(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:20)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या ॢबह(cid:4)र
ह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क [स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 12 व(cid:27)श(cid:4)ख 1(cid:29)3(cid:29) (cid:30)श(cid:15)(cid:31)
(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 34(cid:21)) पटन(cid:4)
पटन(cid:4) म(cid:14)गलव(cid:4)र 2 मई 2(cid:15)1(cid:21)
जल संसाधन विभाग
———
अधिसूचना
13 जनवरी 2017
सं0 22 नि0सि0 (सिवान)-
)-11-11/2012&35—श्री विजय किशोर सिंह, (आई0 डी0-2002), तत्कालीन श्री विजय किशोर सिंह, (आई0 डी0-2002), तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता गाड़ा प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के पदस्थापन अवधि के दरम्यान गाड़ा के द्वारा सिवान कार्यपालक अभियन्ता गाड़ा प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के पदस्थापन अवधि के दरम्यान गाड़ा के द्वारा सिवान कार्यपालक अभियन्ता गाड़ा प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत के पदस्थापन अवधि के दरम्यान गाड़ा के द्वारा सिवान नाले के निर्माण कार्य से संबंधित श्री विक्रम कुंवर जिलान्तर्गत रधुनाथपुर एवं हुसैनगंज प्रखंडों में कराये जा रहे सिंचाई नाले के निर्माण कार्य से संबंधित श्री विक्रम कुंवर जिलान्तर्गत रधुनाथपुर एवं हुसैनगंज प्रखंडों में कराये जा रहे सिंचाई स0 वि0 स0 से प्राप्त परिवाद की जॅाच उड़नदस्ता अंचल से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जॅाच स0 वि0 स0 से प्राप्त परिवाद की जॅाच उड़नदस्ता अंचल से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जॅाच स0 वि0 स0 से प्राप्त परिवाद की जॅाच उड़नदस्ता अंचल से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेतन के समीक्षोपरान्त इसकी छाया प्रति संलग्न करते हुए पायी गई अनियमितता के संबंध में विभागीय पत्रांक 1119 प्रतिवेतन के समीक्षोपरान्त इसकी छाया प्रति संलग्न करते हुए पायी गई अनियमितता के संबंध में विभागीय पत्रांक 1119 प्रतिवेतन के समीक्षोपरान्त इसकी छाया प्रति संलग्न करते हुए पायी गई अनियमितता के संबंध में विभागीय पत्रांक 1119 दिनांक 12.10.12 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण पूछा गया। तदालोक में श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त 12 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण पूछा गया। तदालोक में श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त 12 द्वारा श्री सिंह से स्पष्टीकरण पूछा गया। तदालोक में श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरान्त उनके विरूद्व निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-''क'' गठित कर बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 उनके विरूद्व निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-''क'' गठित कर बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 उनके विरूद्व निम्नलिखित आरोपों के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-''क'' गठित कर बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 188 दिनांक 20.01.15 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः- (बी0) के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 188 दिनांक 20 रा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः- सिवान जिला अनतर्गत रघुनाथपुर प्रखण्ड में गाड़ा प्रमण्डल, छपरा द्वारा पॅाच अद्द विभिन्न नहर प्रणालियों से सिवान जिला अनतर्गत रघुनाथपुर प्रखण्ड में गाड़ा प्रमण्डल, छपरा द्वारा पॅाच अद्द विभिन्न नहर प्रणालियों से सिवान जिला अनतर्गत रघुनाथपुर प्रखण्ड में गाड़ा प्रमण्डल, छपरा द्वारा पॅाच अद्द विभिन्न नहर प्रणालियों से निःसृत पक्का नाला निर्माण कार्य कराया गया। उड़नदस्ता द्वारा जॅाचित चार अद्द नाला निर्माण कार्य योजनाओं का निःसृत पक्का नाला निर्माण कार्य कराया गया। उड़नदस्ता द्वारा जॅाचित चार अद्द नाला निर्माण कार्य योजनाओं का निःसृत पक्का नाला निर्माण कार्य कराया गया। उड़नदस्ता द्वारा जॅाचित चार अद्द नाला निर्माण कार्य योजनाओं का ें व्यवहृत सीमेंट, मोर्टार, प्लास्टर तथा पी0 सी0 सी0 प्रावधानित सीमेंट बालू के अनुपात से बालू की ें व्यवहृत सीमेंट, मोर्टार, प्लास्टर तथा पी0 सी0 सी0 प्रावधानित सीमेंट बालू के अनुपात से बालू की स्थलीय जॅाच में व्यवहृत सीमेंट, मोर्टार, प्लास्टर तथा पी0 सी0 सी0 प्रावधानित सीमेंट बालू के अनुपात से बालू की मात्रा अधिक पाया गया। जो निम्नवत हैः- मात्रा अधिक पाया गया। जो निम्नवत हैः-
| क्र0 | कार्य का नाम | प्राक्कलन के अनुसार लिये गये नमुने की विशिष्टि | जॅाच के दौरान एकत्रित नमुने की जॅाचफल (cement, sand by volume) | अभ्युक्ति |
| 1. | कटवार w/c के वि0 दू0-0 क वि0 दू0-0.90 (R) े से निस्सृत नाला | Plaster 1ः6 PCC 1ः2ः4 | 1ः7.4 1ः2.8 | बालू ज्यादा पाया गया |
| 2. | कटवार w/c के वि0 दू0-2 के वि0 दू0-2.4(R) से निस्सृत नाला | Plaster 1ः6 PCC 1ः2ः4 | 1ः8.9 1ः3.4 | बालू ज्यादा पाया गया |
| 3. | चंदपुर वितरणी के वि0दू0 -51. 25(R) से निस्सृत नाला | PCC 1ः2ः4 | 1ः4.3 | बालू ज्यादा पाया गया |
| 4. | रघुनाथपुर उप वितरणी के वि0दू0-20.50(R) से निस्सृत नाला | Cement mortar 1ः6 PCC 1ः2ः4 | 1ः8.9 1ः4.4 | बालू ज्यादा पाया गया |
उपरोक्त विवरणी से स्पष्ट है कि नाला निर्माण कार्य में सीमेंट, मोर्टार, प्लास्टर तथा पी0 सी0 सी0 कार्य में बालू की मात्रा अधिक पाया गया। जो मान्य सीमा के अन्तर्गत नहीं है तथा भुगतान प्राक्कलन में प्रावधानित विशिष्टि के अनुरूप करने के कारण सरकारी राशि का क्षति हुआ। जिसके लिए आप दोषी है।
उक्त विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 2616 दिनांक 01.12.15 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
कदवार जलवाहा के वि0 दू0-2.4 आर0 से निःसृत नाला के प्लास्टर में सीमेंट की मात्रा में 29.29% की कमी रघुनाथपुर उप वितरणी के वि0 दू0 20.5 आर0 से निःसृत नाला के मोर्टार एवं कंक्रीट में सीमेंट की मात्रा में क्रमशः 29. 29% एवं 25.53% की कमी होने से सीमेंट बालू के अनुपात में बालू की मात्रा अधिक पाये जाने के फलस्वरूप भुगतान प्राक्कलन में प्रावधानित विशिष्टि के अनुरूप करने से सरकारी राशि की क्षति का आरोप प्रमाणित होता है।
श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में मुख्य रूप से निम्नांकित बातें कही गयी हैः-
(i) संवेदक के विपत्र से जमानत की राशि 10 प्रतिशत रोक कर भुगतान किया गया है, जिसकी विवरणी निम्न प्रकार हैः-
| क्र | कार्य का नाम | स्वीकृत प्राक्कलन की राशि | एकरारनामा की राशि | प्रथम चालू विपत्र से संवेदक को चेक से किया गया भुगतान | कुल जमा जमानत की राशि | मापपुस्त सं0 एवं पृष्ट |
| 1. | कटवार जलवाहा के वि0 दू0 2.4 आर0 से निःसृत नाला का निर्माण कार्य | 322931 | 319764 | 249744 | 8000 एवं 25046 | 843 पृ0-50 |
| 2. | रघुनाथपुर उप वितरणी के वि0 दू0 20.5 आर0 से निःसृत नाला का निर्माण कार्य | 276973 | 274256 | 216522 | 6600 एवं 21700 | 844 पृ0-29 |
| कुल जोड़ः- | 599904 | 594020 | 466266 | 61346 |
इस प्रकार संवेदक को 466266/-का भुगतान किया गया है एवं 61346/- रोककर रखा गया है। संवेदक के विपत्र से काटी गयी इस राशि से किसी प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर वसूली की जा सकती है। अंतिम विपत्र पारित करते समय तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक 2961 दिनांक 03.12.90 के दिशा निर्देश के अनुसार भी आवश्यक कार्रवाई कर जमानत की राशि से वसूली की जा सकती है। अतः सरकारी राशि की क्षति का आरोप प्रमाणित नहीं होता है।
(ii) मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक 2961 दिनांक 03.12.90 से यह भी स्पष्ट है कि प्रयोगशाला जॅाचफल बहुत कारणों से प्रभावित होता है, जिसमें 25 प्रतिशत तक की भिन्नता को अनुज्ञेय सीमा के अन्दर माना जा सकता है।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 मई 2017 (iii) सीमेंट मोर्टार एवं सीमेंट प्लास्टर में सीमेंट की मात्रा में कमी का कारण Hand Mixing नमूना एक साल बाद लिया जाना, नालों में पानी का चलना एवं वायुमंडलीय प्रभाव हो सकता है। (iv) पी0 सी0 सी0 कार्य के उपर 12 कि0 मी0 का प्लास्टर किया गया था। पी0 सी0 सी0 का नमुना नाला के उपरी भाग से कहीं कहीं से एक जगह का लिया गया था, जिससे प्लास्टर नमूने में सम्मिलत हो गये थे। इसके कारण भी जॅाचफल में बालू की मात्रा में बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है। (v) गुण नियंत्रण के लिए गाड़ा में प्रयोगशाला की व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण अनुमान के आधार पर गुणवत्ता का आकलन कर भुगतान किया जाता था। अगर प्रयोगशाला की व्यवस्था होती तो गुण नियंत्रण से जॅाच प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरान्त ही भुगतान किया जाता।
(vi) नियमानुसार निर्माण कार्य में कार्यपालक अभियन्ता को भुगतान हेतु कार्य का दस प्रतिशत स्वयं जॅाच करना चाहिए जो कि इनके द्वारा किया गया है। कार्य क्षेत्र बड़ा होने के कारण एक कार्य स्थल पर उपस्थित रहकर कार्य कराना इनके लिए संभव नहीं था। कार्य स्थल पर हमेशा उपस्थित रहकर समुचित ढ़ग से कार्यो का निष्पादन कराने की जिम्मेवारी संबंधित कनीय अभियनता एवं अवर प्रमण्डल पदाधिकारी की होती है। अगल बालू की मात्रा थोड़ी अधिक है तो इसके लिए वे जिम्मेवार है। उक्त द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव की समीक्षा से स्पष्ट हुआ किः- नाला निर्माण कार्य अन्तर्गत उड़नदस्ता द्वारा एकत्रित नमूनों की जॅाचोपरान्त सिंचाई गवेषण संस्थान, खगौल द्वारा दिये गये जॅाचफल निम्नवत उद्धृत किया जाता हैः-
| क्र॰ | कार्य का नाम | प्राक्कलन के अनुसार लिये गये नमूने की विशिष्टि | जॅाचफल | सीमेंट की मात्रा में कमी |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1. | कटवार w/c के लिए वि0 दू0-2.4 (R) से निस्सृत नाला | Plaster 1ः6 PCC 1ः2ः4 | 1ः8.9 1ः3.4 | 29.29% 16.67% |
| 2. | रघुनाथपुर उप वितरणी के वि0दू0-20.4 (R) से निस्सृत नाला | Mortar 1ः6 PCC 1ः2ः4 | 1ः8.9 1ः4.4 | 29.29% 25.53% |
नालों में प्लास्टर कार्य में सीमेंट की मात्रा 29.29% की कमी पायी गयी है। इसी प्रकार रघुनाथपुर उप वितरणी वि0 दू0 के 20.5 (R) से निस्सृत नाला के मोर्टार में तथा पी0 सी0 सी0 में सीमेंट की मात्रा में क्रमशः 29.29% एवं 25.53% कमी पायी गयी है।
तकनीकी परीक्षक कोषांग (मंत्रिमंंडल निगरानी विभाग) के पत्रांक 2961 दिनांक 03.12.90 के अनुसार कार्य कराने में बरती गयी सावधानियॅा एवं गुणवत्ता नियंत्रण के बाद भी जॅाचफल में 25 प्रतिशत तक की भिन्नता को अनुज्ञय सीमा के अन्तर्गत माना जा सकता है। इसमें जॉच फल प्रभावित होने के विभिन्न कारणों यथा संधटक के प्रकार रासायनिक रचना, कारीगरी, माप आयतन या वजन से, सैम्पल लेने का तरीका, इत्यादि को समाहित किया गया है। श्री सिंह द्वारा Hand Mixing एवं नमूना एक साल बाद लिये जाने को सीमेंट की मात्रा में कमी का कारण बताया गया है। लेकिन ये कारण जॅाचफल प्रभावित करनेवाले कारणों में सम्मिलत नहीं है। इनके द्वारा नालों में पानी का चलना, वायुमंडलीय प्रभाव, नमूने संग्रहित किये जाने में प्लास्ट का अंश पी0 सी0 सी0 में सम्मिलत हो जाने को भी सीमेंट की मात्रा में कमी का कारण बताया गया है, जिसे स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। इनका यह कहना मान्य किया जा सकता है कि जॅाच के लिए प्रयोगशाला नहीं रहने से अनुमान के आधार पर गुणवत्ता का आकलन कर भुगतान किया जाता था, लेकिन न्यून विशिष्टि के लिए इसे आधार नहीं बनाया जा सकता।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आरोप प्रमाणित होता है। श्री सिंह द्वारा दो अद्द कार्यो के लिए प्रथम चालू विपत्र से 466266/- का भुगतान किया गया है। तकनीकी परीक्षक कोषांग, मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पत्रांक 462 दिनांक 30.03.1982 द्वारा कार्यपालक अभियंता को दस प्रतिशत कार्य की जॅाच करनी है।
अतः उक्त प्रमाणित आरोप के लिए सरकार द्वारा श्री सिंह को विभागीय अधिसूचना सं0 1771 दिनांक 19.08. 16 द्वारा ''दस प्रतिशत पेंशन से कटौती एक वर्ष के लिए'' का दण्ड अधिरोपित किया गया।
उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह ने अपने पत्रांक 01 दिनांक 14.09.16 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दिया गया, जिसमें मुख्यतः निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया हैः-4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 मई 2017 संवेदक को कार्य आवंटन के उपरान्त एकरारनामा करते समय एवं प्रथम चालू विपत्र से जमानत की कुल राशि 10% रोक कर इनके द्वारा भुगतान किया गया था। इनके द्वारा कटवार जलवाह के वि0 दू0 20.5 (R) से निस्सृत नाला के निर्माण कार्य के तहत जाँचित मद से संबंधित भुगतान की मात्रा एवं राशि तथा पायी गयी त्रृटियों के कारण सिमेन्ट में कमी की मात्रा का आकलन विवरणी उद्धृत किया गया है तथा कहा गया है कि दोनों कार्यों जिसमें जाँचफल में सिमेंट की मात्रा अनुज्ञेय सीमा 25 प्रतिशत से कम पायी गयी है। जो कि गणना के अनुसार कुल 3.61 बैग (120. 61= 3.61) सिमंेंट की कमी माना जा सकता है। इन दोनों कार्यों के प्रथम चालू विपत्र से कुल 466266.00 का भुगतान किया गया है जिसमें नाला के सभी मदों की राशि सम्मिलित है। दोनों नाला में मात्र तीन मद के जाँचफल में सिमेंट की मात्रा की कमी अनुज्ञेय सीमा 25 प्रतिशत से अधिक पायी गयी है। जिसमें मदवार कुल भुगतान 142090.85 (17517.9164839.9459733.00=1,42,090.85) किया गया है।
तकनीकी परीक्षक कोषांग के पत्रांक 462 दिनांक 30.03.82 द्वारा कार्यपालक अभियंता को 10% कार्य की मापी कार्यपालक अभियंता को जाँच करना होता है। संवेदक से जमानत की राशि 61346.00 रोक रखा गया था। उस मद में भुगतान का 10 प्रतिशत रू0 14200 ही होता है जिसकी वसूली संवेदक से की जा सकती है। इस प्रकार सरकारी राशि की क्षति का प्रश्न नहीं उठता है।
कार्यस्थल पर जगह की कमी के कारण छोटे-छोट Plateform पर Hand Mixing से तैयार किया जाता था। ऐसी परिस्थिति में सिमेंट बालू के मिश्रण में बालू की मात्रा कहीं-कहीं घट बढ़ जाने की संभावना होती है। जाँच हेतु नमूना कहीं-कहीं से एक साल बाद लिया गया था। जिसके कारण नालों में पानी चलने एवं वायुमंडलीय प्रभाव से भी सिमेंट की जाँच में कमी आ सकती है।
गाड़ा में नालों का निर्माण कार्य किसानों की समिति द्वारा चयनित अभिकर्त्ता द्वारा कराया जाता है। गुण नियंत्रण के लिए गाड़ा में प्रयोगशाला की व्यवस्था नहीं थी। अगर प्रयोगशाला की व्यवस्था होती तो गुण नियंत्रण से जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कर ही भुगतान किया जाता। ऐसी स्थिति में कार्य की गुणवत्ता मेंं अगर थोड़ी कमी पायी गयी है तो इसके लिए जमानत की राशि से वसूली की जा सकती है।
इनके द्वारा अधिरोपित दण्ड ''दस प्रतिशत पेंशन से कटौती एक वर्ष के लिए'' के अनुसार वर्त्तमान में वसूली की जाने वाली राशि की गणनाकी गई है। जिसके अनुसार कुल 6962x12=83544/- बतायी गयी है। जबकि तीनों कार्य मद में कुल भुगतान की राशि 142090/- का 10% रू0 14200 होता है तथा संवेदक की कुल जमानत की राशि 61346.00 रूपये रोक कर रखी गयी है, से वसूली की जा सकती है। ऐसी परिस्थिति में एक निर्दोष पेंशन भोगी के पेंशन से 10 प्रतिशत की राशि की कटौती का दण्ड न्यायसंगत नहीं है।
उक्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी जिसमें पाया गया कि श्री सिंह द्वारा अपने पुनर्विलोकन अर्जी में अधिकांशतः वही तथ्य उद्धृत किया गया है जिसका उल्लेख संचालन पदाधिकारी के समक्ष दिये गये बचाव बयान एवं द्वितीय कारण पृच्छा में किया है। इनके पुनर्विलोकन अर्जी को निम्न तथ्यों के आधार पर अस्वीकार योग्य पाया गयाः-
(i) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन से स्पष्ट रूप से स्थापित होता है कि दोनों नाला निर्माण कार्य में प्लास्टर, मोर्टार तथा पी0 सी0 सी0 का कार्य एकरारनामा के विरूद्ध न्यून विशिष्टि का कराया गया है जिसके पुनर्विलोकन अर्जी में इनके द्वारा भी स्वीकार किया गया परिलक्षित होता है।
(ii) न्यून विशिष्टि के कार्य होने की स्थिति में नाला के स्थायित्व पर भी प्रभाव पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
(iii) जहाँ तक अनियमित भुगतान की वसूली संवेदक से करने का प्रश्न है। आरोपी द्वारा न्यून विशिष्टि के कार्य के विरूद्ध किये गये भुगतान की कुल राशि 142099 रूपये बताया गया एवं संवेदक का जमानत के रूप में जमा राशि का कुल 61346/- बताया गया है। ऐसी स्थिति में अनियमित भुगतान की राशि 142099/- रूपये के बदले 10 प्रतिशत यानि 14200/- रूपये की वसूली हो जाने के आधार पर सरकार को क्षति नहीं होना बताया जाना, सरकारी हित एवं नियमानुकूल उचित नहीं है।
(iv) किसी भी सरकारी सेवक के अनियमित कृत्य के कारण सरकार को हुई क्षति की वसूली का ही दण्ड अधिरोपित करने का प्रावधान नहीं है। बल्कि दायित्वों का निर्वहन नहीं करने, सरकारी सेवक के क्रियाकलाप एवं कार्य के प्रति उदासीनता के लिए भी दण्ड अधिरोपित करने का प्रावधान है। अतएव आरोपी का कहना कि न्यून विशिष्टि के कार्य के कारण सरकार को हुई क्षति की कुल राशि का 10 प्रतिशत तक की ही इनकी जिम्मेवारी थी, जिसके तहत सरकार को हुई कुल 14200/- रूपये की5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 मई 2017 क्षति के बदले अधिरोपित दण्ड के कारण कुल 83544/- रूपये की वसूली करना न्यायसंगत नहीं है, को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री विजय किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए पूर्व में अधिरोपित निम्न दण्ड को बरकरार रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया हैः-
''दस प्रतिशत पेंशन से कटौती एक वर्ष के लिए''। उक्त निर्णय श्री विजय किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, गाड़ा प्रमण्डल, छपरा सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के उप-सचिव।
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ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 347%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in