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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
2 नवम्बर 2017
सं॰ 22 नि0सि0(मोति0)-08-03/2013 (अंश-1) 1925—मो0 शादिक हुसैन, (आई0डी0-5135), तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (सहायक अभियंता), मुख्य पश्चिमी नहर अवर प्रमंडल, त्रिवेणीगंज, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध नेपाल हितकारी योजना 2009 गंड़क प्रोजेक्ट के अन्तर्गत एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग करने संबंधी वित्तीय अनियमितताओं एवं जानबुझकर सरकारी राशि के गबन करने में सहयोग करने संंबंधी आरोप लिए विभागीय अधिसचूना ज्ञापांक-133, दिनांक-24.01.2014 द्वारा निलंबित किया गया तथा विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-293, दिनांक-12.03.14 द्वारा निम्नांकित आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :-
नेपाल हितकारी योजना 2009 गंडक प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मुख्य पश्चिमी नहर प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के अधीन मुख्य पश्चिमी नहर के पुनस्र्थापन कार्य में एकरारनामा के विरूद्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग किया गया है। तकनीकी परीक्षण कोषांग, निगरानी विभाग के जाँच में पाया गया कि स्थानीय सामग्री के प्रयोग के बावजूद भी सामग्री ढुलाई मद का भुगतान वास्तविक लीड के बजाय एकरारनामा मेें प्रावधानित मद दर के अनुरूप किया गया है। फलस्वरूप सिर्फ सामग्री ढुलाई मद में रू0 24.65 करोड़ का अनियमित भुगतान हुआ है। जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता है एवं जानबूझकर सरकारी राशि के गबन करने में सहयोग किया गया परिलक्षित होता है जिसके लिए वे प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये।
संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा निष्कर्ष में अंकित किया गया कि नवम् चालू विपत्र तक स्टोन मेटल, चिप्स एवं एग्रीगेट तथा सोन बालू का ढुलाई मद की कुल राशि रू0 24.65 करोड़ मात्र है, जिसके अन्तर्गत हुए अनियमित भुगतान में आरोपित पदाधिकारी द्वारा जानबुझकर सरकारी राशि के गबन करने में सहयोग किया गया है तथा आरोपित के विरूद्ध गठित वित्तीय अनियमितता एवं जानबुझकर सरकारी राशि के गबन करने में सहयोग करने का आरोप प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए विभागीय पत्रांक-2407, दिनांक 09.11.16 द्वारा मो0 हुसैन से द्वितीय कारणपृच्छा की गई।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) मो0 हुसैन, निलंबित सहायक अभियंता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में मुख्यतः निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गया :-
i. उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का आधार तकनीकी परीक्षक कोषांग का जाँच प्रतिवेदन है। तकनीकी परीक्षक कोषांग के द्वारा स्थापित नियमों के अनुसार कार्य स्थल से नमूने का संग्रहण नहीं किया गया है।
ii. जिस आधार पर विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी है, उसे माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा विधि सम्मत नहीं माना गया है।
iii. माननीय उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा संवेदक द्वारा दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-3569/2014 में दिनांक-06.10.2016 को आदेशित किया गया है कि याचिकाकर्त्ता के विरूद्ध किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाय।
iv. माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा दिनांक-02.01.2013 के जाँच प्रतिवेदन को विधि सम्मत नहीं मानते हुए विभाग को याचिकाकर्त्ता के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई करने से मना किया है। इसलिए उसी जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उनके विरूद्ध कार्रवाई किया जाना विधि विरूद्ध है।
v. इस मामले में प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग के द्वारा भी विभागीय उड़नदस्ता से जाँच करायी गयी थी। विभागीय उड़नदस्ता द्वारा पत्रांक-18, दिनांक 30.05.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में बिन्दुवार मंतव्य गठित किया गया है, जिसमें किसी प्रकार की अनियमितता होने अथवा स्थानीय सामग्री के उपयोग होने की बात नहीं कही गयी है। इस प्रकार तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा दिनांक 02.01.13 को समर्पित प्रतिवेदन एवं विभागीय उड़नदस्ता द्वारा दिनांक 30.05.2013 को समर्पित परस्पर विरोधाभाषी है।
vi. विभाग द्वारा प्रारंभ किये गये विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0-7968/2015 दायर किया गया है, जो अभी विचाराधीन है। मो0 हुसैन, निलंबित सहायक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा के प्रत्युत्तर की समीक्षा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की गई। समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि उन्होंने अपने द्वितीय कारणपृच्छा उत्तर में जिन बातों का उल्लेख किया है, उसके समर्थन में किसी प्रकार का साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया है। उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में माननीय उच्च न्यायालय के जिस आदेश का उल्लेख किया गया है वह संवेदक (कमलादित्य कन्स0 प्रा0 लि0) से संबंधित है। संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में 42 करोड़ रूपये रोके जाने के औचित्य के संबंध में याचिका दायर की गयी थी, जिसमें माननीय न्यायालय का आदेश पारित है कि 8.99 करोड़ रूपये को छोड़कर शेष राशि का भुगतान संवेदक को कर दिया जाय। साथ ही बिहार पब्लिक वक्र्स आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल द्वारा मामला निर्णित होने तक संवेदक के विरूद्ध किसी प्रकार की दण्डात्मक कार्रवाई न की जाय। संवेदक द्वारा दायर किये गये याचिका सं०-3569/2014 में दिनांक 06.10.2016 को पारित माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का ऑपरेटिव पार्ट निम्न प्रकार है :-
Let the admitted dues be paid to the petitioner after keeping an amount of Rs. 8.99 Crores within a period of three months from the date of receipt/production of a copy of this order. So far the amount of Rs. 8.99 Crores is concerned, the recovery of the same shall be subject to the decision of the bihar public works Arbitration Tribunal. The Writ application is accordingly disposed of with the aforesaid observation and direction.
This court makes it clear that none of the issues between the parties has been considered on merit and it shall be open to the parties to raise all such issues before the Arbitration Tribunal. It is further made clear that no coercive action shall be taken against the petitioner until the matter is decided by the Arbitration Tribunal considering the acrimony between the parties and the importance of the matter. The Tribunal is requested to dispose of the matter within a period of three months from the date the parties submit their respective claims.
Let the claim be filed before the tribunal within a period of six weeks from today. उक्त आदेश में तकनीकी परीक्षण कोषांग के जाँच प्रतिवेदन को न तो अवैध ठहराया गया है और न ही उक्त जाँच प्रतिवेदन के प्रतिकूल कोई टिप्पणी की गयी है। इस प्रकार मो0 हुसैन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या किया गया है। विभाग द्वारा इस मामले की जाँच पुनः विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी है। विभागीय उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन के निष्कर्ष कंडिका-1 में उल्लेखित है कि नेपाल हितकारी योजना के अन्तर्गत मेसर्स कमलादित्य कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0, गंडक पुनर्स्थापन कार्य के तहत मेसर्स नागार्जुन कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 तथा मेसर्स जार कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 द्वारा बिहार प्रदेश क्षेत्राधीन कार्याें में स्थानीय सामग्रियों के उपयोग में लाये जाने का प्रमाण नहीं पाया गया, जबकि नेपाल भू-भाग में कार्य के जाँच के दौरान स्थानीय सामग्रियों आंशिक रूप से पायी गयी। अंतिम भुगतान के पूर्व नेपाल भू-भाग में कार्य में व्यवहृत सामग्रियों के लिए पर्याप्त नमूना लेकर एवं उसके3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) आकलन के आधार पर भुगतान के लिए कार्यपालक अभियंता को निदेश दिया जा सकता है। इस प्रकार विभागीय उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन में भी स्थानीय सामग्री के उपयोग होने की बात कही गयी है इसलिए मो0 हुसैन के इस बात को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि विभागीय उड़नदस्ता द्वारा जाँच प्रतिवेदन में अनियमितता एवं स्थानीय सामग्रियों की उपयोग होने की बात अंकित नहीं है। मो0 हुसैन द्वारा दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं०-7968/2015, में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विभागीय कार्यवाही पर रोक नहीं लगायी गयी।
मो0 हुसैन के विरूद्ध मुख्य आरोप यह है कि स्थानीय सामग्री उपयोग होने के बावजूद भी वास्तविक लीड के बजाय प्राक्कलन में प्रावधानित दर के अनुसार भुगतान किया गया है। इस बिन्दु पर मो0 हुसैन ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है और न ही इस बात का खंडन किया गया कि आलोच्य कार्य में स्थानीय सामग्री का उपयोग नहीं हुआ है। उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन की प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह उठाया गया, जबकि इस मामले में विहित प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा मो0 हुसैन के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया।
तकनीकी परीक्षक कोषांग के जाँच प्रतिवेदन में 24.65 करोड़ रूपये का अधिकाई भुगतान करने का आरोप गठित है किन्तु विभागीय समीक्षा में पाया गया कि यह राशि रू0 8.99 करोड़ रूपये है। इस प्रकार मो0 हुसैन संवेदक से मिलीभगत कर 8.99करोड़ रूपये अनियमित भुगतान के लिए दोषी पाये गये। तत्कालीन मुख्य अभियंता श्री रामपुकार रंजन के द्वारा अपने विभिन्न पत्रों के माध्यम से इस बात को प्रकाश में लाया जाता रहा कि आलोच्य कार्य में स्थानीय सामग्री की उपयोग हो रहा है, के बावजूद भी संवेदक को प्राक्कलन में प्रावधानित दर से लीड मद का भुगतान कर दिया गया, जिसके कारण सरकार को 8.99 करोड़ रूपये की हानि हुई जिसके लिए मो0 शादिक हुसैन (आई0डी0-5135), तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (सहायक अभियंता), मुख्य पश्चिमी नहर अवर प्रमंडल, त्रिवेणीगंज, वाल्मीकिनगर दोषी पाये गये।
2. मामले की सम्यक समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा प्रमाणित आरोपों के लिए मो0 शादिक हुसैन (आई0डी0-5135), तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (सहायक अभियंता), मुख्य पश्चिमी नहर अवर प्रमंडल, त्रिवेणीगंज, वाल्मीकिनगर संप्रति निलंबित सहायक अभियंता, अधीक्षण अभियंता का कार्यालय पश्चिमी कोशी नहर अंचल, मधुबनी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14(xi) के तहत "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
3. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से मो0 हुसैन के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर परामर्श की मांग की गयी जिस पर आयोग के पत्रांक-680, दिनांक 28.06.17 द्वारा सहमति प्रदान की गई।
4. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से प्राप्त सहमति के समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए मो0 शादिक हुसैन, (आई0डी0-5135) तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (सहायक अभियंता), मुख्य पश्चिमी नहर अवर प्रमंडल, त्रिवेणीगंज, वाल्मीकिनगर संप्रति निलंबित सहायक अभियंता, अधीक्षण अभियंता का कार्यालय पश्चिमी कोशी नहर अंचल, मधुबनी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14(xi) के तहत अधिसूचना निर्गत की तिथि से "सेवा से बर्खास्तगी" का दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है। 5. मो0 शादिक हुसैन (आई0डी0-5135), तत0 अवर प्रमंडल पदाधिकारी (सहायक अभियंता), मुख्य पश्चिमी नहर अवर प्रमंडल, त्रिवेणीगंज, वाल्मीकिनगर को सेवा से बर्खास्तगी के दण्ड प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के संयुक्त सचिव।
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