ॢबह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क
ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत
2(cid:18) म(cid:4)घ 1(cid:22)3(cid:22) (cid:24)श(cid:18)(cid:25)
(स(cid:26)(cid:18) पटन(cid:4) 12(cid:29)) पटन(cid:4)(cid:30) श१ व(cid:4)र(cid:30) 9 फरवर(cid:15) 2(cid:18)1(cid:29) सं॰ 08/नि॰था॰-11-20/2014-16525/सा॰प्र॰ सामान्य प्रशासन विभाग
———
ladYi
27 fnlEcj 2017
श्री राजमंगल राम, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-504/11 को जिला परिवहन पदाधिकारी, मोतिहारी के पदस्थापन काल में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के धावा दल द्वारा दिनांक 14.09.2006 को परिवादी श्री हरेन्द्र सिंह से 20,000/- (बीस हजार) रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने एवं उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड सं॰-052/2006 दिनांक 13.09.2006 दर्ज होने की सूचना जिला पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी के पत्रांक-2261/गो॰ दिनांक 17.09.2006 द्वारा प्राप्त हुई। विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11433 दिनांक-11.11.2006 द्वारा श्री राम को हिरासत की तिथि (दिनांक 14.09.2006) के प्रभाव से निलंबित किया गया। उक्त कृत्य में निहित आरोपों के लिए श्री राम के विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई हेतु विभागीय स्तर पर आरोप, प्रपत्र 'क' गठित करते हुए स्पष्टीकरण की माँग की गयी। इस क्रम में श्री राम का स्पष्टीकरण (दिनांक 03.05.2008) प्राप्त हुआ, जिसमें उन्होंने अपना बचाव प्रस्तुत किया। सम्यक् विचारोपरांत मामले के वृहद जाँच की आवश्यकता पायी गयी तथा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) के आलोक में संकल्प ज्ञापांक-6639 दिनांक 10.07.2009 द्वारा श्री राम के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को इस हेतु संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में प्रमाणित आरोपों पर श्री राम से बचाव बयान प्राप्त किया गया। इसके उपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के स्तर पर सेवा से बर्खास्तगी का दंड विनिश्चित किया गया तथा बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। इस क्रम में आयोग द्वारा अपनी सहमति संसूचित की गयी। तत्पश्चात् राज्य मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के उपरांत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9072 दिनांक 24.07.2017 द्वारा उन्हें सेवा से बर्खास्तगी (जो सामान्यतया सरकार के अधीन भविष्य में नियोजन के लिए निरर्हता होगी) का दंड संसूचित किया गया। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:24)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:25)(cid:30) (cid:22) फरवर& 2(cid:18)1(cid:29) समय-सीमा का अनुपालन नहीं किया गया। इसके साथ ही उन्होंने सदर्भित ट्रक के कागजात के कालातीत होने का तथ्य उजागर करते हुए स्वयं द्वारा की गयी कार्रवाई को न्यायोचित ठहराया है। विभागीय कार्यवाही के दौरान गवाहों के प्रतिपरीक्षण का अवसर नहीं दिये जाने एवं द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युत्तर में निहित तथ्यों का संज्ञान नहीं लिये जाने का भी मामला उठाया है।
3. विषयगत आरोप से संबंधित उपलब्ध अभिलेख के अवलोकन से स्पष्ट हुआ कि संचालन पदाधिकारी ने आरोपी पदाधिकारी एवं उपस्थापन पदाधिकारी को सुनते हुए विश्लेषणात्मक स्थिति के साथ अपना जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया। इस क्रम में श्री राम से प्राप्त लिखित अभिकथन (दिनांक 23.02.2017) में निहित तथ्यों की गहन समीक्षा की गयी तथा यह पाया गया कि तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी के रूप में श्री राम ने ट्रक सं॰ UP 78 N-2699 के संदर्भ में वाहन मुक्ति आदेश बुक में प्रविष्टि के पूर्व जुर्माना की राशि का रसीद निर्गत करने संबंधी कार्रवाई नहीं की गयी। जिससे रिश्वत माँगने एवं लेने की घटना/औचित्य की पुष्टि होती है। इसके साथ ही गिरफ्तार किये जाने के बाद रूपये की बरामदगी एवं उनके हाथ में लगे रसायन के धोवन की पुष्टि गवाहों द्वारा किये जाने से भी उनके रिश्वत लेने का आरोप प्रमाणित हुआ है। इस संबंध में श्री राम द्वारा कोई तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया।
वस्तुतः श्री राम को बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-(3) एवं नियम-(14) के प्रावधानों के आलोक में जिला परिवहन पदाधिकारी के रूप में अपने विहित दायित्व का निर्वहन करना चाहिए था। परन्तु उनके द्वारा नियमानुकूल कार्य नहीं किया गया एवं जब्त ट्रक को मुक्त करने हेतु रिश्वत ली गयी जो विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित हुआ। पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पत्रांक-2290 दिनांक 12.12.2014 द्वारा उनके विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड सं॰ 52/2006
दिनांक 13.09.2006 में एतद्संबंधी आरोप सत्य पाये गये एवं इसके आलोक में विशेष न्यायालय, निगरानी, मुजफ्फरपुर के न्यायालय में आरोप पत्र सं॰ 72/2006 दिनांक 11.11.2006 समर्पित हुआ। विधि विभाग के आदेश सं॰ 4201 दिनांक 11.11.2006 द्वारा उक्त कांड में अभियोजन स्वी—त्यादेश निर्गत हुआ। श्री राम के विरूद्ध गठित आरोप प्रमाणित पाये जाने के उपरांत दण्डादेश पारित किया गया। श्री राम ने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में जिन तथ्यों का उल्लेख किया है उस पर पूर्व में ही विचार हो चुका है।
4. सम्यक् विचारोपरांत श्री राम के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (दिनांक 05.09.2017) को अस्वी—त करते हुए सेवा से बर्खास्तगी संबंधी दण्ड को यथावत् रखने के प्रस्ताव में राज्य मंत्रिपरिषद् का अनुमोदन प्राप्त किया गया। 5. अतएव श्री राजमंगल राम, बि॰प्र॰से॰, कोटि क्रमांक-504/11 के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन (दिनांक 05.09.2017) को अस्वी—त करते हुए सेवा से बर्खास्तगी (संकल्प ज्ञापांक-9072 दिनांक 27.07.2017) संबंधी दंड को यथावत् रखा जाता है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधरण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, सरकार के अवर सचिव।
———— [ध(cid:3)¡क(cid:6) स०चव(cid:12)लय म१(cid:17)ण(cid:12)लय(cid:6) ॢबह(cid:12)र(cid:6) पटन(cid:12) ह(cid:12)र(cid:12) (cid:27)क(cid:12)०शत eव(cid:31) म१ॢ(cid:17)त? ॢबह(cid:12)र गजट #[स(cid:12)ध(cid:12)रण$ 128%5'1+10%ड(cid:3)+ट,+प(cid:3)+? Website: http://egazette.bih.nic.in