Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 21 November 2018

Published 21 November 2018

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2018-11-21.47
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

िनबंधन सं(cid:201)या पी0ट(cid:547)0-40

(cid:466)बहार गजट (cid:466)बहार सरकार }kjk (cid:292)कािशत 30 कार्तिक 1940 (श0) सं(cid:201)या 47 पटना, बुधवार,———————— 21 uoEcj 2018 (ई0)

(cid:466)वषय-सूची पृ(cid:231)ठ भाग-1—िनयु(cid:466)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदली, श(cid:466)(cid:416), छु (cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:466)(cid:416)गत सूचनाएं। 2-13 भाग-1-क—(cid:232)वयंसेवक गु(cid:227)म(cid:585) के समादे(cid:231)टाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मै(cid:282)(cid:547)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:547)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:201)तार(cid:547) पर(cid:547)(cid:162)ाओं के पर(cid:547)(cid:162)ा-फल, काय(cid:91)(cid:272)म, छा(cid:287)वृ(cid:466)(cid:419) (cid:292)दान, आ(cid:465)द।

---

भाग-1-ग—िश(cid:162)ा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:547)(cid:162)ाफल आ(cid:465)द ---

भाग-2—(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल और काया(cid:91)(cid:218)य(cid:162)(cid:585) (cid:430)ारा िनकाले गये (cid:466)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आ(cid:465)द। 14-15 भाग-3—भारत सरकार, प(cid:468)(cid:433)म बंगाल सरकार और उ(cid:205)च (cid:219)यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और रा(cid:207)य गजट(cid:585) के उ(cid:424)रण। ---

भाग-4—(cid:466)बहार अिधिनयम ---

पृ(cid:231)ठ भाग-5—(cid:466)बहार (cid:466)वधान मंडल म(cid:581) पुर:(cid:232)था(cid:466)पत (cid:466)वधेयक,उ(cid:200)त (cid:466)वधान मंडल म(cid:581) उप(cid:232)था(cid:466)पत या उप(cid:232)था(cid:466)पत (cid:465)कये जानेवाले (cid:292)वर सिमितय(cid:585) के (cid:292)ितवेदन और उ(cid:200)त (cid:466)वधान मंडल म(cid:581) पुर:(cid:232)थापन के पूव(cid:91) (cid:292)कािशत (cid:466)वधेयक।

---

भाग-7—संसद के अिधिनयम (cid:468)जनपर रा(cid:231)(cid:282)पित क(cid:551) (cid:207)ये(cid:231)ठअनुमित िमल चुक(cid:551) है। ---

भाग-8—भारत क(cid:551) संसद म(cid:581) पुर:(cid:232)था(cid:466)पत (cid:466)वधेयक, संसद म(cid:581) उप(cid:232)था(cid:466)पत (cid:292)वर सिमितय(cid:585) के (cid:292)ितवेदन और संसद म(cid:581) उप(cid:232)था(cid:466)पत (cid:292)वर सिमितय(cid:585) के (cid:292)ितवेदन और संसद म(cid:581) पुर:(cid:232)थापन के पूव(cid:91) (cid:292)कािशत (cid:466)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:466)व(cid:163)ापन

---

भाग-9-क—वन (cid:466)वभाग क(cid:551) नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:466)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:465)द। 16-16 पूरक

---

पूरक-क 17-302 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

भाग-1

िनयु(cid:466)(cid:416), पद(cid:232)थापन, बदली, श(cid:466)(cid:416), छु (cid:210)ट(cid:547) और अ(cid:219)य (cid:229)य(cid:466)(cid:416)गत सूचनाएं। ————— सामान्य प्रशासन विभाग

-------

अधिसूचनाएं

24 सितम्बर 2018

सं0 1/सी0-1011/2018-सा0प्र0-12751--श्री राजेश भूषण, भा0प्र0से0(बी एच ः 87), अपर सचिव, मंत्रिामंडल सचिवालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को श्री आर0के0 महाजन, भा0प्र0से0 (बी एच : 87) की सापेक्षता में दिनांक 15.09.2018 से शीर्ष वेतनमान (मुख्य सचिव स्तर, वेतनमान-लेवल-17-/रु0 2,25,000/-नियत) में प्रोफॉर्मा प्रोन्नति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

27 सितम्बर 2018

सं0 1/ एल0-09/2001-सा0प्र0-12948-श्री विपिन कुमार, भा0प्र0से0 (बी एच ः 96), स्थानिक आयुक्त, बिहार भवन, नई दिल्ली को विभागीय अधिसूचना संख्या-10086 दिनांक 27.07.2018 द्वारा दिनांक 03.08.2018 से दिनांक 24.08.2018 तक स्वीकृत उपार्जित अवकाश को दिनांक 29.08.2018 तक विस्तारित किये जाने की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिव महादेव प्रसाद, अवर सचिव।

-------

29 सितम्बर 2018

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13044--श्री मनोज कुमार, भा0प्र0से0(बी एचः 2007), अपर सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। 2. श्री कुमार अगले आदेश तक मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13045--श्री सुरेन्द्र झा, भा0प्र0से0(बी एचः 2006), उप निदेशक, भविष्य निधि निदेशालय, वित्त विभाग, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक सचिव, राजस्व पर्षद्‌, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13046--श्री आलोक कुमार, पी एण्ड टी बी डब्ल्यू एस (आई ई एसः 96), (भारत संचार निगम लिमिटेड, भारत सरकार से विरमित होने के पश्चात्‌ प्रतिनियुक्ति के आधार पर राज्य में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में)को अगले आदेश तक प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य जल विद्युत निगम, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री कुमार अगले आदेश तक निदेशक, ब्रेडा के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13047--श्री सतीश चन्द्र झा, आई पी एण्ड टी ए एफ एस(98), (दूरसंचार विभाग, भारत सरकार से विरमित होने के पश्चात्‌ प्रतिनियुक्ति के आधार पर राज्य में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक विशेष सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सिद्धेश्वर चौधरी, अवर सचिव।

-------

4 अक्तूबर 2018

सं0 1/ अ0-1018/2018-सा0प्र0-13180--श्री राधा किशोर झा, भा0प्र0से0 (बी एचः 2005) ,संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली-1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 22.10.2018 से 13.11.2018 तक कुल 23 दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।3 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

9 अक्तूबर 2018

सं0 1/पी0-1001/2016(खंड)-सा0प्र0-13517--श्री मनोज कुमार, भा0प्र0से0 (बी एचः 2007), अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति, पटना) अगले आदेश तक कार्यपालक निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसायटी, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना के भी प्रभार में रहेंगे। सं0 1/पी0-1001/2016(खंड)-सा0प्र0-13518--श्री आलोक कुमार, भा0व0से0(2012), वन प्रमंडल पदाधिकारी, नवादा (जिनकी सेवा पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपी गयी है) को अगले आदेश तक निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएँ (आई0सी0डी0एस0), समाज कल्याण विभाग, बिहार,पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

9 अक्तूबर 2018

सं0 1/पी0-1001/2016-सा0प्र0-13519--श्रीमती सुजाता चतुर्वेदी, भा0प्र0से0 (बी एचः89), प्रधान सचिव, वाणिज्य-कर विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, वित्त विभाग) को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, नई दिल्ली के पत्राांक 36/01/2018-EO (SM-I)(7) दिनांक 17.09.2018 द्वारा केन्द्रीय स्टाफिंग स्कीम के तहत अपर सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार के पद पर नियुक्त किये जाने के फलस्वरूप, धारित प्रभारों का त्याग करने की तिथि से उन्हें नव पदस्थापन पर योगदान देने हेतु विरमित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

9 अक्तूबर 2018

सं0 1/पी0-1001/2016-सा0प्र0-13520--श्री एस सिद्धार्थ, भा0प्र0से0 (बी एचः1991), प्रधान सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार फाउण्डेशन, पटना/प्रधान सचिव-गन्ना उद्योग विभाग/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रधान सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं0 1/पी0-1001/2016-सा0प्र0-13521--श्री के के पाठक, भा0प्र0से0 (बी एचः1990), अपर सदस्य, राजस्व पर्षद, बिहार, पटना को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रधान सचिव, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री पाठक अगले आदेश तक प्रधान सचिव उद्योग विभाग, बिहार, पटना/मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार फाउण्डेशन, पटना/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगे। सं0 1/पी0-1001/2016-सा0प्र0-13522--श्री आर के महाजन, भा0प्र0से0 (बी एचः1987), प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, संसदीय कार्य विभाग, बिहार, पटना/स्थानिक आयुक्त, नई दिल्ली के कार्यालय में विशेष कार्य पदाधिकारी) अगले आदेश तक प्रधान सचिव, निगरानी विभाग, बिहार, पटना के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी0-1001/2016-सा0प्र0-13523--श्री सुधीर कुमार, भा0प्र0से0 (बी एचः1988), प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, लघु जल संसाधन विभाग) अगले आदेश तक प्रधान सचिव, गन्ना उद्योग विभाग, बिहार, पटना के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी0-1001/2016-सा0प्र0-13524--श्री चैतन्य प्रसाद, भा0प्र0से0 (बी एचः1990), प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना अगले आदेश तक प्रधान सचिव, संसदीय कार्य विभाग, बिहार, पटना के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

सं0 1/पी0-1001/2016-सा0प्र0-13525--श्रीमती सुजाता चतुर्वेदी, भा0प्र0से0 (बी एचः89), प्रधान सचिव, वाणिज्य-कर विभाग, बिहार, पटना द्वारा वर्तमान धारित प्रभारों का त्याग करने की तिथि से डॉ (श्रीमती) प्रतिमा सतीश कुमार, भा0प्र0से0 (बी एचः2002), सचिव, वाणिज्य-कर विभाग (अतिरिक्त प्रभार-वाणिज्य-कर आयुक्त, वाणिज्य-कर विभाग/अपर मिशन निदेशक, बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी/अपर आयुक्त, वस्तु एवं सेवा कर-जी0एस0टी0) को वाणिज्य-कर विभाग का सम्पूर्ण प्रभार प्रदान किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

12 अक्तूबर 2018

सं0 1/ अ0-18/2008-सा0प्र0-13732--श्री रवि मनुभाई परमार, भा0प्र0से0(बी एचः 92) ,प्रधान सचिव, पर्यटन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार- प्रधान सचिव, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग/प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य फिल्म4 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 विकास एवं वित्त निगम, पटना) को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली-1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 12.09.2018 से 20.09.2018 तक कुल 09 दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

15 अक्तूबर 2018

सं0 1/अ0नि0प्र0-1004/2014-सा0प्र0-13842--श्री लोकेश कुमार सिंह, भा0प्र0से0 (बी एच : 2003), कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना (अतिरिक्त प्रभार-विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना) की अनिवार्य मध्य सेवाकालीन प्रशिक्षण चरण-4 (जो दिनांक 19.10.2018 को समाप्त होगा) से आच्छादित शेष अनुपस्थिति अवधि तक कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना का अतिरिक्त प्रभार, श्री मनोज कुमार, भा0प्र0से0(बी एचः 2007), अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति, पटना/कार्यपालक निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसायटी, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना) के पास रहेगा।

सं0 1/अ0नि0प्र0-1004/2014-सा0प्र0-13843--डॉ0 करुणा कुमारी, भा0प्र0से0(ए एम : 2010) अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना अगले आदेश तक कार्यपालक निदेशक, बिहार एड्‌स नियंत्राण सोसायटी, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में भी रहेंगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

22 अक्तूबर 2018

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13946--श्री लोकेश मिश्र, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, छपरा सदर, सारण के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री मिश्र को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13947--श्री अंशुल अग्रवाल, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, झंझारपुर, मधुबनी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री अग्रवाल को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13948--श्री ऋची पाण्डेय, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, महुआ, वैशाली के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री पाण्डेय को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13949--श्री रवि प्रकाश, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, फारबिसगंज, अररिया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री प्रकाश को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13950--सुश्री वर्षा सिंह, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, गोपालगंज सदर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।5 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 2. सुश्री सिंह को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13951--श्री मुकुल कुमार गुप्ता, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, सीतामढ़ी सदर, सीतामढ़ी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री गुप्ता को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13952--श्री अंशुल कुमार, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, दानापुर, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री कुमार को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13953--श्री वैभव चौधरी, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, हिलसा, नालन्दा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री चौधरी को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

सं0 1/पी0-1004/2018-सा0प्र0-13954--श्री विजय प्रकाश मीणा, भा0प्र0से0 (बी एचः 2016) (केन्द्रीय पदस्थापन से दिनांक 28.09.2018 को विरमित होने के पश्चात्‌ दिनांक 08.10.2018 को सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में) को अगले आदेश तक अनुमण्डल पदाधिकारी, शाहपुर पटोरी, समस्तीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

2. श्री मीणा को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-20 के तहत संबंधित अनुमण्डल क्षेत्रा के लिए दण्डाधिकारी और संबंधित जिला के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (एक्ट-2, 1974) की धारा-144 का प्रयोग करने की शक्तियाँ उन्हें प्रदान की जाती हैं।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

23 अक्तूबर 2018

सं0 1/पी0-1010/2018-सा0प्र0-14028--भारतीय प्रशासनिक सेवा के शीर्ष वेतनमान (मुख्य सचिव स्तर/वेतन स्तर-17) के गैर-संवर्गीय पदों के विरुद्ध प्रोन्नत होने वाले प्रधान सचिव स्तर के पदाधिकारियों को उनके स्तर के अनुरुप पदनामित किये जाने के उद्देश्य से भा0प्र0से0 (बिहार संवर्ग) के लिए अधिकृत प्रधान सचिव स्तर के 8 (आठ) चलायमान (फ्लोटिंग) पदों में से 5 (पॉंच) चलायमान पदों को अपर मुख्य सचिव के रुप में अधिसूचित किया जाता है। 2. अपर मुख्य सचिव के रुप में पदनामित भा0प्र0से0 पदाधिकारी प्रधान सचिव के कार्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करेेंगे। 3. यह व्यवस्था तात्कालिक प्रभाव से लागू होगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

23 अक्तूबर 2018

सं0 1/पी0-1010/2018-सा0प्र0-14029--सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-14028 दिनांक 23.10.2018 (जिसके द्वारा बिहार संवर्ग के भा0प्र0से0 के प्रधान सचिव स्तर के 8 में से से 5 चलायमान पदों को अपर मुख्य सचिव स्तर के रुप में अधिसूचित किया गया है) के आलोक में शीर्ष वेतनमान (वेतन स्तर-17) के निम्नांकित भा0प्र0से0 पदाधिकारियों को तात्कालिक प्रभाव से अपर मुख्य सचिव के रुप में पदनामित किया जाता हैः- (i) श्री त्रिापुरारि शरण, भा0प्र0से0(85), प्रधान सचिव, पर्यावरण एवं वन विभाग (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग);

6

(cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 (ii) श्री आमिर सुबहानी, भा0प्र0से0(87), प्रधान सचिव, गृह विभाग (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना/मिशन निदेशक, बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी/प्रधान सचिव, जनशिकायत/प्रधान सचिव, मद्य निषेद्य, उत्पाद एवं निबंधन विभाग/प्रधान सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग); (iii) श्री अतुल प्रसाद, भा0प्र0से0(87), प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभाग (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, सहकारिता विभाग); और (iv) श्री आर0 के0 महाजन, भा0प्र0से0(87), प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, निगरानी विभाग/विशेष कार्य पदाधिकारी, स्थानिक आयुक्त का कार्यालय, नई दिल्ली) ।

2. अपर मुख्य सचिव के रुप में पदनामित भा0प्र0से0 पदाधिकारी प्रधान सचिव के कार्योंं एवं दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

25 अक्तूबर 2018

सं0 1/पी0-1001/2016(खंड)-सा0प्र0-14164--श्री विनय कुमार, भा0प्र0से0 (99), सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-मुख्य मंत्राी के सचिव, मुख्य मंत्राी सचिवालय, बिहार, पटना/मिशन निदेशक, बिहार विकास मिशन, पटना) को मुख्य मंत्री के सचिव, मुख्य मंत्री सचिवालय के प्रभार से मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शिवमहादेव प्रसाद, अवर सचिव।

-------

26 अक्तूबर 2018

सं0 1/ अ0-1013/2018-सा0प्र0-14209--डॉ0 श्यामल किशोर पाठक, भा0प्र0से0 (बी एच ः 2005), नगर आयुक्त, मुंगेर नगम निगम, मुंगेर को विभागीय अधिसूचना संख्या-9407 दिनांक 16.07.2018 द्वारा दिनांक 05.07.2018 से दिनांक 25.07.2018 तक स्वीकृत उपार्जित अवकाश को दिनांक 23.09.2018 तक विस्तारित किये जाने की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, राम बिशुन राय, अवर सचिव।

-------

2 नवम्बर 2018

सं0 1/पी0-1025/2011-सा0प्र0-14481--राज्य में प्रतिनियुक्ति के आधार पर कार्यरत पदाधिकारी-श्री अनुपम कुमार सुमन, आई.आर.एस. (2004) , संयुक्त सचिव, मुख्य मंत्री सचिवालय, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी-सह-नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, पटना) की दिनांक 23.08.2018 को समाप्त हुई राज्य प्रतिनियुक्ति अवधि को उनके पैतृक विभाग-राजस्व विभाग (केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, आयकर निदेशालय, मानव संसाधन विकास), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली से प्राप्त सहमति के आलोक मेें दिनांक 24.08.2018 के प्रभाव से अगले एक(01) वर्ष के लिए अर्थात, दिनांक 23.08.2019 तक विस्तारित की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कन्हैया लाल साह, अवर सचिव।

-------

सामान्य प्रशासन विभाग

-------

आदेश

6 सितम्बर 2018

सं0 2/सी0-3-30156/1999-सा0प्र0-11994--मो0 शमीम अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 575/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिमडेगा, गुमला सम्प्रति वरीय उप समाहर्त्ता, लखीसराय-सह-निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, लखीसराय के विरूद्ध इंदिरा आवास निर्माण में अनियमितता कर 45,000/-रू0 एवं 75 बोरे सीमेन्ट की आपूर्ति कर सरकारी राशि का गबन करने संबंधी प्रतिवेदित आरोपों के लिए उन्हें निलम्बित कर विभागीय कार्यवाही चलाने की प्राप्त अनुशंसा के आलोक में विभागीय आदेश ज्ञापांक 374 दिनांक 23.01.2000 एवं अनुवर्ती शुद्धि पत्र सं0 651 दिनांक 06.02. 2001 द्वारा निलम्बित किया गया था। मो0 अख्तर द्वारा मा0 उच्च न्यायालय में दायर समादेश याचिका सं0 1485/01 में दिनांक 27.02.2001 को पारित आदेश के आलोक में विभागीय आदेश सं0 1727 दिनांक 29.03.2001 द्वारा दिनांक 27.02.2001 के प्रभाव से निलम्बन मुक्त किया गया। मो0 अख्तर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1382 दिनांक 16.03.2001 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

महानिदेशक, सेन्ट फॉर गुड गर्वेनस सोसाईटी, बिहार, पटना के पत्रांक 104 दिनांक 29.08.2013 द्वारा मो0 अख्तर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में मो0 अख्तर के विरूद्ध सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।7 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 मो0 अख्तर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, प्राप्त स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6543 दिनांक 21.05.2018 संचिकास्त कर दिया गया।

उक्त के आलोकमें मो0 अख्तर द्वारा अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 04.06.2018 द्वारा निलंबन अवधि (दिनांक 23.01.2001 से 26.02.2001 तक) को विनियमित कर वेतनादि के भुगतान के संबंध में अभ्यावेदन समर्पित किया गया। मो0 अख्तर द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की विभागीय समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त इनके निलंबन अवधि दिनांक 23.01.2001 से 26.02.2001 को र्काव्य पर बितायी गई अवधि मानते हुए सेवा को विनियमित करने का निर्णय लिया गया है। अतएव उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आलोक में मो0 शमीम अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 575/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सिमडेगा, गुमला सम्प्रति वरीय उप समाहर्त्ता, लखीसराय-सह-निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, लखीसराय को निलम्बन अवधि दिनांक 23.01.2001 से 26.02.2001 तक को र्काव्य पर बितायी गयी अवधि मानते हुए विनियमित किया जाता है।

आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

-------

3 अगस्त 2018

सं0 2/सी0-1098/2006-सा0प्र0-10417--श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-निर्वाची पदाधिकारी, ठकराहा, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध पंचायत निर्वाचन में अवैध एवं मनमाने ढंग से नाम-निर्देशन पत्र अस्वी—त करने, राज्य निर्वाचन आयोग के निदेशों के विपरीत कार्य करने तथा सरकारी पदाधिकारियों के र्काव्यों के प्रतिकूल आचरण बरतने इत्यादि आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-2/सी0-1098/2006-सा0प्र0-13419 दिनांक 30.09.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। श्री भारती के दिनांक 30.11.2016 को सेवा निवृा हो जाने के कारण उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 20 दिनांक 02.01.2016 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम 43(बी) के तहत्‌ सम्परिवर्तित किया गया।

आयुक्त तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1155 दिनांक 07.12.2016 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें श्री भारती के विरूद्ध तीनों आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

श्री भारती के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, प्राप्त स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के आदेशानुसार संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय पत्रांक 10367 दिनांक 11.08.2017 द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार, पटना से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।

राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक 1173 दिनांक 04.06.2018 द्वारा मंतव्य उपलब्ध कराया गया, जिसमें मंतव्य दिया गया है कि ''श्री महेन्द्र कुमार भारती, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-निर्वाची पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के उपरान्त समर्पित जाँच प्रतिवेदन से आयोग सहमत है।''

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य, जिसमें संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से सहमति जतायी गयी है, के समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुये श्री भारती के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को संचिकास्त करने का निर्णय लिया गया है। अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में श्री महेन्द्र कुमार भारती (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 129/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-निर्वाची पदाधिकारी, ठकराहा, बेतिया सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को संचिकास्त किया जाता है।

आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

-------

गृह विभाग

(आरक्षी शाखा)

------

अधिसूचनाएं

23 अक्तूबर 2018

सं0 1/एल1-10-09/2008-गृ0आ0 9174--श्री एम0 सुनील कुमार नायक, भा0पु0से0 (2005), पुलिस अधीक्षक, ए0टी0एस0 बिहार, पटना को अपने माता-पिता के ईलाज हेतु हैदराबाद में दिनांक 10.06.2018 से 24.06.2018 तक कुल 15 दिनों के अवधि के लिए उपभोग किये गये उपार्जित अवकाष की घटनोत्तर स्वीकृति अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्‌टी) नियमावली 1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।8 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 23 अक्तूबर 2018 सं0 1/एल1-10-01/2012-गृ0आ0 9173--डॉं0 सिद्धार्थ मोहन जैन, भा0पु0से0 (2006), सम्प्रति पुलिस अधीक्षक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, बिहार, पटना को विभागीय अधिसूचना संख्या-5293, दिनांक 15.06.2018 द्वारा पूर्व में स्वीकृत दिनांक 10.06.2018 से 09.07.2018 तक कुल 30 दिनों के अवकाष को संषोधित करते हुए दिनांक 16.06.2018 से 22.07.2018 तक कुल 37 दिनों के उपार्जित अवकाष की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

2. एतद्‌ संबंधी विभागीय अधिसूचना संख्या-5293, दिनांक 15.06.2018 को इस हद तक संशोधित समझा जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

10 अक्तूबर 2018

सं0 1/एल01-10-02/2017 गृ0आ0 8880--श्री विजय कुमार वर्मा, भा0पु0से0, (2004), पुलिस उप-महानिरीक्षक, सारण क्षेत्र, छपरा को MCTP phase-IV के foreign Component दिनांक 22.10.2018 से 26.10.2018 की अवधि के बाद दिनांक 27/28.10.2018 (शनिवार एवं रविवार) के Prefix के साथ दिनांक 29.10.2018 से 01.11.2018 तक कुल 4 (चार) दिनों के Ex- India Leave की स्वीकृति आकस्मिक अवकाश के रूप में प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

10 अक्तूबर 2018

सं0 1/एल01-10-17/2017 गृ0आ 8879--श्री सुरेश प्रसाद चौधरी, भा0पु0से0, (2004), पुलिस उप-महानिरीक्षक, कोसी क्षेत्र, सहरसा को MCTP phase-IV के foreign Component दिनांक 22.10.2018 से 26.10.2018 की अवधि के बाद दिनांक-27/28.10.2018 (शनिवार एवं रविवार) के Prefix के साथ दिनांक 29.10.2018 से 01.11.2018 तक कुल 4 (चार) दिनों के Ex- India Leave की स्वीकृति आकस्मिक अवकाश के रूप में प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

29 अक्तूबर 2018

सं0 1/एल1-10-15/2014-गृ0आ0 9354--श्रीमती किम, भा0पु0से0 (2008), समादेष्टा, बिहार सैन्य पुलिस-14, पटना (अतिरिक्त प्रभार-समादेष्टा, बिहार सैन्य पुलिस-01, पटना) को उनके द्वितीय संतान के लिये दिनांक-03.10.2018 से दिनांक-31.03.2019 तक कुल-180 (एक सौ अस्सी) दिनों का मातृत्व अवकाश की स्वीकृति अखिल भारतीय सेवाएं (अवकाश) नियमावली 1955 के नियम 18(1)े अन्तर्गत प्रदान की जाती है।

2. श्रीमती किम की अवकाश अवधि में श्री अरविन्द ठाकुर, भा0पु0से0 (नव प्रोन्नत), पुलिस महानिरीक्षक के सहायक, बिहार सैन्य पुलिस, बिहार, पटना अपने कार्यो के अतिरिक्त समादेष्टा, बिहार सैन्य पुलिस-14, पटना एवं समादेष्टा, बिहार सैन्य पुलिस-01, पटना के प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

29 अक्तूबर 2018

सं0 1/एल01-10-05/2015 गृ0आ 9362--श्री विनय कुमार, भा0पु0से0, (2004), पुलिस उप-महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र, गया को MCTP phase-IV के foreign Component दिनांक 22.10.2018 से 26.10.2018 की अवधि के बाद दिनांक 27/28.10.2018 (शनिवार एवं रविवार) के Prefix के साथ दिनांक 29.10.2018 से 01.11.2018 तक कुल 4 (चार) दिनों के Ex- India Leave की स्वीकृति आकस्मिक अवकाश के रूप में प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

1 नवम्बर 2018

सं0 1/एल1-10-06/2018-गृ0आ0-9441--श्री उपेन्द्र नाथ वर्मा, भा0पु0से0 (2013) पुलिस अधीक्षक, बक्सर को अपनी पत्नी के स्वास्थ्य जॉंच एवं चिकित्सा हेतु अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्‌टी) नियमावली 1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत दिनांक 31.10.2018 से 06.11.2018 तक कुल 07 (सात) दिनों के उपार्जित अवकाष की स्वीकृति प्रदान की जाती है। 2. श्री वर्मा की अवकाष अवधि में श्री अरूण कुमार गुप्ता, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), बक्सर जिला के विधि व्यवस्था एवं दैनिक कार्य के प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।9 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

10 अगस्त 2018

सं0 1/एल1-10-04/2018-गृ0आ0 7107--श्री अष्विनी कुमार, भा0पु0से0 (2008), समादेष्टा, बिहार सैन्य पुलिस-13, दरभंगा को अपनी चिकित्सा हेतु उपभोग की गयी अवधि दिनांक 16.05.2018 से 03.06.2018 तक कुल 19 (उन्नीस) दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोत्तर स्वीकृति अखिल भारतीय सेवाएं (छुट्‌टी) नियमावली 1955 के नियम 10, 11 एवं 20 के अन्तर्गत प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

10 अगस्त 2018

सं0 1/एल1-10-05/2018-गृ0आ0-7108--श्री राजेन्द्र कुमार भील, भा0पु0से0 (2011), समादेष्टा, बिहार गृह रक्षा वाहिनी, पटना सम्प्रति पुलिस अधीक्षक, नगर (पूर्वी) पटना कोे विभागीय अधिसूचना संख्या-4329 दिनांक 19.05.2018 द्वारा दिनांक 21.05.2018 से 08.06.2018 तक कुल 19 (उन्नीस) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की गयी थी। श्री भील द्वारा दिनांक 21.05.2018 के अपराह्‌न में प्रस्थान किया गया एवं अवकाश उपभोग के पश्चात दिनांक 12.06.2018 के पूर्वाह्‌न में आगमन प्रतिवेदन समर्पित किया गया।

2. उक्त के आलोक में श्री भील को पूर्व में स्वीकृत दिनांक 21.05.2018 से 08.06.2018 की अवधि से दिनांक 21.05.2018, एक दिन के उपार्जित अवकाश को रद्‌द करते हुए दिनांक 09.06.2018 से 11.06.2018 तक कुल 3 दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

13 अगस्त 2018

सं0 1/सी01-01/2016, गृ.आ.-7125--अखिल भारतीय सेवाएँ (मृत्यु-सह-सेवान्त लाभ) नियमावली, 1958 के नियम-16(3) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्यिों का प्रयोग करते हुये राज्य सरकार की सहमति से केन्द्र सरकार द्वारा श्री अमिताभ कुमार दास, भा0पु0से0 (1994) को जनहित में तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त कराने एवं समयपूर्व सेवानिवृत्ति हेतु आवश्यक नोटिस के बदले में तीन माह के वेतन एवं भत्ते की राशि के भुगतान का निर्णय गृह मंत्रालय, भारत सरकार के आदेश सं0-30012/19/2016-IPS.II, दिनांक 18.07.2018 द्वारा संसूचित किया गया है।

2. केन्द्र सरकार के उक्त निर्णय के आलोक में श्री अमिताभ कुमार दास, भा0पु0से0 (1994), पुलिस अधीक्षक-सह-सहायक नागरिक सुरक्षा आयुक्त, बिहार, पटना को तत्काल प्रभाव से भारतीय पुलिस सेवा से समयपूर्व सेवानिवृत्ति प्रदान की जाती है।

श्री दास को अखिल भारतीय सेवाएँ (मृत्यु-सह-सेवान्त लाभ) नियमावली, 1958 के प्रासंगिक प्रावधानों के आलोक में सेवान्त लाभ अनुमान्य होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

------

सहकारिता विभाग

-------

अधिसूचनाएं

12 अक्तूबर 2018

सं0 1/सह॰राज॰स्था॰(स्थाना॰)-56/2013/3451--मो0 अमजद हयात बर्क (सिविल लिस्ट संख्या-49/2018, गृह जिला-मुजफ्फरपुर) जिला सहकारिता पदाधिकारी, नालन्दा (अतिरिक्त प्रभार-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहारषरीफ/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, हिलसा) को श्रीमती शषिवाला रावल, प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, नालन्दा के अवकाष अवधि तक प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, नालन्दा का अतिरिक्त प्रभार तत्कालिक प्रभाव से दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

-------

24 अक्तूबर 2018

सं0 1/सह॰राज॰स्था॰(स्थाना॰)-04/2015/3513--श्री शंभू सेन कुमार, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ (अवकाष/प्रषिक्षण रक्षित), बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-जनसंपर्क पदाधिकारी, बिहार, पटना/प्रबंध निदेषक, धु॰र॰द॰) को अपने कार्यों के अतिरिक्त माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना के समक्ष दायर अपील के मामले से संबंधित कार्यों के निष्पादन हेतु न्यायिक कोषांग में नोडल पदाधिकारी के रूप में प्राधिकृत किया जाता है।10 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 2. यह आदेष तत्काल प्रभाव से प्रवृत्त होगा। 3. एतद संबंधी पूर्व में निर्गत आदेष इस हद तक संषोधित समझा जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

-------

15 अक्तूबर 2018

सं0 08/नि॰को॰(रा॰)न्या॰-712/2014-3485--समादेष याचिका संख्या-17974/2017 में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 03.05.2018 को पारित न्यायादेष के आलोक में श्री बब्बन मिश्र, तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी, रोहतास सम्प्रति प्रबंध निदेषक, सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि॰, गोपालगंज के विरूद्ध जमसोना पैक्स में चावल मिल-सह- गैसीफायर एवं गोदाम निर्माण में सरकारी राषि के वित्तीय अनियमितता एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के आरोप में दिए गए दण्ड संबंधित विभागीय अधिसूचना संख्या-4459 दिनांक 26.12.16 को निरस्त किया जाता है। 2. इस आदेष में माननीय मुख्यमंत्री, बिहार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार के राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।

-------

27 जुलाई 2018

सं0 08/नि॰को॰(रा॰)विभागीय-716/2017-2512--श्री अरविन्द कुमार अजय, तत्कालीन जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भागलपुर सम्प्रति जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पूर्णिया को सृजन महिला सहयोग समिति लि॰, सबौर, भागलपुर के अंकेक्षण कार्य में पदीय दायित्व के प्रति घोर लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता, आदेषोल्लंघन, अनुषासनहीनता एवं वित्तीय अनियमितता में संलिप्तता के आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) के तहत अधिसूचना निर्गत की तिथि से अगले आदेष तक निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री अजय का मुख्यालय-संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में श्री अजय को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 में निहित प्रावधानों के तहत संबंधित स्थापना से नियमानुसार देय जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जायेगा। 4. इसमें माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार के राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।

-------

7 सितम्बर 2018

सं0 08/नि॰को॰(रा॰)थाना कांड-907/2011-2998--श्री सुरेष प्रसाद, तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी को रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के मामले में विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत अधिगम एवं द्वितीय कारण पृच्छा की सम्यक समीक्षोपरान्त दिये गये सेवा से बर्खास्ती के दण्ड को समादेष याचिका संख्या-19280/2015 में दिनांक 10.04.2018 द्वारा निरस्त किये जाने के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1379 दिनांक 26.03.2014 को निरस्त किया जाता है। 2. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समादेष याचिका संख्या-19280/2015 में दिनांक 10.04.2018 को न्यायादेष की कंडिका-22 में निम्नांकित observation दिया गया है :- It would be open to the authorities to proceed afresh against the petitioner from stage of second show cause Rule 18 of Bihar CCA Rules by complying with procedure prescribe therein. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित उपर्युक्त आदेष के आलोक में श्री प्रसाद के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), नियमावली-2005 के नियम-18 के अन्तर्गत पुनः विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है। 3. इस आदेष में माननीय मुख्यमंत्री, बिहार का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार के राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।

-------

12 अक्तूबर 2018

सं0 08/नि॰को॰(रा॰)विभागीय-717/2017-3463--श्री मुकेष कुमार, तत्कालीन जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भागलपुर सम्प्रति उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, सहकारी गृह निर्माण एवं उपभोक्ता संघ, पटना अतिरिक्त प्रभार संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना एवं संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, मगध प्रमंडल, गया को सृजन महिला विकास सहयोग समिति लि॰, सबौर, भागलपुर के अंकेक्षण कार्य में पदीय दायित्व के11 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 प्रति घोर लापरवाही एवं कर्त्तव्यहीनता, आदेषोल्लंघन एवं अनुषासनहीनता के आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) के तहत अधिसूचना निर्गत की तिथि से अगले आदेष तक निलंबित किया जाता है।

2. निलंबन अवधि में श्री कुमार का मुख्यालय संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, मगध प्रमण्डल, गया का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 में निहित प्रावधानों के तहत संबंधित स्थापना से नियमानुसार देय जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जायेगा। 4. इसमें माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग, बिहार, पटना का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार के राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।

-------

26 अक्तूबर 2018

सं0 08/नि॰को॰(रा॰)विभागीय-704/2014-3536--श्री अषोक कुमार रजक, तत्कालीन प्रबंध निदेषक, केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, बेतिया सम्प्रति संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध उक्त पदस्थापन काल में राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत्‌ खरीफ मौसम वर्ष, 2009 में गैर ऋणी कृषकों के फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन में विभागीय निदेषों एवं फसल बीमा मार्गदर्षिका की अवहेलना एवं अपने कर्त्तव्यों के प्रति लापरवाही/चूक बरते जाने के आरोप में विभागीय कार्यवाही संचालित कर विभागीय अधिसूचना संख्या-2484 दिनांक 25.07.2018 द्वारा श्री अषोक कुमार रजक को 01 (एक) वेतन वृृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने एवं भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी का दण्ड संसूचित की गई थी, परन्तु इनके वार्द्धक्य सेवा निवृृत्ति दिनांक 31.12.2018 को हैं। जिस कारण अगली वेतन वृृद्धि के पूर्व ही सेवा निवृृत्त हो जायेंगे।

अतः उक्त लघु शास्ति एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोक के स्थान पर निन्दन का दण्ड संसूचित किया जाता है, जो उनके आरोप वर्ष 2009 के बाद अगले 03 (तीन) वर्ष तक प्रभावी रहेगा। 2. अधिसूचना संख्या-2484 दिनांक 25.07.2018 के शेष बिन्दु यथावत रहेंगे। इसमें माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार के राज्यपाल के आदेष से, राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।

-------

10 सितम्बर 2018

सं0 1/रा॰स्था॰विविध-32/2018 सह॰/2999--बिहार सहकारिता प्रषासनिक सेवा संवर्ग के स्तम्भ-2 में अंकित निम्नांकित पदाधिकारियों को अपने कार्यों के अतिरिक्त स्तम्भ-5 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार तत्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/वरीयता/पदनाम ग ृह जिला वर्त्तमान पदस्थापन (अतिरिक्त प्रभार सहित) अतिरिक्त प्रभार का पद
1 2 3 4 5
1़. श्री कविन्द्र नाथ ठाकुर, 04(ख)/17, सहायक निबंधक, स॰स॰ किशनगंज प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, पूर्णिया। (अति॰प्रभार-जिला सहकारिता पदाधिकारी, पूर्णिया। सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, पूर्णिया। महाप्रबंधक, आई0सी0डी0पी0, पूर्णिया) जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, अररिया/महाप्रबंधक, आई0सी0डी0पी0, अररिया।
2. श्री विकास कुमार बरियार 28(ख)/17, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ औरंगाबाद प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, भागलपुर। (अति॰प्रभार-जिला सहकारिता पदाधिकारी, बाँका/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, बाँका/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, भागलपुर) जिला सहकारिता पदाधिकारी, भागलपुर/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, नवगछिया।
3. श्री अरविन्द कुमार पासवान 50(ख)/17, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ पूर्णियां सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, अवकाष/प्रषिक्षण रक्षित, बिहार, पटना (जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, सुपौल एवं प्रबंध निदेषक, प्रस्तावित जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, सुपौल के पद पर प्रतिनियुक्त) सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, वीरपुर/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, त्रिवेणीगंज।
4. श्री यतीन्द्र किषोर कुषवाहा, 12(ख)/17, सहायक निबंधक, स॰स॰ पश्चिमी चम्पारण जिला सहकारिता पदाधिकारी, शेखपुरा (अति॰प्रभार-सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, शेखपुरा) जिला सहकारिता पदाधिकारी, नवादा/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, नवादा।
5. श्री धर्मनाथ प्रसाद, 54(ख)/17, सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ पूर्वी चम्पारण प्रबंध निदेषक, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि॰, औरंगाबाद। जिला सहकारिता पदाधिकारी, औरंगाबाद/सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ, औरंगाबाद/महाप्रबध्ांक, आई0सी0डी0पी0, औरंगाबाद।
12 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

2. क्रमांक-1 एवं 4 पर अंकित पदाधिकारी को क्रमषः श्री सैय्‌यद सरवर हुसैन एवं श्री संजीव कुमार सिंह के अवकाष अवधि तक कॉलम-5 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

-------

5 अक्तूबर 2018

सं0 1/सह॰रा॰स्था॰बि॰स॰से॰(अंके॰)स्थाना॰-16/2012/3382--बिहार सहकारिता अंकेक्षण सेवा संवर्ग के निम्नांकित पदाधिकारियों को अपने कार्यों के अतिरिक्त उनके नाम के समक्ष स्तम्भ-5 में अंकित पद का अतिरिक्त प्रभार तत्कालिक प्रभाव से अगले आदेष तक दिया जाता है :-

क्र॰ सं॰ पदाधिकारी का नाम/वरीयता/ ग ृह जिला पदनाम वर्त्तमान पदस्थापन पद (अतिरिक्त प्रभार सहित ) अतिरिक्त प्रभार का पद/कार्यालय का नाम
1 2 3 4 5
1 श्री संजय कुमार 02/15 भोजपुर उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ उप मुख्य अंकेक्षक, कार्यालय निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार पटना (अति॰प्रभार-संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना/जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पटना) उप मुख्य अकेक्षक, सहयोग समितियाँ, मगध एवं पटना प्रमंडल, पटना।
2 श्री मुकेश कुमार 03/15 गया उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ उप मुख्य अकेक्षक, सहयोग समितियाँ, सहकारी गृह निर्माण एवं उपभोक्ता संघ, पटना (अति॰प्रभार-संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना/संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, मगध प्रमंडल, गया) उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, भूमि विकास बैंक, पटना।
3 श्री कामेश्वर ठाकुर 05/15 सीतामढ़ी उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ उप मुख्य अकेक्षक, सहयोग समितियाँ, कोशी एवं दरभंग प्रमंडल, सहरसा (अति॰ प्रभार-संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, कोशी प्रमंडल, सहरसा/जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, सहरसा) संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर।
4 श्री वैद्यनाथ राय 09/15 समस्तीपुर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, वैशाली। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, सीवान।
5 श्री राजेश कुमार 11/15 बेगूसराय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पश्चिमी चम्पारण। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, गोपालगंज।
6 श्री रतन कुमार बेगूसराय जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, रोहतास। जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, औरंगाबाद।
7 श्री शशि भूषण प्रसाद पटना जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, अररिया (अति॰प्रभार-जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, किशनगंज) जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पूर्णियाँ।
8 श्री सुधीर कुमार मुंगेर जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, जहानाबाद जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पटना/ जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, अरवल
13 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, ऋचा कमल, उप-सचिव।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

द्वारा

(cid:466)बहार, पटना (cid:292)कािशत एवं मु(cid:465)(cid:289)त। (cid:466)बहार गजट, 35—571+10-ड(cid:547)0ट(cid:547)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in14 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

भाग-2

(cid:466)बहार-रा(cid:207)यपाल और काया(cid:91)(cid:218)य(cid:162)(cid:585) (cid:430)ारा िनकाले गये (cid:466)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आ(cid:465)द। ————— सामान्य प्रशासन विभाग

-------

शुद्धि-पत्र

11 सितम्बर 2018

सं0 2/आरोप-01-19/2013-सा0प्र0-12131--श्री अरविन्द कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 591/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पातेपुर, वैशाली सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, मधुबनी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3216 दिनांक 08.03.2018 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11553 दिनांक 29.08.2018 द्वारा 'समाप्त' किया गया है। उक्त संकल्प की कंडिका-3, 5 एवं 6 में श्री झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने संबंधी संकल्प का ज्ञापांक 3216 एवं दिनांक 08.03.2018 पढ़ा जाय।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

-------

सहकारिता विभाग

-------

शुद्धि-पत्र

20 सितम्बर 2018

सं0 08/नि॰को॰(रा॰)विभागीय-716/2017-3188--विभागीय अधिसूचना संख्या-2512 दिनांक 27.07.2018 के कंडिका-1 में उल्लिखित ''श्री अरविन्द कुमार अजय, तत्कालीन जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भागलपुर सम्प्रति जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पूर्णियाँ'' के बदले ''श्री अरविन्द कुमार अजय, तत्कालीन जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भागलपुर सम्प्रति उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, मगध एवं पटना प्रमण्डल, पटना अतिरिक्त प्रभार-संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर एवं जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, पूर्णियाँ'' पढ़ा एवं समझा जाय। श्

2. कंडिका-2 में उल्लिखित ''मुख्यालय संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ का कार्यालय'' के बदले ''मुख्यालय-संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण), सहयोग समितियाँ, कोषी प्रमंडल, सहरसा का कार्यालय'' पढ़ा एवं समझा जाय।

3. अधिसूचना के शेष बिन्दु यथावत रहेंगे।

आदेश से,

राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।15 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

24 सितम्बर 2018

सं0 08/नि॰को॰(रा॰)विभागीय-718/2017-3212--विभागीय अधिसूचना संख्या-2297 दिनांक 13.07.2018 के कंडिका-1 में उल्लिखित ''श्री कृष्णकांत शर्मा, तत्कालीन जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भागलपुर सम्प्रति जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, सीवान'' के बदले ''श्री कृष्णकांत शर्मा, तत्कालीन जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, भागलपुर सम्प्रति उप मुख्य अंकेक्षक, सहयोग समितियाँ, भूमि विकास बैंक, पटना अतिरिक्त प्रभार-जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, सीवान एवं जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सहयोग समितियाँ, गोपालगंज'' पढ़ा एवं समझा जाय। श्

2. अधिसूचना के शेष बिन्दु यथावत रहेंगे।

आदेश से,

राजेन्द्र राम, उप-सचिव (निगरानी)।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

द्वारा

(cid:466)बहार, पटना (cid:292)कािशत एवं मु(cid:465)(cid:289)त। (cid:466)बहार गजट, 35—571+10-ड(cid:547)0ट(cid:547)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in16 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

भाग-9-ख

िन(cid:466)वदा सूचनाएं, प(cid:464)रवहन सूचनाएं, (cid:219)यायालय सूचनाएं और सव(cid:91)साधारण

सूचनाएं इ(cid:215)या(cid:465)द।

————— सूचना

—————

No. 1477----I, Saurav Dubey, S/o Late Subodh Kumar Dubey, R/o Flat No. 102, Devendra Apartment, Near Bihar Dalit Vikash Samiti, Rukunpura, Bailey Road, PO-B.V. College, Patna-800014 declare that my actual name is Saurav Dubey and that Saurav Dubey and Kumar Saurabh is the same and one identical person vide Affidavit no. 27613 of the court of Executive Magistrate, Patna Sadar on 27.09.2018.

Saurav Dubey.

—————

No. 1478----I, SWETA, D/o Arjun Singh, R/o Vill-Bari Kewai, P.O.-Daniyawan, P.S.- Shahjahanpur, Distt.-Patna-801304 vide affidavit no. 10598 dated 11.06.2018 shall be known as Sweta Singh.

SWETA.

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

द्वारा

(cid:466)बहार, पटना (cid:292)कािशत एवं मु(cid:465)(cid:289)त। (cid:466)बहार गजट, 35—571+10-ड(cid:547)0ट(cid:547)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in17 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018

(cid:466)बहार गजट

का

पूरक(अ0)

(cid:292)ािधकार(cid:547) }kjk (cid:292)कािशत

—————

सं0 2/आरोप-01-16/2018-सा0प्र0-8325

सामान्य प्रशासन विभाग

-------

संकल्प

22 जून 2018

पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के पत्रांक 1887 दिनांक 29.05.2018 द्वारा श्री ज्ञान कुमार राम (GAYAN KUMAR RAM) (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1159/11, वरीय उप समार्हाा-सह-कार्यपालक पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय, सासाराम, रोहतासको 10,000/-(दस हजार) रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर माननीय विशेष न्यायाधीश, निगरानी-I, पटना के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से आदेशानुसार उन्हें दिनांक 24.05. 2018 को न्यायिक हिरासत में (आदर्श केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना) भेजे जाने तथा उनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या 022/2018 दिनांक 24.05.2018, धारा-7 भ्र0नि0अधि0, 1988 दर्ज किये जाने की सूचना प्राप्त है।

श्री राम को रंगे हाथ घूस लेते दिनांक 24.05.2018 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क), (ग) एवं नियम-9(2) के प्रावधानों के तहत्‌ उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की तिथि दिनांक 24.05.2018 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है।

निलंबन अवधि में श्री राम को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-10 के तहत्‌ अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

------

सं0 2/सी0-1069/2008-सा0प्र0-7675

-------

11 जून 2018

श्री दिवाकर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 477/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़, भपटियाही, सुपौल सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, बक्सर के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, सुपौल के पत्रांक 316/गो0 दिनांक 01.08. 2007 द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी सरायगढ़, भपटियाही, सुपौल के पदस्थापन अवधि में इंदिरा आवास योजना मद मेें प्राप्त आवंटन से अधिक राशि का व्यय अन्य मद की योजनाओं में करने, वित्तीय अनुशासन की परवाह नहीं करते हुए राशि की विचलन करने एवं सरकार द्वारा निर्गत दिशा निर्देशों में प्रतिकूल आरोप के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभाग को उपलब्ध कराया गया।

ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 4951 दिनांक 07.04.2008 द्वारा श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, सुपौल के मन्तव्य के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3658 दिनांक 27.04. 2009 विभागीय कार्यवाही संचालित की गई, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त18 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 किया गया। विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक 394 दिनांक 06.05.2009 द्वारा श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों से संबद्ध साक्ष्यों के संलग्न नहीं होने एवं आरोपों के सुसंगत प्रतीत नहीं होने के कारण प्रस्ताव को यथास्थिति वापस कर दिया गया। विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा पत्र में अंकित किया गया कि आरोपकर्त्ता पदाधिकारी एवं जाँच पदाधिकारी ही संबंधित राशि के विचलन के संबंध में आश्वस्त नहीं है। साथ ही आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण का खंडन कर यह विनिर्दिष्ट नहीं किया गया है कि उक्त राशि किस मद की थी और किस मद में इसका व्यय किया गया। फलस्वरूप अस्पष्ट आरोप के लिए प्रस्ताव विभाग को वापस कर दिया गया। तत्पश्चात्‌ विभागीय पत्रांक 8165 दिनांक 19.08.2009 द्वारा ग्रामीण विकास विभाग से आरोप से संबंधित साक्ष्यों की पठनीय प्रति की माँग की गई। जिला पदाधिकारी, सुपौल के पत्रांक 13022/गो0, दिनांक 03.01.2010 द्वारा वांछित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

विभागीय पत्रांक 2830, दिनांक 30.03.2010 द्वारा जिला पदाधिकारी, सुपौल से श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों के संबंध में स्पष्ट प्रतिवेदन की मांग की गई। जिला पदाधिकारी, सुपौल द्वारा ग्रामीण विकास विभाग को प्रेषित मन्तव्य की प्रति संलग्न कर विभाग को प्रेषित की गई। तत्पश्चात्‌ विभागीय जाँच आयुक्त के पत्र के आलोक में विभागीय पत्रांक 8594 दिनांक 01.09.2010 द्वारा संचालन पदाधिकारी द्वारा की गई इस आशय की पृच्छा कि किस मद की राशि का विचलन किस मद में किया गया, के क्रम में अंकेक्षण करा कर प्रतिवेदन समर्पित करने का अनुरोध जिला पदाधिकारी, सुपौल से किया गया। कई स्मारों के पश्चात्‌ जिला पदाधिकारी के पत्रांक 454-2/गो0 दिनांक 22.04.2015 द्वारा श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की जाँच कोषागार पदाधिकारी, सुपौल एवं उप विकास आयुक्त, सुपौल के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर सूचित किया गया है कि श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित इन्दिरा आवास योजना मद की राशि के विचलन का मामला प्रथम दृष्ट्‌या सही प्रतीत नहीं होता। इस मामले में अंकेक्षण एजेंसी मे0 पी0 झा एण्ड एसोसिएट्‌स, चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट, पटना द्वारा अंकेक्षण भी कराया गया लेकिन श्री झा द्वारा निर्गत चेक पंजी उपलब्ध नहीं हो पाने के कारणवश अंकेक्षण दल के किसी स्पष्ट निष्कर्ष पर पहुँचने में सक्षम नहीं होने के आशय की सूचना भी दी गई है।

कोषागार पदाधिकारी, सुपौल एवं उप विकास आयुक्त, सुपौल के प्रतिवेदन में निष्कर्ष रूप में अंकित किया गया है कि इंदिरा आवास मद में उपलब्ध कुल राशि-2,67,69,100/-रू0 के विरूद्ध कुल समायोजित भुगतित राशि-2,39,99,800/-रू0 मात्र है, जो कुल प्राप्ति की तुलना में कम है। अतएव इंदिरा आवास मद की राशि के विचलन का मामला प्रथम दृष्ट्‌या सत्य प्रतीत नहीं होता।

जिला पदाधिकारी के उपर्युक्त प्रतिवेदन के आलोक में ग्रामीण विकास विभाग से श्री झा के विरूद्ध गठित आरोप एवं संबंधित साक्ष्यों के सुसंगत नहीं होने के कारणवश विभागीय पत्रांक 10582 दिनांक 22.07.2015 द्वारा विभागीय मन्तव्य की मांग की गई। ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक 327679 दिनांक12.09.2017 द्वारा मन्तव्य उपलब्ध कराया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण, जिला पदाधिकारी, सुपौल के मन्तव्य एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिला पदाधिकारी, सुपौल के पत्रांक 454-2 दिनांक 22.04.2015 एवं संचालन पदाधिकारी विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक 394 दिनांक 06.05.2009 के समीक्षोपरांत पाया गया कि तत्कालीन निदेशक द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन में रोकड़ पंजी में प्रारम्भिक शेष का उल्लेख नहीं है केवल प्राप्त आवंटन एवं श्री झा द्वारा किये गये व्यय को जोड़ दिया गया है। जबकि जिला पदाधिकारी, सुपौल द्वारा पत्रांक 454-2, दिनांक 22.04.2015 के तहत्‌ जो प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है उसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि विषय गत मामले की जाँच कोषागार पदाधिकारी, सुपौल एवं लेखापाल, डी0आर0डी0ए0, सुपौल से करायी गयी। इन्दिरा आवास मद में कुल उपलब्ध राशि 2,67,69,100/- के विरूद्ध कुल समायोजन/भुगतित राशि 2,39,99,800/-मात्र है, जो कुल प्राप्ति की तुलना में कम है अतः इन्दिरा आवास मद की राशि के विचलन का मामला प्रथम द्रष्टया सत्य प्रतीत नहीं होता है। उक्त प्रतिवेदन पर जिला पदाधिकारी की भी सहमति है। स्पष्ट है कि श्री झा के विरूद्ध इन्दिरा आवास योजना की राशि विचलन का मामला नहीं बनता है। विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री झा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को वापस किये जाने एवं जिला पदाधिकारी, सुपौल से प्राप्त प्रतिवेदन तथा उक्त के आलोक में ग्रामीण विकास विभाग से प्राप्त मंतव्य से सहमत होते हुए श्री झा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3658 दिनांक 27.04.2009 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री दिवाकर झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 477/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़, भपटियाही, सुपौल सम्प्रति जिला परिवहन पदाधिकारी, बक्सर के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3658 दिनांक 27.04.2009 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

------

सं0 2/आरोप-01-07/2017-सा0प्र0-8697

------

2 जुलाई 2018

श्री मदन कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 904/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, कैमूर को दिनांक 14.01.2017 को सबलपुर दियारा पतंग उत्सव के दौरान हुई नाव दुर्घटना मेें गंभीर प्रशासनिक चूक एवं विधि व्यवस्था में लापरवाही का दोषी पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2292 दिनांक 24.02.2017 द्वारा निलंबित19 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 किया गया। श्री कुमार के विरूद्ध आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 3356 दिनांक 21.03.2017 एवं स्मार पत्रांक 4639 दिनांक 20.04.2017 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया। श्री कुमार के पत्रांक-शून्य दिनांक 21.04.2017 द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के संदर्भ में अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

2. श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 6431 दिनांक 30.05.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3. अपर सदस्य, राजस्व पर्षद, बिहार, पटना-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 422 दिनांक 28.08.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में अंकित निष्कर्ष पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा व्यक्त किये गये असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 16278 दिनांक 21.12.2017 द्वारा श्री कुमार को लिखित अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। उक्त के आलोक में श्री कुमार के पत्रांक-शून्य दिनांक 17.01.2018 द्वारा लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

4. श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पाया गया कि श्री कुमार द्वारा न तो कार्यक्रम स्थल (सबलपुर दियारा, सोनपुर) की व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की गई और न ही कार्यक्रम के पूर्व या कार्यक्रम के दिन सबलपुर दियारा जाना उचित समझा गया। इनके द्वारा कार्यक्रम स्थल के लिए प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी को स्वविवेक के आधार पर कार्य करने की जिम्मेवारी सौंप दी गई तथा इस बात का संज्ञान नहीं लिया गया कि प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी के साथ कौन से पुलिस अधिकारी को टैग किया गया है। यदि श्री कुमार द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी से कार्यक्रम स्थल की लगातार जानकारी प्राप्त की गई होती तो भीड़ को नियंत्रित करने का तात्कालिक हल निकाला जा सकता था तथा नाव दुर्घटना के कारण हुई लोगों की मृत्यु को रोका जा सकता था। इस प्रकार श्री कुमार को सबलपुर दियारा पतंग उत्सव (दिनांक 14.01.2017) के दौरान हुई नाव दुर्घटना में कत्वर्यों के निर्वहन/विधि-व्यवस्था के संधारण में लापरवाही बरतने तथा सतकर्ता एवं दूरदर्शिता का अभाव का दोषी पाया गया। अतएव श्री कुमार के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए उन्हें तत्काल निलंबन मुक्त करने तथा 'तीन वेतन वृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोकने' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया। तदनुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2628 दिनांक 23.02.2018 द्वारा श्री कुमार को निलंबन मुक्त किया गया।

5. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के विरूद्ध विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 2741 दिनांक 27.02.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 467 दिनांक 21.05.2018 द्वारा परामर्श समर्पित किया गया। उक्त परामर्श में बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा कहा गया कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तावित दंड अधिक होने के कारण अनुपातिक नहीं है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरान्त श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की गंभीरता एवं श्री कुमार की कत्वर्यहीनता के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श से असहमति व्यक्त की गयी।

6. अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री मदन कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 904/11, तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी, सोनपुर सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, कैमूर के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''तीन वेतन वृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोकने'' का दंड अधिरोपित किया जाता है। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हराम बिशुन राय, अवर सचिव।

-------

सं0 2/आरोप-01-18/2018-सा0प्र0-9899

------

25 जुलाई 2018

जिला पदाधिकारी, कटिहार के पत्रांक 958 दिनांक 11.07.2018 द्वारा सूचित किया गया है कि कटिहार नगर सहायक थाना कांड संख्या 318/2018 दिनांक 25.08.2018 (धारा-377 भा0द0वि0) के प्राथमिक अभियुक्त मो0 जफर रकीब (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 528/11,अपर समार्हाा, कटिहार को अप्रा—तिक यौनाचार करने के आरोप के लिए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, कटिहार द्वारा दिनांक 06.07.2018 को मंडल कारा, कटिहार में भेजने का आदेश दिया गया है। वर्तमान में मो0 रकीब को मंडल कारा, कटिहार में कारावासित की सूचना प्राप्त है।

2. मो0 रकीब को उक्त आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क), (ग) एवं नियम-9(2) के प्रावधानों के तहत्‌ उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की तिथि दिनांक 06.07.2018 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया जाता है।

3. निलंबन अवधि में मो0 रकीब को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-10 के तहत्‌ अनुमान्य दर से जीवन निर्वाह भाा देय होगा।20 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

------- सं0 2/आरोप-01-38/2012-सा0प्र0-10350 ------ 2 अगस्त 2018 मो0 मोबीन अली अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 459/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, नगर अंचल, गया सम्प्रति अपर समाहर्त्ता, दरभंगा के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक 2249 दिनांक 21.05.2012 द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के द्वारा निर्गत परिपत्रों एवं बिहार टेनेन्सी एक्ट के प्रावधानों के प्रतिकूल रैयती गैर मजरूआ आम भूमि/गैर मजरूआ मालिक जमीन का लगान निर्धारण करने संबंधी आरोप के लिए आरोप प्रपत्र 'क' गठित कर प्रमंडलीय आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया को प्रेषित किया गया, जिसकी प्रति विभाग को भी उपलब्ध करायी गयी।

2. अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 2598 दिनांक 24.02.2014 द्वारा मो0 अंसारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, पटना प्रमण्डल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 92 दिनांक 23.01.2016 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें मो0 अंसारी के विरूद्ध प्रतिवेदित सभी आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

जाँच प्रतिवेदन पर समीक्षा के क्रम में पाया गया कि प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में आरोपों के समर्थन में विभागीय पक्ष को ठीक ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। फलतः समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए मो0 अंसारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की पुनः जाँच करने का निर्णय लिया गया। विभागीय पत्रांक 4920 दिनांक 04.04.2016 द्वारा संयुक्त आयुक्त, पटना प्रमण्डल, पटना को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18 (i) के तहत्‌ नियम 17 के उपबंधों के अनुसार आरोपों की पुनः जाँच कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने का अनुरोध किया गया।

3. आयुक्त, पटना प्रमण्डल, पटना के पत्रांक 927 दिनांक 23.06.2017 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें मो0 अंसारी के विरूद्ध सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया तथा सभी आरोपों के निष्कर्ष में आरोपी पदाधिकारी को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर काम करने, नियम के विरूद्ध काम करने, निदेशों/नियमों की त्रुटिपूर्ण व्याख्या करने, बिना सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त किये स्वयं अपने स्तर से मामले को निष्पादित करने इत्यादि निष्कर्ष प्रतिवेदित किया गया।

उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 9976 दिनांक 03.08.2017 द्वारा मो0 अंसारी से अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में मो0 अंसारी के पत्रांक 917 दिनांक 06.09.2017 द्वारा अपना अभ्यावेदन समर्पित किया गया। मो0 अंसारी द्वारा अपने अभ्यावेदन में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया, बल्कि मुख्य रूप से उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया, जिसका उल्लेख उनके द्वारा पूर्व में समर्पित स्पष्टीकरण/बचाव बयान में किया गया था।

4. मो0 अंसारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन तथा समर्पित अभ्यावेदन के सम्यक्‌ समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मो0 अंसारी के विरूद्ध आरोप बहुत गंभीर प्र—ति के होने तथा नियमों का लगातार उल्लंघन कर क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर बड़ी संख्या में आदेश पारित करने का उन्हें दोषी पाया गया। अतएव संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए मो0 अंसारी के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(vii) के तहत्‌ ''वर्तमान कालमान वेतन एवं कोटि (उप विकास आयुक्त) से एक स्तर नीचे के पद एवं कोटि (उप सचिव) में स्थायी रूप से अवनति'' का दण्ड देने का निर्णय लिया गया।

5. विभागीय पत्रांक 15773 दिनांक 11.12.2017 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से मो0 अंसारी के विरूद्ध विनिश्चित दण्ड प्रस्ताव पर सहमति/परामर्श की मांग की गयी। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के पत्रांक 52 दिनांक 09.04.2018 द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त किया गया।

6. बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति एवं अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णय के आलोक में मो0 मोबीन अली अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 459/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, नगर अंचल, गया को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5931 दिनांक 09.05.2018 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 (vii) के तहत्‌ ''वर्तमान कालमान वेतन एवं कोटि (उप विकास आयुक्त) से एक स्तर नीचे के पद एवं कोटि (उप-सचिव) में स्थायी रूप से अवनति'' का दंड दिया गया।

7. उक्त दंड के विरूद्ध मो0 अंसारी के पत्रांक शून्य दिनांक 18.05.2018 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी दाखिल किया गया। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मो0 अंसारी के पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त पाया गया कि मो0 अंसारी द्वारा अपने अर्जी में प्रमाणित आरोपों के विरूद्ध कोई तार्किक तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मो0 अंसारी के विरूद्ध आरोप की प्र—ति गंभीर होने एवं नियमों की अनदेखी करने इत्यादि प्रमाणित आरोपों के आलोक में उनके पुनर्विलोकन अर्जी को अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया।21 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 8. अतएव उपर्युक्त वर्णित स्थिति में मो0 मोबीन अली अंसारी (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 459/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी, नगर अंचल, गया सम्प्रति अपर समाहर्त्ता, दरभंगा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 18.05.2018 को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5931 दिनांक 09.05.2018 द्वारा अधिरोपित दंड ''वर्तमान कालमान वेतन एवं कोटि (उप विकास आयुक्त) से एक स्तर नीचे के पद एवं कोटि (उप-सचिव) में स्थायी रूप से अवनति'' को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ह राम बिशुन राय, अवर सचिव।

--------

सं0 2/आरोप-01-08/2017-सा0प्र0-9428

-------

17 जुलाई 2018

मो0 मंजूर आलम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1393/11, तत्कालीन नगर दंडाधिकारी, पटना सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, किशनगंज को दिनांक 14.01.2017 के विरूद्ध सबलपुर दियारा पतंग उत्सव के दौरान हुई नाव दुर्घटना की उच्चस्तरीय जाँच के उपरान्त प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर एस0डी0आर0एफ0 के नावों का सही ढ़ंग से उपयोग नहीं करने तथा नावों को समय पर ईंधन उपलब्ध नहीं कराने इत्यादि आरोपों के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर विभागीय पत्रांक 4152 दिनांक 06.04.2017 एवं स्मार पत्रांक 5603 दिनांक 11.05.2017 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया। मो0 आलम के पत्र दिनांक 24.05.2017 द्वारा प्रतिवेदित आरोपों के संदर्भ में स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। 2. मो0 आलम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के सम्यक्‌ समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 7847 दिनांक 29.06.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

3. अपर सदस्य, राजस्व पर्षद, बिहार, पटना-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 474 दिनांक 03.10.2017 द्वारा उक्त विभागीय कार्यवाही में जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें संचालन पदाधिकारी द्वारा मो0 आलम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन में अंकित निष्कर्ष पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा व्यक्त किये गये असहमति के बिन्दु पर विभागीय पत्रांक 16277 दिनांक 21.12.2017 द्वारा मो0 आलम को लिखित अभ्यावेदन समर्पित करने का निदेश दिया गया। उक्त के आलोक में मो0 आलम के पत्र दिनांक 08.01. 2018 द्वारा लिखित अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

4. मो0 आलम द्वारा समर्पित अभ्यावेदन की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पाया गया कि मो0 आलम द्वारा एस0डी0आर0एफ0 का सही ढंग से उपयोग नहीं किया गया और नावों को समय पर र्इंधन उपलब्ध नहीं कराया गया। इनके द्वारा यदि नावों को समय पर ईंधन उपलब्ध करा दिया होता तो नावों का परिचालन ससमय किया जाता। र्इंधन की आपूर्ति के अभाव में नावों का सदुपयोग, पेट्रोलिंग तथा बचाव ऑपरेशन के लिए ससमय नहीं किया जा सका। उक्त लापरवाही के कारण नाव दुर्घटना हुई तथा व्यापक जान-माल की क्षति हुई। इस प्रकार मो0 आलम को सबलपुर दियारा पतंग उत्सव (दिनांक 14.01.2017) के दौरान हुई नाव दुर्घटना में कत्वर्यों के निर्वहन/विधि-व्यवस्था के संधारण में लापरवाही बरतने तथा सतकर्ता एवं दूरदर्शिता का अभाव का दोषी पाया गया, अतएव मो0 आलम के अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए उन्हें ''तीन वेतन वृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोकने'' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

5. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा मो0 आलम के विरूद्ध विनिश्चित दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक 2740 दिनांक 27.02.2018 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। उक्त के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 575 दिनांक 29.05.2018 द्वारा परामर्श समर्पित किया गया। उक्त परामर्श में बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा कहा गया कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तावित दंड अधिक होने के कारण अनुपातिक नहीं है।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षोपरान्त मो0 आलम के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों की गंभीरता एवं मो0 आलम की कत्वर्यहीनता के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श से असहमति व्यक्त की गयी।

6. अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार मो0 मंजूर आलम (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1393/11, तत्कालीन नगर दंडाधिकारी, पटना सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, किशनगंज के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ ''तीन वेतन वृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोकने'' का दंड अधिरोपित किया जाता है। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, हभीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।22 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 सं0 2/सी0-10178/2008-सा0प्र0-10748

------

9 अगस्त 2018

श्री अरविन्द कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 691/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, हरलाखी, मधुबनी सम्प्रति उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, बक्सर (अतिरिक्त प्रभार-अपर समार्हाा, बक्सर) के विरूद्ध आधि—त रूप से अनुपस्थित रहने एवं सरकारी निदेश/आदेश तथा उच्चाधिकारियों के आदेश का उल्लंघन करने संबंधित आरोपों के लिए जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 512 दिनांक 30.07.2009 द्वारा आवश्यक कार्रवाई हेतु प्राप्त हुआ।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 4364 दिनांक 14.05.2009 द्वारा उन्हें स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेश दिया गया। उक्त के आलोक में जिला पदाधिकारी, मधुबनी के पत्रांक 554 दिनांक 10.02.2016 के साथ संलग्न श्री कुमार के पत्रांक 706 दिनांक 08.09.2009 द्वारा स्पष्टीकरण प्राप्त हुआ। विभागीय पत्रांक 10892 दिनांक 05.11.2009 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर मंतव्य की मांग की गयी। जिला पदाधिकारी, मधुबनी के ज्ञापांक 1063 दिनांक 24.04.2010 द्वारा निर्गत मंतव्य जो आयुक्त कार्यालय, दरभंगा के पत्रांक 981 दिनांक 17.07.2010 द्वारा विभाग को प्राप्त हुआ, में प्रतिवेदित किया गया है कि श्री कुमार का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य/संतोषप्रद नहीं है। श्री कुमार के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा गठित मंतव्य पर विभागीय पत्रांक 9436 दिनांक 23.09.2010 द्वारा आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा से मंतव्य की मांग की गयी थी, जो स्मारित किये जाने के बावजूद विभाग को प्राप्त नहीं हुआ।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप यथा उनके अनधि—त रूप से अनुपस्थित रहने एवं सरकारी निदेश/आदेश तथा उच्चाधिकारी के आदेश का उल्लंघन करने के आरोप प्रतिवेदित हैं। आरोप मुख्यतया र्काव्य के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता से संंबंधित है, जो प्रशासनिक प्र—ति के हैं।

श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण को जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा अपने मंतव्य में संतोषजनक नहीं पाया गया एवं प्रतिवेदित सभी आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अरविन्द कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 691/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, हरलाखी, मधुबनी सम्प्रति उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, बक्सर (अतिरिक्त प्रभार-अपर समार्हाा, बक्सर) के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4544 दिनांक 05.04.2018 द्वारा (i) निन्दन तथा (ii) एक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया गया। उपर्युक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा पुनरीक्षण वाद/पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पत्रांक 402 दिनांक 07.05.2018 समर्पित किया गया।

अभ्यावेदन में श्री कुमार द्वारा दंडादेश से संबंधित विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4544 दिनांक 05.04.2018 की कंडिका-2 में आयुक्त कार्यालय, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा का मंतव्य विभाग को प्राप्त नहीं होने की तरफ इंगित किया गया है। उनका कहना है कि आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 939 दिनांक 09.09.2011 द्वारा स्पष्टीकरण पर बिन्दुवार मंतव्य विभाग को उपलब्ध कराया गया था। उक्त मंतव्य में आयुक्त द्वारा आरोप संख्या-1(क) के विरूद्ध समर्पित स्पष्टीकरण को आंशिक रूप से स्वीकारात्मक, आरोप संख्या-1(ख) में आरोप के सार्थक प्रतीत नहीं होने तथा आरोप संख्या-2 के विरूद्ध समर्पित स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य परिलक्षित होने का मंतव्य दिया गया है। उपरोक्त मंतव्य के आधार पर श्री कुमार द्वारा उन्हें संसूचित दंड से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि श्री कुमार के स्पष्टीकरण एवं जिला पदाधिकारी, मधुबनी द्वारा गठित मंतव्य पर विभागीय पत्रांक 9436 दिनांक 23.09.2010 द्वारा आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा से मंतव्य की मांग की गयी थी, जो स्मारोपरान्त अप्राप्त रहा।

जहाँ तक आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 939 दिनांक 09.09.2011 द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण पर आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा दिये गये बिन्दुवार मंतव्य का प्रश्न है, इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि उक्त पत्र के संचिका में संधारित नहीं रहने के कारण आयुक्त कार्यालय, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 981 दिनांक 17.07.2010 द्वारा प्राप्त जिला पदाधिकारी, मधुबनी के ज्ञापांक 1063 दिनांक 24.04.2010 द्वारा निर्गत मंतव्य के आलोक में समीक्षा के उपरान्त श्री कुमार को दंड अधिरोपित किया गया है।

श्री कुमार द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के साथ संलग्न आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 939 दिनांक 09.09.2011 द्वारा दिये गये मंतव्य में आयुक्त द्वारा आरोप संख्या-1(क) के विरूद्ध समर्पित स्पष्टीकरण को आंशिक रूप से स्वीकारात्मक, आरोप संख्या-1(ख) में आरोप के सार्थक प्रतीत नहीं होने तथा आरोप संख्या-2 के विरूद्ध समर्पित स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य परिलक्षित होने का मंतव्य दिया गया है।

उपर्युक्त मंतव्य में आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा श्री कुमार के स्पष्टीकरण को पूर्णतः स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है, अतः आयुक्त कार्यालय, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 981 दिनांक 17.07.2010 द्वारा प्राप्त जिला पदाधिकारी, मधुबनी के ज्ञापांक 1063 दिनांक 24.04.2010 द्वारा निर्गत मंतव्य के आलोक में समीक्षेपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अधिरोपित लघु दंड 'निन्दन तथा एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक' पर पुनर्विचार की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है।23 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री कुमार के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वी—त करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4544 दिनांक 05.04.2018 द्वारा इन्हें ''(i) निन्दन तथा (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' के संसूचित दंड को पूर्ववत्‌ बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।

अतः अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अरविन्द कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 691/11, तत्कालीन अंचलाधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, हरलाखी, मधुबनी सम्प्रति उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्‌, बक्सर (अतिरिक्त प्रभार-अपर समार्हाा, बक्सर) के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 4544 दिनांक 05.04.2018 द्वारा संसूचित दंड ''(i) निन्दन तथा (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' को पूर्ववत्‌ बरकरार रखा जाता है। आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

--------

सं0 2/आरोप-01-77/2013-सा0प्र0-11370

-------

24 अगस्त 2018

श्री अजय कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 379/11, तत्कालीन अपर समार्हाा, विभागीय जाँच, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध जन वितरण प्रणाली के डीलरों, होल सेलरों एवं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों से अवैध राशि की वसूली करने तथा उच्चाधिकारियों को विभिन्न विभागों से अवैध लेन-देन की प्रक्रिया में स्वयं को शामिल रखने आदि आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 19463 दिनांक 23.12.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

आयुक्त कार्यालय, पूर्णियाँ के पत्रांक 4890 दिनांक 09.12.2015 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार विभागीय पत्रांक 14682 दिनांक 28.10.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में आगे की जाँच हेतु संचालन पदाधिकारी आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमंडल, पूर्णियाँ को पुनः निदेश दिया गया है।

श्री झा दिनांक 31.07.2018 को सेवानिवृा हो चुके हैं, लेकिन विभागीय कार्यवाही का अंतिम जाँच प्रतिवेदन सम्प्रति अप्राप्त है।

अतः श्री अजय कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 379/11, तत्कालीन अपर समार्हाा, विभागीय जाँच, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली 1950 के नियम-43(बी) के तहत्‌ सम्परिवर्तित किया जाता है। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

--------

सं0 2/आरोप-01-19/2013-सा0प्र0-11553

-------

29 अगस्त 2018

श्री अरविन्द कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 591/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पातेपुर, वैशाली सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, मधुबनी के विरूद्ध पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के पत्रांक 2318 दिनांक 21.09.2015 के द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ। उक्त आरोप प्रखंड विकास पदाधिकारी, पातेपुर, वैशाली के पदस्थापन अवधि में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के वाद संख्या 1431/4/39/2009-10 के आलोक में वर्ष 2006-07 से 2008-09 के दौरान प्री मैट्रिक छात्रवृति वितरण में अनियमितता/गबन के आरोप से संबंधित है।

प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 16847 दिनांक 07.12.2015 द्वारा श्री झा से स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर श्री झा के पत्रांक 1789 दिनांक 15.12.2015 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 293 दिनांक 07.01.2016 द्वारा प्रधान सचिव, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गयी। उक्त के आलोक में पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 2681 दिनांक 18.10.2016 द्वारा श्री झा के स्पष्टीकरण को स्वीकारयोग्य नहीं पाए जाने संबंधी मंतव्य उपलब्ध कराया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण एवं पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त मंतव्य पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3216 दिनांक 08.03.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमेंविभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।24 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 430 दिनांक 17.05.2018 द्वारा विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन/अन्तिम निष्कर्ष समर्पित किया गया, जिसमें श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित चारों आरोपों को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया।

श्री झा के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन/अन्तिम निष्कर्ष की समीक्षा के उपरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री झा के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 3216 दिनांक 08.03.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री अरविन्द कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 591/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पातेपुर, वैशाली सम्प्रति वरीय उप समार्हाा, मधुबनी के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10203 दिनांक 26.07.2016 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को 'समाप्त' किया जाता है। आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

--------

सं0 2/आरोप-01-39/2015-सा0प्र0-11554

-------

29 अगस्त 2018

डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, केवटी, दरभंगा सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्णिया के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्य सहित आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 559 दिनांक 25.05.2009 द्वारा उपलब्ध कराया गया। उक्त आरोप-पत्र में आचार संहिता के अनुपालन में निष्क्रियता, चुनाव सभा की विडियोग्राफी कराने के संबंध मे ंगलत जानकारी देने, चुनावी सभा की संवेदनशीलता के प्रति उदासीनता, अपने अधीनस्थ कर्मियों को उनके र्काव्य के बारे में सही जानकारी नहीं देने, चुनाव संबंधी कार्य में समन्वय का अभाव तथा संवादहीनता पैदा करने संबंधी आरोप प्रतिवेदित किए गए।

डॉ0 रविन्द्र नाथ से उक्त आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 620 दिनांक 14.01.2016 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग किये जाने पर डॉ0 रविन्द्र नाथ के पत्रांक 08 दिनांक 24.01.2016 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 3821 दिनांक 11.03.2016 द्वारा आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा से मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 424 दिनांक 21.04.2017 द्वारा आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा का मंतव्य प्राप्त हुआ, जिसमें उनके द्वारा आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण को अस्वीकार योग्य पाए जाने की सूचना दी गई।

प्रतिवेदित आरोपों, डॉ0 रविन्द्र नाथ के स्पष्टीकरण एवं आयुक्त के सचिव, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा द्वारा समर्पित मंतव्य पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार डॉ0 रविन्द्र नाथ के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 10074 दिनांक 07.08.2017 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, दरभंगा के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

संचालन पदाधिकारी-सह-आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्रांक 888 दिनांक 26.08.2017 द्वारा इस आशय की सूचना दी गई है कि आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध उनके कार्यालय स्तर से आरोप-पत्र गठित किया गया है एवं आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण पर मंतव्य भी उपलब्ध कराया गया है। ऐसी स्थिति में पुनः आयुक्त के स्तर से ही विभागीय कार्यवाही का संचालन कर जाँच प्रतिवेदन अभिलेखित किया जाना समीचीन प्रतीत नहीं होता है।

विभागीय स्तर पर आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पत्र के समीक्षोपान्त एवं अनुशासनिक प्राधिकार के आदेशानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1087 दिनांक 23.01.2018 द्वारा डॉ0 नाथ के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 341 दिनांक 06.04.2018 द्वारा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसमें संचालन पदाधिकारी का विश्लेषण/जाँच परिणाम एवं अन्तिम निष्कर्ष निम्न प्रकार दिया गया है :-

आरोप संख्या-2 के संबंध में कहा गया है कि-आरोपित पदाधिकारी ने ऐसा केाई साक्ष्य नहीं दिया है, जो इन तथ्यों को काट सके। बैंक-डेटिंग के प्रयास को सिर्फ मानवीय भूल नहीं कहा जा सकता है और पूरी सभा के दौरान वीडियोग्राफी न करने के कारण स्थानीय बिजली का कट जाना बताया जाना स्वीकार्य नहीं है, क्याेंकि वीडियों जो तैयार किया गया था उसकी सी0डी0 बिजली कटने से प्रभावित हो सकती थी, न कि भूल वीडियोग्राफी। सुनवाई के दौरान भी आरोपित पदाधिकारी ने कोई अकाट्‌य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। ऐसी स्थिति में यह आरोप प्रमाणित होता है।

आरोप संख्या-4 के संबंध में कहा गया है कि-सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा है कि आदर्श आचार संहिता अनुपालन संबंधी निर्वाचन आयोग के पत्र की प्रति उन्हें घटना की तिथि तक नहीं मिली थी। दोनों पक्षों के कथनों और साक्ष्यों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि आरोपित पदाधिकारी ने प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी को न तो आचार संहिता के बारे में बताया और न वीडियोग्राफी कराने की सूचना दी इसलिये वह यहाँ आंशिक रूप से दोषी हैं।

आरोप संख्या-5 के संबंध में कहा गया है कि-यह आरोप पुनरावृाि का है, किन्तु इसमें आंशिक सच्चाई है कि आरोपित पदाधिकारी ने श्री सत्यनारायण पंडित, कनीय अभियंता-सह-दंडाधिकारी को आदर्श चुनाव आचार संहिता संबंधी25 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 निर्देश और चुनाव सभा-स्थल पर वीडियोग्राफी कराने संबंधी पत्र से अवगत नहीं कराया, जिसके लिए वह कुछ हद तक दोषी हैं, क्योंकि दूसरी ओर पंचायत सचिवों को इस संबंध में ससमय पत्र लिखा था। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा जब आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला प्रकाश में आया, तो भी आरोपित पदाधिकारी ने प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी से तत्क्षण कोई जानकारी नहीं ली और अपने स्तर से स्थल निरीक्षण नहीं किया और न उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी। ऐसी स्थिति में यह आरोप अंशतः प्रमाणित होता है।

विभागीय पत्रांक 5996 दिनांक 10.05.2018 द्वारा डॉ0 नाथ से संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित आरोपों के लिए अभ्यावेदन की मांग की गयी। उक्त के आलोक में डॉ0 नाथ द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 18.05.2018 समर्पित किया गया। डॉ0 नाथ द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में किसी नये तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया। उनके द्वारा उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया, जो उनके द्वारा पूर्व में किया गया था।

वर्णित तथ्यों के आलोक में डॉ0 नाथ के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित आरोप, आरोपित पदाधिकारी के बचाव बयान, विभागीय मंतव्य, विभागीय मंतव्य पर आरोपित पदाधिकारी की प्रतिक्रिया पर सुनवाई कर विश्लेषणोंपरान्त डॉ0 नाथ के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप संख्या-2 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-4 एवं 5 को अंशतः प्रमाणित पाया गया। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँच प्रतिवेदन पर डॉ0 नाथ के समर्पित अभ्यावेदन/बचाव बयान को अस्वी—त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ 'निन्दन तथा दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक' का दंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार डॉ0 रविन्द्र नाथ (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 587/11, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, केवटी, दरभंगा सम्प्रति अपर समार्हाा, पूर्णिया के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ निम्नांकित दंड अधिरोपित एवं संसूचित किया जाता है :-

(i) निन्दन (वर्ष 2009-10) तथा (ii) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

--------

सं0 2/आरोप-01-22/2017-सा0प्र0-12439

-------

14 सितम्बर 2018

श्री कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 1018/11, तत्कालीन भूमि सुधार उप समार्हाा, सदर पटना सम्प्रति निलंबित के विरूद्ध आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 943 दिनांक 03.11.2017 द्वारा गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' विभाग को उपलब्ध करायी गयी। श्री सिंह के विरूद्ध कंकडबाग पावर सब स्टेशन की सरकारी जमीन को गलत एवं अवैध रूप से लगान निर्धारण करने एवं गलत स्वामित्व प्रमाण-पत्र निर्गत किये जाने के संबंधित आरोप प्रतिवेदित है एवंं पत्रकार नगर थाना में प्राथमिकी संख्या 319/2017 दर्ज है। श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9093 दिनांक 24.07.2017 द्वारा निलंबित किया गया।

प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 14537 दिनांक 16.11.2017 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। उक्त के आलोक में श्री सिंह द्वारा स्पष्टीकरण दिनांक 01.12.2017 समर्पित किया गया। श्री सिंह के समर्पित स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक 15935 दिनांक 14.12.2017 द्वारा आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना से मंतव्य की मांग की गयी। उक्त के आलोक में आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 326 दिनांक 30.05.2018 द्वारा मंतव्य प्राप्त हुआ।

अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप, समर्पित स्पष्टीकरण एवं आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना द्वारा प्राप्त मंतव्य के सम्यक्‌ विचारोपरान्त अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा जिला पदाधिकारी, पटना द्वारा नामित किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

जिला पदाधिकारी, पटना को निदेश दिया जाता है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित करेंगे।

श्री सिंह से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।26 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 सं0 2/नि0था0-11-02/2017-सा0प्र0-13675

--------

11 अक्तूबर 2018

श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 956/11, तत्कालीन विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, जमुई सम्प्रति निलंबित, मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना के विरूद्ध पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के ज्ञापांक 301 दिनांक 07.02.2017 द्वारा पद का दुरूपयोग करते हुए प्रत्यानुपातिक धनार्जन के आरोप के लिए निगरानी थाना कांड संख्या 006/2017 दिनांक 18.01.2017 धारा-13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(ई) भ्र0नि0अधि0, 1988 दर्ज होने संबंधी आरोप प्रतिवेदित किया गया।

उक्त के आलोक में विभागीय स्तर पर आरोप-पत्र गठित किया गया, जिसपर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। आरोपों की गम्भीरता के मद्‌देनजर समीक्षोपरान्त विभागीय संकल्प ज्ञापांक 9039 दिनांक 21.07.2017 द्वारा श्री कुमार को निलम्बित किया गया तथा मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना निर्धारित किया गया।

श्री कुमार के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 10342 दिनांक 11.08.2017 द्वारा श्री कुमार से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जो स्मारोपरान्त अप्राप्त रहा।

प्रतिवेदित आरोपों पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री कुमार के विरूद्ध संलग्न अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच विहित रीति से करने हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित की जाती है, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो), बिहार, पटना द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

निगरानी विभाग (अन्वेषण ब्यूरो), बिहार, पटना को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।

श्री आलोक कुमार (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 956/11 तत्कालीन विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, जमुई सम्प्रति निलंबित, मुख्यालय-आयुक्त कार्यालय, पटना प्रमंडल, पटना को निदेश दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

--------

सं0 2/सी0-01-33/2015-सा0प्र0-12576

-------

19 सितम्बर 2018

श्री धीरेन्द्र कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 578/11, तत्कालीन विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, पटना बाढ़ सुरक्षा योजना, पटना सम्प्रति अपर समार्हाा, सहरसा के विरूद्ध गठित आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' साक्ष्यों सहित संयुक्त सचिव-सह-निदेशक, भू-अर्जन एवं पुनर्वास का पत्रांक 1748 दिनांक 21.10.2016 द्वारा उपलब्ध कराया गया है। उक्त आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' में पद का दुरूपयोग करते हुए स्वयं के नाम पर एवं अन्य व्यक्ति, जो पंचाटी नहीं थे, के नाम पर अनियमित निकासी किये जाने एवं निकासी एवं व्ययंन पदाधिकारी के रूप में कार्यालय के रोकड़ पंजी का नियमानुकूल संधारण नहीं करवाने का आरोप प्रतिवेदित है।

2. श्री झा से उक्त आरोपों पर विभागीय पत्रांक 889 दिनांक 30.09.2015 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री झा के पत्रांक 832 दिनांक 12.11.2016 द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

3. प्रतिवेदित आरोपों एवं श्री झा के द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक्‌ विचारोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री झा के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानोंं के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक 16863 दिनांक 20.12.2016 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें आयुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

4. संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना के पत्रांक 1202 दिनांक 07.08.2017 द्वारा श्री झा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही का जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया।

5. संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोरान्त अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा दंड विनिश्चित किया गया, जिसपर बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से मंतव्य की मांग की गयी।

6. इसी बीच श्री झा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0डब्ल्यू0जे0सी0 संख्या 19086/2017 दायर किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा इस वाद में दिनांक 24.04.2018 को पारित अन्तरिम आदेश में वाद की पूर्ण सुनवाई तक श्री झा के विरूद्ध संचालित कार्यवाही में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाये जाने संबंधी आदेश दिया गया। इस वाद में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 13.08.2018 को अन्तिम आदेश पारित किया गया, जिसका कार्यकारी अंश निम्नवत्‌ है :-

"In view of the above, the entire proceeding is vitiated. Let the Department should conduct a fresh enquiry from the stage of charge-sheet by appointing an independent Enquiry27 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 Officer and Presenting Officer, Sri Vikash Kumar, the Special Acquisition Officer will not be appointed as a Presenting Officer. However, the Department will be at liberty to take assistance of Sri Vikash Kumar and also examine him as a witness for proving the charge. The Enquiry Officer, after taking evidence, oral and documentary, and giving an opportunity to the petitioner to examine defence witness, if any request is made by the petitioner, if any witness is examined by the Department in support of the allegation for proving the charge against the petitioner, will be given opportunity to cross-examine the witnesses and would take a decision in accordance with law.

With the aforementioned observation and direction, this writ application is allowed to the extent indicated above."

7. माननीय न्यायालय द्वारा पारित उपर्युक्त न्यायादेश के आलोक में श्री धीरेन्द्र कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 578/11, तत्कालीन विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, पटना बाढ़ सुरक्षा योजना, पटना सम्प्रति अपर समार्हाा, सहरसा के विरूद्ध पूर्व से अनुमोदित आरोप-पत्र के आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानोंं के तहत्‌ नये सिरे से विभागीय कार्यवाही संस्थित की जाती है, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी (श्री विकास कुमार, विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, बाढ़ सुरक्षा योजना, पटना को छोड़कर) को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है। संचालन पदाधिकारी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश का अनुपालन किया जायेगा तथा श्री विकास कुमार, विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, बाढ़ सुरक्षा योजना, पटना से जाँच में सहायता तथा गवाह के रूप में उनकी गवाही भी लेंगे। 8. प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे। साथ ही श्री विकास कुमार से आवश्यकतानुसार जाँच में सहायता लेंगे तथा गवाह के रूप में उनकी गवाही का कार्य कराया जा सकेगा।

9. श्री धीरेन्द्र कुमार झा (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 578/11, तत्कालीन विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, पटना बाढ़ सुरक्षा योजना, पटना सम्प्रति अपर समार्हाा, सहरसा को निदेश दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हों। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति अनुबंध की प्रति सभी संबंधितों को जानकारी एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

--------

सं0 2/नि0था0-11-05/2017-सा0प्र0-13093

-------

3 अक्तूबर 2018

मो0 कामिल अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 833/11, तत्कालीन वरीय उप समार्हाा-सह-भू-अर्जन पदाधिकारी, शेखपुरा सम्प्रति निलंबित को परिवादी श्री भोला प्रसाद से10,000/-रू0 रिश्वत लेने के आरोप में दिनांक 13.10.2017 को निगरानी धावा दल द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने के बावत निगरानी थाना कांड संख्या 079/2017 दिनांक 13.10.2017, धारा-7/13(2)-सह-पठित धारा-13(1)(डी) भ्र0नि0अधि0, 1988 दर्ज होने की सूचना पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के ज्ञापांक 3051 दिनांक 20.10.2017 द्वारा, जो राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार, पटना को सम्बोधित है, की प्रतिलिपि सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराया गया। उक्त के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 14352 दिनांक 14.11.2017 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1)(क) एवं (ग) के प्रावधानों के तहत्‌ उन्हें गिरफ्तार किये जाने की तिथि दिनांक 13.10.2017 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया।

2. उक्त के क्रम में मो0 अख्तर के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, शेखपुरा के पत्रांक 55 दिनांक 23.01.2018 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप-पत्र को विभागीय स्तर पर पुनर्गठित कर विभागीय पत्रांक 2393 दिनांक 20.02.2018 द्वारा मो0 अख्तर से स्पष्टीकरण की गयी। मो0 अख्तर द्वारा दिनांक 12.06.2018 को स्पष्टीकरण समर्पित किया गया।

3. मो0 अख्तर के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप एवं समर्पित स्पष्टीकरण पर सम्यक्‌ समीक्षोपरांत अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा आरोप की वृहद जाँच हेतु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के संगत के प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित किया जाता है, जिसमें विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी एवं जिला पदाधिकारी, शेखपुरा के द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।28 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 4. जिला पदाधिकारी, शेखपुरा को निदेश दिया जाता है कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर इसकी सूचना संचालन पदाधिकारी एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को देंगे।

5. मो0 कामिल अख्तर (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 833/11, तत्कालीन वरीय उप समार्हाा-सह-भू-अर्जन पदाधिकारी, शेखपुरा सम्प्रति निलंबित को निदेश दिया जाता है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी संबंधितों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

सं0 2/आरोप-01-12/2015-सा0प्र0-14348

-------

1 नवम्बर 2018

श्री अरविन्द कुमार मिश्र (बि0प्र0से0), कोटि क्रमांक 719/11, तत्कालीन जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, बेगूसराय सम्प्रति जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम, खगड़िया के विरूद्ध खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पत्रांक 1645 दिनांक 29.03.2018 द्वारा गठित आरोप-पत्र प्राप्त हुआ। प्राप्त आरोप-पत्र के आधार पर विभागीय स्तर पर पुनः आरोप-पत्र गठित किया गया, जिस पर अनुशासनिक प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है। उक्त आरोप बेगूसराय जिलान्तर्गत गोदामों का फर्जी निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार करने, मुख्यालय को निरीक्षण प्रतिवेदन नहीं भेजने एवं पूर्व के घटित घटनाओं से सबक नहीं लेने, वर्ष 2017-18 में बेगूसराय जिलान्तर्गत गोदामों का ससमय निरीक्षण नहीं कर दायित्व का निर्वहन नहीं करने, जिसके कारण 43541849/-रू0 मूल्य के खाद्यान्न गबन को बचाया नहीं जा सकने से संबंधित हैं। उक्त के कारण श्री मिश्रा की प्रशासनिक विफलता एवं गबन मामले में इनकी संलिप्तता एवं वर्ष 2015-16 में श्री मिश्र की पदस्थापन अवधि में खोदावन्तपुर गोदाम में 37494512.57/-रू0 मूल्य के खाद्यान्न का गबन हुआ। श्री मिश्रा द्वारा उनके प्रभार के गोदामों का ससमय निरीक्षण नहीं करने तथा दायित्व का निर्वहन नहीं करने के कारण उल्लिखित अनुदानित खाद्यान्न के गबन से बचाया नहीं जा सका। इस प्रकार श्री मिश्रा के विरूद्ध कार्यों में शिथिलता, लापरवाही, मनमानेपूर्ण कार्य करने एवं मामले में संलिप्तता का आरोप प्रतिवेदित है।

प्रतिवेदित आरोपों पर विभागीय पत्रांक 7810 दिनांक 12.06.2018 द्वारा श्री मिश्र से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। स्मारित किये जाने के बावजूद श्री द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। तत्पश्चात्‌ अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा श्री मिश्र के विरूद्ध प्रतिवेदित आरोप पर सम्यक्‌ विचारोपरान्त अनुलग्नक अनुबंध में अंतर्विष्ट आरोपों की जाँच के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-17(2) के प्रावधानों के तहत्‌ विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है। विभागीय कार्यवाही में मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना द्वारा नामित किन्हीं वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया जाता है।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना से अनुरोध है कि इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी को सहयोग प्रदान करने हेतु अपने अधीनस्थ किसी वरीय पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त कर संचालन पदाधिकारी मुख्य जाँच आयुक्त, बिहार, पटना एवं सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को सूचित किया जाय। श्री मिश्र से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित होंगे। आदेश :-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधितों को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भीम प्रसाद, संयुक्त सचिव।

-------- सं0 कारा/नि0को0(अधी0)-01-18/2014--8018 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग (कारा) ------ संकल्प 8 नवम्बर 2018

श्री ललन कुमार सिन्हा, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बिहारषरीफ सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, दरभंगा के विरूद्ध उनके मंडल कारा, बिहारशरीफ में पदस्थापन काल में दिनांक 24.06.2011 को संसीमित बंदी मुन्ना सिंह की जहर खाने से हुई मृत्यु की घटना में बरती गई लापरवाही, कर्त्तव्योपेक्षा एवं प्रशासनिक विफलता के प्रतिवेदित आरोपों के लिए प्रपत्र 'क' में गठित आरोप के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1356 दिनांक 01.03.2016 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित की गयी थी। विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।29 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 2. संचालन पदाधिकारी-सह-विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना के पत्रांक 166 अनु0 दिनांक 19.02.2018 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में श्री सिन्हा के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में गठित कुल छः (06) आरोपों में से आरोप संख्या-01, 05 एवं 06 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-03 को आंषिक रूप से प्रमाणित एवं आरोप संख्या-02 तथा 04 को प्रमाणित नहीं पाया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 18 (3) के प्रावधानों के तहत विभागीय ज्ञापांक 1835 दिनांक 21.03.2018 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री सिन्हा से उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।

3. श्री सिन्हा ने अपने पत्रांक 02 (गोपनीय) दिनांक 09.04.2018 के द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया, जिसमें उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि कारा के प्रभारी उच्च कक्षपाल, तत्कालीन कारापाल तथा सदर अस्पताल, बिहारषरीफ के चिकित्सक डॉ0 सुनील किषोर प्रसाद के बयानों को संचालन पदाधिकारी द्वारा महत्ता दिया गया है और इसी आधार पर उनको इस आरोप के लिए दोषी माना गया है। उन्होंने अपने बचाव में यह भी लिखा है कि मुन्ना सिंह के पास जहर कैसे पहुँचा, इस पहलु पर भी पुलिस ने जाँच किया है। इस संबंध में उनपर कोई संदेह नहीं प्रकट की गयी है। आरोपित ने अपने जबाव में लिखा है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-2 को जिस आधार पर अप्रमाणित माना गया है उसी आधार को आरोप संख्या-3 पर उन्होने क्यों नहीं लागू की, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसा करना नियम एवं प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध हैं। आरोपित पदाधिकारी ने आरोप संख्या-1 का हवाला देते हुए आरोप संख्या-5 को प्रमाणित करना उचित नहीं बताया है। उन्होंने यह भी लिखा है कि क्या सिर्फ इसीलिए कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली ने काराधीक्षक (एवं चिकित्सक) के विरूद्ध एक प्रारंभिक जाँच के आधार पर एक आदेष पारित किया उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करना प्राकृतिक रूप से न्याय संगत है ?

आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि जांच दल द्वारा दिनांक 19.04.2014 को तिथि पुर्ननिर्धारित की जाने की कोई सूचना नहीं मिली थी। तात्कालिक उप विकास आयुक्त, नालंदा को सरकारी फोन पर भी तिथि पुनर्निधारित करने का निवेदन किया था। परन्तु उनकेे ई-मेल पते पर अथवा मोबाईल फोन पर अथवा पत्र द्वारा पुनर्निधारित तिथि की सूचना उन्हें नहीं मिली। यदि पुनर्निधारित तिथि की सूचना उन्हेें मिलती, तो वे अवष्य ही उक्त जाँच में आरा से बिहारषरीफ जाकर उपस्थित होते। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप को प्रमाणित मानना, अनुचित एवं प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है।

4. आरोप पत्र, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं श्री सिन्हा द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा जबाव की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गयी समीक्षा में पाया गया कि जिला पदाधिकारी, नालन्दा द्वारा समर्पित प्रतिवेदन में वर्णित है कि बंदी के विरूद्ध आरोपित पदाधिकारी की असंवेदनषीलता एवं लापरवाही परिलक्षित होती है और पूरा मामला संदेहास्पद प्रतीत होता है। इसी प्रकार अनुमंडल न्यायिक पदाधिकारी के प्रतिवेदन में भी कहा गया है। ऐसी स्थिति में उक्त बंदी की मृत्यु की घटना में आरोपित पदाधिकारी दोषी प्रतीत होते हैं क्योंकि कारा के अंदर बंदी द्वारा जहर खा लेने की घटना उनके कारा के नियंत्री पदाधिकारी के विपरीत बरते गये आचरण का द्योतक है। कारा के अंदर बंदी के पास जहर जैसी निषिद्ध वस्तु का पाया जाना कारा में औचक तलाषी के नाम पर खानापूर्ति परिलक्षित करता है और कारा के पर्यवेक्षी पदाधिकारी के रूप में कर्त्तव्यहीनता का द्योतक है। यदि आरोपित पदाधिकारी के द्वारा कारा के प्रत्येक वार्ड की समुचित तलाषी समय-समय पर करायी जाती तो कारा के अंदर सल्फास/जहरीले पदार्थ जैसे निषिद्ध वस्तु का प्रवेष नहीं हो पाता। इस प्रकार काराधीक्षक के रूप में अपने अधीनस्थों पर उनका नियंत्रण नहीं था।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और जिला पदाधिकारी, नालन्दा की रिपोर्ट में प्रासंगिक घटना में आरोपित पदाधिकारी की भूमिका संदेहास्पद बतायी गयी है। उनके द्वारा बरती गयी लापरवाही के कारण ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मृत बंदी के नजदीकी परिजनों को 1,00,000/- (एक लाख) रूपये मुआवजा भुगतान करने का आदेष पारित किया गया है। जिला पदाधिकारी, नालन्दा के प्रतिवेदन के अनुसार विभागीय पत्र से आरोपित पदाधिकारी को गवाही देने के लिए सूचित किया गया था। आरोपित पदाधिकारी ने बताया कि उन्हें पत्र विलम्ब से मिला था और उन्होंने नई तिथि निर्धारित करने का अनुरोध किया था। परन्तु अगली तिथि दिनांक 19.04.2014 को भी वह उपस्थित नहीं हुए। इससे जांच में आरोपित पदाधिकारी का असहयोगात्मक रवैया सिद्ध होता है। अतः उनका द्वितीय कारण पृच्छा जबाव को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

5. वर्णित तथ्यों के आधार पर अनुषासनिक प्राधिकार द्वारा श्री सिन्हा के द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब को अस्वीकृत करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित करने का विनिष्चय किया गया :-

'' वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से एक वेतन वृद्धि घटाकर वेतन की अवनति का दंड ''। 6. उपर्युक्त विनिष्चयी दंड के संदर्भ में विभागीय पत्रांक 5390 दिनांक 27.07.2018 के द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, पटना से परामर्ष की माँग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2028 दिनांक 29.10.2018 द्वारा दण्ड प्रस्ताव पर सहमति संसूचित की गयी है।

7. प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त सहमति के आलोक में अनुषासनिक प्राधिकार के निर्णयानुसार श्री ललन कुमार सिन्हा, बिहार कारा सेवा, तत्कालीन अधीक्षक, मंडल कारा, बिहारषरीफ सम्प्रति अधीक्षक, मंडल कारा, दरभंगा को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (समय-समय पर यथा संषोधित) के नियम-14 के प्रावधानों के तहत निम्नांकित दंड अधिरोपित किया जाता है :-

'' वर्तमान वेतनमान में सम्प्रति देय वेतन से एक वेतन वृद्धि घटाकर वेतन की अवनति का दंड ''।30 (cid:466)बहार गजट, 21 नवम्बर 2018 आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित की जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अंजनि कुमार, उप-सचिव-सह-उप निदेषक (प्र0)।

सं0 1/एम02-60-30/2018 गृ0आ0--96289 x`g foHkkx (आरक्षी शाखा) ----- संकल्प 15 नवम्बर 2018 श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003), तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक-सह-उप महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना के विरूद्ध कर्तव्य के प्रति लापरवाही, वरीय पदाधिकारी के आदेशोल्लंघन, स्वेच्छाचारिता, स्थापित नियमों एवं प्रक्रियाओं का अनुपालन नहीं करने, वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार का सम्पोषण एवं संवर्द्धन, वरीय पुलिस पदाधिकारी की गरिमा के विरूद्ध कार्य करने एवं अदूरदर्शिता जैसे गंभीर आरोपों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार द्वारा अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(1)(a) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए विभागीय संकल्प 8309, दिनांक 19.09.2018 द्वारा श्री संजीव को तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया। साथ ही, उक्त गंभीर आरोपों के लिए आरोप पत्र विभागीय ज्ञापन 8310, दिनांक 19.09.2018 द्वारा निर्गत किया गया।

2. अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के अंतर्गत विहित प्रक्रिया के आलोक में श्री संजीव के निलंबन के संबंध में अपेक्षित प्रतिवेदन गृह मंत्रालय, भारत सरकार को भेजते हुए सूचित किया गया था कि निलंबन के 30 दिनाें की आरंभिक अवधि दिनांक 18.10.2018 को पूरी होगी। श्री संजीव के निलंबन की सम्पुष्टि एवं उन्हें 30 दिनों के बाद की अवधि में भी निलंबन में बनाये रखने के संबंध में गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पत्र दिनांक 09.10.2018 के माध्यम से सूचित किया गया कि भारतीय पुलिस सेवा के पदाधिकारियों के निलंबन में बनाये रखने हेतु सम्पुष्टि, गृह मंत्रालय, भारत सरकार से केवल तब आवश्यक है जब राज्य सरकार द्वारा आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र, निलंबन की तिथि से नियत समयावधि 30 दिनाें के अंदर निर्गत करना संभव नहीं हो। प्रस्तुत मामले में श्री संजीव के विरूद्ध, चूँकि राज्य सरकार द्वारा नियत समयावधि 30 दिनों के अंदर आरोप पत्र निर्गत किया जा चुका है, निलंबन की सम्पुष्टि की आवश्यक्ता नहीं रही।

3. अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम 3(8)(a) के अद्यतन प्रावधान के अनुसार निलम्बन, विस्तारण के पूर्व 60 दिनों तक वैध रहता है। उक्त प्रावधान एवं भारत सरकार के प्रासंगिक पत्र के आलोक में श्री संजीव के निलंबन की अवधि की वैधता 60 (साठ) दिनाें तक अर्थात दिनांक 19.09.2018 से 17.11.2018 तक हैै। 4. श्री संजीव के विरूद्ध आरोप पत्र दिनांक 19.09.2018 को निर्गत करते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया है और इसके निमित्त नियमानुसार 30 दिनाें का समय प्रदान किया गया। निर्धारित 30 दिनों की अवधि पूरी होने के पूर्व आरोपित पदाधिकारी द्वारा आरोप पत्र के साथ संलग्न साक्ष्यों/कागजात की सत्यापित प्रतियों की मांगी की गयी है। इसके लिए महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएँ, बिहार, पटना से अनुरोध किया गया है, जो प्राप्त होने के पश्चात्‌ श्री संजीव को उपलब्ध करा दिया जायेगा। श्री संजीव के विरूद्ध अलग से विस्तृत जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना से कराने का निर्णय लिया गया। सम्प्रति निगरानी जांच की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। ऐसी स्थिति में श्री संजीव के निलंबन अवधि के विस्तारण के संबंध में दिनांक 26.10.2018 को निलंबन समीक्षा समिति द्वारा विचार किया गया तथा विचारोपरांत समिति द्वारा श्री संजीव के निलंबन अवधि दिनांक 17.11.2018 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 17.03.2019 तक विस्तारण करने की अनुशंसा की गयी, जिसे अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित किया गया है।

5. अतः अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के प्रावधानों के अंतर्गत निलंबन समीक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003) के निलंबन की अवधि दिनांक 17.11.2018 के आगे 120 दिनों तक अर्थात दिनांक 17.03.2019 तक विस्तारित की जाती हैै।

6. श्री रत्नमणि संजीव, भा0पु0से0 (2003) को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रंजन कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव।

—————

अधी(cid:162)क, सिचवालय मु(cid:289)णालय

द्वारा

(cid:466)बहार, पटना (cid:292)कािशत एवं मु(cid:465)(cid:289)त। (cid:466)बहार गजट, 35—571+10-ड(cid:547)0ट(cid:547)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 21 November 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2018-11-21.47/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2018-11-21.47.