010-2102—बिहार राज्य मंत्रिपरिषद् की बैठक दिनांक 21.12.2016 में बिहार राज्य समाज कल्याण बोर्ड के मुख्यालय को दिनांक 31.03.2017 के पष्चात् समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
मंत्रिपरिषद् द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के अनुसार बिहार राज्य समाज कल्याण बोर्ड के मुख्यालय को दिनांक 31.03.2017 के प्रभाव से समाप्त किया जाता है। बोर्ड मुख्यालय में कार्यरत कर्मियों का समायोजन समाज कल्याण विभाग या अधीनस्थ निदेषालयों में रिक्त पदों के विरूद्ध नियमानुसार किया जाएगा।
2. बिहार राज्य समाज कल्याण बोर्ड के दायित्वों एवं परिसम्पतियों के संबंध में समाज कल्याण विभाग द्वारा अलग से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, वन्दना किनी, प्रधान सचिव।
—————
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Website: http://egazette.bih.nic.in
5 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017भ(cid:2)ग(cid:4)2
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शुद्धि-शुद्धि-शुद्धि-शुद्धि-पत्रपत्रपत्रपत्र
30 दिसम्बर 2016
laŒ 5 fu0xks0fo0 ¼5½ 28@2014&421fuŒxksŒ—पशु एवं मत्स्य संसाधन विभागीय अधिसूचना संख्या-393 नि0गो0 दिनांक 06.12.2016 में अंकित कोषागार पदाधिकारी, पटना को शुद्ध रूप में कोषागार पदाधिकारी,सचिवालय कोषागार, विकास भवन, नया सचिवालय, बिहार, पटना पढा़ एवं समझा जाय।
2. उक्त अधिसूचना की अन्य शर्ते यथावत् रहेगी।
आदेश से,
वीरेन्द्र कुमार सिन्हा, अवर सचिव।
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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
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Website: http://egazette.bih.nic.in
6 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017भाग-9(ख)
और सवIसाधारण सूचनाएं इLयाNद।
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सूचना ——
No. 1459—I, BAL MUKUND KHAN S/O Sri Shankar Narayan Khan Resident of Village - Hanuman Nagar (Bhour), Post - Bhour, Via- Lohat, P.S. - Pandaul, Dist. - Madhubani (Bihar), Pin - 847231 do hereby declare that with the consent of my parent, I have changed my Surname from KHAN to SHANDILYA. Henceforth, I shall be known as Bal Mukund Shandilya for all purposes. I have also declared the contents said above through the Affidavit Vide No. 1048/2016 dated 08/09/2016. Shown before the Notary Public Civil Court, Madhubani (Bihar).
BAL MUKUND KHAN.
——
No. 1461—I, PURUSOTAM KUMAR S/O Late Deo Narayan Choudhary ,Vill+P.O. Sherpur Dhepura, Via-Vidyapatinagar, Dist.Samastipur Shall be known as Purushotam Kumar Choudhary for all Future purposes. Affidavit. No.14766/02.12.16.
PURUSOTAM KUMAR.
——
सं॰ 1473—मैं दिव्यांशु पिता-दिनेश कुमार, ग्राम-चंद्रहट्टी, थाना-कुढ़नी, जिला-मुजफ्फरपुर एस.डी.ओ. पश्चिमी के श.प.सं. 26044/03 दिनांक 10.11.16 से मैं दिव्यांशु सिंह के नाम से जाना जाऊँगा।
दिव्यांशु।
No. 1473— I DIVYANSHU S/O Mr. Dinesh Kumar, Vill+P.O. Chandrahatti, P.S.- Kurhani, Dist-Muzaffarpur has changed my name vide Affidavit. No. 26044 Dated. 10.11.16 and from now the new name will be Divyanshu Singh for all purpose.
DIVYANSHU.
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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?
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Website: http://egazette.bih.nic.in
7 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017ॢबह(cid:4)र गजट
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सहकारिता विभाग ——— अधिसूचनाएं अधिसूचनाएं अधिसूचनाएं अधिसूचनाएं 19 सितम्बर19 सितम्बर19 सितम्बर19 सितम्बर 2016201620162016
सं॰ 08/नि॰को॰(रा॰)परि॰-238/2012-3319—श्री नागेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन प्रबंध निदेषक, दी मोतिहारी सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, मोतिहारी सम्प्रति उप निबंधक (न्या॰), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना के विरूद्ध श्री अवध बिहारी प्रसाद, भूतपूर्व अध्यक्ष, किसान जन मोर्चा, पूर्वी चम्पारण का परिवाद पत्र प्राप्त हुए थे । जिसमें श्री प्रसाद के विरूद्ध बैंक की जमा राषि में ह्रास, जमा वृद्धि हेतु कोई प्रयास नहीं करना/ऋण वसूली हेतु कोई प्रयास नहीं करना/अधिकांषतः पटना में रहना, सूर्या होटल में ठहरना/बैंक जिप्सी की जगह भाड़े पर वाहन लेकर भ्रमण करना/बैंक के मोबाईल पर अत्यधिक कॉल/मकान बनाने हेतु बैंक से 5 लाख ऋण सूद दर कम करके प्राप्त करना/Bye laws के प्रावधान के प्रतिकूल defaults कई बैंक के director बने हुए हैं/विकास पदाधिकारी को लाभ पहुँचाने के लिए मो॰-2,77,,800/- रू॰ का चिकित्सा प्रतिपूर्त्ति का भुगतान करना आरोप प्रतिवेदित थे । उक्त परिवाद-पत्र की जाँच संयुक्त निबंधक (पणन), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना से कराई गई । संयुक्त निबंधक (पणन), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना के ज्ञापांक 202, दिनांक 09॰01॰08 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रसाद के विरूद्ध कतिपय आरोप प्रमाणित पाये गये । फलस्वरूप विभागीय पत्रांक 959, दिनांक 03॰03॰08 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण पूछा गया । श्री प्रसाद के पत्रांक 5223, दिनांक 20॰09॰10 से प्राप्त स्पष्टीकरण पर निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना से मंतव्य माँगा गया । निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध स्वयं के अनुमान्यता के प्रतिकूल ऋण प्राप्त करने तथा बैंक के चिकित्सा प्रतिपूर्त्ति में बगैर प्रक्रिया निर्धारण कराये भुगतान करने का आरोप प्रमाणित पाया गया है ।
संयुक्त निबंधक (पणन), सहयोग समितियाँ, बिहार, से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन, श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण एवं निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना के मंतव्य के सम्यक् समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री प्रसाद का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है, जिसके लिए वे दोषी हैं । अतएव प्रमाणित आरोपों के लिए श्री नागेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन प्रबंध निदेषक, दी मोतिहारी सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, मोतिहारी सम्प्रति उप निबंधक (न्या॰), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना को संचयी प्रभाव के बिना तीन वेतनवृद्धियाँ रोकने का दण्ड संसूचित किया जाता है । 2॰ इसमें सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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16 सितम्बर 201616 सितम्बर 201616 सितम्बर 201616 सितम्बर 2016
सं॰ 08/नि॰को॰(रा॰)विभागीय-708/2014-3320—श्री विनोद, तत्कालीन सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, चास अंचल, चास सम्प्रति सहायक निबंधक (अवकाष रक्षित), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना के विरूद्ध पंचवटी सहकारी गृह निर्माण समिति लि॰, चास बोकारो में की गई अनियमितता के लिए सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार, राँची के पत्रांक-1237 (WE) दिनांक 25.03.14 द्वारा आरोप-पत्र (प्रपत्र-'क') गठित कर आवष्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई थी। उक्त पत्र के आलोक में श्री विनोद, तत्कालीन सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, चास अंचल, चास के विरूद्ध विभाग के स्तर से8 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 आरोप-पत्र (प्रपत्र-'क') गठित कर श्री विनोद से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री विनोद से प्राप्त स्पष्टीकरण पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार, राँची से मंतव्य की माँग की गई। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार, राँची के पत्रांक-1017(अनु॰) दिनांक 03.5.2016 द्वारा प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री विनोद के विरूद्ध लगाये गये कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं पाये गये हैं।
अतएव श्री विनोद से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखण्ड सरकार, राँची के मंतव्य के सम्यक समीक्षोपरान्त श्री विनोद, तत्कालीन सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, चास अंचल, चास सम्प्रति सहायक निबंधक (अवकाष रक्षित), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना को आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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19 सितम्बर 201619 सितम्बर 201619 सितम्बर 201619 सितम्बर 2016
सं॰ 8/नि॰को॰(रा॰)न्यायिक-604/2015-3343—समादेष याचिका संख्या-15210/2015 सतीष कुमार सिंह बनाम राज्य सरकार में दिनांक 01.10.2015 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा न्यायादेष पारित करते हुए विभागीय दण्डादेष अधिसूचना ज्ञापांक-1740, दिनांक 25.05.15 को निरस्त कर दिया गया और मामले को अनुषासनिक प्राधिकार के पास भेजते हुए यह निदेष दिया गया है कि आवेदक के कारण पृच्छा एवं उपलब्ध अन्य तथ्यों पर विचार करते हुए नये सिरे से आदेष पास करें।
2. उल्लेखनीय है कि श्री सतीष कुमार सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेषक, सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, औरंगाबाद के विरूद्ध बैंक के शाखा प्रबंधक को वेतन वृद्धि का लाभ नहीं देने/बैंक के आवास में रहते हुए सरकारी दर पर मकान भाड़ा प्राप्त करने/पैक्स सदस्य को खेती योग्य जमीन नहीं रहते कृषि ऋण देना/फसल बीमा का लाभ एक ही परिवार एवं संबंधी को KCC ऋण दिये जाने के आरोप पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5023 दिनांक 07.12.2010 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-552 दिनांक 04.06.11 द्वारा प्रस्तुत अधिगम में आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया।
3. इस अधिगम/जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभाग द्वारा आरोपित पदाधिकारी से विभागीय पत्रांक-712 दिनांक 11.02.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षा में आरोप संख्या-1, 3 एवं 4 प्रमाणित नहीं पाये गये, किन्तु आरोप संख्या-02 के संबंध में पाया गया कि ''आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में नया तथ्य दिया गया है कि गेस्ट हाऊस में निदेषक मंडल के सदस्यों द्वारा आये दिन कब्जा बनाये रखने के कारण उनके कब्जे से छुड़ाने की नियत से इन्होंने एक कमरे को अपने कब्जे में लेकर बैंक के कागजात आदि को रख कर ताला लगा दिया था और उस अवधि में वे स्वयं भाड़े के मकान में अन्यत्र रहते थे। इसके साक्ष्य में उक्त भाड़े के मकान का प्रमाण-पत्र दिया है। चूँकि श्री सिंह का यह कथन After Thought एवं Self–Contradictory का है क्योंकि अन्यत्र भाड़े पर आवासन करने का तथ्य इन्होंने पूर्व में कभी नहीं दिया और इन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि गेस्ट हाऊस का वह कमरा बैंक के कागजात आदि रखने के लिए बंद किया गया तब इनके द्वारा निजी तौर पर उस कमरे का किराया भुगतान करने की क्या आवष्यकता थी।
यहाँ यह भी विचारणीय है कि निदेषक मंडल के सदस्यों के अस्थायी कब्जे से मुक्त करने के नियत से जब इन्होंने इसे खाली कराया, तब अपने कब्जे में लेकर अन्ततः उस गेस्ट हाऊस को स्थायी रूप से अपना आवास ही घोषित करा लिया जो नैतिक दृष्किोण से कतई सही नहीं है।'' आवेदक द्वारा बैंक के आवास में रहते हुए आवासन भत्ता लेने के संबंध में दिया गया द्वितीय कारण पृच्छा पूर्ण रूप से असंतोषप्रद है और इनके स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1740 दिनांक 25.05.2015 द्वारा दण्ड संसूचित किया गया।
4. श्री सतीष कुमार सिंह द्वारा विभाग द्वारा निर्गत दण्डादेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। (क) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 01.10.15 को पारित न्यायादेष की कंडिका-07 में उल्लेख किया गया है कि आवेदक द्वारा समर्पित कारण पृच्छा स्वीकार नहीं किये जाने के संबंध में दण्डादेष में कारण नहीं दर्षाया गया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 01.10.2015 को ही दण्डादेष को निरस्त कर दिया गया तथा आदेष पारित किया गया कि मामले पर पुनर्विचार करते हुए प्रषासनिक प्राधिकार नये सिरे से आदेष पारित करें। जबकि दण्डादेष की कंडिका-2 में यह स्पष्ट रूप से दर्षाया गया था कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा समर्पित कारण पृच्छा में बैंक के गेस्ट हाऊस में रहने के दौरान आवासन भत्ता लिए जाने पर स्पष्टीकरण औचित्य विहिन है।
(ख) अवलोकनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय ने अपने न्याय निर्णय के कंडिका-08 एवं 09 में विभाग द्वारा किये गये विचार को नहीं माना है। विभाग के विचार को विभिन्न रूपाें में परिभाषित किया गया अपने न्यायादेष में दण्डादेष को निरस्त करने का आधार KCC ऋण को बनाया है। जबकि दण्डादेष का मूल आधार बैंक द्वारा उपलब्ध कराये गये गेस्ट हाउस को आवास के रूप में रहते हुए आवासन भत्ता लेने से संबंधित है।
5. उक्त न्यायादेष के अनुपालन में (i) विभागीय अधिसूचना संख्या-113, दिनांक 12.01.2016 द्वारा विभागीय अधिसूचना संख्या-1740, दिनांक 25.05.2005 द्वारा निर्गत दण्डादेष को निरस्त किया गया।
(ii) न्यायादेष के अनुपालन में श्री सिंह से प्राप्त पूर्व के द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त पाया गया कि उपरोक्त तथ्यों की पुष्टि होती है, इस सन्दर्भ में यह भी उल्लेखनीय है कि आरोपित पदाधिकारी दिनांक-03. 02.2004 को अपना पद ग्रहण किये तथा उनके द्वारा अनियमित रूप से आवास भत्ता लिये जाने के संबंध में कई स्तरों से पूर्व9 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 में जाँच कराई गई थी। इस निमित्त विभागीय पत्रांक-703, दिनांक 17.02.2012 द्वारा जाँच करायी गयी। श्री टी॰पी॰ सिन्हा, प्रबंध निदेषक -सह- अपर निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पत्र संख्या-1127, दिनांक 10.05.2012 से स्पष्ट है कि आरोपित पदाधिकारी गेस्ट हाऊस का एक कमरा अपने नाम रखा और किराया का भुगतान बैंक को किया। इस संबंध में जिला सहकारिता पदाधिकारी -सह- उपस्थापन पदाधिकारी के पत्रांक-303, दिनांक 05.04.2011 के अवलोकन से उक्त आरोप की पुष्टि होती है।
6. विदित हो कि कोई भी पदाधिकारी या कर्मचारी यदि सरकार या प्रतिष्ठान के आवास में रहता है तो उसे आवासन भत्ता लेने का कोई अधिकार नहीं हैं। आवासन भत्ता लेते समय यह घोषणा पत्र देना पड़ता है कि सरकार द्वारा दिये गये आवास अथवा किसी प्रतिष्ठान द्वारा दिये गये आवास में निवास नहीं करते हैं और प्राईवेट आवास में रहने के कारण उन्हें आवासन भत्ता देय है। बैंक के प्रबंध निदेषक के रूप में बैंक द्वारा उपलब्ध कराये गये गेस्ट हाउस का उपभोग उन्होंने आवास के रूप में किया है और आवासन भत्ता प्राप्त किया है जो बिल्कुल ही अनैतिक घोर कदाचार की श्रेणी में आता है। 7. अतएव प्रमाणित आरोप के लिए श्री सतीष कुमार सिंह, तत्कालीन प्रबंध निदेषक, सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, औरंगाबाद के द्वितीय कारण पृच्छा पर पूर्व में दिये गये विभागीय अभिमत/कथन को यथावत् रखते हुए निम्नांकित दण्ड संसूचित किया जाता है :-
(i) निन्दन की सजा, (ii) बैंक के गेस्ट हाऊस में अनियमित रूप से रहने की अवधि (यानि दिनांक 01.03.2004 से दिनांक 30.11.2006 तक) में लिये गये आवास भत्ता की राषि की वसूली श्री सिंह के वेतन से की जायेगी। 8. इस आदेष में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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15 नवम्बर15 नवम्बर15 नवम्बर15 नवम्बर 2016201620162016
सं॰ 08/नि॰को॰(रा॰)निग॰-102/2016-4010—श्री संदीप कुमार ठाकुर, जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्णियाँ को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के धावादल द्वारा दिनांक 02.08.2016 को रू॰ 25,000/- (पच्चीस हजार रूपये) रिष्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने एवं उनके विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-076/2016, दिनांक 03.08.2016, धारा-7/13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(डी॰)भ्र॰नि॰ अधिनियम 1988 दर्ज होने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 3192, दिनांक 05.09.2016 द्वारा दिनांक 02.08.2016 के प्रभाव से निलंबित किया गया है ।
2. कारागार से विमुक्ति के फलस्वरूप दिनांक 24.10.16 को श्री ठाकुर के द्वारा अपना योगदान समर्पित किया गया है । सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9(3)(1) के अन्तर्गत इनका योगदान स्वी—त किया जाता है । योगदान की तिथि से श्री ठाकुर निलंबन से मुक्त समझे जायेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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15 नवम्बर 201615 नवम्बर 201615 नवम्बर 201615 नवम्बर 2016
सं॰ 08/नि॰को॰(रा॰)निग॰-102/2016-4013—श्री संदीप कुमार ठाकुर, जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्णियाँ को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के धावादल द्वारा दिनांक 02.08.2016 को रू॰ 25,000/- (पच्चीस हजार रूपये) रिष्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने एवं उनके विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-076/2016, दिनांक 03.08.2016, धारा-7/13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(डी॰)भ्र॰नि॰ अधिनियम 1988 दर्ज होने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 3192, दिनांक 05.09.2016 द्वारा दिनांक 02.08.2016 के प्रभाव से निलंबित किया गया है ।
2. कारागार से विमुक्ति के फलस्वरूप दिनांक 24.10.16 को श्री ठाकुर के द्वारा अपना योगदान समर्पित किया गया है । सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9(3)(1) के अन्तर्गत इनका योगदान विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-4010 दिनांक 15.11.2016 द्वारा स्वी—त किया गया ।
परन्तु चूँकि श्री ठाकुर के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-076/2016, दिनांक 03.08.2016, धारा-7/ 13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(डी॰)भ्र॰नि॰ अधिनियम 1988 दर्ज है तथा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की जानी है । अतः इनका निलंबन जनहित में आवष्यक है ताकि जाँच कार्यों में व्यवधान उत्पन्न नहीं हो ।
अतएव बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9(1)(क) तथा 9(1)(ग) के अन्तर्गत उन्हें अगले आदेष तक निलंबित किया जाता है ।
3. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ का कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया जाता है ।
4. निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता नियमानुसार देय होगा । 5. यह आदेष तात्कालिक प्रभाव से लागू होगा । इसमें माननीय मुख्यमंत्री, बिहार का अनुमोदन प्राप्त है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।10 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017
23 23 23 23 नवम्बर 2016नवम्बर 2016नवम्बर 2016नवम्बर 2016
सं॰ 08/नि॰को॰(रा॰)विभागीय-708/2016-4074—डा॰ श्रवण कुमार, संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ-सह -जिला सहकारिता पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के धावादल द्वारा दिनांक 21.10.2016 को रू॰ 50,000/- (पचास हजार रूपये) रिष्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस क्रम में डा॰ कुमार के विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-109/2016, दिनांक 21.10.2016, धारा-7/13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(डी॰)भ्र॰नि॰ अधिनियम 1988 दर्ज किया गया है। डा॰ कुमार 48 घंटों से अधिक अवधि के लिए न्यायिक हिरासत में शहीद खुदीराम बोस, केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर में निरूद्ध है।
2. उक्त के आलोक में लोकहित में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9(2)(क) के तहत डा॰ कुमार को दिनांक 21.10.2016 के प्रभाव से अगले आदेष तक निलंबित किया जाता है। 3. निलम्बन अवधि में डा॰ कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10(3) के तहत उन्हें नियमानुसार देय जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान उनके प्राधिकार पत्र के आधार पर उनके नामांकित आश्रित को किया जा सकेगा। ऐसे जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान उसी स्थापना द्वारा किया जायेगा, जहाँ ये कारावास में जाते समय पदस्थापित थे। कारावास से मुक्त होने के पश्चात् इनका मुख्यालय संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है, जहाँ ये अपना योगदान समर्पित करेंगे एवं विभाग को भी सूचित करेंगे।
4. उक्त के क्रम में डा॰ कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत अलग से की जायेगी।
5. इस आदेष में माननीय मुख्यमंत्री, बिहार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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1 दिसम्बर1 दिसम्बर1 दिसम्बर1 दिसम्बर 2016201620162016
सं॰ 08/नि॰को॰(रा॰)परि॰-212/2012-4211—श्री पी॰पी॰ ओझा, तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी, चाईबासा (झारखण्ड) सम्प्रति सेवा निवृत्त अपर निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना के पदस्थापन काल में अपने पद का दुरूपयोग करने मो॰ सदरूद्दीन, लिपिक, कार्यालय सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, घाटषीला अंचल (चाईबासा) के साथ मिलकर रू॰ 1.30 लाख (एक लाख तीस हजार रूपये) गृह निर्माण अग्रिम वित्त विभाग के फर्जी स्वीकृत्यादेष के आधार पर कोषागार से राषि के गबन करने के आरोप में विभागीय अधिसूचना संख्या-4591 दिनांक 06.11.13 द्वारा इनके विरूद्ध फौजदारी मुकदमा दायर करने का निर्णय लिया गया था।
बिहार पेंषन नियमावली के नियम 43(बीं) के तहत मामला कालबाधित होने के कारण एवं निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध आपराधिक मंषा का आरोप प्रमाणित नहीं होने के कारण इस मामले को संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया।
इस आदेष में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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1 दिसम्बर1 दिसम्बर1 दिसम्बर1 दिसम्बर 2016201620162016
सं॰ सह॰ 02/निग॰(रा॰आ॰)-13/2000-4212—विभागीय संकल्प संख्या-2130 दिनांक 02.06.1997 द्वारा मो॰ हामिद, तत्कालीन सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना अंचल, पटना के विरूद्ध नियंत्री पदाधिकारी के निदेष का अवहेलना करने, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही, दायित्व निर्वहन में कमी एवं वैधानिक कर्त्तव्य के अवहेलना के आरोप में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी।
2. उक्त विभागीय कार्यवाही के अधिगम में संचालन पदाधिकारी द्वारा मो॰ हामिद के विरूद्ध कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया किन्तु विभागीय समीक्षा के क्रम में संचालन पदाधिकारी के अधिगम में मो॰ हामिद के विरूद्ध आरोप संख्या-01 जिसमें नियंत्री पदाधिकारी के निदेष की अवहेलना, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया गया था उसे प्रमाणित पाया गया और प्रमाणित आरोप के लिए सक्षम प्राधिकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-2079 दिनांक 15.06.99 द्वारा एक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का दण्ड संसूचित करते हुए विभागीय कार्यवाही समाप्त की गयी। उक्त दण्डादेष के विरूद्ध मो॰ हामिद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी॰डब्लू॰जे॰सी॰-12892/99 दायर किया गया जिसमें माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा समादेष याचिका को निस्पादित करते हुए दिनांक-06.12.2005 को आदेष पारित किया गया कि "It is open to the learned disciplinary authority to disagree with findings/recommendations of the learned enquiry officer in which case he has to record reasons of disagreement which is conveyed to the detinguent employee. Which has been in the present case. In that view of the matter the impugned order is hereby set aside. It goes without saying that it will be open to the learned disclpinary authority to record reasons in disagreement of the enquiry report which will have to be conveyed to the petitioner for this reply, and there after pass a final order accordance with law.
11 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 20173. न्यायादेष के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-138 दिनांक 19.01.2006 द्वारा विभागीय अधिसूचना संख्या-2079 दिनांक 15.06.99 द्वारा संसूचित दण्डादेष को निरस्त कर दिया गया तथा साथ ही न्यायादेष के निर्णय के अनुपालन में विभागीय पत्रांक-1728 दिनांक 18.05.2007 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त अधिगम की प्रति संलग्न करते हुए अधिगम से असहमत हुए बिन्दुओ को स्पष्ट करने हेतु मो॰ हामिद से स्पष्टीकरण पूछा गया। मो॰ हामिद से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा के क्रम में पाया गया कि मो॰ हामिद द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में आरोप से संबंधित कतिपय बिन्दुओं का उत्तर अस्पष्ट होने के कारण उनसे पुनः विभागीय पत्रांक-4223 दिनांक 28.12.15 द्वारा कारण पृच्छा की गयी। मो॰ हामिद ने अपने पत्रांक-5393 दिनांक 14.06.16 द्वारा कारण पृच्छा का प्रत्युत्तर विभाग को समर्पित किया गया है।
4. मो॰ हामिद से प्राप्त कारण पृच्छा/प्रत्युत्तर के सम्यक् समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि उनके विरूद्ध लगाये गये आरोप प्रमाणित नहीं होते है तद्नुसार उनका स्पष्टीकरण स्वीकार करते हुए उन्हें आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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5 दिसम्बर 20165 दिसम्बर 20165 दिसम्बर 20165 दिसम्बर 2016
सं॰ 08/नि॰को॰(रा॰)परि॰-222/2013-4245—श्री राम नरेष पाण्डेय, तत्कालीन प्रबंध निदेषक, सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, समस्तीपुर-सह-जिला सहकारिता पदाधिकारी, समस्तीपुर सम्प्रति प्रबंध निदेषक, सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, कटिहार के विरूद्ध निलाम पत्र से संबंधित मामला लंबित रखने/फर्जी ऋण दावा/पैक्स के वारंटी ऋणी सदस्य को पैक्स का प्रबंधक बनाये जाने के विरूद्ध कार्रवाई नहीं करने आदि पर श्री श्याम सुन्दर सिंह एवं अन्य से प्राप्त परिवादों की जाँच जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर से करायी गयी। जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर श्री पाण्डेय से स्पष्टीकरण पूछा गया। जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री पाण्डेय के समर्पित स्पष्टीकरण पर निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार से प्राप्त मंतव्य का सम्यक समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री पाण्डेय पैक्स प्रबंधक के कार्य-कलाप पर सम्यक पर्यवेक्षण एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं के लिए दोषी है।
अतएव श्री राम नरेष पाण्डेय, तत्कालीन प्रबंध निदेषक, सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, समस्तीपुर-सह-जिला सहकारिता पदाधिकारी, समस्तीपुर सम्प्रति प्रबंध निदेषक, सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, कटिहार को उक्त दोषी पाये गये आरोप के लिए निन्दन की सजा संसूचित की जाती है।
आरोप की अवधि वर्ष 2012-13 है। इस आदेष में माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।
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सं0- dा0#व0-14(भा0)भा0-03/2016-296127 ग्रा॰वि॰
dामीण #वकास #वभाग
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संक<प
2 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 2017
gी रघुन6दन आन6द, dामीण #वकास पदाUधकार(cid:15)-सह-Mभार(cid:15) Mखंड #वकास पदाUधकार(cid:15), सबौर, भागलपुर के #वiZ बाढ़ राहत #वतरण कायI म] क` गई लापरवाह(cid:15) के संबंध म] िजला पदाUधकार(cid:15), भागलपुर के पKांक-120 Nदनांक 15.06.2016 Tवारा गNठत आरोप MपK 'क' आपदा Mबंधन #वभाग Pबहार, पटना के पKांक- 1/Mा0आ0- 17/2016/4042/आ0M0 Nदनांक 06.12.2016 के माSयम से Mाmत हुआ।
MपK 'क' म] धाbरत आरोप> क` समीGा #वभाग Tवारा क` गयी। समीGोपरा6त Mथमn'टया gी आन6द के #वiZ आरोप> को Mमाoणत मानते हुए इनके #वiZ Pबहार सरकार(cid:15) सेवक (वगpकरण, (cid:1)नयंKण एवं अपील) (cid:1)नयमावल(cid:15)-2005 के (cid:1)नयम- 17(2) म] (cid:1)नNहत र(cid:15)(cid:1)त से #वभागीय कायIवाह(cid:15) संचाOलत _कये जाने का (cid:1)नणIय Oलया गया है।
gी आन6द के #वiZ #वभागीय कायIवाह(cid:15) संचालन हेतु िजला पदाUधकार(cid:15), भागलपुर संचालन पदाUधकार(cid:15) एवं उप/थापन पदाUधकार(cid:15) को नाOमत करने के Oलए अUधकृ त _कये गये हq।
तदनुसार एतT Tवारा िजला पदाUधकार(cid:15), भागलपुर को आदेश Nदया जाता है _क संक<प Mाmत होने क` (cid:1)तUथ से एक पG के अ6दर संचालन पदाUधकार(cid:15) एवं उप/थापन पदाUधकार(cid:15) (cid:1)नयु,त कर gी रघुन6दन आन6द, dामीण #वकास पदाUधकार(cid:15)-सह-Mभार(cid:15) Mखंड #वकास पदाUधकार(cid:15), सबौर, भागलपुर को इसक` सूचना द]गे।12 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 gी आन6द सूचना Mािmत क` (cid:1)तUथ के प6rह Nदन> के अ6दर संचालन पदाUधकार(cid:15) के समG उपि/थत होकर अपना /प'ट(cid:15)करण/Oलoखत बचाव बयान (साsय सNहत) उनके (संचालन पदाUधकार(cid:15)) समG M/तुत कर]गे। #वभागीय कायIवाह(cid:15) के संचालन के M/ताव म] सGम MाUधकार का आदेश Mाmत है।
आदेश:- आदेश Nदया जाता है _क संक<प क` M(cid:1)त िजला पदाUधकार(cid:15), भागलपुर/ उप #वकास आयु,त, भागलपुर/ gी रघुन6दन आन6द,,,, dामीण #वकास पदाUधकार(cid:15)-सह-Mभार(cid:15) Mखंड #वकास पदाUधकार(cid:15), सबौर, भागलपुर को सूचनाथI एवं आवVयक कारIवाई हेतु भेज द(cid:15) जाय।
Pबहार-राRयपाल के आदेश से,
राधा _कशोर झा, अपर सUचव।
——— सं॰ 2 आरोप-01-07/2005-सा॰प्र॰-15431 सामान्य प्रषासन विभाग ——— संकल्प 16 नवम्बर 2016
श्री देवेन्द्र प्रसाद, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक-308/2011—तत्कालीन विशेष सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग सम्प्रति सेवा निवृत्त के विरूद्ध गठित आरोप पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के पत्रांक 262 दिनांक 21.01.2015 द्वारा प्राप्त हुआ। श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र में डॉ0 सुभाष कुमार, तत्कालीन भ्रमणशील चिकित्सा पदाधिकारी, जैतपुर, मुजफ्फरपुर के निलंबन से विमुक्ति संबंधी प्रस्ताव में विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त किये जाने का प्रस्ताव नहीं दिये जाने का आरोप प्रतिवेदित है।
2. प्रपत्र 'क' के आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 2715 दिनांक 19.02.2015 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर श्री प्रसाद द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 16.03.2015 समर्पित किया गया। आरोप-पत्र के आरोपों एवं श्री प्रसाद के स्पष्टीकरण पर समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9682 दिनांक 06.07.2015 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के प्रावधानों के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
3. ज्ञापांक 513 दिनांक 08.09.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के उपरान्त विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा समर्पित निष्कर्ष प्राप्त हुआ। उक्त निष्कर्ष में श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप को प्रमाणित बताया गया है। 4. प्रमाणित आरोप के लिए श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक 16625 दिनांक 01.12.2015 द्वारा अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 17.03.2016 समर्पित किया गया। अभ्यावेदन में श्री प्रसाद का कहना है कि उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में पूर्ण स्थिति स्पष्ट करते हुए भूल को दृष्टि चूक मानते हुए विभागीय कार्यवाही समाप्त किया गया है। उक्त विभागीय कार्यवाही में किसी तरह का कोई सरकारी राशि का गबन/अनियमितता संबंधी आरोप नहीं लगाया गया है। श्री प्रसाद द्वारा प्रासंगिक मामले में दृष्टि चूक मानते हुए मामले को समाप्त करने का अनुरोध किया गया।
5. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष, श्री प्रसाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन एवं संचिका में उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के उपरान्त यह पाया गया कि राज्य सरकार को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई है, लेकिन श्री प्रसाद द्वारा आरोप-पत्र में वर्णित डॉ0 सुभाष कुमार, तत्कालीन भ्रमणशील चिकित्सा पदाधिकारी, जैतपुर के निलम्बन मुक्ति से संबंधित प्रस्ताव माननीय मंत्री के अनुमोदनार्थ उपस्थापित किये जाने का स्पष्ट प्रस्ताव नहीं देने संबंधी आरोप को दृष्टि चूक स्वीकार किया गया है।
6. वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रमाणित आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के प्रावधान के तहत् श्री प्रसाद के ''पेंशन से 10% राशि की कटौती दो वर्षों तक'' करने का दंड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।
7. विभागीय पत्रांक-11691 दिनांक 30.08.2016 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2139 दिनांक 19.10.2016 द्वारा उक्त विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है।
8. प्रमाणित आरोपों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री देवेन्द्र प्रसाद (बि0प्र0से0) कोटि क्रमांक-308/11 तत्कालीन विशेष सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के संगत प्रावधान के तहत ''पेंशन से 10% राशि की कटौती दो वर्षों तक'' करने का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्रवाई हेतु भेज दी जाय।13 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017
सं॰ 2/परि0-716/2008 -सा0प्र0-15512
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संकल्प
17 नवम्बर 2016
श्री अषोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1038 दिनांक 23.09.2008 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित प्राप्त हुआ। उक्त आरोप-पत्र में सहायक रोकड़ बही एवं सामान्य रोकड़ बही का भौतिक सत्यापन नहीं करने, दिनांक 01.07.2001 से 02.12.2001 तक सामान्य रोकड़ बही पर हस्ताक्षर नहीं करने, जिला नजारत उप समार्हाा का प्रभार सौंपने के वक्त पंचायत अग्रिम पंजी में दर्ज राषि के वास्तविक जाँचोपरान्त अन्तर पाये जाने तथा दायित्वों के निर्वहन में अक्षमता के कारण सरकारी राषि का दुर्विनियोग एवं गबन होने का आरोप प्रतिवेदित है।
2. प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1845 दिनांक 17.03.2009 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय जाँच आयुक्त, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 3. विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक 260 दिनांक 23.03.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संबंधी संकल्प को वापस करते हुए पत्र में अंकित कतिपय त्रुटियों के निराकरण के उपरान्त संकल्प भेजने का निदेष दिया गया।
4. उपर्युक्त निदेष के आलोक में विभागीय पत्रांक 9526 दिनांक 23.09.2009 द्वारा प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) की प्रति भेजते हुए श्री त्रिपाठी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री त्रिपाठी के पत्रांक 01 दिनांक 09.06.2014 द्वारा स्पष्टीकरण एवं पत्रांक 01 दिनांक 07.11.2014 द्वारा पूरक स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
5. आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 540 दिनांक 11.03.2015 द्वारा जिला पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण पर गठित मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया।
6. विभागीय पत्रांक 6044 दिनांक 21.04.2015 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1845 दिनांक 17.03.2009 की प्रति अन्य कागजातों के साथ विभागीय जाँच आयुक्त, पटना को प्रेषित करते हुए विभागीय कार्यवाही का संचालन कर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेष दिया गया।
7. विभागीय जाँच आयुक्त, पटना के पत्रांक 171 अनु0 दिनांक 30.03.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ जिसमें श्री त्रिपाठी के विरूद्ध लेखा संधारण संबंधी उनके द्वारा दायितवों के निर्वहन में षिथिलता और विफलता प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय पत्रांक 6312 दिनांक 05.05.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी से अभ्यावेदन की मांग की गयी।
श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 24.05.2016 में कहा गया है कि विभागीय कार्यवाही के दौरान उन्होेंने विभागीय जाँच आयुक्त के समक्ष सभी आरोपों का कंडिकावार जवाब दाखिल किया तथा सभी तथ्यों को विस्तार से रखा तथा इसकी संपुष्टि हेतु पंचायत चुनाव 2001 की अग्रिम पंजी, चेक बुक निर्गत पंजी, पंचायत निर्वाचन (2001) के समय जिला पंचायत राज पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा पंचायत कार्यों में भुगतान हेतु अधियाचना से संबंधित संचिका आदि को उपस्थापित करने तथा डेयरी एवं कृषि का कार्य नाजीर द्वारा कराने एवं भुगतान के संबंध में वर्णित तथ्यों के सत्यापन/गवाही के लिए गवाहों (तत्कालीन गोपनीय शाखा के प्रधान सहायक श्री कपूर एवं पूर्व में तथा वर्तमान में गोपनीय शाखा में कृषि कार्य के लिए प्रतिनियुक्त अनुसेवक उपेन्द्र प्रसाद) को बुलाने हेतु अनुरोध किया था। परन्तु विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया गया तथा उक्त कागजातों/गवाहों को उपस्थापित करने हेतु उपस्थापन पदाधिकारी या जिला पदाधिकारी को कोई निदेश नहीं दिया। साथ ही इनके द्वारा संबंधित कागजातों की मांग किये जाने पर सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जिला पदाधिकारी जहानाबाद को आदेश दिये जाने एवं स्मारित किये जाने के बावजूद संपूर्ण कागजातों को उपलब्ध नहीं कराने के कारण सभी आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण देने में इन्हें कठिनाई हुई। इनका कहना है कि वे जहानाबाद जिला में कार्यपालक दण्डाधिकारी के पद पर पदस्थापित थे तथा दिनांक 24.12.1999 से 20.08.2002 तके पदस्थापन के दौरान इन्हें कई कार्यों का कार्यभार सौंपा गया। इनके स्थानांतरण के काफी बाद मार्च, 2003 में लेखा अंकेक्षक द्वारा नजारत शाखा का लेखा परीक्षण किया गया तथा पंचायत के अग्रिम पंजी में छेड़-छाड़ करके नाजीर के द्वारा गबन की आशंका व्यक्त की गई तथा अपने प्रतिवेदन में कहा गया कि "……..and also mainpulation of pages appeared to had been made in advance register by cashier/Najir. तत्पश्चात् तत्कालीन जिला पदाधिकारी के द्वारा गठित त्रिस्तरीय जाँच दल द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में जिला नजारत द्वारा संधारित कुल 12 सहायक रोकड़ बही को सही पाया गया तथा अग्रिम एवं भाउचर रजिस्टर को भी सही पाया गया। मात्र पंचायत के अस्थाई अग्रिम रोकड़बही में लिखा कि अन्तशेष 63,000/- है, परन्तु 20.08.2002 को रोकड़ बही पंजी में 6,55,860/-रूपया दर्शाया गया है। प्रतिवेदन में यह भी अंकित है कि अभी भी (जांच की तिथि दिनांक 05.04.2003 तक) दिनांक 21.08.2002 के पश्चात् का रोकड़ पंजी अभिलिखित नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि नाजीर द्वारा गबन अथवा राशि के दुर्विनियोग को छुपाने एवं धोखा देने के उद्देश्य से कैश बैलेंस की विवरणी में हेरा फेरी की गई है। उक्त प्रतिवेदन से परिलक्षित है कि अनियमितता के लिए तत्कालीन नाजीर श्री जेम्स सैमुअल को ही दोषी पाया गया। जिला पदाधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण से संतुष्ट होकर तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने अपने पत्रांक 1163 दिनांक 25.07.2003 द्वारा तत्कालीन नाजीर जेम्स सैमुअल को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु प्रपत्र 'क' गठित करने का आदेश दिया तथा दिनांक 21.11.2003 को प्रपत्र 'क'14 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 गठित कर कार्रवाई प्रारंभ की गयी। साथ ही श्री जेम्स सैमुअल के विरूद्ध आपराधिक मामला भी दर्ज कराया गया था तथा जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के पत्रांक 638 दिनांक 05.05.2014 द्वारा गबन की राशि 6,38,300/- रूपये की वसूली उनको भुगतेय राशि से करने हेतु आदेश दिया गया। जिसके अनुपालन में नजारत उप समाहर्त्ता, जहानाबाद द्वारा विपत्र संख्या 248/2014-15 से दिनांक 22.11.2014 को जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के खाता संख्या 30809549284 में उक्त राशि मो0 6,38,300/- रूपये जमा कराया गया। इसके अलावा उनका कहना है कि उन्होंने दिनांक 24.12.1999 को श्री सईउद्दीन शाह (तत्कालीन एन0डी0सी0) से नजारत का जो प्रभार प्राप्त किया उस तिथि को भाउचर रजिस्टर में भाउचर के रूप में 1,0027,202.88/- (एक करोड़ सताईस हजार दो सौ दो रूपये अठासी पैसे) रूपये दर्ज था, साथ ही Single Lock में भी भाउचर के रूप में 3,05,389/- रूपये दर्ज था। प्रभार विवरणी/सामान्य रोकड़ पंजी पर नाजीर, कार्यालय अधीक्षक एवं नजारत उप समाहर्त्ता का हस्ताक्षर था तथा इसे सत्यापित किया गया था। इस प्रकार उन्हें प्रभार के समय में ही पूर्व एन0डी0सी0 द्वारा मो0 3,05,389.95 रूपये भाउचर के रूप में कम प्रभार दिया गया। उनके समय का बकाया राशि 4,95,582/- रूपये नाजीर के पास था जिसे उसने प्रभार देने के समय (दिनांक 23.03.2003 को) दूसरे नाजीर को सौंप दिया। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि तत्कालीन जिला पदाधिकारी के पदनाम से ही बैंकों में खाता था तथा उनके सिंगल हस्ताक्षर से ही चेक से पैसे की निकासी नाजीर द्वारा की जाती थी। पैसे की निकासी बिना उनके संज्ञान में लाये तथा बिना संचिका पर लिखे ही पंचायत के चुनाव (वर्ष 2001) में जिला पदाधिकारी द्वारा की गई। निर्वाचन शाखा में भी (जिसके प्रभार में उप निर्वाचन पदाधिकारी थे) जिला पदाधिकारी द्वारा नाजीर के नाम से अनावश्यक पैसे की निकासी की जाती थी, जिसके संबंध में वित्त विभाग के अंकेक्षण दल द्वारा भी अपने प्रतिवेदन में (पत्रांक 399 दिनांक 16.06.2004) स्पष्ट कहा गया है कि ''निकासी की राशियों के बचे रहने के उपरांत भी दूसरे बैंक द्वारा स्वयं राशि निकासी पाई गई''। उनका यह भी कहना है कि जिला निलाम पत्र पदाधिकारी के रूप में उन्होंने प्रत्येक वर्ष लगभग 3 से 4 करोड़ रूपये की वसूली किया जिसके कारण तत्कालीन आयुक्त, मगध प्रमण्डल, गया द्वारा इन्हें प्रशस्ती पत्र दिया गया तथा साथ ही जिला परिवहन पदाधिकारी के रूप में कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप तीन वर्षों में क्रमशः 80 लाख, 1 करोड़ 10 लाख एवं 1 करोड़ 40 लाख रूपये की वसूली करके सरकारी खजाना में जमा कराया। इन सभी कार्यों से उनके पदस्थापन अवधि के सभी जिला पदाधिकारी संतुष्ट थे तथा उन्होंने उनके सी0आर0 में भी उत्कृष्ट दर्ज किया है। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री त्रिपाठी द्वारा नजारत में लेखा संधारण संबंधी दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता एवं विफलता के आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया गया।
8. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त पाया गया कि-
(i) तत्कालीन जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के ज्ञापांक 1169 दिनांक 25.07.2003 द्वारा तत्कालीन नाजिर, जेम्स सैमुअल को निलम्बित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु प्रपत्र 'क' गठित करने का निदेश दिया गया तथा दिनांक 21.11.03 को प्रपत्र 'क' गठित कर कार्रवाई प्रारम्भ की गयी। अतएव श्री त्रिपाठी के विरुद्ध गठित आरोप पत्र में श्री त्रिपाठी के द्वारा सहायक रोकड़ बही एवं रोकड़ पंजियों को विधिवत् संधारित नहीं किये जाने का आरोप प्रथम दृष्ट्या स्पष्ट होता है।
(ii) जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के पत्रांक 2245 दिनांक 03.12.2014 द्वारा समर्पित मंतव्य में स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि आरोपित नाजिर के द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में इनके द्वारा नियमावली में वर्णित नियम के आलोक में अनुशासनिक कार्यवाही हेतु संचिका सक्षम प्राधिकार के पास उपस्थापित करना चाहिए था। इनके द्वारा पूर्व के कैश डिटेल को निकालने का सार्थक प्रयास नहीं किया गया। अपने कर्त्तव्य का पालन न करते हुए जिला पदाधिकारी के निरीक्षण टिप्पणी पर प्रश्न चिन्ह लगाना इनके कर्त्तव्यहीनता का परिचायक है। तत्कालीन नाजिर जेम्स सैमुअल रोकड़ पंजी एवं अन्य पंजी तथा कागजातों में छेड़-छाड़ करने का दोषी हैं, परन्तु नजारत उप समाहर्त्ता के रूप में यह इनका भी दायित्व बनता था कि ये सभी आय-व्यय का उल्लेख रोकड़ पंजी में कराते एवं वे यदि ऐसा कराते तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इनके द्वारा अपने स्तर से भी नाजिर के अतिरिक्त प्रभार हटाने का प्रयास किया जाना चाहिए था, परन्तु ऐसा नहीं किया गया। आरोपित नाजिर के द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं होने की स्थिति में इनके द्वारा नियमावली में वर्णित नियम के आलोक में अनुशासनिक कार्यवाही हेतु संचिका सक्षम प्राधिकार/वरीय प्रभारी पदाधिकारी के समक्ष उपस्थापित करना चाहिए था, परन्तु ऐसा कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट हो सके कि इनके द्वारा इस हेतु सतत् प्रयास किया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा अन्य कार्य के लिए प्रशंसनीय कार्य किया गया होगा, परन्तु आरोपित बिन्दु पर यह स्पष्टीकरण स्वीकार्य योग्य नहीं है।
(iii) संचालन पदाधिकारी के द्वारा भी अपने जॉंच प्रतिवेदन में आरोपों का विश्लेषण एवं जॉंच करने के संदर्भ में यह पाया गया है कि आरोपित पदाधिकारी ने जिला पदाधिकारी सहित अन्य प्राधिकारों के दायित्वों और उनकी विफलताओं का विवरण दिया है, परन्तु अपने दायित्वों के निर्वहन करने के संबंध में बचाव में संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया है। उनका यह कहना कि नजारत उप समाहर्त्ता अभिश्रवों और नगद राशि का मिलान करके प्रभार नहीं लेता, प्रभार लेने की सामान्य प्रक्रिया से आच्छादित नहीं है। प्रभार लेने का अर्थ ही है, उस तिथि को रोकड़ पंजी और सभी सहायक पंजियों और समर्थक भाउचर्स आदि की जॉंच15 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 हो जाना। नजारत उप समाहर्त्ता, नाजिर और कार्यालय प्रधान समाहर्त्ता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि समाहर्त्ता द्वारा नजारत का निरीक्षण किया जा रहा था तो जिला नजारत उप समाहर्त्ता का दायित्व था कि उस तिथि के पूर्व सभी पंजियों को अद्यतन कराते, बैंक खातों को अद्यतीकरण कर उसका रोकड़ पंजी से मिलान कराते और नाजिर के पास उपलब्ध भाउचर्स आदि का सत्यापन कराते। समाहर्त्ता द्वारा कैश डिटेल के लिए insist नहीं करना निरीक्षण की गुणवर्त्ता में कमी की ओर इंगित करता है तो नजारत उप समाहर्त्ता द्वारा निरीक्षण की तैयारियों की कमी को भी दर्शाता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा सत्यापन के संदर्भ में अपने बचाव बयान में यह कहा गया है कि उन्होंने सामान्य रोकड़ पंजी पर 6 माह तक हस्ताक्षर नहीं किया था क्योंकि उनके निर्देशों का पालन नाजिर द्वारा नहीं किया जा रहा था। इससे यह भी प्रतीत होता है कि उन्हें कहीं-न-कहीं यह आशंका थी कि नाजिर के द्वारा लेखा संधारण में गड़बड़ियॉं की जा रही हैं। ऐसी आशंका की स्थिति में उनके द्वारा अपने प्रभार की नाजरत का निरीक्षण क्यों नहीं किया गया, जिसके आधार पर नाजिर द्वारा की जा रही गड़बड़ियॉं उजागर हो जाती। सिर्फ इस आधार पर कि वर्ष 1998 में कार्यालय अधीक्षक द्वारा नाजिर को पंचायत निर्वाचन नजारत के प्रभार से हटाने की अनुशंसा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोपित पदाधिकारी द्वारा नाजिर के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा नहीं किया जाना स्वीकार्य योग्य नहीं पाया गया। आरोपित पदाधिकारी ने अपने इस तर्क को मजबूत करने के लिए सारा दोष नाजिर का है, अंकेक्षण रिपोर्ट का निम्नांकित उद्धरण दिया गया ः-"And also manipulation of pages appear to have been made in advance register by cashier Nazir" । परन्तु ये Manipulations पहले ही उजागर हो जाते अगर आरोपित पदाधिकारी द्वारा नजारत शाखा का विस्तृत निरीक्षण किया गया होता। आरोपित पदाधिकारी के जिम्मे समाहरणालय की कई शाखाओं का प्रभार था यथा गोपनीय शाखा, शस्त्र शाखा, सामान्य शाखा, विधि शाखा, नीलाम पत्र पदाधिकारी एवं जिला परिवहन पदाधिकारी, परन्तु इतनी महत्वपूर्ण प्रशाखाओं के प्रभार में होने का यह अर्थ भी है कि वे जिला पदाधिकारी के नियमित सम्पर्क में थे। ऐसी स्थिति में यदि उनके अधीनस्थ कर्मी द्वारा वित्तीय अनियमितता बरती जा रही थी और वह उनके प्रभार की शाखा (नजारत) थी और अगर वास्तव में नाजिर उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था, तो एक टीम बनाकर नजारत की विस्तृत जॉंच का प्रस्ताव समाहर्त्ता के समक्ष रखा ही जा सकता था। अगर उनके द्वारा नजारत की जॉंच और नाजिर के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव सिर्फ इसलिए नहीं दिया गया कि समाहर्त्ता द्वारा नाजिर के विरुद्ध पूर्व में कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी, तो यह उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा पर भी प्रश्न उठाता है। विशेषकर लेखा संधारण के मामले में समुचित कार्रवाई नहीं किये जाने के आरोप पर आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान संतोषजनक नहीं पाया गया। उनके विरुद्ध जिला नजारत शाखा में लेखा संधारण संबंधी अपने दायित्वों यथा पंजियों का नियमित संधारण एवं नियमित भौतिक सत्यापन के निर्वहन में शिथिलता का आरोप बनता है।
9. वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोप, जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपी के अभ्यावेदन पर सम्यक् विचारोपरान्त श्री त्रिपाठी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए ''निन्दन एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।
10. श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिष्चित वृहत दंड पर विभागीय पत्रांक 10768 दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 2137 दिनांक 19.10.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिष्चित वृहत दंड पर सहमति संसूचित की गयी।
11. प्रमाणित पाये गये आरोपों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री अषोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया हाता है :-
(i) निन्दन (वर्ष 2001-02), (ii) संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित16 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017
सं॰ 2/सी-3-30158/99 -सा0प्र0-15498
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संकल्प
17 नवम्बर 2016
श्री अशोक कुमार त्रिपाठी, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, पष्चिम चंपारण सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध गठित आरोप पत्र प्रपत्र 'क' समाहर्त्ता, प0 चंपारण के पत्रांक 42 दिनांक 05.05.1999 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' में कतिपय दुकानों के लिए बकाया लीज राषि की विवरणी गलत ढंग से तैयार करने, क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर गैर मजरूआ नदी एवं जंगल की जमीन की बन्दोबस्ती का प्रस्ताव व्यक्ति विषेष के लिए अनुषंसित करने, गैर मजरूआ मालीक जमीन की बन्दोबस्ती में अनियमितता, लगान निर्धारण में अनियमितता बरतने तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी ठकराहां के कार्यकाल में सामाजिक वाणिकी योजना के कार्यान्वयन में अनियमितता बरतने का आरोप प्रतिवेदित है।
2. विभागीय पत्रांक 167 दिनांक 12.12.2000 द्वारा श्री त्रिपाठी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री त्रिपाठी के द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 25.07.2007 को समर्पित किया गया। प्रतिवेदित आरोपों एवं श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण पर समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11482 दिनांक 19.11.2007 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
3. विभागीय जाँच आयुक्त के ज्ञापांक 759 दिनांक 12.09.2008 द्वारा प्राप्त निदेश के आलोक में विभागीय स्तर पर उक्त आरोप पत्र को फिर से गठन किया गया, जिसे विभागीय पत्रांक 11113 दिनांक 16.10.2008 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त को उपलब्ध करायी गयी।
4. अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 733 दिनांक 01.09.2012 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
5. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष से असहमत होते हुए पुनर्जांच कराने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णयानुसार विभागीय पत्रांक 2772 दिनांक 18.02.2013 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त कोे पुनर्जांच करने का निदेश दिया गया।
6. प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 100 दिनांक 20.05. 2015 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री त्रिपाठी से विभागीय पत्रांक 8200 दिनांक 08.06.2015 द्वारा अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री त्रिपाठी द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 26.06.2015 को समर्पित किया गया।
7. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं श्री त्रिपाठी के उक्त अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री त्रिपाठी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए सेवा से पदच्युत करने का विनिश्चय किया गया।
8. विभागीय पत्रांक 13349 दिनांक 04.09.2015 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से उपर्युक्त विनिष्चत दंड प्रस्ताव पर सहमति/परामर्ष की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 2960 दिनांक 29.02.2016 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि प्रस्तावित दंड अनुपातिक नहीं है।
9. श्री त्रिपाठी द्वारा उपर्युक्त पुनर्जांंच के निर्णय तथा पुनर्जांच के उपरांत प्राप्त द्वितीय जाँच प्रतिवेदन के आधार पर मांगे गये अभ्यावेदन के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 22283/2013 अषोक कुमार त्रिपाठी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 11.12.2015 को पारित न्यायादेष की छायाप्रति श्री त्रिपाठी द्वारा उपलब्ध करायी गयी। पारित न्यायादेष का कार्यकारी अंष निम्नवत् है :-
"Situated thus, and in view of the discussions made above, I have no hesitation in coming to the conclusion that the second enquiry has not been held in accordance with law. In the result, this application is allowed. The impugned enquiry report contained in Annexure-19 and second show-cause dated 08.06.2015 are set aside with liberty to the disciplinary authority to proceed afresh in accordance with law."
10. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उपर्युक्त न्यायादेष के अनुपालन में विभागीय पत्रांक 2772 दिनांक 18.02. 2013, जिसके द्वारा पुनर्जांच का निर्णय संसूचित किया गया था, तथा विभागीय पत्रांक 8200 दिनांक 08.06.2015, जिसके द्वारा द्वितीय जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित प्रमाणित आरोपों के लिए अभ्यावेदन की मांग की गयी थी, को निरस्त किये जाने का निर्णय लिया गया।
11. उपर्युक्त न्यायादेष दिनांक 11.12.2015 के अनुपालन में अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 733 दिनांक 01.09.2012 द्वारा प्राप्त प्रथम जाँच प्रतिवेदन, जिसमें सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया, के निष्कर्ष17 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 से अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा निर्धारित असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 7212 दिनांक 20.05.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी से अभ्यावेदन की मांग की गयी।
श्री त्रिपाठी द्वारा जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष से असहमति के बिन्दुओं के संबंध में अभ्यावेदन दिनांक 06.06.2016 समर्पित किया गया है। उक्त अभ्यावेदन में श्री त्रिपाठी का कहना है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा खास महाल परामर्षदात्री समिति की बैठक में दिनांक 28.05.2001 को पष्चिमी चम्पारण समाहरणालय एवं विभिन्न कार्यालय परिषर के अन्तर्गत खास महाल की जमीन पर बनी दुकानों/गुमंटियों का भाड़ा निर्धारित किया गया। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि राम नगर बाजार स्थित दुकानों से रूपया 3/- प्रति वर्गफीट की दर से किराया लिया जायेगा जो दिनांक 01.07. 2001 की तिथि से प्रभावी होगा। जब समार्हाा द्वारा ही वर्ष 2001 में सभी दुकानों का किराया रूपया 3/- प्रति वर्गफीट निर्धारित किया गया तो उनके द्वारा वर्ष 1997 में रूपया 5/- प्रति वर्गफीट निर्धारित करने का प्रस्ताव क्यों नहीं दिया गया था, सरासर गलत है तथा प्रा—तिक न्याय के विरूद्ध है। उनके द्वारा लीज के बकाया राषि की वसूली (जो डिमाण्ड पंजी में मौजुद था) उनके वरीय पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, बगहा के आदेष से किया गया। उन्होंने लीज नवीकरण का कोई प्रस्ताव भी समर्पित नहीं किया था, बल्कि नवीकरण हेतु प्रस्ताव के संबंध में मात्र अनुमति मांगी गयी थी। जाँच प्रतिवेदन से असहमति के दूसरे बिन्दु के संबंध में श्री त्रिपाठी का कहना है कि आरोप में बंदोबस्ती पंजी को आधार बनाया गया है तथा लिखा गया है कि उन्होंने उक्त अभिलेखों का प्र्रस्ताव भेजा परन्तु साक्ष्य के रूप में कोई प्रस्ताव की छायाप्रति संलग्न नहीं की गयी है। इससे यह आरोप स्वतः निराधार हो जाता है। समार्हाा, पष्चिम चम्पारण, बेतिया के पत्रांक 7प्र0/रा0 दिनांक 09.01.2012 द्वारा रामनगर अंचल का जो बन्दोबस्ती पंजी भेजा गया है, उसमें मात्र चार ही अभिलेख के बारे में दर्ज है तथा तत्कालीन अंचल अधिकारी, रामनगर द्वारा हल्का कर्मचारी के हाथ से लिखकर जो खतियान की प्रति भेजा गया है उसके अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि उक्त खतियान में जो खाता-खेसरा दर्ज है, तथा उक्त बन्दोबस्ती पंजी जो उक्त खाता के साथ दर्ज है, वह अलग-अलग है। यानि कि खतियान में दर्ज खाता-खेसरा एवं उक्त बन्दोबस्ती पंजी में दर्ज खाता-खेसरा में अन्तर है। उनका यह भी कहना है कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि उनके द्वारा कोई बन्दोबस्ती प्रस्ताव (जैसा की आरोप-पत्र में वर्णित है) दिया गया है और न ही ऐसे किसी प्रस्ताव पर क्रियान्वयन का ही कोई साक्ष्य है। अतः आरोप स्वतः आधारहीन है एवं असहमति के बिन्दु में वर्णित पंजी (जो मात्र चार वादों से संबंधित है) से भी कुछ सिद्ध नहीं होता है। जाँच प्रतिवेदन से असहमति के तीसरे बिन्दु के संबंध में श्री त्रिपाठी का कहना है कि यह आरोप सामाजिक वानिकी योजना के तहत लिये गये योजनाओं में बरती गई अनियमितता से संबंधित है। उक्त योजना के सहायक रोकड़ पंजी के आधार पर योजनाओ में दिये गये अग्रिम राषि का जो विवरण दिया गया है, वह गलत है। योजना संख्या 11/1993-94 में मात्र दो अग्रिम दिया गया, परन्तु इसमें तीन अग्रिम दर्ज है। इसी प्रकार योजना संख्या12/1993-94 में दो अग्रिम दिया गया परन्तु इसमें एक अग्रिम दर्ज है। साथ ही उनका यह भी कहना है कि अभिकर्त्ता को पूर्ण राषि का भुगतान नहीं होने के कारण ही प्राक्कलन में दर्ज माउण्ड एवं जाँच के समय पाये जाने वाले माउण्डों में अंतर है। अपने प्रतिवेदन दिनांक 23.12. 1994 में कार्यपालक अभियंता ने स्पष्ट लिखा है कि कार्य स्थल पर चल रहे कार्य से ऐसा प्रतीत हुआ कि अभिकर्त्ता कार्य को पूर्ण कराने की दिषा में सचेष्ट हैं। ऐसी स्थिति में यदि मान्य हो तो उन्हें प्राक्कलन की विषिष्टयों के अनुरूप कार्य पूर्ण कराने हेतु एक माह का समय दिया जा सकता है। उन्होंने अपने जाँच प्रतिवेदन में यह भी लिखा है कि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, ठकराहाँ द्वारा न तो एम0बी0 बुक किया गया है एवं ना ही मास्टर रौल को पारित किया गया है। योजना को 09 माह में पूर्ण करना था, परन्तु छः माह में ही उन्होंने अपना प्रभार नये अधिसूचित प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को सौंप दिया। नये पदाधिकारी द्वारा योजना को पूर्ण कराने हेतु क्या कार्रवाई की गई तथा अभिकर्त्ताओं ने योजना पूर्ण किया या राषि वापस करने के संबंध में प्रतिवेदन में कहीं कोई उल्लेख नहीं किया गया है। उनके प्रभार सौंपने के समय योजना का कार्य चल रहा था। उनके द्वारा कोई एम0बी0/विपत्र/मास्टर रौल नहीं पारित किया गया था। साथ ही उनके द्वारा योजना में पूर्ण राषि का भुगतान भी नहीं किया गया। यह प्रभार लेने वाले प्रखण्ड विकास पदाधिकारी का दायित्व था कि वे विषिष्टयों के अनुरूप योजना पूर्ण कराते या यथोचित कार्रवाई करते। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने काषीनाथ दीक्षित बनाम भारत संघ, AIR 1986 SC 2118 (1986) 3 SC 229 तथा माननीय उच्च न्यायालय, पटना ने एस0 के0 प्रसाद बनाम बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम, 1989 PLJR 294 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दस्तावेज की अनापूर्ति से जाँच दूषित हो जायेगी। उक्त तथ्यों के आधार पर श्री त्रिपाठी द्वारा अभ्यावेदन को स्वीकार करते हुए उपरोक्त आरोपों को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
12. प्रतिवेदित आरोप एवं श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त निम्नांकित तथ्य पाये गये :-
(i) आरोप संख्या-1 के संदर्भ में श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 10.02.2009 में स्वयं अंकित किया गया है कि-इस प्रकार तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, बगहा के निदेषानुसार संबंधित हल्का कर्मचारी द्वारा हल्का में संधारित डिमांड पंजी के आधार पर बकाया राषि की वसूली हेतु प्रस्ताव लगभग तीन माह में तैयार किया गया तथा प्रस्ताव की जाँच तत्कालीन अंचल निरीक्षक द्वारा किया गया तथा स्वी—ति हेतु अनुषंसा किया गया और उनके द्वारा सभी वस्तुस्थिति को अभिलेख संख्या-03/97-98 के आदेष फलक में दर्षाते हुए बकाया राषि की वसूली हेतु अनुमति एवं लीज के नवीकरण हेतु अभिलेख भूमि सुधार उप समार्हाा, बगहा को अग्रसारित किया गया। उक्त आदेष फलक में उनके द्वारा स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है कि बाजार में स्थित कुछ दुकानदारों को लीज राषि पन्द्रह पैसे, तो कुल को बीस पैसे तो कुछ को पाँच रू0 प्रति वर्गफीट सलाना की दर से जमाबन्दी में डिमांड अंकित किया गया है,18 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 जबकि विगत कई वर्षों से लीज की राषि नहीं वसूल की गयी है। वसूली नहीं होने से राजस्व बाधित है। बकाया राषि की वसूली की अनुमति एवं लीज के नवीकरण करने हेतु उनके द्वारा अभिलेख के माध्यम से अनुषंसा अनुमंडल में भेजा गया। प्रस्ताव की जाँच करने एवं शुद्ध करने का दायित्व अंचल निरीक्षक का है। यदि मांग तैयार करने में कोई लिपिकीय भूल हुई हो तो उसकी जवाबदेही संबंधित हल्का कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक की है तथापि कोई विाीय नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि डिमांड का योग सही है तथा रसीद भी नहीं काटा गया है और न ही वसूली हुआ है, जिसे र्वामान में वसूल किया जा सकता है। रामनगर दैनिक बाजार लीज राषि वसूली अभिलेख संख्या-3 विविध/97-98 एवं संलग्न विवरणी तथा आदेष फलक दिनांक 07.07.1997 में अंचल अधिकारी के द्वारा अंकित किया गया है किः-
''हल्का कर्मचारी ने अंचल निरीक्षक के माध्यम से प्रतिवेदित किया है। प्रतिवेदन के अवलोकन से विदित होता है कि रामनगर दैनिक बाजार, सा0 रामनगर, थाना नं0-619 में अवस्थित दुकान क्रमांक-1 से 368 तक का लगान 15 पैसे से 20 पैसे एवं कुछ दुकानों का 5 रू0 से 7 रू0 प्रति वर्गफीट की दर से लीज किया गया है। गत कई वर्षों से इसकी लीज राषि वसूल नहीं की गई है। यद्यपि वसूली बंद करने के लिए किसी पदाधिकारी का कोई आदेष नहीं है। वसूली नहीं होने के फलस्वरूप मो0 1,72,326.50 रू0 बकाया है। नियमानुसार इस लीज का नवीकरण भी आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः बकाया राषि की वसूली हेतु अनुमति एवं लीज के नवीकरण हेतु अभिलेख भूमि सुधार उप समार्हाा, बगहा को भेजें।''
उपरोक्त से अंचल अधिकारी के विरूद्ध आरोप संख्या-1 प्रमाणित होता है।
(ii) समार्हाा, पष्चिम चम्पारण, बेतिया के पत्रांक 15 दिनांक 11.03.2005 के द्वारा कार्यपालक अभियंता, रा0ग्रा0नि0का0, बेतिया का पत्रांक 659 दिनांक 26.12.2015 प्राप्त हुआ है, जिसके द्वारा श्री त्रिपाठी, तत्कालीन अंचल अधिकारी के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर मंतव्य समर्पित किया गया है, जो सामाजिक वाणिकी योजना संख्या-11, 12 एवं 13 वर्ष 1993-94 से संबंधित है। प्रासंगिक पत्र में कार्यपालक अभियंता द्वारा स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि अंचल अधिकारी द्वारा प्रासंगिक योजनाओं के अभिर्काा कनीय अभियंता को बिना सहायक अभियंता की अनुषंसा किये प्रथम अग्रिम दिनांक 08.12.1993 को 75,000 रू0 तथा दिनांक 15.12.1993 को 1,50,000 रू0 दिया गया, जबकि कनीय अभियंता द्वारा प्रथम चालू विपत्र दिनांक 27.02.1994 को बनाया गया था। स्पष्ट है कि प्रासंगिक योजना में अभिर्काा को अग्रिम दिये जाने में श्री त्रिपाठी, तत्कालीन अंचल अधिकारी, ठकराहा के द्वारा विभागीय नियमों/निदेषों की अवहेलना की गयी है। अनुमंडल पदाधिकारी, बगह के पत्रांक 696 दिनांक 29.06.1994 के द्वारा सामाजिक वाणिकी योजनान्तर्गत योजना संख्या-11/93-94, 12/93-94 एवं 13/93-94 के जाँचोरान्त प्रतिवेदित किया गया है कि योजना संख्या 11/93-94 में 9,000 माउण्ड के स्थान पर 2,000 माउण्ड बना हुआ पाया गया, योजना संख्या-12/93-94 में 8,990 माउण्ड के स्थान पर 4,000 माउण्ड बना हुआ पाया गया तथा योजना संख्या-13/93-94 में 8,990 माउण्ड के स्थान पर 3,000 माउण्ड बना हुआ पाया गया। अनुमंडल पदाधिकारी, बगहा के पत्रांक 245 दिनांक 29.04.1994 के द्वारा भी प्रासंगिक सामाजिक वाणिकी योजनाओं के संबंध में जाँच प्रतिवेदन समर्पित करते हुए स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया गया है कि योजनाओं के कार्यान्वयन में अनियमितता बरती गयी है।
श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 06.06.2016 में स्वयं स्वीकार किया गया है कि अंचल अधिकारी, ठकराहा के पदस्थापन अवधि में मात्र छः माह हेतु प्रखंड विकास पदाधिकारी, ठकराहा के प्रभार में थे एवं दिनांक 14.06.1994 को उनके द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, ठकराहा का प्रभार श्री विष्णुदेव प्रसाद को सौंप दिया गया। स्पष्ट है कि प्रासंगिक सामाजिक वाणिकी योजनाओं में इनके द्वारा अग्रिम दिया गया है एवं कार्य कराया गया है।
विभागीय नियमों/निदेषों के प्रतिकूल उपरोक्त तीनों योजनाओं में प्रथम अग्रिम के रूप में 7,500 रू0 अथवा प्राक्कलित राषि का 25%, जो भी न्यूनतम हो, अग्रिम दिये जाने के प्रावधान के प्रतिकूल 75,000 रू0 अग्रिम दिया गया है तथा योजना में कार्य प्रगति तथा मापी प्रतिवेदन प्राप्त किये बिना पुनः द्वितीय अग्रिम के रूप में 1,50,000 रू0 अग्रिम दिया गया है, जो स्पष्ट रूप से विभागीय नियमों/निदेषों का उल्लंघन है। साथ ही दिये गये अग्रिम के अनुरूप कार्य नहीं कराया जाना, योजना के कार्यान्वय में अनियमितता को प्रमाणित करता है।
13. वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोप, श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर सम्यक् विचारोपरान्त श्री त्रिपाठी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दंड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।19 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 14. श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिष्चित वृहत दंड पर विभागीय पत्रांक 11288 दिनांक 19.08.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 2138 दिनांक 19.10.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिष्चित वृहत दंड पर सहमति संसूचित की गयी।
15. प्रमाणित पाये गये आरोपों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री अषोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, पष्चिम चंपारण सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया हाता है :-
(i) निन्दन (वर्ष 1997-98),
(ii) तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।
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सं॰ 2/आरोप-01-41/2015-सा0प्र0-15534
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संकल्प
18 नवम्बर 2016
श्री मनोज कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 910/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, पीरो, भोजपुर सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार, पटना के विरूद्ध राज्य सूचना आयोग के वाद संख्या 64809/11-12 में दिनांक 15.12.2015 को पारित आदेष की अवहेलना का आरोप प्रतिवेदित करते हुए विभागीय कार्यवाही की अनुषंसा की गयी।
राज्य सूचना आयोग के ज्ञापांक 14549 दिनांक 04.01.2016 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा-19 के प्रावधानों के अधीन अपील का निष्पादन 45 दिनों के अन्दर नहीं करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 1093 दिनांक 21.01.2016 द्वारा श्री कुमार को स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेष दिया गया।
श्री कुमार के पत्र दिनांक 02.03.2016 द्वारा स्पष्टीकरण एवं दिनांक 21.03.2016 द्वारा पूरक स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा राज्य सूचना आयोग के पारित आदेष एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की सम्यक समीक्षा की गयी। आयोग द्वारा दिये गये निदेष के अनुपालन के क्रम में प्रथम अपीलीय प्राधिकार के रूप में वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराने, राज्य सूचना आयोग के निदेष के अनुपालन में तत्परता एवं सतर्कता नहीं बरतने तथा कार्यालय पर नियंत्रण नहीं रखने जैसे प्रमाणित आरोपों के लिए श्री कुमार को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9122 दिनांक 28.06.2016 द्वारा ''निन्दन'' (आरोप वर्ष 2014-15) एवं असंचयात्मक प्रभाव (non-cumulative effect) से एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड दिया एवं संसूचित किया गया।
श्री कुमार द्वारा उपर्युक्त दंडादेष पर पुनर्विचार हेतु पुनर्विलोकन अर्जी (दिनांक 10.08.2016) समर्पित किया गया। समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी में श्री कुमार का कहना है कि दंड का आधार 'कार्यालय सहायक द्वारा प्रासंगिक आदेष को ससमय संचिका में उपस्थापित नहीं किये जाने से यह परिलक्षित होता है कि श्री कुमार का अपने कार्यालय पर नियंत्रण नहीं था' बनाया गया। सिर्फ एक उदाहरण से उन्हें इस आधार पर दंडित किया जा रहा है कि उनका कार्यालय पर नियंत्रण नहीं था। उनका कार्यालय पर पूरी तरह नियंत्रण था। यह महज एक संयोग रहा कि प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के रूप में वांछित सूचना कार्यालय के सहायको की लापरवाही एवं षिथिलतापूर्ण रवैये के कारण ससमय उपलब्ध नहीं कराया जा सका। आगे उनका कहना है कि पीरो एक संवेदनषील अनुमंडल है। यहाँ पर नक्सली, माले की गतिविधियाें एवं साम्प्रदायिकता के कारण आम जन-जीवन में तनाव व्याप्त होने की संभावना हमेषा प्रबल बनी रहती है। दिनांक 31.03.2014 को अकबर हत्याकांड (पीरो हत्याकांड संख्या 73/14) के सिलसिले में प्रषासन को जनता के भारी आक्रोष का सामना करना पड़ा था। साम्प्रदायिक तनाव अपने चरम पर था। इस घटना के बाद लगभग यही स्थिति बनी रही। अतः उन्हें क्षेत्र भ्रमण में ज्यादा समय देना पड़ता था ताकि शन्ति व्यवस्था बनी रहे। उनका आगे कहना है कि उनके पदस्थापन काल में Performance Appraisal Report (PAR) को दंडादेष पारित करते समय आधार बनाया जाय। समर्पित अभ्यावेदन में उनका कहना है कि कार्यालय एक तंत्र है जहाँ हर कर्मी अपने-अपने र्काव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करते हैं। किसी दूसरे कर्मी की गलती को विभाग द्वारा संज्ञान में न लेकर उसके द्वारा की गयी गलती का दंड उन्हें दिया जा रहा है।
अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध राज्य सूचना आयोग के वाद संख्या 64809/11-12 में दिनांक 15.12.2015 को पारित आदेष तथा समर्पित स्पष्टीकरण, संलग्न साक्ष्यों एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी पर सम्यक् विचारोपरान्त पाया गया कि अपीलर्काा के द्वारा अनुमंडल कार्यालय, पीरो में प्रथम अपीलीय प्राधिकार-सह-अनुमंडल पदाधिकारी, पीरो को समर्पित प्रथम अपील आवेदन पत्र दिनांक 24.08.2011 को निष्पादन नहीं किये जाने के कारण राज्य20 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 सूचना आयोग द्वारा दिनांक 16.10.2014 को पारित आदेष में सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा-19(6) के प्रावधानों का प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा उल्लंघन किये जाने के कारण प्रथम अपीलीय प्राधिकार को अगली सुनवाई की तिथि के पूर्व धारा-19(6) को पूरा करने हेतु निदेष दिया गया था। श्री कुमार के योगदान करने के पूर्व ही अगर अपील कालवाधित हो चुका था तो वैसी स्थिति में आयोग को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए अपीलर्काा को भी सूचना उपलब्ध कराते हुए माननीय राज्य सूचना आयुक्त को अनुपालन प्रतिवेदन भेजना चाहिए था, जो श्री कुमार द्वारा नहीं किया गया। राज्य सूचना आयोग द्वारा दिनांक 22.04.2015 को पारित आदेष में प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेष का दिनांक 16.10.2014 तक अनुपालन नहीं किये जाने के संंबंध में अंकित किया गया है कि सुनवाई की अगली तिथि के पूर्व यदि दोनों अधिकारियों के द्वारा आदेष का अनुपालन नहीं किया जाता है तो क्रमषः उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की अनुषंसा तथा आर्थिक दंड लगाने की कार्रवाई की जायेगी।
राज्य सूचना आयोग द्वारा दिनांक 15.12.2015 को पारित आदेष से स्पष्ट है कि उक्त तिथि तक प्रथम अपीलीय प्राधिकार/लोक सूचना पदाधिकारी द्वारा राज्य सूचना आयोग में उपस्थित नहीं हुए और न ही आवेदक/अपीलर्काा को कोई सूचना दी गयी। स्पष्टतः राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेषों की अवहेलना प्रथम अपीलीय प्राधिकार द्वारा की गयी है तथा उनके इस कदाचारपूर्ण आचरण के लिए माननीय आयोग द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की अनुषंसा की गयी। श्री कुमार के द्वारा संबंधित सहायक को संचिका में उपस्थापित करने हेतु आदेष दिये जाने मात्र से उनके र्काव्य तथा दायित्वों का निर्वहन पूरा नहीं हो जाता है।
श्री कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, पीरो, भोजपुर के योगदान देने के पूर्व ही अपीलर्काा द्वारा दाखिल किये गये प्रथम अपील आवेदन पर भी तत्कालीन अपीलीय प्राधिकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी, ऐसी स्थिति में श्री कुमार को राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेष के अनुपालन हेतु सतर्क एवं तत्पर रहना चाहिए था जो कि श्री कुमार द्वारा नहीं किया गया। राज्य सूचना आयोग द्वारा दिनांक 15.12.2015 को पारित आदेष कार्यालय में प्राप्त होने के बावजूद संंबंधित सहायक/प्रषाखा पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के समक्ष उपस्थापित नहीं किया जाना यह प्रमाणित करता है कि उनका कार्यालय पर नियंत्रण नहीं था।
श्री कुमार का कहना है कि नक्सली/माले की गतिविधियों एवं संप्रदायिकता के कारण आम जन-जीवन में तनाव व्याप्त होने की संभावना हमेषा बनी रहती थी तथा दिनांक 21.03.2014 को अकबर हत्याकांड के कारण सम्प्रदायिक तनाव अपने चरम पर था, उक्त घटना के बाद शांति व्यवस्था हेतु उन्हें क्षेत्र भ्रमण में अधिक समय देना पड़ता था। श्री कुमार द्वारा उक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। मार्च, 2014 की घटना के कारण अक्टूबर, 2014 एवं उक्त तिथि के बाद पारित आदेष का अनुपालन नहीं करना तर्कसंगत नहीं होता है।
वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 10.08.2016 को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9122 दिनांक 28.06.2016 द्वारा निर्गत दंड ''निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15) एवं असंचयात्मक प्रभाव (non-cumulative effect) से एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड'' को पूर्ववत् बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।
अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मनोज कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 910/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, पीरो, भोजपुर सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार, पटना के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9122 दिनांक 28.06.2016 एवं शुद्धि-पत्र ज्ञापांक 11454 दिनांक 24.08. 2016 द्वारा निर्गत दंड ''निन्दन (आरोप वर्ष 2014-15) एवं असंचयात्मक प्रभाव (non-cumulative effect) से एक वेतनवृद्धि पर रोक का दंड'' को पूर्ववत् बरकरार रखा एवं संसूचित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
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सं॰ 2/नि॰था॰-11-03/2016-सा0प्र0-15674
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संकल्प
23 नवम्बर 2016
पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 2569 दिनांक 03.11.2016 द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या 116/2016 दिनाक 28.10.2016 धारा-7/8/13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(डी) भ्र0नि0अधि0, 1988 के तहत श्री गुलाम मुस्तफा अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 929/11, अनुमंडल पदाधिकारी, जयनगर, मधुबनी को प्राथमिकी अभियुक्त बनाये जाने एवं दिनांक 27.10.2016 को श्री अंसारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में शहीद खुदिराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर भेजे जाने की सूचना प्राप्त है।
2. श्री अंसारी को दिनांक 27.10.2016 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत् उन्हें गिरफ्तार किये जाने की तिथि दिनांक 27.10.2016 के प्रभाव से अगले आदेष तक के लिए निलंबित किया जाता है।21 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 3. निलंबन अवधि में श्री अंसारी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10 के तहत् अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
भीम प्रसाद, उप-सचिव।
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सं॰ 2/नि॰का॰-307/2007-सा0प्र0-16593
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संकल्प
14 दिसम्बर 2016
श्री अल्लामा मुख्तार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक-987/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचलाधिकारी, अतरी, गया को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10472 दिनांक 21.07.2015 के द्वारा सेवा से बर्खास्तगी का दंड संसूचित किया गया।
2. श्री मुख्तार द्वारा विभागीय पत्रांक 11544 दिनांक 21.08.2014, जिसके द्वारा उनसे संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमति के निर्धारित बिन्दु पर अभ्यावेदन की मांग की गयी थी, को निरस्त करने हेतु सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 1142/2015 माननीय उच्च न्यायालय में दायर किया गया। तत्पश्चात् विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10472 दिनांक 21.07.2015, जिसके द्वारा श्री मुख्तार को सेवा से बर्खास्त किया गया, को निरस्त करने हेतु आई0 ए0 संख्या 6719/2015 दायर किया गया।
सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-1142/2015 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 16.05.2016 को पारित न्यायादेश की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री मुख्तार द्वारा आवेदन दिनांक 11.07.2016 समर्पित किया गया। उक्त न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् हैः-
"16. This takes us to the last submission of the petitioner that the punishment of dismissal from service is too harsh and excessive. The petitioner submits that the inquiry officer did not find charged proved against him and as such, the extreme punishment of dismissal from service may be reconsidered. The submission of the petitioner is not completely devoid of merit. Furthermore, there is no prior act of omission and commission, except for the incident in question.
17. In vew of the above, the matter is remitted to the disciplinary authority for reconsideration of punishment of dismissal from service.
18. With the aforesaid observation, the writ application is disposed of." 3. उपर्युक्त न्यायादेश के आलोक में प्रासंगिक मामले की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय आदेश ज्ञापांक 12695 दिनांक 19.09.2016 द्वारा श्री मुख्तार के विरूद्ध अधिरोपित सेवा से बर्खास्तगी के दंड को पूर्ववत बरकरार रखने का निर्णय संसूचित किया गया।
4. सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-1142/2015 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 16.05.2016 को पारित न्यायादेश के विरूद्ध श्री मुख्तार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एल0पी0ए0 सं0-1561/2016 अल्लामा मुख्तार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य दायर किया गया।
एल0पी0ए0 सं0-1561/2016 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 18.10.2016 को पारित न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् हैः-
"23. We accordingly set aside the order, dated 21.07.2015, imposing upon the appellant the penalty of dismissal from service, as it does not show application of mind over the explanation submitted by the appellant in response to the communication, dated 21.08.2014. The order, dated 21.07.2015, is accordingly quashed having been passed in violation of principles of natural justice. The State respondents, particularly, respondent No. 2 is directed to ensure that an order is passed afresh, dealing with each of the points raised in the explanation submitted by the appellant, within a period of two months from the date of receipt/production of a copy of this order.
24. It will be open to the respondents to supply to the appellants detailed tentative notes of disagreement afresh recording reasons why the report to the Inquiry Officer could not be accepted and on the basis of materials on record, charge framed against the petitioner could be said to have been proved. In such circumstances, the appellant shall be given adequate opportunity to respond to the detailed tentative notes of disagreement. In any case, the entire exercise must be completed within the aforesaid period of two months.
25. CWJC No. 1142 of 2015 is allowed to the extent above. The order under appeal, dated 16.05.2016 passed by the learned single Judge in CWJC No. 1142 of 2015, is set aside."22 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 5. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उपर्युक्त न्यायादेश दिनांक 18.10.2016 के अनुपालन में सम्यक् विचारोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार निम्नांकित निर्णय संसूचित किया जाता हैः-
(i) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(5) के प्रावधान के तहत् श्री मुख्तार की सेवा से बर्खास्तगी से संबंधित विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10472 दिनांक 21.07.2015 को निरस्त करते हुए श्री मुख्तार को उक्त सेवा से बर्खास्तगी की तिथि 21.07.2015 से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना रहेगा। निलंबन अवधि में नियमानुकूल जीवनयापन भत्ता का भुगतान किया जायेगा।
(ii) श्री मुख्तार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5175 दिनांक 03.06.2009 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 7(iii) में प्रतिवेदित किया गया है कि प्रतिपरीक्षण के दौरान धावादल सदस्यों द्वारा घूस की प्राप्ति/बरामदगी पर पूछा गया प्रश्न कि क्या जब आरोपी ने घूस की राशि को प्राप्त कर जमीन पर गिराया तो जमीन पर राशि कि अवस्था क्या थी ? इसके उत्तर में एक सदस्य का कहना कि रूपया इकट्ठा था एवं दूसरे का कहना की रूपया बिखर गया था, पूर्व से अतिसंदेहास्पद को घूस की राशि के प्राप्ति-बरामदगी की विवरणी पर विराम लगाता है एवं इस बात की पुष्टि करता है कि आरोपी पर घूस प्राप्त करने का आरोप प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त बातों की पुष्टि में आरोपी ने माननीय उच्च एवं उच्चतम न्यायालयाें के अनेक न्यायादेशों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है, जिनमें ऐसी त्रुटियों के कारण आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया है। यहाँ तो आरोपी के यहाँ परिवादी का कोई कार्य लम्बित ही नहीं था जिस कारण परिवाद पत्र का कोई आधार नहीं था एवं पूरी घटना षडयंत्र अन्तर्गत रची दिखती है। आरोपी द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य हैं। संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्षतः प्रतिवेदित किया गया है कि आरोपी के विरूद्ध दोनों आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं।
संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष से असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर श्री मुख्तार से अभ्यावेदन की मांग की जायेगी :-
(क) निगरानी धावा दल द्वारा प्रस्तुत पोस्ट ट्रैप मेमोरेन्डम में यह अंकित है कि रिश्वत की राशि में फिनोफ्थलीन लगाया गया था। आरोपित श्री अल्लामा मुख्तार के दोनों हाथों की उँगलियों को सोडियम कार्बोनेट पाउडर के घोल में धुलवाए जाने पर सफेद घोल का रंग गुलाबी हो गया। जिससे यह स्पष्ट है कि परिवादी द्वारा दी गयी घूस की राशि को श्री मुख्तार द्वारा हाथ में लिया गया।
(ख) जिला उद्यान पदाधिकारी के द्वारा अंचलाधिकारी, अतरी से परिवादी के भूमि के स्वामित्व प्रतिवेदन की मांग की गयी थी। किन्तु अंचलाधिकारी के पद पर पदस्थापित श्री अल्लामा मुख्तार के द्वारा भूमि सत्यापन प्रतिवेदन नहीं भेजा गया था। इससे यह स्पष्ट है कि परिवादी का मामला श्री मुख्तार के स्तर पर लंबित था। इससे परिवादी के द्वारा लगाये गये आरोपों एवं घूस लिये जाने तथा रंगे हाथ पकड़े जाने संबंधी आरोपों की पुष्टि होती है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्रवाई हेतु भेज दी जाय।
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सं॰ 2/सी॰-1020/2010-सा0प्र0-16862
——— संकल्प 20 दिसम्बर 2016
श्री अमरनाथ साह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान सम्प्रति उप निदेषक (खाद्य), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्यों सहित जिला पदाधिकारी, सिवान के पत्रांक 849/सी0 दिनांक 07.04.2010 द्वारा प्राप्त हुआ। श्री साह के विरूद्ध गलत सूचना देकर मुख्यालय से बाहर जाने, ससमय SIO मिलने के बावजूद उसे समय पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराने, बैठकों में पूरी तैयारी के साथ भाग नहीं लेने, सप्लाई रिविजन संख्या 268/08 एवं 271/08 में आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा के द्वारा पारित आदेष के अनुपालन में सकारण आदेष पारित नहीं करने, प्राप्त षिकायत के आलोक में जन वितरण प्रणाली बिक्रेताओं के विरूद्ध जाँच नहीं करने/ठोस कार्रवाई नहीं करने, मेसर्स गोयल स्टेषनरी ट्रेडर्स, सिवान को अवैध तरीके से सील करने तथा एक व्यक्ति को अवैध रूप से थाना हाजत में बन्द रखने, जाति प्रमाण-पत्र/निवास प्रमाण-पत्र/आय प्रमाण-पत्र के सत्यापन में मनमानी करने, वाहन चेकिंग के नाम पर वाहनों को पकड़कर अवैध तरीके से कई सप्ताह रखे जाने तथा जन प्रतिनिधियों के साथ अमर्यादित व्यवहार करने का आरोप प्रतिवेदित है।
2. श्री साह से उक्त आरोपों पर विभागीय पत्रांक 10686 दिनांक 01.08.2014 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री साह के पत्रांक 65/गो0 दिनांक 15.08.2014 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। उक्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक23 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 13208 दिनांक 22.09.2014 द्वारा जिला पदाधिकारी, सिवान से मंतव्य की मांग की गयी। तत्पष्चात विभागीय पत्रांक 5908 दिनांक 20.04.2015, 7885 दिनांक 02.06.2016, 9708 दिनांक 14.07.2016 एवं पत्रांक 10597 दिनांक 03.08.2016 द्वारा स्मारित किये जाने पर जिला पदाधिकारी, सिवान के पत्रांक 2927/सी0 दिनांक 17.10.2016 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ।
3. प्रतिवेदित आरोपों, श्री साह के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, सिवान द्वारा प्रतिवेदित मंतव्य पर सम्यक् विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री साह के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है। आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, सिवान के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. जिला पदाधिकारी, सिवान को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।
5. श्री अमरनाथ साह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 549/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सिवान सम्प्रति उप निदेषक (खाद्य), भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।
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सं॰ 2/सी॰-01-33/2015-सा0प्र0-16863
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संकल्प
20 दिसम्बर 2016
श्री धीरेन्द्र कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 578/11, तत्कालीन विषेष भू-अर्जन पदाधिकारी, पटना बाढ़ सुरक्षा योजना, पटना सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, नवादा के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्यों सहित संयुक्त सचिव-सह-निदेषक, भू-अर्जन एवं पुनर्वास का पत्रांक 1748 दिनांक 21.10.2016 द्वारा उपलब्ध कराया गया है। उक्त आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' में पद का दुरूपयोग करते हुए स्वयं के नाम पर एवं अन्य व्यक्ति, जो पंचाटी नहीं थे, के नाम पर अनियमित निकासी किये जाने एवं निकासी एवं व्ययंन पदाधिकारी के रूप में कार्यालय के रोकड़ पंजी का नियमानुकूल संधारण नहीं करवाने का आरोप प्रतिवेदित है।
2. श्री झा से उक्त आरोपों पर विभागीय पत्रांक 889 दिनांक 30.09.2015 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री झा के पत्रांक 832 दिनांक 12.11.2016 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।
3. प्रतिवेदित आरोपों एवं श्री झा के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक् विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री झा के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानोंं के तहत् विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है। आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
4. प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।
5. श्री धीरेन्द्र कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 578/11, तत्कालीन विषेष भू-अर्जन पदाधिकारी, पटना बाढ़ सुरक्षा योजना, पटना सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, नवादा (अधिसूचित अपर समार्हाा, सहरसा) को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।24 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017
सं॰ 2/सी॰-10102/2009-सा0प्र0-17128
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संकल्प
26 दिसम्बर 2016
श्रीमती इन्दू कुमारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1188/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, गौनाहा, पष्चिमी चम्पारण, बेतिया सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 9359 दिनांक 16.08.2010 द्वारा इंदिरा आवास के लिए संधारित पंजी को सत्यापित नहीं करने, पंजी में की गयी प्रविष्टि के उपरान्त हस्ताक्षर नहीं करने, योजना पंजी में कतिपय मामलों में लाभार्थियों का नाम अंकित नहीं रहने, लछनौता पंचायत में प्रतीक्षा सूची के क्रमांक को तोड़कर इंदिरा आवास का लाभ दिये जाने से संबंधित आरोप के लिए आरोप प्रपत्र 'क' गठित कर आवष्यक कार्रवाई हेतु विभाग को उपलब्ध कराया गया।
प्रतिवेदित आरोप के संबंध में विभागीय पत्रांक 9155 दिनांक 16.09.2010 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु निदेष दिया गया।
इसी बीच ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 2832 दिनांक 14.03.2011 द्वारा श्रीमती कुमारी के विरूद्ध साक्ष्यों सहित पूरक आरोप-पत्र गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया, जिसमें इनके विरूद्ध इंदिरा आवास, के0सी0सी0 एवं वृद्धावस्था पेंषन योजना में अवैध राषि लेने, इंदिरा आवास योजना में राषि भुगतान हेतु लाभार्थियों का एडभाईस किस्त करके एवं क्रम तोड़कर बैंकों को भेजने एवं इनके पति के भ्रष्टाचार में लिप्त होने से संबंधित आरोप प्रतिवेदित किया गया।
2. विभागीय पत्रांक 5088 दिनांक 06.05.2011 द्वारा श्रीमती कुमारी से पूरक आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु निदेष दिया गया। स्मारित किये जाने के बावजूद भी स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने के फलस्वरूप विभागीय संकल्प ज्ञापांक 120 दिनांक 05.01.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय संसूचित करते हुए आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 2511/भी0 दिनांक 14.10.2015 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया। समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या-01(4) को मुख्यतः अप्रमाणित तथा आरोप संख्या-01(च) को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है।
4. विभागीय पत्रांक 17428 दिनांक 17.12.2015 द्वारा श्रीमती कुमारी को जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए आरोप संख्या-01(च) के प्रमाणित आरोप के लिए अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया।
श्रीमती कुमारी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 28.01.2016 में उनके द्वारा प्रमाणित आरोप संख्या-01(च) के संबंध कहा गया है कि-''इस संबंध में मुझे कहना है कि बजड़ा पंचायत का जो आदेश फलक लगाया गया है। वह मेरे कार्य अवधि का नहीं और ना ही मेरे द्वारा संधारित किया गया है। मेरे द्वारा जो भी आदेश फलक (नाजीर को राशि भुगतान का आदेश) निर्गत किया गया है। इन सभी में दिनांक, चेक संख्या कुल राशि आदि स्पष्ट रूप में अंकित की गई है। साथ ही इस आदेश फलक पर मेरा और मेरे प्रधान सहायक का हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से अंकित है (साक्ष्य स्वरूप बजड़ा पंचायत, लझनौता पंचायत एवं भितिहरवा पंचायत एवं डरौल पंचायत का आदेश फलक लगा रही हूँ), जिसमें क्रम संख्या, पंचायत का नाम, पिता/पति का नाम, ग्राम-खाता संख्या राशि आदि स्पष्ट रूप से अंकित है, जिसमें कार्यालय का पत्रांक दिनांक, राशि, चेक संख्या आदि अंकित है, जिसमें नाजीर को आदेश दिया गया है कि उक्त खाता में चेक के माध्यम से राशि का भुगतान करें।'' 5. अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 12468 दिनांक 12.09.2016 द्वारा निम्नांकित असहमति के बिन्दुओं पर श्रीमती कुमारी से अभ्यावेदन की मांग की गयी :-
आरोप सं0-1(1), इंदिरा आवास के निमित संधारित पंजी को सत्यापित नहीं करने से संबंधित है। ग्राम पंचायत लखनौता की इंदिरा आवास की नियमित संधारित पंजी के आधार पर संदेह का लाभ देते हुए आरोप को अप्रमाणित पाया गया, जबकि आरोप प्रपत्र 'क' के साथ साक्ष्य स्वरूप संलग्न योजना पंजी के अवलोकन से स्पष्ट है कि उक्त पंजी को सत्यापित नहीं किया गया है।
आरोप सं0-1(2), जिस पंजी में कहीं भी प्रविष्टि के उपरान्त हस्ताक्षर नहीं करने से संबंधित है को भी आरोप सं0 1(1) के लिए वर्णित कारणों से संचालन पदाधिकारी द्वारा अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
आरोप सं0-1(3), वर्ष 2009-10 हेतु संधारित पंजी में योजना सं0 128 से 151 तक के किसी भी योजना में लाभुक का नाम अंकित नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों के आधार पर उक्त आरोप को भी अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है, जबकि आरोप प्रपत्र 'क' के साथ साक्ष्य स्वरूप संलग्न योजना पंजी के पृष्ठों के अवलोकन से स्पष्ट है कि योजना के लाभुक का नाम योजना पंजी में अंकित नहीं किया गया है।
6. श्रीमती कुमारी के पत्र दिनांक 18.10.2016 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया। समर्पित अभ्यावेदन में श्रीमती इन्दु कुमारी का कहना है कि लक्षनौता पंचायत के इंदिरा आवास पंजी पर उनका हस्ताक्षर दिनांक 20.08.2009 अंकित है। आरोप संख्या-01(2) के संबंध में इनका कहना है कि पंजी के सारे पृष्ठ इनका हस्ताक्षर अंकित है। साथ ही आरोप संख्या-01(3) के संबंध में इनका कहना है कि वर्ष 2009-10 में लक्षनौता पंचायत के इंदिरा आवास पंजी पूर्णतः सत्यापित है। इस पंजी में सभी पृष्ठ पर योजना संख्या/योजना का नाम/लाभार्थियों का नाम/पिता/पति का नाम/कुल प्राक्कलित राषि/बैंक का नाम/खाता संख्या अंकित है तथा प्रथम किस्त 24,000/-(चौबीस हजार) रूपये जो इनके (श्रीमती इन्दु कुमारी) द्वारा भुगतान किया गया है तथा दूसरी किस्त जो बाद के प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा भुगतान किया गया है पर संबंधित सहायक एवं पदाधिकारी का हस्ताक्षर भी अंकित है।25 Pबहार गजट, 18 जनवर(cid:15) 2017 7. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं समर्पित अभ्यावेदन की सम्यक समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि उनके द्वारा संबंधित पंजियों पर हस्ताक्षर किये जाने के उपरान्त किया गया प्रतीत होता है, जो संभवतः अभिलेखों को अद्यतन किये जाने के मद्देनजर उनके द्वारा किया गया प्रतीत होता है। अतः आरोपों का गठन हो जाने के पश्चात् तथा विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ हो जाने के पश्चात् पूर्व में पायी गयी त्रुटियों के किए गए निराकरण के पश्चात् समर्पित दस्तावेजों के आधार पर त्रुटि निराकरण के पूर्व में की गयी चूक एवं हुई अनियमितता के संदर्भ में उनका उपरोक्त कथन मान्य नहीं है।
श्रीमती इन्दु कुमारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपाें में से इंदिरा आवास योजना के योजना पंजी को विधिवत् संधारित नहीं करने एवं की गयी प्रविष्टियों के उपरान्त हस्ताक्षर नहीं करने/सत्यापित नहीं करने का आरोप, आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के साथ संलग्न साक्ष्यों के आधार पर स्वतः प्रमाणित है।
8. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्रीमती इन्दु कुमारी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् अंसचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित किये जाने का निर्णय लिया गया।
अतः अनुषासनिक प्राधिकर के निर्णयानुसार श्रीमती इन्दू कुमारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1188/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, गौनाहा, पष्चिमी चम्पारण, बेतिया सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत् निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) अंसचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
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