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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 22 February 2018

Published 22 February 2018

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2018-02-22.156
Languages
English, Hindi

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श्री अशोक कुमार तिवारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1032/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया सम्प्रति सेवा से बर्खास्त के विरूद्ध अररिया जिले के अन्तर्गत इंदिरा आवास की राशि राष्ट्रीय—त बैंक में नहीं जमा कराकर डेहटी पैक्स में जमा कर इंदिरा आवास योजना की मार्गदर्शिका के विपरीत कार्य करने, उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने, इंदिरा आवास मद की राशि का दुरूपयोग, गबन तथा कदाचार का मार्ग प्रशस्त करने तथा इंदिरा आवास के लाभार्थियों के चयन में भारी अनियमितता बरतने इत्यादि प्रतिवेदित आरोपों के लिए ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना की अनुशंसा के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 353 दिनांक 29.01.2009 द्वारा श्री तिवारी को निलंबित किया गया था। तत्पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9056 दिनांक 09.09.2009 द्वारा उनके विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी तथा आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

2. सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 12959/2010 अशोक कुमार तिवारी बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 19.08.2010 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में श्री तिवारी को निलंबन से मुक्त किया गया। साथ ही श्री तिवारी के निलंबन अवधि के विनियमन एवं वेतन के संबंध में उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही एवं फौजदारी मुकदमे के फलाफल के आलोक में निर्णय लिये जाने का आदेश संसूचित किया गया। 3. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ के पत्रांक 3338 दिनांक 26.11.2009 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि जाँच प्रतिवेदन में सभी तथ्यों तथा साक्ष्यों को विचारित नहीं किया गया था तथा इस मामले की पूर्ण जाँच नहीं हो सकी थी। अतः अनुषासनिक प्राधिकार के आदेशानुसार इस मामले की पुनर्जांच की आवश्यकता को देखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-18(1) के अन्तर्गत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पुनः विस्तृत जाँच हेतु संशोधित आरोप-पत्र गठित कर साक्ष्य के साथ संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराते हुए पुनः जाँच कराये जाने का निर्णय लिया गया। विभागीय पत्रांक 8389 दिनांक 26.08.2010 द्वारा श्री तिवारी के विरूद्ध गठित पूरक/संशोधित आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रेषित जाँच प्रतिवेदन, जिला पदाधिकारी, अररिया द्वारा प्रेषित जाँच प्रतिवेदन एवं साक्ष्य तथा ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना द्वारा पूरक आरोप-पत्र के साथ साक्ष्य अभिलेख2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:24)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:26)(cid:31) 22 फरवर( 2(cid:25)1$ आदि को विभागीय पत्रांक 35 दिनांक 03.01.2011 द्वारा आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को भेजते हुए पुनर्जांच कर तीन माह के अन्दर जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया।

4. आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ द्वारा पुनर्जांच के उपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन में सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

5. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँँच प्रतिवेदन पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), नियमावली, 2005 (यथा संशोधित) के नियम-14 के संगत प्रावधानों के तहत आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध ''सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं'' का दंड अधिरोपित करने का विनिश्चय किया गया।

6. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन तथा अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा विनिश्चित दंड पर श्री तिवारी से अभ्यावेदन की मांग किये जाने पर उनके द्वारा ससमय अभ्यावेदन समर्पित नहीं किया गया।

7. विनिश्चित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग किये जाने पर आयोग द्वारा विनिश्चित दंड पर सहमति संसूचित की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति प्राप्त होने के उपरान्त श्री तिवारी की सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं का दंड दिये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद्‌ द्वारा स्वी—ति दी गयी।

8. विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2977 दिनांक 24.02.2012 द्वारा श्री अशोक कुमार तिवारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1032/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया के विरूद्ध सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं का दंड संसूचित किया गया।

9. सेवा से बर्खास्तगी संबंधी आदेश के विरूद्ध श्री तिवारी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 7586/2013 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 15.07.2016 को पारित आदेश का कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"10. I find that the case of the petitioner is at least on similar footing to that of Shamim Akhtar, Surendra Roy and Gayanand Yadav, whose dismissal have already been set aside. In the result, the writ petition succeeds. The impugned order of dismissal is set aside in terms of order dated 20.5.2016, passed in C.W.J.C. Nos. 14595 of 2012 and C.W.J.C. No. 20812 of 2012, with the liberty mentioned therein."

10. सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 7586/2013 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 15.07.2016 को पारित उपर्युक्त न्यायादेष के विरूद्ध राज्य सरकार द्वारा एल0पी0ए0 संख्या 2377/2016 दायर किया गया। उक्त एल0पी0ए0 माननीय उच्च न्यायालय में सम्प्रति विचाराधीन है।

11. इस बीच सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 7586/2013 में पारित आदेश का अनुपालन नहीं होने के आधार पर श्री तिवारी द्वारा अवमाननावाद एम0जे0सी0 संख्या 1303/2017 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय का उक्त अवमाननावाद में दिनांक 07.11.2017 को पारित आदेश निम्नवत है :-

"Heard learned counsel for the petitioner and the learned Additional Advocate General No.3 appearing on behalf of the State.

A show cause has been filed today stating that an L.P.A. has been preferred against the order, which is the subject-mater of the present contempt application.

Learned counsel for the petitioner submits that till date, the matter is pending as defective and no stay order has been passed. Therefore, the contempt application may proceed as similarly situated persons have been extended the relief as sought for by the present petitioner.

List this case after two weeks, during which period the learned counsel for the State may take appropriate steps, failing which this Court shall proceed to pass further order in the contempt application."

12. उपर्युक्त सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या 7586/2013 एवं अवमाननावाद एम0जे0सी0 संख्या 1303/2017 में पारित न्यायादेश के अनुपालन के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री अशोक कुमार तिवारी को सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं का दंड संसूचन संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2977 दिनांक 24.02.2012 को निरस्त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील)3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:24)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:26)(cid:31) 22 फरवर( 2(cid:25)1$ नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत सेवा में पुनःस्थापित किये जाने का निर्णय लिया गया। पुनःस्थापन आदेश विचाराधीन एल0पी0ए0 संख्या 2377/2016 में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के फलाफल से आच्छादित होगा। 13. अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अशोक कुमार तिवारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1032/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पलासी, अररिया को सेवा से बर्खास्तगी एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भाा के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं का दंड संसूचन संबंधी विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2977 दिनांक 24.02.2012 को निरस्त करते हुए सेवा में पुनःस्थापित किया जाता है। पुनःस्थापन आदेश विचाराधीन एल0पी0ए0 संख्या 2377/2016 में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के फलाफल से आच्छादित होगा।

आदेश :- आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाषित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को दी जाय।

बिहार राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, सरकार के संयुक्त सचिव।

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