िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 1(cid:18) म(cid:4)घ 1(cid:21)3(cid:21) (cid:23)श(cid:24)(cid:25)
((((स(cid:26)(cid:24) पटन(cid:4) (cid:21)(cid:29)) ) ) ) पटन(cid:4)(cid:30) स(cid:31)मव(cid:4)र(cid:30) 5555 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2(cid:24)1" जल संसाधन विभाग ——— अधिसूचना 15 नवम्बर 2017
सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-19/2012-2030—श्री राजू कुमार (आई0डी0-5191), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-1, मधुबनी शिविर पडरौना के विरूद्ध बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-1, शिविर पडरौना के अन्तर्गत वर्ष 2012 में कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों से संबंधित विभागीय उड़नदस्ता अंचल द्वारा प्रतिवेदित जाँच प्रतिवेदन के आलोक में उनके द्वारा बरती गयी अनियमितताओं के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1308, दिनांक 09.06.15 द्वारा आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में गठित निम्नांकित प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी :-
(1) पी0पी0 तटबंध के 26.75 कि0मी0 स्पर पर सामग्री प्रबंधन में कमी के कारण बाढ़ संघर्षात्मक कार्य नहीं होने से स्पर में कटाव की वजह से सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचना एवं लेखा संधारण में त्रुटि कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाने की गलत मंशा रखना।
(2) पी0पी0 तटबंध के कि0मी0 22.00 से कि0मी0 28.00 तक पक्कीकरण का प्राक्कलन तैयार नहीं कर उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना करना।
(3) बाढ़ 2012 के दरम्यान बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में लापरवाही एवं शिथिलता बरतने तथा कार्यशैली में सुधार नहीं करने से पी0पी0 तटबंध के 26.75कि0मी0 स्पर पर कटाव हो जाने की वजह से सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचना।
(4) दिनांक 20.06.12 से 22.06.12 तक एवं 26.07.12 को मुख्यालय एवं कार्यस्थल से अनुपस्थित रहना। (5) पी0पी0 तटबंध के 26.75कि0मी0 स्पर के अपस्ट्रीम में बिना नींव कटाई के स्टड प्रभाग 2/10 का कार्य प्रारंभ करने से विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं करने की मंशा रख कर सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचना।
(6) बाढ़ अवधि में अनावश्यक पत्राचार कर सामग्री की ढुलाई में विलम्ब करने से पी0पी0 तटबंध के 26.75 कि0मी0 स्पर पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में दायित्व का निर्वहन नहीं करना।
संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-15, दिनांक 03.06.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया जिसमें आरोपित पदाधिकारी श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों में से आरोप सं०-1 को प्रमाणित एवं शेष को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत आरोप सं०-1, 2 एवं 6 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत एवं आरोप सं०-3, 4 एवं 5 के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक-2131, दिनांक 26.09.16 द्वारा आरोप सं०-1, 3, 4 एवं 5 के संबंध में द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव-बयान में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
(1) आरोप 1ः-सामग्री प्रबंध के संबंध में कहा गया है कि मेरे द्वारा दिनांक 20.06.12 से 03.08.12 तक कार्यपालक अभियंता को समर्पित खैरियत प्रतिवेदन एवं अवर प्रमंडल पदाधिकारी के स्टॉक लेखा, स्थल लेखा, सरप्लस लेखा की प्रति से स्पष्ट होता है कि स्पर पर कटाव के लिये दोषी मैं नहीं हूँ न ही लेखा संधारण में कोई त्रुटि हुई है। पत्रांक-36, दिनांक 20.07.12, 37 दिनांक 13.07.12, 40 दिनांक 24.07.12 संलग्न करते हुए कहा गया है कि कि0मी0 26.25 पर अवस्थित स्पर का खैरियत प्रतिवेदन दिनांक 20.07.12 से 26.07.12 तक प्रतिदिन कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध कराया गया है तथा दिनांक 25.07.12 के खैरियत प्रतिवेदन में दिनांक 24.07.12 से 25.07.12 के सुबह तक लगातार भारी वर्षों से स्थल एवं तटबंध पर के रास्ता खराब होने के कारण जरूरत के अनुसार सामग्री ढुलाई नहीं हो सका। दिनांक 24.07.12 को रात्रि पाली में कार्यपालक अभियंता को मौखिक एवं लिखित रूप से कटाव रोकने हेतु बोल्डर माँगने हेतु भी कही गयी थी तथा समय-समय पर उच्चाधिकारी को सामग्री की स्थिति से अवगत कराया गया था।
दिनांक 25.07.12 को बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष के द्वारा आवागमन पर दिये गये निदेश के आलोक में तटबंध पर ट्रैक्टर चलने लायक बनवा लिये थे तथा कुछ बाकी थे तथा दिनांक 18.07.12 को प्रधान सचिव के निरीक्षण में स्थल पर पूरे तटबंध पर रास्ता ठीक करा लेने का आदेश दिया गया था। परन्तु कार्यपालक अभियंता द्वारा कोई रूचि नहीं ली गयी तथा रास्ता ठीक नहीं हो सका।
कार्यपालक अभियंता को पत्र के माध्यम से 8 हजार NC 2 लाख EC bags तथा वी0ए0 वायर की आपूर्ति हेतु कही गयी थी तथा दिनांक 02.08.12 को मुझे स्पर के कार्यों से हटा दिया गया फिर भी मैं अन्य स्थल की निगरानी/चौकसी करता रहा।
नदी के तीव्र बहाव के कारण स्टड सं०-1 के आगे का भाग झुक गया था जिसकी सूचना पत्रांक 45, दिनांक 29.07.12 से खैरियत प्रतिवेदन से दिया गया। दिनांक 28.07.12 को निदेशानुसार NC का कार्य कराकर ठीक कराया जा रहा था। नदी का दबाव बढ़ता गया। इस स्थिति में स्थल पर कार्यपालक अभियंता की उपस्थिति एवं दिशा-निर्देश आवश्यक था परन्तु वे स्थल पर नहीं आये। इन सभी स्थिति को खैरियत प्रतिवेदन में अंकित कर पत्रांक-49, दिनांक 30.07.12 को दिया गया।
पत्रांक 2, दिनांक 01.08.12 रात्रि 11.00 बजे थाना प्रभारी को संबोधित है, में 11 बजे रात्रि में करीब दो असमाजिक तत्व लाठी-डण्डे से लैस होकर पहुँचे एवं रात्रि में कार्य बन्द करा दिया गया। किसी तरह जान बचाकर कि0मी0 26.75 स्टड पर मुख्य अभियंता को सारी घटना की जानकारी दी गयी। परन्तु दिनांक 01.08.12 को रात्रि की घटना के बाद मुझपर झूठा आरोप लगाकर 26.10 कि0मी0 कटाव स्थल से ही हटा दिया गया।
संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन के कंडिका 1.08 में कहा गया है कि तटबंध का रास्ता ठीक कराने में कार्यपालक अभियंता द्वारा कोई दिलचस्पी नहीं ली गयी तथा प्रमंडलीय सभी कार्यों के समग्र रूप से प्रभारी होने के नाते कार्यपालक अभियंता की जबावदेही थी हर पाली में दर्ज स्थलीय स्थिति/खैरियत के आलोक में सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करते, परन्तु सहायक अभियंता श्री राजू कुमार एवं कनीय अभियंता श्री तेज प्रताप सिंह द्वारा प्रतिवेदन खैरियत में दर्ज तथ्यों पर गंभीरता से नहीं लिया गया। जिसके कारण दिनांक 24.07.12 के रात्रि पाली एवं दिनांक 25.07.12 के प्रथम श्रेणी में सामग्री के अभाव में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य नहीं कराया गया।
संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन के निष्कर्ष कंडिका से स्पष्ट है कि श्री राजू कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी द्वारा बाढ़ पूर्व सामग्रियों की ढुलाई/भंडारण की दिशा में कार्रवाई से लेकर कि0मी0 26.75 स्पर पर हो रहे कटाव को नियंत्रण करने हेतु कार्यपालक अभियंता एवं उच्च पदाधिकारी को लगातार बाढ़ संघर्षात्मक सामग्री की उपलब्धता के लिये मौखिक/लिखित खैरियत प्रतिवेदन से प्रतिदिन अनुरोध किया जाता रहा। उनके द्वारा कहा गया है कि उक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि सामग्री प्रबंधन में सहायक अभियंता श्री राजू कुमार के स्तर से कोई लापरवाही अथवा शिथिलता बरतने की बात प्रतीत नहीं हो रही है अपितु कार्यपालक अभियंता के स्तर पर घनात्मक सोच के साथ ठोस कार्रवाई नहीं करने के कारण कटाव की स्थिति सामग्री के अभाव में बिगड़ती चली गयी। इस प्रकार बचाव कार्य में प्रतिकूल असर कार्यपालक अभियंता श्री उमेश चन्द्र शर्मा के द्वारा ठोस कारवाई नहीं करने के कारण हुआ है। लेखा संधारण में त्रुटियों के संदर्भ में कहा गया है कि मुख्य अभियंता के पत्रांक 1856, दिनांक 19.06.12 एवं कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 654, दिनांक 26.06.12 के आलोक में 12500 अद्द खाली सीमेंट बोरा में बालू भरकर 26.10 कि0मी0 से 26.75कि0मी0 के बीच भंडारित किये गये थे। श्री तेज प्रताप सिंह, कनीय अभियंता ने दिनांक 10.08.12 को बताया कि उनके द्वारा दिनांक 03.08.12 को समर्पित स्टॉक लेखा एवं स्थल लेखा के साथ HR में कि0मी026.75 पर गठित पाली अभियंताओं द्वारा पाली रजिस्टर में BA wire crating कार्य 138 अद्द दिखलाये गये, जबकि लेखा में कुल 66 अद्द बचे थे। ये सब कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के मिलीभगत से हुआ है एव ंहम पर गलत NR करने के लिये दबाव बनाया गया। परन्तु गलत करने से इनकार करने पर झूठा लापरवाही का आरोप लगाकर स्थल से हटा दिया गया तथा द्वितीय पाली में 36 अद्द अधिक BA wire crate पाली रजिस्टर में3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) दर्ज करने वाले सहायक अभियंता श्री कामेश्वर प्रसाद एवं कनीय अभियंता श्री निखिलानन्द पाण्डेय को लगा दिया गया। बाद में उड़नदस्ता के कार्यालय में श्री निखिलानन्द पाण्डेय द्वारा पाली रजिस्टर में दर्ज BA wire Crate की सं० 49 अद्द को 19 अद्द की गयी।
श्री उपेन्द्र प्रसाद मण्डल, कनीय अभियंता द्वारा दिनांक 22.07.12 को 22 अद्द तथा दिनांक 28.07.12 को 50 अद्द BA wire Crate का हस्तांतरण श्री तेज प्रताप सिंह को किया गया, परन्तु श्री मंडल द्वारा दिनांक 06.09.12 द्वारा बताया गया कि श्री तेज प्रताप सिंह, कनीय अभियंता द्वारा 46 अद्द क्रेट का HR नहीं दिया गया जो गलत था। मेरे द्वारा पत्रांक 184, दिनांक 31.08.12 से मुख्य अभियंता को उचित माध्यम से एक रिपोर्ट दी गयी। उसके बाद कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 06.09.16 को अपना बचाव हेतु उक्त पत्र डलवाया गया, ताकि कम सामग्री रहते हुए अधिक खपत पाली रजिस्टर में दर्ज किया।
माह जुलाई 2011 से पी0पी0 बाँध के 26.75 कि0मी0 पर श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा कार्य कराया गया। दिनांक 25.07.11 को उनके लेखा में मात्र 1 अद्द NC एवं 25 अद्द EC bags बचे थे। परन्तु संवेदक से पैसा लेकर उन्होंने 25.07.11 को 51 अद्द NC तथा 1275 अद्द EC bags तथा 26.07.11 को भी 51 अद्द NC तथा 1275 अद्द EC bags लेखा से ज्यादा NR कर दिया गया। मेरा पदस्थापन के बाद तुरन्त लेखा की माँग करने पर नहीं दिया गया। जुलाई 2011 बाढ़ से संबंधित प्रपत्र 24 एवं श्री अरूण कुमार चौबे द्वारा समर्पित HR का मिलान कर मेरे द्वारा सभी लेखा बनाये गये तभी इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ जिसकी सूचना तुरन्त कार्यपालक अभियंता को दी गयी।
उक्त से स्पष्ट है कि मेरे द्वारा ही गलत कार्यों का उजागर किया गया। इस प्रकार यदि निखिलानन्द पाण्डेय (कनीय अभियंता) द्वारा पाली रजिस्टर में टेम्परिंग कर BA Wire Crate की खपत को 49 अद्द को 19 अद्द नहीं दिया गया होता तथा श्री उपेन्द्र प्रसाद मंडल, कनीय अभियंता के उक्त आवेदन दिनांक 06.09.12 जिसमें 46 अद्द BA Wire Crate का HR नहीं देने का जिक्र को गलत करार दिया जाय एवं श्री अरूण कुमार चौबे, कनीय अभियंता द्वारा दिया गया HR तथा उनका लेखा को सही माना जाय तो मेरे द्वारा समर्पित लेखा बिल्कुल ही त्रुटिपूर्ण नहीं है। (ii) आरोप 3 ः- श्री कुमार द्वारा श्री अब्दुल हमीद अध्यक्ष बाढ़ संघर्षात्मक बल के पत्रांक 1 दिनांक 15.09.02 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि तटबंध से सटकर बहने वाली चैनल में लगभग कुल बहाव का 60 प्रतिशत पानी बहने लगा जिसके कारण पी0पी0 तटबंध के कि0मी0 26.75 के U/s में काफी कटाव होने लगा तथा स्पर पर गंडक नदी की धारा का सीधा आक्रमण होने लगा। कटाव होने से स्पर के सैक के U/s, U/s Nose corner तथा D/s Sank आंशिक रूप से नष्ट हो गया।
उच्च पदाधिकारी के निदेशानुसार क्षतिग्रस्त भाग के पुनस्र्थापन कार्य हेतु बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया गया, परन्तु दायाँ चैनल में डिस्चार्ज बढ़ता गया। फलस्वरूप कि0मी0 26.10 से 26.75 के बीच बने स्ट्रेच के U/s भाग में नदी घुसती चली गयी एवं स्पर पर दबाव बढ़ता चला गया। अंततः कि0मी0 26.75 के स्पर को 210मी0 से 85मी0 की लंबाई पर कटाव होने से रोका गया।
कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता तथा मुख्य अभियंता ने दिनांक 25.09.12 को GHLC के उप कमिटी एवं अक्टूबर 2012 के अंतिम सप्ताह में GHLC के समक्ष प्रस्तुत एजेण्डा नोट के संयुक्त प्रतिवेदन में बाढ़ संघर्षात्मक बल द्वारा तटबंध के नजदीक से बहने वाली चैनल में ही अधिकांश डिस्चार्ज बहने के वजह नदी का दबाव कि0मी0 26.75 स्पर पर अत्यधिक पड़ने के कारण स्पर में कटाव होना बताया गया है।
प्रकृति के नियमों के अनुकूल प्रत्येक वर्ष पी0पी0 तटबंध के कि0मी0 26.10 से 26.75 के बीच नदी नजदीक आकर बहने के कारण वर्ष 2012 में स्पर में कटाव हुआ था।
मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा एक टीम बनाकर विभिन्न प्रकार के पत्राें के माध्यम से मुझे फँसाया गया है ताकि विभाग का ध्यान उनपर से हटकर मुझपर केन्द्रीत हो जाय। मुझे हटाकर पुनः दिनांक 23.08.12 को मुख्य अभियंता द्वारा अभियंता प्रमुख के आदेश के आलोक में पाली रजिस्टर में आदेश देकर बाढ़ कार्य में लगाया गया और बाँध को बचाया जा सका। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में पूरी निष्ठा के साथ करते हुए बाँध को बचाया गया।
संचालन पदाधिकारी के कंडिका 2.0.2 में कहा गया है कि कि0मी0 26.75 स्पर की कुल लंबाई 210मी0 से 85मी0 की लंबाई में रोक लिया गया। यह कार्य के प्रति लापरवाही एवं शिथिलता नहीं बल्कि कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा कहा जा सकता है एवं कंडिका 2.0.4 से प्रतीत होगा कि मैं प्रतिदिन अपने कार्यक्षेत्र के तटबंध प्रभाग के साथ ही कि0मी0 26.75 स्पर एवं कि0मी0 26.10 से 26.53 के बीच अवस्थित स्टड पर उत्पन्न बाढ़ की स्थिति से कार्यपालक अभियंता एवं उच्चाधिकारी को अवगत कराता रहा एवं उत्पन्न स्थिति के रोकथाम के लिये कार्यपालक अभियंता के द्वारा कोई ठोस दिशा निदेश नहीं देकर केवल आपस में आरोप प्रत्यारोप कर कार्यालय की गरिमा को भंग करने में दिलचस्पी लेते रहा गया। यह पूरी तरह कार्यपालक अभियंता के खराब कार्यकलाप एवं भेदभाव पूर्ण रवैया तथा मुझे फँसाने की साजिश का जिक्र किया गया, तथा आरोप मुक्त किया गया है।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) (iii) आरोप 4 :- इस आरोप के संबंध में कहा गया है कि दिनांक 20.06.12 से दिनांक 22.06.12 तक एवं 26.07.12 को वे अपने कार्यस्थल एवं मुख्यालय में बने रहे जो संलग्न खैरियत प्रतिवेदन से भी स्पष्ट होता है। साक्ष्य के रूप में इनके द्वारा दिनांक 19.06.16 से 26.07.16 तक का कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध कराये गये खैरियत प्रतिवेदन दिया गया है।
इसके अतिरिक्त दिनांक 20.06.12 को अपने पत्रांक-111 दिनांक 20.6.12 के द्वारा माह जून 2012 का स्वयं अधीनस्थ कनीय अभियंता, कर्मचारियों का अनुपस्थिति विवरणी कार्यपालक अभियंता को दी गयी है।
कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 621, दिनांक 20.06.12 तथा मुख्य अभियंता के NR 5 दिनांक 20.06.12 को दिनांक 21.06.12 को प्राप्त कराया गया है। कार्यपालक अभियंता के चपरासी वही देखा जा सकता है।
इस पत्र का जवाब अपने पत्रांक 116, दिनांक 21.06.12 द्वारा कार्यपालक अभियंता को प्राप्त कराया गया है। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 614, दिनांक 14.06.12 को दिनांक 21.06.12 की तिथि में प्राप्त करके पत्रांक 115 दिनांक 21.06.12 के द्वारा ही कनीय अभियंता को प्राप्त कराया।
कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 634, दिनांक 22.06.12 को प्राप्त कर अपने पत्रांक 122, दिनांक 22.06.12 द्वारा कनीय अभियंता को उसी दिन प्राप्त कराया गया। कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 656, दिनांक 26.06.12 को उसी दिन प्राप्त कर उसकी प्रतिलिपि अपने कनीय अभियंता श्री चौबे एवं श्री सिंह को पत्रांक 136, दिनांक 26.06.12 द्वारा प्राप्त कराया तथा कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 654 दिनांक 26.06.12 को 26.06.12 की तिथि में प्राप्त कर उसकी प्रति अपने कनीय अभियंता श्री चौबे एवं श्री सिंह को अपने पत्रांक-134, दिनांक 26.06.12 द्वारा प्राप्त कराया गया। उड़नदस्ता द्वारा समर्पित प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि वर्णित तिथियों को मेरा कार्यस्थल एवं मुख्यालय में उपस्थित होना बताया गया है।
कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 677, दिनांक 04.07.12 जिसमें अनुपस्थित अवधि में खैरियत प्रतिवेदन एक साथ दिनांक 23.06.12 को श्री संजय ठाकुर को देने की बात कही गयी है, जो बिल्कुल ही गलत है। मेरे द्वारा प्रतिदिन खैरियत प्रतिवेदन पत्रांक 01/बाढ़ से पत्रांक 9/बाढ़ एवं अवर प्रमंडल का चपरासी वही के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रतिदिन खैरियत प्रतिवेदन प्रमंडल में समर्पित किया गया है।
कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रमंडल के पत्रांक 631, दिनांक 21.06.12 को मुझे दिनांक 23.06.12 को प्रमंडलीय चपरासी वही से प्राप्त कराया गया है। कार्यपालक अभियंता श्री शर्मा द्वारा NR 11 दिनांक 20.06.12 के द्वारा 15000 हजार आरक्षित बालू भरे बोरे का रिपोर्ट कर दिया गया जबकि श्री सुनील कुमार, कनीय अभियंता से मात्र 12500 अद्द खाली सीमेंट बोरा मैंने प्राप्त किया था। 2500 बोरों की गलत HR नहीं देने के कारण कार्यपालक अभियंता द्वारा मेरे विरूद्ध अनुपस्थित एवं कार्य में सहयोग नहीं करने का रिपोर्ट अपने पत्रांक 631, दिनांक 21.06.12 द्वारा किया गया तथा पुनः दिनांक 26.06.12 को अनुपस्थिति का रिपोर्ट कर दिया गया।
इस प्रकार दिनांक 20.06.12 से 22.06.12 तक एवं दिनांक 26.06.12 को मुख्यालय एवं कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने के आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय।
(iv) आरोप 5 :- दिनांक 27.05.12 की शाम को कार्यपालक अभियंता के साथ पी0पी0 तटबंध के कि0मी0 26.10 से 26.53 के बीच चल रहे कटाव निरोधक कार्यों के अन्तर्गत 10 अद्द स्टड का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में स्टड प्रभाग 2/10 का नींव पूर्ण रूप से कटे हुए थे तो बोल्डर कार्य चल रहे थे। कार्य समाप्ति के पश्चात कार्यपालक अभियंता द्वारा मुझे एवं मेरे कनीय अभियंता श्री चौबे को साथ लेकर पड़रौना आये और दिनांक 28.05.12 की सुबह मोबाईल पर निदेश दिया गया कि आप दोनों लेखा मिलान कर समर्पित करें, और कार्यपालक अभियंता ने श्री संतोष कुमार चक्रवर्ती, कनीय अभियंता के साथ सुबह उक्त स्थल पर चले गये। वे दोनों असमाजिक तत्वों से मिलकर स्टड प्रभाग 2/10 के बीच में नींव में मिट्टी भराई करके बोल्डर क्रेटिंग कार्य करा रहे थे। जब ग्रामीणों द्वारा शोर किया जाने लगा तो हम दोनों को बदनाम करने के लिये उच्च पदाधिकारी को गलत सूचना दी गयी। जब मेरे द्वारा इसकी सूचना दिनांक 28.05.12 को मोबाईल पर अध्यक्ष श्री अब्दुल हमीद एवं मुख्य अभियंता को दी गयी। दिनांक 01.05.12 को अधीक्षण अभियंता द्वारा श्री संतोष कुमार चक्रवर्ती को गलत कार्य कराने के कारण उन्हें हटा दिये जाने के बाद भी कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 09.05.12 को कि0मी0 26.75 पर चल रहे स्पर निर्माण कार्य में लगा दिया गया।
जहाँ तक स्थल से मुझे हटाने का आदेश कार्यपालक अभियंता द्वारा दिये गये थे वे खुद इसके लिए साक्ष्य नहीं थे। गलत तरीके से मुझे हटाकर श्री राजेन्द्र सिंह को उनके पत्रांक 519, दिनांक 28.05.12 द्वारा लगाया गया ताकि गलत कार्य कराकर आर्थिक लाभ के लिये कनीय अभियंता/सहायक अभियंता का टीम बन सके। इसकी सूचना मैंने पत्रांक 61 दिनांक 30.05.12 द्वारा उच्चधिकारियों को दिया था।
संचालन पदाधिकारी द्वारा यह भी कहा गया है कि श्री राजू कुमार द्वारा प्रमंडलीय क्रियान्वयन कटाव निरोधक कार्य एवं बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों में अनियमितता के विरूद्ध सोच एवं कार्यशैली अपनाने के कारण कार्यपालक अभियंता श्री उमेश चन्द्र शर्मा द्वारा गलत आरोप लगाकर फँसाने का हर संभव प्रयास किया गया है। अतः उक्त तथ्यों के आलोक में आरोप मुक्त करने की कृपा की जाय।5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव-बयान की समीक्षा में पाया गया कि :- (i) आरोप 1 :-संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं०-1 को प्रमाणित मानते हुए श्री राजू कुमार से इस आरोप के संदर्भ में बचाव-बयान की माँग की गयी। श्री राजू कुमार द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान में इस आरोप सं०-1 के संदर्भ में वही तथ्य एवं साक्ष्य दिया गया जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान संचालन पदाधिकारी को दिया गया है। इनके द्वारा कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के द्वारा दिये गये मंतव्य के आलोक में श्री राजू कुमार, सहायक अभियंता को बाढ़ सामग्री के भंडार लेखा एवं स्थल लेखा के संधारण में पायी गयी त्रुटियों के लिए दोषी माना जा सकता है।
(ii) आरोप 3 ः-इस आरोप के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से निम्न तथ्यों के आलोक में असहमत होते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी :-
(1) बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में शिथिलता एवं लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्य अभियंता द्वारा आपसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। आप से प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत कार्य में शिथिलता एवं लापरवाही बरतने एवं क्रियाकलाप के मद्देनजर आपके विरूद्ध प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण करने की अनुशंसा की गयी।
(2) स्थल आदेश पंजी से स्पष्ट है कि कि0मी0 26.75 पर अवस्थित स्पर तथा कि0मी0 26.10 से 26.70 के बीच बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में अवरोध पैदा करने तथा शिथिलता एवं लापरवाही बरतने के कारण आपको स्थल से हटाने का आदेश मुख्य अभियंता द्वारा दिया गया।
(3) सामग्री के सही प्रबंधन नहीं करने कारण दिनांक 23.07.12 को तृतीय पाली एवं 24.07.12 को द्वितीय पाली में कार्य नहीं होने के कारण स्पर के स्लोप एवं नोज क्षतिग्रस्त हो गया तथा मुख्य अभियंता के पत्रांक 287, दिनांक 24.01.13 से स्पष्ट है कि आपको कार्य से अलग रख कर बाँध को टूटने से बचाया गया।
आरोपी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में अधिकांश तथ्य वही उद्धित किया गया जो इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को विभागीय संचालन के दौरान दिया गया है।
स्पर क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण आरोपी द्वारा बताया गया है कि वर्ष 2011 में ही कि0मी0 26.0 से 26.75 के स्पर के बीच नदी में तेज धारा के कारण एक लूप बन गया था तथा स्पर निर्माण नदी के अन्दर तटबंध से 210मी0 दूरी पर बनाने का आदेश हुआ था जिसके कारण गंडक नदी के धारा की प्रवृति भी कि0मी0 26.10 पर Tangential बहने के कारण अत्याधिक दबाव पड़ने लगा कि पुष्टि रियाज्म प्लान से होना परिलक्षित होता है। अंततः बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराकर स्पर का 218मी0 से 85मी0 पर बचा लिया गया। साथ ही अन्य तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा एक टीम बनाकर विभिन्न प्रकार के पत्रों के माध्यम से मुझे फँसाया गया है ताकि विभाग का ध्यान उन पर से हटकर मुझ पर केन्द्रीत हो जाय इसलिए मुझ पर कार्य में शिथिलता, लापरवाही के आरोप लगाते हुए कार्य से हटाकर बाँध टूटने से बचाने की बात कही गयी है, जबकि पुनः दिनांक 23.08.12 को मुख्य अभियंता द्वारा अभियंता प्रमुख के आदेश के आलोक में पाली रजिस्टर में आदेश देकर कार्य में लगाया गया को एक सिरे से स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है क्योंकि अभिलेख से परिलक्षित होता है कि श्री कुमार को NR तैयार करने एवं समय पर भेजने हेतु आदेश दिया गया है न कि कार्य कराने का आदेश दिया गया है। ऐसी स्थिति में मुख्य अभियंता द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध की गयी टिप्पणी एवं कार्रवाई के आधार पर माना जा सकता है कि श्री प्रसाद द्वारा कुछ हद तक शिथिलता/लापरवाही बरती गयी है। (iii) आरोप 4 ः- इस आरोप के संबंध मे संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से निम्न तथ्यों के आलोक असहमत होते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी -
कार्यपालक अभियंता के पत्रांक 677, दिनांक 04.07.12 में कहा जाना कि आप दिनांक 15.06.12 से 22.06.12 तक अपनी उपस्थित दर्ज करने हेतु उक्त अवधि के खैरियत प्रतिवेदन तैयार कर दिनांक 23.06.12 को एक साथ बेतार चालक श्री संजय ठाकुर को दिया गया। उपस्थिति विवरणी पोस्ट डेटिंग कर प्रमंडलीय कार्यालय में किसी के द्वारा दिनांक 20.06.12 को उपलब्ध कराया गया है। कार्यपालक अभियंता द्वारा यह कहा गया है कि प्रमंडल के पत्रांक 631 दिनांक 21.06.12 को आपके द्वारा दिनांक 23.06.12 को प्रमंडलीय चपरासी वही में स्वयं प्राप्त किया गया है उक्त से स्पष्ट है कि दिनांक 20.06.12 से 22.06.12 तक आपके द्वारा उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास किया गया है। आरोपी द्वारा कहा गया है कि दिनांक 20.06.12 को इनके द्वारा हस्ताक्षर करके अपने पत्रांक 111, दिनांक 20.06.12 के द्वारा माह जून 2012 का स्वयं एवं अधीनस्थ कनीय अभियंता/कर्मचारियों का अनुपस्थिति विवरणी कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध कराया गया है। खैरियत प्रतिवेदन NR 1 से 9 तक प्रतिदिन प्रमंडल कार्यालय में उपलब्ध कराया गया है। कार्यपालक अभियंता के NR 5 दिनांक 20.05.12 को स्वयं श्री कुमार द्वारा दिनांक 21.06. 12 को प्राप्त किया गया है तथा दिनांक 21.06.12 को विभागीय पत्रांक 337, दिनांक 08.05.12 की प्रति श्री कुमार द्वारा कनीय अभियंता को पृष्ठांकित किया गया है तथा अवर प्रमंडल के चपरासी वही के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि दिनांक 19.06.12 से 23.06.12 तक विभिन्न NR के माध्यम से प्रतिदिन खैरियत प्रतिवेदन प्रमंडल के कर्मचारी श्री राजू चौधरी को हस्तगत कराया गया है। अभिलेखों से स्पष्ट है कि श्री कुमार आरोपी द्वारा दिनांक 26.06.12 को कई पत्र6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) प्राप्त करते हुए उसी दिन कनीय अभियंता को पृष्ठांकित किया गया है। पूरे प्रकरण के अवलोकन से यह भी स्थापित होता है कि श्री कुमार एवं कार्यपालक अभियंता श्री उमेश चन्द्र शर्मा के बीच आरोप प्रत्यारोप करते हुए काफी पत्राचार किया गया है ऐसी स्थिति में मात्र श्री शर्मा कार्यपालक अभियंता के कथन के आधार पर श्री कुमार को अनुपस्थित माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।
उपरोक्त तथ्यों एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होेते हुए श्री राजू कुमार को स्वेच्छा से दिनांक 20.06.12 से 22.06.12 एवं दिनांक 26.06.12 को अनुपस्थित रहने के लिये दोषी माना जाना समीचीन नहीं होता है। (iv) आरोप 5 :- इस आरोप के संबंध में श्री कुमार से निम्न तथ्यों के आधार पर द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी थी कि आपका कथन कि दिनांक 27.05.12 को कार्यपालक अभियंता के द्वारा दिये गये निदेश के आलोक में दिनांक 28.05.12 को प्रमंडल में रहकर लेखा संबंधित कार्य किया जा रहा था एवं दिनांक 27.05.12 को स्थल पर नींव में मिट्टी काटी गयी थी तो दिनांक 28.05.12 को इस तरह का आरोप लगाया जाना पूर्वाग्रह से परिलक्षित होता है। साक्ष्य के अभाव में स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है एवं आपका यह कहना है कि कार्यपालक अभियंता दिनांक 27.05.12 को स्थल निरीक्षण में कोई गड़बड़ी नहीं पाये गये थे तो दिनांक 28.05.12 को कैसे गड़बड़ी हो गया को भी साक्ष्य के अभाव में स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होते है।
आरोपी द्वारा कहा गया है कि दिनांक 01.05.12 को अधीक्षण अभियंता द्वारा श्री संतोष कुमार चक्रवर्ती (प्रतिनिधि) द्वारा उनकी उपस्थिति में गलत कार्य होने के कारण कार्य से हटाकर विरमित करने का आदेश दिया गया परन्तु उक्त आरोपित कनीय अभियंता को कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 09.05.12 को पुनः स्पर कार्य में लगा दिया गया ताकि मौका पाकर गलत कार्य कराया जा सके।
श्री कुमार का पत्रांक 61, दिनांक 30.05.12 जो अधीक्षण अभियंता को संबोधित है एवं प्रति मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर एवं अभियंता प्रमुख (उ0) को दी गयी है में प्रश्नगत स्थल पर कराये गये कार्यों का विस्तृत तथ्य एवं दिनांक 27.05.12 एवं 28.05.12 के घटना क्रम की विस्तृत विवरणी/तथ्यों का उल्लेख किया है।
उक्त पत्र से स्पष्ट होता है कि दिनांक 27.05.12 को आरोप एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया है एवं कार्यपालक अभियंता के निदेशानुसार दिनांक 28.05.12 को एकाउन्ट का मिलान करने के लिए प्रमंडलीय कार्यालय में थे। घटनाक्रम की सूचना दिनांक 28.05.12 को ही दूरभाष के माध्यम से अध्यक्ष एवं मुख्य अभियंता को दी गयी। इसके बावजूद भी उच्च पदाधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जाना परिलक्षित करता है कि इस घटना के क्रम में श्री कुमार की कोई सहभागिता नहीं रही है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री कुमार के विरूद्ध आरोप सं०-5 को प्रमाणित माना जाना समीचीन नहीं होता है।
समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध आरोप सं०-1 एवं 3 को प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए आरोपित पदाधिकारी को "2 वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक" का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।
उपरोक्त विनिश्चित दंड पर विभागीय पत्रांक-725, दिनांक 24.05.17 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्श हेतु अनुरोध किया गया। आयोग के पत्रांक 886, दिनांक 18.7.17 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दंड पर सहमति दी गयी।
अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय एवं बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति के आलोक में सम्यक विचारोपरांत श्री राजू कुमार (आई0डी0-5191) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सं०-1 मधुबनी शि0-पडरौना को निम्न दंड दिया एवं संसूचित किया जाता है :-
"2 (दो) वेतनवृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के संयुक्त सचिव।
——— [ध(cid:25)¡क(cid:16) स०चव(cid:4)लय म१"ण(cid:4)लय(cid:16) ॢबह(cid:4)र(cid:16) पटन(cid:4) ह(cid:4)र(cid:4) &क(cid:4)०शत eव* म१ॢ"त(cid:16) ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15) 97+5,1+10+ड(cid:25)(cid:22)ट(cid:20)(cid:22)प(cid:25)(cid:22)? Website: http://egazette.bih.nic.in