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सं॰ 08/आरोप-01-339/2014,सा॰प्र॰-10941 सं॰ सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 25 अगस्त 2017
श्री सुरेन्द्र राय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-996/08 के विरूद्ध प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया के श्री सुरेन्द्र राय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-996/08 के विरूद्ध प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया के श्री सुरेन्द्र राय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-996/08 के विरूद्ध प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया के त बैंक के स्थान पर डेहटी पैक्स में जमा कराने संबंधी पदस्थापन काल में इन्दिरा आवास मद की राशि राष्ट्रीय—त बैंक के स्थान पर डेहटी पैक्स में जमा कराने संबंधी पदस्थापन काल में इन्दिरा आवास मद की राशि राष्ट्रीय के योजना की मार्गदर्शिका के प्रतिकूल कार्य करने, इन्दिरा आवास मद की राशि के गबन, लाभार्थी के इन्दिरा आवास के योजना की मार्गदर्शिका के प्रतिकूल कार्य करने, इन्दिरा आवास मद की राशि के गबन, लाभार्थी के के योजना की मार्गदर्शिका के प्रतिकूल कार्य करने, इन्दिरा आवास मद की राशि के गबन, लाभार्थी के चयन में अनियमितता बरतने इत्यादि आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही (संकल्प ज्ञापांक-9422 दिनांक 18.09.2009 एवं चयन में अनियमितता बरतने इत्यादि आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही (संकल्प ज्ञापांक-9422 दिनांक 18 चयन में अनियमितता बरतने इत्यादि आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही (संकल्प ज्ञापांक-9422 दिनांक 18 .2010) संचालित की गयी। इस क्रम में श्री राय को संकल्प ज्ञापांक-353 दिनांक इस क्रम में श्री राय को संकल्प ज्ञापांक-353 दिनांक आदेश ज्ञापांक-11022 दिनांक 29.10. 2009 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-11054 दिनांक 02.11.2010 द्वारा ये निलंबन मुक्त हुए। 2010 द्वारा ये निलंबन मुक्त हुए। 29.01.2009 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-11054 दिनांक 02 ति के उपरांत विभागीय संकल्प कालान्तर में आरोपों की प्रमाणिकता के आधार पर राज्य मंत्रिपरिषद् की स्वी—ति के उपरांत विभागीय संकल्प कालान्तर में आरोपों की प्रमाणिकता के आधार पर राज्य मंत्रिपरिषद् की स्वी 2012 द्वारा श्री राय को सेवा से बर्खास्तगी का दंड संसूचित किया गया। 2012 द्वारा श्री राय को सेवा से बर्खास्तगी का दंड संसूचित किया गया। ज्ञापांक-2697 दिनांक 17.02.2012 द्वारा श्री राय को सेवा से बर्खास्तगी का दंड संसूचित किया गया। 2. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री राय ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में याचिका उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री राय ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में याचिका उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री राय ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में याचिका 2016 को निम्नरूपेण आदेश (सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-14595/12) दायर किया। माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 20.05.2016 को निम्नरूपेण आदेश (सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-14595/12) दायर किया। माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 20 पारित किया गया :-
"20 In view of the forgoing reasons, I am of the considered view that the disciplinary In view of the forgoing reasons, I am of the considered view that the disciplinary In view of the forgoing reasons, I am of the considered view that the disciplinary authority has failed to produce relevant materials on record to establish the guilt of authority has failed to produce relevant materials on record to establish the guilt of authority has failed to produce relevant materials on record to establish the guilt of the petitioner. The enquiry proceeding was conducted in breach of well established the petitioner. The enquiry proceeding was conducted in breach of well e the petitioner. The enquiry proceeding was conducted in breach of well e norms and principal of law. norms and principal of law. 21 In the result, both the writ applications are allowed. The enquiry report, the findings In the result, both the writ applications are allowed. The enquiry report, the findings In the result, both the writ applications are allowed. The enquiry report, the findings of guilt recorded by the disciplinary authority are set aside. The petitioners would be of guilt recorded by the disciplinary authority are set aside. The petitioners would be of guilt recorded by the disciplinary authority are set aside. The petitioners would be reinstated in service forthwith will consequential benefits." reinstated in service forthwith will
मो॰ शमीम अख्तर द्वारा दायर रिट याचिका माननीय न्यायालय द्वारा स्वी—त हुआ। कालान्
त हुआ। कालान्तर में 3. अभिलेख से स्पष्ट हुआ कि श्री राय से पूर्व पलासी प्रखंड में पदस्थापित दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों अभिलेख से स्पष्ट हुआ कि श्री राय से पूर्व पलासी प्रखंड में पदस्थापित दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों अभिलेख से स्पष्ट हुआ कि श्री राय से पूर्व पलासी प्रखंड में पदस्थापित दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों यथा, मो॰ शमीम अख्तर एवं श्री गयानंद यादव के विरूद्ध भी सदृश्य आरोपों के लिए अलग-अलग विभागीय कार्यवाही यथा, मो॰ शमीम अख्तर एवं श्री गयानंद यादव के विरूद्ध भी सदृश्य आरोपों के लिए अलग-अलग विभागीय कार्यवाही यथा, मो॰ शमीम अख्तर एवं श्री गयानंद यादव के विरूद्ध भी सदृश्य आरोपों के लिए अलग-अलग विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा उन्हें सेवा से बर्खास्तगी का दंड संसूचित किया गया। उक्त दंडादेश के विरूद्ध मो॰ शमीम ेवा से बर्खास्तगी का दंड संसूचित किया गया। उक्त दंडादेश के विरूद्ध मो॰ शमीम ेवा से बर्खास्तगी का दंड संसूचित किया गया। उक्त दंडादेश के विरूद्ध मो॰ शमीम अख्तर एवं श्री गयानंद यादव ने माननीय उच्च न्यायालय में क्रमशः सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-723/2013 एवं 2086/12 अख्तर एवं श्री गयानंद यादव ने माननीय उच्च न्यायालय में क्रमशः सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-723/2013 एवं 2086/12 अख्तर एवं श्री गयानंद यादव ने माननीय उच्च न्यायालय में क्रमशः सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-723/2013 एवं 2086/12 दायर किया। मो॰ शमीम अख्तर द्वारा दायर रिट याचिका माननीय न्यायालय द्वारा स्वी माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं होने के कारण मो॰ अख्तर ने अवमाननावाद माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं होने के कारण मो॰ अख्तर ने अवमाननावाद माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं होने के कारण मो॰ अख्तर ने अवमाननावाद2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 7 नव(cid:15)बर 2017 (एम॰जे॰सी॰ सं॰-2743/2016) दायर किया। अन्ततः माननीय न्यायालय द्वारा रीट याचिका में पारित न्यायादेश के अनुपालन में मो॰ शमीम अख्तर के सेवा से बर्खास्तगी संबंधी आदेश को राज्य मंत्रिपरिषद् की स्वी—ति के पश्चात् विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5371 दिनांक 05.05.2017 द्वारा वापस ले लिया गया।
वस्तुतः माननीय न्यायालय द्वारा सदृश्य आरोप होने के आलोक में श्री गयानंद यादव द्वारा दायर याचिका (सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-20862/12) एवं श्री सुरेन्द्र राय द्वारा दायर याचिका की सुनवाई संयुक्त रूप से की गयी तथा दिनांक 20.05.2016 को न्यायादेश पारित किया गया।
4. माननीय न्यायालय द्वारा सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-14595/12 को स्वी—त करते हुए श्री राय को पुनः सेवा में स्थापित करने संबंधी पारित न्यायादेश में निम्नरूपेण विश्लेषणात्मक मंतव्य दिया :-
(i) SJRY एवं इन्दिरा आवास की राशि को राष्ट्रीय—त बैंक में जमा नहीं किये जाने संबंधी गठित आरोपाें के परिप्रेक्ष्य में प्रतिवादी यह सिद्ध नहीं कर सके कि संदर्भित परिपत्र की जानकारी आरोपित पदाधिकारी को थी।
(ii) उप विकास आयुक्त, अररिया ने अपने पत्रांक-1736 दिनांक 02.12.2000 द्वारा SJRY की राशि को पैक्स में जमा करने की अनुमति दी थी।
(iii) पैक्स में योजना मद की राशि जमा करने संबंधी आरोप को प्रथम बार जाँच पदाधिकारी ने अप्रमाणित पाया था, परन्तु दूसरी बार जाँच पदाधिकारी ने 3 लाभुकों की राशि गबन किये जाने का आरोप प्रमाणित पाया, जाँच प्रतिवेदन को अभिलेख में प्रस्तुत नहीं किया गया अतः इसे प्रमाणित आधार नहीं माना जा सकता है।
(iv) आरोपित पदाधिकारी से की गयी द्वितीय कारण पृच्छा के पूर्व ही उन्हेंं दोषी मानकर दंडित करने का निर्णय ले लिया गया था अतः कारण-पृच्छा मात्र औपचारिकता थी।
(v) विद्वान अपर महाधिवक्ता द्वारा विषय को पुनः अनुशासनिक प्राधिकार के रिमांड हेतु किये गये अनुरोध पर माननीय न्यायालय ने कोई मंतव्य नहीं दिया, परन्तु यह कहा कि अनुशासनिक प्राधिकार उचित कार्रवाई कर सकती है।
5. श्री राय, बि॰प्र॰से॰ के बर्खास्तगी आदेश (विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2697 दिनांक 17.02.2012) को निरस्त किये जाने संबंधी न्यायादेश के विरूद्ध एल॰पी॰ए॰ दायर करने हेतु तथ्य विवरणी के साथ संचिका विधि विभाग को पृष्ठांकित की गयी। इस क्रम में महाधिवक्ता द्वारा निम्न रूपेण परामर्श दिया गया :-
" In the above view of the matter in my considered view there would be no justification in seeking to assail the writ court order by filing a Letters patent Appeal."
महाधिवक्ता द्वारा एल॰पी॰ए॰ दायर करने का औचित्य नहीं होने संबंधी परामर्श दिये जाने के आलोक में पुनः मामले की गहन समीक्षा की गयी तथा प्रदत्त परामर्श पर पुनर्विचार हेतु विधि विभाग से अनुरोध किया गया। इस क्रम में महाधिवक्ता द्वारा पुनः पूर्व के अनुरूप निम्नरूपेण परामर्श दिया गया :-
" Having re-considered the matter, I am still reluctant ot advise filing of LPA in the present case i.e in relation to Sri surendra Rai (CWJC No-14595/12) in absence of any material furnished by the department controverting and/or answering the findings recorded by the Hon'ble Single Judge as noticed in the earlier opinion recorded by the undersigned of 22.10.2016." इसी बीच श्री राय द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एम॰जे॰सी॰ सं॰-1671/2017 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त अवमाननावाद में दिनांक 05.07.2017 को अन्तरिम रूप से निम्न न्यायादेश पारित किया गया :-
" Two weeks time is granted to the learned counsel for the State to file show-cause.
Put-up this case after two weeks."
6. तदुपरांत पूरे मामले की पुनः समीक्षा में पाया गया कि तीनों पदाधिकारियों यथा, मो॰ शमीम अख्तर, श्री सुरेन्द्र राय एवं श्री गयानन्द यादव के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने के उपरांत उन्हें (तीनों पदाधिकारी को) सेवा से बर्खास्त किया गया। उक्त आदेश के विरूद्ध अलग-अलग दायर रीट याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा न्यायादेश पारित करते हुए बर्खास्तगी एवं एतद्संबंधी निर्गत संकल्प को निरस्त कर दिया गया। कालान्तर में मो॰ शमीम अख्तर ने रीट याचिका के आदेश के अनुपालन हेतु अवमाननावाद दायर किया। अन्ततः रीट याचिका में पारित न्यायादेश के अनुपालन में उन्हें सेवा में वापस ले लिया गया। श्री सुरेन्द्र राय एवं श्री गयानन्द यादव द्वारा अलग-अलग दायर रीट याचिकाओं की सुनवाई माननीय न्यायालय द्वारा संयुक्त रूप से की गयी तथा दिनांक 20.05.2016 को समेकित आदेश पारित करते हुए दोनों पदाधिकारियों के बर्खास्तगी संबंधी शास्ति को निरस्त कर दिया गया। श्री सुरेन्द्र राय के मामले में रीट याचिका में पारित न्यायादेश के विरूद्ध एल॰पी॰ए॰ दायर करने हेतु दो बार संचिका विधि विभाग भेजी गयी। इस क्रम में विद्वान महाधिवक्ता ने एल॰पी॰ए॰ दायर करने हेतु कोई ठोस तार्किक आधार नहीं होने का मंतव्य देते हुए संचिका वापस कर दी। इसी बीच श्री राय द्वारा अवमाननावाद (एम॰जे॰सी॰ सं॰-1671/2017) दायर कर दिया गया, जिसके फलस्वरूप सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-14595/12 में पारित न्यायादेश (दिनांक 20.05.2016) के अनुपालन के संबंध में निर्णय लिया जाना अपरिहार्य हो गया।
7. अन्ततः अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर पूरे मामले की गहन समीक्षा की गयी तथा सम्यक् विचारोपरांत निम्न निर्णय लिया गया :-
3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 7 नव(cid:15)बर 2017(क) श्री राय के विरूद्ध गठित आरोपों की पुनः अग्रेत्तर जाँच आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ से करायी जाय। इस क्रम में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इन्दिरा आवास मद की राशि के गबन अथवा दुर्विनियोग के बिन्दू सहित संदर्भित आरोपों पर सुस्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध कराते हुए प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की नियुक्ति की जायेगी। जाँच पदाधिकारी छः माह के अन्दर जाँच प्रतिवेदन समर्पित करेंगे।
(ख) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-14595/12 में पारित न्यायादेश (दिनांक 20.
05.2016) एवं इस संबंध में राज्य मंत्रिपरिषद् की दिनांक 18.08.2017 को सम्पन्न बैठक में दी गयी स्वी—ति (मद सं॰-5) के आलोक में बर्खास्तगी संबंधी शास्ति (संकल्प ज्ञापांक-2697 दिनांक 17. 02.2012) को वापस लेते हुए श्री सुरेन्द्र राय को सेवा में पुनः स्थापित किया जाय। पदस्थापन हेतु श्री राय सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान करेंगे।
8. अतएव उपर्युक्त निर्णय के आलोक में सेवा से बर्खास्तगी संबंधी शास्ति (संकल्प ज्ञापांक-2697 दिनांक 17.
02.2012) को वापस लेते हुए श्री सुरेन्द्र राय, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-996/08 को सेवा में पुनः स्थापित किया जाता है। श्री राय पदस्थापन हेतु सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में अपना योगदान देगें।
9. कंडिका-7 (क) में लिये गये निर्णय के संबंध में अलग से आदेश निर्गत किया जायेगा।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गुफरान अहमद, सरकार के उप-सचिव।
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