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पटन(cid:4)(cid:29) श१(cid:31)व(cid:4)र(cid:29) 1111 िसत(cid:15)बिसत(cid:15)बिसत(cid:15)बिसत(cid:15)बर र र र 2(cid:15)1(cid:19) बिहार विधन सभा सचिवालय
——— अध्सिूचना 22 अगस्त 2017
सं वि∫स∫वि∫-22/2017-7232 / वि
-22/2017-7232 / वि∫स∫—''बिहार काश्तकारी ;संशोध्नद्ध विध्ेयक, 2017'', ज
''बिहार काश्तकारी ;संशोध्नद्ध विध्ेयक, 2017'', जो बिहार 22 अगस्त, 2017 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन सभा की प्रिÕया तथा कार्य संचालन या तथा कार्य संचालन विधन सभा में दिनांक 22 अगस्त, 2017 को पु नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ∞ेश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है । नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ
अध्यक्ष, बिहार विधन
बिहार विधन सभा के आदेश से,
राम श्रेष्ठ राय, राम श्रेष्ठ राय सचिव। सचिव।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 िसत(cid:15)बर 2017 बिहार काश्तकारी (संशोधन) विधेयक, 2017 [वि∫स∫वि∫-16/2017⁄ बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 का संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के अड़सठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ।-(1) यह अधिनियम बिहार काश्तकारी (संशोधन) अधिनियम, 2017 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरन्त प्रवृत होगा। 2. अधिनियम, 1885 की धारा-118 में संशोधन।-उक्त अधिनियम, 1885 की धारा-118 में उल्लिखित प्रावधान को उप-धारा-(1) केे रूप में संख्यांकित किया जाएगा और उसके पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा-(2) एवं (3) जोड़ी जाएगीः-
''(2) कोई भी रैयत अपनी निजी जमीन की मापी कराये जाने हेतु, विहित प्रपत्र में, मापी कराये जाने वाली जमीन पर अधिकार से संबंधित साक्ष्य के साथ आवेदन पत्र अपने क्षेत्र के अंचल अधिकारी के समक्ष समर्पित करेगा। अंचल कार्यालय में मापी आवेदन पत्र जमा किये जाने के पश्चात्, अंचल अधिकारी आवेदक की जमीन पर अधिकार एवं हक से संबंधित साक्ष्य की जांच करेंगे एवं संतुष्ट होने के पश्चात् अमीन फीस जमा करने का आदेश आवेदक को देंगे। आवेदक के द्वारा अमीन का फीस जमा किये जाने के पश्चात्, अंचल अधिकारी आवेदक की रैयती जमीन की मापी कराये जाने की तिथि नियत करते हुए अंचल अमीन को नियत तिथि को जमीन की मापी कर मापी प्रतिवेदन, नक्शा के साथ, समर्पित करने का निदेश देंगे।
अंचल अमीन के द्वारा नियत तिथि को जमीन की मापी करते हुए संबंधित जमीन को स्थल पर सीमांकित कर दिया जाएगा एवं अपना मापी प्रतिवेदन नक्शा के साथ अंचल कार्यालय में समर्पित किया जाएगा। अंचल अमीन का जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर, अंचल अधिकारी उक्त प्रतिवेदन को संबंधित मापी अभिलेख के साथ संलग्न कर देंगे और अभिलेख में आगे की कार्रवाई को समाप्त कर देंगे। अमीन के मापी प्रतिवेदन के आधार पर, अंचल अधिकारी जमीन के स्वामित्व के संंबंध में कोई आदेश पारित नहीं करेगें। अंचल अधिकारी यदि आवश्यक समझे तो वे आवेदित जमीन की चौहद्दी के रैयतों को मापी की तिथि से अवगत कराते हुए, मापी के समय स्थल पर उपस्थित रहने से संबंधित नोटिस निर्गत करेंगे।
(3) अपील-अंचल अमीन के रैयती जमीन की मापी/मापी प्रतिवेदन से संबंधित अंचल अधिकारी के आदेश से असंतुष्ट/व्यथित व्यक्ति मापी/मापी प्रतिवेदन के विरूद्ध, मापी की तिथि से 30 (तीस) दिनों के अन्दर भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के न्यायालय में अपील दाखिल करेगा। अपील निर्धारित अवधि में नहीं किये जाने की स्थिति में अपीलकर्त्ता के द्वारा अपील आवेदन पत्र के साथ विलम्ब क्षांति से संबंधित आवेदन पत्र विलम्ब के कारण के साथ समर्पित किया जाएगा। भूमि सुधार उप समाहर्त्ता को यदि समाधान हो जाता है, कि विलम्ब होने के समुचित कारण है, तो वह अपील दायर होने में हुए विलम्ब को संबंधित पक्षों को सुनने के पश्चात् क्षांत कर सकेंगे। भूमि सुधार उप समाहर्त्ता संबंधित पक्षों को सुनने के पश्चात् यदि आवश्यक हो तो एक से अधिक अमीन के द्वारा संयुक्त रूप से जमीन का मापी कराए जाने का आदेश पारित करेगें अथवा अंचल अमीन द्वारा समर्पित मापी प्रतिवेदन को रद्द एवं अमान्य घोषित कर देगें। यदि भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, अमीन के संयुक्त दल द्वारा किये गये मापी के आलोक में समर्पित मापी प्रतिवेदन से संतुष्ट हो तो वैसी स्थिति में अंचल अमीन के द्वारा समर्पित मापी प्रतिवेदन को अस्वीकार घोषित करेगें और इस आशय का आदेश पारित करेंगे कि अमीन के संयुक्त दल का मापी प्रतिवेदन प्रभावी/मान्य होगा। यदि भूमि सुधार उप समाहर्त्ता अमीन के संयुक्त दल के मापी प्रतिवेदन से संतुष्ट नहीं हो, तो वे अन्य अमीनों का अन्य संयुक्त दल गठित करते हुए उस जमीन की पुनः मापी का आदेश करेगें।''
3. अधिनियम, 1885 में नई उप धाराओं का जोड़ा जाना।-उक्त अधिनियम, 1885 की धारा-158 (बी) के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा-158 (सी) एवं धारा-158 (डी) जोड़ी जाएगी :-
''158(सी) लगान का नियतन।—
(1) वैसी रैयती बेलगान/काबिल लगान भूमि का, जिसका लगान भू-सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त कार्यक्रम के संचालन के दौरान नियत नहीं किया गया हो, लगान नियत करने की शक्ति क्षेत्र के भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अनुमंडल पदाधिकारी में निहित होगी।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 िसत(cid:15)बर 2017 (2) वैसे मामलों में लगान नियतन की मंजूरी नहीं दी जाएगी, जिनमें होल्डिंग या उसके भाग के संबंध में, सक्षम न्यायालय में स्वत्व वाद लंबित हों।
(3) वैसे मामलों में भी लगान नियतन की मंजूरी नहीं दी जाएगी, जिनमें किसी होल्डिंग या उसके भाग में हित अर्जित करने वाले का उस होल्डिंग या उसके भाग पर भौतिक कब्जा न हो।'' ''158 (डी) अपील।—
(1) भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अनुमंडल पदाधिकारी के आदेश के विरूद्ध, आदेश की तारीख से 60 (साठ) दिनाें के भीतर अपर समाहर्त्ता/समाहर्त्ता के समक्ष अपील संस्थित होगी। (2) अपर समाहर्त्ता/समाहर्त्ता को यदि समाधान हो जाय कि विलम्ब होने के समुचित कारण है तो वह अपील दायर होने में हुए विलम्ब को क्षान्त कर सकेगा।
(3) अपर समाहर्त्ता/समाहर्त्ता द्वारा जिस आदेश के विरूद्ध अपील की गयी हो उसे उपान्तरित, परिवर्तित या अपास्त करने वाला आदेश तबतक नहीं दिया जाएगा, जबतक कि सम्बद्ध पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दिया गया हो।
(4) लगान नियतन से संबंधित अपील का निष्पादन, अपील दायर करने की तिथि से 60 (साठ) कार्यदिवसों के भीतर किया जाएगा।''4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 िसत(cid:15)बर 2017
उद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतु
बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 अथवा राजस्व से संबंधित किसी अन्य अधिनियम में रैयती जमीन की मापी अंचल अमीन से कराये जाने संबंधी प्रावधान अंकित नहीं है। रैयतों के द्वारा राज्य के विभिन्न अंचल कार्यालयों में अपनी रैयती जमीन को सीमांकित कराये जाने हेतु आवेदन पत्र समर्पित किया जाता है, जिसके आलोक में संबंधित अंचल अधिकारी के द्वारा नाजिर रसीद के माध्यम से आवेदक को अमीन फीस जमा किये जाने का आदेश दिया जाता है। अंचल नजारत में अमीन फीस जमा किये जाने के पश्चात् अंचल अमीन के द्वारा प्रश्नगत रैयती जमीन की मापी कर अपना मापी प्रतिवेदन अंचल कार्यालय में समर्पित किया जाता है। उपर्युक्त प्रावधान बिहार काश्तकारी अधिनियम अथवा किसी अन्य अधिनियम में अंकित नहीं होने के कारण राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के नियंत्राधीन जिला, अनुमंडल एवं अंचलों में पदस्थापित पदाधिकारियों के द्वारा उपर्युक्त प्रक्रिया को विनियमित किये जाने का अनुरोध किया जाता रहा है, जिसके आलोक में बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा-118 में अंकित प्रावधानों को उप धारा-(1) के रूप में अंकित करते हुए उप धारा-(1) के पश्चात् नई उप धारा-(2) एवं (3) जोड़ा गया है, जो रैयती जमीन की मापी एवं मापी के विरूद्ध अपील से संबंधित है।
अंचल अमीन के मापी प्रतिवेदन से व्यथित पक्ष के द्वारा मापी प्रतिवेदन के विरूद्ध भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के न्यायालय में अपील दायर किये जाने का प्रावधान उक्त अधिनियम की धारा-118(3) में किया गया है।
2. वर्तमान में बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 अथवा राजस्व से संबंधित किसी अन्य अधिनियम में बेलगान/काबिल लगान रैयती जमीन का लगान निर्धारण से संबंधित प्रावधान भी अंकित नहीं है, जबकि राज्य में हजारों एकड़ जमीन बेलगान/काबिल लगान के रूप में सर्वे खतियान में दर्ज है। वैसी जमीन का लगान निर्धारण करवाते हुए लगान रसीद प्राप्त किये जाने हेतु रैयतों के द्वारा आवेदन पत्र समर्पित किया जाता है। इस प्रकार की जमीन का लगान निर्धारित नहीं होने एवं उसकी जमाबंदी नहीं चलने के कारण सरकार को प्रतिवर्ष राजस्व की क्षति होती है। उपर्युक्त के आलोक में बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा-158बी के पश्चात् नई उप धारा-158सी जोड़ते हुए लगान निर्धारण का प्रावधान किया गया है, जिसके सक्षम प्राधिकार क्षेत्र भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अनुमंडल पदाधिकारी होगें। उसी प्रकार अधिनियम, 1885 की धारा-158सी के पश्चात् उप धारा-158डी जोड़ा गया है, जिसके तहत भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अनुमंडल पदाधिकारी के आदेश से व्यथित पक्ष के द्वारा अपर समाहर्त्ता/समाहर्त्ता के न्यायालय में अपीलवाद दायर किया जाएगा।
अतः बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा-118 में अंचल अमीन के द्वारा रैयती जमीन की मापी किये जाने, अंचल अमीन के मापी से असंतुष्ट पक्ष के द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्त्ता के न्यायालय में अपील दायर करने, अधिनियम, 1885 की धारा-158 में नई उप धारा-158सी एवं उप धारा-158डी को जोड़ते हुए रैयती बेलगान/काबिल लगान जमीन का लगान निर्धारण किये जाने एवं लगान निर्धारण के भूमि सुधार उप समाहर्त्ता/अनुमंडल पदाधिकारी के आदेश से व्यथित पक्ष के द्वारा अपर समाहर्त्ता/समाहर्त्ता के न्यायालय में अपील दायर करने से संबंधित प्रावधान जोड़ा जाना इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य है तथा इसे अधिनियमित कराना ही इस संशोधन विधेयक का अभीष्ट है।
(((( राम नारायण मंडल)))) भार-साधक सदस्य ।
पटना,
दिनांक 22.08.2017
सचिव, बिहार विधान सभा।
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