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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
23 अक्तूबर 2017
सं॰ 22/नि0सि0(औ0)17-07/2007-1910—श्री राजेन्द्र प्रसाद केसरी (आई0डी0-3531) तत्कालीन सहायक अभियंता, उत्तर कोयल नहर प्रमंडल सं०-2, औरंगाबाद के विरूद्ध मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, औरंगाबाद में अवासीय परिसर में जीप शेड एवं चौकीदारी शेड तथा प्रमंडलीय कार्यालय भवन की मरम्मति कार्य में बरती गई अनियमितताओं एवं अन्य आरोप के लिए विभागीय आदेश सं०-1 सहपठित ज्ञापांक-25, दिनांक 01.02.2005 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-187, दिनांक 03.03.2005 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक-121, दिनांक 29.01.2008 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री केसरी से प्राप्त प्रत्युत्तर की समीक्षोपरांत इसे पूर्णतया असंतोषजनक पाते हुए विभागीय आदेश सं०-94 सहपठित ज्ञापांक-703, दिनांक 26.08.2008 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित किया गया :-
(i) "निन्दन" वर्ष 2003-04 (ii) दो वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। इसके पश्चात संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री केसरी द्वारा अपील अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया जिस पर सम्यक विचारोपरांत विभागीय पत्रांक-630, दिनांक 07.07.2009 द्वारा अस्वीकृत करते हुए दण्ड को यथावत रखा गया। संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री केसरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-16562/2008 दायर किया गया जिसमें दिनांक 28.01.2017 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में उक्त दण्डादेश को निरस्त करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार किया गया। सम्यक विचारोपरांत श्री केसरी के विरूद्ध प्राक्कलन की विशिष्टियों के अनुरूप कार्य नहीं कराने का आरोप प्रमाणित पाया गया जिसके लिए उनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-829, दिनांक 01.06.2017 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-
2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24)आलोक में श्री केसरी द्वारा मुख्य रूप से उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र होने उच्च पदाधिकारियों के बीच मतभेद होने के चलते उनके विरूद्ध आरोप गठित किए जाने तथा बिना स्पष्टीकरण पूछे निलंबित कर विभागीय कार्यवाही संचालित कर बिना प्रमाणित आरोप के दंडित किए जाने तथा प्रोन्नति बाधित होने का तथ्य दिया गया है।
श्री केसरी द्वारा दिए गए तथ्य से यह स्थापित नहीं हो पाता है कि उनका निलंबन अवैध था क्योंकि उनके विरूद्ध पूर्व में भी आरोप प्रमाणित पाया गया था एवं माननीय उच्च न्यायालय के न्यायादेश के आलोक में नए सिरे से विचारण के उपरांत भी प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराने का आरोप प्रमाणित पाते हुए दण्ड संसूचित किया गया। अतः श्री केसरी की निलंबन अवधि दिनांक 01.02.2005 से 25.08.2008 तक की सेवा का निरूपण तथा वेतन भत्ता की अनुमान्यता के बिन्दु पर उनके द्वारा दिए गए तथ्यों पर सम्यक विचारोपरांत इसे स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए निम्न निर्णय सरकार के स्तर से लिया गया है :-
"श्री राजेन्द्र प्रसाद केसरी, सहायक अभियंता की निलंबन अवधि दिनांक 01.02.2005 से 25.08.2008 तक कर्त्तव्य अवधि नहीं मानी जाएगी तथा इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता को छोड़कर अन्य कुछ भी भुगतान नहीं किया जाएगा तथा इस अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जाएगी।"
उक्त निर्णय श्री राजेन्द्र प्रसाद केसरी (आई0डी0-3531) तत्कालीन सहायक अभियंता, उत्तर कोयल नहर प्रमंडल सं०-2, औरंगाबाद सम्प्रति सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन प्रमंडल, सहरसा (विकास भवन) को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
चन्द्रमा प्रसाद, सरकार के अवर सचिव।
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