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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचना
15 नवम्बर 2017
सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-19/2012-2028—श्री उमेश चन्द्र शर्मा (आई0डी0-2552), तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-1, मधुबनी, शिविर पडरौना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-1, शिविर पडरौना के अन्तर्गत वर्ष 2012 में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित विभागीय उड़नदस्ता अंचल द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में उनके द्वारा बरती गयी अनियमितताओं के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1307, दिनांक 09.06.15 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में गठित निम्नांकित प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी - (1) बाढ़ अवधि 2012 में पी0पी0 तटबंध के 26.75 कि0मी0 स्पर पर परकोपाईन का गलत NR रिपोर्ट किये जाने से सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाया जाना।
(2) पी0पी0 तटबंध के कि0मी0 22.00 से कि0मी0 28.00 तक पक्कीकरण का प्राक्कलन बढ़ा चढ़ाकर तैयार करने से सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाये जाने की मंशा रखना।
(3) दिनांक 15.06.12 से 19.06.12 तक लगातार कार्यस्थल तथा मुख्यालय से अनुपस्थित रहना। (4) NR-11 दिनांक 20.06.12 से आरक्षित बालू भरे बोरे की मात्रा कुल 12500 अद्द के विरूद्ध मात्र कुल 15000 अद्द का NR देकर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाना।
(5) श्री संतोष कुमार चक्रवर्ती, कनीय अभियंता को कार्य से हटाने से संबंधित अधीक्षण अभियंता को कार्य से हटाने से संबंधित अधीक्षण अभियंता बाढ़ नियंत्रण अंचल, पडरौना का स्थल पंजी पर दिनांक 01.05.12 को निर्देश दिये जाने के बावजूद उक्त निदेश का अनुपालन नहीं कर उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करना।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 15 दिनांक 03.06.16 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया जिसमें आरोपित पदाधिकारी श्री शर्मा के विरूद्ध गठित आरोपों में से आरोप सं०-1 एवं 2 को अप्रमाणित तथा आरोप सं० 3, 4, एवं 5 को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत आरोप सं०-2, 3, 4, एवं 5 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत एवं आरोप सं०-1 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होेते हुए असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 2129, दिनांक 26.09.16 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए आरोप सं० 1, 3, 4 एवं 5 के संबंध में द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) श्री शर्मा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया -
(i) आरोप 1ः-कार्य के प्रभारी सहायक अभियंता श्री कामेश्वर प्रसाद एवं उनके कनीय अभियंता के सहयोग से पालीवार कार्यों का संकलन कर NR में अंकित कर प्रमंडल स्तर पर NR प्रेषित किया जाता था। 1851 अद्द परक्युपाईन का प्रतिवेदन एवं 254 अद्द परक्युपाईन लेईंग का आरोप सही नहीं है। कृपया साक्ष्य रूप से उपरोक्त तिथि का पालीवार पंजी का प्रति उपलब्ध कराया जाय। चूँकि कार्यस्थल के कई बिन्दुओं पर अलग-अलग कार्यपालक अभियंता के स्तर से कार्य कराया जा रहा था। अतः कृपया साक्ष्य के रूप में संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन की सत्यापित प्रति एवं माह जून 2012 से अक्टूबर 2012 तक का परक्यूपाईन भण्डारण से संबंधित अवर प्रमंडल का स्थल लेखा/भंडार लेखा की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराना चाहेंगे।
(ii) आरोप 3ः-इस आरोप के संबंध में कहा गया है कि दिनांक 15.06.12 को वे वाल्मी परिसर में हुए राज्य स्तरी बैठक में सम्मिलित थे। बैठक के पश्चात मोनिटरिंग के सहायक अभियंता श्री जमील द्वारा कतिपय प्रपत्र प्राप्त करने हेतु अगले दिन सचिवालय बुलाने पर अवकाश के बावजूद भी श्री जमील द्वारा उन्हें प्रपत्र उपलब्ध कराया गया। इसके बाद शाम को वे मुख्यालय लौट गये। दिनांक 17.06.12 से 18.06.12 के अपराह्न तक कार्यालय कार्य कर माननीय उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर दिनांक 19.06.12 की रात मुख्यालय के लिए प्रस्थान कर गया। श्री राजू कुमार जिनका मुख्यालय प्रमंडल से 20-22कि0मी0 दूर है, दिनांक 15.06.12 से 19.06.12 तक प्रतिदिन उनके अनुसार प्रमंडलीय कार्यालय आते रहे, परन्तु उनके द्वारा कार्यालय कर्मचारी एवं कार्यपालक अभियंता के मुवमेंट की जानकारी नहीं ली जबकि दिनांक 17.06.12 से 18.06.12 तक पूर्वाहन तक वे स्वयं कार्यालय में थे परन्तु उनके द्वारा कोई सम्पर्क नहीं किया गया।
(iii) आरोप 4ः-इस आरोप के संबंध में कहा गया है कि सहायक अभियंता प्रमंडलीय कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए थे। उनसे मोबाईल पर प्रतिवेदन मांगने का प्रयास किया गया परन्तु उनका मोबाईल बन्द था। अंततः उनके कनीय अभियंता द्वारा मोबाईल पर सूचना दी गई। यह प्रतिवेदन पूर्व में भी समर्पित है। पूर्व में इनके द्वारा मोबाईल पर स्पष्ट आवाज नहीं आने की बात कही गयी थी, जो सही है एवं इनके द्वारा यह नहीं कहा गया था कि कनीय अभियंता ने 15000 बोरा ही भरे जाने की सूचना दी गयी थी।
(iv) आरोप 5ः-इस आरोप के संबंध में कहा गया है कि श्री चक्रवर्ती कनीय अभियंता को तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के आदेश का अनुपालन में स्पर निर्माण जो दूसरे एजेण्डा में था, कार्यहित में चेतावनी के साथ लगाया गया था। उस समय प्रमंडल में कनीय अभियंता का बल आधे से भी कम था और दूसरे कार्य में श्री चक्रवर्ती को भेजने में कोई आपत्ति नहीं की गयी। श्री चक्रवर्ती को पूर्ण रूप से कटाव निरोधक कार्य से हटाने का कोई आदेश निर्गत नहीं था। श्री चक्रवर्ती से स्पष्टीकरण की भी मांग की गयी थी।
श्री शर्मा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान की समीक्षा में पाया गया कि :- (i) आरोप 1ः-श्री शर्मा द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा में कहा गया है कि गलत NR नहीं भेजा गया है तथा चूँकि कार्यस्थल के कई बिन्दुओं पर अलग-अलग कार्यपालक अभियंता के स्तर से पाली में कार्य कराया जा रहा था एवं पाली पंजी में अंकित मात्रा को समेकित कर NR भेजा गया है। साक्ष्य के रूप में संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन की सत्यापित प्रति तथा माह जून 2012 से अक्टूबर 2012 तक पाली पंजी तथा भंडार लेखा एवं स्थल लेखा की मांग की गयी है।
संचिका में प्रश्नगत प्रमंडलान्तर्गत विभिन्न पर स्थलों वर्ष 2012 में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों का सम्पूर्ण रूप से NR एवं पाली पंजी तथा लेखा नहीं रहने की स्थिति में आरोपी के कथन को पूर्ण रूप से नकारा जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। परन्तु उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर परिलक्षित है कि वास्तविक रूप से कराये गये परक्यूपाईन लेईंग कार्य से अधिक NR में प्रतिवेदित किया गया है कुछ हद तक सही माना जा सकता है।
(ii) आरोप 3 :-इस आरोप के संदर्भ में आरोपी अपने द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान में वही तथ्य दुहराया गया है जो इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है, कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इनके बचाव बयान एवं तथ्यों के समीक्षोपरांत ही स्वेच्छापूर्वक दिनांक 15.06.12 से 18.06.12 तक अनुपस्थित रहने का मंतव्य दिया गया है जिससे सहमत होते हुए दिनांक 15.06.12 से 18.06.12 तक स्वेच्छापूर्वक मुख्यालय एवं कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने का आरोप प्रमाणित माना जा सकता है।
(iii) आरोप 4 :-इस आरोप का संर्दभ में आरोपी द्वारा वही तथ्य दिया गया है कि मोबाईल से वार्ता करने के क्रम में नेटवर्क नहीं करने के कारण 12500 अद्द के स्थान पर 15000 अद्द सुनाई पड़ा एवं उसी के अनुरूप NR दिया गया है, को संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त कटाव हो हास्यपद करार देते हुए आरोप को प्रमाणित माना गया है। एक कार्यपालक अभियंता जैसे जिम्मेवार पदाधिकारी से इस तरह का भ्रामक आँकड़ो से विभाग को अवगत कराना स्पष्ट परिलक्षित करता है कि इनके द्वारा गलत आँकड़ा प्रतिवेदित कर सरकारी राशि की हानि पहुँचाने की मंशा रही है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित माना जा सकता है।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) (iv) आरोप 5 :-आरोपी द्वारा कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया। मात्र वही तथ्य दोहराया गया है जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि अधीक्षण अभियंता के द्वारा दिये गये आदेश की अवहेलना करने के लिए दोषी है से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना जा सकता है। समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री शर्मा के विरूद्ध आरोप सं०-1, 3, 4 एवं 5 को प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए आरोपित पदाधिकारी को "10प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से कटौती" करने का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।
उपर्युक्त विनिश्चित दंड पर विभागीय पत्रांक 726, दिनांक 24.05.17 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श हेतु अनुरोध किया गया। आयोग के पत्रांक 941 दिनांक 24.07.17 द्वारा श्री शर्मा के विरूद्ध विनिश्चित दंड पर सहमति दी गयी।
अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय एवं बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति के आलोक में सम्यक विचारोपरांत श्री उमेश चन्द्र शर्मा (आई0डी0-2552) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-1, मधुबनी शि0-पड़रौना को निम्न दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-
"10% प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से कटौती"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के संयुक्त सचिव।
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