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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 02 May 2017

Published 02 May 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-05-02.362
Languages
English, Hindi

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ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत 12 वैशाखवैशाखवैशाखवैशाख 1939 (शशशश0)

((((संसंसंसं0 पटनापटनापटनापटना 362) ) ) ) पटनापटनापटनापटना

पटनापटनापटनापटना, मंगलमंगलमंगलमंगलवारवारवारवार, 2222 मईमईमईमई 2017

जल संसाधन विभाग ---------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 12121212 अप्रील 2017अप्रील 2017अप्रील 2017अप्रील 2017

सं0 22/नि0सि0(मु0)याँ-19-76/09/

ाँ-19-76/09/541—श्री रविन्द्र प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई श्री रविन्द्र प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई यांत्रिक प्रमंडल, चाण्डिल के पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितताओं की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल-1, यांत्रिक प्रमंडल, चाण्डिल के पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितताओं की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल-1, यांत्रिक प्रमंडल, चाण्डिल के पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितताओं की जाँच विभागीय उड़नदस्ता अंचल-1, पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल-1, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री प्रसाद के विरूद्ध पटना से करायी गयी। उड़नदस्ता अंचल-1, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री प्रसाद के विरूद्ध असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55(ए) के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55(ए) के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55(ए) के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया। तदनुसार श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण पुछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार निर्णय लिया गया। तदनुसार श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण पुछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार निर्णय लिया गया। तदनुसार श्री प्रसाद से स्पष्टीकरण पुछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार । समीक्षोपरांत पाये गये प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार ने विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1131, । समीक्षोपरांत पाये गये प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार ने विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1131, के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत पाये गये प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार ने विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1131, दिनांक 13.06.2001 द्वारा श्री प्रसाद को निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया :-

निन्दन की सजा जिसकी प्रविष्टि उनकी चारित्री वर्ष 1987-88 में की जायेगी।

र्ं तक देय प्रोन्नति पर रोक।

पाँच लाख रूपये की वसूली।

2001 द्वारा श्री प्रसाद को निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया :- (क) निन्दन की सजा जिसकी प्रविष्टि उनकी चारित्री वर्ष 1987-88 में की जायेगी। (ख) सात वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। (ग) पाँच लाख रूपये की वसूली। उक्त राशि की वसूली श्री प्रसाद के सेवा अवधि तक रू0 2000/- (दो हजार) प्रत्येक माह की दर से की उक्त राशि की वसूली श्री प्रसाद के सेवा अवधि तक रू0 2000/- (दो हजार) प्रत्येक माह की दर से की उक्त राशि की वसूली श्री प्रसाद के सेवा अवधि तक रू0 2000/- (दो हजार) प्रत्येक माह की दर से की जायेगी। यदि उपर्युक्त राशि की वसूली उनके सेवाकाल में पूरी नहीं हो पाती है तो वैसी स्थिति में शेष राशि की जायेगी। यदि उपर्युक्त राशि की वसूली उनके सेवाकाल में पूरी नहीं हो पाती है तो वैसी स्थिति में शेष राशि की जायेगी। यदि उपर्युक्त राशि की वसूली उनके सेवाकाल में पूरी नहीं हो पाती है तो वैसी स्थिति में शेष राशि की वसूली उनके सेवानिवृति के पश्चात देय पावनाओं से एक मुश्त कर ली जायेगी।

सूली उनके सेवानिवृति के पश्चात देय पावनाओं से एक मुश्त कर ली जायेगी।

उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 5424/2002 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त वाद में अंतरिम आदेश से 2000/-(दो हजार) प्रतिमाह की दर से किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त वाद में अंतरिम आदेश से 2000/-(दो हजार) प्रतिमाह की दर से किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त वाद में अंतरिम आदेश से 2000/-(दो हजार) प्रतिमाह की दर से 2005 को आदेश पारित करते हुए विभागीय ली को स्थगित कर दिया गया तथा अंतिम रूप से दिनांक 08.09.2005 को आदेश पारित करते हुए विभागीय वसूली को स्थगित कर दिया गया तथा अंतिम रूप से दिनांक 08 2001 को निरस्त करते हुए आदेश दिया गया कि - दण्डादेश सं0-1131, दिनांक 13.06.2001 को निरस्त करते हुए आदेश दिया गया कि -

" The authorities will be at liberty if so advised to proceed in the matter in " The authorities will be at liberty if so advised to proceed in the matter in " The authorities will be at liberty if so advised to proceed in the matter inaccordance with law." माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उक्त आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1005, दिनांक 05. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उक्त आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1005, दिनांक 05 माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उक्त आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1005, दिनांक 05 10.09 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध संसूचित दण्डादेश सं0-1131, दिनांक 13 2001 को निरस्त किया गया एवं 09 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध संसूचित दण्डादेश सं0-1131, दिनांक 13.06.2001 को निरस्त किया गया एवं 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 2 मईमईमईमई 2017 विभागीय आदेश सं0-206 सहपठित ज्ञापांक-1284, दिनांक 13.11.09 द्वारा विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1325, दिनांक 20.11.09 द्वारा प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित करने के निर्णय को श्री प्रसाद द्वारा पुनः माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-1400/2010 के द्वारा चुनौती दी गयी जिसमें दिनांक 27.10.16 को पारित आदेश द्वारा विभागीय कार्यवाही को रद्‌द कर दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का सार निम्नवत्‌ है :-

" I have heard learned counsel for the parties and I have perused the records. As I have said I do not need to enter into the merit of the case for very initiation of the proceeding besides suffering delay on its initiation is also not sustainable on the provisions of Rule 43(b) of the "pension rules" which puts a bar on any initiation of the proceeding post the retirement of a delinquent in relation to an event which does fall within the period of four years of its initiation. It is undisputed that the alleged default with which the petitioner is charged is much beyond this period. In fact the initiation is more than seven years since the retirement of the petitioner and more than four years since the liberty was granted to the respondent by this court in the order passed in CWJC No. 5424 of 2005. In view of the undisputed position explained the initiation of the proceedings against the petitioner is apparently in the teeth of the statutory provisions underlying Rule 43(b) of the Bihar Pension Rules and cannot be upheld and accordingly the order bearing Memo No.- 1284 dated 13.11.2009 impugned at Annexure-1 together with the charge sheet issued vide resolution bearing memo no. 1325 dated 20-11-2009 impugned at Annexure-2 insofar as the petitioner is concerned cannot be upheld and is accordingly quashed and set aside.

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0-206, सहपठित ज्ञापांक 1284, दिनांक 13.11.2009 द्वारा प्रारंभ की गयी विभागीय कार्यवाही एवं संकल्प सं0-1325, दिनांक 20.11.2009 द्वारा निर्गत प्रपत्र-'क' निरस्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

अतः उक्त के आलोक में विभागीय आदेश सं0-206 सहपठित ज्ञापांक-1284, दिनांक 13.11.2009 द्वारा प्रारंभ की गयी विभागीय कार्यवाही एवं संकल्प सं0-1325, दिनांक 20.11.2009 द्वारा निर्गत प्रपत्र-'क' को निरस्त किया जाता है एवं उक्त आशय से श्री रविन्द्र प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सिंचाई यांत्रिक प्रमंडल, चाण्डिल को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के उप-सचिव।

———— अधी)कअधी)कअधी)कअधी)क, सिचवालयसिचवालयसिचवालयसिचवालय मुिणालयमुिणालयमुिणालयमुिणालय, (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार, iiiiटनाटनाटनाटना (cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा(cid:23)ारा ूकािशतूकािशतूकािशतूकािशत एवंएवंएवंएवं मु.ित।मु.ित।मु.ित।मु.ित। (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार गजटगजटगजटगजट (असाधारणअसाधारणअसाधारणअसाधारण) 362-571+10-ड$ड$ड$ड$0ट$ट$ट$ट$0प ीप ीप ीप ी0।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 02 May 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-05-02.362/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-05-02.362.