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(स(cid:27)(cid:24) पटन(cid:4) (cid:30)51) पटन(cid:4) स!मव(cid:4)र 17 (cid:22)सत(cid:24)बर 2018 सं॰ 38/लो0उ0प्र0 (विविध)-17/15-52/वि0 वित्त विभाग ——— ladYi 14 ekpZ 2018
अकार्यरत निगम/लोक उपक्रमों की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण कर्मियों के वेतन आदि का भुगतान वर्षो से लंबित चल रहा है। माननीय न्यायालयों में दायर वादों पर न्यायादेश के क्रम में मानवीय दृष्टिकोण एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के आलोक में निगम कर्मियों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रूपये व्यय किया जा चुका है। अभी भी इस संबंध में माननीय न्यायालयों में कई वाद लंबित हैं।
मामलों के एकमुश्त समाधान हेतु अकार्यरत लोक उपक्रमों के कर्मियों के बकाये वेतनादि का भुगतान तथा इन निगमों के विभिन्न सरकारी विभागों में प्रतिनियुक्त एवं इन निगमों में शेष बचे कर्मियों की विभिन्न सरकारी विभागों में समायोजन की स्वीकृति संबंधी प्रस्ताव पर सम्यक् विचारोपरान्त राज्य सरकार द्वारा निम्न प्रकार से निर्णय लिया गया है-
1. इन लोक उपक्रमों के कर्मचारी, जो विभिन्न विभागों में समायोजित हैं, संबंधित विभाग से सेवानिवृत्त होंगे एवं उनकी सभी देयता संबंधित प्रशासी विभाग की होगी।
2. जो कर्मचारी विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्त हैं, उन्हें आदेश निर्गत होने की तिथि से विभागों में समायोजित किया जायेगा तथा समायोजन की तिथि से इन कर्मचारियों की देयता संबंधित विभाग की होगी। 2 ॢबह(cid:4)र गजट (cid:10)[स(cid:4)ध(cid:4)रण(cid:15)(cid:16) 17 (cid:22)सत(cid:24)बर 2018 समायोजित नहीं हो पाते हैं, उनका संबंधित प्रशासी विभाग, उस तिथि तक का बकाया वेतन एवं अन्य देयता का भुगतान वित्त विभाग से आवंटन प्राप्त करके, इस शत्र्त पर करेगा कि यह भुगतान उन कर्मचारियों के लिए एक-कालीय समझौता (One Time Settlement) माना जाएगा। 4. सेवानिवृत्त एवं मृत कर्मियों के अंशदायी भविष्य निधि में जमा राशि के सरकारी अंशदान का एकमुश्त भुगतान प्रशासी विभाग द्वारा किया जाएगा।
5. बिहार एवं झारखंड के बीच अंतर्राज्यीय निगमों की आस्तियों एवं दायित्वों के संबंध में झारखंड सरकार से वार्ता के बाद निर्णय लिया जायेगा। उपर्युक्त कंडिकाओं में प्रस्तावित व्यवस्था सम्प्रति उन्हीं लोक उपक्रमों के लिये मान्य होगी, जिनकी आस्तियों एवं दायित्वों का बंटवारा अंतिम रूप से विधिवत् संपन्न हो चुका है।
6. जहां तक अकार्यरत निगमों के पास उपलब्ध भूमि, भवन आदि का प्रश्न है, ये सभी ''जैसा है जहां है'' (as is where is) के आधार पर बियाडा को हस्तांतरित किए जाएंगे। बियाडा इन भूमि/भवनों को नियमानुसार विक्रय द्वारा उद्योग विभाग को हस्तांतरित करेगा एवं उससे प्राप्त राशि राजकीय कोष में जमा की जायेगी।
किया जाय।
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