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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 22 February 2017

Published 22 February 2017

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-02-22.8
Languages
English, Hindi

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(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

ॢबह(cid:4)र गजट

ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 3 फा(cid:20)गुन 1938 (श0) सं(cid:8)या 8 पटना, बुधवार, ———————— 22 फरवर(cid:15) 2017 (ई0) #वषय-सूची पृ(ठ भाग-1—(cid:1)नयुि,त, पद/थापन, बदल(cid:15), शि,त, छु 3ी और अ6य 7यि,तगत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—/वयंसेवक गु(cid:20)म= के समादे(टाओं के आदेश।

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भाग-1-ख—मैB(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Fाओं के पर(cid:15)Fा-फल, कायGHम, छाIवृिJत Kदान, आLद।

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भाग-1-ग—MशFा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Fाफल आLद ---

भाग-2—Nबहार-राPयपाल और कायाGQयF= Rवारा (cid:1)नकाले गये #व(cid:1)नयम, आदेश, अSधसूचनाएं और (cid:1)नयम आLद। 3-3 भाग-3—भारत सरकार, पिTचम बंगाल सरकार और उVच 6यायालय के आदेश, अSधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राPय गजट= के उYरण। ---

भाग-4—Nबहार अSध(cid:1)नयम ---

पृ(ठ भाग-5—Nबहार #वधान मंडल म\ पुर:/था#पत #वधेयक, उ,त #वधान मंडल म\ उप/था#पत या उप/था#पत ^कये जानेवाले Kवर सMम(cid:1)तय= के K(cid:1)तवेदन और उ,त #वधान मंडल म\ पुर:/थापन के पूवG KकाMशत #वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अSध(cid:1)नयम िजनपर रा(Bप(cid:1)त क_ Pये(ठ अनुम(cid:1)त Mमल चुक_ है। ---

भाग-8—भारत क_ संसद म\ पुर:/था#पत #वधेयक, संसद म\ उप/था#पत Kवर सMम(cid:1)तय= के K(cid:1)तवेदन और संसद म\ उप/था#पत Kवर सMम(cid:1)तय= के K(cid:1)तवेदन और संसद म\ पुर:/थापन के पूवG KकाMशत #वधेयक। ---

भाग-9—#व`ापन

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भाग-9-क—वन #वभाग क_ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—(cid:1)न#वदा सूचनाएं, पaरवहन सूचनाएं, 6यायालय सूचनाएं और सवGसाधारण सूचनाएं इJयाLद। ---

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पूरक

पूरक-क 4-212 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

भ(cid:2)ग(cid:4)1

०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $

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कला, संस्कृति एवं युवा विभाग

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अधिसूचना

15 फरवरी 2017

सं॰ 1/स्था॰6-03/2012-193—भागलपुर संग्रहालयाध्यक्ष के पद से श्री ओम प्रकाष पाण्डेय दिनांक 31.12.2016 को वार्धक्य सेवानिवृत्त होने के फलस्वरूप हुए रिक्त स्थान पर श्री शंकर सुमन, सहायक संग्रहालयाध्यक्ष-सह-मार्गदर्षन व्याख्याता, पटना संग्रहालय, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त संग्रहालयाध्यक्ष, भागलपुर का प्रभार अगले आदेष तक सौंपा जाता है।

2. यह आदेष तत्काल प्रभाव से प्रभावी होगी। 3. इस पर माननीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, तारानन्द महतो वियोगी, उप-सचिव।

——— आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया ——— अधिसूचना 11 फरवरी 2017

सं॰ II स्था0-22/2010-1941—बिहार एवं उडी़सा लोक माँग वसूली अधिनियम-1914 की धारा-3(3) के तहत्‌ श्री बीरेन्द्र कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, औरंगाबाद को सम्पूर्ण औरंगाबाद जिलान्तर्गत सहकारिता विभाग से संबंधित नीलाम -पत्र वादों के निष्पादन हेतु नीलाम पत्र पदाधिकारी की शक्ति प्रदान की जाती है।

आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया का आदेष दिनांक 01.10.16

आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, आयुक्त के सचिव।

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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)

ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?

ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 49-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?

Website: http://egazette.bih.nic.in

3 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

भ(cid:2)ग(cid:4)2

ॢबह(cid:2)र(cid:4)र(cid:2)Îयप(cid:2)ल jर क(cid:2)य(cid:2)Z8य¡9 ह(cid:2)र(cid:2) ०नक(cid:2)ल: गय: ॢव०नयम(cid:12) \द:श(cid:12) [०धस३चन(cid:2)e $ jर ०नयम \ॢद?

——————— पथ निर्माण विभाग ——— vf/klwpukvf/klwpukvf/klwpukvf/klwpuk ¼'kqf)&¼'kqf)&¼'kqf)&¼'kqf)&i=½i=½i=½i=½ 24 नवम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-10476 (एस)—पथ निर्माण विभाग के अधिसूचना संख्या-9001 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-9002 (एस) दिनांक 17.09.15 द्वारा श्री कृष्ण चन्द्र ठाकुर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-1 एवं 2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति उप महाप्रबंधक (तकनीकी), बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड, पटना को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरोप वर्ष 2008-09 से 2010-11 तक के लिए निन्दन की सजा दी गयी थी। उक्त अधिसूचना में अंकित "आरोप वर्ष 2008-09 से 2010-11 तक के लिए निन्दन की सजा" के स्थान पर "आरोप वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 तक के लिए निन्दन की सजा" पढ़ा जाय।

2. अधिसूचना संख्या-9001 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-9002 (एस) दिनांक 17.09.15 की शेष बातें यथावत रहेंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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Website: http://egazette.bih.nic.in

4 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

ॢबह(cid:4)र गजट

क(cid:4)

प३रक(cid:13)[(cid:15)(cid:16) (cid:17)(cid:4)०धक(cid:4)र(cid:20) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:17)क(cid:4)०शत

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

29 अप्रील 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ)-आरोप-67/13-3751 (एस)—आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना द्वारा दर्ज आर्थिक अपराध इकाई थाना कांड संख्या-25/13 एवं पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई-2, बिहार से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, खगड़िया सम्प्रति अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, पथ अंचल, पूर्णियाँ-सह-प्रभारी कार्यपालक अभियंता, राज्य उच्च पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ को अधिसूचना संख्या-799 (एस) दिनांक 29.01.14 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1167 (एस) दिनांक 11.02.14 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित है।

2. श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह द्वारा जीवन निर्वाह भत्ता में बढ़ोतरी हेतु समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 04.02.15 के समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10 (1)(i) के आलोक में श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित के जीवन निर्वाह भत्ता में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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7 मई 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ)-आरोप-41/2014-3913(एस)—पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ अन्तर्गत पूर्णियाँ-श्रीनगर पथ में बरती गयी अनियमितता की कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 द्वारा जाँचोपरांत समर्पित प्रारंभिक एवं पूरक जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटियों/अनियमितता के लिए श्री अरूण कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ कार्य अंचल, पटना एवं प्रतिनियुक्त मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना से विभागीय पत्रांक-2446 (ई) दिनांक 10.04.12 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री कुमार, सहायक अभियंता के पत्रांक-शून्य अनु0 दिनांक 23.08.12 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि पूर्णियाँ-श्रीनगर पथ के कि0मी0 6 एवं 11 में कराये गये SDBC कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की प्रतिशत मात्रा विभाग द्वारा निर्धारित टोलरेन्स से काफी कम है।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित पाये गये अनियमितता के लिए विभाग द्वारा निर्धारित माप दंड के अनुरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-91 (एस) दिनांक 06.01.15 द्वारा श्री अरूण कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, पूर्णियाँ सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ कार्य अंचल, पटना एवं प्रतिनियुक्त मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।

4. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार, सहायक अभियंता द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 24.02.15 विभाग को समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा अन्य तकनीकी बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए कहा गया की उनके दिनांक 23.08.125 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 को समर्पित स्पष्टीकरण पर पूर्णरूपेण तथा समुचित तकनीकी समीक्षा किये बिना ही दंड संसूचित कर दिया गया है। उक्त के आधार पर संसूचित दंड से मुक्त करने का अनुरोध किया गया।

5. श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी दिनांक 24.02.15 के समीक्षोपरांत यह पाया गया कि उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की पूर्ण तकनीकी समीक्षा कर हीं पुनरीक्षित मान्य दंड के अनुसार श्री कुमार को दंड संसूचित किया गया था। अतः उनका यह कहना की संदर्भित आरोपों पर तकनीकी अभिमत गठित नहीं किया गया है पूर्णतः गलत है।

6. तद्‌आलोक में सरकार के निर्णयानुसार श्री अरूण कुमार, सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ कार्य अंचल, पटना एवं प्रतिनियुक्त मुख्य अभियंता (अनुश्रवण) का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-शून्य दिनांक 24.02.15 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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7 मई 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ)-आरोप-72/2013-3919(एस)—श्री सदानन्द चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत को पथ प्रमंडल, किशनगंज के पदस्थापन काल में किशनगंज-बहादुरगंज पथ में दिनांक 10.07.13 को अप्रत्याशित बाढ़ से हुए कटाव के कारण अवरूद्ध यातायात को चालू करवाने में हुई चूक के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-5531 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-5532 (एस) दिनांक 11.07.13 के द्वारा निलंबित करते हुए श्री चौधरी के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-6478 (एस) अनु0 दिनांक 12.08.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचलित की गयी जिसमें अधिसूचना संख्या-11948 (एस) दिनांक 11.12.14 द्वारा निम्न निर्णय संसूचित किया गया :-

(i) इन्हें दिये गये चेतावनी की प्रविष्टि उनके चारित्री पुस्त में की जाय। (ii) निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता को छोड़कर कुछ भी देय नहीं होगा।

2. महालेखाकार (ले0 एवं ह0) का कार्यालय, बिहार, पटना का पत्रांक-2082 दिनांक 23.02.15 के आलोक में श्री सदानन्द चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि दिनांक 11.07.13 से दिनांक 28.08.14 तक के संबंध में सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया जाता है :-

(i) निलंबन अवधि को अन्य प्रयोजनार्थ कर्तव्य अवधि मानी जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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7 मई 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप (सी0ए0जी0)-04/12-3921(एस)—श्री रामानन्द मंडल, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पथ अवर प्रमंडल, ढाका सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, शहरी विकास अभिकरण, रोहतास के विरूद्ध पथ अवर प्रमंडल, ढाका के पदस्थापन काल में सी0ए0जी0 से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3782 (एस) अनु0 दिनांक 02.04.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-189 अनु0 दिनांक 24.01.13 में श्री मंडल के विरूद्ध गठित 8 आरोपों में से आरोप संख्या-5 को अप्रमाणित एवं शेष सभी आरेापों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक-2454 (एस) अनु0 दिनांक 21.03.13 द्वारा श्री मंडल से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री मंडल द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य-2 कैम्प, पटना दिनांक 03.06.13 द्वारा समर्पित किया गया। 2. श्री मंडल द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की तकनीकी समीक्षा करायी गयी जिसमें आरेाप संख्या-4 को अप्रमाणित, आरेाप संख्या-1,3,5 तथा 8 को अंशतः प्रमाणित जबकि आरेाप संख्या-2,6 तथा 7 को प्रमाणित होने की अनुशंसा की गयी। तकनीकी समिति ने अपनी अनुशंसा में श्री मंडल की कर्त्तव्यहीनता एवं लापरवाही के कारण सरकार को कुल `3,30,209.00 का वित्तीय क्षति पहुँचाने का दोषी पाया गया।

3. तदआलोक में सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए विभाग द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-395 (एस) दिनांक 15.01.15 द्वारा श्री रामानन्द मंडल, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पथ अवर प्रमंडल, ढाका सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, शहरी विकास अभिकरण, रोहतास को निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(क) सरकार को पहुँचाई गई आर्थिक क्षति की राशि `3,30,209.00 की वसूली इनके वेतन से की जाय एवं

(ख) संचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक।

4. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री मंडल के पत्रांक-129 अनु0 दिनांक 02.02.15 द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री मंडल द्वारा पूर्व में समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में जिन बातों का उल्लेख किया गया था उसे हीं पुनः पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में दोहराया गया है। इसमें कोई ऐसा नया तथ्य नहीं दिया गया है जिसके आधार पर संसूचित दंड पर पुनर्विचार की आवश्यकता हो।6 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 5. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री रामानन्द मंडल, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी, पथ अवर प्रमंडल, ढाका सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, शहरी विकास अभिकरण, रोहतास के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक-129 दिनांक 02.02.15 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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15 मई 2015

7 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

21 मई 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ)-आरोप-30/2014-4457(एस)—श्री अंजनी कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में गरँहा-हथौड़ी पथ के निर्माण कार्य में पायी गयी निम्न त्रुटियों यथा-(i) पथ के पहले एवं दूसरे culvert में निर्मित wingwall का alignment एवं PCC casting proper नहीं रहने तथा दूसरे culverts के एक साइड का wing wall, abutment के नजदीक Tilted रहने (ii) culverts के approach में मिट्टी कार्य का compaction layer wise नहीं करने (iii) सभी culverts में Railing approach slab कार्य शेष रहने के लिए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-716 (ई) अनु0 दिनांक 06.02.12 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-46 अनु0 दिनांक 29.02.12 के तकनीकी समीक्षोपरांत आरोप संख्या-1 को प्रमाणित तथा शेष दो आरोपों को अप्रमाणित पाया गया।

2. तदआलोक में श्री अंजनी कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग को दोषी मानते हुए अधिसूचना संख्या-9185 (एस) दिनांक 22.09.14 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

3. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-335 (अनु0) दिनांक 01.11.14 समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी के विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा ऐसा कोई तथ्य समर्पित नहीं किया गया जो उन्हें अधिरोपित शास्ति को क्षांत करता हो।

4. तद्‌आलोक में श्री अंजनी कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-335 (अनु0) दिनांक 01.11.14 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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21 मई 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ)-आरोप-30/2014-4459(एस)—श्री सत्येन्द्र सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पटना पश्चिम द्वारा पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में गरँहा-हथौड़ी पथ के निर्माण कार्य में पायी गयी निम्न त्रुटियों यथा-(i) पथ के पहले एवं दूसरे culvert में निर्मित wingwall का alignment एवं PCC casting proper नहीं रहने तथा दूसरे culverts के एक साइड का wing wall, abutment के नजदीक Tilted रहने (ii) culverts के approach में मिट्टी कार्य का compaction layer wise नहीं करने (iii) सभी culverts में Railing approach slab कार्य शेष रहने के लिए श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-717 (ई) अनु0 दिनांक 06.02.12 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पत्रांक-637 दिनांक 15.03.12 के तकनीकी समीक्षोपरांत आरोप संख्या-1 को प्रमाणित तथा शेष दो आरोपों को अप्रमाणित पाया गया। 2. तदआलोक में श्री सत्येन्द्र सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पटना पश्चिम को दोषी मानते हुए अधिसूचना संख्या-9183 (एस) दिनांक 22.09.14 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

3. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री सिंह द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-2621 (अनु0) दिनांक 31.10.14 समर्पित किया गया। श्री सिंह द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी के विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा ऐसा कोई तथ्य समर्पित नहीं किया गया जो उन्हें अधिरोपित शास्ति को क्षांत करता हो।

4. तद्‌आलोक में श्री सत्येन्द्र सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, पटना पश्चिम द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी पत्रांक-2621 (अनु0) दिनांक 31.10.14 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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29 मई 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-70/2013-4882 (एस)— श्री सचिन्द्र प्रसाद सिंह, माननीय सदस्य, बिहार विधान सभा से प्राप्त परिवाद के आलोक में श्री लक्ष्मी कान्त पटेल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति निलंबित द्वारा पथ प्रमंडल, मोतिहारी अन्तर्गत बलहा-मलाही पथ में बिना टेंडर के रोड मार्किंग का कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 से करायी गयी एवं प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री पटेल से विभागीय पत्रांक-316 (एस) अनु0 दिनांक 13.01.15 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।8 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 2. श्री पटेल के पत्रांक-शून्य दिनांक 02.02.15 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि बलहा-मलाही पथ में रोड मार्किंग का कार्य बिना टेंडर के किसी अज्ञात व्यक्ति से कराये जाने के लिए श्री पटेल दोषी हैं। 3. तदआलोक में श्री लक्ष्मी कान्त पटेल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री पटेल को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(i) एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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29 मई 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-70/2013-4886(एस)—श्री सचिन्द्र प्रसाद सिंह, माननीय सदस्य, बिहार विधान सभा से प्राप्त परिवाद के आलोक में श्री रजनीश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, ठाकुरगंज (किशनगंज) द्वारा पथ प्रमंडल, मोतिहारी अन्तर्गत बलहा-मलाही पथ में बिना टेंडर के रोड मार्किंग का कार्य में बरती गयी अनियमितता की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 से करायी गयी एवं प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-315 (एस) अनु0 दिनांक 13.01.15 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री कुमार के पत्रांक-शून्य दिनांक 27.01.15 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि बलहा-मलाही पथ में रोड मार्किंग का कार्य बिना टेंडर के किसी अज्ञात व्यक्ति से कराये जाने के लिए श्री कुमार दोषी हैं। 3. तदआलोक में श्री रजनीश कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए श्री कुमार को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(i) एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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24 जून 2015

सं॰ निग/सारा-1 (मुख्या0)-27/15-5674 (एस)—श्री शशिनाथ दास, सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को पारिवारिक विवाद में मार-पीट हो जाने के फलस्वरूप दिनांक 31.05.15 को हिरासत में लिए जाने के कारण इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (2) (क) के तहत दिनांक 31.05.15 के प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्तों के तहत जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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26 जून 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-23/2011-5740(एस)—मुख्यमंत्री सचिवालय से प्राप्त परिवाद पत्र के आलोक में गोपालगंज जिलान्तर्गत रघुनन्दनपुर से चमारी पट्टी पथ में कराये गये कार्य का कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा दिनांक 04.09.08 से 05.09.08 तक स्थल जाँच कर पत्रांक-364 अनु0 दिनांक 10.09.08 के माध्यम से अंतरिम जाँच प्रतिवेदन, पत्रांक-111 अनु0 दिनांक 06.08.09 के माध्यम से गुणवत्ता प्रतिवेदन एवं पत्रांक-182 अनु0 दिनांक 26.10.09 के माध्यम से विहित प्रपत्र में गुणवत्ता प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया जिसके समीक्षोपरांत पाई गई त्रुटियों/अनियमितता के लिए श्री आलोक कुमार भगत, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, हाजीपुर से विभागीय पत्रांक-13715 (एस) दिनांक 26.11.09 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री भगत से प्राप्त स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6694 (एस) अनु0 दिनांक 10.06.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-3540 (अनु0) दिनांक 10.12.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवदेन में संचालन पदाधिकारी द्वारा इनके विरूद्ध गठित 6 आरोपों में से आरोप संख्या-1 एवं 2 को अंशतः प्रमाणित एवं शेष को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-1082 (एस) अनु0 दिनांक 12.02.13 द्वारा श्री भगत से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

3. श्री भगत ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 27.02.13 द्वारा कारण पृच्छा उत्तर विभाग को समर्पित किया जिसके समीक्षोपरांत आलोच्य पथ से संबंधित कार्य की मुटाई में कमी के लिए दोषी पाये जाने के आलोक में सरकार के निर्णयानुसार9 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए विभाग द्वारा निर्धारित माप दंड के अनुरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-12284 (एस) दिनांक 18.12.14 द्वारा श्री भगत को निम्न दंड संसूचित किया गया।

(i) असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतन वृद्धि पर रोक।

4. श्री भगत द्वारा उक्त संसूचित दंडादेश को निरस्त करने हेतु पुनर्विचार आवेदन समर्पित किया गया। श्री भगत ने अपने पुनर्विचार आवेदन में अंकित किया है कि जाँच प्रतिवेदन में कार्य में प्रयुक्त सामग्रियों के गुणवताहीन होने का कोई आरोप नहीं है, जिससे स्पष्ट है कि कार्य में व्यवहृत सामग्रियाँ प्राक्कलन के अनुसार लगायी गयी है चूँकि वे Material के गुण नियंत्रण का कार्य देख रहे थे इसलिए पथ के विभिन्न स्तरों में पायी गयी मोटाई की कमी के लिए उन्हें उत्तरदायी ठहराना न्यायसंगत नहीं है क्योंकि योजना के क्रियान्वयन की सीधी जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता की होती है। जाँच प्रतिवेदन में अन्य त्रुटियों के साथ-साथ पथ के कि0मी0 1 में कराये गये WBM ग्रेड-III कार्य में प्रयुक्त Agrigate औसतन 22.02 प्रतिशत ओवरसाईज तथा औसतन 36.73 प्रतिशत अन्डरसाईज पाया गया है साथ ही SDBC कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.59 प्रतिशत पायी गयी है जबकि प्रावधान 5 प्रतिशत का है। पथ के अन्य भागों में भी प्रयुक्त Agrigate oversize एवं undersize पाया गया है इसलिए श्री भगत का यह कहना कि कार्य में प्रयुक्त सभी सामग्रियाँ गुणवतापूर्ण थी मान्य नहीं है।

5. तद्‌आलोक में सरकार के निर्णयानुसार श्री आलोक कुमार भगत, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, हाजीपुर द्वारा उक्त दंडादेशके विरूद्ध समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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26 जून 2015

सं॰ निग/सारा-10-4/01-5752(एस)—श्री चन्द्रानन मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध पथ प्रमंडल, कटिहार के पदस्थापन काल में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना में विभागीय दिशा-निर्देश के प्रतिकूल कार्य कराने एवं अन्य अनियमितताओं के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6533 (एस) अनु0 दिनांक 19.09.01 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-1929 दिनांक 08.08.02 में श्री मंडल के विरूद्ध गठित कुल 3 आरोपों में से सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया, परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उससे असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं को चिन्हित कर विभागीय पत्रांक-7918 (एस) दिनांक 22.10.05 द्वारा श्री मंडल से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री मंडल ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक 16.12.09 में मूल रूप में अंकित किया कि आलोच्य सभी योजनाओं का कार्यान्वयन डिपोजिट वर्क के रूप में जिला प्रशासन से उपलब्ध करायी गयी राशि से लोक निर्माण संहिता/लोक निर्माण लेखा संहिता तथा समय-समय पर निर्गत विभागीय परिपत्रों के अनुपालन में किया गया है, जिसकी सम्पुष्टि पथ प्रमंडल, कटिहार में उनके बाद पदस्थापित कार्यपालक अभियंता के प्रतिवेदन से भी होती है। उक्त आधार पर आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया।

2. श्री मंडल से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर जिला पदाधिकारी, कटिहार से मंतव्य की मांग की गयी, किन्तु कई स्मारों के बावजूद जिला पदाधिकारी से मंतव्य अप्राप्त रहने के कारण श्री मंडल के विरूद्ध गठित प्रपत्र-'क' एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पर तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। तकनीकी समिति ने श्री मंडल के विरूद्ध गठित 3 आरोपों में से आरोप संख्या-1 को प्रमाणित एवं आरोप संख्या-2 तथा 3 को अप्रमाणित होने की अनुशंसा की। तदआलोक में श्री मंडल के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए इनके पेंशन से 5 प्रतिशत राशि की कटौती स्थायी रूप से करने के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-338 (एस) अनु0 दिनांक 13.01.15 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग की गयी।

3. बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने पत्रांक-532 दिनांक 20.05.15 द्वारा उपलब्ध कराये गये परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर असहमति व्यक्त की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने परामर्श में प्रस्तावित दंड को आरोपों के परिपे्रक्ष्य में अनुपातिक नहीं माना। आयोग का मंतव्य ं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन पर आधारित है, जबकि आरोप संख्या-1 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी थी। श्री मंडल से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की तकनीकी समीक्षा करायी गयी जिसमें तकनीकी समिति द्वारा आरोप संख्या-1 को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। इस बिन्दु पर आयोग द्वारा अपना कोई मंतव्य अंकित नहीं किया गया है। उक्त कारणों के आलोक में आयोग के सलाह को बाध्यकारी नहीं मानते हुए श्री चन्द्रानन मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत्त को सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित किया जाता है-

(क) इनके पेंशन से 5 प्रतिशत राशि की कटौती स्थायी रूप से की जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।10 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

13 जुलाई 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-30/2015-6348(एस)—श्री रामकृष्ण प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना को पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत शिवहर-मीनापुर पथ एवं झपहा-मीनापुर पथ तथा पुल निर्माण कार्य में अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से नहीं करने के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्तों के तहत इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह विशेष सचिव का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है।

4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु अलग से आरोप पत्र निर्गत किया जा रहा है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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13 जुलाई 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-30/2015-6350(एस)—श्री चन्द्र भानु तिवारी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति परियोजना निदेशक, बिहार शहरी आधारभूत संरचना, विकास निगम लिमिटेड, पटना को पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत शिवहर-मीनापुर पथ एवं झपहा-मीनापुर पथ तथा पुल निर्माण कार्य में अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से नहीं करने के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्तों के तहत इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह विशेष सचिव का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है।

4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु अलग से आरोप पत्र निर्गत किया जा रहा है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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14 जुलाई 2015

सं॰ निग/सारा-1 (मुख्या0)-27/15-6408(एस)—श्री शशिनाथ दास, सहायक अभियंता (अनुश्रवण), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को व्यक्तिगत विवाद में मार-पीट हो जाने के फलस्वरूप दिनांक 31.05.15 को हिरासत में लिए जाने के कारण इन्हें विभागीय अधिसूचना-5674 (एस) दिनांक 24.06.2015 द्वार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (2) (क) के तहत दिनांक 31.05.15 के प्रभाव से निलंबित किया गया।

2. अधीक्षण अभियंता (अनुश्रवण) पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के पीत पत्र सं॰-3992 (ई) अनु॰ दिनांक 26.06.2015 से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार श्री दास न्यायालय से जमानत प्राप्त कर एवं दरभंगा कारागार से मुक्त होने के उपरान्त दिनांक 24.06.2015 को योगदान दिये। जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दरभंगा के आदेश दिनांक 20.06.2015 से स्पष्ट है कि श्री दास के विरूद्ध भा0द0वि0 की धारा-341, 342, 323, 324, 307, 504, 506, 354/34 के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज है, जिसके आधार पर इनके विरूद्ध आपराधिक कार्यवाही संचालित है। मामला विभागीय कार्यों अथवा पद के दुरूपयोग से संबंधित नहीं होने के कारण इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित नहीं है।

3. उपरोक्त के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (3) (i) मेें विहित प्रावधान के तहत श्री दास को योगदान की तिथि 24.06.2015 के पूर्वाह्‌न से निलंबन से मुक्त किया जाता है। 4. श्री दास के निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में निर्णय बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (6) के तहत आपराधिक कार्यवाही पूर्ण होने के उपरांत लिया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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16 जुलाई 2015

सं॰ निग/सारा-उ०बि०याँ०-81/13-6541(एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत तप्त मिश्रण संयंत्र स्थल, मोतिहारी स्थित मार्शल तप्त मिश्रण संयंत्र के संचालन में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद एवं माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0सं0-8982/2013 विजय चौधरी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिये गये निदेशों के उल्लंघन संबंधी बरती गयी अनियमितता के लिए श्री राजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6257 (एस) अनु0 दिनांक 02.08.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।11 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 2. श्री राजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में निर्णय लेने के क्रम में श्री अजय कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), यांत्रिक प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, आरा के विरूद्ध बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की अनुमति के बिना तप्त मिश्रण संयंत्र स्थल, मोतिहारी अवस्थित मार्शल तप्त मिश्रण संयंत्र को स्थापित एवं संचालित करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2412 (एस) दिनांक 17.03.15 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

3. श्री अजय कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) के पत्रांक-54 दिनांक 27.03.15 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि तप्त मिश्रण संयंत्र स्थल, मोतिहारी अवस्थित मार्शल तप्त मिश्रण संयंत्र के संचालन में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से अनापत्ति प्रमाण पत्र इनके द्वारा प्राप्त नहीं किया गया था।

4. अतएव श्री अजय कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), यांत्रिक प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, आरा कोे उक्त कृत्य के लिए सरकार के निर्णयानुसार निम्न लघु दंड संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष-2012-13) (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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16 जुलाई 2015

सं॰ निग/सारा-उ०बि०याँ०-81/13-6543(एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत तप्त मिश्रण संयंत्र स्थल, मोतिहारी स्थित मार्शल तप्त मिश्रण संयंत्र के संचालन में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद एवं माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0सं0-8982/2013 विजय चौधरी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिये गये निदेशों के उल्लंघन संबंधी बरती गयी अनियमितता के लिए श्री राजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6257 (एस) अनु0 दिनांक 02.08.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

2. श्री राजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में निर्णय लेने के क्रम में श्री ब्रजेश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), यांत्रिक प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की अनुमति के बिना तप्त मिश्रण संयंत्र स्थल, मोतिहारी अवस्थित मार्शल तप्त मिश्रण संयंत्र को संचालित करने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2411 (एस) दिनांक 17.03.15 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

3. श्री ब्रजेश कुमार, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक) के पत्रांक-शून्य दिनांक 30.03.15 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि तप्त मिश्रण संयंत्र स्थल, मोतिहारी अवस्थित मार्शल तप्त मिश्रण संयंत्र के संचालन में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से अनापत्ति प्रमाण पत्र इनके द्वारा प्राप्त नहीं किया गया था।

4. अतएव श्री ब्रजेश कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), यांत्रिक प्रमंडल, पथ निर्माण विभाग, मुजफ्फरपुर को उक्त कृत्य के लिए सरकार के निर्णयानुसार निम्न लघु दंड संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (आरोप वर्ष-2012-13) (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 जुलाई 2015

सं॰ निग/सारा-2 (ग्रा0)-34/97 (छाया संचिका)-6592(एस)—श्री ललन राम, तत्कालीन कनीय अभियंता, महेशखूँट प्रशाखा, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, खगड़िया सम्प्रति दिनांक 31.12.12 को सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध कनीय अभियंता, महेशखूँट प्रशाखा, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, खगड़िया के पदस्थापन काल में कार्य के प्रति उदासीनता, लापरवाही, शिथिलता, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, अनुशासनहीनता एवं लिये गये अग्रिम का समायोजन नहीं करने जैसे कुल 6 आरोपों के लिए आरोप प्रपत्र-'क' का गठन कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3803 (एस) अनु0 दिनांक 10.06.96 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री राम के दिनांक 31.12.12 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप संचालित विभागीय कार्यवाही को संकल्प ज्ञापांक-40 (एस) दिनांक 05.01.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-5284 दिनांक 12.10.01 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या-1 से 5 तक को अप्रमाणित तथा आरोप संख्या-6 के लिए चेतावनी की सजा की अनुशंसा की गयी। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत इससे असहमत होने के पश्चात असहमति के बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए एवं जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए श्री राम से विभागीय पत्रांक-415 (एस) अनु0 दिनांक 17.01.03 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की12 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 गयी तथा पत्रांक-6079 (एस) दिनांक 25.05.05, पत्रांक-652 (एस) दिनांक 21.01.06 एवं पत्रांक-5136 (एस) अनु0 दिनांक 21.05.09 द्वारा स्मारित किया गया। श्री राम के पत्रांक-शून्य दिनांक 25.05.09 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-9578 (एस) अनु0 दिनांक 02.09.09 द्वारा कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, खगड़िया से असमायोजित/समायोजित राशि के संबंध में स्पष्ट प्रतिवेदन की मांग की गयी तथा स्मारित भी किया गया। कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, खगड़िया के पत्रांक-129 (अनु0) दिनांक 07.02.15 द्वारा समर्पित अद्यतन प्रतिवेदन में श्री राम के विरूद्ध `824970.77 (आठ लाख चौबीस हजार नौ सौ सत्तर रूपये सतहत्तर पैसा) असमायोजित अग्रिम दिखाते हुए मूल अभिश्रव जमा नहीं करने की बात प्रतिवेदित की गयी। इसी मामले में श्री राम के विरूद्ध खगड़िया थाना कांड संख्या-335/12 भी दर्ज है।

3. प्रपत्र-'क' से स्पष्ट है कि विभिन्न योजनाओं में श्री राम को अग्रिम के रूप में राशि दी गयी थी, किन्तु प्राप्त किये गये सभी राशि का प्रमाणक इनके द्वारा समर्पित नहीं किया गया और `591316.71 असमायोजित रहा। कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, खगड़िया के पत्र से स्पष्ट है कि श्री राम के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में अंकित राशि `591316.71 के अलावा प्रकीर्ण लेखा में भारित राशि `233659.00 अग्रिम है। इस प्रकार श्री राम से कुल `591316.77+`233659.00=`824975.77 अर्थात `824976.00 (आठ लाख चौबीस हजार नौ सौ छिहत्तर रूपया) वसूलनीय है। श्री राम के पत्रांक-शून्य दिनांक 23.02.15 द्वारा समर्पित आवेदन पत्र में असमायोजित राशि को ग्रेच्चुयटी की राशि से समायोजित करने का आग्रह किया गया है।

4. अतएव श्री ललन राम, तत्कालीन कनीय अभियंता, महेशखूँट प्रशाखा, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, खगड़िया सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता, पिता-स्व० जगनाथ राम, ग्राम-चिलहौस, थाना-संदेश, जिला-भोजपुर, राज्य-बिहार के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए सरकार के निर्णयनुसार श्री राम से वसूलनीय कुल राशि ``824976.00 (आठ लाख चौबीस हजार नौ सौ छिहत्तर रूपया) की एकमुश्त वसूली इनके उपादान से करने का आदेश दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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3 अगस्त 2015

सं॰ निग/सारा-1 (पथ) वि॰नि॰ई॰-02/2015-7132(एस)—श्री शरदेन्दु भूषण, सहायक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, हिलसा, नालन्दा के विरूद्ध विशेष निगरानी ईकाई, बिहार, पटना के द्वारा आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक सम्पत्ति भ्रष्ट क्रियाकलापों के द्वारा अर्जित करने के लिए विशेष निगरानी ईकाई, थाना कांड सं0-01/2015 दिनांक 30.06. 2015 धारा 13 (2) सहपठित धारा 13 (1) (ई) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अन्तर्गत दर्ज किया गया। श्री भूषण का यह कृृत्य सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 (1) (i), (ii), (iii) के प्रतिकूल है, जिसके लिए श्री शरदेन्दु भूषण, सहायक अभियंता को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (ग) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्तों के तहत इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है।

4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु अलग से आरोप पत्र निर्गत किया जा रहा है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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7 अगस्त 2015

सं॰ निग/सारा-उ०बि०याँ०-81/13-7348(एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत तप्त मिश्रण संयंत्र स्थल, मोतिहारी स्थित मार्शल तप्त मिश्रण संयंत्र के संचालन में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद एवं माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0सं0-8982/2013 विजय चौधरी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिये गये निदेशों के उल्लंघन संबंधी बरती गयी अनियमितता के लिए श्री राजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता (यांत्रिक), राष्ट्रीय उच्च पथ यांत्रिक प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6257 (एस) अनु0 दिनांक 02.08.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी ने पत्रांक-2041 (अनु0) दिनांक 23.10.13 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया, जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपो को प्रमाणित नहीं पाया गया, किन्तु विभागीय समीक्षा में यह पाया गया कि जाँच प्रतिवेदन में माननीय न्यायालय द्वारा याचिका सं0-8982/13 विजय चौधरी एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 09.07.13 को पारित आदेश को ध्यान में रखे बिना तकनीकी बिन्दु पर विभागीय कार्यवाही को Conclude किया गया।13 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 3. तद्‌आलोक में असहमति के बिन्दुओं के संबंध में विभागीय पत्रांक-6599 (एस) अनु0 दिनांक 17.07.14 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारणपृृच्छा की गयी। श्री कुमार ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 04.08.2014 द्वारा अपना द्वितीय कारणपृच्छा उत्तर समर्पित किया जिसके समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि :-

(क) श्री राजीव कुमार, कार्यपालक अभियंता (यां0) को आरोप मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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19 अगस्त 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-100/10 (खंड)-7832(एस)—श्री सलमान अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति मुख्य अभियंता के सचिव (प्रावैधिक), केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के विरूद्ध पथ प्रमंडल, अररिया के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल अररिया अन्तर्गत जोकिहाट-पलासी-टेढ़ागाछी- फतेहपुर पथ के 40 वें कि0मी0 में निर्माणाधीन अवस्था में ही पुल के क्षतिग्रस्त होने की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से करायी गयी। कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से प्राप्त प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा-उक्त पुल के निर्माण हेतु बिना स्थल का निरीक्षण किये हीं प्राक्कलन का गठन करने के लिए श्री अहमद के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-242 (एस) अनु0 दिनांक 10.01.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-117 अनु0 दिनांक 07.10.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री अहमद के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित एक मात्र आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री अहमद से विभागीय पत्रांक-10715 (एस) अनु0 दिनांक 12.11.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री अहमद के पत्रांक-शून्य दिनांक 28.11.14 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में अंकित किया गया है कि मेरे द्वारा आलोच्य पुल के निर्माण हेतु प्राक्कलन गठित करने के पूर्व प्रस्तावित पुल स्थल का निरीक्षण कर अपेक्षित जलीय आकड़ों को संचित कर स्थलीय अन्वेषण के उपरांत तैयार किया गया था जिसकी समुचित छानबीन के उपरांत केन्द्रीय निरूपण संगठन द्वारा प्रावैधिक स्वीकृति प्रदान की गयी थी एवं तदोपरांत पुल निर्माण निगम द्वारा केन्द्रीय निरूपण संगठन द्वारा प्रदत्त तकनीकी अनुमोदन के आधार पर निविदा आमंत्रित कर पुल निर्माण कार्य संवेदक को आवंटित किया गया था। द्वितीय कारण पृच्छा की कंडिका-6 में श्री अहमद ने अंकित किया है कि इनके विरूद्ध लगाये गये एक मात्र आरोप की स्थल निरीक्षण किये वगैर प्राक्कलन तैयार किया गया है, निराधार है क्योंकि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 के जाँच प्रतिवेदन में मेरे विरूद्ध लगाये गये आरोप के संदर्भ में कोई विश्लेषण/ठोस साक्ष्य अथवा तकनीकी पहलू का उल्लेख नहीं है जिससे यह स्थापित होता है कि मेरे विरूद्ध लगाया गया एक मात्र आरोप पूर्णतः आधारहीन एवं साक्ष्यविहीन है। ऐसी स्थिति में प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों के लिए उन्हें दोषी ठहराया जाना न्यायसंगत नहीं है। उक्त के आलोक में श्री अहमद ने आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया है। श्री अहमद से प्राप्त कारण पृच्छा एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री अहमद के विरूद्ध प्रस्तावित दंड पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।

2. विभागीय पत्रांक-1551 (एस) दिनांक 19.02.15 द्वारा अनुमोदित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-534 दिनांक 20.05.15 से प्राप्त परामर्श में श्री अहमद के विरूद्ध गठित आरोपों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तावति दंड को अनुपातिक नहीं बताते हुए दिये गये दंड प्रस्ताव से असहमति व्यक्त की गयी।

3. बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति/परामर्श में प्रस्तावित दंड को आरोपों के परिपे्रक्ष्य में अनुपातिक नहीं मानने का कोई औचित्य अंकित नहीं किया है और न ही कोई कारण/आधार प्रस्तुत किया गया। फलतः बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति/परामर्श नियमानुसार मान्य नहीं है।

4. श्री अहमद से प्राप्त कारण पृच्छा एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा से यह स्पष्ट होता है कि यदि निर्धारित मानक एवं प्राक्कलन के विशिष्टयों के अनुसार पुल का निर्माण कार्य कराया गया होता तो निर्माणाधीन पुल क्षतिग्रस्त नहीं होता। निर्माणाधीन पुल का क्षतिग्रस्त होना स्वतः इस आरोप को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि पुल का निर्माण प्राक्कलन के विशिष्टियों के अनुरूप नहीं कराया गया।

5. तदआलोक में सम्यक्‌ विचारोपरांत श्री सलमान अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति मुख्य अभियंता के सचिव (प्रावैधिक), केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को अस्वीकार योग्य मानते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए सरकार के निर्णयानुसार निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(क) कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।14 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

19 अगस्त 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-100/10 (खंड)-7834(एस)—श्री निरंजन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, पदस्थापन की प्रतीक्षा में अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय के विरूद्ध पथ प्रमंडल, अररिया के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल अररिया अन्तर्गत जोकिहाट-पलासी-टेढ़ागाछी-फतेहपुर पथ के 40 वें कि0मी0 में निर्माणाधीन अवस्था में ही पुल के क्षतिग्रस्त होने की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से करायी गयी। कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से प्राप्त प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा-निर्माणाधीन पुल के bed floor का कार्य एवं cut of wall का कार्य प्राक्कलन के अनुरूप नहीं करने के लिए श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-243 (एस) अनु0 दिनांक 10.01.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-126 अनु0 दिनांक 06.11.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित एक मात्र आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-10716 (एस) अनु0 दिनांक 12.11.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री कुमार ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक-0212.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया जिसमें उन्होंने अंकित किया है कि उनके योगदान की तिथि 09.08.08 के पूर्व ही इस पुल का फाउन्डेशन, सब-स्ट्रक्चर तथा दो एवटमेन्ट एवं 6 पीयर का कार्य नीव से लेकर उपर पीयर कैप तक का कार्य मेरे पूर्व प्रतिस्थानी द्वारा पूर्ण कराया जा चुका था। मेरेे कार्यकाल में मात्र कट ऑफ वाल एवं बेड फ्लोर का निर्माण कार्य कराया गया था। कट ऑफ बॉल के नीव का तल वही रखा गया था जो पूर्व से निर्मित पीयर एवं एवटमेन्ट का नीव तल था। नीव तल के लेवल में किसी तरह की त्रुटि होने का प्रतिवेदन कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 ने अपने स्थल जाँच प्रतिवेदन में अंकित नहीं किया है ना ही ऐसा प्रतिवेदन अधीक्षण अभियंता, कार्य अंचल, पूर्णियाँ के निरीक्षण प्रतिवेदन में है। साथ हीं उन्होंने अंकित किया है कि निर्माणाधीन पुल के ध्वस्त होने का एक मात्र कारण अप्रत्याशित बाढ़ है। ऐसी परिस्थिति में मेरे बचाव वयान को अस्वीकार करने का कोई प्रश्न हीं नहीं उठता है न हीं संचालन पदाधिकारी ने इसे अस्वीकार किया है। जहाँ तक संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष में आंशिक रूप से आरोप को प्रमाणित अंकित किया गया है वह मात्र बेड फ्लोर में पी0सी0सी0 कार्य का 150 एम0एम0 (6 इंच) के जगह औसत 125 एम0एम0 पाये जाने के कारण अंकित किया गया है। ऐसी स्थिति में प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों के लिए उन्हें दोषी ठहराया जाना न्यायसंगत नहीं है। उक्त के आलोक में श्री कुमार ने आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया है। श्री कुमार से प्राप्त कारण पृच्छा एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध प्रस्तावित दंड पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।

2. विभागीय पत्रांक-1553 (एस) दिनांक 19.02.15 द्वारा अनुमोदित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-535 दिनांक 20.05.15 से प्राप्त परामर्श में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तावति दंड को अनुपातिक नहीं बताते हुए दिये गये दंड प्रस्ताव से असहमति व्यक्त की गयी।

3. बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति/परामर्श में प्रस्तावित दंड को आरोपों के परिपे्रक्ष्य में अनुपातिक नहीं मानने का कोई औचित्य अंकित नहीं किया है और न ही कोई कारण/आधार प्रस्तुत किया गया। फलतः बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति/परामर्श नियमानुसार मान्य नहीं है।

4. श्री कुमार से प्राप्त कारण पृच्छा एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा से यह स्पष्ट होता है कि यदि निर्धारित मानक एवं प्राक्कलन के विशिष्टयों के अनुसार पुल का निर्माण कार्य कराया गया होता तो निर्माणाधीन पुल क्षतिग्रस्त नहीं होता। निर्माणाधीन पुल का क्षतिग्रस्त होना स्वतः इस आरोप को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि पुल का निर्माण प्राक्कलन के विशिष्टियों के अनुरूप नहीं कराया गया।

5. तदआलोक में सम्यक्‌ विचारोपरांत श्री निरंजन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, पदस्थापन की प्रतीक्षा में अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को अस्वीकार योग्य मानते हुए प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए सरकार के निर्णयानुसार निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(क) कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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24 अगस्त 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ)-पु0भ0नि0-(नि0वि0)-03/15-8001(एस)—श्री जिवेन्द्र प्रसाद सिंह, कार्यपालक अभियंता, पुलिस भवन निर्माण निगम, मुजफ्फरपुर प्रमंडल को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के गठित धावा दल द्वारा दिनांक 16.07.18 को `50,000 (पच्चास हजार रूपये) रिश्वत लेेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने तथा इनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-56/15, दिनांक 16.07.15 धारा-7/13(2)-सहपठित धारा-13(1)(डी) भ्र0नि0अधि0, 1988 दर्ज किये जाने के फलस्वरूप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (2) (क) एवं नियम 9 (1) (ग) के तहत दिनांक 16.07.15 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है।15 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 2. निलंबन अवधि के दौरान श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्त्तों के तहत अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के कार्यालय से अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. न्यायिक हिरासत से रिहा होने के उपरांत श्री सिंह का मुख्यालय अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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3 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप (सी0ए0जी0)-43/12-8380(एस)—श्री कृष्ण माधव सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध पथ प्रमंडल, मोतिहारी के पदस्थापन काल में अलकतरा प्रकरण में सी0ए0जी0 से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7159 (एस) अनु0 दिनांक 25.06.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-177 अनु0 दिनांक 01.03.14 में श्री सिंह के विरूद्ध गठित सभी आरोपो को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। इसी बीच श्री सिंह के दिनांक 31.10.14 को सेवानिवृत हो जाने के कारण इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से असहमति व्यक्त करते हुए असहमति के बिन्दुओं के आधार पर विभागीय पत्रांक-2541 (एस) अनु0 दिनांक 20.03.15 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री सिंह द्वारा अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक 01.04.15 द्वारा समर्पित किया गया। 2. श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत यह स्पष्ट हुआ कि श्री सिंह के कृत्य से सरकार को कोई आर्थिक क्षति नहीं पहुँची है। साथ हीं संचालन पदाधिकारी द्वारा इनके विरूद्ध गठित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। 5. तद्‌आलोक में सम्यक्‌ समीक्षोपरांत सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि श्री कृष्ण माधव सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता को आरोप मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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7 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-4-(पथ)-आरोप-53/11-8518(एस)—श्री लालमोहन प्रजापति, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, रामनगर (बेतिया) सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, समस्तीपुर द्वारा पथ प्रमंडल, रामनगर के पदस्थापन काल में बेतिया-चनपटिया-नरकटियागंज पथ एवं नरकटियागंज-रामनगर पथ में कराए गए कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1013 (एस) अनु0 दिनांक 24.01.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-1905 अनु0 दिनांक 14.06.12 में श्री प्रजापति के विरूद्ध गठित चार आरोप में से आरोप संख्या-(क) (i) प्रमाणित एवं (क) (ii) तथा (ख) (i), (ii) को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त मंतव्य के आलोक में उक्त मामले में तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। तकनीकी समिति से प्राप्त मंतव्य में आरोप संख्या-(क) (i) प्रमाणित एवं (क) (ii), (ख) (i) आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप सं0 (ख) (ii) को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

2. तकनीकी समिति से प्राप्त मंतव्य के आलोक में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री प्रजापति से विभागीय पत्रांक-3627(S) we दिनांक 08.05.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री प्रजापति का पत्रांक-24 अनु0 दिनांक 08.01.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया।

3. श्री प्रजापति द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-4367 (एस) दिनांक 19.05.15 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) कालमान वेतन में तीन वर्षों के लिए न्यूनतम प्रक्रम पर अवनति। इस दौरान कोई वेतनवृद्धि देय नहीं होगी, परन्तु शास्ति की अवधि के अवसान के पश्चात भविष्य की वेतन वृद्धियाँ अनुमान्य होने लगेंगी। 4. उक्त दंडादेश को निरस्त करने हेतु श्री प्रजापति, कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक-551 अनु0 दिनांक 25.06.15 द्वारा पुनर्विचार आवेदन समर्पित किया। श्री प्रजापति ने अपने पुनर्विचार आवेदन में निम्न बिन्दुओं का उल्लेख किया है :-

(i) वर्त्तमान मामलें में एग्रीगेट के ग्रेडिंग में विचलन के लिए सबसे अधिक कठोर दंड उन्हें संसूचित किया गया है, जबकि संबंधित सहायक अभियंता जो कार्य स्थल पर कार्य कराने हेतु मुख्य रूप से जिम्मेवार हैं, उन्हें कार्यपालक अभियंता से कम दंड दिया गया है। तथा संवेदक को कोई भी आर्थिक दंड नहीं दिया गया है।16 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 (ii) कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार पथ की जाँच नहीं की गयी है। विभागीय निदेश के अनुसार 10 कि0मी0 लंबाई से अधिक लंबाई के पथों की जाँच में 25 प्रतिशत लंबाई होने, यानि कम से कम 3 कि0मी0 की जाँच किया जाना है परन्तु वर्त्तमान मामले में उड़नदस्ता द्वारा मात्र एक कि0मी0 की जाँच की गयी है।

5. कार्यपालक अभियंता द्वारा जाँच में पायी गयी अनियमितता की सम्पुष्टि विभागीय कार्यवाही के संचालन में की जा चुकी है। दो पथांशों क्रमशः बेतिया-चनपटिया-नरकटियागंज पथ एवं नरकटियागंज-रामनगर पथ से संबंधित सहायक अभियंता अलग-अलग थे, जबकि, इन दोनों पथों की संबद्धता श्री प्रजापति से रही है। इसलिए इन दोनों पथों में पाई गई अनियमितता के आधार पर संबंधित सहायक अभियंताओं को अलग-अलग दंड दिया गया है जबकि दोनों पथों से संबंधित होने के कारण कार्यपालक अभियंता को सहायक अभियंता के अनुरूप दंड दिया गया है। जहाँ तक संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई नहीं करने की बात है इस संबंध में संवेदक को कालीकृत करने का दंड दिया जा चुका है। इसलिए श्री प्रजापति के पुनर्विचार आवेदन का यह उद्धरण स्वीकार योग्य नहीं है। कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता द्वारा कार्य स्थल से संग्रहित किये गये नमूने एवं TRI से प्राप्त गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन के आधार पर हीं दंड संसूचित किया गया है, इसलिए श्री प्रजापति का यह कहना कि कार्यपालक अभियंता द्वारा विहित तरीके से योजना की जाँच नहीं की गयी स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव श्री प्रजापति को पूर्ण तथ्यों के समीक्षोपरांत हीं दंड संसूचित किया गया है इसमें परिवर्तन/संशोधन अपेक्षित नहीं है। इनके अभ्यावेदन में उठाई गई बातें पूर्ण तथ्यों पर आधारित नहीं है।

6. अतएव श्री प्रजापति के पुनर्विचार आवेदन पत्रांक-551 अनु0 दिनांक 25.06.15 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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16 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप (सी0ए0जी0)-21/12-8970(एस)—श्री विजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मधेपुरा के विरूद्ध पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में सी0ए0जी0 से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5545 (एस) अनु0 दिनांक 22.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-3675 अनु0 दिनांक 18.07.13 एवं पत्रांक-4373 अनु0 दिनांक 21.08.13 में श्री कुमारके विरूद्ध गठित 6 आरोपों में से आरोप संख्या-2, 3 एवं 4 को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-1, 5 एवं 6 को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक-7846 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री कुमार द्वारा अपना द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-1359 अनु0 दिनांक 19.10.13 द्वारा समर्पित किया गया।

2. श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की तकनीकी कोषांग से समीक्षा करायी गयी। तकनीकी समिति ने अपनी अनुशंसा में श्री कुमार के विरूद्ध लगाये गये आरोपों के संबंध में अंकित किया है कि महालेखाकार के डेविट ज्ञापों को लेखांकित नहीं किया जाना एवं राशि का असमायोजित रह जाना प्रक्रियागत त्रुटि है। इसी प्रकार आरोप संख्या-4 के संबंध में मंतव्य दिया गया है कि प्रपत्र-'क' में अंकित राशि का गवन एवं दुर्विनियोग नहीं हुआ है, यह मात्र प्रक्रियागत त्रुटि है। तकनीकी कोषांग से प्राप्त मंतव्य के विभागीय समीक्षोपरांत मामले में प्रक्रियागत त्रुटि के लिए श्री कुमार दोषी हैं। 3. तदआलोक में सरकार के निर्णयानुसार श्री विजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मधेपुरा को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(क) असंचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-9001(एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक में कराये गये कार्यों के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्रों, जिनमें मुख्य रूप से बिना समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित किये स्थानीय प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने मनपसंद संवेदक को काम देने का आरोप लगाया गया था, की जाँच अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-143 अनु0 दिनांक 21.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटि/कमियों के लिए श्री कृष्ण चन्द्र ठाकुर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-1 एवं 2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड, पटना से विभागीय पत्रांक-7854 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री ठाकुर के पत्रांक-1643 दिनांक 23.10.13 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय तकनीकी समिति से करायी गयी जिसमें आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। पुनः विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता या मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। खुली निविदा नहीं होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा17 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 इसके लिए निगरानी विभाग के परिपत्र 462 दिनांक 30.03.1982 को मुख्य आधार बनाया गया जिसमें राशि की अधिसीमा निर्धारित नहीं है।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री कृष्ण चन्द्र ठाकुर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-1 एवं 2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड, पटना को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरेाप वर्ष 2008-09 से 2010-11 तक के लिए निन्दन की सजा दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-9003 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक में कराये गये कार्यों के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्रों, जिनमें मुख्य रूप से बिना समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित किये स्थानीय प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने मनपसंद संवेदक को काम देने का आरोप लगाया गया था, की जाँच अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-143 अनु0 दिनांक 21.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटि/कमियों के लिए श्री सोहेल अख्तर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, उच्च पथ योजना एवं अन्वेषण अंचल, पटना से विभागीय पत्रांक-7849 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री अख्तर द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु कतिपय संबंधित कागजातों की मांग की गयी, जिसके आलोक में विभागीय पत्रांक-6513 (एस) अनु0 दिनांक 15.07.14 द्वारा श्री अख्तर को वांछित कागजात उपलब्ध कराया गया।

2. श्री अख्तर के पत्रांक-01 (अनु0) दिनांक 17.09.14 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय तकनीकी समिति से करायी गयी जिसमें आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। पुनः विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता या मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। खुली निविदा नहीं होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इसके लिए निगरानी विभाग के परिपत्र 462 दिनांक 30.03.1982 को मुख्य आधार बनाया गया जिसमें राशि की अधिसीमा निर्धारित नहीं है।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री सोहेल अख्तर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, उच्च पथ योजना एवं अन्वेषण अंचल, पटना को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरेाप वर्ष 2008-09 के लिए निन्दन की सजा दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-9005 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक में कराये गये कार्यों के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्रों, जिनमें मुख्य रूप से बिना समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित किये स्थानीय प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने मनपसंद संवेदक को काम देने का आरोप लगाया गया था, की जाँच अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-143 अनु0 दिनांक 21.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटि/कमियों के लिए श्री रमा कान्त प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना से विभागीय पत्रांक-7848 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री प्रसाद द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु कतिपय संबंधित कागजातों की मांग की गयी, जिसके आलोक में विभागीय पत्रांक-4282 (एस) अनु0 दिनांक 29.05.14 द्वारा श्री प्रसाद को वांछित कागजात उपलब्ध कराया गया।

2. श्री प्रसाद के पत्रांक-112/सी (अनु0) दिनांक 06.06.14 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय तकनीकी समिति से करायी गयी जिसमें आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। पुनः विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता या मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। खुली निविदा नहीं होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इसके लिए निगरानी विभाग के परिपत्र 462 दिनांक 30.03.1982 को मुख्य आधार बनाया गया जिसमें राशि की अधिसीमा निर्धारित नहीं है।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री रमा कान्त प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरेाप वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक के लिए निन्दन की सजा दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।18 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

17 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-9007(एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक में कराये गये कार्यों के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्रों, जिनमें मुख्य रूप से बिना समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित किये स्थानीय प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने मनपसंद संवेदक को काम देने का आरोप लगाया गया था, की जाँच अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-143 अनु0 दिनांक 21.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटि/कमियों के लिए श्री विवेकानन्द यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, कैमूर (भभुआ) से विभागीय पत्रांक-7852 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13, स्मार पत्रांक-4024 (एस) दिनांक 22.05.14 तथा स्मार पत्रांक-6182 (एस) दिनांक 09.07.14 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री यादव के पत्रांक-1001 दिनांक 05.08.14 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय तकनीकी समिति से करायी गयी जिसमें आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। पुनः विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता या मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। खुली निविदा नहीं होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इसके लिए निगरानी विभाग के परिपत्र 462 दिनांक 30.03.1982 को मुख्य आधार बनाया गया जिसमें राशि की अधिसीमा निर्धारित नहीं है।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री विवेकानन्द यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, कैमूर (भभुआ) को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरेाप वर्ष 2009-10 के लिए निन्दन की सजा दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-9009(एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक में कराये गये कार्यों के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्रों, जिनमें मुख्य रूप से बिना समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित किये स्थानीय प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने मनपसंद संवेदक को काम देने का आरोप लगाया गया था, की जाँच अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-143 अनु0 दिनांक 21.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटि/कमियों के लिए श्री विजय कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मधेपुरा से विभागीय पत्रांक-7847 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। पुनः विभागीय पत्रांक-11274 (एस) दिनांक 25.11.14 द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-02, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल से संबंधित अनियमितता के लिए स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री कुमार के पत्रांक-1720 दिनांक 11.12.14 द्वारा कतिपय संबंधित कागजातों की मांग की गयी। पूरे मामले के समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता या मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। खुली निविदा नहीं होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायी।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री विजय कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मधेपुरा को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरेाप वर्ष 2009-10 एवं 2010-11 के लिए निन्दन की सजा दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-9011(एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक में कराये गये कार्यों के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्रों, जिनमें मुख्य रूप से बिना समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित किये स्थानीय प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने मनपसंद संवेदक को काम देने का आरोप लगाया गया था, की जाँच अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-143 अनु0 दिनांक 21.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटि/कमियों के लिए श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, बक्सर से विभागीय पत्रांक-7850 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री सिन्हा द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने हेतु कतिपय संबंधित कागजातों की मांग की गयी, जिसके आलोक में विभागीय पत्रांक-6514 (एस) अनु0 दिनांक 15.07.14 द्वारा श्री सिन्हा को वांछित कागजात उपलब्ध कराया गया।19 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 2. श्री सिन्हा के पत्रांक-3 (कैम्प) पटना दिनांक 16.08.14 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय तकनीकी समिति से करायी गयी जिसमें आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। पुनः विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता या मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। खुली निविदा नहीं होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इसके लिए निगरानी विभाग के परिपत्र 462 दिनांक 30.03.1982 को मुख्य आधार बनाया गया जिसमें राशि की अधिसीमा निर्धारित नहीं है।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, बक्सर को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरेाप वर्ष 2010-11 के लिए निन्दन की सजा दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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17 सितम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-02 (परिवाद)-13/2010-9013 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर अन्तर्गत विभिन्न प्रमंडलों द्वारा वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक में कराये गये कार्यों के संबंध में प्राप्त परिवाद पत्रों, जिनमें मुख्य रूप से बिना समाचार पत्र में निविदा प्रकाशित किये स्थानीय प्रचार-प्रसार के माध्यम से अपने मनपसंद संवेदक को काम देने का आरोप लगाया गया था, की जाँच अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना से करायी गयी। अधीक्षण अभियंता, अग्रिम योजना अंचल, पथ निर्माण विभाग, पटना के पत्रांक-143 अनु0 दिनांक 21.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटि/कमियों के लिए श्री राजकुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति प्रभारी अधीक्षण अभियंता, पथ निर्माण विभाग, मगध पथ अंचल, गया से विभागीय पत्रांक-7844 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13, स्मार पत्रांक-4019 (एस) दिनांक 22.05.14 तथा स्मार पत्रांक-6181 (एस) दिनांक 09.07.14 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री राजकुमार के पत्रांक-02 (कैम्प, पटना) दिनांक 08.11.14 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय तकनीकी समिति से करायी गयी जिसमें आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। पुनः विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता या मात्रा में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है। खुली निविदा नहीं होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो पायी। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इसके लिए निगरानी विभाग के परिपत्र 462 दिनांक 30.03.1982 को मुख्य आधार बनाया गया जिसमें राशि की अधिसीमा निर्धारित नहीं है।

3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री राजकुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति प्रभारी अधीक्षण अभियंता, पथ निर्माण विभाग, मगध पथ अंचल, गया को प्रक्रियात्मक त्रुटि के लिए आरेाप वर्ष 2009-10 एवं 2010-11 के लिए निन्दन की सजा दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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29 दिसम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-100/10 (खंड)-11246(एस)—श्री सलमान अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध पथ प्रमंडल, अररिया के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल अररिया अन्तर्गत जोकिहाट-पलासी-टेढ़ागाछी- फतेहपुर पथ के 40 वें कि0मी0 में निर्माणाधीन अवस्था में ही पुल के क्षतिग्रस्त होने की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से करायी गयी। कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से प्राप्त प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा-उक्त पुल के निर्माण हेतु बिना स्थल का निरीक्षण किये हीं प्राक्कलन का गठन करने के लिए श्री अहमद के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-242 (एस) अनु0 दिनांक 10.01.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-117 अनु0 दिनांक 07.10.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री अहमद के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित एक मात्र आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री अहमद से विभागीय पत्रांक-10715 (एस) अनु0 दिनांक 12.11.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री अहमद के पत्रांक-शून्य दिनांक 28.11.14 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में अंकित किया गया है कि मेरे द्वारा आलोच्य पुल के निर्माण हेतु प्राक्कलन गठित करने के पूर्व प्रस्तावित पुल स्थल का निरीक्षण कर अपेक्षित जलीय आकड़ों को संचित कर स्थलीय अन्वेषण के उपरांत तैयार किया गया था जिसकी समुचित छानबीन के उपरांत केन्द्रीय निरूपण संगठन द्वारा प्रावैधिक स्वीकृति प्रदान की गयी थी एवं तदोपरांत पुल निर्माण निगम द्वारा केन्द्रीय निरूपण संगठन द्वारा प्रदत्त तकनीकी अनुमोदन के आधार पर निविदा आमंत्रित कर पुल निर्माण कार्य संवेदक को आवंटित किया गया था। द्वितीय कारण पृच्छा की कंडिका-6 में श्री अहमद ने अंकित किया है कि इनके विरूद्ध लगाये गये एक मात्र आरोप की स्थल निरीक्षण किये वगैर प्राक्कलन तैयार किया गया है, निराधार है क्योंकि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 के जाँच प्रतिवेदन में मेरे विरूद्ध लगाये गये आरोप के संदर्भ में कोई विश्लेषण/ठोस साक्ष्य अथवा तकनीकी पहलू का उल्लेख नहीं है जिससे यह स्थापित होता है कि मेरे विरूद्ध लगाया गया एक मात्र आरोप पूर्णतः आधारहीन एवं साक्ष्यविहीन है। ऐसी स्थिति में प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों के लिए उन्हें दोषी ठहराया जाना न्यायसंगत नहीं है। उक्त के आलोक में श्री अहमद ने आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया है।20 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017 2. श्री अहमद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरांत अधिसूचना संख्या-7832 (एस) दिनांक 19.08.18 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(क) कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति।

3. उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध श्री अहमद, कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 28.08.15 द्वारा पुनर्विचार आवेदन समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव वयान में कही गयी बातों को ही पुनः दोहराया गया है और कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जो पूर्व में विचारित नहीं हुआ हो। 4. अतएव श्री सलमान अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के पुनर्विचार आवेदन पत्रांक-शून्य दिनांक-28.08.15 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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29 दिसम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-100/10 (खंड)-11248 (एस)—श्री निरंजन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, पदस्थापन की प्रतीक्षा में अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय के विरूद्ध पथ प्रमंडल, अररिया के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल अररिया अन्तर्गत जोकिहाट-पलासी-टेढ़ागाछी-फतेहपुर पथ के 40 वें कि0मी0 में निर्माणाधीन अवस्था में ही पुल के क्षतिग्रस्त होने की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से करायी गयी। कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 से प्राप्त प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन में पायी गयी त्रुटियों यथा-निर्माणाधीन पुल के bed floor का कार्य एवं cut of wall का कार्य प्राक्कलन के अनुरूप नहीं करने के लिए श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-243 (एस) अनु0 दिनांक 10.01.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-126 अनु0 दिनांक 06.11.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र-'क' में गठित एक मात्र आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री कुमार से विभागीय पत्रांक-10716 (एस) अनु0 दिनांक 12.11.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री कुमार ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 0212.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया जिसमें उन्होंने अंकित किया है कि उनके योगदान की तिथि 09.08.08 के पूर्व ही इस पुल का फाउन्डेशन, सब-स्ट्रक्चर तथा दो एवटमेन्ट एवं 6 पीयर का कार्य नीव से लेकर उपर पीयर कैप तक का कार्य मेरे पूर्व प्रतिस्थानी द्वारा पूर्ण कराया जा चुका था। मेरेे कार्यकाल में मात्र कट ऑफ वाल एवं बेड फ्लोर का निर्माण कार्य कराया गया था। कट ऑफ बॉल के नीव का तल वही रखा गया था जो पूर्व से निर्मित पीयर एवं एवटमेन्ट का नीव तल था। नीव तल के लेवल में किसी तरह की त्रुटि होने का प्रतिवेदन कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 ने अपने स्थल जाँच प्रतिवेदन में अंकित नहीं किया है ना ही ऐसा प्रतिवेदन अधीक्षण अभियंता, कार्य अंचल, पूर्णियाँ के निरीक्षण प्रतिवेदन में है। साथ हीं उन्होंने अंकित किया है कि निर्माणाधीन पुल के ध्वस्त होने का एक मात्र कारण अप्रत्याशित बाढ़ है। ऐसी परिस्थिति में मेरे बचाव वयान को अस्वीकार करने का कोई प्रश्न हीं नहीं उठता है न हीं संचालन पदाधिकारी ने इसे अस्वीकार किया है। जहाँ तक संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष में आंशिक रूप से आरोप को प्रमाणित अंकित किया गया है वह मात्र बेड फ्लोर में पी0सी0सी0 कार्य का 150 एम0एम0 (6 इंच) के जगह औसत 125 एम0एम0 पाये जाने के कारण अंकित किया गया है। ऐसी स्थिति में प्रपत्र-'क' में गठित आरोपों के लिए उन्हें दोषी ठहराया जाना न्यायसंगत नहीं है। उक्त के आलोक में श्री कुमार ने आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया है।

2. श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के विभागीय समीक्षोपरांत अधिसूचना संख्या-7834 (एस) दिनांक 19.08.18 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(क) कालमान वेतन में निम्नतर प्रक्रम पर स्थायी रूप से अवनति।

3. उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध श्री कुमार, कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-1, कैम्प/पटना, दिनांक 21.08.15 द्वारा पुनर्विचार आवेदन समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव वयान में कही गयी बातों को ही पुनः दोहराया गया है और कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जो पूर्व में विचारित नहीं हुआ हो।

4. अतएव श्री निरंजन कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, अररिया सम्प्रति सेवानिवृत के पुनर्विचार आवेदन पत्रांक-1, कैम्प/पटना, दिनांक 21.08.15 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।21 Nबहार गजट, 22 फरवर(cid:15) 2017

30 दिसम्बर 2015

सं॰ निग/सारा-4 (पथ) आरोप-53/11-11275 (एस)— श्री इम्तियाज अहमद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, रामनगर (बेतिया) सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, शेखपुरा द्वारा पथ प्रमंडल, रामनगर के पदस्थापन काल में नरकटियागंज-रामनगर पथ में कराए गए कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2723 (एस) अनु0 दिनांक 05.04.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-2250 अनु0 दिनांक 26.11.13 में श्री अहमदके विरूद्ध गठित दोनों आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त मंतव्य के आलोक में उक्त मामले में तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। तकनीकी समिति से प्राप्त मंतव्य में आरोप संख्या-(i) प्रमाणित एवं (ii) को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। 2. तकनीकी समिति से प्राप्त मंतव्य के आलोक में प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री अहमद से विभागीय पत्रांक-1041(S) we दिनांक 07.02.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री अहमद का पत्रांक-402 अनु0 दिनांक 18.05.14 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया।

3. श्री अहमद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-4365 (एस) दिनांक 19.05.15 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-

(i) कालमान वेतन में तीन वर्षों के लिए न्यूनतम प्रक्रम पर अवनति। इस दौरान कोई वेतनवृद्धि देय नहीं होगी, परन्तु शास्ति की अवधि के अवसान के पश्चात भविष्य की वेतन वृद्धियाँ अनुमान्य होने लगेंगी। (ii) निन्दन (आरोप वर्ष-2008-09)।

4. उक्त दंडादेश को निरस्त करने हेतु श्री अहमद, कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्रांक-657 अनु0 दिनांक 02.07.15 द्वारा पुनर्विचार आवेदन समर्पित किया। श्री अहमद के द्वारा समर्पित पुनर्विचार आवेदन के क्रमांक-3, 5, 6, 7 एवं 8 पर जिन मुद्‌दों के प्रति ध्यान आकृष्ट किया गया है वह मुख्यतः विभागीय कार्यवाही सम्पन्न करने के प्रक्रियाओं एवं विभागीय निदेश के आलोक में जाँच करने के संबंध में है। इस संबंध में उल्लेख करना है कि उड़नदस्ता द्वारा कार्य स्थल से संग्रहित किये गये नमूने एवं टी0टी0आर0आई0 से प्राप्त गुणवता जाँच प्रतिवेदन तथा तकनीकी समिति द्वारा दिये गये मंतव्य जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वर्णित पथ के कि0मी0 03 में कराये गये डब्लू0बी0एम0 ग्रेड-II कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट औसतन 9.41 प्रतिशत ओभर साईज तथा औसतन 15.75 अन्डर साईज पाया गया है, जो अनुमान्य सीमा से 7.5 प्रतिशत अधिक है, के आलोक में पूर्ण तथ्यों के समीक्षोपरांत ही श्री अहमद को दंड संसूचित किया गया है। श्री अहमद के पुनर्विचार आवेदन में कोई नई बात नहीं है, पूर्णर्विचार आवेदन में उन्हीं बातों को पुनः अंकित किया गया है जो उनके द्वारा दिये गये बचाव वयान और द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में अंकित है। अतएव इस संबंध में किसी भी प्रकार के संशोधन/परिवर्तन की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है।

5. अतएव श्री अहमद के पुनर्विचार आवेदन पत्रांक-657 अनु0 दिनांक 02.07.15 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 22 February 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-02-22.8/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-02-22.8.