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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 15 February 2017

Published 15 February 2017

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-02-15.7
Languages
English, Hindi

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(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

ॢबह(cid:4)र गजट

ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 26 माघ 1938 (श0) सं(cid:8)या 7 पटना, बुधवार, ———————— 15 फरवर(cid:15) 2017 (ई0) %वषय-सूची पृ*ठ भाग-1—(cid:1)नयुि/त, पद2थापन, बदल(cid:15), शि/त, छु 6ी और अ9य :यि/तगत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—2वयंसेवक गु?म@ के समादे*टाओं के आदेश।

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भाग-1-ख—मैE(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Iाओं के पर(cid:15)Iा-फल, कायJKम, छाLवृिMत Nदान, आOद।

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भाग-1-ग—PशIा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Iाफल आOद ---

भाग-2—Qबहार-राSयपाल और कायाJTयI@ Uवारा (cid:1)नकाले गये %व(cid:1)नयम, आदेश, अVधसूचनाएं और (cid:1)नयम आOद। 3-4 भाग-3—भारत सरकार, पिWचम बंगाल सरकार और उYच 9यायालय के आदेश, अVधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राSय गजट@ के उ\रण। ---

भाग-4—Qबहार अVध(cid:1)नयम ---

पृ*ठ भाग-5—Qबहार %वधान मंडल म^ पुर:2था%पत %वधेयक, उ/त %वधान मंडल म^ उप2था%पत या उप2था%पत `कये जानेवाले Nवर सPम(cid:1)तय@ के N(cid:1)तवेदन और उ/त %वधान मंडल म^ पुर:2थापन के पूवJ NकाPशत %वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अVध(cid:1)नयम िजनपर रा*Eप(cid:1)त कa Sये*ठ अनुम(cid:1)त Pमल चुकa है। ---

भाग-8—भारत कa संसद म^ पुर:2था%पत %वधेयक, संसद म^ उप2था%पत Nवर सPम(cid:1)तय@ के N(cid:1)तवेदन और संसद म^ उप2था%पत Nवर सPम(cid:1)तय@ के N(cid:1)तवेदन और संसद म^ पुर:2थापन के पूवJ NकाPशत %वधेयक। ---

भाग-9—%वbापन

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भाग-9-क—वन %वभाग कa नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—(cid:1)न%वदा सूचनाएं, पcरवहन सूचनाएं, 9यायालय सूचनाएं और सवJसाधारण सूचनाएं इMयाOद। 5-5

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पूरक

पूरक-क 6-202 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017

भ(cid:2)ग(cid:4)1

०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $

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नगर विकास एवं आवास विभाग

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अधिसूचना

18 जनवरी 2017

सं011 न0वि0/विविध (ट्रिब्यु0)-37/2016-30/न0वि0 एवं आ0वि0—बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा के अन्तर्गत C.W.J.C No-8152/2013 में पारित आदेश के आलोक में नगरपालिका भवन न्यायाधिकरण-I & II में सदस्य के रूप में क्रमशः श्री रामध्यान राम, अभियंता प्रमुख (सेवानिवृत), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना एवं श्री श्याम सुन्दर पाठक, मुख्य अभियंता (असैनिक, सेवानिवृत) झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड, राँची को विभागीय अधिसूचना सं0-11 न0वि0 (न्या0)-23/2013 185 पटना दिनांक 28.01.2014 के द्वारा तीन वर्षों के लिए नियुक्ति की गयी थी, जिसका सेवा विस्तार दिनांक 28.01.2017 से अगले तीन वर्षों के लिए की जाती हों

2. अधिसूचना सं0-185 दिनांक 28.01.2014 में सन्निहित अन्य शर्त्ते यथावत रहेगी। 3. प्रस्ताव पर सरकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, अवर सचिव।

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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 48-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

3 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017

भ(cid:2)ग(cid:4)2

ॢबह(cid:2)र(cid:4)र(cid:2)Îयप(cid:2)ल jर क(cid:2)य(cid:2)Z8य¡9 ह(cid:2)र(cid:2) ०नक(cid:2)ल: गय: ॢव०नयम(cid:12) \द:श(cid:12) [०धस३चन(cid:2)e $ jर ०नयम \ॢद?

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

(शुद्धि-(शुद्धि-(शुद्धि-(शुद्धि-पत्र)पत्र)पत्र)पत्र)

14 जुलाई 2015

सं0 निग/सारा-1 (रा0उ0प0)-02/15-6422 (एस)—श्री शंभू नाथ राम, तत्कालीन सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, गया, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गया सम्प्रति सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण, अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, बक्सर द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-110 के कि0मी0 36 से 54 में कराये गये पथ एवं कल्भर्ट कार्य में पायी गयी अनियमितता के लिए अधिसूचना सं॰-4888 (एस) दिनांक 29.05.2015 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गयाः-

(क) निन्दन।

(ख) असंचयात्मक प्रभाव से एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगायी जाती है।

2. उक्त अधिसूचना की कंडिका (3) में अंकित श्री राम सुरेश राय, सहायक अभियंता के स्थान पर श्री शंभू नाथ राम, सहायक निदेशक अंकित समझा जाय तथा उक्त अधिसूचना को इस हद तक संशोधित समझा जाय।

3. अधिसूचना संख्या-4888 (एस) दिनांक 29.05.2015 की शेष शर्तें यथावत रहेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

(शुद्धि-(शुद्धि-(शुद्धि-(शुद्धि-पत्र)पत्र)पत्र)पत्र)

18 अगस्त 2015

सं0 निग/सारा-6 (आरोप) द0बि0 (ग्रा0)-69/2008-7758 (एस)—पथ निर्माण विभाग के अधिसूचना संख्या-7437 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-7438 (एस) दिनांक-10.08.15 द्वारा श्री मोख्तार नाथ राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति सेवानिवृत, अधीक्षण अभियंता, नॉर्थ पटेल नगर, गया सिंह खटाल के पश्चिम, पो0-केसरी नगर, पटना के विरूद्ध संसूचित आदेश की कंडिका-4 एवं 5 को निम्न रूपेण संशोधित किया जाता है :-

2. महालेखाकार, बिहार के कार्यालय के पत्रांक-GE-04-PWD-R-V-15-809 दिनांक 29.10.13 द्वारा श्री राम की सेवानिवृति की तिथि 31.12.2014 होने के आलोक में श्री राम का केवल एक ही वार्षिक वेतन वृद्धि जो उन्हें दिनांक 01.07.2014 को देय होगा, को रोकना संभव होने की सूचना देते हुए इस मामले में अंतिम निर्णय से अवगत कराने का अनुरोध किया गया। तद्‌आलोक में मामले के पुनर्विचारोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-6957 (एस) दिनांक 30.08.13 के द्वारा अधिसूचना संख्या-9915 (एस) दिनांक 26.12.13 द्वारा संसूचित दंड को निम्नरूपेण संशोधित किया जाता है :-

(i) निन्दन एवं

(ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।4 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 3. श्री राम द्वारा उक्त दण्डादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी॰डब्लू॰जे॰सी॰ संख्या-23069/13 दायर किया गया। उक्त वाद में दिनांक 07.01.2015 को पारित आदेश के अनुपालन एवं विधि विभाग से परामर्श के आलोक में श्री मोख्तार नाथ राम, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता को वर्णित अधिसूचना संख्या-6957 (एस) दिनांक 30.08.13 तथा अधिसूचना संख्या-9915 (एस) दिनांक 26.12.13 द्वारा दिये गये दंड को सरकार के निर्णयानुसार निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 48-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

5 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017

भाग-9(ख)

और सवJसाधारण सूचनाएं इMयाOद।

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सूचना ——

सं॰ 147—शपथ-पL सं- 17002/12.11.16 के आधार पर मg च9दन कु मार, %पता- 2व. महेWवर Nसाद, आमगोला, मुजiफरपुर अब च9दन कु मार jीवा2तव के नाम से जाना जाऊगा । भ%व*य मे मेरे सभी काम को च9दन कु मार jीवा2तव के नाम से जाना जाए।

च9दन कु मार।

———

सं॰ 148—शपथ-पL सं- 17003/12.11.16 के आधार पर मg सVचन कु मार, %पता- 2व. महेWवर Nसाद, आमगोला, मुजiफरपुर अब सVचन कु मार jीवा2तव के नाम से जाना जाऊगा । भ%व*य मे मेरे सभी काम को सVचन कु मार jीवा2तव के नाम से जाना जाए।

सVचन कु मार।

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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 48-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

6 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017

ॢबह(cid:4)र गजट

क(cid:4)

प३रक(cid:13)[(cid:15)(cid:16) (cid:17)(cid:4)०धक(cid:4)र(cid:20) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:17)क(cid:4)०शत

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सं॰ 5 नि0गो0वि0 (5) /129/2014-27नि॰गो॰

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

——— संकल्प

3 जनवरी 2017

डा0 जागेश्वर लाल, भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, हसनपुर, समस्तीपुर सम्प्रति संयुक्त निदेशक (मु0), पशुपालन निदेशालय, पटना को कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहने एवं कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही के आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-52 नि0गो0 दिनांक 27.01.2015 द्वारा निलंबित किया गया था।

2. उक्त आरोप के लिए डा0 लाल के विरूद्ध प्रपत्रा-'क' में आरोप पत्रा गठित करते हुए उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी। उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की सरकार द्वारा समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरांत डा0 लाल को आरोप से मुक्त करते हुए विभागीय संकल्प-500 नि0गो0 दिनांक 22.12.2015 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया था।

3. विभागीय संकल्प ज्ञापांक-500 नि0गो0 दिनांक 22.12.2015 द्वारा डा0 लाल के निलंबन अवधि दिनांक 27.01.2015 से 22.12.2015 के वेतनादि के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया था। इसलिए इस संबंध में डा0 लाल के अभ्यावेदन दिनांक 29.11.2016 की समीक्षा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी एवं समीक्षोपरांत पाया गया कि चूँकि डा0 लाल को जिस आरोप के लिए निलंबित किया गया था, उन्हें उस आरोप से मुक्त कर दिया गया है। इस प्रकार डा0 लाल को उनके निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि मानते हुए निलंबन अवधि के पूर्ण वेतन भुगतान का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

4. अतः सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के आलोक में डा0 जागेश्वर लाल, भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, हसनपुर, समस्तीपुर सम्प्रति संयुक्त निदेशक (मु0), पशुपालन निदेशालय, पटना के निलंबन अवधि दिनांक 27.01.2015 से 22.12.2015 को कर्त्तव्य अवधि मानते हुए उक्त अवधि का पूर्ण वेतन भुगतान किया जायेगा।

vkns'k%& आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधित पदाधिकारियों को अवश्य भेज दी जाय।

बिहार राज्यपाल के आदेश से,

वीरेन्द्र कुमार सिन्हा, अवर सचिव।7 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 सं॰ कारा/नि0को0(क)-25/2012-458 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ——— संकल्प 2 फरवरी 2017

श्री मनोज कुमार चौधरी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, मधेपुरा (सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, वीरपुर) के विरूद्ध उनके मंडल कारा, मधेपुरा में पदस्थापन अवधि में वर्ष 1999-2000 में योजना मद से राषि गबन, पदीय कर्त्तव्य निर्वहन में विफलता एवं अन्य कतिपय प्रतिवेदित आरोपों के लिए गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2777 दिनांक 25.06.2012 द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी।

2. आयुक्त कार्यालय, कोषी प्रमण्डल, सहरसा के पत्रांक 44 दिनांक 08.02.2014 से प्राप्त संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच-सह-संचालन पदाधिकारी, कोषी प्रमण्डल, सहरसा द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री चौधरी के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय ज्ञापांक 2911 दिनांक 03.06.2014 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री चौधरी से उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री चौधरी ने अपने पत्रांक 1072 दिनांक 29.07.2014 के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया। 3. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री चौधरी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा जबाव की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री चौधरी के द्वितीय कारण पृच्छा जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा किया गया :-

(i) निन्दन।

(ii) देय वेतन से 03 (तीन) वेतनवृद्धि घटा कर वेतन की अवनति का दण्ड, जिसका प्रतिकूल प्रभाव सेवान्त लाभ पर भी पड़ेगा।

4. उपर्युक्त विनिष्चय दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 5148 दिनांक 23.08.2016 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक 2144 दिनांक 19.10.2016 द्वारा संसूचित किया गया है कि प्रस्तावित दण्ड '' निन्दन '' वृहत्‌ दण्ड की श्रेणी में नहीं आता है, फलतः इस पर विभागीय स्तर पर ही निर्णय लिया जाना अपेक्षित है। आयोग द्वारा सम्यक्‌ विचारोपरान्त '' देय वेतन से 03 (तीन) वेतनवृद्धि घटा कर वेतन की अवनति का दण्ड, जिसका प्रतिकूल प्रभाव सेवान्त लाभ पर भी पड़ेगा '' संबंधी विभागीय दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है।

5. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6821 दिनांक 09.11.2016 द्वारा श्री मनोज कुमार चौधरी, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, मधेपुरा (सम्प्रति अधीक्षक, उपकारा, वीरपुर) को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (समय-समय पर यथा संषोधित) के प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :-

(i) निन्दन।

(ii) देय वेतन से 03 (तीन) वेतनवृद्धि घटा कर वेतन की अवनति का दण्ड, जिसका प्रतिकूल प्रभाव सेवान्त लाभ पर भी पड़ेगा।

6. श्री चौधरी द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6821 दिनांक 09.11.2016 द्वारा संसूचित उपर्युक्त दंडादेष के विरूद्ध पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि उनके योगदान की तिथि से लगभग 04 (चार) माह पहले ही काराधीक्षक, श्री जयकिषुन प्रसाद द्वारा अग्रिम राषि का बैंक ड्राफ्ट कार्यपालक अभियन्ता, भवन प्रमंडल, मधेपुरा को भुगतान कर दिया गया था। निर्धारित कार्य के दो वर्ष में पूर्ण नहीं किये जाने के फलस्वरूप ब्याज दर में 3,24,000/- (तीन लाख चौबीस हजार रूपये) की सरकारी राषि की हुई हानि के संबंध में श्री चौधरी द्वारा स्पष्ट रूप से लगाये गये आरापों को नकारते हुए उल्लेख किया गया है कि उनका इस मामले में दोष नहीं है।

7. श्री चौधरी के उपर्युक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री चौधरी का यह कहना कि आवंटन पूर्व अधीक्षक, श्री जय किषुन प्रसाद ने कार्यपालक अभियंता, भवन को उपलब्ध कराया था और इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, गैर जिम्मेदाराना एवं लापरवाही का द्योतक है। वे दूसरे काराधीक्षक को दोषी ठहराकर इस आरोप से बच नहीं सकते है कि उनके द्वारा सौंपे गये आवंटित कार्यों के क्रियान्वयन में लापरवाही बरती गई है। संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि श्री चौधरी के द्वारा कार्यों का निरीक्षण, पर्यवेक्षण नहीं किया गया, परिणामस्वरूप योजनाओं के कार्यान्वयन में गड़बड़ी हुई। काराधीक्षक को सौंपा गया कार्य तथा वित्तीय वर्ष 1999-2000 के अंत तक कार्य पूरा करने का जो उत्तरदायित्व उन्हें दिया गया था वह पूरा नहीं हुआ जो उनकी8 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 कर्त्तव्यहीनता एवं प्रषासनिक विफलता का द्योतक है। स्पष्ट है कि श्री चौधरी के द्वारा अपने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में जिन तथ्यों को अंकित किया गया है, संचालन पदाधिकारी ने विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में उसे असत्य पाया है। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन सही पाया गया है।

8. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में सम्यक्‌ विष्लेषणोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मनोज कुमार चौधरी, तत्कालीन काराधीक्षक, मंडल कारा, मधेपुरा (सम्प्रति उपकारा, वीरपुर) के द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं॰ कारा/निग0को0(क)-48/09-508

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संकल्प

7 फरवरी 2017

श्री घनष्याम राम, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी एवं मंडल कारा, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध उनके मंडल कारा, सीतामढ़ी एवं मंडल कारा, आरा में पदस्थापन के दौरान कारा पर समुचित प्रषासनिक नियंत्रण नहीं रखने, कर्त्तव्य निर्वह्‌न में लापरवाही बरतने, सक्षम पदाधिकारी की अनुमति के बिना कारा वाहन के साथ अपने मुख्यालय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के प्रतिवेदित आरोपों के लिए गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के आलोक में गृह (विषेष) विभाग की अधिसूचना ज्ञापांक 7409 दिनांक 16.09.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी। 2. आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमण्डल, पटना के पत्रांक 1909 दिनांक 28.08.2014 से प्राप्त संयुक्त आयुक्त (विभागीय जाँच)-सह-संचालन पदाधिकारी, पटना प्रमण्डल, पटना द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री राम के विरूद्ध गठित आरोपों में से आरोप संख्या-01 को प्रमाणित एवं आरोप संख्या-02 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय पत्रांक 5419 दिनांक 15.10.2014 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री राम से उपर्युक्त प्रमाणित आरोप एवं अप्रमाणित पाये गये आरोप से असहमति के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री राम के द्वारा दिनांक 10.11.2014 को द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया गया।

3. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री राम द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत श्री राम के द्वितीय कारण पृच्छा जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार पेंषन नियमावली के प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा किया गया :-

'' पेंषन से 5% (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षाें के लिए ''। 4. उपर्युक्त विनिष्चयी दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 581 दिनांक 28.01.2016 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के पत्रांक 558 दिनांक 20.05.2016 द्वारा प्रस्तावित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी है।

5. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3384 दिनांक 03.06.2016 द्वारा श्री घनष्याम राम, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी एवं मंडल कारा, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) को निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :-

'' पेंषन से 5'' पेंषन से 5'' पेंषन से 5'' पेंषन से 5% (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। 6. श्री राम द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3384 दिनांक 03.06.16 द्वारा संसूचित उपर्युक्त दंडादेष के विरूद्ध पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिसमें उनका कहना है कि मंडल कारा, सीतामढ़ी के पष्चात्‌ मंडल कारा, आरा में पदस्थापित होने के पष्चात्‌ उन्होंने इस संबंध में अपने पत्रांक 1259 दिनांक 14.06.2007 के द्वारा स्पष्टीकरण भेजी थी, परन्तु उनके पदस्थापन काल में उसका निराकरण नहीं किया गया तथा सेवानिवृत्ति के बाद इतनी लम्बी अवधि के पष्चात्‌ विभागीय कार्यवाही के उपरान्त '' पेंषन से 5% (पाँच प्रतिषत) की राषि की कटौती 10 (दस) वर्षोंं तक '', का जो दण्ड दिया गया है, उसे क्षमा किया जाय। श्री राम का कहना है कि उनके विरूद्ध जो दण्ड पारित किया गया है वह विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन से बिल्कुल अलग प्रतीत होता है। उनका कहना है कि मंडल कारा, आरा में दिनांक 05/ 06.07.2008 को दो विचाराधीन बंदियों के पलायन की घटना हुई थी और इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करते हुए नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी तथा जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को ससमय सूचना दी गई थी। इस आरोप में उच्च कक्षपाल एवं कक्षपाल दोनों को निलंबित किया गया तथा अन्य सभी कार्रवाई ससमय की गई थी।

7. श्री राम के उपर्युक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री राम दिनांक 20.09.2003 से 26.09.2003 तक अनधिकृत रूप से मुख्यालय से कारा वाहन के साथ अनुपस्थित थे तथा इस अवधि में दिनांक 26.09.2003 की रात्रि में बंदी रामेष्वर मंडल को ससमय अस्पताल नहीं ले जाने के कारण मृत्यु हो गई थी। विभागीय कार्यवाही के संचालन के क्रम में उनका यह तर्क है कि उन्हें विषेष न्यायाधीष, आर्थिक अपराध,9 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 मुजफ्फरपुर के समक्ष दिनांक 22.09.2003 को उपस्थित होना था, जो उनके विरूद्ध गठित आरोप को नहीं नकार रहा है। कारा जैसे संवेदनषील स्थल से बिना जिला पदाधिकारी को सूचना दिये अपने कारा से प्रस्थान करना उनकी स्वेच्छाचारिता एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही को दर्षाता है। मंडल कारा, आरा में दिनांक 05/06.07.2008 की रात्रि में बंदी कक्ष संख्या-03 से दो बंदियों की पलायन की घटना के लिए उच्च कक्षपाल एवं कक्षपाल मुख्य रूप से दोषी थे, लेकिन कारा में रात्रि गष्त तथा कारा में प्रषासनिक नियंत्रण नहीं रहने के लिए आरोपित काराधीक्षक, श्री घनष्याम राम विफल रहें है, जिसके लिए कारा हस्तक के नियम 60 एवं 61 के आलोक में वे दोषी है। अतः उनका पुनर्विलोकन अभ्यावेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में सम्यक्‌ विष्लेषणोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारापरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारापरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारापरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री घनष्याम राम, श्री घनष्याम राम, श्री घनष्याम राम, श्री घनष्याम राम, 8. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में सम्यक्‌ विष्लेषणो उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में सम्यक्‌ विष्लेषणो उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में सम्यक्‌ विष्लेषणो बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी एवं मंडल कारा, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी एवं मंडल कारा, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के द्वारा समर्पित के द्वारा समर्पित के द्वारा समर्पित के द्वारा समर्पित बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी एवं मंडल कारा, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सीतामढ़ी एवं मंडल कारा, आरा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) पुनर्विलोकन पुनर्विलोकन पुनर्विलोकन पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।

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सं॰ कारा/नि0को0(क)-56/10-509

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संकल्प

7 फरवरी 2017

श्री घनष्याम राम, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सहरसा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध उनके मंडल कारा, सहरसा में पदस्थापन काल में दिनांक 26.06.2010 को संसीमित बंदी भूषण साह के पलायन में संलिप्तता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 2884 दिनांक 09.07.2010 द्वारा श्री राम को निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2885 दिनांक 09.07.2010 द्वारा विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी।

2. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-4047 दिनांक 07.09.2012 द्वारा श्री राम को निलंबन मुक्त करते हुए निलंबन अवधि का विनियमन विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर अलग से निर्णय लिये जाने का आदेष संसूचित किया गया।

3. श्री राम के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही के संचालन के पष्चात्‌ प्रमाणित आरोपों के लिए अनुषासनिक प्राधिकार के द्वारा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3385 दिनांक 03.06.2016 के द्वारा श्री राम को निम्नांकित दंड अधिरोपित किया गया :-

'' पेंषन से 5'' पेंषन से 5'' पेंषन से 5'' पेंषन से 5% (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए ''। 4. उक्त आरोप प्रकरण में श्री राम दिनांक 09.07.2010 से 06.09.2012 तक निलंबित रहें। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 के उप नियम-5 में विहित प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय ज्ञापांक 6329 दिनांक 17.10.2016 द्वारा श्री राम से अभ्यावेदन की माँग की गई, कि क्यों नहीं इस आषय का निर्णय लिया जाय कि निलंबन अवधि के लिए उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा। उक्त पत्र की प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, दरभंगा को भेजते हुए उन्हें पत्र का तामिला श्री राम को कराने का निदेष दिया गया था।

5. तद्‌आलोक में अधीक्षक, मंडल कारा, दरभंगा के पत्रांक 2232 दिनांक 31.10.2016 द्वारा सूचित किया गया कि श्री राम को उनके पते पर विषेष दूत के माध्यम से उक्त पत्र दिनांक 31.10.2016 को तामिला करा दिया गया है। परन्तु पत्र तामिला होने के 60 दिनों की निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद श्री राम का अभ्यावेदन अप्राप्त है। इस प्रकार स्पष्ट है कि श्री राम को इस संबंध में कुछ नहीं कहना है।

6. श्री राम के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही के संचालन के पष्चात्‌ प्रमाणित आरोपों के लिए विनिष्चय किये गये दंड एवं उस पर बिहार लोक आयोग से परामर्ष प्राप्त होने के पष्चात्‌ उन्हें विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3385 दिनांक 03.06.2016 के द्वारा '' पेंषन से 5% (पाँच प्रतिषत) राषि की कटौती 10 (दस) वर्षों के लिए '' का दंड अधिरोपित किया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि श्री राम का निलंबन औचित्यपूर्ण था जिसके लिए उन्हें दंडित किया गया।

7. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक्‌ विष्लेषणोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-11 (5) (7) के आलोक में संसूचित किया जाता है कि श्री घनष्याम राम, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, सहरसा (सम्प्रति सेवानिवृत्त) को निलंबन अवधि दिनांक 09.07.2010 से 06.09.2012 के बीच जीवन निर्वाह भत्ता मद में किये गये भुगतान के अतिरिक्त कुछ भी राषि का भुगतान नहीं किया जायेगा तथा निलंबन अवधि की गणना कर्त्तव्य पर बितायी गई अवधि एवं पेंषन प्रदायी सेवा के रूप में की जायेगी। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव-सह-निदेषक (प्र0)।10 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017

पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

27 जुलाई 2015

सं॰ निग/सारा-1-85/2000 (अंश)-6896 (एस)—श्री जयनारायण प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, जहानाबाद सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा पथ प्रमंडल संख्या-1, जहानाबाद के पदस्थापन काल में नक्सल योजनान्तर्गत मखदुमपुर-बराबर पथ एवं टेहटा बाइपास पथ में बरती गयी अनियमितता के लिए अधिसूचना संख्या-7731 (एस) दिनांक 02.09.99 द्वारा निलंबित कर संकल्प ज्ञापांक-8436 (एस) दिनांक 28.11.2000 द्वारा 6 आरोपों के संदर्भ में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संकल्प संख्या-9276 (एस) अनु0 दिनांक 30.12.2000 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध तीन अनुपूरक आरोप भी गठित किये गये। श्री प्रसाद, कार्यपालक अभियंता के दिनांक 30.11.02 को सेवानिवृत हो जाने के परिणामस्वरूप संकल्प ज्ञापांक-3066 (एस) दिनांक 24.04.03 द्वारा इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1377 दिनांक 24.11.03 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध गठित कुल 9 आरोपों में से 6 आरोपों को प्रमाणित एक आरोप को अंशतः प्रमाणित तथा शेष दो आरोप को अप्रमाणित पाया गया। जाँच प्रतिवेदन में पाये गये प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-3697 (एस) दिनांक 28.05.04 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा दिनांक 22.06.04 के समीक्षोपरांत इनको दंडस्वरूप पेंशन से पाँच वर्षों तक 20 प्रतिशत की कटौती उसके बाद 10 प्रतिशत की कटौती करने एवं इनके निलंबन अवधि दिनांक 02.09.99 से 02.09.01 तक की अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी नहीं देने के प्रस्ताव में विभागीय पत्रांक-3456 दिनांक 29.03.06 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1203 दिनांक 23.09.06 द्वारा प्राप्त परामर्श के आलोक में सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-11947 (एस) दिनांक 18.10.06 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) इनके पेंशन से 20 प्रतिशत कटौती 5 वर्षों तक तथा उसके बाद 10 प्रतिशत की कटौती की जाय। (ii) इनके निलंबन अवधि दिनांक 02.09.99 से 02.09.01 तक में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा।

3. श्री प्रसाद द्वारा उक्त दंडादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-16214/2006 दायर किया गया जिसमें दिनांक 04.05.15 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश द्वारा निम्न कारणों से निर्गत दंडादेश को निरस्त कर दिया गया :-

(क) निर्गत दंडादेश speaking नहीं है। द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में वर्णित तथ्यों को अस्वीकृत करने का औचित्य अधिसूचना में अंकित नहीं है।

(ख) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 में विहित प्रावधान के आलोक में निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में आरोपित पदाधिकारी से अलग से स्पष्टीकरण प्राप्त करना है, जबकि इस मामले में आरोपित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण प्राप्त किये बगैर निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में निर्णय लिया गया है।

3. माननीय उच्च न्यायालय, पटना के न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय अधिसूचना संख्या-11947 (एस) दिनांक 18.10.06 को निरस्त किया जाता है।

4. माननीय उच्च न्यायालय, पटना के न्यायादेश के अनुपालन में श्री जयनारायण प्रसाद, कार्यपालक अभियंता (सेवानिवृत) से स्पष्टीकरण पूछकर विधि सम्मत निर्णय लिया जाएगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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13 मई 2015

सं0 निग/सारा-1 (NH)-47/2014-4080 (एस)—श्री रवि प्रकाश लोकेश, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नवसृजित पथ प्रमंडल, शिवहर द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद के पदस्थापन काल के दौरान एन0एच0-98 के जसोईया मोड़ से दाउदनगर पथ में कराये गये कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा की गयी तथा पत्रांक-299 अनु0 दिनांक 22.12.10 द्वारा समर्पित प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-136 अनु0 दिनांक 28.06.11 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि पथ के 126 वें कि0मी0 में कराये गये SDBC कार्य का औसत FDD प्रावधानित 2.30gm/cc के विरूद्ध 1.95gm/cc पाया गया। पथ के 126 वें कि0मी0 में कराये गये BUSG (in pot repair) कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट औसतन 21.23 प्रतिशत ओभर साईज पाया गया। BUSG कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 1.73 प्रतिशत पायी गयी जबकि प्रावधान 1.93 प्रतिशत का है। पथ के 106 वें कि0मी0 में कराये गये BUSG (in pot repair) कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट औसतन 13.73 प्रतिशत ओभर साईज एवं 7.93 प्रतिशत अंडर साईज पाया गया है।

2. उपर्युक्त पायी गयी अनियमितता के लिए श्री लोकेश से विभागीय पत्रांक-4475 (ई) अनु0 दिनांक-28.08.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।11 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 3. श्री लोकेश के पत्रांक-1261 दिनांक 14.09.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि SDBC कार्य का औसत FDD 2.16gm/cc तक पाये जाने पर टोलरेन्स के रूप में स्वीकार किया गया है। इस मामले में SDBC कार्य का औसत FDD 1.95gm/cc है जो उक्त निर्धारित टोलरेन्स से काफी कम है। इस कारण इस बिन्दु पर प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया। BUSG कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के ग्रेडिंग में भिन्नता 7.50 प्रतिशत तक पाये जाने पर टोलरेन्स के रूप में स्वीकार किया गया है। इस मामले में पायी गयी भिन्नता 12.13 प्रतिशत है जो उक्त निर्धारित टोलरेन्स से अधिक है। इस कारण इस बिन्दु पर प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाते हुए सरकार के निर्णय के आलोक में श्री रवि प्रकाश लोकेश, कार्यपालक अभियंता को निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) असंचयात्मक प्रभाव से एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक।

4. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री लोकेश ने अपनेे पत्रांक-28 (अनु0) दिनांक 22.01.15 द्वारा पुनर्विचार आवेदन समर्पित किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि जाँच की तिथि 15.12.10 एवं 16.12.10 को SDBC का कार्य प्रगति में था। साथ हीं, उन्होंने कार्य स्थल से जाँच पदाधिकारी द्वारा संग्रहित किये गये नमूने की प्रक्रिया को मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षण कोषांग, बिहार, पटना के आदेश संख्या-1389 दिनांक 16.09.94 के प्रतिकूल माना है। अन्य कंडिकाओं में उन्हीं बातों की पुनरावृति है जो स्पष्टीकरण के दौरान कही गयी है।

5. श्री लोकेश द्वारा समर्पित पुनर्विचार आवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य स्थल से संग्रहित नमूने की गुणवता जाँच TRI से करायी गयी। गुणवता जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों के संदर्भ में प्राप्त स्पष्टीकरण तकनीकी समीक्षोपरांत हीं श्री लोकेश को दंड संसूचित किया गया है।

5. अतएव श्री रवि प्रकाश लोकेश, कार्यपालक अभियंता, नवसृजित पथ प्रमंडल, शिवहर के पुनर्विचार आवेदन पत्रांक-28 (अनु0) दिनांक 22.01.15 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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29 मई 2015

सं0 निग/सारा-1 (रा0उ0प0)-02/15-4884 (एस)—श्री राम सुरेश राय, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गया सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पटना द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-110 के कि0मी0 36 से 54 में कराये गये पथ एवं कल्भर्ट कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-01 अनु0 दिनांक 03.01.11 द्वारा समर्पित प्रारम्भिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-44 अनु0 दिनांक 17.03.11 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के कि0मी0 36 वें में निर्माणाधीन कल्भर्ट के रिटर्न वॉल एवं एवेटमेन्ट वॉल में प्रयुक्त सीमेन्ट एवं बालू का औसत अनुपात प्रावधान के अनुरूप नहीं पाये जाने जैसी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-3240 (ई) दिनांक 24.06.11 द्वारा श्री यादव से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री राय, सहायक अभियंता के पत्रांक-57, दिनांक 02.09.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

कल्भर्ट संख्या-36/1 में किये गये आंशिक निर्माण को पुराने अंश सहित पूरी संरचना को तोड़कर नये सिरे से कल्भर्ट का निर्माण कराया गया एवं नींव के सतर से ही नये आर0सी0सी0 पुलिया का निर्माण कराया गया हैं। आंशिक रूप से किये गये Extension अथवा इसे तोड़ने का कोई भी भुगतान संवेदक को नहीं किया गया है। फलस्वरूप पुराने कल्भर्ट के Extension में किये गये ब्रीक वर्क के मोर्टार की जाँच अथवा उसके जाँचफल की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गयी है। 3. श्री राय, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपंरात पाया गया कि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा किये गये जाँच में सीमेन्ट और बालू की औसत मात्रा प्राक्कलन के अनुरूप नहीं पाया गया था। अतएव इस अनियमितता के लिए श्री राम सुरेश राय, सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ रूप से विचारोपंरात निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(क) निन्दन। (ख) असंचयात्मक प्रभाव से एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगायी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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29 मई 2015

सं0 निग/सारा-1 (रा0उ0प0)-02/15-4888 (एस)—श्री शंभू नाथ राम, तत्कालीन सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, गया, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गया सम्प्रति सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, बक्सर द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-110 के कि0मी0 36 से 54 में कराये गये पथ एवं कल्भर्ट कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-01 अनु0 दिनांक 03.01.11 द्वारा समर्पित प्रारम्भिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-44 अनु0 दिनांक 17.03.11 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के कि0मी0 36 वें कि0मी0 में निर्माणाधीन कल्भर्ट के रिटर्न वॉल एवं एवेटमेन्ट वॉल में प्रयुक्त सीमेन्ट एवं बालू का औसत अनुपात प्रावधान के अनुरूप12 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 नहीं पाये जाने जैसी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-3238 (ई) दिनांक 24.06.11 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री राम, सहायक अभियंता के पत्रांक-250, दिनांक 14.07.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

पथ के कि0मी0 36 वें में निर्माणाधीन कल्भर्ट के रिटर्न वॉल एवं एवेटमेन्ट वॉल में प्रयुक्त सीमेन्ट एवं बालू का औसत अनुपात प्रावधान के अनुरूप नहीं पाये जाने के संबंध में स्पष्ट किया है कि उक्त कार्य में सीमेन्ट मोर्टार टेस्ट से संबंधित यंत्र-संयंत्र गुण नियंत्रण, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन स्थित गया के प्रयोगशाला में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, डिहरी-ऑन-सोन स्थित गया में शोध कर्मी के रूप में एक मात्र शोध सहायक, श्री जिआउदीन अहमद के पदस्थापित होने का उल्लेख किया गया है। इस प्रमंडल के अधीन राष्ट्रीय उच्च पथों में एल0डब्लू0ई0 योजना अन्तर्गत अन्य पथों में एक साथ कार्य संचालित होने पर भी एक मात्र शोध सहायक के साथ संयुक्त रूप से गुणवता का कार्य ससमय सम्पादित किये जाने का उल्लेख भी किया गया है।

3. श्री राम, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपंरात पाया गया कि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा किये गये जाँच में सीमेन्ट और बालू की औसत मात्रा प्राक्कलन के अनुरूप नहीं पाया गया था। अतएव इस अनियमितता के लिए श्री राम सुरेश राय, सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ रूप से विचारोपंरात निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(क) निन्दन। (ख) असंचयात्मक प्रभाव से एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगायी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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11 जून 2015

सं0 निग/सारा-4 (पथ)-आरोप-(भवन)-61/2011-5162 (एस)—कपिलदेव यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल, लखीसराय सम्प्रति दिनांक-31.08.07 को सेवानिवृत, पुत्र-स्व० कमलेश्वरी यादव, 68, नेहरू नगर, पटना-13 के विरूद्ध भवन प्रमंडल, लखीसराय के पदस्थापन काल में उपकारा लखीसराय में सुरक्षा हेतु तीन अद्‌द वाच टावरों के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9542 (एस) अनु0 दिनांक 28.08.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

2. श्री यादव के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के कालबाधित होने के आलोक में सरकार के निर्णयानुसार इसे निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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1 जुलाई 2015

सं0 निग/सारा-1 (पथ)-1007/2003-5929 (एस)—श्री अनिल कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, पाकुड़ के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4417 (एस) अनु0 दिनांक 06.07.2000 एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3987 (एस) दिनांक 19.06.2001 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री कुमार के दिनांक 12.08.2008 को मृत्यु हो जाने के कारण विभागीय अधिसूचना संख्या-5551 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-5552 (एस) दिनांक 16.04.10 द्वारा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में निम्नलिखित निर्णय लिया गया है :-

(क) इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

(ख) बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (2) के अन्तर्गत स्व० कुमार के निलंबन की तिथि 27.05.2008 से मृत्यु की तिथि 12.08.2008 के बीच की अवधि को सभी प्रयोजनों के लिए कर्तव्य पर मानी जायेगी और इनके परिवार को उस अवधि के लिए पूरे वेतन तथा भत्ता का भुगतान किया जायेगा।

(ग) किन्तु ऐसा भुगतान करने के क्रम में पूर्व में दिये गये जीवन निर्वाह भत्ता तथा अन्य भत्ते एवं सरकारी बकाया या ऋणों का समायोजन कर लिया जायेगा।

2. उक्त आदेश के कंडिका-'ग' के संबंध में उल्लेखनीय है कि स्व० कुमार के जिम्मे जिला प्रशासन गोड्‌डा का जवाहर रोजगार योजनान्तर्गत `12,15,100.00 एवं पथ प्रमंडल, पाकुड़ का `8,05,978.00 कुल-`20,21,078.00 बकाया है। स्व० कुमार के विरूद्ध असमायोजित राशि `8,05,978.00 के वसूलनीय होने संबंधी साक्ष्य/अभिलेख कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, गोड्‌डा का पत्रांक-415 (अनु0)/गोड्‌डा दिनांक 14.05.2015 से प्राप्त है।13 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार स्व० कुमार के जिम्मे लंबित अस्थायी अग्रिम कुल `20,21,078.00 का समायोजन स्व० कुमार के आश्रितों को देय सेवान्त लाभों से इस शर्त के साथ की जा सकती है कि जिला प्रशासन द्वारा निर्गत राशि `12,15,100.00 का समायोजन कर लिये जाने की सूचना जिला प्रशासन, गोड्‌डा से प्राप्त होने पर उक्त राशि स्व० कुमार के आश्रितों को विमुक्त कर दिया जायेगा।

4. उक्त प्रस्ताव पर तत्कालीन माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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14 जुलाई 2015

सं0 निग/सारा-1-विविध-04/07-6424 (एस)—श्री शत्रुघ्ननाथ तिवारी, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, कटिहार सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, बनमनखी, पूर्णियाँ द्वारा पथ प्रमंडल कटिहार के पदस्थापन काल में वर्ष-2000-01, 2001-02 एवं 2002-03 में कराये गये मरम्मति एवं निर्माण कार्य की श्री उमाशंकर सिंह, माननीय सदस्य बिहार विधान सभा से प्राप्त ध्यानाकर्षण सूचना के आलोक में तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग से कराये गये जांच एवं उनसे प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में आरोप प्रपत्र ''क'' गठित करते हुए श्री तिवारी से विभागीय पत्रांक-11695 (एस) अनु0 दिनांक 19.10.09 द्वारा बचाव बयान/स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री तिवारी द्वारा समर्पित बचाव बयान/स्पष्टीकरण दिनांक 25.11.09 की तकनीकी/विभागीय समीक्षा के उपरांत श्री तिवारी को उक्त कार्यों में प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए दोषी पाये जाने के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-2410 दिनांक 01.03.2012 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया।

1. दो वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

2. उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध श्री तिवारी द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-शून्य दिनांक 19.03.2012 समर्पित किया गया हैं। श्री तिवारी ने अपने पुनर्विलोकन अर्जी में अंकित किया हैं कि पथ प्रशाखा-2 कोढ़ा के रूप में मात्र कोढ़ा-फलका पथ के ही प्रभार में था। मरम्मति मद में प्राक्कलन स्वीकृत करने एवं निविदा आमंत्रण की कोई शक्ति कनीय अभियंता को प्रदत्त नहीं हैं। उपरोक्त के आधार पर आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया।

3. श्री तिवारी से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी के समीक्षोपरान्त पाया गया कि इन्हें दी गयी शास्ति सुविचारित हैं। श्री तिवारी ने अपने पुनर्विलोकन आवेदन में कोई नया तथ्य नहीं दिया हैं।

4. तद्‌्‌आलोक में श्री तिवारी के पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक- शून्य दिनांक 19.03.2012 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता हैंं ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 जुलाई 2015

सं0 निग/सारा-2 (परिवाद)-4/2012-6590 (एस)—श्री वीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण), पथ निर्माण विभाग, पथ अंचल, सहरसा के पदस्थापन काल में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने का प्रयास एवं कार्य के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारित जैसी बरती गयी अनियमितता के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-2637 (एस) दिनांक 07.03.12 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5731 (एस) अनु0 दिनांक 24.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-4209 अनु0 दिनांक 08.08.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने के प्रयास के आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित एवं स्वेच्छाचारित के संबंध में पूर्व में मौखिक चेतावनी दिये जाने का उल्लेख किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलगन करते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित/प्रमाणित आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-9226 (एस) अनु0 दिनांक 02.12.13 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी।

3. श्री कुमार, निलंबित कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-शून्य (अनु0) दिनांक 12.12.13 द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा विभाग में समर्पित किया गया। श्री कुमार के द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव वयान के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-990 (एस) दिनांक 06.02.14 द्वारा एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया। साथ हीं, निलंबन अवधि (दिनांक 07.03.12 से 18.02.14) में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी भुगतान नहीं करने का निर्णय विभागीय अधिसूचना संख्या-992 (एस) दिनांक 06.02.14 द्वारा लिया गया।

4. संसूचित दंड के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा पुनर्विचार आवेदन ज्ञापांक-शून्य दिनांक 28.02.14 समर्पित किया गया। विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार द्वारा अपने पुनर्विचार आवेदन में उन्हीं बातों को उल्लेख किया है जिसका द्वितीय कारण पृच्छा में किया गया था। अतएव इसे मान्य नहीं पाते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-6957 (एस) दिनांक 24.07.14 द्वारा श्री कुमार के पुनर्विचार आवेदन ज्ञापांक-शून्य दिनांक 28.02.14 को अस्वीकृत किया गया।14 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 2. श्री कुमार ने माननीय उच्च न्यायालय, पटना में संसूचित दंडादेश को निरस्त करने हेतु याचिका संख्या-3219/2015 दायर किया जिसमें दिनांक 28.04.15 को पारित अपने न्यायादेश में माननीय उच्च न्यायालय ने निर्गत दंडादेश में किसी प्रकार का हस्तक्षेप से इनकार करते हुए निलंबन अवधि के विनियमन से संबंधित अधिसूचना संख्या-992 (एस) दिनांक 06.02.14 को निरस्त करते हुए निलंबन अवधि के पूर्ण वेतनादि का भुगतान करने का आदेश दिया। 4. अतएव माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश दिनांक 28.04.15 के आलोक में सरकार के निर्णयानुसार पूरे मामले के समीक्षोपरांत श्री वीरेन्द्र कुमार, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण), पथ निर्माण विभाग, पथ अंचल, सहरसा के विरूद्ध संसूचित दंड को यथावत रखते हुए निलंबन अवधि (दिनांक 07.03.12 से 18.02.14) का पूर्ण वेतन (पूर्व में दिये गये वेतन को घटाकर) दिये जाने का निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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5 अगस्त 2015

सं0 निग/सारा-10 भवन-मं0म0-42/09-7205 (एस)—श्री गोपाल प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पटना पश्चिम भवन प्रमंडल, दानापुर, पटना-सह-प्रभारी मुख्य अभियंता, दक्षिण बिहार, भवन निर्माण विभाग, पटना को पटना पश्चिमी भवन प्रमंडल, दानापुर, पटना से संबंधित बरती गयी अनियमितता के लिए उनके विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-018/2009 के आधार पर भवन निर्माण विभाग के पत्रांक-3438 (भ) अनु0 दिनांक 13.05.09 द्वारा श्री प्रसाद कोे तत्कालिक प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने की अनुशंसा की गयी। तद्‌आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-5472 (एस) दिनांक 28.05.09 द्वारा श्री प्रसाद को तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया। भवन निर्माण विभाग के पत्रांक-4320 (भ) अनु0 दिनांक 12.06.09 द्वारा आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही संचालित करने की अनुशंसा की गयी। भवन निर्माण विभाग से प्राप्त आरेाप पत्र एवं अनुशंसा के आधार पर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3770 (एस) अनु0 दिनांक 16.03.10 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के संचालन में बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के अधीन श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचािलत की गयी।

2. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-5928 दिनांक 13.09.13 में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित सभी 5 आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक-4127 (एस) अनु0 दिनांक 26.05.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री प्रसाद ने अपने पत्रांक-01 (पी0) आवास अनु0 दिनांक 09.06.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया। जिसके समीक्षोपरांत इसे स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। तद्‌आलोक में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित प्रपत्र-'क'में प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत "इनके पेंशन से स्थायी रूप से 10 (दस) प्रतिशत की कटौती" के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनांपरांत विभागीय पत्रांक-2203 (एस) अनु0 दिनांक 11.03.15 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से परामर्श/सहमति की मांग की गयी।

3. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1101 दिनांक 17.07.15 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। तदआलोक में श्री गोपाल प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पटना पश्चिम भवन प्रमंडल, दानापुर, पटना-सह-प्रभारी मुख्य अभियंता, दक्षिण बिहार, भवन निर्माण विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत, एफ0/411, कंकड़बाग कॉलोनी, पटना, बिहार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(क) श्री प्रसाद के पेंशन से स्थायी रूप से 10 (दस) प्रतिशत की कटौती।

4. श्री प्रसाद निलंबन अवधि में ही सेवानिवृत हो चुके हैं। अतः श्री प्रसाद को सेवानिवृति की तिथि दिनांक 30.06.09 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में इनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर तदआलोक में निर्णय लिया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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7 अगस्त 2015

सं0 निग/विरा-1 -16/1999-7346 (एस)—श्री कमलेश्वरी शरण वर्मा, तत्कालीन कनीय अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, रॉंची सम्प्रति सेवा निवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप में दर्ज निगरानी थाना कांड सं0-28/93 के आलोक में विभागीय कार्यालय आदेश सं0-123 दिनांक 25.02.1997 सह-340 दिनांक 24.10.1998 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्री वर्मा के दिनांक-31.10.1999 को सेवानिवृत होने के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6252 (s) दिनांक 11.09.2001 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत्‌ सम्परिवर्तित किया गया।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-775 अनु0 दिनांक 18.08.1998 द्वारा जॉंच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री वर्मा के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित माना गया। जिसके आधार पर विभागीय पत्रांक-6325 (s) अनु0 दिनांक 12.09.2001 द्वारा श्री वर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री वर्मा से द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर अप्राप्त रहने के आलोक में अनेक स्मारों एवं प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उन्हे स्मारित किया गया तथापि द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर सम्प्रति अप्राप्त है।15 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 3. विभागीय स्मार पत्रांक-5144(s) अनु0 दिनांक 11.06.2015 के संबंध में श्री संजीव रमण, पुत्र स्व0 कमलेश्वरी शरण वर्मा का पत्रांक-शून्य दिनांक 21.06.2015 द्वारा सूचित किया गया है कि उनके पिता स्व0 कमलेश्वरी शरण वर्मा का दिनांक 12.05.2014 को निधन हो गया, जिसके आलोक में सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि :-

(क) स्व0 कमलेश्वरी शरण वर्मा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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10 अगस्त 2015

सं0 निग/सारा-6 (आरोप) द0बि0 (ग्रा0)-69/2008-7437 (एस)—श्री मोख्तार नाथ राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर को कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, भभूआ के पदस्थापन काल में मुख्यमंत्री सड़क योजना के अन्तर्गत बारहमासी सड़क सुविधा प्रदान करने हेतु वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए कैमूर जिला हेतु 5 करोड़ रूपये की राशि कर्णांकित की गई थी। इस बजट प्रावधान की तिगुनी राशि 15 करोड़ रूपये की योजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर कार्य प्रारंभ किया जाना था, ताकि 2007-08 तक इसमें अधिकांश योजनाओं को पूर्ण किया जा सके। साथ ही उसके लिए विभाग द्वारा समय सीमा का निर्धारण किया गया था। श्री राम के द्वारा 9 माह बीतने के बावजूद निर्धारित लक्ष्य 15 करोड़ के विरूद्ध मात्र 11.92 करोड़ का ही डी0पी0आर0 समर्पित किया गया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2006-07 में 5 करोड़ रूपये कर्णांकित राशि के विरूद्ध मात्र 5.47 लाख रूपये व्यय किया गया। ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-799 दिनांक 12.07.04 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण पूछा गया, परन्तु उनके द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब निर्धारित तिथि तक नहीं देने के फलस्वरूप ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-4168 अनु0 दिनांक 20.06.08 द्वारा पथ निर्माण विभाग से श्री राम के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही हेतु अनुशंसा की गई। तदआलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-13748 (एस) अनु0 दिनांक 24.10.08 द्वारा विभागीय कार्यवाही सचांलित की गई।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-614 दिनांक 19.07.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप-1 एवं पूरक आरेाप-2 को यद्यपि प्रमाणित नहीं पाया गया, परन्तु संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि एक वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री सड़क योजना में प्राप्त `5.00 करोड़ आवंटन के विरूद्ध समय पर तीन गुणा राशि का डी0पी0आर0 तैयार नहीं कराना तथा मात्र `5.47 लाख व्यय करना श्री राम की कर्त्तव्यहीनता तथा लापरवाही को दर्शाता है। संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष एवं श्री राम केे कथन के अनुसार मात्र `1.79 करोड़ की योजनाओं की स्वीकृति को मान भी लिया जाय तो किसी भी दृष्टिकोण से वित्तीय वर्ष में मात्र `5.47 लाख के व्यय को संतोषजनक नहीं माना जा सकता है। अनुपूरक आरोप के संबंध में पाया गया कि कार्यपालक अभियंता को नियमानुसार 10 प्रतिशत योजनाओं की जाँच करनी है। श्री राम द्वारा मंत्रिमंडल निगरानी विभाग द्वारा निर्गत परिपत्र का उल्लंघन किया गया। उक्त परिपत्र यह नहीं कहता है कि विभागीय रूप से कार्यान्वित योजनाओं की जाँच कार्यपालक अभियंता द्वारा किया जाना आवश्यक नहीं है। योजनाओं का कार्यान्वयन एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता की है। इस मामले में श्री राम द्वारा पर्यवेक्षण का अभाव स्पष्ट होता है। जाँच प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक भूल के लिए श्री राम दोषी है। इस प्रकार योजनाओं के कार्यान्वयन में लापरवाही, शिथिलता तथा कर्त्तव्यहीनता के लिए श्री राम को दोषी पाए जाने के आलोक में विभागीय पत्रांक-2037 (एस) दिनांक 13.03.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

3. श्री राम द्वारा अपने पत्रांक-295 अनु0 दिनांक 09.04.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। श्री राम द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के बिन्दुओं के आलोक में प्रमाणित पाए गए आरोपों के लिए श्री मोख्तार नाथ राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-6957 (एस) दिनांक-30.08.13 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) निन्दन एवं

(ii) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

4. महालेखाकार, बिहार के कार्यालय के पत्रांक-GE-04-PWD-R-V-15-809 दिनांक 29.10.13 द्वारा श्री राम की सेवानिवृति की तिथि 31.12.2014 होने के आलोक में श्री राम का केवल एक ही वार्षिक वेतन वृद्धि जो उन्हें दिनांक 01.07.2014 को देय होगा, को रोकना संभव होने की सूचना देते हुए इस मामले में अंतिम निर्णय से अवगत कराने का अनुरोध किया गया। तद्‌आलोक में मामले के पुनर्विचारोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-6957 (एस) दिनांक 30.08.13 द्वारा संसूचित दंड को निम्नरूपेण संशोधित किया जाता है :-

(i) निन्दन एवं (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।16 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 5. श्री राम द्वारा उक्त दण्डादेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी॰डब्लू॰जे॰सी॰ संख्या-23069/13 दायर किया गया। उक्त वाद में दिनांक 07.01.2015 को पारित आदेश के अनुपालन एवं विधि विभाग से परामर्श के आलोक में श्री मोख्तार नाथ राम, सेवा निवृत अधीक्षण अभियंता को वर्णित अधिसूचना द्वारा दिये गये दण्ड को सरकार के निर्णयानुसार निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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18 अगस्त 2015

सं0 निग/सारा-2 (पथ)-56/2003 (अंश-आ)-7761 (एस)—श्री ब्रजभूषण प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, जहानाबाद सम्प्रति निलंबित अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय के विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, जहानाबाद के पदस्थापन काल के दौरान बिना कार्य कराये फर्जी विपत्रों के माध्यम से राशि निकासी के संबंध में मार्च-2001 में जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से प्राप्त सूचना एवं तद्‌आलोक में उड़नदस्ता दल के जाँच प्रतिवेदन के आलोक में संकल्प ज्ञापांक-3623 (एस) दिनांक 23.05.2002 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में अधिसूचना संख्या-3937 (एस) दिनांक 01.04.2011 द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर सी॰डब्लू॰जे॰सी॰ संख्या-20209/2010 में दिनांक 30.07.2012 को पारित आदेश के आलोक में दण्ड को निरस्त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2635 (एस) अनु॰ दिनांक 02.04.2013 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध नये सिरे से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी साथ ही अधिसूचना संख्या-1989 (एस) दिनांक 12.03.2013 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबित किया गया।

2. श्री प्रसाद द्वारा जीवन निर्वाह भत्ता में बढ़ोतरी हेतु समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 30.06.2015 के अवलोकनोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10(1) (i) के तहत निलंबन की अवधि एक वर्ष से अधिक होने पर जीवन निर्वाह भत्ता में बढ़ोतरी किये जाने के प्रावधान के आलोक में श्री ब्रजभूषण प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, जहानाबाद सम्प्रति निलंबित अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय के जीवन निर्वाह भत्ता में सरकार द्वारा 50(पचास) प्रतिशत बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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19 अगस्त 2015

सं0 निग/सारा-1 (एन0एच0) आरोप-32/15-7822 (एस)—श्री रवि प्रकाश लोकेश, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, ओरंगाबाद सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, शिवहर के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद अन्तर्गत एन0एच0-98 के कि0मी0 141 में निर्मित उच्चस्तरीय पुल निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-1064 (ई) अनु0 दिनांक 20.02.13 द्वारा जाँच प्रतिवेदन संलग्न करते हुए एवं विभागीय पत्रांक-2792 (एस) अनु0 दिनांक 08.04.13 द्वारा आरोप पत्र संलग्न करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

श्री लोकेश, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-154 (अनु0) दिनांक 23.03.13 द्वारा स्पष्टीकरण उत्तर समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से कार्य से संबंद्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया। श्री लोकेश से प्राप्त स्पष्टीकरण की तकनीकी समीक्षा करायी गयी जिसमें तकनीकी समिति द्वारा श्री लोकेश को आरोपों से मुक्त करने की अनुशंसा की गयी। उपर्युक्त के आलोक में पूरे मामले के सम्यक्‌ समीक्षोपरांत सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया जाता हैः- (i) श्री रवि प्रकाश लोकेश, कार्यपालक अभियंता को विभागीय कार्यवाही के दायरे से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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11 सितम्बर 2015

सं0 निग/सारा-1 (पथ)-14/10 (अंश)-8792 (एस) श्री सत्येन्द्र प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ अंचल, दरभंगा द्वारा नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना के पदस्थापन काल के दौरान डाकबंगला से पटना हाईकोर्ट होते हुए बोरिंग रोड चौराहा तक पथांश में कराये गये कार्यों की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में पथ के कि0मी0 2 रें में कराये गये DBM कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 4 प्रतिशत के स्थान पर 3.43 प्रतिशत पाये जाने तथा BC कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 5.4 प्रतिशत के स्थान पर 4.15 प्रतिशत पाये जाने जैसी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-13172 (एस) दिनांक-03.09.10 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-1855 (एस) दिनांक-16.02.12 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) इनकी दो वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है। (ii) निन्दन आरोप वर्ष 2010-11 ।17 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 2. इसी पदस्थापन काल से संबंधित जवाहर लाल नेहरू पथ के कि0मी0 0 से 4 तक में एकरारनामा संख्या-5एस0बी0/2009-10 के तहत कराये गये मजबूतीकरण कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा की गयी। कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 के पत्रांक-105 गो0 दिनांक 29.12.09 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर श्री प्रसाद के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-3305 (एस) दिनांक 23.03.12 के द्वारा दो आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रसाद के विरूद्ध आरेाप संख्या-1 को अप्रमाणित तथा आरोप संख्या-2 को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप संख्या-1 को प्रमाणित पाया गया तथा विभागीय पत्रांक-2633 (एस) दिनांक 02.04.13 द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री प्रसाद केे द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत अधिसूचना संख्या-7981 (एस) दिनांक 21.08.14 द्वारा दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।

3. श्री प्रसाद, सहायक अभियंता द्वारा उपरोक्त दोनों दंडादेश के विरूद्ध उनके पत्रांक-शून्य दिनांक 26.08.14 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। श्री प्रसाद के पुनर्विलोकन अर्जी के विभागीय समीक्षा में पाया गया कि एकरारनामा संख्या-5 एस0बी0/2009-10 के तहत दोनों पथांशों क्रमशः डाकबंगला से पटना हाईकोर्ट होते हुए बोरिंग रोड चौराहा तक पथ निर्माण कार्य एवं बोरिंग रोड जंक्शन से रेलवे क्रॉसिंग तक की जाँच में पायी गयी त्रुटियों के लिए संबंधित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता को दंड संसूचित किया गया। इन दोनों पथांशों में कार्यपालक अभियंता एवं कनीय अभियंता अलग-अलग थे, जबकि सहायक अभियंता श्री सत्येन्द्र प्रसाद की संबद्धता दोनों पथांशों से रही है। इसलिए इन्हें दो-दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का अलग-अलग दंड संसूचित किया गया है।

4. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री सत्येन्द्र प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ अंचल, दरभंगा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-शून्य दिनांक 26.08.14 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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15 अक्टूबर 2015

सं0 निग/सारा-6 (था0का0)-104/2010-9924 (एस)—निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-54/10 में श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-5433 दिनांक 14.09.10 से प्राप्त निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-3327 (एस) दिनांक 26.04.13 द्वारा श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण पर नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री अरविन्द प्रसाद को कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितताओं के लिए अधिसूचना संख्या-4394 (एस) दिनांक 04.06.13 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6064 (एस) दिनांक 26.07.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित है।

2. विभागीय अधिसूचना संख्या-11800 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-11801 दिनांक 08.12.14 द्वारा श्री अरविन्द प्रसाद, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित के जीवन निर्वाह भत्ता में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10(1)(i) के तहत उनके जीवन निर्वाह भत्ता में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का निर्णय संसूचित है, में विभागीय अधिसूचना संख्या-12945 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-12946 (एस) दिनांक 31.12.14 द्वारा इनके जीवन निर्वाह भत्ता में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का निर्णय संसूचित है। उक्त आदेश में सरकार के निर्णयानुसार अधिसूचना संख्या-11800 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-11801 दिनांक-08.12.14 में आंशिक रूप से संशोधित करते हुए श्री अरविन्द प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति निलंबित कार्यपालक अभियंता के जीवन निर्वाह भत्ता में दिनांक 05.06.14 से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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15 अक्टूबर 2015

सं0 निग/सारा-6 (था0का0)-104/2010-9926 (एस)—निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-54/10 में श्री शैलेश मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-5433 दिनांक 14.09.10 से प्राप्त निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-3056 (एस) दिनांक 16.04.13 द्वारा श्री मिश्र से कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री मिश्र से प्राप्त कारण पृच्छा पर नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री शैलेश मिश्र को कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितताओं के लिए अधिसूचना संख्या-4392 (एस) दिनांक 04.06.13 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4949 (एस) दिनांक 20.06.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित है।18 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 2. विभागीय अधिसूचना संख्या-11802 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-11803 दिनांक 08.12.14 द्वारा श्री शैलेश मिश्र, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित के जीवन निर्वाह भत्ता में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10(1)(i) के तहत उनके जीवन निर्वाह भत्ता में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का निर्णय संसूचित है, में विभागीय अधिसूचना संख्या-12949 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-12950 (एस) दिनांक 31.12.14 द्वारा इनके जीवन निर्वाह भत्ता में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का निर्णय संसूचित है। उक्त आदेश में सरकार के निर्णयानुसार अधिसूचना संख्या-11802 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-11803 दिनांक 08.12.14 में आंशिक रूप से संशोधित करते हुए श्री शैलेश मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति निलंबित कार्यपालक अभियंता के जीवन निर्वाह भत्ता में दिनांक 05.06.14 से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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15 अक्टूबर 2015

सं0 निग/सारा-6 (था0का0)-104/2010-9928 (एस)—निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-54/10 में श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, पटना नगर निगम को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया। नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-5433 दिनांक 14.09.10 से प्राप्त निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय पत्रांक-3057 (एस) दिनांक 16.04.13 द्वारा श्री सिन्हा से कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिन्हा से प्राप्त कारण पृच्छा पर नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री अनिल कुमार सिन्हा को सहायक अभियंता, पटना नगर निगम के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितताओं के लिए अधिसूचना संख्या-4396 (एस) दिनांक 04.06.13 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-4946 (एस) दिनांक 20.06.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित है।

2. विभागीय अधिसूचना संख्या-11798 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-11799 दिनांक 08.12.14 द्वारा श्री अनिल कुमार सिन्हा, सहायक अभियंता सम्प्रति निलंबित कार्यपालक अभियंता के जीवन निर्वाह भत्ता में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10(1)(i) के तहत उनके जीवन निर्वाह भत्ता में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का निर्णय संसूचित है, में विभागीय अधिसूचना संख्या-12947 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-12948 (एस) दिनांक 31.12.14 द्वारा इनके जीवन निर्वाह भत्ता में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का निर्णय संसूचित है। उक्त आदेश में सरकार के निर्णयानुसार अधिसूचना संख्या-11798 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-11799 दिनांक 08.12.14 में आंशिक रूप से संशोधित करते हुए श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, पटना नगर निगम सम्प्रति निलंबित कार्यपालक अभियंता के जीवन निर्वाह भत्ता में दिनांक 05.06.14 से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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26 अक्टूबर 2015

सं0 निग/सारा-2 (पथ)-47/03 (अंश)-10056 (एस)—श्री शिव शंकर प्रसाद गुप्ता, तत्कालीन कनीय अभियंता, शाहाबाद पथ प्रमंडल, आरा सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध शाहाबाद पथ प्रमंडल, आरा के पदस्थापन काल में आरा-सासाराम पथ निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए कार्यालय आदेश संख्या-253-सहपठित ज्ञापांक-9520 (ई) दिनांक 21.12.05 द्वारा निलंबित कर कार्यालय आदेश संख्या-84-सहपठित ज्ञापांक-2660 (ई) दिनांक 10.03.06 द्वारा 6 आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-61 अनु0 दिनांक 11.01.07 में श्री गुप्ता के विरूद्ध गठित सभी आरोपो को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय कार्यालय आदेश संख्या-54-सहपठित ज्ञापांक-1715 (ई) दिनांक 12.02.07 द्वारा इन्हें तात्कालिक प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्नांकित दंड संसूचित किया गया :- (i) इनकी एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है। (ii) इन्हें चेतावनी की सजा दी जाती है जिसकी प्रविष्टि उनकी चारित्री वर्ष 2000-01 में की जाय। (iii) निलंबन अवधि में इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु यह अवधि अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि मानी जायेगी।

2. उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध श्री गुप्ता के पत्रांक-शून्य दिनांक 26.03.07 द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। श्री गुप्ता के अपील अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत कार्यालय आदेश संख्या-61-सहपठित ज्ञापांक-3829 (ई) दिनांक 14.03.08 द्वारा अस्वीकृत किया गया।

3. श्री गुप्ता द्वारा उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-16997/2007 दायर किया गया जिसमें दिनांक 07.08.15 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश में प्रस्तुत मामले में आरोप प्रमाणित नहीं माने जाने, आरोपी से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग नहीं किये जाने, सक्षम पदाधिकारी से दंडादेश निर्गत नहीं किये जाने, एक ही प्राधिकार से दंडादेश एवं अपील निरस्त करने का आदेश निर्गत होने, निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में विहित प्रक्रिया का पालन नहीं किये जाने के कारण उक्त दंडादेश को रद्‌द कर दिया गया तथा नये सिरे से कार्रवाई करने पर रोक लगा दिया गया है।19 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 4. माननीय उच्च न्यायालय, पटना के न्यायदेश के अनुपालन में श्री शिवशंकर प्रसाद गुप्ता, तत्कालीन कनीय अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को आरोप से मुक्त करते हुए नियमानुसार उनके सेवांत लाभ/दावे को भुगतान का निर्णय लिया जाता है।

5. उक्त प्रस्ताव पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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26 अक्टूबर 2015

सं0 निग/सारा-1 (पथ) आरोप-59/2012-10058 (एस)—श्री सच्चिदानन्द मिश्र, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, बांका, पथ प्रमंडल, बांका सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, बांका के पदस्थापन काल के दौरान पथ प्रमंडल, बांका अन्तर्गत जिलाधिकारी आवास से पोखरिया पथ एवं बौसी से बिक्रमपुर पथ में कराये गये कार्य की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 से करायी गयी तथा उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर पायी गयी त्रुटियों के लिए विभागीय पत्रांक-1523 (एस) अनु0 दिनांक 26.02.13 द्वारा श्री मिश्र से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री मिश्र के पत्रांक-18 दिनांक 12.03.13 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के तकनीकी समीक्षोपरांत स्पष्टीकरण में उल्लेखित तथ्यों की पुष्टि कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, बांका के पत्रांक-1040 अनु0 दिनांक 03.09.15 द्वारा की गयी। कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, बांका से प्राप्त मंतव्य/प्रतिवेदन के आधार पर श्री मिश्र की आलोच्य कार्य में संलिप्तता नहीं रहने के कारण सरकार के निर्णयानुसार इन्हें आरोप से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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22 दिसम्बर 2015

सं0 निग/सारा-6 द॰वि॰ (आरोप)34/2012-11119 (एस)—श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग सम्प्रति निलंबित कार्यपालक अभियंता, अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध नगर विकास एवं आवास विभाग के पदस्थापन काल में निम्नवत्‌ आरोप यथा-

(i) सहायक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग के पदस्थापन काल के दौरान नगर विकास एवं आवास विभाग के अधिसूचना संख्या-2486 दिनांक 27.06.09 के द्वारा तात्कालिक प्रभाव से आपकी सेवा पथ निर्माण विभाग को वापस की गयी। पुनः नगर विकास एवं आवास विभाग के आदेश संख्या-2721 दिनांक 08.07.09 के द्वारा अधिसूचना निर्गत की तिथि से आपको पैतृक विभाग के लिए विरिमित किया गया, परन्तु आप आदेश का अनुपालन नहीं कर नगर निगम, पटना में बने रहें।

(ii) पथ निर्माण विभाग के अधिसूचना संख्या-1455 (एस) दिनांक 27.01.10 के द्वारा आपको कार्यपालक अभियंता के पद पर प्रोन्नति दी गयी तथा आपका सेवा पदस्थापन हेतु नगर विकास एवं आवास विभाग को प्राप्त हुई। उक्त के आलोक में नगर विकास एवं आवास विभाग के अधिसूचना संख्या-2044 दिनांक 20.04.10 के द्वारा आपको जिला शहरी विकास अभिकरण, मधेपुरा में पदस्थापित किया गया, परन्तु आप अपने पूर्व पद सहायक अभियंता के पद पर आदेश उल्लंघन कर पटना नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर बने रहें, के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10860 (एस) अनु0 दिनांक 14.11.14 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-8062 अनु0 दिनांक 24.09.15 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित दो आरोपों में से आरोप संख्या-1 एवं 2 को निर्विवाद रूप से पूर्णतः प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक-9919 (एस) अनु0 दिनांक 15.10.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिन्हा ने अपने आवेदन दिनांक 02.11.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया। 3. श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा वहीं बाते कही गयी है जो उनके द्वारा अपने बचाव वयान में संचालन पदाधिकारी के समक्ष दी गयी थी। इन सभी तथ्यों का संचालन पदाधिकारी के द्वारा विस्तृत रूप से समीक्षोपरांत इनके विरूद्ध आरेाप प्रमाणित पाये गये।

4. अतएव श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर दिनांक 02.11.15 को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14 (vi) के तहत निम्न दंड संसूचित किया जाता है। (i) संचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।20 Qबहार गजट, 15 फरवर(cid:15) 2017 22 दिसम्बर 2015 सं0 निग/सारा-6 द॰वि॰ (आरोप)34/2012-11123 (एस)—श्री शत्रुघ्न शरण सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, मोतिहारी के विरूद्ध नगर विकास एवं आवास विभाग के पदस्थापन काल में निम्नवत्‌ आरोप यथा-(i) सहायक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग के पदस्थापन काल के दौरान नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना संख्या-2486 दिनांक 27.06.09 के द्वारा तात्कालिक प्रभाव से आपकी सेवा पथ निर्माण विभाग को वापस की गयी। पुनः नगर विकास एवं आवास विभाग के आदेश संख्या-2721 दिनांक 08.07.09 के द्वारा अधिसूचना निर्गत की तिथि से आपके पैतृक विभाग के लिए विरिमित किया गया, परन्तु आप आदेश का अनुपालन नहीं कर नगर निगम, पटना में बने रहें। (ii) पथ निर्माण विभाग के अधिसूचना संख्या-1455 (एस) दिनांक 27.01.10 के द्वारा आपको कार्यपालक अभियंता के पद पर प्रोन्नति दी गयी तथा आपकी सेवा पदस्थापन हेतु नगर विकास एवं आवास विभाग को प्राप्त हुई। उक्त के आलोक में नगर विकास एवं आवास विभाग के अधिसूचना संख्या-2044 दिनांक 20.04.10 के द्वारा आपको जिला शहरी विकास अभिकरण, पश्चिमी चम्पारण, बेतिया में पदस्थापित किया गया, परन्तु आप अपने पूर्व पद सहायक अभियंता के पद पर आदेश उल्लंघन कर पटना नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर बने रहें, के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10859 (एस) अनु0 दिनांक 14.11.14 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-8058 अनु0 दिनांक 24.09.15 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिन्हा के विरूद्ध गठित दो आरोपों में से आरोप संख्या-1 एवं 2 को निर्विवाद रूप से पूर्णतः प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक-9920 (एस) अनु0 दिनांक 15.10.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिन्हा ने अपने पत्रांक-1951 दिनांक 26.10.15 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया। 3. श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा वहीं बाते कही गयी है जो उनके द्वारा अपने बचाव वयान में संचालन पदाधिकारी के समक्ष दी गयी थी। इन सभी तथ्यों का संचालन पदाधिकारी के द्वारा विस्तृत रूप से समीक्षोपरांत इनके विरूद्ध आरेाप प्रमाणित पाये गये। 4. अतएव श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-1951 दिनांक 26.10.15 को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-14 (vi) के तहत निम्न दंड संसूचित किया जाता है।

(i) संचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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ग्रामीण कार्य विभाग

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अधिसूचना

13 जनवरी 2017

सं॰ 2/अ0प्र0-1-260/16-66—श्री ओम प्रकाश मांझी, अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अंचल, सिवान को निगरानी थाना कांड संख्या-145/2016 दिनांक 19.12.2016 की धारा 13(2)-सह-पठित धारा 13(1)(ई) भ्र॰नि॰अधि॰, 1988 के अंतर्गत आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(क) एवं 9(1)(ग) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि में इनको बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 10(1) के अंतर्गत अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख का कार्यालय, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है।

4. श्री ओम प्रकाश मांझी,अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अंचल, सिवान के विरूद्व विभागीय कार्यवाही हेतु आदेश अलग से निर्गत किया जा रहा है।

प्रस्ताव में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शंभू चौधरी, उप-सचिव।

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Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 15 February 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-02-15.7/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-02-15.7.