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04/नि0 (पणन) फल/सब्जी/विपणन - 04/2017-8529
सहकारिता विभाग
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संकल्प
1 नवम्बर 2017
राज्य में सहकारी प्रक्षेत्र के माध्यम से बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना को विषय :- राज्य में सहकारी प्रक्षेत्र के माध्यम से बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना को राज्य में सहकारी प्रक्षेत्र के माध्यम से बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना को लागू करने के संबंध में। लागू करने के संबंध में।
बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन येाजना का मुख्य उद्देष्य सब्जी के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन येाजना का मुख्य उद्देष्य सब्जी के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन येाजना का मुख्य उद्देष्य सब्जी के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, को प्रभावी बनाना, post harvest सब्जी उत्पादकों को उत्पाद का सही मूल्य दिलाना, vegetable supply chain को प्रभावी बनाना, सब्जी उत्पादकों को उत्पाद का सही मूल्य दिलाना, losses को कम करना, उपभोक्ताओं को अत्यधिक मूल्य से राहत दिलाना एवं सब्जी क्षेत्र में मूल्य संवर्द्धन करना है। को कम करना, उपभोक्ताओं को अत्यधिक मूल्य से राहत दिलाना एवं सब्जी क्षेत्र में मूल्य संवर्द्धन करना है। इन उद्देष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य सरकार द्वारा ''बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना'' की प्रषासनिक इन उद्देष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य सरकार द्वारा ''बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना'' की प्रषासनिक इन उद्देष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य सरकार द्वारा ''बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना'' की प्रषासनिक स्वीकृति प्रदान करते हुए इसे बिहार राज्य में लागू करने का निर्णय लिया गया है। स्वीकृति प्रदान करते हुए इसे बिहार राज्य में लागू करने का निर्णय लिया गया है।
सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना की विषेषतायें निम्नवत हैं :-
त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना का कार्य -
2. सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन यो (i) संस्थागत व्यवस्था - संस्थागत व्यवस्था - योजना का क्रियान्वयन बिहार सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1935 के तहत् गठित एवं निबंधित (क) योजना का क्रियान्वयन बिहार सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1935 के तहत् गठित एवं निबंधित योजना का क्रियान्वयन बिहार सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1935 के तहत् गठित एवं निबंधित त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना के माध्यम से किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर इस योजना के प्रयोजनार्थ त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना के माध्यम से किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर इस योजना के प्रयोजनार्थ त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना के माध्यम से किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर इस योजना के प्रयोजनार्थ पूर्व में निबंधित प्राथमिक सब्ज ी उत्पादक सहयोग समितियों को शामिल किया जाएगा और जहाँ पूर्व पूर्व में निबंधित प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहयोग समितियों को शामिल किया जाएगा और जहाँ पूर्व में इस योजना के प्रयोजनार्थ समितियाँ निबंधित नहीं हैं, वहाँ नई प्राथमिक समितियों का गठन एवं में इस योजना के प्रयोजनार्थ समितियाँ निबंधित नहीं हैं, वहाँ नई प्राथमिक समितियों का गठन एवं में इस योजना के प्रयोजनार्थ समितियाँ निबंधित नहीं हैं, वहाँ नई प्राथमिक समितियों का गठन एवं निबंधन किया जाएगा। क्षेत्रीय स्तर पर कुछ जिलों को मिलाकर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन निबंधन किया जाएगा। क्षेत्रीय स्तर पर कुछ जिलों को मिलाकर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन निबंधन किया जाएगा। क्षेत्रीय स्तर पर कुछ जिलों को मिलाकर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ को केन्द्रीय सहकारी समिति के रूप में गठित एवं निबंधित किया जाएगा तथा शीर्ष केन्द्रीय सहकारी समिति के रूप में गठित एवं निबंधित किया जाएगा तथा शीर्ष स्तर पर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेषन का गठन एवं निबंधन किया जाएगा। स्तर पर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेषन का गठन एवं निबंधन किया जाएगा। स्तर पर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेषन का गठन एवं निबंधन किया जाएगा। (ख) उपर्युक्त वर्णित त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना के अंतर्गत प्राथमिक, केन्द्रीय एवं शीर्ष सहकारी उपर्युक्त वर्णित त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना के अंतर्गत प्राथमिक, केन्द्रीय एवं शीर्ष सहकारी उपर्युक्त वर्णित त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना के अंतर्गत प्राथमिक, केन्द्रीय एवं शीर्ष सहकारी ट प्रकार की समितियाँ हैं, अतः इन समितियों की प्रबंधकारिणी के गठन में बिहार ट प्रकार की समितियाँ हैं, अतः इन समितियों की प्रबंधकारिणी के गठन में बिहार समितियाँ विषिष्ट प्रकार की समितियाँ हैं, अतः इन समितियों की प्रबंधकारिणी के गठन में बिहार सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1935 की धारा-14(2) के द्वितीय परंतुक के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1935 की धारा-14(2) के द्वितीय परंतुक के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1935 की धारा-14(2) के द्वितीय परंतुक के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत् आरक्षण के प्रावधान अपवर्जित रहेंगे। तहत् आरक्षण के प्रावधान अपवर्जित रहेंगे। (ii) त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना का कार्य2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 7 नव(cid:15)बर 2017 (क) प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति - प्रखंड स्तर पर गठित ऐसी समितियाँ सब्जी संग्रहण, sorting, grading, विपणन तथा सहकारी संघ को सब्जी आपूर्ति करने का कार्य करेगी। इन प्राथमिक समितियों में सदस्य वही किसान हो सकते हैं, जो स्वयं की भूमि अथवा दूसरे की भूमि पर स्वयं सब्जी उत्पादन का कार्य करते हैं। एक प्रखंडस्तरीय समिति के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत सब्जी उत्पादन बहुल क्षेत्रों में एक से अधिक (आवष्यकतानुसार) संग्रहण केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगे। प्राथमिक समितियाँ अपने सदस्यों को production planning, harvest planning कृषि उपादान एवं कृषि विस्तार सेवाएँ तथा साख सुविधा उपलब्ध कराने का कार्य करेगी। प्रखंड स्तर पर गठित समितियाँ प्रखंडस्तरीय अधिसंरचना का निर्माण एवं प्रबंधन करेंगी। इसके अन्तर्गत स्थानीय उपभोक्ताओं के लिए फल-सब्जी हाट के साथ-साथ प्रबंधन कार्यालय, मिनी कोल्ड स्टोरेज, sorting-grading शेड, सब्जी वाहनों के लिए lifting platform के निर्माण और अन्य आवष्यक उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी। चूँकि सभी प्राथमिक सहकारी समितियाँ, सहकारी संघ से सम्बद्ध होंगी, अतः यहाँ से वाहनों के माध्यम से सब्जियाँ सहकारी संघ द्वारा स्थापित प्रसंस्करण एवं विपणन ईकाई में भेजी/मँगाई जाएगी। प्राथमिक समिति सिर्फ स्थानीय मंडी द्वारा ही विपणन का कार्य कर सकेगी। स्थानीय मंडी के निर्माण से सब्जी उत्पादक सदस्य किसानों को स्थानीय स्तर पर संगठित बाजार मिलेगा और समिति को आत्मनिर्भर होने में मदद मिलेगी। अतः इसे समिति के निबंधन के बाद शीघ्र शुरू किया जाएगा।
(ख) सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ - क्षेत्रीय स्तर पर कुछ जिलों को मिलाकर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ का केन्द्रीय सहकारी समिति के रूप में गठन किया जाएगा। यह सहकारी संघ पूरे प्रसंस्करण एवं विपणन व्यवस्था के केन्द्र के रूप में कार्य करेगा। उक्त सहकारी संघ, प्राथमिक सहकारी सहयोग समितियों से प्राप्त सब्जी का शीत संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य सम्वर्द्धन एवं विपणन व्यवस्था का कार्य करेगा। अधिसंरचना के रूप में संघ को Multi- chambered Cold Storage, Modified Atmospheric Chamber (MA Chamber), Controlled Atmospheric Chambers (CA-chambers), Individuated Quick Frozen Line (IQF), Deep Freezer, Air Cooled Sorting, Grading, Processing and Packaging Hall, Fleet Management (Refrigerated Vehicles and other vehicles), Pre-cooling chambers, Ripening Chambers, Processing Facility एवं अन्य आवष्यक तकनीकी व्यवस्था से सुदृढ़ बनाया जाएगा। संघ अपने कार्यक्षेत्र में बड़ी संख्या में विकेन्द्रीकृत विपणन हेतु सब्जी बिक्री केन्द्र स्थानीय निकाय/जिला प्रषासन के सहयोग से स्थापित करेगा। सहकारी संघ प्राथमिक समितियों को आवश्यक तकनीकी, संस्थागत, कृषि उपादान एवं साख सेवाएँ उपलब्ध करायेंगे।
(ग) सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेषन - फेडरेषन का मुख्य कार्य संपूर्ण व्यवस्था को पेषेवर नेतृत्त्व प्रदान करना, सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघों के बीच व्यावसायिक समन्वय स्थापित करना, सभी तरह के forward एवं backward linkages का integration सुनिष्चित करना, राज्य के अन्दर, राज्य के बाहर एवं देष के बाहर विपणन की व्यवस्था कराना, प्रषिक्षण एवं मानव संसाधन विकास की व्यवस्था करना, बाह्य परिवेश (External Environment) का प्रबंधन आदि हैं।
उपर्युक्त वर्णित त्रि-स्तरीय सहकारी संरचना की कार्य प्रणाली एवं प्रबंधन को सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर के माध्यम से integrate किया जाएगा।
(iii) परियोजना के backward linkages -
• सदस्य किसानों को सब्जी उत्पादन हेतु प्रषिक्षण, सूचना समर्थन, तकनीकी समर्थन, कृषि उपादान, कृषि साख एवं विस्तार सेवाओं के माध्यम से समर्थन।
• सभी संग्रहण केन्द्र एवं स्थानीय स्तर पर सब्जी बाजार का प्रबंधन।
(iv) परियोजना के forward linkages -
• राज्य के अन्दर विपणन व्यवस्था का प्रबंधन। • राज्य एवं देष के बाहर आपूर्ति एवं बिक्री व्यवस्था का प्रबंधन। • संबंधित संस्थाओं से व्यावसायिक समन्वय।
(v) राज्य सरकार का नोडल विभाग - सहकारिता विभाग इस योजना के प्रबंधन के लिए नोडल विभाग होगा। उक्त योजना के कार्यान्वयन हेतु ''बिहार सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन एजेंसी'' का गठन निम्नवत् किया जा सकेगा - 1. मंत्री, सहकारिता विभाग, बिहार सरकार - अध्यक्ष 2. प्रधान सचिव/सचिव, सहकारिता विभाग - उपाध्यक्ष3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 7 नव(cid:15)बर 2017 3. निबंधक, सहयोग समितियाँ - सदस्य 4. प्रतिनिधि, वित्त विभाग - सदस्य 5. प्रतिनिधि, कृषि विभाग - सदस्य 6. प्रतिनिधि, बिहार राज्य बागवानी मिषन - सदस्य 7. प्रतिनिधि, उद्योग विभाग - सदस्य 8. प्रतिनिधि, योजना एवं विकास विभाग - सदस्य 9. प्रबंध निदेषक, बिहार सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन एजेंसी - सदस्य सचिव
विभागों के प्रतिनिधि संयुक्त सचिव से अन्यून होंगे। बिहार सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन एजेंसी इस योजना का कार्यान्वयन सुनिष्चित कराने हेतु योजना में विर्निदिष्ट सभी आवष्यक निर्णय लेने हेतु अधिकृत होगी। यह एजेंसी योजना के कार्यान्वयन के क्रम में शीर्ष स्तरीय सब्जी उत्पादक सहकारी फेडरेषन के निबंधित एवं कार्यरत् होने तक इसके कार्यान्वयन एवं संचालन का सतत् अनुश्रवण भी करेगा।
इस एजेंसी की एक कार्यकारिणी समिति होगी। इसके अध्यक्ष, एजेंसी के प्रबंध निदेषक होंगे। इसका गठन एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
(vi) कार्यान्वयन के चरण - योजना का कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीकेे से किया जा सकेगा। प्रथम चरण में पाँच जिलों यथा, पटना, नालन्दा, बेगूसराय, वैषाली एवं समस्तीपुर को मिलाकर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ का गठन केन्द्रीय सहकारी समिति के रूप में किया जाएगा, जिसका मुख्यालय पटना जिले में होगा। इसके सफल शुरूआत के बाद अन्य जिलों के अन्य समूहों में चरणबद्ध रूप से योजना विस्तार किया जाएगा।
3. जमीन की उपलब्धता ः- सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना अंतर्गत कृषि उत्पादन बाजार समिति (विघटित) की जमीन का उपयोग किया जा सकेगा।
साथ ही, योजना अंतर्गत विकेन्द्रीकृत विपणन हेतु सब्जी बिक्री केन्द्र को स्थापित करने के लिए स्थानीय निकाय/जिला प्रषासन के द्वारा उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। प्राथमिक सहयोग समितियों को आधारभूत ढाँचे हेतु भूमि की व्यवस्था समिति को स्वयं ही करनी होगी।
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fcgkj&jkTiky ds vkns'k ls] सुरेष चौधरी, सरकार के अपर सचिव।
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