(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
ॢबह(cid:4)र गजट
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 29 चै(cid:22) 1939 (श0) सं(cid:8)या 16 पटना, बुधवार, ———————— 19 अ"ील 2017 (ई0) &वषय-सूची पृ*ठ भाग-1—(cid:1)नयुि/त, पद2थापन, बदल(cid:15), शि/त, छु 5ी और अ7य 8यि/तगत सूचनाएं। 2-3 भाग-1-क—2वयंसेवक गु=म? के समादे*टाओं के आदेश।
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भाग-1-ख—मैC(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, डीप0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Gाओं के पर(cid:15)Gा-फल, कायIJम, छा(cid:22)वृिKत "दान, आLद।
---
भाग-1-ग—MशGा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Gाफल आLद ---
भाग-2—Nबहार-राPयपाल और कायाIQयG? Rवारा (cid:1)नकाले गये &व(cid:1)नयम, आदेश, अSधसूचनाएं और (cid:1)नयम आLद। ---
भाग-3—भारत सरकार, पिTचम बंगाल सरकार और उVच 7यायालय के आदेश, अSधसूचनाएं और (cid:1)नयम, 'भारत गजट' और राPय गजट? के उYरण। ---
भाग-4—Nबहार अSध(cid:1)नयम ---
पृ*ठ भाग-5—Nबहार &वधान मंडल म\ पुर:2था&पत &वधेयक, उ/त &वधान मंडल म\ उप2था&पत या उप2था&पत ^कये जानेवाले "वर सMम(cid:1)तय? के "(cid:1)तवेदन और उ/त &वधान मंडल म\ पुर:2थापन के पूवI "काMशत &वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अSध(cid:1)नयम िजनपर रा*Cप(cid:1)त क_ Pये*ठ अनुम(cid:1)त Mमल चुक_ है। ---
भाग-8—भारत क_ संसद म\ पुर:2था&पत &वधेयक, संसद म\ उप2था&पत "वर सMम(cid:1)तय? के "(cid:1)तवेदन और संसद म\ उप2था&पत "वर सMम(cid:1)तय? के "(cid:1)तवेदन और संसद म\ पुर:2थापन के पूवI "काMशत &वधेयक। ---
भाग-9—&वaापन
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भाग-9-क—वन &वभाग क_ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—(cid:1)न&वदा सूचनाएं, पbरवहन सूचनाएं, 7यायालय सूचनाएं और सवIसाधारण सूचनाएं इKयाLद। 4-4
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पूरक
पूरक-क 5-152 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017
भ(cid:2)ग(cid:4)1
०नय१ॢफ(cid:12) पद(cid:16)थ(cid:2)पन(cid:12) बदल(cid:20)(cid:12) शॢफ(cid:12) छ१Ñट(cid:20) jर [(cid:28)य व(cid:30)यॢफक स३चन(cid:2)e $
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गृह विभागगृह विभागगृह विभागगृह विभाग (आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा)(आरक्षी शाखा) ——— अधिसूचनाएं 28 फरवरी 2017
सं॰ 1/एल1-10-08/2015 गृ0आ0-1766—श्री डी0 अमरकेष, भा0पु0से0 (2013), सहायक पुलिस अधीक्षक-सह-अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी, बेलसंड, सीतामढ़ी को अपने घर पर आवष्यक कार्यवष हेतु अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 04.02.2017 से 23.02.2017 तक कुल 20 (बीस) दिनों की उपार्जित अवकाष की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्री अमरकेष के अवकाष अवधि में पुलिस उपाधीक्षक (मु0), सीतामढ़ी को अपने कार्यों के अतिरिक्त सहायक पुलिस अधीक्षक-सह-अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी, बेलसंड, सीतामढ़ी के प्रभार में रहने की स्वीकृति दी जाती है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, अपर सचिव।
——— 3 मार्च 2017
सं॰ 1/एल01-10-10/2001 गृ0आ0-1884—श्री पी0एन0 राय, भा0पु0से0 (1982), महानिदेषक-सह -महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निषाम सेवाएॅं, बिहार, पटना को निजी कार्यवष संयुक्त राज्य अमेरिका (विदेष) जाने हेतु अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 01.06.2017 से 30.06.2017 तक कुल 30 (तीस) दिनों का उपार्जित अवकाष एवं दिनांक 01.07.2017 (षनिवार) एवं दिनांक 02.07.2017 (रविवार) का राजपत्रित अवकाष Suffix के रूप में उपभोग करने की अनुमति प्रदान की जाती है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, अपर सचिव।
———
23 मार्च 2017
सं0 1/एल1-10-08/2015 गृ0आ0-2481—विभागीय अधिसूचना सं0-1766, दिनांक 28.02.2017 द्वारा श्री डी0 अमरकेष, भा0पु0से0 (2013), सहायक पुलिस अधीक्षक-सह-अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी, बेलसंड, सीतामढ़ी को अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 04.02.2017 से 23.02.2017 तक कुल 20 (बीस) दिनों की स्वीकृत उपार्जित अवकाष को रद्द किया जाता है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, अपर सचिव।
———
24 मार्च 2017
सं0 1/एल1-10-04/2017 गृ0आ0-2500—श्री उपेन्द्र प्रसाद सिंह, भा0पु0से0 (2004), पुलिस महानिरीक्षक के सहायक (निरीक्षण), बिहार, पटना को अपनी पुत्री की शादी हेतु अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्टी) नियमावली-1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 11.05.2017 से 26.05.2017 तक कुल 16 (सोलह) दिनों की उपार्जित अवकाष की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. श्री सिंह के अवकाष अवधि में उनके द्वारा धारित पद के अतिरिक्त प्रभार में पुलिस महानिरीक्षक के सहायक (क्यू0), बिहार, पटना रहेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, रंजन कुमार सिन्हा, अपर सचिव।3 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017
निगरानी विभाग
सूचना भवन, पटना
———
अधिसूचना
6 अप्रील 2017
दिनांक 17.02.2017 द्वारा श्री सुनील कुमार सिन्हा, नव प्रोन्नत अधीक्षण अभियंता की सेवा अगले आदेश तक के लिए निगरानी विभाग में सौंपी गयी है। तद्नुसार दिनांक 21.02.2017 को श्री सिन्हा द्वारा अधीक्षण अभियंता के पद पर योगदान समर्पित किया गया है।
2. उक्त के आलोक में उनके योगदान की तिथि 21.02.2017 के पूर्वाह्न से योगदान स्वीकृत करते हुए निगरानी विभाग के अधीन तकनीकी परीक्षक कोषांग, पटना में अधीक्षण अभियंता के रिक्त पद पर पदस्थापित किया जाता है। 3. इसमें मुख्य (निगरानी) मंत्री का आदेश प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, उमेश चन्द्र विश्वास, अपर सचिव।
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[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?
ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 5-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?
Website: http://egazette.bih.nic.in
4 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017भाग-9(ख)
और सवIसाधारण सूचनाएं इKयाLद।
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सूचना ——
No. 479— I, ABHIGYAN S/O Dhrub Narain Sahu R/O Flat No.-101, Om Nilay Apartment, Khaitan Gali, West Boring Canal Road, Patna declare vide Affidavit no. 312 Dated 03.12.2016 that now on wards I shall be known as Abhigyan Arya for all future purposes.
ABHIGYAN.
——
No. 486—I, ASHUTOSH KUMAR S/o.Ramdeo Jha, R/o. H.No. B/35, Bank Men's Colony Chitragupta Nagar, Kankarbagh, Patna-20 (Bihar) declare vide Affidavit no. 2839 Dated 27.02.2017 that now onwards I shall be known as Ashutosh kumar Jha for all future purposes.
ASHUTOSH KUMAR.
सं॰ 486—मैं, आशुतोष कुमार, पिता-श्री रामदेव झा, पता मकान संख्या बी/35, बैंक मेन्स कॉलोनी, चित्रगुप्त नगर, कंकड़बाग, पटना-800020, शपथ पत्र सं॰ 2839, दिनांक 27.02.2017 से यह घोषणा करता हूँ कि मैं अब से आशुतोष कुमार झा के नाम से जाना जाऊँगा।
आशुतोष कुमार।
—————
[ध&¡क(cid:12) स०चव(cid:2)लय म१)ण(cid:2)लय(cid:12)
ॢबह(cid:2)र(cid:12) पटन(cid:2) ह(cid:2)र(cid:2) -क(cid:2)०शत eव$ म१ॢ)त?
ॢबह(cid:2)र गजट(cid:12) 5-571+10(cid:4)ड&4ट(cid:20)4प&4?
Website: http://egazette.bih.nic.in
5 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017ॢबह(cid:4)र गजट
क(cid:4)
प३रक(cid:13)[(cid:15)(cid:16) (cid:17)(cid:4)०धक(cid:4)र(cid:20) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:17)क(cid:4)०शत
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सं॰ 2/सी0-3-301/1997-सा॰प्र॰-18 सामान्य प्रषासन विभाग ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 2 जनवरी2 जनवरी2 जनवरी2 जनवरी 2017201720172017
श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी-सह-प्रभारी अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध कक्षपालों/उच्च कक्षपालों को मनमाने ढंग से स्थानांतरण करने, निर्गत परिपत्रों का उल्लंघन करने, निर्दोष कारा कर्मियों को बिना कारण निलंबित करने, वर्षों से फरार कर्मियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं करने आदि के आरोप में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2/सी0-3-301 /1997-सा0प्र0-10157 दिनांक 24.07.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री भारती दिनांक 30.11.2016 को सेवानिवृा हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है।
अतः श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी-सह-प्रभारी अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली 1950 के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/सी0-3-30273/2002-सा॰प्र॰-19 ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 2 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 2017
श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी-सह-प्रभारी अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध विधायक, श्री राजन तिवारी को नई दिल्ली स्थिति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में चिकित्सोंपरान्त सीधे केन्द्रीय कारा, बक्सर में संसीमित करने के आदेष/नियमों की अवहेलना करते हुए मेडिकल बोर्ड एवं जिला पदाधिकारी, पटना की स्वी—ति के बिना पी0एम0सी0एच0 में भर्ती कराने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक- 2/सी0-3-30273/2002-सा0प्र0- 15132 दिनांक 07.11.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री भारती दिनांक 30.11.2016 को सेवानिवृा हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है।6 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 अतः श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी-सह-प्रभारी अधीक्षक, आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली 1950 के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/सी0-1098/2006-सा॰प्र॰-20 ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 2 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 2017
श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-निर्वाची पदाधिकारी, ठकराहा, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध पंचायत निर्वाचन में अवैध एवं मनमाने ढंग से नाम-निर्देषन पत्र अस्वी—त करने, राज्य निर्वाचन आयोग के निदेषों के विपरीत कार्य करने तथा सरकारी पदाधिकारियों के र्काव्यों के प्रतिकूल आचरण बरतने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2/सी0-1098/2006-सा0प्र0-13419 दिनांक 30.09.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री भारती दिनांक 30.11.2016 को सेवानिवृा हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है।
अतः श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-निर्वाची पदाधिकारी, ठकराहा, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली 1950 के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/सी0-10151/2006-सा॰प्र॰-65 ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 2 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 20172 जनवरी 2017
श्री कमलेष सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 659/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, विस्फी, मधुबनी सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, ग्रामीण कार्य विभाग, पटना के विरूद्ध बाढ़ पुनर्वास इंदिरा आवास एवं सामान्य इंदिरा आवास योजनाओं के तहत् आवास आवंटन एवं लाभार्थियाें के चयन में अनियमितता बरतने के आरोपों के लिए ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 4837 दिनांक 05.06.2007 के माध्यम से जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 1445 दिनांक 11.07.2006 द्वारा प्राप्त पत्र प्रपत्र 'क' के आलोक में विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 6531 दिनांक 07.07.2009 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेष दिया गया। श्री सिंह के पत्रांक 770 दिनांक 21.08.2009 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 11101 दिनांक 11.11.2009 द्वारा जिला पदाधिकारी, मधुबनी से मंतव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 1395 दिनांक 26.05.2010 द्वारा प्राप्त मंतव्य के सम्यक विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9712 दिनांक 29.09.2010 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 69 दिनांक 20.01.2011 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध आरोप संख्या-01 एवं 02 के संबंध में प्रतिवेदित है कि इनका स्पष्टीकरण आंषिक रूप से स्वीकार करने योग्य है एवं आरोप संख्या-03 के संबंध में प्रतिवेदित किया गया कि आरोपित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया।
श्री सिंह को विभागीय पत्रांक 5527 दिनांक 17.05.2011 द्वारा जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित आंषिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेष दिया गया। श्री सिंह के पत्रांक 01 दिनांक 20.06.2011 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया।
श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, मधुबनी से प्राप्त मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा ''तीन वेतनवृद्धियां संचयात्मक प्रभाव से रोके जाने एवं देय प्रोन्नति की तिथि से अगले पाँच वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक'' का दंड विनिष्चित किया गया। श्री सिंह के विरूद्ध विनिष्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 11150 दिनांक 29.09.2011 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्ष हेतु पत्र प्रेषित किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2091 दिनांक 21.11.2011 द्वारा अभिमत दिया गया कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के परिपेक्ष्य में प्रस्तावित दंड अनुपातिक नहीं है।7 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप गंभीर प्र—ति के पाये जाने तथा जाँच प्रतिवेदन में आरोप प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरूप बिहार लोक सेवा आयोग के अभिमत से असहमत होते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14247 दिनांक 28.12.2011 द्वारा विनिष्चित दंड (i) तीन वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं (ii) देय प्रोन्नति की तिथि से अगले पाँच वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक का दण्ड संसूचित किया गया।
संसूचित दंड के आलोक में श्री सिंह के पत्रांक 433 दिनांक 15.02.2012 द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया। समर्पित अभ्योवदन के सम्यक् विचारोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9451 दिनांक 03.04.2012 द्वारा इसे अस्वी—त करते हुए संकल्प ज्ञापांक 14247 दिनांक 28.12.2011 द्वारा श्री सिंह को (i) तीन वेतन वृद्धियॉ संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं (ii) देय प्रोन्नति की तिथि से अगले पाँच वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक के दण्ड को पूर्ववत बरकरार रखा गया।
श्री सिंह द्वारा संसूचित दण्ड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 6683/2013 दायर किया गया, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 08.09.2016 को पारित न्यायादेष निम्नवत् है :-
"As one of the two charges is not found to be proved and the other only partially proved, the matter is remitted to the disciplinary authority for fresh consideration of quantum of punishment in light of observations made above.
The writ petition is thus allowed to the extent indicated above." माननीय न्यायालय द्वारा उपर्युक्त पारित न्यायादेष के अनुपालन के क्रम में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध ''तीन वेतनवृद्धियां संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं देय प्रोन्नति की तिथि से अगले पाँच वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक'' के दंड पर सम्यक समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री सिंह के विरूद्ध इंदिरा आवास योजना के तहत मात्र एक व्यक्ति को गलत ढ़ंग से चयनित करने का आरोप आंषिक रूप से प्रमाणित पाया गया है तथा इस मामले में राषि की वसूली की कार्रवाई भी पूर्ण हो चुकी है। अतः आंषिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धियों पर रोक का दंड अधिरोपित किया जाने का निर्णय लिया गया।
अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री कमलेष सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 659/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, विस्फी, मधुबनी सम्प्रति विषेष कार्य पदाधिकारी, ग्रामीण कार्य विभाग, पटना के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14247 दिनांक 28.12.2011 द्वारा अधिरोपित दंड ''(i) तीन वेतनवृद्धियां संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं (ii) देय प्रोन्नति की तिथि से अगले पाँच वर्षों तक प्रोन्नति पर रोक'' के दंड को निरस्त करते हुए आंषिक रूप से प्रमाणित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-
(i) असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धियों पर रोक का दंड।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/आरोप-01-58/2014-सा॰प्र॰-231 ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 11 जनवरी 201711 जनवरी 201711 जनवरी 201711 जनवरी 2017
श्री फैयाज अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 887/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, सहरसा सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, कटिहार के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 3496 दिनांक 29.04.2015 के माध्यम से बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल कॉरपोरेषन लि0, पटना के पत्रांक 10061 दिनांक 17.09.2014 द्वारा प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, सहरसा के पदस्थापन अवधि में अधिप्राप्ति धान को क्षतिग्रस्त कराने, निगम को आर्थिक हानि पहुंचाने, उच्चाधिकारियों के आदेष की अवहेलना करने, जनहित-निगमहित के विरूद्ध कार्य करने तथा अपने र्काव्यों के प्रति उदासीनता बरतने एवं आवंटित कार्यों के सम्पादन में लापरवाही बरतने संबंधी आरोपों के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित गठित कर आवष्यक कार्रवाई हेतु विभाग को उपलब्ध कराया गया।
2. श्री अख्तर के विरूद्ध गठित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 7478 दिनांक 21.05.2015 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जो अनेक स्मारों के बावजूद सम्प्रति अप्राप्त है।
3. जिला पदाधिकारी, सहरसा के प्रतिवेदन एवं बिहार स्टेट फूड एण्ड सिविल कॉरपोरेषन लि0, पटना द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के सम्यक् विचारोपरान्त यह पाया गया कि श्री अख्तर द्वारा अधिप्राप्ति धान को क्षतिग्रस्त कराने, उच्चाधिकारियों के आदेष की अवहेलना करने तथा निगम को आर्थिक हानि पहुंचाने का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होता है।
4. अनुषासनिक प्राधिकार के विचारोपरान्त श्री फैयाज अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 887/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, सहरसा सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, कटिहार के विरूद्ध अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की8 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें आयुक्त, कोषी प्रमंडल, सहरसा को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, सहरसा द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।
5. जिला पदाधिकारी, सहरसा को निदेष दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी आयुक्त, कोषी प्रमंडल, सहरसा एवं सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेगें।
6. श्री फैयाज अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 887/11 को निदेष दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवष्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/अभि0-304/2008 -सा0प्र0-330 ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 12 जनवरी 201712 जनवरी 201712 जनवरी 201712 जनवरी 2017
श्री महर्षि राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 303/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर पूर्वी सम्प्रति अपर समार्हाा, नवादा के विरूद्ध निगरानी विभाग के पत्रांक 84/अप0सा0 दिनांक 21.01.2008 द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या 118/2007 दिनांक 15.10.2007 में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गयी जाँच में बी0पी0एल0 के गेहूँ के कालाबाजारी रोकने में इनकी भूमिका संदेहास्पद पायी गयी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के जाँच प्रतिवेदन में पाये गये तथ्यों के आलोक में विधि विभाग के आदेष ज्ञापांक 4978 दिनांक 09.12.2009 द्वारा अभियोजन की स्वी—ति प्रदान की गयी। निगरानी विभाग के पत्रांक 84 दिनांक 21.01.2008 द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित किया गया। श्री महर्षि राम के विरूद्ध आरोप है कि श्री राम कुमार सिंह परिवादी द्वारा नालिस वाद संख्या 14/06 एवं ग्रामीणों की मद्द से 38 बोरा बी0पी0एल0 गेहूँ टाटा 407 पर लदा हुआ पकड़े जाने के बावजूद स्थानीय डीलर एवं मुखिया द्वारा कालाबाजारी में खरीदार राधेष्याम साव एवं भोला साव के हाथों बेचा गया। तत्कालीन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में मुखिया चन्द्रकिषोर सिंह के विरूद्ध स्पष्ट साक्ष्य रहने के बावजूद उनका नाम नहीं दिया गया एवं जाँच प्रतिवेदन में अंकित तथ्यों की अनदेखी की गयी। स्पष्ट है कि श्री राम द्वारा भ्रष्ट मुखिया, डीलर आदि आरोपितों को आपराधिक षड़यंत्र के तहत बचाने का प्रयास किया गया।
पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पत्रांक 3552 दिनांक 09.12.2013 द्वारा सूचित किया गया कि उक्त थाना कांड संख्या में श्री राम के विरूद्ध आरोप-पत्र संख्या 19/2010 दिनांक 19.02.2010 द्वारा माननीय न्यायालय में आरोप-पत्र समर्पित किया जा चुका है।
उक्त आरोपों की गंभीरता को देखते हुए श्री राम के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4413 दिनांक 01.04.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 838 दिनांक 02.03.2015 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री राम के विरूद्ध तीनों आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।
विभागीय पत्रांक 6817 दिनांक 12.05.2015 द्वारा उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम से अभ्यावेदन की मांग की गयी। श्री राम के पत्रांक 610 दिनांक 20.06.2015 अभ्यावेदन समर्पित किया गया।
अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, निगरानी विभाग द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन, समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक विचारोपरान्त यह पाया गया कि श्री राम द्वारा प्रभारी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, गायघाट के पत्रांक 21 दिनांक 17.01.2004 में कालाबाजारी में बेचे गये 38 बोरा बी0पी0एल0 गेहूँ को ग्रामीणों द्वारा पकड़ा गया था। उक्त जाँच प्रतिवेदन में खाद्यान्न बिक्री करने वाले जनवितरण प्रणाली विक्रेता, नन्दकिषोर सिंह का नाम स्पष्ट रूप से अंकित था, लेकिन ग्रामीण की षिकायत एवं जप्त किये गये खाद्यान्न के आलोक में संबंधित जनवितरण प्रणाली विक्रेता के भंडार पंजी, वितरण पंजी एवं उपभोक्ता का बयान लिये जाने के संंबंध में कोई प्रतिवेदन अंकित नहीं किया गया।
प्रभारी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, गायघाट के पत्रांक 29 दिनांक 24.01.2004 द्वारा दर्ज प्राथमिकी से स्पष्ट है कि दिनांक 17.01.2004 को खाद्यान्न जप्त किया गया था लेकिन भंडार पंजी एवं वितरण पंजी आदि की जाँच नहीं की गयी तथा अविलम्ब प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कराया गया। खाद्यान जप्ति के सात दिनों के उपरान्त प्राथमिकी दर्ज की गयी। प्राथमिकी के अनुलग्नकों से स्पष्ट है कि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा संबंधित जन वितरण प्रणाली विक्रेता के भण्डार का भौतिक9 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 सत्यापन प्रतिवेदन, भंडार पंजी एवं वितरण पंजी के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन समर्पित नहीं किया गया एवं टाटा 407 वाहन जिसपर खाद्यान्न लदा हुआ था उस वाहन को भी छोड़ दिया गया।
स्पष्ट है कि अनुमंडल पदाधिकारी होने के नाते अनुमंडलीय क्षेत्राधीन बी0पी0एल0 खाद्याान की कालाबजारी पर रोक लगाने हेतु श्री राम द्वारा त्वरित कार्रवाई नहीं की गयी एवं अपने पदीय र्काव्यों एवं दायित्वों को निर्वहन नहीं किया गया मात्र प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी को प्राथमिकी दर्ज करने का निदेष दे दिये जाने से उनका दायित्व पूर्ण नहीं हो जाता है। यदि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा जप्त खाद्यान्न के संबंध में विभागीय निदेष के अनुरूप अन्य जाँच नहीं किये गये तो इसकी विधि सम्मत जाँच कराकर पूरक प्राथमिकी दर्ज किया जाना चाहिए था, जो श्री राम द्वारा नहीं किया गया। यदि प्राथमिकी में किसी तथ्य को छोड़ दिया गया हो तो उन तथ्यों को शामिल करते हुए पूरक प्राथमिकी दर्ज कराया जाना चाहिए था, जो इनके द्वारा नहीं किया गया।
अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त उक्त प्रमाणित आरोपों की प्र—ति को देखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संषोधित) के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9478 दिनांक 06.07.2016 द्वारा ''असंचयात्मक प्रभाव (non-cumulative effect) से दो वेतनवृद्धियों पर रोक का दंड'' दिया गया।
उल्लेखनीय है कि श्री राम दिनांक 30.09.2017 को सेवानिवृा होने वाले हैं। अतः अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री महर्षि राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 303/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर पूर्वी सम्प्रति निलंबित को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संषोधित) के संगत प्रावधानों के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9478 दिनांक 06.07.2016 द्वारा ''असंचयात्मक प्रभाव (non-cumulative effect) से दो वेतनवृद्धियों पर रोक का दंड'' को संषोधित करते हुए ''एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में एक प्रक्रम पर अवनति का दंड'' अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/सी0-3-3049/2003-सा0प्र0-1183 ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 31313131 जनवरी 2017जनवरी 2017जनवरी 2017जनवरी 2017
श्री अषोक कुमार पाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 296/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, विश्रामपुर, पलामू सम्प्रति विषेष भू-अर्जन पदाधिकारी, गंडक योजना, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध प्रखंड विकास पदाधिकारी, विश्रामपुर, पलामू के पद पर रहते हुए सक्षम प्राधिकार से 15 जलधारा कूप की स्वी—ति प्राप्त किये बिना अपने कार्य क्षेत्र से बाहर जाकर कूप की स्वी—ति प्रदान करने, एकरारनामा करने, कार्यादेष निर्गत करने एवं सरकारी राषि का दुरूपयोग करने के प्रतिवेदित आरोप के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित किया गया।
2. प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में श्री पाल से विभागीय पत्रांक 5845 दिनांक 19.08.2003 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। तत्पष्चात् पत्रांक 945 दिनांक 04.02.2004 तथा पत्रांक 9719 दिनांक 08.11.2004 द्वारा स्मारित भी किया गया, किन्तु श्री पाल द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया।
3. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 18243 दिनांक 28.11.2013 द्वारा उपर्युक्त आरोपों के लिए श्री पाल के विरूद्व विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
4. संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 1053 दिनांक 18.08.2016 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या-1 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-2 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। आरोप संख्या-1 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष निम्नवत् है :-
''श्री अषोक कुमार पाल, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, विश्रामपुर सम्प्रति विषेष भू-अर्जन पदाधिकारी, गंडक योजना, मुजफ्फरपुर के द्वारा बिना सक्षम प्राधिकार के स्वी—ति के 15 जलधारा कूप की स्वी—ति देना अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर किया गया कार्य है, जो अवैध है। लाभुकों का बिना परीक्षण किये राषि वितरित किया गया, जो विाीय अनियमितता है।''
5. विभागीय पत्रांक 12289 दिनांक 08.09.2016 द्वारा प्रमाणित आरोप के लिए श्री पाल से अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त निदेष के आलोक में श्री पाल के द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 30.09.2016 समर्पित किया गया।10 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 उपर्युक्त अभ्यावेदन में श्री पाल द्वारा कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रषासन द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्य अभिलेख तथा उनके द्वारा समर्पित लिखित पक्ष की समीक्षा की गयी है, जिसमें उनके द्वारा समर्पित लिखित पक्ष (बचाव बयान) का उल्लेख किया गया है कि पूर्व की जिलास्तरीय बैठक में वरीय सक्षम पदाधिकारी द्वारा मौखिक रूप से निदेष दिया गया था कि जलधारा कूल जैसे जनहित योजनाओं को युद्ध स्तर पर पूरा कराना है और लाभुकों का चयन करते हुए सूची भेजकर कार्य प्रारम्भ करा दें ताकि विाीय वर्ष में योजना पूर्ण हो सके। उक्त लिखित पक्ष के संबंध में विवेचना के दौरान संचालन पदाधिकारी ने कहा है कि उनके द्वारा उक्त कथन के संबंध में साक्ष्य के रूप में कोई अभिलेख यथा बैठक की कार्यवाही आदि संलग्न नहीं किया गया है। इसके अलावा समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत सिंचाई कूप संबंधित आवेदन पत्र के विहित स्थान पर अंचल अधिकारी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी का हस्ताक्षर/मुहर भी नहीं है और निर्गत कार्यादेष का ज्ञापांक, दिनांक तथा कार्यादेष में योजना संख्या भी अंकित नहीं की गयी है, जिससे स्पष्ट है कि लाभुकों का परीक्षण किये बिना ही राषि उपलब्ध करायी गयी है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उपर्युक्त विवेचना के आधार पर उनके विरूद्ध गठित आरोप संख्या-1 को प्रमाणित किया गया। अतः न्यायहित में उनके उक्त लिखित पक्ष के समर्थन में साक्ष्य के रूप में संबंधित जिलास्तरीय बैठक की कार्यवाही से संबंधित अभिलेख को प्रस्तुत करना अत्यावष्यक है। श्री पाल के द्वारा माह नवम्बर एवं दिसम्बर, 1996 का जिलास्तरीय प्रखंड विकास पदाधिकारीगण की मासिक बैठकों की कार्यवाही से संबंधित अभिलेख प्रदान करने हेतु निदेष संबंधित विभाग/जिला को देने का अनुरोध किया गया, ताकि वे संचालित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित आरोप संख्या-1 के संबंध में अपना अभ्यावेदन पूर्णरूपेण सही ढंग से समर्पित कर सकें।
7. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री पाल द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरांत पाया गया कि श्री पाल के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना को समर्पित लिखित पक्ष की कंडिका-2 में उल्लेख किया गया है कि-प्रपत्र 'क' में गठित आरोप की कंडिका-1 के संबंध में कहना है कि सरकार से प्राप्त जिला की लक्ष्यों को प्रखंडों की जनसंख्या के आलोक में निर्धारित कर संसूचित किया जाता है, जिसके आलोक में प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा लाभुकाें का चयन कर सूची स्वी—ति हेतु सक्षम पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त को भेजा जाता था तथा इसी सूची की स्वी—ति प्राप्त होती थी। प्रष्नगत जलधारा कूपों की सूची स्वी—ति हेतु प्रखंड कार्यालय के पत्रांक 896 दिनांक 31.12.1996 द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अन्दर भेजा गया था। चूँकि भेजी गयी सूची का ही स्वी—ति प्राप्त होती थी इसलिए सक्षम पदाधिकारी द्वारा स्वी—ति की प्रत्याषा में संबंधित लाभार्थियों के अभिलेख खोलने, एकरारनामा करने एवं कार्यादेष निर्गत किया गया था तथा कुल छः लाभुकों को पाँच-पाँच हजार रू0 चेक द्वारा दिया गया था। तत्पष्चात् वहां से आरोपी की स्थानान्तरण होने पर दिनांक 13.01.1997 को अपना पदभार सौंपकर स्थानान्तरण स्थान पर प्रभार ग्रहण किया गया। इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व की जिलास्तरीय बैठक में वरीय सक्षम पदाधिकारी द्वारा मौखिक रूप से निदेष दिया गया था कि जलधारा कूप जैसे जनहित योजनाओं को युद्ध स्तर पर पूरा कराना है और लाभुकों का चयन करते हुए सूची भेजकर कार्य प्रारंभ करा दें ताकि विाीय वर्ष में योजना पूर्ण हो सके। चूँकि संबंधित विाीय वर्ष का समापन में मात्र तीन माह की अवधि बची हुई थी, जिसमें प्रष्नगत योजना का कार्य पूर्ण कराना था। ऐसी परिस्थिति में वरीय सक्षम पदाधिकारी के उपरोक्त मौखिक दिषा-निर्देष के आलोक में स्वी—ति की प्रत्याषा में कार्य कराने का आदेष दिया गया। इसमें कोई विाीय अनियमितता नहीं की गयी। इसके मात्र एक सप्ताह बाद उनका स्थानान्तरण हो गया। इस प्रकार गठित आरोप की कंडिका-1 में उनके विरूद्ध लगाये गये सभी आरोप गलत है।
श्री पाल के उपरोक्त कथन से स्पष्ट है कि श्री पाल के द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि पूर्व की जिलास्तरीय बैठक में वरीय सक्षम पदाधिकारी द्वारा दिये गये मौखिक निदेष के आलोक में उनके द्वारा स्वी—ति की प्रत्याषा में कार्य कराने का आदेष दिया गया था, लेकिन श्री पाल के द्वारा अपने उक्त कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया। यदि श्री पाल के द्वारा जिला पदाधिकारी के मौखिक निदेष पर उनकी स्वी—ति की प्रत्याषा में कार्य कराया गया था तो वैसी स्थिति में प्रभार परित्याग करने के पूर्व जिला पदाधिकारी/उप विकास आयुक्त/सक्षम प्राधिकार से जलधारा कूप निर्माण की स्वी—ति प्राप्त करनी चाहिए थी, जो नहीं किया गया है।
7. वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री पाल के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत ''एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में एक निम्नतर प्रक्रम पर अवनति'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
8. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अषोक कुमार पाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 296/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, विश्रामपुर, पलामू सम्प्रति विषेष भू-अर्जन पदाधिकारी, गंडक योजना, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता हैः-
(i) एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए संचयी प्रभाव के बिना कालमान वेतन में एक निम्नतर प्रक्रम पर अवनति।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधित को
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।11 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 सं॰ 2/सी0-10188/2008 -सा0प्र0- 1786 ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 15 फरवरी15 फरवरी15 फरवरी15 फरवरी 2017201720172017
मो0 कासिम अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 494/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, हुसैनगंज, सिवान के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2/सी0-10188/2008 -सा0प्र0-13608 दिनांक 29.09.2014 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही सम्प्रति प्रक्रियाधीन है।
उल्लेखनीय है कि मो0 अंसारी दिनांक 31.01.2017 को सेवानिवृा हो चुके हैं। अतः मो0 कासिम अंसारी (बि0प्र0से0), सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस आदेष की प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/अभि॰-03-16/2013-सा0प्र0-1807 ——— संसंसंसंकल्पकल्पकल्पकल्प 15 फरवरी 201715 फरवरी 201715 फरवरी 201715 फरवरी 2017
विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2/अभि0-03-16/2013-सा0प्र0-3936 दिनांक 14.03.2016 द्वारा श्री अषोक कुमार पाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 296/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, परसौनी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी थी। श्री पाल दिनांक 31.01.2017 को सेवानिवृा हो चुके हैं तथा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही अभी तक प्रक्रियाधीन है।
अतः श्री अषोक कुमार पाल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 296/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, परसौनी सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंषन नियमावली, 1950 के नियम-43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस आदेष की प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।
——— सं॰ 2/नि0था0-11-03/2016-सा0प्र0-2109 ——— संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 21 फरवरी 201721 फरवरी 201721 फरवरी 201721 फरवरी 2017
पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 2569 दिनांक 03.11.2016 द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या 116/2016 दिनाक 28.10.2016 धारा-7/8/13 (2)-सह-पठित धारा-13 (1)(डी) भ्र0नि0अधि0, 1988 के तहत श्री गुलाम मुस्तफा अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 929/11, अनुमंडल पदाधिकारी, जयनगर, मधुबनी को प्राथमिकी अभियुक्त बनाये जाने एवं दिनांक 27.10.2016 को श्री अंसारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में शहीद खुदिराम बोस केन्द्रीय कारा, मुजफ्फरपुर भेजे जाने की सूचना प्राप्त हुई।
प्रासंगिक मामले पर समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत् श्री अंसारी को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15674 दिनांक 23.11.2016 द्वारा उन्हें गिरफ्तार किये जाने की तिथि 27.10.2016 के प्रभाव से अगले आदेष तक के लिए निलंबित किया गया।
2. श्री अंसारी द्वारा जमानत पर रिहा होने के उपरान्त दिनांक 23.01.2017 को पूर्वाह्न में सामान्य प्रषासन विभाग में योगदान समर्पित किया गया।
3. निलंबन अवधि में श्री अंसारी का मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया जाता है। 4. निलंबन अवधि में श्री अंसारी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10 के तहत् अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।12 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 सं॰ 2/आरोप-01-21/2014-सा0प्र0-2285(A) ——— संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 21 फरवरी 201721 फरवरी 201721 फरवरी 201721 फरवरी 2017
श्री अविनाष कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 891/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' जिला पदाधिकारी, पष्चिम चम्पारण, बक्सर के पत्रांक 01-002 (मु0)/स्था0 दिनांक 16.01.2014 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' में निगरानी थाना कांड संख्या 038/2008 दिनांक 27.06.2008 के प्राथमिकी अभियुक्त के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के रूप में विभागीय कार्रवाई के निष्पादनोपरांत समर्पित जाँच प्रतिवेदन में दोषमुक्त बताते हुए विभागीय कार्रवाई समाप्त करने की अनुषंसा करने का आरोप प्रतिवेदित है। विभागीय पत्रांक 12274 दिनांक 03.09.2014 द्वारा श्री कुमार को प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित उपलब्ध कराते हुए उक्त आरोपों के संदर्भ में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री कुमार के द्वारा उक्त निदेष के आलोक में स्पष्टीकरण दिनांक 16.10.2014 समर्पित किया गया। विभागीय पत्रांक 15589 दिनांक 10.12.2014 द्वारा उक्त स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी से मंतव्य मांगे जाने पर जिला पदाधिकारी, बक्सर के पत्रांक 01-1885/स्था0 दिनांक 22.12.2014 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ।
2. प्रतिवेदित आरोप, आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, बक्सर के मंतव्य की समीक्षोपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2235 दिनांक 10.02.2015 द्वारा श्री कुुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 3. संयुक्त आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 1687 दिनांक 25.11.2015 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 17542 दिनांक 18.12.2015 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त निदेष के आलोक में श्री कुमार द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 29.02.2016 समर्पित किया गया।
4. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा निम्नांकित असहमति के बिन्दु निर्धारित किये गये :-
''संचालन पदाधिकारी के रूप में आपके द्वारा केवल आरोपी सरकारी सेवक के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के प्रमाणित होने अथवा अप्रमाणित होने के संबंध में निष्कर्ष समर्पित किया जाना चाहिए था, जबकि आपके द्वारा जाँच प्रतिवेदन में विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने की अनुषंसा की गयी है, जिसे आपके द्वारा जिला पदाधिकारी, बक्सर को समर्पित स्पष्टीकरण में भी स्वीकार किया गया है।''
उपर्युक्त असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 5682 दिनांक 22.04.2016 द्वारा श्री कुमार से अभ्यावेदन की मांग किये जाने पर श्री कुमार द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 30.05.2016 समर्पित किया गया।
5. प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के संगत प्रावधानों के तहत श्री कुमार के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए ''दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं प्रोन्नति की देय तिथि से दो साल तक प्रोन्नति पर रोक'' के दण्ड का विनिष्चय किया गया।
6. विभागीय पत्रांक 9581 दिनांक 11.07.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से विनिष्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति/परामर्ष की मांग किये जाने पर आयोग के पत्रांक 2008 दिनांक 03.10.2016 द्वारा विनिष्चित दण्ड पर सहमति संसूचित की गयी।
7. जिला पदाधिकारी, रोहतास, सासाराम के पत्रांक 1076 दिनांक 13.12.2016 द्वारा श्री कुमार की दिनांक 08.08.2016 को मृत्यु होने की सूचना दी गयी।
8. श्री कुमार की मृत्यु हो जाने के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा विभागीय पत्रांक 3422 दिनांक 28.03.1990 में निहित निदेष के आलोक में स्व0 अविनाष कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 891/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2235 दिनांक 10.02.2015 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
9. अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार स्व0 अविनाष कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 891/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, बक्सर के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2235 दिनांक 10.02.2015 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, उप-सचिव।13 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017
सं॰ 2/आरोप-01-07/2017-सा0प्र0-2292
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संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प
24 फरवरी 201724 फरवरी 201724 फरवरी 201724 फरवरी 2017
दिनांक 14.01.2017 को सारण जिला क्षेत्र अवस्थित सबलपुर दियारा में आयोजित पतंगोत्सव के पश्चात् सबलपुर दियारा से गाँधी घाट, पटना यात्रियों को लेकर आ रही नाव के दुर्घटनाग्रस्त होने की जाँच उच्च स्तरीय द्विसदस्यीय जाँच समिति द्वारा की गयी। समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री मदन कुमार, कोटि क्रमांक-904/2011, अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर को गंभीर प्रशासनिक चूक एवं विधि-व्यवस्था में लापरवाही का दोषी पाया गया।
2. उक्त आरोप के लिए श्री मदन कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1) (क) के प्रावधान के तहत् तात्कालिक प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 10 के तहत अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
4. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय, सारण (छपरा) निर्धारित किया जाता है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, संयुक्त सचिव।
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सं॰ 2/ नि0था0-11-02/2016-सा0प्र0-17445
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संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प
30 दिसम्बर 201630 दिसम्बर 201630 दिसम्बर 201630 दिसम्बर 2016
पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 2174 दिनांक 21.09.2016 द्वारा श्री महर्षि राम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 303/11, अपर समार्हाा, नवादा को चार लाख रूपये रिष्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर दिनांक 08.09.2016 को न्यायिक हिरासत में (आदर्ष केन्द्रीय कारा, बेउर, पटना) भेजे जाने तथा उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या 087/2016 दिनांक 09.09.2016 दर्ज किये जाने की सूचना के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत् श्री राम को गिरफ्तार किये जाने की तिथि दिनांक 08.09.2016 के प्रभाव से अगले आदेष तक के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13501 दिनांक 03.10.2016 द्वारा निलंबित किया गया।
2. जिला पदाधिकारी, नवादा से श्री राम के विरूद्ध र्काव्यों के निर्वहन में की गयी प्रषासनिक चूक एवं बरती गयी अनियमितता के संबंध में साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' अप्राप्त रहने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(7) के प्रावधानों के तहत श्री राम के निलंबन अवधि को अगले चार माह के लिए विस्तारित किया जाता है।
3. निलंबन अवधि में श्री राम को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10 के तहत् अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा।
4. प्रस्ताव पर अनुषासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
आदेष :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
भीम प्रसाद, उप-सचिव।14 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017
सं0 dा0&व0-14(द0)मधु0-06/2015/307289-dा0&व0
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dामीण &वकास &वभाग
संक=प
11 अ"ील 2017
fी आलोक कु मार शमाI, dामीण &वकास पदाSधकार(cid:15)-सह-"भार(cid:15) "खंड &वकास पदाSधकार(cid:15), अंधराठाढ़(cid:15) (मधुबनी) के &वiY िजला पदाSधकार(cid:15), मधुबनी के प(cid:22)ांक- 1459/िज02था0 Lदनांक 08.09.2015 Rवारा (cid:1)नवाIचन कायk म\ घोर लापरवाह(cid:15) बरतने, कKतI8यह(cid:15)नता, ई0आर0ओ0 के आदेश क_ अवहेलना, (cid:1)नवाIचक (cid:1)नबंधन पदाSधकार(cid:15) के बैठक से अनुपि2थ(cid:1)त, &वLहत "प(cid:22) म\ "(cid:1)तवेदन नह(cid:15)ं उपलmध कराना, मतदाता पुनर(cid:15)Gण से संबंSधत अMभलेख उपलmध नह(cid:15)ं कराना, िजला 2तर(cid:15)य Nबहार &वधान-सभा (cid:1)नवाIचन 2015 के समीGाKमक बैठक म\ अनुपि2थ(cid:1)त आLद आरोप? के Mलए "प(cid:22) 'क' गLठत कर &वभाग को उपलmध कराया गया।
2. fी शमाI से उ/त आरोप? पर 2प*ट(cid:15)करण "ाnत ^कया गया। fी शमाI Rवारा सम&पIत 2प*ट(cid:15)करण पर िजला पदाSधकार(cid:15), मधुबनी से "ाnत मंत8य (प(cid:22)ांक- 2067/िज02था0 Lदनांक 30.11.2016) क_ समीGा &वभाग Rवारा क_ गयी। समीGोपरा7त आरो&पत पदाSधकार(cid:15) के 2प*ट(cid:15)करण को असंतोषजनक पाते हुए "ाnत कई आरोप?
क_ जाँच बृहद iप म\ कराये जाने एवं उनके कृ Kय को Nबहार सरकार(cid:15) सेवा आचार (cid:1)नयमावल(cid:15) के &वपर(cid:15)त पाते हुए fी शमाI के &वiY &वभागीय कायIवाह(cid:15) संचाMलत ^कये जाने का (cid:1)नणIय Mलया गया।
3. तRआलोक म\ Nबहार सरकार(cid:15) सेवक (वगpकरण, (cid:1)नयं(cid:22)ण एवं अपील) (cid:1)नयमावल(cid:15)-2005 के (cid:1)नयम- 17(2) के तहत ् इस &वभागीय कायIवाह(cid:15) के संचालन हेतु fी अनुराग कौशल Mसंह, &वशेष कायI पदाSधकार(cid:15), dामीण &वकास &वभाग, Nबहार, पटना को संचालन पदाSधकार(cid:15) तथा िजला पदाSधकार(cid:15), मधुबनी Rवारा नाMमत पदाSधकार(cid:15) को उप2थापन पदाSधकार(cid:15) (cid:1)नयु/त ^कया जाता है।
4. fी आलोक कु मार शमाI, dामीण &वकास पदाSधकार(cid:15)-सह-"भार(cid:15) "खंड &वकास पदाSधकार(cid:15), अंधराठाढ़(cid:15) (मधुबनी) से यह अपेGा क_ जाती है ^क वे अपने बचाव के सsब7ध म\ अपना पG रखने हेतु 15 Lदन? के अ7दर या जैसा संचालन पदाSधकार(cid:15) अनुम(cid:1)त द\, उनके समG 2वयं उपि2थत ह?गे।
आदेश:- आदेश Lदया जाता है ^क संक=प क_ "(cid:1)त Nबहार राजप(cid:22) के अगले अंक म\ "काMशत ^कया जाय तथा इसक_ "(cid:1)त सभी सsबि7धत को भेज द(cid:15) जाय।
Nबहार-राPयपाल के आदेश से,
महे7t भगत, उप-सSचव।
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VIGILANCE DEPARTMENT
FORM No. I
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DECLARATIONS
The 7th April 2017
(Under Section 5 of the Bihar Special Courts Act 2009, and Rules 7 of Bihar Special Courts Rules
2010)
No. Ni. Vi. /Stha (Vi.Nya.)-06/2016-1506— WHEREAS, It is alleged that Sri Surendra Kumar, the then Food Inspector, Patna Division, Patna S/o Late Nathu Prasad Address : Gitanjali Bhawan, Road No. 8, Ramlakhan Path, P.S. - Kankarbagh, Patna while holding the post of Sri Surendra Kumar, the then Food Inspector, Patna Division, Patna and serving in different capacities in the State of Bihar committed an offence under clause (e) of sub-section (1) of Section 13 of the Prevention of Corruption Act, 1988 and that the matter was investigated in Vigilance Case No. 19/2013 dated 16.04.2013.
AND WHEREAS, on scrutiny of relevant materials available on record, the State Government is of the opinion that there is prima facie case of Commission of The Sri Surendra Kumar, the then15 Nबहार गजट, 19 अ"ील 2017 Food Inspector, Patna Division, Patna, who has accumulated properties disproportionate to his known sources of income by resorting to corrupt means.
AND WHEREAS, it is felt necessary and expedient by the Government that the said offender should be tried for confiscation of the properties mentioned in the application by the Special Court Established under sub-section (1) of Section 3 of Bihar Special Courts Act, 2009;
NOW, THEREFORE, in exercise of the powers conferred by sub-section (1) of Section 5 of Bihar Special Courts Act, 2009, the State Government do hereby declare that the said offence be dealt with under the provision of Special Courts Act, 2009.
By order of the Governor of Bihar.
sd/- Illegible, Principal Secretary.
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