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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 24 March 2017

Published 24 March 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-03-24.234
Languages
English, Hindi

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सं॰सं॰-एम-4-53/2007-2199/वि॰ वित्त विभागवित्त विभागवित्त विभागवित्त विभाग ——— संकल्प 24 मार्च 2017 विषय :-स्कीमों की स्वीकृति हेतु शक्त्तियों का प्रत्यायोजन । विषय :-स्कीमों की स्वीकृति हेतु शक्त्तियों का प्रत्यायोजन ।

2007 द्वारा वित्तीय मामलों में प्रत्यायोजित मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की अधिसूचना सं॰-602, दिनांक 20.03.2007 द्वारा वित्तीय मामलों में प्रत्यायोजित

2008, 2190/वि(2) दिनांक 17.03.

2016 द्वारा योजना एवं गैर योजना मद में स्कीमों की स्वीकृति हेतु शक्त्तियों का .2016 द्वारा योजना एवं गैर योजना मद में स्कीमों की स्वीकृति हेतु शक्त्तियों का

2016 में किये गये प्रावधान को विलोपित करते 2008 एवं 2063/वि॰ दिनांक 11.03.2016 में किये गये प्रावधान को विलोपित करते मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की अधिसूचना सं॰-602, दिनांक 20 वित्तीय शक्त्तियों के आलोक में वित्त विभागीय संकल्प 96/वि॰(2) दिनांक 03.01.2008, 2190/वि(2) दिनांक 17 वित्तीय शक्त्तियों के आलोक में वित्त विभागीय संकल्प 96/वि॰(2) दिनांक 2008 एवं 2063/वि॰ दिनांक 11.03. प्रत्यायोजन किया गया है । 2. दिनांक 01.04.2017 से योजना एवं गैर योजना स्कीमों का विलय किया जा रहा है, जिसके का 2017 से योजना एवं गैर योजना स्कीमों का विलय किया जा रहा है, जिसके कारण उपर्युक्त 2017 से योजना एवं गैर योजना स्कीमों का विलय किया जा रहा है, जिसके का वर्णित वित्त विभागीय संकल्प पर विचार करना आवश्यक हो गया है । अतएव सम्यक विचारोपरांत योजनाआें की वर्णित वित्त विभागीय संकल्प पर विचार करना आवश्यक हो गया है । अतएव सम्यक विचारोपरांत योजनाआें की वर्णित वित्त विभागीय संकल्प पर विचार करना आवश्यक हो गया है । अतएव सम्यक विचारोपरांत योजनाआें की स्वीकृति की प्रक्रिया एवं शक्त्तियों के प्रत्यायोजन के सम्बन्ध में निर्गत वित्त विभागीय संकल्प 96/वि(2) दिनांक 03.01. स्वीकृति की प्रक्रिया एवं शक्त्तियों के प्रत्यायोजन के सम्बन्ध में निर्गत वित्त विभागीय संकल्प 96/वि(2) दिनांक 03 स्वीकृति की प्रक्रिया एवं शक्त्तियों के प्रत्यायोजन के सम्बन्ध में निर्गत वित्त विभागीय संकल्प 96/वि(2) दिनांक 03 2008, 2190/वि(2) दिनांक 17.03.2008 एव हुए निम्नांकित व्यवस्था लागू होगीः- 3. समीक्षा समितियाँ

(क) विभागीय स्थायी वित्त समिति।-

समीक्षा समितियाँ ((((Appraisal Committees)ः-)ः-)ः-)ः- विभाग में स्कीमों की समीक्षा हेतु विभागीय प्रधान सचिव/सचिव विभागीय स्थायी वित्त समिति।-विभाग में स्कीमों की समीक्षा हेतु विभागीय प्रधान सचिव/सचिव विभागीय स्थायी वित्त समिति रहेगी, जिसमें निम्न सदस्य होंगेः- विभागीय स्थायी वित्त समिति रहेगी, जिसमें निम्न सदस्य होंगेः- की अध्यक्षता में विभागीय स्थायी वित्त समिति रहेगी, जिसमें निम्न सदस्य होंगेः-

(क) विभागीय प्रधान सचिव/सचिव — अध्यक्ष
(ख) आन्तरिक वित्तीय सलाहकार — सदस्य
(ग) योजना संबंधी प्रशाखा के विशेष सचिव/संयुक्त सचिव/उप सचिव — सदस्य

प्रधान सचिव/सचिव यदि चाहें तो योजना एवं विकास के प्रतिनिधि को भी आमंत्रित कर सकते हैं । के प्रतिनिधि को भी आमंत्रित कर सकते हैं ।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 24 माच(cid:17) 2017 (ख) लोक वित्त समिति ((((Public Finance Committee))))।-।-।-।-स्कीमों की समीक्षा के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में लोक वित्त समिति रहेगी जिसमें निम्न सदस्य होंगेः-

(क) विकास आयुक्त — अध्यक्ष
(ख) प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग — सदस्य
(ग) प्रधान सचिव/सचिव, योजना एवं विकास विभाग — सदस्य सचिव
(घ) सम्बन्धित विभागीय प्रधान सचिव/सचिव — सदस्य
(ड.) सम्बन्धित विभागाध्यक्ष (यदि हाें तो) — सदस्य

(ग) प्रशासी पदवर्ग समिति।-स्थापना एवं अन्य प्रतिबद्ध व्यय में पदों के सृजन अथवा उत्क्रमण तथा वाहन के क्रय संबंधी प्रस्ताव जो पूर्व में गैर योजना व्यय से सम्बन्धित थे, की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रशासी पदवर्ग समिति रहेगी जिसमें निम्न सदस्य होंगेः-

(क) मुख्य सचिव — अध्यक्ष
(ख) विकास आयुक्त — सदस्य
(ग) प्रधान सचिव, वित्त विभाग — सदस्य
(घ) सचिव, वित्त विभाग — सदस्य सचिव
(ड.) प्रधान सचिव/सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग — सदस्य
(च) सम्बन्धित प्रशासी विभाग के प्रधान सचिव/सचिव — सदस्य

4444.... समीक्षा एवं स्वीकृति की शक्त्तियाँः-

क्र॰क्र॰क्र॰क्र॰ नई स्कीम समीक्षा प्राधिकार स्वीकृति प्राधिकार
1 ` ` ` `5.00 करोड़ तक प्रशासी विभाग विभागीय सचिव
2 ` ` ` `5.00 करोड़ से ````15.00 करोड़ तक विभागीय स्थायी वित्त समिति विभागीय मंत्री
3 ` ` ` `15.00 करोड़ से ````30.00 करोड़ तक विभागीय स्थायी वित्त समिति विभागीय मंत्री एवं वित्त मंत्री
4 ` ` ` `30.00 करोड़ से अधिक लोक वित्त समिति मंत्रिपरिषद्‌
5 नये स्वायत संगठन के अधिष्ठापन के सम्बन्ध में । लोक वित्त समिति मंत्रिपरिषद्‌

यदि राज्य स्कीम, केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम एवं केन्द्रीय क्षेत्र स्कीम में किसी नये पद के सृजन या पद के उत्क्रमण अथवा नये वाहन के क्रय का प्रस्ताव शामिल हो, तो ऐसे मामले लोक वित्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे एवं स्वीकृति सक्षम प्राधिकार यथा मंत्रिपरिषद्‌ के द्वारा दी जायेगी ।

स्थापना एवं अन्य प्रतिबद्ध व्यय में पदों के सृजन अथवा उत्क्रमण तथा वाहन के क्रय के प्रस्ताव, जो पूर्व में गैर योजना व्यय से संबंधित थे, के मामले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित प्रशासी पद वर्ग समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा । पदों के सृजन एवं उत्क्रमण संबंधी मामलों में स्वीकृति सक्षम प्राधिकार यथा मंत्रिपरिषद्‌ के द्वारा तथा नये वाहन के क्रय संबंधी मामलों में स्वीकृति वित्त मंत्री के द्वारा पूर्ववत्त दी जायेगी ।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 24 माच(cid:17) 2017 (ख) निवेश पूर्व कार्य आदि ((((Pre-investment activity) पर व्यय ।-) पर व्यय ।-) पर व्यय ।-) पर व्यय ।-स्कीमों में विस्तृत संभाव्यता/परियोजना प्रतिवेदन की तैयारी जैसे निवेश पूर्व कार्यों के लिए प्रत्यायोजन निम्न प्रकार रहेगाः-

क्र॰ स्कीम की लागत समीक्षा प्राधिकार स्वीकृति प्राधिकार
1 ` ` ` `20 लाख तक की लागत पर विस्तृत संभाव्यता/परियोजना प्रतिवदेन की तैयारी एवं निवेश पूर्व कार्यों के लिए (निवेश पूर्व कार्यों में प्रतिवेदन हेतु विस्तृत अध्ययन शामिल होगा लेकिन भूमि अधिग्रहण/अन्य आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था शामिल नहीं होगी) । विभागीय सचिव विभागीय मंत्री
2 शेष मामलों में लोक वित्त समिति मंत्रिपरिषद्‌

(क) मंत्रिपरिषद्‌ अथवा सक्षम प्राधिकार द्वारा अनुमोदित स्कीम्स के कार्यान्वयन के क्रम में यदि यह पाया जाता है कि किसी स्वीकृत स्कीम के मूल प्राक्कलन में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभावित है, तो ऐसी स्कीम के पुनरीक्षित प्राक्कलन में कंडिका-4 के अनुसार पुनः अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा ।

(ख) यदि स्वीकृत स्कीम के मूल प्राक्कलन में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभावित है, तो ऐसी स्कीम के पुनरीक्षित प्राक्कलन में विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए, मंत्रिपरिषद्‌ अथवा पूर्व से निर्धारित सक्षम प्राधिकार से एक स्तर ऊपर के प्राधिकार का पुनः अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा । 6. ऋण/अनुदान/सहायक अनुदान से सम्बन्धित स्कीमों की स्वीकृतिः-

(क) राज्य सरकार द्वारा किसी अधिनियम/संकल्प/निर्णय द्वारा गठित सरकारी बोर्ड, प्राधिकार, एजेंसी एवं सोसाइटी अथवा किसी स्कीम विशेष के कार्यान्वयन हेतु गठित Special purpose vehicle के अनुदानित/सहायक अनुदानित स्कीमों को प्रशासनिक स्वीकृति वर्णित कंडिका-4 के अनुसार दी जायेगी ।

(ख) उपरोक्त कंडिका (क) के अनुरूप ही वैसे गैर-सरकारी संस्थानों में ऋण/अनुदान/सहायक अनुदान की स्वीकृति दी जा सकेंगी, जिन मामलों में आय-व्ययक प्राक्कलन में उक्त संस्था के नाम से राशि प्रावधानित हो ।

(ग) शेष सभी मामलों में कंडिका-4 में उल्लेखित निर्धारित वित्तीय सीमा के लिए समीक्षा प्राधिकार एवं स्वीकृति प्राधिकार से एक स्तर उपर के द्वारा स्वीकृति दी जायेगी । स्वीकृति प्राधिकार मंत्रिपरिषद्‌ होने की स्थिति में स्वीकृति मंत्रिपरिषद्‌ द्वारा दी जायेगी ।

7. केन्द्र द्वारा प्रायोजित, केन्द्र चालित एवं वाह्‌य सम्पोषित प्रक्षेत्र में चालू तथा नई स्कीमेंः- (क) केन्द्र द्वारा प्रायोजित अथवा केन्द्र चालित चालू स्कीमेंः- यदि ऐसी स्कीम के केन्द्रांश एवं राज्यांश के लिए उद्‌व्यय एवं बजट में उपबंध उपलब्ध हो, तो प्रत्येक वर्ष अलग से प्रशासनिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी । प्रशासी विभाग केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इन स्कीमों का क्रियान्वयन करेगा । प्रशासी विभाग उद्‌व्यय एवं बजट उपबंध के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि के समानुपातिक राशि विमुक्त करने के लिए सक्षम होगा । यदि ऐसी स्कीम के लिए उद्‌व्यय/बजट उपबंध उपलब्ध नहीं हो, तो प्रशासी विभाग योजना एवं विकास विभाग से उद्‌व्यय प्राप्त कर एवं बजट में बिहार आकस्मिकता निधि/अनुपूरक द्वारा प्रावधान करा कर ही राशि विमुक्त करेगा ।

(ख) केन्द्र द्वारा प्रायोजित अथवा केन्द्र चालित नयी स्कीमें।- नयी स्कीमों के क्रियान्वयन एवं उनके लिए केन्द्रांश एवं राज्यांश की विमुक्ति संबंधी निर्णय उपरोक्त कंडिका-4(क) के अनुसार लिये जायेंगे।

8. राज्य द्वारा प्रायोजित चालू स्कीम।-राज्य क्षेत्र की चालू स्कीमों के लिये प्रत्येक वर्ष स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी । इसके लिए स्कीम की प्रशासनिक स्वीकृति की लागत के अन्तर्गत सम्बन्धित वर्ष के लिए स्कीम उद्‌व्यय तथा बजट उपबंध के अन्तर्गत राशि विमुक्त करने के लिए प्रशासी विभाग सक्षम होगा । स्कीमों का क्रियान्वयन एवं राशि की विमुक्ति प्रशासी विभाग द्वारा सरकार की मूल स्वीकृति एवं अनुमोदित दिशा-निर्देशों के4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 24 माच(cid:17) 2017 अनुसार किया जा सकेगा । उदाहरण के तौर पर यदि छात्रवृत्ति की दर में कोई परिवर्तन नहीं है, तो प्रतिवर्ष स्कीमों की प्रशासनिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है और इसे चालू स्कीम की श्रेणी मेें ही मानते हुए बजट उपबंध के अन्तर्गत राशि विमुक्त की जा सकती है ।

9. जिन मामलों में मंत्रिपरिषद्‌ के अनुमोदन की आवश्यकता हो, उनमें सक्षम समीक्षा प्राधिकार (लोक वित्त समिति) की अनुशंसा के पश्चात्‌ प्रशासी विभाग आन्तरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति से संलेख सीधे मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के माध्यम से मंत्रिपरिषद्‌ के सम्मुख रखेगा । स्वीकृति प्राधिकार (विभागीय सचिव/विभागीय मंत्री/वित्त मंत्री/मंत्रिपरिषद्‌) के अनुमोदन के पश्चात्‌ प्रशासी विभाग स्कीम की स्वीकृति के सम्बन्ध में स्वीकृत्यादेश आन्तरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति से निर्गत एवं संसूचित कर सकेगा । राज्यादेश (स्वीकृत्यादेश) में यह भी अंकित रहना आवश्यक है कि स्कीमों में व्यय किस शीर्ष/उपशीर्ष से विकलनीय है तथा एक अलग कंडिका में स्पष्ट रूप से अंकित किया जायेगा कि स्कीम के अनुमोदन के सम्बन्ध में सक्षम स्वीकृति प्राधिकार का अनुमोदन किस संचिका के किस पृष्ठ पर किस तिथि को प्राप्त किया गया है । इसी तरह वित्त विभाग/आन्तरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति/डायरी नम्बर/संचिका एवं पृष्ठ संख्या भी अलग कंडिका में स्पष्ट रहे । यदि किसी प्रशासनिक स्वीकृति संबंधी राज्यादेश (स्वीकृयादेश) में राशि की विमुक्ति की भी स्वीकृति अंकित की जाती है, तो निधि की उपलब्धता, पुनर्विनियोग/बिहार आकस्मिकता निधि से अग्रिम की स्वीकृति संबंधी पत्रांक अंकित रहना आवश्यक होगा । प्रशासी विभाग स्कीमों हेतु निर्गत स्वीकृत्यादेश की प्रति योजना एवं विकास विभाग तथा वित्त विभाग दोनाें को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें । निर्गत स्वीकृत्यादेश के आधार पर कोषागार/उप कोषागार से निकासी से पूर्व महालेखाकर से प्राधिकार पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता है या नहीं, यह वित्त विभाग के परिपत्र संख्या 7355 वि॰(2) दिनांक 05.10.2007 द्वारा निर्धारित है । अतः बेहतर होगा कि स्वीकृत्यादेश में ही अंकित कर दिया जाय कि महालेखाकार से प्राधिकार पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता है या नहीं ।

10. उल्लेखनीय है कि जहाँ उद्‌व्यय नहीं है अथवा बजट में उपबंध नहीं है, वहाँ उद्‌व्यय के लिए योजना एवं विकास विभाग तथा बजट उपबंध के लिए वित्त विभाग की अलग से स्वीकृति प्राप्त करनी होगी अर्थात्‌ स्कीमों की प्रशासनिक स्वीकृति तो की जा सकेगी लेकिन राशि की विमुक्ति उद्‌व्यय/बजट उपबंध के पश्चात्‌ ही की जा सकेगी। 11. स्कीमें उतनी ही ली जाएं जिनके सम्बन्ध में वित्तीय वर्ष में व्यय बजट उपबंध/उद्‌व्यय के अन्तर्गत हो। नई स्कीम लेने से पहले यह सुनिश्चित कर लिया जाय कि पुरानी स्कीमें अधूरी नहीं रह जायें और उनके लिए आवश्कतानुसार राशि कर्णांकित कर दी गई है । राज्य सरकार के विभागों द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में Bank of Sanction (BOS) की अधिसीमा बजटीय उपबंध की राशि की तीन गुणी लागत तक ही रखी जायेगी । परन्तु यदि बजटीय उपबंध की तीन गुणी लागत तक का दायित्व पूर्व से सृजित है, तो विशेष परिस्थिति में, जनोपयोगी योजनाएं उक्त अधिसीमा के आगे भी लोक वित्त समिति के अनुमोदन से ली जा सकेगी ।

12. उपर्युक्त प्रत्यायोजित शक्त्तियों का उपयोग सरकार द्वारा निर्गत सामान्य मितव्ययिता परिपत्रों एवं अन्य सामान्य निर्देशों के अधीन किया जायेगा ।

13. प्रशासी विभाग कंडिका-9 में वर्णित स्वीकृत्यादेशों की प्रतियाँ सम्बन्धित विभागों को अनिवार्य रूप से ऑनलाईन/ई-मेल पर उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था सुनिश्चित करेगें ।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय एवं इसकी प्रतिलिपि सरकार के सभी विभागों एवं महालेखाकार, बिहार, पटना को सूचनार्थ भेजी जाय ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रवि मित्तल, प्रधान सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 24 March 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-03-24.234/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-03-24.234.