Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 09 February 2018

Published 09 February 2018

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2018-02-09.122
Languages
English, Hindi
(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

ॢबह(cid:4)र गजट

[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क

ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत

2(cid:18) म(cid:4)घ 1(cid:22)3(cid:22) (cid:24)श(cid:18)(cid:25)

(स(cid:26)(cid:18) पटन(cid:4) 122) पटन(cid:4)(cid:29) श१(cid:31)व(cid:4)र(cid:29) 9 फरवर(cid:15) 2(cid:18)1!

सं॰ 08/आरोप-01-05/2016-1481/सा॰प्र॰

सामान्य प्रशासन विभाग

———

ladYi

30 tuojh 2018

श्री विजय कुमार, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 434/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, नगर अंचल, गया सम्प्रति नगर आयुक्त, नगर निगम, गया के विरूद्ध राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना के परिपत्रों एवं बी॰टी॰ एक्ट-1973 के प्रावधानों के प्रतिकूल रैयती, गैर मजरूआ आम भूमि/गैर मजरूआ मालिक जमीन का लगान निर्धारण करने संबंधी जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक-2249, दिनांक 21.05.2012 द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के लिए संकल्प ज्ञापांक-2773, दिनांक 26.02.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक-93 दिनांक 23.01.2016) में श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों को अप्रमाणित बताया गया। विभागीय स्तर पर समीक्षा में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के दिशा-निर्देश एवं बी॰टी॰एक्ट-1973 के प्रावधानों के उल्लंघन से आच्छादित लगान निर्धारण में अनियमितता के आरोपों की गम्भीरता के आलोक में जाँच प्रतिवेदन को संतोषप्रद एवं समुचित नहीं पाया गया। जाँच के क्रम में संचालन पदाधिकारी द्वारा लगान निर्धारण के अभिलेखों का परीक्षण नहीं किये जाने का तथ्य भी स्पष्ट हुआ, जो आरोपों की प्रमाणिकता से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य थे। ऐसी स्थिति में पुनः जाँच कराने का निर्णय लिया गया। विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10455 दिनांक 29.07.2016 द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध गठित आरोपों की आगे और जाँच कराने का आदेश निर्गत हुआ, जिसमें आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना से स्वयं जाँच की कार्रवाई का अनुरोध किया गया।संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-802 दिनांक 25.05.2017 द्वारा एतद्‌संबंधी जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध गठित सभी आरोपों (यथा आरोप सं॰-01 से 05) को प्रमाणित बताया गया। विभागीय पत्रांक-7415 दिनांक 16.06.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री कुमार (सम्प्रति नगर आयुक्त, गया नगर निगम, गया) से लिखित अभिकथन (बचाव बयान) की माँग की गयी जिसके प्रत्युत्तर में उन्होंने अपना स्पष्टीकरण (पत्रांक-1539 दिनांक 28.06.2017) समर्पित किया। अपने स्पष्टीकरण में उन्होंने मुख्य रूप से संबंधित मामले में सरकारी अधिवक्ता से प्राप्त सहमति को लगान निर्धारण रसीद निर्गत किये जाने का आधार बताया। उन्होंने यह भी बताया की वैसी रैयती जमीन, जो हाल सर्वे में बिहार सरकार के नाम पर दर्ज हो गया है उसकी लगान वसूली पूर्व से जारी जमाबन्दी के आलोक में की गयी, यह कार्रवाई अपर समाहर्त्ता, गया के आदेश का अनुपालन था। इस आधार पर उन्होंने जानबूझकर नियमों की अनदेखी किये जाने एवं गलत मंशा से कार्य किये जाने के आरोपों का प्रतिकार करते हुए स्वयं को आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:24)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:25)(cid:29) (cid:22) फरवर& 2(cid:18)1! आरोप, जाँच प्रतिवेदन एवं श्री कुमार से प्राप्त लिखित अभिकथन की अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर समीक्षा में यह पाया गया कि जिलास्तरीय जाँच से उद्‌भूत लगान निर्धारण में अनियमितता संबंधी इस मामले में आरोपित पदाधिकारी द्वारा सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के बिना बहुसंख्यक मामलों में लगान निर्धारण किया, जो क्षेत्राधिकार का उल्लंघन है। अपने बचाव में वे समुचित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इस प्रकार आरोपों की प्रमाणिकता के आधार पर उनके विरूद्ध (i) निन्दन, (ii) प्रोन्नति पर स्थायी रोक एवं (iii) संचयी प्रभाव से कालमान वेतन में तीन प्रक्रम पर अवनति संबंधी दंड विनिश्चित किया गया। संदर्भित कंडिका (iii) में विनिश्चित वृहद दंड पर विभागीय पत्रांक-14536 दिनांक 16.11.2017 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य की माँग की गयी। इस क्रम में बिहार लोक सेवा आयोग का पत्रांक-2401 दिनांक 28.12.2017 प्राप्त हुआ, जिसमें आरोपों के परिपे्रक्ष्य में प्रस्तावित दंड अधिक प्रतीत होने के कारण अनुपातिक नहीं होने का मंतव्य दिया गया।

बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त असहमति संबंधी मंतव्य के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर पुनः मामले की समीक्षा की गयी तथा यह पाया गया कि संचालन पदाधिकारी ने समर्पित जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित बताया है। उक्त आरोपों के प्रतिकार/बचाव में आरोपित पदाधिकारी समुचित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। ऐसी स्थिति में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के दिशा-निर्देश एवं बी॰टी॰एक्ट-1973 के प्रावधानों के उल्लंघन से आच्छादित लगान निर्धारण में अनियमितता का आरोप प्रमाणित होने के आधार पर श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दंड में परिवर्तन का औचित्य नहीं पाया गया।

अतएव सम्यक्‌ विचारोपरांत श्री विजय कुमार, (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 434/11 को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-14 में प्रावधानित शास्ति निम्नवत्‌ संसूचित की जाती है। (i) निन्दन, (ii) प्रोन्नति पर स्थायी रोक एवं (iii) संचयी प्रभाव से कालमान वेतन में तीन प्रक्रम पर अवनति।

आदेष :- आदेष दिया जाता है कि संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, सरकार के अवर सचिव।

———— [ध(cid:3)¡क(cid:6) स०चव(cid:12)लय म१(cid:17)ण(cid:12)लय(cid:6) ॢबह(cid:12)र(cid:6) पटन(cid:12) ह(cid:12)र(cid:12) (cid:27)क(cid:12)०शत eव(cid:31) म१ॢ(cid:17)त? ॢबह(cid:12)र गजट #[स(cid:12)ध(cid:12)रण$ 122%5'1+10%ड(cid:3)+ट,+प(cid:3)+? Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 09 February 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2018-02-09.122/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2018-02-09.122.