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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 November 2017

Published 01 November 2017

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-11-01.44
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 10101010 काित(cid:29)ककाित(cid:29)ककाित(cid:29)ककाित(cid:29)क 1931931931939999 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 44444444 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ————————

1111 नव%बनव%बनव%बनव%बरररर 2017201720172017 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)0, पदःथापन, बदली, श(cid:18)0, छु 6ट(cid:15) और अ9य :य(cid:18)0गत सूचनाएं। ---

भाग-1-क—ःवयंसेवक गु>म@ के समादेंटाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Iाओं के पर(cid:15)Iा-फल, काय(cid:29)बम, छाऽवृ(cid:18)M ूदान, आNद।

---

भाग-1-ग—िशIा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Iाफल आNद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राOयपाल और काया(cid:29)PयI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आNद। 2-4 भाग-3—भारत सरकार, पQRम बंगाल सरकार और उTच 9यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राOय गजट@ के उVरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ[त (cid:18)वधान मंडल मY उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Nकये जानेवाले ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और उ[त (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथापन के पूव(cid:29) ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Qजनपर रांशपित क\ Oयेंठ अनुमित िमल चुक\ है। ---

भाग-8—भारत क\ संसद मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मY पुर:ःथापन के पूव(cid:29) ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व^ापन

---

भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क\ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प_रवहन सूचनाएं, 9यायालय सूचनाएं और सव(cid:29)साधारण सूचनाएं इ`याNद। ---

पूरक

---

पूरक-क 5-202 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017

भागभागभागभाग----2222

(cid:18)बहार-राOयपाल और काया(cid:29)PयI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आNद

ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

जल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभाग

---------------------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 21 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 2017

सं0 बा0/रू0/स्था0-18/2017-सं0 बा0/रू0/स्था0-18/2017-सं0 बा0/रू0/स्था0-18/2017-सं0 बा0/रू0/स्था0-18/2017-504504504504—बिहार सिंचाई अधिनियम, 1997 की धारा-115(1) एवं (2) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्य सरकार एतद्‌ द्वारा बिहार सिंचाई, बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण नियमावली 2003 का संशोधन करने हेतु निम्नलिखित नियमावली बनाती हैः-

''बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण (संशोधन) नियमावली, 2017'' ''बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण (संशोधन) नियमावली, 2017'' ''बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण (संशोधन) नियमावली, 2017'' ''बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण (संशोधन) नियमावली, 2017''

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ :- (1) यह नियमावली बिहार सिंचाई बाढ़ प्रबंधन एवं जल निस्सरण (संशोधन) नियमावली 2017 कहलायेगी। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा । (3) यह तुरंत प्रवृत होगी । ''राज्य तकनीकी सलाहकार समिति'' निम्नलिखित द्वारा 2 उक्त नियमावली 2003 के नियम 4.9.3 के अधीन गठित ''राज्य तकनीकी सलाहकार समिति'' ''राज्य तकनीकी सलाहकार समिति'' ''राज्य तकनीकी सलाहकार समिति''

प्रतिस्थापित की जायेगी ।

1 मुख्य अभियन्ता, केन्द्रीय रूपाकंण, शोध एवं गुण नियंत्रण, जल संसाधन विभाग, पटना अध्यक्ष
2 अध्यक्ष, गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग, पटना द्वारा नामित एक सदस्य सदस्य
3 मुख्य अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, वीरपुर सदस्य
4 मुख्य अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, गोपालगंज सदस्य
5 निदेशक, वाल्मी, जल संसाधन विभाग, फुलवारीशरीफ, पटना सदस्य
6 मुख्य अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, कटिहार सदस्य
7 मुख्य अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर सदस्य
8 मुख्य अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सदस्य
9 मुख्य अभियन्ता, समग्र योजना अन्वेषण एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, पटना सदस्य
10 अभियन्ता प्रमुख लघु जल संसाधन विभाग, बिहार द्वारा नामित एक सदस्य सदस्य
11 अभियन्ता प्रमुख पथ निर्माण विभाग, बिहार द्वारा नामित एक सदस्य सदस्य
12 निदेशक, कृषि विभाग, पटना सदस्य
13 प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पटना द्वारा नामित एक सदस्य सदस्य
14 मुख्य अभियन्ता, पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर सदस्य
15 मुख्य अभियन्ता, (ब्रीज) पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर, उत्तरप्रदेश सदस्य
16 मुख्य अभियन्ता, पूर्व रेलवे, 17 नेताजी सुभाष रोड, कलकत्ता-01 सदस्य
17 मुख्य अभियन्ता, (ब्रीज) उत्तर पूर्व सीमान्त रेलवे, मालीगॉव, गुवाहाटी, आसाम सदस्य
18 मुख्य अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, पटना सदस्य
19 संयुक्त निदेशक, एफ0एम0आई0एस0सी0, अनिसाबाद, पटना सदस्य
20 अधीक्षण अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना सदस्य
21 अधीक्षण अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण रूपाकंण अंचल, पटना सदस्य सचिव

3. शेष अन्य नियम पूर्ववत्‌ रहेंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, योगेश्वरधारी सिंह, संयुक्त सचिव (अभि0)।3 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017

The 21st September 2017

No. बा0/रू0/स्था018/2017-504—In exercise of the power conferred by Bihar Irrigation Act 1997, under Section – 115(1) & (2) the Government of Bihar is pleased to modify Bihar Irrigation, Flood Management and Drainage Rules, 2003 and make the following rules to amend the Bihar Irrigation, Flood Management and Drainage Rules, 2003 :-

1. Short name, extent & commencement :-

(1) This rule will be known as Bihar Irrigation, Flood Management and Drainage (Amendment) Rule, 2017.

(2) It shall extend to the whole of the State of Bihar.

(3) It shall come into force at once.

2. State Technical Advisory Committee constituted under Rule 4.9.3 of the said Rules, 2003 will be substituted by the following:-

"State Technical Advisory Committee "

1 Chief Engineer, Central Design, Research & Quality Control, WRD, Patna Chairman
2 A Member Nominated by Chairman GFCC, Patna Member
3 Chief Engineer, Flood Control & Drainage, WRD, Birpur Member
4 Chief Engineer, Flood Control & Drainage, WRD, Gopalganj Member
5 Director , WALMI, WRD, Phulwarisharif, Patna Member
6 Chief Engineer, Flood Control & Drainage, WRD, Katihar Member
7 Chief Engineer, Flood Control & Drainage, WRD, Samastipur Member
8 Chief Engineer, Flood Control & Drainage, WRD, Muzaffarpur Member
9 Chief Engineer, Master Planning Investigation & Project Preparation, WRD, Patna Member
10 A Member Nominated by Engineer-In-Chief, Minor Water Resources Department, Bihar Member
11 A Member Nominated by Engineer-In-Chief, Road Construction Department, Bihar Member
12 Director, Agriculture Department, Patna Member
13 A Member Nominated by Principal Chief Forest Conservator, Patna Member
14 Chief Engineer, Eastern Central Railway, Hajipur Member
15 Chief Engineer (Bridges), N.E. Railway, Gorakhpur, U.P. Member
16 Chief Engineer, Eastern Railway, 17, Netaji Subhash Road, Calcutta-700001 Member
17 Chief Engineer (Bridges), N.E.F. Railway, Maligaon, Gauhati, Assam Member
18 Chief Engineer, Flood Control & Drainage, WRD, Patna Member
19 Joint Director, FMISC, Anisabad, Patna Member
20 Superintending Engineer, Flood Control Planning & Monitoring Circle, Patna Member
21 Superintending Engineer, Flood Control Design Circle, Patna Member Secretary
4 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017

By Order of the Governor of Bihar,

Yogeshwar Dhari Singh, Joint Secretary (Engg.).

——— अधीIकअधीIकअधीIकअधीIक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुNित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 33333333ÑÑÑÑ571+11110----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in5 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017

(cid:18)बहार गजट

का

पूरक(अ0)

ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत

ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

सं0 5 नि0गो0वि0 (8) 06/2012—316 नि0गो0

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

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संकल्प

शुद्धि-पत्रा

20 अक्तूबर 2017

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभागीय संकल्प-307 नि0गो0 दिनांक 12.10.2017 के तीसरे कंडिका में अंकित वाद संख्या-224/2014 के स्थान पर शुद्ध रूप में वाद संख्या-224/2017 पढा़ एवं समझा जाय।

2. उक्त संकल्प की अन्य शर्ते यथावत्‌ रहेगी।

आदेश से,

वीरेन्द्र कुमार सिन्हा, अवर सचिव।

——— सं0 5@vk02&1020@2013—853 yksd LokLF; vfHk;a=.k foHkkxyksd LokLF; vfHk;a=.k foHkkxyksd LokLF; vfHk;a=.k foHkkxyksd LokLF; vfHk;a=.k foHkkx &&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&& ladYi 12 अक्तूबर 2017

श्री गणेश प्रसाद यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध मुजफ्फरपुर शहरी जलापूर्ति योजना के विस्तारीकरण/सुदृढ़ीकरण (फेज-2) में मे0 जुसको लिमिटेड, जमशेदपुर द्वारा कराये गये कार्यों/आपूर्ति के लिए फर्म द्वारा प्राईस न्यूट्रलाईजेशन के तहत (छड़ एवं सीमेंट सहित) किये गये दावों की बिना जांच परख किये कुल `2,20,54,120/-(रूपये दो करोड़ बीस लाख चौउवन हजार एक सौ बीस मात्र) की राशि के अनियमित भुगतान हेतु अनुशंसा का आरोप विभागीय प्रधान सचिव की अध्यक्षता में दिनांक 08.04.2010 को हुई निविदा समिति की बैठक में सरकार के संज्ञान में आया।

2. मामले की सरकार द्वारा समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प सं0-5/आ02-1020/2013-29, दिनांक 31.01.2014 द्वारा श्री यादव के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी तथा श्री यादव के दिनांक 31.01. 2014 को सेवानिवृत्ति के मद्देनजर विभागीय आदेश संख्या-554 दिनांक 18.07.2016 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) में संपरिवर्तित किया गया।6 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 3. श्री यादव के विरूद्ध संस्थित विभागीय कार्यवाही के जांच संचालन पदाधिकारी, विभागीय जांच आयुक्त, श्री रामेश्वर सिंह, भा0प्र0से0 के पत्रांक-वि0का0सं0-49/14-113 दिनांक 02.03.2016 द्वारा जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। जांच प्रतिवेदन में निष्कर्ष स्वरूप कहा गया है कि ''कंडिका 2.1 में सूचीबद्ध आरोपों में से Price Neutralization के तहत ऐजेंसी के दावों की जांच एवं प्रेषण के संदर्भ में प्रमंडल स्तर पर बरती गयी त्रुटियों के लिए कोई आरोप नहीं बनता है। भंडारपंजी के संधारण में हुई त्रुटियों के लिए प्रथम दृष्टया सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को जिम्मेवार माना जा सकता है, आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध कोई आरोप प्रमाणित नहीं होता है।'' 4. जांच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए एवं असहमति के बिन्दु अंकित करते हुए विभागीय पत्रांक-5/आ02-1020/2013-555, दिनांक 18.07.2016 द्वारा जांच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए आरोपित पदाधिकारी से 15 दिनों के अंदर द्वितीय कारण पृच्छा (लिखित अभिकथन) समर्पित करने का अनुरोध किया गया। 5. उक्त के आलोक में आरोपित पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक 19.08.16 द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया। आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त कारण पृच्छा को सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त अस्वीकार्य पाया गया।

6. वर्णित परिपेक्ष्य में सरकार द्वारा पूरे मामले की पुनः समीक्षा की गई तथा जांच संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए आरोपित पदाधिकारी श्री गणेश प्रसाद यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत पच्चीस (25) प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोकने का दंड अधिरोपित करने का प्रस्ताव गठित किया गया तथा सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किया गया।

7. उपरोक्त विभागीय प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्रस्तावित दण्ड पर परामर्श देने हेतु विभागीय पत्रांक-5/आ02-1020/2013-08, दिनांक 09.01.2017 द्वारा अनुरोध किया गया।

8. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-05/प्रो0-3-01/2017-689 लो0से0आ0 दिनांक 28.06.2017 द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अधिरोपित विभागीय दण्ड प्रस्ताव से असहमति व्यक्त की गयी। इस मामले की पुनः समीक्षा की गयी तथा समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि बिहार लोक सेवा आयोग का उपर्युक्त परामर्श स्वीकार योग्य नहीं है। 9. उल्लेखनीय है कि पाईपों की आपूर्ति करने से संबंधित विश्वसनीय एवं वैध कागजात अथवा कोई पुष्ट साक्ष्य उपलब्ध नहीं रहने के बावजूद आरोपित पदाधिकारी द्वारा बिना किसी आधार के इतनी बड़ी राशि का Price Neutralisation से संबंधित दावा अपने उच्चाधिकारियों सहित सचिव को अनुशंसित किया गया, यह इनके गलत मंशा को दर्शाता है। बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के नियम 109 में निहित उपबंध के तहत प्रमंडलीय पदाधिकारी की हैसियत से भंडार पंजी के संधारण में बरती गयी अनियमितता, सामग्रियों की आपूर्ति, रख-रखाव एवं अधिष्ठापन के नियंत्रण की जिम्मेवारी आरोपित पदाधिकारी की बनती थी। जब योजना में उपयोग की जानी वाली सामग्री का भुगतान सरकारी कोष से होना है तो कार्यपालक अभियंता की यह जिम्मेवारी बनती है कि इसके भंडारण एवं वितरण पर नियंत्रण रखे।

समीक्षा के क्रम में यह भी स्पष्ट होता है कि योजना के कार्यान्वयन में आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण का अभाव रहा है तथा इन्होंने अपने जिम्मेवारी का वहन नहीं किया है। इन्होंने वगैर प्रमाणिक कागजात एवं पुष्ट साक्ष्यों के ही `2,20,54,120/-(रूपये दो करोड़ बीस लाख चौउवन हजार एक सौ बीस मात्र) का Price Neutralisation का प्रस्ताव अनुशंसित कर दिया, जबकि निविदा समिति की बैठक में `1,14,13,628/-(रूपये एक करोड़ चौदह लाख तेरह हजार छः सौ अठ्‌ठाईस मात्र) ही अनुमोदित किया गया था। इन्हें अनुशंसा भेजने के पूर्व आवश्यक छानबीन करनी चाहिए थी। यह एक गंभीर कदाचार का मामला बनता है।

उपर्युक्त विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि श्री यादव द्वारा Price Neutralisation के अनुशंसा करने में गंभीर अनियमितता बरती गयी है। श्री यादव को पूर्व में भी एक मामले में पांच प्रतिशत पेंशन पांच वर्षाें तक रोेकने का दण्ड दिया गया है तथा एक अन्य मामले में इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के मद्देनजर द्वितीय कारणपृच्छा पूछा जाना प्रक्रियाधीन है। इससे स्पष्ट होता है कि अपने सेवाकाल में आरोपित पदाधिकारी द्वारा लगातार अनियिमतता बरती गयी है तथा इनके आचरण में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। यह गंभीर अनुशासनहीनता, कर्त्तव्यहीनता, अन्तर्लिप्पतता तथा कदाचार को प्रमाणित करता है।7 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 10. वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री गणेश प्रसाद यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, मुजफ्फरपुर संप्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत निम्नांकित शास्ति अधिरोपित कर संसूचित किया जाता हैः-

(i) पच्चीस (25) प्रतिशत पेंशन स्थायी पच्चीस (25) प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोकने का दंड।रूप से रोकने का दंड।रूप से रोकने का दंड।रूप से रोकने का दंड। पच्चीस (25) प्रतिशत पेंशन स्थायी पच्चीस (25) प्रतिशत पेंशन स्थायी

11. उक्त निर्णय पर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 12. उपर्युक्त कंडिका-10 में निहित शास्ति पर मंत्रिपरिषद का (मंत्रिपरिषद की बैठक दिनांक 03.10.2017 मद सं0-09) अनुमोदन प्राप्त है।

आदेशःआदेशःआदेशःआदेशः—आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय।जाय।जाय।जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशिकांत तिवारी, अपर सचिव।

---------------------------- सं0 2/आरोप-01-40/2014-सा0प्र0-6923 सामान्य सामान्य सामान्य सामान्य प्रश्प्रश्प्रश्प्रशासन विभागाासन विभागाासन विभागाासन विभाग ---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 8 जून 20178 जून 20178 जून 20178 जून 2017

श्री अजय कुमार ठाकुर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 684/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, फारबिसगंज-सह-प्रभारी अंचल अधिकारी, नरपतगंज सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित जिला पदाधिकारी, अररिया के पत्रांक 1172/रा0 दिनांक 08.09.2011 द्वारा उपलब्ध कराया गया। उक्त आरोप पत्र में रोकड़ बही का संधारण सही ढंग से नहीं किये जाने, रोकड़ बही दिनांक 24.04.2009 से शून्य से प्रारंभ करने एवं पूर्व के रोकड़ बही दिनांक 26.06.2009 तक लिखा जाने, पारित अभिश्रव का रोकड़ बही में संधारण नहीं करने, प्राप्त अभिश्रव समय पर पारित नहीं करने एवं बिना रोकड़ बही पर प्रभार प्राप्त किये राशि का आय व्यय करने के आरोप प्रतिवेदित है।

2222.... श्री ठाकुर से उक्त आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 2489 दिनांक 17.02.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर श्री ठाकुर के पत्रांक 254 दिनांक 03.03.2016 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 5434 दिनांक 13.04. 2016 द्वारा जिला पदाधिकारी, अररिया से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। जिला पदाधिकारी, अररिया के पत्रांक 2451/रा0 दिनांक 25.10.2016 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ।

3333.... प्रतिवेदित आरोपों, श्री ठाकुर के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, अररिया द्वारा समर्पित मंतव्य पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री ठाकुर के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, अररिया के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। 4444.... जिला पदाधिकारी, अररिया को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।

5555.... श्री अजय कुमार ठाकुर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 684/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, फारबिसगंज-सह-प्रभारी अंचल अधिकारी, नरपतगंज सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना को निदेश दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। ध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई यक कार्रवाई यक कार्रवाई यक कार्रवाई आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंकी प्रति अनुबंकी प्रति अनुबंकी प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश् ध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश् ध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश् के लिए भेज दी जाय।के लिए भेज दी जाय।के लिए भेज दी जाय।के लिए भेज दी जाय। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।8 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 सं0 2/सी0- 3-3098/2005-सा0प्र0-7750

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 27 जून 201727 जून 201727 जून 201727 जून 2017

श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 427/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी, जहानाबाद सम्प्रति उप विकास आयुक्त, खगड़िया के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1183 दिनांक 06.06.2005 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' में गैर मजरूआ आम एवं गैर मजरूआ मालिक खाते की जमीन को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर, राजस्व नियमों की अनदेखी करते हुए लगान निर्धारण की स्वी—ति हेतु भूमि सुधार उप समार्हाा, जहानाबाद को अभिलेख तैयार कर अनुषंसा के साथ भेजे जाने का आरोप प्रतिवेदित है।

2222. प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में श्री अंसारी से विभागीय पत्रांक 7015 दिनांक 18.07.2006 एवं 12722 दिनांक 14.12.2006 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर उनके द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 29.12.2006 समर्पित किया गया। 3333.... श्री अंसारी से प्राप्त स्पष्टीकरण तथा संलग्न किये गये साक्ष्यों के आलोक में जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से विभागीय पत्रांक 1682 दिनांक 14.02.2007 द्वारा मन्तव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा प्रतिवेदित मंतव्य पत्रांक 329 दिनांक 16.03.2011 द्वारा प्राप्त हुआ।

4444.... प्रतिवेदित आरोप, श्री अंसारी के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, जहानाबाद से प्राप्त मंतव्य पर सम्यक विचारोपरान्त श्री अंसारी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8169 दिनांक 17.06.2014 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, मगध प्रमण्डल, गया को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

5555.... संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 465 दिनांक 28.02.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन के उपरान्त जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। जाँच प्रतिवेदन में दोनों आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

6666. संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के उपर्युक्त निष्कर्ष से अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निर्धारित असहमति के बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 10101 दिनांक 13.07.2015 द्वारा श्री अंसारी से अभ्यावेदन की मांग की गयी। श्री अंसारी द्वारा असहमति के बिन्दुओं पर अभ्यावेदन दिनांक 01.08.2015 समर्पित किया गया।

7777.... श्री अंसारी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर विभागीय पत्रांक 13899 दिनांक 14.09.2015 द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से मंतव्य की मांग की गयी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 930 दिनांक 01.09.2016 द्वारा प्राप्त मंतव्य में प्रतिवेदित किया गया कि गैर मजरूआ आम एवं खास जमीन की लगान निर्धारण नहीं होता है। गैर मजरूआ आम जमीन की बन्दोबस्ती की स्वी—ति वर्ष 2010 के पूर्व सरकार द्वारा दी जाती थी। गैर मजरूआ खास जमीन का भी लगान निर्धारण नहीं किया जाता है। सक्षम श्रेणी के परिवारों के साथ गैर मजरूआ खास जमीन की बन्दोबस्ती की शक्ति संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी को प्रदा है। जब भी किसी गैर मजरूआ खास जमीन की बन्दोबस्ती की स्वी—ति दी जाती है, तो वैसी जमीन का लगान भी साथ-साथ निर्धारित कर दिया जाता है।

प्रश्नगत मामले में श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी, जहानाबाद के द्वारा गैर मजरूआ आम किस्म नहीं स्वरूप जमीन का एवं गैर मजरूआ खास जमीन का लगान निर्धारण की अनुशंसा किया जाना प्रतिवेदित है, जो गलत है। अंचल अधिकारी के रूप में श्री अब्दुल बहाव अंसारी से अपेक्षा नहीं की जाती है कि उनके द्वारा गैर मजरूआ आम किस्म नदी एवं गैर मजरूआ खास जमीन का लगान निर्धारण का प्रस्ताव अपनी अनुशंसा के साथ वरीय पदाधिकारी को भेजें। उनका यह —त्य नियम के प्रतिकूल है।

8888.... प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन, श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन एवं राजस्व एवं भुमि सुधार विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य की समीक्षा के उपरान्त निम्नांकित तथ्य पाया गयाः-

(i) लगान निर्धारण वाद सं0 5-98-99 एवं 6/98-99 में कहीं इस तथ्य का उल्लेख नहीं है कि प्रस्तावित भूमि पर निर्मित मंदिर, औषधालय एवं विद्यालय का सार्वजनिक उपयोग होता है तथा इससे संबंधित साक्ष्य का उल्लेख/संलगन नहीं किया गया है। अपने स्पष्टीकरण अथवा अभ्यावेदन में भी श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो कि उस प्रस्तावित भूमि पर निर्मित मंदिर एवं अन्य संस्थानों का सार्वजनिक उपयोग होता है।

(ii) श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा अपने अभ्यावेदन में भी स्वयं स्वीकार कि गया है कि प्रस्तावित भूमि का खाता लक्ष्मीनारायण मंदिर, हुलासगंज के संस्थापक के नाम से खोलने की अनुषंसा की गयी थी।

(iii) प्रस्तावित भूमि का रकबा बड़ा होने तथा नदी की गैर मजरूआ भूमि की प्र—ति बदल जाने के बावजूद भी किसी व्यक्ति अथवा संस्था के नाम से लगान निर्धारण किया जाना सार्वजनिक हित में नहीं है क्योंकि नदी से व्यापक जनहित जुड़ा हुआ रहता है।

(iv) लगान निर्धारण के प्रासंगिक वादो के अभिलेखों में श्री अब्दुल बहाव अंसारी के द्वारा स्थलीय निरीक्षण किये जाने एवं निरीक्षण में पाये गये तथ्यों का कोई उल्लेख नहीं है।

(v) राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा प्रतिवेदित मंतव्य में अंकित किया गया है कि अंचल अधिकारी के रूप में श्री अंसारी द्वारा गैर मजरूआ आम किस्म नदी एवं गैर मजरूआ खास जमीन का लगान निर्धारण का प्रस्ताव अपनी अनुशंसा के साथ वरीय पदाधिकारी को भेजे जाने का —त्य नियम के प्रतिकूल है।9 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 9999.... वर्णित तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन, श्री अंसारी के अभ्यावेदन एवं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य के सम्यक्‌ विचारोपरान्त श्री अंसारी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर संशोधित) के संगत प्रावधानों के तहत श्री अंसारी के विरूद्ध ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' पर रोक'' पर रोक'' पर रोक'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

10101010.... अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 427/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी, जहानाबाद सम्प्रति उप विकास आयुक्त, खगड़िया के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13676 दिनांक 05.10.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (समय समय पर ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया संशोधित) के संगत प्रावधानों के तहत ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' गया।

11111111.... श्री अंसारी द्वारा उपर्युक्त दंडादेश के विरूद्ध पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 31.10.2016 समर्पित किया गया। पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में श्री अंसारी का कहना है कि जिला पदाधिकारी या आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया उनके अनुशासनिक प्राधिकार नहीं थे, फिर भी जिला पदाधिकारी तथा आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया के द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में गठित आरोप बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-17(3) के प्रतिकूल है। साथ ही यह भी कहा गया है कि संकल्प दिनांक 17.06.2014 के माध्यम से आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया को संचालन पदाधिकारी नियुक्त करना भी सी0सी0ए0 रूल्स के उक्त नियम-17(3) के प्रतिकूल है। इनके द्वारा कहा गया है कि आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया द्वारा उनके विरूद्ध गठित उक्त सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है जो कि संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पत्रांक 645 दिनांक 28.02.2015 से स्पष्ट हो सकेगा। इस प्रकार जिस प्राधिकार के द्वारा उनके विरूद्ध आरोप गठित किया गया, उन्हीं के द्वारा उन्हें आरोप से मुक्त किया गया है। ऐसी स्थिति में संसूचित दंड अपने आप में नैसर्गिक न्याय के प्रतिकूल है। अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा उक्त संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के मंतव्य/निष्कर्ष से बिना कारण और बिना साक्ष्य के ही असहमत होने का निर्णय लिया गया है जो बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(ii) के प्रतिकूल है। जहाँ तक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 4097 दिनांक 23.09.1953 की कंडिकाओं के विश्लेषण और स्थल निरीक्षण से पाया गया कि कंडिका-2 एवं 3(iv) में निहित तथ्यों के आलोक में कार्रवाई की गई। चूँकि स्थल धार्मिक मंदिर एवं स्कूल तथा अन्य धार्मिक कार्य से संबंधित था तथा संबंधित भूमि के संबंध में हल्का कर्मचारी एवं अंचल निरीक्षक ने अपने जाँच प्रतिवेदन से संबंधित भूमि पर मंदिर 40 वर्ष पूर्व बना दिखाते हुए लगान निर्धारण करने का अनुशंसा किया था। यह भी उल्लेखनीय है कि चकबन्दी पदाधिकारी द्वारा वाद संख्या 133/86-87 में स्थल निरीक्षण एवं वास्तविक तथ्यों का विवेचना करके अपने आदेश दिनांक 16.01.1997 को श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर हुलासगंज, संस्थापक रामानुजाचार्य के नाम खाता सुधारने का आदेश पारित किया गया। इसी प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोप संख्या-2 को अप्रमाणित माना गया, लेकिन अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा बिना साक्ष्य का असहमति व्यक्त किया गया। इसी प्रकार से संचालन पदाधिकारी का आरोप संख्या-3 के निष्कर्ष से बिना कारण और साक्ष्य के अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा असहमत होने का निर्णय लिया गया है। बिहार जोत समेकन एवं खंडकरण निवारण अधिनियम, 1956 के अनुसार चकबन्दी पदाधिकारी के द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध सक्षम न्यायालय में अपील 30 दिनों के अंदर ही दायर करने का प्रावधान है। पूर्व के पदाधिकारियों द्वारा ससमय कोई कार्रवाई नहीं की गई, उसके लिए वे दोषी नहीं हूँ। उनके पदस्थापन से लगभग 10-11 वर्ष पूर्व ही चकबन्दी पदाधिकारी द्वारा आदेश पारित किया गया था। पारित आदेश के विरूद्ध लगभग 10 वर्षों के बाद अपील दायर करने हेतु विलम्ब का कोई उचित कारण नहीं था। लगान निर्धारण अभिलेख संख्या 05/98-99 एवं 06/98-99 में लगान निर्धारण संबंधी भूमि सुधार उप समाहर्त्ता कि द्वारा दिये गये आदेश के संबंध में कहा गया है कि उक्त आदेश को जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के द्वारा अपने पत्रांक 1737/स्था0 दिनांक 13.07.1999 स्थगित/रोक लगा दिया गया था जिसके विरूद्ध प्रमंडलीय आयुक्त, गया के न्यायालय में नारायण शर्मा सदस्य श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ट्रस्ट के द्वारा आवेदन दाखिल किया गया था, जिसके आलोक में विविध वाद संख्या 08/2009 खोला गया जिसमें आयुक्त महोदय द्वारा दिनांक 14.05.2009 के आदेश में स्थल निरीक्षण के पश्चात्‌ जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के द्वारा पत्रांक 1737/स्था0 दिनांक 13.07.1999 को शिथिल कर दिया गया और दोनों अभिलेखों को जिला पदाधिकारी, जहानाबाद को भेज दिया गया। इस प्रकार स्पष्ट है कि लगान निर्धारण का अनुशंसा किया जाना गलत नहीं था और इस कार्य के लिए किसी प्रकार का दंड देना उचित नहीं है। श्री अंसारी द्वारा यह भी कहा गया है कि एक से अधिक अधिकारी या कर्मचारी के विरूद्ध समान आरोप के लिए भिन्न-भिन्न दंड संसूचित नहीं किया जा सकता है, जो माननीय उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय के विभिन्न संलग्न न्यायादेश से स्पष्ट हो सकेगा। उपरोक्त तथ्यों पर विचार करते हुए श्री अंसारी द्वारा उनके विरूद्ध संकल्प-सह-पठित ज्ञापांक संख्या 13676 दिनांक 05.10.2016 के अन्तर्गत संसूचित दंड को निरस्त करते हुए उनके पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को स्वीकार करने का अनुरोध किया गया है।

12121212.... श्री अंसारी द्वारा उपर्युक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो इनके द्वारा पूर्व में किया गया था। इनके द्वारा कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा असहमति के बिन्दुओं पर श्री अंसारी से प्राप्त अभ्यावेदन पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त ही श्री अंसारी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13676 दिनांक 05.10.2016 द्वारा असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक का दंड संसूचित किया गया है।10 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 13131313.... वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अंसारी के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13676 दिनांक 05.10.2016 द्वारा इनके विरूद्ध ''असंचयात्मक प्र''असंचयात्मक प्र''असंचयात्मक प्र''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर भाव से दो वेतनवृद्धि पर भाव से दो वेतनवृद्धि पर भाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' रोक'' रोक'' रोक'' के संसूचित दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।

14141414.... अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अब्दुल बहाव अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 427/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी, घोषी, जहानाबाद सम्प्रति उप विकास आयुक्त, खगड़िया के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13676 दिनांक 05.10.2016 द्वारा ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' के संसूचित दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' ''असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतनवृद्धि पर रोक'' आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति की प्रति अनुबंध की प्रति की प्रति अनुबंध की प्रति की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियोंके साथ सभी संबंधित पदाधिकारियोंके साथ सभी संबंधित पदाधिकारियोंके साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को को को को सूचनार्थसूचनार्थसूचनार्थसूचनार्थ एवं एवं एवं एवं आवश्आवश्आवश्आवश्यक कार्यार्थयक कार्यार्थयक कार्यार्थयक कार्यार्थ भेज दी जाय।भेज दी जाय।भेज दी जाय।भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

--------- सं0 2/आरोप-01-08/2017-सा0प्र0-7847 ---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 29 जून 201729 जून 201729 जून 201729 जून 2017

मो0 मंजूर आलम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1393/11, तत्कालीन नगर दंडाधिकारी, पटना सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध दिनांक 14.01.2017 को सबलपुर दियारा पतंग उत्सव के दौरान हुई नाव दुर्घटना की उच्चस्तरीय जाँच के उपरान्त प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर एस0डी0आर0एफ0 के नावों का सही ढंग से उपयोग नहीं करने तथा नावों को समय पर ईंधन उपलब्ध नहीं कराने के आरोप के लिए विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित किया गया।

2222.... मो0 आलम से उक्त आरोप पर विभागीय पत्रांक 4152 दिनांक 06.04.2017 एवं स्मार पत्रांक 5603 दिनांक 11.05. 2017 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया। मो0 आलम के पत्रांक-शून्य दिनांक 24.05.2017 द्वारा प्रतिवेदित आरोप के संदर्भ में स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

3333.... प्रतिवेदित आरोपों एवं मो0 आलम द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार मो0 आलम के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोप की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, पटना के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

4444.... जिला पदाधिकारी, पटना को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।

5555.... मो0 मंजूर आलम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1393/11, तत्कालीन नगर दंडाधिकारी, पटना सम्प्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को निदेश दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेश ः-आदेश्आदेश ः-आदेश्आदेश ः-आदेश्आदेश ः-आदेश दिया जाता ा दिया जाता ा दिया जाता ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी सहै कि इस संकल्प की प्रति सभी सहै कि इस संकल्प की प्रति सभी सहै कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्ंबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्ंबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्ंबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी यक कार्रवाई हेतु भेज दी यक कार्रवाई हेतु भेज दी यक कार्रवाई हेतु भेज दी जाय।जाय।जाय।जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 2/परि0-716/2008-सा0प्र0-7965

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 3 जुलाई3 जुलाई3 जुलाई3 जुलाई 2017201720172017

श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, मधुबनी के विरूद्ध आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 1038 दिनांक 23.09.2008 द्वारा आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित प्राप्त हुआ। उक्त आरोप-पत्र में सहायक रोकड़ बही एवं सामान्य रोकड़ बही का भौतिक सत्यापन नहीं करने, दिनांक 01.07.2001 से 02.12.2001 तक सामान्य रोकड़ बही पर हस्ताक्षर नहीं करने, जिला नजारत उप समार्हाा का प्रभार सौंपने के वक्त पंचायत अग्रिम पंजी में दर्ज राषि के वास्तविक जाँचोपरान्त अन्तर पाये जाने तथा दायित्वों के निर्वहन में अक्षमता के कारण सरकारी राशि का दुर्विनियोग एवं गबन होने का आरोप प्रतिवेदित है।

2222.... प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1845 दिनांक 17.03.2009 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय जाँच आयुक्त, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 3333.... विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक 260 दिनांक 23.03.2009 द्वारा विभागीय कार्यवाही संबंधी संकल्प को वापस करते हुए पत्र में अंकित कतिपय त्रुटियों के निराकरण के उपरान्त संकल्प भेजने का निदेश दिया गया।11 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 4444.... उपर्युक्त निदेश के आलोक में विभागीय पत्रांक 9526 दिनांक 23.09.2009 द्वारा प्रपत्र 'क' (साक्ष्य सहित) की प्रति भेजते हुए श्री त्रिपाठी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री त्रिपाठी के पत्रांक 01 दिनांक 09.06.2014 द्वारा स्पष्टीकरण एवं पत्रांक 01 दिनांक 07.11.2014 द्वारा पूरक स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

5555.... आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक 540 दिनांक 11.03.2015 द्वारा जिला पदाधिकारी, जहानाबाद द्वारा श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण पर गठित मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य प्रतिवेदित किया गया।

6666.... विभागीय पत्रांक 6044 दिनांक 21.04.2015 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1845 दिनांक 17.03.2009 की प्रति अन्य कागजातों के साथ विभागीय जाँच आयुक्त, पटना को प्रेषित करते हुए विभागीय कार्यवाही का संचालन कर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया।

7777.... विभागीय जाँच आयुक्त, पटना के पत्रांक 171 अनु0 दिनांक 30.03.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ जिसमें श्री त्रिपाठी के विरूद्ध लेखा संधारण संबंधी उनके द्वारा दायितवों के निर्वहन में शिथिलता और विफलता प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय पत्रांक 6312 दिनांक 05.05.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी से अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त निदेश के आलोक में श्री त्रिपाठी द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 24.05.2016 समर्पित किया गया।

8888.... प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त श्री त्रिपाठी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए ''निन्दन एवं संचयात्मक प्रभाव ''निन्दन एवं संचयात्मक प्रभाव ''निन्दन एवं संचयात्मक प्रभाव ''निन्दन एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।

9999.... श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिश्चित वृहत दंड पर विभागीय पत्रांक 10768 दिनांक 05.08.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 2137 दिनांक 19.10.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिश्चित वृहत दंड पर सहमति संसूचित की गयी।

10101010.... प्रमाणित पाये गये आरोपों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री अशोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 दिनांक 17.11.2016 द्वारा ''निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभा निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''व से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''व से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''व से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' का दंड अधिरोपित एवं निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभा निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभा संसूचित किया गया।

11111111.... उपर्युक्त दंडादेश पर पुनर्विचार हेतु श्री त्रिपाठी द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 02.01.2017 समर्पित किया गया है।

उक्त पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में श्री त्रिपाठी का कहना है कि विभागीय कार्यवाही संख्या 31/2015 में विभागीय जाँच आयुक्त ने अपने निष्कर्ष में लिखा है कि ''उपरोक्त जाँच और विश्लेषण के आलोक में कंडिका-2.1 में सूचीबद्ध आरोपों के संबंध में यह निष्कर्ष स्थापित होता है कि आरोपित पदाधिकारी के जिम्मे समाहरणालय की कई महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार होने के चलते कार्य की अधिकता थी। नजारत शाखा में नाजिर द्वारा किए गए गबन में उनकी संलिप्तता प्रतीत नहीं होती, परन्तु नजारत में लेखा संधारण संबंधी उनके दायित्वों के निर्वहन में उनकी शिथिलता और विफलता प्रमाणित होता है।'' साथ ही उक्त जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-04 आरोपों का विश्लेषण एवं जाँच के अन्तर्गत पृष्ठ संख्या 26 पर विभागीय जाँच आयुक्त ने लिखा है कि ''आरोपित पदाधिकारी द्वारा तत्कालीन जिला पदाधिकारी के विरूद्ध लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं। वे आरोप ज्यादा गंभीर इसलिए हो जाते हैं कि तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा संबंधित पदाधिकारियों की किसी अधियाचना के बिना और सीधे नाजिर के द्वारा संचिका उपस्थापन पर पंचायत निर्वाचन अवधि में चार तिथियों में कुल चार लाख रूपये का चेक नाजिर के नाम काट कर दिया गया। विा विभाग के विशेष अंकेक्षण की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि नाजिर के पास पर्याप्त कैश उपलब्ध होने के बावजूद उसके पक्ष में चेक काटकर राशि दी गई। आरोपाें की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए प्रशासी विभाग को इसकी सम्यक्‌ जाँच करानी चाहिए।'' उनके द्वारा विस्तृत स्पष्टीकरण/अभ्यावेदन दिनांक 24. 05.2016 को समर्पित किया गया, जिसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि तत्कालीन जिला पदाधिकारी (वर्ष 2001) द्वारा ही अपने —षि कार्य एवं डेयरी हेतु विभिन्न तिथियों में चार लाख रूपये का चार चेक नाजीर के नाम आकस्मिक खर्च के रूप में (पंचायत चुनाव, 2001 के दौरान) सीधे संचिका पर (नाजीर के टिप्पणी के आलोक में) आदेश दिया तथा बिना किसी अधियाचना के चेक निर्गत कर दिया। तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक, जहानाबाद के पत्रांक 36/का0अ0 दिनांक 16.09.2004 द्वारा दिनांक 23.03.2003 (उनके द्वारा नजारत के प्रभार सौंपने के लगभग 07 माह पश्चात्‌) को कैश का डिटेल निकाला गया तथा नाजीर के जिम्मे 6,38,600/-रूपये दर्शाया गया, जो कि दूसरे नजारत उप समार्हाा के समय निकाली गई राशि का था, क्योंकि उनके समय का कुल लगभग 4,95,582/-रूपये का प्रभार नाजीर द्वारा दूसरे नाजीर को सौंप दिया गया था। उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि वे दिनांक 24.12.1999 से 20.08.2002 तक नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद के प्रभार में रहे तथा जबकि दिनांक 23.03.2003 को नाजीर के जिम्मे 6.38,600/-रूपये बकाया था, जिसे जिला पदाधिकारी, जहानाबाद के खाते में जमा करा लिया गया है तथा जो कैशबुक में संधारित है। वे कार्यपालक दंडाधिकारी, जहानाबाद के पद पर पदस्थापित थे तथा साथ ही गोपनीय शाखा, शस्त्र शाखा, सामान्य शाखा, विधि शाखा का प्रभारी उप समार्हाा थे तथा साथ ही जिला जनगणना पदाधिकारी, जिला नीलाम-पत्र पदाधिकारी एवं जिला परिवहन पदाधिकारी का भी प्रभार था तथा प्रभार की सभी शाखाओं में उत्—ष्ट कार्य किया, जिसका उल्लेख तत्कालीन सभी चार जिला पदाधिकारियों ने अधोहस्ताक्षरी के सी0आर0 में भी ''उत्—ष्ट'' के रूप में दर्ज किया तथा तत्कालीन आयुक्त महोदय, मगध प्रमंडल, गया द्वारा भी प्रषस्ति पत्र12 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 दिया गया। उनके द्वारा नाजीर से कैशबुक का डिटेल निकालने हेतु मौखिक एवं लिखित रूप से विभिन्न पत्रों द्वारा निदेश दिया -यथा-पत्रांक 65 दिनांक 28.02.2000, पत्रांक 85 दिनांक 25.03.2000 एवं पत्रांक 170 दिनांक 26.04.2001 तथा इसकी सूचना भी लिखित एवं मौखिक रूप से नजारत के वरीय पदाधिकारी, तत्कालीन अपर समार्हाा (नक्सल) एवं तत्कालीन समार्हाा, जहानाबाद को यथा पत्रांक 164 दिनांक 25.04.2001, पत्रांक 264 दिनांक 27.07.2001 एवं पत्रांक 433 दिनांक 29. 12.2001 आदि पत्रों द्वारा भी देता रहा। परन्तु इसका अनुपालन नाजीर द्वारा नहीं किया गया एवं समार्हाा द्वारा भी अपने स्तर से नाजीर को कोई निदेश नहीं दिया गया। कारण स्पष्ट था कि नाजीर समार्हाा आवास में लगभग 05 एकड़ जमीन में खेती कराता था एवं आवास में डेयरी संचालन में भूसा-चोकर/खली आदि क्रय करता था तथा समार्हाा से सीधे संचिका में आदेश प्राप्त कर अपने नाम से चेक प्राप्त कर लेता था। चूँकि समार्हाा के नाम से ही खाता संधारित था तथा उन्हीं के द्वारा स्वयं पैसे की निकासी की जाती थी तो वे किसके पास शिकायत करता या नाजीर के विरूद्ध कार्रवाई हेतु आगे संचिका किसके पास बढ़ाता, जबकि नाजीर के साथ सारा लेनदेन समार्हाा द्वारा स्वयं किया जा रहा था। उक्त नाजीर हीं निर्वाचन के नाजीर के भी प्रभार में था तथा वहाँ भी उसने लगभग दो वर्षों से कैशबुक नहीं लिखा था। इसके लिए समार्हाा द्वारा लगभग 10 बार विभिन्न पत्रों-यथा-पत्रांक 500 दिनांक 16.03.2000, पत्रांक 542 दिनांक 22.04.2000, पत्रांक 678 दिनांक 03. 07.2000, पत्रांक 697 दिनांक 25.07.2000, पत्रांक 753 दिनांक 20.10.2000, पत्रांक 764 दिनांक 09.11.2000, पत्रांक 03 दिनांक 07.01.2001, पत्रांक 45 दिनांक 27.06.2001, पत्रांक 488 दिनांक 26.10.2002, पत्रांक 601 दिनांक 21.12.2003 एवं पत्रांक 67 दिनांक 24.03.2003 आदि के माध्यम से कैशबुक लिखने एवं डिटेल निकालने हेतु पत्र दिया गया। परन्तु नाजीर द्वारा इसका अनुपालन नहीं किया गया तथा इतने के बावजूद भी समार्हाा द्वारा उक्त नाजीर को निर्वाचन नजारत से नहीं हटाया गया तथा उसके द्वारा निर्वाचन नजारत में भी तीन लाख रूपये गबन किया गया। जिला निर्वाचन नजारत में भी तत्कालीन उप निर्वाचन पदाधिकारी (भोला राम) के बिना जानकारी के ही जिला पदाधिकारी द्वारा नाजीर के नाम से अग्रिम के रूप में अनावश्यक पैसे की निकासी की जाती थी, जिसके संबंध में विा विभाग के अंकेक्षण दल द्वारा भी अपने प्रतिवेदन में (पत्रांक 399/पटना दिनांक 16.06.2004) स्पष्ट कहा गया है कि ''निकासी की राशियों के बचे रहने के उपरांत भी दूसरे चेक से बैंक द्वारा स्वयं राशि की निकासी पाई गई।'' निर्वाचन शाखा में गबन होने के बावजूद भी तत्कालीन उप निर्वाचन पदाधिकारी से न तो कोई स्पष्टीकरण पूछा गया एवं ना ही उनके विरूद्ध प्रपत्र 'क' ही भेजा गया। वर्ष 2003 एवं 2006 में उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट होकर तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा मामले को संचिकास्त कर दिया गया। परन्तु लगभग छः वर्षो के बाद उनके एवं तत्कालीन नजारत उप समार्हाा श्री अरविन्द कुमार झा के विरूद्ध प्रपत्र 'क' भरकर भेजा गया, जिसमें उनके एवं श्री झा पर एक ही आरोप (Negligence) था, परन्तु उन्हें मात्र निंदन का दंड दिया गया। जबकि उन्हें निदंन के अलावा संचयात्मक प्रभास से तीन वेतनवृद्धि पर रोक का दंड दिया गया। उनकेे पास कार्य की अधिकता थी तथा तत्कालीन समार्हाा द्वारा निजी स्वार्थ के कारण नाजीर के नाम चेक निर्गत कर पैसे की निकासी की गई। इस संबंध में श्री रविन्द्र नाथ पाण्डेय बनाम बिहार राज्य 2000(4) PLJR 299 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट कहा गया है कि कार्य की अधिकता के कारण कोई चूक कदाचार की कोटि में नहीं आयेगी।

उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्री त्रिपाठी द्वारा विभागीय ज्ञापांक 15512 पटना दिनांक 17.11.2016 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंड ''निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' को समाप्त/रद्द करने का अनुरोध किया गया।

12121212.... प्रतिवेदित आरोप एवं श्री त्रिपाठी के उपर्युक्त अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त पाया गया कि उनके द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। श्री त्रिपाठी द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो इनके द्वारा पूर्व में किया गया है।

13131313.... वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री त्रिपाठी के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 दिनांक 17.11.2016 द्वारा इनके विरूद्ध ''निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक''प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' के संसूचित दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।

14141414.... अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अषोक कुमार त्रिपाठी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन नजारत उप समार्हाा, जहानाबाद सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, मधुबनी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15512 निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' के दंड को दिनांक 17.11.2016 द्वारा संसूचित ''निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' निन्दन (वर्ष 2001-02) एवं संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि पर रोक'' पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ धकारियों को सूचनार्थ धकारियों को सूचनार्थ धकारियों को सूचनार्थ आदेश :-आदेश :-आदेश :-आदेश :- आदेश्आदेश्आदेश्आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाि ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाि ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाि

एवं एवं एवं एवं आवश्आवश्आवश्आवश्यक कार्यार्थ भेज दी जाए।यक कार्यार्थ भेज दी जाए।यक कार्यार्थ भेज दी जाए।यक कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 2/सी0-1074/2011-सा0प्र0-7966

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 3 जुलाई 20173 जुलाई 20173 जुलाई 20173 जुलाई 2017

श्री आजीव वत्सराज (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 968/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, महिषी सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, परिवहन विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध अंकेक्षण आपाि के फलस्वरूप विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन13 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 हेतु दिये गये अग्रिमों की वसूली/समायोजन की कार्रवाई नहीं करने के आरोप के लिए गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक 76-1 दिनांक 08.06.2011 द्वारा प्राप्त हुआ।

2222.... विभागीय पत्रांक 9217 दिनांक 18.08.2011 एवं 6940 दिनांक 15.05.2012 द्वारा प्रतिवेदित आरोपों पर श्री वत्सराज से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त निदेश के आलोक में श्री वत्सराज द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 29.08.2012 समर्पित किया गया। श्री वत्सराज के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, सहरसा से विभागीय पत्रांक 17789 दिनांक 27.12.2012 द्वारा मंतव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, सहरसा के पत्रांक 286-2 दिनांक 16.09.2013 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ। 3333.... प्रासंगिक मामले की समीक्षा के उपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 12407 दिनांक 12.11.2013 द्वारा श्री वत्सराज के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, कोशी प्रमंडल प्रमंडल, सहरसा को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

4444.... संयुक्त आयुक्त विभागीय जाँच, कोशी प्रमंडल, सहरसा के पत्रांक 2972 दिनांक 03.12.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के उपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्ष के रूप में प्रतिवेदित किया गया कि- श्री वत्सराज पर तीन आरोप लगाये गये हैं जो आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' से स्वतः स्पष्ट है। यहाँ पुनः उल्लेख करना है कि श्री वत्सराज दिनांक 13.01.2001 को प्रखंड महिषी का प्रभार लिये थे। उसी समय पंचायत आम निर्वाचन, 2001 भी घोषित हो गया था। महिषी प्रखंड का चुनाव प्रथम चरण में ही था। श्री वत्सराज का कार्यकाल महिषी प्रखंड में दिनांक 13.01.2001 से 31.07.2001 तक यानि लगभग छः माह 18 दिन ही था और इसमें लगभग चार माह से उपर पंचायत आम निर्वाचन, 2001 की प्रथम चरण के तहत महिषी प्रखंड में चलता रहा। इस महत्वपूर्ण निर्वाचन कार्यों के बीच भी श्री वत्सराज ने निरक्षण, सत्यापन, नोंटिस जैसे कार्य किये हैं। प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, सहरसा ने भी माना है कि श्री वत्सराज के द्वारा अपने कार्य अवधि में अग्रिम समायोजन हेतु अभिर्काा को नोटिस निर्गत किये थे। महिषी प्रखंड में दिनांक 13.01.2001 से 31.07.2001 तक प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद पर कार्यरत रहे, उक्त अवधि में वे पंचायत निर्वाचन, 2001 जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन करते हुए योजनागत अग्रिम समायोजन हेतु नोटिस निर्गत किये थे। श्री वत्सराज ने योजनाओं की अग्रिम का समायोजन का प्रयास किया। उल्लेखनीय है कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, सहरसा ने भी इसे स्वीकारा है। अतः उपरोक्त सारे तथ्यों एवं साक्ष्यों के अवलोकन से यही प्रतीत होता है कि श्री वत्सराज पर गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' के आरोप को प्रमाणित नहीं माना जा सकता है।

5555.... प्रतिवेदित आरोप, श्री वत्सराज का संचालन पदाधिकारी को समर्पित स्पष्टीकरण, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का मंतव्य एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित निष्कर्ष के आलोक में श्री वत्सराज के विरूद्ध विभागीय संकल्प 12407 दिनांक 12.11.2013 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

6666.... अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री आजीव वत्सराज (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 968/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, महिषी सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, परिवहन विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध विभागीय संकल्प 12407 दिनांक 12.11.2013 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है। ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति के साथ सभी संबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्ंबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्ंबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्ंबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी यक कार्यार्थ भेज दी यक कार्यार्थ भेज दी यक कार्यार्थ भेज दी आदेश :-आदेश :-आदेश :-आदेश :- आदेश्आदेश्आदेश्आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति के साथ सभी स ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति के साथ सभी स ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति के साथ सभी स

जाय।जाय।जाय।जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 2/सी0-3-30158/99-सा0प्र0-8990

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 21 जुलाई 201721 जुलाई 201721 जुलाई 201721 जुलाई 2017

श्री अशोक कुमार त्रिपाठी, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, पश्चिम चंपारण सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध गठित आरोप पत्र प्रपत्र 'क' समाहर्त्ता, पश्चिम चंपारण के पत्रांक 42 दिनांक 05.05.1999 द्वारा प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' में कतिपय दुकानों के लिए बकाया लीज राशि की विवरणी गलत ढंग से तैयार करने, क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर गैर मजरूआ नदी एवं जंगल की जमीन की बन्दोबस्ती का प्रस्ताव व्यक्ति विशेष के लिए अनुशंसित करने, गैर मजरूआ मालीक जमीन की बन्दोबस्ती में अनियमितता, लगान निर्धारण में अनियमितता बरतने तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी ठकराहां के कार्यकाल में सामाजिक वाणिकी योजना के कार्यान्वयन में अनियमितता बरतने का आरोप प्रतिवेदित है।

2222.... विभागीय पत्रांक 167 दिनांक 12.12.2000 द्वारा श्री त्रिपाठी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री त्रिपाठी के द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 25.07.2007 को समर्पित किया गया। प्रतिवेदित आरोपों एवं श्री त्रिपाठी के स्पष्टीकरण पर समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11482 दिनांक 19.11.2007 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3333.... विभागीय जाँच आयुक्त के ज्ञापांक 759 दिनांक 12.09.2008 द्वारा प्राप्त निदेश के आलोक में विभागीय स्तर पर उक्त आरोप पत्र को फिर से गठन किया गया, जिसे विभागीय पत्रांक 11113 दिनांक 16.10.2008 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त को उपलब्ध करायी गयी।14 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 4444.... अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 733 दिनांक 01.09.2012 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

5555.... अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष से असहमत होते हुए पुनर्जांच कराने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णयानुसार विभागीय पत्रांक 2772 दिनांक 18.02.2013 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त कोे पुनर्जांच करने का निदेश दिया गया।

6666.... प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 100 दिनांक 20.05. 2015 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री त्रिपाठी से विभागीय पत्रांक 8200 दिनांक 08.06.2015 द्वारा अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री त्रिपाठी द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 26.06.2015 को समर्पित किया गया।

7777.... संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं श्री त्रिपाठी के उक्त अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री त्रिपाठी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए सेवा से पदच्युत करने का विनिश्चय किया गया।

8888.... विभागीय पत्रांक 13349 दिनांक 04.09.2015 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से उपर्युक्त विनिश्चत दंड प्रस्ताव पर सहमति/परामर्श की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 2960 दिनांक 29.02.2016 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि प्रस्तावित दंड अनुपातिक नहीं है।

9999.... श्री त्रिपाठी द्वारा उपर्युक्त पुनर्जांंच के निर्णय तथा पुनर्जांच के उपरांत प्राप्त द्वितीय जाँच प्रतिवेदन के आधार पर मांगे गये अभ्यावेदन के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 22283/2013 अशोक कुमार त्रिपाठी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 11.12.2015 को पारित न्यायादेश की छायाप्रति श्री त्रिपाठी द्वारा उपलब्ध करायी गयी। पारित न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"Situated thus, and in view of the discussions made above, I have no hesitation in coming to the conclusion that the second enquiry has not been held in accordance with law. In the result, this application is allowed. The impugned enquiry report contained in Annexure-19 and second show-cause dated 08.06.2015 are set aside with liberty to the disciplinary authority to proceed afresh in accordance with law."

10101010.... माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उपर्युक्त न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय पत्रांक 2772 दिनांक 18.02. 2013, जिसके द्वारा पुनर्जांच का निर्णय संसूचित किया गया था, तथा विभागीय पत्रांक 8200 दिनांक 08.06.2015, जिसके द्वारा द्वितीय जाँच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित प्रमाणित आरोपों के लिए अभ्यावेदन की मांग की गयी थी, को निरस्त किये जाने का निर्णय लिया गया।

11111111.... उपर्युक्त न्यायादेश दिनांक 11.12.2015 के अनुपालन में अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 733 दिनांक 01.09.2012 द्वारा प्राप्त प्रथम जाँच प्रतिवेदन, जिसमें सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया, के निष्कर्ष से अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निर्धारित असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 7212 दिनांक 20.05.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी से अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त निदेश के आलोक में श्री त्रिपाठी द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 06.06.2016 समर्पित किया गया।

12121212.... प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री त्रिपाठी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त श्री त्रिपाठी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत श्री त्रिपाठी के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया। तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक''

13131313.... श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिश्चित वृहत दंड पर विभागीय पत्रांक 11288 दिनांक 19.08.2016 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की मांग की गयी। आयोग के पत्रांक 2138 दिनांक 19.10.2016 द्वारा श्री त्रिपाठी के विरूद्ध विनिश्चित वृहत दंड पर सहमति संसूचित की गयी।

14141414.... प्रमाणित पाये गये आरोपों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में श्री अशोक कुमार त्रिपाठी, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, पश्चिम चंपारण सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15498 ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दंड अधिरोपित दिनांक 17.11.2016 द्वारा ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' एवं संसूचित किया गया।

15151515.... उपर्युक्त दंडादेश पर पुनर्विचार हेतु श्री त्रिपाठी द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक 01/कैम्प, अरवल दिनांक 02.01.2017 समर्पित किया गया है।

श्री त्रिपाठी द्वारा उपर्युक्त पुनर्विलोकन आवेदन में कहा गया है कि उनके विरूद्ध मई, 1999 में तत्कालीन जिला पदाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण (बेतिया) द्वारा गठित प्रपत्र 'क' के आरोपों से संबंधित अभिलेखों/कागजातों की मांग कार्मिक विभाग से किये जाने पर समार्हाा ने वर्ष 2005 में अपने पत्रांक 15/स्था0 दिनांक 11.03.2005 द्वारा सचिव, कार्मिक विभाग को सूचित किया कि कागजातों की खोज की जा रही है तथा उपलब्ध होते हीं पुनः भेज दी जायेगी। पुनः वर्ष 2006 में अवर सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, पटना ने अपने पत्रांक 6522 दिनांक 06.07.2006 द्वारा जिला पदाधिकारी, पश्चिमी चम्पारण (बेतिया) को सूचित किया कि ''आपके पत्रांक 15 दिनांक 11.03.2005 द्वारा सूचित किया गया था कि आरोप15 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 से संबंधित अभिलेख श्री ललन सिंह, तत्कालीन अपर समार्हाा, बेतिया अपने साथ ले गयें हैं, जबकि श्री सिंह ने अपने पत्रांक 135 दिनांक 03.09.2005 द्वारा सूचित किया है कि उनके पास कोई कागजात नहीं है।'' वर्ष 2007 में आरोप संख्या 01 से संबंधित अभिलेख संख्या 03/विविध/1997-98 उपलब्ध कराया गया तथा अन्य आरोपाें के बारे में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया। समार्हाा, प0च0 (बेतिया) ने अपने पत्रांक 46 दिनांक 09.12.2013 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को सूचित किया कि ''आरोप संख्या 01 से संबंधित अभिलेख संख्या 03/विविध/1997-98 के छायाप्रति के अलावा अन्य कोई साक्ष्य कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।'' श्री त्रिपाठी का यह भी कहना है कि उनके विरूद्ध विशेष सचिव, सामान्य प्रषासन विभाग, बिहार, पटना के ज्ञापांक 15498 दिनांक 17.11.2016 द्वारा जो दंडादेश अधिरोपित एवं संसूचित किया गया है, उसमें आरोप संख्या 01 एवं 05 पर असहमति व्यक्त की गई है, परन्तु कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। दंडादेश के पैरा 12(i) में कहा गया कि ''रामनगर दैनिक बाजार लीज राशि वसूली अभिलेख संख्या 03/विविध/1997-98 के आदेश फलक, दिनांक 07.07.1997 में अंचल अधिकारी द्वारा यह अंकित किया गया है कि बकाया राशि की वसूली हेतु अनुमति एवं लीज की नवीकरण हेतु अभिलेख भूमि सुधार उप समार्हाा को भेजें। उपरोक्त से अंचल अधिकारी के विरूद्ध आरोप संख्या 01 प्रमाणित होता है।'' परन्तु उसी अभिलेख के आदेश फलक, दिनांक 19.07.1997 में अनुमंडल पदाधिकारी, बगहाँ एवं भूमि सुधार उप समार्हाा, बगहा के संयुक्त हस्ताक्षर से यह आदेश अंकित किया गया है कि ''बकाया राशि की वसूली हो जाने के पश्चात नियमानुसार लीज के नवीकरण हेतु प्रस्ताव उपस्थापित करें,'' जिसके आलोक में उनके द्वारा भी संबंधित हल्का कर्मचारी को निदेश दिया गया। स्पष्ट है कि उनके द्वारा न तो लीज नवीकरण का कोई प्रस्ताव ही दिया गया एवं ना ही कोई लीज नवीकरण स्वी—त हुआ। अतः आरोप संख्या 01 साक्ष्यों एवं कागजातों के आधार पर प्रमाणित नहीं होता है। इसी प्रकार दंडादेश के पैरा 12(ii) में यह कहा गया है कि समार्हाा, प0चंपारण (बेतिया) के पत्रांक 15 दिनांक 11.03.2005 के द्वारा कार्यपालक अभियंता, रा0ग्रा0नि0का0, बेतिया का पत्रांक 659 दिनांक 26.12.2015 प्राप्त हुआ है यह गलत है, क्योंकि उक्त पत्र न तो विभागीय कार्यवाही के दौरान और ना ही आरोप-पत्र के साथ ही संलग्न है। साथ ही अनुमंडल पदाधिकारी, बगहाँ के पत्रांक 245 दिनांक 29.04.1994 एवं पत्रांक 696 दिनांक 29.06.1994 के पत्र के आधार पर कहा गया है कि योजनाओं के कार्यान्वयन में अनियमितता बरती गई है। अनुमंडल पदाधिकारी तकनीकी पदाधिकारी नहीं हैं तथा उनके प्रतिवेदन का कोई विधिक महत्व नहीं है। परन्तु तथ्य यह है कि वे अंचल अधिकारी, ठकराहाँ के रूप में पदस्थापित थें तथा मात्र 06 माह के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी, ठकराहाँ के अतिरिक्त प्रभार में थे। सामाजिक-वानिकी योजना को 09 माह में पूरा करना था, परन्तु उनके द्वारा छः माह के अन्दर हीं अपना प्रभार अधिसूचित प्रखंड विकास पदाधिकारी, ठकराहाँ को सौंप दिया। उनके द्वारा उक्त योजनाओं में पूर्ण राशि का न तो भुगतान किया गया एवं ना ही कोई एम0बी0/मस्टर रौल ही पास किया गया था। साथ ही उक्त योजनाओं के अवशेष राशि को समार्हाा को चेक के माध्यम से वापस कर दिया था। उनका कहना है कि समार्हाा के पत्रांक 1156 दिनांक 02.08.1994 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, बगहाँ को आदेश दिया गया था कि अभिर्काा से किये गये कार्य के विरूद्ध अवशेष राशि जमा करायें तथा कार्यपालक अभियंता एन0आर0ई0पी0 को निदेश दिया कि वे योजना का शत-प्रतिशत मापी करा कर के प्रस्तुत करें, जिसके आलोक में कार्यपालक अभियंता एन0आर0ई0पी0 ने बरसात के बाद दिनांक 23.12.1994 अन्य तकनीकी पदाधिकारियों एवं कार्यपालक दंडाधिकारी, बगहाँ के साथ योजना की जाँच की गई। अपने जाँच प्रतिवेदन में उन्होंने लिखा है कि ''कार्य स्थल पर चल रहे कार्य से ऐसा प्रतीत होता है कि अभिर्काा कार्य को पूर्ण कराने की दिशा में सचेष्ट हैं। ऐसी स्थिति में मान्य हो तो उन्हें प्राक्कलन की विशिष्टयो के अनुरूप कार्य पूर्ण कराने हेतु एक माह का समय दिया जा सकता है,'' जिसके आलोक में समार्हाा द्वारा समय देने के पश्चात अभिर्कााआें (जो सरकारी पदाधिकारी थें) द्वारा लिये गये अग्रिम एवं प्राक्कलन के अनुरूप कार्य को पूर्ण करा दिया गया था तथा जो अभिलेख के आदेश फलक में दर्ज है तथा अभिर्कााओं द्वारा लिये गये अग्रिम के अनुरूप कार्य पूर्ण करने पर अभिलेख को बंद कर दिया गया था। इसलिए तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी/प्रखंड विकास पदाधिकारी, ठकराहाँ द्वारा अभिर्कााओं के विरूद्ध कोई वसूली की कार्रवाई नहीं की गई और ना ही उनसे कोई कारण पृच्छा किया गया। उनके द्वारा भी बार-बार सामाजिक-वानिकी से संबंधित अभिलेख एवं एम0बी0 की मांग की जाती रही परन्तु उसे उपलब्ध नहीं कराया गया तथा उन्हें जान-बुझकर फंसाने हेतु घटना (1994) के 05 वर्षों के बाद उनके विरूद्ध प्रपत्र 'क' भरकर भेजा गया तथा मात्र सहायक रोकड़ पुस्त के आधार पर श्री त्रिपाठी को दोषी माना गया। स्पष्ट है कि उक्त आरोप के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है तथा आरोप-पत्र के साथ संलग्न कागजात इस आरोप को सिद्ध करने के लिए सुसंगत नहीं है। श्री त्रिपाठी द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15498 दिनांक 17.11.2016 द्वारा अधिरोपित एवं संसूचित दंड को रद्द करने का अनुरोध किया गया।

16161616.... प्रतिवेदित आरोप एवं श्री त्रिपाठी के उपर्युक्त अभ्यावेदन की समीक्षा के उपरान्त पाया गया कि उनके द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। श्री त्रिपाठी द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जो इनके द्वारा पूर्व में किया गया है।

17171717.... वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री त्रिपाठी के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 15498 दिनांक 17.11.2016 द्वारा इनके विरूद्ध ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' के संसूचित दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखने का निर्णय लिया गया। वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक'' वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक''

18181818.... अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अशोक कुमार त्रिपाठी, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 463/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, रामनगर, पश्चिम चंपारण सम्प्रति जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध विभागीय संकल्प ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव ज्ञापांक 15498 दिनांक 17.11.2016 द्वारा इनके विरूद्ध ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव ''निन्दन (वर्ष 1997-98) एवं तीन वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक''से रोक''से रोक''से रोक'' के दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है।16 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 आदेश :-आदेश :-आदेश :-आदेश :- आदेश्आदेश्आदेश्आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाि

ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ धकारियों को सूचनार्थ धकारियों को सूचनार्थ धकारियों को सूचनार्थ ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाि ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाि

एवं आवश्एवं आवश्एवं आवश्एवं आवश्यक यक यक यक कार्यार्थ भेज दी जाए।कार्यार्थ भेज दी जाए।कार्यार्थ भेज दी जाए।कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 2/नि0था0-11-02/2012/नि0था0-11-02/2012/नि0था0-11-02/2012/नि0था0-11-02/2017 -सा0प्र0-7 -सा0प्र0-7 -सा0प्र0-7 -सा0प्र0-9039 9039 9039 9039

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 21 जुलाई 201721 जुलाई 201721 जुलाई 201721 जुलाई 2017

श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 956/11, विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, जमुई के विरूद्ध रू0 2,22,21,855/- (दो कराड़ बाईस लाख इक्कीस हजार आठ सौ पचपन रूपया) प्रत्यानुपातिक धर्नाजन के आरोप के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या 006/2017 दिनाक 18.01.2017 धारा-13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(ई) भ्र0नि0अधि0, 1988 के तहत दर्ज करते हुए प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया है।

2222.... श्री कुमार को प्रत्यानुपातिक धर्नाजन के आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत्‌ तत्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक के लिए निलंबित किया जाता है।

3333.... निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया जाता है। 4444. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10(1) के तहत्‌ अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा। ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकात किया जाय तथा इसकात किया जाय तथा इसकात किया जाय तथा इसकी ी ी ी आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-22/2017-सा0प्र0-2/आरोप-01-22/2017-सा0प्र0-2/आरोप-01-22/2017-सा0प्र0-2/आरोप-01-22/2017-सा0प्र0-9093 9093 9093 9093

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 24 जुलाई 201724 जुलाई 201724 जुलाई 201724 जुलाई 2017

श्री कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1018/11, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर पटना के विरूद्ध कंकड़बाग पावर सब स्टेशन की सरकारी जमीन का गलत एवं अवैध रूप से लगान निर्धारण करने एवं गलत स्वामित्व प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने के संबंध में पत्रकार नगर थाना में प्राथमिकी सं0-319/2017 दर्ज की गयी है। श्री सिंह पर जानबूझ कर तथा गलत नियत से सरकार के साथ धोखाधड़ी करते हुए श्री देवेन्द्र कुमार के पक्ष में सरकारी जमीन का लगान निर्धारण करने संबंधी फर्जीवाड़ा तथा धोखाधड़ी का आरोप प्रतिवेदित किया गया है। उक्त के आलोक में आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 437 दिनांक 28.06.2017 द्वारा श्री सिंह के निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही आरम्भ किये जाने की अनुशंसा की गयी है।

2222.... श्री सिंह को उक्त आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत्‌ तत्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक के लिए निलंबित किया जाता है। 3333.... निलंबन अवधि में श्री सिंह का मुख्यालय आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया निर्धारित किया जाता है। 4444. निलंबन अवधि में श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10(1) के तहत्‌ अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा।

ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी ात किया जाय तथा इसकी ात किया जाय तथा इसकी ात किया जाय तथा इसकी आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि

प्रति सभी संबंधित को भप्रति सभी संबंधित को भप्रति सभी संबंधित को भप्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।ेज दी जाय।ेज दी जाय।ेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।17 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017

सं0 2/नि0था0-11-03/2015-सा0प्र0-9620

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 27 जुलाई 201727 जुलाई 201727 जुलाई 201727 जुलाई 2017

श्री चंदन कुमार मंडल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 797/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, बायसी, पूर्णियां सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के धावादल द्वारा परिवादी मो0 रजी अहमद से 10,000/- (दस हजार) रूपये रिष्वत लेते रंगे-हाथ गिरफ्तार करने के उपरान्त निगरानी थाना कांड संख्या 069/2015 दिनांक 21.08.2015 धारा-7/13 (2)-सह-पठित धारा-13 (1)डी0 भा0नि0अधि0 1988 के अन्तर्गत दर्ज किये जाने की सूचना जिला पदाधिकारी, पूर्णियां के पत्रांक 2019 दिनांक 21.08.2015 द्वारा प्राप्त हुई।

2222.... श्री मंडल को निगरानी धावादल द्वारा रिश्वत लेते हुए रंगे-हाथ गिरफ्तार किये जाने के फलस्वरूप विभागीय संकल्प ज्ञापांक 13496 दिनांक 09.09.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम- 9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत्‌ दिनांक 20.08.2015 के प्रभाव से निलंबित किया गया था। दिनांक 30.09.2015 को जमानत मिलने के उपरांत श्री मंडल द्वारा दिनांक 05.10.2015 को विभाग में योगदान समर्पित किया गया है। श्री मंडल द्वारा समर्पित योगदान पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 205 दिनांक 06.01.2016 द्वारा श्री चंदन कुमार मंडल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 797/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, बायसी पूर्णियां को निलम्बन मुक्त किया गया।

3333.... श्री मंडल को निगरानी विभाग के धावादल द्वारा रंगे-हाथों घूस लेते हुए गिरफ्तार किया गया है एवं उक्त के लिए उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या 069/15 दिनांक 21.08.2015 दर्ज किया गया है। अतः अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा आरोपों की गम्भीरता को देखते हुए श्री मंडल को बिहार सरकारी (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(क) के प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापाक 217 दिनांक 06.01.2016 द्वारा पुनः निलम्बित किया गया। 4444.... जिला पदाधिकारी, पूर्णियां का पत्रांक 2671 दिनांक 05.12.2015 द्वारा प्राप्त साक्ष्यों सहित आरोप-पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 17362 दिनांक 16.12.2015 द्वारा श्री मंडल से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

श्री मंडल द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, निगरानी थाना कांड सं0 069/2015 दिनांक 21.08.2015 में निगरानी विभाग द्वारा घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के फलस्वरूप प्राथमिकी अभियुक्त बनाये जाने, विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक 46/जे0 दिनांक 14.03.2016 द्वारा अभियोजन स्वी—ति प्रदान किये जाने एवं आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1338 दिनांक 27.01.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

5555.... उक्त के आलोक में श्री मंडल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 6221/2016 (चंदन कुमार मंडल बनाम्‌ बिहार राज्य एवं अन्य) में दिनांक 16.12.2016 को पारित न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"The writ petition is accordingly disposed of with a direction to the Disciplinary Authority to ensure the conclusion of the disciplinary proceeding expeditiously and preferably within a period of six months from the date of receipt/production of a copy of this order and in case the disciplinary proceeding is not disposed of within six months as stipulated above for reasons not attributable to the petitioner then the Disciplinary Authority should consider the prayer of the petitioner for revocation of the suspension within four weeks next."

6666.... उक्त न्यायादेश में श्री मंडल के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को छः माह के अंदर पूरा करने का आदेश दिया गया था। विभागीय जाँच आयुक्त के समक्ष जाँच की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के अंदर विभागीय कार्यवाही का निस्तार नहीं किया जा सका है।

7777.... माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 6221/2016 दिनांक 16.12.2016 को पारित न्यायादेश के अनुपालन के क्रम में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मंडल को निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।

8888.... अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय कार्यवाही के अधीन रखते हुए श्री चंदन कुमार मंडल (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 797/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, बायसी, पूर्णियां सम्प्रति निलंबित मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत तत्कालिक प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है। दया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाश्हिार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी ात किया जाय तथा इसकी ात किया जाय तथा इसकी ात किया जाय तथा इसकी आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश ाि ाि ाि दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि दया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि दया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बि

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।18 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 सं0 2/विविध-10-14/2012-सा0प्र0-9928

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 3 अगस्त 20173 अगस्त 20173 अगस्त 20173 अगस्त 2017

डॉ0 सतीश चरण झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 742/11, तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी-सह-प्रभारी प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, खगड़िया सम्प्रति जिला पंचायत राज पदाधिकारी, नवादा के विरूद्ध जिला पदाधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने, स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने, र्काव्य के प्रति लापरवाही बरतने, धान अधिप्राप्ति के बाद धान मिलिंग के पश्चात्‌ मिलों में पड़े चावल को भारतीय खाद्य निगम को हस्तान्तरित नहीं करने संबंधी आरोपों के लिए गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 116 दिनांक 09.01.2013 द्वारा प्राप्त हुआ। 2222.... प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 2222 दिनांक 07.02.2013 द्वारा डॉ0 झा से स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर डॉ0 झा के पत्रांक 07 दिनांक 15.03.2013 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। उक्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 7113 दिनांक 03.05.2013 द्वारा जिला पदाधिकारी, खगड़िया से मंतव्य की मांग किये जाने पर जिला पदाधिकारी, खगड़िया के पत्रांक 1468 दिनांक 20.10.2014 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ।

3333.... प्रासंगिक मामले की समीक्षा के उपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8141 दिनांक 07.06.2016 द्वारा डॉ0 झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 4444.... आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर के पत्रांक 1060 दिनांक 23.03.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के उपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्ष के रूप में प्रतिवेदित किया गया कि-उपर्युक्त कंडिका-01 से 03 तक आरोपी पदाधिकारी पर लगे आरोप, आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी का साक्ष्य अभिलेख एवं विभागीय कार्यवाही के सुनवाई के दौरान आरोपी पदाधिकारी तथा प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी से किये गये मौखिक पृच्छा तथा संबंधित अभिलेखों के अवलोकन से आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य है।

5555.... प्रतिवेदित आरोप, डॉ0 झा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित मंतव्य के आलोक में डॉ0 झा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8141 दिनांक 07.06.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। 6666.... अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार डॉ0 सतीश चरण झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 742/11, तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी-सह-प्रभारी प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, खगड़िया सम्प्रति जिला पंचायत राज पदाधिकारी, नवादा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 8141 दिनांक 07.06.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है। धकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक यक यक यक ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति के साथ सभी संबंधित पदाकिे साथ सभी संबंधित पदाकिे साथ सभी संबंधित पदाकिे साथ सभी संबंधित पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश् आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश्आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति धकारियों को सूचनार्थ एवं आवश् धकारियों को सूचनार्थ एवं आवश् ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति

कार्यार्थ भेज दी जाए।कार्यार्थ भेज दी जाए।कार्यार्थ भेज दी जाए।कार्यार्थ भेज दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 2/परि0-7037/2006-सा0प्र0-9929

---------------------------- संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप 3 अगस्त 20173 अगस्त 20173 अगस्त 20173 अगस्त 2017

श्री अखिलेश्वर प्रसाद सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 703/11, तत्कालीन अंचल अधिकारी-सह-कार्यपालक पदाधिकारी, गोगरी, जमालपुर सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, पटना नगर निगम, पटना के विरूद्ध योजना का कार्य पूरा नहीं करने, योजना अपूर्ण रहने के कारण जन सामान्य को इसका समुचित लाभ नहीं मिलने तथा सरकार की राशि का अपव्यय होने के प्रतिवेदित आरोपों के लिए गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित जिला पदाधिकारी, खगड़िया के पत्रांक 718 दिनांक 17.07.2009 द्वारा प्राप्त हुआ।

2222.... श्री सिंह से उक्त आरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक 9067 दिनांक 09.09.2009 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर श्री सिंह के द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 30.10.2009 समर्पित किया गया। श्री सिंह के स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 12985 दिनांक 03.12.2009 द्वारा जिला पदाधिकारी, खगड़िया से मंतव्य की मांग की गयी तथा मंतव्य अप्राप्त रहने पर स्मारित भी किया गया। जिला पदाधिकारी, खगड़िया के पत्रांक 780 दिनांक 21.05.2016 द्वारा प्राप्त मंतव्य में आरोप संख्या-1 एवं 3 से संबंधित स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए प्रतिवेदित किया गया है कि आरोप संख्या-2 से संबंधित श्री सिंह का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है।

3333.... प्रासंगिक मामले की समीक्षा के उपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10203 दिनांक 26.07.2016 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 4444.... आयुक्त, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर के पत्रांक 345 दिनांक 28.01.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के उपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। जाँच प्रतिवेदन में संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्ष के रूप में प्रतिवेदित किया गया कि-उपर्युक्त कंडिका 01 से 03 तक आरोपी पदाधिकारी पर लगे आरोप, आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण, आरोपी पदाधिकारी तथा उपस्थापन पदाधिकारी से किये गये मौखिक पृच्छा तथा संबंंधित अभिलेखों के अवलोकन के उपरान्त इस19 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि श्री अखिलेश्वर प्रसाद सिंह, बि0प्र0से0, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, गोगरी, जमालपुर सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, पटना नगर निगम पटना के लापरवाही के कारण राशि का अपव्यय यथोचित प्रतीत नहीं होता है।

5555.... प्रतिवेदित आरोप, श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित मंतव्य के आलोक में श्री झा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10203 दिनांक 26.07.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। 6666.... अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अखिलेश्वर प्रसाद सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 703/11, सम्प्रति विशेष कार्य पदाधिकारी, पटना नगर निगम, पटना के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10203 दिनांक 26.07.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है। ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति के साथ सभी संबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्के साथ सभी संबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्के साथ सभी संबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्के साथ सभी संबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ भेज दी यक कार्यार्थ भेज दी यक कार्यार्थ भेज दी यक कार्यार्थ भेज दी आदेशः-आदेशः-आदेशः-आदेशः- आदेश्आदेश्आदेश्आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति ा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति

जाए।जाए।जाए।जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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सं0 2/आरोप-01-39/2015-सा0प्र0-10074

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संकल्संकल्संकल्संकल्पपपप

7 अगस्त 20177 अगस्त 20177 अगस्त 20177 अगस्त 2017

डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, केवटी, दरभंगा सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्णिया के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 559 दिनांक 25.05.2009 द्वारा उपलब्ध कराया गया। उक्त आरोप-पत्र में आचार संहिता के अनुपालन में निष्क्रियता, चुनाव सभा की विडियोग्राफी कराने के संबंध में गलत जानकारी देना, चुनावी सभा की संवेदनशीलता के प्रति उदासीनता, अपने अधीनस्थ कर्मियों को उनके र्काव्य के बारे में सही जानकारी नहीं देने, चुनाव संबंधी कार्य में समन्वय का अभाव तथा संवादहीनता पैदा करने संबंधी आरोप प्रतिवेदित है।

2222.... डॉ0 रविन्द्र नाथ से उक्त आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 620 दिनांक 14.01.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर डॉ0 रविन्द्र नाथ के पत्रांक 08 दिनांक 24.01.2016 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 3821 दिनांक 11.03.2016 द्वारा आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 424 दिनांक 21.04.2017 द्वारा आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा का मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें उनके द्वारा आरोपी के स्पष्टीकरण को अस्वीकार किया गया।

3333.... प्रतिवेदित आरोपों, डॉ0 रविन्द्र नाथ के स्पष्टीकरण एवं आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा समर्पित मंतव्य पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार डॉ0 रविन्द्र नाथ के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, दरभंगा के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

4444.... जिला पदाधिकारी, दरभंगा को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।20 (cid:18)बहार गजट, 1 नव%बर 2017 5555.... डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, केवटी, दरभंगा सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्णिया को निदेश दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे।

आदेश :-आदेश :-आदेश :-आदेश :- आदेश्आदेश्आदेश्आदेश दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्पा दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी की प्रति अनुबंध की प्रति सभी की प्रति अनुबंध की प्रति सभी की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों संबंधितों संबंधितों संबंधितों को जानकारी एवं आवश्को जानकारी एवं आवश्को जानकारी एवं आवश्को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई यक कार्रवाई यक कार्रवाई यक कार्रवाई केकेकेके लिए भेज दी जाय।लिए भेज दी जाय।लिए भेज दी जाय।लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 November 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-11-01.44/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-11-01.44.