(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत
12 प(cid:20)ष 1(cid:22)3(cid:24) (cid:25)श(cid:26)(cid:27)
(स(cid:28)(cid:26) पटन(cid:4) (cid:26)1) पटन(cid:4)(cid:30) म(cid:28)गलच(cid:4)र(cid:30) 2 जनवर(cid:15) 2(cid:26)1(cid:24) समाज कल्याण विभाग (सामाजिक सुरक्षा एवं निःशक्तता निदेशालय) ——— vf/klwpuk 19 fnlEcj 2017 बिहार दिव्यांगजन अधिकार नियमावली, 2017 सं॰ 2/सा0सु0-वि0यो0-01/2017-1822/स0क0—दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 101 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बिहार राज्यपाल एतद्द्वारा निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं :-
अध्याय-I
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ ।- (1) यह नियमावली बिहार दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 कही जा सकेगी।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगी। 2. परिभाषाएँः- (1) जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो, इस नियमावली मेंः- (क) "अधिनियम" से अभिप्रेत है, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (2016 का 49)। (ख) "प्रमाण पत्र" अधिनियम की धारा 57 की उपधारा (1) के अधीन जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र अभिप्रेत है।
(ग) "निबंधन प्रमाण पत्र" से अभिप्रेत अधिनियम की धारा 50 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत निबंध का प्रमाण पत्र है।
(ध) "प्रारूप" से इन नियमों से उपाबद्ध प्रारूप अभिप्रेत है। (ख) "राज्य सरकार" से अभिप्रेत है बिहार सरकार। (ग) "अध्यक्ष" से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन नियुक्त अध्यक्ष। (घ) "सदस्य" से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन नियुक्त सदस्य। (ड.) "सदस्य सचिव" से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन नियुक्त सदस्य सचिव। (च) "राज्य सलाहकार बोर्ड" से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन गठित राज्य सलाहकार बोर्ड। (छ) "जिला स्तरीय समिति" से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन गठित 'जिला स्तरीय समिति'।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 (ज) "अधिसूचना" से अभिप्रेत है राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना।
(झ) "आयुक्त" से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन नियुक्त राज्य आयुक्त। () "सक्षम प्राधिकारी" से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन नियुक्त सक्षम प्राधिकारी। (ट) "वर्ष" से अभिप्रेत है पहली अप्रैल को आरंभ वित्तीय वर्ष। (ठ) "विधानसभा" से अभिप्रेत है बिहार विघानसभा। (ढ़) "गैर-सरकारी सदस्य" से अभिप्रेत है ऐसा सदस्य जो सरकारी या सरकारी उपक्रम की स्थापना में नियोजित नहीं हो।
(2) शब्द और पद, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किंतु अधिनियम में परिभाषित हैं, का क्रमशः वही अर्थ होगा, जो उनका अधिनियम में है।
अध्याय-II दिव्यांगता अनुसंधान के लिए समिति
3. दिव्यांगता अनुसंधान के लिए राज्य समितिः-
(1) दिव्यांगता अनुसंधान के लिए राज्य स्तर पर समिति निम्नलिखित व्यक्तियों से मिलकर बनेगी, अर्थात् -
(i) राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट किया जाने वाला विज्ञान या औषधि अनुसंधान के क्षेत्र में वृृहत अनुभव रखने वाला एक विख्यात व्यक्ति - पदेन अध्यक्ष;
(ii) निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार - सदस्य; (iii) रजिस्ट्रीकृत संगठनों से प्रतिनिधि के रूप में पाँच विषेषज्ञ, जो अधिनियम की धारा 2 उप-धारा (ZC) के अंतर्गत विनिर्दिष्ट दिव्यांगताओेंं के पाँच समूहों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिनको राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायगा - सदस्य; परन्तु रजिस्ट्रीकृत संगठनों में से कम से कम एक प्रतिनिधि महिला होगी; (iv) निदेशक, सामाजिक सुरक्षा एवं निःषक्तता निदेशालय, बिहार - सदस्य सचिव। (2) अध्यक्ष किसी विशेषज्ञ को विशेष आमंत्रिती के रूप में आमंत्रित कर सकेगा। (3) नामनिर्दिष्ट सदस्यों की पदावधि, उस तारीख से जिसको वह अपना पद धारण करते हैं, तीन वर्ष होगी और नामनिर्दिष्ट सदस्य एक और पदावधि के लिए पुनः नामनिर्देशन के लिए पात्र होंगे। (4) आधे सदस्य बैठकों की गणपूर्ति करेंगे। (5) गैर-शासकीय सदस्य और विशेष आमंत्रिती राज्य सरकार के समूह "क" अथवा उसके समकक्ष अधिकारियों को अनुज्ञेय यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता के पात्र होंगे।
(6) राज्य सरकार समिति को उतने लिपिकीय और अन्य कर्मचारीवृंद्ध उपलब्ध कराएगी, जैसा राज्य सरकार आवश्यक समझे।
4. दिव्यांगजन को अनुसंधान का एक विषय नहीं समझा जाना।- कोई दिव्यांगजन किसी अनुसंधान का विषय नहीं होगा सिवाय तब जब अनुसंधान में उसके शरीर पर भौतिक प्रभाव अंतर्वलित हो।
5. कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया।- अधिनियम की धारा 7 के अधीन परिवादों पर कार्यवाही करने के प्रयोजन के लिए कार्यापालक मजिस्ट्रेट दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 133 से धारा 143 में उपबंधित प्रक्रिया का अनुसरण करेगा।
अध्याय-III
लिमिटेड गार्जियनषिप
6. लिमिटेड गार्जियनशिप।-
(1) जिला न्यायालय या किसी भी प्राधि—त प्राधिकारी, जिसे राज्य सरकार द्वारा स्वयं या उसके द्वारा निर्दिष्ट किया गया है, दिव्यांग व्यक्तियों को उसकी ओर से कानूनी तौर पर बाध्यकारी निर्णय लेने के लिए लिमिटेड गार्जियनशिप प्रदान करेगा।
(2) दिव्यांग व्यक्ति के लिए लिमिटेड गार्जियनशिप देने से पहले जिला न्यायालय या प्राधि—त प्राधिकारी स्वयं को संतुष्ट करेगा कि ऐसा व्यक्ति अपने स्वयं के कानूनी तौर पर बाध्यकारी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।
(3) जिला न्यायालय या प्राधि—त प्राधिकारी लिमिटेड गार्जियनशिप देने के संबंध में आवेदन प्राप्त होने की तारीख से या इस तरह के लिमिटेड गार्जियनशिप की आवश्यकता के अपने संज्ञान में आने की तारीख से एक महीने की अवधि के भीतर अधिमानतः निर्णय लेगा।
(4) उप-नियम (1) के तहत नियुक्त लिमिटेड गार्जियनशिप की वैधता प्रारंभ में पांच साल की अवधि के लिए होगा, जिसे आगे जिला न्यायालय या प्राधि—त प्राधिकारी द्वारा, यदि उचित समझती हो तो पूर्व में निहित प्रक्रिया का पालन करने की शर्तों के साथ बढ़ाया जा सकता है।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 (5) उप-नियम (1) अंतर्गत लिमिटेड गार्जियनशिप प्रदान करते समय किसी उचित व्यक्ति को लिमिटेड गार्जियनशिप के रूप में नियुक्त करने के लिए प्राथमिकता निम्न रूप में दी जाएगी - (क) दिव्यांग व्यक्ति के माता-पिता या उनके व्यस्क बच्चे। (ख) सगा भाई या बहन। (ग) अन्य रक्त रिश्तेदार या देखभाल करने वाले या उनके क्षेत्र के प्रमुख व्यक्ति।
(6) उप-नियम (1) अंतर्गत केवल उन व्यक्तियों को नियुक्त किया जाएगा जो 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं और पहले से किसी भी आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 1) में परिभाषित संज्ञेय अपराध के दोषी नहीं हैं।
(7) उप-नियम (1) के तहत नियुक्त लिमिटेड गार्जियन अपनी ओर से कानूनी तौर पर बाध्यकारी निर्णय लेने से पहले सभी मामलों में दिव्यांग व्यक्ति से परामर्श करेगा।
(8) उप-नियम (1) के तहत नियुक्त लिमिटेड गार्जियन यह सुनिश्चित करेगा कि दिव्यांग व्यक्ति के बदले लिया गया कानूनी तौर पर बाध्यकारी निर्णय उस दिव्यांग व्यक्ति के हित में है।
अध्याय- IV
शिक्षा
7. शैक्षिक संस्थानों को मान्यता प्रदान करने संबंधी नियम और शर्ते।- राज्य में सक्षम प्राधिकारी द्वारा शैक्षिक संस्थानों को मान्यता प्रदान करते समय अधिनियम की धारा 16 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
अध्याय-V
दिव्यांगजनों के लिए संस्थानों का निबंधन
8. (1) आवेदन पत्र।- दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य करने हेतु इच्छुक संस्थानों को सक्षम प्राधिकार से निबंधन प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए फार्म- A में आवेदन करना अनिवार्य होगा।
(2) आवेदन करते समय फार्म- A के साथ निम्न साक्ष्य उपलब्ध करने होंगे-
(क) दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव। (ख) संस्था का निबंधन प्रमाण पत्र, संविधान/नियमावली एवं स्मृति पत्र। (ग) विगत तीन वर्षों का वार्षिक प्रतिवेदन, अंकेक्षण प्रतिवेदन एवं प्राप्त अनुदान की विवरणी जो संस्थान द्वारा सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से निर्गत हो।
(घ) संस्थान में कार्यरत कर्मियों की संख्या एवं उनका कार्य विवरणी। (ड़) संस्थान में कार्यरत व्यवसायिकों की संख्या एवं उनकी योग्यता संबंधी विवरणी एवं आवेदक के पते का साक्ष्य।
(3) निबंधन कराने हेतु निम्न शर्तों को पूरा करना होगा -
(क) संस्था कम से कम विगत तीन वर्षों से दिव्यांगता पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य कर रहा हो। (ख) संस्था भारतीय सोसाइटी निबंधन अधिनियम, 1860 (21, 1860) अथवा किसी वैधानिक इकाई के तहत निबंधित हो।
(ग) संस्था का संचालन गैर लाभकारी हो। (घ) संस्थान में भारतीय पुनर्वास परिषद् द्वारा निबंधित व्यवसायिक नियुक्त किए गए हों। (ड़) संस्थान के पास पर्याप्त शैक्षणिक एवं ज्ञानवर्धक सामाग्री हो।
(4) निबंधन प्रमाण पत्र की विधिमान्यताः- धारा 52 के अधीन दिया गया निबंधन प्रमाण पत्र पाँच वर्षाें की अवधि के लिए प्रवृत्त रहेगा जबतक कि वह धारा 52 के अधीन प्रतिसंहृत न किया गया हो।
(5) निबंधन का नवीनीकरणः-
(क) संस्थान के निबंधन का नवीनीकरण प्रत्येक पाँच वर्ष की अवधि के लिए किया जाएगा। (ख) निबंधन प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन विधिमान्यता की अवधि के कम से कम साठ दिन पूर्व किया जाएगा।
(ग) सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवेदन प्राप्ति की तिथि से साठ दिनों के भीतर नवीनीकरण किया जाएगा। विशेष परिस्थिति में उचित कारणों के साथ यह अवधि 120 दिनों से अधिक नहीं होगी। (घ) निबंधन के नवीनीकरण हेतु इस नियमावली के नियम 8 उप-नियम (2) में वर्णित सभी साक्ष्य आवेदन के साथ पुनः समर्पित करना होगा।
(ड़) निबंधन प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन यदि विधिमान्यता की अवधि के साठ दिनों पूर्व किया गया हो तो आवेदन विचाराधीन रहने तक संस्था का निबंधन मान्य रहेगा, परंतु यदि विधिमान्यता की अवधि के साठ दिनों के भीतर आवेदन नहीं किया गया हो तो संस्था के निबंधन की वैधता विधिमान्यता की अवधि पर स्वतः समाप्त हो जाएगी।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 9. सक्षम प्राधिकारी के आदेष के खिलाफ अपील।- प्रमाण पत्र मंजूर करने से इंकार अथवा प्रमाण पत्र प्रतिसंहृत करनेवाले सक्षम प्राधिकारी के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति पैंतालीस दिनों के भीतर ऐसे इंकार या प्रतिसंहरण के विरूद्ध सरकार के पास अपील कर सकेगी तथा आवष्यकतानुसार अपीलीय प्राधिकारी षिकायतकर्त्ता की षिकायत को सुनने के पष्चात उचित निर्णय देगी। परन्तु, अपीलीय प्राधिकारी यदि उचित समझती हो कि उक्त अवधि के भीतर संस्था को अपील दाखिल न करने के पर्याप्त कारण थे तो पैंतालिस दिनों की अवधि के अवधान के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगी।
अध्याय-VI दिव्यांगता प्रमाण पत्र
10. दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदनः-
(1) विनिर्दिष्ट दिव्यांगताग्रस्त कोई व्यक्ति दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए http://www.swavlambancard.gov.in/ पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन कर सकेगा। ऑफलाईन आवेदन भी फार्म- I प्रपत्र में स्वीकार किए जायेंगे। आवेदन के साथ निम्नलिखित संलग्न होंगे- (क) निवास का साक्ष्य। (ख) दो नवीनतम पासपोर्ट आकार के फोटो और (ग) आधार नबंर या आधार नामांकन नबंर, यदि कोई हो।
टिप्पणी :- आवेदक से निवास का कोई अन्य सबूत अपेक्षित नहीं होगा, जिसके पास आधार या आधार नामांकन संख्या है।
(2) आवेदन निम्नलिखित को प्रस्तुत किया जाएगा -
(क) उस जिले, जिसमें आवेदक निवास करता है, (जैसा कि आवेदन में आवास के सबूत के रूप में वर्णन किया गया है), का सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी जो दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिसूचित हो, या
(ख) किसी सरकारी अस्पताल में संबंधित चिकित्सा प्राधिकारी, जिसमें उसने अपनी दिव्यांगता के संबंध में वह उपचार कर रहा है या उसने उपचार कराया है। परन्तु जहां दिव्यांगजन कोई अल्पव्य है या बौद्धिक दिव्यांगता से ग्रस्त है या किसी ऐसी दिव्यांगता से ग्रस्त है जो उसे स्वयं ऐसा आवेदन करने में अनफिट या असमर्थ बनाती है तो उसके निमित्त आवेदन उसके विधिक अभिभावक या इस अधिनियम के अधीन निबंधित ऐसे संगठन द्वारा किया जा सकेगा, जिसकी देखभाल के अधीन अल्पव्य है।
11. दिव्यांगता प्रमाण-पत्र का जारी किया जाना।-
(1) नियम 10 के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी आवेदक द्वारा यथा प्रस्तुत सूचना का सत्यापन करेगा और राज्य/केन्द्र सरकार द्वारा जारी सुसंगत दिशानिर्देशों के तहत अधिनियम की धारा 2 उप-धारा (ZC) के अंतर्गत परिभाषित दिव्यांगता का पता लगाएगा तथा स्वयं का यह समाधान हो जाने पर कि आवेदक दिव्यांगजन है, यथास्थिति, फार्म- II, फार्म- III और फार्म- IV में उसके पक्ष में दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करेगा। (2) सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा आवेदन की प्राप्ति की तारीख से एक माह के भीतर दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
(3) सम्यक् जांच के पश्चात् चिकित्सा प्राधिकारी-
(i) उन मामलों में स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करेगा, जहां दिव्यांगता की डिग्री में
समय के साथ परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है; या
(ii) उन मामलों में, जहां समय के साथ दिव्यांगता के स्तर में परिवर्तन की संभावना है, अस्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र देगा और प्रमाण पत्र की विधिमान्यता की अवधि को उपदर्शित करेगा।
(4) यदि किसी आवेदक को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पात्र नहीं पाया जाता है तो सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी उचित कारणों के साथ लिखित में उसे फार्म- V में आवेदन की प्राप्ति की तारीख से एक मास की अवधि के भीतर सूचित करेगा।
(5) इस नियम के अधीन दिव्यांगता प्रमाण पत्र यदि मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के स्तर से जारी न होकर अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया हो तो ऐसी स्थिति में सभी वांछित कागजात के साथ निर्गत दिव्यांगता प्रमाण पत्र की एक प्रति उस जिले के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा।
(6) दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाईन प्लेटफॉर्म पर आवेदन राज्य सरकार द्वारा इसे अधिसूचित करने की तारीख से मंजुर किया जाएगा।5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 12. पहचान पत्रः-
(1) प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा निर्गत दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर यूनिक पहचान पत्र (Unique Disability ID Card) प्राप्त करने का हकदार होगा। (2) यूनिक पहचान पत्र आवेदक द्वारा निर्दिष्ट पते पर निबंधित डाक के माध्यम से भेजा जाएगा। यूनिक पहचान पत्र को ऑनलाईन पोर्टल http://www.swavlambancard.gov.in/ से भी डाउनलोड किया जा सकेगा।
(3) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट पहचान पत्र/ दिव्यांगता प्रमाण पत्र घारक दिव्यांग व्यक्ति सरकारी या गैर-सरकारी संगठनों की स्कीमों के अधीन अनुमान्य सुविधाएं, रियायतें एवं लाभ प्राप्त करने का हकदार होगा।
(4) दिव्यांग व्यक्ति के पक्ष में सम्यक रूप से निर्गत पहचान पत्र (Unique Disability ID Card) पेश करने मात्र से ही वह रेल रियायत/सुविधाएं वायुयान, ट्राम, बस अथवा सरकारी उपक्रम या निगम/निजी संगठनों के स्वामित्व वाले परिवहन के अन्य साधनों की दशा में समान रियायत दावा, किसी अन्य प्राधिकारी से प्राप्त कोई अन्य प्रमाण पत्र दिये बिना करने का हकदार होगा।
(5) एक बार निर्गत पहचान पत्र, निर्गत किये जाने की तारीख से पहचान पत्र पर अंकित अवधि के लिए विधिमान्य होगा तथा इस अवधि की समाप्ति के पश्चात छः माह के भीतर नवीकृत करा लेना होगा।
13. निरसित अधिनियम के अधीन जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र की विधिमान्यता।- निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) के अधीन जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र उसमें विनिर्दिष्ट अवधि तक विधिमान्य बना रहेगा।
14. दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी के निर्णय के खिलाफ अपील।- (1) नियम 11 अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी द्वारा दिव्यांगता प्रमाण पत्र संबंधी लिए गए निर्णय से व्यथित कोई व्यक्ति निर्णय लिए जाने के नब्बे दिनों के अंदर अधिनियम की धारा 59 की उप-धारा (1) के तहत राज्य सरकार द्वारा प्राधि—त अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष निम्नलिखित तरीके से अपील कर सकेगाः-
(क) अपील में संक्षिप्त पृष्ठभूमि और अपील करने का कारण वर्णित होगा। (ख) अपील के साथ सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्र या
अस्वीकृति के पत्र की एक प्रति संलग्न की जाएगी।
(ग) यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति नाबालिग अथवा गंभीर रूप से दिव्यांगता से ग्रसित होने के कारण अपील करने में सक्षम नही हो, तो ऐसी स्थिति में उसके कानूनी (legal) या लिमिटेड गार्जियन अपील कर सकेंगें।
(2) अपील की प्राप्ति पर, अपीलीय प्राधिकारी अपीलकर्त्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करेगा तथा उचित एवं तर्कसंगत विस्तृत आदेश पारित करेगा।
(3) उप-नियम (1) के तहत अपील की गई सभी अपील का निर्णय शीघ्रता-शीघ्र किया जाएगा और किसी भी स्थिति में यह अवधि अपील प्राप्ति की तारीख से साठ दिनों से अधिक नहीं होगी।
अध्याय-VII राज्य सलाहकार बोर्ड
15. राज्य सलाहकार बोर्ड का गठन।- अधिनियम की धारा 66 के अंतर्गत दिव्यांगता पर राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की कुल संख्या न्यूनतम 39 एवं अधिकतम 41 होगी, जिसका स्वरूप निम्न्वत् होगाः- (क) मंत्री स्तरीय (कुल संख्या = 01)
- माननीय मंत्री, समाज कल्याण विभाग - अध्यक्ष।
(ख) विभाग प्रमुख/सचिव स्तरीय सदस्य (कुल संख्या = 13)
- प्रधान सचिव/ सचिव, समाज कल्याण विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, शिक्षा विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, वित्त विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, स्वास्थ्य विभाग - सदस्य।6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 - प्रधान सचिव/ सचिव, ग्रामीण विकास विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, पंचायती राज विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, उद्योग विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, श्रम संसाधन विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, विज्ञान एवं प्रवैधिकी विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, सूचना प्रवैधिकी विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, कला संस्—ति एवं युवा विभाग - सदस्य। - प्रधान सचिव/ सचिव, पथ निर्माण विभाग - सदस्य।
(ग) बिहार विधान सभा के सदस्य (कुल संख्या = 03) - बिहार विधान सभा के तीन सदस्य जिनमें दो का चयन विधान सभा तथा एक का चयन विधान परिषद द्वारा किया जाएगा - सदस्य। (घ) राज्य सरकार द्वारा नामित सदस्य (कुल संख्या = 22 - 24) -
(i) दिव्यांगता एवं पुनर्वास क्षेत्र के विशेषज्ञ (कुल संख्या = 05) - समाजिक सुरक्षा निदेशालय द्वारा दिव्यांगता एवं पुनर्वास क्षेत्र के कुल पॉच विशेषज्ञों को नामित किया जाएगा - सदस्य।
(ii) जिलों का प्रतिनिधित्व करने हेतु चक्रानुक्रम आधारित नामित सदस्य (कुल संख्या = 05) - पाँच जिलों से चक्रानुक्रम के आधार पर जिला पदाधिकारी द्वारा एक-एक सदस्य नामित किया जाएगा - सदस्य।
(iii) गैर-सरकारी संगठनों/समूहों का प्रतिनिधित्व करने हेतु नामित सदस्य (कुल संख्या = 10) - दिव्यांगता प्रक्षेत्र के गैर-सरकारी संगठनों/समूहों का प्रतिनिधित्व करने हेतु कुल दस सदस्यों को समाज कल्याण विभाग द्वारा नामित किया जाएगा, जो अधिमान्तः दिव्यांगजन हों तथा जिनमें कम से कम पाँच महिलाएं, एक अनुसूचित जाति एवं एक अनुसूचित जनजाति की श्रेणी से हों - सदस्य।
(iv) बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज़ के प्रतिनिधि (अधिकतम संख्या = 03) - बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज़ से न्यूनतम एक सदस्य तथा अधिकतम तीन सदस्यों को नामित किया जाएगा - सदस्य।
(v) निदेशक, सामाजिक सुरक्षा एवं निःशक्तता निदेशालय, बिहार, पटना (कुल संख्या = 01) - सदस्य सचिव।
16. राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की सेवाएँ एवं शर्तेंः-
(1) नियम 15, उप-नियम (घ) अंतर्गत नामित सदस्यों का कार्यकाल उनके नामित होने की तिथि से तीन साल की अवधि का होगा। किसी सदस्य की अवधि समाप्त होने के बावजूद अपने उतराधिकारी के आभाव में उसी कार्यालय में पदस्थापित होने की स्थिति में यह अवधि बढ़ भी सकती है।
(2) राज्य सरकार यदि उचित समझती हो तो नियम 15, उप-नियम (घ) अंतर्गत नामित किसी भी सदस्य को उनपर लगे आरोपों पर उचित कारण प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किए जाने के पश्चात् उनके कार्यकाल समाप्ति से पूर्व हटा सकती है।
(3) नियम 15, उप-नियम (घ) अंतर्गत नामित कोई भी सदस्य यदि अपने कार्यालय के पद से इस्तीफा देता है तो ऐसी स्थिति में बोर्ड में उसका पद रिक्त हो जाएगा।
(4) राज्य सलाहकार बोर्ड में आकस्मिक रिक्तियाँ होने की स्थिति में उस रिक्ति को नए सिरे से नामित कर भरना होगा तथा नामित सदस्य उस रिक्त पद के शेष कार्य अवधि के लिए पद ग्रहण करेंगे।
(5) नियम 15, उप-नियम (घ- i एवं iii) अंतर्गत नामित सदस्यों बोर्ड में पुर्ननामित किए जाने के लिए योग्य होंगे।
(6) नियम 15, उप-नियम (घ- i एवं ii) अंतर्गत नामित सदस्य को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित भत्ता देय होगा।7 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 17. राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की अयोग्यता संबंधी शर्तेंः- (1) वैसे लोग राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य नहीं हो सकते जो -
(क) किसी भी समय दिवालिया घोषित रहे हों या होने के स्थिति में हों अथवा जिन्होंने अपना कर्ज अदा नहीं किया हो; या
(ख) सक्षम न्यायालय द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित हो; या (ग) किसी वैसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो राज्य सरकार की नजर में नैतिक अधमता की श्रेणी में आता हो; या
(घ) इस अधिनियम के तहत किसी भी समय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया होे; या (ड़) राज्य सरकार की नजर में राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य के पद का दुरुपयोग किया हो तथा पद पर बने रहकर आमजन के हितों को हानि पहुँचाया हो।
(2) राज्य सरकार किसी भी सदस्य को हटाने का कोई आदेश तब तक नहीं दे सकती, जब तक संबंधित सदस्य को अपने खिलाफ कारण बताने का उचित मौका नहीं दिया गया हो। (3) नियम 15, उप-नियम (घ- 1 एवं 3) अंतर्गत नामित सदस्यों को राज्य सलाहकार बोर्ड की सदस्यता से एक बार हटाये जाने के उपरांत उन्हें इस बोर्ड में पुनर्नामित नहीं किया जायेगा। (4) यदि कोई भी सदस्य नियम 17, उप-नियम (1) अंतर्गत वर्णित अयोग्यता संबंधी शर्तों के अधीन आता है तो बोर्ड के सदस्य का वह पद रिक्त समझा जाएगा।
18. राज्य सलाहकार बोर्ड के कार्य।- राज्य सलाहकार बोर्ड दिव्यांगता के विषय पर राज्य की एक परामर्शी एवं सलाहकार निकाय होगी, जो दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण एवं उनके अधिकारों के सम्पूर्ण संरक्षण के लिए राज्य के व्यापक नीति का सतत् मूल्यांकन को बढ़ावा देगी। राज्य सलाहकार बोर्ड के कार्य निम्न्वत् होंगे-
(1) दिव्यांगता संबंधी नीतियों, कार्यक्रमों, अधिनियमों एवं परियोजनाओं पर राज्य सरकार को सलाह देना।
(2) दिव्यांगजनों के मुद्दों के समाधान हेतु राज्य स्तरीय नीति तैयार करना। (3) राज्य सरकार के सभी विभागों एवं दिव्यांगता-संबंधी मामलों पर कार्य करने वाले राज्य के सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों द्वारा संचालित गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करना तथा उसकी समीक्षा करना।
(4) राज्य की योजनाओं में दिव्यांगजनों हेतु योजनाओं एवं परियोजनाओं का समावेश करने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों एवं संबंधित प्राधिकारों के समक्ष उनके मुद्दों को उठाना।
(5) सामान्य लोगों की तरह ही दिव्यांगजनों के सामाजिक जीवन में समान भागीदारी, आधारभूत संरचनाओं एवं सेवाओं तक पहुँच, अभेदभाव, उचित सुविधाएं (रीज़नेबल एकोमोडेशन) एवं सुगम पहुँच की उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु सुझाव देना।
(6) दिव्यांगजनों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु तैयार किए गए कानूनों, नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभाव का मूल्यांकन एवं निगरानी करना।
(7) राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर दिये गए दिव्यांगता प्रक्षेत्र से संबन्धित अन्य दायित्वों का निर्वहन करना।
19. स्कार्ट के रूप में सहयुक्त व्यक्ति।- नियम 15 के अधीन राज्य सलाहकार बोर्ड का कोई दिव्यांग सदस्य, जिसे सहयुक्त व्यक्ति की आवश्यकता है, अध्यक्ष के पूर्वानुमोदन से स्कार्ट के रूप में सहयुक्त व्यक्ति के साथ बैठक में भाग ले सकेगा।
20. राज्य सलाहकार बोर्ड संचालन की शर्तेंः- 1. सदस्यता नामावली- सदस्य सचिव सदस्यों के नाम एवं पता का अभिलेख रखेगा। 2. पता परिवर्तन- यदि कोई सदस्य अपना पता में परिवर्तन करता है तो वह सदस्य सचिव को अपना नया पता अधिसूचित करेगा, जो तदुपरान्त कार्यालय अभिलेख में उसका नया पता दर्ज करेगा। यदि वह अपना नया पता अधिसूचित करने में असफल रहता है तो कार्यालय अभिलेख में दर्ज पता ही सभी प्रयोजनों के लिए उसका सही पता माना जाएगा।
3. दैनिक भत्ता और यात्रा भत्ता-
(i) राज्य सलाहकार बोर्ड के वैसे सदस्य जो स्थानीय हैं एवं पटना में निवास करते हैं, समिति की प्रत्येक संपन्न बैठक के लिए 2000/- रूपये प्रतिदिन की दर से दैनिक भत्ता के रूप में उन्हें भुगतान किया जाएगा।
(ii) राज्य सलाहकार बोर्ड के गैर-सरकारी सदस्य (नियम 15, उप-नियम 'ग' को छोड़कर) जो स्थानीय नहीं हैं, उन्हें संपन्न बैठक के प्रत्येक दिन के लिए उतना ही दैनिक भत्ता एवं यात्रा भत्ता का भुगतान किया जायेगा, जितना राज्य सरकार के समूह "क" अथवा उसके समकक्ष अधिकारियोंं को8 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 देय है। परन्तु गैर सरकारी सदस्यों को वित्त विभाग के पूर्वानुमोदन के बिना हवाई जहाज से यात्रा करने की स्वी—ति नहीं होगी।
(iii) राज्य विधानसभा के सदस्य की दशा में जो राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी हों, जब विघान मंडल सत्र में न हों और सदस्य द्वारा यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये जाने पर कि उसने इसी यात्रा और ठहराव के लिए किसी अन्य सरकारी स्रोत्र से कोई भत्ता नहीं लिया है, उक्त दैनिक भत्ता एवं यात्रा भत्ता का भुगतान विधानसभा के सदस्य के रूप में उसको अनुमान्य दर पर किया जाएगा। (iv) राज्य सलाहकार बोर्ड के किसी सरकारी सदस्य को यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर उसने इसी यात्रा और ठहराव के लिए किसी अन्य सरकारी स्त्रोत से कोई ऐसा भत्ता प्राप्त नहीं किया गया है, तब उसे उस सरकार के जिस संवर्ग के अधीन वह सेवा दे रहा है, सुसंगत नियमों के अधीन अनुमान्य दरों पर दैनिक एवं यात्रा भत्ता का भुगतान किया जाएगा।
(v) नियम 19 के अधीन सहयुक्त व्यक्ति को दैनिक भत्ता एवं यात्रा भत्ता उसी दर और उसी रीति से प्राप्त करने का अधिकार होगा, जिस दर और रीति से राज्य सलाहकार बोर्ड के गैर-सरकारी/सरकारी सदस्यों को देय है।
21. राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की बैठकः-
(1) राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों की बैठक प्रत्येक छः माह में कम-से-कम एक बार अनिवार्य रूप से होगी, जिसमें बोर्ड राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के कार्यप्रणाली का अवलोकन करेगी।
(2) राज्य सलाहकार बोर्ड की बैठक प्रायः अघ्यक्ष द्वारा यथा नियत तारीख को राज्य की राजधानी में निर्धारित स्थल पर होगी।
(3) राज्य सलाहकार बोर्ड के दस से अन्यून सदस्यों के लिखित आग्रह पर अध्यक्ष बोर्ड की विशेष बैठक बुला सेकेंगें।
(4) साधारण बैठक की नोटिस स्पष्ट पन्द्रह दिन पूर्व तथा विशेष बैठक की नोटिस स्पष्ट पाँच दिन पूर्व, नोटिस में बैठक का समय एवं स्थान तथा उसमें सव्यवहार किए जाने वाले कामकाज का विवरण विनिर्दिष्ट करते हुए सदस्य-सचिव द्वारा सदस्यों को दी जायगी। (5) बैठक की नोटिस सदस्यों को दूत द्वारा या नवीनतम संचार स्त्रोत के अनुसार उनके आवास या कारबार स्थल पर निबंधित डाक से अथवा मामले की परिस्थिति के अनुसार ऐसी अन्य रीति से दी जायगी जिसे अध्यक्ष उचित समझे।
(6) कोई भी सदस्य किसी मामला को बैठक में विचारार्थ लाने का तब तक हकदार नहीं होगा जब तक उसके लिए उसने सदस्य सचिव को दस दिन पूर्व की नोटिस नहीं दी हो अथवा अध्यक्ष ऐसा करने के लिए स्वविवेकानुसार उसे अनुज्ञा न दी हो।
(7)(i) राज्य सलाहकार बोर्ड अपनी बैठक अन्य या किसी विशिष्ट दिन के लिए स्थगित कर सकेगी। (ii) जहाँ राज्य सलाहकार बोर्ड की बैठक किसी कारणवश स्थगित की जाती है, तो ऐसी बैठक की नोटिस विहित निर्धारित माध्यम से सभी सदस्यों को दी जाएगी।
(8) पीठासीन पदाधिकारी - अध्यक्ष ऐसी प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता करेगा जिसमें वह उपस्थित हो तथा उसकी अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यगण बैठक की अध्यक्षता के लिए अपने में से एक सदस्य का चुनाव कर लेंगे।
(9) गणपूर्ति -
(i) कुल सदस्यों की एक तिहाई से बैठक की गणपूर्ति होगी। (ii) यदि किसी बैठक के लिए नियत किसी समय पर अथवा बैठक के दौरान कुल सदस्य संख्या की एक तिहाई से कम सदस्य उपस्थित हों तो अध्यक्ष उस बैठक को ऐसे कुछ या अगले दिन या किसी आगामी तिथि के लिए, जिसे वह उचित समझे, स्थगित कर सकेगा।
(iii) स्थगित बैठक के लिए गणपूर्ति आवश्यक नही होगी। (iv) किसी ऐसे विषय पर जो यथा स्थिति, साधारण या विशेष बैठक की कार्यसूची में
शामिल न हो, स्थगित बैठक में विचार नहीं किया जाएगा।
(10) राज्य सलाहकार बोर्ड का कार्यवृत-
(i) बैठक में उपस्थित सदस्यों के नाम तथा बैठक की कार्यवाही को कार्यवाही पुस्तिका में दर्ज किया जाएगा तथा उसे सदस्य-सचिव द्वारा उस प्रयोजनार्थ संधारित किया जाएगा।
(ii) प्रत्येक उत्तरवर्ती बैठक के प्रारभ्भ में पूर्ववती बैठक के कार्यवृत पढ़ा जाएगा तथा बैठक के पीठासीन पदाधिकारी द्वारा संपुष्ट किया जायेगा और उस पर हस्ताक्षर किया जाएगा।9 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 (iii) सदस्य-सचिव के कार्यालय में कार्यालय अवधि के दौरान किसी भी सदस्य के
निरीक्षण हेतु कार्यवाही पुस्तिका खुली रहेगी।
(11) बैठक में किये जाने वाले कामकाज-
(i) पीठासीन पदाधिकारी बैठक में व्यवस्था बनाए रखेगा। (ii) पीठासीन पदाधिकारी की अनुज्ञा के बिना, किसी बैठक में, ऐसे किसी कामकाज का सव्यवहार नहीं किया जाएगा जो कार्यसूची में दर्ज न हो अथवा किसी सदस्य द्वारा जिसकी नोटिस नहीं दी गयी हो।
(iii) जब तक पीठासीन पदाधिकारी की अनुज्ञा से बैठक में निश्चय न किया जाए तब तक किसी बैठक में कार्यसूची में दर्ज क्रम से ही किसी कामकाज का सव्यवहार किया जाएगा।
(iv) या तो बैठक के प्रारभ्भ में या बैठक के दौरान प्रस्ताव पर, वाद विवाद समाप्त होने पर, पीठासीन पदाधिकारी या कोई सदस्य कार्य सूची में यथा दर्ज कामकाज के क्रम में परिवर्तन की सलाह दे सकेगा और यदि अध्यक्ष सहमत हो तो ऐसा परिवर्तन किया जाएगा।
(12) बहुमत द्वारा विनिश्चत- बोर्ड की बैठक में विचारित सभी प्रश्नों का विनिश्चय एवं मत देने वाले सदस्यों के बहुमत और समान मतों की दशा में, प्रश्न का विनिश्चय अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में, अध्यक्षता करने वाले सदस्य के निर्णायक मत द्वारा होगा।
(13) अविधिमान्य्- राज्य सलाहकार बोर्ड की कोई कार्यवाही समिति में किसी रिक्ति या समिति के गठन में किसी त्रुटि मात्र के चलते अविधिमान्य नहीं होगी।
अध्याय-VIII जिला स्तरीय समिति 22. अधिनियम की धारा 72 अंतर्गत जिला स्तरीय समिति का स्वरूप निम्नवत् होगाः- 1. जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा - अध्यक्ष। 2. सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग - सदस्य सचिव । 3. असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी - सदस्य। 4. जिला शिक्षा पदाधिकारी - सस्दय। 5. जिला परिवहन पदाधिकारी - सस्दय। 6. रेड क्रॉस सोसाईटी के प्रतिनिधि - सदस्य। 7. अधिनियम की धारा 2 उप-धारा (ZC) के अंतर्गत परिभाषित दिव्यांगता का प्रतिनिधित्व करने हेतु चक्रानुक्रम आधारित दिव्यांगजन - सदस्य।
8. दिव्यांगता प्रक्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों/समूहों के प्रतिनिधित्व करने हेतु चक्रानुक्रम आधारित प्रतिनिधि - सदस्य।
9. चक्रानुक्रम आधारित दिव्यांगता एवं पुनर्वास क्षेत्र के विषेषज्ञ - सदस्य। 10. राष्ट्रीय न्यास अंतर्गत गठित लोकल लेवल कमिटी के प्रतिनिधि - सदस्य। 11. अध्यक्ष द्वारा मनोनित चक्रानुक्रम आधारित सामाजिक कार्यकर्त्ता - सदस्य। 12. चक्रानुक्रम आधारित दो अनुमंडल पदाधिकारी - सदस्य।
23. जिला स्तरीय समिति के सदस्यों के सेवाएॅ एवं शर्ते तथा संचालन की शर्ते राज्य सलाहकार बोर्ड हेतु अंतर्निहित नियमों के अनुरूप होगी।
24. जिला स्तरीय समिति के कार्य।-
(1) दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास और सशक्तिकरण से संबंधित मामलों पर जिला प्रशासन को सलाह देना।
(2) अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन और जिला प्राधिकरणों के अधीन बनाए गए नियमों की निगरानी करना।
(3) दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में जिला प्राधिकरणों की सहायता करना।
(4) जिला प्राधिकरण द्वारा अधिनियम के प्रावधानों के गैर-कार्यान्वयन से संबंधित शिकायतों पर गौर करना और ऐसी शिकायतों का निवारण करने के लिए संबंधित प्राधिकरण को उचित उपाय सुझाना।
(5) अधिनियम की धारा 23 के उप-धारा (4) के तहत जिला स्तर की प्रतिष्ठानों द्वारा की गई कार्रवाई से प्रभावित सरकारी प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों द्वारा की गई अपील पर विचार करना एवं उचित उपाय सुझाना ।10 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 (6) राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सौंपी गयी अन्य कार्य दायित्वों का निर्वहन करना।
अध्याय-IX दिव्यांग व्यक्तियों के लिए राज्य आयुक्त
25. राज्य आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए अर्हताः-
(1) अधिनियम की धारा 79 की उप-धारा 1 अंतर्गत राज्य आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए कोई व्यक्ति पात्र तभी होगा जब-
(क) वह दिव्यांगजनों के पुनर्वास/सशक्तिकरण के क्षेत्र में विशेष ज्ञान अथवा व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया हो।
([k) वह भर्ती के वर्ष की 1 जनवरी को 60 वर्ष से कम की उम्र का हो। (ग) वह केन्द्र या राज्य सरकार की सेवा में है तो वह पद पर नियुक्ति से पूर्व ऐसी सेवा से सेवानिवृति लेगा।
(2) राज्य आयुक्त की नियुक्ति की शैक्षणिक योग्यता निम्नवत् होगी -
(i) अनिवार्य योग्यता- किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक; (ii) वांछित योग्यता- सामाजिक कार्य या विधि प्रबंध या मानव अधिकार या पुनर्वास या दिव्यांगजनों की शिक्षा में मान्यता प्राप्त डिग्री या डिप्लोमा;
(3) राज्य आयुक्त की नियुक्ति हेतु अनुभव- समूह ''क'' अथवा समकक्ष स्तर पर कम से कम 20 वर्ष का कार्यानुभव, जिनमें निकट पूर्व में न्यूनतम 3 वर्ष का दिव्यांगजनों के पुनर्वास/सशक्तिकरण के क्षेत्र में निम्न सेक्टर में कार्य करने का अनुभव हो।
(i) केन्द्र या राज्य सरकार। (ii) पब्लिक सेक्टर उपक्रम या अर्ध-सरकारी या स्वायत्त निकाय। (iii)निबंधित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्वैच्छिक संगठन।
26. राज्य आयुक्त की नियुक्ति की विधि।-
(1) राज्य सरकार राज्य आयुक्त के पद की रिक्ति होने से छह मास पूर्व कम से कम दो राष्ट्रीय स्तर के अंग्रेजी और हिंदी के दैनिक समाचार-पत्रों में पद के लिए पात्र अभ्यर्थियों, जो नियम 25 में विहित अहर्ताओं को पूरा करते हैं, से आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन देगी। (2) राज्य सरकार द्वारा छानबीन-सह-चयन समिति का गठन किया जाएगा, जो उप-नियम (1) के तहत प्राप्त आवेदनों के जॉचोंपरांत तीन उपयुक्त अभ्यार्थियों के पैनल की नियुक्ति हेतु सिफारिश करेगी।
(3) छानबीन-सह-चयन समिति का गठन उप-नियम (2) के तहत समाज कल्याण विभाग द्वारा समय-समय पर जारी अनुदेशों के अनुसार किया जाएगा।
(4) उप-नियम (2) के तहत गठित समिति द्वारा सिफारिश किए गए पैनल में उन व्यक्तियों में से जिन्होंने उप-नियम (1) में वर्णित विज्ञापन के प्रत्युत्तर में आवेदन किया हो तथा केन्द्र/ राज्य सरकार अंतर्गत सेवारत अन्य इच्छुक पात्र व्यक्ति, जिन्हें समिति उचित समझे, व्यक्ति हो सकते हैं।
(5) राज्य सरकार छानबीन-सह-चयन समिति द्वारा उप-नियम (2) में सिफारिश किए गए किसी एक अभ्यर्थी को राज्य आयुक्त नियुक्त करेगी।
27. राज्य आयुक्त पदावधि :-
(1) राज्य आयुक्त की पदावधि, उस तारीख से जिस दिन से वह पद धारण करता है, से तीन वर्ष या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वत्तर हो, होगी।
(2) कोई व्यक्ति राज्य आयुक्त के रूप में अधिकतम दो कार्यकाल या जब तक कि वह पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेता है, इनमें से जो भी पूर्वत्तर हो, के लिए सेवा कर सकेगा। (3) राज्य सरकार राज्य आयुक्त की पदावधि की समाप्ति पर उप-नियम (2) के तहत विस्तार दे सकेगी।
28. राज्य आयुक्त का वेतन, भत्ता एवं अन्य परिलब्धियॉः-
(1) राज्य आयुक्त, बिहार राज्य सरकार के सचिव को उपलब्ध वेतन, भत्ता एवं अन्य परिलब्धियों का हकदार होगा।11 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 (2) जहॉ राज्य आयुक्त कोई सेवानिवृत्त सरकारी सेवक या सरकार द्वारा वित्त पोषित किसी संस्था या स्वायत निकाय का सेवानिवृत कर्मचारी है और जो ऐसी पूर्व सेवा की बाबत पेंशन प्राप्त कर रहा है वहां उसे इन नियमों के अधीन अनुज्ञेय वेतन में से पेंशन की रकम को घटा दिया जाएगा, और यदि उसने पेंशन के किसी भाग के बदले उसका सारांशित मूल्य प्राप्त किया है, वहां पेंशन के ऐसे सारांशित भाग की रकम को भी वेतन में से घटा दिया जाएगा।
(3) राज्य आयुक्त कार्यालय के अन्य पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति इस प्रयोजनार्थ पृथक रूप से बनायी जानेवाली भर्ती नियमावली के अनुसार की जायेगी।
29. त्याग पत्र और हटाया जानाः-
(1) राज्य आयुक्त, अपने हस्ताक्षर के अधीन राज्य सरकार को संबोधित एक लिखित सूचना देकर अपने पद से त्यागपत्र दे सकेंगे।
(2) राज्य सरकार किसी व्यक्ति को राज्य आयुक्त के पद से हटा सकेगी, यदि वह-
(क) अनुन्मोचित दिवालिया हो जाता है; या (ख) अपने कार्यकाल के दौरान किसी संदाययुक्त नियोजन में लगता है या उसके कार्यालय के कर्तव्यों से परे कोई क्रियाकलाप करता है; या
(ग) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है या कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है, जिसमें राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता अंतर्वलित है; या
(घ) राज्य सरकार की राय में, मस्तिष्क या शरीर के अंग-शैथिल्य के कारण या अधिनियम में यथाअधिकथित उसके कृत्यों के निष्पादन में गंभीर व्यतिक्रम के कारण पद पर बने रहने के लिए उपयुक्त नहीं है; या
(ड.) राज्य सरकार से अनुपस्थिति की अनुमति अभिप्राप्त किए बिना पन्द्रह दिन या अधिक की अनुक्रमिक अवधि के लिए कार्य से अनुपस्थित रहता है; या
(च) राज्य सरकार की राय में, राज्य आयुक्त के पद का इस प्रकार दुरूपयोग करता है कि उसका पद पर बने रहना दिव्यांग व्यक्तियों के हित के लिए हानिकारक है।
(3) परन्तु किसी व्यक्ति को इस नियम के अधीन, राज्य सरकार के समूह ''क'' के कर्मचारियों को हटाए जाने के लिए लागू प्रक्रिया का यथावश्यक परिवर्तनों सहित अनुसरण किए बगैर नहीं हटाया जाएगा।
(4) राज्य सरकार किसी ऐसे राज्य आयुक्त को, जिसके विरूद्ध उप-नियम (2 एवं 3) के अनुसार उसे हटाए जाने के लिए प्रक्रियाएॅ प्रारंभ की गई है और ऐसी प्रक्रियाएॅ निष्कर्ष हेतु लंबित है, निलंबित कर सकेगी।
30. अवषिष्ट उपबंध।- किसी राज्य आयुक्त की किन्हीं ऐसी सेवा शर्तों की बाबत, जिसके लिए इन नियमों में कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं किया गया है, अवधारण, यथास्थिति, राज्य सरकार के सचिव को सत्समय लागू नियमों और आदेशों द्वारा किया जाएगा।
31. राज्य आयुक्त की सहायता के लिए सलाहकार समितिः-
(1) राज्य सरकार निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाली एक सलाहकार समिति नियुक्त करेगी, अर्थात्- (क) अधिनियम की धारा 2 उप-धारा (ZC) में उल्लेखित विनिर्दिष्ट दिव्यांगताओं के पाँच समूहों में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करने के लिए चक्रानुक्रम आधारित कुल तीन विशेषज्ञ, जिनमें से एक महिला होगी।
(ख) राज्य सरकार द्वारा नामित कोई दो विशेषज्ञ, जिनमें एक दिव्यांगता प्रक्षेत्र के तथा दूसरा विधिक विशेषज्ञ हो अथवा राज्य सरकार के दो वरीय पदाधिकारी। (2) उप-नियम (1) अंतर्गत नियुक्त सलाहकार समिति की कार्य-अवधि तीन वर्षों की होगी। (3) राज्य आयुक्त आवश्यकता के अनुसार विषय-वस्तु या डोमेन विशेषज्ञ को आमंत्रित कर सकेंगे, जो उनकी बैठक या सुनवाई में या रिपोर्ट तैयार करने में सहायता कर सकेंगे।
(4) राज्य सलाहकार समिति के वैसे सदस्य जो स्थानीय हैं एवं पटना में निवास करते हैं, समिति की प्रत्येक संपन्न बैठक के लिए 2000/- रूपये प्रतिदिन की दर से दैनिक भत्ता के रूप में उन्हें भुगतान किया जाएगा।12 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 (5) राज्य सलाहकार समिति के गैर-सरकारी सदस्य जो स्थानीय नहीं हैं, उन्हें संपन्न बैठक के प्रत्येक दिन के लिए उतना ही दैनिक भत्ता एवं यात्रा भत्ता का भुगतान किया जायेगा, जितना राज्य सरकार के समूह "क" अथवा उसके समकक्ष अधिकारियोंं को देय है। परन्तु गैर सरकारी सदस्यों को वित्त विभाग के पूर्वानुमोदन के बिना हवाई जहाज से यात्रा करने की स्वी—ति नहीं होगी।
32. राज्य आयुक्त द्वारा अनुसरित की जानेवाली प्रक्रियाः-
(1) कोई भी परिवाद परिवादी द्वारा स्वयं या अपने अभिकर्त्ता के माध्यम से, निम्नलिखित विशिष्टयों के साथ, दिव्यांग व्यक्तियों के आयुक्त को प्रस्तुत किया जाएगा अथवा राज्य आयुक्त के पते पर निबंधित डाक से भेजा जाएगा। (क) परिवादी का नाम, विवरण एवं पता। (ख) विरोधी पक्षकार अथवा पक्षकारों का यथास्थिति नाम, विवरण एवं पता जिससे उनका अभिनिश्चत किया जा सके।
(ग) परिवाद से संबंधित तथ्य कब और कहॉ यह उत्पन्न हुआ। (घ) परिवाद में अन्तर्विष्ट अभिकथनों के समर्थन में दस्तावेज। (ड़) राहत जिसका परिवादी दावा करता हो।
(2) परिवाद प्राप्त होने पर आयुक्त उसकी एक प्रति परिवाद में उल्लेखित विरोधी पक्षकार/पक्षकारों को यह निर्देश देते हुए भेजेगा कि वे तीन दिनों के भीतर अथवा आयुक्त द्वारा यथा मंजूर पन्द्रह दिनों से अधिक विस्तारित अवधि के भीतर, मामले का प्रतिवाद करेंगे।
(3) सुनवाई की तारीख को अथवा जिस किसी अन्य तारीख के लिए सुनवाई स्थगित की गई हो, उस तारीख को आयुक्त के समक्ष उपस्थित होना पक्षकारों या उनके अभिकर्त्ताओं के लिए बाध्यकर होगा।
(4) जहाँ परिवादी या उसके अभिकर्त्ता उस तारीख को आयुक्त के समक्ष उपस्थित होने में विफल रहता हो वहाँ आयुक्त, स्वविवेक से, परिवाद को व्यक्तिक्रम के आधार पर खारिज कर सकेगा या गुणागुण के आधार पर उसका विनिश्चय कर सकेगा।
(5) जहाँ विरोधी पक्षकार या उसका अभिकर्त्ता सुनवाई की तारीख को उपस्थित होने में विफल रहता हो, वहाँ आयुक्त विरोधी पक्षकार को समन करने तथा उसे हाजिर कराने के लिए अधिनियम की धारा 82 के अधीन यथोचित कार्रवाई कर सकेगा।
(6) यदि आवश्यक हो तो आयुक्त परिवाद का एकपक्षीय निपटान कर सकेगा। (7) आयुक्त ऐसे निबन्धनों के आधार पर जो वह उचित समझे और कार्यवाही के किसी भी स्तर पर परिवाद की सुनवाई स्थगित कर सकेगा।
(8) परिवाद का विनिश्चय विरोधी पक्षकार द्वारा नोटिस प्राप्त की तारीख से यथासंभव, तीन माह की अवधि के भीतर किया जाएगा।
33. राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करना।- अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन के संबंध में अधिनियम की धारा 83 के अधीन आयुक्त, राज्य सरकार को छः माह के अन्तराल पर, ऐसी रीति से रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा कि एक वित्तीय वर्ष में कम से कम दो रिपोर्ट जा सके।
34. वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनाः-
(1) वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद, यथासंभव शीघ्र, किन्तु अगले वर्ष के 30 सितम्बर तक आयुक्त उक्त वित्तीय वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का सत्य एवं निष्ठापूर्वक विवरण देते हुए वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा और राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
(2) विशिष्टतः उप-नियम (1) के निर्देशित रिपोर्ट में निम्नलिखित विषयों में से प्रत्येक के संबंध में जानकारी अंतर्निष्ट होगी - (क) पदाधिकारियों के नाम/उनके कार्यालय के कर्मचारियों के नाम तथा संगठनात्मक गठन दर्शानेवाला चार्ट।
(ख) कृत्यों जिनके लिए अधिनियम की धारा 80, 81 एवं 82 के अधीन आयुक्त को सशक्त किया गया हो तथा इस संबंध में कृत्यों के अनुपालन में मुख्य अंश।
(ग) आयुक्त द्वारा की गयी मुख्य सिफारिशें। (घ) अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन में जिलावार प्रगति। (ड़) ऐसा कोई अन्य विषय जिसे रिपोर्ट में शामिल किया जाना, आयुक्त द्वारा समुचित समझा जाय अथवा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जिसे विहित किया जाए।13 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 अध्याय-X
दिव्यांगजनों हेतु लोक अभियोजक
35. दिव्यांगजनों हेतु लोक अभियोजक की नियुक्तिः-
(1) प्रत्येक विशेष न्यायालय में राज्य सरकार द्वारा वैसे सरकारी अभियोजक की नियुक्ति की जाएगी जो - (i) दिव्यांग व्यक्तियों के मामलों को निपटाने का व्यावहारिक अनुभव रखता हो। (ii) न्यायिक प्रक्रिया (बार) में पाँच वर्षों से कम समय का अनुभव नहीं रखता हो। (iii) स्थानीय भाषा और रीति-रिवाज से अच्छी तरह से वाकिफ हो।
(2) अधिनियम की धारा 85 के उप-धारा (1) के तहत निर्दिष्ट या नियुक्त विशेष सरकारी अभियोजक के शुल्क और अन्य पारिश्रमिक, सरकारी अभियोजक जो कि अपराधिक प्रक्रिया के कोड 1973 (1974 का 1) के तहत सत्र न्यायालय के समक्ष मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है, के समान होगा।
अध्याय-XI
दिव्यांगजन राज्य निधि
36. राज्य निधि का प्रबंधः-
(1) राज्य सरकार द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 'राज्य निधि' का गठन किया जाएगा, जिसके अंतर्गत निम्न प्रकार की राशि क्रेडिट की जाएगी- (क) अनुदान, उपहार, दान, लाभ, वसीयत या स्थानान्तरण के माध्यम से प्राप्त सभी रकम; (ख) अनुदान सहायता सहित राज्य सरकार से प्राप्त सभी रकम; तथा (ग) ऐसे अन्य स्रोतों से प्राप्त सभी रकम जिन्हें राज्य सरकार द्वारा तय किया जा सकता है। (2) राज्य निधि का प्रबंध करने के लिए एक शासी निकाय होगा, जिसमें निम्नलिखित सदस्य सम्मिलित होंगे, अर्थात्-
(क) प्रधान सचिव/सचिव, समाज कल्याण विभाग - अध्यक्ष; (ख) राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, श्रम संसाधन विभाग, वित्त विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के वर्णानुक्रम के अनुसार चक्रानुक्रम आधारित दो प्रतिनिधि, जो संयुक्त-सचिव स्तर की पंक्ति से नीचे का न हो - सदस्य;
(ग) राज्य सरकार द्वारा चक्रानुक्रम से नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दो व्यक्ति जो अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगताओं का प्रतिनिधित्व करेंगे - सदस्य;
(घ) निदेशक, सामाजिक सुरक्षा एवं निःशक्तता निदेशालय - संयोजक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी।
(3) शासी निकाय उतनी बार अपना अधिवेशन करेगा, जितनी वह आवश्यक समझे, किंतु प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक अधिवेशन किया जाएगा।
(4) नामनिर्दिष्ट सदस्य तीन वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पद धारण नहीं करेंगे। (5) शासी निकाय का कोई भी सदस्य, उस अवधि के दौरान निधि का फायदाग्राही नहीं होगा, जिसके दौरान ऐसा सदस्य पद धारण करता है।
(6) नामनिर्दिष्ट गैर-शासकीय सदस्य शासी निकाय के अधिवेशनों में भाग लेने के लिए ऐसे यात्रा भत्ते और दैनिक भत्ते के संदाय के लिए पात्र होंगे, जो राज्य सरकार के समूह ''क'' के पदाधिकारियों को अनुज्ञेय है।
(7) किसी भी व्यक्ति को उप-नियम (2) के खंड (ख एवं ग) के अधीन शासी निकाय के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट नहीं किया जाएगा, यदि वह - (क) किसी ऐसे अपराध को लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है या गया है जिसमें राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता अंतर्वलित है।
(ख) किसी भी समय दिवालिया के रूप में अधिनिर्णीत किया जाता है या किया गया है।14 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 37. राज्य निधि का उपयोगः-
(1) नियम 36 के अधीन गठित राज्य निधि का उपयोग निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगा, अर्थात् - (i) ऐसे क्षेत्रों में वित्तीय सहायता प्रदान करने, जो विनिर्दिष्ट रूप से राज्य सरकार के किसी योजना और कार्यक्रम के अंतर्गत नहीं आते हैं या पर्याप्त रूप से राज्य सरकार की किसी योजना या कार्यक्रम के अघीन वित्तपोषित नहीं है;
(ii) निधि के प्रशासनिक और अन्य व्यय, जिन्हें इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उपगत किया जाना अपेक्षित है; और
(iii) ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए, जो शासी निकाय द्वारा विनिश्चय किये जाएँ।
(2) व्यय के प्रत्येक प्रस्ताव को शासी निकाय के समक्ष, उसके अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। (3) शासी निकाय, लेखापालों सहित अनुसचिवीय कर्मचारीवृंद की नियुक्ति ऐसे निबंधनों और शर्तो के साथ कर सकेगा जिन्हें वह आवश्यकता आधारित अपेक्षा के आधार पर राज्य निधि के प्रबंध और उपयोग की देखभाल करने के लिए उपयुक्त समझे।
(3) राज्य निधि का विनिधान ऐसी रीति में किया जाएगा, जो शासकीय निकाय द्वारा विनिश्चय किया जाएँ।
38. बजट।- राज्य निधि का मुख्य कार्यपालक अधिकारी, प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए निधि के अधीन व्यय उपगत करने के लिए बजट तैयार करेगा, जिसमें प्रत्येक वर्ष के जनवरी मास में निधि की प्राक्कलित प्राप्तियों और व्यय को दर्शित किया जाएगा और उसे शासी निकाय के समक्ष विचारार्थ रखा जाएगा।
39. वार्षिक रिपोर्ट।- समाज कल्याण विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में दिव्यांगजन राज्य निधि से संबंधित एक खण्ड सम्मिलित होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अतुल प्रसाद, सरकार के प्रधान सचिव।15 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018
फाम(cid:30) – I
( द"यांगजन$ %वारा द"यांगता 'माण प) 'ा*त करने के -लए आवेदन)
((cid:1)नयम 10 दे1खए)
01. नाम: ............................ ............................. ............................... (उपनाम) ('थम नाम) (म7य नाम)
02. 8पता का नाम:........................................... माता का नाम...................................................
03. ज9म क: (cid:1)त;थ: .........../............/..........
(तार(cid:15)ख) (मास) (वष(cid:30))
04. आवेदन क: तार(cid:15)ख को आयु : ......................................................................वष(cid:30)
05. -लंग: ................................................................. पु?ष/म हला/उभयचर............................
06. पता:
(क) Cथायी पता (ख) वत(cid:30)मान पता (प)ाचार आ द के -लए)
..................................................... ..................................................................
...................................................... ..................................................................
...................................................... ............................................................. ....
(ग) वत(cid:30)मान पते पर कब से रह रहे/रह(cid:15) हD।
पता: ..................................................................
..................................................................
07. शैHIक िCथ(cid:1)त (कृ पया जो लागू हो (cid:1)नशान लगाएं)
(i) C9नातकोMतर
(ii) C9नातक
(iii) Nड*लोमा
(iv) हायर सैकPडर(cid:15)
(v) हाई Cकू ल (vi) -मNडल
(vii) 'ाइमर(cid:15)
(viii) अनपढ़़
08. "यवसाय: ..................................................................
09. पहचान के ;च9W: (1) ............................................................
(2) ............................................................
10. द"यांगता क: 'कृ (cid:1)त: ..................................................................
11. अव;ध जब से द"यांगता आई :................................................ ज9म/वष(cid:30) से: .......................................
16 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 201812. (i) Xया आपने पूव(cid:30) मY द"यांगता 'माण प) के -लए कभी आवेदन Zकया है – हॉ / नह(cid:15)ं
(ii) य द हॉ तो \यौरे :
(क) Zकस 'ा;धकार(cid:15) को और Zकस िजलY मY आवेदन दया गया: .......................................................
(ख) आवेदन का प_रणाम: .......................................................
13. Xया पूव(cid:30) मY आपको कोई द"यांगता 'माण प) जार(cid:15) Zकया गया है य द हॉ, तो कृ पया सह(cid:15) '(cid:1)त संलbन करY। घोषणा : घोषणा करता/करती हॅ ू Zक उपरोXत क;थत सभी 8व-शeटय$ मेर(cid:15) सवfMतम जानकार(cid:15) और 8वgवास के अनुसार सMय हD और कोई भी तािMवक जानकार(cid:15) छु पाई या -मiया कथन नह(cid:15)ं बताई गई है । मD आगे यह भी कथन करता हॅ ू Zक य द आवेदन मY कोई गलती पाई जाती है, जानकार(cid:15) छु पाई या -मiया कथन नह(cid:15)ं बताई गई है। मD आगे यह भी कथन करता हॅ ू Zक य द आवेदन मY कोई गलती पाई जाती है, तो मD -लए गए Zकसी भी 'कार के लाभ समपहरण और 8व;ध के अनुसार अ9य कार(cid:30)वाई के -लए उMतरदायी होउॅ गा/होउॅ गी।
................................................................
द"यांग "यिXत या मान-सक मंदता, ऑ टkम
'मिCतeक अंगघात और बहु (cid:1)न:शXतता मY
उसके /उसक: 8व;धक संरIक के हCताIर या
बाएं अंगूठे का (cid:1)नशान
तार(cid:15)ख :
Cथान :
संलbन :
1. (cid:1)नवास का 'माण (कृ पया जो लागू हो (cid:1)नशान लगाएं)
(क) राशन काड(cid:30)
(ख) मतदाता पहचानप)
(ग) mाइ8वंग लाइसYस
(घ) बDक पासबुक
(ङ) पैन काड(cid:30)
(च) पासपोट(cid:30)
(छ) आवेदक के पते को उपद-श(cid:30)त करता टेल(cid:15)फोन, oबजल(cid:15), पानी, और कोई अ9य उपयो;गता संबंधी oबल (ज) पंचायत, नगरपा-लका, छावनी बोड(cid:30), Zकसी राजपo)त अ;धकार(cid:15) या संबं;धत पटवार(cid:15) या शासक:य 8व%यालय के 'धान अ7यापक %वारा जार(cid:15) (cid:1)नवास 'माण प)
(झ) द"यांग "यिXत, (cid:1)नरा;qत, मान-सक ?bण इMया द के -लए आवासीय संCथा के वासी क: दशा मY, ऐसे संCथान के 'मुख से (cid:1)नवास का 'माण ')
2. दो नवीनतम पासपोट(cid:30) आकार के फोटो
(के वल काया(cid:30)लय उपयोग के -लए)
तार(cid:15)ख :
Cथान :
जार(cid:15) करने वाले 'ा;धकार(cid:15) के हCताIर मुहर17 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 फाम(cid:30) – II
द"यांगता 'माण प)
(अंगोsछे दन या अंग$ क: पूण(cid:30) Cथाई अंगघात, बौनापन और अंधापन क: दशा मY)
((cid:1)नयम 11 दे1खए)
('माण प) जार(cid:15) करने संबंधी ;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) का नाम और पता)
द"यांग "यिXत का
नवीनतम पासपोट(cid:30) 'माण प) सं(cid:8)या :-
तार(cid:15)ख :-
आकार का सMया8पत
फोटोtाफ (के वल
चेहरा दखता हुआ) यह 'मा1णत Zकया जाता है Zक मDने qी/qीमती/कु मार(cid:15) ..................................................... पु)/पिMन/पु)ी qी........................................................ ज9म क: तार(cid:15)ख............................... (तार(cid:15)ख/मास/वष(cid:30)) आयु....................वष(cid:30), पु?ष/म हला....................रिजCuेशन नं0:-...................................मकान न0.....................
वाड(cid:30)/गॉव/गल(cid:15)..................... डाकघर ............................ िजला ................................राkय ........................... का Cथाई (cid:1)नवासी िजनक: फोटो उपर लगी हुई है क: सावधानीपूव(cid:30)क जॉच कर ल(cid:15) है और मD संतुeट हॅ ू Zक :-
(क) यह मामला
• चलन संबंधी द"यांगता • बौनापन • ने)ह(cid:15)न का है
(कृ पया जो लागू हो, उस पर ठvक का (cid:1)नशान लगाएं)
(ख) उनके मामले मY (cid:1)नदान .................................... है।
(ग) उ9हY माग(cid:30)दश(cid:30)क -सwांत$ (..... माग(cid:30)दश(cid:30)क क: सं(cid:8)या और जार(cid:15) करने क: (cid:1)त;थ (cid:1)न द(cid:30)eट Zकया जाना है) के अनुसार उनके (शर(cid:15)र के अंग) के संबंध मY Cथापना ...................... % (अंक मY) .............................................. '(cid:1)तशत (श\द$ मY) Cथाई चलन द"यांगता/बौनापन/ने)ह(cid:15)नता है।
2. आवेदक ने (cid:1)नवास के सबूत के ?प मY (cid:1)नxन-ल1खत दCतावेज 'Cतुत Zकए है :-
| द तावेज क कृ त | जार होने क तारख | माण प जार करने वाले ाधकार का यौरा |
उस "यZकत के
हCताIर/अंगूठे क: छाप
िजसके पI मY
(अ;धसू;चत ;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) के 'ा;धकृ त हCताIर और मोहर) द"यांगता 'माण प)
जार(cid:15) होना है।18 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 फाम(cid:30) – III
द"यांगता 'माण प)
(बहु द"यांगता क: दशा मY)
((cid:1)नयम 11 दे1खए)
('माण प) जार(cid:15) करने संबंधी ;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) का नाम और पता)
द"यांग "यिXत का 'माण प) सं(cid:8)या :-
तार(cid:15)ख :-
नवीनतम पासपोट(cid:30)
आकार का सMया8पत
फोटोtाफ (के वल
चेहरा दखता हुआ) यह 'मा1णत Zकया जाता है Zक हमने qी/qीमती/कु मार(cid:15) .................. ..............................................
पु)/पिMन/पु)ी qी.....................................................ज9म क: तार(cid:15)ख............................... (तार(cid:15)ख/मास/वष(cid:30)) आयु ................वष(cid:30),--------पु?ष/म हला....................रिजCuेशन नं0:-......................... मकान न0..................
वाड(cid:30)/गॉव/गल(cid:15)...........................डाकघर.............................. िजला ....................... राkय ............................का Cथाई (cid:1)नवासी िजनक: फोटो उपर लगी हुई है क: सावधानीपूव(cid:30)क जॉच कर ल(cid:15) है और मD संतुeट हॅ ू Zक :-
(क) यह मामला बहु द"यांगता के -लए है । उनक: Cथाई शार(cid:15)_रक I(cid:1)त/ द"यांगता को (cid:1)नxन-ल1खत द"यांगताओं हेतु माग(cid:30)दश(cid:30)क -सwांत$ (8व(cid:1)न द(cid:30)eट Zकया जाना है) के अनुसार मूzयांकन Zकया गया है और (cid:1)नxन-ल1खत सारणी मY द"यांगता के सामने दशा(cid:30)या गया है
| 0स0 | द यांगता | शरर का भावत अंग | नदान | थाई शाररक द यांगता / मानसक द यांगता (% म) |
| 1 | चलन संबंधी द यांगता | @ | ||
| 2 | मांसपेशीय दुवकास | |||
| 3 | ठक कया हुआ कु ठ | |||
| 4 | बौनापन | |||
| 5 | मित क घात | |||
| 6 | अ ल हमले क पी डत ़ | |||
| 7 | कम िट | # | ||
| 8 | िटहनता | # | ||
| 9 | वण त | £ | ||
| 10 | सुनने म कठनाई | £ | ||
| 11 | वाक और भाषा द यांगता | |||
| 12 | बौक द यांगता | |||
| 13 | वश ट शण द यांगता | |||
| 14 | ऑट म पे म डस ्ऑडर | |||
| 15 | मानसक णता | |||
| 16 | ोनक नायवक िथत | |||
| 17 | बहुल काठ य | |||
| 18 | पाक सन रोग | |||
| 19 | हमोफलया | |||
| 20 | थैलेसीमया | |||
| 21 | सकल सेल रोग |
(ख) उपरोXत के म€देनजर उनक: समt Cथाई शार(cid:15)_रक I(cid:1)त माग(cid:30)दश(cid:30)क -सwांत$ (माग(cid:30)दश(cid:30)क् क: सं(cid:8)या और जार(cid:15) करने क: (cid:1)त;थ (cid:1)न द(cid:30)eट Zकया जाना है) के अनुसार इस 'कार है :-
अंको मY .................................................. '(cid:1)तशत
श\द$ मY .................................................. '(cid:1)तशत
2. यह िCथ(cid:1)त वध(cid:30)नशील/अवध(cid:30)नशील/इसमY सुधार होने क: संभावना/सुधार न होने क: संभावना है।
3. द"यांगता का पुन(cid:30)मूzयांकन
(i) आवgयक नह(cid:15)ं है।
या
(ii) .................... वष(cid:30) ............................ मास के पgचात -सफा_रश क: जाती है और इस-लए यह 'माण प) .................. तक ......................... 8व;धमा9य रहेगा।
@ अथा(cid:30)त बायां/दा हना/दोन$ भुजाएं/पैर
# अथा(cid:30)त एक ऑख/दोन$ ऑखे
$ अथा(cid:30)त बायां/दा हना/दोन$ कान
4. आवेदक ने (cid:1)नवास के सबूत 'माण के ?प मY (cid:1)नxन दCतावेज 'Cतुत Zकए है :-
| द तावेज क कृ त | जार होने क तारख | माण प जार करने वाले ाधकार का यौरा |
5. ;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) के हCताIर और मोहर
| सद य का नाम और मुहर | सद य का नाम और मुहर | अ य का नाम और मुहर |
(
उस "यZकत के हCताIर/अंगूठे क:
छाप िजसके पI मY द"यांगता
'माण प) जार(cid:15) होना है।20 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 फाम(cid:30) – IV
द"यांगता 'माण प)
(फाम(cid:30) 5 एवं फाम(cid:30) 6 मY उिzल1खत मामल$ के अ(cid:1)त_रXत)
('माण प) जार(cid:15) करने संबंधी ;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) का नाम और पता)
((cid:1)नयम 11 दे1खए)
द"यांग "यिXत का
नवीनतम पासपोट(cid:30) 'माण प) सं(cid:8)या :-
तार(cid:15)ख :-
आकार का सMया8पत
फोटोtाफ (के वल चेहरा
दखता हुआ) qी ........................................ ज9म क: तार(cid:15)ख........................... (तार(cid:15)ख/मास/वष(cid:30)) आयु ........................वष(cid:30), पु?ष/म हला....................रिजCuेशननं0:-............................मकानन0.................. वाड(cid:30)/गॉव/गल(cid:15)........................
डाकघर..........................िजला......................................राkय ......................... का Cथाई (cid:1)नवासी िजनक: फोटो उपर लगी हुई है क: सावधानीपूव(cid:30)क जॉच कर ल(cid:15) है और मD संतुeट हॅ ू Zक यह ...................................................... द"यांगता का मामला है। इसक: शार(cid:15)_रक I(cid:1)त/ द"यांगता का मूzयांकन माग(cid:30)दश(cid:30)क -सwांत$ के अनुसार (........ माग(cid:30)दश(cid:30)क् क: सं(cid:8)या और जार(cid:15) करने क: (cid:1)त;थ 8व(cid:1)न द(cid:30)eट Zकया जाना है) Zकया गया है तथा यह (cid:1)नxन-ल1खत सारणी मY द"यांगता के सामने दशा(cid:30)या गया है :-
| 0 स0 | द यांगता | शरर का भावत अंग | नदान | थाई शाररक द यांगता /मानसक द यांगता (% म) |
| 1 | चलन संबंधी द यांगता | @ | ||
| 2 | मांसपेशीय दुवकास | |||
| 3 | ठक कया हुआ कु ठ | |||
| 4 | मित क घात | |||
| 5 | अ ल हमले क पी डत ़ | |||
| 6 | कम िट | # | ||
| 7 | बधर | £ | ||
| 8 | वण त | £ | ||
| 9 | वाक और भाषा द यांगता | |||
| 10 | बौक द यांगता | |||
| 11 | वश ट शण द यांगता | |||
| 12 | ऑट म पे म डस ्ऑडर | |||
| 13 | मानसक णता | |||
| 14 | ोनक नायवक िथत | |||
| 15 | बहुल काठ य | |||
| 16 | पाक सन रोग | |||
| 17 | हमोफलया | |||
| 18 | थैलेसीमया | |||
| 19 | सकल सेल रोग |
जो लागू न हो उसे काट दY।21 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 2. उपरोXत िCथ(cid:1)त वध(cid:30)नशील/अवध(cid:30)नशील है इसमY सुधार होने क: संभावना/सुधार न होने क: संभावना है।
3. द"यांगता का पुन(cid:30)मूzयांकन
(i) आवgयक नह(cid:15)ं है।
या
(ii) .................... वष(cid:30) ............................ मास के पgचात -सफा_रश क: जाती है और इस-लए यह 'माण प) तार(cid:15)ख ..................मास.............वष(cid:30) तक मा9य रहेगा।
@ अथा(cid:30)त बायां/दा हना/दोन$ भुजाएं/पैर
# अथा(cid:30)त एक ऑख/दोन$ ऑखे
$ अथा(cid:30)त बायां/दा हना/दोन$ कान
4. आवेदक ने (cid:1)नवास के सबूत 'माण के ?प मY (cid:1)नxन दCतावेज 'Cतुत Zकए है :-
| द तावेज क कृ त | जार होने क तारख | माण प जार करने वाले ाधकार का यौरा |
(अ;धसू;चत ;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) के 'ा;धकृ त हCताIर और मोहर)
| उस व ् यकत के ह तार/अंगूठे क छाप िजसके प म द यांगता माण प जार होना है। |
(
| अधसूचत चक सा ाधकार के ाधकृ त ह तार नाम और मोहर त ह तार | चक सा ाधकार , जो सरकार सेवक नहं है, के वारा जार माण प क दशा म | मु य चक सा अधकर/चक सा अधीक/सरकार अ पताल के धान का तह तार और मोहर |
ट*पणी :- य द यह 'माण प) ;च ZकMसा 'ा;धकार(cid:15), जो सरकार(cid:15) सेवा मY नह(cid:15)ं है, के %वारा जार(cid:15) Zकया जाता है तो यह 8व;धमा9य तभी होगा जब इस पर िजला के मु(cid:8)य ;चZकMसा अ;धकार(cid:15) %वारा '(cid:1)तहCताIर Zकया गया हो।22 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 फाम(cid:30)- V
( द"यांगता 'माण प) के -लए आवेदन को अCवीकार करने क: सूचना)
((cid:1)नयम 11 दे1खए)
सं(cid:8)या .................................. तार(cid:15)ख ...........................
सेवा मY,
.....................................................................
.....................................................................
.....................................................................
.....................................................................
( द"यांगता 'माण प) के -लए, आवेदक का नाम एवं पता)
8वषय :- द"यांगता 'माण प) के आवेदन का अCवीकार Zकया जाना
महोदय/महोदया,
कृ पया तार(cid:15)ख के (cid:1)नxन-ल1खत द"यांगता के -लए द"यांगता 'माण प) जार(cid:15) करने के आवेदन का संदभ(cid:30) ले :
2. पूव(cid:129)Xत आवेदन के अनुसरण मY आपक: (cid:1)नxन-ल1खत हCताIर(cid:15)/;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) %वारा ....................................... को जॉच क: गई और मुझे यह सू;चत करते हुए अफसोस हो रहा है Zक नीचे दए गए कारण$ से आपके पI मY द"यांगता 'माण प) जार(cid:15) करना संभव नह(cid:15)ं है :-
(i)
(ii)
(iii)
3. य द आप अपने आवेदन को अCवीकार Zकए जाने से "य;थत हD तो आप इस 8व(cid:1)नgचय का पुन8व(cid:30)लोकन करने का अनुरोध करने के -लए ................................ को अ'यावेदन दे सकते है।
भवद(cid:15)य
(अ;धसू;चत ;चZकMसा 'ा;धकार(cid:15) का 'ा;धकृ त हCताIर(cid:15))
नाम एवं मुहर स हत23 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 2 जनवर(cid:15) 2018 फाम(cid:30)-A
संCथान$ के (cid:1)नबंधन हेतु आवेदन प)
[(cid:1)नयम 8(1)]
(1) आवेदक का नाम और पता: __________________________________________
(2) संCथान िजसके बारे मY आवेदन Zकया जाना है:
(क) नाम: ________________________________
(ख) पता (काया(cid:30)लय / प_रयोजना): ________________________________
(ग) फोन/ फै Xस/ टेलेXस (काया(cid:30)लय/प_रयोजना): __________________________
(3) (i) अ;ध(cid:1)नयम का नाम, िजसके तहत संCथा पहले से (cid:1)नबं;धत है: _______________
(ii) (cid:1)नबंधन सं(cid:8)या और (cid:1)नबंधन क: (cid:1)त;थ: _________________________________
(कृ पया (cid:1)नबंधन क: एक फोटो कॉपी संलbन करY)
(4) संCथा का Cमार प) एवं (cid:1)नयमावल(cid:15) (कृ पया एक फोटो कॉपी संलbन करY):
(5) संCथा के 'बंधन बोड(cid:30)/शासी (cid:1)नकाय के सदCय$ का नाम, पता, पेशा एवं अ9य 8ववरणी
(6) संCथा क: वत(cid:30)मान ग(cid:1)त8व;धयां: __________________________________________
(7) वत(cid:30)मान सदCयता Iमता और संCथा का वग(cid:129)करण। (cid:1)नxन दCतावेज$ क: सूची संलbन करY:
(क) 8वगत वष(cid:30) के वा8ष(cid:30)क _रपोट(cid:30) क: एक '(cid:1)त,
(ख) 8वगत दो वष… का अंके Iण '(cid:1)तवेदन जो चाट(cid:30)ड(cid:30) एकाउं टYट %वारा 8व;धवत 'मा1णत Zकया गया हो:
(i) पावती एवं भुगतान खाता (गत दो वष… का चाट(cid:30)ड(cid:30) एकाउं टYट %वारा 'मा1णत)
(ii) आय और "यय खाता (गत दो वष… का चाट(cid:30)ड(cid:30) एकाउं टYट %वारा 'मा1णत)
(iii) गत दो वष… का बैलYस शीट (गत दो वष… का चाट(cid:30)ड(cid:30) एकाउं टYट %वारा 'मा1णत) (ग) संCथा %वारा (cid:1)नयोिजत क-म(cid:30)य$ का 8ववरण
(घ ् ) संCथा %वारा आsछा दत Zकये जाने वाले लाभा;थ(cid:30)य$ का 8ववरण
(च ् ) य द छा)ावास संचा-लत हो, तो छा)ावास मY आवा-सन$ क: सं(cid:8)या
(छ) अ9य शत†, य द कोई हो तो
(ज) Xया संCथान अपने Cवयं/Zकराए के भवन मY िCथत है (आवgयक सा‡य संलbन करY) नाम: आवेदक का हCताIर
पदनाम:
पता:
तार(cid:15)ख:
काया(cid:30)लय Cटाxप:
————
[ध(cid:17)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१(cid:27)ण(cid:4)लय(cid:16)
ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) (cid:31)क(cid:4)०शत eव# म१ॢ(cid:27)त? ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) %1&5(1+2000&ड(cid:17)%ट,%प(cid:17)%? Website: http://egazette.bih.nic.in