Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 15 November 2017

Published 15 November 2017

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2017-11-15.46
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 24242424 काित(cid:29)ककाित(cid:29)ककाित(cid:29)ककाित(cid:29)क 1931931931939999 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 46464646 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ————————

15151515 नव(बनव(बनव(बनव(बरररर 2017201720172017 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)2, पदःथापन, बदली, श(cid:18)2, छु 8ट(cid:15) और अ;य <य(cid:18)2गत सूचनाएं। 2-18 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु@मB के समादेंटाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Kाओं के पर(cid:15)Kा-फल, काय(cid:29)बम, छाऽवृ(cid:18)O ूदान, आPद।

---

भाग-1-ग—िशKा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Kाफल आPद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राQयपाल और काया(cid:29)RयKB (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आPद। ---

भाग-3—भारत सरकार, पSTम बंगाल सरकार और उVच ;यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राQय गजटB के उXरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Pकये जानेवाले ूवर सिमितयB के ूितवेदन और उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथापन के पूव(cid:29) ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Sजनपर रांशपित क] Qयेंठ अनुमित िमल चुक] है। ---

भाग-8—भारत क] संसद मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयB के ूितवेदन और संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयB के ूितवेदन और संसद मZ पुर:ःथापन के पूव(cid:29) ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व_ापन

---

भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क] नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प`रवहन सूचनाएं, ;यायालय सूचनाएं और सव(cid:29)साधारण सूचनाएं इaयाPद। ---

पूरक

---

पूरक-क 19-462 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)2, पदःथापन, बदली, श(cid:18)2, छु 8ट(cid:15) और अ;य <य(cid:18)2गत सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

पटना उच्च न्यायालयपटना उच्च न्यायालयपटना उच्च न्यायालयपटना उच्च न्यायालय -------------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाएंएंएंएं 6 सितम्बर 20176 सितम्बर 20176 सितम्बर 20176 सितम्बर 2017

सं0सं0सं0सं0 365 नि0365 नि0365 नि0365 नि0ः—श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, शेखपुरा को बक्सर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित एवं पदस्थापित किया जाता है।

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

-------------------------------- The 6th September 2017.

No. 365 A:—Sri Ajay Kumar Srivastava, Principal Judge, Family Court, Sheikhpura is transferred and posted as District and Sessions Judge of Buxar.

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

8 सितम्बर 20178 सितम्बर 20178 सितम्बर 20178 सितम्बर 2017

सं0 367सं0 367सं0 367सं0 367 नि0नि0नि0नि0ः—दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 13 की उप-धारा (1) (अधिनियम 2, 1974) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय निम्न तालिका के स्तंभ-2 में उल्लिखित कार्यपालक पदाधिकारियों को न्यायालय की अधिसूचना की तिथि से एक वर्ष के लिए बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 के अधीन उन वादों को जिन्हें वे दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अंतर्गत क्षमतापूर्वक निष्पादित कर सकते हैं के निष्पादन हेतु तालिका के स्तंभ-3 में उल्लिखित क्षेत्राधिकार के लिए द्वितीय श्रेणी का विशेष न्यायिक दंडाधिकारी नियुक्त करता है।

उन्हें संहिता की धारा 261 के अंतर्गत बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 में वर्णित वादों के संक्षिप्त विचारण के लिए द्वितीय श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी की शक्तियाँ भी प्रदान की जाती है।

उन्हें अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत उन वादों में जिसका निष्पादन करने के लिए उन्हें प्राधिकृत किया गया है, संज्ञान

क्रम क्रम क्रम क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं स्थान जहाँ वे पदस्थापित हैं क्षेत्राधिकार जहाँ के लिए शक्तियाँ प्रदान क क्षेत्राधिकार जहाँ के लिए शक्तियाँ प्रदान की ी ी ी क्षेत्राधिकार जहाँ के लिए शक्तियाँ प्रदान क क्षेत्राधिकार जहाँ के लिए शक्तियाँ प्रदान क जाती हैं
1 1.... 1 1 2 2.... 2 2 3 3.... 3 3
1. श्री रमण कुमार, अंचल अधिकारी, किशनगंज। किशनगंज अनुमण्डल

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

-------------------------------- The 8th September 2017.

No. 367A:—In exercise of powers conferred upon the High Court under Sub Section (1) of Section 13 of the Code of Criminal Procedure 1973 (Act 2 of 1974) the executive Officers named in column no. 2 of the table given below are appointed as Special Judicial Magistrate 2nd Class for a period of one year with effect from the date of notification within the territorial jurisdiction mentioned against their names in column no. 3 of the table to try the cases under the BIHAR CONDUCT OF EXAMINATION ACT, 1981, which they can competently try under the code of Criminal Procedure, 1973. These Officers are also vested with the powers conferrable on a Judicial Magistrate 2nd Class to try summarily the cases under the BIHAR CONDUCT OF EXAMINATION ACT, 1981, as are covered by Section 261 of the Cr.P.C.

3 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

They are also conferred with the powers to take cognizance of such cases which they have been authorized to try in their respective Territorial Jurisdiction.

Sl. No. Name of Officer with designation and place of posting Jurisdiction for which Powers are vested
1 2 3
1. Sri Raman Kumar, C.O., Kishanganj Kishanganj Sub division

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

8 सितम्बर 20178 सितम्बर 20178 सितम्बर 20178 सितम्बर 2017

सं0 368सं0 368सं0 368सं0 368 नि0नि0नि0नि0ः—दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 13 की उप-धारा (1) (अधिनियम 2, 1974) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय निम्न तालिका के स्तंभ-2 में उल्लिखित कार्यपालक पदाधिकारियों को न्यायालय की अधिसूचना की तिथि से एक वर्ष के लिए बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 के अधीन उन वादों को जिन्हें वे दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अंतर्गत क्षमतापूर्वक निष्पादित कर सकते हैं के निष्पादन हेतु तालिका के स्तंभ-3 में उल्लिखित क्षेत्राधिकार के लिए द्वितीय श्रेणी का विशेष न्यायिक दंडाधिकारी नियुक्त करता है।

उन्हें संहिता की धारा 261 के अंतर्गत बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 में वर्णित वादों के संक्षिप्त विचारण के लिए द्वितीय श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी की शक्तियाँ भी प्रदान की जाती है।

उन्हें अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत उन वादों में जिसका निष्पादन करने के लिए उन्हें प्राधिकृत किया गया है, संज्ञान

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं स्थान जहाँ वे पदस्थापित हैं क्षेत्राधिकार जहाँ के लिए शक्तियाँ प्रदान की क्षेत्राधिकार जहाँ के लिए शक्तियाँ प्रदान की जाती हैं
1 1.... 1 1 2 2.... 2 2 3 3.... 3 3
1. श्री निरंजन शर्मा, कार्यपालक दण्डाधिकारी, अररिया। अररिया अनुमण्डल
2. श्री सुनील कुमार, कार्यपालक दण्डाधिकारी, फारबिसगंज। फारबिसगंज अनुमण्डल
3. श्री अनिरूद्ध प्रसाद यादव, अवर निर्वाचन पदाधिकारी, अररिया। अररिया अनुमण्डल
4. श्री सुमन कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, फारबिसगंज। फारबिसगंज अनुमण्डल
5. श्री बिनोद कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत, जोगबनी, अररिया। अररिया अनुमण्डल
6. श्री अभय कुमार, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग अररिया। अररिया अनुमण्डल
7. श्री जावेद रहमत, श्रम अधीक्षक, अररिया। अररिया अनुमण्डल
8. श्री संजय कुमार, वरीय उप समाहर्त्ता, अररिया। अररिया अनुमण्डल
9. श्री शम्भु कुमार, वरीय उप समाहर्त्ता, अररिया। अररिया अनुमण्डल
10. श्रीमति माधवी लता, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, अररिया। अररिया अनुमण्डल
11. श्रीमति सीमा कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, कुर्सा कांटा, अररिया। अररिया अनुमण्डल
12. श्रीमति फिरदौस शेख, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, रानीगंज, अररिया। अररिया अनुमण्डल
13. श्रीमति रूबी कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, सिकटी, अररिया। अररिया अनुमण्डल
14. श्रीमति संगीता कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, फारबिसगंज। फारबिसगंज अनुमण्डल
4 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

उच्च न्यायालय के आदेश उच्च न्यायालय के आदेश उच्च न्यायालय के आदेश उच्च न्यायालय के आदेश से,से,से,से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

-------------------------------- The 8th September 2017.

No. 368A:—In exercise of powers conferred upon the High Court under Sub Section (1) of Section 13 of the Code of Criminal Procedure 1973 (Act 2 of 1974) the executive Officers named in column no. 2 of the table given below are appointed as Special Judicial Magistrate 2nd Class for a period of one year with effect from the date of notification within the territorial jurisdiction mentioned against their names in column no. 3 of the table to try the cases under the BIHAR CONDUCT OF EXAMINATION ACT, 1981, which they can competently try under the code of Criminal Procedure, 1973. These Officers are also vested with the powers conferrable on a Judicial Magistrate 2nd Class to try summarily the cases under the BIHAR CONDUCT OF EXAMINATION ACT, 1981, as are covered by Section 261 of the Cr.P.C. They are also conferred with the powers to take cognizance of such cases which they have been authorized to try in their respective Territorial Jurisdiction.

Sl. No. Name of Officer with designation and place of posting Jurisdiction for which Powers are vested
1 2 3
1. Sri Niranjan Sharma, Executive Magistrate, Araria Araria Sub division
2. Sri Sunil Kumar, Executive Magistrate, Forbesganj Forbesganj Sub division
3. Sri Anirudh Prasad Yadav, Sub Election Officer, Araria Araria Sub division
4. Sri Suman Kumar, Executive Magistrate, Nagar Parisad, Forbesganj Forbesganj Sub division
5. Sri Binod Kumar, Executive Magistrate, Nagar Panchayat, Jogbani, Araria Araria Sub division
6. Sri Abhay Kumar, Assistant Director, Social Security Cell, Araria Araria Sub division
7. Sri Jawed Rahamat, Labour Superintendent, Araria Araria Sub division
8. Sri Sanjay Kumar, Senior Deputy Collector, Araria Araria Sub division
9. Sri Shambhu Kumar, Senior Deputy Collector, Araria Araria Sub division
10. Smt. Madhvi Lata, Child Development Project Officer, Araria Araria Sub division
11. Smt. Seema Kumari, Child Development Project Officer, Raniganj, Araria Araria Sub division
12. Smt. Firdaus Sheikh, Child Development Project Officer, Raniganj, Araria Araria Sub division
13. Smt. Rubi Kumari, Child Development Project Officer, Sikti, Araria Araria Sub division
14. Smt. Sanjeeta Kumari, Child Development Project Officer, Forbesganj Forbesganj Sub division
5 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

8 सितम्बर 20178 सितम्बर 20178 सितम्बर 20178 सितम्बर 2017

सं0 369सं0 369सं0 369सं0 369 नि0नि0नि0नि0ः—निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित न्यायिक पदाधिकारी (असैनिक न्यायाधीश, कनीय कोटि) को उसी तालिका के स्तम्भ-3 में निर्देशित जजी एवं स्थान पर मुंसिफ एवं उच्च न्यायालय द्वारा दंडाधिकारी की आवश्यक शक्तियाँ प्रदान किये जाने पर न्यायिक दण्डाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

पदाधिकारी को आवश्यकतानुसार, बंगाल, आगरा एवं आसाम सिविल कोर्ट बिहार एमेंडमेंट ऐक्ट-2013 (ऐक्ट XIV, 2014) द्वारा संबोधित बंगाल, आगरा एवं आसाम सिविल कोर्टस ऐक्ट, 1887 (ऐक्ट XII, 1887) की धारा 19 की उपधारा (2) के अन्तर्गत उक्त तालिका के स्तम्भ-4 में यथानिर्देशित आर्थिक एवं प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर होने वाले मौलिक वादों की साधारण प्रक्रिया के अधीन निष्पादन की शक्तियाँ प्रदान की जाती है।

सम्बन्धित पदाधिकारी को उसी स्तम्भ-4 में निर्देशित आर्थिक एवं प्रादेशिक क्षेत्राधिकारी के अन्दर लघुवाद न्यायालय द्वारा संज्ञेय वादों के निष्पादन के लिए ऐसे न्यायालय के न्यायाधीश की शक्तियाँ भी प्रदान की जाती है।

स्तम्भ-4 में दी गयी शक्तियों का प्रयोग तबतक नहीं किया जाय जबतक कि वे बिहार राज्य पत्र या जिला राज्यपत्र में अधिसूचित न हो जायें।6 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

क्रम क्रम क्रम क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी सहित अ) नए स्थान का पदनाम ब) साधारणतः अधिष्ठित रहने का ब) साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी जहॉ नियुक्त किए गये स) जजी जहॉ नियुक्त किए गये स) जजी जहॉ नियुक्त किए गये स) जजी जहॉ नियुक्त किए गये हैंहैंहैंहैं नये स्थान पर अधिकारियों को प्रदान नये स्थान पर अधिकारियों को प्रदान नये स्थान पर अधिकारियों को प्रदान नये स्थान पर अधिकारियों को प्रदान की गयी विशेष शक्तियाँ अ) बंगाल, आगरा एण्ड आसाम अ) बंगाल, आगरा एण्ड आसाम अ) बंगाल, आगरा एण्ड आसाम अ) बंगाल, आगरा एण्ड आसाम सिविल कोर्ट ऐक्ट के अंतर्गत सिविल कोर्ट ऐक्ट के अंतर्गत (साधारन प्रक्रिया) (साधारन (साधारन (साधारन प्रक्रिया) ब) ब) प्रोविन्सिीयल प्रोविन्सिीयल स्मॉल कोजेज ब) ब) प्रोविन्सिीयल प्रोविन्सिीयल स्मॉल कोजेज कोर्टस ऐक्ट 1987 के अंतर्गत
1 2 3 4
1. सीमा कुमारी, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, हाजीपुर (वैशाली)। अ) मु सिफ (असैनिक न्यायाधीश, ं कनीय कोटि) ब) हाजीपुर स) वैशाली अ) हाजीपुर मुंसिफी की स्थानीय सीमाओं के अंतर्गत 150000 रूपये तक ब) हाजीपुर मु सिफी की ं स्थानी सीमाओं के अंतर्गत 1000 रूपये तक लघुवाद की शक्तियाँ

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

--------------------------------

The 8th September 2017.

No. 369A:—The Judicial Officer of the rank of Civil Judge (Junior Division) named in column no. 2 of the table given below is appointed as Munsif (Civil Judge, Jr. Div.) in the judgeship and station mentioned in the column no. 3.

As mentioned in column no. 4, the officer is also vested with the powers under Sub-section (2) of Section-19 of the Bengal, Agra and Assam Civil Courts Acts, 1887, (act XII of 1887) as amended by the Bengal, Agra and Assam Civil Courts Bihar Amendment Act, 2013 (Act 14 of 2014) to try under ordinary procedure original suits of Pecuniary and Territorial Jurisdiction.

As further mentioned in column no. 4, the officer is also vested with powers of the Court of small causes for the trial of suits cognizable by such a Court with the necessary Pecuniary and Territorial Jurisdiction.

The powers vested as per column no. 4, should not, however, be exercised by the officer concerned unless it is published in the Bihar Gazette or in the District Gazette.

7 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017
Sl. No. Name of the Officer with designation and present place of posting with judgeship a) Designation at the new station. b) Place where the officer is to be stationed at ordinarily. c) Name of the Judgeship in which appointed on transfer. Special Power with which the Officer is vested at the new station a) Under the Bengal, Agra and Assam Civil Court Acts (under ordinary procedure). b) Under the provincial small causes Courts Act,1987
1 2 3 4
1 Ms. Seema Kumari, J.M. 1st Class, Hajipur (Vaishali) a) Munsif (Civil Judge, Jr. Div.) b) Hajipur c) Vaishali a) Rs.1,50,000/- within the local limits of Hajipur Munsifi. b) S.C.C. Powers of Rs. 1000/- within the local limits of Hajipur Munsifi.

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

16 सितम्बर 201716 सितम्बर 201716 सितम्बर 201716 सितम्बर 2017

सं0 378सं0 378सं0 378सं0 378 नि0नि0नि0नि0ः—सभी मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी एवं न्यायिक दण्डाधिकारी, प्रथम श्रेणी जो इस रूप में कम-से-कम तीन साल की सेवा पूरी कर चुके हैं और जो व्यवहार न्यायालय में आगामी दुर्गापूजा अवकाश में कार्यरत रहेगें उन्हें उस अवधि के लिए इसके द्वारा आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 1964 (47-1964) द्वारा यथा संशोधित आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अन्तर्गत उनके अपने-अपने जिलों/अनुमंडलों में उक्त अधिनियम की धारा-3 के अधीन बने किसी ऐसे आदेश जिसे राजपत्र अधिसूचित आदेश द्वारा उस संबंध में उल्लेखित है, के उल्लंघन के संबंध में हुए अपराधों के विषय में दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (अधिनियम 2, 1974) की धारा 260(1) (सी) के अधीन संक्षिप्त विचारण करने की शक्तियाँ अस्थायी रूप से प्रदान की जाती है।

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,

विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

--------------------------------

The 16th September 2017.

No. 378A:—All the Chief Judicial Magistrate, Additional Chief Judicial Magistrate and Judicial Magistrate, 1st Class who have completed at least three year of service as such and who are detained during ensuing Civil Court's Durga Puja Vacation are hereby vested temporarily, for this period only, with the powers u/s 260(1)(c) of the code of Criminal Procedure 1973 (Act 2 of 1974) for the summary trial of offences arising generally within their respective Districts/Sub-Divisions relating to the contravention of any order made under sections 3 of the Essential commodities Act as amended by8 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 Essential Commodities (Amendment) Act 1964 (no. 47 of 1964) and duly notified in the official Gazette as laid down in section 12A of the Essential Commodities Act 1955.

By order of the High Court,

B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

18 सितम्बर 201718 सितम्बर 201718 सितम्बर 201718 सितम्बर 2017

सं0 379सं0 379सं0 379सं0 379 नि0नि0नि0नि0ः—अपने वर्त्तमान कर्तव्यों से विरमित होने पर श्री आनन्द कुमार सिंह-I, सब जज (असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि) समस्तीपुर की सेवायें, क्रमशः पीठासीन पदाधिकारी, श्रम न्यायालय, पटना के पद पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्ति हेतु राज्य सरकार के अधीन, सामान्य प्रशासन विभाग, पटना को सौंपी जाती है। जिनकी प्रतिनियुक्ति की अवधि अधिकतम तीन वर्षों की होंगी।

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

-------------------------------- The 18th September 2017.

No. 379A:—On being relieved of their present assignment, the services of Sri Anand Kumar Singh I, Sub Judge, Samastipur is placed at the disposal of the State government in the Department of General Administration, Govt. of Bihar, Patna for his appointment as Presiding Officer, Labour Court, Patna, on deputation basis, for a maximum period of three years.

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

18 सितम्बर 201718 सितम्बर 201718 सितम्बर 201718 सितम्बर 2017

सं0 380सं0 380सं0 380सं0 380 नि0नि0नि0नि0ः—उच्च न्यायालय निम्न तालिका के स्तंभ-II में उल्लिखित पदाधिकारियों को उनके नाम के समक्ष स्तंभ- III में उल्लिखित क्षेत्राधिकार के लिए विधि विभाग के ज्ञाप सं0- 1806/जे. दिनांक 13.04.1992 तथा 1604/जे. दिनांक 21.04.1999 में उल्लिखित अधिनियमों के अधीन वादों के निष्पादन या निष्पादन हेतु सुपुर्द करने के लिए आवश्यक शक्तियाँ प्रदान की जाती है। इन्हें अपने-अपने क्षेत्राधिकारों के अंतर्गत वादों में जिसका निष्पादन करने के लिए इन्हें प्राधिकृत किया गया है, संज्ञान लेने की शक्तियाँ भी प्रदान की जाती है। इन्हें विधि विभाग के उपरोक्त ज्ञाप सं0 में उल्लिखित आर्थिक अपराधों से संबंधित मुकदमों के निष्पादन हेतु स्थापित विशेष न्यायालयों, जिसका क्षेत्राधिकार स्तंभ- III में उल्लिखित है, और जिसका मुख्यालय स्तंभ- IV, में उल्लिखित है, के पीठासीन पदाधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए भी नियुक्त किया जाता है।

क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं पदस्थापन का स्थान क्षेत्राधिकार मुख्यालय
I II III IV
1. श्री राज नारायण निगम अवर न्यायाधीश प्रथम-सह-अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, पटना पटना, नालंदा, रोहतास, भभुआ, भोजपुर, बक्सर, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा, भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई एवं खगड़िया पटना

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

-------------------------------- The 18th September 2017.

No. 380A:—The High Court have been pleased to confer upon the officers named in column no. 2 of the table given below, the powers for trial or to commit for trial9 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 of cases with respect to the offences under the acts as mentioned in law Department memo Nos. 1806/J, dated 13.04.1992 and 1604/J, dated 21.04.1999 for the territorial Jurisdiction mentioned against their names in column no. 3 of the given table. The Court are further pleased to confer upon them the powers to take cognizance of such cases, as they have been authorized to try. These officers are also appointed to act as Presiding Officer of Special Court established with headquarters as mentioned against their names in column no. 4 of the table, having Jurisdiction as mentioned in column no. 3, for trial of cases relating to Economic Offences under the Acts mentioned in the Law Department's aforesaid memos.

Sl. No. Name of the Officers with designation and place of posting Territorial Jurisdiction Headquarter of the Court
1. Sri Raj Narayan Nigam, Sub Judge-I-cum-A.C.J.M.- cum-A.S.J., Patna Patna, Nalanda, Rohtas, Bhabhua, Bhojpur, Buxar, Gaya, Jehanabad, Aurangabad, Nawadah, Bhagalpur, Banka, Munger, Jamui and Khagaria Patna

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

18 सितम्बर18 सितम्बर18 सितम्बर18 सितम्बर 2017201720172017

सं0 381सं0 381सं0 381सं0 381 नि0नि0नि0नि0ः—न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर नियुक्त निम्नलिखित (असैनिक न्यायाधीश, कनीय कोटि) की सेवायें उनके नाम के सम्मुख स्तंभ-3 में उल्लेखित तिथि के प्रभाव से संपुष्ट की जाती है।

क्रमांक पदाधिकारियों का नाम, पदनाम एवं पदस्थापन का पदाधिकारियों का नाम, पदनाम एवं पदस्थापन का स्थान पदाधिकारियों का नाम, पदनाम एवं पदस्थापन का पदाधिकारियों का नाम, पदनाम एवं पदस्थापन का स्थान संपुष्टि की तिथि
1 2 3
1. श्री श्यामल कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी, दानापुर, पटना। 26वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
2. श्री हरे राम, न्यायिक दंडाधिकारी, मसौढ़ी, पटना। 26वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
3. श्री विशाल कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी, शिवहर। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
4. श्री संतोष कुमार I, न्यायिक दंडाधिकारी, मु गेर। ं 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
5. श्री सुनील कुमार त्रिपाठी, न्यायिक दंडाधिकारी, पुपरी, सीतामढ़ी। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
6. श्री विकास झा, न्यायिक दंडाधिकारी, मधुबनी। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
7. श्री देव राज, न्यायिक दंडाधिकारी, पटना सिटी, पटना। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
8. श्री पंकज कुमार लाल, न्यायिक दंडाधिकारी, नवादा। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
9. श्री अमित कुमार तिवारी, न्यायिक दंडाधिकारी, बेनीपट्‌टी, मधुबनी। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
10. श्री विमलेन्दु कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी, नालन्दा। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
11. श्री रोहित कुमार I, न्यायिक दंडाधिकारी, विशेष कार्य पदाधिकारी, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
12. श्री संदीप कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी, दानापुर, पटना। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
13. श्री तेज प्रताप सिंह, न्यायिक दंडाधिकारी, मधेपुरा। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
14. श्री तरूण कुमार झा, न्यायिक दंडाधिकारी, नौगछिया, भागलपुर। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
15. श्री कुलदीप, न्यायिक दंडाधिकारी, पूर्णिया। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
16. श्री मनीष कुमार उपाध्याय, न्यायिक दंडाधिकारी, जहानाबाद। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
17. श्री प्रकाश कुमार सिन्हा, न्यायिक दंडाधिकारी, सहरसा। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
18. श्री ऋषि गुप्ता, न्यायिक दंडाधिकारी, अरेराज, पूर्वी चम्पारण। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
19. श्री विपिन लावाणिया, न्यायिक दंडाधिकारी, मुजफ्फरपुर। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
20. श्री कविन्द्र कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी, डेहरी, रोहतास। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
21. श्री मनीष कुमार जायसवाल, न्यायिक दंडाधिकारी, वैसी, पूर्णिया। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
22. श्री राकेश कुमार राकेश, न्यायिक दंडाधिकारी, अरवल, जहानाबाद। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
23. श्री अरविन्द कुमार सिंह, न्यायिक दंडाधिकारी, धमदाहा, पूर्णिया। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
24. श्री रधुबीर प्रसाद, न्यायिक दंडाधिकारी, बेगूसराय। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
25. श्री मानस कमार, न्यायिक दंडाधिकारी, पश्चिम चम्पारण। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
26. श्री कुमार कृष्ण देव, न्यायिक दंडाधिकारी, सुपौल। 27वीं न्यायिक सेवा 29.11.2016
10 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 11 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

इनकी आपसी वरीयता का निर्धारण बाद में किया जाएगा।

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

-------------------------------- The 18th September 2017.

No. 381A:—The services of following (Civil Jude, Junior Division) appointed on the basis of the result of 26th & 27th Judicial Service Competitive Examination are hereby confirmed w.e.f. the dates indicated against their respective names in column 3.

Sl. No. Name, Designation and Place of Posting of the Officer Date of Confirmation
1. 2. 3.
1. Sri Shyamal Kumar, Judicial Magistrate, Danapur, Patna 26th Bihar Judicial Service 29.11.2016
2. Sri Hare Ram, Judicial Magistrate, Masaurhi, Patna 26th Bihar Judicial Service 29.11.2016
3. Sri Vishal Kumar, Judicial Magistrate, Sheohar, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
4. Sri Santosh Kumar I, Judicial Magistrate, Munger, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
5. Sri Sunil Kumar Tripathi, Judicial Magistrate, Poopri, Sitamarhi 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
6. Sri Vikas Jha, Judicial Magistrate, Madhubani, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
7. Sri Dev Raj, Judicial Magistrate, Patna City, Patna, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
8. Sri Pankaj Kumar Lal, Judicial Magistrate, Nawadah, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
9. Sri Amit Kumar Tiwari, Judicial Magistrate, Benipatti, Madhubani 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
10. Sri Vimlendu Kumar, Judicial Magistrate, Nalanda at Biharsharif, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
11. Sri Rohit Kumar I, Posted as O.S.D., Bihar State Legal Services Authority, Patna 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
12. Sandeep Kumar, Judicial Magistrate, Danapur, Patna, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
13. Sri Tej Pratap Singh, Judicial Magistrate, Madhepura, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
14. Sri Tarun Kumar Jha, Judicial Magistrate, Naugachia, Bhagalpur, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
15. Sri Kuldip, Judicial Magistrate, Purnea, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
16. Sri Manish Kumar Upadhyay, Judicial Magistrate, Jehanabad, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
17. Sri Prakash Kumar Sinha, Judicial Magistrate, Saharsa, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
18. Sri Rishi Gupta, Judicial Magistrate, Areraj, East Champaran at Motihari, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
19. Sri Vipin Lavania, Judicial Magistrate, Muzaffarpur, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
20. Sri Kavindra Kumar, Judicial Magistrate, Dehri, Rohtas at Sasaram, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
21. Sri Manish Kumar Jaiswal, Judicial Magistrate, Vaisi, Purnea, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
22. Sri Rakesh Kumar Rakesh, Judicial Magistrate, Arwal, Jehanabad, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
23. Sri Arvind Kumar Singh, Judicial Magistrate, Dhamdaha, Purnea, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
24. Sri Raghubir Prasad, Judicial Magistrate, Begusarai, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
25. Sri Manas Kumar, Judicial Magistrate, West Champaran at Bettiah, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
26. Sri Kumar Krishna Deo, Judicial Magistrate, Supaul, 27th Bihar Judicial Service 29.11.2016
12 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 13 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

21 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 2017

सं0 388सं0 388सं0 388सं0 388 नि0नि0नि0नि0ः—निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित न्यायिक पदाधिकारियों (असैनिक न्यायाधीश, कनीय कोटि) को असैनिक न्यायाधीश (वरीय कोटि) के रूप में प्रोन्नत करते हुए उसी तालिका के स्तम्भ-3 में क्रमशः उनके नाम के सामने निर्देशित जजी एवं स्थान जहॉ पर वे साधारणतः अधिष्ठित रहेगे पर अवर न्यायाधीश सह अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी के रूप में स्थानान्तरित एवं नियुक्त किया जाता है।

पुनः दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 11 की उपधारा (3) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय, स्तंभ-2 में अंकित न्यायिक पदाधिकारियों को उनके पदस्थापन के जिला के क्षेत्राधिकारों के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक दण्डाधिकारी की शक्तियां प्रदान करता है, बशर्ते उनके द्वारा निष्पादित दिवानी तथा आपराधिक वादों की संख्या 30ः70 के अनुपात में हो।

क्रम क्रम क्रम क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान (जजी सहित) अ) नये स्थान का पदनाम ब) पदाधिकारी का साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी/स्थान जहाँ नियुक्त किये जाते हैं।
1 2 3
1. श्री राजेश प्रसाद गुप्ता अनुमण्डल न्यायिक दण्डाधिकारी, बेनीपुर (दरभंगा) (अ) अवर न्यायाधीश (ब) पटना (स) पटना
2. श्री दीपक सिंह वर्मा अनुमण्डल न्यायिक दण्डाधिकारी, मसौढ़ी (पटना) (अ) अवर न्यायाधीश (ब) भागलपुर (स) भागलपुर
क्रम क्रम क्रम क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान (जजी सहित) अ) नये स्थान का पदनाम ब) पदाधिकारी का साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी/स्थान जहाँ नियुक्त किये जाते हैं।
1 2 3
3. श्री राजीव कुमार मिश्रा अनुमण्डल न्यायिक दण्डाधिकारी, बिरौल (दरभंगा) (अ) अवर न्यायाधीश (ब) भभुआ (स) कैमूर
4. श्री सुनील दत्त अनुमण्डल न्यायिक दण्डाधिकारी, मंझौल (बेगूसराय) (अ) अवर न्यायाधीश (ब) गया (स) गया
5. श्री रामेश्वर मिश्रा अनुमण्डल न्यायिक दण्डाधिकारी, बेनीपट्‌टी (मधुबनी) (अ) अवर न्यायाधीश (ब) हाजीपुर (स) वैशाली
14 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

-------------------------------- The 21st September 2017.

No. 388A:—The Judicial officers of the cadre of Civil Judge (Junior Division), named in column no. 2 of the table given below, on promotion to the cadre of Civil Judge (Senior Division), are transferred and appointed to act as Sub Judge-cum- A.C.J.M. in the Judgeships to be stationed ordinarily at the station mentioned in column no. 3 of the table. Further in exercise of the powers conferred under Sub Section (3) of Section 11 of the Code of Criminal Procedure, 1973 (Act 2 of 1974) the High Court are pleased to confer upon the Judicial Officers named below, the powers of a Judicial Magistrate of the 1st Class for the concerned Districts, provided that they shall work in such a way that their disposal of Civil and Criminal matter must be in the ratio of 30:70.

Sl. No. Name of the officers, designation and present place of posting (with Judgeship) (a) Designation at the new station (b) Place where the officer is to be stationed at ordinarily (c) Name of the Judgeship/place in which appointed on promotion
1. 2. 3.
1. Sri Rajesh Prasad Gupta S.D.J.M., Benipur (Darbhanga) a) Sub Judge b) Patna c) Patna
2. Sri Deepak Singh Verma S.D.J.M., Masaurhi (Patna) a) Sub Judge b) Bhagalpur c) Bhagalpur
3. Sri Rajeev Kumar Mishra S.D.J.M., Biraul at Benipur (Darbhanga) a) Sub Judge b) Bhabhua c) Kaimur
4. Sri Sunil Datta S.D.J.M., Manjhaul (Begusarai) a) Sub Judge b) Gaya c) Gaya
5. Sri Rameshwar Mishra S.D.J.M., Benipatti (Madhubani) a) Sub Judge b) Hajipur c) Vaishali
15 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

21 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 2017

सं0 389सं0 389सं0 389सं0 389 नि0नि0नि0नि0ः—निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित न्यायिक पदाधिकारी (असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि) को उसी तालिका के स्तम्भ-3 में क्रमशः उनके नाम के सामने निर्देशित जजी एवं स्थान जहॉ पर वे अधिष्ठित रहेगे पर अवर न्यायाधीश सह अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी के रूप में स्थानान्तरित किया जाता है।

पुनः दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 11 की उपधारा (3) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय, स्तंभ-3 में अंकित अवर न्यायाधीश (असैनिक न्यायाधीश, वरीय कोटि) को उनके पदस्थापन के जिला के क्षेत्राधिकारों के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक दण्डाधिकारी की शक्तियां प्रदान करता है, बशर्ते उनके द्वारा निष्पादित दिवानी तथा आपराधिक वादों की संख्या 30ः70 के अनुपात में हो।

क्रम क्रम क्रम क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान (जजी सहित) अ) नये स्थान का पदनाम ब) पदाधिकारी का साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी/स्थान जहाँ नियुक्त किये जाते हैं।
1. श्री सुभाष चन्द द्विवेदी अवर न्यायाधीश, कहलगॉव, (भागलपुर) (अ) अवर न्यायाधीश (ब) किशनगंज (स) किशनगंज

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

--------------------------------

The 21st September 2017.

No. 389A:—The Judicial officers of the cadre of Civil Judge (Senior Division), named in column no. 2 of the table given below is transferred and posted as Sub Judge- cum-A.C.J.M. in the Judgeship to be stationed ordinarily at the station mentioned in column no. 3 of the table.

16 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

Further in exercise of the powers conferred under Sub Section (3) of Section (11) of the Code of Criminal Procedure, 1973 (Act 2 of 1974) the High Court are pleased to confer upon the Subordinate Judge named below, the powers of a Judicial Magistrate of the 1st Class for the concerned Districts, provided that he shall work in such a way that his disposal of Civil and Criminal matter must be in the ratio of 30:70.

Sl. No. Name of the officer, designation and present place of posting (with Judgeship) (a) Designation at the new station (b) Place where the officer is to be stationed at ordinarily (c) Name of the Judgeship/place in which appointed on promotion
1. 2. 3.
1. Sri Subhash Chand Dwivedi Sub Judge, Kahalgaon (Bhagalpur) a) Sub Judge b) Kishanganj c) Kishanganj

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

21 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 201721 सितम्बर 2017

सं0 392सं0 392सं0 392सं0 392 नि0नि0नि0नि0ः—श्री रविन्द्र पटवारी, निबंधक (प्रशासन), पटना उच्च न्यायालय, पटना को गया के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित एवं पदस्थापित किया जाता है।

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,

विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

--------------------------------

The 21st September 2017.

No. 392A:—Shri Ravindra Patwari, Registrar (Administration), Patna High Court, Patna is transferred and posted as District and Sessions Judge of Gaya.

By order of the High Court,

B.B. Pathak, Registrar General.

--------------------------------

23 सितम्बर 201723 सितम्बर 201723 सितम्बर 201723 सितम्बर 2017

सं0 394सं0 394सं0 394सं0 394 नि0नि0नि0नि0ः—निम्न तालिका के स्तम्भ-2 में उल्लिखित न्यायिक पदाधिकारी (असैनिक न्यायाधीश, कनीय कोटि) को उसी तालिका के स्तम्भ-3 में निर्देशित जजी एवं स्थान पर मुंसिफ एवं उच्च न्यायालय द्वारा दंडाधिकारी की आवश्यक शक्तियाँ प्रदान किये जाने पर न्यायिक दण्डाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

पदाधिकारी को आवश्यकतानुसार, बंगाल, आगरा एवं आसाम सिविल कोर्ट बिहार एमेंडमेंट ऐक्ट-2013 (ऐक्ट XIV, 2014) द्वारा संबोधित बंगाल, आगरा एवं आसाम सिविल कोर्टस ऐक्ट, 1887 (ऐक्ट XII, 1887) की धारा 19 की उपधारा (2) के अन्तर्गत उक्त तालिका के स्तम्भ-4 में यथानिर्देशित आर्थिक एवं प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर होने वाले मौलिक वादों की साधारण प्रक्रिया के अधीन निष्पादन की शक्तियाँ प्रदान की जाती है।17 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 सम्बन्धित पदाधिकारी को उसी स्तम्भ-4 में निर्देशित आर्थिक एवं प्रादेशिक क्षेत्राधिकारी के अन्दर लघुवाद न्यायालय द्वारा संज्ञेय वादों के निष्पादन के लिए ऐसे न्यायालय के न्यायाधीश की शक्तियाँ भी प्रदान की जाती है।

स्तम्भ-4 में दी गयी शक्तियों का प्रयोग तबतक नहीं किया जाय जबतक कि वे बिहार राज्य पत्र या जिला राज्यपत्र में अधिसूचित न हो जायें।

क्रम क्रम क्रम क्रम संख्या पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं पदाधिकारी का नाम, पदनाम एवं वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी वर्तमान वर्तमान पदस्थापन का स्थान जजी पदस्थापन का स्थान जजी सहित अ) नए स्थान का पदनाम ब) साधारणतः अधिष्ठित रहने का ब) साधारणतः अधिष्ठित रहने का स्थान स) जजी जहॉ नियुक्त किए गये स) जजी जहॉ नियुक्त किए गये हैंहैंहैंहैं नये स्थान पर अधिकारियों को प्रदान नये स्थान पर अधिकारियों को प्रदान की गयी विशेष शक्तियाँ अ) बंगाल, आगरा एण्ड आसाम अ) बंगाल, आगरा एण्ड आसाम सिविल कोर्ट ऐक्ट के अंतर्गत सिविल कोर्ट ऐक्ट के अंतर्गत सिविल कोर्ट ऐक्ट के अंतर्गत सिविल कोर्ट ऐक्ट के अंतर्गत (साधारन प्रक्रिया) ब) ब) ब) ब) प्रोविन्सिीयल स्मॉल कोजेज कोर्टस प्रोविन्सिीयल स्मॉल कोजेज कोर्टस ऐक्ट 1987 के अंतर्गत
1 2 3 4
2. श्री राकेश कुमार पाण्डेय, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, अररिया (अररिया)। अ) मु सिफ (असैनिक न्यायाधीश, ं कनीय कोटि) ब) अररिया स) अररिया अ) अररिया मु सिफी की ं स्थानीय सीमाओं के अंतर्गत 150000 रूपये तक ब) अररिया मुंसिफी की स्थानीय सीमाओं के अंतर्गत 1000 रूपये तक लघुवाद की शक्तियाँ

उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से,उच्च न्यायालय के आदेश से, विधु भूषण पाठक, महानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधकमहानिबंधक।।।।

--------------------------------

The 23rd September 2017.

No. 394A:—The Judicial Officer of the rank of Civil Judge (Junior Division) named in column no. 2 of the table given below is appointed as Munsif (Civil Judge, Jr. Div.) in the judgeship and station mentioned in the column no. 3.

As mentioned in column no. 4, the officer is also vested with the powers under Sub-section (2) of Section-19 of the Bengal, Agra and Assam Civil Courts Acts, 1887, (act XII of 1887) as amended by the Bengal, Agra and Assam Civil Courts Bihar Amendment Act, 2013 (Act 14 of 2014) to try under ordinary procedure original suits of Pecuniary and Territorial Jurisdiction.

As further mentioned in column no. 4, the officer is also vested with powers of the Court of small causes for the trial of suits cognizable by such a Court with the necessary Pecuniary and Territorial Jurisdiction.

18 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

The powers vested as per column no. 4, should not, however, be exercised by the officer concerned unless it is published in the Bihar Gazette or in the District Gazette.

Sl. No. Name of the Officer with designation and present place of posting with judgeship a) Designation at the new station. b) Place where the officer is to be stationed at ordinarily. c) Name of the Judgeship in which appointed on transfer. Special Power with which the Officer is vested at the new station a) Under the Bengal, Agra and Assam Civil Court Acts (under ordinary procedure). b) Under the provincial small causes Courts Act,1987
1 2 3 4
1 Sri Rakesh Kumar Pandey, J.M. 1st Class, Araria (Araria) a) Munsif (Civil Judge, Jr. Div.) b) Araria c) Araria a) Rs.1,50,000/- within the local limits of Araria Munsifi. b) S.C.C. Powers of Rs. 1000/- within the local limits of Araria Munsifi.

By order of the High Court, B.B. Pathak, Registrar General.

———

अधीKकअधीKकअधीKकअधीKक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 33335555ÑÑÑÑ571+11110----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in19 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 (cid:18)बहार गजट का पूरक(अ0) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत

ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

सं0 कारा/08 (प्रशि0)-15/2017—5206

कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालयकारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालयकारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालयकारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह गृह गृह गृह विभाग (कारा)विभाग (कारा)विभाग (कारा)विभाग (कारा) ------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 13 सितम्बर 201713 सितम्बर 201713 सितम्बर 201713 सितम्बर 2017

ाासनिक संस्थान, हाजीपुर के सुचारू संचालन हेतु Bihar Institute of Correctional विषयः-बिहार सुधारात्मक प्रश्बिहार सुधारात्मक प्रश्बिहार सुधारात्मक प्रश्बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान, हाजीपुर के सुचारू संचालन हेतु ाासनिक संस्थान, हाजीपुर के सुचारू संचालन हेतु ाासनिक संस्थान, हाजीपुर के सुचारू संचालन हेतु Administration Society के गठन एवं इसके के गठन एवं इसके के गठन एवं इसके के गठन एवं इसके Bye Laws एवं एवं एवं एवं Memorandum of Association की की की की स्वीकृति के संबंध में।स्वीकृति के संबंध में।स्वीकृति के संबंध में।स्वीकृति के संबंध में। बिहार राज्य के काराओं में पदस्थापित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को उच्च कोटि की व्यवाहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु वैशाली जिला अन्तर्गत मंडल कारा, हाजीपुर के परिसर में बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान (BICA), हाजीपुर का निमार्ण कार्य बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम द्वारा कराया गया है।

2. विभागीय पत्रांक-4720 दिनांक 05.05.2008 बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान (BICA), हाजीपुर के संस्थान, कार्यालय एवं हॉस्टल के संचालन हेतु विभिन्न पदाधिकारियों एवं कर्मियों का कुल 33 पद यथा निदेशक, उप निदेशक, व्याख्याता, वरीय अनुदेशक, कनीय अनुदेशक, अनुसेवक, माली, सफाई कर्मी, प्रषासी पदाधिकारी, लेखा पदाधिकारी, लेखापाल, लिपिक, कम्प्यूटर ऑपरेटर, केयर टेकर, रसोईया, सहायक रसोईया आदि पदों का सृजन किया गया है।

3. सम्यक विचारोपरान्त बिहार सुधारात्मक प्रषासनिक संस्थान (BICA), हाजीपुर के सफल संचालन हेतु Societies Registration Act के अंतर्गत Bihar Institute of Correctional Administration Society के गठन का निर्णय एवं इसके सुचारू संचालन हेतु Bye Laws एवं Memorandum of Association पर स्वी—ति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राजीव वर्मा, राजीव वर्मा, राजीव वर्मा, राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (प्रशासन)संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (प्रशासन)संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (प्रशासन)संयुक्त सचिव-सह-निदेशक (प्रशासन)।।।।

------------------------ सं0 सं0 सं0 सं0 08/आरोप-01-120/2015,सा॰08/आरोप-01-120/2015,सा॰08/आरोप-01-120/2015,सा॰08/आरोप-01-120/2015,सा॰प्र॰प्र॰प्र॰प्र॰—9534953495349534 सामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभागसामान्य प्रशासन विभाग ------- संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 26 जुलाई 201726 जुलाई 201726 जुलाई 201726 जुलाई 2017

श्री नरेन्द्र नाथ, बि॰प्र॰से॰ (कोटि क्रमांक-766/11) के विरूद्ध कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, जहानाबाद के पदस्थापन काल (वर्ष-2014-15) में उपकरणों के क्रय में अनियमितता एवं मुख्यालय से अनुपस्थित रहने इत्यादि के आरोपों पर कार्रवाई हेतु नगर विकास एवं आवास विभाग का प्रस्ताव (पत्रांक-5824 दिनांक 27.11.2015) प्राप्त हुआ। जिसके आलोक में विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए20 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 पत्रांक-6090 दिनांक 29.04.2016 द्वारा श्री नाथ से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने के कारण दिनांक 11.05.2017 को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एतद्‌संबंधी विभागीय आदेश के अनुपालन का निदेश दिया गया। इसके बावजूद स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा। इस प्रकार श्री नाथ द्वारा उच्चाधिकारियों/सरकार के आदेश की अवहेलना की गयी। नगर विकास एवं आवास विभाग के अधिसूचना सं॰-2088 दिनांक 14.04.2015 द्वारा श्री नाथ की सेवाएँ सामान्य प्रशासन विभाग को वापस की गयी। इस क्रम में उन्होंने दिनांक 05.05.2015 को धारित पद (कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌ जहानाबाद) का प्रभार सौंप दिया परन्तु सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान नहीं किया। सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना सं॰-11747 दिनांक 12.08.2015 द्वारा श्री नाथ को वरीय उप समाहर्त्ता, सीतामढ़ी के पद पर पदस्थापित किया गया परन्तु उन्होंने अधिसूचित पद पर योगदान नहीं किया। इस प्रकार वे बिना किसी सूचना के दो वर्षो से अनुपस्थिति है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9 (1) (क) में निहित प्रावधानों के तहत श्री नाथ को आदेश निर्गत होने की तिथि से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है। 2222.... निलंबन अवधि में श्री नाथ का मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया निर्धारित किया जाता है। 3333.... निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशआदेशआदेशआदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन राय, , , , अवर सचिव।

---------------------------- सं0 सं0 सं0 सं0 08/08/08/08/नि0था0-11-20नि0था0-11-20नि0था0-11-20नि0था0-11-20/2014 सा॰प्र॰/2014 सा॰प्र॰/2014 सा॰प्र॰/2014 सा॰प्र॰—9072907290729072 ------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 24242424 जुलाई 2017जुलाई 2017जुलाई 2017जुलाई 2017

श्री राजमंगल राम, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-504/11 को जिला परिवहन पदाधिकारी, मोतिहारी के पदस्थापन काल में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के धावा दल द्वारा दिनांक 14.09.2006 को परिवादी श्री हरेन्द्र सिंह से 20,000/-(बीस हजार) रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। श्री राम के विरूद्ध निगरानी थाना कांड सं॰-052/2006 दिनांक 13.09.2006 दर्ज हुआ। जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के पत्रांक-2261/गो॰ दिनांक 17.09.2006 द्वारा उक्त सूचना प्राप्त हुई। विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11433 दिनांक 11.11.2006 द्वारा श्री राम को हिरासत की तिथि (दिनांक 14.09.2006) के प्रभाव से निलंबित किया गया। उक्त कृत्य में निहित आरोपों के लिए श्री राम के विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई हेतु विभागीय स्तर पर आरोप, प्रपत्र 'क' गठित करते हुए स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इस क्रम में श्री राम का स्पष्टीकरण (दिनांक 03.05.2008) प्राप्त हुआ, जिसमें उन्होंने अपना बचाव प्रस्तुत किया। सम्यक्‌ विचारोपरांत मामले के वृहद जाँच की आवश्यकता पायी गयी तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) के आलोक में संकल्प ज्ञापांक-6639 दिनांक 10.07.2009 द्वारा श्री राम के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को इस हेतु संचालन पदाधिकारी नियुक्ति किया गया। 2222.... कालान्तर में संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें विश्लेषणात्मक स्थिति प्रस्तुत करते हुए श्री राम के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित दर्शाया गया। विभागीय पत्रांक-933 दिनांक 25.01.2017 द्वारा उक्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री राम से लिखित अभिकथन की मांग की गयी। इस हेतु पत्रांक-1800 दिनांक 15. 02.2017 द्वारा स्मारित भी किया गया। तत्पश्चात श्री राम ने अपना लिखित अभिकथन (दिनांक 23.02.2017) समर्पित किया, जिसमें आरोपों का प्रतिकार करते हुए स्पष्ट किया किया कि उन्होंने ट्रक सं॰-UP 78 H-2699 जब्त नहीं किया था और न श्री हरेन्द्र सिंह उसके मालिक थे। स्पष्टीकरण में आगे उल्लेख किया गया कि उन्होंने ट्रक सं॰-UP 78 N-2699 जब्त करते हुए ओवर लोडिंग एवं अन्य त्रुटियों के लिए अर्थ दंड लगाया था। इस क्रम में उनके द्वारा रिश्वत की माँग नहीं की गई थी। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के धावा दल ने अकारण उन्हें गिरफ्तार किया।

3333.... आरोप, प्रपत्र-'क', संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं श्री राम से प्राप्त लिखित अभिकथन की समीक्षा के उपरांत यह पाया गया कि श्री राम द्वारा जब्त किये गये ट्रक के नम्बर में भिन्नता का तथ्य मात्र टंकण भूल थी। यथा आरोप पत्र में UP 78 N के स्थान पर UP 78 H अंकित हो गया परन्तु इससे जाँच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। आरोपित पदाधिकारी ने वाहन मुक्ति आदेश बुक में प्रविष्टि करने संबंधी साक्ष्य के आधार पर रिश्वत माँगने के आरोपों का प्रतिकार किया है। जबकि इसके पूर्व उनके द्वारा जुर्माना की राशि का रसीद निर्गत करने संबंधी कार्रवाई नहीं की गयी। जिससे रिश्वत माँगने एवं लेने की घटना/औचित्य की पुष्टि होती है। इसके साथ ही गिरफ्तार किये जाने के बाद रूपये की21 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 बरामदगी एवं उनके हाथ में लगे रसायन के धोवन की पुष्टि गवाहों द्वारा किये जाने से भी रिश्वत लेने का आरोप प्रमाणित हुआ है। इस संबंध में श्री राम द्वारा कोई तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया।

बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम-3 में प्रावधान है कि हर सरकारी सेवक सदा :- (i) पूरी शील निष्ठा रखेगा। (ii) कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा रखेगा। (iii) ऐसा कोई काम नहीं करेगा जो सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय है। इसके साथ ही नियम-14 में प्रावधान है कि कोई भी सरकारी सेवक प्रीतिदान या आर्थिक लाभ स्वीकार नहीं करेगा।

वस्तुतः श्री राम को जिला परिवहन पदाधिकारी के रूप में अपने विहित दायित्व का निर्वहन करना था। परन्तु उनके द्वारा नियमानुकूल कार्य नहीं किया गया एवं जब्त ट्रक को मुक्त करने हेतु रिश्वत ली गयी जो विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित हुआ। पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पत्रांक-2290 दिनांक 12.12.2014 द्वारा उनके विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड सं॰-52/2006 दिनांक 13.09.2006 में एतद्‌संबंधी आरोप सत्य पाये गये एवं इसके आलोक में विशेष न्यायालय, निगरानी, मुजफ्फरपुर के न्यायालय में आरोप पत्र सं॰-72/2006 दिनांक 11.11.2006 समर्पित हुआ। विधि विभाग के आदेश सं॰-4201 दिनांक 11.11.2006 द्वारा उक्त कांड में अभियोजन स्वी—त्यादेश निर्गत हो चुका है। इस प्रकार श्री राम के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित पाये गये।

4444.... सम्यक्‌ विचारोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री राम के विरूद्ध ''सेवा ''सेवा ''सेवा ''सेवा से बर्खास्तगी का दंड''से बर्खास्तगी का दंड''से बर्खास्तगी का दंड''से बर्खास्तगी का दंड'' विनिश्चित किया गया। विभागीय पत्रांक-5060 दिनांक 27.04.2017 द्वारा उक्त दंड के प्रस्ताव में बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की माँग की गयी। इस क्रम में आयोग की पूर्णपीठ द्वारा उक्त दंड प्रस्ताव में सहमति प्रदान की गयी, जो बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-677 दिनांक 28.06.2017 द्वारा प्राप्त हुआ।

''सेवा से बर्खास्तगी (जो (जो (जो (जो 5555.... बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति प्राप्ति के उपरांत श्री राजमंगल राम, बि॰प्र॰से॰ के ''सेवा से बर्खास्तगी ''सेवा से बर्खास्तगी ''सेवा से बर्खास्तगी सामान्यतः सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' संबंधी संलेख/प्रस्ताव (विभागीय ज्ञापांक-8738 सामान्यतः सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' सामान्यतः सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' सामान्यतः सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' दिनांक 17.07.2017) राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की स्वी—ति हेतु मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग को भेजा गया। राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की दिनांक 18.07.2017 को सम्पन्न बैठक में उक्त दंड प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की गयी।

6.... अतएव वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के ''सेवा से बर्खास्तगी (जो सामान्यतः सरकार के नियम-14 के तहत श्री राजमंगल राम, बि0प्र0से0, को0क्र0-504/11 को ''सेवा से बर्खास्तगी (जो सामान्यतः सरकार के ''सेवा से बर्खास्तगी (जो सामान्यतः सरकार के ''सेवा से बर्खास्तगी (जो सामान्यतः सरकार के भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' का दंड संसूचित किया जाता है। अधीनअधीनअधीनअधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' का दंड भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' का दंड भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी)'' का दंड 7.... श्री राम के निलंबन अवधि के संबंध में अलग से कार्रवाई की जायेगी।

ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र

प्रति सभी प्रति सभी प्रति सभी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।संबंधित को भेज दी जाय।संबंधित को भेज दी जाय।संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन राय, , , , अवर सचिव।

---------------------------- सं0 सं0 सं0 सं0 08/आरोप-01-27/2016 08/आरोप-01-27/2016 08/आरोप-01-27/2016 08/आरोप-01-27/2016 सा॰प्र॰सा॰प्र॰सा॰प्र॰सा॰प्र॰—9532953295329532 ------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 26 जुलाई 201726 जुलाई 201726 जुलाई 201726 जुलाई 2017

चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री उदय कान्त झा, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-273/11 (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना के पदस्थापन काल में विभागीय कार्यवाही (सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प ज्ञापांक-2773 दिनांक 26.02.2014 द्वारा संस्थित) के संचालन पदाधिकारी के रूप में दायित्व निर्वहन में लापरवाही बरतने संबंधी आरोप उजागर हुए है। (यथा अनुलग्नक आरोप, प्रपत्र 'क' में वर्णित)। 2222.... राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के परिपत्रों एवं बी॰टी॰ एक्ट-1973 के प्रावधानों के प्रतिकूल भूमि लगान निर्धारण में अनियमितता एवं कदाचार के आरोपों की जाँच हेतु श्री विजय कुमार, तत्कालीन अंचलाधिकारी, नगर अंचल, गया के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के रूप में श्री झा ने आरोपों की सांगोपांग जाँच नहीं की तथा मामले को गम्भीरता से नहीं लिया। वस्तुतः जिला स्तर पर की गयी जाँच से उद्‌भूत उक्त गम्भीर अनियमितता (गठित आरोपों) की समुचित जाँच किये बिना आरोपित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए श्री झा ने आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया। संचालन पदाधिकारी के रूप में उक्त लापरवाही एवं अनियमितता बरतने संबंधी —त्य के लिए विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-11283 दिनांक 19.08.2016 द्वारा श्री झा से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इस क्रम में प्राप्त स्पष्टीकरण (दिनांक 16.09.2016) में श्री झा ने आरोपों पर अपना बचाव प्रस्तुत किया जिसकी समीक्षा के उपरांत मामले के वृहद जाँच की आवश्यकता पायी गयी।22 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 3333.... अतएव यह निर्णय लिया गया है कि श्री उदय कान्त झा के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की वृहद जाँच, बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43 (बी॰) के तहत करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटनाआयुक्त, पटना प्रमंडल, पटनाआयुक्त, पटना प्रमंडल, पटनाआयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, बि॰प्र॰से॰, आरोप प्रशाखा-8 के कनीय प्रभारी श्री राम बिशुन राय, अवर सचिव होंगे। 4444.... श्री झा से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे। ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित कियप्रकाशित कियप्रकाशित कियप्रकाशित किया जाय तथा इसकी ा जाय तथा इसकी ा जाय तथा इसकी ा जाय तथा इसकी ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशआदेशआदेशआदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन राय, , , , अवर सचिव।

---------------------------- सं0 सं0 सं0 सं0 08/आरोप-01-120/2015 08/आरोप-01-120/2015 08/आरोप-01-120/2015 08/आरोप-01-120/2015 सा॰प्र॰सा॰प्र॰सा॰प्र॰सा॰प्र॰—9590959095909590 ------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 27 जुलाई 201727 जुलाई 201727 जुलाई 201727 जुलाई 2017

चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री नरेन्द्र नाथ, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-766/11 के विरूद्ध कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, जहानाबाद के पदस्थापन काल (वर्ष-2014-15) में उपकरणों के क्रय में अनियमितता एवं मुख्यालय से अनुपस्थित रहने इत्यादि का आरोप नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्रांक-5824 दिनांक 27.11.2015 द्वारा प्रतिवेदित है, जो गम्भीर प्र—ति के प्रतीत होते है। 2222.... नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के आलोक में विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-6090 दिनांक 29.04. 2016 द्वारा श्री नाथ से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। वस्तुतः कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, जहानाबाद के पद से स्थानांतरण के पश्चात्‌ वरीय उप समाहर्त्ता, सीतामढ़ी के अधिसूचित पद पर योगदान नहीं करने की स्थिति में श्री नाथ को उनके स्थायी पता पर स्पष्टीकरण संबंधी पत्र भेजा गया था। निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने के कारण दिनांक 11.05.2017 को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एतद्‌संबंधी विभागीय आदेश के अनुपालन का निदेश दिया गया। इसके बावजूद आरोपित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा, जिससे मामले की अग्रेत्तर जाँच अवरूद्ध रही। 3333.... अतएव यह निर्णय लिया जाता है कि श्री नरेन्द्र नाथ, बि॰प्र॰से॰ (सम्प्रति निलंबित) के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के तहत करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया एवं उपस्थापन/ प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा नामित पदाधिकारी होंगे। 4444.... श्री नाथ से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे। ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशआदेशआदेशआदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन राय, , , , अवर सचिव।

---------------------------- सं0 सं0 सं0 सं0 08/आरोप-01-42/2016 सा॰-9780 08/आरोप-01-42/2016 सा॰-9780 08/आरोप-01-42/2016 सा॰-9780 08/आरोप-01-42/2016 सा॰-9780 ------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 1 अगस्त 20171 अगस्त 20171 अगस्त 20171 अगस्त 2017

चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री नरेन्द्र नाथ, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-766/11 (सम्प्रति अन्य आरोपों के लिए निलंबित एवं मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, मगध प्रमंडल, गया) के विरूद्ध वरीय उप समाहर्त्ता, सीतामढ़ी के अधिसूचित पद (सामान्य प्रशासन विभाग का अधिसूचना सं॰-11747 दिनांक 12.08.2015) पर योगदान नहीं करने का आरोप है। (यथा अनु॰ आरोप, प्रपत्र 'क' में अन्तर्विष्ट आरोप) 2222.... सरकार के आदेश की अवहेलना के लिए विभागीय स्तर पर गठित एवं अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए पत्रांक-16006 दिनांक 01.12.2016 द्वारा श्री नाथ से स्पष्टीकरण की माँग की गयी। वस्तुतः कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद्‌, जहानाबाद के पद से स्थानांतरण के पश्चात्‌ वरीय उप समाहर्त्ता, सीतामढ़ी के अधिसूचित पद पर योगदान नहीं करने की स्थिति में श्री नाथ को उनके स्थायी पता पर स्पष्टीकरण संबंधी पत्र भेजा गया था। निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने के कारण दिनांक 11.05.2017 को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एतद्‌संबंधी विभागीय आदेश के अनुपालन का निदेश दिया गया। इसके बावजूद आरोपित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण अप्राप्त रहा, जिससे मामले की अग्रेत्तर जाँच अवरूद्ध रही।23 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 3333.... अतएव यह निर्णय लिया गया है कि श्री नरेन्द्र नाथ के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के तहत करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, आयुक्त, पटना पआयुक्त, पटना पआयुक्त, पटना पआयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना ्रमंडल, पटना ्रमंडल, पटना ्रमंडल, पटना एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मनोनित अवर सचिव से अन्यून स्तर के पदाधिकारी होंगे। संचालन पदाधिकारी से यह अपेक्षा है कि वे 04 (चार) माह के अन्दर जाँच कार्य पूर्ण करेगेंं। 4444.... श्री नाथ से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे। ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशआदेशआदेशआदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन राय, , , , अवर सचिव।

---------------------------- 08/आरोप-01-60/2016,सा॰प्र॰-11699 सं0 सं0 सं0 सं0 08/आरोप-01-60/2016,सा॰प्र॰-11699 08/आरोप-01-60/2016,सा॰प्र॰-11699 08/आरोप-01-60/2016,सा॰प्र॰-11699 ------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 11 सितम्बर 201711 सितम्बर 201711 सितम्बर 201711 सितम्बर 2017

श्री उपेन्द्र झा, बि॰प्र॰से॰, को॰ क्र॰-265/08 (सेवानिवृत्त) के विरूद्ध विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, सोन योजना, औरंगाबाद के पदस्थापन काल में —षि भूमि को आवासीय भूमि में परिवर्तित करने संबंधी प्रतिवेदित आरोपों की जाँच हेतु संकल्प ज्ञापांक-5103 दिनांक 02.06.09 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री झा के दिनांक 31.07.11 को सेवानिवृत्त हो जाने के फलस्वरूप संकल्प ज्ञापांक-4966 दिनांक 03.04.12 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली-1950 के नियम-43 (बी॰) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपित पदाधिकारी के लिखित अभिकथन की समीक्षा के उपरांत आरोपों की प्रमाणिकता के आधार पर संकल्प ज्ञापांक-3919 दिनांक 07.03.13 द्वारा श्री झा के पेंशन से 5 प्रतिशत कटौती (10 वर्षो तक) का निर्णय संसूचित किया गया। श्री झा ने इस क्रम में अपना पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया, जिसे विचारोपरांत संकल्प ज्ञापांक-11536 दिनांक 12.07. 13 द्वारा अस्वी—त कर दिया गया। श्री झा ने पेंशन कटौती आदेश के विरूद्ध पटना उच्च न्यायालय में रीट याचिका दायर किया। एतद्‌संबंधी सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰सं॰-3013/16 में दिनांक 26.10.16 को न्यायादेश का कार्यकारी अंश निम्नवत है :- "For the reasons aforementioned, the impugned order bearing Memo No. 3919 dated 07- 03-2013 impugned at Annexure-15 and the order bearing Memo No.11536 dated 12-07-2013 present at Annexure 'L' to the counter affidavit are quashed and set aside. In consequence the amount recovered from the pension of the petitioner, should be refunded with in three months from the date of receipt/production of a copy of this order. The writ petition is allowed. " उक्त न्यायादेश के आलोक में श्री झा ने पेंशन कटौती संबंधी आदेश वापस लेने हेतु एक अभ्यावेदन (दिनांक 01.12. 16) विभाग में समर्पित किया। विभागीय स्तर से न्यायादेश के विरूद्ध एल॰पी॰ए॰ दायर करने हेतु विधि विभाग से परामर्श प्रदान करने का अनुरोध किया गया। इस क्रम में महाधिवक्ता, बिहार द्वारा निम्न मंतव्य दिया गया :- "In View of the fact as well as the legal propositios stated above I am of the considered poinion that preferring a Letters Patent Appeal against the order dated 26-10-2016 passed by learned single judge shall be a futile exercise and will impose unnecessary financial burden on the state exchequer. Opinion is recorded accordingly and the record is remitted back. " इस प्रकार एल॰पी॰ए॰ दायर नहीं हो सकने की स्थिति में रीट याचिका में पारित आदेश का अनुपालन अपरिहार्य हो गया। अतएव सम्यक्‌ विचारोपरांत सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-3013/16 में पारित न्यायादेश (दिनांक 26.10.2016) के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3919 दिनांक 07.03.2013 (श्री झा के पेंशन से 5 प्रतिशत कटौती (10 वर्षो तक) संबंधी आदेश) एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11536 दिनांक 12.07.2013 (श्री झा के पुनर्विलोकन आवेदन को अस्वी—त करने संबंधी आदेश) वापस लिया जाता है। ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन रायराम बिशुन राय, , , , अवर सचिव।24 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 सं0 सं0 सं0 सं0 08/अभि॰-03-20/2014,08/अभि॰-03-20/2014,08/अभि॰-03-20/2014,08/अभि॰-03-20/2014,सा॰प्र॰-13155सा॰प्र॰-13155सा॰प्र॰-13155सा॰प्र॰-13155

------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 11113 अक्तूबर3 अक्तूबर3 अक्तूबर3 अक्तूबर 2017201720172017

श्री राजेश कुमार गुप्ता, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-874/11) के विरूद्ध प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिहारीगंज के पदस्थापन काल में बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों की क्षतिपूर्त्ति राशि के भुगतान में रिश्वत लेने संबंधी आरोपों के लिए बिहारीगंज थाना कांड सं॰-39/09 दिनांक 07.04.2009 दर्ज हुआ। विधि विभाग के आदेश सं॰-116 दिनांक 09.04.2014 द्वारा श्री गुप्ता के विरूद्ध अभियोजन की स्वी—ति प्रदान की गयी। उक्त —त्य में निहित आरोपों के लिए विभागीय स्तर से अनुशासनिक कार्रवाई के निमित जिला पदाधिकारी, मधेपुरा से आरोप, प्रपत्र 'क' की माँग की गयी। इस क्रम में जिला पदाधिकारी, मधेपुरा के पत्रांक-21-2/स्था॰, दिनांक 08.01.2016 द्वारा आरोप, प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ। जिसमें रिश्वत लेने के आरोपों के साथ ही भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) के पदस्थापन काल में श्री गुप्ता द्वारा भूमि विवाद निराकरण अधिनियम के तहत वाद सं॰-62/2013-14 में गलत आदेश पारित करने का आरोप गठित/प्रतिवेदित करते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की गयी। उक्त आरोप, प्रपत्र 'क' की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-2610 दिनांक 19.02.2016 द्वारा श्री गुप्ता से स्पष्टीकरण माँगी गयी। जिसके अनुपालन में स्पष्टीकरण (दिनांक 23.12.2016) प्राप्त हुआ। तदुपरांत श्री गुप्ता के स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, मधेपुरा से मंतव्य की माँग की गयी। इस क्रम में जिला पदाधिकारी, मधेपुरा का पत्रांक-316-2/स्था॰ दिनांक 13.05.2017 प्राप्त हुआ जिसमें अधिकांश आरोपों के परिपेक्ष्य में श्री गुप्ता के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं बताया गया। वर्णित स्थिति में सम्यक्‌ विचारोपरांत आरोपों के वृहद जाँच की आवश्यकता पायी गयी। अतएव यह निर्णय लिया जाता है कि श्री राजेश कुमार गुप्ता, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-874/11) के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की वृहद जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 (2) के तहत करायी जाय। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा आयुक्त, कोशी प्रमंडल, सहरसा एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, मधेपुरा द्वारा मनोनित पदाधिकारी होंगे। श्री गुप्ता से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हाेंगे। ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रकाशित किया जाय तथा इसकी ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में आदेशआदेशआदेशआदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ति बिहार राजपत्र के अगले अंक में ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र ः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्र

प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम राम राम राम बिशुन रायबिशुन रायबिशुन रायबिशुन राय, , , , अवर सचिव।

---------------------------- जल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभाग ---------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाएंएंएंएं 6 जुलाई 20176 जुलाई 20176 जुलाई 20176 जुलाई 2017

22/नि0सि0(पट0)-03-09/2017/1099—श्री राजीव नन्दन मौर्य, सहायक अभियंता, (आई0डी0-3498) सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-09/2017 22/नि0सि0(पट0)-03-09/2017 22/नि0सि0(पट0)-03-09/2017

प्रभारी कार्यपालक अभियंता, गुण नियंत्रण प्रमंडल, जल संसाधन विभाग, पटना द्वारा अपनी नियमित प्रोन्नति को रद्द किये जाने के मामले को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में नये तथ्यों के साथ जिसमें अपने आप को बिहार राज्य में जन्म एवं लालन-पालन के आधार पर बिहार राज्य के आरक्षित श्रेणी घोषित किये जाने के संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं पटना उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निदेश के आलोक में श्री मौर्य के जन्म, निवास एवं जाति प्रमाण-पत्र को सक्षम प्राधिकार द्वारा जाँचोपरांत इन सभी प्रमाण पत्रों को फर्जी पाया गया तथा इन प्रमाण पत्रों को रद्द करते हुए श्री मौर्य के विरूद्ध भ॰वि॰द॰ की धारा-420/467/468/471 के तहत गाँधी मैदान, थाना-पटना में प्राथमिकी संख्या-266/2017 दर्ज की गई है। 2. श्री मौर्य द्वारा पदीय गरिमा को धूमिल करते हुए सरकारी कार्यालयो को धोखे में रख कर स्वयं के शपथ-पत्र के आधार पर बिहार राज्य से जन्म प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र एवं स्थाई आवासीय प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तथा इन फर्जी प्रमाण पत्रों को माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष शपथ पत्र के माध्यम से साक्ष्य के रूप में दायर किये जाने के साजिशपूर्ण एवं धोखाधड़ी के कृत के चलते प्राथमिकी दर्ज होने एवं उसके अन्वेषनाधीन रहने के कारण श्री मौर्य को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9 (1)(ग) के प्रावधान के तहत अगले आदेश तक निलंबित किया जाता है।25 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 3. निलंबन अवधि में श्री मौर्य का मुख्यालय मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. निलंबन अवधि में श्री मौर्य को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के तहत जीवन निर्वाह भाा अनुमान्य होगा।

5. श्री मौर्य के उपर्युक्त कृत्य के लिये इनके विरूद्ध अलग से आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु संकल्प निर्गत किया जा रहा है।

यह आदेश तात्कालिक प्रभाव से लागु होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

19 जुलाई 201719 जुलाई 201719 जुलाई 201719 जुलाई 2017

सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-16/2007/1175—मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन मधेपुरा जिला के जल निस्सरण प्रमण्डल सहरसा अन्तर्गत मुसहरिया जल निस्सरण योजना में कराये गये कार्यों की स्थलीय जाँच कार्यपालक अभियंता योजना एवं मोनेटरिंग प्रमण्डल सं०-8 द्वारा की गयी। मो0 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी, समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोप श्री सुजीत कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, सहरसा के विरूद्ध गठित किये गयेः-

(1) मुसहरिया जल निस्सरण योजना अन्तर्गत नाला के प्रारंभ से वि0दू0 0.00 से वि0दू0 3.00 तक मात्र 2000 फीट कार्य कराकर कार्य का भुगतान वि0दू0 0.00 से वि0दू0 5.50 तक किया गया। (2) मिट्‌टी कार्य का भुगतान ग्राफीय गणना के बजाय गणितीय गणना के अनुसार की गयी। (3) योजनान्तर्गत वि0दू0 7.00 एवं 13.20 पर दो अद्‌द पुल हेतु प्रशासनिक स्वीकृति के तहत 6.50 लाख रूपये प्रावधानिक कार्य मद में अनावश्यक एवं अत्यधिक बढ़ोतरी कर रू0(18.281.04) लाख का प्राक्कलन स्वीकृत कर कार्य कराया गया, जिसकी वर्णित स्थल बिन्दुओं पर उतनी उपयोगिता नहीं थी। उपरोक्त आरोपों के लिए श्री सुजीत कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, सहरसा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करते हुए पत्रांक 1079, दिनांक 13.10.2009 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' के साथ स्पष्टीकरण किया गया। उक्त विभागीय स्पष्टीकरणके आलोक में श्री सुजीत कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा प्रतिउत्तर समर्पित किया गया। श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी। समीक्षा में आरोप संख्या-1 के संदर्भ में पाया गया कि वर्ष 2004 में योजना के मिट्‌टी एवं पुल निर्माण का कार्य साथ-साथ प्रारंभ हुआ तथा वि0दू0 0.00 से 5.50 तक नाला के मिट्‌टी कार्य कराया गया। वर्ष 2005 में कार्य पुनः प्रारंभ करने पर भू-मुआवजा भुगतान के आधार पर ग्रामीणों द्वारा कार्य रोक दिया गया। भू-मुआवजा भुगतान प्राप्त करने के समय कब्रिस्तान का बहाना बनाकर भुगतान प्राप्त नहीं किया गया एवं कार्य को रोक दिया गया तथा खुदाई की गई मिट्‌टी से नाला को भरना आरंभ कर दिया गया। साथ ही कहना है कि संवदेक को निदेश दिये जाने के बावजूद मार्च 2007 तक ग्रामीणों द्वारा भरा गया नाला की उड़ाही नहीं किये जाने के कारण अंतिम मापी में उपलब्ध कार्य का ही विपत्र तैयार किया गया जिससे ग्रामीणों द्वारा भर दिये गये नाले के विरूद्ध किया गया भुगतान की वसूली स्वतः हो जाती है। इस प्रकार भुगतान में कोई अनियमितता नहीं किये जाने को अंकित किया गया।

इस प्रकार यह ज्ञात होता है कि वि0दू0 0.00 से 5.50 तक नाला खुदाई के लिए भुगतान किया गया है। दिनांक 27.06.2007 को स्थलीय जाँच के दौरान वि0दू0 7.00 पर दोनों तरफ तथाकथित कब्रों के अवशेष के बीच उपलब्ध नाला स्थल को मिट्‌टी से भरकर समतल किये जाते हुए पाये जाने को जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है।

स्थलीय जाँच प्रतिवेदन में वि0दू0 0.00 से 3.00 के बीच मात्र 2000'-0" में कार्य होने को उल्लेखित किया गया है। कार्यपालक अभियंता, सहरसा के पत्रांक-103, दिनांक 06.02.2007 से प्रखंड विकास पदाधिकारी पुरैनी, जिला पदाधिकारी, मधेपुरा, उपविकास आयुक्त, मधेपुरा, मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ को ग्रामीणों द्वारा कार्य रोक दिये जाने की सूचना देते हुए निदेश/सुझाव हेतु अनुरोध किया गया एवं किसी प्रकार का निदान नहीं होने एवं संवेदक द्वारा भरे गये नाला का उड़ाही नहीं किये की स्थिति में 8वॉ चालू विपत्र से वि0दू0 2.00 से 5.50तक के पूर्व के भुगतान कार्य को अमान्य करते हुए मात्र 1700'-0" (वि0दू0 0.00 से 2.00 के बीच) में ही मिट्‌टी कार्य होने का विपत्र तैयार किया जाना परिलक्षित होता है।

प्राप्त तथ्यों एवं स्थलीय स्थिति के मद्‌देनजर इस आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी को उत्तरदायी माना जाना सही नहीं है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप स्थापित नहीं होता है।

इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री कुमार के विरूद्ध लगाये गये उक्त आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया, फलस्वरूप श्री कुमार के विरूद्ध लगाये गये उक्त आरोप से दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।26 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 सरकार द्वारा लिए गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुजीत कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, सहरसा को लगाये गये उक्त आरोप से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

19 जुलाई 201719 जुलाई 201719 जुलाई 201719 जुलाई 2017

सं0 22/नि0सि0(पू0)-01-16/2007/1178—मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ परिक्षेत्राधीन मधेपुरा जिला के जल निस्सरण प्रमण्डल सहरसा अन्तर्गत मुसहरिया जल निस्सरण योजना में कराये गये कार्यों की स्थलीय जाँच कार्यपालक अभियंता योजना एवं मोनेटरिंग प्रमण्डल सं०-8 द्वारा की गयी। मो0 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी, सम्यक समीक्षोपरांत निम्नांकित आरोप प्रपत्र-'क' में श्री परवेज अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, सहरसा के विरूद्ध गठित किये गये :-

(1) मुसहरिया जल निस्सरण योजना अन्तर्गत नाला के प्रारंभ से वि0दू0 0.00 से वि0दू0 3.00 तक मात्र 2000फीट कार्य कराकर कार्य का भुगतान वि0दू0 0.00 से वि0दू0 5.50 तक किया गया। (2) मिट्‌टी कार्य का भुगतान ग्राफीय गणना के बजाय गणितीय गणना के अनुसार की गयी। (3) योजनान्तर्गत वि0दू0 7.00 एवं 13.20 पर दो अद्‌द पुल हेतु प्रशासनिक स्वीकृति के तहत 6.50 लाख रूपये प्रावधानिक कार्य मद में अनावश्यक एवं अत्यधिक बढ़ोतरी कर रू0(18.281.04) लाख का प्राक्कलन स्वीकृत कर कार्य कराया गया, जिसकी वर्णित स्थल बिन्दुओं पर उतनी उपयोगिता नहीं थी। उपरोक्त आरोपों के लिए श्री अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, सहरसा के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए श्री रामविलास चौधरी, मुख्य अभियंता, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँचोपरांत जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी। समीक्षा में आरोप संख्या-1 के संदर्भ में पाया गया कि वर्ष 2004 में योजना के मिट्‌टी एवं पुल निर्माण का कार्य साथ-साथ प्रारंभ हुआ तथा वि0दू0 0.00 से 5.50 तक नाला के मिट्‌टी कार्य कराया गया। वर्ष 2005 में कार्य पुनः प्रारंभ करने पर भू-मुआवजा भुगतान के आधार पर ग्रामीणों द्वारा कार्य रोक दिया गया। भू-मुआवजा भुगतान प्राप्त करने के समय कब्रिस्तान का बहाना बनाकर भुगतान प्राप्त नहीं किया गया एवं कार्य को रोक दिया गया तथा खुदाई की गई मिट्‌टी से नाला को भरना आरंभ कर दिया गया। साथ ही कहना है कि संवदेक को निदेश दिये जाने के बावजूद मार्च 2007 तक ग्रामीणों द्वारा भरा गया नाला की उड़ाही नहीं किये जाने के कारण अंतिम मापी में उपलब्ध कार्य का ही विपत्र तैयार किया गया जिससे ग्रामीणों द्वारा भर दिये गये नाले के विरूद्ध किया गया भुगतान की वसूली स्वतः हो जाती है। इस प्रकार भुगतान में कोई अनियमितता नहीं किये जाने को अंकित किया गया।

इस प्रकार यह ज्ञात होता है कि वि0दू0 0.00 से 5.50 तक नाला खुदाई के लिए भुगतान किया गया है। दिनांक 27.06.2007 को स्थलीय जाँच के दौरान वि0दू0 7.00 पर दोनों तरफ तथाकथित कब्रों के अवशेष के बीच उपलब्ध नाला स्थल को मिट्‌टी से भरकर समतल किये जाते हुए पाये जाने को जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है।

स्थलीय जाँच प्रतिवेदन में वि0दू0 0.00 से 3.00 के बीच मात्र 2000'-0" में कार्य होने को उल्लेखित किया गया है। कार्यपालक अभियंता, सहरसा के पत्रांक-103, दिनांक 06.02.2007 से प्रखंड विकास पदाधिकारी पुरैनी, जिला पदाधिकारी, मधेपुरा, उपविकास आयुक्त, मधेपुरा, मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ अधीक्षण अभियंता, पूर्णियाँ को ग्रामीणों द्वारा कार्य रोक दिये जाने की सूचना देते हुए निदेश/सुझाव हेतु अनुरोध किया गया एवं किसी प्रकार का निदान नहीं होने एवं संवेदक द्वारा भरे गये नाला का उड़ाही नहीं किये की स्थिति में 8वॉ चालू विपत्र से वि0दू0 2.00 से 5.50तक के पूर्व के भुगतान कार्य को अमान्य करते हुए मात्र 1700'-0" (वि0दू0 0.00 से 2.00 के बीच) में ही मिट्‌टी कार्य होने का विपत्र तैयार किया जाना परिलक्षित होता है।

प्राप्त तथ्यों एवं स्थलीय स्थिति के मद्‌देनजर इस आरोप के लिए आरोपित पदाधिकारी को उत्तरदायी माना जाना सही नहीं है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप स्थापित नहीं होता है।

इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत आरोप सं०-2 एवं 3 के संदर्भ में श्री अहमद से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री अहमद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा उच्च स्तर पर की गयी।

आरोप सं0-2 के संदर्भ में पाया गया कि मिट्‌टी कार्य की मात्रा की गणना ग्राफीय विधि से किया जाना परिलक्षित होता है जिससे आरोपित पदाधिकारी के कथन कि पूर्व में भूलवश गणितीय आधार पर की गयी मिट्‌टी की मात्रा की गणना को अगले विपत्र में सुधार करते हुए ग्राफीय विधि से किया गया है कि पुष्टि होती है। इस प्रकार कार्य के दौरान गणितीय गणना में हुई किसी प्रकार की त्रुटि यदि हो को ग्राफीय गणना से कर लिये जाने के उपरांत किसी प्रकार के अधिकाई भुगतान की गुंजाइश नहीं रह जाती है। इस प्रकार मिट्‌टी की गणना गणितीय आधार पर किये जाने की भूल को कार्य के दौरान ही आरोपित पदाधिकारी द्वारा भूल सुधार करते हुए ग्राफीय विधि से गणना कर लिये जाने के आलोक में संचालन पदाधिकारी के आरोप प्रमाणित होने के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोपी पदाधिकारी को दोषी नहीं माना जा सकता है। आरोप सं0-3 के संदर्भ में पाया गया कि विभागीय सचिव की पृच्छा के आलोक में मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ से दोनों पुल के उपयोगिता के संबंध में प्रतिवेदन की माँग की गयी। मुख्य अभियंता, पूर्णियाँ ने अपने प्रतिवेदन में दोनों पुल वर्तमान में अच्छी स्थिति में मौजूद रहने, पूर्णरूपेण उपभोगी रहने, सड़क मार्ग से जुड़े होने एवं वाहनों का आवागमन होने को प्रतिवेदित27 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 किया गया है जिससे पुल का सड़क मार्ग से जुड़ जाना परिलक्षित होता है। इस प्रकार सम्यक समीक्षोपरांत श्री अहमद के विरूद्ध लगाये गये उक्त आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। आरोप प्रमाणित नहीं पाये जाने के कारण श्री परवेज अहमद, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को लगाये गये उक्त आरोप से मुक्त करने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गया। सक्षम प्राधिकार द्वारा लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री परवेज अहमद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमण्डल, सहरसा सम्प्रति सेवानिवृत को लगाये गये उक्त आरोप से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

31 जुलाई 201731 जुलाई 201731 जुलाई 201731 जुलाई 2017

सं0 22/नि0सि0(भाग0)-09-02/2010/1252—श्री मुकुल कुमार श्रीवास्तव, आई०डी०-3287 कार्यपालक अभियंता, बाँध एवं गेट रूपांकण प्रमंडल सं0-2, अनिसाबाद, पटना द्वारा वर्ष 2004-05 में सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितताओं के लिए निम्नांकित आरोपों को गठित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-253, दिनांक 27.01.2015 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-

(i) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका द्वारा कार्यान्वित योजना क्रमांक 01, वर्ष 2004-05 के प्राक्कलन के अनुसार 240'-0" लंबा, 2'-0" आंतरिक चौड़ा एवं 2'-0" ऊँचाई का नाला निर्माण किया जाना था जिसके दोनों दीवाल की मुटाई 10" होनी चाहिए परंतु स्थलीय जाँच में 125' लंबाई में 1'-0" आंतरिक चौड़ाई एवं 1'-0"ऊँचाई जिसका दोनों दीवाल 5" मोटा पाया गया। इसके अतिरिक्त 110'-0" लंबाई में 1'-0" आंतरिक चौड़ाई में एवं 1'-0" दोनों दीवाल क्रमशः 5" एवं 10" चौड़ा पाया गया जबकि मापीपुस्त में प्राक्कलन के अनुरूप प्रविष्टि की गयी है।

इस प्रकार योजना क्रमांक-01, वर्ष 2004-05 के तहत निर्माण कार्य में प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराने कराये गये कार्य से मापीपुस्त में अंकित अधिक कार्य की जाँच के लिए प्रथमदृष्टया दोषी है।

(ii) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका द्वारा कार्यान्वित योजना क्रमांक-03, वर्ष 2004-05 के प्राक्कलन के अनुसार 490'-0" लंबाई में 10'-0" ऊँचा बाँध का निर्माण किया जाना था। मापीपुस्त में भी उक्त प्रविष्टि की गयी है परंतु, स्थलीय जाँच में 300'-0" लंबाई में 6'-8" ऊँचा मिट्‌टी का कार्य कराया गया पाया गया। इस प्रकार स्थल जाँच में ये प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराने एवं वास्तविक कार्य से अधिक कार्य की मापी के लिए प्रथमदृष्टया दोषी है। (iii) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका द्वारा कार्यान्वित योजना क्रमांक-04, वर्ष 2004-05 में कराये गये नाला निर्माण की प्रविष्टि संबंधित मापीपुस्त में 215'-0" लंबाई में ही नाला का दोनों दीवाल 10'X1'6" के उपर 3"पी0सी0सी0 की प्रविष्टि इनके द्वारा जाँचित है एवं इनके द्वारा स्थल पर कार्य पाये जाने के बाद मापीपुस्त पर हस्ताक्षर करने की बात कही गयी है जबकि, जाँच दल द्वारा 215'-0" के स्थान पर मात्र 195'-0" लंबाई में नाला का निर्माण पाया गया। इस प्रकार प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराने एवं वास्तविक कार्य से अधिक कार्य की मापी जाँच के लिए प्रथमदृष्टया दोषी है।

(iv) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका द्वारा कार्यान्वित योजना क्रमांक-05, वर्ष 2004-05 में कराये गये उत्पादन-सह-बिक्री केन्द्र के निर्माण से संबंधित मापीपुस्त में इनके द्वारा अंकित किया गया है कि 180वर्गफीट कारपेट एरिया के जगह 211.6 वर्गफीट कारपेट एरिया का कार्य कराया गया है। इस प्रकार बिना सक्षम प्राधिकार से प्राक्कलन को पुनरीक्षित कराये इनके द्वारा अधिक कारपेट एरिया का कार्य कराया गया तथा खिड़की एवं प्लास्टर कार्य की मापी की जाँच इनके द्वारा की गयी है वह कार्य वस्तुतः हुआ ही नहीं है जिसके लिए प्रथमदृष्टया दोषी हैं।

(v) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका द्वारा कार्यान्वित योजना क्रमांक-06, वर्ष 2004-05 में कराये गये कूप निर्माण के कार्य में कुएँ की गहराई स्थलीय जाँच में 32'-0" के विरूद्ध 13'-0" पाया गया तथा योजना के प्रावधान के बिना कुँआ के चारों तरफ 3'-9" चौड़ाई में प्लेटफार्म का निर्माण पाया गया।

इस प्रकार स्वीकृत मात्रा से कम मात्रा में कार्य कराकर प्राक्कलन के अनुरूप कार्य की मात्रा को जाँच करने एवं तदनुसार भुगतान कराये जाने के लिए प्रथमदृष्टया दोषी हैं।

(vi) ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका द्वारा कार्यान्वित योजना क्रमांक-07, वर्ष 2004-05 में कराये गये उत्पादन-सह-बिक्री केन्द्र निर्माण कार्य में स्थलीय जाँच में प्राक्कलन के अनुरूप दो अदद्‌ स्टील खिड़की 2'-6"X 4'-0" नहीं पाया गया जबकि मापीपुस्त में लोकल लकड़ी का एक दरवाजा एवं एक खिड़की की प्रविष्टि है परंतु Shlaves की प्रविष्टि नहीं है तथा इनके द्वारा अंकित किया गया है कि कार्य स्थल पर कार्य पाये जाने के फलस्वरूप ही मापीपुस्त पर हस्ताक्षर किया गया है।

इस प्रकार प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराने एवं बिना स्वीकृति के कराये गये कार्य से भिन्न कार्य कराने तथा अधिक कार्य की मात्रा की जाँच के लिए प्रथमदृष्टया दोषी हैं।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-770, दिनांक 10.11.2015 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर किये जाने के उपरांत लिये गये निर्णय के आलोक में जाँच प्रतिवेदन से सहमत होकर प्रमाणित आरोपों के लिए श्री मुकुल कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाँध एवं गेट रूपांकण प्रमंडल सं0-2, अनिसाबाद, पटना से विभागीय पत्रांक-316, दिनांक 19.02.2016 द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा की गयी।28 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 विभागीय पत्रांक-316, दिनांक 19.02.2016 के आलोक में श्री श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, बाँध एवं गेट रूपांकण प्रमंडल संख्या-2, अनिसाबाद, पटना के पत्रांक-78, दिनांक 09.03.2016 द्वारा समर्पित द्वितीय कारणपृच्छा के प्रत्युत्तर में आरोपवार निम्नांकित तथ्यों को प्रस्तुत किया गया :-

आरोप सं0 1आरोप सं0 1आरोप सं0 1आरोप सं0 1ः-ः-ः-ः-यह योजना जिला परिषद सदस्या श्रीमती सुजाता देवी की अनुशंसा के आलोक में रामचन्द्रपुर एवं लौसा ग्राम को जोड़ने वाली क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मति एवं नाला निर्माण से संबंधित है जिसकी प्राक्कलित राशि रूपये 101700.00 (एक लाख एक हजार सात सौ) मात्र है। प्राक्कलन में 400फीट लंबाई में पथ के दोनों ओर प्रत्येक फ्लैंक में मिट्‌टी भराई, क्षतिग्रस्त भाग एवं बीच में मिट्‌टी भराई के पश्चात बिना संपीडन के डब्लू0बी0एम0 गे्रड-I एवं उसके ऊपर मोरम डालकर सड़क को यातायात हेतु सुगम बनाने का लक्ष्य था। इस निर्माण के पूर्व इस सम्पर्क पथ पर वाहनों का आवागमन लगभग ठप था। सड़क की मरम्मति के साथ 240फीट में नाला निर्माण का कार्य कराना था। प्राक्कलन के प्रावधान के अनुरूप सड़क मरम्मति एवं नाला निर्माण का कार्य विभागीय अभिकर्त्ता श्री कुलानंद मिश्र, कनीय अभियंता द्वारा सीधे प्रमंडल से अग्रिम लेकर कराया गया। कार्य पूर्ण होने के पश्चात मापीपुस्त पर अंकित मापी के अनुरूप कार्य स्थल पर कार्य पाये जाने के फलस्वरूप इनके द्वारा स्थल निरीक्षण के पश्चात दिनांक 29.01.2005 को मापीपुस्त पर हस्ताक्षर किया गया जिसे कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, बांका द्वारा पारित किया गया।

योजना पूर्ण होने के पश्चात्‌ रामचन्द्रपुर ग्राम का सम्पर्क लौसा एवं लौसा के आगे पड़नेवाले ग्रामों से हो गया। उस अवधि में उस क्षेत्र में विभिन्न मदों यथा प्रधानमंत्री सड़क योजना, सांसद मद, विधायक मद से अनेक योजनाओं पर निर्माण कार्य चल रहा था। सम्पर्क पथ बन जाने से इस पथ पर भारी वाहनों जैसे जे0सी0बी0 मशीन, ट्रक, ट्रैक्टर आदि का आवागमन प्रारंभ हो गया। निर्माण कार्य पूर्ण होने के लगभग 2½ (ढाई) साल पश्चात श्रीमती सुजाता देवी, जिला परिषद सदस्या उत्तरी क्षेत्र अमरपुर द्वारा भारी वाहनों के कारण नाला क्षतिग्रस्त होने की सूचना देते हुए क्षतिग्रस्त नाले से प्राप्त ईंटों एवं अन्य सामग्रियों की व्यवस्था कर ग्रामीण के सहयोग से काम चलने लायक नाला निर्माण कराने की बात बताते हुए इनसे नाला को पूर्व में किये गये निर्माण के अनुरूप पुनस्र्थापित करने हेतु प्राक्कलन तैयार कराने का अनुरोध किया गया। जिसे इनके द्वारा श्री कुलानंद मिश्र, तत्कालीन कनीय अभियंता को अग्रसारित कर दिया गया। लगभग तीन वर्ष नौ माह बाद जाँच दल द्वारा उक्त कार्य की जाँच की गयी और स्थल पर पाया गया कार्य मापी पुस्तिका से भिन्न पाया गया। जाँच दल द्वारा जिस कार्य की जाँच की गयी, वह कार्य जिला परिषद्‌ सदस्या द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से कराया गया कार्य था न कि, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा कराया गया कार्य।

इसलिए कार्य स्थल पर पाये गये कार्य एवं मापीपुस्तिका पर अंकित कार्य में भिन्नता होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसकी पुष्टि जिला परिषद सदस्या द्वारा इनको दिनांक 20.06.2007 को लिखे गये पत्र से भी होती है।

आरोप सं0 2ः-आरोप सं0 2ः-आरोप सं0 2ः-आरोप सं0 2ः-यह कार्य गंगापुर कुशवाहा बाँध के निर्माण से संबंधित है जिसकी प्राक्कलित राशि रूपये 150800.00 (एक लाख पचास हजार आठ सौ) है। इस कार्य में 490फीट की लंबाई में एवं औसत 10फीट की ऊँचाई में मिट्‌टी भराई का कार्य कराना था। जिस भाग में कार्य कराना था उसके दोनों तरफ ऊँचा भू-भाग एवं बीच में भैली आकार का टोपोग्राफी था। बाँध की ऊँचाई 0-चेन से 1फीट 0 ईंच से शुरू होकर बीच में लगभग 14फीट 0 र्इंच एवं फिर दूसरे तरफ अन्त में 1फीट 0 ईंच हो जाता है। बाँध की ऊँचाई की गणना प्रत्येक 50फीट दूरी पर बाँध की ऊँचाई का औसत निकाल कर किया गया है जो 10'0" आता है। जाँच दल द्वारा इसी बिन्दु पर बाँध की ऊँचाई 6फीट 8 ईंच पाया गयी है, जिसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है, परंतु, निर्माण के समय पूरी लंबाई में अनेक बिन्दुओं पर ऊँचाई निकालकर एवं औसत करने पर 10फीट 0 ईंच आती थी। कार्यस्थल पर मापीपुस्त के अनुरूप कार्य पाये जाने के फलस्वरूप इनके द्वारा दिनांक 30.04.2005 को हस्ताक्षर किया गया। दिनांक 20.06.2007 को श्रीमती सुजाता देवी, जिला परिषद सदस्या द्वारा इन्हें सूचित किया गया कि बाँध को दोनों तरफ से कृषकों द्वारा काटकर कुछ भाग में मिला लिया गया है। जिसके पुनस्र्थापन हेतु एक प्राक्कलन तैयार करने का अनुरोध किया गया था जिसके इनके द्वारा तत्कालीन कनीय अभियंता श्री कुलानंद मिश्र को अग्रसारित कर दिया गया था। निर्माण के पश्चात्‌ कृषकों द्वारा बाँध का कुछ भाग काट कर खेत में मिला लेने के फलस्वरूप जाँच दल द्वारा दिनांक 01.09.2008 को स्थल जाँच के क्रम में स्थल पर पायी गयी बाँध की लंबाई एवं मापीपुस्तिका पर अंकित मापी में भिन्नता होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

जाँच दल द्वारा जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2004-05 में स्वीकृत योजना की मिट्‌टी भराई कार्य का पाँच वर्षा ऋतु के बाद वास्तविक मूल्यांकन करना संभव नहीं हुआ।

आरोप सं0 3ः-आरोप सं0 3ः-आरोप सं0 3ः-आरोप सं0 3ः-यह योजना रामचन्द्रपुर में नाला निर्माण से संबंधित है जिसकी प्राक्कलित राशि 51300.00(इक्यावन हजार तीन सौ) रूपये है। वर्ष 2005 की निर्मित योजना के संबंध में श्रीमती सुजाता देवी, सदस्या जिला परिषद उत्तरी क्षेत्र अमरपुर द्वारा वर्ष 2007 में नाला के क्षतिग्रस्त होने की सूचना देते हुए इसके पुनस्र्थापन का अनुरोध किया गया, जिसे तत्कालीन कनीय अभियंता को अग्रसारित कर दिया गया। वर्ष 2008 में जाँच दल द्वारा जाँच के क्रम में मापीपुस्त में अंकित कार्य एवं स्थल पर उपलब्ध कार्य में भिन्नता की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

आरोप सं0 4ः-आरोप सं0 4ः-आरोप सं0 4ः-आरोप सं0 4ः-यह एक व्यक्तिगत लाभ की योजना थी जिसे लाभुक की सुविधा योजना की अनुशंसा पर ही बिना किसी मौलिक बदलाव के सम्पन्न कराया गया। कार्यस्थल पर कराये गये कार्य मदों का मूल्यांकन मापीपुस्त पर अंकित मूल्यांकन से अधिक होने के बावजूद स्वीकृत राशि के अन्तर्गत ही भुगतान हेतु अनुशंसा की गयी थी।

आरोप सं0 5ः-आरोप सं0 5ः-आरोप सं0 5ः-आरोप सं0 5ः-यह योजना पेयजल कूप निर्माण योजना से संबंधित है। यह एक व्यक्तिगत लाभ की योजना है जिसे लाभुक के हितों एवं अनुशंसा करने वाली जिला परिषद सदस्या के अनुरोध पर एक प्लेटफार्म निर्माण के साथ पूर्ण कराया29 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 गया है। कार्य पूर्ण होने के लगभग चार वर्षों के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के फलस्वरूप कूप की गहराई कम होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। कूप में पानी भरे रहने की बात जाँच दल द्वारा भी स्वीकार किया गया है। स्थल पर पाये जाने वाले कार्य का मूल्यांकन मापीपुस्त में अंकित मूल्यांकन से अधिक होने के बावजूद स्वीकृत राशि के अन्तर्गत ही भुगतान की अनुशंसा की गयी थी।

आरोप सं0 6ः-आरोप सं0 6ः-आरोप सं0 6ः-आरोप सं0 6ः-यह योजना उत्पादन-सह-बिक्री केन्द्र निर्माण की एक व्यक्तिगत लाभ की योजना है। वर्ष 2005 में निर्मित योजना की जाँच वर्ष 2008 में की गयी है। इस अवधि से लाभुक द्वारा अपनी सुविधानुसार कुछ परिवर्तन करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि प्रतिकूल परिस्थिति यथा ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता, कुशल मजदूरों की अनुपलब्धता, स्वयं के हेपटाईटीस-बी एवं लीवर की गंभीर बीमारी रहने के बावजूद लाभुकों के अधिकतम उपयोग में आनेवाली योजना राशि का अधिकतम उपयोग करने एवं कहीं भी स्वीकृत राशि से ज्यादा राशि व्यय न हो, इन बिन्दुओं का पालन करते हुए जनहित, कार्यहित एवं विभागीय नियमों का पालन करते हुए कार्याें का संपादन कराया गया है। श्री श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत उपर्युक्त तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उपरांत निम्नांकित तथ्य पाये गये :-

(i) योजना सं0-01/04-05 में प्राक्कलन के अनुसार 240फीट लंबा, 2फीट चौड़ा एवं 2फीट गहरा नाला का निर्माण करना था, जिसके दोनों दीवाल की मुटाई 10 ईंच होनी चाहिए थी किन्तु, स्थलीय जाँच में मात्र 125फीट लंबा, 1फीट चौड़ा एवं 1फीट गहरा नाला का निर्माण कराया गया। साथ ही नाला के दीवाल की मुटाई 10 ईंच के स्थान पर मात्र 5 ईंच पायी गयी जबकि, मापीपुस्त में प्रविष्टि प्राक्कलन के अनुसार की गयी थी। आरोपी पदाधिकारी ने अपने द्वितीय कारणपृच्छा के उत्तर में उल्लेख किया है कि भारी वाहनों के कारण नाला क्षतिग्रस्त हो गया परंतु, नाला की लंबाई, चौड़ाई एवं गहराई तथा दीवाल की मुटाई प्राक्कलन के अनुसार क्यों नहीं बनायी गयी, इस बिन्दु पर कोई जबाब नहीं है। तीन वर्ष के पश्चात्‌ भी जाँच किये जाने पर नाला की चौड़ाई, गहराई एवं दीवाल की मुटाई में कमी संभव नहीं है। अतएव इस बिन्दु पर आरोपी पदाधिकारी का कथन स्वीकार योग्य नहीं है।

(ii) योजना सं0-3/2004-05 में प्राक्कलन के अनुसार 490फीट लंबा, 10फीट ऊँचाा बाँध का निर्माण किया जाना था। मापीपुस्त में भी इतने कार्य का उल्लेख है जबकि स्थलीय जाँच में बाँध का निर्माण 300फीट लंबा एवं 6फीट 8ईंच ऊँचा पाया गया।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में अंकित किया है कि बाँध निर्माण के पश्चात्‌ कृषकाें द्वारा बाँध का कुछ भाग काटकर खेत में मिला लेने के कारण जाँच दल द्वारा बाँध की लंबाई में कमी पायी गयी। साथहीं पाँच वर्षा ऋतु के बाद कराये गये मिट्‌टी के कार्य का वास्तविक मूल्यांकन संभव नहीं है। आरोपी का यह कथन भी स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि, अगर बाँध कार्य को कृषकों द्वारा काटकर खेत में मिला लिया गया था तो, इस आशय का प्रतिवेदन आरोपी पदाधिकारी को अपने उच्चाधिकारी को देना चाहिए था जो, नहीं किया गया।

(iii) योजना सं0-04/04-05 में 215फीट लंबा नाला के दोनों दीवाल 10ईंच x 1फीट 6 ईंच के ऊपर 3 ईंच पी0सी0सी0 कार्य कराया जाना था। स्थलीय जाँच में 215 फीट की जगह 195फीट ही नाला का निर्माण कराया गया, पाया गया। जबकि, मापीपुस्त में प्राक्कलन के अनुसार प्रविष्टि की गयी थी।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारणपृच्छा में उल्लेख किया गया है कि जिला परिषद सदस्या श्रीमती सुजाता देवी द्वारा वर्ष 2007 में नाला के क्षतिग्रस्त होने की सूचना दी गयी थी जिसके कारण स्थलीय जाँच में नाला की लंबाई में कमी पायी गयी। नाला का निर्माण पक्का कार्य है जिसके किसी कारण विशेष से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में भी अवशेष रहना चाहिए था। क्षतिग्रस्त नाले का पूर्ण अस्तित्व समाप्त हो जाना संभव नहीं है।

(iv) आरोपी पदाधिकारी ने इस बिन्दु पर अपने द्वितीय कारणपृच्छा में अंकित किया है कि यह व्यक्तिगत लाभ की योजना थी जिसे, बिना किसी मौलिक बदलाव के लाभुक की सुविधा के लिए सम्पन्न कराया गया। प्राक्कलन में विहित कारपेट एरिया 180वर्गफीट से अधिक कारपेट एरिया में कार्य कराने के पूर्व सक्षम पदाधिकारी से अनुमति प्राप्त करने के बिन्दु पर आरोपी पदाधिकारी का उत्तर स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए द्वितीय कारणपृच्छा की यह कंडिका भी स्वीकार योग्य नहीं है। (v) योजना सं0-06/04-05 में कूप निर्माण की गहराई 32फीट होनी चाहिए थी परंतु स्थलीय जाँच में इसकी गहराई 13फीट 6 इंच पाये जाने तथा मापीपुस्त में प्राक्कलन के अनुसार कार्य दर्ज होने के संबंध में आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने द्वितीय कारणपृच्छा में अंकित किया गया है कि योजना व्यक्तिगत लाभ की है एवं कार्यपूर्ण होने के चार वर्षों बाद तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कुआँ की गहराई कम होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। परंतु, आरोपी का उक्त स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कूप की गहराई 32 फीट के स्थान पर 13फीट 6 इंच हो जाने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता तथा बांका जिला बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी नहीं है।

(vi) योजना सं0-07/04-05 में प्राक्कलन के अनुसार 2 फीट 6 इंच x 4 फीट के दो अदद स्टील खिड़की का कार्य कराये जाने एवं मापीपुस्त में लोकल लकड़ी के एक दरवाजा एवं एक खिड़की की प्रविष्टि किये जाने के संबंध में आरोपी पदाधिकारी का यह कथन कि लाभुक द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार कार्य में कुछ परिवर्तन किया गया है, स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि, प्राक्कलन के अनुसार कार्य कराने की जिम्मेवारी संबंधित कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता की थी, जिसका निर्वहन नहीं किया गया।30 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 उपर्युक्त पाये गये तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री श्रीवास्तव द्वारा योजनाओं के कार्यान्वयन में लापरवाही बरती गयी है तथा कनीय अभियंता द्वारा तैयार किये गये मापीपुस्त की जाँच किये बगैर उसे सत्यापित किया गया। जिससे न केवल कार्य की गुणवता खराब हुई अपितु योजना के अभिकर्त्ता को कराये गये वास्तविक कार्य से अधिक भुगतान किया गया जिसके लिए श्री श्रीवास्तव दोषी पाये गये हैं। परंतु उक्त प्रमाणित पाये गये आरोपों के बिन्दु पर अंतिम निर्णय लिये जाने से पूर्व श्री श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता के दिनांक 31.07.2016 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप सरकार के स्तर पर लिए गये निर्णय के आलोक में इनके विरूद्ध पूर्व संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-256 सहपठित ज्ञापांक 1747, दिनांक 12.08.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित करते हुए विभागीय पत्रांक-1976, दिनांक 06.09.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत द्वितीय कारणपृच्छा की गयी।

श्री श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के द्वारा समर्पित द्वितीय कारणपृच्छा के उत्तर, दिनांक-07.10.2016 की समीक्षा पुनः सरकार के स्तर पर की गयी एवं सम्यक्‌ समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री मुकुल कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल सं0-2, बांका सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को विभागीय अधिसूचना संख्या-431, दिनांक 21.03.17 द्वारा "पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती" का दण्ड अधिरोपित किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड के आलोक में श्री मुकुल कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा पुनर्वचिार अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया है जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से आरोपवार निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गया है - आरोप संख्या-1 :-आरोप संख्या-1 :-आरोप संख्या-1 :-आरोप संख्या-1 :-इस योजना के प्रथम भाग में 400'-0" सड़क निर्माण में कोई कमी नहीं पायी गयी है। द्वितीय भाग में 240'-0" नाला निर्माण में 235' नाला का अस्तित्व पाया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा नाला निर्माण हेतु राशि 64,776/-रूपये आकलित किया गया है एवं वर्ष 2004-05 में निर्मित नाला की जाँच पाँच वर्षों बाद दिनांक 01.09.08 को की गयी है।

आरोप आरोप आरोप आरोप संख्या-2 :-संख्या-2 :-संख्या-2 :-संख्या-2 :-वर्ष 2004-05 में निर्मित बाँध जो बिना सम्पोषण एवं रख-रखाव का है के पाँच वर्षों बाद जाँच में बाँध की ऊँचाई कम पाया जाना स्वभाविक है। बाँध की लंबाई के संबंध में स्थानीय प्रतिनिधि द्वारा पूर्व में प्रतिवेदित किया गया है एवं विमर्श में कार्यपालक अभियंता को अवगत कराया गया था। विपत्र कार्यपालक अभियंता द्वारा पारित किया गया। इसलिए उच्चाधिकारी को सूचना नहीं दी गयी।

आरोप संख्या-3 ः-आरोप संख्या-3 ः-आरोप संख्या-3 ः-आरोप संख्या-3 ः-रामचन्द्रपुर में नाला निर्माण के संबंध में स्थानीय लोगों द्वारा नाला क्षतिग्रस्त किये जाने से 215'-0" के स्थान पर 195'-0" नाला अस्तित्व में पाया गया है।

आरोप संख्या-4 :-आरोप संख्या-4 :-आरोप संख्या-4 :-आरोप संख्या-4 :-श्रीमती शीला देवी का उत्पादन-सह-बिक्री केन्द्र का निर्माण स्थानीय जन प्रतिनिधि के अनुशंसा के आधार पर एक कमरा एवं एक बरामदा के स्थान पर दो कमरा का निर्माण प्राक्कलन स्वीकृत करने वाले कार्यपालक अभियंता की अनुमति से स्वीकृत राशि के अन्तर्गत कराया गया। जिसकी पुष्टि उनके द्वारा विपत्र पारित किये जाने से होती है।

आरोप संख्या-5आरोप संख्या-5आरोप संख्या-5आरोप संख्या-5 ः-श्रीमती सरोजनी देवी का कूप निर्माण में कूप की गहराई कम पाये जाने के संबंध में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कुँआ में मिट्‌टी भर जाना बताया गया है।

आरोप संख्या-6आरोप संख्या-6आरोप संख्या-6आरोप संख्या-6 ः-श्री सरस्वती देवी का उत्पादन-सह-बिक्री केन्द्र का निर्माण प्राक्कलन के अनुरूप कराकर लाभुक को हस्तगत करा दिया गया। लाभुक द्वारा खिड़की हटा कर शेल्व्‌स का निर्माण करा लिया गया, इसके लिए कनीय अभियंता, सहायक अभियंता जिम्मेवार नहीं है।

श्री मुकुल कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा दाखिल पुनर्विचार अभ्यावेदन में प्रस्तुत उपर्युक्त तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत यह पाया गया कि श्री श्रीवास्तव ने अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में मुख्यतः उन्हीं तथ्यों की पुनरावृति की है, जिसका उल्लेख इनके द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में है। पुनर्विचार अभ्यावेदन में कोई नया विचारणीय तथ्य नहीं दिया गया है, बल्कि पूर्व में कही गयी बातों की पुनरावृति की गयी है।

उपर्युक्त पाये गये तथ्यों के आलोक में श्री मुकुल कुमार श्रीवास्तव द्वारा दाखिल पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

अतः सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री मुकुल कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल संख्या-2, बाँका सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता का पुनर्विचार अभ्यावेदन अस्वीकृत करते हुये विभागीय अधिसूचना संख्या-431, दिनांक 21.03.17 द्वारा पूर्व में अधिरोपित निम्न दण्ड को यथावत रखने का निर्णय लेते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

"पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती" । "पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती" । "पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती" । "पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती" ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

10 अगस्त10 अगस्त10 अगस्त10 अगस्त 2017201720172017

सं0 22/नि0सि0(विभा0)-03-1019/90/1301—श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, फुलवरिया नहर प्रमण्डल, सिरदल्ला के पदस्थापन अवधि (दिनांक 12.04.84 से 31.12.88) में बरती गयी अनियमितताओं की जानकारी मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, पटना, अधीक्षण अभियन्ता, जलपथ अंचल, नवादा एवं महालेखाकार के अंकेक्षण प्रतिवेदन31 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 सं0-आई0 आर0-1/88-89 से प्राप्त होने पर विभागीय स्तर पर इसकी जाँच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उपरोक्त सभी प्रतिवेदनों के समीक्षोपरान्त श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता वर्ष 86-87, 87-88 एवं 88-89 की अवधि में नहरों की मरम्मति, सुदृढ़ीकरण, नहर टूट एवं अनियमित रूप से नहरों के उड़ाही मद में कार्यो को छोटे-छोटे टुकड़े कर अधिकांशतः 25,000/- (पचीस हजार रूपये) के अन्दर का एकरारनामा करने तथा 2,000 (दो हजार रूपये) तक के अन्दर प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर 55.98 लाख रूपये का अनियमित भुगतान के लिए दोषी पाये गये जिसके लिए विभागीय आदेश सं0-88 दिनांक 26.03.91 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1357 दिनांक 04.06.91 द्वारा उनके विरूद्व सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 1950 के नियम 55 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उन्हें उपलब्ध कराते हए विभागीय पत्रांक 376 दिनांक 9.04.95 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद निम्नलिखित आरोपों के लिए दोषी पाये गयेः- (i) वर्ष 1986-87 से 88-89 के बीच नहर के कार्य को टुकडे-टुकड़े कर एकरारनामा करना। (ii) 2,000 (दो हजार रूपये) का प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर 1.92 लाख रूपये का भुगतान करना।

(iii) प्रदत्त वित्तीय शक्तियों का अतिक्रमण कर अनियमित व्यय करना।

(iv) प्राक्कलन को टुकड़े-टुकड़े कर अपनी सक्षमता के अन्दर लाना। (v) दिसम्बर 87 तथा अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर-88 में जब निरीक्षण हुआ तो अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया जिससे संकेत मिलता है कि वित्तीय अनियमितता एवं दुरूपयोग का प्रयास किया गया एवं जाँच में सहयोग नहीं दिया गया। इस बीच प्रसाद द्वारा निलंबन आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0 सी0सं0-3334/91 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना के निदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0-25, दिनांक 04.02.92 द्वारा श्री प्रसाद को दिनांक 04.06.91 से पूर्ण वेतन भत्ता भुगतान करने आदेश निर्गत किया गया। विभागीय आदेश सं0-1079, दिनांक 22. 09.97 द्वारा श्री प्रसाद को निलंबन से मुक्त किया गया। उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता को निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय लिया गया :- (i) निन्दन वर्ष 88-89 (ii) कार्यपालक अभियन्ता से सहायक अभियन्ता के पद पर पदावनति (रिभर्शन)। (iii) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा किन्तु निलंबन की अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी। उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-3063, दिनांक 22.09.97 द्वारा श्री प्रसाद से पुनः द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर पत्रांक शून्य दिनांक 07.10.97 की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त निम्न आरोप प्रमाणित पाये गयेः- (i) वर्ष 1986-87 से 1988-89 में 58.98 लाख रूपये के नहर के कार्य को टुकड़ा-टुकड़ा कर एकरारनामा करना। (ii) 2,000 (दो हजार रूपये) का प्रथम एवं अंतिम विपत्र बनाकर हस्त रसीद पर भुगतान करना (1.61 लाख)। (iii) प्रदत्त वित्तीय शक्तियों का दुरूपयोग कर अनियमित व्यय करना। (iv) प्राक्कलन को टुकड़ा-टुकड़ा कर अपनी सक्षमता के अन्दर लाना। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1499 दिनांक 30.11.2000 द्वारा श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद, कार्यपालक अभियंता को निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- (i) ''निन्दन'' जिसकी प्रविष्टि उनकी चारित्री वर्ष 88-89 में की जायेगी। (ii) कार्यपालक अभियन्ता से सहायक अभियन्ता के पद पर पदावनति (रिभर्शन)। (iii) निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा किन्तु निलंबन की अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जायेगी। उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री प्रसाद द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-13057/2000 दायर किया गया। उक्त याचिका में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 31.07.15 को निम्न न्याय निर्णय पारित किया गया :- 12. I have perused the order passed by the Disciplinary Authority imposing the punishment upon the petitioner as indicated above. I do not find any discussion on the petitioner's representation against the findings of the Inquiry Officer in the said order of punishment. The impugned notification/order of punishment dated 30.11.2000 has thus became vulnerable and requires interference by this Court. The notification dated 30.11.2000 imposing punishment upon the petitioner is, accordingly, quashed32 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 13. The respondents are directed to pass an order afresh after considering the petitioner's respresentation which has been brought on record by way of Annexure-12 to the present writ application. Such order must reflect application of mind showing consideration of the said representation of the petitioner against findings of the Inquiry Officer. This court will not comment upon the nature of punishment which the diciplinary authority may pass thereafter as learned State Counsel appears to be right in his submission that it is purely within the discretion of the disciplinary authority to impose appropriate punishment. 14. However, as has been stated at the bar, the petitioner is said to have attained the age of superannuation on 31.01.2001. the disciplinary authority will consider awarding appropriate punishment upon the petitioner Under Bihar Pension Rules. The disciplinary authority must pass an order, in the light of the present order of this Court within a period of six months from the date of receipt/production of a copy of this order, failing which the petitioner will be entitled to all benefits. उक्त न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना स0ं-2190 दिनांक 24.09.15 द्वारा दण्डादेश अधिसूचना ज्ञापांक-1499, दिनांक 30.11.2000 को निरस्त किया गया तथा श्री प्रसाद के विरूद्व विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1357, दिनांक 04. 06.91 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 1950 के नियम-55 के तहत संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया तथा विभागीय पत्रांक-2268 दिनांक 01. 10.15 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब दिनांक 07.10.97 (Annexure-12) एवं दिनांक 19.10.15 की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः- (i) आरोप सं0-1 के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा कहा गया है कि वर्ष 1980-81 से लंबित आ रही योजना के वर्ष 86 में सिंचाई प्रारंभ किये जाने के विभागीय निर्णय के आलोक में कार्य को छोटे इकाई में तोड़कर अनेक संवेदकों से कार्य तेजी से कराते हुए 9,352 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता के विरूद्ध 7,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित किया गया। साथ ही कहा गया है कि कार्य को तोड़ने का विभाग में मान्य प्रचलन है एवं इसी प्रक्रिया के तहत जलपथ अंचल, नवादा द्वारा भी फुलवरिया जलाशय योजना के कार्य को टुकड़े में स्वीकृति दी गई। श्री प्रसाद द्वारा यह भी कहा गया है कि श्री शिवनारायण राम एवं श्री आर0 एन0 पी0 शर्मा, अधीक्षण अभियंता कार्य के निरीक्षण के दरम्यान प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की एवं वरीय पदाधिकारी होने के नाते समान रूप से दोषी रहते हुए दोष मुक्त हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यह आरोप प्रक्रियात्मक दोष के अन्तर्गत आता है जिसके लिये मुख्य अभियंता ने ''चेतावनी'' एवं अभियंता प्रमुख ने मात्र प्रक्रियात्मक भूल के लिए दण्डित नहीं किये जाने की अनुशंसा की है। साथ ही कहा गया है कि लक्ष्य प्राप्ति या जन कल्याण के लिए अपनाई गई Practical Approach को अनियमितता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। श्री प्रसाद के उक्त कथन को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया क्योंकि मुख्य सचिव, बिहार के पत्रांक 462 दिनांक 30.03.82 के अनु0 भाग-2 क (1) के अनुसार कार्य को छोटे टुकड़े में तोड़कर स्वीकृति के लिये वे ही पदाधिकारी सक्षम होते हैं जो पूरे कार्य के निविदा/कोटेशन निष्पादन के लिए सक्षम हैं। श्री प्रसाद द्वारा उक्त निदेश की अनदेखी की गई एवं इस प्रकार के कृत्य की पूर्व या घटनोत्तर स्वीकृति सक्षम प्राधिकार से प्राप्त नहीं की गई। वित्तीय सक्षमता के बाहर स्वीकृति/एकरारनामा किया जाना अनियमितता की श्रेणी में आता है। अन्य को उद्धृत किया जाना प्रासंगिक नहीं है क्योंकि प्रस्तुत मामला श्री प्रसाद से संबंधित है। श्री शिवनारायण राम, अधीक्षण अभियंता ने संचालन पदाधिकारी से श्री प्रसाद को कार्य को टुकड़े में बाँटने, एकरारनामा करने तथा भुगतान से संबंधित कोई आदेश दिये जाने से इनकार किया है। उक्त के आलोक में श्री प्रसाद प्रक्रियात्मक त्रृटि के लिए दोषी हैं। (ii) श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप सं0-2 प्रमाणित नहीं पाया गया। (iii) आरोप सं0-3 के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कहा गया है कि सरकार ने गबन का आरोप स्थगित कर दिया है और अब मात्र प्रक्रियात्मक अनियमितता का आरोप रह जाता है जो Practical and Prevalent Approach के कारण है जो निजी स्वार्थवश नहीं बल्कि ससमय लक्ष्य प्राप्ति के लिए किया गया है। श्री प्रसाद के कथन से ही स्पष्ट है कि कार्य को छोटे टुकड़े में सक्षमता के बाहर स्वीकृति देकर एकरारनामा किया गया है। इस प्रकार श्री प्रसाद द्वारा विभागीय निदेशों/संहिता का उल्लंघन करते हुए अपनी वित्तीय शक्ति के बाहर कार्य को छोटी इकाई में तोड़कर स्वीकृति देते हुए एकरारनामा किया गया है। अर्थात श्री प्रसाद प्रदत्त वित्तीय शक्तियों के अतिक्रमण के लिये दोषी हैं। (iv) आरोप सं0-4 के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा कहा गया है कि यह आरोप आरोप सं0-1 एवं 3 3 के सदृश्य अथवा दोनों का संयुक्त है। साथ ही कहा गया है कि सिंचाई क्षमता के सृजन के लिए नहरों के तीव्रता से निर्माण के उद्धेश्य से प्राक्कलन को टुकड़ा-टुकड़ा किया गया एवं दोनों लक्ष्य बिना सरकारी क्षति के प्राप्त किया गया। श्री प्रसाद के उक्त कथन है को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया क्योंकि तथ्य यह है कि कार्य को वित्तीय शक्ति के बाहर टुकड़ों में स्वीकृति देकर एकरारनामा किया जाना मुख्य सचिव, बिहार के पत्रांक 462 दिनांक 30.03.82 के अनु0 भाग-2 के क (1) का उल्लंघन है जिसमें स्पष्ट निदेशित है कि ''किसी कार्य को कितने टुकड़े में बाँटकर निविदा/कोटेशन माँगी जाय इसका निर्णय33 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 वही पदाधिकारी लेंगे जो उस पूरे कार्य (प्रोवैधिक स्वीकृति की राशि के अनुसार) की निविदा/कोटेशन निष्पादन के लिए सक्षम है।'' अतः इस निदेश के उल्लंघन के लिए श्री प्रसाद दोषी हैं। (v) श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप सं0-5 प्रमाणित नहीं पाया गया। इस प्रकार श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद के विरूद्ध आरोप सं0-1, 3 एवं 4 प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(बी) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-419, दिनांक 09.03. 2016 द्वारा निम्न दंड अधिरोपित किया गया -

"10101010% (दस प्रतिशत) पेंशन स्थायी रूप से रोक।" (दस प्रतिशत) पेंशन स्थायी रूप से रोक।" (दस प्रतिशत) पेंशन स्थायी रूप से रोक।" (दस प्रतिशत) पेंशन स्थायी रूप से रोक।"

श्री वैद्‌यनाथ प्रसाद के निलंबन अवधि दिनांक 26.03.1991 से 03.06.1991 के विनियमन के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 11(5) के तहत श्री प्रसाद को विभागीय पत्रांक-2058, दिनांक 09.09. 16 द्वारा नोटिस निर्गत किया गया। श्री प्रसाद द्वारा दिनांक 06.10.2016 को विभागीय नोटिस के आलोक में जवाब प्राप्त हुआ। श्री प्रसाद द्वारा विभाग को उपलब्ध कराये गया जवाब निम्न है :- चूँकि विभागीय अधिसूचना संख्या-419, दिनांक 09.03.2016 द्वारा उनके पेंशन से 10प्रतिशत पर स्थायी रूप से रोक का दंड संसूचित किया गया है। ऐसी स्थिति में अब और कोई दंड दिया जाना उचित नहीं है। अतः निलंबन अवधि को विनियमित करते हुए उक्त अवधि का पूर्ण वेतन एवं भत्ते का भुगतान करने की कृपा की जाए। श्री प्रसाद से उक्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। जो निम्न है - "श्री प्रसाद का उनके पदस्थापन काल में की गई अनियमितता एवं अनियमित भुगतान के आरोप में निलंबित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत इनसे प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत इनके पेंशन से 10 प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती करने का निर्णय लिया गया। इससे स्पष्ट है कि श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित प्रपत्र-'क' में लगाये गये आरोप सही थे। इसलिए इनका निलंबन औचित्यपूर्ण था। श्री प्रसाद के निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में श्री प्रसाद से प्राप्त जवाब पर सरकार के स्तर पर सम्यक समीक्षोपरांत एवं महाधिवक्ता के परामर्श के आलोक में श्री प्रसाद के निलंबन अवधि 26.03.1991 से 03.06.1991 के विनियमन पर निम्न निर्णय लिया गया है -

(1) "दिनांक 26.03.1991 से 03.06.1991 तक को कर्त्तव्य पर बितायी गई अवधि के रूप में विनियमित नहीं करते हुए तथा इस अवधि को पेंशन प्रदायी नहीं मानते हुए तथा इस शर्त्त पर कि यह अवधि सेवा में टूट नहीं मानी जायेगी।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

11 सितम्बर 201711 सितम्बर 201711 सितम्बर 201711 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2016/1584—श्री अंशुमण ठाकुर, (आई0डी0-3501) कार्यपालक अभियंता, बाढ़ सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2016 22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2016 22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2016 नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत वर्ष 2016 में बगहा शहर के नजदीक रतनमाला एवं पुअर हाउस में कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता आदि आरोपों के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं०-1526, दिनांक 27.07.17 द्वारा निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-1585, दिनांक 29.07.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

विभागीय कार्यवाही मेें संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-494, दिनांक 10.04.17 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री ठाकुर सेे द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

श्री ठाकुर द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा पत्रांक-0, दिनांक 19.05.2017 की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षोपरांत सरकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए श्री ठाकुर को निलंबन से मुक्त करते हुए कतिपय दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री अंशुमण ठाकुर, कार्यपालक अभियंता (निलंबित) को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त किया जाता है एवं दण्ड संबंधित आदेश पृथक से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017/1604—श्री राम विनय सिन्हा (आई0डी0-3374) कार्यपालक अभियंता, सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017 बागमती प्रमंडल सीतामढ़ी को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 13.08.2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनिया, रिंग बाँध मसान नरोत्तम ग्राम मेें सीपेज के कारण क्षतिग्रस्त होने के मामले में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।34 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 2. निलंबन अवधि में श्री सिन्हा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री सिन्हा का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. श्री सिन्हा के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017/1605—श्री वीरेन्द्र कुमार सिंह (आई0डी0-जे0 7886) अवर प्रमंडल सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-09/2017 पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बैरगनिया को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 13.08.2017 को ललबकिया नदी पर निर्मित बैरगनिया, रिंग बाँध मसान नरोत्तम ग्राम मेें सीपेज के कारण क्षतिग्रस्त होने में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री सिंह का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. श्री सिंह के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017/1606—श्री नेहाल अहमद (आई0डी0-.............) कार्यपालक अभियंता, जल सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017 निस्सरण प्रमंडल, मोतिहारी को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 13.08.2017 को बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया दायाँ बाँध में हुये टूटान में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री अहमद को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री अहमद का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. श्री अहमद के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

2/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017/1607—श्री ओम प्रकाश (आई0डी0-जे० 7488) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सं0 सं0 सं0 सं0 22222/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017 2/नि0सि0(मुज0)-06-11/20172/नि0सि0(मुज0)-06-11/2017 बागमती अवर प्रमंडल, ढाका को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 13.08.2017 को बलुआ ग्राम में दायाँ मार्जिनल बाँध तथा सपही में ललबकैया दायाँ बाँध में हुये टूटान में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री प्रकाश को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री प्रकाश का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।35 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 4. श्री प्रकाश के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017/1608—श्री सतीश कुमार (आई0डी0-4045) कार्यपालक अभियंता, बागमती सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 प्रमंडल, रून्नीसैदपुर को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी का बायाँ तटबंध सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुये टूटान में जान-माल की व्यापक क्षति में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. श्री कुमार के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017/1609—श्री अरूण कुमार (आई0डी0- ) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 बागमती अवर प्रमंडल, रून्नीसैदपुर को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी के बायें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण बलुआ ग्राम, सपती ग्राम एवं फुलवरिया ग्राम में हुये टूटान में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. श्री कुमार के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017/1610—श्री प्रियदर्शी मनोज कुमार (आई0डी0- ) अवर प्रमंडल सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 पदाधिकारी, बागमती अवर प्रमंडल, बेनीबाद को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी के बायें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुये टूटान में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली -2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. श्री कुमार के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।36 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017/1611—श्री संजय कुमार (आई0डी0- ) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 22/नि0सि0(मुज0)-06-10/2017 बागमती अवर प्रमंडल, कटरा को उक्त प्रमंडल के अन्तर्गत दिनांक 14.08.2017 को बागमती नदी के बायें तटबंध में सीपेज एवं पाईपिंग के कारण चार स्थलों पर हुये टूटान में बरती गयी अनियमितता, कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं करने एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्याें के प्रति संवेदनशील नहीं रहने आदि के मामले में पूर्ण समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

3. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

4. श्री कुमार के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र-'क' गठित करते हुये विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि॰सि॰(गोपा॰)-27-04/2017/1612—श्री विजय कुमार सिंह (आई॰डी॰-3516), कार्यपालक अभियंता, सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि॰सि॰(गोपा॰)-27-04/2017 22/नि॰सि॰(गोपा॰)-27-04/2017 22/नि॰सि॰(गोपा॰)-27-04/2017 बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-01, पडरौना के द्वारा अपने कार्य से अनुपस्थित रहने, बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण कार्य के प्रति घोर उदासीनता एवं र्काव्य के प्रति लापरवाही बरतने संबंधी अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, पडरौना के एन॰आर॰ 65, दिनांक-15.08.2017 के समीक्षेापरांत सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के आलोक में श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-09 (1) के तहत्‌ तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि मेें श्री सिंह का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, पटना निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भाा देय होगा। 4. श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017/1613—श्री मिथिलेश कुमार सिंह (आई॰डी॰-3611) तत्कालीन कार्यपालक सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य संबंधी विभागीय निदेशों की अवहेलना करने, अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित रहने, संवेदनशील कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने संबंधी मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के बेतार संदेश के समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के आलोक में श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-09(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि से श्री सिंह का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भाा देय होगा। 4. श्री सिंह के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017/1614—श्री संजय कुमार सुमन (आई॰डी॰-5089) तत्कालीन सहायक सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-02, झंझारपुर द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य संबंधी विभागीय निदेशों की अवहेलना करने, अपने कार्यक्षेत्र से अनुपस्थित रहने, संवेदनशील कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने संबंधी मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर के बेतार संदेश के समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिए गए37 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 निर्णय के आलोक में श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-09 (1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि से श्री सुमन का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भाा देय होगा।

4. श्री सुमन के विरूद्ध विहित प्रपत्र में आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

14 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 201714 सितम्बर 2017

22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017/1615—श्री बिजेन्द्र कुमार राम (आई॰डी॰-3871) तत्कालीन मुख्य सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 22/नि॰सि॰(सम॰)-02-08/2017 अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, समस्तीपुर द्वारा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण कार्य में घोर लापरवाही बरतने विभागीय दिशा निदेशों की अवहेलना करते हुए आवश्यक कार्रवाई नहीं करने एवं अपने कार्य क्षेत्र से अनुपस्थित रहने संबंधी जिलाधिकारी, दरभंगा से प्राप्त पत्र के समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिए गए निर्णय के आलोक में श्री राम को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-09 (1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि से श्री राम का मुख्यालय मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग, जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-10 के आलोक में जीवन निर्वाह भाा देय होगा।

4. श्री राम के विरूद्ध विहित प्रपत्र में प्रपत्र 'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त संयुक्त संयुक्त संयुक्त सचिव।सचिव।सचिव।सचिव।

----------------------------

26 सितम्बर 201726 सितम्बर 201726 सितम्बर 201726 सितम्बर 2017

22/नि0सि0(मोति0)-08-03/2013(अंश-1)/1721—श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मोति0)-08-03/2013(अंश-1) 22/नि0सि0(मोति0)-08-03/2013(अंश-1) 22/नि0सि0(मोति0)-08-03/2013(अंश-1) संसाधन विभाग, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना गंडक परियोजना-2009 के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग करने संबंधी वित्तीय अनियमितता एवं जानबूझकर तथ्य छिपाने आदि आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-294, दिनांक 12.03.14 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत निम्नांकित आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयीः-

(1) नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है। तकनीकी परीक्षक कोषांग, निगरानी विभाग के जाँच में पाया गया है कि स्थानीय सामग्री के प्रयोग के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा में प्रावधानित मद दर के अनुरूप किया गया है। कार्य के निरीक्षण के दौरान उनके द्वारा स्थानीय सामग्री के उपयोग का उद्‌घोषणा नहीं कर तथ्य को छिपाकर निरीक्षण प्रतिवेदन प्रतिवेदित किया गया। इससे स्पष्ट है कि उक्त अनियमित भुगतान में उनके स्तर से सहयोग करने का आरोप के लिए प्रथम दृष्टया दोषी है। श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) ने निष्कर्षतः मंतव्य गठित किया कि आरोपित मुख्य अभियंता के रूप में श्री चौधरी द्वारा कई बार उक्त कार्य का निरीक्षण करने के बावजूद अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में इन अनियमितताओं का उल्लेख नहीं किया गया है। अतः उक्त अनियमित भुगतान में आरोपित के स्तर पर सहयोग करने का आरोप सिद्ध होता है। आरोपित ने अपने बचाव-बयान में ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है जिससे यह प्रतीत होता हो कि इस अनियमित भुगतान में उन्होने सहयोग नहीं किया हो। अतः आरोपित के विरूद्ध गठित वित्तीय अनियमितता का आरोप प्रमाणित होता है।

संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2406, दिनांक 09.11.2016 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री चौधरी से द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर की मांग की गयी। श्री चौधरी ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में निम्न तथ्यों का उल्लेख किया :-

(i) संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में ऐसे किसी तथ्य एवं साक्ष्य का उल्लेख नहीं किया है जो उनके पदस्थापन काल से संबंध रखता हो। संचालन पदाधिकारी यदि उनके पदस्थापन काल की परिस्थितियों एवं अभिलेखों को गंभीरता से संज्ञान में लेते तो उन्हें स्पष्ट होता कि उनके पदस्थापन काल में ऐसी परिस्थितियाँ एवं स्थलीय/अभिलेखीय38 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 साक्ष्य उनके समक्ष नहीं लाया गया जिसके आधार पर आलोच्य कार्य में स्थानीय सामग्रियों के प्रयोग का उद्‌घोषणा अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में करते।

(ii) आलोच्य कार्य में कनीय अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता तक के पदाधिकारियों को लगाया गया था तथा कार्यों को विशिष्टि एवं गुणवत्ता के साथ कराने हेतु जाँच के लिए गुण नियंत्रण के पदाधिकारी लगे हुए थे। विपरीत परिस्थितियों में उनके द्वारा दिनांक 10.04.2011 दिनांक 04.05.2011 एवं दिनांक 11.12.2011 को स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय स्थल पर न तो स्थानीय सामग्री उपलब्ध थी और न ही इनका उपयोग होते हुए पाया गया। कनीय अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता तक के पदाधिकारियों द्वारा उनकी जानकारी में संवेदक द्वारा स्थानीय सामग्रियों (स्टोन/ मेटल/चिप्स/बालू) के उपयोग करने से तथ्य एवं साक्ष्य नहीं लाया गया। गुण नियंत्रण के पदाधिकारियों द्वारा भी स्थानीय सामग्री के उपयोग होने की बात नहीं कही गयी जिसके कारण उनके निरीक्षण प्रतिवेदन में स्थानीय सामग्री की उपयोग होने की उद्‌घोषणा नहीं की गयी।

(iii) घरेलू समस्याओं के कारण एवं बाढ़ कार्य में अतिव्यस्तता के बावजूद समय निकालकर तीन बार स्थल निरीक्षण करने एवं कार्यहित में निदेश देने का उद्‌देश्य यही था कि कार्य गुणवत्ता एवं विशिष्टि के अनुरूप रहे तथा अधीनस्थ कार्य से संबद्ध पदाधिकारी अपने कार्यों के प्रति सजग रहें। उन्होंने अधीक्षण अभियंता, शीर्ष कार्य अंचल, वाल्मीकिनगर के कार्य के प्रति उदासीन, लापरवाह एवं निष्क्रिय रहने के कारण उनका स्थानांतरण करते हुए योग्य अधीक्षण अभियंता का पदस्थापन करने हेतु पत्रांक-01, दिनांक 08.05.2011 द्वारा विभाग से अनुरोध किया गया था किन्तु उनका स्थानांतरण नहीं हुआ। इससे यह साबित होता है कि उन्हाेंने कार्यहित में लगातार प्रयास किया है तथा वे अनियमित भुगतान में सहयोग नहीं किये हैं। श्री चौधरी के विरूद्ध मुख्य आरोप यह है कि नेपाल हितकारी योजना-2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया तथा संवेदक को भुगतान वास्तविक लीड की बजाय एकरारनामा में प्रावधानित दर के अनुसार किया गया। श्री चौधरी के द्वारा कार्यों के निरीक्षण के दौरान अपने निरीक्षण प्रतिवेदन में इस बात की उद्‌घोषणा नहीं की गयी कि कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग हुआ है। श्री चौधरी ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में स्वीकार किया है कि उनके द्वारा आलोच्य कार्य का स्थल निरीक्षण दिनांक 10.04.2011 दिनांक 04.05.2011 एवं दिनांक 11.12.2011 को किया गया, किन्तु स्थल निरीक्षण के समय न तो कोई स्थानीय सामग्री भंडारित थी और न ही कार्य में स्थानीय सामग्री उपयोग किये जाने का साक्ष्य था। श्री चौधरी का यह तर्क विश्वसनीय नही है क्योंकि एक अभियंता होने के नाते प्रथम दृष्टया गुण नियंत्रण के जाँच प्रतिवेदन के अभाव में भी इस बात का पता लगाया जा सकता है कि कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग हो रहा अथवा नहीं। ऐसा नहीं है कि श्री चौधरी के निरीक्षण प्रतिवेदन के बाद स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया। स्थल निरीक्षण में कार्य में प्रयुक्त हो रहे सामग्री का प्राथमिकी निरीक्षण (Primary Inspection) करना भी श्री चौधरी का दायित्व था। निरीक्षण के दौरान उन्हें आश्वस्त होना चाहिए था कि कार्य में जिस सामग्री का उपयोग हो रहा है वे प्राकक्लन के विशिष्टि के अनुरूप है अथवा नहीं। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि आलोच्य कार्य में लगाये जा रहे स्थानीय सामग्री को श्री चौधरी द्वारा नजरअंदाज किया गया एवं इसकी उद्‌घोषणा निरीक्षण प्रतिवेदन में नहीं की गयी। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री चौधरी के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर स्वीकार योग्य नहीं माना गया।

मामले की सम्यक समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर को निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार के स्तर से लिया गया है :- "स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।" "स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।" "स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।" "स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।" उक्त निर्णित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक-681, दिनांक 28.06.2017 के माध्यम से सहमति प्रदान की गयी है।

सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री दिनेश कुमार चौधरी, तत्कालीन मुख्य अभियंता, वाल्मीकिनगर संप्रति मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :-

"स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।" "स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।" "स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।" "स्थायी रूप से निम्नतर प्रक्रम (अधीक्षण अभियंता के पद) पर पदावनति।"

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

5 अक्तूबर 20175 अक्तूबर 20175 अक्तूबर 20175 अक्तूबर 2017

सं0सं0सं0सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)-03-14/2008/22/नि॰सि॰(पट॰)-03-14/2008/22/नि॰सि॰(पट॰)-03-14/2008/22/नि॰सि॰(पट॰)-03-14/2008/1763—श्री सच्चिदानंद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता (आई॰डी॰-1654), जब कार्यपालक अभियंता (आई॰डी॰-1654), बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोकामा, शि॰-बख्तियारपुर के पद पर पदस्थापित थे, तब उनके द्वारा पटना जिलान्तर्गत पंडारक प्रखंड में बरूआने जमींदारी बांध का मरम्मति कार्य कराने में बरती गई अनियमितता की जाँच निगरानी विभाग द्वारा की गई। निगरानी विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत श्री सच्चिदानन्द सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1000, दिनांक 12.09.2012 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली 2005 के नियम 43(बी॰) में विहित रीति से निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- आरोप-01 :- आरोप-01 :- आरोप-01 :- आरोप-01 :- सिंचाई विभाग के पत्रांक-1148, दिनांक 11.10.1999 का अनुपालन नहीं करने के लिए दोषी पाए गए है।39 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 अअअआरोप-02 :- ारोप-02 :- ारोप-02 :- ारोप-02 :- प्राक्कलन के समय समर्पित प्री सेक्शन एवं कार्य प्रारंभ होने के पूर्व प्री सेक्शन में अंतर पाया गया, जिसके लिए दोषी पाए गए। आरोप-03 :-आरोप-03 :-आरोप-03 :-आरोप-03 :- बांध में मिट्‌टी भराई के क्रम में उचित प्रोफाइल नहीं बनाया गया है जिस कारण संवेदक से विपत्र की राशि की कटौती की जानी चाहिए थी, जो नहीं किया गया, जिसके लिए दोषी पाए गए। आरोप-04 :-आरोप-04 :-आरोप-04 :-आरोप-04 :- कार्य के मापी की जाँच किए बिना भुगतान करने के लिए कार्यपालक अभियंता दोषी पाए गए। आरोप-05 :-आरोप-05 :-आरोप-05 :-आरोप-05 :- रू॰ 12,76,133/- अधिकाई भुगतान की राशि संवेदक से वसूलनीय है, तथा इस अधिकाई भुगतान के लिए दोषी पाए गए। आरोप-06 :-आरोप-06 :-आरोप-06 :-आरोप-06 :- बांध के समानान्तर बिना उचित दूरी छोड़े मिट्टी कटाई कराने हेतु दोषी पाए गए। आरोप-07 :-आरोप-07 :-आरोप-07 :-आरोप-07 :- समय पर फाइन ड्रेसिंग एवं टरफिंग कार्य नहीं कराने हेतु दोषी पाए गए। आरोप-08 :-आरोप-08 :-आरोप-08 :-आरोप-08 :- एकरारनामानुसार कार्य 15.06.2008 तक पूर्ण रूपेण समाप्त कर देना था, परन्तु इसके लिए कोई समय वृद्धि की स्वीकृति नहीं दी गई जिसके लिए दोषी पाए गए। आरोप-09 :-आरोप-09 :-आरोप-09 :-आरोप-09 :- निगरानी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन मे अंकित टिप्पणी कि कार्यपालक अभियंता द्वारा प्री लेवल की जाँच असम्बद्ध प्रमंडल से करा लेने का प्रमाण पत्र प्राक्कलन पर दिया हुआ है परन्तु असम्बद्ध प्रमंडल के किसी पदाधिकारी का कहीं भी हस्ताक्षर नही किया हुआ है एवं न ही लेवल जाँच का कोई अभिलेख ही उपलब्ध कराया गया है। इस प्रकार भ्रामक तथ्य समर्पित करने के लिए दोषी पाए गए। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा के क्रम मे आरोप सं॰-2, 4, 5, 6, 8 एवं 9 को प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2683, दिनांक 17.12.2015 द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए की गई। श्री सिंह द्वारा प्राप्त उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए की गई द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा के दौरान आरोपवार निम्न तथ्य अंकित किए गए :- आरोप सं॰-02 :-आरोप सं॰-02 :-आरोप सं॰-02 :-आरोप सं॰-02 :- प्रस्तुत आरोप में प्राक्कलन के समय समर्पित प्री सेक्शन एवं कार्य प्रारम्भ होने के पूर्व के प्री सेक्शन में अंतर के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी पाया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा विषयांकित कार्य के लिए आरोपित पदाधिकारी द्वारा विशिष्ट तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में आरोप को सिद्ध पाया गया परन्तु द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में संलग्नित साक्ष्य के अवलोकन से विदित होता है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राक्कलित लेवल 90 मीटर के अंतराल पर एवं कार्यकारी लेवल 30 मीटर के अंतराल पर अलग-अलग अवधि के लिए जाने, हर समय स्टॉफ एक ही स्थान पर नहीं रखे जाने तथा एकमात्र रास्ता जमींदारी बांध होने की स्थिति में ग्रामीणों द्वारा मिट्टी काटकर, फसल ढुलाई, एव ट्रैक्टर के परिचालन हेतु सतह समतलीकरण करने के आधार पर प्राक्कलन के पूर्व एवं कार्य प्रारंभ करने के पूर्व के लेवल में अंतर होने का स्वाभाविकतः एवं प्राक्कलन पूर्व लेवल सम्बद्ध से जांचित नहीं तथा कार्य के पूर्व के लेवल को असम्बद्ध से जांचित होने को उचित माना गया है। उक्त आधार पर आरोपित पदाधिकारी को दोषी करार दिए जाने को सही प्रतीत नहीं माना गया है। प्राक्कलित प्री लेवल, अजांचित लेवल, Redundant हैं और इसका प्रभाव भुगतान पर नहीं होता है। जिसमे प्री लेवल के कारण अनियमित भुगतान का मामला बनता प्रतीत नहीं होता है। आरोप सं॰-04 :-आरोप सं॰-04 :-आरोप सं॰-04 :-आरोप सं॰-04 :- प्रस्तुत आरोप में कार्य के मापी जाँच किए बिना भुगतान करने के लिए आरोपित पदाधिकारी को दोषी माना गया है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में एकरारित राशि 2.08 करोड़ के विरूद्ध करीब रू 1.21 करोड़ भुगतान से संबंधित एक भी विपत्र की जाँच आरोपित पदाधिकारी द्वारा नही की गई और उल्टे 10 प्रतिशत जाँच के मापदंड के आधार पर शेष 40 प्रतिशत कार्य से कभी भी 10 प्रतिशत जाँच कर लिए जाने के आरोपित पदाधिकारी के पक्ष को उचित नहीं माना गया है। साथ ही रू 1.21 करोड़ के भुगतान से संबंधित कुछेक विपत्रों को भी 10 प्रतिशत के मापदंड के आधार पर 12-13 लाख रूपये की जाँच कर भुगतान करना उचित स्पीरिट में दायित्व निर्वहन कहा जा सकता था। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सिद्ध पाया गया है। संचालन पदाधिकारी के आरोपित पदाधिकारी द्वारा भुगतान पूर्व विपत्र की जाँच उनके द्वारा नहीं किए जाने के संबंध में आरोपित पदाधिकारी के पक्ष विवेचना युक्ति संगत एवं तार्किक प्रतीत होता है। जाँच प्रतिवेदन के साथ संलग्नित मापी पुस्त से आरोपित पदाधिकारी द्वारा भुगतान किए गए दो विपत्रों में से एक भी मद की मापी की जाँच नहीं किया जाना परिलक्षित होता है। आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि मुख्य सचिव के पत्रांक-462, दिनांक 30.03.1982 के कंडिका (ग) में एकरारित राशि के 10 प्रतिशत राशि या जिस कार्य में 10 से अधिक चालू विपत्र हों किसी एक विपत्र की जाँच किए जाने का उल्लेख है एवं इसी संदर्भ में आगे की विपत्रों से मापदंड के आधार पर जाँच कर लिया जाएगा। पत्रांक-462, दिनांक 30.03.1982 की कंडिका 10(ग) में उल्लेखित तथ्य की पुष्टि होती है परन्तु 10(ख) में ''प्रथम एवं अंतिम विपत्र सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभिंयता अवश्य चेक करें'' भी उल्लेखित है जिसका अनुपालन किए बिना आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रथम एवं द्वितीय चालू विपत्रों का भुगतान किया जाना परिलक्षित होता है। भविष्य के विपत्रों की जाँच मापदंड के आधार पर कर लिए जाने के आरोपित पदाधिकारी के पक्ष के संदर्भ में उनके द्वारा कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। श्री सिंह द्वारा समर्पित बचाव बयान एवं जाँच प्रतिवेदनों के आलोक में विषयांकित कार्य का दो विपत्रों की भुगतान पूर्व जाँच किए बिना ही भुगतान किए जाने के लिए श्री सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (सेवानिवृत) दोषी प्रतीत होते हैं। आरोप सं॰-05 :- आरोप सं॰-05 :- आरोप सं॰-05 :- आरोप सं॰-05 :- प्रस्तुत आरोप में रू 12,76,133/- अधिकाई भुगतान जो संवेदक से वसूलनीय है कि भुगतान के लिए आरोपी पदाधिकारी को दोषी माना गया है।40 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 आरोपी पदाधिकारी द्वारा पूर्व के स्पष्टीकरण के सदृश ही विभाग द्वारा प्री लेवल लेवलींग मशीन से लिए जाने, जाँच पदाधिकारी द्वारा मैनुअल रूप में जल सतह के उपर ही मापी किए जाने को प्रतिवेदित करते हुए जाँच पदाधिकारी द्वारा मिट्टी की गणना में जल सतह के उपर के प्री सेक्शन एरिया को सम्मिलित किए जाने के विरूद्ध आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिखाई गई प्री सेक्शन एरिया को लिए जाने को उल्लेखित किया गया है। मिट्टी की गणना में प्रीसेक्शन एरिया में आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित की गई भिन्नता एवं अधिकाई मिट्टी की मात्रा के संबंध में तकनीकी परीक्षक कोषांग से मंतव्य की माँग की गई। जिसके क्रम में निगरानी विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि ''पूर्व में आरोपित पदाधिकारी श्री सिंह द्वारा ही प्री सेक्शन से संबंधित ग्राफ की छायाप्रति को अभिप्रमाणित करते हुए जाँच पदाधिकारी को समर्पित किया गया था। उक्त ग्राफ से आरोपित पदाधिकारी द्वारा वर्णित चेनेजों पर प्री सेक्शनल एरिया की गणना का सत्यापन किया गया, जो पूर्व में समर्पित प्री सेक्शन एरिया के अनुरूप पाया गया। अतः जाँच प्रतिवेदन मे प्रतिवेदित अधिकाई मिट्टी की मात्रा को सही माना जा सकता है। इस पर पुनः गणना की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। निगरानी विभाग के उक्त प्रतिवेदन से श्री सिंह द्वारा वर्णित चेनेजों पर प्री सेक्शनल एरिया में जाँच पदाधिकारी द्वारा भूल किए जाने का बयान स्वीकार योग्य नही है। संचालन पदाधिकारी द्वारा भी उपरोक्त आरोप को निगरानी विभाग के मंतव्य के आलोक में प्रमाणित पाया गया है। अतः श्री सिंह अधिकाई भुगतान के लिए दोषी हैं। आरोप सं॰-06 :- आरोप सं॰-06 :- आरोप सं॰-06 :- आरोप सं॰-06 :- प्रस्तुत आरोप में बांध के समानांतर उचित दूरी छोड़े बिना मिट्टी कटाई कराने हेतु दोषी पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय अभिमत में स्वीकृत प्राक्कलन में अस्थाई भू-अर्जन एवं फसल मुआवजा का प्राक्कलन होने की स्थिति में अस्थाई भूमि से ही उचित दूरी छोड़ मिट्टी कटाई नहीं करने के लिए आरोप प्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित किया गया है कि सामान्यतया बांध को हाइड्रोलिक ग्रेडिएन्ट में सुरक्षित रखने के लिए उचित दूरी छोड़कर मिट्टी की कटाई की जाती है। विभागीय आदेश के अनुसार भू-अर्जन नहीं किये है, अतः बांध का सेक्शन उपलब्ध भूमि की सीमा मे रखा गया है। जिसका उल्लेख पत्रांक-2975, दिनांक 31.12.2008 के कंडिका-4 में किया गया है। बांध के दोनों तरफ सिंचाई एवं ड्रेनेज के उपयोग हेतु पइन है। मिट्टी भराई कार्य टो सं॰- 3-5 मीटर दूरी छोड़कर किया गया। प्राक्कलन में मिट्टी भराई का लीड का प्लान 15 मीटर ही है। अतः बांध के समानांतर बिना उचित दूरी छोड़े मिट्टी कार्य कराने हेतु दोषी करार देना उचित प्रतीत नहीं होता है। विभागीय समीक्षा में आरोपित पदाधिकारी, संचालन पदाधिकारी और प्रधान सचिव का 31.12.2008 के पत्र मे लिए गए स्टैण्ड से स्पष्ट है कि भू-अर्जन का प्रावधान नहीं रहने के कारण जमीन छोड़ा जाना संभव नहीं था। अतएव उक्त आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। आरोप सं॰-08 :- आरोप सं॰-08 :- आरोप सं॰-08 :- आरोप सं॰-08 :- प्रस्तुत आरोप में कार्य समाप्ति की एकरारित तिथि 15.06.2008 या परन्तु समय वृद्धि की स्वीकृति नहीं लिए जाने के लिए श्री सिंह को दोषी पाया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा मिट्टी कार्य रू 1.21 करोड़ का होने, संरचना कार्य समानुपाति प्रकृति के प्रावधान के तहत एकरारित अवधि के अन्तर्गत संवेदक से नहीं करा लिए जाने एवं उचित कारणों से ऐसा संभव नही होने की स्थिति में एकरारित अवधि को बढ़ाने की कार्रवाई नही किए जाने के लिए श्री सिंह को दायित्वहीनता एवं लापरवाही से संबंधित आरोप को प्रमाणित पाया गया है। श्री सच्चिदानन्द सिंह के बचाव बयान एवं जाँच प्रतिवेदन के आलोक में श्री सिंह का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है एवं दोषी है। आरोप सं॰-09 ः- आरोप सं॰-09 ः- आरोप सं॰-09 ः- आरोप सं॰-09 ः- प्रस्तुत आरोप में प्री लेवल की जाँच असम्बद्ध प्रमंडल से बिना कराये जांचित होने का प्रमाण पत्र प्राक्कलन पर दिए जाने एवं कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने के आलोक में भ्रामक तथ्य समर्पित किए जाने के लिए श्री सिंह को दोषी माना गया है। श्री सिंह द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिनांक 19.07.2014 को दिए स्पष्टीकरण के सदृश्य ही इसे प्रक्रियात्मक भूल मानते हुए कनीय अभियंता के सूचना के आधार पर बहुत बांधों के प्री लेवल की जाँच मुख्य अभियंता द्वारा कराए जाने एवं जाँच प्रतिवेदन समर्पित होने की स्थिति में प्राक्कलन पर प्री लेवल जांचित होने का अंकन किए जाने को प्रतिवेदित किया गया है। साथ ही कार्यकारी प्री लेवल की असम्बकद्ध प्रमंडल से जांचित होने के उपरांत ही कार्य कराया गया है। तथ्य यह है कि प्राक्कलित प्री लेवल की जाँच असम्बद्ध प्रमंडल से करा लिए जाने का विभागीय निदेश है। तदनुसार ही श्री सिंह द्वारा प्राक्कलन पर असम्बद्ध प्रमंडल से प्री लेवल जांचित होने का प्रमाण पत्र पर दिया गया, जो कि निगरानी विभाग के जाँच में सही नहीं पाया गया और न तत्संबंधी कोई अभिलेख ही उपलब्ध कराया गया। इस प्रकार भ्रामक प्रमाण पत्र प्राक्कलन पर दिया जाना परिलक्षित होता है, जिसे श्री सिंह ने प्रक्रियात्मक भूल के तहत अंकित किया जाना प्रतिवेदित किया गया है। संचालन पदाधिकारी ने इसे प्रक्रियात्मक भूल की श्रेणी में नहीं माना है एवं जाँच करने वाले किसी पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं होने की स्थिति में जानते-बुझते गलत प्रमाण पत्र दिये जाने के कदाचार को स्थापित होने को उल्लेखित किया गया है तथा आरोप प्रमाणित पाया गया है। अतः श्री सच्चिदानन्द सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत को आलेच्य कार्य से संबंधित विपत्र को बिना जाँच किए भुगतान करने, आलोच्य कार्य में अधिकाई भुगतान करने, कार्य को एकरारित तिथि के बाद समय वृद्धि स्वीकृत नहीं किए जाने एवं प्राक्कलन पर प्री लेवल असम्बद्ध से जांचित होने का प्रमाण पत्र दिए जाने के बावजूद जांचित41 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 पदाधिकारी का हस्ताक्षर एवं सम्बद्ध अभिलेख नहीं पाए जाने के मामले में भ्रामक तथ्य समर्पित करने का आरोप प्रमाणित होता है। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है :- 1. श्री सिंह को 10 % पेंशन की राशि की कटौती तीन (03) वर्षों के लिए। उक्त दण्ड के निर्णय पर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना की सहमति प्राप्त है। वर्णित स्थिति में श्री सच्चिदानन्द सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता (सेवानिवृत), आई॰डी॰-1654, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोकामा, शि॰-बख्तियारपुर को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता है। 1. श्री सिंह को 10 % पेंशन की राशि की कटौती तीन (03) वर्षों के लिए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

10 अक्तूबर 201710 अक्तूबर 201710 अक्तूबर 201710 अक्तूबर 2017

सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-22/नि0सि0(मुज0)-06-22/नि0सि0(मुज0)-06-22/नि0सि0(मुज0)-06-07/201207/201207/201207/2012/1821—श्री देवानन्द कुंवर, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल निस्सरण अनुसंधान अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को उनके उक्त अंचल में पदस्थापन अवधि के दौरान तिरहुत तटबंध के 7.50 कि0मी से 9.50 कि0मी0 के बीच एजेण्डा सं०-113/376 के तहत पहाड़पुर मनोरथ स्थल पर कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-810, दिनांक 20.07.2012 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री कुंवर से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 289 दिनांक 28.01. 15 द्वारा श्री कुंवर के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री कुंवर, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध सभी आरोपों को अप्रमाणित पाया। फलस्वरूप मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप सं०-1, आरोप सं० 2(क) के लिए विभागीय पत्रांक-2271 दिनांक 19.10.2016 द्वारा श्री कुंवर से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

श्री कुंवर, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत मामले में श्री कुंवर को आरोप मुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

अतएव उक्त निर्णय श्री देवानन्द कुंवर, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता, 203, शिवलोक अपार्टमेंट, न्यू पाटलिपुत्रा कॉलोनी, पटना-13 को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

----------------------------

10 अक्तूबर 201710 अक्तूबर 201710 अक्तूबर 201710 अक्तूबर 2017

22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2012/1822—श्री गुंजा लाल राम (आई0डी0-3798), तत्कालीन मुख्य अभियंता, सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2012 22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2012 22/नि0सि0(मुज0)-06-07/2012 जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, कटिहार को उनके पदस्थापन अवधि के दौरान दिनांक 12.06.2012 को अभियंता प्रमुख (उत्तर) द्वारा गंडक नदी के बाँये तट पर 7.50कि0मी से 9.50कि0मी0 के बीच अवस्थित पहाड़पुर मनोरथ स्थल पर निरीक्षण के क्रम में दिये गये निदेश में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-510, दिनांक 20.07.2012 द्वारा श्री राम, मुख्य अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षोपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं०-290, दिनांक 28.01.2015 द्वारा श्री राम, मुख्य अभियंता के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 (2) में विहित रीति से प्रपत्र-क में गठित निम्नलिखित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

(1) (1) (1) (1) दिनांक 11.05.2012 को प्रधान सचिव को मुजफ्फरपुर स्थित विभागीय निरीक्षण भवन में क्षेत्रीय पदाधिकारी से वार्ता के क्रम में इनके द्वारा बताया गया कि उक्त स्थल पर प्रस्तावित तीन अदद स्पर निर्माण कार्य में से दो अदद स्पर निर्माण का कार्य पुरा करा लिया गया है। जबकि दिनांक 12.06.12 को अभियंता प्रमुख (उत्तर) के स्थल निरीक्षण में उक्त दोनों स्पर का निर्माण कार्य अधुरा पाया गया। अतएव गलत सूचना देने के लिए आप दोषी हैं।

(2) (2) (2) (2) दिनांक 12.06.2012 को अभियंता प्रमुख (उत्तर) द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में कई निदेश दिया था। पुनः दिनांक 24.06.2012 को उनके स्थल निरीक्षण के क्रम में दिये गये निदेशो में से निम्नलिखित निदेशों के अनुपालन उनके द्वारा नहीं किया गया।

(क) दिनांक 12.06.12 को अभियंता प्रमुख के निरीक्षण के क्रम में स्पर सं०-3 का कार्य नहीं होने के कारण वैकल्पिक रूप से 300मी0 की लंबाई में बोल्डर रिभेटमेंट कार्य कराने हेतु एप्रोन के लिए 50-60मी0 की लंबाई में मिट्‌टी खुदाई कर दी गयी थी।

रिभेटमेंट कार्य हेतु 50-60मी0 की गयी खुदाई को अविलंब भर देने एवं ट्रैन्च के बीच में 03 स्थलों पर एन0सी0 से प्लग करने का स्थल पर उपस्थित सभी पदाधिकारियों को दिया गया था। ताकि, पानी बढ़ने पर चैनल एक्टिवेट नहीं हो। इसके अतिरिक्त एक अद्‌द क्रेटेड बेडवार जो अब Out Flank हो गया था को NSL तक रिभर साईड एवं कंट्रसाईड के NSL कोे मिलाते हुए जोड़ने का आदेश दिया गया था। ताकि, फॉल क्रियेट नहीं हो सके। उक्त निदेश का अनुपालन नहीं किया गया।42 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 (ख) तकनीकी सलाहाकर समिति की अनुशंसा के आलोक में पायलट चैनल का निर्माण नहीं किये जाने के कारण स्पर सं०-01 अपस्ट्रीम ऑफसूट चैनल को यथा संभव मैनुअल लेबर से एकटीवेट करने को कहा गया था। जिसका अनुपालन नहीं किया गया।

(ग) स्पर सं०-1 अपस्ट्रीम में तटबंध के तरफ नदी रिफटिंग की प्रवृति को देखते हुए प्रतिदिन तीन Reference point यथा स्कूल भवन, ग्रामीण सड़क एवं पुराने रिंगबांध के निकट तटबंध एवं रीभर एज की दूरी मुख्यालय में प्रतिवेदित कराने का निदेश दिया गया था। ताकि, कटाव की दर का आकलन किया जा सके। उक्त निर्देश का भी अनुपालन नहीं किया जा सका।

(3) (3) (3) (3) एजेण्डा सं०----113/376 के तहत तिरहुत तटबंध के 7.50कि0मी0 से 9.50कि0मी0 के बीच कटाव निरोधक कार्याें के तहत SRC की अनुशंसा के आलोक में उक्त स्थल पर विस्तृत सर्वेक्षणोपरांत एवं अद्यतन सेटेलाईट मैप के आधार पर पायलट चैनल के निर्माण की योजना तैयार कर समर्पित करनी थी। परन्तु आपके द्वारा उक्त अनुशंसा के आलोक में वांछित प्रस्ताव भी समर्पित नहीं किया गया।

(4) (4) (4) (4) उक्त स्थल पर भू-अर्जन की समस्या के कारण स्पर सं०-3 का निर्माण कार्य प्रारंभ होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में स्थल पर 300मी0 में बोल्डर रिभटमेंट का प्रस्तावल (लागत राशि 3 करोड़) मुख्यालय को स्वीकृति हेतु दिनांक 25.05.2012 को भेजा गया। प्रस्ताव में तटबंध से नदी की दूरी 120मी0 बतलाई गई। जबकि दिनांक 12. 06.2012 को अभियंता प्रमुख (उ0) के द्वारा स्थल निरीक्षण में तटबंध से नदी (River Edge) के बीच की दूरी 291मी0 पाई गई। उड़नदस्ता द्वारा भी स्थलीय जाँच में तटबंध से रिभर ऐज की दूरी 317 मी0 पाई गई। उक्त बोल्डर रिभटमेंट कार्य को अभियंता प्रमुख (उ0) द्वारा तकनीकी दृष्टिकोण से उपयुक्त नहीं बताया गया है। अतएव गलत स्थलीय स्थिति को दर्शाते हुए अनावश्यक रूप से बढ़ा चढ़ाकर 300मी0 की लंबाई में बोल्डर रिभटमेंट का अनुपयुक्त प्रस्ताव सम्प्रेषित करना गलत मंशा परिलक्षित करता है।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री राम, मुख्य अभियंता के विरूद्ध सभी आरोपों को अप्रमाणित पाया है। फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं० 2(ख), 2(ग) एवं 4 को अप्रमाणित पाया गया। साथ ही संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप सं०-1 2(क) एवं 3 को प्रमाणित पाते हुए असहमति के निम्न बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक-2269, दिनांक 19.10.2016 से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

आरोप सं०ः 1 -आरोप सं०ः 1 -आरोप सं०ः 1 -आरोप सं०ः 1 -दिनांक 11.06.2012 को मुजफ्फरपुर स्थित निरीक्षण भवन में वार्ता के क्रम में आपके द्वारा तत्कालीन प्रधान सचिव महोदय को बताया गया कि प्रश्नगत स्थल पर कराये जा रहे कटाव निरोधक कार्य के तहत तीन अदद स्पर में से दो अदद स्पर का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। जबकि दिनांक 12.06.2012 को तत्कालीन अभियंता प्रमुख (उ0) के स्थल निरीक्षण में पाया गया कि स्पर सं०-1 को टैगिंग बाँध Proper profile एवं उपर के लेयर में कार्य नहीं कराया गया है तथा स्पर सं०-2 में प्रथम वर्ष में क्रेटिंग का कार्य प्रगति में एवं द्वितीय स्लोप पर कार्य आरंभ नहीं किया गया है। टैगिंग बाँध भी डिजाईन सेक्शन में पूर्ण नहीं है। जिससे स्पष्ट है कि उनके द्वारा प्रधान सचिव को गलत सूचना दी गयी। संचालन पदाधिकारी के द्वारा उनके कथन की दिनांक 11.06.12 को प्रधान सचिव को निरीक्षण भवन में समीक्षा के दौरान कहा गया था कि स्पर सं० 1 का कार्य टैंगिग बाँध को छोड़कर लगभग समाप्त था एवं स्पर सं० 2 का प्रथम वर्म तक सभी कार्य समाप्त करा लिया गया है। मात्र प्रथम वर्म के उपर का द्वितीय स्लोप एवं टैगिग बाँध का कार्य प्रगति में था, को स्वीकार करते हुए कहा गया है कि कटाव निरोधक हेतु स्पर निर्माण में टैगिग बाँध एवं प्रथम वर्म के उपर के अवशेष कार्य को साधारण प्रकृति का मामूली कार्य मानते हुए आपके द्वारा Substantially complete होने की सूचना दी गयी थी। जिससे संभवतः प्रधान सचिव के मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई होगी एवं गलत सूचना देने के लिए दोषी करार दिया गया।

संचालन पदाधिकारी का यह कहना कि प्रधान सचिव के मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने के कारण गलत सूचना देने के लिए दोषी करार दिया गया है, से सहमत नहीं हुआ जा सकता है। जहाँ तक दो स्पर के कार्य पूर्ण होने की सूचना देने का प्रश्न है तो प्रधान सचिव के पत्रांक 84/ps दिनांक 18.06.12 में स्पष्ट अंकित है कि आकपे द्वारा तीन स्पर में से दो स्पर का कार्य पूर्ण होने की सूचना दी गयी है। आपके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिससे परिलक्षित हो सके कि आपके द्वारा प्रथम एवं द्वितीय स्पर के मुख्य भाग के निर्माण का Substantially complete होने की सूचना प्रधान सचिव को दी गयी थी। जबकि उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन में भी स्पर सं०-1 में टैंगिग बाँध का कार्य प्रगति में पाया गया है तथा स्पर सं०-2 में भी प्रथम वर्म पर क्रेटिंग का कार्य होते हुए पाया गया है। उसके उपर द्वितीय स्लोप तथा टैंगिग बाँध का कार्य शेष था। अभियंता प्रमुख (उ0) के दिनांक 12.06.12 को दिये गये स्थल निरीक्षणी में भी दोनों स्पर के कार्य को पूर्ण नहीं पाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि दिनांक 11.06.12 तक स्पर सं०-1 एवं स्पर सं०-2 का कार्य पूर्ण नहीं हुआ था। अतः आरोप सं०-1 प्रमाणित होता है।

आरोप सं0 2(क) -आरोप सं0 2(क) -आरोप सं0 2(क) -आरोप सं0 2(क) - संचालन पदाधिकारी द्वारा निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

(i) दिनांक 12.06.12 को स्थल पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि अपने निरीक्षण प्रतिवेदन द्वारा दिनांक 17.06.12 तक नहीं दिया जाना।43 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 (ii) दिनांक 12.06.12 को स्थल पर दिये गये मौखिक आदेश में अनेकों परिवर्तन के साथ निरीक्षण प्रतिवेदन पृष्ठांकित किया जाना।

(iii) आरोपी का कहना है कि संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ तो किया गया परन्तु आदेश की सम्पुष्टि नहीं होने के कारण भुगतान में अनिश्चितता उत्पन्न होने की आशंका के कारण कार्य बन्द कर दिया गया।

(iv) अभियंता प्रमुख (उ0) द्वारा अपने निरीक्षण प्रतिवेदन को ससमय क्षेत्रीय पदाधिकारियों को पृष्ठांकित नहीं करने एवं साथ ही उसमें फेरबदल की सूचना मिलने तथा एकरारित मदों से भिन्न मदों को कराने का मौखिक निदेश का अनुपालन द्रुतगति से कराना संभव नहीं हो सका। जिसके कारण समय से कार्य प्रारंभ नहीं हो सका।

अभियंता प्रमुख (उ0) का दिनांक 12.06.12 का निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक 13.06.12 को निर्गत है एवं उक्त प्रतिवेदन पत्रांक 1497 दिनांक 18.06.12 से पृष्ठांकित किया गया है। प्रश्न है कि दिनांक 12.06.12 को स्थल पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि में विलंब हो रहा था तो आपके द्वारा क्या कार्रवाई की गयी। जबकि बाढ़ सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में आपका दायित्व बनता था कि अभियंता प्रमुख द्वारा स्थल पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि में विलंब होने की स्थिति में अपने अधीनस्थ सभी पदाधिकारियों के बचाव बयान से परिलक्षित होता है कि दिनांक 12.06.12 के पश्चात दिनांक 18.06.12 तक स्थल पर दिये गये निदेश के अनुपालन करने के दिशा में न तो कोई रूचि ही ली गई और न ही ठोस कार्रवाई ही की गयी। अगर आपके द्वारा प्रयास किया जाता तो संभव था कि अभियंता प्रमुख (उ0) का निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक 13.06.12 को प्राप्त हो सकता था क्योंकि निरीक्षण प्रतिवेदन 13.06.12 को निर्गत हो चुका था।

OUT FLANK BOULDER BEDBAR को NSL तक जोड़ने हेतु दिये गये निदेश के अनुपालन नहीं होने के संबंध में कहा गया है कि दिनांक 12.06.12 को स्थल पर दिये गये निदेश की सम्पुष्टि दिनांक 17.06.12 तक नहीं होने तथा विभागीय पत्रांक 1497 दिनांक 18.06.12 द्वारा निर्गत निरीक्षण प्रतिवेदन में दिनांक 12.06.12 को स्थल पर बेडवार का एक्सटेंशन जियो बैग से करने का निदेश को परिवर्तित कर क्रेटेड बोल्डर से करने का निदेश प्राप्त होने के पश्चात दिनांक 19.06.12 से कार्य प्रारंभ किया गया। लेकिन दिनांक 23.06.12 को असामाजिक तत्वों द्वारा कार्य को बन्द करा दिया गया। जिसकी प्राथमिकी संवेदक के प्रतिनिधि द्वारा स्थानीय थाना में दर्ज करायी गयी तथा क्षेत्रीय पदाधिकारी द्वारा भी थाना प्रभारी को सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध किया गया। पुनः 24.06.12 से शेष कार्य NC से कराकर दिनांक 27.06.12 तक पूरा कराते हुए इसका अनुपालन प्रतिवेदन विभाग को भेजा गया है, के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया है, को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि दिनांक 12.06.12 का स्थल निरीक्षण का निरीक्षण प्रतिवेदन दिनांक 13.06.12 को विभाग से निर्गत है एवं प्रतिलिपि में उल्लेखित है कि इसकी सूचना दूरभाष से भी आपको दी गयी। आपका यह कहना है कि स्थल निरीक्षण के दौरान दिये गये निदेश को निरीक्षण प्रतिवेदन में परिवर्तित कर दिया गया, को साक्ष्य के अभाव में स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। अगर अभियंता प्रमुख द्वारा स्थल पर दिये गये निदेश में किसी तरह की दुविधा थी तो उसी समय उसका समाधान किया जाना चाहिए था अथवा अभियंता प्रमुख से पत्राचार कर मामले को निष्पादित करते हुए बाढ़ सुरक्षा जैसे कार्य को ससमय निष्पादित करना चाहिए था परन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया। अतः आरोप सं0 2(क) प्रमाणित होता है।

आरोप सं0 3 - आरोप सं0 3 - आरोप सं0 3 - आरोप सं0 3 - आपका कहना कि दिनांक 30.09.11 एवं 04.03.12 को प्राप्त Satellite Imagery के अध्ययन उपरांत श्री ब0एन0 प्रसाद की अध्यक्षता में गठित आरोप विशेषज्ञ समिति से विमर्शोपरांत पायलट चैनल की Feasibility संदिग्ध होने के कारण पायलट चैनल के निर्माण को उचित नहीं मानने के आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को तकनीकी रूप से उचित नहीं होने का जो मंतव्य दिया गया है, से निम्न तथ्यों के आधार पर असहमत हुआ गया है। (ंa) आपका कहना है कि दिनांक 30.09.11 एवं 04.03.12 को प्राप्त सेटेलाईट मैप के आधार पर उक्त स्थल पर पायलट चैनल की Feasibility संदिग्ध होने के कारण योजना प्राक्कलन तैयार करने हेतु विस्तृत सर्वेक्षण के प्राक्कलन की स्वीकृति नहीं दी गयी है। उल्लेखनीय है कि दिनांक 24.10.11 से 28.10.11 के बीच SRC की आहूत बैठक में संभवतः आप उपस्थित रहे हैं। पायलट चैनल के Feasibility के संदर्भ में बैठक में विचार विमर्श के पश्चात ही सभी पदाधिकारी के सहमति के आलोक में ही समिति द्वारा पायलट चैनल निर्माण की अनुशंसा की गयी होगी। जबकि आपको दिनांक 30.09.11 को ही प्रथम सेटेलाईट में प्राप्त हो चुका था। बाद की तिथि में कहा जाना कि पायलट चैनल का Feasibility नहीं था, को स्वीकार योग्य माना नहीं जा सकता है।

(b) यदि आपके द्वारा SRC के अनुशंसा के बाद भी समझा गया कि इस स्थल पर पायलट चैनल Feasible नहीं है तो इसकी सूचना अभी तक विभाग को क्यों नहीं दी गयी, संभव था कि स्थल की सुरक्षा हेतु विभाग द्वारा अन्य विकल्प पर विचार किया जाता। आपके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है जिससे स्पष्ट हो सके कि प्रश्नगत कार्यों का योजना प्राक्कलन पायलट चैनल Feasibilty नहीं होने के आलोक में तैयार नहीं की जा रही की सूचना विभाग को दी गयी है। (c) कार्यपालक अभियंता श्री सिंह द्वारा उक्त योजना को तैयार करने हेतु विस्तृत सर्वेक्षण का प्राक्कलन अधीक्षण अभियंता को भेजा गया तथा अधीक्षण अभियंता ने अपने पत्रांक-306, दिनांक 10.03.12 को ही अनुशंसा के साथ आपके पास स्वीकृति हेतु भेज दिया। किन्तु आपके द्वारा न तो सर्वेक्षण कार्य का प्राक्कलन ही स्वीकृत किया गया। न ही अपने अधीनस्थ पदाधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत ही कराया गया।

उक्त के आलोक में श्री राम, मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-01(निजी) दिनांक 13.05.2017 से द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया। जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें कही गयी हैं :-

44

(cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 आरोपआरोपआरोपआरोप (1) (1) (1) (1) दिनांक 11.06.12 को प्रधान सचिव को निरीक्षण भवन, मुजफ्फरपुर में प्रथम एवं द्वितीय स्पर का मुख्य भाग का निर्माण Substantially पूर्ण होने की सूचना दी गयी थी। (2) (2) (2) (2) संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए साक्ष्य की अपेक्षा किया जाना न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है। दिनांक 11.06.12 को अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय कक्ष में आहुत बैठक में कार्य की प्रगति की समीक्षा में प्रमंडल स्तर पर दिये गये प्रतिवेदन के आधार पर दिनांक 15.06.2012 को सम्पन्न राज्य स्तरीय बैठक में पत्रांक-1621, दिनांक 13.06.2012 द्वारा समर्पित प्रगति प्रतिवेदन में स्पर-1 एवं 2 की प्रगति क्रमशः 96.82 प्रतिशत एवं 77.48 प्रतिशत दर्शायी गई है। उल्लेखनीय है कि दिनांक 11.06.2012 के बैठक में Proceeding से संबंधित ऐसा कोई पत्र निर्गत नहीं है। जिसमें कार्य पूर्ण होने की सूचना प्रधान सचिव महोदय को दी गयी हो का उल्लेख हो। वस्तुतः प्रधान सचिव का पत्रांक-84/ps दिनांक 18.06.2012 को निर्गत है। जो अभियंता प्रमुख (उ0) के प्रतिवेदन पर आधारित है जबकि अभियंता प्रमुख के निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित अधिकांश तथ्य काल्पनिक एवं वास्तविक से परे है। दोनों स्पर का कार्य जून माह में पूर्ण करा लिया गया था। आरोपआरोपआरोपआरोप 2(क) 2(क) 2(क) 2(क) असहमति का बिन्दु है कि दिनांक 12.06.12 का निरीक्षण प्रतिवेदन विलंब से प्राप्त होने की स्थिति में इनके स्तर पर क्या कार्रवाई की गयी। इस संदर्भ से स्पष्ट है कि तीसरे स्पर के निर्माण में व्यवधान होने के कारण उसके D/s में 300मी0 में रिभेटमेंट कार्य का प्रस्ताव क्षेत्रीय अभियंताओं के अनुशंसा के आलोक में पत्रांक-1483 दिनांक 28.05.2012 से अभियंता प्रमुख (उ0) को समर्पित किया गया था तथा दूरभाष पर उक्त प्रस्ताव की अनुमति संसूचित की गयी। दिनांक 12.06. 12 को अभियंता प्रमुख (उ0) स्थल निरीक्षण में उक्त कार्य को बन्द करने के निदेश देते हुए काटी गई ट्रेंच को तीन जगहो पर जियो बैग से प्लग करने का निदेश दिया गया। एकरारनामा मे जियो बैग का मद नहीं रहने के कारण कार्य थोड़ा विलम्ब से प्रारम्भ करते हुए दिनांक 27.06.2012 तक ट्रेंच भर कराकर विभाग को सूचना दी गयी। पूरे बाढ़ अवधि में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराये जाने की भी आवश्यकता नही पड़ी। Out Flank बड़ेवार NSL से ट्रैकिंग का कार्य एकरारनामा में सम्मिलित रहने के कारण यह कार्य दिनांक 19.06.2012 को उच्च स्तर पर प्रारम्भ करा दिया गया। दिनांक 12.06.2012 से 18.06.2012 के बीच कार्य का अत्याधिक दबाव रहने के बाद भी दूरभाष से अभियंता प्रमुख से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया किन्तु फलाफल शुन्य रहा। दिनांक 23.06.2012 को असमाजिक तत्वो द्वारा व्यवधान उतपन्न किये जाने पर कार्य की गति प्रभावित हुई फिर भी दिनांक 27.06. 2012 तक पूर्ण कराकर विभाग को सूचना दी गयी। बाढ़ अवधि में यह स्थल पूर्णतः सुरक्षित रहा एवं अभियंता प्रमुख की सारी आशंकाएँ निर्मूल साबित हुई। उक्त से स्पष्ट है कि अभियंता प्रमुख के द्वारा निदेशित कार्य के कार्यान्वयन मे हुआ विलम्ब परिस्थितिजन्य था किन्तु विलम्ब के बाद भी स्थल सुरक्षित रहा है। आरोप सं॰-03 :-आरोप सं॰-03 :-आरोप सं॰-03 :-आरोप सं॰-03 :- दिनांक 14.09.11 को B.N Prasad बाढ़ विशेषज्ञ के निरीक्षण के समय इस स्थल पर पाईलेट चैनल के निर्माण पर विचार विमर्श के उपरान्त चैनल निर्माण की संभावना पर सहमति प्रदान नही की गयी। बाढ़ की तिथि में SRC की बैठक में मेरे प्रतिरोध के बावजूद पाईलेट चैनल निर्माण की अनुशंसा की गयी। पुनः दिनांक 04.03.2012 को अद्यतन Setellite Imagery प्राप्त करते हुए अधिनस्थों के साथ विचार-विमर्श किया गया परन्तु इसके निर्माण के तकनीकी कारणों से उपयुक्त नहीं माना गया। इसकी सूचना विभाग को नही देने के संदर्भ में कहा गया है कि बाढ़ से आक्रम्य स्थलों के सुरक्षा हेतु संबंधित मुख्य अभिंयता विभाग के साथ समान रूप से जिम्मेवार माने जोते है। उक्त कार्य के सर्वेक्षण संबंधित प्रस्ताव मेरे कार्यालय मे दिनांक 01.03.2012 को प्राप्त हुआ। सर्वेक्षण कार्य एवं तत्पश्चात निविदा प्रक्रिया में लगने वाले समय के मद्‌देनजर कार्य 15.06.2012 तक पूर्ण कराया जाना संदिगध मानते हुए अन्य विकल्प के तहत मेरे द्वारा प्रतिकूल परिस्थिति की सामना के लिये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य की पूरी तैयारी की गई थी। श्री राम मुख्य अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा मे निम्न तथ्य पाये गयेे :- आरोप सं॰-01 :-आरोप सं॰-01 :-आरोप सं॰-01 :-आरोप सं॰-01 :- जो स्पर निर्माण कार्य अधुरा रहने के बावजूद दिनांक 11.05.2012 के बैठक मे तत्कालीन प्रधान सचिव को कार्य पूर्ण होने की गलत सूचना देने से संबंधित है। यह आरोप तत्कालीन प्रधान सचिव के पत्रांक-84/PS, दिनांक 18.06.2012 में उद्धित तथ्यों यथा दिनांक 11.05. 2012 को मुजफ्फरपुर स्थित निरीक्षण भवन मे वार्ता के क्रम में आरोपी द्वारा बताया गया कि तीन अदद स्पर मे से दो अदद स्पर निर्माण का कार्य पूर्ण करा लिया गया जबकि दिनांक 12.06.2012 को अभियंता प्रमुख (उार) के स्थल निरीक्षण मे स्पर-1 एवं स्पर-2 का कार्य अधुरा पाया गया। आरोपी का कथन है कि दिनांक 11.05.2012 को तत्कालीन प्रधान सचिव महोदय को स्पर-1 का कार्य टैगिंग बाँध को छोड़कर लगभग समाप्त होने एवं स्पर-2 का प्रथम वर्म के उपर 2nd Shape एवं टैगिंग बाँध का कार्य प्रगति पर था, की सूचना दी गयी थी, को संचालन पदाधिकारी द्वारा स्वीकार करते हुए कहा गया है कि अवशेष कार्य साधारण प्रकृति का मानते हुए आरोपी द्वारा Substantially Complete होने की सूचना दी गयी थी। जिसमें संभवतः भ्रम की स्थिति उतपन्न हुई होगी एवं गलत सूचना देने के लिए दोषी करार दिया गया तथा आरोप प्रमाणित नही होने का मंतव्य दिया गया। चुँकि प्रधान सचिव के पत्रांक-84/PS दिनांक 18.06.2012 मे उद्धित है कि आरोपी द्वारा दिनांक 11.05.2012 को दोनों स्पर-1 एवं 2 का निर्माण कार्य की पूर्ण जानकारी दी गयी थी एवं इसके अतिरिक्त कोई साक्ष्य संचिका मे नही है जिससे स्थापित हो सके की आरोपी द्वारा दोनो स्पर-एवं स्पर-2 का निर्माण कार्य दिनांक 11.05.2012 तक पूर्ण कराने की45 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 सूचना की गयी है। इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी द्वारा संभवतः मौखिक रूप से प्रधान सचिव को सूचना दी गयी होगी। जिसका विवेचना करना उचित प्रतीत नही होता है परन्तु आरोपी मुख्य अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-1621, दिनांक 13.062012 से विभाग को समर्पित प्रगति प्रतिवेदन में दोनों स्पर निर्माण कार्य की प्रगति क्रमशः 96.82% एवं 77.48 प्रतिशत बताया गया है न की पूर्ण होना परन्तु तत्कालीन प्रधान सचिव के पत्रांक-84/PS दिनांक 18.06.2012 मे उद्धित तथ्यों को नकारा भी उचित नहीं है। अतएव आरोप सं॰-1 प्रमाणित नहीं होता है। आरोप सं॰-02 (क) :- आरोप सं॰-02 (क) :- आरोप सं॰-02 (क) :- आरोप सं॰-02 (क) :- संचालन पदाधिकरी ने निम्न तथ्यों के आलोक में आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया गया है। (क)(क)(क)(क) दिनांक 12.06.2012 को स्थल पर दिये गये निदेशों की सम्पुष्टि अपने निरीक्षण प्रतिवेदन द्वारा दिनांक 17.06.2012 तक नहीं किया जाना। (ख)(ख)(ख)(ख) दिनांक 12.06.2012 को स्थल पर दिये गये मौखिक निदेशों मेंं परिवर्तन के साथ निरीक्षण प्रतिवेदन पृष्ठांकित किया जाना। (ग)(ग)(ग)(ग) आरोपी का कहना कि संवेदक द्वारा कार्य प्रारम्भ किया गया था परन्तु आदेश की सम्पुष्टि नहीं होने के कारण कार्य बन्द कर दिया गया। इस संबंध में आरोपी श्री राम, मुख्य अभियंता द्वारा कहा गया है कि दिनांक 12.06.2012 को अभियंता प्रमुख (उार) द्वारा स्थल पर रिभेंटमेंट कार्य हेतु खोदे गये ट्रेंच को तीन स्थलों पर जीओ बैग से प्लग करने एवं क्षतिग्रस्त बेडवार को जीओ बैग से C/S एवं R/S के NSL से मिलाते हुए टैंग करने का आदेश दिया गया था। पुनः दिनांक 15.06.2012 को श्री संजय कुमार तिवारी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल, पटना जो स्थल निरीक्षण में अभियंता प्रमुख (उार) के साथ थें, के द्वारा कार्य से संबंधित सहायक अभियंता को वार्ता के क्रम में उक्त दिये गये निदेश में परिवर्तन होने की बात कही गयी जिसकी पुष्टि सहायक अभियंता द्वारा स्थल पंजी पर अंकित तथ्यों से होती है। फलतः संसय एवं दुविधा की स्थिति अतपन्न होने के कारण स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन प्राप्त होने का इंतजार किया जाना उचित समझा गया। तत्पश्चात दिनांक 17.06.2012 से कार्य प्रारम्भ किया गया परन्तु क्षतिग्रस्त वेडवार की मरम्मति कार्य में दिनांक 23.06.2012 को ग्रामीणों द्वारा अवयर्थ पैदा करने के बावजूद भी दिनांक 27.06.2012 तक दोनों कार्य को पूर्ण कराते हुए सूचना विभाग को दी गई तथा बाढ़ अवधि में स्थल पूर्णतः सुरक्षित रहा। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में दिनांक 12.06.2012 को स्थल पर दिये गये निदेश का अनुपालन के कार्यन्वयन में हुए विलम्ब को परिस्थितिजन्य माना जा सकता है किन्तु विलम्ब से निदेश का अनुपालन नही होने के लिये श्री राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता को दोषी नहीं माना सकता। अतः आरोप प्रमाणित नहीं होता है।

आरोप सं॰-03 (आरोप सं॰-03 (आरोप सं॰-03 (आरोप सं॰-03 (I) :- ) :- ) :- ) :- आरोपी श्री राम, मुख्य अभियंता का कथन कि दिनांक 30.09.2011 एवं 04.03.2012 को प्राप्त सेटेलाईट मैप के आधार पर पाईलट चैनल की Feasibility संदिग्ध होने के कारण योजना प्राक्कलन तैयार करने हेतु अधीक्षण अभियंता से प्राप्त विस्तृत सर्वेक्षण का प्राक्कलन की स्वीकृति नही दी गयी। चुँकि दिनांक 24.10.2011 से 28.10.2011 के बीच SRC के आहुत बैठक में श्री राम उपस्थित थें एवं पाइलेट चैनल के Feasibility के संदर्भ में विचार विमर्श के पश्चात ही समिति द्वारा पाइलेट चैनल में निर्माण की अनुशंसा की गयी होगी। अगर SRC के अनुशंसा के बाद भी स्थल पर पाइलेट चैनल की Feasibility नहीं थी तो वस्तु स्थिति की जानकारी उसी समय विभाग को दिये जाना चाहिए था। ताकि अन्य विकल्प पर विभाग द्वारा विचार किया जाता परन्तु श्री राम, मुख्य अभियंता द्वारा पाइलेट चैनल की Feasibility के संदर्भ में न तो विभाग को सूचना दी गयी, न ही अधिनस्थ पदाधिकारीयों को ही सर्वेक्षण कार्य के प्राक्कलन की स्वीकृति नहीं किये जाने के संदर्भ में अवगत कराया गया।

श्री राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता ने अपने द्वितीय कारण पृच्छा में मुख्य रूप से कहा है कि बाढ़ से अक्रम्य स्थलों की सुरक्षा हेतु संबंधित मुख्य अभियंता विभाग के साथ समान रूप से जिम्मेवार माने जाते है। सर्वेक्षण कार्य का प्रस्ताव दिनांक 01.03.2012 को प्राप्त हुआ। सर्वेक्षण कार्य के पश्चात निविदा प्रक्रिया में लगने वाले समय के मद्‌देनजर दिनांक 15.05.2012 तक कार्य पूर्ण कराया संदिग्ध मानते हुए अन्य विकल्प के तहत बाढ़ संघर्षात्मक कार्य हेतु पुरी तैयारी की गई थी परन्तु इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के बिन्दु यथा पाइलेट चैनल की Feasibility से संदर्भित सूचना विभाग को देने एवं अधीनस्थ पदाधिकारियों को पाइलेट चैनल हेतु सर्वेक्षण कार्य के प्राक्कलन की स्वीकृति की स्थिति की जानकारी देने से संबंधित न तो कोई साक्ष्य दिया गया और न ही उनका कथन की विकल्प के रूप मे बाढ़ संघर्षात्मक की पूर्ण तैयारी कर ली गई थी, से संदर्भित साक्ष्य ही दिया गया।46 (cid:18)बहार गजट, 15 नव(बर 2017 उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता को SRC के अनुशंसा के अनुपालन में पाइलेट चैनल के निर्माण का प्रस्ताव समर्पित नहीं करने के लिये दोषी माना जाता है।

समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री गुंजालाल राम, तत्कालीन मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर सम्प्रति मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, कटिहार को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

''आरोप वर्ष 2012-2013 के लिए निन्दन'' ''आरोप वर्ष 2012-2013 के लिए निन्दन'' ''आरोप वर्ष 2012-2013 के लिए निन्दन'' ''आरोप वर्ष 2012-2013 के लिए निन्दन''

उक्त निर्णय के आलोक में श्री गुंजालाल राम, मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, कटिहार को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

''आरोप वर्ष 2012-2''आरोप वर्ष 2012-2''आरोप वर्ष 2012-2''आरोप वर्ष 2012-2013 के लिए निन्दन''013 के लिए निन्दन''013 के लिए निन्दन''013 के लिए निन्दन''

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।संयुक्त सचिव।

———

अधीKकअधीKकअधीKकअधीKक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 33335555ÑÑÑÑ571+11110----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 15 November 2017. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2017-11-15.46/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2017-11-15.46.