िनबंधन सं(cid:10)या पी0ट(cid:22)0-40 िनबंधन सं(cid:10)या ॢबह(cid:4)र
ह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क [स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:10)क(cid:4)०शत 23 क(cid:4)०तZक 1(cid:27)3(cid:27) (cid:28)श(cid:15)(cid:29)
((((स(cid:14)(cid:15) पटन(cid:4) 1(cid:15)5(cid:21)) ) ) ) पटन(cid:4)
पटन(cid:4)(cid:30) म(cid:14)गलव(cid:4)र(cid:30) 14141414 नव(cid:16)बनव(cid:16)बनव(cid:16)बनव(cid:16)बरररर 2(cid:15)1" जल संसाधन विभाग ——— अधिसूचना 10 vxLr 2017
सं॰ 22/नि0सि0(वीर0)-07-01/12-1300—श्री अमीनउदीन शेरू, तत0 कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध श्री अमीनउदीन शेरू, तत0 कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध सं॰ 22/नि0सि0(वीर0)-07-01/12-1 प्रमंडल, वीरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध वर्ष 2011-12 में कोशी बराज के U/S में प्रस्तावित चैनल एवं वेलमाउथ में में प्रस्तावित चैनल एवं वेलमाउथ में प्रमंडल, वीरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध वर्ष 2011-12 में कोशी बराज के जमे सिल्ट का ड्रेजींग कर हटाने के कार्य में बरती गयी अनियमितता के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए गयी अनियमितता के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए जमे सिल्ट का ड्रेजींग कर हटाने के कार्य में बरती 14 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब की 07.14 द्वारा स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के जवाब की विभागीय पत्रांक-869, दिनांक 04.07 समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत श्री अमीनउदीन शेरू के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत श्री अमीनउदीन शेरू के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापां समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत श्री अमीनउदीन शेरू के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापां 15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही 739 दिनांक 27.03.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही 15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
"जब आप पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तब कोशी "जब आप पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तब कोशी "जब आप पूर्वी कोशी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे तब कोशी में प्रस्तावित पायलट चैनल एवं वेल माउथ में जमें silt हटाने के कार्य में हुई अनियमितता की जाँच बराज के U/S में प्रस्तावित पायलट चैनल एवं वेल माउथ में जमें हटाने के कार्य में हुई अनियमितता की जाँच विभागीय निदेश के आलोक में उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया विभागीय निदेश के आलोक में उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया विभागीय निदेश के आलोक में उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया विपत्र की जाँच Ocean गया कि उक्त कार्य एकरारनामा सं०-01SBD/2010-11 के शर्त के अनुसार Even विपत्र की जाँच गया कि उक्त कार्य एकरारनामा सं०- से कराये बिना पोस्ट लेवल की जाँच Engineering Department IIT Madras/Bombay/Kharagpur से कराये बिना पोस्ट लेवल की जाँच Engineering Department IIT Madras/Bombay/Kharagpur अनुसंधान एवं शोध प्रमंडल, वीरपुर से कराकर भुगतान किया गया। आपके द्वारा मिट्टी की मापी वाटर लेवल के उपर अनुसंधान एवं शोध प्रमंडल, वीरपुर से कराकर भुगतान किया गया। आपके द्वारा मिट्टी की मापी वाटर लेवल के उपर अनुसंधान एवं शोध प्रमंडल, वीरपुर से कराकर भुगतान किया गया। आपके द्वारा मिट्टी की मापी वाटर लेवल के उपर सेक्शनल मेजरमेंट एवं वाटर लेवल के नीच Echo Sounders द्वारा ली सेक्शनल मेजरमेंट एवं वाटर लेवल के नीचे Disposed slurry के Solid earth और Echo Sounders गयी गहराई के आधार पर सिल्ट की मात्रा में जो कम हो का भुगतान नहीं कर सेक्सनल मेजरमेंट के द्वारा मिट्टी की गयी गहराई के आधार पर सिल्ट की मात्रा में जो कम हो का भुगतान नहीं कर सेक्सनल मेजरमेंट के द्वारा मिट्टी की गयी गहराई के आधार पर सिल्ट की मात्रा में जो कम हो का भुगतान नहीं कर सेक्सनल मेजरमेंट के द्वारा मिट्टी की मापी कर भुगतान किया गया है।
Ocean Engineering Department IIT Madras/Bombay/Kharagpur से सत्यापन इस प्रकार Ocean Engineering Department IIT Madras/Bombay/Khar Ocean Engineering Department IIT Madras/Bombay/Khar कराये बगैर एवं वाटर लेवल के नीचे के कार्य की मापी में एकरारनामा शर्तों का अनुपालन नहीं करने के लिए आप कराये बगैर एवं वाटर लेवल के नीचे के कार्य की मापी में एकरारनामा शर्तों का अनुपालन नहीं करने के लिए आप कराये बगैर एवं वाटर लेवल के नीचे के कार्य की मापी में एकरारनामा शर्तों का अनुपालन नहीं करने के लिए आप प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गयी। विभागीय समीक्षोपरांत चालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1059, दिनांक 09.06.16 चालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1059, दिनांक 09 संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमत होते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-1059, दिनांक 09 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 14 नव(cid:16)बर 2017 (i) 1.8मी0 गहराई वाले पुराने पायलट चैनल के उड़ाही जिसमें 0.67 मी0 पानी रहा हो, में Echo Sounder से Ocean अभियंता से मापी जाँच की शर्त निविदा में रखना अनावश्यक एवं अव्यवहारिक था। इस शर्त की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि अधिक गहराई रहने पर Staff से Level लेना संभव नहीं होता है, नाव की आवश्यकता होती है वहाँ echo Sounder का प्रयोग किया जाता है। उल्लेखनीय है कि कार्य समाप्ति की तिथि 31.05.11 तक नदी जल चैनल में प्रवेश नहीं किया था। (ii) IIT अभियंता से गहराई की जाँच करना आवश्यक था तो सरकार अथवा कम से कम मुख्य अभियंता स्तर पर निविदा निस्तार के पूर्व उनसे सहमति प्राप्त कर प्रतिनियुक्ति की आवश्यक व्यवस्था कर लेना चाहिए था। राष्ट्रीय स्तर के Expert की व्यवस्था उच्च स्तर पर ही संभव था एवं किया जाना चाहिए था न कि कार्यपालक अभियंता स्तर पर छोड़ देना चाहिए था।
(iii) मैं अपने स्तर पर असफल होने पर वरीय पदाधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई हेतु अनुरोध किया। परंतु उनके स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी। जाँच पदाधिकारी ने अनदेखी की एवं विशेषज्ञ नहीं आने के लिए मुझे दोषी करार दिया। जाँच पदाधिकारी 14.06.11 से स्वयं मुख्य अभियंता, वीरपुर के प्रभार में थे एवं 22.6.11 को भुगतान के पूर्व कोई प्रयास नहीं किया गया। 22.06.11 को द्वितीय चालू विपत्र का भुगतान विवशता में किया गया क्योंकि राशि रोक कर बाढ़ Channel Maintain कराना अनुचित होता।
(iv) 31.05.11 तक चैनल की गहराई का पोस्ट लेवल Lavelling Staff से लेकर 01.06.11 तक असम्बद्ध प्रमंडल से जाँच करवाकर मापीपुस्त में अंकित कर लिया गया था एवं संवेदक का भी हस्ताक्षर प्राप्त कर लिया गया था ताकि बाढ़ अथवा IIT के विशेषज्ञ के प्रतिनियुक्ति नहीं होने पर उस परिस्थिति में भुगतान पर भविष्य में अनावश्यक विवाद उत्पन्न न हो।
(v) पूर्व के बयान में जिक्र है कि Lavelling Staff से मापी की प्रक्रिया मजबूरन कार्यहित में विशेषज्ञ की व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में अपनायी गयी थी जो व्यवहारिक भी थी। जानबूझ कर लाभ लेने अथवा लाभ पहुँचाने की मंशा से नहीं की गयी थी।
विभागीय समीक्षा
(i) आरोपी श्री शेरू का कहना है कि 1.80मी0 गहराई वाले पुराने पायलट चैनल की उड़ाही जिसमें 0.67 मी0 पानी रहा हो, कि जाँच Ocean अभियंता द्वारा echo sounder से किये जाने का शर्त निविदा में रखा जाना अनावश्यक एवं अव्यवहारिक है। अधिक गहराई रहने पर ही echo sounder का प्रयोग किया जाता है। यदि यह आवश्यक था तो राष्ट्रय स्तर के विशेषज्ञ की व्यवस्था उच्च स्तर पर ही निविदा निस्तार के पूर्व कर लिया जाना चाहिए था। तथ्य यह कि आरोपी श्री शेरू के 29.01.11 के पदभार ग्रहण के बाद ही निविदा निस्तार एवं दिनांक 15.03.11 को उनके विरूद्ध एकरारनामा किया गया। जिससे कार्य के मापी का उक्त शर्त निहित था। यदि आरोपी श्री शेरू को उक्त शर्त अनावश्यक एवं अव्यवहारिक लगा था तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था का प्रस्ताव देते हुए उच्चधिकारियों के माध्यम से विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त कर लेना चाहिए था जो उनके द्वारा किये जाने का बोध नहीं होता है। बल्कि अपने पत्रांक 337, दिनांक 15.04.11 से राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान से अनुरोध किया गया। उक्त के आलोक में आरोपी का उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
(ii) आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि अपने पत्रांक-337, दिनांक 15.04.11 एवं पत्रांक 490, दिनांक 31.05.11 से नामित राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान एवं उच्चाधिकारियों से Ocean अभियंता के प्रतिनियुक्ति हेतु अनुरोध किया था। उक्त की पुष्टि उक्त रूप से होती है।
(iii) आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि 31.05.11 तक कराये गये कार्य का Lavelling Staff से मापी लेकर असम्बद्ध प्रमंडल से good faith & good intention में दिनांक 01.06.11 को जाँच करा ली गयी एवं नदी का जलस्तर बढ़ने पर मुख्य अभियंता, वीरपुर के आदेश से दिनांक 14.06.11 को उड़ाही किये गये चैनल में नियंत्रित रूप से नदी का जल प्रवाहित कराया गया तथा 22.06.11 तक विशेषज्ञ की व्यवस्था नहीं होने पर लिए गये सेक्शनल मापी के आधार पर द्वितीय चालू विपत्र का उपलब्ध निधि तक विवशता में भुगतान किया गया।
निम्न तथ्यों के आलोक में आरोपी पदाधिकारी का उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है- (i) वाटर लेवल से उपर के कार्य का भुगतान सेक्सनल मेजरमेंट के अनुसार किया जाना है। (ii) वाटर लेवल से नीचे का कार्य में Echo sounders से ली गयी गहराई के आधार पर आकलित सिल्ट की मात्रा एवं डे्रजर के पाईप के द्वारा dispose की गयी slurry में Solid earth की मात्रा में जो कम हो उसी का भुगतान किया जाना है।
(iii) साथ ही even एवं अंतिम विपत्र का भुगतान Ocean Engineering Department IIT Madras/Bombay/Kharagpur से सत्यापन के पश्चात ही किया जाना है।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 14 नव(cid:16)बर 2017 (iv) ड्रेजर पाईप से disposed slurry में solid earth की मात्रा का आकलन किये जाने का बोध नहीं होता हैं। आरोपी पदाधिकारी द्वारा Lavelling staff से ली गयी मापी के आधार पर भुगतान किया गया है। IIT के विशेषज्ञ द्वारा भी विपत्र की जाँच क्यों नही की गयी। उक्त से निविदा/एकरारनामा शर्त के अनुसार मापी एवं भुगतान किये जाने की पुष्टि नहीं होती है। यदि उसी संवेदक से बाढ़ अवधि में ड्रेजर से उड़ाही किये गये चैनल को Maintain कराने एवं विशेषज्ञ अभियंता द्वारा विपत्र जाँचित नहीं होने की स्थिति में ली गयी मापी के आधार भुगतान करने की विवशता थी तो बदली परिस्थिति में उच्चाधिकारी के माध्यम से भुगतान के संदर्भ में विभागीय मार्गदर्शन प्राप्त कर भुगतान करना चाहिए था जो आरोपी पदाधिकारी द्वारा नहीं किये जाने का बोध होता है। इस प्रकार उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
(v) आरोपी पदाधिकारी का कहना है कि चैनल में 0.67मी0 जल था एवं उक्त गहराई में echo sounders से मापी संभव नहीं है तथा Lavelling staff से ली गयी मापी ही व्यवहारिक एवं तकनीकी रूप से सही है। तथ्य यह है कि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में कहा गया है कि प्री लवेल एवं कार्यकारी प्राक्कलन में दिये गये सेक्सन के आधार पर प्रस्तावित चैनल के वेड लेवल से पानी की औसत ऊँचाई 0.67मी0 परिगणित करते हुए वाटर लेवल के नीचे खुदाई की जाने वाली मिट्टी की मात्रा 29 प्रतिशत आकलित की गई है न कि कार्य के दौरान चैनल में जल की गहराई 0.67मी0 आकलित की गई है। वस्तुतः ड्रेजीग मशीन के कार्यकारी होने के लिए जल की गहराई 1मी0 से 1.50मी0 होनी चाहिए। इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी का उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है।
उक्त के परिप्रेक्ष्य में श्री शेरू आरोपित पदाधिकारी के मामले में द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं है।
वर्णित तथ्यों के आलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अमीनउदीन शेरू, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दंड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है :- (1) पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की कटौती 04(चार) वर्ष के लिए। उक्त प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना का सहमति प्राप्त है। अतः श्री अमीनउदीन शेरू, तत0 कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-
"पेंशन से 10(दस) प्रतिशत की कटौती 04(चार) वर्ष के लिए''।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, सरकार के संयुक्त सचिव।
——— [ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त(cid:16) ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 1056-5%1+10(ड(cid:17)*ट+*प(cid:17)*? Website: http://egazette.bih.nic.in