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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 23 February 2017

Published 23 February 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-02-23.143
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:18)या पी0ट#0-40 िनबंधन सं(cid:18)या

(cid:1)बहार गजट

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ूकािशत ((((संसंसंसं0 पटनापटनापटनापटना 143) ) ) ) पटनापटनापटनापटना

4 फा(cid:28)गुफा(cid:28)गुफा(cid:28)गुफा(cid:28)गुनननन 1938 (शशशश0) पटनापटनापटनापटना, वृहःपवृहःपवृहःपवृहःपितितितितवारवारवारवार, 22223333 फरफरफरफरवर#वर#वर#वर# 2017 सं0 2/आ0-7016/2009 गृ0आ0—7956 गृह विभागगृह विभागगृह विभागगृह विभाग (आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा) ---------------------------- संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 3 अक्तूबर 20163 अक्तूबर 20163 अक्तूबर 20163 अक्तूबर 2016

ा दिया गया। श्री आलोक द्वारा दिनांक 05.03.2010 को समर्पित किये गए बचाव अभिकथ श्री आलोक, तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर बेतिया सम्प्रति अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, श्री आलोक, तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर बेतिया सम्प्रति अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, श्री आलोक, तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर बेतिया सम्प्रति अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, साम्प्रदायिक विवाद को उलझाने, प्रशासन पर अरेराज (मोतिहारी) को उनके द्वारा ग्राम-कारनेमया, थाना मुफ्फसिल में साम्प्रदायिक विवाद को उलझाने, प्रश् अरेराज (मोतिहारी) को उनके द्वारा ग्राम-कारनेमया, थाना मुफ्फसिल में े, वरीय पदाधिकारियों के तों को लाभ पहुँचाने के उद्‌देश्य से कांडों को लीपापोती करने, वरीय पदाधिकारियों के आरोप लगाने, कांडों के अभियुक्तों को लाभ पहुँचाने के उद्‌देश् रने के आरोप में विभागीय आदेश कार्य में निष्क्रियता बरतने एवं अनुशासनहीन आचरण करने के आरोप में विभागीय आदेश् आदेश का उल्लंघन करने, कार्य में निष्क्रियता बरतने एवं अनुश् 09 द्वारा निलंबित किया गया था। निलंबित किये जाने के पश्चात्‌ गृह विभाग (आरक्षी शाखा), कया गया था। निलंबित किये जाने के पश्चात्‌ गृह विभाग (आरक्षी शाखा), सं0-4496 दिनांक 20.07.09 द्वारा निलंबित ि 2010 द्वारा श्री आलोक के विरूद्ध गठित आरोप पर बचाव अभिकथन प्रस्तुत पटना के ज्ञापन सं0-204 दिनांक 07.01.2010 द्वारा श्री आलोक के विरूद्ध गठित आरोप पर बच पटना के ज्ञापन सं0-204 दिनांक 07 2010 को समर्पित किये गए बचाव अभिकथन में उनके करने का निदेश दिया गया। श्री आलोक द्वारा दिनांक 05 द्वारा आरोपों को अस्वीकार किया गया। फलतः समीक्षोपरांत सरकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं द्वारा आरोपों को अस्वीकार किया गया। फलतः समीक्षोपरांत सरकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं द्वारा आरोपों को अस्वीकार किया गया। फलतः समीक्षोपरांत सरकार द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) के अन्तर्गत उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7494 दिनांक 19.09. अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) के अन्तर्गत उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7494 दिनांक 19 अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) के अन्तर्गत उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7494 दिनांक 19 2012 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ किया गया। 2012 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ किया

श्री आलोक के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ थे :- श्री आलोक के विरूद्ध गठित आरोप निम्नवत्‌ थे :- (क) इनके द्वारा ग्राम करनेमया थाना-

ाील सांप्रदायिक विवाद के संबंध में समर्पित इनके द्वारा ग्राम करनेमया थाना-मुफ्फसिल में उत्पन्न संवेदनशील सांप्रदायिक विवाद के संबंध में समर्पित प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि "यह स्पष्ट है कि करनेमया ग्राम में विधमान सांप्रदायिक विद्वेष प्रशासनिक प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि "यह स्पष्ट है कि करनेमया ग्राम में विधमान सांप्रदायिक विद्वेष् प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि "यह स्पष्ट है कि करनेमया ग्राम में विधमान सांप्रदायिक विद्वेष् री नहीं हूँ।" इस तरह ष्क्रियता का प्रतिफल है तथा उक्त निष्क्रियता का संज्ञान लेकर कार्रवाई हेतु मैं सक्षम पदाधिकारी नहीं हूँ।" इस तरह निष्क्रियता का प्रतिफल है तथा उक्त निष्क्रियता का संज्ञान लेकर कार्रवाई हेतु मैं सक्षम पदाधिका ाासन के ऊपर आरोप लगाया गया, जिससे ाासन द्वारा दर्ज किए गए प्राथमिकी को गलत ठहराते हुए इनके द्वारा प्रशासन के ऊपर आरोप लगाया गया, जिससे प्रशासन द्वारा दर्ज किए गए प्राथमिकी अंग नहीं मानते है और ग्राम में उत्पन्न सांप्रदायिक विवाद को होता है कि ये अपने आप को प्रशासन का अंग नहीं मानते है और ग्राम में उत्पन्न सांप्रदायिक विवाद को यह प्रमाणित होता है कि ये अपने आप को प्रश् सुलझाने के बजाय उलझाने का प्रयास किया गया, जिसके कारण पुनः मामले की संवेदनशीलता बढ़ गई। सुलझाने के बजाय उलझाने का प्रयास किया गया, ि

ाीलता बढ़ गई।09 को आलिन्द राय द्वारा संजय शाही को मोबाइल पर जान से मारने की धमकी दी गई, (ख) दिनांक 30.04.09 को आलिन्द राय द्वारा संजय शाही को मोबाइल पर जान से मारने की धमकी दी गई, 09 को आलिन्द राय द्वारा संजय शाही को मोबाइल पर जान से मारने की धमकी दी गई, ोक में शाही ने अपनी सुरक्षा हेतु दिनांक 01.05.09 को एक आवेदन पत्र समर्पित किया, परन्तु इन्होंने इनके 09 को एक आवेदन पत्र समर्पित किया, परन्तु इन्होंने इनके जिसके आलोक में शाही ने अपनी सुरक्षा हेतु दिनांक 01 आवेदन पत्र को 18 दिनों के पश्चात्‌ विलंब से अपने कार्यालय ज्ञापांक-685/09 दिनांक 12.05.09 द्वारा जांच हेतु नगर 09 द्वारा जांच हेतु नगर आवेदन पत्र को 18 दिनों के पश्चात्‌ विलंब से अपने कार्यालय ज्ञापांक-685/09 दिनांक 12 थाना बेतिया को भेजा जो दिनांक 19.05.09 को नगर थाना में प्राप्त हुआ। इस तरह इन्होंने आवेदक के आवेदन-पत्र थाना में प्राप्त हुआ। इस तरह इन्होंने आवेदक के आवेदन-पत्र थाना बेतिया को भेजा जो दिनांक 19 अपराधकर्मी है और श्री राय की को दबाकर रख लिया। जबकि इन्हें पता था कि श्री आलिन्द राय एक सफेदपोश अपराधकर्मी है और श्री राय की को दबाकर रख लिया। जबकि इन्हें पता 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 23 फरवर# 2017 घटना में संलिप्तता है, फिर भी इनके द्वारा मामले को लीपापोती करने का प्रयास किया गया। इनके इस कृत्य के कारण जितेन्द्र शाही एवं संजय शाही की हत्या की घटना घटित हुई। (ग) इन्होंने योगापट्‌टी थाना कांड सं0-263/07 में आरोपित चन्द्रभूषण सिंह उर्फ मोहन सिंह को पक्षपात पूर्ण तरीके से फायदा पहुँचाने की नियत से अंतिम प्रतिवेदन असत्य समर्पित करने की अनुशंसा की, परन्तु तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, बेतिया द्वारा उक्त कांड की जांच की गई थी और उन्होंने अपने प्रतिवेदन-2 में कांड के प्राथमिकी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध सत्य पाया था। इस तरह इन्होंने वरीय पदाधिकारी द्वारा किये गये जाँच एवं निर्णय के विपरीत पुलिस अधीक्षक से ऊपर होने का संकेत दिया और कांड को असत्य करने का प्रयास किया। इस संबंध में जब इनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी तो इन्होंने स्पष्टीकरण नहीं दिया।

(घ) पुलिस महानिरीक्षक, मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र, मुजफ्फरपुर द्वारा नौतन थाना कांड सं0-50/09 के अभियुक्तों के सात दिनों के अन्दर गिरफ्तारी करने का निदेश इन्हें दिया गया था, परन्तु इन्होंने अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं की। इस तरह इन्होंने अपने वरीय पदाधिकारियों के आदेश का उल्लंघन किया।

(ड़) आरोपित पदाधिकारी के पास 97 विशेष प्रतिवेदित कांड लंबित पाये गए। बार-बार निदेषित करने के पश्चात्‌ इनके द्वारा कांडों में पर्यवेक्षण टिप्पणी समर्पित नहीं किया गया, जिसके फलस्वरूप अभियुक्तों की फायदा पहुँचता रहा और वादी पक्ष भय एवं दहषत में जीवन व्यतीत करते रहे। इस तरह इनकी निष्क्रियता एवं गलत नियत को उजागर करता है।

(च) इन्होंने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बेतिया के पद पर योगदान देने के पश्चात्‌ एक भी साप्ताहिक गोपनीय दैनन्दिनी समर्पित नहीं किया। इसके लिए पुलिस अधीक्षक, बेतिया द्वारा अपने अर्द्व-सरकारी पत्र सं0-1394/गो0, दिनांक 04.04.2009 के माध्यम से कारण पृच्छा मांगी गई एवं अर्द्व-सरकारी पत्र सं0-2614 दिनांक 19.06.09 द्वारा इन्हें स्मारित भी किया गया, लेकिन इन्होंने कारण पृच्छा समर्पित नहीं की, जो कार्य के प्रति लारपवाही एवं उदासीनता का परिचायक है और अभियुक्तों को बचाने का हर संभव प्रयास उजागर करती है।

(छ) मेडिकल कॉलेज चाहारदीवारी के निर्माण के संबंध में इन्हें अतिक्रमण से मुक्त करवाने तथा खेसरा नं0-5227 एवं 5228 जो बिहार सरकार की जमीन है, पर चाहारदीवारी निर्माण के संबंध में निदेशित किए जाने के बावजूद इन्होंने कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की, जिसके फलस्वरूप हिन्दु मुस्लिम साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न हुई तथा विधि-व्यवस्था की स्थिति भी सामान्य नहीं रह सकी।

गठित उपर्युक्त आरोपों के विरूद्ध संचालित किये गए विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा सभी आरोप प्रमाणित नहीं होने का प्रतिवेदन दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित किये गए जाँच प्रतिवेदन एवं श्री आलोक पर गठित सभी आरोपों के विरूद्ध आरोप प्रमाणित नहीं होने संबंधी दिये गए निष्कर्ष के आलोक में समस्त समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन को स्वीकार करते हुए श्री आलोक के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के अनुसार समाप्त किया जाता है। ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाश्किे अगले असाधारण अंक में प्रकाश्किे अगले असाधारण अंक में प्रकाश्किे अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया ात किया ात किया ात किया आदेश :-आदेश्आदेश :-आदेश्आदेश :-आदेश्आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय। जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय। जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय। जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

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———— अधी*क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:1)बहार, iटना (cid:23)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 143-571+10-ड#0ट#0प ी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 23 February 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-02-23.143/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-02-23.143.