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श्री नन्द किशोर सिंह (बिहार लेखा सेवा), तत्कालीन कोषागार पदाधिकारी, अरवल के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, अरवल के पत्रांक-167/स्था॰ दिनांक 08.06.2016 द्वारा गठित आरोप पत्र (प्रपत्र-'क') पर श्री सिंह के विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना काण्ड संख्या-24/2014 दिनांक 27.03.2014 के क्रम में विधि विभाग के आदेश सं॰-12/जे॰ दिनांक 02.02.2016 द्वारा अभियोजन की स्वी—ति प्रदान की गयी।
2. श्री सिंह से वित्त विभागीय पत्रांक-5023/वि॰ दिनांक 23.06.2016 द्वारा इस मामले में स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण पर आरोपों की जाँच हेतु विभागीय संकल्प सं॰-6040 दिनांक 24.07.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी एवं गंभीर आरोपों की जाँच प्रक्रियाधीन रहने के कारण इन्हें वित्त विभागीय अधिसूचना सं॰-6037/वि॰ दिनांक 29.07.2016 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) एवं 9(1)(ग) के अन्र्तगत तात्कालिक प्रभाव से निलंबित भी किया गया था, पुनः माननीय उच्च न्यायालय, पटना में श्री सिंह द्वारा दायर CWJC No.-13816/2016 माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 19.05.2017 को पारित आदेश के अनुपालन में इन्हें वित्त विभागीय अधिसूचना संख्या 5830 दिनांक 21.08.2017 द्वारा निलंबन से मुक्त कर दिया गया।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:24)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:26)(cid:31) 22 फरवर' 2(cid:25)1(cid:30) 3. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन (पत्रांक 06/सं॰स॰को॰ दिनांक 30.01.2017) की प्रति संलग्न करते हुए संचालन पदाधिकारी के अभिमत से विरत होने के बिन्दुओं के साथ वित्त विभागीय पत्रांक 8342 दिनांक 30.10.2017 द्वारा आरोपित पदाधिकारी से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। आरोपित पदाधिकारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर की समीक्षा की गयी, जो निम्न प्रकार हैः-
(i) आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की कंडिका-1 के संबंध में उल्लेख किया गया है कि आरोप परिकल्पना आधारित है न कि प्रमाणिक साक्ष्य पर आधारित है एवं स्वतः दुर्भावना पूर्ण एवं विरोधाभाषी तथ्य से संबंध रखता है, के संबंध में कोई साक्ष्य या प्रमाणिक दस्तावेज संलग्न नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के संबंध में घटनाक्रम जिसके तहत कोषागार के संबंधित क्लर्क श्री कुमार से मिलकर काम कराने की बात तथा दिनांक 27.03.2017 को धावा दल के धावे के समय आरोपित के कार्यालय से भागने की हुयी घटना के संबंध में श्री सिंह ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
(ii) आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की कंडिका-2 के संबंध में स्पष्ट नहीं किया गया है कि विपत्र की तैयारी एवं भुगतान हेतु मामला पूर्व से हीं उनके संज्ञान में था अथवा नहीं। (iii) कारण पृच्छा के बिन्दु-3 एवं 4 के संबंध में श्री सिंह द्वारा दिनांक 03.03.2014 से 29.03.2014 के बीच प्रश्नगत विपत्रों के दुबारा प्रस्तुत न किये जाने की बात कही गयी है, परन्तु निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने दिनांक 27.03.2014 को तीनों विपत्र को आरोपित के कार्यालय से जब्त किया था। इस प्रकार तीनों विपत्र अवश्य हीं कोषागार में दुबारा प्रस्तुत किये गये थे। श्री सिंह ने कोषागार की स्थापित कार्य पद्धति, कोषागार संहिता, 2011 का उल्लेख करते हुए कोषागार संवाहक की पंजी को अपना बचाव का आधार बनाया है। पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना का पत्रांक-2241 दिनांक 11.08.2017 स्पष्ट करता है कि दिनांक 29.03.2014 को परिवादी जब कोषागार में गये तब आरोपित द्वारा इन तीनों विपत्रों (55, 57, 58/2013-14) की वापसी, आपत्ति निराकरण के संबंध में दवाब के तहत मेसेन्जर बुक पर दिनांक 03.03.2014 दर्ज कराया गया था। इस प्रकार श्री सिंह आरोप के सृजन एवं घटनाक्रम से अलग एक सैद्धांतिक पहलुओं का सहारा लेते हुए बचाव का प्रयास किया है, जो स्वीकार्य योग्य नहीं है।
(iv) कारण पृच्छा के बिन्दु-5 के संबंध में श्री सिंह ने विधि विभाग के आदेश संख्या- एस0पी0(नि0)-26/2015-12 जे0 दिनांक 02.02.2016 द्वारा अपने विरूद्ध बिना प्रमाणिक साक्ष्य के अभियोजन की स्वीकृति दिये जाने का उल्लेख किया गया है, जो इनके विरूद्ध की गयी समुचित विधिक कार्रवाई को बिना आधार के दोषपूर्ण बनाया जाना दर्शाता है। इस प्रकार श्री सिंह का उत्तर इस बिन्दु के संदर्भ में मान्य नहीं है।
(v) द्वितीय कारण पृच्छा के बिन्दु-6 के संबंध में आरोपित पदाधिकारी का कथन है कि उनके द्वारा अपने सेवाकाल में अपने दायित्वों के निर्वहन के क्रम में आपत्ति योग्य विपत्रों पर सर्वदा लिखित आपत्ति दर्ज करायी जाती थी परन्तु इसके समर्थन में श्री सिंह ने कोई साक्ष्य अथवा अन्य अभिलेख आदि की प्रति उपलब्ध नहीं करायी है। इस प्रकार श्री सिंह के यह कह देने मात्र से कि उनके द्वारा संबंधित आपत्ति योग्य विपत्र की वापसी लिखित रूप से हीं की जाती थी, यह स्थापित नहीं होता है3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:24)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:26)(cid:31) 22 फरवर' 2(cid:25)1(cid:30) क्योंकि आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में साक्ष्य कागजात प्रस्तुत नहीं किया गया है और दवाब देकर मैसेन्जर बुक पर पूर्व की तिथि दर्ज कराने की बात कही गयी है।
श्री सिंह ने अपने विरूद्ध दर्ज थाना काण्ड संख्या-24/2014 दिनांक-27.03.2014 को एक फर्जी मामला बताया है। इस संबंध में उल्लेखनीय है कि उक्त निगरानी थाना काण्ड निगरानी विभाग द्वारा आरोप के सत्यापन एवं धावादल की कार्यवाही के उपरांत दर्ज किया गया है। परिवादी श्री रामप्रवेश सिंह द्वारा शिकायत करने के पश्चात निगरानी विभाग द्वारा उपरोक्त कार्रवाई की गई है। आरोपित पदाधिकारी का कथन कि कोषागार में आगंतुक पंजी संधारित है और दिनांक-26.03.2014 को 11 बजे श्री हंस कुमार, सहायक आरक्षी निरीक्षक की कोषागार में उपस्थिति के संबंध में उक्त पंजी में अंकण नहीं है। निगरानी विभाग द्वारा इस मामले में उपलब्ध कराया गया सत्यापन प्रतिवेदन इस बात की पुष्टि करता है कि आरोपित पदाधिकारी का कथन सत्य नहीं है। आरोपित पदाधिकारी का उत्तर यथा कंडिका-5 (घ) (ड.) (च) निगरानी विभाग के कार्य प्रणाली के संबंध में है। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के बिन्दु के बचाव के संबंध में कोई तथ्यात्मक बातें नहीं रखी गयी हैं एवं संबंधित कागजात भी संलग्न नहीं किया गया है, जिसके आधार पर इनके द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार किया जा सके।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में सक्षम प्राधिकार द्वारा आरोपित पदाधिकारी श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के अधीन उनके ऊपर संचयी प्रभाव के साथ 04 (चार) वेतनवृद्धि रोकने का दण्ड अधिरोपित करने का विनिश्चित किया गया।
4. वित्त विभागीय पत्रांक 9271/वि॰ दिनांक 28.11.2017 द्वारा उक्त विनिश्चित दण्ड पर बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति माँगी गयी। इस क्रम में आयोग की पूर्ण पीठ द्वारा उक्त विनिश्चित दण्ड पर सहमति, बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2648/लो॰से॰आ॰ दिनांक 01.02.2018 प्राप्त हुयी।
5. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में सम्यक् विचारोपरांत श्री नन्द किशोर सिंह, बि॰ले॰से॰ के निलंबन अवधि को कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि नहीं मानते हुए श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 में प्रावधानित शास्ति निम्नवत् संसूचित की जाती है :-
(क) 04 (चार) वेतन वृद्धियों पर संचयात्मक प्रभाव से रोक।
आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से जयन्त कुमार सिंह, सरकार के अपर सचिव।
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