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अध्सिूचना
23 अगस्त 2017
सं वि∫स∫वि∫-24/2017-7395 / वि
-24/2017-7395 / वि∫स∫—''बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग विध्ेयक, 2017'', जो ''बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग विध्ेयक, 2017'', जो बिहार विधन सभा में दिनांक- 23 अगस्त, 2017 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन सभा की प्रिÕया तथा कार्य बिहार विधन सभा में दिनांक- 23 अगस्त, 2017 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन सभा की प्रि बिहार विधन सभा में दिनांक- 23 अगस्त, 2017 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन सभा की प्रि संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ∞ेश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है । संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ
अध्यक्ष, बिहार विधन सभा
बिहार विधन सभा के आदेश से,
राम श्रेष्ठ राय, राम श्रेष्ठ राय सचिव। सचिव।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 िसत(cid:15)बर 2017
बिहार राज्य विष्वविद्यालय सेवा आयोग विधेयक, 2017
[वि∫स∫वि∫-21/2017⁄
बिहार राज्य के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु बिहार राज्य विश्वविद्यालय आयोग के गठन हेतु प्रावधान करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के अड़सठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ। (1) यह अधिनियम बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग अधिनियम, 2017 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह उस तिथि से प्रवृत होगा जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे। 2. परिभाषाएँ । - इस अधिनियम मेें जब तक विषय या संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो -
(i) ''अधिनियम'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग अधिनियम 2017; (ii) ''अध्यक्ष'' से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा-4 के अधीन नियुक्त अध्यक्ष; (iii) ''अंगीभूत महाविद्यालय'' से अभिप्रेत है विश्वविद्यालय एवं राज्य सरकार के द्वारा संचालित एवं नियंत्रित शिक्षण संस्थान, जिसमेें स्नातक एवं उससे ऊपर की शिक्षा प्रदान की जाती हो;
(iv) ''संस्थान'' से अभिप्रेत है विश्वविद्यालय द्वारा संचालित एवं मान्यता प्राप्त संस्थान; (v) ''विहित'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम अथवा उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमनों द्वारा विहित;
(vi) ''अध्यापक'' से अभिप्रेत है विभाग, महाविद्यालय अथवा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित संस्था या अंगीभूत महाविद्यालयाें के प्राचार्य (प्रोफेसर), सह प्राचार्य (एसोसिएट प्रोफेसर) एवं सहायक प्राचार्य (एसिटेन्ट प्रोफेसर);
(vii) ''प्राचार्य'' से अभिप्रेत है सक्षम प्राधिकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेगुलेशन/दिशा-निर्देश अथवा राज्य सरकार द्वारा बनाए गए परिनियम के अनुसार सम्यक् रूप से नियुक्त अथवा प्रोन्नत महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का अध्यापक;
(viii) ''सह प्राचार्य'' से अभिप्रेत है सक्षम प्राधिकार द्वारा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेगुलेशन/दिशा-निर्देश अथवा राज्य सरकार द्वारा बनाए गए परिनियम के अनुसार सम्यक् रूप से नियुक्त अथवा प्रोन्नत महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का अध्यापक;
(ix) ''सहायक प्राचार्य'' से अभिप्रेत है सक्षम प्राधिकार द्वारा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेगुलेशन/दिशा-निर्देश अथवा राज्य सरकार द्वारा बनाए गए परिनियम के अनुसार सम्यक् रूप से नियुक्त अथवा प्रोन्नत महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का अध्यापक;
(x) ''विश्वविद्यालय'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 या पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के अधीन स्थापित विश्वविद्यालय या किसी अन्य वैधानिक प्रावधान के अधीन भविष्य में स्थापित होने वाला कोई विश्वविद्यालय, किन्तु इसमें विधि, चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षण वाले विश्वविद्यालय शामिल नहीं हैं;
(xi) ''सरकार'' से अभिप्रेत है बिहार सरकार; (xii) ''विभाग'' से अभिप्रेत है शिक्षा विभाग
3. आयोग का गठन ।-(1) राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, बिहार राज्य विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना करेगी।
(2) आयोग एक निगमित निकाय होगा, जिसका प्रधान कार्यालय पटना में होगा। जिसे शाश्वत् उतराधिकार तथा अपनी मुहर होगी एवं जो उक्त नाम से वाद ला सकेगा अथवा उस पर वाद लाया जा सकेगा।
4. आयोग की संरचना। - (1) आयोग एक अध्यक्ष एवं अधिकतम छः सदस्य से मिलकर होगा एवं वे पूर्णकालिक होंगे।
(2) अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार के द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार, अधिसूचना की तिथि से तीन वर्षो की अवधि के लिए की जाएगी।
परन्तु अध्यक्ष पद के लिए अधिकतम आयु (सेवानिवृति) 72 (बहत्तर) वर्ष होगी एवं सदस्यगण के लिए अधिकतम आयु (सेवानिवृति) 70 (सत्तर) वर्ष होगी।
अध्यक्ष एवं सदस्यगण तीन वर्षो के कार्यकाल के बाद पुनः तीन वर्ष की अवधि के लिए उनकी उपरोक्त अधिकतम उम्र सीमा के अन्तर्गत पुनर्नियोजन के पात्र होंगें।
(3) अध्यक्ष के पद पर आकस्मिक रिक्ति की स्थिति में आयोग के वरीय सदस्य को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने हेतु सशक्त होगा।
5. अध्यक्ष एवं सदस्यों की अर्हत्ता ।- (1) अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किए जाने वालेे व्यक्ति राज्य सरकार मेें मुख्य सचिव के समकक्ष अथवा भारत सरकार में सचिव के समकक्ष पद पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 िसत(cid:15)बर 2017 पदाधिकारी होंगे अथवा वैसे व्यक्ति होंगे, जिन्हे विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य करने का अनुभव हो अथवा ऐसे व्यक्ति जो प्रख्यात शिक्षाविद् हों।
(2) कुल छः सदस्यों में से न्यूनतम आधे सदस्य विश्वविद्यालय प्राचार्य होंगे, जिन्हे विश्वविद्यालय प्राचार्य के पद पर न्यूनतम 5 वर्षों का अनुभव हो तथा आधे सदस्य राज्य सरकार में संयुक्त सचिव से अन्यून पद पर कार्यरत या सेवा निवृत अधिकारी अथवा केन्द्र सरकार समकक्ष पंक्ति के कार्यरत अथवा सेवानिवृत अधिकारी होंगे।
6. अध्यक्ष एवं सदस्यगण का त्यागपत्र एवं हटाया जाना ।- (1) अध्यक्ष एवं सदस्यगण अपने हाथ से लिखित और राज्य सरकार को सम्बोधित अनुरोध पत्र द्वारा अपना पदत्याग करते हुए त्याग पत्र समर्पित कर सकेगें, जो राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत होने पर प्रवृत्त होगा :
परंतु यदि त्यागपत्र की स्वीकृति इसकी प्राप्ति के 15 (पन्द्रह) दिनों के भीतर संसूचित नहीं की जाती है, तो इसे स्वीकृत माना जाएगा,
(2) अध्यक्ष एवं सदस्यगण आयोग से हटा दिये जायेगे, यदि वे
(क) न्यायालय के द्वारा दिवालिया न्याय-निर्णीत कर दिए गए हाें, अथवा (ख) अपने पद के कर्तव्यों के दौरान किसी नियोजन में लगे हों, अथवा (ग) सरकार की राय में, मानसिक या शारीरिक असमर्थता या किसी प्रकार की ऐसी भूलचूक के कार्य में लिप्त होने के कारण, जो कि आयोग के हित में अहितकर हो, कार्यालय में आगे बने रहने के लिए अयोग्य हो :
परन्तु, आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगण दुराचरण या सिद्ध दुव्र्यवहार के आधार पर, नियमों के अधीन विहित रीति से जाँच-पड़ताल किये बिना, जिसमें कि ऐसे दुराचरण एवं दुव्र्यवहार को साबित किया जा सकें, कार्यालय से नहीं हटाये जायेंगे।
7. आयोग के सचिव। - (1) आयोग का एक सचिव होगा जो पूर्णकालिक पदाधिकारी होगा। (2) आयोग के सचिव की नियुक्ति, राज्य सरकार के द्वारा बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों में से, जो राज्य सरकार में कम से कम संयुक्त सचिव के वेतनमान में हों, की जाएगी। 8. आयोग के कार्य एवं शक्ति।-आयोग विश्वविद्यालयों तथा अंगीभूत महाविद्यालयों/संस्थानों में अध्यापकों की नियुक्ति हेतु, जैसा कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 (बिहार अधिनियम, 24, 1976) एवं बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम (बिहार अधिनियम 23, 1976) में विहित किया गया है, अनुशंसा करेगा एवं अध्यापकों की नियुक्ति के संबंध में, यह उक्त अधिनियमों एवं उनके अधीन बनाए गए परिनियम के अधीन आयोग के लिए यथा विहित कृत्यों का निर्वहन करेगा।
9. नियम बनाने हेतु राज्य सरकार की शक्ति। - राज्य सरकार किसी अन्य विषय सहित जो विहित किया जाने वाला या किया जाए, इस अधिनियम के उद्देश्यों एवं प्रयोजनों, को पूरा करने/आयोग के अध्यक्ष/ सदस्य/सचिव/पदाधिकारियों/कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्त्तों के लिए, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी।
10. आयोग की विनियम बनाने की शक्ति। - (1) आयोग पात्र उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया सहित अपने कामकाज और प्रक्रिया को विनियमित करने हेतु विनियम बना सकेगा।
(2) आयोग के द्वारा बनाया गया कोई भी विनियम सरकार के पूर्व अनुमोदन के पश्चात् ही प्रवृत्त होगा। 11. निरसन एवं व्यावृत्ति ।- (1) इस अधिनियम के प्रवृत होने के पश्चात्, बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 एवं पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के अधीन बिहार लोक सेवा आयोग की विश्वविद्यालयों तथा अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्ति की शक्ति निरसित समझी जाएगी।
(2). ऐसे निरसन के होते हुए भी, बिहार लोक सेवा आयोग की अनुश्ांसा पर बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 एवं पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के अधीन किया गया कुछ भी अथवा की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के अधीन किया गया या की गई समझी जाएगी, मानो यह अधिनियम उस तिथि प्रवृत था जिस दिन वैसा कुछ किया गया था अथवा वैसी कोई कार्रवाई की गई थी।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 1 िसत(cid:15)बर 2017
उद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतु
चूँकि विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों के चयन का वर्तमान प्रावधान से चयन प्रक्रिया दीर्घकालिक हो रही है और
चूँकि विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों के विरूद्ध बहुत बड़ी संख्या मेें शिक्षकों के पद रिक्त है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और
चूँकि विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षकों के शीघ्र एवं उचित ढंग से चयन के लिए एक अलग आयोग आवश्यक है
इसलिए राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की कार्रवाई के लिए प्रावधान करने हेतु बिहार राज्य विश्वविद्यालय आयोग के गठन हेतु इस विधेयक को अधिनियमित करना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।
((((कृष्णनन्दन प्रसाद वकृष्णनन्दन प्रसाद वकृष्णनन्दन प्रसाद वकृष्णनन्दन प्रसाद वर्मार्मार्मार्मा)))) भार-साधक सदस्य ।
पटना, दिनांक 23.08.2017
सचिव, बिहार विधान सभा।
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