Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 02 May 2017

Published 02 May 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-05-02.351
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

(cid:4)नबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:20)0-40 (cid:4)नबंधन सं(cid:10)या ॢबह(cid:4)र

ह(cid:4)र गजट

[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क [स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 12 व(cid:26)श(cid:4)ख 1(cid:28)3(cid:28) (cid:29)श(cid:15)(cid:30)

(स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 351) पटन(cid:4)

पटन(cid:4)(cid:31) म(cid:14)गलव(cid:4)र(cid:31) 2 मई 2(cid:15)1"

ty lalk/ku foHkkx

———

vf/klwpuk

15 Qjojh 2017

सं0 22 नि0सि0 (देव॰)-10

10-125/94&240—श्री रामस्वरूप प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई श्री रामस्वरूप प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल, सिकन्दरा सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि वर्ष 1986-87 से 1988-89 में बरती गई प्रमंडल, सिकन्दरा सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि वर्ष 1986-87 से 1988-89 में बरती गई प्रमंडल, सिकन्दरा सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि वर्ष 1986-87 से 1988-89 में बरती गई अनियमितताओं की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। तीन अलग -अलग आरोपों के लिए विभागीय उड़नदस्ता अनियमितताओं की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। तीन अलग-अलग आरोपों के लिए विभागीय उड़नदस्ता द्वारा तीन जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कराया गया। उड़नदस्ता से प्राप्त तीनों जाँच प्रतिवेदन के आलोक में उनसे तीन द्वारा तीन जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कराया गया। उड़नदस्ता से प्राप्त तीनों जाँच प्रतिवेदन के आलोक में उनसे तीन द्वारा तीन जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कराया गया। उड़नदस्ता से प्राप्त तीनों जाँच प्रतिवेदन के आलोक में उनसे तीन स्पष्टीकरण किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त तीनों स्पष्टीकरण की समीक्षा एक साथ की गयी। समीक्षोपरान्त विभागीय स्पष्टीकरण किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त तीनों स्पष्टीकरण की समीक्षा एक साथ की गयी। समीक्षोपरान्त विभागीय स्पष्टीकरण किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त तीनों स्पष्टीकरण की समीक्षा एक साथ की गयी। समीक्षोपरान्त विभागीय आदेश सं0 1002 सह-पठित ज्ञापांक 2940 दिनांक 15

1002 सह-पठित ज्ञापांक 2940 दिनांक 15.09.97 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-

97 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-

''15 (पन्द्रह) प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक।'' ''15 (पन्द्रह) प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक।'' एक अन्य मामले में जब श्री प्रसाद, कमला नहर प्रमण्डल, जयनगर में कार्यपालक अभियंता के पद पर 2. एक अन्य मामले में जब श्री प्रसाद, कमला नहर प्रमण्डल, जयनगर में कार्यपालक अभियंता के पद पर एक अन्य मामले में जब श्री प्रसाद, कमला नहर प्रमण्डल, जयनगर में कार्यपालक अभियंता के पद पर

01.1997 को सेवानिवृत होना था लेकिन श्री प्रसाद द्वारा अवैध रूप से दिनांक 30

सेवानिवृत होना था लेकिन श्री प्रसाद द्वारा अवैध रूप से दिनांक 30.05. पदस्थापित थे तब उन्हें दिनांक 31.01 1997 तक पद पर बने रहे एवं वेतनादि प्राप्त करते रहे। उपरोक्त आरोप के लिए इनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1997 तक पद पर बने रहे एवं वेतनादि प्राप्त करते रहे। उपरोक्त आरोप के लिए इनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली 1997 तक पद पर बने रहे एवं वेतनादि प्राप्त करते रहे। उपरोक्त आरोप के लिए इनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के तहत कार्रवाई की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त उक्त के नियम-43 (बी0) के तहत कार्रवाई की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम के नियम-43 (बी0) के तहत कार्रवाई की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम .99 द्वारा निम्न दण्ड आरोप प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय आदेश सं0 2117 दिनांक 08.07. आरोप प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय आदेश सं0 2117 दिनांक 08 संसूचित किया गयाः-

यदि कोई नोशनल प्रोन्नति देय हो तो उससे वंचित रहेंगे।

(क) यदि कोई नोशनल प्रोन्नति देय हो तो उससे वंचित रहेंगे। (ख) दिनांक 01.02.97 से दिनांक 30

ं प्राप्त किये गये वेतन एवं सभी प्रकार के 97 से दिनांक 30.05.97 तक की अवधि में प्राप्त किये गये वेतन एवं सभी प्रकार के (ग) 20 (बीस) प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक।

भत्ते आदि से एकमुश्त वसूली इनके उपादान से की जाय। भत्ते आदि से एकमुश्त वसूली इनके उपादान से की जाय। 20 (बीस) प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक।

श्री प्रसाद द्वारा उक्त वर्णित दोनों दण्डादेशों के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में याचिका श्री प्रसाद द्वारा उक्त वर्णित दोनों दण्डादेशों के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में याचिका श्री प्रसाद द्वारा उक्त वर्णित दोनों दण्डादेशों के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में याचिका CWJC-3913/02 दायर किया गया ि -3913/02 दायर किया गया जिसमें दिनांक 29.07.09 को माननीय न्यायालय द्वारा न्याय-निर्णय पारित करते 09 को माननीय न्यायालय द्वारा न्याय-निर्णय पारित करते 09.07 एवं आदेश सं0 हुए उक्त वर्णित दोनों दण्डादेशों यथा आदेश सं0 1002 सह-पठित ज्ञापांक 2940 दिनांक 15.09 हुए उक्त वर्णित दोनों दण्डादेशों यथा आदेश सं0 1002 सह-पठित ज्ञापांक 2940 दिनांक 15 2117 दिनांक 08.07.99 को तकनीकी आधार पर निरस्त कर दिया गया, साथ ही श्री प्रसाद से कारण पृच्छा करने एवं 99 को तकनीकी आधार पर निरस्त कर दिया गया, साथ ही श्री प्रसाद से कारण पृच्छा करने एवं आरोप से उनके द्वारा इनकार करने की स्थिति में पूर्णरूपेण विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु विभागीय कार्यवाही आरोप से उनके द्वारा इनकार करने की स्थिति में पूर्णरूपेण विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु विभागीय कार्यवाही आरोप से उनके द्वारा इनकार करने की स्थिति में पूर्णरूपेण विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु विभागीय कार्यवाही पूर्ण होने तक पूर्व की तरह 65% (प्रतिशत) पेंशन भुगतान करने का आदेश पारित किया गया।

(प्रतिशत) पेंशन भुगतान करने का आदेश पारित किया गया।

2

ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 मई 2017 उक्त न्याय-निर्णय के आलोक में श्री प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से पूर्व में गठित आरोपों के आधार पर संयुक्त रूप से आरोप पत्र तैयार कर, संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 1646 दिनांक 10.11.10 द्वारा कारण पृच्छा की गयी जिसके संदर्भ में श्री प्रसाद द्वारा कहा गया कि उक्त न्याय-निर्णय के विरूद्ध उनके द्वारा एल0 पी0 ए0 सं0 1475/10 दायर की गयी है। समीक्षा में पाया गया कि उक्त एल0 पी0 ए0 सं0 1475/10 में माननीय न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश पारित नहीं किया गया है। तत्पश्चात समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 635 दिनांक 31.05. 2011 द्वारा बिहार पेंशन निमयावली के नियम-43 (बी0) के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसके संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

laf{kIr vkjksi& वित्तीय वर्ष 1986-87 से 1988-89 में जब आप सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तब उस कार्यकाल में बरती गयी अनियमितता की जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। समीक्षोपरान्त निम्नांकित आरोप पाया गयाः-

1. कोटेशन नोटिस सं0 1057 दिनांक 15.04.88 द्वारा 84 नम्बर चेन बेरियर की आपूर्ति आमंत्रित की गई परन्तु प्रमण्डलीय कार्यालय में किसी प्रकार की लेखा उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण उसकी खपत का ब्यौरा प्राप्त नहीं हुआ।

2. प्रमण्डल के मापपुस्त सं0 632 के पृष्ठ 46-48 पर चार विपत्र चढ़ाया गया है परन्तु उसके टुकड़े-टुकड़े में अलग कर पारित करने के लिए दोषी हैं।

3. मापपुस्त सं0 542 में छोटे-छोटे विपत्र चढ़ाया गया है जो नियम के विरूद्ध है। 4. भंजोषी शाखा नहर के चेन सं0 0 से 04 तक मिट्‌टी कार्य से संबंधित निविदा सूचना देखने से स्पष्ट है कि कार्य छोटे-छोटे टुकड़े करके कराया गया है जो नियम के विरूद्ध है।

5. हलसी राजवाहा, हसनपुर वितरणी एवं शमी राजवाहा में आपके अवधि में कराये गये कार्य का स्वीकृत प्राक्कलन उपलब्ध नहीं है। संबंधित अभिलेखों के अवलोकनोपरान्त भुगतान का मामला संदेहास्पद प्रतीत होता है।

6. भौरैया पे्रमडीहा प्रमण्डल आदि स्थानों पर कराये गये कार्य को बिना जाँच किये विपत्रों को पारित करने एवं अतिरेक भुगतान के संबंध में दोषी पाये गये।

7. वर्ष 1986-87 में विभिन्न सहायक अभियंताओं को दिये गये अग्रिमों से संबंधित प्रमाणक एवं मापपुस्त प्रमण्डल में उपलबध नहीं है।

8. जाँच में महादेव सिमरियॉ कॉलोनी के लिए क्रय किया गया टंकी यत्र-त़त्र पड़ा हुआ पाया। पानी टंकी की आपूर्ति से संबंधित एक कार्य का तीन एकरारनामा एक ही संवेदक के साथ करने एवं टंकी का सदुपयोग नहीं होने के फलस्वरूप सरकारी राशि का दुरूपयोग का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित होता है।

9. सिंचाई प्रमण्डल, सिकन्दरा के अन्तर्गत 10 (दस) हॉर्स पॉवर का एक पंपिंग सेट का क्रय किया गया परन्तु उसे कहीं लगाया नहीं गया इससे सरकारी राशि का दुरूपयोग किया गया।

10. आपके द्वारा 84 अदद्‌ चेन बैरियर्स का क्रय किया गया परन्तु 55 (पचपन) अदद्‌ चेन बैरियर्स कनीय अभियंता के लेखा में बेकार पड़ा रहा। इस प्रकार अनावश्यक व्यय के लिए आप उत्तरदायी हैं। 11. आपके द्वारा कॉपर सील की आपूर्ति कोटेशन प्राप्त किया गया। आपके द्वारा स्वच्छ प्रतियोगिता नहीं अपनाकर मुख्य सचिव के परिपत्र सं0 462 दिनांक 30.03.82 का उल्लंघन किया गया।

12. आपके द्वारा फरवरी, 88 में 1600 अदद चुनार बाउन्ड्री पीलर की आपूर्ति लिया गया परन्तु जाँच के समय 1365 बाउन्ड्री पीलर अव्यवहृत पाया गया। इस प्रकार 1,70,500/- रूपये अनावश्यक व्यय के लिए उत्तरदायी हैं।

13. आपके द्वारा न्यू शिविर सिकन्दरा स्थित निरीक्षण भवन के लिए क्रय किये गये 11 (ग्यारह) अदद वाटर टैंक अव्यवहृत पाये गये।

14. महादेव सिमरियॉ सिंचाई शिविर का एफ0 टाईप आवासी भवन अधूरा पाया गया। भवन का निर्माण विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया।

15. संरचना के डेक स्लैब का कार्य में लोहा बाहर दिखता है। 16. संरचना के मार्टार नमूने के जाँचफल से स्पष्ट है कि आपके द्वारा विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया।

17. नियमानुसार विपत्र की जाँच कार्यपालक अभियंता को करना चाहिए परन्तु ऐसा नहीं करने के लिए उत्तरदायी हैं।

18. जब आप कमला नहर प्रमण्डल, जयनगर में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तब आपका दिनांक 31.01.97 को सेवानिवृत होना था लेकिन अवैध रूप से दिनांक 30.05.97 तक पद पर बने रहे एवं वेतनादि प्राप्त करते रहे। उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि आपके द्वारा जान-बूझकर सेवानिवृति की तिथि के बाद सेवा में बने रहे एवं अवैध ढंग से वेतनादि प्राप्त करते रहे।

उपर्युक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त कराया गया, जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री प्रसाद को बचाव बयान देने हेतु कई बार स्मारित किया गया तथा समाचार पत्र के माध्यम से भी बचाव बयान देने हेतु अनुरोध किया गया। इसके बावजूद भी श्री3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 मई 2017 प्रसाद संचालन पदाधिकारी के समक्ष न तो उपस्थित हुए और न ही बचाव बयान समर्पित किये। संचालन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सभी आरोप प्रमाणित पाया गया। समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 205 दिनांक 13.02.14 द्वारा श्री प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी परन्तु उनके द्वारा जवाब समर्पित नहीं किया गया। श्री प्रसाद का जवाब अप्राप्त रहने के उपरान्त विभाग द्वारा पे्रस विज्ञप्ति के माध्यम से श्री प्रसाद को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने का निदेश दिया गया। इसके बावजूद उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित नहीं किया गया। श्री प्रसाद के जवाब अप्राप्त रहने की स्थिति में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि माननीय न्यायालय द्वारा उक्त वर्णित याचिका में पारित न्याय-निर्णय में वादी के असहयोग करने की स्थिति में एक पक्षीय निर्णय लेने की छूट दी गयी है। अतः न्याय-निर्णय के आलोक में सरकार द्वारा मामले के समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध उक्त वर्णित आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री रामस्वरूप प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को पूर्व में विभागीय दण्डादेशों दिनांक 15.09.97 एवं 08.07.99 को निरस्त करते हुए उक्त वर्णित दोनों आदेशों द्वारा संसूचित दण्ड को ही बरकरार रखने का निर्णय लिया गया। तदनुसार श्री प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड देने का निणर्य लिया गयाः-

(1) 35 (पैंतीस) प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक। (2) दिनांक 01.02.97 से 30.05.97 तक की अवधि में प्राप्त किये गये वेतन एवं सभी प्रकार के भत्ते की एकमुश्त वसूली।

(3) यदि कोई नोशनल प्रोन्नति देय हो तो उससे वंचित रहेंगे।

उपर्युक्त वर्णित स्थिति में श्री रामस्वरूप प्रसाद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को पूर्व में संसूचित दण्ड से संबंधित विभागीय आदेश सं0 1002 सह-पठित ज्ञापांक 2940 दिनांक 15.09.97 एवं विभागीय आदेश सं0 2117 दिनांक 08.07.99 को निरस्त किया जाता है। साथ ही उक्त वर्णित दोनों आदेशों द्वारा ही संसूचित दण्ड को बरकरार रखा जाता है। तदनुसार इन्हें निम्न दण्ड संसूचित किया जाता हैः-

(1) 35 (पैंतीस) प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक। (2) दिनांक 01.02.97 से 30.05.97 तक की अवधि में प्राप्त किये गये वेतन एवं सभी प्रकार के भत्ते की एकमुश्त वसूली।

(3) यदि कोई नोशनल प्रोन्नति देय हो तो उससे वंचित रहेंगे।

उक्त दण्डादेश के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में एल0 पी0 ए0 (LPA) सं0 1475/2010 दायर किया गया। उक्त एल0 पी0 ए0 में दिनांक 21.04.16 को पारित न्याय-निर्णय द्वारा इनके पूर्ण पेंशन का भुगतान दिनांक 30.07.2009 के प्रभाव से करने का आदेश पारित किया गया।

माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा LPA सं0 1475/2010 में पारित आदेश के विरूद्ध विभाग द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में एस0 एल0 पी0 सं0 20196/16 दायर किया गया, परन्तु माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एस0 एल0 पी0 सं0 20196/16 को खारिज कर दिया गया है।

उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0 561 दिनांक 03.03.15 द्वारा निर्गत दण्डादेश को निरस्त किया जाता है एवं साथ ही दिनांक 30.07.09 के प्रभाव से पूर्ण पेंशन भुगतान करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

उक्त निर्णय श्री रामस्वरूप प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के उप-सचिव।

————= [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 351%5'1+10%ड(cid:17)+ट,+प(cid:17)+? Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 02 May 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-05-02.351/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-05-02.351.