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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 02 May 2017

Published 02 May 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-05-02.361
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:18)या पी0ट$0-40 िनबंधन सं(cid:18)या (cid:1)ब(cid:1)ब(cid:1)ब(cid:1)बहारहारहारहार

हारहारहारहार गजटगजटगजटगजट गजटगजटगजटगजट

(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार

असाधारणअसाधारणअसाधारणअसाधारण अंकअंकअंकअंक

असाधारणअसाधारणअसाधारणअसाधारण

सरकारसरकारसरकारसरकार (cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत

ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत 12 वैशाखवैशाखवैशाखवैशाख 1939 (शशशश0)

((((संसंसंसं0 पटनापटनापटनापटना 361) ) ) ) पटनापटनापटनापटना

पटनापटनापटनापटना, मंगलमंगलमंगलमंगलवारवारवारवार, 2222 मईमईमईमई 2017

जल संसाधन विभाग ---------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 11111111 अप्रील 2017अप्रील 2017अप्रील 2017अप्रील 2017

सं0 22/नि0सि0(मोति0)-08-03/2013/

स0(मोति0)-08-03/2013/506—श्री राजेश्वर दयाल, (आई०डी०-2467), तत्कालीन अभियंता श्री राजेश्वर दयाल, (आई०डी०-2467), तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उत्तर) संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना गंडक परियोजना 2009 के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी प्रमुख (उत्तर) संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना गंडक परियोजना 2009 के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी प्रमुख (उत्तर) संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना गंडक परियोजना 2009 के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का प्रयोग करने स्थानीय सामग्री के प्रयोग करने के नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का प्रयोग करने स्थानीय सामग्री के प्रयोग करने के बावजूद सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद के अनुरूप करने आदि बावजूद सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद के अनुरूप करने आदि बावजूद सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद के अनुरूप करने आदि 15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2018, दिनांक 08 अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2018, दिनांक 08.09.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43( के तहत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- के तहत निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-

(1)(1)(1)(1) मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर अपने पत्रांक-437, दिनांक 30 2012 से उक्त तथ्यों को उजागर करते हुए मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर अपने पत्रांक-437, दिनांक 30.3.2012 से उक्त तथ्यों को उजागर करते हुए उनको प्रतिवेदित किया तथा दिनांक 31 ा, वाल्मीकिनगर द्वारा स्थल उनको प्रतिवेदित किया तथा दिनांक 31.03.12, 27.04.12 एवं 09.05.12 को भी मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा स्थल निरीक्षण कर स्थानीय स्टोन मेटल चिप्स एवं बालू के उपयोग सहित अन्य त्रुटियों को उजागर किया गया। यहाँ तक निरीक्षण कर स्थानीय स्टोन मेटल चिप्स एवं बालू के उपयोग सहित अन्य त्रुटियों को उजागर किया गया। यहाँ तक निरीक्षण कर स्थानीय स्टोन मेटल चिप्स एवं बालू के उपयोग सहित अन्य त्रुटियों को उजागर किया गया। यहाँ तक 12 के माध्यम से विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं किये कि मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर अपने पत्रांक-276, दिनांक 21.3.12 के माध्यम से विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं किये कि मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर अपने पत्रांक-276, दिनांक 21 त अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता को भुगतान लंबित रखने हेतु निदेशित करते हुए जाने के आलोक में संबंधित अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता को भुगतान लंबित रखने हेतु निदेशित करते हुए त अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता को भुगतान लंबित रखने हेतु निदेशित करते हुए प्रति उनको उपलब्ध कराया गया जिसमें मुख्य अभियंता ने आपको स्पष्ट लिखा था कि अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक प्रति उनको उपलब्ध कराया गया जिसमें मुख्य अभियंता ने आपको स्पष्ट लिखा था कि अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक प्रति उनको उपलब्ध कराया गया जिसमें मुख्य अभियंता ने आपको स्पष्ट लिखा था कि अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता निदेश की अवहेलना कर भुगतान किये/कर रहे हैं, जिसके लिए व े दोषी है, परंतु उनके द्वारा उक्त वित्तीय अभियंता निदेश की अवहेलना कर भुगतान किये/कर रहे हैं, जिसके लिए वे दोषी है, परंतु उनके द्वारा उक्त वित्तीय अनियमितता के प्रति सजग नही रहे एवं आवश्यक कार्रवाई भी नहीं की गई। फलतः अनियमित भुगतान होता रहा। अनियमितता के प्रति सजग नही रहे एवं आवश्यक कार्रवाई भी नहीं की गई। फलतः अनियमित भुगतान होता रहा। अनियमितता के प्रति सजग नही रहे एवं आवश्यक कार्रवाई भी नहीं की गई। फलतः अनियमित भुगतान होता रहा। यहाँ तक यो0 एवं मोनि0 अंचल-2, पटना द्वारा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर से प्राप्त अनेको पत्रों को संचिकाबद्ध यहाँ तक यो0 एवं मोनि0 अंचल-2, पटना द्वारा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर से प्राप्त अनेको पत्रों को संचिकाबद्ध यहाँ तक यो0 एवं मोनि0 अंचल-2, पटना द्वारा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर से प्राप्त अनेको पत्रों को संचिकाबद्ध करते हुए संचिका उपस्थापित कर वस्तुस्थिति से उनको अवगत भी कराया गया, जिससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमित ा उपस्थापित कर वस्तुस्थिति से उनको अवगत भी कराया गया, जिससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमित ा उपस्थापित कर वस्तुस्थिति से उनको अवगत भी कराया गया, जिससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमित भुगतान होने एवं सरकारी राजस्व की क्षति होने में उनकी सहभागिता है। जिसके लिए वह प्रथम दृष्टया दोषी हैं। भुगतान होने एवं सरकारी राजस्व की क्षति होने में उनकी सहभागिता है। जिसके लिए वह प्रथम दृष्टया दोषी हैं। भुगतान होने एवं सरकारी राजस्व की क्षति होने में उनकी सहभागिता है। जिसके लिए वह प्रथम दृष्टया दोषी हैं। (2) (2) (2) (2) कंक्रिट एवं रोड के कार्यों में स्थानीय

कंक्रिट एवं रोड के कार्यों में स्थानीय Singles के उपयोग के कारण कार्यों की गुणवता घटी है। विशिष्टि ण कार्यों की गुणवता घटी है। विशिष्टि के अनुरूप कार्य न ही कराने तथा विशिष्टि के विरूद्ध कार्य चलते रहने देने में उनकी सहभागिता स्पष्ट रूप से के अनुरूप कार्य न ही कराने तथा विशिष्टि के विरूद्ध कार्य चलते रहने देने में उनकी सहभागिता स्पष्ट रूप से के अनुरूप कार्य न ही कराने तथा विशिष्टि के विरूद्ध कार्य चलते रहने देने में उनकी सहभागिता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है जिसके लिए आप दोषी हैं। परिलक्षित होता है जिसके लिए आप दोषी हैं।2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 2 मईमईमईमई 2017 उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में मुख्यतः निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गया :-

((((i)))) नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के पुनस्र्थापन कार्य का एकरारनामा मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर द्वारा किया गया है। अतएव मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर का यह दायित्व है कि वे एकरारनामा की शर्त्तों के अनुसार कार्य की गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुरूप निष्पादित करावें, परंतु श्री दिनेश कुमार चौधरी एवं श्री रामपुकार रंजन, तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा अपने दायित्व का निर्वहन न कर केवल अपने पत्रांक-276, दिनांक 21.03.12, पत्रांक-437, दिनांक 30.3.12 पत्रांक-479, दिनांक 31.03.12 पत्रांक-480, दिनांक 31.03.12 पत्रांक-487, दिनांक 31.03.12 पत्रांक-499, दिनांक 09.04.12 पत्रांक-557, दिनांक 27.04.12 (निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक 27.04.12) पत्रांक-687, दिनांक 10.5.12 (निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक 09.05.12) द्वारा कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग होने एवं कार्य गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुरूप नहीं होने की सूचना देकर केवल स्थानापूर्ति की गयी है। जब अनियमितता हो रही थी और यह उनकी जानकारी में थी तो तुरंत भुगतान पर रोक लगा दिया जाना चाहिए था, जबकि प्रमंडल अंचल एवं उनका मुख्यालय कार्य स्थल के बिल्कुल समीप (walking distance) है। इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि मुख्य अभियंताओ द्वारा सोची समझी साजिश के तहत अपने दायित्व का निर्वहन न करते हुए इस प्रकार का प्रपंच रचा गया है।

((((ii)))) इस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि विभागीय पत्रांक-658, दिनांक 07.07.10 द्वारा मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर परिक्षेत्राधीन गुण नियंत्रण प्रयोगशाला सुसज्जित हो जाने के फलस्वरूप 50.00(पचास) लाख रूपये की राशि से अधिक राशि के कार्यों की गुणवत्ता एव विशिष्टि की जाँच गुण नियंत्रण शोध प्रमंडल, वाल्मीकिनगर, शिविर मोतिहारी द्वारा संपन्न कराये जाने का निदेश दिया गया है फिर भी क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा इस निदेश का अनुपालन नहीं किया गया प्रतीत होता है।

((((iii)))) दिनांक 14.04.11 से दिनांक 16.04.11 तक माननीय मंत्री, जल संसाधन विभाग द्वारा नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के कार्यों का स्थल भ्रमण एवं समीक्षात्मक बैठक में मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को हर हाल में पुनस्र्थापन कार्य गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुरूप कराने का निदेश दिया गया है तथा समानुपातिक प्रगति नहीं होने पर एकरारनामा के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाय। इस संदर्भ में विभागीय पत्रांक-612, दिनांक 28.04.11 देखा जा सकता है।

((((iv)))) दिनांक 10.11.11 से 12.11.11 तक मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर के परिक्षेत्राधीन नेपाल हिताकारी योजना 2009 के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना के द्वारा किया गया, जिसमें कार्य की गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुरूप कराने हेतु क्षेत्रीय पदाधिकारियों को निदेशित किया गया है। ((((v)))) दिनांक 16.11.11 एवं 17.11.11 को प्रधान सचिव की अध्यक्षता में नेपाल हितकारी योजना के पुनस्र्थापन कार्यों की प्रगति की समीक्षात्मक बैठक में मुख्य अभियंता को निदेशित किया गया है कि कार्यों की गहन समीक्षा साप्ताहिक रूप से करें एवं कार्य में आने वाली बाधाओं एवं समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। इस संदर्भ में विभागीय पत्रांक-2059, दिनांक 30.11.11 देखा जा सकता है।

((((vi) ) ) ) दिनांक 25.04.12 को निर्माण एजेंसी एवं विभागीय पदाधिकारियों के साथ संपन्न बैठक की कार्यवाही में भी नेपाल हितकारी योजना के संवेदक को समानुपातिक प्रगति लाने एवं कार्य की गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुसार करने का निदेश दिया गया है। इस संदर्भ में विभागीय पत्रांक 321, दिनांक 08.05.12 देखा जा सकता है। ((((vii)))) इसके बावजूद भी विभागीय पत्रांक 627, दिनांक 26.04.12 के द्वारा आवश्यक दिशा-निदेश मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को दिया गया है, जिसका अनुपालन प्रतिवेदन उनके द्वारा विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया है। जबकि नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के अंतर्गत मुख्य पश्चिमी नहर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर का पुनस्र्थापन कार्य मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता का मुख्यालय वाल्मीकिनगर में ही अवस्थित है तथा कार्य क्षेत्र भी वाल्मीकिनगर में ही है। फिर भी स्थानीय सामग्री के उपयोग को नहीं रोका जाना अथवा संवेदक पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न किया जाना एकरारनामा के अनुरूप कार्य का भुगतान संवेदक को होते रहना क्षेत्रीय पदाधिकारियों की सहभागिता को परिलक्षित करता है।

((((viii)))) अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक 756, दिनांक 28.05.12 द्वारा कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल-7, पटना एवं सहायक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2 के साथ-साथ शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, खगौल के पदाधिकारियों को नेपाल हितकारी योजना 2009 के कार्यों का स्थल निरीक्षण के लिये निदेश दिया गया। जिसके आलोक में उनके द्वारा दिनांक 30.5.12 को नेपाल हितकारी योजना 2009 के कार्यों का स्थल निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण दल के साथ शोध एवं प्रशिक्षण3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 2 मईमईमईमई 2017 संस्थान, खगौल के पदाधिकारी भी उपस्थित थे तथा उनके द्वारा गुणवत्ता जाँच हेतु चल रहे कार्यों का नमूना भी संग्रह किया गया। निरीक्षण दल द्वारा क्षेत्रीय पदाधिकारियों को यह निदेश दिया गया कि कार्य में तेजी लाया जाय एवं सभी कार्य को विशिष्टि एवं गुणवत्ता के अनुरूप यथाशीघ्र संपन्न कराया जाय।

((((ix)))) नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के पुनस्र्थापन कार्य में घोर अनियमितता के संबंध में प्राप्त परिवाद पर विभागीय पत्रांक-769, दिनांक 19.07.12 द्वारा उड़नदस्ता अंचल, पटना से परिवाद की जाँच का आदेश दिया गया है। जिसके आलोक में उड़नदस्ता का जाँचदल दिनांक 08.04.13 से 11.04.13 तक स्थल निरीक्षण कर जाँच समर्पित किया है। उड़नदस्ता दल ने जाँच के दौरान नेपाल भू-भाग के कार्यों में स्थानीय सामग्रियाँ आंशिक रूप से पाया है। उड़नदस्ता द्वारा कार्यपालक अभियंता को निदेश दिया गया है कि अभी एकरारनामा के तहत कार्य चल रहे हैं, अंतिम भुगतान के पूर्व नेपाल भू-भाग में कार्य में व्यवहृत सामग्रियों के लिये पर्याप्त नमूना लेकर एवं उसके आकलनके आधार पर भुगतान किया जाय, उल्लेखित है। परंतु यह प्रतिवेदन अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध नहीं कराया गया ताकि इस पर कार्रवाई की जा सके।

((((x)))) नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के पुनस्र्थापन कार्य खासकर नेपाल भाग में पश्चिमी गंडक मुख्य नहर का लाईनिंग के कार्य को 31 दिसम्बर 2012 तक हर हालत में पूर्ण कराने का उद्‌देश्य से सघन मोनिटरिंग के लिये मुख्यालय स्तर से श्री उपेन्द्र प्रसाद शर्मा, कार्यपालक अभियंता एवं श्री धर्मवीर कुमार, सहायक अभियंता को वाल्मीकिनगर में कैम्प कराये जाने का निर्णय लिया गया। इस संदर्भ में विभागीय गैर सरकारी प्रेषण सं0-104, दिनांक 04.12.12 में दिये गये निदेश के आलोक में अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-1711, दिनांक 06.12.12 के द्वारा कार्यपालक अभियंता योजना एवं मोनिटरिंग प्रमंडल सं0-7, पटना एवं सहायक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना को वाल्मीकिनगर में कैम्प कर कार्यों की गहन मोनिटरिंग हेतु भेजा गया।

((((xi)))) विभागीय पत्रांक-387, दिनांक 30.4.13 द्वारा नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट की प्रगति एवं गुणवत्ता की जाँच कराने हेतु टीम का गठन किया गया है, जिसके आलोक में अधीक्षण अभियंता, रूपांकण आयोजन एवं गुण नियंत्रण अंचल, जल संसाधन विभाग, सिवान के पत्रांक-112, दिनांक 30.6.13 द्वारा गुणवत्ता एवं प्रगति जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है।

((((xii)))) मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर द्वारा केवल स्थानीय सामग्री के उपयोग एवं अनियमित भुगतान पर रोक लगाने का निदेश दिये जाने के बावजूद भी कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा संवेदक के प्रति कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं किया गया, जिसके लिये उन्हें दोषी माना जा सकता है। परंतु अधीक्षण अभियंता/कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु प्रपत्र-क में आरोप गठित कर मुख्य अभियंता द्वारा विभाग को नहीं भेजा गया जिससे उनपर विभागीय कार्यवाही संबंधी अग्रेतर कार्रवाई नहीं की जा सकी। उसी तरह संवेदक यदि एकरारनामा के अनुसार कार्य नहीं कर रहे थें तो उनके विरूद्ध एफ0आई0आर0/डिफाल्टर घोषित करने/अपने निविदा में भाग लेने से वंचित करने/कालीकृत करने के संबंध में स्वयं सक्षम होते हुए भी उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही इस संबंध में विभाग को कोई सूचना दी गई है।

((((xiii)))) निगरानी के जाँच दल द्वारा अगस्त 2012 में जाँच की गयी तथा जाँच प्रतिवेदन जनवरी 2013 में निगरानी विभाग को समर्पित किया गया। संयुक्त सचिव, निगरानी विभाग से जाँच प्रतिवेदन मई 2013 में विभाग को प्राप्त हुआ तथा विभागीय निगरानी शाखा द्वारा माह जनवरी 2014 में इस अनियमितता को उजागर किया गया। अगर उड़नदस्ता एवं निगरानी का जाँच प्रतिवेदन ससमय प्राप्त हुआ होता तो उनके द्वारा और पहले कार्रवाई की गयी होती। संयुक्त सचिव, निगरानी विभाग, पटना के पत्रांक 2756, दिनांक 29.05.13 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के अनुपालन में विभागीय पत्रांक-96, दिनांक 24.01.14 द्वारा संवेदक के किसी भी प्रकार के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। चूँकि कार्य प्रगति में है और एकरारनामा चालू है, वित्तीय अनियमितता एवं हानि के समेकित निर्धारण एवं भरपाई संवेदक के विपत्रों या अन्य माध्यम से करने हेतु एक समिति का गठन कर दिया गया । इस संदर्भ में विभागीय पत्रांक-96, दिनांक 22.01.14 एवं पत्रांक-206, दिनांक 18.02.14 देखा जा सकता है। समिति का प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत संवेदक से वसूली/भुगतान की कार्रवाई की जायेगी।

उपरोक्त तथ्यों से बिल्कुल स्पष्ट है कि उनके द्वारा अनियमितता को रोकने के लिये यथोचित आवश्यक कार्रवाई की गई है। उसके बाद भी यह कहा जाना कि केवल दिशा-निदेश दिया गया है न्यायसंगत नहीं है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-1017, दिनांक 02.06. 16 द्वारा श्री दयाल से द्वितीय कारणपृच्छा की गई।4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 2 मईमईमईमई 2017 श्री दयाल, तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उत्तर) संप्रति सेवानिवृत द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में मुख्यतः निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गया :-

Enquiry officer without appreciating the relevent fact and in absence of any documentary evidence and witness has wrongly held the charge to have been proved against me nearly on presumption and assumption which is not permissible in the eye of law.

Further the reasoning by the enquiry officer was totally immaterial for proving the charge and inthus perverse for the follwoing reasons :-

(i) The enquiry officer has also failed to appreciate that the work was executed by C.E. WRD, Balmikinagar and it is a responsibility of the C.E. But the Chief Engineer, Ram Pukar Ranjan through several latter's has done the formality only.

When such irregularity were committed within the knowledge of the C.E. the payment should have been stopped and both the circle and division officers along with office were at waking distance of the work site and appears that the Chief Engineer through conspiracy falsely implicated me to state their skin and tried to shift the onus on me for their illegal gains by violating the condition mentioned in agreement.

(ii) The enquiry officer has also failed to appreciate that through letter no. 358 dated 07-07-10 it is evident that within the Zone officer C.E. is equipped with qulity control laboratory has been establisehed from 14-04-11 to 16-04-11 a visit by the Hon'ble Minister of WRD along with me. After visit guidelines were issued by Hon'ble Minister that work was done as per the clasue mentioned in SBD and incase if the work is not found as per the agreement penal actions be taken against the persons responsible which is evident from letter no. 612 dt. 28-4-11 and the Chief Enginner as per the PWD code is responsible for such illegal activities and the officers posted within that zone is accountable for such misconduct.

(iii) Enquiry officers has also not appreciated the fact that from 10.11.11 to 12.11.11 the chief Engineer has carried a inspection and directed to get the work done as per the clause of SBD. Further from 16-11-11 to 17-11-11 meeting under the chairmanship of Principle Secretary was conducted and it was directed that the supervision has to be carried out weekly. But it is surprising that no body to say such irregularity and suggests that I have been falsely implicated and roped by than C.E. is conspiracy with contractor for their illegal gratification.

(iv) Further through letter no. 627 dt. 26-04-12 necessary direction to C.E. were issued regards to his different letters. Despite that the local material used by contractor was stopped by the Engineers posted there and no actions against the contractor has been taken and their connivance can not be ruled out and payment were not stopped. the above stated facts and Engg. posted were purposely allowed the contractor to use the local material for their gain for which they are responsible.

(v) The enquiry officer has also not considered the fact that upon the complain with regard a flying squared was constituted through letter no. 769 dt. 19- 07-12 and investigation from 08-04-13 to 11-04-13 was carried out.

5 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 2 मईमईमईमई 2017

(vi) Enquiry officers has failed to appreciate that dispite the direction by the C.E. for stopping the payment through memo no. 480 dt. 31-03-12 to the E.E.&S.E. has not taken any action against the contractor like loading FIR or showing him defaulter.

For this the C.E. is responsible and as per SBD clause he is vested with such power and in spite of taking any action the C.E. started writing letter no me for shifting his onus and liability and responsibilty.

(vii) The Enquiry officer has not consider the letter 437 dt. 30-03-12 issued by C.E. to me. and tried to mislead me as well as the department by starting in the said letter. It is submitted that in the said letter it has been also mentioned by C.E. the proper direction/ Guidelines were issued to SE and EE that the work should be done as per agreement. But no any information with regard to action taken by C.E. was either communicated to me or department with regard to this work.

(viii) Further the enquiry officer has failed to appreciate that the payment made after 28-03-2012 against 6th, 7th, 8th and 9th bill was passed by the EE and amount paid after 28-3-12 amounting Rs. 12,74,07,988/- was made in connivance with CE with EE and it is surprising that the CE and EE were having the knowledge that local material are being used and order for stopping the payment has been passed vide ltter no. 480 dt. 31-03-12. I cannot be held responsible it the direction issued by CE is not being followed by his subordinate EE. For which the chief Enginner is competent to initiate action against him. For which there is no requirement as the CE is competent to take action against them under the code.

(ix) Further the report of Technical Vigilance was received on 31-05-2013 in department. After 08 month the report was brought to my notice dt. 23-01-14 and the moment I can to know that the irregularity on the very next day i.e. 24-01-14 directed to the C.E. with regard to the said work not to make any payment against any bill and other direction, there after direction of Technical vigilance a three man committee was constitute and in the report submitted by committee that the Excess amount paid was 8,99,33,624/- which was also raise dispute upon the report submitted by technical vigilance.

(x) Further the Enquiry officer has not considered under rule 15A of PWD code is the authority to take action against the officer and the CE is responsible for any misconduct within their zone. The role of Engineer is Chief and the Chief Engineer is also the administrative and processional head of that zone and having the power to recommend to Govt. removal transfer and posting.

(xi) The Enquiry officer has also not consider the fact that the Chief Engineer through its letter 687 dt. 10-5-12 requested for suspension of one AE & JE. When through letter no. 739 dt. 24-05-12, I directed the CE to submit memo of charge along with specific allegation against them. same was not provided by the chief Engineer so in absence of memo of charge, I was not in a position to take any action against those Engg.

(xii) The Enquiry officer has wrongly relied upon the statement made by Rajeev Nandan Maurya, AE as for the reason that he was posted there for a very short 6 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 2 मईमईमईमई 2017 duration from 24-05-12 to 16-09-12 and he was not aware with the proper fact of this proceeding. during that period of his posting nothing has been alleged against me. for the said period or any role for participation as been brought by Sri R.M. Maurya with regard to my participation in relation to the excess payment.

(xiii) Further it is relevent to mention here that the Technical Vigilance has concluded his investigation on 29-5-13 and after a laps of Eleven months on 18-02-14 a show cause has been issued and to which, I replied on 28-02-14 and there after without considering my show cause and after my retirement a proceeding has been initiated under Rule 43(B) is not permissible under the pension rule. But in the present case much after my retirement on 08-09-15 the proceeding has been conducted under 43(B) which is clear viloation of pension rule 43 (B).

(xiv) Further it is submitted that from the above mentioned fact it is evidence that no charge alleged against me is being proved and for the irregularities posted in the said work is responsible for the said irregular payment.

श्री राजेश्वर दयाल, तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उत्तर) से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर की समीक्षा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि श्री दयाल द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में वही तथ्य उद्धत किया गया है जो उनके द्वारा प्रथमतः विभाग को दिये गये अपने स्पष्टीकरण में अंकित किया गया है अथवा संचालित विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिये गये मूल बचाव-बयान एवं पूरक बचाव-बयान में उद्धत किया गया है। इसके अतिरिक्त कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।

श्री दयाल के द्वितीय कारणपृच्छा की कंडिका 13 में वर्णित तथ्यों के समीक्षोपरांत यह पाया गया है कि उनके विरूद्ध गठित आरोप पत्र प्रपत्र-क में आरोप वर्ष 2010-11 से 2013-14 उल्लिखित है। श्री दयाल दिनांक 30.9.14 को सेवानिवृत हुए है तथा इनके विरूद्ध प्रपत्र क का गठन दिनांक 12.08.15 को किया गया है। बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि सेवानिवृत कर्मियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही कार्यवाही उस घटना के संदर्भ में चलायी जा सकती है जो 4 वर्ष से पूर्व घटित नहीं हुयी हो। इस प्रकरण में आरोप वर्ष 2013-14 है तथा श्री दयाल की सेवानिवृति तिथि दिनांक 30.9.14 है। इसलिए इनकी संबद्धता विषयगत मामले से दिनांक 30.9.14 तक रही है। पूर्व में दिये गये स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत ही इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया है। स्पष्टतः यह मामला बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के अन्तर्गत कालबाधित नहीं है।

संचालन पदाधिकारी (विभागीय जाँच आयुक्त) द्वारा विभाग द्वारा उपलब्ध कराये आरोप पत्र तथा संदर्भित साक्ष्य विभागीय अभिमतों तथा आरोपी पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये सभी बचाव बयान का विस्तृत रूप से अध्यानोपरांत मामले की विस्तृत रूप से समीक्षा की गयी। संचालन पदाधिकारी ने अपने समीक्षात्मक कंडिका में योजना प्राक्कलन के गठन से लेकर कार्य की गुणवत्ता के संदर्भ में आरोपी पदाधिकारी द्वारा दिये गये तर्क कार्य में संलग्न पदाधिकारियों की मौलिक जवाबदेही वरीय पदाधिकारी के दायित्वों तथा संदर्भित बिहार वित्त नियमावली की कंडिका 10, 11, 12, 31 एवं 32 तथा PWD Code-15 AC जिसमें मुख्य अभियंता की जबावदेही PWD Code-15 के आलोक में अभियंता प्रमुख के दायित्वों तथा अन्य संदर्भित पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण करते हुए जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 8 (vi) में कहा गया है कि -

आरोपित पदाधिकारी द्वारा यदि समय पर उपर्युक्त वांछित कार्रवाईयाँ की गई होती तो 28 मार्च 2012 और उसके बाद के विपत्रों के माध्यम से किये गये 12 करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान रूक जाता और उससे अनियमित भुगतान की आकलित राशि की वसूली की जा सकती थी। आरोपित पदाधिकारी का यह कहना है कि उपर्युक्त विपत्रों के द्वारा किये गये भुगतान अग्रिम के तौर पर है और उनके माध्यम से भुगतान की गयी राशि की वसूली अंतिम विपत्र से की जा सकती है एक गैर जबाबदेही दृष्टिकोण है। अगर वित्तीय नियमावली में विभागाध्यक्ष और नियंत्री पदाधिकारी के लिए निर्धारित दायित्वों के आलोक में इसे देखा जाय तो चालू विपत्रों के तहत भुगतान में कोई त्रुटि होने की स्थिति में उसके समायोजन की व्यवस्था आगे के विपत्रों से किये जाने की है परंतु वर्त्तमान मामला त्रुटिपूर्ण का नहीं है बल्कि अधीनस्थ पदाधिकारियों द्वारा जानबूझकर और मुख्य स्तर के वरीय पदाधिकारियों के संज्ञान में आने और उनके स्तर से7 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 2 मईमईमईमई 2017 स्पष्ट निदेश दिये जाने के बावजूद अनियमित वित्तीय भुगतान जारी रखने का है जो एक गबन का मामला है। इस संदर्भ में बिहार वित्त नियमावली का नियम 34 का उल्लेख किया गया है जिसमें अंकित है कि Every Govt. Servent should realise fully and clearly that he will be held personally responsible for any loss suistained by govt. through fraud or negligence on his part and that he will also be held personally responsible for any loss arising from fund or negligence on the party of any other govt. servent to the extent to which it may me shown that he contributed to the loss by his won action or negligence.

संचालन पदाधिकारी ने मामले को एवं आरोपी द्वारा दिये गये तर्कों के समीक्षोपरांत पुनस्र्थापन कार्य में विशिष्टि का उल्लंघन करते हुए कार्य जारी रहने में तथा पत्थर एवं बालू की ढुलाई मद में अनियमित भुगतान जारी रहने में श्री दयाल की सहभागिता मानी है तथा दोनों आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया है। चूंकि आरोपी श्री दयाल के द्वारा अपने द्वितीय कारणपृच्छा में वही तथ्य दोहराया गया है जो उनके द्वारा विभिन्न तिथियों में विभाग को अथवा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। इस कार्य में विभाग द्वारा अनियमित भुगतान की गणना हेतु गठित समिति द्वारा ढुलाई मद में कुल 8,99,33,624/-(आठ करोड निनानबे लाख तैतीस हजार छः सौ चौबीस) रूपये की अनियमितता भुगतान होने की गणना की गयी है। इनके कृत्य से सरकार को 8,99,33,264/- (आठ करोड निनानबे लाख तैतीस हजार दो सौ चौसठ) रूपये की आर्थिक क्षति हुयी है।

मामले की सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राजेश्वर दयाल, तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उत्तर) संप्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दंड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार स्तर से लिया गया है :-

"पेंशन से 50"पेंशन से 50"पेंशन से 50"पेंशन से 50% (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"। (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"। (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"। (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"। उक्त निर्णित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-3612, दिनांक 10.3.17 के माध्यम से सहमति प्रदान की गयी है।

सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेश्वर दयाल, तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उत्तर) सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-

"पेंशन से 50"पेंशन से 50"पेंशन से 50"पेंशन से 50% (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"। (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"। (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"। (पचास प्रतिशत) की स्थायी रूप से कटौती"।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के उप-सचिव।

———— अधी)क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, iiiiटना (cid:23)ारा ूकािशत एवं मु.ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 361-571+10-ड$0ट$0प ी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 02 May 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-05-02.361/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-05-02.361.