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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 06 August 2018

Published 06 August 2018

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2018-08-06.755
Languages
English, Hindi

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 ॢबह(cid:4)र गजट

[स(cid:3)ध(cid:3)रण [(cid:8)क ॢबह(cid:4)र सरक(cid:4)र ह(cid:4)र(cid:4) (cid:13)क(cid:4)०शत 15 (cid:19)(cid:4)वण 1(cid:22)4(cid:24) (cid:25)श(cid:24)(cid:26)

((((स(cid:27)(cid:24) पटन(cid:4) (cid:30)55) ) ) ) पटन(cid:4)(cid:31) स मव(cid:4)र(cid:31) 6666 अगःतअगःतअगःतअगःत 2018201820182018 जल संसाधन विभाग ——— अधिसूचना 27 अप्रील 2018

सं॰ 22/नि0सि0(सिवान)-11-04/2016-983—श्री सुरेश पूर्वे (आई0डी0-3207), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, दरभंगा के विरूद्ध उक्त पदस्थापन अवधि के दरम्यान नहरों के पुनस्र्थापन कार्य में बरती गयी अनियमितता के संबंध में प्रतिवेदित आरोप पत्र प्रपत्र-'क' में उल्लिखित निम्नांकित आरोपों के संबंध में विभागीय पत्रांक-1083, दिनांक 13.06.16 से स्पष्टीकरण की मांग की गयी :-

(i) कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज द्वारा नहर के पुनस्र्थापन कार्यों में प्रारंभिक दौर से ही लापरवाही बरता जाना।

(ii) मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान के निर्देशों का अनुपालन न करना।

(iii) पटेल इंजीनियरिंग का Letter Of Acceptance दिनांक 21.11.14 को निर्गत करने के पश्चात एकरारनामा काफी विलंब से दिनांक 02.01.2015 को करना।

(iv) वैभव कन्सट्रक्शन को Letter Of Acceptance दिनांक 21.11.2014 को निर्गत करने के पश्चात एकरारनामा विलंब से दिनांक 09.12.2014 को करना।

(v) मे० पटेल इंजीनियरिंग एवं वैभव कन्स्ट्रक्शन को Mobilization advance का चेक विलंब से दिनांक 30.01.2015 को काटा जाना एवं कोषागार पदाधिकारीसे पारित कराने में दिलचस्पी न लेना।

(vi) विभागीय पत्रांक 126, दिनांक 22.01.2015 द्वारा वाहन क्रय हेतु विभागीय आदेश प्राप्त होने मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान के निदेश एवं स्मारित करने के बावजूद वाहन का क्रय न किया जाना।2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 6666 vxLrvxLrvxLrvxLr 2018 उक्त आरोपों के संदर्भ में श्री पूर्वे द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना का मंतव्य प्राप्त किया गया। योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2 द्वारा निम्न मंतव्य दिया गया :-

(i) आरोप 1ः-प्रमंडलीय कार्यालय में आवंटन अधियाचना लगभग 24.75 करोड़ का माह जनवरी में ही प्राप्त हो गयी थी। कार्यपालक अभियंता द्वारा आवंटन की मांग ससमय नहीं करने के लिए लापरवाही बरती गयी है।

(ii) आरोप 2ः-श्री पूर्वे द्वारा पुनस्र्थापन कार्य का एकरारनामा करना, मोबिलाईजेशन अग्रिम का भुगतान करना एवं वाहन क्रय की प्रक्रिया को पूरा करना आदि का कार्य किया गया है। उक्त कार्य नियमानुकूल प्रक्रियाधीन के तहत करना पड़ता है अतएव श्री पूर्वे का कथन सही प्रतीत होता है। (iii) आरोप 3ः-पुनस्र्थापन कार्य के एकरारनामा संबंधी कागजात मे0 पटेल इंजिनियरिंग लि0 द्वारा ससमय नहीं जमा करने के कारण एकरारनामा करने में विलंब हुआ है, अतएव श्री पूर्वे का कथन इस संदर्भ में तर्कसंगत है।

(iv) आरोप 4ः-पुनस्र्थापन कार्य के एकरारनामा संबंधी कागजात वैभव कन्सट्रक्शन द्वारा ससमय नहीं जमा करने के कारण एकरारनामा में विलंब हुआ है। अतएव श्री पूर्वे का कथन इस संदर्भ में तर्कसंगत है।

(v) आरोप 5ः-श्री पूर्वे द्वारा संवेदक को मोबिलाईजेशन अग्रिम नियमानुसार प्रक्रिया के तहत दिया गया है तथा संवेदक को चेक प्राप्त कराते हुए कोषागार में जमा किया गया। कोषागार द्वारा लगाये गये आपत्तियों का ससमय निराकरण किया गया है।

(vi) आरोप 6ः-वाहन क्रय की प्रक्रिया जटिल है। त्रुटिपूर्ण प्रोफार्मा इनभ्वाइस मिलने के कारण वाहन क्रय में विलंब हुआ। श्री पूर्वे द्वारा वाहन क्रय के संदर्भ में की गयी कार्रवाई समीचीन प्रतीत होता है। श्री पूर्वे से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2 के मंतव्य की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में यह पाया गया कि श्री पूर्वे द्वारा कहा गया है कि प्रमंडल में पूर्व से 495 लाख का आवंटन दिनांक 04.12.14 को प्राप्त था तथा प्रमंडलीय पत्रांक 81, दिनांक 22.01.15 द्वारा कुल 1165 लाख का आवंटन की मांग की गयी थी। पुनः आवश्यकता पड़ने पर दिनांक 04.03.15 को कुल 394 लाख का आवंटन हेतु अधियाचना पत्र अधीक्षण अभियंता को दी गयी तथा अधीक्षण अभियंता द्वारा पत्रांक 245, दिनांक 04.03.15 से अधियाचना मुख्य अभियंता को दी गयी। उक्त प्रमंडल का आवंटन निर्गत करने का कार्य योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना द्वारा किया जाता है। इस मामले के समीक्षोपरांत अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना द्वारा ससमय आवंटन की मांग करने में कार्यपालक अभियंता के स्तर से लापरवाही बरतने का मंतव्य दी गयी है, जिससे सहमत हुआ जा सकता है। शेष आरोप सं०-2,3,4,5 एवं 6 को प्रमाणित नहीं पाया गया।

अतः सरकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरांत श्री सुरेश पूर्वे तत्‌कालीन कार्यपालक अभियंता सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज के विरूद्ध प्रमाणित आरोप सं०-1 के लिए "दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री पूर्वे, को विभागीय अधिसूचना सं०-825, दिनांक 01.06.2017 द्वारा "दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" का दण्ड संसूचित किया गया। सरकार द्वारा उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्ध श्री पूर्वे के पत्रांक-03, दिनांक 06.12.17 द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया। जिसमें श्री पूर्वे द्वारा निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

संवेदक वैभव कन्सट्रक्शन प्राईवेट लिमिटेड, गोपालगंज द्वारा दिनांक 26.12.2014 को रूपये 147582358 रूपये मोबिलाईजेशन अग्रिम हेतु सिर्फ आवेदन दिया गया। बैंक गारंटी एक रूपये का भी नहीं जमा किया गया। सिर्फ आवेदन देकर इतनी बडी राशि की माँग विभाग से नहीं की जा सकती है। इसके लिए उन्हें उसी समय उतनी राशि का बैंक गारंटी जमा करना चाहिए था। संवेदक वैभव कन्सट्रक्शन प्राईवेट लिमिटेड द्वारा सिर्फ और सिर्फ 4.25 करोड़ का दिनांक 19.01.2015 भारतीय स्टेट बैंक एस0एम0ई0 शाखा डाक बंगला रोड, पटना का निर्गत बैंक गारंटी की सूचना दिनांक 22.01.2015 को दिया गया एवं दिनांक 23.01.2015 को प्रमंडलीय कार्यालय में समर्पित किया गया। संवेदक वैभव कन्सट्रक्शन द्वारा सिर्फ 4.25 करोड़ की अधियाचना एवं पटेल इंजिनियरिंग लिमिटेड, मुम्बई के लिए 10.00 करोड़ (बैंक गारंटी के अनुरूप) कुल मोबिलाईजेशन अग्रिम 14.25 करोड़ की अधियाचना तत्कालीन प्रमंडलीय कार्यालय के पत्रांक 81 दिनांक 22.01.2015 द्वारा अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, सिवान को सम्बोधित पत्र द्वारा की गई एवं इसकी प्रतिलिपि मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान एवं अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल सं०-2, जल संसाधन विभाग, सिंचाई भवन, पटना को भी दी गई। इस पत्र द्वारा (मोबिलाईजेशन अग्रिम हेतु 14.25 करोड़) कुल आवश्यक राशि रू0 142520035=1660 लाख दर्शाते हुए एवं पूर्व से उपलब्ध राशि 495 लाख का जिक्र करते हुए कुल 1165 लाख रूपये की अधियाचना की गई।3 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 6666 vxLrvxLrvxLrvxLr 2018 स्पष्ट है कि बैंक गारंटी के अनुरूप 14.25 करोड़ मोबिलाईजेशन अग्रिम हेतु आवश्यक राशि को दर्शाते हुए उचित राशि की मांग ससमय की गई एवं इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई। यदि मोबिलाईजेशन अग्रिम हेतु 24.75 करोड़ की अधियाचना विभाग से किया जाता तो 10.50 करोड़ की राशि बिना व्यय के अवशेष रह जाता एवं प्रत्यर्पित करना पड़ता। संवेदक वैभव कन्सट्रक्शन प्राईवेट लिमिटेड, गोपालगंज द्वारा बाद में भी 4.25 करोड़ के अलावे मोबिलाइजेशन अग्रिम हेतु न तो बैंक गारंटी जमा की गई न मोबिलाईजेशन अग्रिम की माँग की गई।

इस अधियाचना के अलावे एवं संवेदक द्वारा कार्यक्षेत्र में कार्य सम्पादित किए जाने के बाद आवश्यकता पड़ने पर दिनांक 04.03.2015 को बैठक के दौरान अंचलीय कार्यालय में रूपये 394लाख आवंटन हेतु अधियाचना हाथों-हाथ अधीक्षण अभियंता, सारण नहर अंचल, सिवान को पत्र देकर की गई। अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-245, दिनांक 04.03. 2015 द्वारा आवंटन हेतु मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिवान को पत्र लिखा गया एवं इसकी प्रति कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज को दी गई।

उक्त तथ्यों के आलोक में श्री पूर्वे द्वारा उनके उपर लगाये गये आरोप सं०-1 से भी मुक्त करने का अनुरोध किया गया श्री पूर्वे के पुनर्विचार अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा :- श्री पूर्वे द्वारा कहा गया है कि वैभव कन्सट्रक्शन प्राईवेट लिमिटेड द्वारा दिनांक 26.12.14 को बिना बैंक गारंटी का कुल 14,75,82,358/- रूपये मोबिलाइेजेशन अग्रिम का आवेदन दिया गया तथा दिनांक 23.01.15 को इनके द्वारा कुल 4.25 करोड़ का ही बैंक गारंटी प्रमंडल कार्यालय को उपलब्ध कराया गया। मात्र आवेदन पर आवंटन की माँग करना उचित नहीं था।

संवेदक वैभव कन्सट्रक्शन द्वारा सिर्फ 4.25 करोड़ की अधियाचना एवं पटेल इंजिनियरिंग लिमिटेड के लिये 10 करोड़ (बैंक गारंटी के अनुरूप) कुल 14.25 करोड़ की अधियाचना पत्रांक 81 दिनांक 22.01.15 द्वारा किया गया। श्री पूर्वे का उक्त कथन विरोधाभाषी प्रतीत होता है क्योंकि एक तरफा इनके द्वारा कहा गया है कि वैभव कन्सट्रक्शन के द्वारा दिनांक 23.01.15 को बैंक गारंटी की प्रति उपलब्ध करायी गयी। दूसरे तरफ कहनाकि बिना बैंक गारंटी के आवंटन की अधियाचना करना उचित नहीं था तो फिर बिना बैंक गारंटी के दिनांक 22.01.15 को इनके द्वारा आवंटन की अधियाचना किस आधार पर की गयी।

संचिका में रक्षित अभिलेखों से निम्नवत्‌ स्थिति बनती है -

(i) वैभव कन्सट्रक्शन के द्वारा दिनांक 26.12.14 को कुल 14,7582358 करोड़ का मोबिलाईजेशन अग्रिम हेतु आवेदन दिया गया है तथा कहा गया था कि Bank Guarantee (B.G) against amount of mobilization advance will be submitted before release of payment. ) (ii) पटेल इंजिनियरिंग के द्वारा दिनांक 05.01.15 को कुल 10.0 करोड़ B.G के साथ कुल 10.0 करोड़ का मोबिलाईजेशन अग्रिम हेतु आवेदन दिया गया।

(iii) पटेल इंजिनियरिंग को मोबिलाईजेशन अग्रिम का प्रथम किस्त रूप में दिनांक 28.01.15 को 2.5 करोड, द्वितीय किस्त के रूप में दिनांक 26.02.15 को 6.0 करोड़ तथा तृतीय किस्त दिनांक 25.03.15 को कुल 0.96 करोड़ प्रदान किया गया है।

(iv) वैभव कन्सट्रक्शन के द्वारा दिनांक 19.01.15 को निर्गत बैंक गारंटी समर्पित करने के पश्चात प्रथम किस्त के रूप में दिनांक 28.01.15 को कुल 4.25 करोड़ का अग्रिम प्रदान की गयी है।

(v) श्री पूर्वे द्वारा प्रमंडल से पूर्व से 4.95 करोड़ का आवंटन प्राप्त होने के कारण शेष 11.65 करोड़ की आवंटन की माँग प्रथम बार दिनांक 22.01.15 को की गई है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि पटेल इंजिनियरिंग के द्वारा दिनांक 05.01.15 को 10.0 करोड़ की अधियाचित मोबिलाईजेशन अग्रिम के विरूद्ध प्रथम किस्त के रूप में मात्र 2.5 करोड़ दिनांक 28.01.15 को प्रदान की गयी है। जबकि प्रमंडल में अधियाचना के पूर्व से ही प्रमंडल को 4.95 करोड़ का आवंटन उपलब्ध था। यदि श्री पूर्वे द्वारा आवंटन की माँग ससमय की जाती तो संवेदक पटेल इंजिनियरिंग को नियमानुसार 10.0 करोड़ की अग्रिम भुगतान में विलम्ब नहीं होता। उक्त के आलोक में माना जा सकता है कि इनके द्वारा ससमय अग्रिम प्रदान करने में लापरवाही बरती गयी है।

आरोपी का कथन कि यदि (1014.75)=24.75 करोड़ की अधियाचना विभाग से किया जाता तो 10.50 करोड़ की राशि बिना व्यय के अवशेष रह जाता एवं प्रत्यार्पित करना पड़ता। क्योंकि वैभव कन्सट्रक्शन प्रा0 लि0 द्वारा बाद में 4.25 करोड़ के अलावे कोई बैंक गारंटी जमा नहीं दी गयी। स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है क्योंकि प्रश्नगत कार्य प्रगति पर था एवं माह जनवरी से मार्च के बीच सम्पादित कार्य के विरूद्ध उक्त आवंटन के तहत व्यय किया जा सकता था। मार्च 2015 में भी अतिरिक्त आवंटन की माँग की गयी है। उपरोक्त तथ्यों तथा अधीक्षण अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग अंचल-2, पटना के मंतव्य के आलोक में ससमय आवंटन की माँग करने में लापरवाही परिलक्षित होता है। अतएव श्री पूर्वे का पुनर्विचार याचिका स्वीकार योग्य नहीं है।4 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 6666 vxLrvxLrvxLrvxLr 2018 उपरोक्त समीक्षा के आधार पर श्री सुरेश पूर्वे, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित अभ्यावेदन को अस्वीकार करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं०-825, दिनांक 01.06.17 द्वारा अधिरोपित दण्ड को बरकरार रखने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया।

उक्त निर्णय के आलोक में श्री सुरेश पूर्वे (आई0डी0-3207), तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सारण नहर प्रमंडल, गोपालगंज सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, पश्चिमी कोशी नहर अंचल, दरभंगा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकृत करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना सं०-825, दिनांक 01.06.17 द्वारा संसूचित दण्ड "दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक" को बरकरार रखा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, जीउत सिंह, सरकार के संयुक्त सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 06 August 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2018-08-06.755/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2018-08-06.755.