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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 02 May 2017

Published 02 May 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-05-02.348
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

———

अधिसूचना

18 जनवरी 2017

सं0 22 नि0 सि0 (वीर0)-07

वीर0)-07-02/2011&62—श्री जवाहर लाल मंडल (आई0 डी0 4456), तत्कालीन श्री जवाहर लाल मंडल (आई0 डी0 4456), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया सम्प्रति अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमण्डल, कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया सम्प्रति अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमण्डल, कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया सम्प्रति अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमण्डल, पद पर पदस्थापित थे। तब जलालगढ़ (पूर्णियाँ) द्वारा जब कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया के पद पर पदस्थापित थे। तब जलालगढ़ (पूर्णियाँ) द्वारा जब कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया के 00 (छियालीस हजार एक सौ इनके विरूद्ध वेतन स्थापना मद के विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से रू0 46161.00 (छियालीस हजार एक सौ इनके विरूद्ध वेतन स्थापना मद के विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से रू0 46161 एकसठ) तथा वेतन स्थापना मद के विपत्र सं0 123 ई0/2010-11 से रू0 41593.00 (एकतालीस हजार पाँच सौ 00 (एकतालीस हजार पाँच सौ एकसठ) तथा वेतन स्थापना मद के विपत्र सं0 123 ई0/2010-11 से रू0 41593 तिरानवे) की अनियमित निकासी के संबंध में बरती गयी अनियमितता के प्रथम दृष्टया प्रमाणित निम्न आरोपों के लिए अनियमितता के प्रथम दृष्टया प्रमाणित निम्न आरोपों के लिए तिरानवे) की अनियमित निकासी के संबंध में बरती गयी 15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली विभागीय संकल्प ज्ञापाक 462 दिनांक 16.02.15 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली विभागीय संकल्प ज्ञापाक 462 दिनांक 16 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः- 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः- आरोप सं0 1- वेतन स्थापना मद के विपत्र

- वेतन स्थापना मद के विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से रू0 46161

सं0 118 ई0/2010-11 से रू0 46161.00 की अनियमित निकासी के संबंध मेें।

0 से 05 अक्टूबर, 2010 तक बॉल पेन से लाईन खींचे आपके प्रमण्डल कोपरिया का कार्यालय प्रधान तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के समयकाल में वेतन आपके प्रमण्डल कोपरिया का कार्यालय प्रधान तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के समयकाल में वेतन आपके प्रमण्डल कोपरिया का कार्यालय प्रधान तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के समयकाल में वेतन स्थापना मद के विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया का स्थापना मद के विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिय स्थापना मद के विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिय माह जून, 2010 से सितम्बर, 2010 तक वेतन एकमुश्त 00 (छियालीस हजार एक सौ एकसठ) रू0 मात्र सितम्बर, 2010 तक वेतन एकमुश्त मो0 46161.00 (छियालीस हजार एक सौ एकसठ) रू0 मात्र निकासी माह नवम्बर, 2010 में की गयी जो नियमानुसार नहीं है। संलग्न साक्ष्यों से स्पष्ट है कि श्री जितेन्द्र कुमार, निकासी माह नवम्बर, 2010 में की गयी जो नियमानुसार नहीं है। संलग्न साक्ष्यों से स्पष्ट है कि श्री जितेन्द्र कुमार, निकासी माह नवम्बर, 2010 में की गयी जो नियमानुसार नहीं है। संलग्न साक्ष्यों से स्पष्ट है कि श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक के द्वारा प्रमण्डलीय उपस्थिति पंजी में माह जून, 1 अनुरेखक के द्वारा प्रमण्डलीय उपस्थिति पंजी में माह जून, 10 से 05 अक्टूबर, 2010 तक बॉल पेन से लाईन खींचे भाग में उपस्थिति बनाई गई है एवं भरपाई पंजी में माह जून, 2010 के वेतन विपत्र में श्री कुमार के आगे डैश होने भाग में उपस्थिति बनाई गई है एवं भरपाई पंजी में माह जून, 2010 के वेतन विपत्र में श्री कुमार के आगे डैश होने भाग में उपस्थिति बनाई गई है एवं भरपाई पंजी में माह जून, 2010 के वेतन विपत्र में श्री कुमार के आगे डैश होने तथा जुलाई, 2010 से सितम्बर, 2010 तक वेतन विपत्रों पर श्री कुमार के नाम के आगे उपार्जित अवकाश लिखे होने तथा जुलाई, 2010 से सितम्बर, 2010 तक वेतन विपत्रों पर श्री कुमार के नाम के आगे उपार्जित अवकाश् तथा जुलाई, 2010 से सितम्बर, 2010 तक वेतन विपत्रों पर श्री कुमार के नाम के आगे उपार्जित अवकाश् के बावजूद श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक का माह जून, 2010 से सितम्बर, 2010 तक का वेतन एक साथ 46161 के बावजूद श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक का माह जून, 2010 से सितम्बर, 2010 तक का वेतन एक साथ 46161.00 रू0 के बावजूद श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक का माह जून, 2010 से सितम्बर, 2010 तक का वेतन एक साथ 46161 का निकासी अलग से माह नवम्बर, 2010 में विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से आपके द्वारा की गयी जो कि का निकासी अलग से माह नवम्बर, 2010 में विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से आपके द्वारा की गयी जो कि का निकासी अलग से माह नवम्बर, 2010 में विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से आपके द्वारा की गयी जो कि अनियमित है।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 मई 2017 आप कार्यालय प्रधान तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी थे। ऐसे में आपके बिना जानकारी के अलग से विपत्र तैयार होकर निकासी होना संभव नहीं प्रतीत होता है। अतः इसके लिए आप दोषी प्रतीत होते हैं।

आरोप सं0 2।- वेतन स्थापना मद के विपत्र सं0 123 ई0/2010-11 से रू0 41593.00 (एकतालीस हजार पाँच सौ तिरानवे) की अनियमित निकासी के संबंध मेें।

विपत्र सं0 123 ई0/2010-11 से श्री चन्द्र किशोर साह, अनुसेवक, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया का दिनांक 09.06.10 से 31.08.10 तक का वेतन एक ही विपत्र से मो0 41593.00 रू0 का माह नवम्बर, 2010 में आपके द्वारा की गयी, जो नियमानुसार नहीं है। संलग्न साक्ष्यों से स्पष्ट है कि श्री चन्द्र किशोर साह, अनुसेवक द्वारा प्रमण्डलीय उपस्थिति पंजी दिनांक 14.06.10 तक बॉल पेन से लाईन खींची भाग में उपस्थिति बनाना दिनांक 09.06.10 से 12.06.10 तक बॉल पेन से लाईन खींचे भाग में सी0 एल0 अंकित रहना तथा वेतन भरपाई पंजी में माह जून, 10 के वेतन में दिनांक 01.06.10 से 08.06.10 तक वेतन बनाना माह जुलाई, 10 एवं अगस्त, 10 के वेतन विपत्र में श्री साह के नाम के आगे उपार्जित अवकाश रहने के आधार पर आपके द्वारा पत्रांक 887 दिनांक 11.10.10 द्वारा निर्गत आदेश अनियमित है।

आप कार्यालय प्रधान तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी थे, आपके पत्रांक 887 दिनांक 11.10.10 से निर्गत आदेश गलत प्रतीत होता है तथा इसी आदेश के आलोक में आपके द्वारा विपत्र सं0 123 ई0/2010-11 एक साथ 41593.00 रू0 का अनियमित निकासी अलग से विपत्र माह नवम्बर, 10 में करने के लिए दोषी प्रतीत होते हैं। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। विभागीय समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री मंडल से विभागीय पत्रांक 126 दिनांक 19.01.16 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

श्री मंडल द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में निम्न का उल्लेख किया गया हैः-

(i) आरोप सं0 1 के संबंध में।- श्री मंडल द्वारा आरोप सं0 1 के संदर्भ में कहा गया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित विभागीय कार्यवाही की जाँच प्रतिवेदन में विभागीय गवाहों का परीक्षण नहीं किया गया है, केवल तथ्य के आधार पर आरोप को सिद्ध पाया गया है। उपस्थिति पंजी के आधार पर बिल क्लर्क द्वारा विपत्र बनाया जाता है जिसकी जाँच प्रमण्डलीय लेखा पदाधिकारी द्वारा की जाती है। प्रमण्डलीय लेखा पदाधिकारी के जाँचोपरान्त ही कार्यपालक अभियंता द्वारा विपत्र पर हस्ताक्षर किया जाता है। इस मामले में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार ही विपत्र बनाकर उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसलिए आरोप सं0-1 के संदर्भ में मुझे दोषी ठहराया जाना न्यायसंगत नहीं है। (ii) आरोप सं0 2 के संबंध में।- श्री मंडल द्वारा आरोप सं0 2 के संदर्भ में कहा गया है कि बिहार सेवा संहिता के नियम 227, 230 एवं 240 के तहत कार्यालय आदेश सं0 887 दिनांक 11.10.10 द्वारा श्री चन्द्र किशोर साह के चार दिनों का उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया गया था। उपार्जित अवकाश की स्वीकृति के पश्चात ही श्री साह का वेतन भुगतान किया गया है। अतः आरोप सं0 2 भी मुझपर प्रमाणित नहीं होता है।

श्री मंडल द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की विभागीय समीक्षा निम्न रूप में की गयी हैः- गठित प्रपत्र 'क' एवं इसके साथ संलग्न साक्ष्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि श्री जितेन्द्र कुमार, अनुरेखक, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया माह जून, 2010से पाँच अक्टूबर, 2010 तक कार्यालय से अनुपस्थित रहे हैं क्योंकि कार्यालय मेें संधारित उपस्थिति पंजी में इनके नाम के आगे बॉल पेन से सीधी लाईन खींंची हुई है। बाद में श्री कुमार के द्वारा इसे क्रॉस कर अपनी उपस्थिति बनायी गयी है। इसके बावजूद भी स्थापना लिपिक, विपत्र लिपिक एवं लेखा पदाधिकारी की मिली भगत से श्री कुमार के माह जून, 2010 से अक्टूबर, 2010 तक के विपत्र सं0 118 ई0/2010-11 से एकमुश्त 46161.00 रू0 (छियालीस हजार एक सौ एकसठ) की निकासी की गयी। आरोपी पदाधिकारी श्री मंडल का यह तर्क की संचालन पदाधिकारी द्वारा गवाहों का परीक्षण नहीं किया गया तथा जान-बूझ कर उन्हें आरोपी सिद्ध किया गया मान्य नहीं है, क्योंकि इस मामले की उपस्थिति पंजी की छायाप्रति प्रपत्र 'क' में गठित आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है। संचालन पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य के आधार पर ही आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। जबकि प्रपत्र 'क' में गठित आरोपों को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद है। वैसी स्थिति में गवाहों के परीक्षण का कोई औचित्य नहीं है। कार्यालय प्रधान होने के नाते कार्यपालक अभियंता का यह जिम्मेवारी है कि वह कार्यालय में अपने अधीनस्थ कर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करें एवं एवं अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित कर्मियों के विरूद्ध कार्रवाई करें, जबकि इस मामले में श्री मंडल द्वारा अनुपस्थित कर्मियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके विरूद्ध अनुपस्थित कर्मियों का एकमुश्त वेतन भुगतान भी किया गया। इसलिए श्री मंडल का द्वितीय कारण पृच्छा भी स्वीकार योग्य नहीं है।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 मई 2017 उक्त वर्णित स्थिति में विभागीय समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए श्री जवाहर लाल मंडल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, कोपरिया सम्प्रति अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, सिंचाई अवर प्रमण्डल, जलालगढ़, पूर्णियाँ को निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया हैः- (1) ''संचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक''।

उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का सहमति प्राप्त है। सरकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री जवाहर लाल मंडल को निम्न दण्ड दिया जाता हैः- (1) ''संचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्धि पर रोक''।

उक्त आदेश श्री जवाहर लाल मंडल को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के उप-सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 02 May 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-05-02.348/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-05-02.348.