(cid:1)नबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट
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(स(cid:26)(cid:23) पटन(cid:4) 32(cid:23)) पटन(cid:4)(cid:31) स मव(cid:4)र(cid:31) 9 अ(cid:22)ील 2018 बिहार विधान-सभा सचिवालय
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अधिसूचना
28 मार्च 2018
सं॰ वि॰स॰वि॰-06/2018-3112/वि॰स॰—'' बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् विधेयक, 2018'', जो बिहार विधान-सभा में दिनांक 28 मार्च 2018 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधान-सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उद्देश्य ओर हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।
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lfpo] fcgkj fo/kku lHkkA=2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् विधेयक, 2018 [Ñç∫ä∫Ñç∫CMQ]OMNU⁄ बिहार राज्य में उच्चतर शिक्षा परिषद् की स्थापना और उससे संबंधित तथा उसके आनुषंगिक प्रावधान करने के लिए विधेयक।
प्रस्तावनाः- चूँकि भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 में उच्चतर शिक्षा के लिए राज्यस्तरीय योजना एवं समन्वय राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् के माध्यम से किए जाने की अनुशंसा सन्निहित है;
चूँकि भारत सरकार द्वारा उच्चतर शिक्षा के उन्नयन हेतु राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना प्रारम्भ किया गया है तथा इस योजना को लागू करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2013 में ही लिया जा चुका है। चूँकि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान का दिशा-निर्देश भी (i) शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं समाजिक न्याय के उन्नयन हेतु सरकार के नीति सूत्रण एवं भविष्योन्मुखी योजना (ii) राज्य में उच्चतर शिक्षा के सभी संस्थानों के बीच स्वायत्तता, पारदर्शिता एवं समन्वय सुनिश्चित करने (iii) राज्य के समाजिक आर्थिक आवश्यकता के अनुसार उच्चतर शिक्षा में समाज के आर्थिक समाजिक आवश्यकता के अनुसार सामन्जस्यपूर्ण विकास के दिशा-निर्देश, के उद्देश्य से राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् के गठन हेतु प्रावधान किया गया है।
चूॅंकि भारत सरकार के राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किए गए अनुशंसा तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के राज्य में संचालन हेतु विभागीय अधिसूचना संख्या 687 दिनांक 28.03.2014 के द्वारा औपबंधिक रूप से राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् का गठन किया गया है;
अतः राज्य में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना के सम्यक रूप से क्रियान्वयन हेतु तथा औपबधिक रूप से गठित किए गए राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् को स्थायित्व प्रदान करने हेतु स्थायी रूप से राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् का गठन करने का निर्णय लिया गया है,
भारत-गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, अनुप्रयोग एवं प्रारम्भ।- (1) यह अधिनियम बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् अधिनयम, 2018 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) इसका राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा उच्चतर शिक्षा के संस्थानों के लिए अनुप्रयोग किया जाएगा।
(4) यह तत्काल प्रभाव से प्रवृत्त होगा।
2. परिभाषाएँ।-इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो -
(क) ''महाविद्यालय'' से अभिप्रे्रत है कोई महाविद्यालय अथवा संस्थान जो किसी विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित अथवा अनुमोदित हो अथवा उससे संबद्ध हो तथा विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए किसी पाठ्यक्रम में नामांकन लिया जाता हो तथा इसमें स्वायत्तता प्राप्त महाविद्यालय भी शामिल है;
(ख) ''परिषद्'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्;
(ग) ''उपाधि'' से अभिप्रेत है किसी विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त कला, विज्ञान, वाणिज्य, ललित कला, अभियांत्रिकी, औषधि, तकनीकी, प्रबंधन, विधि या किसी अन्य विषय की उपाधि जिसमें स्नातकोत्तर उपाधि भी शामिल है;
(घ) ''डिप्लोमा'' से अभिप्रेत है स्नातक के उपरांत किसी पाठ्यक्रम के पूर्ण होने पर डिप्लोमा की उपाधि, किन्तुु इसमें सर्टिफिकेट कोर्स पाठ्यक्रम शामिल नहीं है;
(ड.) ''सरकार '' से अभिप्रेत है बिहार राज्य सरकार; (च) ''उच्चतर शिक्षा'' से अभिप्रेत है किसी विश्वविद्यालय से किसी डिग्री अथवा डिप्लोमा की उपाधि के लिए प्राप्त की गई व्यावसायिक, तकनीकी अथवा अन्य प्रकार की शिक्षा;
(छ) ''उच्चतर शिक्षा संस्थान'' से अभिप्रेत है कोई संस्थान जो राज्य सरकार द्वारा उच्चतर शिक्षा के लिए अनुमोदित किसी पाठ्यक्रम का संचालन करता हो,
(ज) ''सदस्य'' से अभिप्रेत है परिषद् का कोई सदस्य और इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य सचिव-सह-राज्य परियोजना निदेशक शामिल है;
(झ) ''विनियमावली'' से अभिप्रेत है परिषद् द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाई गई कोई विनियमावली; (ञ) ''विश्वविद्यालय'' से अभिप्रेत है पटना विश्वविद्यालय, पटना; मगध विश्वविद्यालय, बोधगया; वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा; बाबा साहेब भीम राव अम्बेदकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर; जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा; तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर; ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा; भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा; कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा; मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, पटना। आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना, बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 के अधीन स्थापित विश्वविद्यालय अथवा ऐसे अन्य विश्वविद्यालय जो बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा बनाये गए किसी3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 विधि के अधीन बिहार राज्य में स्थापित होे, जिसपर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 लागू होता हो;
(ट) ''विश्वविद्यालय अनुदान आयोग'' से अभिप्रेत है विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 4 के अधीन गठित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग;
(ठ) ''राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान'' से अभिप्रेत है, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं संचालित राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना; (ड) ''राज्य'' से अभिप्रेत है, बिहार राज्य।
3. उच्चतर शिक्षा के लिए परिषद् की स्थापना।- (1) राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रावधान के अधीन अधिसूचना द्वारा बिहार राज्य उच्चत्तर शिक्षा परिषद् का गठन करेगी।
(2) परिषद् एक निगमित निकाय होगी, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार तथा एक सामान्य मुहर (सील) होगी एवं उक्त नाम से वह वाद ला सकेगी और उसपर वाद लाया जा सकेगा। (3) परिषद् का मुख्यालय पटना में अवस्थित होगा।
4. परिषद् की संरचना।- (1) परिषद् निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर होगीः-
(क) शिक्षा/उच्चतर शिक्षा के प्रभारी मंत्री -पदेन अध्यक्ष; (ख) उपाध्यक्ष- अभिलेख से साबित प्रोफेसर रैंक के एक प्रख्यात शैक्षणिक प्रशासक होंगे; (ग) उच्च शिक्षा के प्रभारी अपर सचिव/विशेष सचिव/सचिव-सदस्य सचिव-सह-राज्य परियोजना निदेशक
(घ) सचिव/प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग - पदेन सदस्य; (ङ) सचिव/प्रधान सचिव, वित्त विभाग - पदेन सदस्य; (च) सचिव/प्रधान सचिव, उद्योग विभाग - पदेन सदस्य; (छ) सचिव/प्रधान सचिव, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग - पदेन सदस्य; (ज) सचिव/प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग - पदेन सदस्य; (झ) निदेशक, उच्च शिक्षा - पदेन सदस्य; (ञ) निदेशक, विज्ञान एवं प्रावैद्यिकी विभाग, बिहार- पदेन सदस्य; (ट) सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अथवा उनके नामित प्रतिनिधि- पदेन सदस्य; (ठ) कला, विज्ञान एवं प्रावैद्यिकी, संस्कृति, सिविल सोसायटी एवं उद्योग, व्यवसायिक शिक्षा तथा कौशल विकास के क्षेत्र से जुडे़ हुए राज्य सरकार द्वारा मनोनीत कुल 05 (पाँच) व्यक्ति- सदस्य;
(ड़) विश्वविद्यालय के कुलपतियों में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत तीन (03) सदस्य, जिसमें राज्य में अवस्थित केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति भी शामिल हैं, यदि कोई हों;
(ढ़) राज्य में संचालित विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में से राज्य सरकार द्वारा मनोनीत प्रोफेसर रैंक के दो सदस्य;
5. परिषद् की सदस्यता के लिए निरर्हताएँ।- कोई भी व्यक्ति परिषद् के उपाध्यक्ष नियुक्त होने अथवा सदस्य मनोनीत होने निरर्हित होगा यदि-
(क) वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो; (ख) उसे दिवालिया घोषित करने का न्याय निर्णय प्रक्रियाधीन हो अथवा दिवालिया घोषित किया जा चुका हो;
(ग) उसे किसी अपराध, जिसमें नैतिक अधमता शामिल हो, के लिए दंडित किया जा चुका है; (घ) यदि परिषद् में कार्यरत एवं परिषद् से भुगतान प्राप्त करने वाला कोई कर्मचारी हो; (ड़) वह राज्य सरकार द्वारा विहित किसी नियम के तहत अयोग्य घोषित होने के लिए पात्र हो;
6. उपाध्यक्ष एवं मनोनीत सदस्यों की सेवा निबंधन और शर्त्तें।-
(1) उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा 75 वर्ष होगी। (2) उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। उपाध्यक्ष पाँच वर्षों की कालावधि के लिए पद धारित करेंगे और वेे पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे।
(3) मनोनीत सदस्य तीन वर्षों के लिए पद धारण करेंगे तथा पूर्ण कार्यकाल के लिए पुनः मनोनयन के लिए पात्र होंगेः
परंतु इस उपधारा के प्रयोजनार्थ कोई व्यक्ति, जो उपाध्यक्ष अथवा मनोनीत सदस्य के रूप में आकस्मिक रिक्ति के फलस्वरूप न्यूनतम एक वर्ष तक पदारूढ़ रहा है, उसे पूर्ण कार्यकाल तक पद पर कार्यरत समझा जाएगा।
(4) उपाध्यक्ष अथवा मनोनीत सदस्य, यथास्थिति, सरकार अथवा परिषद् को अपने हस्तलिखित संबोधन से त्याग पत्र दे सकेंगे परंतु वे तबतक अपने पद पर बने रहेंगे, जब तक कि यथास्थिति, सरकार अथवा परिषद् द्वारा उनका त्याग-पत्र स्वीकृत नहीं किया जाता है।
(5) इस धारा के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, उपाध्यक्ष एवं मनोनीत सदस्यों की सेवा के निबंधन और शर्त्तें वही होंगी, जो विहित की जाये।
(6) उपाध्यक्ष उन शक्तियों का प्रयोग एवं उन कृत्यों का पालन करेंगे, जो विहित किये जाये।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 7. सदस्य सचिव-सह-राज्य परियोजना निदेशक की सेवा निबंधन और शर्त्तें।- (1) सदस्य सचिव-सह-राज्य परियोजना निदेशक भारतीय प्रशासनिक सेवा संवर्ग के उच्च शिक्षा के प्रभारी सचिव/विशेष सचिव/अपर सचिव होंगे। उनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
(2) सदस्य सचिव-सह-राज्य परियोजना निदेशक उन शक्तियों का प्रयोग एवं उन कृत्यों का पालन करेंगे, जो इस अधिनियम के अधीन उन्हे प्रदत अथवा अधिरोपित किये गये हों अथवा अन्य वैसी शक्तियाँ एवं कृत्य जो विहित किये जाएँ।
8. परिषद् की सदस्यता से हटाया जाना।- यदि किसी समय राज्य सरकार को ऐसा प्रतीत हो कि उपाध्यक्ष अथवा कोई मनोनीत सदस्य पद पर बने रहने के अनुपयुक्त है अथवा किसी दुराचार के अथवा उपेक्षा के लिए दोषी है, जिससे उनको हटाया जाना समीचीन है, तो राज्य सरकार, यथास्थिति, उपाध्यक्ष अथवा ऐसे मनोनीत सदस्य को कारण दर्शाने हेतु युक्तियुक्त अवसर देने के बाद यथास्थिति, उपाध्यक्ष या मनोनीत सदस्य को पदमुक्त कर सकेगी। 9. आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना।- यदि उपाध्यक्ष अथवा किसी मनोनीत सदस्य की मृत्यु, पदत्याग, हटाये जाने अथवा अन्यथा कारण से इस पद की आकस्मिक रिक्ति होती है, तो वैसी रिक्ति सरकार द्वारा, यथाशीघ्र, भरी जाएगी तथा ऐसे नियुक्त/मनोनीत उपाध्यक्ष अथवा सदस्य, जिस उपाध्यक्ष अथवा मनोनीत सदस्य की पद रिक्तता के कारण नियुक्त हुए हों, उसके कार्यकाल की केवल शेष अवधि के लिए पदधारित कर सकेेंगे। 10. तकनीकी सहायता समूह।-(1). राज्य उच्चत्तर शिक्षा परिषद्, विशेषज्ञों मिलाकर एक तकनीकी सहायता समूह की नियुक्ति कर सकेगी।
(2). तकनीकी सहायता समूह की संरचना का निर्णय परिषद् द्वारा लिया जाएगा। (3) तकनीकी सहायता समूह के कार्य निम्नवत् होंगे :-
(क) सूचना तथा निधि के प्रवाह का मॉनिटर करना। (ख) समान्य प्रबंधन सूचना तंत्र की रिपोर्ट, आवश्यकतानुसार, तैयार करना। (ग) परिषद् के प्रर्वतन सहायता उपलब्ध करना।
11. परिषद् की शक्तियाँ एवं कृत्य।- (1) परिषद् के कृत्य, समय-समय पर, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों के अनुसार, उच्चतर शिक्षण संस्थानों अथवा शोध एवं वैज्ञानिक तथा तकनीकी संस्थानों के समन्वय और मानकों के अवधारण के संबंध में सलाहकार के होंगे। (2) उपधारा (1) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए परिषद,
(क) राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों तथा राज्य में उच्चतर शिक्षा की प्राथमिकताओं तथा संभावनाओं को ध्यान में रखकर उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में समेकित कार्यक्रम तैयार करेगी तथा उसके क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करेगी;
(ख) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को शिक्षा के मानक को बनाए रखने के लिए अनुरक्षण के संदर्भ में सहायता प्रदान करना तथा यथा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई का सुझाव देगी;
(ग) राज्य में उच्चतर शिक्षा के विकास के लिए संभावनाओं की योजना तैयार करेगी; (घ) विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा उच्चतर शिक्षण संस्थानों के विकास योजनाओं को अपने मंतव्य तथा अनुशंसा के साथ राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान को अग्रसारित करेगी तथा इस प्रकार के विकासात्मक योजनाओं के क्रियान्वयन का अनुश्रवण करेगी;
(ङ) उच्चतर शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग तथा समन्वय को प्रोत्साहित करना तथा उनको उद्योग तथा अन्य संबंधित संस्थापनाओं से अंतःक्रिया के संबंध में संभावनाओं की तलाश करेगी;
(च) सरकार तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों के अनुरूप उच्चतर शिक्षा में नए संस्थानो को प्रारम्भ करने लिए नियम सूत्रण हेतु परामर्श देगी;
(छ) राज्य में उच्चतर शिक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधन बढ़ाने हेतु अर्थोपाय संबंधी सुझाव देगी; (ज) विश्वविद्यालय, महाविद्यालय तथा उच्चतर शिक्षण संस्थानों में पाठ्यक्रमों के अद्यतनीकरण को प्रोन्नत तथा प्रोत्साहित करने हेतु उसके विकास, पुनर्संरचना तथा अद्यतनीकरण के लिए परामर्श देगी;
(झ) विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय के कार्यक्रम को समन्वय तथा प्रोत्साहित करना, निगरानी प्रणाली गठित करेगी तथा इसके क्रियान्वयन का अनुश्रवण करेगी;
() विश्वविद्यालयों तथा स्वायत्त महाविद्यालयों द्वारा संचालित होने वाले परीक्षा के स्तर के सुधार के लिए कदम तथा तरीका निर्माण करेगी;
(ट) विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में शिक्षकों को प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करना तथा उच्च गुणवता वाले पुस्तकें, मोनोग्राफ तथा संदर्भ पुस्तक प्रकाशित करने तथा समन्वय के द्वारा अकादमी स्टाफ कॉलेज के कार्यों की निगरानी करेगी;
(ठ) विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों के बीच प्रभावी अन्तःक्रिया तथा शैक्षणिक समन्वय के लिए कार्यक्रम विकसित करने हेतु परामर्श देना तथा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को राज्य के भीतर तथा बाहर जाने की गतिशीलता प्रदान करेगी;
(ड) विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा उच्चतर शिक्षण संस्थानों में नामांकन की प्रक्रिया विनियमित करेगी;
5 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018(ढ़) विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में क्रीड़ा, खेल-कूद, शारीरिक शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी;
(ण) विश्वविद्यालयों तथा क्षेत्रीय विकास योजनाओं से जुडे़ हुए विशेष क्षेत्रों में विश्वविद्यालय तथा उद्योगों के बीच प्रभावी परामर्श के द्वारा विस्तार गतिविधियों को प्रोत्साहित करना तथा उनके बीच अन्तःक्रिया का उन्नयन करेगी;
(त) महाविद्यालयों के कार्यशैली पर एक संक्षिप्त प्रतिवेदन तैयार कर उसकी एक प्रति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को प्रस्तुत करेगी;
(थ) विश्वविद्यालय में उत्कृष्टता के केन्द्र की पहचान करना तथा ज्ञान के अग्रणी क्षेत्रांें में विज्ञान एवं प्रावैधिकी की वृद्धि हेतु राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संबंध प्रदान करेगी;
(द) विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक अनुसंधान की उन्नति के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान के वित्तपोषण के लिए समन्वय स्थापित करेगी;
(घ) आणविक जीवविज्ञान, आनुुवांशिकी अभियांत्रिकी, अंतरिक्ष-विज्ञान, जैव-प्राद्योगिकी तथा इसी प्रकार के अन्य ज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों के लिए विश्वविद्यालय पद्वति के अंदर तथा बाहर उत्कृष्टता के संस्थान का उन्नयन करेगी;
(न) सरकार को विश्वविद्यालयों तथा उच्चतर शिक्षा संस्थानों में वृहत अनुदान के निर्धारण हेतु इस प्रकार के अनुदान के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर राज्य सरकार को परामर्श देगी;
(प) वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक राज्य स्तरीय केन्द्र की स्थापना करना तथा विश्वविद्यालयों के बीच अनुसंधान गतिविधियों का समन्वय करेगी;
फ) राज्य के विश्वविद्यालयों के परिनियमों, अध्यादेशाें तथा विनियमावलियों की जाँच करना तथा शैक्षणिक गतिविधियों की स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए बगैर किसी पूर्वाग्रह के प्रशासन में एकरूपता बनाए रखने के दृष्टिकोण से संशोधन हेतु परामर्श देगी;
(ब) नये विश्वविद्यालयों की स्थापना से सबंधित विधि सहित विश्वविद्यालयों से संबंधित विधियाें के सुधार के संबंध में राज्य सरकार को सुझाव देगी;
(भ) उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों तथा प्रौद्योगिकीविदों के योगदान के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कारों की स्थापना करेगी;
(म) प्रशासन तथा सरकार से विश्वविद्यालयों को सहायक अनुदान विमुक्त करेगी; (य) उद्योगों, संस्थानों तथा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों को दिए गए परामर्शीय सेवा से स्वउपार्जित निधि के माध्यम से टिकाऊ, विकास के लिए अभिनव/नये कार्यक्रमों की पहचान करेगी;
(र) राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय निधिकरण एजेंसियों से प्राप्त, यदि कोई होे, अनुसंधान निधि का प्रशासन तथा उसे विमुक्त करेगी;
(ल) तकनीकी शिक्षा के संदर्भ में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् के साथ सम्पर्क स्थापना का कार्य करेगी;
(व) सरकार अथवा किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा उच्चतर शिक्षा शोध संस्थान को, परिषद् को सौंपे जाने वाले विषयों से संबंधित, सुझाव देगी;
(श) उच्चतर शिक्षा में उत्कृष्टता के उन्नयन के लिए, यथाविहित अन्य आवश्यक कार्य का संपादन करेगी;
(ष) सरकार द्वारा सौंपा गया अन्य कोई कार्य;
12. परिषद् की बैठक।-परिषद् जब भी आवश्यक हो उस समय तथा स्थान पर बैठक कर सकेगी और उन प्रक्रिया के नियमाें का संप्रेक्षण करेगी, जो विनियमावली में उपबंधित किये जाएँः
परंतु परिषद् की बैठक तीन माह में एक बार अवश्य होगी। परिषद् की बैठक के लिए गणपूर्ति परिषद के न्यूनतम एक तिहाई सदस्यों से होगी;
13. परिषद् के कर्मी।-परिषद् अपने कार्यों के दक्षता पूर्ण अनुपालन के लिए उतनी संख्या में कर्मियों की नियुक्ति कर सकेगा, जितनी आवश्यक हो। परिषद् के कर्मियों की सेवा के निबंधन एवं शर्त्तेें वही होंगी, जो विनियमावली में उपबंधित हो। परिषद् मेें सरकार द्वारा प्रतिनियुक्त नियमित पदाधिकारियों/कर्मचारियों के अलावे सभी पदाधिकारी/कर्मचारी जो परिषद् में कार्य करेंगे, उनको राज्य सरकार का कर्मचारी/पदाधिकारी नहीं माना जाएगा। परिषद् में किसी भी पदाधिकारी अथवा कर्मचारी की संविदा के आधार पर/वाह्य श्रोतों से नियुिक्त राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के बाद की जायेगी।
14. परिषद् का बजट।-परिषद् यथाविहित प्ररूप में तथा उस समय तक अगले वित्तीय वर्ष के संबंध में आकलित प्राप्तियाँ तथा व्यय को दर्शाते हुए एक बजट तैयार करेगी तथा बजट की प्रति सरकार को अग्रसारित की जायेगी।6 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 15. परिषद् की निधि।-(1) परिषद् की अपनी निधि होगी तथा सभी प्रकार की राशि, जो समय-समय पर, राज्य सरकार द्वारा भुगतान की जाए अथवा परिषद् को प्राप्त सभी प्रकार की प्राप्तियाँ (इसमें केन्द्र सरकार, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान अथवा किसी अन्य प्राधिकार अथवा व्यक्ति द्वारा परिषद् को हस्तगत करायी जाने वाली राशि भी शामिल है) इसी निधि में जमा की जाएगी,
(2) सरकार, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसी राशि का भुगतान करेगी जो परिषद् के संचालन हेतु आवश्यक समझी जाये,
(3) इस अधिनियम के अधीन अथवा इसके उद्देश्यों के लिए परिषद् द्वारा उपगत सभी व्यय वर्णित निधि से ही किए जाएंगे। उक्त निधि से होने वाले सभी व्यय पर बिहार वित्तीय नियमावली के सुसंगत प्रावधान लागू होंगे। 16. परिषद् की वार्षिक लेखा।-(1) परिषद् का लेखा संधारित किया जायेगा एवं बिहार वित्तीय नियमावली के प्रावधानों के अनुसार वार्षिक बजट तैयार किया जायेगा।
(2) परिषद् के लेखा का अंकेक्षण वर्ष में न्यूनतम एक बार इस निमित परिषद् द्वारा यथा नियुक्त निबंधित चार्टर्ड एकाउन्टेंट द्वारा किया जाएगा।
(3) उपधारा (2) के अधीन नियुक्त अंकेक्षक को, अंकेक्षण के उद्देश्यों से, वैसे अधिकार, विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे जो विहित किए जाएँ।
(4) परिषद् के सदस्य सचिव-सह-राज्य परियोजना निदेशक, अंकेक्षण प्रतिवेदन का कारण दर्शाते हुए मुद्रित करांऐंगे तथा मुद्रित प्रतियाँ प्रत्येक सदस्य को अग्रसारित करते हुुए उस अंकेक्षण प्रतिवेदन को परिषद् की अगली बैठक में विचारण हेतु प्रस्तुत करेंगे।
(5) परिषद् अंकेक्षण प्रतिवेदन में दर्शाए गए अनियमितताओं अथवा कमियों को दूर करने के लिए अविलम्ब आवश्यक समुचित कार्रवाई करेगी।
(6) अंकेक्षक द्वारा प्रमाणित परिषद् के लेखा का अंकेक्षण प्रतिवेदन उस पर परिषद् की टिप्पणी के साथ, यथाविहित समय के भीतर सरकार को अग्रसारित किया जाएगा।
(7) सरकार, लिखित आदेश के द्वारा अंकेक्षण प्रतिवेदन में खुलासा किए गए कमियों के निराकरण हेतु आदेश में विहित समय-सीमा के भीतर यथाविनिर्दिष्ट कार्रवाई करने हेतु निदेश परिषद् को दे सकेगी तथा परिषद उस निदेश का अनुपालन करेगी।
17. वार्षिक प्रतिवेदन।- परिषद् प्रत्येक वित्तीय वर्ष के समाप्ति पर, यथाशीघ,्र यथाविहित रीति तथा तिथि से पूर्व पिछले वर्ष की अपनी गतिविधियों का लेखा जोखा तथा अगले वर्ष में संभावित गतिविधियों, यदि कोई हो, का लेखा जोखा सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगी तथा सरकार उसकी प्राप्ति के बाद यथाशीघ्र विधान मंडल के समक्ष उप स्थापित करवाएगी। वार्षिक प्रतिवेदन की एक प्रति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भी अग्रसारित की जाएगी। 18. निदेश जारी करने की शक्ति।- सरकार परिषद् को ऐसे निदेश जारी कर सकेगी जो उनकी राय में इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने हेतु आवश्यक एवं समीचीन हो तथा परिषद् ऐसे सभी निदेशों को प्रभावी करेगी।
19. परिषद के गठन में त्रुटि के कारण परिषद् की कार्यवाही को अविधिमान्य नहीं किया जाना।- परिषद् को, सदस्यता में किसी रिक्ति अथवा उसके गठन में किसी त्रुटि के बावजूद भी कार्य करने की शक्ति होगी तथा किसी सदस्य के परिषद् की कार्यवाही में बैठने, मतदान अथवा अन्य कारणों से भाग लेने हेतु अपात्रता के बावजूद भी परिषद् की कार्यवाही में भाग लिया गया है तो परिषद् की कार्यवाही विधि मान्य होगी।
20. परिषद् के सदस्य तथा कर्मियों का लोक सेवक होना।- परिषद् के अध्यक्ष, उपाध्याक्ष, सदस्य, सदस्य सचिव-सह-राज्य परियोजना निदेशक तथा अन्य कर्मी इस अधिनियम के प्रावधानों अथवा इस अधिनियम के तहत निर्मित निर्गत किसी नियम अथवा विनियम अथवा आदेश अथवा निदेश के अनुसरण में कार्य कर रहे कोई कर्मी भारतीय दण्ड संहिता की धारा 21 के अर्थातंर्गत लोक सेवक माने जाऐंगे।
21. नियम बनाने की शक्ति।- (1) सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने हेतु नियम बना सकेगी।
(2) इस अधिनियम के अधीन सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, जो एक या दो अथवा अधिक क्रमिक सत्रों को मिलाकर चौदह दिनों के लिए प्रस्तुत किया जाएगा तथा उपर वर्णित एक या दो या क्रमिक सत्रों की समाप्ति के ठीक पहले, यदि दोनों सदन इस बात पर सहमत होते है कि नियम में किसी प्रकार का संशोधन किया जाना चाहिए अथवा नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, उसके बाद, यथास्थिति, नियम संशोधित रूप में ही प्रभावी होगा अन्यथा निष्प्रभावी होगा, जैसा कि मामला हो, हालांकि इस तरह का कोई संशोधन या विलोपन नियम के तहत किए गए कार्य कीे वैधता के प्रति पूर्वाग्रह से रहित होगा।
22. विनियमावली बनाने की शक्ति।- (1) परिषद् राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किसी नियम के प्रावधानों के तहत तथा राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से इस अधिनियम के अधीन परिषद् के कार्यों एवं शक्तियों के कार्यान्वयन हेतु विनियमावली बना सकेगी।
(2) इस अधिनियम के अधीन सरकार द्वारा बनायी गयी प्रत्येक विनियमावली बनाए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, जो एक या दो अथवा अधिक क्रमिक सत्रों को मिलाकर चौदह दिनों के लिए प्रस्तुत किया जाएगा तथा उपर वर्णित एक या दो या क्रमिक सत्रों की समाप्ति के ठीक7 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 9 अ(cid:22)ील 2018 पहले, यदि दोनों सदन इस बात पर सहमत होते है कि विनियमावली में किसी प्रकार का संशोधन किया जाना चाहिए अथवा विनियमावली नहीं बनाया जाना चाहिए, उसके बाद, यथास्थिति, विनियमावली संशोधित रूप में ही प्रभावी होगा अन्यथा निष्प्रभावी होगा, जैसा कि मामला हो, हालांकि इस तरह का कोई संशोधन या विलोपन विनियमावली के तहत किए गए कार्य की वैधता के प्रति पूर्वाग्रह से रहित होगा।
23. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति।- (1) यदि इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में किसी प्रकार की कठिनाइयाँ उत्पन्न होती है, तो सरकार आदेश द्वारा कोई ऐसा प्रावधान कर सकेगी जो, अधिनियम के प्रावधानों से अंसगत नहीं हो और कठिनाईयों के निराकरण के प्रयोजनार्थ आवश्यक एवं समीचीन होः
परंतु इस प्रकार का कोई भी आदेश अधिनियम के प्रारम्भ होने की तिथि से दो वर्षों के बाद जारी नहीं किया जा सकेगा।
उद्देश्य एवं हेतु
उच्चत्तर शिक्षा के समन्वित विकास हेतु केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2013 में राष्ट्रीय उच्चत्तर शिक्षा अभियान योजना लागू किया गया है। राज्य सरकार के निर्णय से यह योजना राज्य में क्रियान्वित भी हो रही है। परंतु इस योजना के सम्यक् क्रियान्वयन हेतु बिहार राज्य उच्चत्तर शिक्षा परिषद् का गठन अधिनियम के माध्यम से किया जाना आवश्यक है। अतः बिहार राज्य उच्चत्तर शिक्षा परिषद् का गठन ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है जिसे अधिनियमित कराना ही इसका अभीष्ट है।
((((कृष्णनन्दन प्रसाद वर्मा)))) भार-साधक सदस्य ।
पटना दिनांक-28.03.2018
jke Js"B jk;] सचिव, बिहार विधान-सभा ।
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