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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 14 February 2018

Published 14 February 2018

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2018-02-14.7
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 25252525 माघमाघमाघमाघ 1939 1939 1939 1939 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 07070707 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ————————

14141414 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018201820182018 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)3, पदःथापन, बदली, श(cid:18)3, छु 9ट(cid:15) और अ<य =य(cid:18)3गत सूचनाएं। 2-8 भाग-1-क—ःवयंसेवक गुAमB के समादेंटाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Kाओं के पर(cid:15)Kा-फल, कायLबम, छाऽवृ(cid:18)O ूदान, आPद।

---

भाग-1-ग—िशKा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Kाफल आPद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राQयपाल और कायाLRयKB (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आPद। ---

भाग-3—भारत सरकार, पSTम बंगाल सरकार और उVच <यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राQय गजटB के उXरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Pकये जानेवाले ूवर सिमितयB के ूितवेदन और उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Sजनपर रांशपित क] Qयेंठ अनुमित िमल चुक] है। ---

भाग-8—भारत क] संसद मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयB के ूितवेदन और संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयB के ूितवेदन और संसद मZ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व^ापन

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भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क] नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प_रवहन सूचनाएं, <यायालय सूचनाएं और सवLसाधारण सूचनाएं इ`याPद। 9-9 पूरक

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पूरक-क 10-372 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)3, पदःथापन, बदली, श(cid:18)3, छु 9ट(cid:15) और अ<य =य(cid:18)3गत सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

निर्वाचन विभागनिर्वाचन विभागनिर्वाचन विभागनिर्वाचन विभाग ------------------------------------ अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाएंएंएंएं 30 जनवरी 201830 जनवरी 201830 जनवरी 201830 जनवरी 2018

सं0 ई2-207/82-367—कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना संप्रति सामान्य प्रशासन विभाग के कार्यालय आदेश सं0 12/टि0-4-162/93- का0-467/पटना- 15, दिनांक 16.12.1998 में अंकित निहित प्रावधानों के आलोक में बिहार निर्वाचन सेवा के निम्नांकित 07 (सात) अवर निर्वाचन पदाधिकारियों की सेवा अवर निर्वाचन पदाधिकारी के मौलिक पद (वेतनमान Level 9) पर उनके नाम के समक्ष स्तंभ 4 में अंकित तिथि से संपुष्ट किया जाता है-

क्र0 क्र0 क्र0 क्र0 सं0सं0सं0सं0 पदाधिकारी का नाम/गृह पदाधिकारी का नाम/गृह पदाधिकारी का नाम/गृह पदाधिकारी का नाम/गृह जिला/वरीयता क्रमांक पदस्थापन स्थल सेवा संपुष्टि की तिथि
1 2 3 4
1 श्री पुष्कर कुमार/ फतेहपुर (उ0प्र0)/43/2013 बक्सर अनुमंडल 26.09.2017
2 श्री अनिल कुमार तिवारी/ बक्सर/46/2013 तेघड़ा अनुमंडल 26.09.2017
3 श्री जावेद इकबाल/ सिवान/53/2013 गोपालगंज अनुमंडल 26.09.2017
4 श्री मो0 नजरूल हक/ बांका/60/2013 दलसिंहसराय अनुमंडल 26.09.2017
5 श्री मो0 अशरफ अफरोज/ अररिया/64/2013 बायसी अनुमंडल 26.09.2017
6 श्रीमती संजुला कुमारी/ मधेपुरा/67/2013 त्रिवेणीगंज अनुमंडल 26.09.2017
7 श्री पवन कुमार पासवान/ भागलपुर/73/2013 सिवान अनुमंडल 26.09.2017

2. यह सेवा संपुष्टि संबंधित पदाधिकारी की वरीयता का द्योतक नहीं होगा तथा इसका अन्य पदाधिकारियों की आपसी वरीयता पर प्रभाव नहीं पडे़गा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सोहन कुमार ठाकुर, अपर सचिव।

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2 फरवरी 20182 फरवरी 20182 फरवरी 20182 फरवरी 2018

सं0 ई2-2-2-12/2002-407—बिहार सेवा संहिता के नियम 227, 240 एवं 248 के तहत श्री दिनेष लाल दास, उप निर्वाचन पदाधिकारी, सुपौल को पिता के मृत्यु के अवसर पर दिनांक 30.05.2017 से 18.07.2017 तक कुल 50 (पचास) दिनों के उपार्जित अवकाष की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सोहन कुमार ठाकुर, अपर सचिव।3 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

9 फरवरी 20189 फरवरी 20189 फरवरी 20189 फरवरी 2018

सं0 ई2-2-018/2011-509-05050505—मुख्य सचिव, बिहार के पत्रांक 4841 दिनांक 19.09.2014 में निहित प्रावधानों के आलोक में श्री नवल किषोर शर्मा, सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी-सह-सहायक सचिव, निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना को विभागीय मुख्य निगरानी पदाधिकारी मनोनीत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सोहन कुमार ठाकुर, अपर सचिव।

---------------------------- पर्यावरण एवं वन विभागपर्यावरण एवं वन विभागपर्यावरण एवं वन विभागपर्यावरण एवं वन विभाग ---------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाएंएंएंएं 8 फरवरी 20188 फरवरी 20188 फरवरी 20188 फरवरी 2018

सं0 2/बि०व०से०(स्था०)-03/2018----399399399399/प०व०—श्री पातंजली कुमार चौधरी, बि०व०से०, वन प्रमंडल पदाधिकारी, तिरहुत वन प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक वन प्रमंडल पदाधिकारी, मोतिहारी वन प्रमंडल, मोतिहारी के रिक्त पद का प्रभार दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रत्नेश्रत्नेश्रत्नेश्रत्नेश झा, ा झा, ा झा, ा झा, संयुक्त सचिव।

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8 फरवरी 20188 फरवरी 20188 फरवरी 20188 फरवरी 2018

सं0 सं0 सं0 सं0 भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017-402-402-402-402/प/प/प/प॰॰॰॰वववव॰॰॰॰—डॉ॰ सतेन्द्र, भा॰व॰से॰, (86) के द्वारा वर्त्तमान धारित पद (मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना) को उनके पदस्थापन काल तक के लिए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि में उत्क्रमित करते हुए उन्हें अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जात है।

सं0 सं0 सं0 सं0 भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017-403-403-403-403/प/प/प/प॰॰॰॰वववव॰॰॰॰—श्री हेमन्त पाटिल, भा॰व॰से॰, (2014), वन प्रमंडल पदाधिकारी, बेतिया को स्थानांतरित करते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना पार्क प्रमंडल, पटना के पद पर अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

सं0 सं0 सं0 सं0 भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017भा॰व0से0 (स्था॰)-04/2017-404-404-404-404/प/प/प/प॰॰॰॰वववव॰॰॰॰—श्री अमित कुमार, भा॰व॰से॰, (2008), वन प्रमंडल पदाधिकारी-सह-उप निदेशक, वाल्मिकी व्याघ्र परियोजना प्रमंडल-2, बेतिया को वन प्रमंडल पदाधिकारी, बेतिया का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रत्नेश्रत्नेश्रत्नेश्रत्नेश झा, ा झा, ा झा, ा झा, संयुक्त सचिव।

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27 दिसम्बर 201727 दिसम्बर 201727 दिसम्बर 201727 दिसम्बर 2017

सं0 सं0 सं0 सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰भा॰व॰से॰(स्था॰भा॰व॰से॰(स्था॰भा॰व॰से॰(स्था॰)-11/2016)-11/2016)-11/2016)-11/2016-4089-4089-4089-4089/प॰व॰/प॰व॰/प॰व॰/प॰व॰—डॉ॰ सतेन्द्र, भा॰व॰से॰, (BHः86), मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, राज्य औषधीय पादप बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-15 रूपये 1,82,200-2,24,100) में प्रोन्नति दी जाती है।

2. इन्हें प्रोन्नति का लाभ समकक्ष पद पर पदस्थापन के उपरांत योगदान की तिथि से देय होगा। सं0 सं0 सं0 सं0 भा॰व॰से॰(स्था॰भा॰व॰से॰(स्था॰भा॰व॰से॰(स्था॰भा॰व॰से॰(स्था॰)-11/2016)-11/2016)-11/2016)-11/2016-4090-4090-4090-4090/प॰व॰/प॰व॰/प॰व॰/प॰व॰—श्री आशुतोष, भा॰व॰से॰, (BHः88), सम्प्रति केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर, को भारतीय वन सेवा (वेतन) नियमावली, 2016 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्त्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुदेशों के अधीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कोटि (वेतन स्तर-15 रूपये 1,82,200-2,24,100) में प्रोफार्मा प्रोन्नति दी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रत्नेश्रत्नेश्रत्नेश्रत्नेश झा, ा झा, ा झा, ा झा, संयुक्त सचिव।

---------------------------- मंत्रिमंडलमंत्रिमंडलमंत्रिमंडलमंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा)सचिवालय (राजभाषा)सचिवालय (राजभाषा)सचिवालय (राजभाषा) विभागविभागविभागविभाग ------------------------ अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 24 नवम्बर 201724 नवम्बर 201724 नवम्बर 201724 नवम्बर 2017

सं0 सं0 सं0 सं0 स्था॰-1-59/9स्था॰-1-59/9स्था॰-1-59/9स्था॰-1-59/90-8130-8130-8130-813/रा॰/रा॰/रा॰/रा॰—विभागीय प्रोन्नति समिति की अनुशंसा के आलोक में श्री विष्णुदेव सहनी, वरीय राजभाषा सहायक (वेतनमान 9300-34800, ग्रेड पे 4600) को अधिसूचना निर्गत की तिथि से राजभाषा पदाधिकारी (वेतनमान 9300-34800, ग्रेड पे 4800) के पद पर स्थानापन्न प्रोन्नति दी जाती है।4 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 2. उक्त प्रोन्नति सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प संख्या-13295, दिनांक 28.09.2016 के आलोक में इस शर्त्त के साथ दी जाती है कि डॉ॰ प्रमोद कुँवर, वरीय राजभाषा सहायक के भविष्य में पूर्णरूपेण दण्ड मुक्त होने एवं तत्समय पद रिक्त नहीं रहने की स्थिति में श्री सहनी अपने पूर्व पद पर प्रत्यावर्त्तित हो जायेंगे। 3. सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-4800, दिनांक 01.04.2016 की कंडिका 11(IV) के अनुसार यह प्रोन्नति औपबंधिक होगी तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन एस॰एल॰पी॰(सी॰) संख्या-29770/2015, बिहार सरकार बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगी। 4. प्रस्ताव में माननीय मुख्य (विभागीय) मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहारबिहारबिहारबिहार----राज्यपाल के आदेश सेराज्यपाल के आदेश सेराज्यपाल के आदेश सेराज्यपाल के आदेश से,,,, मिथिलेश कुमार, मिथिलेश कुमार, मिथिलेश कुमार, मिथिलेश कुमार, अपर सचिव-सह-निदेशक।

-------------------------------- स्वास्थ्य विभागस्वास्थ्य विभागस्वास्थ्य विभागस्वास्थ्य विभाग -------------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 7 फरवरी 20187 फरवरी 20187 फरवरी 20187 फरवरी 2018

सं॰ 16/आई॰जी॰ 1-09/2014(पार्ट)-152/(आ॰चि॰)/स्वा॰—राष्ट्रीय आयुष मिशन क तहत अधिसूचना संख्या 1283( आ॰चि॰) दिनांक 20.11.2017 द्वारा गठित राज्य आयुष समिति, बिहार, पटना क सदस्य-सह-नोडल पदाधिकारी श्री नागेन्द्र प्रसाद, अवर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना को राज्य आयुष समिति, बिहार का कोषाध्यक्ष नामित किया जाता है। 2. प्रधान सचिव, स्वास्थ्य का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, सच्चिदानन्द चौधरी, विशेष सचिव।

-------------------------------- परिवहन विभागपरिवहन विभागपरिवहन विभागपरिवहन विभाग -------------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 2 फरवरी 20182 फरवरी 20182 फरवरी 20182 फरवरी 2018 सं0 05/स्था0-110/89(पार्ट-II)-817—विभागीय पत्रांक-1429, दिनांक-04.03.1972, सी0 डब्ल्यू0 जे0 सी0 संख्या-16412/2011 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश एवं विभागीय प्रोन्नति समिति द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में परिवहन विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय में कार्यरत श्री सबल कुमार, उच्च वर्गीय लिपिक, जिला परिवहन कार्यालय, गया को जिला परिवहन पदाधिकारी के कनीय वेतनमान के गैर संवर्गीय पद पर अपुनरीक्षित वेतनमान पी0बी0-2 ग्रेड पे0-4800/- में औपबन्धिक रूप से प्रोन्नति दी जाती है। 2. यह प्रोन्नति एस0एल0पी0(सी0) सं0-29770/2015, बिहार सरकार बनाम्‌ सुशील कुमार सिंह एवं अन्य,सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या..../2017, श्री अशोक कुमार सिंह बनाम्‌ बिहार राज्य तथा अन्य, सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या.... /2017, श्री दिवाकर कुमार बनाम्‌ बिहार राज्य तथा अन्य एवं सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या..../2017, श्री सत्यानन्द आंजनेय बनाम्‌ बिहार राज्य तथा अन्य में पारित न्यायादेश से प्रभावित होगा। 3. श्री सबल कुमार परिवहन विभाग, बिहार पटना में योगदान देकर अगले आदेश तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहेंगे। 4. प्रोन्नति का आर्थिक लाभ योगदान की तिथि से अनुमान्य होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनय कुमार राय, उप-सचिव।

-------- पर्यटन विभागपर्यटन विभागपर्यटन विभागपर्यटन विभाग ---------------------------- कार्यालय कार्यालय कार्यालय कार्यालय आदेशआदेशआदेशआदेश 25 जनवरी 201825 जनवरी 201825 जनवरी 201825 जनवरी 2018

सं॰ पर्य॰वि॰(स्था॰)-87/2005-162-04/प॰वि॰—सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19(1) के प्रावधान के तहत पर्यटन विभाग, बिहार, पटना में पदस्थापित सुश्री इनायत खान, संयुक्त सचिव को अपीलीय प्राधिकार के रूप में नामित किया जाता है। इस प्रसंग में पूर्व के निर्गत आदेष को विलोपित समझा जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह0) अस्पष्ट, सचिव।5 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

गन्ना उद्योग विभाग

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अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

17 जनवरी 2018

सं॰. सू॰अ॰-01-03/2012-63—विभागीय अधिसूचना संख्या-1354 दिनांक 24.06.2016 द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के कार्यान्वयन हेतु सचिवालय/ईखायुक्त कार्यालय हेतु लोक सूचना पदाधिकारी के रूप में अधिसूचित सहायक ईखायुक्त, गन्ना उद्योग विभाग के पद पर कार्यरत श्री मोहन राम की सेवानिवृत्ति हो जाने के फलस्वरूप अवर सचिव, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त लोक सूचना पदाधिकारी का कार्य संपादित करने हेतु अगले आदेष तक नियुक्त किया जाता है।

2. उक्त विभागीय अधिसूचना संख्या-1354 दिनांक 24.06.2016 का क्रमांक-1 को इस हद तक संषोधित समझा जाय।

3. यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 4. शेष यथावत रहेंगे। 5. प्रस्ताव पर विभागीय प्रधान सचिव का अनुमोदन प्राप्त है।

आदेश से, मृत्युंजय कुमार, विषेष कार्य पदाधिकारी।

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वाणिज्य-कर विभागवाणिज्य-कर विभागवाणिज्य-कर विभागवाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

6 फरवरी 20186 फरवरी 20186 फरवरी 20186 फरवरी 2018

सं0 6/गो॰-34-03/2016 (खण्ड-1)-358—बिहार वित्त सेवा संवर्ग के विभिन्न कोटियों के निम्नलिखित पदाधिकारियों की सेवा अगले आदेश तक वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौंपी जाती है।

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम गृह जिला पदनाम एवं पदस्थापित कार्यालय का नाम
1 2 3 4
1. श्री पाण्डेय संतोष —ष्ण सहाय पटना वा॰-कर अपर आयुक्त मुख्यालय, बिहार, पटना।
2. श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव सिवान वा॰-कर संयुक्त आयुक्त मुख्यालय, बिहार, पटना।
3. श्री मनोज कुमार वर्मा पटना वा॰-कर संयुक्त आयुक्त प्रशिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना।
4. श्री पंकज कुमार सिन्हा मुंगेर वा॰-कर संयुक्त आयुक्त टी॰आर॰यू॰, मुख्यालय, बिहार, पटना।
5. श्री अमिताभ मिश्र मुंगेर वा॰-कर उपायुक्त प्रशिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना।
6. श्री मुकेश कुमार वर्मा पटना वा॰-कर उपायुक्त प्रशिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना।
7. श्री सुरेश चौधरी जहानाबाद वा॰-कर उपायुक्त प्रशिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना।
6 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

2. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। 3. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

------------------------------------ जल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभाग ------------------------------------ अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 25 जनवरी 201825 जनवरी 201825 जनवरी 201825 जनवरी 2018

सं0 7/प्रो0 3-1002/2012-164—जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के प्रशासनिक नियंत्राधीन कार्यरत निम्नलिखित कनीय अभियंता (यॉत्रिक) को बिहार लोक सेवा आयोग के पत्र संख्या-5/प्रो0-7-37/ 2017(2481)/लो0से0आ0 दिनांक 10.01.18 में सन्निहित अनुशंसा के आलोक में बिहार अभियंत्रण सेवा वर्ग-2 में सहायक अभियंता (यॉत्रिक) के पद पर अपुनरीक्षित वेतनमान 6500-10500 (8000-13500), पुनरीक्षित वेतन पी0 बी0-2 ग्रेड पे 5400 रूपये में औपबंधिक प्रोन्नति स्तम्भ-5 में अंकित तिथि से प्रदान की जाती है ।

क्र0 स0 पदाधिकारी का नाम कनीय अभियंता क े मूल कोटि की वर्ष 2006 का वरीयता क्रमांक आई0 डी0 कोड प्रोन्नति की देय तिथि
1 श्री ओम प्रकाश शर्मा 979/06 जे0 6974 अधिसूचना निर्गत की तिथि से ।
2 श्री सुभाष चन्द्र मिश्र 1008/06 जे0 9588 अधिसूचना निर्गत की तिथि से ।
3 श्री दिनेश कुमार 1143/06 जे0 7001 कनीय को दी गई प्रोन्नति की तिथि से। (दिनांक 27.08.14 से )
4 श्री जगदीश यादव 1179/06 जे0 7254 अधिसूचना निर्गत की तिथि से ।

2. सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक- 4800 दिनांक- 01.04.16 की कंडिका 11 (iV) में निहित निदेश के तहत दी जाने वाली यह संवर्गीय प्रोन्नति औपबंधिक होगी तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन एस0 एल0 पी0 (सी0) संख्या- 29770/2015 बिहार सरकार बनाम सुशील कुमार सिंह एवं अन्य में पारित आदेश के फलाफल से प्रभावित होगा ।

3. प्रोन्नत पदाधिकारियों का आर्थिक लाभ अधिसूचना निर्गत होने के पश्चात प्रभार ग्रहण की तिथि से देय होगा ।

4. प्रोन्नति के बाद यदि किसी के विरूद्ध ऐसा कोई तथ्य सामने आता है, जिसके कारण दी गई प्रोन्नति अमान्य हो, तो दी गई प्रोन्नति रदद्‌ कर दी जाएगी एवं उनके द्वारा प्राप्त राशि की वसूली की कार्रवाई की जाएगी ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अवधेश कुमार मंडल, अवर सचिव (प्रबंधन)।7 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभागलोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभागलोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभागलोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग

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प्रभार-प्रतिवेदन

1 नवम्बर 2017

सं0 960—मैं नवीन कुमार, भा0प्र0से0 (2011) संयुक्त सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार, पटना के पद का प्रभार आज दिनांक 01.11.2017 के पूर्वाह्‌न में स्वतः ग्रहण करता हूँ।

(सामान्य प्रषासन विभाग की अधिसूचना संख्या-1/पी॰-1001/2016 (खण्ड-1)-सा॰प्र॰-13691 दिनांक 31.10.2017 द्रष्टव्य)।

आदेश से, नवीन कुमार, भारग्राही पदाधिकारी।

---------------------------- गृह विभागगृह विभागगृह विभागगृह विभाग अभियोजन निदेश्अभियोजन निदेश्अभियोजन निदेश्अभियोजन निदेशालयाालयाालयाालय ---------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाएंएंएंएं 5 फरवरी 20185 फरवरी 20185 फरवरी 20185 फरवरी 2018

सं0 07/सी0-01-202/2007/खंड-181—बिहार अभियोजन सेवा के निम्नांकित अभियोजन पदाधिकारियों को विशेष परिस्थिति में कार्यहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानान्तरित करते हुए उनके नाम के सामने स्तम्भ-4 में अंकित स्थान पर अगले आदेश तक के लिए पदस्थापित किया जाता है :-

क्र0 अभियोजन पदाधिकारी का नाम/ पदनाम वर्तमान पदस्थापन स्थान नव पदस्थापन स्थान
1 2 3 4
1 मो0 जावेद अहमद अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी/ अपर लोक अभियोजक अनुमंडल अभियोजन कार्यालय दानापुर। (अधिसूचना संख्या 695 दिनांक 12.07.2017 द्वारा अधिसूचित अनुमंडल अभियोजन कार्यालय, बखरी, बेगूसराय) जिला अभियोजन कार्यालय, पटना सदर।
2 श्री संजीव कुमार चौधरी अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी, से0ग्र 0/ े अपर लोक अभियोजक, से0ग्र 0 े जिला अभियोजन कार्यालय अररिया। निगरानी अन्वेष्ण ब्यूरो, पटना।
3 श्री शिवनन्दन रजक अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी/ अपर लोक अभियोजक जिला अभियोजन कार्यालय गया। अनुमंडल अभियोजन कार्यालय, पटना सिटी।
4 श्री गौरी शंकर ताँती अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी, से0ग्र 0/ े अपर लोक अभियोजक, से0ग्र 0 े जिला अभियोजन कार्यालय शिवहर। जिला अभियोजन कार्यालय, लखीसराय।
5 श्री भानु प्रताप सिंह अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी, से0ग्र 0/ े अपर लोक अभियोजक, से0ग्र े अनुमंडल अभियोजन कार्यालय बगहा। अनुमंडल अभियोजन कार्यालय दानापुर।
6 श्रीमती संगीता कुमारी अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी/ अपर लोक अभियोजक जिला अभियोजन कार्यालय गया। जिला अभियोजन कार्यालय, पटना सदर।
7 श्री शम्भु शाही अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी, से0ग्र 0/ े अपर लोक अभियोजक, से0ग्र े जिला अभियोजन कार्यालय शेखपुरा। जिला अभियोजन कार्यालय, गोपालगंज।
8 श्री दिनेश कुमार नं0-3 अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी, से0ग्र 0/ े अपर लोक अभियोजक, से0ग्र े जिला अभियोजन कार्यालय समस्तीपुर। अनुमंडल अभियोजन कार्यालय दानापुर।

पदस्थापित स्थान पर योगदान देना सुनिश्चित करेंगे।8 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 3. उपरोक्त सभी पदाधिकारियों का स्थानान्तरण उनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के आलोक में विशेष परिस्थिति में कार्यहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से किया गया है, अतएव इन सभी पदाधिकारियों को स्थानान्तरण यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, संयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशकसंयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशकसंयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशकसंयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशक।।।।

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5 फरवरी 20185 फरवरी 20185 फरवरी 20185 फरवरी 2018

सं0 (01) 19/2015/स्था0-182—बिहार अभियोजन सेवा के निम्नांकित अभियोजन पदाधिकारियों को विशेष परिस्थिति में कार्यहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानान्तरित करते हुए उनके नाम के सामने स्तम्भ-4 में अंकित स्थान पर अगले आदेश तक के लिए पदस्थापित किया जाता है :-

क्र0 अभियोजन पदाधिकारी का नाम/ पदनाम वर्तमान पदस्थापन स्थान नव पदस्थापन स्थान
1 2 3 4
1 श्री राजवंश सिंह अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी, से0ग्र 0/ े अपर लोक अभियोजक, से0ग्र 0 े अनुमंडल अभियोजन कार्यालय बाढ़। प्रतिनियुक्त पुलिस महानिदेशक कार्यालय, पटना। पुलिस महानिदेशक कार्यालय, पटना।
2 श्री विजय कान्त ठाकुर अनुमंडल अभियोजन पदाधिकारी, से0ग्र 0/ े अपर लोक अभियोजक, से0ग्र 0 े अनुमंडल अभियोजन कार्यालय मसौढ़ी। प्रतिनियुक्त पुलिस महानिदेशक कार्यालय, पटना। पुलिस महानिदेशक कार्यालय, पटना।

नव पदस्थापित स्थान पर योगदान देना सुनिश्चित करेंगे।

4. उपरोक्त दोनों पदाधिकारियों का स्थानान्तरण उनके द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के आलोक में विशेष परिस्थिति में कार्यहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से किया गया है, अतएव इन दोनों पदाधिकारियों को स्थानान्तरण यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, ईश्वर चन्द्र सिन्हा, संयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशकसंयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशकसंयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशकसंयुक्त सचिव-सह-संयुक्त निदेशक।।।।

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अधीKकअधीKकअधीKकअधीKक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 44448888ÑÑÑÑ571+10101010----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in9 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

भाग-9-ख

िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प_रवहन सूचनाएं, <यायालय सूचनाएं और सवLसाधारण

सूचनाएं इ`याPद

ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

सूचनासूचनासूचनासूचना ----------------------------

No. 133—I, Prachi D/O Late Upendra Kumar M/o Kanchan Kumari R/o Radhasadan Amrudi Lane, Mchuatoli, PO- Bankipur, PS-Kadamkuan, Patna-4, Bihar vide affidavit no. 11732 dated 01.07.2017 shall be known as Prachi Ruhee for all future purposes.

Prachi.

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No. 172—I ANKITA Rani, D/O Shashi Ranjan Paswan, R/o Qr.no. D1/21, BRTS, Begusarai, Bihar have changed my name to Ankita Ranjan Affi. no. 8477 dated 15/12/2017. Ankita Rani.

———

अधीKकअधीKकअधीKकअधीKक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 48484848ÑÑÑÑ571+10101010----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in10 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

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सं0 गव्य (ग-1) 01/2006—206

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

(गव्य विकास)

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संकल्प

2 फरवरी 2018

विषय :- बिहार स्टेट डेयरी कॉरपोरेशन लि0, पटना के निदेशक पर्षद का पुनर्गठन।

विभागीय संकल्प संख्या-1129 दिनांक 02.08.2016 द्वारा बिहार स्टेट डेयरी कॉरपोरेशन लि0 के निदेशक पर्षद का पुनर्गठन निम्नवत किया गया था :-

(1) डा0 एन0 विजयलक्ष्मी, भा0 प्र0 से0 अध्यक्ष

सचिव,

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग,

बिहार, पटना।

(2) श्री एच0 आर0 श्रीनिवास, भा0 प्र0 से0 निदेशक

सचिव (संसाधन),

वित्त विभाग, बिहार, पटना।

(3) श्रीमती सीमा त्रिापाठी, भा0 प्र0 से0 निदेशक

प्रबंध निदेशक, कम्फेड, पटना।

(4) श्री अजय कुमार झा, निदेशक

उप निदेशक (मु0)

गव्य विकास निदेशालय, बिहार, पटना-सह-

प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट डेयरी कॉरपोरेशन लि0, पटना।

उपरोक्त क्रमांक (3) के पदाधिकारी का स्थानान्तरण अन्यत्रा हो चुका है फलस्वरूप वर्त्तमान में बिहार स्टेट डेयरी कॉरपोरेशन लि0, पटना के निदेशक पर्षद का पुनर्गठन निम्नवत किया जाता है :-

11 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

(1) डा0 एन0 विजयलक्ष्मी, भा0 प्र0 से0 अध्यक्ष

सचिव,

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग,

बिहार, पटना।

(2) श्री उदयन मिश्र, निदेशक

सचिव (संसाधन),

वित्त विभाग, बिहार, पटना।

(3) श्रीमती शिखा श्रीवास्तव, आई0आर0टी0एस0 निदेशक

प्रबंध निदेशक, कम्फेड, पटना।

(4) श्री अजय कुमार झा, निदेशक

निदेशक,

गव्य विकास निदेशालय, बिहार, पटना-सह-

प्रबंध निदेशक, बिहार स्टेट डेयरी कॉरपोरेशन लि0, पटना।

उपरोक्त क्रमांक 1 एवं 4 में अंकित पदाधिकारियों का कार्यकाल संकल्प निर्गत की तिथि से 03 (तीन) वर्षो के लिए तथा क्रमांक 2 एवं 3 में अंकित पदाधिकारियों का कार्यकाल संकल्प निर्गत की तिथि से 01 (एक) वर्ष के लिए होगा।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि संकल्प की प्रति बिहार स्टेट डेयरी कॉरपोरेशन लि0, पटना के निदेशक पर्षद के सभी निदेशकों को भेज दी जाय।

यह भी आदेश दिया जाता है कि संकल्प आम जानकारी के लिए राजकीय गजट में प्रकाशित किया जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

श्री ब्रजेश्वर पाण्डेय, अवर सचिव।

-------------------------------- जल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभागजल संसाधन विभाग -------------------------------- अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाएंएंएंएं 8 नवम्बर 20178 नवम्बर 20178 नवम्बर 20178 नवम्बर 2017

सं0 सं0 सं0 सं0 22/नि0सि0(भाग22/नि0सि0(भाग22/नि0सि0(भाग22/नि0सि0(भाग0)-09-08/2011-19770)-09-08/2011-19770)-09-08/2011-19770)-09-08/2011-1977—श्री रामनारायण यादव, आई0डी0 क्रमांक-2241, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया सम्प्रति सेवानिवृत को कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के पदस्थापन अवधि के दौरान कतिपय अनियमितताओं के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-749, दिनांक 23.06.11 द्वारा निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1061, दिनांक 19.08.11 द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17(2) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के उपरांत श्री यादव की सेवानिवृति तिथि 31.05.2012 होने के मद्‌देनजर सरकार के स्तर पर किये गये निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-400, दिनांक 20.04.12 द्वारा उन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध गठित आठ आरोपों में से पाँच आरोप प्रमाणित एवं एक आरोप अंशतः प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दुओं को अभिलिखित करते हुए विभागीय पत्रांक-410, दिनांक 24.04.12 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

उपर्युक्त द्वितीय कारण पृच्छा के आलोक में श्री यादव के पत्रांक-307, दिनांक 12.05.12 द्वारा समर्पित जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर किये जाने के पूर्व इनके दिनांक 31.05.2012 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप विभागीय आदेश संख्या-102 सहपठित ज्ञापांक-763, दिनांक 10.07.12 द्वारा इनके विरूद्ध पूर्व संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया तथा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दुओं को पुनः अभिलिखित करते हुए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत विभागीय पत्रांक-606, दिनांक 17.05.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

श्री यादव से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं सम्यक समीक्षोपरांत प्रक्रियात्मक त्रुटि, प्रशासनिक विफलता एवं वित्तीय अनियमितता तथा सरकार को वित्तीय क्षति पहुँचाने जैसै प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय एवं बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति से श्री रामनारायण यादव, तत्कालीन12 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-1970, दिनांक 16.12.2014 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित कर उन्हें संसूचित किया गया -

"दस प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष तक रोक।" "दस प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष तक रोक।" "दस प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष तक रोक।" "दस प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष तक रोक।" श्री रामनारायण यादव, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-शून्य दिनांक 22.09.16 द्वारा इनके निलंबन अवधि दिनांक 23.06.2011 से 19.04.2012 के विनियमन हेतु अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री यादव से प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षा के क्रम में पाया गया कि इनके कृत से वित्तीय अनियमितता करने की मंशा स्पष्ट हुई है एवं सरकार को वित्तीय क्षति भी हुई है।

समीक्षोपरांत श्री यादव द्वारा समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए निलंबन अवधि को कर्त्तव्य पर नहीं मानने और इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होने तथा इस अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ नहीं करने का निर्णय लिया गया।

वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री रामनारायण यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया सम्प्रति सेवानिवृत के निलंबन अवधि दिनांक 23.06.2011 से 19.04.2012 के विनियमन एवं वेतन भत्ता के अनुमान्यता के संबंध में समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकार करते हुए उन्हें निम्न निर्णय संसूचित किया जाता है -

"निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि नहीं माना जाय तथा इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता को छोड़कर अन्य कुछ भी देय नहीं हो, परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ भी नहीं की जायेगी।"

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल राज्यपाल राज्यपाल राज्यपाल के आदेश से,के आदेश से,के आदेश से,के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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7 नवम्बर 20177 नवम्बर 20177 नवम्बर 20177 नवम्बर 2017

22/नि॰सि॰(सिवान)-11-17/2012////1951195119511951—श्री महावीर राम (आई॰डी॰-4592), तत्कालीन सहायक सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-17/2012 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-17/2012 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-17/2012 अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमण्डल-2, सिवान सम्प्रति सहायक अभियंता स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमण्डल, सुपौल के विरूद्ध माननीय सदस्य बिहार विधान परिषद श्री केदार नाथ पाण्डेय की ऐच्छिक कोष से सिवान जिलांतर्गत 10 शिक्षण संस्थाओं के निर्माण/जिर्णोद्धार कार्य हेतु दिये गये 11,59,760.00 रूपये की राशि नियम विरूद्ध तरीके से कनीय अभियंता को देने के आरोप के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1111, दिनांक-13.09.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन के उपरांत श्री राम के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं॰-1373, दिनांक-16.09.2014 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया :- 1111.... निन्दन वर्ष 2008-09निन्दन वर्ष 2008-09निन्दन वर्ष 2008-09निन्दन वर्ष 2008-09 दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। 2222.... दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्ध श्री राम द्वारा अभ्यावेदन पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-73 दिनांक-16.08.2017 (विभाग में दिनांक-04.09.2017 को प्राप्त) समर्पित किया गया। श्री राम द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई, जिसमें पाया गया कि श्री राम द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन निर्गत दण्डादेश के करीब 3 वर्षों बाद दिया गया है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 25 में अपील/पुनर्विचार अर्जी दायर करने हेतु 45 दिन का परिसीमा काल निर्धारित किया गया है। तीन साल बाद पुनर्विचार अर्जी दायर करने के औचित्य के संबंध में किसी उचित कारण का उल्लेख पुनर्विचार अर्जी में नहीं है। अतः कालबाधित होने के कारण पुनर्विलोकन अर्जी ग्राह्‌य नहीं है। उक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सरकार द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उक्त निर्णय श्री महावीर राम (आई॰डी॰-4592), सहायक अभियंता को संसूचित किया जाता है।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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13 नवम्13 नवम्13 नवम्13 नवम्बर 2017बर 2017बर 2017बर 2017

22/नि0सि0(विविध)वीर-21-24/2017////1996199619961996—श्री शिवनाथ रूद्र, लेखालिपिक, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(विविध)वीर-21-24/2017 22/नि0सि0(विविध)वीर-21-24/2017 22/नि0सि0(विविध)वीर-21-24/2017 को एक अल्पसंख्यक महिला कर्मी के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप में अगस्त 2016 में वीरपुर से मोहनियाँ स्थानांतरित किया गया था। श्री रूद्र द्वारा उक्त स्थानांतरण के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया गया, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके विरूद्ध दायर एल0पी0ए0 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा स्थानांतरण आदेश को इस आधार पर रद्‌द कर दिया गया कि इनका स्थानांतरण आरोप के साथ किया गया है। विभाग चाहे तो कार्य हित में स्थानांतरण कर सकता है।

श्री रूद्र, लेखा लिपिक का स्थानांतरण नवम्बर 2016 में कार्यहित में वीरपुर से मोहनियाँ करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया। साथ ही श्री श्रीनिवास प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल, वीरपुर को इन्हें एक सप्ताह के अंदर विरमित करने का निदेश दिया गया किन्तु श्री श्रीनिवास प्रसाद, कार्यपालक अभियंता द्वारा इन्हें विरमित नहीं किया गया।

दूरभाष पर श्री श्रीनिवास प्रसाद, कार्यपालक अभियंता से पूछने पर जवाब दिया गया कि मार्च 2017 के बाद उन्हें विरमित किया जायेगा। इस निमित्त श्री प्रसाद, कार्यपालक अभियंता से स्पष्टीकरण पूछा गया। किन्तु श्री प्रसाद द्वारा जवाब13 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 नहीं दिया गया। फलतः श्री प्रसाद, कार्यपालक अभियंता को विभागीय आदेश की अवहेलना करने के प्रमाणित आरोप के लिए सरकार के स्तर से निम्न दण्ड दिया गया - (i) निंदन वर्ष 2016-17 (ii) एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध। उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री श्रीनिवास प्रसाद द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन विभाग में समर्पित किया गया। पुनर्विलोकन अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। जिसमें पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा सरकारी आदेश का अनुपालन नहीं करके अनुशासनहीनता बरती गयी है। उक्त के आलोक में इनके द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया।

अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्रीनिवास प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, पूर्वी तटबंध प्रमंडल सं०-2, वीरपुर द्वारा दिये गये पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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14 नवम्बर 201714 नवम्बर 201714 नवम्बर 201714 नवम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2011/22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2011/22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2011/22/नि0सि0(भाग0)-09-05/2011/2010201020102010—श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को मासिक बैठक में आवंटित राशि की गलत सूचना देने एवं वर्ष 2010 की बाढ़ अवधि में गंगा नदी की धारा के दबाव के कारण कराये जा रहे बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की सुनियोजित रूप से बाढ़ सामग्री एवं श्रम प्रबंधन के अभाव तथा अदूरदर्शिता के कारण स्पर सं0 5 से 9 के क्षतिग्रस्त होने आदि के आरोप में इनके विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-क गठित करते हुये विभागीय संकल्प ज्ञापांक-441 दिनांक 08.05.2012 द्वारा इनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत0 मुख्य अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के पूर्व ही उनके द्वारा दिनांक 30.06.2013 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय ज्ञापांक-315 दिनांक 13.03.14 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।

विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी श्री विवेक कुमार सिंह, अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-56, दिनांक 08.03.2016 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई एवं सम्यक समीक्षोपरांत आरोप सं०-1 के संबंध में सन्देह का लाभ देने एवं आरोप सं०-2 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाये जाने के फलस्वरूप श्री महतो, तत0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत से विभागीय पत्रांक-1056, दिनांक 09.06.16 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत0 मुख्य अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत के पत्रांक-शून्य दिनांक 03.04.17 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित किया गया, जिसमें इनके द्वारा निम्नलिखित तथ्यों को प्रस्तुत किया गया।

आरोप सं० 1-आरोप सं० 1-आरोप सं० 1-आरोप सं० 1- दिनांक 05.03.11 के मासिक बैठक में किसी प्रमण्डल विशेष के लिए आवंटन का सही आंकड़ा प्रस्तुत नहीं करने के आरोप के संदर्भ में टंकण भूल होने का उल्लेख किया गया है। इनके द्वारा टंकण भूल घोर कदाचार की श्रेणी में न होने एवं गलत सूचना से सरकार को वित्तीय क्षति न होने के कारण विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम 43(बी) में सम्परिवर्तित करने के बिन्दु पर समीक्षा किए जाने का अनुरोध किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग का पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 की कंडिका 2(10) को उद्धृत करते हुए उल्लिखित किया गया है कि द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित विभागीय पत्र में आरोपवार असहमति के बिन्दू अंकित नहीं किया गया है। दिनांक 03.11.2011 तक मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर परिक्षेत्रान्तर्गत 1700.00लाख आवंटन के विरूद्ध 1293.231लाख (76.07%) उपयोग किये जाने का स्पष्ट उल्लेख इनके पत्रांक-1821, दिनांक 08.11.12 द्वारा की गई है जो कार्य में अभिरूचि एवं कार्यालय पर नियंत्रण होने की ओर इंगित करता है।

आरोप सआरोप सआरोप सआरोप सं० 2-ं० 2-ं० 2-ं० 2- इनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि लांक्षण लगाने वाला पदाधिकारी तदेन अभियंता प्रमुख द्वारा अदूरदर्शिता के अभिप्राय को स्पष्ट नहीं किया गया है। आरोप के साथ संलग्नित अभिलेख से उनके स्तर से अदूरदर्शी होने एवं निदेश निर्गत करने की कार्यवाही नहीं किया जाना स्थापित नहीं होता है।

बाढ़ के दौरान विभाग को भेजे गये अभिलेखों को निम्नलिखित सूची की ओर ध्यान आकृष्ट करने का अनुरोध किया गया है -

((((i)))) विभाग द्वारा दिनांक 20.01.2009 को रूपये 4456 लाख की दी गई प्रशासनिक स्वीकृति के क्रम में एकरारनामा (21 SBP/08-09) करते हुए दिनांक 02.03.2009 को कार्य प्रारंभ कराया गया एवं दिनांक 19.09.09 तक कार्य पूर्ण था। इसी बीच बाढ़ 2009 के अंतिम समय में नदी की धारा में परिवर्तन के कारण स्पर सं०-2, 3, 6 एवं 7 का नोज आंशिक क्षतिग्रस्त हुआ, जिसे मरम्मति हेतु कार्यपालक अभियंता, नवगछिया द्वारा कई पत्रों के माध्यम से संवेदक को निदेशित किया गया, जिसकी सूचना विभाग को भी दी गई।

(ii) अध्यक्ष बाढ़ सुरक्षात्मक दल को पत्रांक-169, दिनांक 14.01.10 द्वारा स्थल निरीक्षण हेतु अनुरोध किया गया।14 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 (iii) दिनांक 06.02.2010 को कार्यपालक अभियंता मोनिटरिंग प्रमंडल-1 एवं सहायक अभियंता, बाढ़ अनुश्रवण अंचल द्वारा स्थल निरीक्षण कर स्परों की मरम्मति का निर्णय लिया गया।

(iv) दिनांक 23.02.2010 को क्षतिग्रस्त स्परों के संबंधित आत्मभरित प्रतिवेदन फोटोग्राफ के साथ दिनांक 15.03.2010 को विभाग को उपलब्ध कराया गया एवं बाढ़ 2010 के पूर्व मरम्मति आवश्यक होने को कहा गया।

(v) पत्रांक-1252 दिनांक 12.04.2010 द्वारा इन क्षतिग्रस्त स्परों की मरम्मति हेतु 480.66लाख का प्राक्कलन विभाग को समर्पित किया गया।

(vi) इस कार्य से संबंधित कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल संख्या-1, भागलपुर दिनांक 09.02.2010 को कार्यपालक अभियंता, नवगछिया को प्रभार सौंपने की सूचना एवं इनके विरूद्ध कार्रवाई करने का प्रस्ताव अभियंता प्रमुख को दिया गया।

(vii) श्री ब्रजनन्दन प्रसाद, अभियंता प्रमुख (सेवानिवृत) के दिनांक 08.05.2010 के स्थल निरीक्षण के उपरांत सुझाव के आलोक में रूपये 218.75लाख का प्राक्कलन विभाग को समर्पित करते हुए कार्य पूरा कराने हेतु आवंटन की मांग की गई। (viii) बाढ़ 2010 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य का प्रतिवेदन दिनांक 26.08.2010 को समर्पित है। (ix) बाढ़ 2010 के दौरान दिनांक 01.07.10 से 15.10.10 तक कराये गये कार्यों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन विभाग को समर्पित है, जिसकी समीक्षा से बाढ़ निरोधात्मक कार्यों में व्यय राशि स्पष्ट होगा, जिसे विभाग ने स्वीकार किया है। (x) कटाव स्थल पर लगातार कैम्प कर अधीनस्थों को लगातार निदेश देते हुए बाढ़ से होने वाली क्षति को कारगर एवं प्रभावी ढ़ग से रोकने में सफलता पायी गई है।

श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत0 मुख्य अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में प्रस्तुत उपर्युक्त तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये -

(1) (1) (1) (1) आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि नियम 43(बी0) के तहत सम्परिवर्तित करने के पूर्व विभाग को टंकण भूल घोर कदाचार की श्रेणी में होने एवं गलत सूचना से सरकार को वित्तीय क्षति होने को समीक्षा कर स्पष्ट किया जाना चाहिए था।

आरोपित पदाधिकारी का उक्त कथन स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि सामान्य प्रशासन विभाग में पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 की कंडिका (15) में सेवा अवधि के दौरान संचालित विभागीय कार्यवाही सेवानिवृति के फलस्वरूप बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत स्वतः परिवर्त्तन संबंधी एक आदेश निर्गत करना ही पर्याप्त होने को उल्लिखित किया गया है।

आरोपित पदाधिकारी का कथन है कि सामान्य प्रशासन विभाग का पत्रांक-1893, दिनांक 14.06.11 के कंडिका 2(10) के अनुसार असहमति का बिन्दु अंकित नहीं किया गया है।

जाँच प्रतिवेदन में समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा "आरोपित पदाधिकारी को संदेह का लाभ दिया जा सकता है" निष्कर्षित किया गया है, जिससे संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया जाना परिलक्षित होता है। अतएव संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष पर असहमति के बिन्दू के साथ द्वितीय कारण पृच्छा नहीं किये जाने से उनके निष्कर्ष से सहमत होना दर्शाता है। अतएव आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस संदर्भ में दिया गया उत्तर औचित्यहीन प्रतीत होता है। (2) (2) (2) (2) आरोपित पदाधिकारी का कथन है कि अभियंता प्रमुख, जो मुख्य अभियंता से अधिक दूरदर्शी एवं निदेश देने में सक्षम है द्वारा हमेशा कार्य स्थल पर मौजूद रहकर अपने निरीक्षण के दौरान दूरदर्शिता पूर्ण निर्णय लेकर कौन सा निदेश निर्गत किया गया या क्या फॉलो-अप किया गया, स्थापित नहीं होता है।

संचालन पदाधिकारी ने आरोपित पदाधिकारी द्वारा निर्मित स्पर के क्षतिग्रस्त होने की ससमय सूचना नहीं देने एवं अपने स्तर से प्रबंधन नहीं करने को प्रमाणित पाया है तथा बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में विशिष्टि रूप से किन-किन बिन्दुओं पर प्रबंधन दोष परिलक्षित हुआ है, जिसके कारण स्पर सं० 5 से 9 काफी व्यापक रूप से प्रभावित हुआ, स्पष्ट नहीं है। अतएव उक्त के लिए आरोपित पदाधिकारी को ससमय सूचना नहीं देने एवं प्रबंधकीय कमी के लिए आंशिक रूप से दोषी होने को प्रमाणित पाया गया है।

आरोपित पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि बाढ़ 2009 के अंतिम समय में स्पर सं० 2, 3, 6, 7 का नोज आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था, जिन्हें पूर्ण करने हेतु कार्यपालक अभियंता, नवगछिया पत्रांक-1235, दिनांक 21.10.2009 द्वारा संवेदक को निदेशित किया गया। उक्त से आरोपित पदाधिकारी के स्तर से ससमय कोई कार्रवाई नहीं किया जाना अथवा सूचना नहीं दिया जाना स्पष्ट होता है। साथ ही उक्त उल्लिखित पत्राें में अवशेष कार्य पूर्ण किये जाने को निदेशित किये जाने से उक्त आशय की पुष्टि होती है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा अंकित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी को साक्ष्य के रूप में उपलब्ध कराये गये अभियंता प्रमुख का गै0स0प्रे0सं०-4 दिनांक 09.02.11 को विदित होता है कि बाढ़ 2009 में क्षतिग्रस्त स्पर को बाढ़ 2010के पूर्व पुर्नस्थापित किये जाने के उपरांत बाढ़ अवधि 2010 में क्षेत्रीय अभियंताओं के पास बाढ़ सामग्री एवं श्रम प्रबंधन का अभाव एवं अदूरदर्शिता के कारण तथा आरोपित पदाधिकारी में अपेक्षित निर्णय लेने एवं निदेश देने के अभाव के कारण स्पर सं० 5 से 9 क्षतिग्रस्त हुआ।

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि बाढ़ के आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कटाव स्थल पर लगातार कैम्प करते हुए अधीनस्थों को लगातार निदेश देकर बाढ़ से होने वाली क्षति को कारगर एवं प्रभावी ढ़ग से रोकने में सफलता पायी। परन्तु तदेन अभियंता प्रमुख के दिनांक 08.05.2010 के स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में की गई टिप्पणी "It is really15 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 strange why no action where taken to protect these spurs either during flood or after flood till to date" एवं अभिलेख से विदित होता है कि वर्ष 2009 एवं 2010 में निर्मित स्पर सं० 5 से 9 बाढ़ 2010 में क्षतिग्रस्त हुआ। इस प्रकार संबंधित परिक्षेत्र का मुख्य अभियंता होने के नाते आरोपित पदाधिकारी के स्तर से ससमय समुचित निर्णय लेने एवं निदेश देने में कमी परिलक्षित होता है। बाढ़ संघर्षात्मक कार्य, सामुहिक जिम्मेवारी का होने के कारण एवं विशिष्ट रूप से किन-किन बिन्दुओं पर प्रबंधन दोषी परिलक्षित हुआ है, स्पष्ट नहीं रहने के कारण आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है।

उपर्युक्त पाये गये तथ्यों के आलोक में श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत का द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं है। अतएव ससमय सूचना नहीं दिये जाने, समुचित निर्णय/निदेश नहीं देने तथा सामग्री एवं श्रम प्रबंधन में अभाव का आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। फलस्वरूप उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को "पाँच प्रतिशत पेंशन की राशि से कटौती एक वर्ष के लिए" का दण्ड देने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

उक्त निर्णित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। सरकार के स्तर पर लिये गये उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत0 मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देते हुए संसूचित किया जाता है। "पाँच प्रतिशत पेंशन की राशि से कटौती एक वर्ष तक के लिए"। "पाँच प्रतिशत पेंशन की राशि से कटौती एक वर्ष तक के लिए"। "पाँच प्रतिशत पेंशन की राशि से कटौती एक वर्ष तक के लिए"। "पाँच प्रतिशत पेंशन की राशि से कटौती एक वर्ष तक के लिए"।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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17 नवम्बर 201717 नवम्बर 201717 नवम्बर 201717 नवम्बर 2017

22/नि0सि0(पट0)-03-18/2015////2040204020402040—श्री सत्यनारायण, मुख्य अभियंता (प्रभारी), जल विज्ञान एवं योजना सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(पट0)-03-18/2015 22/नि0सि0(पट0)-03-18/2015 22/नि0सि0(पट0)-03-18/2015 आयोजन, पटना आई0डी0-2956 को आरोप वर्ष 2005-06 का आरोप पत्र गठित कर उल्लेखित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2779, दिनांक 30.06.2005 को स्पष्टीकरण किया गया। मुख्य अभियंता का कार्यालय, जल विज्ञान एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग, पटना के पत्रांक-620, दिनांक 15.07.2005 द्वारा श्री सत्यनारायण, मुख्य अभियंता द्वारा अपना स्पष्टीकरण विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। श्री सत्यनारायण को घोर अनियमितता, कदाचार, अनुशासनहीनता का आरोप के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाए जाने के फलस्वरूप विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1490, दिनांक 30.08.2005 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 में विहित नीति से विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गई। समीक्षोपरांत उनके विरूद्ध निम्नलिखित आरोप प्रमाणित पाए गए :-

(1) दिनांक 17.05.2005 को श्री आदित्य नारायण झा, 'अनल' उप निदेशक-2, जल विज्ञान योजना, आयोजन जल संसाधन विभाग को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के कार्याें से मुक्त किये जाने के पीछे गलत मंशा का होना।

(2) श्री 'अनल' उप निदेशक-2, जल विज्ञान योजना आयोजन, पटना को निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के कार्यों से मुक्त करने के तत्काल बाद कनीय अभियंताओं के राज्यस्तरीय हड़ताल में प्रस्थान कर जाने के पीछे यह स्पष्ट मंशा रहना कि मुख्य अभियंता कार्यालय के कर्मियों को मई माह का वेतन ससमय नहीं मिल सके, जिससे सरकार के परेशानियों का सामना करना पड़ सके।

(3) कर्मचारियों द्वारा जब वेतन भुगतान में विलंब की सूचना मुख्यालय को दी गई तब उनके द्वारा बैक डेटिंग कर आदेश संख्या-462 दिनांक 31.05.05 द्वारा मुख्य अभियंता कार्यालय में पदस्थापित प्रशाखा पदाधिकारी को निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बनाया जाना अर्थात जबरन कागजातों में हेर-फेर एवं अन्तरलेखन किया जाना एवं झूठे कागज तैयार करना। (4) उपरोक्त आदेश पर इनके द्वारा दिनांक 17.05.05 को हस्ताक्षर किया जाना परन्तु पत्र की निर्गत तिथि 31.05.05 होना एवं निर्गत पंजी में कोई इसका फोस्र्ड इन्ट्री किया जाना, जिससे स्पष्ट रूप से बैंक डेटिंग प्रमाणित होना। (5) कार्यालय कर्मियों द्वारा समर्पित अभ्यावेदन पर हस्ताक्षर 02.06.05 एवं 01.06.05 में किया जाना जबकि इसी आवेदन के उपांत में इनके द्वारा 17.05.05 को हस्ताक्षर किया जाना एवं अपने स्पष्टीकरण में इस हेतु क्षमा मांगना स्पष्ट रूप से आरोप को प्रमाणित करता है।

(6) इनके द्वारा मुख्य अभियंता के रूप में कार्यालय का संचालन सचिवालय अनुदेश के अनुरूप नहीं कर मौखिक रूप से अधिकांश आदेश का कार्यान्वयन करना।

(7) मुख्य अभियंता कार्यालय में पदस्थापित प्रशाखा पदाधिकारी को निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के रूप में मनोनीत करना जो बिहार कोषागार अधिनियम के नियम 148 के अनुकूल नहीं रहना अर्थात सरकार के आदेश का समुचित अनुपालन नहीं करना।

(8) इनके द्वारा उपरोक्त उल्लेखित कृत्य कार्य अभियंत्रण सेवा वरीय पद की गरिमा के प्रतिकूल होना। उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित करने का निर्णय लिया गया - (i) अधीक्षण अभियंता के सम्पुष्ट पद से कार्यपालक अभियंता के पद पर पदावनति। उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सत्यनारायण, तत्कालीन, मुख्य अभियंता (अतिरिक्त प्रभार), जल विज्ञान एवं योजना आयोजन, पटना से विभागीय पत्रांक-290 दिनांक 23.02.2006 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की16 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 छायाप्रति संलग्न करते हुए अधीक्षण अभियंता के सम्पुष्ट पद से कार्यपालक अभियंता के पद पर पदावनत क्यों नहीं की जाए के संबंध में द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री सत्यनारायण, तत्कालीन मुख्य अभियंता (अतिरिक्त प्रभार) जल विज्ञान एवं योजना आयोजन, पटना द्वारा उनके पत्रांक-659, दिनांक 05.04.2006 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत श्री सत्यनारायण के विरूद्ध वेतन भुगतान में विलंब के कारण कर्मचारियों द्वारा मुख्यालय सूचना देने के उपरांत इनके द्वारा बैक डेटिंग कर अपने कार्यालय के प्रशाखा पदाधिकारी को निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी घोषित करने के आरोप एवं अन्य आरोपों के प्रमाणित पाए जाने तथा श्री सत्यनारायण द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य समर्पित नहीं करने के फलस्वरूप विभागीय पत्रांक-174, दिनांक 01.03.2007 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग की सम्पुष्टि हेतु भेजी गई, जिसके क्रम में बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने पत्रांक-1103, दिनांक 25.09.2007 द्वारा सरकार के निर्णय से असहमति व्यक्त की गई। बिहार लोक सेवा आयोग के असहमति के बावजूद भी श्री सत्यनारायण को अधीक्षण अभियंता के सम्पुष्ट पद से कार्यपालक अभियंता के पद पर पदावनत करने के निर्णय पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय को अनुमोदन प्राप्त है।

उक्त वर्णित स्थिति में श्री सत्यनारायण, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, जल विज्ञान एवं योजना आयोजन, जल संसाधन विभाग को अधीक्षण अभियंता (नियमित) के पद से कार्यपालक अभियंता (नियमित) के पद पर पदावनत करने का निर्णय एवं संसूचन विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-670, दिनांक 14.08.2008 द्वारा किया गया।

विभाग द्वारा संसूचित दंडादेश के विरूद्ध श्री सत्यनारायण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-13644/2008 दायर किया गया। जिसमें सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने दिनांक 30.01.2017 को पारित आदेश में विभागीय दंडादेश को निरस्त करते हुए सम्पूर्ण मामले को नए सिरे से विचार करने हेतु आदेश दिया। उक्त के आलोक में निम्न प्रस्ताव विभाग द्वारा निर्णीत किया गया - (क) सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-13644/2008 में पारित आदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-670 दिनांक 14.08.2008 द्वारा निर्गत दंडादेश निरस्त किया जाना।

(ख) संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए श्री सत्यनारायण से द्वितीय कारण पृच्छा प्राप्त करना।

उक्त प्रस्ताव पर माननीय मंत्री महोदय का अनुमोदनोपरांत उक्त दंडादेश विभागीय अधिसूचना संख्या-891, दिनांक 12.06.2017 द्वारा निरस्त किया गया। तदुपरांत विभागीय आदेश संख्या-55 सहपठित ज्ञापांक-1055, दिनांक 29.06.2017 द्वारा श्री सत्यनारायण, तत्कालीन मुख्य अभियंता (अतिरिक्त प्रभार) सम्प्रति सेवानिवृत जल विज्ञान एवं योजना आयोजन, पटना के विरूद्ध विभागीय संकल्प संख्या-1490 दिनांक 30.11.2005 द्वारा बिहार सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही को उनके दिनांक 30.06.2009 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया और इसके तहत श्री सत्यनारायण को संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए विभागीय पत्रांक-1174, दिनांक 19.07.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

इसी क्रम में श्रीमती रूकमिणी देवी, पत्नी स्व0 सत्यनारायण से प्राप्त पत्र दिनांक 12.08.2017 में संलग्न स्व0 सत्यनारायण की मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग को उपलब्ध कराया गया। जिसमें स्व0 सत्यनारायण की मृत्यु दिनांक 08.06.2017 मृत्यु स्थान नरकटिया कोठी के हाट थाना-चौक, पूर्णियाँ उल्लेखित है।

सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-8811 दिनांक 18.07.2017 के आलोक में स्वर्गीय सत्यनारायण के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही एवं पूछे गए द्वितीय कारण पृच्छा को संचिकास्त करने का निर्णय सरकार के स्तर पर लिया गया है।

इस प्रकार इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया गया है। उक्त निर्णय पर माननीय मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त निर्णय श्रीमती रूकमिणी देवी, पत्नी-स्व0 सत्यनारायण, तत्कालीन मुख्य अभियंता, (अतिरिक्त प्रभार), जल विज्ञान एवं योजना आयोजन, पटना नरकटिया कोठी, के0 हाट, थाना चौक पूर्णियाँ को संसूचित किया जाता है।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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23 नवम्बर 201723 नवम्बर 201723 नवम्बर 201723 नवम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/2016////2051205120512051—श्री रामस्वरूप रजक, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को विभागीय उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सहोरा और मदरौनी स्थल पर कराये गये क्रेटेड बोल्डर पीचींग कार्य न्यून विशिष्टि कार्य कराकर अधिकाई भुगतान करने, क्रेटेड बोल्डर पीचींग कार्य में उपयोग किये गये जी0आई0 वायर क्रेट के अधिकाई भुगतान करने तथा मदरौनी ग्राम के समीप बाढ़ 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में अध्यक्ष, विशेष जाँच दल द्वारा दिये गये निदेश का अनुपालन विलंब से करने, जिसके कारण एल0डब्लू0एल0 से उपर बदले हुए स्वरूप में कराया गया कार्य क्षतिग्रस्त हो गया के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय ज्ञापांक-1471, दिनांक 22.07.2016 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1543, दिनांक 27.07.2016 द्वारा इनके विरूद्ध अधिरोपित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।17 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 समीक्षोपरांत श्री रामस्वरूप रजक, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को आदेश निर्गत तिथि से निलंबन मुक्त किया जाता है।

श्री रामस्वरूप रजक के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में अधिरोपित दण्ड का आदेश अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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23 नवम्बर 201723 नवम्बर 201723 नवम्बर 201723 नवम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/2016////2052205220522052—श्री विनय कुमार गुप्ता, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को विभागीय उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सहोरा और मदरौनी स्थल पर कराये गये क्रेटेड बोल्डर पीचींग कार्य न्यून विशिष्टि कार्य कराकर अधिकाई भुगतान करने, क्रेटेड बोल्डर पीचींग कार्य में उपयोग किये गये जी0आई0 वायर क्रेट के अधिकाई भुगतान करने तथा मदरौनी ग्राम के समीप बाढ़ 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में अध्यक्ष, विशेष जाँच दल द्वारा दिये गये निदेश का अनुपालन विलंब से करने, जिसके कारण एल0डब्लू0एल0 से उपर बदले हुए स्वरूप में कराया गया कार्य क्षतिग्रस्त हो गया के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय ज्ञापांक-1470, दिनांक 22.07.2016 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1541, दिनांक 27.07.2016 द्वारा इनके विरूद्ध अधिरोपित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

समीक्षोपरांत श्री विनय कुमार गुप्ता, सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को आदेश निर्गत तिथि से निलंबन मुक्त किया जाता है।

श्री गुप्ता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में अधिरोपित दण्ड का आदेश अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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23 नवम्बर 201723 नवम्बर 201723 नवम्बर 201723 नवम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/201622/नि0सि0(पू0)01-07/2016////2053205320532053—श्री अवधेश कुमार झा, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को विभागीय उड़नदस्ता के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सहोरा और मदरौनी स्थल पर कराये गये क्रेटेड बोल्डर पीचींग कार्य न्यून विशिष्टि कार्य कराकर अधिकाई भुगतान करने, क्रेटेड बोल्डर पीचींग कार्य में उपयोग किये गये जी0आई0 वायर क्रेट के अधिकाई भुगतान करने तथा मदरौनी ग्राम के समीप बाढ़ 2016 के पूर्व कराये गये कटाव निरोधक कार्य में अध्यक्ष, विशेष जाँच दल द्वारा दिये गये निदेश का अनुपालन विलंब से करने, जिसके कारण एल0डब्लू0एल0 से उपर बदले हुए स्वरूप में कराया गया कार्य क्षतिग्रस्त हो गया के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में विभागीय ज्ञापांक-1469, दिनांक 22.07.2016 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1542, दिनांक 27.07.2016 द्वारा इनके विरूद्ध अधिरोपित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

समीक्षोपरांत श्री अवधेश कुमार झा, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया को आदेश निर्गत तिथि से निलंबन मुक्त किया जाता है।

श्री झा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में अधिरोपित दण्ड का आदेश अलग से निर्गत किया जायेगा।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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30 नवम्बर 201730 नवम्बर 201730 नवम्बर 201730 नवम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(भाग0)09-07/201022/नि0सि0(भाग0)09-07/201022/नि0सि0(भाग0)09-07/201022/नि0सि0(भाग0)09-07/2010////2103210321032103—श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो (आई0डी0-2539) तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर को वर्ष 2009-10 के उक्त पदस्थापन काल में रूपांकण प्रमंडल सं०-1, भागलपुर द्वारा वर्ष 2009 के बाढ़ अवधि में दिनांक 01.07.09 से 15.09.09 तक कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य को नियमानुसार विभाग के निबंधित संवदेकों से नामांकन के आधार पर नहीं कराकर विभागीय प्रक्रिया के विपरीत विभाग में अनिबंधित संवेदक से कराये जाने के आरोप के लिए प्रथम द्रष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में इनके विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-770, दिनांक 11.07.12 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। उक्त विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत्कालीन मुख्य अभियंता के दिनांक 30.06.13 को सेवानिवृत हो जाने के फलस्वरूप इनके विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक-770, दिनांक 11.07.12 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं०-181 सहपठित ज्ञापांक-1609, दिनांक 31.12.13 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया।18 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी श्री विवेक कुमार सिंह, अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-प्रधान सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-219, दिनांक 16.11.15 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत सरकार के स्तर पर लिये गये निर्णय के आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होकर "विभाग में अनिबंधित संवेदक से बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराये जाने के कार्यपालक अभियंता के प्रस्ताव की अनुशंसा करने, जो विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के प्रतिकूल है" के प्रमाणित आरोप के लिए श्री महतो, तत्कालीन मुख्य अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत से विभागीय पत्रांक-304 दिनांक 18.02.16 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत द्वितीय कारण पृच्छा किया गया।

श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, सेवानिवृत मुख्य अभियंता के पत्रांक-शून्य दिनांक 29.02.16 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर से निम्न तथ्यों को प्रस्तुत किया गया -

(i) नामांकन के आधार पर बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराने के लिए कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता और विभाग ही सक्षम प्राधिकार है। इसमें मुख्य अभियंता की कहीं कोई भूमिका उल्लेखित नहीं है।

(ii) अनिबंधित संवेदक से कराये गये बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के प्रस्ताव की अनुशंसा श्री राजेश कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सिंचाई अंचल, भागलपुर जो दिनांक 21.11.09 को मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के प्रभार में थे, के द्वारा दी गयी थी। साक्ष्य के रूप में मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर के पत्रांक-3790, दिनांक 21.11.09 की छायाप्रति संलग्न की गयी है।

(iii) इनके द्वारा किसी संवेदक की नियुक्ति के बिन्दु पर कोई अनुशंसा नहीं की गयी है क्योंकि इस प्रकार के कार्यों में मुख्य अभियंता की कोई भूमिका नहीं है।

(iv) इस मामले में श्री धनंजय प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, रूपांकण प्रमंडल सं०-1, भागलपुर को इस आधार पर आरोप मुक्त कर दिया गया क्योंकि यह मामला गंभीर प्रकृति का नहीं है और न ही कोई वित्तीय क्षति का मामला है। मात्र विभागीय प्रक्रिया के विपरीत कार्य कराने का आरोप है। अतएव श्री महतो के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही नियमानुसार नहीं चलायी जा सकती।

(v) मामला वित्तीय क्षति और गंभीर प्रकृति का नहीं है। अतएव बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही का संचालन नियम विरूद्ध है। श्री महतो द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में प्रस्तुत किये गये उपर्युक्त तथ्यों की समीक्षा पुनः सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये -

(i) बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य दिनांक 01.07.2009 से 15.09.2009 तक कराये गये। (ii) श्री महतो दिनांक 13.11.09 से 30.11.09 तक उपार्जित अवकाश में थे। (iii) बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य की अवधि, दिनांक 01.07.09 से 15.09.09 तक श्री महतो द्वारा कार्य स्थल का भिजिट (दौरा) किया गया है।

(iv) इस अवधि का पाक्षिक प्रतिवेदन प्रपत्र-24 श्री महतो द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित है। (v) कार्य प्रारंभ के समय या इससे पूर्व अनिबंधित संवेदक से कार्य लेने के लिए कोई प्रस्ताव इनके द्वारा विभाग को नहीं भेजा गया।

(vi) विभाग में निबंधित संवेदक द्वारा कार्य में अभिरूचि नहीं लेने के लिए उनके विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

उपर्युक्त पाये गये तथ्यों के आलोक में श्री महतो का द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं है एवं इनके विरूद्ध गठित आरोप पूर्णतया प्रमाणित पाया गया। फलस्वरूप श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत को उक्त प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना सं०-2412, दिनांक 09.11.16 द्वारा "एक वर्ष के लिए पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती" का दण्ड अधिरोपित किया गया।

उक्त संसूचित दण्ड के आलोक में श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, सेवानिवृत मुख्य अभियंता द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया है। जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गया है -

(1) अनिबंधित संवेदक से कार्य कराने का अधीक्षण अभियंता को कार्यपालक अभियंता का समर्पित प्रस्ताव अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रभारी मुख्य अभियंता के रूप में विभाग को समर्पित किया गया। अनिबंधित संवेदक से कराए गए कार्य का व्यय प्रतिवेदन मुख्य अभियंता के माध्यम से विभाग को भेजा गया।

(2) विभाग द्वारा प्रस्तावित अनिबंधित संवेदक की निबंधन का बिना समीक्षा किए कालांतर में निबंधित कर दिया गया एवं उनके द्वारा कराए गए कार्यों की उड़नदस्ता से जाँच कराकर पूरे मामले को अनुमोदित कर दिया गया। इस प्रकार विभाग पूरी प्रक्रिया से संतुष्ट था। स्पष्टतः इस मामले में घोर कदाचार एवं वित्तीय क्षति का मामला नहीं था। घोर कदाचार या वित्तीय क्षति का मामला नहीं होने की स्थिति में सरकार बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी) के तहत दण्ड अधिरोपित नहीं कर सकती।

श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृत द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन में प्रस्तुत उपुर्यक्त तथ्यों की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरांत यह पाया गया कि श्री महतो ने पुनर्विचार अभ्यावेदन में मुख्यतः उन्हीं तथ्यों की पुनरावृति की है, जिसका उल्लेख इनके द्वितीय कारण पृच्छा के19 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 उत्तर में है। पुनर्विचार अभ्यावेदन में कोई नया विचारणीय तथ्य नहीं दिया गया है। बल्कि पूर्व में ही कही गयी बातो की पुनरावृति की गयी है।

उपुर्यक्त पाए गए तथ्यों के आलोक में श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, सेवानिवृत मुख्य अभियंता द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नहीं है।

अतः सरकार के स्तर पर लिए गए उक्त निर्णय के आलोक में श्री राजेन्द्र प्रसाद महतो, तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर सम्प्रति सेवानिवृति का समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन अस्वीकृत करते हुए विभागीय अधिसूचना सं०-2412, दिनांक 09.11.16 द्वारा पूर्व में अधिरोपित निम्न दण्ड को यथावत रखने का निर्णय लेते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।

"एक वर्ष के लिए पाँच प्रतिशत पेंशन की कटौती।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, राकेश मोहन, संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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15 दिसम्बर 201715 दिसम्बर 201715 दिसम्बर 201715 दिसम्बर 2017

22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2014////2230223022302230—श्री सुरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे॰ 7720), तत्कालीन सहायक सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2014 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2014 22/नि॰सि॰(सिवान)-11-03/2014 अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, डुमरिया के विरूद्ध सल्लेहपुर टंडसपुर छरकी टूटान आदि आरोपों के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1167, दिनांक-26.08.2014 द्वारा निलंबित करते हुए निम्नांकित आरोपों के लिए आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-1761, दिनांक-25.11.2014 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- 1. विभागीय आदेश /निदेश का उल्लंघन करना। 2. सल्लेहपुर टंडसपुर छरकी के रख रखाव एवं बाढ़ से सुरक्षा कार्य में अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करना तथा इस कार्य में लापरवाही बरतना। 3. सरकारी राजस्व का नुकसान करना। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य प्रतिवेदन किया गया जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु पर श्री कुमार से अभ्यावेदन (द्वितीय कारण पृच्छा) की गई एवं उनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के प्रत्युार की समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-422, दिनांक-10.03.2016 द्वारा निलंबन मुक्त करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1728, दिनांक-10.08.2016 द्वारा निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया गया :- (i) देय प्रोन्नति पर तीन वर्षों तक रोक। (ii) एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। दण्ड संसूचन के पश्चात श्री कुमार के निलंबन अवधि (दिनांक-26.08.2014 से दिनांक-09.03.2016) के विनियमन एवं वेतन भाा की अनुमान्यता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के तहत्‌ विभागीय पत्रांक-2223, दिनांक-07.10.2016 द्वारा नोटिस निर्गा किया गया। श्री कुमार द्वारा नोटिस के जवाब में मुख्य रूप से अंकित किया गया है कि संचालन पदाधिकारी ने उनके विरूद्ध आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया है। उसके बावजूद भी विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए उनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा में असहमति के बिन्दुओं को सही ढंग से अभिलेखित नही ंकिया गया, जिसका उल्लेख उन्होंने अपने द्वितीय कारण पृच्छा के उार में सविस्तार किया था। इसके बावजूद भी विभाग द्वारा उनके द्वितीय कारण पृच्छा उार में उठाये गये बिन्दुओं को अनदेखी करते हुए उनके विरूद्ध दण्ड दिया गया, जो नियम विरूद्ध है। संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होने का विभाग के पास कोई आधार नहीं बनता है। इस प्रकार उनका निलंबन पूर्णतः औचित्यहीन था, इसलिए उनके निलंबन अवधि (दिनांक-26़.08.2014 से दिनांक-09.03.2016 तक) को सभी प्रायोजनार्थ र्काव्य अवधि मानते हुए उक्त अवधि को सम्पूर्ण वेतन एवं भाा का भुगतान किया जाय। श्री कुमार द्वारा दिये गये तथ्यों की समीक्षा में पाया गया कि श्री कुमार के विरूद्ध विभागीय निदेश का उल्लंघन करने सल्लेहपुर टंडसपुर छरकी का रख-रखाव एवं बाढ़ से सुरक्षा कार्य में अपने दायित्व का निर्वाह नही करने तथा इस कार्य में लापरवाही बरतने एवं सरकार को आर्थिक क्षति पहुँचाने के आरोप के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध गठित तीनों आरोपों को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया, किन्तु विभागीय समीक्षा में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति व्यक्त करते हुए असहमति के बिन्दुओं पर श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी। श्री कुमार द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उार के समीक्षोपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-1728, दिनांक-10.08.2016 द्वारा (क) देय प्रोन्नति पर तीन वर्षों तक रोक एवं (ख) वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड संसूचित किया गया। विभागीय समीक्षा में पाया गया कि नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण संवेदनशील तटबंध की सतत निगरानी एवं गश्ती करने के मुख्य अभियंता के निदेश की अवहेलना इनके द्वारा की गयी। फलस्वरूप सल्लेहपुर टंडसपुर छरकी के टूटान के कारण सरकारी एवं निजी संपाि को नुकसान पहुँचा। अपने र्काव्य के निर्वहन में चूक के लिए ही इन्हें निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालनोपरांत दंडादेश निर्गत किया गया है। इस प्रकार इनका निलंबन पूर्णतः औचित्यपूर्ण था।20 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में श्री कुमार से प्राप्त जवाब की समीक्षोपरांत इनके निलंबन अवधि दिनांक-26.08.2014 से दिनांक-09.03.2016 तक निम्न रूपेण विनियमित करने का निर्णय लिया गया :- ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन प्रायोजनार्थ ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन प्रायोजनार्थ ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन प्रायोजनार्थ ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन प्रायोजनार्थ र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।'' र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।'' र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।'' र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।'' अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री सुरेन्द्र कुमार (आई0डी0-जे॰ 7720), तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल, डुमरिया की निलंबन अवधि (दिनांक-26.08.2014 से दिनांक-09.03.2016 ) को निम्न रूपेण विनियमित किया जाता है :- ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन प्रायोजनार्थ प्रायोजनार्थ प्रायोजनार्थ प्रायोजनार्थ ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त अन्य कुछ भी देय नहीं होगा तथा यह अवधि पेंशन र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।'' र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।'' र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।'' र्काव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित नहीं की जायेगी।''

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012////2231223122312231—पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, कुनौली के अन्तर्गत दिनांक सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012

06.07.2012 को पश्चिमी कोशी मुख्य नहर (नेपाल भाग) के कि0मी0 11.785 पर दायाँ बाँध में हुए टूटान के पश्चात मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, दरभंगा द्वारा स्थल निरीक्षणोपरांत निरीक्षण प्रतिवेदन पत्रांक-1305, दिनांक-06.07.2012 द्वारा विभाग के समक्ष समर्पित किया गया। निरीक्षण प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत कतिपय अनियमितताओं के लिए श्री सत्येन्द्र नारायण सिंह (आई0डी0-4783), तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, कुनौली को अधिसूचना सं0-755, दिनांक-07.07.2012 द्वारा प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। तत्पश्चात संकल्प सहपठित ज्ञापांक-1186, दिनांक-18.10.2012 द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु पर श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा पत्रांक-1420, दिनांक-23.09.2014 द्वारा किया गया। श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय पत्रांक-965, दिनांक-04.07.2012 में निहित निदेश का उल्लंघन करते हुए नहरों का सघन चौकसी न कर दायित्वों का निर्वहन नहीं करने के कारण टूटान होने तथा टूटान भराई में हुई सरकारी राजस्व की हानि करने का आरोप प्रमाणित होता है। अतः उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री सत्येन्द्र नारायण सिंह (आई0डी0-4783), तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, कुनौली को तत्कालीन प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया :-

1111.... ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड।'' ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड।'' ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड।'' ''एक वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक का दण्ड।'' ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त और कुछ देय नहीं होगा, किन्तु पेंशन प्रायोजनार्थ यह अवधि 2. ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त और कुछ देय नहीं होगा, किन्तु पेंशन प्रायोजनार्थ यह अवधि ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त और कुछ देय नहीं होगा, किन्तु पेंशन प्रायोजनार्थ यह अवधि ''निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त और कुछ देय नहीं होगा, किन्तु पेंशन प्रायोजनार्थ यह अवधि सेवा सेवा सेवा सेवा में टूट नहीं मानी जाएगी।''में टूट नहीं मानी जाएगी।''में टूट नहीं मानी जाएगी।''में टूट नहीं मानी जाएगी।'' सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में उक्त दण्ड श्री सत्येन्द्र नारयण सिंह को विभागीय अधिसूचना सं0-193, दिनांक-21.01.2015 द्वारा संसूचित किया गया। सरकार द्वारा अधिरोपित उक्त दण्ड के विरूद्ध श्री सिंह ने अपने पत्रांक-शुन्य दिनांक-19.03.2015 द्वारा विभाग में पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया। जिसमें श्री सिंह द्वारा निम्न तथ्यों का उल्लेख किया :- (1) उनके विरूद्ध कर्तव्य में लापरवाही बरतने का जो आरोप लगाया गया है, वह निराधार है। नहर के क्षतिग्रस्त भाग की मरम्मति युद्धस्तर पर कराकर नहर में दिनांक-10.07.2012 से पानी का प्रवाह शुरू कर दिया गया। (2) संचालन पदाधिकारी द्वारा भी उनके विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। (3) जब भी सूखा स्थिति उत्पन्न होती है, नेपाल भाग के किसानों द्वारा जबरन गेट को गिराकर पटवन करने का प्रयास किया जाता रहा है एवं विरोध करने पर ग्रामीणों द्वारा गेट संचालक का अपहरण एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों/पदाधिकारियों के साथ दुव्र्यवहार किया जाता रहा है। खरीफ सिंचाई 2010 में इस तरह की कई घटनाँए हुई जिसकी लिखित सूचना उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता को भी दी गयी, किन्तु नेपाल की विधि व्यवस्था ठीक नही होने के कारण इस पर अंकुश नही लगाया गया। (4) नहर को नेपाल के ग्रामीणों द्वारा रात्रि में जबरन काटा गया, जिसकी अविलंब मरम्मति कराकर पानी के प्रवाह को शुरू कर दिया गया। इस आशय की सूचना दैनिक समाचार पत्र प्रभात खबर में भी दिनांक-15.07.2012 को प्रकाशित की गयी थी। उक्त के आलोक में श्री सिंह द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0-193, दिनांक 21.01.2015 द्वारा निर्गत दण्डादेश को रद्‌द करने का आग्रह किया गया। श्री सिंह के पुनर्विचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा :- श्री सिंह के पुनर्विचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा :- श्री सिंह के पुनर्विचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा :- श्री सिंह के पुनर्विचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा :-

21 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

यद्यपि कि संचालन पदाधिकारी ने श्री सिंह के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है, किन्तु संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-965, दिनांक-04.07.2012 मेे निहित निदेश का उल्लंघन करते हुए नहरों का सघन चौकसी न कर दायित्वों का निर्वहन नहीं करने के बिन्दू पर श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गयी। श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उार के समीक्षोपरांत ही इन्हें दण्ड संसूचित किया गया। श्री सिंह द्वारा अपने पूनर्विचार अभ्यावेदन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा रात्रि में सघन गश्ती नहीं की जाती थी। इस प्रकार प्रपत्र 'क' में लगाया गया आरोप प्रमाणित होता है। उक्त के आधार पर श्री सिंह का पुनर्विचार अभ्यावेदन स्वीकार योग्य नही पाया गया। उक्त के आलोक में श्री सत्येन्द्र नारायण सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, कुनौली द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकार करते हुए श्री सिंह के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-193, दिनांक 21.01.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड लागु रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। सरकार का उक्त निर्णय श्री सिंह को संसूचित किया जाता है।

बिहारबिहारबिहारबिहार----राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012////2232223222322232—श्री सुरेश प्रसाद (आई॰डी॰-जे॰ 6467), तत्कालीन सहायक सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012 22/नि॰सि॰(दर॰)-16-05/2012 अभियंता (याँत्रिक), सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वीरपुर द्वारा अपने उक्त पदस्थापन के दौरान अपने र्काव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने एवं विभागीय निदेशों की अवहेलना करने इत्यादि आरोपों के लिए मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, दरभंगा के पत्रांक-1305, दिनांक-06.07.2012 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर अधिसूचना संख्या-754, दिनांक-07.07.2012 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। तत्पश्चात संकल्प सह पठित ज्ञापांक-1187, दिनांक 18.10.2012 द्वारा श्री प्रसाद के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 में विहित रिति से विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। विभागीय कार्यवाही संचालन के क्रम में श्री प्रसाद दिनांक-31.07.2013 को सेवानिवृत हो गये। ततपश्चात मामले के समीक्षोपरांत सरकार द्वारा लिए गये निर्णय के आलोक में श्री प्रसाद को सेवानिवृत की तिथि 31.07.2013 के प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) में अधिसूचना सं0-1045, दिनांक-03.09.2013 द्वारा समपरिवर्तित किया गया। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर की गयी। सम्यक समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के बिन्दु पर श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा पत्रांक-1422, दिनांक 23.09.2014 द्वारा किया गया। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक समीक्षोपरांंत पाया गया कि श्री प्रसाद के विरूद्ध खरीफ सिंचाई 2012 के पूर्व एवं सूचना दिये जाने के बावजूद पश्चिमी कोशी नहर (नेपाल भाग) पर अवस्थिति त्रियक नियामक के गेटों का संचालन एवं उाोलन प्रणाली को ठीक नहीं कराने के कारण नहर टूटान होने तथा सिंचाई कार्य बाधित होने एवं मरम्मति कार्य में सरकारी राशि के क्षति होने का आरोप प्रमाणित हुआ। अतः उक्त प्रमाणित आरोप के लिए श्री सुरेश प्रसाद (आई0डी0-जे॰ 6467), तत्कालीन सहायक अभियंता (याँत्रिक), सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वीरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गयाः- ्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक'' ''पाँच प''पाँच प''पाँच प''पाँच प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक'' ्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक'' ्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक'' सरकार के उक्त निर्णय में सक्षम प्राधिकार एवं आयोग का अनुमोदन/परामर्श प्राप्त किया गया। सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में उक्त दण्ड श्री सुरेश प्रसाद को दिया एवं संसूचित किया गया। सरकार द्वारा अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री प्रसाद ने अपने पत्रांक-शुन्य दिनांक-29.06.2015 द्वारा विभाग में पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया। जिसमें श्री प्रसाद द्वारा निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :- (I) उन्होंने दिनांक-30.06.2012 को अवर प्रमंडल सिंचाई याँत्रिक केन्द्रीय कार्यशाला, वीरपुर का पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के समय कार्यपालक अभियंता, सिंचाई याँत्रिक प्रमंडल, वीरपुर तथा पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के कि0मी0-0.00 से 35.00 कि0मी0 के मूल प्रभारी कनीय अभियंता श्री सुनील कुमार के द्वारा गेटों के संबंध में जानकारी दी गई। (II) गेटों के मरम्मति हेतु संयुक्त निरीक्षण के आधार पर प्राक्कलन तैयार कर उच्च पदाधिकारियों को भेज दिया गया। प्राक्कलन स्वीकृति के बाद अधीक्षण अभियंता द्वारा संवेदक के नाम से दिनांक-06.07.2012 को कार्यादेश निर्गत किया, जो नहर टुटान के बाद की तिथि है। (III) श्री प्रसाद ने अपने पूनर्विचार अभ्यावेदन में इस बात का उल्लेख किया है कि चूँकि संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन में उनके विरूद्ध गठित आरोप को अप्रमाणित पाया है। ऐसी स्थिति में विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) में सम्परिवर्तित करते हुए दण्ड निर्गत करना विधि सम्मत नहीं है। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित पूनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा :- श्री प्रसाद द्वारा समर्पित पूनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा :- श्री प्रसाद द्वारा समर्पित पूनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा :- श्री प्रसाद द्वारा समर्पित पूनर्विचार अभ्यावेदन की समीक्षा :-

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(cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 यह सत्य है कि संचालन पदाधिकारी ने श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप प्रमाणित नही पाया है, किन्तु असहमति के बिन्दूओं को स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हुए श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की माँग की गई एवं इनके प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उार के समीक्षोपरांत अस्वीकार योग्य पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-1358, दिनांक-16.06.2015 द्वारा दण्ड संसूचित किया गया। श्री प्रसाद के पूनर्विचार अभ्यावेदन में ऐसे किसी तथ्य का उल्लेख नहीं है जिसके आधार पर दण्ड में संशोधन किये जाने की कोई आवश्यकता है। श्री प्रसाद द्वारा पूर्व में कही गयी बातों की पुनरावृाि की गयी है। इसलिए श्री प्रसाद के पुनर्विचार याचिका को अस्वीकार करते हुए श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं0-1358, दिनांक-16.06.2015 द्वारा अधिरोपित दण्ड को बरकरार रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। सरकार का उक्त निर्णय श्री प्रसाद को संसूचित किया जाता है।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014////2234223422342234—श्री दिलीप कुमार (आई॰डी॰-4471), तत्कालीन कार्यपालक सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014 अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध महालेखाकार (लेखा परीक्षक), बिहार, पटना के निरीक्षण प्रतिवेदन में विाीय अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2354, दिनांक 13.10.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- (1) प्रमंडलीय रोकड़पाल श्री तेज नारायण सिंह के निम्नलिखित कृत्यों से कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निगरानी एवं सर्तकता नहीं रखने का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया गया :- (i) प्रमंडलीय रोकड़पाल श्री तेज नारायण सिंह द्वारा राजस्व मद, सेवांत लाभ मद एवं चेक में हेराफेरी कर रू 24,07,445/- (चौबीस लाख सात हजार चार सौ पैंतालीस) का गबन करना। (ii) पुनरीक्षित फार्म 51 का फर्जी प्रेषण। (iii) फार्म 51 पासबुक का तैयार एवं प्रमाणित नही होना। (iv) भुगतित राशि के साक्ष्य के बगैर रोकड़बही में रू 67,650/- (सड़सठ छः सौ पचास) का भुगतान दिखलाया जाना। (v) 25,620/- (पचीस हजार छः सौ बीस) को रोकड़बही में नहीं लिया जाना। (vi) कोषागार से पारित विपत्र का भुगतान संबंधित कर्मी को नही होना (राशि रू 38,426/-) (vii) आहरित राशि का नकद रोकड़बही से अलग रखना। श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके विरूद्ध गठित आरोप सं0- II एवं III के प्रमाणित होने तथा आरोप सं0-IV को आंशिक रूप से प्रमाणित एवं अन्य आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत आरोप सं0- II, III एवं IV के संबंध में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए तथा आरोप सं0- I, IV, V एवं VII के संबंध में निम्न तथ्यों के आधार पर मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-918, दिनांक-13.06.2017 द्वारा द्वितीय कारणपृच्छा की गई :- आरोप सं0-01आरोप सं0-01आरोप सं0-01आरोप सं0-01 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा कोषागार से पारित विपत्र की राशि का भुगतान करने तथा निर्धारित शीर्ष में जमा करने की जिम्मेवारी रोकड़पाल की होती है, के आधार पर इस बिन्दु को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है जबकि मुख्य अभियंता के पत्रांक-1722, दिनांक-08.08.2013 एवं कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल का पत्रांक-650, दिनांक-25.11.2014 से स्पष्ट है कि कई विपत्रों के माध्यम से कर्मी के भुगतान हेतु वर्ष 2013-14 में कुल रू 15,25,831/- तथा वर्ष 2012-13 में रू 3,36,249/- तथा राजस्व मद की राशि वर्ष 2012-13 में 4,03,931/- यानि कुल रू 22,66,011/- (बाईस लाख दियासठ हजार ग्यारह) की निकासी कर रोकड़पाल श्री सिंह द्वारा गबन किया जाना परिलक्षित होता है। इतनी बड़ी राशि के गबन हो जाने के बावजूद संचालन पदाधिकारी एवं उनका कहना कि पारित विपत्र का भुगतान करने की जिम्मेदारी मात्र रोकड़पाल की होती है, उचित नही है। यदि कार्यपालक अभियंता सर्तकता बरतते हुए रोकड़बही का सही ढंग से संधारित कराते तो आवश्य ही काफी पूर्व में उक्त अनियमित कृत का उजागर काफी पूर्व में ही हो जाता। उक्त आलोक में सतत्‌ निगरानी एवं सर्तकता नही बरतने के लिए दोषी माना गया। आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा विपत्र पारित होने के बाद भुगतान अधिकृत पदाधिकारी एवं कर्मचारी को करने की मूल जिम्मेवारी प्रमंडलीय रोकड़पाल की होती है, के आधार पर इस आरोप को अप्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। मार्च 2013 में कुल चार विपत्रों की राशि को बैंक से कार्यपालक अभियंता से स्वीकृति प्राप्त कर रोकड़पाल द्वारा निकासी की गयी एवं वेतन भरपाई पंजी में भुगतान प्राप्तर्काा का हस्ताक्षर कराये बिना ही रोकड़बही में राशि को भुगतित दिखलाकर गबन कर लिया गया। उल्लेखनीय है कि लोकलेखा संहिता के अनुसार कार्यपालक अभियंता को प्रत्येक माह के अन्त में पारित विपत्र एवं भुगतान पंजी से मिलान करते हुए रोकड़वही को बन्द किया जाना है ऐसे भी चूँकि नकद निकासी की स्वीकृति कार्यपालक अभियंता द्वारा दी गयी थी तो उनका दायित्व था कि निकासी की गई नकद राशि का भुगतान अधिकृत व्यक्ति को हुआ अथवा नही कि जानकारी लेना चाहिए था जो उनके द्वारा नहीं किया गया। अतएव उनका कथन23 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 की पारित कर भुगतान करने की मूल जिम्मेवारी रोकड़पाल की होती है, को स्वीकार योग्य नही मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रपत्र 'क' के साथ संलग्न साक्ष्य में उक्त राशि का कहीं भी उल्लेख नही है एवं इस घटना के लिए मुख्य रूप से रोकड़पाल श्री सिंह जिम्मेवार है के आलोक में अप्रमाणित माना गया है परन्तु महालेखाकार के निरीक्षण प्रतिवेदन में 73/E/12-13 के सम्मुख स्पष्ट रूप से अंकित है कि इस विपत्र से संबंधित राशि कोषागार से पारित होकर पदेन खाता में पाया गया लेकिन रोकड़वही में दर्ज नही हुआ एवं इसका भुगतान संबंधित कर्मी को नही हुआ जिसकी राशि अंकित टेबुल के क्रमांक-2 के अनुसार 6,627/- रूपये है। इस निरीक्षण प्रतिवेदन की प्रति संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया गया है, अतएव संचालन पदाधिकारी के द्वारा कहा जाना कि प्रपत्र 'क' में साथ इस आरोप से संदर्भित साक्ष्य नही है, को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-07आरोप सं0-07आरोप सं0-07आरोप सं0-07 :- संचालन पदाधिकारी ने रोकड़वही का संधारण रोकड़वही के द्वारा किया जाता है अतः इसकी पूर्ण जिम्मेवारी रोकड़पाल की होती है, के आधार पर आरोप प्रमाणित नही होने का मंतव्य दिया गया। महालेखाकार के निरीक्षण प्रतिवेदन की कंडिका-4(III) से स्पष्ट है कि रोकड़पाल द्वारा पारित विपत्र की राशि को रोकड़वही में प्राप्ति पक्ष में लेने में एक से छः माह का विलम्ब किया गया है जिसके कारण प्रत्येक महिने में लगभग 5 लाख से 18.15 लाख हमेशा विगत तीन वर्षों में रोकड़वही से बाहर रहें है यानि इस राशि का दुर्विनियोग हुआ है प्रत्येक माह के अन्त में प्रमाणक से मिलान करते हुए रोकड़वही बन्द किये जाने का प्रवधान है। ऐसी स्थिति में पारित विपत्र की राशि को बिना रोकड़वही में लिए ही रोकड़वही बन्द किये जाने की कार्रवाई की गयी है जो नियमानुकूल नहीं है। उक्त आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया। श्री कुमार से प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा बचाव बयान के प्रारंभिक भाग में PWD Code के अनुसार Duties of Officers यथा अधीक्षण अभियंता, प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी के कर्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा गया कि न तो अधीक्षण अभियंता एवं न ही लेखा पदाधिकारी द्वारा प्रमंडल में व्याप्त अनियमितताओं के सन्दर्भ में कोई उद्‌घोषणा की गयी न ही कभी इस तरफ ध्यान आकृष्ट कराया गया एवं विभाग द्वारा कार्यपालक अभियंता को अधीनस्थ कर्मचारी के द्वारा Criminal Misconduct करने में उारदायी मान लिया गया है। श्री कुमार द्वारा आरोपवार द्वितीय कारणपृच्छा में दिये गये तथ्यों की स्थिति निम्नवत है :- आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05 :- इस आरोप के संबध में श्री कुमार द्वारा कहा गया कि यह राशि वर्ष 2010 से पदस्थापित सभी कार्यपालक अभियंताओं के कार्यपालक अभियंताओं के कार्यकाल का है। मुख्य अभियंता के पत्रांक-1722, दिनांक-08.08.2013 एवं कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-650, दिनांक-25.11.2014 से स्पष्ट है कि श्री कुमार के पदस्थापन अवधि जून 2012 से जुलाई 2013 के बीच वर्ष 2013-14 में कर्मी के भुगतान मद में कुल रू 15,25,831/- तथा वर्ष 2012-13 मे रू 3,36,249/- तथा वर्ष 2012-13 में राजस्व मद मे कुल रू 4,03,931/- रूपये यानि कुल 22,66,011/-(बाईस लाख छियासठ हजार ग्यारह) की निकासी कर रोकड़पाल द्वारा गबन किया जाना परिलक्षित होता है। आरोपी द्वारा यह भी कहा गया कि प्रमंडलीय लेखापाल द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नही करते हुए लेखा संबंधी मामले में कोई सूचना एवं सहयोग प्राप्त नही किया गया। जबकि PWD Code के अनुसार कार्यपालक अभियंता को भी अपनी जवाबदेही है कि प्रमंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर निगरानी होना परिलक्षित हुआ। हालाकि इनके द्वारा अपने पदस्थापन के अंतिम समय दिनांक-13.07.2013 को श्री तेज नारायण सिंह, तत्कालीन रोकड़पाल पर प्राथमिकी दर्ज की गयी। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री कुमार के द्वारा भी रोकड़पाल पर सत्‌त निगरानी नही रखी गयी, न ही सर्तकत बरती गयी, फलतः एक बड़ी राशि का गबन होना परिलक्षित हुआ। आरोप सं0-02आरोप सं0-02आरोप सं0-02आरोप सं0-02 :- इस आरोप के सन्दर्भ में आरोपी श्री कुमार द्वारा कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नही दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा साक्ष्य के आभाव में श्री कुमार का कथन की उक्त फर्जी फार्म-51 पर उनका हस्ताक्षर नही को स्वीकार योग्य नही मानते हुए इस बिन्दु को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया जिससे विभाग द्वारा सहमत हुआ गया। आरोप सं0-0आरोप सं0-0आरोप सं0-0आरोप सं0-03333 :- इस आरोप के संदर्भ में आरोपी श्री कुमार द्वारा कोई नया तथ्य नही दिया गया है। मात्र प्रमंडल के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के र्काव्यों के निर्वहन में विश्वास होने की बात कही गयी है जिसे स्वीकार नही किया गया क्योंकि कार्यपालक अभियंता का दायित्व है कि प्रत्येक माह का आय-व्यय का लेखा (प्रपत्र-51) के जाँचोपरांत कोषागार से सत्यापन कराना है। उक्त आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04 :- आरोपी द्वारा इस आरोप के सन्दर्भ में वही तथ्य दिया गया कि भुगतान का दायित्व रोकड़पाल एवं लेखापाल की होती है, को स्वीकार योग्य नही माना गया क्योंकि हर माह आय-व्यय के जाँचोपरांत रोकड़वही की बन्दी कार्यपालक अभियंता द्वारा की जाती रही है। आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05 :- इस सन्दर्भ में श्री कुमार द्वारा कहा गया कि आरोप में रू 25,620/- (पचीस हजार छः सौ बीस) का राशि रोकड़बही में नही लिये जाने का है। आरोप में रू 6,627/- (छः हजार छः सौ सााइस) का उल्लेख नही था। महालेखाकार के निरीक्षण प्रतिवेदन में 73/E/12-13 के सम्मुख स्पष्ट रूप से अंकित है कि इस विपत्र से संबंधित राशि कोषागार से पारित होकर पदेन खाता में पाया गया लेकिन रोकड़वही में दर्ज नही हुआ एवं इसका भुगतान संबंधित24 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 कर्मी को नही हुआ जिसकी राशि महालेखाकार निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित टेबुल के क्रमांक-2 के अनुसार 6,627/- रूपये है। इस निरीक्षण प्रतिवेदन की प्रति संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया गया है, अतएव संचालन पदाधिकारी के द्वारा कहा जाना कि प्रपत्र 'क' में साथ इस आरोप से संदर्भित साक्ष्य नही है, को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-06आरोप सं0-06आरोप सं0-06आरोप सं0-06 :- आरोपी श्री कुमार द्वारा इस आरोप के सन्दर्भ में वही तथ्य दिया गया जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को दिया गया। संचालन पदाधिकारी ने पारित विपत्र का भुगतान संबंधित व्यक्ति को करने का दायित्व प्रमंडलीय रोकड़पाल की होती है, परन्तु कार्यपालक अभियंता के रूप में इनका दायित्व था कि संबंधित कर्मी का भुगतान हुआ या नही से संबंधित जानकारी प्राप्त करते हुए कार्रवाई करते परन्तु ऐसा नही किया गया के आलोक में इस आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया जिससे सहमत होते हुए आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-07आरोप सं0-07आरोप सं0-07आरोप सं0-07 :- आरोपी द्वारा कहा गया है कि यह आरोप वर्ष 2010 से पदस्थापित सभी कार्यपालक अभियंता से संबंधित है जबकि उनके द्वारा कार्यकाल में तत्कालीन रोकड़पाल श्री तेज नारायण सिंह के कृत्यों को उजागर करते हुए FIR दर्ज किया गया। विदित हो कि प्रत्येक माह के अन्त में प्रमाणक से मिलान करते हुए रोकड़बही कार्यपालक अभियंता द्वारा बन्द किया जाना होता है, जबकि महालेखाकार के प्रतिवेदन कंडिका-4 (III) के अनुसार प्रत्येक माह में पारित विपत्र की राशि को रोकड़बही से अलग रखा गया है। उक्त तथ्यों के आलोक में श्री कुमार का बचाव बयान स्वीकार योग्य नही माना गया। मामले की सम्यक समीक्षोपरांत श्री दिलीप कुमार (आई0डी0-4471), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता के द्वितीय कारणपृच्छा उार को अस्वीकार योग्य मानते हुए आरोप के सभी बिन्दुओ यथा (I) से (VII) तक में उद्धित तत्कालीन रोकड़पाल श्री तेज नारायण सिंह के अनियमित कृत्यों एवं सरकारी राशि के गबन होने पर निगरानी एवं सर्तकता नही बरतने के लिए दोषी मानते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :- ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति'' अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री दिलीप कुमार (आई0डी0-4471), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर संप्रति कार्यपालक अभियंता, पुनपुन बराज प्रमंडल-01, गोह, औरंगाबाद के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है :- ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति''

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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15 दिसम्बर 201715 दिसम्बर 201715 दिसम्बर 201715 दिसम्बर 2017

22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014////2235223522352235—श्री रंजन प्रसाद समैयार (आई॰डी॰-3223), तत्कालीन सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014 22/नि॰सि॰(मोति॰)-08-01/2014 कार्यपालक अभियंता, शीर्ष कार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध महालेखाकार (लेखा परीक्षक), बिहार, पटना के निरीक्षण प्रतिवेदन में विाीय अनियमितता संबंधी निम्नांकित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2353, दिनांक-13.10.2015 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई :- (1) प्रमंडलीय रोकड़पाल श्री तेज नारायण सिंह के निम्नलिखित कृत्यों से कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध निगरानी एवं सर्तकता नहीं रखने का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये :- (i) प्रमंडलीय रोकड़पाल श्री तेज नारायण सिंह द्वारा राजस्व मद का रू 267527/- (दो लाख सरसठ हजार पाँच सौ सााइस) का गबन करना। (ii) पुनरीक्षित फार्म 51 का फर्जी प्रेषण। (iii) फार्म 51 पासबुक का तैयार एवं प्रमाणित नही होना। (iv) कर्मचारियों का रू 1,68,000/- (एक लाख अड़सठ हजार) का भुगतान लंबित रखना। (v) फरवरी 2012 से मई 2012 तक बगैर दायित्व का राशि रू 14,22,611/- (चौदह लाख बाइस हजार छः सौ ग्यारह) का भुगतान दिखलाया जाना। (vi) आहरित राशि का नकद रोकड़बही से अलग रखना। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री समैयार के विरूद्ध गठित आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-917, दिनांक-13.06.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से निम्न तथ्यों के आधार पर असहमत होते हुए द्वितीय कारणपृच्छा की गई :- आरोप सं0-03आरोप सं0-03आरोप सं0-03आरोप सं0-03 ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा कार्यपालक अभियंता के फर्जी हस्ताक्षर कर रोकड़पाल द्वारा जानबुझकर जमा राशि का गबन का षड़यंत्र रचा गया था। कोषागार से पुनरीक्षित प्रपत्र-51 प्राप्त होने पर इसका मिलान किया जाता है परन्तु उनके पदस्थापन काल में सत्यापित फार्म-51 उपलब्ध नही हो सका फलतः मिलान नहीं हो सका, के आलोक में इस आरोप को प्रमाणित नही माना गया।25 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-1(छः) से स्पष्ट है कि यह आरोप वस्तुतः पुनरीक्षित प्रपत्र-51 तैयार नही करने एवं कोषागार से सत्यापित नही करने से संबंधित है। जाँच प्रतिवेदन में कहा गया है कि यदि फार्म-51 पासबुक तैयार कर संधारित एवं सत्यापित किया जाता तो रोकड़पाल द्वारा गबन करने की स्थिति नही बनती। उनके द्वारा आरोप की कंडिका-II में स्वीकार किया गया है कि उनके पदस्थापन काल में कोई फार्म-51 का प्रेषण नहीं किया गया है तथा आरोप के बिन्दु (II) में कहा गया है कि तीन माह के अल्प अवधि में द्धैत प्रभार में रहने तथा अतिव्यस्तता के कारण नियमित रूप से प्रपत्र-51 का न तो प्रेषण हो पाया, न ही सत्यापन हो सका, को स्वीकार योग्य नही माना जा सकता क्योकि कार्यपालक अभियंता के दायित्वों में से एक दायित्व नियमित रूप से किये गये व्यय एवं राजस्व मद में जमा की गयी राशि को फार्म-51 के माध्यम से कोषागार से सत्यापित कराना भी है, जो उनके द्वारा नही किया गया, फलतः रोकड़पाल को गबन करने का मौका मिल गया। उक्त आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होत हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04 ः- संचालन पदाधिकारी द्वारा विपत्र पारित होने के पश्चात भुगतान करने की मूल जिम्मेवारी रोकड़पाल की होती है, के आधार पर आरोप प्रमाणित नही होने का मंतव्य दिया गया। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-4(I) में की गयी टिप्पणी से स्पष्ट है कि उनके कार्यकाल (फरवरी 2012 से मई 2012) में 1.68 लाख रूपये का भुगतान लंबित था। इसका तात्पर्य है कि रोकड़पाल द्वारा इस अवधि में अधिक यात्रा में कार्यपालक अभियंता से बैंक से निगरानी की स्वीकृति प्राप्त कर DDO के चेक के माध्यम से नकद राशि प्राप्त कर ली जाती थी एवं उसका भुगतान नही किया जाता था। ऐसी स्थिति में आरोपी का कहना कि इनके कार्यकाल में कोई भुगतान लंबित नहीं था, को स्वीकार योग्य नही माना जा सकता। साथ ही संचालन पदाधिकारी का मंतव्य की पारित विपत्र का भुगतान करने का दायित्व रोकड़पाल की होती है, को स्वीकार योग्य नही माना जा सकता क्योकि प्रमंडल में किसी तरह के हो रहे अनियमितता पर निगरानी रखना भी कार्यपालक अभियंता का दायित्व होता है। उक्त आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए इस आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रपत्र-'क' के साथ संलग्न साक्ष्य में उक्त राशि उल्लेख नहीं होंने, तथा मुख्य अभियंता द्वारा इस घटनाक्रम में मुख्य रूप से श्री तेजनारायण सिंह, तत्कालीन रोकड़पाल को जिम्मेदार मानने के आलोक में आरोप को प्रमाणित नही होने का मंतव्य दिया गया है। जाँच प्रतिवेदन की कंडिका-4(II) बगैर दायित्व के भुगतान किये जाने से संबंधित है, जिसमें फरवरी 2012 से मई 2012 के बीच बगैर दायित्व के कुल 14,22,611/- रूपये का भुगतान किये जाने का उल्लेख है। यह भी अंकित किया गया है कि रोकड़बही के संधारण में प्रत्येक माह के अंतशेष जो विवरणी होता है, वही अगले माह के दायित्व का रूप लेता है यदि बगैर दायित्व दर्शाए हुए किसी विपत्र का भुगतान किया जाता है तो यह स्पष्ट है कि उतनी राशि पूर्व से रोकड़वही में नही थी। दुसरे विपत्र की राशि जो चालू माह में प्राप्त की गयी उससे भुगतान कर दिया गया इसका हश्र हुआ कि दिनांक 31.05.2012 को दायित्व 14,22,611/- रूपये के विरूद्ध बैंक में 2,11,597/- रूपये ही बच गये। यदि कार्यपालक अभियंता रोकड़वही को ससमय सही ढंग से जाँच की जाती तो इस गबन का उजागर उनके कार्यकाल में हो जाता परन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं कर अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जाना माना जा सकता है तथा रोकड़पाल को उक्त अनियमितता करने का मौका भी मिल गया। उक्त आलोक में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप को प्रमाणित माना गया। आरोप सं0-06आरोप सं0-06आरोप सं0-06आरोप सं0-06 :- संचालन पदाधिकारी द्वारा यह मामला मार्च, 2013 का होने तथा आपके द्वारा दिनांक 01.06.2012 को प्रभार सौंपने के आलोक में इस आरोप को निराधार बताया गया है। जाँच प्रतिवेदन के कंडिका-4(III) जो आहरित राशि का नगद रोकड़वही से अलग रहने से संबंधित है, में कहा गया है कि कोषागार अनुसूची से रोकड़वही के प्राप्ति पक्ष के मिलान करने पर पाया गया कि रोकड़पाल द्वारा पारित विपत्र के राशि को रोकड़वही के प्राप्ति पक्ष में एक से छः महीने विलम्ब से अंकित किया गया है इससे स्पष्ट है कि राशि तो पारित होकर DDO के पदेन खाता में है लेकिन रोकड़वही में नही लिया गया। इस प्रकार की अनियमितता प्रत्येक महिने लगभग 5.0 लाख से 18.15 लाख रूपये हमेशा विगत तीन वर्षों में रोकड़वही से बाहर रहे, यानि इस राशि का पुर्विनियोग होना माना गया है। उक्त के आलोक में उनका कथन एवं संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि यह मामला मार्च 2013 का है, को स्वीकार योग्य नही माना गया एवं इस आरोप को संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए प्रमाणित माना गया। उक्त आलोक में श्री समैयार से प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा बचाव बयान के मुख्य अंश निम्नलिखित है :- आरोप सं0-03आरोप सं0-03आरोप सं0-03आरोप सं0-03 :- श्री समैयार द्वारा लोक निर्माण लेखा संहित की कंडिका-528, 542, 529, TCR form 162 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि Submission of monthly Account of AG का हस्ताक्षर से उल्लेख है जिसमें Consolidated Treasary receipt and issue को Teasury पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षर करने का प्रावधान है। CTI के तैयार करने में प्रमंडलीय संबंधित लेखा लिपिक एवं प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी, कोषागार पदाधिकारी की अपनी-अपनी जिम्मेवारी निर्धारित है। Revised Form-51 की सारी जवाबदेही कार्यपालक अभियंता की नही होती है। आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04आरोप सं0-04 :- किसी माह के अवशेष की राशि अगले माह में दायित्व बन जाता है। यह मामला रोकड़पाल द्वारा राशि गबन से संबंधित है। अतः इसमें द्वितीय कारणपृच्छा का कोई औचित्य नही है।26 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05आरोप सं0-05 :- कर्मचारियों का रू 14,22,611/- (चौदह लाख बाईस हजार छः सौ ग्यारह) का भुगतान अल्प कार्यावधि दिनांक-27.02.2012 से 01.06.2012 में लंबित नही था। विपत्र पारित होने के बाद भुगतान अधिकृत पदाधिकारी एवं कर्मचारी को करने का मूल दायित्व रोकड़पाल का है जिसका निर्वाहन नही करने के लिए रोकड़पाल को दोषी माना गया है। आरोप सं0-06आरोप सं0-06आरोप सं0-06आरोप सं0-06 ः- आहरित राशि का नकद रोकड़बही से अलग रखने का मामला मार्च-2013 का है। फलतः संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप को प्रमाणित नही माना गया है जिससे असहमत होने का कोई औचित्य नही है। श्री समैयार से प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत यह पाया गया कि उनके विरूद्ध संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप के बिन्दुओ में से (III), (IV), (V) एवं (VI) प्रमाणित होने की स्थिति में इन चारो बिन्दुओं पर द्वितीय कारणपृच्छा की माँग की गयी। उनसे प्राप्त द्वितीय कारणपृच्छा बचाव बयान में आरोप के बिन्दु (III), (IV), (V) एवं (VI) के संदर्भ में वही तथ्य उद्धित किया गया जो उनके द्वारा संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया गया। कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य द्वितीय कारणपृच्छा में नही दिया गया। उक्त आलोक में श्री समैयार के द्वितीय कारणपृच्छा को अस्वीकार योग्य मानते हुए तत्कालीन प्रमंडलीय रोकड़पाल श्री तेज नारायण सिंह के द्वारा अनियमित ढंग से गबन की गयी राशि पर सतत निगरानी एवं सर्तकता नही बरतने के लिए आरोप के बिन्दु (III), (IV), (V) एवं (VI) को प्रमाणित माना गया। मामले की सम्यक समीक्षोपरांत श्री रंजन प्रसाद समैयार (आई0डी0-3223), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्षकार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के द्वितीय कारणपृच्छा को अस्वीकार योग्य मानते हुए आरोप के बिन्दु (III), (IV), (V) एवं (VI) यथा ससमय फार्म-51 तैयार कराकर सत्यापन नही करना, रू 1,68,000/- (एक लाख अड़सठ हजार) के पारित विपत्र का भुगतान लंबित रखने, फरवरी 2012 से मई 2012 के बीच बगैर दायित्वों के कुल 14,22,611/- (चौदह लाख बाईस हजार छः सौ ग्यारह) का विपत्र पारित कराकर भुगतान दिखलाने एवं आहरित राशि को रोकड़बही से अलग रखने के रोकड़पाल के इन कुकृत्यों एवं सरकारी राशि के गबन करने पर निगरानी एवं सर्तकता नही बरतने के लिए दोषी मानते हुए अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री समैयार के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है :- ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।'' अनुशासनिक प्राधिकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री रंजन प्रसाद समैयार (आई0डी0-3223), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, शीर्षकार्य प्रमंडल, वाल्मीकिनगर के विरूद्ध निम्न दण्ड अधिरोपित करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता हैः- ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।'' ''कालमान वेतन में 3 (तीन) वेतन प्रक्रम पर दो वर्षों के लिए अवनति।''

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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21 दिसम्बर 201721 दिसम्बर 201721 दिसम्बर 201721 दिसम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-07/201622/नि0सि0(मुज0)06-07/201622/नि0सि0(मुज0)06-07/201622/नि0सि0(मुज0)06-07/2016////2287228722872287—श्री प्रभु नारायण पाण्डेय (आई0डी0-5255) तत्कालीन सहायक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल मोतिहारी को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष 2016 में बगहा शहर के नजदीक रतनमाला एवं पुअर हाउस में कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी राशि की क्षति के लिए विभागीय ज्ञापांक सं०-1527 दिनांक 27.07.2016 द्वारा श्री पाण्डेय को निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय ज्ञापांक सं०-1586 दिनांक 29.07.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 में विहित रीति से प्रपत्र-'क' में उल्लेखित निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। (1)(1)(1)(1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 2.0.1 एवं 5.0.0 (1) के क्रम में प्रश्नगत कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन के मद सं०-4 एवं 5 (बोल्डर क्रेटिंग एवं बोल्डर पीचींग कार्य) में बोल्डर ढुलाई मद में Loading एवं Unloading के लिए रूपये 145.04 प्रति घनमीटर तथा Stacking कार्य में रूपये 39.73 प्रति घनमीटर का अधिक दर स्वीकृत होने के कारण क्रमशः 7691833/- एवं 2106990/- अर्थात कुल रू0 97,98,824/- का अधिकाई भुगतान होना संभावित प्रतीत होता है। उक्त प्राक्कलन का गठन प्रस्ताव का सर्मपण एवं अनियमित भुगतान में आपकी संलिप्तता रही है।

(2)(2)(2)(2) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 2.0.2 एवं 5.0.0 के उप कंडिका-3 से स्पष्ट है कि प्रश्नगत कार्य में जंगल सफाई कार्य का प्राक्कलन में प्रावधानित मात्रा 23250 वर्ग मी0 का हूबहू मापपुस्त में अंकित कर भुगतान करने की कार्रवाई की गई है। जबकि स्थल पर प्रावधानित लंबाई 1550 मीटर के विरूद्ध 1490 मीटर पाया गया। इस प्रकार जंगल सफाई मद में अधिकाई भुगतान करने के लिये आप दोषी है।

(3)(3)(3)(3) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.0.1 एवं 5.0.0(3) के समीक्षा में पाया गया कि एप्रोन लेईंग का Alignment बिना सक्षम प्राधिकार के स्वीकृत प्राप्त किये ही नदी के किनारे से 2.8मी0 से 6.25मी0 Back Shift कर गलत alignment पर कार्य कराया गया। जिसके कारण ग्रामीणों का आवासीय एवं उपजाऊ भूमि बर्बाद होने के साथ-साथ सरकार के भूमि अधिग्रहण मद एवं फसल मुआवजा मद तथा मिट्‌टी कटाई मद में सरकारी राशि का अपव्यय होना परिलक्षित है। यदि apron laying को बिना back shift किये हुए कार्य कराया जाता तो उपरोक्त अपव्यय को बचाया जा सकता है। परन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया।

(4) (4) (4) (4) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.03 से स्पष्ट है कि प्रश्नगत कार्य प्राक्कलन के प्रावधानित के विरूद्ध LWL 80.96 से 0.16मी0 से 0.95मी0 उपर तक कार्य प्रारंभ कराया गया है जिसके कारण एप्रोन सिंक करने की संभावना से27 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 इंकार नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में इस योजना पर किया गया व्यय अनुपयोगी होने की प्रबल संभावना बनती है। इस प्रकार न्यूनतम जलस्तर से उपर एप्रोन का कार्य कराया गया।

(5)(5)(5)(5) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 3.0.4 से स्पष्ट है कि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा स्थलीय जाँच में Boulder Crating कार्य में 20.25 तथा Uncrated Boulder Pitching कार्य में 21.43 प्रतिशत voids पाया गया है, जो निर्धारित मानक 20 प्रतिशत से अधिक है। फलतः अनियमित भुगतान होना परिलक्षित होता है। अतएव न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किया गया।

(6) (6) (6) (6) जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.0.1 से स्पष्ट है कि स्थलीय जाँच में एकरारनामा में प्रावधानित विशिष्टि के विरूद्ध Boulder Crating कार्य में Oversize Boulder 39.95% एवं Under Size Boulder 48.22% पाया गया उसी प्रकार पैनल में Uncrated Boulder Pitching कार्य में Over Size Boulder 49.37% तथा Under size boulder 30.22% पाया गया। इससे परिलक्षित है कि विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया परन्तु भुगतान प्रावधान के अनुरूप करने के फलस्वरूप अधिकाई भुगतान होना स्पष्ट रूप से परिलक्षित है।

(7)(7)(7)(7) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 4.0.2 से स्पष्ट है कि उड़नदस्ता के स्थलीय जाँच में स्वीकृत प्राक्कलन/एकरारनामा में प्रावधानित G.I. Binding Wire का व्यवहार क्रेट बांधने में नहीं किया गया है। फलतः B.A Wire Crate के साईज सिंक कर छोटा हो गया है। अतएव बिना G.I. Binding wire के उपयोग किये ही निम्न विशिष्टि के कार्य कराने के बावजूद भुगतान एकरारित दर से करने के कारण इस मद में अधिकाई भुगतान परिलक्षित है। (8) (8) (8) (8) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 4.0.3 से स्पष्ट है कि स्थलीय जाँच में Boulder Crating एवं Boulder Pitching कार्य में एकरारनामा तथा GOI, CWC द्वारा प्रकाशित Hand Book के पारा 5.3.4 के विपरीत भरे हुए बोल्डर तथा कम मोटाई के समतल (Flat) Boulder का उपयोग कर न्यून विशिष्टि का बोल्डर कार्य उपयोग कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराया गया है एवं भुगतान प्रावधान के अनुरूप होने के फलस्वरूप अधिकाई भुगतान होना परिलक्षित है। (9) (9) (9) (9) जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.0.4 एवं 5.0.0 के उप कंडिका 10 से बोध होता है कि एप्रोन एवं स्लोप के मिलन बिन्दु पर 1 फीट का गैप रह गया है, जिसके कारण अभी से ही बिना कटाव के ही स्लोप पिचींग फिसल रहा है एवं कुछ भाग के स्लोप पीचींग क्षतिग्रस्त भी हो गया है। जिसके कारण सरकार को एक बड़ी राशि का अपव्यय होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। अतएव इस प्रकार के अनियमित कार्य कराकर सरकारी राशि की अपव्यय की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी के क्रम में ही श्री पाण्डेय के दिनांक 31.01.2017 को सेवानिवृत होने के कारण श्री पाण्डेय के विरूद्ध पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय पत्रांक-475, दिनांक 06.04.17 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43(बी0) में सम्परिवर्तित किया गया।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता के विरूद्ध आरोप सं०-03, 04, 05, 06, 07, 08 एवं 09 को पूर्णतः प्रमाणित एवं आरोप सं०-02 को अप्रमाणित तथा आरोप सं०-1 में 76,91,833/- (छिहत्तर लाख इकानवे हजार आठ सौ तैतीस) रूपये के अधिकाई भुगतान को प्रमाणित पाया है। इसी आरोप में रू0 21,06,990/- रूपये के अधिकाई भुगतान को अप्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई । समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति श्री पाण्डेय को विभागीय पत्रांक-495, दिनांक 10.04.2017 द्वारा उपलब्ध कराते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

उक्त के आलोक में श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0 दिनांक 19.05.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बाते कही गई हैं :-

आरोप सं०-1- आरोप सं०-1- आरोप सं०-1- आरोप सं०-1- 69,22,650/- रूपये की अनियमित भुगतान संबंधी आरोप को प्रमाणित पाये जाने हेतु संचालन पदाधिकारी कई तथ्यों का उल्लेख किया गया है जो निम्नवत है :-

(क) प्राक्कलन में 2 times loading or unloading के लिये 2x143.60 का प्रावधान किया जाना जो Font end loader से Loading & Unloading by tripper का है। उसमें मैनुअल लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान नहीं रहने के कारण मेरा बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं माना गया है। जबकि मैनुअल लोडिंग एवं अनलोंिडंग किया गया है।

(ख) मेरे द्वारा पूरक बचाव बयान में मिर्जापुर एवं बेतिया स्टेशन पर मात्र Manual Means से लोडिंग एवं अनलोडिंग करने के प्रावधान के साथ दर विशलेषण एवं तुलनात्मक विवरणी के माध्यम से सं० 16,07,736/-राशि की बचत को मात्र इस आधार पर सही नहीं माना गया कि गणना सही प्रतीत नहीं होता है।

(ग) उड़नदस्ता संगठन द्वारा मात्र एक ही बार लोडिंग एवं अनलोडिंग को सही बताया जाना। (घ) अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना द्वारा मंतव्य दिया जाना कि ऐसा प्रतीत होता है कि उक्त प्राक्कलन में बोल्डर की ढुलाई में Originating Station एवं Destination Station का क्रमशः मात्र एक ही लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान होना चाहिये।

आरोप को मात्र संभावना के आधार पर प्रमाणित मान लिया गया है। पूर्व के बचाव बयान के कंडिका 1.1.1 (क) को अस्वीकार योग्य माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। रेलवे द्वारा माल ढुलाई हेतु रैंक में 59 बोगी को Standard पाया गया है। प्रति बोगी की क्षमता अधिकतम 66 टन रहने पर एक रैक में 59x66=3894 टन बोल्डर ढुलाई की जा सकती है। इस हिसाब से उक्त स्थल पर कार्य हेतु बोल्डर 106276 टन की ढुलाई हेतु 106276/3894=27 रैक की आवश्यकता28 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 होती। प्रति रैक 3894 टन बोल्डर [3894x0.499=1943.106M3]की ढुलाई की जा सकती है। 1943.106M2 को सीधे क्वेरी साईट से 74कि0मी0 दूरी पर स्थित मिर्जापुर रेलवे रैक प्वाईंट पर लाकर 9 घंटे के अन्दर बोगी में लोड करना एवं इसको बेतिया स्टेशन पर पहुँचाने के पश्चात रैक प्वाईंट पर अनलोड कर पुनः 9 घंटे के अन्दर रैक प्वाईंट खाली कर 68कि0मी0 स्थित कार्य स्थल पर पहुँचाना कतई संभव नहीं है। इस स्थिति में निश्चित रूप से यह दण्डात्मक शुल्क का मामला बनता है।

रेलवे द्वारा सामग्री रेल यार्ड में संग्रहन के बाद ही रैक दिया जाता है। पुनः रैक लगने के बाद वहाँ Font end leader से टिपर में लोड करने के पश्चात उसे रैक प्वांइट पर अनलोड कर मैनुअली बोगी में डाला जाना था। उसी प्रकार बेतिया में मैनुअली बोगी से अनलोड कर Front end Loader से पुनः टिपर में डाल कर रैक प्वाईंट को निर्धारित समय में खाली कराना आवश्यक था। उक्त कारणों से दो लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान प्राक्कलन गठन के समय किया गया था। इस प्रकार मात्र मैनुअल लोडिंग अनलोडिंग का प्राक्कलन में प्रावधान नहीं रहने के कारण मेरे बचाव बयान अस्वीकार करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता है।

यहाँ पर उल्लेखनीय है कि रेल द्वारा बोल्डर ढुलाई मद में दर विशलेषण में Originating एवं destination दोनों ही स्टेशन पर एक-एक बार अर्थात कुल दो बार लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान एवं विवेक एवं व्यवहारिक बाध्यता के अनुसार good intention से किया गया था। जिसे अधीक्षण अभियंता ने अनुमोदन किया एवं मुख्य अभियंता भी सहमत होते हुए तकनीकी स्वीकृति हेतु प्राक्कलन मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध पटना के अनुशंसित किया गया। ततपश्चात मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना द्वारा उक्त दर विशलेषण को सही मानते हुए प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दी गयी। जिसके आधार पर पर BOQ की स्वीकृति मुख्य अभियंता, मोतिहारी द्वारा दी गई एवं अनुमोदित परिमाण विपत्र के आधार पर निविदा का निष्पादन किया गया।

आरोप सं०-3-आरोप सं०-3-आरोप सं०-3-आरोप सं०-3-इस बिन्दु को पूर्णतः प्रमाणित पाये जाने का उल्लेख है। जबकि संचालन पदाधिकारी द्वारा विषयांकित कार्य को सही एलाईनमेंट पर कराये जाने संबंधी तथ्य को स्वीकार योग्य माना गया। मात्र रेखांकण की विधिवत स्वीकृत सक्षम प्राधिकार से प्राप्त नहीं किये जाने हेतु ही मुझे दोषी माना गया है।

कार्य प्रारंभ किये जाने के पूर्व संबंधित मुख्य अभियंता से कार्यालय कक्ष में वार्ता के उपरांत एलाइनमेंट का निर्धारण किया गया। कार्य सम्पादन अवधि में मुख्य अभियंता द्वारा एलाइनमेंट पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं किये जाने से उसकी पुष्टि होती है। मेरे उक्त कृत्य से न तो सरकारी राजस्व की क्षति ही हुई है एवं न ही कार्य की गुणवता पर ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है एवं आज की तारीख में भी कार्य पूर्णतः Intact है एवं उद्‌देश्य की पूर्ति कर रहा है।

आरोप सं०-4-आरोप सं०-4-आरोप सं०-4-आरोप सं०-4-आरोप का यह बिन्दु एप्रोन LWL से 0.16मी0 से 0.95मी0 उपर से प्रारंभ किये जाने से संबंधित है। उड़नदस्ता के जाँच के पश्चात एप्रोन के Bottom Level की जाँच कार्य से संबंधित कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 14.08.2016 को की गई एवं अन्तर अधिकतम 0.14मी0 पाया गया। वर्णित स्थिति में संचालन पदाधिकारी से पुनः उड़नदस्ता जाँच कराने का अनुरोध किया गया। परन्तु उड़नदस्ता जाँच में कनीय अभियंता/सहायक अभियंता स्थल पर उपस्थित थे के आधार पर अमान्य कर दिया गया। जबकि उड़नदस्ता जाँच के समय कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता का लेवल लेने में कोई सहभागिता नहीं थी।

आरोप सं०-5-आरोप सं०-5-आरोप सं०-5-आरोप सं०-5-क्रेटेड बोल्डर पिचिंग कार्य में Voids की मात्रा 20प्रतिशत के विरूद्ध 20.25 प्रतिशत पाये जाने से संबंधित है। इस नगन्य अन्तर को मान्य सीमा से अन्दर माना जाना न्यायोचित है।

कार्य में कुल 10814 अद्‌द क्रेटस में से मात्र एक क्रेट की जाँच कर पुरे कार्य के संबंध में अवधारणा बनाया जाना न्यायोचित नहीं माना जा सकता है। क्रेटेड बोल्डर पिचिंग कार्य में यदि जाँचित एवं प्रावधानित Voids में अन्दर का आकलन किया जाय तो यह (20.25-20)=0.25 प्रतिशत आता है। जिसे नगन्य माना जा सकता है।

आरोप सं०-6-आरोप सं०-6-आरोप सं०-6-आरोप सं०-6-यह आरोप विशिष्टि के विरूद्ध बोल्डर क्रेटिंग कार्य में अन्दर साईज एवं ओभर साईज बोल्डर की मात्रा अपेक्षित मात्रा से अधिक पाये जाने से संबंधित है। इस क्रम में पुनः उल्लेखनीय है कि -

(क) अनुसूचित दर में 150mm एवं Below से लेकर 30mm एवं above size का बोल्डर का Basic rate at Quarry site पर समान है। अतः, यदि प्रावधान से छोटे एवं बडे आकार के बोल्डर का उपयोग किये जाने पर भी वित्तयी अनियमितता का मामला नहीं बनता है।

(ख) IS Code 14262-1998 के अनुसार यदि क्रेटेड बोल्डर पीचिग कार्य में बोल्डर का आकार मेस साईज से बड़ा हो तो मान्य किया जा सकता है।

(ग) तकनीकी परीक्षक कोषांग भी क्रेट में Voids की मात्रा नियंत्रित करने के लिए छोटे आकार के बोल्डर के व्यवहार को मान्य बताया गया है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में न्यून विशिष्टि का कार्य कराये जाने का आरोप प्रमाणित माना जाना उचित नहीं है। आरोप सं०-7-आरोप सं०-7-आरोप सं०-7-आरोप सं०-7-यह आरोप क्रेट के बाँधने में GI winding wire के जगह पर क्रेट बुनाई में इस्तेमाल किये जाने वाले 10SWG GI Wire को ही आवश्यतानुसार अधिक लंबाई में छोड़कर फिर उसी से क्रेट को बांधन का कार्य किया गया। क्रेट बांधने का कार्य अकुशल मजदूर द्वारा किया जाता है। लोहे के रौड से क्रेट को कसकर बाँधने में कही-कहीं क्रेट के मेस में मामूली सिकुडन उत्पन्न हो जना स्वभाविक है। उक्त कृत से अधिकाई भुगतान होने जैसी संभावना उत्पन्न होने का कोई प्रश्न नहीं है। कृपया मुक्त करने की कृपा की जाय।29 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 आरोप सं०-8-आरोप सं०-8-आरोप सं०-8-आरोप सं०-8- यह बिन्दु भरे हुए बोल्डर एवं कम मोटाई के समतल बोल्डर कार्य में उपयोग करने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी का कहना है कि मुख्य अभियंता के निदेश के बाद भी कार्य में भरे एवं समतल बोल्डर का उपयोग किया गया। उल्लेखनीय है कि मुख्य अभियंता दिनांक 01.03.2016 को स्थल निरीक्षण के पश्चात दिये गये निरीक्षण प्रतिवेदन में कही पर भरे पत्थर का स्थल पर पाये जाने का उल्लेख नहीं है। स्थल पर पाये गये कतिपय Heant/Flat बोल्डर को स्थल से हटाने का उनके द्वारा निदेश दिया गया था। जिसका अनुपालन प्रतिवेदन पत्रांक-437 दिनांक 26.03.2016 द्वारा मुख्य अभियंता, द्वारा उपलब्ध करा दिया गया था। इसके पश्चात दिनांक 16.03.2016 एवं दिनांक 17.04.2016 को अध्यक्ष, अनुवीक्षण दल, मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा किये गये स्थल निरीक्षण में कार्य को संतोषप्रद बताया गया है एवं बोल्डर की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद न्यून विशिष्टि के बोल्डर कार्य में प्रयुक्त किया गया है। आधारहीन एवं तथ्य के परे है। आरोप सं०-9-आरोप सं०-9-आरोप सं०-9-आरोप सं०-9-यह आरोप एप्रोन एवं स्लोप के मिलान बिन्दु पर गैप से संबंधित है। नदी के जलस्तर में वृद्धि के पश्चात कहीं-कहीं एप्रोन में मामूली रूप से सेटल होने के फलस्वरूप एप्रोन एवं स्लोप के मिलान बिन्दु पर कहीं-कहीं मामूली गैप होने लगा था। परन्तु कार्य defeat liability अवधि के अन्तर्गत रहने के कारण संवेदक द्वारा तत्क्षण मुख्य अभियंता के दिशा निदेश के अनुरूप सुधारात्मक कार्य अपने खर्च पर ही कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त व्यय भी नहीं हुआ है। आज की तिथि में कार्य मूलरूप में विद्यमान है। इसमें किसी प्रकार की सरकारी राशि का अपव्यय नहीं हुआ है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपी अभियंता श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा निम्न तथ्य पाये गये हैं -

आरोप सं० -1 आरोप सं० -1 आरोप सं० -1 आरोप सं० -1 में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार Quarry site से मिर्जापुर स्टेशन एवं बेतिया स्टेशन पर पहुँचाने में प्राक्कलन में प्रावधानित 2 time loading एवं Unloading को अनियमित बताते हुए 2 times के बदले एक बार मिर्जापुर स्टेशन पर लोडिंग एवं एक बार बेतिया स्टेशन पर रैक से Unloading होना बताया गया है तथा इसी आधार पर One time loading एवं Unloading मद में किये गये भुगतान को अधिकाई भुगतान होने का मंतव्य दिया गया है। उक्त आरोप के संदर्भ में श्री सिंह, कनीय अभियंता (निलंबित) का कथन की प्राक्कलन गठन में मेरी कोई संलिप्तता नहीं रही है। क्योंकि मेरी प्रतिनियुक्ति के पूर्व कार्य प्रारंभ था एवं 40 प्रतिशत कार्य हो चुका था एवं एकरारनामा एवं प्राक्कलन के अनुरूप भुगतान करना मेरी बाध्यता थी को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। क्योंकि प्राक्कलन में बोल्डर ढुलाई के दर में अगर कोई त्रुटि थी तो श्री सिंह का दायित्व था कि भुगतान से पूर्व उक्त तथ्यों को उजागर करते हुए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त कर भुगतान करते परन्तु इनके द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर गलत भुगतान में सहयोग किया जाना परिलक्षित है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य सहमत होते हुए श्री सिंह के विरूद्ध आरोप सं०-1 का अंश यथा बोल्डर ढुलाई मद में कुल 69,22,650/- के अनियमित भुगतान होने में संलिप्तता होने के आरोप को प्रमाणित पाया गया है तथा बोल्डर स्टैकिंग मद में अनियमित भुगतान होने के आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया है।

आरोप सं० -3 आरोप सं० -3 आरोप सं० -3 आरोप सं० -3 जो Revetment कार्य का एलाइनमेंट बिना सक्षम पदाधिकारियों से स्वीकृत प्राप्त किये ही नदी के किनारे से Back shift कर गलत एलाइनमेंट पर कार्य कराने के कारण मुआवजा मद तथा मिट्‌टी कटाई मद में सरकारी राशि के अपव्यय होने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा एलाइनमेंट की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार यथा मुख्य अभियंता से लेने के आधार पर इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है विदित हो कि कि एलाइनमेंट के संदर्भ में अभियंता प्रमुख बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण से आरोपी अभियंता के बचाव-बयान पर मंतव्य की मांग की गई थी। जिसके आलोक में अभियंता प्रमुख अपने मंतव्य में अंंिकत किया है कि बिना सक्षम प्राधिकार से विधिवत स्वीकृत प्राप्त किये ही एलाइनमेंट कार्य कराया गया। उक्त के आलोक में माना जा सकता है कि कार्य सही रेखांकण पर कराया गया है परन्तु रेखांकण के लिये विधिवत स्वीकृत प्राप्त नहीं किया गया है।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में यही तथ्य उद्धित किया गया है जो इनके अतिरिक्त कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं अभियंता प्रमुख के मंतव्य से सहमत होते हुए बिना सक्षम पदाधिकारी से एलाइनमेंट का अनुमोदन प्राप्त किये ही कार्य कराया जाना स्थापित होता है। अतएव आरोप सं०-3 प्रमाणित होता है।

आरोप सं० -4 आरोप सं० -4 आरोप सं० -4 आरोप सं० -4 जो प्राक्कलन में प्रावधानुसार के विरूद्ध LWL से 0.16मी0 से 0.95 मी0 उपर के लेवल से कार्य प्रारंभ करने के कारण एप्रोन सिंक करने ही प्रबल संभावना होने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन की उड़नदस्ता जाँच केे पश्चात कार्य से संबंधित कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा लेवल की जाँच करने पर मात्र 0.14मी0 का अन्तर है को उड़नदस्ता जाँच के समय कार्य से संबंधित सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता की उपस्थिति में जाँच दल द्वारा लेवल की जाँच किये जाने के आधार पर अस्वीकार योग्य मानते हुए इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया कि श्री पाण्डेय द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में वहीं तथ्य उद्धित किया है जो इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष कही गयी थी। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री पाण्डेय को LWL से 0.16मी0 से 0.95मी0 उपर से कार्य प्रारंभ करने के लिए दोषी माना जाता है अतः आरोप सं०-4 प्रमाणित होता है।

आरोप सं० -5आरोप सं० -5आरोप सं० -5आरोप सं० -5 जो बोल्डर क्रेटिंग कार्य के मानक से अधिक Voids पाये जाने के फलस्वरूप न्यून विशिष्टि का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान होने से संंबंधित है।30 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन की वरीय पदाधिकारी द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया गया है एवं उनके द्वारा इस त्रुटियों की ओर इंगित नहीं किया है उक्त कथन को उड़नदस्ता टीम ने क्रेट खोलकर विधिवत Sand replacement method and density volume method से Voids की जाँच की गयी। जाँच Scientific है के आलोक में अस्वीकार योग्य मानते हुए आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी अभियंता द्वारा कहा गया है कि कार्य में प्रयुक्त कुल 10814 अद्‌द क्रेट में से मात्र एक क्रेट जाँच कर पूरे कार्य के संंबंध में अवधारणा बनाया जाना उचित नहीं है को स्वीकार योग्य माना जा सकता है। उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि जाँचित एवं प्रावधानित Voids में अन्तर मात्र 20.25-20.00=0.25 प्रतिशत आता है जिसे मैनुअली कार्य कराने के कारण Voids में यह अन्तर आना स्वभाविक है को आलोच्य कार्य में मैनुअली रूप से कराये गये कुल 10814 अद्‌द क्रेट में मात्र एक क्रेट में Voids की गणना में मात्र 0.84 प्रतिशत अनुमान्य सीमा से अधिक पाये जाने की स्थिति को स्वीकार योग्य माना जा सकता है अतएव आरोप सं०-5 अप्रमाणित होता है।

आरोप सं० -6 आरोप सं० -6 आरोप सं० -6 आरोप सं० -6 जो एकरारनामा/प्राक्कलन के विरूद्ध कार्य में मानक से काफी अधिक मात्रा में अन्डर साईज एवं ओभर साईज बोल्डर का उपयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर अनियमित भुगतान करने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी का कथन की अलग-अलग साईज के बोल्डर का बेसिक रेट अनुसूचित दर तालिका में एक होने के कारण वित्तयी अनियमितता नहीं हुआ है। विभिन्न साईज के बोल्डर के दर एक होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी साईज का बोल्डर का प्रयोग किया जाय। प्राक्कलन/एकरारनामा के प्रावधान के विपरीत न्यून विशिष्टि का कार्य के कारण सिस्टम फेल हो सकता है दर एक होना अलग चीज है। साईज के आधार पर गुणवत्ता अलग महत्व रखता है के आधार पर स्वीकार योग्य नहीं माना गया तथा आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है बल्कि वही तथ्य को दुहराया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं०-6 को प्रमाणित माना जाता है। आरोप सं० -7 आरोप सं० -7 आरोप सं० -7 आरोप सं० -7 जो प्रावधान के अनुसार बोल्डर क्रेटिंग कार्य में क्रेट बांधने में Binding wire का उपयोग नहीं कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने कहा है कि आरोपी अभियंता का कथन की Binding wire के बदले GI Wire क्रेट के निर्मित तार से क्रेट को खींचकर बाँधने का कार्य किया गया है। फलतः मोटे तौर से गुणवत्ता में सुधार हुआ है को क्रेट में मोटे तार को खींचकर ही बाँधने का भी कार्य उसी तार से किये जाने के कारण क्रेटिंग का साईज में भी कमी हो गयी जो खतरनाक स्थिति है एवं इस आरोप को आरोपी अभियंता द्वारा स्वीकार किया गया है के आधार पर स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपी अभियंता द्वारा अपने बचाव बयान में वही तथ्य उद्धित किया गया है। जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन में कहा गया था। इसके अतिरिक्त कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। आरोपी का कथन की 12-14Garge के जगह पर SWG GI Wire से बाँधने पर गुणवत्ता प्रभावित नहीं हुआ है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। क्योंकि उड़नदस्ता जाँच के क्रेट के साईज एवं मेस की संख्या में कमी पायी गयी है इस प्रकार विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराकर प्रावधान के अनुरूप भुगतान किये जाने से अधिकाई भुगतान परिलक्षित होता है। अतएव आरोप सं०-7 प्रमाणित होता है।

आरोप सं० -8 आरोप सं० -8 आरोप सं० -8 आरोप सं० -8 जो बोल्डर पीचींग कार्य में प्रावधान के विपरीत भरे हुए/कम मोटाई बोल्डर का उपयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी का कथन कि कार्य के दौरान गुणवत्ता जाँचफल तथा अधीक्षण अभियंता मुख्य अभियंता तथा अनुवीक्षण दल द्वारा कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गई थी तथा इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई है को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। मात्र कहा गया है कि मुख्य अभियंता के दिनांक 01.03.2016 के स्थल निरीक्षण के पश्चात दिये गये कतिपय Lean/Flat बोल्डर को स्थल से हटवाते हुए अनुपालन प्रतिवेदन पत्रांक-437, दिनांक 26.03.16 से मुख्य अभियंता को दिया गया। इसके पश्चात किसी भी पदाधिकारी के स्थल निरीक्षण में उक्त तथ्यों का उल्लेख नहीं है एवं कार्य में भरे हुए/समतल बोल्डर का उपयोग नहीं किया गया है। जबकि उड़नदस्ता अंचल जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट अंकित है कि एप्रोन के टॉप एवं स्लोप में कहीं-कहीं भरा हुआ एवं कम मोटाई का पत्थर लगा हुआ पाया गया तथा मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि स्थल पर भरे एवं समतल बोल्डर उपलब्ध थे एवं मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद भी कार्य में न्यून विशिष्टि के बोल्डर का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए कार्य में न्यून विशिष्टि के बोल्डर का उपयोग कर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान होने के आरोप को प्रमाणित माना गया है। अतः आरोप सं०-08 प्रमाणित होता है। आरोप सं० -9 आरोप सं० -9 आरोप सं० -9 आरोप सं० -9 जो स्लोप एवं एप्रोन के बीच 1 फीट गैप पाये जाने के कारण स्लोप पीचींग कार्य क्षतिग्रस्त होने की संभावना के कारण सरकारी राशि अपव्यय होने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने अपने समीक्षा में कहा है कि आरोपी अभियंता का कथन की नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण गैप परिलक्षित हुआ था। जिसे संवेदक द्वारा Defect Liability Period में सुधार करा लिया गया है। परन्तु कार्य संवेदक द्वारा करवाया गया अथवा नहीं उसका स्पष्ट प्रमाण नहीं होना तथा गैप होना प्रमाणित होने के कारण अस्वीकार योग्य मानते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।31 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 आरोपी अभियंता श्री पाण्डेय द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है अतएव श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता का बचाव-बयान को संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अस्वीकार किया जाता है। अतः आरोप सं० -9 प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री प्रभु नारायण पाण्डेय, तत0 सहायक अभियंता, चम्पारण प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

" पेंशन से 15" पेंशन से 15" पेंशन से 15" पेंशन से 15% की कटौती स्थायी रूप से"। की कटौती स्थायी रूप से"। की कटौती स्थायी रूप से"। की कटौती स्थायी रूप से"। उक्त दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। तदनुसार उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रभु नारायण पाण्डेय, सेवानिवृत सहायक अभियंता, टोलाग्रामपंचायत-तेजपुरवा, पो0-सोनवाल, भाया-मलाही पूर्वी चम्पारण को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है।

" पेंशन से 15" पेंशन से 15" पेंशन से 15" पेंशन से 15% की कटौती स्थायी रूप से"। की कटौती स्थायी रूप से"। की कटौती स्थायी रूप से"। की कटौती स्थायी रूप से"।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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21 दिसम्बर 201721 दिसम्बर 201721 दिसम्बर 201721 दिसम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(मुज0)06-07/201622/नि0सि0(मुज0)06-07/201622/नि0सि0(मुज0)06-07/201622/नि0सि0(मुज0)06-07/2016////2288228822882288—श्री अंशुमण ठाकुर (आई0डी0-3501) तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल मोतिहारी को उनके उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि के दौरान वर्ष 2016 में बगहा शहर के नजदीक रतनमाला एवं पुअर हाउस में कराये गये कटाव निरोधक कार्य में बरती गई वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी राशि की क्षति के लिए विभागीय ज्ञापांक सं०-1526 दिनांक 27.07.2016 द्वारा श्री ठाकुर को निलंबित किया गया एवं तदोपरांत विभागीय ज्ञापांक सं०-1585 दिनांक 29.07.16 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 में विहित रीति से प्रपत्र-क में उल्लेखित निम्न आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। (1)(1)(1)(1) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 2.0.1 एवं 5.0.0 (1) के क्रम में प्रश्नगत कार्य के स्वीकृत प्राक्कलन के मद सं०-4 एवं 5 (बोल्डर क्रेटिंग एवं बोल्डर पीचींग कार्य) में बोल्डर ढुलाई मद में Loading एवं Unloading के लिए रूपये 145.04 प्रति घनमीटर तथा Stacking कार्य में रूपये 39.73 प्रति घनमीटर का अधिक दर स्वीकृत होने के कारण क्रमशः 7691833/- एवं 2106990/- अर्थात कुल रू0 97,98,824/- का अधिकाई भुगतान होना संभावित प्रतीत होता है। उक्त प्राक्कलन का गठन प्रस्ताव का सर्मपण एवं अनियमित भुगतान में आपकी संलिप्तता रही है।

(2)(2)(2)(2) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 2.0.2 एवं 5.0.0 के उप कंडिका-3 से स्पष्ट है कि प्रश्नगत कार्य में जंगल सफाई कार्य का प्राक्कलन में प्रावधानित मात्रा 23250 वर्गमी0 का हूबहू मापपुस्त में अंकित कर भुगतान करने की कार्रवाई की गई है। जबकि स्थल पर प्रावधानित लंबाई 1550 मीटर के विरूद्ध 1490 मीटर पाया गया। इस प्रकार जंगल सफाई मद में अधिकाई भुगतान करने के लिये आप दोषी है।

(3)(3)(3)(3) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.0.1 एवं 5.0.0(3) के समीक्षा में पाया गया कि एप्रोन लेईंग का Alignment बिना सक्षम प्राधिकार के स्वीकृत प्राप्त किये ही नदी के किनारे से 2.8मी0 से 6.25मी0 Back Shift कर गलत alignment पर कार्य कराया गया। जिसके कारण ग्रामीणों का आवासीय एवं उपजाऊ भूमि बर्बाद होने के साथ-साथ सरकार के भूमि अधिग्रहण मद एवं फसल मुआवजा मद तथा मिट्‌टी कटाई मद में सरकारी राशि का अपव्यय होना परिलक्षित है। यदि apron laying को बिना back shift किये हुए कार्य कराया जाता तो उपरोक्त अपव्यय को बचाया जा सकता है। परन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया।

(4) (4) (4) (4) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 3.03 से स्पष्ट है कि प्रश्नगत कार्य प्राक्कलन के प्रावधानित के विरूद्ध LWL 80.96 से 0.16मी0 से 0.95मी0 उपर तक कार्य प्रारंभ कराया गया है जिसके कारण एप्रोन सिंक करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में इस योजना पर किया गया व्यय अनुपयोगी होने की प्रबल संभावना बनती है। इस प्रकार न्यूनतम जलस्तर से उपर एप्रोन का कार्य कराया गया।

(5)(5)(5)(5) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 3.0.4 से स्पष्ट है कि उड़नदस्ता जाँच दल द्वारा स्थलीय जाँच में Boulder Crating कार्य में 20.25 तथा Uncrated Boulder Pitching कार्य में 21.43 प्रतिशत voids पाया गया है, जो निर्धारित मानक 20 प्रतिशत से अधिक है। फलतः अनियमित भुगतान होना परिलक्षित होता है। अतएव न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर भुगतान प्रावधान के अनुरूप किया गया।

(6) (6) (6) (6) जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.0.1 से स्पष्ट है कि स्थलीय जाँच में एकरारनामा में प्रावधानित विशिष्टि के विरूद्ध Boulder Crating कार्य में Oversize Boulder 39.95% एवं Under Size Boulder 48.22% पाया गया उसी प्रकार पैनल में Uncrated Boulder Pitching कार्य में Over Size Boulder 49.37% तथा Under size boulder 30.22% पाया गया। इससे परिलक्षित है कि विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया परन्तु भुगतान प्रावधान के अनुरूप करने के फलस्वरूप अधिकाई भुगतान होना स्पष्ट रूप से परिलक्षित है।

((((7)7)7)7) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 4.0.2 से स्पष्ट है कि उड़नदस्ता के स्थलीय जाँच में स्वीकृत प्राक्कलन/एकरारनामा में प्रावधानित G.I. Binding Wire का व्यवहार क्रेट बांधने में नहीं किया गया है। फलतः B.A32 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 Wire Crate के साईज सिंक कर छोटा हो गया है। अतएव बिना G.I. Binding wire के उपयोग किये ही निम्न विशिष्टि के कार्य कराने के बावजूद भुगतान एकरारित दर से करने के कारण इस मद में अधिकाई भुगतान परिलक्षित है। (8) (8) (8) (8) उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 4.0.3 से स्पष्ट है कि स्थलीय जाँच में Boulder Crating एवं Boulder Pitching कार्य में एकरारनामा तथा GOI, CWC द्वारा प्रकाशित Hand Book के पारा 5.3.4 के विपरीत भरे हुए बोल्डर तथा कम मोटाई के समतल (Flat) Boulder का उपयोग कर न्यून विशिष्टि का बोल्डर कार्य उपयोग कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराया गया है एवं भुगतान प्रावधान के अनुरूप होने के फलस्वरूप अधिकाई भुगतान होना परिलक्षित है। (9) (9) (9) (9) जाँच प्रतिवेदन के कंडिका 4.0.4 एवं 5.0.0 के उप कंडिका 10 से बोध होता है कि एप्रोन एवं स्लोप के मिलन बिन्दु पर 1 फीट का गैप रह गया है, जिसके कारण अभी से ही बिना कटाव के ही स्लोप पिचींग फिसल रहा है एवं कुछ भाग के स्लोप पीचींग क्षतिग्रस्त भी हो गया है। जिसके कारण सरकार को एक बड़ी राशि का अपव्यय होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। अतएव इस प्रकार के अनियमित कार्य कराकर सरकारी राशि की अपव्यय की गयी। (10)(10)(10)(10) जाँच प्रतिवेदन की कंडिका 1.0.1 से बोध होता है कि उड़नदस्ता जाँच पदाधिकारी द्वारा जाँचित कार्य से संबंधित दस्तावेज दिनांक 17.06.16 को विशेष दूत से भेजने हेतु अनुरोध किया गया था परन्तु आपके द्वारा दिनांक 19.06.2016 को शाम 5 बजे तक आंशिक दस्तावेज ही उपलब्ध कराया गया। अतएव वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने के लिए आप दोषी हैं।

संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन में श्री ठाकुर, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध आरोप सं०-03, 04, 05, 06, 07, 08 एवं 09 को पूर्णतः प्रमाणित एवं आरोप सं०-02 एवं 10 को अप्रमाणित तथा आरोप सं०-1 में 76,91,833/- (छिहत्तर लाख इकानवे हजार आठ सौ तैतीस) रूपये के अधिकाई भुगतान को प्रमाणित पाया है। इसी आरोप में रू0 21,06,990/- रूपये के अधिकाई भुगतान को अप्रमाणित पाया गया है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई । समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए जाँच प्रतिवेदन की छायाप्रति श्री ठाकुर को विभागीय पत्रांक-494, दिनांक 10.04.2017 द्वारा उपलब्ध कराते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की गई। उक्त के आलोक में श्री ठाकुर, कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने पत्रांक-0 दिनांक 19.05.2017 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग में समर्पित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बाते कही गई हैं :-

आरोप सं०-1- आरोप सं०-1- आरोप सं०-1- आरोप सं०-1- 69,22,650/- रूपये की अनियमित भुगतान संबंधी आरोप को प्रमाणित पाये जाने हेतु संचालन पदाधिकारी कई तथ्यों का उल्लेख किया गया है जो निम्नवत है :-

(क) प्राक्कलन में 2 times loading or unloading के लिये 2x143.60 का प्रावधान किया जाना जो Font end loader से Loading & Unloading by tripper का है। उसमें मैनुअल लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान नहीं रहने के कारण मेरा बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं माना गया है। जबकि मैनुअल लोडिंग एवं अनलोंिडंग किया गया है।

(ख) मेरे द्वारा पूरक बचाव बयान में मिर्जापुर एवं बेतिया स्टेशन पर मात्र Manual Means से लोडिंग एवं अनलोडिंग करने के प्रावधान के साथ दर विशलेषण एवं तुलनात्मक विवरणी के माध्यम से सं० 16,07,736/-राशि की बचत को मात्र इस आधार पर सही नहीं माना गया कि गणना सही प्रतीत नहीं होता है।

(ग) उड़नदस्ता संगठन द्वारा मात्र एक ही बार लोडिंग एवं अनलोडिंग को सही बताया जाना। (घ) अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, पटना द्वारा मंतव्य दिया जाना कि ऐसा प्रतीत होता है कि उक्त प्राक्कलन में बोल्डर की ढुलाई में Originating Station एवं Destination Station का क्रमशः मात्र एक ही लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान होना चाहिये।

आरोप को मात्र संभावना के आधार पर प्रमाणित मान लिया गया है। पूर्व के बचाव बयान के कंडिका 1.1.1 (क) को अस्वीकार योग्य माना जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। रेलवे द्वारा माल ढुलाई हेतु रैंक में 59 बोगी को Standard पाया गया है। प्रति बोगी की क्षमता अधिकतम 66 टन रहने पर एक रैक में 59x66=3894 टन बोल्डर ढुलाई की जा सकती है। इस हिसाब से उक्त स्थल पर कार्य हेतु बोल्डर 106276 टन की ढुलाई हेतु 106276/3894=27 रैक की आवश्यकता होती। प्रति रैक 3894 टन बोल्डर [3894x0.499=1943.106M3]की ढुलाई की जा सकती है। 1943.106M2 को सीधे क्वेरी साईट से 74कि0मी0 दूरी पर स्थित मिर्जापुर रेलवे रैक प्वाईंट पर लाकर 9 घंटे के अन्दर बोगी में लोड करना एवं इसको बेतिया स्टेशन पर पहुँचाने के पश्चात रैक प्वाईंट पर अनलोड कर पुनः 9 घंटे के अन्दर रैक प्वाईंट खाली कर 68कि0मी0 स्थित कार्य स्थल पर पहुँचाना कतई संभव नहीं है। इस स्थिति में निश्चित रूप से यह दण्डात्मक शुल्क का मामला बनता है।

रेलवे द्वारा सामग्री रेल यार्ड में संग्रहन के बाद ही रैक दिया जाता है। पुनः रैक लगने के बाद वहाँ Font end leader से टिपर में लोड करने के पश्चात उसे रैक प्वांइट पर अनलोड कर मैनुअली बोगी में डाला जाना था। उसी प्रकार बेतिया में मैनुअली बोगी से अनलोड कर Front end Loader से पुनः टिपर में डाल कर रैक प्वाईंट को निर्धारित समय में खाली कराना आवश्यक था। उक्त कारणों से दो लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान प्राक्कलन गठन के समय किया गया था। इस प्रकार मात्र मैनुअल लोडिंग अनलोडिंग का प्राक्कलन में प्रावधान नहीं रहने के कारण मेरे बचाव बयान अस्वीकार करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता है।

यहाँ पर उल्लेखनीय है कि रेल द्वारा बोल्डर ढुलाई मद में दर विशलेषण में Originating एवं destination दोनों ही स्टेशन पर एक-एक बार अर्थात कुल दो बार लोडिंग एवं अनलोडिंग का प्रावधान एवं विवेक एवं व्यवहारिक बाध्यता33 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 के अनुसार good intention से किया गया था। जिसे अधीक्षण अभियंता ने अनुमोदन किया एवं मुख्य अभियंता भी सहमत होते हुए तकनीकी स्वीकृति हेतु प्राक्कलन मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध पटना के अनुशंसित किया गया। ततपश्चात मुख्य अभियंता, केन्द्रीय रूपांकण एवं शोध, पटना द्वारा उक्त दर विशलेषण को सही मानते हुए प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति दी गयी। जिसके आधार पर पर BOQ की स्वीकृति मुख्य अभियंता, मोतिहारी द्वारा दी गई एवं अनुमोदित परिमाण विपत्र के आधार पर निविदा का निष्पादन किया गया।

आरोप सं०-3-आरोप सं०-3-आरोप सं०-3-आरोप सं०-3-इस बिन्दु को पूर्णतः प्रमाणित पाये जाने का उल्लेख है। जबकि संचालन पदाधिकारी द्वारा विषयांकित कार्य को सही एलाईनमेंट पर कराये जाने संबंधी तथ्य को स्वीकार योग्य माना गया। मात्र रेखांकण की विधिवत स्वीकृत सक्षम प्राधिकार से प्राप्त नहीं किये जाने हेतु ही मुझे दोषी माना गया है।

कार्य प्रारंभ किये जाने के पूर्व संबंधित मुख्य अभियंता से कार्यालय कक्ष में वार्ता के उपरांत एलाइनमेंट का निर्धारण किया गया। कार्य सम्पादन अवधि में मुख्य अभियंता द्वारा एलाइनमेंट पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं किये जाने से उसकी पुष्टि होती है। मेरे उक्त कृत्य से न तो सरकारी राजस्व की क्षति ही हुई है एवं न ही कार्य की गुणवता पर ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है एवं आज की तारीख में भी कार्य पूर्णतः Intact है एवं उद्‌देश्य की पूर्ति कर रहा है।

आरोप सं०-4-आरोप सं०-4-आरोप सं०-4-आरोप सं०-4-आरोप का यह बिन्दु एप्रोन LWL से 0.16मी0 से 0.95मी0 उपर से प्रारंभ किये जाने से संबंधित है। उड़नदस्ता के जाँच के पश्चात एप्रोन के Bottom Level की जाँच कार्य से संबंधित कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 14.08.2016 को की गई एवं अन्तर अधिकतम 0.14मी0 पाया गया। वर्णित स्थिति में संचालन पदाधिकारी से पुनः उड़नदस्ता जाँच कराने का अनुरोध किया गया। परन्तु उड़नदस्ता जाँच में कनीय अभियंता/सहायक अभियंता स्थल पर उपस्थित थे के आधार पर अमान्य कर दिया गया। जबकि उड़नदस्ता जाँच के समय कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता का लेवल लेने में कोई सहभागिता नहीं थी।

आरोप सं०-5-आरोप सं०-5-आरोप सं०-5-आरोप सं०-5-क्रेटेड बोल्डर पिचिंग कार्य में Voids की मात्रा 20प्रतिशत के विरूद्ध 20.25 प्रतिशत पाये जाने से संबंधित है। इस नगन्य अन्तर को मान्य सीमा से अन्दर माना जाना न्यायोचित है।

कार्य में कुल 10814 अद्‌द क्रेटस में से मात्र एक क्रेट की जाँच कर पुरे कार्य के संबंध में अवधारणा बनाया जाना न्यायोचित नहीं माना जा सकता है। क्रेटेड बोल्डर पिचिंग कार्य में यदि जाँचित एवं प्रावधानित Voids में अन्दर का आकलन किया जाय तो यह (20.25-20)=0.25 प्रतिशत आता है। जिसे नगन्य माना जा सकता है।

आरोप सं०-6-आरोप सं०-6-आरोप सं०-6-आरोप सं०-6-यह आरोप विशिष्टि के विरूद्ध बोल्डर क्रेटिंग कार्य में अन्दर साईज एवं ओभर साईज बोल्डर की मात्रा अपेक्षित मात्रा से अधिक पाये जाने से संबंधित है। इस क्रम में पुनः उल्लेखनीय है कि -

(क) अनुसूचित दर में 150mm एवं Below से लेकर 30mm एवं above size का बोल्डर का Basic rate at Quarry site पर समान है। अतः, यदि प्रावधान से छोटे एवं बडे आकार के बोल्डर का उपयोग किये जाने पर भी वित्तयी अनियमितता का मामला नहीं बनता है।

(ख) IS Code 14262-1998 के अनुसार यदि क्रेटेड बोल्डर पीचिग कार्य में बोल्डर का आकार मेस साईज से बड़ा हो तो मान्य किया जा सकता है।

(ग) तकनीकी परीक्षक कोषांग भी क्रेट में Voids की मात्रा नियंत्रित करने के लिए छोटे आकार के बोल्डर के व्यवहार को मान्य बताया गया है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में न्यून विशिष्टि का कार्य कराये जाने का आरोप प्रमाणित माना जाना उचित नहीं है। आरोप सं०-7-आरोप सं०-7-आरोप सं०-7-आरोप सं०-7-यह आरोप क्रेट के बाँधने में GI winding wire के जगह पर क्रेट बुनाई में इस्तेमाल किये जाने वाले 10SWG GI Wire को ही आवश्यतानुसार अधिक लंबाई में छोड़कर फिर उसी से क्रेट को बांधन का कार्य किया गया। क्रेट बांधने का कार्य अकुशल मजदूर द्वारा किया जाता है। लोहे के रौड से क्रेट को कसकर बाँधने में कही-कहीं क्रेट के मेस में मामूली सिकुडन उत्पन्न हो जना स्वभाविक है। उक्त कृत से अधिकाई भुगतान होने जैसी संभावना उत्पन्न होने का कोई प्रश्न नहीं है। कृपया मुक्त करने की कृपा की जाय।

आरोप सं०-8-आरोप सं०-8-आरोप सं०-8-आरोप सं०-8- यह बिन्दु भरे हुए बोल्डर एवं कम मोटाई के समतल बोल्डर कार्य में उपयोग करने से संबंधित है। संचालन पदाधिकारी का कहना है कि मुख्य अभियंता के निदेश के बाद भी कार्य में भरे एवं समतल बोल्डर का उपयोग किया गया। उल्लेखनीय है कि मुख्य अभियंता दिनांक 01.03.2016 को स्थल निरीक्षण के पश्चात दिये गये निरीक्षण प्रतिवेदन में कही पर भरे पत्थर का स्थल पर पाये जाने का उल्लेख नहीं है। स्थल पर पाये गये कतिपय Heant/flat बोल्डर को स्थल से हटाने का उनके द्वारा निदेश दिया गया था। जिसका अनुपालन प्रतिवेदन पत्रांक-437 दिनांक 26.03.2016 द्वारा मुख्य अभियंता, द्वारा उपलब्ध करा दिया गया था। इसके पश्चात दिनांक 16.03.2016 एवं दिनांक 17.04.2016 को अध्यक्ष, अनुवीक्षण दल, मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा किये गये स्थल निरीक्षण में कार्य को संतोषप्रद बताया गया है एवं बोल्डर की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद न्यून विशिष्टि के बोल्डर कार्य में प्रयुक्त किया गया है। आधारहीन एवं तथ्य के परे है।

आरोप सं०-9-आरोप सं०-9-आरोप सं०-9-आरोप सं०-9-यह आरोप एप्रोन एवं स्लोप के मिलान बिन्दु पर गैप से संबंधित है। नदी के जलस्तर में वृद्धि के पश्चात कहीं-कहीं एप्रोन में मामूली रूप से सेटल होने के फलस्वरूप एप्रोन एवं स्लोप के मिलान बिन्दु पर कहीं-कहीं मामूली गैप होने लगा था। परन्तु कार्य defeat liability अवधि के अन्तर्गत रहने के कारण संवेदक द्वारा तत्क्षण मुख्य अभियंता के34 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 दिशा निदेश के अनुरूप सुधारात्मक कार्य अपने खर्च पर ही कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त व्यय भी नहीं हुआ है। आज की तिथि में कार्य मूलरूप में विद्यमान है। इसमें किसी प्रकार की सरकारी राशि का अपव्यय नहीं हुआ है।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं आरोपी अभियंता श्री ठाकुर, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा निम्न तथ्य पाये गये हैं -

आरोप सं० -1 आरोप सं० -1 आरोप सं० -1 आरोप सं० -1 में उड़नदस्ता जाँच प्रतिवेदन के अनुसार Quarry site से मिर्जापुर स्टेशन एवं बेतिया स्टेशन पर पहुँचाने में प्राक्कलन में प्रावधानित 2 time loading एवं Unloading को अनियमित बताते हुए 2 times के बदले एक बार मिर्जापुर स्टेशन पर लोडिंग एवं एक बार बेतिया स्टेशन पर रैक से Unloading होना बताया गया है तथा इसी आधार पर One time loading एवं Unloading मद में किये गये भुगतान को अधिकाई भुगतान होने का मंतव्य दिया गया है। उक्त आरोप के संदर्भ में श्री सिंह, कनीय अभियंता (निलंबित) का कथन की प्राक्कलन गठन में मेरी कोई संलिप्तता नहीं रही है। क्योंकि मेरी प्रतिनियुक्ति के पूर्व कार्य प्रारंभ था एवं 40 प्रतिशत कार्य हो चुका था एवं एकरारनामा एवं प्राक्कलन के अनुरूप भुगतान करना मेरी बाध्यता थी को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। क्योंकि प्राक्कलन में बोल्डर ढुलाई के दर में अगर कोई त्रुटि थी तो श्री सिंह का दायित्व था कि भुगतान से पूर्व उक्त तथ्यों को उजागर करते हुए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त कर भुगतान करते परन्तु इनके द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर गलत भुगतान में सहयोग किया जाना परिलक्षित है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य सहमत होते हुए श्री सिंह के विरूद्ध आरोप सं०-1 का अंश यथा बोल्डर ढुलाई मद में कुल 69,22,650/- के अनियमित भुगतान होने में संलिप्तता होने के आरोप को प्रमाणित पाया गया है तथा बोल्डर स्टैकिंग मद में अनियमित भुगतान होने के आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया है।

आरोप सं० -3 आरोप सं० -3 आरोप सं० -3 आरोप सं० -3 जो Revetment कार्य का एलाइनमेंट बिना सक्षम पदाधिकारियों से स्वीकृत प्राप्त किये ही नदी के किनारे से Back shift कर गलत एलाइनमेंट पर कार्य कराने के कारण मुआवजा मद तथा मिट्‌टी कटाई मद में सरकारी राशि के अपव्यय होने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा एलाइनमेंट की स्वीकृति सक्षम प्राधिकार यथा मुख्य अभियंता से लेने के आधार पर इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है विदित हो कि कि एलाइनमेंट के संदर्भ में अभियंता प्रमुख बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण से आरोपी अभियंता के बचाव-बयान पर मंतव्य की मांग की गई थी। जिसके आलोक में अभियंता प्रमुख अपने मंतव्य में अंंिकत किया है कि बिना सक्षम प्राधिकार से विधिवत स्वीकृत प्राप्त किये ही एलाइनमेंट कार्य कराया गया। उक्त के आलोक में माना जा सकता है कि कार्य सही रेखांकण पर कराया गया है परन्तु रेखांकण के लिये विधिवत स्वीकृत प्राप्त नहीं किया गया है।

आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव बयान में यही तथ्य उद्धित किया गया है जो इनके अतिरिक्त कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं अभियंता प्रमुख के मंतव्य से सहमत होते हुए बिना सक्षम पदाधिकारी से एलाइनमेंट का अनुमोदन प्राप्त किये ही कार्य कराया जाना स्थापित होता है। अतएव आरोप सं०-3 प्रमाणित होता है।

आरोप सं० -4 आरोप सं० -4 आरोप सं० -4 आरोप सं० -4 जो प्राक्कलन में प्रावधानुसार के विरूद्ध LWL से 0.16मी0 से 0.95 मी0 उपर के लेवल से कार्य प्रारंभ करने के कारण एप्रोन सिंक करने ही प्रबल संभावना होने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन की उड़नदस्ता जाँच केे पश्चात कार्य से संबंधित कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता द्वारा लेवल की जाँच करने पर मात्र 0.14मी0 का अन्तर है को उड़नदस्ता जाँच के समय कार्य से संबंधित सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता की उपस्थिति में जाँच दल द्वारा लेवल की जाँच किये जाने के आधार पर अस्वीकार योग्य मानते हुए इस आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया कि श्री ठाकुर द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में वहीं तथ्य उद्धित किया है जो इनके द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष कही गयी थी। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री ठाकुर को LWL से 0.16मी0 से 0.95मी0 उपर से कार्य प्रारंभ करने के लिए दोषी माना जाता है अतः आरोप सं०-4 प्रमाणित होता है।

आरोप सं० -5आरोप सं० -5आरोप सं० -5आरोप सं० -5 जो बोल्डर क्रेटिंग कार्य के मानक से अधिक Voids पाये जाने के फलस्वरूप न्यून विशिष्टि का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान होने से संंबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने आरोपी का कथन की वरीय पदाधिकारी द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया गया है एवं उनके द्वारा इस त्रुटियों की ओर इंगित नहीं किया है उक्त कथन को उड़नदस्ता टीम ने क्रेट खोलकर विधिवत Sand replacement method and density volume method से Voids की जाँच की गयी। जाँच Scientific है के आलोक में अस्वीकार योग्य मानते हुए आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी अभियंता द्वारा कहा गया है कि कार्य में प्रयुक्त कुल 10814 अद्‌द क्रेट में से मात्र एक क्रेट जाँच कर पूरे कार्य के संंबंध में अवधारणा बनाया जाना उचित नहीं है को स्वीकार योग्य माना जा सकता है। उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि जाँचित एवं प्रावधानित Voids में अन्तर मात्र 20.25-20.00=0.25 प्रतिशत आता है जिसे मैनुअली कार्य कराने के कारण Voids में यह अन्तर आना स्वभाविक है को आलोच्य कार्य में मैनुअली रूप से कराये गये कुल 10814 अद्‌द क्रेट में मात्र एक क्रेट में Voids की गणना में मात्र 0.84 प्रतिशत अनुमान्य सीमा से अधिक पाये जाने की स्थिति को स्वीकार योग्य माना जा सकता है अतएव आरोप सं०-5 अप्रमाणित होता है।

आरोप सं० -6 आरोप सं० -6 आरोप सं० -6 आरोप सं० -6 जो एकरारनामा/प्राक्कलन के विरूद्ध कार्य में मानक से काफी अधिक मात्रा में अन्डर साईज एवं ओभर साईज बोल्डर का उपयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर अनियमित भुगतान करने से संबंधित है।35 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी का कथन की अलग-अलग साईज के बोल्डर का बेसिक रेट अनुसूचित दर तालिका में एक होने के कारण वित्तयी अनियमितता नहीं हुआ है। विभिन्न साईज के बोल्डर के दर एक होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी साईज का बोल्डर का प्रयोग किया जाय। प्राक्कलन/एकरारनामा के प्रावधान के विपरीत न्यून विशिष्टि का कार्य के कारण सिस्टम फेल हो सकता है दर एक होना अलग चीज है। साईज के आधार पर गुणवत्ता अलग महत्व रखता है के आधार पर स्वीकार योग्य नहीं माना गया तथा आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है बल्कि वही तथ्य को दुहराया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं०-6 को प्रमाणित माना जाता है। आरोप सं० -7 आरोप सं० -7 आरोप सं० -7 आरोप सं० -7 जो प्रावधान के अनुसार बोल्डर क्रेटिंग कार्य में क्रेट बांधने में Binding wire का उपयोग नहीं कर न्यून विशिष्टि का कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने कहा है कि आरोपी अभियंता का कथन की Binding wire के बदले GI Wire क्रेट के निर्मित तार से क्रेट को खींचकर बाँधने का कार्य किया गया है। फलतः मोटे तौर से गुणवत्ता में सुधार हुआ है को क्रेट में मोटे तार को खींचकर ही बाँधने का भी कार्य उसी तार से किये जाने के कारण क्रेटिंग का साईज में भी कमी हो गयी जो खतरनाक स्थिति है एवं इस आरोप को आरोपी अभियंता द्वारा स्वीकार किया गया है के आधार पर स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए आरोप को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है। आरोपी अभियंता द्वारा अपने बचाव बयान में वही तथ्य उद्धित किया गया है। जो उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन में कहा गया था। इसके अतिरिक्त कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। आरोपी का कथन की 12-14Garge के जगह पर SWG GI Wire से बाँधने पर गुणवत्ता प्रभावित नहीं हुआ है को स्वीकार योग्य नहीं माना जा सकता है। क्योंकि उड़नदस्ता जाँच के क्रेट के साईज एवं मेस की संख्या में कमी पायी गयी है इस प्रकार विशिष्टि के अनुरूप कार्य नहीं कराकर प्रावधान के अनुरूप भुगतान किये जाने से अधिकाई भुगतान परिलक्षित होता है। अतएव आरोप सं०-7 प्रमाणित होता है।

आरोप सं० -8 आरोप सं० -8 आरोप सं० -8 आरोप सं० -8 जो बोल्डर पीचींग कार्य में प्रावधान के विपरीत भरे हुए/कम मोटाई बोल्डर का उपयोग कर न्यून विशिष्टि के कार्य कराकर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान करने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी का कथन कि कार्य के दौरान गुणवत्ता जाँचफल तथा अधीक्षण अभियंता मुख्य अभियंता तथा अनुवीक्षण दल द्वारा कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं की गई थी तथा इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई है को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। मात्र कहा गया है कि मुख्य अभियंता के दिनांक 01.03.2016 के स्थल निरीक्षण के पश्चात दिये गये कतिपय Lean/Flat बोल्डर को स्थल से हटवाते हुए अनुपालन प्रतिवेदन पत्रांक-437, दिनांक 26.03.16 से मुख्य अभियंता को दिया गया। इसके पश्चात किसी भी पदाधिकारी के स्थल निरीक्षण में उक्त तथ्यों का उल्लेख नहीं है एवं कार्य में भरे हुए/समतल बोल्डर का उपयोग नहीं किया गया है। जबकि उड़नदस्ता अंचल जाँच प्रतिवेदन में स्पष्ट अंकित है कि एप्रोन के टॉप एवं स्लोप में कहीं-कहीं भरा हुआ एवं कम मोटाई का पत्थर लगा हुआ पाया गया तथा मुख्य अभियंता के निरीक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि स्थल पर भरे एवं समतल बोल्डर उपलब्ध थे एवं मुख्य अभियंता के निदेश के बावजूद भी कार्य में न्यून विशिष्टि के बोल्डर का उपयोग किया जाना परिलक्षित है। अतएव संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए कार्य में न्यून विशिष्टि के बोल्डर का उपयोग कर प्रावधान के अनुरूप अनियमित भुगतान होने के आरोप को प्रमाणित माना गया है। अतः आरोप सं०-08 प्रमाणित होता है। आरोप सं० -9 आरोप सं० -9 आरोप सं० -9 आरोप सं० -9 जो स्लोप एवं एप्रोन के बीच 1 फीट गैप पाये जाने के कारण स्लोप पीचींग कार्य क्षतिग्रस्त होने की संभावना के कारण सरकारी राशि अपव्यय होने से संबंधित है।

संचालन पदाधिकारी ने अपने समीक्षा में कहा है कि आरोपी अभियंता का कथन की नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण गैप परिलक्षित हुआ था। जिसे संवेदक द्वारा Defect Liability Period में सुधार करा लिया गया है। परन्तु कार्य संवेदक द्वारा करवाया गया अथवा नहीं उसका स्पष्ट प्रमाण नहीं होना तथा गैप होना प्रमाणित होने के कारण अस्वीकार योग्य मानते हुए आरोप प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया है।

आरोपी अभियंता श्री ठाकुर द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य एवं साक्ष्य नहीं दिया गया है अतएव श्री ठाकुर, कनीय अभियंता का बचाव-बयान को संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए अस्वीकार किया जाता है। अतः आरोप सं० -9 प्रमाणित होता है।

समीक्षोपरांत उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री अंशुमण ठाकुर, तत0 कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मोतिहारी को निम्न दण्ड देने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

" 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। " 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। " 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। " 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। उक्त दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है। तदनुसार उक्त निर्णय के आलोक में श्री अंशुमण ठाकुर, कार्यपालक अभियंता, समग्र योजना, अन्वेषण एवं प्रोजेक्ट प्रीपरेशन प्रमंडल, भागलपुर को निम्न दण्ड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है। " 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। " 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। " 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"। " 3 (तीन) वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक"।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंहजीउत सिंह, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।36 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018

27 दिसम्बर 201727 दिसम्बर 201727 दिसम्बर 201727 दिसम्बर 2017

सं॰ सं॰ सं॰ सं॰ 22/नि0सि0(पट0)03-02/201622/नि0सि0(पट0)03-02/201622/नि0सि0(पट0)03-02/201622/नि0सि0(पट0)03-02/2016////2314231423142314—श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, प्रखंड-पुनपुन, जिला-पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (आई0डी0-3223) स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, भागलपुर के पदस्थापन काल में रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए मिट्‌टी भराई के लिए करीब तैतालिस हजार रूपये के काम को 4,25,000/-(चार लाख पचीस हजार रूपये) का प्राक्कलन बनाने और उसके कार्यान्वयन के संबंध में परिवाद पत्र दिनांक 25.04.07 निगरानी विभाग में दिया गया। निगरानी विभाग के तकनीकी कोषांग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में गलत प्राक्कलन बनाने, प्राक्कलन में अतिरिक्त लीड शिफ्ट का प्रावधान करने, कार्य के पूर्व प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी पुस्तिका में दर्ज नहीं करने एवं बिना वास्तिवक मापी लिए विपत्र समर्पित करने के प्रमाणित आरोप के लिए श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित कर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 विहित रीति के तहत विभागीय संकल्प ज्ञापांक-323, दिनांक 19.02.16 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

आरोप :-आरोप :-आरोप :-आरोप :-राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए श्री सुरेन्द्र सिंह यादव के खेत से हरेन्द्र सिंह के खेत होते हुए लोदीपुर प्राथमिक विद्यालय तक नदी तटबंध जमींदारी बांध पर मिट्‌टी भराई कार्य की जाँच निगरानी विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग, बिहार, पटना द्वारा की गई। निगरानी विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग, बिहार, पटना से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निम्न आरोप गठित किया गया -

1111.... प्राक्कलन में 35 प्रतिशत मिट्‌टी की मात्रा के लिए अतिरिक्त दो लीड एवं एक लिफ्ट का प्रावधान किया गया है, परन्तु मिट्‌टी के संपीडन (कं्रपेक्शन) हेतु प्रावधान नहीं किया गया है। स्पष्ट है कि प्राक्कलन के निर्माण में श्री समैयार द्वारा पर्याप्त तकनीकी ज्ञान का उपयोग नहीं किया गया है। जिसके लिए श्री समैयार प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

2222.... मापीपुस्त के पृ0-5 पर चैनेज 8 से 19 तक का एक्जेस्टींग का रिकार्ड इन्ट्री दिनांक 20.03.2007 की तिथि में कनीय अभियंता द्वारा दर्ज है। पुनः पृष्ठ 05-06 पर चैनेज 18 से 32 का प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी दिनांक 05.04.2007 को कनीय अभियंता द्वारा दर्ज किया गया। रिकार्ड मापी की जाँच सहायक अभियंता द्वारा नहीं किया हुआ है। स्पष्ट है कि श्री समैयार द्वारा अपने कर्त्तव्यों का सही तरीक से निर्वहन नहीं किया गया, जिसके लिए प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

3333.... मापीपुस्त में पूर्व की तिथि में प्रविष्टियों दर्ज करने में कनीय अभियंता के साथ श्री रंजन प्रसाद समैयार की संलिप्तता स्पष्टतः परिलक्षित होती है। जिसके लिए प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

4444.... बिना स्थल निरीक्षण के प्राक्कलन, मापीपुस्त तैयार किया जाना एवं मापीपुस्त में गलत मापी दर्ज कर अभिकर्त्ता को फायदा पहुँचाने का कार्य करने के लिए श्री समैयार प्रथम द्रष्टया देाषी प्रतीत होते हैं।

5555.... राज्य सरकार का आदेश 462, (त0प0को0) दिनांक 30.03.1982 के भाग कंडिका (ग)(10)(च) का उल्लंघन करने के लिए श्री समैयार प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

6666.... कार्य करने के पूर्व प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी नहीं दर्ज करने एवं सहायक अभियंता के रूप में श्री समैयार द्वारा रेकर्ड मापी की जाँच नहीं करने हेतु निगरानी विभाग के पत्रांक 2347, दिनांक 13.12.1983 के अनुलग्नक 2(ग), (ख) के अनुसार श्री समैयार प्रथम द्रष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।

विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोपों 01 से 06 के लिए जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया गया। विभागीय स्तर पर जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा की गई। समीक्षोपरांत निम्न निष्कर्ष अभिलेखित किया गया -

1111.... विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-1, संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए प्रमाणित प्रतीत नहीं होता है।

2222.... विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-2, 3, 4, 5 एवं 6 पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए प्रमाणित प्रतीत होता है।

उक्त विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-2, 3, 4, 5 एवं 6 पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए श्री समैयार से द्वितीय कारण पृच्छा करने का निर्णय लिया गया। विभागीय पत्रांक-2527, दिनांक 08.12.2016 द्वारा श्री समैयार से आरोप संख्या-2,3,4,5 एवं 6 पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य पर असहमति व्यक्त करते हुए आरोपवार असहमति के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गई।

श्री रंजन प्रसाद समैयार के पत्रांक-21/मुज0, दिनांक 10.10.17 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब विभाग को समर्पित किया गया। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षोपरांत निम्न निष्कर्ष अभिलेखित किया गया -

"वर्णित तथ्यों, बचाव बयान एवं जाँच प्रतिवेदन के परिप्रेक्ष्य में श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता प्रखंड-पुनपुन के विरूद्ध निगरानी विभाग के पत्रांक-2347, दिनांक 13.12.1983 के अनुलग्नक-2(ग) (ख) के अनुसार कार्य के पूर्व प्री-सेक्शन का रिकार्ड मापी दर्ज नहीं करने एवं दर्ज रिकार्ड मापी की जाँच नहीं करने का आरोप प्रमाणित प्रतीत होता है।"

अतः आरोपित पदाधिकारी श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता, प्रखंड-पुनपुन, जिला-पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, आई0डी0-3223 स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, भागलपुर के विरूद्ध बिना स्थल निरीक्षण के प्राक्कलन का स्वीकृति देना तथा मापीपुस्त तैयार किया जाना एवं मापीपुस्त में दर्ज प्रविष्टियों में कनीय37 (cid:18)बहार गजट, 14 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2018 अभियंता द्वारा की गई अनियमितता में श्री समैयार की संलिप्तता प्रमाणित होती है। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री समैयार को निम्न दंड देने का निर्णय लिया गया है -

1111.... आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। 2222.... तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। इस दंड निर्णय पर विभागीय मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री तथा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति प्राप्त है।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री रंजन प्रसाद समैयार, तत्कालीन सहायक अभियंता, प्रखंड-पुनपुन, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्यप्रमंडल-1, भागलपुर को निम्न दंड संसूचित किया जाता है। 1111.... आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। आदेश की निर्गत तिथि से चार वर्षों तक देय प्रोन्नति पर रोक। 2222.... तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक। तीन वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-बिहार-बिहार-बिहार-राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से,राज्यपाल के आदेश से, राकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहनराकेश मोहन, , , , संयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिवसंयुक्त सचिव।।।।

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अधीKकअधीKकअधीKकअधीKक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।मुPित।मुPित।मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 48484848ÑÑÑÑ571+10101010----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 14 February 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2018-02-14.7/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2018-02-14.7.