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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 13 September 2017

Published 13 September 2017

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-09-13.828
Languages
English, Hindi

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कार्यभारित स्थापना के कर्मियों के नियमित स्थापना में आने के बाद कालबद्ध प्रोन्नति विषयः- कार्यभारित स्थापना के कर्मियों के नियमित स्थापना में आने के बाद कालबद्ध प्रोन्नति कार्यभारित स्थापना के कर्मियों के नियमित स्थापना में आने के बाद कालबद्ध प्रोन्नति दिये जाने के संबंध में।

जाने के संबंध में।

राज्य सरकार के कार्य विभागों में विभिन्न पदनाम से आवश्यकतानुसार कार्यभारित कर्मियों की सेवाएं, राज्य सरकार के कार्य विभागों में विभिन्न पदनाम से आवश्यकतानुसार कार्यभारित कर्मियों की सेवाएं, राज्य सरकार के कार्य विभागों में विभिन्न पदनाम से आवश्यकतानुसार कार्यभारित कर्मियों की सेवाएं, ली जातीं रही हैं। ये कर्मी नियमित स्थापना के कर्मी नहीं होते हैं अपितु इन्हें निर्माण कार्य के ली जातीं रही हैं। ये कर्मी नियमित स्थापना के कर्मी नहीं होते हैं अपितु इन्हें निर्माण कार्य के वैकल्पिक रूप से ली जातीं रही हैं। ये कर्मी नियमित स्थापना के कर्मी नहीं होते हैं अपितु इन्हें निर्माण कार्य के प्राक्कलनों में समाविष्ट किया जाता है। इन कर्मियों के सम्बन्ध में चतुर्थ वेतन समिति का अभिकथन है कि यदि प्राक्कलनों में समाविष्ट किया जाता है। इन कर्मियों के सम्बन्ध में चतुर्थ वेतन समिति का अभिकथन है कि यदि प्राक्कलनों में समाविष्ट किया जाता है। इन कर्मियों के सम्बन्ध में चतुर्थ वेतन समिति का अभिकथन है कि यदि

त कर्मियों की भॉंति प्रोन्नति आदि का लाभ इन्हें नियमित स्थापना मे परिवर्तित किया जाता है तो इन्हें नियमित कर्मियों की भॉंति प्रोन्नति आदि का लाभ इन्हें नियमित स्थापना मे परिवर्तित किया जाता है तो इन्हें नियमि दिया जा सकता है, अन्यथा इन्हें ये लाभ नहीं दिए जा सकते । दिया जा सकता है, अन्यथा इन्हें ये लाभ नहीं दिए जा सकते ।

2. दिनांक 01/04/81 से चतुर्थ वेतन समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा अकार्यात्मक प्रोन्नति 01/04/81 से चतुर्थ वेतन समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा अकार्यात्मक प्रोन्नति 01/04/81 से चतुर्थ वेतन समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा अकार्यात्मक प्रोन्नति ी व्यवस्था की गई । यह व्यवस्था के रूप में 10 एवं 25 वर्षो की सेवा पूरी होने पर कालबद्ध प्रोन्नति की व्यवस्था की गई । यह व्यवस्था के रूप में 10 एवं 25 वर्षो की सेवा पूरी होने पर कालबद्ध प्रोन्नति क

नियमित स्थापना के कर्मियों के लिए प्रभावी हुई। चूॅंकि कार्यभारित कर्मियों को उनकी सेवा की निरंतरता को नियमित स्थापना के कर्मियों के लिए प्रभावी हुई। चूॅंकि कार्यभारित कर्मियों को उनकी सेवा की निरंतरता को नियमित स्थापना के कर्मियों के लिए प्रभावी हुई। चूॅंकि कार्यभारित कर्मियों को उनकी सेवा की निरंतरता को दृष्टिपथ में रखते हुए नियमित स्थापना में परिवर्तित करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया था, अतः दृष्टिपथ में रखते हुए नियमित स्थापना में परिवर्तित करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया था, अतः दृष्टिपथ में रखते हुए नियमित स्थापना में परिवर्तित करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया था, अतः ें आने के बाद इन्हें कलबद्ध प्रोन्नति दिए जाने का निर्णय लिया गया। वित्त विभागीय ें आने के बाद इन्हें कलबद्ध प्रोन्नति दिए जाने का निर्णय लिया गया। वित्त वि इनके नियमित स्थापना में आने के बाद इन्हें कलबद्ध प्रोन्नति दिए जाने का निर्णय लिया गया। वित्त वि संकल्प संख्या-1503, दिनांक 27/03/1987 के द्वारा कार्यभारित स्थापना की अवधि को जोड़ते हुए कार्यभारित 27/03/1987 के द्वारा कार्यभारित स्थापना की अवधि को जोड़ते हुए कार्यभारित 27/03/1987 के द्वारा कार्यभारित स्थापना की अवधि को जोड़ते हुए कार्यभारित धान निर्गत तिथि से प्रभावी कर्मियों को प्रवर कोटि/कालबद्ध प्रोन्नति दिये जाने का प्रावधान किया गया। उक्त प्रावधान निर्गत तिथि से प्रभावी कर्मियों को प्रवर कोटि/कालबद्ध प्रोन्नति दिये जाने का प्रावधान किया गया। उक्त प्राव द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि दिनांक 27/03/1987 के किया गया। पत्र संख्या-5000, दिनांक 21/09/1992 के द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि दिनांक किया गया। पत्र संख्या-5000, दिनांकप्रभाव से कालबद्ध प्रोन्नति एवं उसका लाभ दिया जाएगा। प्रभाव से कालबद्ध प्रोन्नति एवं उसका लाभ दिया जाएगा। 3. इसके उलट किसी कार्यालय द्वारा दिनांक के उलट किसी कार्यालय द्वारा दिनांक 01/04/1981 या उसके बाद की तिथियों में किन्तु दिनांक द की तिथियों में किन्तु दिनांक 1987 के पूर्व कार्यभारित कर्मियों को कालबद्ध प्रोन्नति दी गई। मामला समक्ष आने पर वित्त विभागीय 1987 के पूर्व कार्यभारित कर्मियों को कालबद्ध प्रोन्नति दी गई। मामला समक्ष आने पर ि 27.03.1987 के पूर्व कार्यभारित कर्मियों को कालबद्ध प्रोन्नति दी गई। मामला समक्ष आने पर ि टीकरण निर्गत किया गया कि दिनांक 27/03/1987 अथवा पत्रांक-3683, दिनांक 17/05/2003 के द्वारा यह स्पष् 17/05/2003 के द्वारा यह स्पष्टीकरण निर्गत किया गया कि दिनांक 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 13 िसत(cid:16)बर 2017 उसके बाद की देय तिथि से कालबद्ध प्रोन्नति दी जाय। स्पष्ट है कि कार्यभारित कर्मियों को पूर्व की सेवा जोड़ते हुए दिनांक 27/03/1987 के प्रभाव से ही यह प्रोन्नति दी जानी थी। 4. इस स्पष्टीकरण के विरूद्ध दायर C.W.J.C. No- 1009/2005 एवं C.W.J.C. No-774/2005 दायर किया गया जिसमें संयुक्त रूप से पारित न्यायादेश दिनांक-20/09/2005 द्वारा दिनांक 17/05/2003 को जारी स्पष्टीकरण को निरस्त कर दिया गया। उक्त न्यायादेश के विरूद्ध केाई विधि सम्मत अग्रतर कर्रवाई नहीं की गई 5. उपर्युक्त के आधार पर स्व॰ कौशल किशेार सिंह, सेवानिवृत बिजली मिस्त्री की बहू श्रीमती सुनिता सिंह, द्वारा स्व॰ सिंह को दिए गए प्रथम कालबद्ध प्रोन्नति के लाभ हेतु माननीय लोकायुक्त बिहार के समक्ष वाद सं॰-2/लोक(सिंचाई)-27/2010 दायर किया गया। माननीय लेाकायुक्त द्वारा कंडिका-4 में इंगित वादों पर हुए न्यायादेश का अनुपालन करने का निदेश इस विचार के साथ कि दिनांक 27/03/1987 के पूर्व दी गयी कालबद्ध प्रोन्नति वैचारिक रूप से देते हुए दिनांक 27/03/1987 से आर्थिक लाभ/सेवान्त लाभ का भुगतान किया जाय। 6. C.W.J.C. No- 1009/2005 एवं C.W.J.C. No-774/2005 में संयुक्त रूप से दिनांक 20/09/2005 को पारित न्यायादेश का कार्यान्वयन राज्य सरकार के समक्ष विचाराधीन था।

7. सम्यक्‌ विचारोपरान्त सरकार द्वारा यह निर्णय लिया जाता है कि कार्यभारित स्थापना के वैसे कर्मी जिन्हें नियमित किया जा चुका है, को कार्यभारित स्थापना में नियुक्ति की तिथि से 10/25 वर्ष की कालावधि को दृष्टिपथ में रखते हुए कालबद्ध प्रोन्नति प्रदान की जाय। यह प्रोन्नति दिनांक 01/04/1981 से दिनांक 27/03/1987 के बीच वैचारिक रूप से दी जा सकेगी और उसका वास्तविक लाभ दिनांक 27/03/1987 के प्रभाव से अनुमान्य होगा। पुनः जो कर्मी उक्त अवधि (27/03/1987 के पूर्व) में सेवा निवृत्त हुए हों उनके संदर्भ में वैचारिक लाभ के आधार पर सेवान्त लाभों की गणना की जाएगी।

8. इस सम्बन्ध में पूर्व में निर्गत संकल्प/परिपत्र इस हद तक संशोधित समझे जायेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

राहुल सिंह, सचिव (व्यय), वित्त विभाग।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 13 September 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-09-13.828/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-09-13.828.