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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 05 February 2018

Published 05 February 2018

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2018-02-05.99
Languages
English, Hindi

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जल संसाधन विभाग

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अधिसूचना

17 नवम्बर 2017

सं॰ 22/नि0सि0(ल0सिं0)-05-09/2014-2038—श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, (आई0डी0-3300), तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, छपरा को वित्तीय वर्ष 2012-13 में नलकूप प्रमण्डल, छपरा के अन्तर्गत नलकूपों के नाला मरम्मति एवं आउटलेट निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितताओं से संबंधित अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, पटना के पत्रांक-142, दिनांक 12.02.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत नाला मरम्मति में बरती गयी अनियमितता, तकनीकी निविदा के निस्तारण से संबंधित कोई अभिलेख/संदर्भ नहीं पाये जाने, निविदा निस्तार की स्थापित प्रक्रिया का घोर उल्लंघन कर सरकारी राशि का दुरूपयोग करने, अवैध भुगतान संवेदक को देने आदि आरोपों के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप लघु जल संसाधन विभाग द्वारा श्री दिनकर को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही चलाने के प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त किया गया।

उक्त आदेश के आलोक में श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, छपरा के कार्यपालक अभियंता, त्रिवेणी नहर निर्माण प्रमंडल, नरकटियागंज (जल संसाधन विभाग के अधीन) के पद पर पदस्थापित रहने के कारण लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक-5282 दिनांक 20.09.14 द्वारा प्राप्त अनुशंसा एवं आदेश के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1629 दिनांक 05.11.14 द्वारा श्री दिनकर को निलंबित किया गया तथा लघु जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञापांक 175, दिनांक 09.01.15 द्वारा श्री दिनकर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत निम्नांकित आरोपों को गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही चलायी गयी :-

आरोप सं० 1- वित्तीय वर्ष 2012-13 में नलकूप प्रमंडल, छपरा में नाला/आउटलेट की मरम्मति/निर्माण कार्य हेतु अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर द्वारा कतिपय प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी। उक्त प्राक्कलन के आधार पर श्री दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता द्वारा कार्य कराया गया। उक्त कार्यों की जाँच अधीक्षण अभियंता, नलकूलप अंचल, पटना की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय जाँच दल द्वारा की गयी जिसमें निम्नलिखित अनियमितता परिलक्षित हुई है :-

(i) स्वीकृत प्राक्कलन में किसी भी योजना का कोई रेखाचित्र, अकार्यरत नालों का स्थान, नाले की तत्कालीन स्थिति का सेक्शन आदि की सूचना अंकित नहीं है। इसके अतिरिक्त एक मीटर नाले का औसत प्राक्कलन के आधार पर प्रावधानित कार्य का मूल्यांकन करते हुए प्राक्कलन की स्वीकृति दी गयी है,2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) जो युक्तिसंगत नहीं है। फिर भी इस त्रुटिपूर्ण प्राक्कलन के आधार पर सहायक अभियंता के रूप में श्री दिनकर द्वारा कार्य सम्पादित कराया गया।

(ii) नलकूप स्थल पकहा के लिए प्राक्कलन स्वीकृत नहीं है, फिर भी सहायक अभियंता नलकूप प्रमंडल, छपरा के रूप में श्री दिनकर द्वारा इस नलकूप का कार्य कराया गया तथा कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, छपरा द्वारा रू0 90778/- मात्र का एकरारनामा सम्पादित कर इस मद में रू0 90710/- का भुगतान संवेदक को किया गया जो वित्तीय अनियमितता का द्योतक है।

(iii) एकरारनामा से संबंधित अभिलेखों के अवलोकन से ज्ञात हुआ कि नाला/आउटलेट मरम्मति हेतु कुल तीन एकरारनामा सम्पादित किया गया जिसका विवरण निम्नवत है :-

एकरारनामा संख्या नलकूप का नाम प्राक्कलित राशि भुगतान राशि 15/F2/12-13 तेनुआ 94311/- 78250/- 1/F2/12-13 तेजपुरवा, भटौरा, पंचभिंडा एवं नारायणपुर 4979530/- 4092087/- 2/F2/12-13 पकहा 90775/- 90710/- इनमें एकरारनामा सं0 1/F2/12-13 से संबंधित निविदा कार्यावंटन इत्यादि का अभिलेख जाँच दल को प्राप्त नहीं हो सका परन्तु अन्य एकरारनामा से संबंधित अभिलेख से स्पष्ट हुआ है कि निविदा सहायक अभियंता द्वारा आमंत्रित की गयी तथा तकनीकी निविदा खोलकर तकनीकी तुलनात्मक विवरणी कार्यपालक अभियंता को समर्पित की गयी। कार्यपालक अभियंता/अधीक्षण अभियंता द्वारा तकनीकी निविदा का निस्तार करने से संबंधित कोई अभिलेख/संदर्भ नहीं पाया गया। वित्तीय निविदा खोलने से संबंधित पदाधिकारी का हस्ताक्षर वित्तीय निविदा पर नहीं पाया गया।

इस प्रकार मामले में निविदा निस्तार की स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। (iv) मापी पुस्तकें चेकिंग में यह पाया गया कि मापीपुस्त में वास्तविक मापी अंकित कार्य के बजाय स्वीकृत प्राक्कलन की प्रतिलिपि मात्र कर दी गयी है तथा मापीपुस्त में मापी के किसी अंश की जाँच सहायक अभियंता/कार्यपालक अभियंता द्वारा नहीं की गयी है। इससे स्पष्ट होता है कि संबंधित सहायक अभियंता द्वारा बगैर स्थल निरीक्षण किये हुए मापीपुस्त में प्रविष्टि कर राशि की बंदरबांट की गयी है।

आरोप सं0-2- जाँच दल द्वारा सभी छः नलकूपों का स्थल जाँच किया गया है जिसमें निम्नांकित अनियमितता पायी गयी :-

(i) तेनुआ नलकूप :- इस नलकूप पर पूर्ण क्षतिग्रस्त नाला 74 मीटर, आंशिक क्षतिग्रस्त 23मीटर तथा 3 अद्‌द आउटलेट का कार्य कराया जाना प्रस्तावित था। स्थल निरीक्षण में नाले की ऊँचाई एक मीटर से अधिक पायी गयी जबकि प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में नाले की ऊँचाई 0.75मीटर अंकित है। नाले में एक भी नया आउटलेट नहीं पाया गया तथा पुराने आउटलेट में स्पॉट चेम्बर नहीं पाया गया। नालों की कुछ लंबाई में मात्र प्लास्टर एवं पनींग का कार्य पाया गया। उप मुखिया के द्वारा बताया गया कि वर्ष 2012-13 में इस नलकूप पर नाला मरम्मति का कार्य सम्पन्न नहीं कराया गया है। इस प्रकार उक्त नलकूप का कार्य प्राक्कलन के अनुरूप नहीं पाया गया।

(ii) भटौरा नलकूप :- इस नलकूप पर पूर्ण क्षतिग्रस्त 100 मीटर तथा वास्ड आउट नाला 100 मीटर एवं 60 आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था। जाँच दल को निरीक्षण में सड़क पार की दिशा में 80 मीटर नाला विस्तारित पाया गया। इस नवनिर्मित नाले की ऊँचाई 0.5मीटर पाया गया जबकि प्राक्कलित ऊँचाई 0.75मीटर था। 600मीटर नाले की लंबाई पर मात्र प्लास्टर एवं पनींग का कार्य पाया गया। इस नाले की ऊँचाई 1 मीटर से अधिक पाया गया। प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में अंकित 60 अद्‌द आउटलेट के जगह मात्र 38 आउटलेट पाये गये जो टूटे-फूटे अवस्था में थे। किसी भी आउटलेट में स्पॉट चेम्बर नहीं पाया गया। इसके अतिरिक्त 2012-13 में कोई मिट्‌टी का कार्य कराने का प्रमाण नहीं पाया गया।

(iii) पंचभिंडा नलकूप :- इस नलकूप पर 500 मीटर पूर्ण क्षतिग्रस्त 300 मीटर वास्ड आउट नाला एवं 48 अद्‌द आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था जिसके विरूद्ध वर्तमान में नाले की कुल लंबाई मात्र 300मीटर पाया गया। जिसमें 26.5 मीटर नाला नवनिर्मित पाया गया। यह भी प्राक्कलन के अनुरूप नहीं था। उपस्थित ग्रामीणों द्वारा भी 26.5मी0 कार्य कराये जाने की बात कही गयी है। इस नवनिर्मित नाले की आंतरिक चौड़ाई 0.40मीटर पायी गयी जबकि प्राक्कलन एवं मापपुस्त में इसकी चौड़ाई 0.50 मीटर अंकित है। शेष नाले पर प्लास्टर एवं पनींग का कार्य मात्र पाया गया। प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में अंकित 48 अद्‌द आउटलेट की जगह मात्र 16 आउटलेट पाये गये जो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। एक भी आउटलेट में स्पॉट चैम्बर नहीं पाया गया। इस प्रकार नलकूप पर कराये गये कार्य प्राक्कलन के अनुरूप थे।

(iv) तेजपूरवा नलकूप ः-इस नलकूप पर 300 मीटर एवं 500मीटर लंबाई में क्रमशः पूर्ण क्षतिग्रस्त एवं वास्ड आउट नाले तथा 32 अदद आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था। स्थल पर कुल नाले की लंबाई3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) मात्र 596 मीटर पायी गयी। नाले की स्थिति से यह स्पष्ट हुआ कि इनमें प्लास्टर एवं पनींग के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं कराया गया है। इस आशय की स्वीकारोक्ति नलकूप चालक द्वारा भी की गयी। इस नलकूप पर जीर्ण-शीर्ण हालत में कुल दो आउटलेट पाये गये। नाले की ऊँचाई प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में अंकित ऊँचाई से दो गुणा अधिक पाया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि मिट्‌टी का कार्य नहीं कराया गया।

(v) नारायणपुर नलकूप :-इस नलकूप पर 500मीटर एवं 900मीटर लंबाई में क्रमशः पूर्ण क्षतिग्रस्त एवं वास्ड आउट नाले तथा 56 अद्‌द आउटलेट का कार्य प्रस्तावित था। स्थल पर कुल नाले की लंबाई मात्र 800 मीटर पाया गया। 38 मीटर नाले की ऊँचाई एक मीटर पायी गयी तथा इसकी आंतरिक चौड़ाई मात्र 0.35 मीटर पायी गयी। प्राक्कलन एवं मापीपुस्त में इसकी चौड़ाई 0.5मीटर है। इस नाले पर मरम्मति का कोई कार्य परिलक्षित नहीं हुआ। वास्ड आउट नाला यथास्थिति में पाया गया तथा इसपर भी कोई कार्य कराये जाने का संकेत नहीं मिला। शेष नाला पर मात्र प्लास्टर एवं पनींग का कार्य पाया गया। वर्तमान नाला पर मिट्‌टी का कार्य कराया जाना परिलक्षित नहीं हुआ। प्रावधानित कुल 56 आउटलेट में मात्र 10 आउटलेट पाया गया।

(vi) पकहा नलकूप :-इस नलकूप का प्राक्कलन स्वीकृत नहीं होने के बावजूद कार्य का भुगतान किया गया। यहाँ 130मीटर नाले की जाँच की गयी जिसमें प्लास्टर एवं पनींग के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं कराया गया।

आरोप सं0-3- उपरोक्त वर्णित स्थिति के बावजूद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा एकरारित राशि के विरूद्ध रू0 4261317/- (बयालीस लाख एकसठ हजार तीन सौ सतरह) मात्र का भुगतान कार्यों के प्राक्कलन, निविदा कार्यान्वयन, मापी एवं भुगतान में निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी की गयी है। सहायक अभियंता के रूप में इस अनियमित भुगतान हेतु श्री दिनकर भी उत्तरदायी है।

आरोप सं०-4- बिहार लोक निर्माण विभाग संहित के नियम-49 के अनुसार सहायक अभियंता अपने अनुमण्डल के अन्तर्गत निर्माण के प्रबंध एवं निष्पादन के लिए जिम्मेवार है। इस प्रकार उपरोक्त सभी कंडिकाओं में वर्णित अनियमितताओं के लिए सहायक अभियंता के रूप में श्री दिनकर समान रूप से उत्तरदायी है।

उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी-सह-अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-सचिव, जल संसाधन विभाग के पत्रांक 451, दिनांक 24.08.15 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में केवल आरोप सं०-01 (iv) इस हद तक प्रमाणित होने कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रतिशत की जाँच नहीं की गयी है, जो उनके अतिरिक्त कार्य बोझ के कारण था, शेष कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य प्रतिवेदित किया गया।

संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त जाँच प्रतिवेदन लघु जल संसाधन विभाग को प्रतिवेदित किया गया जिसकी समीक्षा लघु जल संसाधन विभाग के स्तर पर किये जाने के फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए आरोप सं०-01 (iv) के लिए पत्रांक-5628, दिनांक 29.09.15 द्वारा श्री दिनकर से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 18(3) के तहत जाँच प्रतिवेदन के संदर्भ में अभ्यावेदन की माँग की गयी।

श्री दिनकर के पत्रांक-शून्य दिनांक 16.10.15 द्वारा लघु जल संसाधन विभाग को अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर) समर्पित किये जाने के फलस्वरूप श्री दिनकर का संवर्ग जल संसाधन विभाग होने के कारण इनके विभागीय कार्यवाही से संबंधित संचिका एवं अभिलेख लघु जल संसाधन विभाग के पत्रांक-6705, दिनांक 17.12.15 द्वारा जल संसाधन विभाग को उपलब्ध कराते हुए अग्रेतर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया।

उपर्युक्त मामले में श्री दिनकर के पत्रांक-शून्य दिनांक 16.10.15 द्वारा समर्पित अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर) में निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया है :-

(i) आरोप सं०-1 (i), 1(ii), 1(iii), 2, 3 एवं 4 को अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित नहीं पाया गया है।

(ii) आरोप सं०-1(iv) को अपर विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा इस हद तक प्रमाणित प्रतिवेदित किया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रतिशत की जाँच नहीं की गयी, जो उनके अतिरिक्त कार्य बोझ के कारण था।

(iii) वे तीन-तीन पदो ंके प्रभार में थे। त्रिवेणीगंज नहर निर्माण प्रमंडल, नरकटियागंज एवं त्रिवेणी नहर प्रमंडल, रक्सौल के एक विस्तृत क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने तथा त्रिवेणी नहर का पुनस्र्थापन कार्य कराने की जिम्मेदारी उनके पास थी। कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, छपरा/अधीक्षण अभियंता, नलकूप अंचल, मुजफ्फरपुर एवं मुख्य अभियंता, नलकूप प्रभाग, उत्तर से सहायक अभियंता के रूप में पूर्ववर्ती प्रभार से मुक्त करने हेतु बार-बार अनुरोध करने पर भी सहायक अभियंता के प्रभार से इन्हें मुक्त नहीं किया गया। इतने अधिक संख्या में अतिरिक्त प्रभार में रहने के कारण समयाभाव के चलते सहायक अभियंता के लिए निर्धारित प्रतिशत एवं मापीपुस्त में जाँच करना असम्भव था।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) श्री दिनकर द्वारा समर्पित उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में सम्पूर्ण मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत निम्नांकित तथ्य पाये गये :-

श्री दिनकर के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में कुल चार आरोप गठित किये गये थे जिसमें संचालन पदाधिकारी ने आरोप सं०-1(iv) को छोड़कर अन्य सभी आरोपों को अप्रमाणित माना है। लघु जल संसाधन विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से किसी प्रकार की असहमति व्यक्त नहीं कर एकमात्र आरोप सं०-1(iv) के लिए श्री दिनकर से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की माँग की गयी। आरोप सं०-1(iv) सहायक अभियंता द्वारा योजना के निरीक्षण से संबंधित है जिसमें आरोप है कि श्री दिनकर द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार योजनाओं का निरीक्षण नहीं किया गया है। श्री दिनकर ने अपने अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर) में इस तथ्य को स्वीकार किया गया है कि अत्यधिक प्रभार के कारण वे योजनाओं का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निरीक्षण नहीं कर सके। संचालन पदाधिकारी ने भी इस आरोप के संबंध में टिप्पणी की है कि कार्याधिक्य के कारण योजनाओं के निरीक्षण में कमी पायी गयी है। फिर भी श्री दिनकर को चाहिए था कि वे मापीपुस्त पर हस्ताक्षर करने के पूर्व योजनाओं का स्थल निरीक्षण करते, किन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया जो उनकी लापरवाही को दर्शाता है। फलस्वरूप उक्त पाए गए तथ्यों के आलोक में श्री दिनकर को विभागीय अधिसूचना सं०-1730, दिनांक 10.08.2016 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड संसूचित किया गया :-

(1) एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (2) निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 11(5) के तहत अलग से नोटिस निर्गत किया जाएगा। उक्त दण्डादेश की कंडिका-2 के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-1962, दिनांक 06.09.16 द्वारा श्री दिनकर को नोटिस निर्गत किया गया। उक्त के संदर्भ में श्री दिनकर द्वारा अपना प्रतिवेदन पत्रांक-504, दिनांक 18.11.16 तथा दण्डादेश के विरूद्ध पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक 19.09.16 द्वारा समर्पित किया गया। श्री दिनकर से प्राप्त अभ्यावेदनों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई तथा पाया गया कि इनके द्वारा अपने अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गयी हैं :-

(i) लघु जल संसाधन विभाग द्वारा योजनाओं की जाँच एक ऐसे पदाधिकारी से करायी गयी जो दिनांक 26.03.2014 को आर्थिक अपराध इकाई द्वारा घूस लेते हुए पकड़े गए थे। इसलिए ऐसे दागी व्यक्ति द्वारा दिया गया जाँच प्रतिवेदन विश्वसनीय नहीं हो सकता है।

(ii) जल संसाधन विभाग के पत्रांक-4441, दिनांक 29.06.2012 द्वारा उनकी प्रोन्नति कार्यपालक अभियंता के पद पर की गई प्रोन्नति के पश्चात वे सहायक अभियंता के सभी पूर्ववर्ती पदों से मुक्त होने हेतु लगातार प्रयास करते रहे एवं कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल छपरा को भारमुक्त करने के संबंध में नियमित अंतराल पर पत्र भी भेजते रहे, लेकिन उनके पत्रों पर कोई विचार नहीं किया गया। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता एवं प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी ने स्वीकार किया है कि उक्त कार्यों की मापी निर्धारित प्रतिशतता तक जाँच नहीं करने के लिए श्री दिनकर दोषी नहीं है।

(iii) कार्यपालक अभियंता द्वारा स्थानीय जाँच करने के पश्चात पूरे कार्य की मापी की जाँच कर लेने की सूचना उन्हें दी गयी एवं वे स्वयं भी सभी स्तर से कराए गए कार्य की गुणवत्ता एवं विशिष्टि से संतुष्ट थे। दिनांक 01.09.2012 को दो नलकूपों पर मापी लेने में वे कार्यपालक अभियंता के साथ थे।

(iv) अधीक्षण अभियंता द्वारा विस्तृत स्थल जाँच के बाद संवेदक का भुगतान कर देने का आदेश दिया गया था। संवेदक द्वारा बार-बार किए जा रहे अनुरोध के क्रम में विपत्र पर हस्ताक्षर करना नितांत आवश्यक था। इसलिए उन्होंने कार्यपालक अभियंता द्वारा किए गए जाँच के आधार पर विपत्र पर हस्ताक्षर किया। यह सभी विपत्र प्रथम एवं चालू विपत्र था।

श्री दिनकर से प्राप्त अभ्यावेदन की समीक्षा में पाया गया कि इन्होंने सहायक अभियंता के पद से मुक्त करने हेतु कई पत्र कार्यपालक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, छपरा को दिया था, किन्तु कार्यपालक अभियंता द्वारा इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन में श्री दिनकर के विरूद्ध गठित सभी आरोपों को (आरोप सं० 1(iv) को छोड़कर) अप्रमाणित माना है। आरोप 1(iv) के बारे में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य है कि श्री दिनकर द्वारा योजनाओं की निर्धारित प्रतिशतता की जाँच नहीं की गयी, जो कार्याधिक्य के कारण था। यह सही है कि श्री दिनकर एक साथ कई प्रभार में थे, किन्तु योजनाओं की जाँच निर्धारित प्रतिशतता तक नहीं की गई। इसलिए श्री दिनकर के पुनर्विचार अभ्यावेदन का प्रथम अंश जो दण्डादेश के निरस्त करने के संबंध में है, स्वीकार योग्य नहीं है।

समीक्षोपरांत श्री दिनकर द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन तथा निलंबन अवधि के विभिन्न संबंधी अभ्यावेदन अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया एवं पूर्व में संसूचित दंड को यथावत रखते हुए निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु यह अवधि पेंशन प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जाएगी, का निर्णय लिया गया।5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 5 फरवर(cid:20) 2(cid:22)1(cid:24) वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति कार्यपालक अभियंता का पुनर्विचार अभ्यावेदन तथा निलंबन अवधि (दिनांक 05.11.2014 से 09.08.2016 तक) के विनियमन के संबंध में समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकार करते हुए विभागीय अधिसूचना सं०-1730, दिनांक 10.08.2016 द्वारा संसूचित दण्ड को यथावत रखा जाता है, साथ ही उक्त दण्डादेश के कंडिका-2 के संदर्भ में निम्न निर्णय संसूचित किया जाता है :-

"निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु यह अवधि पेंशन प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जाएगी।"

उक्त निर्णय श्री मिथिलेश कुमार दिनकर, तत्कालीन सहायक अभियंता, नलकूप प्रमंडल, छपरा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, सोन उच्च स्तरीय नहर प्रमंडल, सासाराम को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के संयुक्त सचिव।

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