(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 1(cid:18) च(cid:20)(cid:21) 1(cid:18)4(cid:23) (cid:24)श(cid:23)(cid:25)
(स(cid:26)(cid:23) पटन(cid:4) 31(cid:18)) पटन(cid:4)(cid:30) स(cid:31)मव(cid:4)र(cid:30) 9 अ(cid:22)ील 2018 बिहार विधान-सभा सचिवालय
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अधिसूचना
28 मार्च 2018
प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य ओर हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।
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lfpo] fcgkj fo/kku lHkkA=2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 बिहार विद्युत शुल्क विधेयक, 2018 [Ñç∫ä∫Ñç∫CMP]OMNU⁄
बिहार राज्य में विद्युत ऊर्जा के उपभोग पर शुल्क उद्ग्रहण तथा इससे संबंधित अथवा उसके आनुषंगिक विषयों के लिए विधेयक।
प्रस्तावना।- चूँकि, केन्द्र सरकार द्वारा विद्युत अधिनियम, 2003 के अधिनियमितिकरण के चलते विद्युत उत्पादन, संचरण और आपूर्ति प्रबंधन में आमूल परिवर्तन किए गए हैं तथा पावर ट्रेडिंग, पावर का विनिमय, खुली पहुँच, विद्युत उत्पादन का डिलाइसेंसिग आदि लागू किए गए हैं जो बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 के भाग नहीं हैं; और उक्त विद्युत अधिनियम द्वारा किए गए परिवर्तनों पर विचारण के पश्चात् बिहार सरकार ने विचार किया है कि बिहार राज्य में उक्त विद्युत अधिनियम के अनुसार विद्युत उपभोक्ताओं के सभी कोटि को आच्छादित करते हुए तथा विद्यमान बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम को निरसित करते हुए विद्युत उपभोग पर शुल्क के उद्ग्रहण के लिए एक व्यापक विधि बनाना समीचीन है;
इसलिए, अब, भारत-गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, और आरंभ।-(1) यह अधिनियम बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 2018 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह इसके राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगा।
2. परिभाषाएँ।-(1) इस अधिनियम में, जबतक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-
(क) ''कैप्टिव उत्पादन'' से अभिप्रेत है विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-2 के खंड (8) तथा केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके अधीन इस निमित्त बनाई गई नियमावली में परिभाषित कैप्टिव उत्पादन प्लांट से उत्पादित उर्जा;
(ख) ''सह उत्पादन'' से अभिप्रेत है प्रक्रिया में उत्पादित ऊर्जा जो लगातार विद्युत सहित उपयोगी ऊर्जा का दो या अधिक रूप में उत्पादन करता है;
(ग) ''आयोग'' से अभिप्रेत है विद्युत अधिनियम की धारा-82 के अधीन राज्य सरकार द्वारा गठित बिहार विद्युत विनियामक आयोग;
(घ) ''उपभोक्ता'' से अभिप्रेत है कोई भी व्यक्ति जिसे विद्युत अधिनियम अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन अनुज्ञप्तिधारी अथवा सरकार द्वारा उसको स्वयं के उपयोग के लिए अथवा आम जन को, विद्युत आपूर्ति करने के व्यवसाय में लगे किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विद्युत की आपूर्ति की जाती है और इसमें कोई भी व्यक्ति शामिल है जिसके परिसर तत्समय, यथास्थिति, किसी अनुज्ञप्तिधारी, सरकार या ऐसे अन्य व्यक्ति के कार्यो से विद्युत प्राप्त करने के प्रयोजनार्थ जुड़े हों, किंतु इसमें ऐसा कोई व्यक्ति शामिल नहीं है जिसे उत्पादक कंपनी और किसी अनुज्ञप्तिधारी अथवा अनुज्ञप्तिधारियों के बीच करार के अधीन विद्युत की आपूर्ति की जाती है;
(ड.) ''उपभोग चार्ज'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन उपभोक्ता द्वारा उपभोग की गई ऊर्जा तथा किसी अनुज्ञप्तिधारी द्वारा, किसी अन्य व्यक्ति को, जो किसी उपभोक्ता को ऐसी अनुसार ऊर्जा की आपूर्ति करता है, जिसमें आयोग द्वारा अनुमोदित टैरिफ के मांग चार्ज, परिवर्तनीय चार्ज जैसे ऊर्जा चार्ज, ईंधन समायोजन चार्ज तथा विश्वसनीयता चार्ज शामिल हैं किंतु इसमें, यथास्थिति, विलंब या तत्परता से भुगतान, पावर फैक्टर, हारमोनिक्स, लोड फैक्टर, उस पर प्रभारित व्याज तथा निर्धारण पर प्रशमन चार्ज के लिए दंड प्रभार या प्रोत्साहन शामिल नहीं हैं;
(च) ''विद्युत निरीक्षक'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-8 की उपधारा (1) तथा विद्युत अधिनियम की धारा-162 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई व्यक्ति;
(छ) ''विद्युत अधिनियम'' से अभिप्रेत विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का 36); (ज) ''ऊर्जा'' से अभिप्रेत है किसी भी प्रयोजन के लिए उत्पादित, परिषित, वितरित, उपभुक्त, व्यापार की गई अथवा चक्रचालित विद्युत ऊर्जा;
(झ) ''उत्पादक कंपनी'' से अभिप्रेत है कोई कंपनी या निगम निकाय, या व्यष्ठि संगम या निकाय चाहे निगमित हो या नही, अथवा कृत्रिम अधिकारिक व्यक्ति जो उत्पादन स्टेशन का स्वामी हो अथवा चलाता अथवा संधारित करता हो;
() ''सरकार'' या ''राज्य सरकार'' से अभिप्रेत है बिहार सरकार; (ट) ''स्वतंत्र शक्ति उत्पादक'' से विद्युतीय ऊर्जा का उत्पादक जो एक लोक उपयोगिता न हो किंतु जो उपयोगिताओं अथवा अंतिम उपभोक्ताओं को विक्रय के लिए विद्युतीय ऊर्जा उपलब्ध कराता हो;
3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018(ठ) ''उद्योग'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य में, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन, इस रूप में घोषित कोई औद्योगिक उपक्रम और इसमें राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर, घोषित विभिन्न औद्योगिक नीतियों द्वारा आच्छादित उद्योग शामिल है;
(ड) ''निरीक्षण प्राधिकारी'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-8 की उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई प्राधिकारी;
(ढ) ''अनुज्ञप्तिधारी'' से अभिप्रेत है विद्युत अधिनियम की धारा-14 के अधीन विद्युत में परिषण, वितरण, आपूर्ति व्यापार के लिए, जिसे अनुज्ञप्ति दी गई हो और इसमें वे शामिल है जो माने गये अनुज्ञप्तिधारी की हैसियत रखते हैं और वे भी जिन्हें विद्युत अधिनियम की धारा-13 के अधीन छूट प्राप्त है।
(ण) ''खुली पहुँच'' से अभिप्रेत है आयोग द्वारा बनाए गए विनियमों के अनुसार किसी अनुज्ञप्तिधारी अथवा उपभोक्ता अथवा उत्पादन में लगे किसी व्यक्ति द्वारा परिषण लाइन वितरण प्रणाली अथवा ऐसी लाइन या प्रणाली से संबंधित सुविधाओं के उपयोग के लिए अविभेदकारी प्रावधान;
(त) ''विहित'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाई गई नियमावली द्वारा विहित; (थ) ''नवीकरणीय ऊर्जा'' से अभिप्रेत है नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत से उत्पादित ग्रिड गुणवत्ता वाली विद्युत जो धरती के प्राकृतिक वातावरण का एक भाग हो और जो कालक्रम के साथ या तो जैविक पुनर्रूत्पादन या अन्य प्राकृतिक रूप से आवर्ती प्रक्रियाओं यथा-सूर्य की रोशनी, हवा, वर्षा, ज्वार, लहरो,ं भूतापीय गर्मी, बायोमास, बायोईंधन से पुनः पूर्ति हो सके किंतु इसमें फोसिल ईंधन शामिल नहीं है;
(द) ''नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत'' से अभिप्रेत है नवीकरणीय स्त्रोत, यथा मिनी, माइक्रो तथा स्मॉल हाइड्रो, विंड, सोलर, बायोमास, जिसमें बगास अथवा एग्रीकल्चरल वेस्ट, बायोईंधन, शहरी अथवा नगरीय सॉलिड वेस्ट, औद्योगिक वेस्ट तथा भारत सरकार के नई तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त या अनुमोदित ऐसे अन्य स्त्रोत;
(ध) ''अनुसूची'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची; (न) ''स्टैंडबाई उत्पादन'' से अभिप्रेत संधारण, मरम्मति के संबंध में विद्युत आपूर्तिकर्ता द्वारा, असफलता, बाधा या लोड शेडिंग या आउटेज के कारण विद्यमान अनुज्ञप्तिधारी की विद्युत आपूर्ति की अनुपस्थिति में किया गया विद्युत उत्पादन किंतु विद्युत अधिनियम की धारा-56 के प्रावधानों के अनुसार भुगतान के व्यतिक्रम में आपूर्ति के संबंध विच्छेद के कारण नहीं;
(प) ''इकाई'' से अभिप्रेत है प्रति घंटे किलोवाट में उपभोग की गई ऊर्जा के माप की इकाई;
(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त किंतु इसमें अपरिभाषित शब्दों एवं अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे जो विद्युत अधिनियम, 2003 में उनके प्रति समनुदेशित किए गए हों।
3. उपभोग की गई ऊर्जा की इकाई पर शुल्क।- (1) उपधारा (2) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची में विनिर्दिष्ट दरों पर शुल्क (एतत्पश्चात ''विद्युत शुल्क'' के रूप में निर्देशित) उद्ग्रहित किया और राज्य सरकार को संदत्त किया जाएगाः-
(क) उपभोग चार्ज पर जहाँ ऊर्जा की आपूर्ति अनुज्ञप्तिधारी द्वारा की जाती है, या (ख) किसी व्यक्ति द्वारा उपभोग की गई ऊर्जा की इकाई जहाँ ऐसी ऊर्जा निम्नलिखित के माध्यम से उत्पादित की जाती हैः- (i) कैप्टिव उत्पादन; (ii) सह उत्पादन; (iii) स्टैंडबाई उत्पादन; (iv) नवीकरणीय ऊर्जा; अथवा (v) स्वतंत्र शक्ति उत्पादक; या
(ग) उपभुक्त ऊर्जा की इकाई जो खंड (क) एवं खंड (ख) के अधीन आच्छादित नहीं है यथा खुली पहुँच अथवा अन्य श्रोत।
(2) उपभोग चार्ज अथवा उपभुक्त ऊर्जा पर विद्युत शुल्क उद्ग्रहित नहीं किया जाएगाः-
(i) भारत सरकार द्वारा अथवा भारत सरकार को उस सरकार द्वारा उपभोग के लिए विक्रय; (ii) अपना रेलवे प्रवर्तन करनेवाली किसी रेलवे कंपनी के निर्माण, संधारण या प्रवर्तन में अथवा उस सरकार या किसी ऐसे रेलवे कंपनी को किसी रेलवे के निर्माण, संधारण, प्रवर्तन में उपभोग के लिए बेची गई;
(iii) किसी प्रयोजन के लिए जो राज्य सरकार, अधिसूचना, द्वारा, उस निमित्त लोक प्रयोजन होना घोषित करे तथा ऐसी छूट ऐसी शर्ताें और छूट के अध्यधीन हों जिसे उक्त अधिसूचना में उल्लिखित किया जाय;
4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018(iv) विद्युत अधिनियम के अधीन किसी परिषण तथा वितरण प्रणाली, उसमें उपरांत हानि सहित, के निर्माण, संधारण, प्रवर्तन से सीधे संबंधित प्रयोजनों के लिए किसी अनुज्ञप्तिधारी द्वारा अथवा आमजनों को विद्युत आपूर्ति करने के व्यवसाय में लगे किसी व्यक्ति द्वारा;
(v) उत्पादन संयंत्र के सीधे निर्माण, संधारण और प्रवर्तन से संबंधित प्रयोजनों के लिए किसी उत्पादक कंपनी द्वारा;
(vi) मेट्रो और मोनोरेल को छोड़कर वाहनों अथवा जहाजों के उपयोग के लिए इसे आपूर्ति करने के प्रयोजनार्थ किसी व्यक्ति द्वारा जहाँ ऊर्जा उत्पादित की जाती हो; (vii) जहाँ विद्युत का उत्पादन 100 भोल्ट से अनधिक किया जाता हो।
(3) उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, आवासीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त परिसरों के संबंध में, इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची के अनुसार उपभोग चार्ज पर विद्युत शुल्क उद्ग्रहीत किया और राज्य सरकार को संदत्त किया जाएगा।
4. विद्युत शुल्क में छूट देने की शक्ति।-उन शर्तो के अध्यधीन जो अधिरोपित की जाये, राज्य सरकार, यदि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझे, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, भावी अथवा भूतलक्षी प्रभाव से, ऊर्जा के उपभोग पर राज्य के पूरे अथवा किसी भाग में, परिसरों अथवा प्रयोजनों के किसी वर्ग के संबंध में, उन क्षेत्रों में और उस अवधि के लिए जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाय, अथवा विनिर्दिष्ट सीमा तक उपभोग की गई ऊर्जा के संबंध में, अनुसूची के अनुसार भुगतेय पूर्ण विद्युत शुल्क अथवा उसके भाग के भुगतान से, निम्नलिखित का ध्यान रखते हुए, छूट दे सकेगीः-
(i) इसमें प्रचलित ऊर्जा का मूल्य और उपलब्धता और औद्योगिक या कृषि विकास, शैक्षणिक, चिकित्सा सहायता, सुविधाएँ, सामाजिक स्थितियाँ की स्थिति; तथा
(ii) विभिन्न नीतियों तथा आवश्यकताओं एवं इस निमित्त विनिर्दिष्ट सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, घोषित क्षेत्रों में समग्र विकास की दशाओंः
परंतु इस अधिनियम में अंतर्विष्ट कोई बात इस अधिनियम के आरंभ के पूर्व इस संबंध में निर्गत किसी आदेश को प्रभावित नहीं करेगी और ऐसा आदेश, उसमें उल्लिखित अवधि की समाप्ति तक और जहाँ वह अवधि उल्लिखित न हो, इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन इस संबंध में किसी अगला आदेश निर्गत होने तक प्रवृत रहेगा।
5. विद्युत शुल्क की दरों को उपांतरित करने की शक्ति।-राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उन शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जांये, उपभोक्ता के किसी ऐसे वर्ग, उत्पादन के ऐसे प्रकार, वैसे क्षेत्रों तथा उस अवधि, जो विनिर्दिष्ट किए जांये, के संबंध में विद्युत शुल्क की दरों को उपांतरित कर सकेगी।
6. विद्युत शुल्क का भुगतान और वसूली।- (1) प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी इस अधिनियम के अधीन निम्नलिखित आधारित देय उचित विद्युत शुल्क, विहित समय और रीति से, संग्रह करेगा तथा राज्य सरकार को संदत्त करेगा-
(i) इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची के भाग-'क' के अनुसार धारा-3 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन वर्गीकृत उपभोक्ताओं को उसके द्वारा आपूर्ति की गई ऊर्जा के संबंध में उपभोग चार्ज;
(ii) इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची के भाग-'ग' के अनुसार, धारा-3 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अन्तर्गत वर्गीकृत खुली पहुँच सुविधा का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को चक्र चालन द्वारा आपूर्ति की गई ऊर्जा के संबंध में उपभुक्त ऊर्जा की इकाईयाँ और इस अधिनियम में संलग्न अनुसूची के भाग 'क' में उल्लेखित वितरण कंपनी या अनुज्ञप्तिधारी के उपभोग प्रभार की प्रचलित दर।
(2) वैसा भुगतेय शुल्क अनुज्ञप्तिधारी से, उसके द्वारा आपूर्ति की गई या चक्रचालित ऊर्जा के लिए, वसूलनीय राशि पर प्रथम भार होगा और उसपर राज्य सरकार का बकाया ऋण होगा।
(3) प्रत्येक व्यक्ति जो धारा-3 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन आता है, और जो पूर्णतः या अंशतः ऊर्जा का उपभोग स्वयं अथवा किसी व्यक्ति को आपूर्त्तिकर्ता है, विहित समय और रीति से, यथास्थिति, स्वयं अथवा उपभोक्ताओं जिन्हें उसने ऊर्जा की आपूर्ति की है, द्वारा उपभुक्त ऊर्जा के संबंध में इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची के भाग-ख के अनुसार उपभुक्त ऊर्जा के संबंध में, इस अधिनियम के अधीन देय उचित विद्युत शुल्क का भुगतान राज्य सरकार को करेगा। वह, अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा, जिन्हें उसने ऊर्जा की आपूर्ति की है, उपभुुक्त ऊर्जा पर विद्युत शुल्क के भाग की वसूली कर सकेगा।
(4) प्रत्येक व्यक्ति जो अनुज्ञप्तिधारी अथवा उत्पादक कंपनी नहीं है और धारा-3 की उप-धारा (1) के खंड (ग) के अधीन आता है और ऊर्जा का उपभोग स्वयं के उपयोग के लिए पूर्ण या आंशिक रुप से उपभोग करता है या किसी अन्य व्यक्ति को आपूर्ति करता है, अपने अनुज्ञप्तिधारी के माध्यम से उपभोक्ताओं को की गई ऊर्जा आपूर्त्ति या अपने द्वारा उपभोगित ऊर्जा के संबंध में इस अधिनियम के अधीन देय उचित विद्युत शुल्क का भुगतान संलग्न अनुसूची5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 के भाग 'ग' के अनुसार राज्य सरकार को करेगा। वह अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों से, जिन्हें उसने ऊर्जा की आपूर्त्ति की है, उनके द्वारा उपभुक्त ऊर्जा पर विद्युत शुल्क का भाग वसूल कर सकेगा।
(5) उपधारा (3) और (4) में अंतर्विष्ट कोई बात लागू नहीं होगी यदि ऊर्जा की आपूर्ति अनुज्ञप्तिधारी को की गई हो।
(6) जहाँ कोई व्यक्ति, विहित समय पर और विहित रीति से बकाया विद्युत शुल्क की राशि का भुगतान करने में असफल होता है या उपेक्षा करता है, यथास्थिति, अनुज्ञप्तिधारी अथवा ऊर्जा आपूर्ति करने वाला व्यक्ति, धारा-12 के अधीन राशि वसूल करने के राज्य सरकार के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उस उपभोक्ता या व्यक्ति को, जिसे ऊर्जा की आपूर्ति की गई है, न्यूनतम स्पष्ट सात दिनों की लिखित रूप से सूचना देने के बाद, अनुज्ञप्तिधारी अथवा व्यक्ति के पास जमा अथवा बकाया वापसी, यदि कोई हो, की रकम से विद्युत शुल्क की कटौती कर सकेगा। उस उपभोक्ता या व्यक्ति की ऊर्जा की आपूर्ति, यदि उसके पास प्राप्त जमा या वापसी से बकाया वसूलनीय न हो, काटी जा सकेगी और वह, उपभुक्त ऊर्जा पर उपभोग चार्ज के संबंध में बकाया किसी चार्ज या रकम की वसूली के लिए विद्युत अधिनियम की धारा-56 की उपधारा (1) द्वारा अनुज्ञप्तिधारी को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग, इस प्रयोजनार्थ, कर सकेगा।
(7) अनुज्ञप्तिधारी उस राशि के रिबेट का हकदार होगा जो राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर, उस अनुज्ञप्तिधारी द्वारा उपगत शुल्क के संग्रहण के खर्च का ध्यान रखते हुए विनिश्चित की जाय।
(8) पूर्ववर्ती उपधाराओं में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां राज्य सरकार का समाधान हो जाय कि किसी अनुज्ञप्तिधारी अथवा उपभोक्ताओं या अपने उपयोग के लिए ऊर्जा की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति की ओर से, गलत मीटर रीडिंग अथवा अनुसूची के किसी विशिष्ट भाग या खंड के अधीन गलत वर्गीकरण के चलते उचित विद्युत शुल्क के भुगतान में वास्तविक चूक हुई है तो राज्य सरकार, किसी भी समय, आदेश द्वारा, भूतलक्षी प्रभाव से, धारा-11 के अधीन विलंब से भुगतान के लिए देय, यदि कोई हो, उचित दर पर बकाए विद्युत शुल्क की राशि अथवा उसके किसी भाग की राशि और उसके ब्याज के राशि की वसूली अधित्यक्त अथवा अपलिखित कर सकेगी।
7. अनुज्ञप्तिधारी आदि द्वारा लेखा बही रखना और रिटर्न प्रस्तुत किया जाना।-प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी और ऊर्जा का उपयोग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, धारा-3 की उपधारा (2) के अधीन विद्युत शुल्क से विमुक्ति प्राप्त मामले को छोड़कर, जो धारा-3 की उपधारा (1) के अधीन आता है, विहित प्ररूप में लेखा बही रखेगा और राज्य सरकार को अथवा राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त अधिकारी को यथाविहित प्ररूप में और समय पर, यथास्थिति, उसके द्वारा उपभुक्त अथवा उसके द्वारा प्रत्येक उपभोक्ता को आपूर्ति की गई विद्युत की इकाई तथा उसपर भुगतेय शुल्क की राशि तथा धारा-6 के अधीन उसके द्वारा वसूल अथवा भुगतान की गई देय शुल्क की राशि को दर्शाते हुए रिटर्न सुपुर्द करेगा।
8. इस अधिनियम के अधीन अधिकारी।- (1) बिहार मूल्यवर्द्धित कर अधिनियम, 2005 और बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 के अधीन नियुक्त अधिकारी इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ नियुक्त समझे जाएंगे। (2) इस अधिनियम के अधीन नियुक्त प्रत्येक अधिकारी भारतीय दंडसंहिता की धारा-21 के अर्थांतर्गत लोक सेवक माना जाएगा।
9. निरीक्षण प्राधिकारी की शक्ति।-(1) इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा बनाई गई किसी नियमावली के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, निरीक्षण प्राधिकारी निम्नलिखित कर सकेगाः-
(i) वैसी बही और वैसे अभिलेखों के निरीक्षण के लिए उपस्थापन की अपेक्षा करना जो इस अधिनियम के अधीन उद्ग्रहणीय विद्युत शुल्क की राशि को विनिश्चित या सत्यापित करने के लिए आवश्यक हो;
(ii) निम्नलिखित के प्रयोजनार्थ किसी परिसर में प्रवेश करना और तलाशी लेना जहाँ ऊर्जा की आपूर्ति की जाती हो या आपूर्ति किए जाने का विश्वास हो- (क) धारा-7 के अधीन सुपूर्द किए गए रिटर्न का सत्यापन करने तथा लेखा बहियों में दिये गए विवरण ;
(ख) मीटर की चेकिंग, रीडिंग तथा जाँच करने; (ग) विद्युत शुल्क के उद्ग्रहण के संबंध में अपेक्षित विशिष्टियों को सत्यापित करने;
(iii) इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाई गई नियमावली के प्रयोजनों के क्रियान्वित करने के लिए जो आवश्यक हो वैसी अन्य शक्तियों के प्रयोग तथा वैसे कृत्यों के अनुपालन करने;
(2) उपधारा (1) के अधीन की गई सभी तलाशी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
10. शुल्क का निर्धारण।-(1) यदि विहित प्राधिकारी, किसी साक्ष्य उपस्थापन के लिए निर्धारिती की उपस्थिति की अपेक्षा किए बिना, संतुष्ट होता है कि दिया गया रिटर्न सही और पूर्ण है तो वह ऐसे रिटर्न के आधार पर निर्धारितियों के देय शुल्क की राशि का निर्धारण करेगा।
(2) (क) यदि विहित प्राधिकारी का, साक्ष्य के उपस्थापन के लिए निर्धारितियों की उपस्थिति की अपेक्षा के बिना समाधान न हों कि किसी अवधि के संबंध में दिया गया रिटर्न सही और पूर्ण है अथवा जहाँ अनुसूची के भाग या खंड के संबंध में, कि किस कोटि के अधीन, ऊर्जा का उपयोग आता है, अथवा जहाँ ऊर्जा का उपयोग विभिन्न6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 उपयोगिता प्रयोजनोंं के लिए किया जाता है, उपयोग का कौन भाग उस भाग या खंड द्वारा शासित होगा, का प्रश्न उत्पन्न हो तो वह उससे उसमें विनिर्दिष्ट तिथियों, समय तथा स्थान पर स्वयं उपस्थित होने अथवा किसी साक्ष्य को, जिसपर निर्धारिती उस रिटर्न के समर्थन में निर्भर करता हो, उपस्थापित करने अथवा करवाने हेतु अपेक्षा करते हुए निर्धारितियों को विहित रीति से सूचना देगा।
(ख) सूचना में विनिर्दिष्ट तिथि को अथवा उसके बाद, यथाशीघ्र, विहित प्राधिकारी, ऐसा साक्ष्य जो निर्धारिती उपस्थापित करे और ऐसे अन्य साक्ष्य जिसकी अपेक्षा विनिर्दिष्ट बिन्दु पर विहित प्राधिकारी द्वारा की जाय, निर्धारिती के बकाए शुल्क की राशि का निर्धारण करेगा। (3) यदि निर्धारिती किसी अवधि से संबद्ध रिटर्न देते हुए उपधारा (2) के अधीन नोटिस की सभी शर्तों को पूरा करने में असफल रहता है अथवा उसके द्वारा उपस्थापित लेखा और अन्य साक्ष्य, विहित प्राधिकारी की राय में पूर्णतः या अंशतः अशुद्ध, अपूर्ण या अविश्वसनीय हो तो उक्त प्राधिकारी, अपने सर्वोत्तम विवेक से, शुल्क की राशि, यदि कोई हो, निर्धारिती से बकाया का निर्धारण करेगा।
(4) यदि निर्धारिती किसी अवधि के संबंध में रिटर्न दाखिल करने में असफल रहता है तो विहित प्राधिकारी, निर्धारिती को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद, अपने सर्वोत्तम विवेक से, शुल्क की राशि, यदि कोई हो, निर्धारिती से बकाए का निर्धारण करेगा।
(5) यदि जानकारी प्राप्त होने पर या अन्यथा यदि विहित प्राधिकारी का समाधान हो जाय कि यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार विद्यमान है कि निर्धारिती अथवा निर्धारिती के अलावे कोई व्यक्ति किसी अवधि के संबंध में शुल्क भुगतान का दायी है और ऐसा होने पर भी रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने में जानबूझकर असफल रहता है तो विहित प्राधिकारी, निर्धारिती को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद, अपने सर्वोत्तम विवेक से, निर्धारिती अथवा किसी अन्य व्यक्ति पर ऐसी अवधि और पश्चात्वर्ती अवधि के संबंध में बकाए शुल्क की राशि, यदि कोई हो, का निर्धारण करेगा और विहित प्राधिकारी निर्धारिती अथवा किसी अन्य व्यक्ति को उस प्रकार निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त शास्ति के रूप में, उस अवधि के प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान अनुज्ञप्तिधारी अथवा कोई अन्य व्यक्ति रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करने में असफल हुआ हो, पचास रूपये की राशि अथवा निर्धारित शुल्क की राशि के समतुल्य राशि, जो भी कम हो, देने का निदेश दे सकेगाः परंतु उस अवधि की समाप्ति से, जिससे उसका संबंध हो, चार वर्षो की समाप्ति के पूर्व के सिवाय ऐसे निर्धारण के लिए कोई भी कार्यवाही आरंभ नहीं की जाएगीः परंतु और कि इस उपधारा के अधीन आरंभ की गई कोई भी कार्यवाही आरंभ की तिथि से दो वर्षो की अवधि के भीतर समाप्त कर दी जाएगी।
11. अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील।-(1) इस अधिनियम के अधीन तथा उसके अधीन बनाई गई नियमावली के अधीन शास्ति के साथ या शास्ति के बिना पारित निर्धारण आदेश पर आपत्ति करने वाला कोई अनुज्ञप्तिधारी या अन्य व्यक्ति, विहित अवधि के भीतर और विहित रीति से, विहित प्राधिकारी के समक्ष, ऐसे निर्धारण आदेश, शास्ति अथवा दोनों के विरूद्ध अपील कर सकेगाः
परंतु ऐसे प्राधिकारी द्वारा कोई भी अपील तब तक ग्रहण नहीं किया जाएगा जब तक इसका समाधान न हो जाय कि निर्धारित शुल्क का बीस प्रतिशत अथवा शुल्क की वह राशि जिसे अपीलार्थी अपने पर बकाया स्वीकार कर लिया हो, जो भी अधिक हो, संदत्त न कर दी गई हो।
(2) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील ऐसे प्ररुप और रीति में, जो विहित की जाए, माँग की सूचना की प्राप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर फाइल की जाएगी, किन्तु जहाँ अपील प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी के पास समय के भीतर अपील न करने का पर्याप्त कारण था, वहाँ वह विलम्ब को माफ कर सकेगा। (3) उन नियमों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जांय, अपीलीय प्राधिकारी उपधारा (1) के अधीन अपील का निपटारा करते समय निम्नलिखित कर सकेगाः-
(क) निर्धारण या शास्ति दोनों को बातिल संपुष्ट अथवा दोनों में कमी, बढ़ोतरी कर सकेगा; (ख) निर्धारण या शास्ति अथवा दोनों को खारिज कर सकेगा और निर्धारण करने वाले अधिकारी को, ऐसी आगे जाँच-पड़ताल, करने के बाद जिसे अपीलीय प्राधिकारी द्वारा निदेशित की जाय, नया निर्धारण करने हेतु निदेश दे सकेगा।
(4) इन नियमों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जाय और लिखितरूप में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, विहित प्राधिकारी, आवेदन पर अथवा स्वप्रेरणा से, इस अधिनियम के अधीन अथवा उसके अधीन बनाई गई नियमावली के अधीन पारित किसी आदेश का पुनरीक्षण कर सकेगाः
परंतु निर्धारिती के आवेदन पर कोई भी निर्धारण आदेश तब तक पुनरीक्षित नहीं किया जाएगा जब तक कि उस आदेश के संबंध में उपधारा (2) के अधीन कोई आदेश पूर्व में पारित न किया गया होः
परंतु और कि जहाँ विहित प्राधिकारी स्वप्रेरणा से किसी आदेश का पुनरीक्षण करता है वहाँ ऐसे पुनरीक्षण के लिए कोई भी कार्यवाही किसी भी समय उक्त आदेश की तिथि से दो वर्षो की समाप्ति के पूर्व नहीं आरंभ नहीं की जाएगी।
(5) उन नियमों के अधीन रहते हुए जो विहित किए जायं, इस अधिनियम के अधीन या उसके अधीन बनाई गई नियमावली के अधीन पारित किसी आदेश का पुनरीक्षण, उसे पारित करने वाला प्राधिकारी अथवा कार्यालय का उसका उत्तराधिकारी कर सकेगा।7 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 12. अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील।-(1) उन नियमों के अधीन रहते हुए जो राज्य सरकार द्वारा बनाए जायँ, धारा-8 के अधीन उल्लिखित प्राधिकारों में से कोई धारा-11 के अधीन उपायुक्त अथवा संयुक्त आयुक्त अथवा धारा-13 के अधीन आयुक्त द्वारा किये गये किसी आदेश से व्यथित कोई व्यापारी अथवा व्यक्ति न्यायाधिकरण के समक्ष अपील कर सकेगा।
(2) जहाँ कोई अपील किसी व्यापारी द्वारा किया गया हो वहाँ ऐसी अपील न्यायाधिकरण द्वारा तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसा व्यापारी अथवा अन्य कोई व्यक्ति, इस धारा के अधीन बीस प्रतिशत की राशि, न्यायाधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट रीति से जमा नहीं कर दे :
परंतु न्यायाधिकरण, लिखित रूप में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, इस धारा के अधीन जमा किए जाने हेतु अपेक्षित राशि को अधित्यक्त या कम कर सकेगा।
स्पष्टीकरण।- इस धारा के प्रयोजनार्थ अभिव्यक्ति ''विवादित'' राशि से अभिप्रेत होगा निर्धारित कर, उस वर्ष के संबंध में जिससे विवाद संबंधित है व्यापारी द्वारा जमा की गई कर की राशि से कटौती करने के बाद अवशेष राशि।
(3) इस धारा के अधीन अपील के लिए प्रत्येक आवेदन, उस आदेश के, जिसके विरूद्ध अपील करनी हो, संसूचना की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर दाखिल किया जाएगा किंतु जहाँ न्यायाधिकरण का समाधान हो जाय कि अपीलार्थी के पास समय के भीतर आवेदन नहीं करने के पर्याप्त कारण हैं तो वह विलंब को माफ कर सकेगा। (4) इस धारा के अधीन कोई भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि अपीलार्थी और उस प्राधिकारी को भी, जिसके आदेश के विरूद्ध अपील की गई हो, अथवा उसके प्रतिनिधि को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दिया जाए,
(5) उपधारा (1) के अधीन किसी अपील की प्राप्ति पर, न्यायाधिकरण, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, उसपर ऐसा कोई आदेश, जो उपयुक्त समझे, उस आदेश को जिसके विरूद्ध अपील की गई हो, संपुष्ट, उपांतरित, खारिज करते हुए, पारित कर सकेगा।
(6) न्यायाधिकरण अपने द्वारा किए गए प्रत्येक आदेश की प्रति अपील के पक्षकारों को और उस प्राधिकारी को, जिसके आदेश के विरूद्ध अपील की गई हो, भेजेगा।
(7) उपधारा (1) के अधीन न्यायाधिकरण के समक्ष दाखिल की गई अपील, यथासंभव शीघ्रता से, उसके द्वारा निपटाई जाएगी और उसके द्वारा, अपील प्राप्ति की तिथि से छह माह के भीतर उस अपील को अंतिम रूप से निपटाने की कोशिश की जाएगी।
13. आयुक्त की पुनरीक्षिणीय शक्ति।-आयुक्त, स्वप्रेरणा से, इस अधिनियम के अधीन किसी अधिकारी अथवा अपने अधीनस्थ व्यक्ति द्वारा अभिलिखित किसी कार्यवाही के अभिलेख को मंगा सकेगा और उसका परीक्षण कर सकेगा और यदि उसका विचार हो कि उसमें पारित कोई आदेश त्रुटिपूर्ण अथवा वह राजस्व के हित के प्रतिकूल है तो वह ऐसा आदेश, जिसे वह उपयुक्त समझे, व्यापारी अथवा संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद, पारित कर सकेगा।
14. पुनर्विलोकन।-इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, धारा-8 के अधीन नियुक्त किसी प्राधिकारी अथवा न्यायाधिकरण, अपनेे द्वारा पारित किसी आदेश का पुनर्विलोकन कर सकेगा, यदि ऐसा पुनर्विलोकन, यथास्थिति, उक्त प्राधिकारी अथवा न्यायाधिकरण की राय में, चूक, जो अभिलेख से प्रकट होती हो, के चलते आवश्यक हो;
परंतु कोई ऐसा पुनर्विलोकन यदि कर, ब्याज अथवा शास्ति अथवा किसी वापसी पर प्रभाव डालने वाला हो तो तब तक नही किया जाएगा जब तक कि, यथास्थिति, उक्त प्राधिकारी अथवा न्यायाधिकरण ने व्यापारी अथवा संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दिया हो।
15. उच्च न्यायालय के समक्ष अपील।- (1) न्यायाधिकरण द्वारा पारित प्रत्येक आदेश के विरूद्ध अपील, यदि उच्च न्यायालय का समाधान हो जाय कि मामले में विधि के सारवान् प्रश्न अंतगर््रस्त हैं, उच्च न्यायालय में संस्थित किया जायगा।
(2) न्यायाधिकरण द्वारा पारित किसी आदेश से व्यथित आयुक्त अथवा कोई व्यापारी -
(i) बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम 36, 1948) के अधीन जो धारा-23 द्वारा इसके निरसन के पूर्व था इस अधिनियम के आरंभ की तिथि को अथवा बाद; अथवा (ii) इस अधिनियम के अधीन, उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दाखिल कर सकेगा और इस धारा के अधीन ऐसी अपील व्यापारी अथवा आयुक्त को संसूचना की तिथि से नब्बे दिनों के भीतर, इस आदेश से उत्पन्न किसी प्रश्न पर दाखिल की जाएगी।
(3) जहाँ उच्च न्यायालय का समाधान हो जाय कि किसी मामले में विधि का सारवान् प्रश्न अंतगर््रस्त है वहाँ वह प्रश्न का निर्माण करेगा। (4) अपील की सुनवाई केवल इस प्रकार निर्मित प्रश्न पर की जाएगी और प्रत्यर्थी को, अपील की सुनवाई पर यह तर्क देने के लिए स्वीकार किया जाएगा कि मामले में वैसा प्रश्न अंतगर््रस्त नहीं हैः परंतु इस उपधारा की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि उच्च न्यायालय की अपील में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, उसके द्वारा विरचित न किये गये विधि के किसी सारवान् प्रश्न पर, यदि उसका यह8 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 समाधान हो जाता है कि मामले में ऐसा प्रश्न अंतर्ग्रस्त है, सुनवाई करने की शक्ति को वापस ले लिया गया है अथवा न्यून कर दिया गया है। (5)(क) उच्च न्यायालय वैसे निर्मित अथवा अंतगर््रस्त विधि के सारवान् प्रश्न को विनिश्चित करेगा और उस पर, इन आधारों को अंतर्विष्ट करते हुए जिस पर वैसा निर्णय आधारित हो, निर्णय देगा और ऐसा खर्च अवार्ड कर सकेगा जिसे वह उपयुक्त समझे। (ख) उच्च न्यायालय ऐसा कोई भी मुद्दा विनिश्चित कर सकेगा जो-
(i) न्यायाधिकरण द्वारा विनिश्चत नहीं किया गया हो, या (ii) उपधारा (1) में यथा निर्दिष्ट विधि के ऐसे प्रश्न पर विनिश्चय के कारण न्यायाधिकरण द्वारा गलत अवधारित किया गया हो।
(6) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, उच्च न्यायालय में अपील से संबंधित सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के प्रावधान, जहाँ तक हो सके, इस धारा के अधीन अपीलों के मामलें लागू होंगे। 16. उच्च न्यायालय के समक्ष मामले की सुनवाई न्यूनतम दो न्यायाधीशों द्वारा किया जाना।- (1) जब धारा-15 के अधीन उच्च न्यायालय के समक्ष कोई अपील दाखिल की गई हो तो उसकी सुनवाई उच्च न्यायालय के न्यूनतम दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा की जाएगी और ऐसे न्यायाधीशों की राय अथवा बहुमत, यदि कोई हो ऐसे न्यायाधीशों की राय के अनुसार अपील विनिश्चित की जाएगी।
(2) जहाँ बहुमत न हो, वहाँ न्यायाधीश उस विधि के प्रश्न का उल्लेख करेंगे, जिस पर उनका मतभेद हो और सिर्फ उस प्रश्न पर मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के एक या एक से अधिक अन्य न्यायाधीशों द्वारा की जायेगी और ऐसे बिन्दु का विनिश्चय उन न्यायाधीशों के बहुमत द्वारा किया जायेगा, जिन्होंने मामले की सुनवाई की है और इसमें वे न्यायाधीश भी सम्मिलित होंगे जिन्होंने पहले सुनवाई की थी।
17. विलंब से भुगतान के मामले ब्याज लागू होना।- विद्युत शुल्क के बारे में कोई बकाया राशि, यदि राज्य सरकार को समय पर विहित रीति से संदत्त न की गई हो तो बकाया समझी जाएगी तथा उस राशि पर ब्याज, बकाया हो गई ऐसी राशि के समय के तत्काल बाद पहले तीन माह के लिए डेढ़ प्रतिशत और उसके बाद उस राशि के भुगतान तक प्रतिमाह दो प्रतिशत की दर से भुगतेय होगी और उस पर किसी ब्याज के साथ वह राशि वसूली के विशेष ढं़ग के माध्यम से अथवा भू-राजस्व के रूप में वसूलनीय होगी -
(i) यदि राशि धारा-6 की उपधारा (1) के अधीन भुगतेय थी, तो उपभोक्ता से अथवा उपधारा (2) के परंतुक के अधीन रहते हुए अनुज्ञप्तिधारी या किसी व्यक्ति से जो, राज्य सरकार अथवा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी के विकल्प पर, अनुज्ञप्तिधारी के लिए अथवा बाद में कोई धन धारित करता है अथवा धारित करे।
(ii) यदि राशि धारा-6 की उपधारा (3) के अधीन भुगतेय थी, तो उपभोक्ता से अथवा ऊर्जा की आपूर्ति करने वाले और अपने स्वयं के उपयोग के लिए पूर्णतः अथवा अंशतः उपभोग करने वाले व्यक्ति से अथवा अन्य व्यक्ति को आपूर्ति करने वाला कोई व्यक्ति जिसपर अनुज्ञप्तिधारी की वजह से कोई धन देय है या हो सकता है, यथा स्थिति, राज्य सरकार अथवा इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी के विकल्प पर,
(2) जहाँ उपभोक्ता अथवा, यथास्थिति, अनुज्ञप्तिधारी अथवा अनुज्ञप्तिधारी से अन्यथा कोई व्यक्ति अथवा उत्पादक कंपनी जो धारा-6 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन आती है, विद्युत शुल्क, शास्ति एवं ब्याज के भुगतान का दायी है और यदि वह उस राशि का भुगतान जो उस प्रकार भुगतेय विद्युत शुल्क, शास्ति एवं ब्याज की कुल राशि से कम हो तो भुगतान की गयी वह राशि सबसे पहले ब्याज के मद में तत्पश्चात यदि अवशेष, यदि कोई हो, शास्ति के मद में और इसके बाद अवशेष, यदि कोई हो, विद्युत शुल्क के मद में समायोजित की जाएगी। (3) राज्य सरकार, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उपभोक्ता, जिसे अधिनियम के अधीन विद्युत शुल्क अथवा सरकार के विभिन्न स्कीम के अधीन छूट प्राप्त है, से संग्रहित विद्युत शुल्क के पूर्ण अथवा इसके भाग को वापस कर सकेगी।
18. वसूली के विशेष ढं़ग।- (1) इस अधिनियम अथवा किसी विधि या करार में अंतर्विष्ट विरूद्ध किसी बात के होते हुए भी, शुल्क के निर्धारण और वसूली के लिए विहित प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन लिखित रूप में सूचना द्वारा जिसकी एक प्रति अनुज्ञप्तिधारी अथवा शुल्क के भुगतान के दायी व्यक्ति को भी दी जाएगी, निम्नलिखित निदेश दे सकेगा-
(क) कोई व्यक्ति जो शुल्क भुगतान के दायी अनुज्ञप्तिधारी अथवा व्यक्ति के लिए उस पर कोई धन धारित करता है अथवा तत्पश्चात् धारित करें; अथवा
(ख) कोई व्यक्ति जो अनुज्ञप्तिधारी का कोई धन धारित करता हो या बाद में कर सकता हो अथवा शुल्क भुगतान का दायी व्यक्ति जो मांग सूचना में नियत तिथि तक भुगतान में असफल हो गया हो तो वैसे अनुज्ञप्तिधारी या व्यक्ति या जिसके संबंध में भुगतान की तिथि किसी प्राधिकारी द्वारा बढ़ायी नहीं गई हो तो उनपर तामील उक्त मांग सूचना के अनुसार शुल्क या शास्ति अथवा अधिभार की राशि को, उस रीति से जो शुल्क भुगतान के लिए विहित की गई हो, तुंरत अथवा धन हो जाने पर9 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 उतना धन जो अनुज्ञप्तिधारी अथवा शुल्क भुगतान के दायी व्यक्ति से बकाया राशि के भुगतान के लिए पर्याप्त हो, सरकारी कोषागार में जमा करने।
(2) उपधारा (1) के अधीन सूचना निर्गत करने वाला प्राधिकारी किसी भी समय ऐसी सूचना को संशोधित अथवा वापस ले सकेगा अथवा सूचना के अनुसरण में भुगतान करने के लिए समय को विस्तारित कर सकेगा। (3) उपधारा (1) के अधीन निर्गत किसी सूचना के अनुपालन में भुगतान करने वाला कोई व्यक्ति अनुज्ञप्तिधारी या संबंधित व्यक्ति के प्राधिकार के अधीन भुगतान करने वाला समझा जाएगा और सरकारी कोषागार की रसीद, उस रसीद में विनिर्दिष्ट राशि तक, अनुज्ञप्तिधारी अथवा संबंधित व्यक्ति के दायित्व का उस व्यक्ति के प्रति अच्छा एवं पर्याप्त निर्वहन होगा। (4) उपधारा (1) के अधीन अपने पर सूचना तामील के बाद दायित्व का निर्वहन नहीं करने वाला कोई भी व्यक्ति शुल्क अथवा शास्ति तथा अधिभार के लिए राज्य सरकार का व्यक्तिगत रूप से दायी होगा। (5) यदि वह राशि जिसके लिए कोई व्यक्ति उपधारा (4) के अधीन राज्य सरकार का व्यक्तिगत रूप से दायी हो जाता है, असंदत्त रह जाती है तो वह उससे भू-राजस्व के रूप में वसूलनीय होगी। (6) यदि कोई व्यक्ति इस धारा की उपधारा (4) के अधीन किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है तो विहित प्राधिकारी, सुनवाई का अवसर देने के बाद, लिखित रूप में आदेश देकर उसे निदेश देगा कि वह व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन भुगतेय राशि के दोगुने से अनधिक राशि शास्ति के रूप में भुगतान करेगा।
19. अपराध और शास्तियाँ।- (1) यदि कोई व्यक्ति-
(क) धारा-7 के प्रावधानों तथा धारा-15 के अधीन इस निमित्त बनाई गई नियमावली के अनुसार लेखा बहियों को रखने अथवा रिटर्न सुपूर्द करने में असफल रहता है; या
(ख) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम का उल्लंघन करता है; या (ग) इस अधिनियम के द्वारा या अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में निरीक्षण प्राधिकार को जान बूझकर बाधा पहुँचाता है तो वह दोषसिद्ध होने पर, उस जुर्माने से, जो दस हजार रूपये तक बढ़ायी जा सकेगी, दंडित किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन किए गए अपराध के संबंध में कोई भी शिकायत तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी जब तक कि वह निरीक्षण प्राधिकारी द्वारा दाखिल नहीं की जाती है।
20. कंपनियों द्वारा अपराध।- (1) जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया हो वहाँ प्रत्येक व्यक्ति जो उस समय जब अपराध किया गया हो, कंपनी के प्रभार में और कंपनी के साथ-साथ कंपनी के कारबार के संचालन के लिए कंपनी के प्रति जिम्मेदार था, इस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार कार्यवाही चलाए जाने तथा सजा के लिए दायी होगाः
परंतु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन उपबंधित किसी सजा का दायी नहीं करेगी यदि वह यह साबित कर देता है कि वह अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया है अथवा उसने उस अपराध को होने से रोकने के लिए सभी सम्यक् तत्परता का प्रयोग किया था।
(2) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कंपनी द्वारा किया गया हो और यह साबित हो गया हो कि वह अपराध कंपनी के निदेशक, प्रबंधक, सचिव अथवा अन्य अधिकारी की सहमति या मिलीभगत से किया गया है अथवा कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अथवा अन्य कर्मचारी की ओर से कोई उपेक्षा की गयी हो तो ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव अथवा अन्य अधिकारी भी इस अपराध के दोषी माने जाएंगे तथा तदनुसार कार्यवाही चलाए जाने और सजा के दायी होंगे।
स्पष्टीकरण।- इस धारा के प्रयोजनार्थ -
(क) ''कंपनी'' से अभिप्रेत है कोई निगम निकाय और इसमें फर्म, व्यष्टि संगम अथवा व्यष्टि निगम चाहे निगमित हो या नहीं; और
(ख) फर्म के संबंध में 'निदेशक' से अभिप्रेत है फर्म में कोई साझेदार और व्यष्टि संगम अथवा व्यष्टि निगम के संबंध में अभिप्रेत है उसके क्रियाकलापों को नियंत्रित करने वाला कोई सदस्य। 21. सदभाव में की गई कारवाई का संरक्षण।- किसी बात के लिए जो इस अधिनियम के अधीन सदभाव में की गई हो या किए जाने का आशयित हो, इस अधिनियम के अधीन किसी अधिकारी के विरूद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित नहीं होगी।
22. नियम बनाने की शक्ति।- (1) राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।
(2) विशिष्टतया और पूर्ववर्ती शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित के संबंध में नियम बना सकेगीः- (क) विद्युत शुल्क के भुगतान का समय और रीति विहित करने- (i) विद्युत शुल्क के भुगतान की देय तिथि; (ii) किस्तों में विद्युत शुल्क का भुगतान; (iii) परिस्थितियाँ जिसमें और शर्तें जिनके अधीन रहते हुए तथा अवधि जिसके लिए धारा-6 के अधीन विद्युत शुल्क के भुगतान का आस्थगन स्वीकृत किया जा सके;
10 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018(ख) अधिनियम के अधीन कोई रियायत या छूट सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया विहित करने; (ग) प्रारूप जिसमें लेखा बहियां रखी जाएगी तथा वह समय जब, प्रारूप जिसमें तथा अधिकारी जिनको धारा-7 के अधीन रिटर्न सुपूर्द करने की अपेक्षा की जाएगी, विहित करने; (घ) धारा-8 की उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण प्राधिकारी के कार्यों को विहित करने; (ड.) नियमों को, यदि कोई हो, विहित करना जिसके अधीन रहते हुए निरीक्षण प्राधिकारी धारा-9 की उपधारा (1) के अधीन शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा;
(च) मीटर के अधिष्ठापन और चेकिंग, रीडिंग तथा जाँच के लिए प्रक्रिया विहित करने; (छ) प्राधिकारी को प्रश्न निर्देशित करने की और उस प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों के विरूद्ध राज्य सरकार के समक्ष अपील या पुनरीक्षण दायर करने के लिए प्रक्रिया विहित करने;
(ज) इस अधिनियम के अधीन उपभोक्ता द्वारा भुगतेय राशि से अधिक दी गई विद्युत शुल्क के राशि की वापसी का दावा करने की प्रक्रिया, अवधि की सीमा विहित करने;
(झ) इस अधिनियम के अधीन किसी दस्तावेज की प्रतियों की आपूर्ति करने के लिए फीस विहित करने; () इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने हेतु उपबंध करने। (3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम तथा इस अधिनियम के अधीन निर्गत प्रत्येक अधिसूचना बनाए अथवा निर्गत करने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह कुल चौदह दिनों की अवधि के लिए जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक अनुवर्त्ती सत्रों को मिलाकर हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के जिसमें वह रखा गया हो अथवा उसके ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन किसी नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो जाएँ अथवा दोनों सदन सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए और राजपत्र में उस प्रभाव का अपना विनिश्चय अधिसूचित करें तो उस नियम का प्रभाव इस अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से यथास्थिति केवल उस उपांतरित प्रारूप में हो अथवा उसका प्रभाव नहीं होगा; फिर भी वैसा कोई उपांतरण या बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किए गए या विलोपित किसी बात की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
23. निरसन और व्यावृति।- बिहार विद्युत अधिनियम, 1948 एतद् द्वारा निरसित किया जाता हैः परंतु निरसन का निम्नलिखित पर कोई प्रभाव नहीं होगाः- (क) निरसित विधि के अधीन बनाए गए या निर्गत किसी नियम अधिसूचना, आदेश या सूचना सहित किए गए किए जाने के आशय से किया कुछ भी अथवा की गई या किए जाने के आशय से की गई किसी कार्रवाई; अथवा
(ख) निरसित विधि के अधीन की नियुक्ति, संपुष्टि या घोषणा अथवा दिया गया प्राधिकरण या छूट अथवा निष्पादित किसी दस्तावेज या लिखत; या
(ग) निरसित विधि के अधीन अर्जित उद्भूत या उपगत किसी प्राधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व; या
(घ) पूर्वोक्त किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति के संबंध में कोई अभियोजन, विधिक कार्यवाही अथवा निदान तथा यथा संस्थित जारी या प्रवृत्त कोई अभियोजन, विधिक कार्यवाही या निदान तथा यथा अधिरोपित शास्ति मानो यह अधिनियम अधिनियमित नहीं किया गया होः
परंतु और कि पूर्ववर्ती परंतुक के अधीन रहते हुए विहित शुल्क की दरें या ब्याज, बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम के प्रावधानों के अधीन निर्मित नियम या प्रारूप और निरसित प्रावधानों के अधीन की गई निरीक्षण प्राधिकारी की नियुक्ति इस अधिनियम के तत्स्थानी प्रावधानों के अधीन विहित, निर्मित अथवा किया गया समझा जाएगा और तदुनसार तब तक प्रवृत रहेगी जब तक इस अधिनियम में किए गए कुछ अथवा की गई किसी कार्रवाई द्वारा अधिक्रांत न किया गया हो।
24. कठिनाईयों को दूर करने की शक्ति।- (1) इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न हो तो राज्य सरकार, यथा अवसर उत्पन्न हो, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, कुछ भी कर सकेगी जो इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत न हो और जो कठिनाई को दूर करने के प्रयोजनार्थ आवश्यक एवं समीचीन प्रतीत होः परंतु कोई भी ऐसा आदेश इस अधिनियम के आरंभ की तिथि से दो वर्षों की अवधि की समाप्ति के बाद नही किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश बनाए जाने के बाद यथाशक्य शीघ्र राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।11 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018
अनुसूची
भाग-क
(धारा-3 और 6 देखें)
| क्र0 | विद्युत विपत्र की ट ै रिफ कोटि | उपभोक्ताओं की विभिन्न कोटि को आपूर्त्ति की गई विद्युत की उपयोगिता का प्रयोजन। | दर |
| 1. | भाग-क आवासीय | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की टैरिफ अनुसूची के अनुसार - (i) आवासीय- व्यक्तिगत गरीबी रेखा से नीचे; (ii) आवासीय- व्यक्तिगत गैर गरीबी रेखा से नीचे; (iii) आवासीय- कम्प्लेक्स में सामान्य सुविधाएँ जैसे रोशनी, जल, लिफ्ट, मनोरंजन या सामुदायिक भवन, क्लब, जिमनैजियम, स्वीमिंग पूल इत्यादि; (iv) आवासीय- छात्रावास, कामगार महिलाएँ अथवा प ुरूष छात्रावास; (v) आवासीय- निराश्रय, शारीरिक अथवा मानसिक रूप से निःशक्त, वृद्धावस्था के लिए छात्रावास या गृह, अनाथालय, राहत शिविर, पागलखाना, धर्मशाला; (vi) पूजा के धार्मिक स्थल; (vii) शारीरिक रूप से निःशक्त व्यक्तियों द्वारा चलाए जाने वाले टेलिफोन बूथ; (viii) आवासीय के अधीन कोटिकृत किंतु सामाजिक कारण के लिए; (ix) उपयु र्क्त से अनाच्छादित कोई अन्य परिसर | उपभोग चार्ज की बीस प्रतिशत से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
| 2. | भाग-ख वाणिज्यिक | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की टैरिफ अनुसूची के अनुसार- (i) कारबार अथवा वाणिज्यिक स्थापना- कॉरपोरेट या प्रशासनिक कार्यालय या दुकान या शॉपिंग मॉल या शो-रूम, बैंक, ए॰टी॰एम॰ इत्यादि; (ii) कारबार या वाणिज्यिक स्थापनाओं मे सामान्य सुविधाएँ ं जैसे-रोशनी, लिफ्ट सुरक्षा अग्निशमन वाटर पम्पिंग; (iii) सामुदायिक केन्द्र- विवाह, सामुदायिक, सेमिनार, प्रदर्शनी, मीटिंग अथवा टाउन हॉल; (iv) लोक मनोरंजन- सिनेमा, थियेटर, स्टूडियो, मल्टीप्लेक्स, लीजर अथवा मनोरंजन स्थल; (v) आतिथ्य- होटल, गेस्ट हाउस, पर्यटन केन्द्र, रेस्तरां, आइसक्रीम पार्लर, कॉफी शॉप, फास्ट फूड सेन्टर या स्टॉल इत्यादि; (vi) संचार-टेलिफोन एक्सचेंज, मोबाईल टावर, सैटेलाइट एंटीना, पब्लिक कॉल सेंटर या बूथ टी॰भी॰ या रेडियो स्टेशन इंटरनेट या साइबर कैफे इत्यादि; (vii) सर्विस ओरियेंटेड- ब्यूटी पार्लर, सैलून सर्विस या मरम्मति केन्द्र, लॉऊन्ड्री, गैरेज, टेलरिंग, कॉल सेन्टर इत्यादि; (viii) संस्थान- शैक्षणिक, प्रशिक्षण; (ix) स्वास्थ्य क्रियाकलाप- स्पोर्ट स ् क्लब, ह ल्थ े क्लब, जिमनैजियम, स्विमिंग पूल इत्यादि (x) निर्माण- नयी अथवा नवीकरण इमारतें, संरचना, बुनियादी ढ़ाँचा, सड़क, हवाई अड्डा सुरंग, उपयोगिताएँ इत्यादि (xi) स्मारक या पुरातत्व या ऐतिहासिक इमारतों, संरचना, स्थल इत्यादि का बाह्य प्रदीपन; (xii) विज्ञान और शोध- शोध एवं विकास केन्द्र, प्रयोगशाला, अक्वाकल्चर, मछली पालन, रेशम उत्पादन, पशुपालन, इनसेमिनेशन; (xiii) अक्वाकल्चर, रेशम उत्पादन, मछली पालन; (xiv) हॉस्पीटल, क्लिनिक, डिसपेन्सरिज, प ैथोलोजिकल लेबोरेट्रीज या डायग्नोस्टिक सेन्टर अथवा रेडियोलोजी इमेजिंग सेन्टर इत्यादि; | उपभोग चार्ज की तीस प्रतिशत से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
| (xv) सूचना प्रावैधिकी (आई0टी0)- साफ्टवेयर डेवलपमेंट, डाटा प्रोसेसिंग इत्यादि जो उद्योग श्रेणी के अधीन मान्यता प्राप्त नहीं है एवं सरकार द्वारा ऐसी हैसियत प्रदान नहीं की गयी है ; (xvi) उपभोक्ता द्वारा उपयोगिता सुविधा के रुप में विद्युत के साथ किराये पर या पट्टे पर दिया गया परिसर; (xvii) वाणिज्यिक के अधीन कोटिकृत किंतु सामाजिक प्रयोजन के लिए नहीं ; (xviii) उपयु र्क्त से अनाच्छादित कोई अन्य स्थापना। | |||
| 3. | भाग-ग क षिजन्य ृ | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की टैरिफ अनुसूची के अनुसार- (i) पम्पिंग; (ii) म र्गीपालन; ु (iii) हाईटेक ग्रीन हाउस, टिशू कल्चर, मसरूम इत्यादि; (iv) फ्लोरिकल्चर, हार्टिक्लचर, नर्सरी, प्लान्टेशन, (v) क न क्रशर, फोडर कटर इत्यादि कृषि प्रोसेस तथा स्वयं के े उपयोग के लिए किंतु ऑयल मिल, फ्लॉर मिल के लिए नहीं इत्यादि; (vi) कोल्ड स्टोरेज, प्री-कूलिंग; (vii) कृषि के अधीन कोटिकृत किंतु सामाजिक प्रयोजन के लिए नहीं; (viii) उपर्युक्त से अनाच्छादित कोई अन्य कृषि क्रियाकलाप | उपभोग चार्ज की बीस प्रतिशत से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
| 4. | भाग-घ अस्थायी | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की टैरिफ अनुसूची के अनुसार- (i) अस्थायी विद्युत आपूर्ति के साथ धार्मिक विद्युतीय अधिष्ठापन; (ii) अस्थायी कोटिकृत के अधीन किंतु सामाजिक प्रयोजन के लिए नही; (iii) अस्थायी विद्युत आपूर्ति के साथ, धार्मिक से अन्यथा, कोई विद्युतीय अधिष्ठापन। | उपभोग चार्ज की तीस प्रतिशत से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
| 5. | भाग-ड. विज्ञापन तथा होर्डिंग | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की टैरिफ अनुसूची के अनुसार- विज्ञापन या साईन बोर्ड, होर्डिंग विज्ञापित करना इत्यादि। | उपभोग चार्ज की तीस प्रतिशत से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
| 6. | भाग-च औद्योगिक | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की टैरिफ अनुसूची के अनुसार- (i) आटामिल, दालमिल, राइस मिल, पोहा मिल, सॉ मिल, पावरलूम, अन्य संबद्ध क्रियाकलाप जैसे- वार्पिंग, डब्लिंग, टि्वस्टिंग, इत्यादि; (ii) आईस फैक्ट्री, आईसक्रीम विनिर्माण इकाई, मिल्क प्रोसेसिंग अथवा चिलिंग प्लान्टस (डेयरी); (iii) इन्जीनियरिंग वर्कशॉप, इन्जीनियरिंंग गुडस मैनुफैक्चरिंग य निट्स, प्रि ू टिग प्रेस, ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग वर्कशॉप ; ं (iv) माइनिंग, क्वेरी तथा स्टोन क्रशिंग यूनिट्स (v) गारमेन्ट्स मैनुफैक्चरिंग यूनिटस; (vi) एल॰पी॰जी॰ या सी॰एन॰जी बॉटलिंग प्लान्ट्स आदि; (vii) केवल औद्योगिक क्षेत्र के भीतर अवस्थित एसोसियेशन द्वारा स्वपोषित, संचालित, प्रबंधित सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लान्ट या कॉमन इफ्लूऐन्ट ट्रिटमेंट प्लान्ट (viii) सूचना प्रावैधिकी (आई0टी0) उद्योग कोटि के अधीन मान्यताप्राप्त और राज्य सरकार द्वारा दी गई ऐसी | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की ट रिफ अनुसूची के अनुसार उपभोग ै चार्ज की पन्द्रह प ्रतिशत से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
| हैसियत रखने वाले आई0टी0 पार्क साफ्टवेयर डेवलपमेंट, डाटा प्रोसेसिंग इत्यादि; (ix) उद्योग के अधीन कोटिकृत किंतु सामाजिक प्रयोजन के लिए नहीं; (x) औद्योगिक नीति के अधीन बिहार सरकार के उद्योग विभाग द्वारा यथा वर्गीकृत कोटि या कोटियाँ; (xi) उपयु र्क्त से अनाच्छादित कोई अन्य उद्योग। | |||
| 7. | भाग-ज मोनो एवं मेट्रो रेल | बिहार विद्युत विनियामक आयोग की टैरिफ अनुसूची के अनुसार। | उपभोग चार्ज की बीस प्रतिशत से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। |
भाग-ख
(धारा-3 और 6 देखें)
| निम्नलिखित से उत्पादित शक्ति का उपयोग | प्रयोजन | दर |
| (i) कैप्टिव पावर, (ii) सह उत्पादन से पावर, (iii) स्टैंडबाई उत्पादन, (iv) नवीकरणीय ऊर्जा से पावर, (v) स्वतंत्र पावर उत्पादक (आई0पी0सी0) | (i) स्व उपयोग (ii) अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों को आपूर्ति | एक रूपये पचास पैसे प्रति यूनिट से अनधिक दर या ऐसी दर जो राज्य सरकार भावी अथवा भूतलक्षी रूप से राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। अनुसूची-'क' के अनुसार वितरण कंपनी अथवा अनुज्ञप्तिधारी की प्रचलित दर जिसे राज्य सरकार भावी या भूतलक्षी रूप से, अधिसूचना द्वारा, राजपत्र में विनिर्दिष्ट करे। |
भाग-ग
(धारा-3 और 6 देखें)
| क्र0 | उत्पादन कोटि | उपयोगिता प्रयोजन | दर |
| 1. 2. | खुली-पहुँच अन्य | (i) स्व उपयोग (ii) अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों को आपूर्ति | अनुसूची-'क' के अनुसार वितरण कंपनी अथवा अनुज्ञप्तिधारी की प्रचालत दरें जिन्हें राज्य सरकार, भावी अथवा भूतलक्षी रूप से, अधिसूचना द्वारा राजपत्र में विनिर्दिष्ट करें। |
वित्तीय संलेख
दिनांक 01.07.2017 से राज्य में माल और सेवा कर अधिनियम लागू किया जा चुका है। फलतः अप्रत्यक्ष करों से संबंधित राज्य के अधिकांश अधिनियम इसमें समाहित हो गये हैं किन्तु बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 जीएसटी की परिधि से बाहर रखा गया है। जीएसटी प्रणाली से प्राप्त होनेवाले राजस्व के अलावा यह अधिनियम राज्य के कर-राजस्व का एक महत्वपूर्ण श्रोत है।
बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम वर्ष 1948 से राज्य में लागू है। यह अधिनियम मुख्यतया भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 के प्रावधानों के अनुरुप बनाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 लागू होने के पश्चात् विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। इन सुधारों मेंं कई नई अवधारणायें यथा पावर ट्रेडिंग (Power Trading), पावर का विनियम (Exchange of Power), ओपन एक्सेस (Open Access) आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इस क्षेत्र में विद्युत ऊर्जा के उत्पादन को भी लाइसेंस मुक्त किया गया है। फलस्वरूप कई राष्ट्रीय कम्पनियों को इस प्रतिबंधित क्षेत्र में कारोबार करने का अवसर प्राप्त हुआ है। इन नई परिस्थितियों के अनुसार कई राज्यों द्वारा अपने-अपने विद्युत शुल्क अधिनियम में यथोचित परिवर्तन कर लिये गये, किन्तु बिहार राज्य में समग्र रूप से परिवर्तन नहीं किये जा सके। फलतः पुराने अधिनियम में व्यापक संशोधन करने के बजाय इसके स्थान पर नया बिहार विद्युत शुल्क विधेयक, 2018 को लाये जाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित विधेयक में लाईसेन्सी की परिभाषा एवं कर का प्रभार में व्यापक परिवर्तन करते हुए कर प्रभार का आधार उपभुक्त विद्युत ऊर्जा को बनाया गया है। इससे विद्युत शुल्क अधिनियम के प्रशासन, कर के आरोपण, उद्ग्रहण, वसूली एवं भुगतान में सरलता आएगी तथा कर-विवाद की संख्या भी कम होगी। विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।
(सुशील कुमार मोदी) भार-साधक सदस्य
उद्देष्य एवं हेतु
दिनांक 01.07.2017 से राज्य में माल और सेवा कर अधिनियम लागू किया जा चुका है, किन्तु बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 जीएसटी की परिधि से बाहर रखा गया है। जीएसटी प्रणाली से प्राप्त होनेवाले राजस्व के अलावा यह अधिनियम राज्य के कर-राजस्व का एक महत्वपूर्ण श्रोत है।
2. बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम वर्ष 1948 से राज्य में लागू है। यह अधिनियम मुख्यतया भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 के प्रावधानों के अनुरुप बनाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 लागू होने के पश्चात् विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। इन सुधारों मेंं कई नई अवधारणायें यथा पावर ट्रेडिंग (Power Trading), पावर का विनियम (Exchange of Power), ओपन एक्सेस (Open Access) आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इस क्षेत्र में विद्युत ऊर्जा के उत्पादन को भी लाइसेंस मुक्त किया गया है। फलस्वरूप कई राष्ट्रीय कम्पनियों को इस प्रतिबंधित क्षेत्र में कारोबार करने का अवसर प्राप्त हुआ है। इन नई परिस्थितियों के अनुसार कई राज्यों द्वारा अपने-अपने विद्युत शुल्क अधिनियम में यथोचित परिवर्तन कर लिये गये, किन्तु बिहार राज्य में समग्र रूप से परिवर्तन नहीं किये जा सके।
3. फलतः पुराने अधिनियम में व्यापक संशोधन करने के बजाय इसके स्थान पर नया बिहार विद्युत शुल्क विधेयक, 2018 को लाये जाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित विधेयक में लाईसेन्सी की परिभाषा एवं कर का प्रभार में व्यापक परिवर्तन करते हुए कर प्रभार का आधार उपभुक्त विद्युत ऊर्जा को बनाया गया है। इससे विद्युत शुल्क अधिनियम के प्रशासन, कर के आरोपण, उद्ग्रहण, वसूली एवं भुगतान में सरलता आएगी तथा कर-विवाद की संख्या भी कम होगी। 4. यही इस विधेयक का उद्देश्य है जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।
(सु(सु(सु(सुशील कुमार मोदी)शील कुमार मोदी)शील कुमार मोदी)शील कुमार मोदी) भार-साधक सदस्य ।
पटना दिनांक-28.03.2018
jke Js"B jk;] सचिव, बिहार विधान-सभा ।
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