(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत
13 म(cid:4)घ 1(cid:21)3(cid:21) (cid:22)श(cid:23)(cid:24)
(स(cid:25)(cid:23) पटन(cid:4) (cid:28)(cid:28)) पटन(cid:4)(cid:29) श१(cid:31)व(cid:4)र(cid:29) 2 फरवर(cid:15) 2(cid:23)1(cid:28) सं॰ 3ए-1-मुक॰-111/2017-796/वि॰ foÙkfoÙkfoÙkfoÙk foHkkxfoHkkxfoHkkxfoHkkx ——— ladYiladYiladYiladYi
2 फरवर(cid:15) 2018 विषयः- बोर्ड/निगम/सोसाईटी के कर्मियों को राज्य सरकार के रिक्त पदों के विरुद्ध समायोजित करने के निमित्त समरूप सेवा शर्त्त निरूपित करने के संबंध में।
बोर्ड/निगम/सोसाईटी के विघटित या यथा निर्णय की स्थिति में उक्त के कर्मियों को राज्य सरकार के रिक्त पदों के विरुद्ध विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग सेवा शर्त्तों के अधीन समायोजित किया जाता रहा है। 2. सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰-16075/2011, अशोक कुमार बनाम राज्य सरकार एवं अन्य में दिनांक 02/07/2013 को पारित न्यायादेश द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग को, बोर्ड/निगम/सोसाइटी के कर्मियों को राज्य सरकार के रिक्त पदों के विरुद्ध समायोजित करने के निमित्त, समरूप सेवा शर्त्त निरूपित करने का निदेश दिया गया, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत् हैः-
"However, the Court would like to observe that a large number of cases are coming to this Court in respect of employees who were earlier in the Government Corporation and by different decisions taken at different times by the government upon the Corporation became sick were taken into State Government service. Sometime the government took a decision to grant continuity of service. Sometime it took decision to give pay protection. Sometime they were treated as fresh appointees. Thus, denying them of any pensionary benefit. It is high time that the government should take a uniform decision in the matter so that all employees who were similarly situated and brought to government service are treated similarly so that no person or group has grievance against them.
They all should be treated in non discriminatory manner. It would be for the Principal Secretary of General Administration Department to consider and decide the policy but in the fact as of now the petitioner cannot be granted any relief.
2ॢबह(cid:4)र गजट (cid:22)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:24)(cid:29) 2 फरवर& 2(cid:23)1(cid:28) Let a copy of this order be sent to the learned Principal Secretary, General Administration Department, Govt. of Bihar, for necessary action. The writ petition is disposed of accordingly".
3. रिट आवेदक द्वारा सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं॰ 16075/2011 में पारित आदेश के विरुद्ध एल॰पी॰ए॰ सं॰ 1198/2013 दायर किया गया। उक्त एल॰पी॰ए॰ में दिनांक 21.08.2017 को निम्नांकित आदेश पारित किया गयाः-
"Let a detailed affidavit be filed by the Principal Secretary, General Administration Department, as to what follow up action he has taken since passing of the order dated 02.07.2013 in C.W.J.C. No.16075 of 2011. Since the said direction of the learned single Judge has significance not only limited to this case but for many other cases which may come or which are pending consideration before this Court his affidavit is of paramount importance.
Let the matter be listed after three weeks as prayed on behalf of the State Counsel." 4. पुनः एल॰पी॰ए॰ सं॰ 1198/2013 में दिनांक 03.10.2017 को न्यायालय द्वारा पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत् हैः-
"Since enough time has already been lost by inaction, if not inefficiency on the part of the General Administration Department or the State of Bihar, which also shows disregard to the judicial order, the Court at the most adjourns this matter to 19th of December, 2017, when affidavit of the Principal Secretary, Finance, Government of Bihar, Patna would be filed as to the steps taken in furtherance to the direction of the Court.
List this matter accordingly". 5. इस प्रकार बोर्ड/निगम/सोसाईटी के कर्मियों को राज्य सरकार के रिक्त पदों के विरुद्ध समायोजित करने के निमित्त समरूप सेवा शर्त्त निर्धारण का मामला सरकार के समक्ष विचाराधीन था। अतएव, सम्यक् विचारोपरान्त बोर्ड/निगम/सोसाईटी के कर्मियों की राज्य सरकार के रिक्त पदों के विरुद्ध समायोजन हेतु सेवा-शर्त्त निम्नवत् निर्धारित किया जाता हैः-
(क) निगम/सोसाईटी के कर्मियों के सम्बन्ध मेंः-
(i) आदेश निर्गत की तिथि से समायोजन प्रभावी होगा। ऐसे सामंजित कर्मी समायोजन की तिथि से सरकारी सेवक माने जाएगें एवं उसी तिथि से ही सरकारी सेवकों के लिए अनुमान्य सुविधाएॅं देय होगी।
(ii) ऐसे सामायोजन के मामलों में नियुक्ति की अधिकतम उम्र सीमा शिथिल समझा जाएगा। (iii) निगम/सोसाईटी की कार्यावधि में किसी प्रकार की देनदारी/बकाया के भुगतान के लिए राज्य सरकार उत्तरदायी नहीं होगी।
(iv) समायोजन के क्रम में आरक्षण नियमों का पालन किया जाना अनिवार्य होगा। (v) समायोजित कर्मी को निगम/सोसाईटी में प्राप्त हो रहे वेतन, समायोजित पद के वेतनमान में, संरक्षणीय होगा। अर्थात पैतृक निगम/सोसाईटी में धारित पद हेतु प्रभावी वेतनमान संरक्षणीय नही होगा, बल्कि कुल प्राप्त वेतन ही संरक्षणीय होगा।
(vi) पेंशन प्रयोजनार्थ निगम/सोसाईटी की सेवावधि गणनीय नहीं होगी। निगम/सोसाईटी के समायोजित कर्मी राज्य सरकार की नई पेंशन योजना-2005 से आच्छादित होंगे। (vii) निगम/सोसाईटी में लागू कर्मचारी भविष्य निधि योजना के अधीन संबंधित कर्मी द्वारा निगम की सेवावधि में किये गये अंशदान एवं निगम/सोसाईटी द्वारा दिया गया अंशदान की कुल राशि सूद सहित भुगतान की जिम्मेवारी संबंधित निगम/सोसाईटी की होगी।
(viii) समायोजित कर्मियों की वरीयता, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वरीयता निर्धारण संबंधी संकल्पों/परिपत्रों के, अनुरूप किया जाएगा।
(ix) समायोजन के पश्चात् उनकी प्रोन्नति, समायोजित पद के संवर्गीय नियमावली में विहित प्रावधानों के आलोक में होगी।
(x) एम॰ए॰सी॰पी॰ के प्रयोजनार्थ निगम/सोसाईटी के सेवावधि गणनीय नहीं होगी।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:22)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:24)(cid:29) 2 फरवर& 2(cid:23)1(cid:28) (ख) बोर्ड के कर्मियों के सम्बन्ध मेंः-
(i) राज्य के अंतर्गत बोर्ड का गठन एवं उसका विघटन अधिनियम के तहत किया जाता है। विघटन के पश्चात् बोर्ड में कार्यरत कर्मियों का समायोजन, राज्य सरकार के विभागों/कार्यालयों में उनके द्वारा बोर्ड में धारित पद के वेतनमान/समकक्ष वेतनमान में, होगा। समायोजन की तिथि से वे सरकारी सेवक माने जाएगें तथा ऐसे कर्मियों को सरकारी सेवकों के लिए अनुमान्य सुविधाएॅं समायेाजन की तिथि से देय होगी।
(ii) ऐसे समायोजन के मामलों में कर्मी के नियुक्ति की अधिकतम उम्र सीमा शिथिल समझा जाएगा।
(iii) बोर्ड में कार्यरत अवधि के लिए किसी प्रकार के बकाए के भुगतान के लिए राज्य सरकार उत्तरदायी नहीं होगा।
(iv) बोर्ड के कर्मी के समायोजन के क्रम में आरक्षण नियमों का पालन किया जाएगा। (v) बोर्ड में प्राप्त हो रहे वेतन, समायोजित पद के वेतनमान में, संरक्षणीय होगा। (vi) बोर्ड में की गयी सेवावधि पेंशन/वित्तीय उन्नयन के प्रयोजनार्थ गणनीय होगी। (vii) बोर्ड में G.P.F. योजना से आच्छादित रहने की स्थिति में समायोजन के पश्चात् G.P.F. योजना से ही आच्छादित होंगे। बोर्ड की कार्यावधि में, G.P.F. में संचित राशि सूद सहित, बोर्ड द्वारा भुगतान किया जाएगा।
(viii) बोर्ड में E.P.F योजना से आच्छादित रहने की स्थिति में समायोजन के पश्चात् ऐसे कर्मी नयी पेंशन योजना से आच्छादित होंगे।
(ix) E.P.F योजना के अन्तर्गत समायोजन के पूर्व जो देनदारी होगी उसका भुगतान सूद सहित बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
(x) बोर्ड में बिहार पेंशन नियमावली लागू रहने की स्थिति में समायोजन के पश्चात् समायोजित कर्मी उसी नियमावली से शासित होंगे।
(xi) समायोजन के पश्चात् प्रोन्नति, समायोजित पद के संवर्गीय नियमावली में विहित प्रावधानों के आलोक में, शासित होगी।
(xii) समायोजित कर्मियों की वरीयता, सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्पों/परिपत्रों से शासित होगी।
(xiii) समायोजित कर्मियों को MACPS-2010 के तहत, बोर्ड की नियमित सेवावधि गणनीय होगी।
6. यह सेवा-शर्त्त निर्गत की तिथि से प्रभावी होगा।
fcgkj&jkTiky ds vkns'k ls] राहुल सिंह] सचिव (व्यय) A
———— [ध(cid:3)¡क(cid:6) स०चव(cid:12)लय म१(cid:17)ण(cid:12)लय(cid:6)
ॢबह(cid:12)र(cid:6) पटन(cid:12) ह(cid:12)र(cid:12) (cid:27)क(cid:12)०शत eव(cid:31) म१ॢ(cid:17)त? ॢबह(cid:12)र गजट #[स(cid:12)ध(cid:12)रण$ 88%5'1+10%ड(cid:3)+ट,+प(cid:3)+? Website: http://egazette.bih.nic.in